राजनीति
दूषित पानी से मचे हड़कंप पर कांग्रेस का हमला, पीड़ितों को 1 करोड़ मुआवजे की मांग
1 Jan, 2026 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार से पीड़ित परिवार को 1-1 करोड़ का मुआवजा देने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग की है. जीतू पटवारी ने कहा, “इंदौर शहर की जनता ने उन्हें बार-बार सांसद चुना. उन्होंने उन्हें नौ विधायक, एक महापौर और पार्षद दिए और भाजपा ने क्या किया? उन्होंने पानी में जहर मिलाया और मौत का फरमान जारी कर दिया. उनका अहंकार इतना चौंकाने वाला और अकल्पनीय है कि जब पत्रकार सवाल पूछते हैं, तो मंत्री उन्हें गाली देते हैं. मुझे मुख्यमंत्री से बहुत उम्मीदें थीं. जब मैं मृतकों के परिवारों से उनके घरों पर मिलने गया, तो सभी को लगा कि सरकार उनकी मदद करेगी।
मनरेगा बचाओ अभियान की तैयारी, कांग्रेस 5 जनवरी से शुरू करेगी ‘जी राम जी’ आंदोलन
31 Dec, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सेव अरावली और वोट चोरी के मुद्दे के बाद अब कांग्रेस की सियासत ‘जी राम जी’ यानी मनरेगा के इर्द-गिर्द घूमती नजर आएगी। नए साल की शुरुआत के साथ ही कांग्रेस केन्द्र सरकार के खिलाफ मनरेगा बचाओ आंदोलन छेड़ने जा रही है। 5 जनवरी से देशभर में इस आंदोलन का आगाज होगा, जिसके तहत पैदल मार्च, मशाल जुलूस, धरना-प्रदर्शन और जनसभाओं का आयोजन किया जाएगा।
राजस्थान कांग्रेस भी मनरेगा को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेगी। प्रदेश से लेकर ब्लॉक स्तर तक कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर केन्द्र सरकार के नए संशोधन बिल का विरोध करेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में मनरेगा को लेकर आक्रामक आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया है। आंदोलन की रणनीति से जुड़ा सर्कुलेशन जल्द ही सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को भेजा जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि केन्द्र सरकार मनरेगा के मूल स्वरूप को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले संसद के दोनों सदनों में मनरेगा योजना का नाम बदलने और महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध किया था। हालांकि विरोध के बावजूद संशोधित बिल पारित हो गया, जिसके बाद अब कांग्रेस ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है।
इस मुद्दे को लेकर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी भी सक्रिय नजर आ रही हैं। उन्होंने कुछ मीडिया संस्थानों में इस मुद्दे को लेकर एडिटोरियल भी लिखे हैं। इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई, जिसमें मनरेगा को बचाने के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे मजदूरों के हक की लड़ाई बताया है। दरअसल, मनरेगा से जुड़े करीब 12 करोड़ से अधिक मजदूर देशभर में कार्यरत हैं। ऐसे में कांग्रेस थिंक टैंक इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है। पार्टी मनरेगा के जरिए खुद को मजदूर हितैषी साबित करने और ग्रामीण वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। अब देखना होगा कि ‘जी राम जी’ यानी मनरेगा के मुद्दे पर कांग्रेस को कितनी सियासी सफलता मिलती है।
अयोध्या में रक्षा मंत्री का बयान, सबका समय आता है; विपक्ष पर योगी-राजनाथ की कटाक्ष
31 Dec, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए. इसके बाद अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा, पिछली सरकारों ने अयोध्या को लहुलुहान किया. अयोध्या के खिलाफ साजिश की | अयोध्या ने कई उतार-चढ़ाव देखे. अयोध्या के नाम से ही एहसास होता है, यहां कभी युद्ध नहीं हुआ. कोई भी दुश्मन यहां के पराक्रम के सामने कभी टिक नहीं पाया लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून और सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को उपद्रव व संघर्ष का अड्डा बना दिया था |
उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई है. इसलिए आज वो इस रामलला मंदिर का भव्य रूप देखकर आनंद की अनुभूति कर रहे हैं. पिछले 5 साल में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे | जहां पहले कुछ लाख में लोग आते थे |
जय श्रीराम बोलने पर लाठी पड़ जाती थी
सीएम योगी ने कहा, 2017 के पहले ना स्वच्छता थी, ना बिजली, ना कनेक्टिविटी, ना सुरक्षा थी. कोई जय श्रीराम बोलता था तो उस पर लाठी जरूर पड़ जाती थी |गिरफ्तारियां हो जाती थीं. आज देश में जय श्रीराम बोलिए. अब तो भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के ही नाम पर आ गई है, जो रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है |
सीएम योगी के बाद अयोध्या प्रतिष्ठा द्वादशी कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, आज इस पवन भूमि पर आकर भावुक और अभिभूत हूं. जो मुझे जीवन में चाहिए था वो मुझे आज दर्शन करके मिल गया. आज से दो साल पहले सदियों की प्रतीक्षा के बाद हमारे भगवान श्री राम अपने भव्य मंदिर में आए. आज का दिन मेरे जीवन के सौभाग्यशाली दिनों में से एक है |
यह वही अयोध्या है जो वर्षों तक रक्तरंजित रही
राजनाथ सिंह ने कहा, आज का दिन हम सबके लिए गौरव का क्षण है. यह वही अयोध्या है जो वर्षों तक रक्तरंजित रही. पीड़ा और अपमान सहने के बाद भी इस धरती ने आस्था को खत्म नहीं होने दिया | हम सबने अनेक पीढ़ियों में सबसे सौभाग्यशाली पीढ़ी में जन्म लिया है. दुनिया से जाते हुए ये संतोष रहेगा कि हम सबने राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा देखी |
रक्षा मंत्री ने कहा, आने वाली पीढ़ियां भी खुद को भाग्यशाली समझेंगी. राम मंदिर आंदोलन दुनिया के सबसे ग्रैंड नैरेटिव है, ये दुनिया का सबसे बड़ा आंदोलन है | भूगोल और समय दोनों के लिहाज से देखें तो ये आंदोलन दुनिया का सबसे ग्रैंड नैरेटिव बना है | पहले राम का नाम लेने वालों को अपराधी कहा गया. प्रभु राम से हम सबने सीखा है कि समय सबका आता है | जिन्होंने त्याग और तपस्या को कुचलने का काम किया उनकी स्थिति भी दुनिया देख रही है | हमने केवल राम मंदिर के आंदोलन को देखा ही नहीं बल्कि हनने आंदोलन को जिया भी है |
BJP सांसद अनिल फिरोजिया ने ममता पर साधा निशाना, सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर निर्माण पर तंज
31 Dec, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकाल के मंदिर की तर्ज पर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में मंदिर बनाया जा रहा है | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा | वहीं ममता बनर्जी के बयान के बाद उज्जैन से बीजेपी सांसद अनिल फिरोजिया ने ममता बनर्जी पर तंज कसा है |
बाबरी मस्जिद की नींव की बात करते समय हिंदू प्रेम कहां था
उज्जैन की तर्ज पर सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर बनाने को लेकर बीजेपी सांसद अनिल फिरोजिया ने ममता बनर्जी पर तंज कसा है | अनिल फिरोजिया ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आज क्यों सनातन धर्म ओर हिन्दू धर्म की याद आ रही है. जब उनकी ही पार्टी के नेता बाबरी मस्जिद की नींव की बात कर रहे थे, तब उनका हिंदू प्रेम कहां गया था | तब क्यों ना उन्हीं के पार्टी के नेता को बर्खास्त किया गया? उनके खिलाफ क्यों नहीं मोर्चा खोला. इस पर सवाल खड़ा होता है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आज महाकाल की याद आ रही है. पहले याद क्यों नहीं आई, जब टीएमसी के नेता ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा की थी.’
जनवरी के दूसरे हफ्ते में होगा मंदिर का शिलान्यास
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर मंदिर बनेगा. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में शिलीगुड़ी में बाबा महाकाल के मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा |
दिग्विजय सिंह Vs शिवराज: क्या पूर्व मुख्यमंत्री की पदयात्रा ढहाएगी बीजेपी का किला? जानें मनरेगा विवाद की पूरी सच्चाई
31 Dec, 2025 12:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Digvijaya Singh Padyatra: केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme) का नाम विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G) कर दिया है. विपक्ष इसे लेकर विरोध जता रहा है. कांग्रेस ने 5 जनवरी को देश भर में ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ करने की घोषणा की है. अब राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के गढ़ में पदयात्रा करने वाले हैं.
दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने सीहोर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी की नहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आत्मा की लड़ाई है. केंद्र सरकार योजनाओं से महात्मा गांधी का नाम मिटाना चाहती है, ये देश के इतिहास और आत्मा पर हमला है. कांग्रेस नेता ने बताया कि पदयात्रा सीहोर जिले के किसी ग्राम पंचायत से शुरू होगी, ताकि ग्रामीण भारत की आवाज सीधे दिल्ली तक पहुंचे. उन्होंने ये भी कहा कि ये वही ग्रामीण भारत है, जिसके लिए मनरेगा योजना बनी थी, जिसने लाखों गरीब परिवारों को रोजगार के साथ सम्मान दिया.
देशव्यापी प्रदर्शन करेगी कांग्रेस
कांग्रेस 5 जनवरी को देशव्यापी प्रदर्शन करेगी. इसे ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ नाम दिया गया है. कांग्रेस मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी योजना लेकर आने का विरोध कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार शायद ये बात भूल रही है कि मनरेगा नहीं होती तो लोग कोरोना के समय लाखों लोग भूखे मर गए होते. इससे लोगों को गारंटी के साथ रोजगार मिला. उन्होंने कहा था कि बीजेपी सरकार के इस फैसले को गरीबों का हक छीनने वाला बताया था.
2025 में बसपा की राह रही कठिन, मायावती ने जमीन हासिल करने की रणनीति तेज की
31 Dec, 2025 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल 2025 बहुजन समाज पार्टी के लिए न तो उपलब्धियों का उत्सव रहा और न ही पराजय की इबारत. यह साल पार्टी के लिए आत्ममंथन, संगठनात्मक कसावट और 2027 की बिसात बिछाने का रहा. कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता की धुरी रही बसपा, 2025 में अपनी खोई जमीन वापस पाने की जद्दोजहद में दिखी |
हालांकि, साल के अंत में नेशनल को-ऑर्डिनेटर आकाश आनंद के घर जन्मी पुत्री को बहुजन मिशन के प्रति समर्पित करने की घोषणा ने पार्टी सुप्रीमो मायावती को निजी तौर पर खुशी जरूर दी |
बसपा के लिए मुश्किल रहा साल 2025
राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक 2024 लोकसभा चुनाव के बाद 2025 की शुरुआत बसपा के लिए कठिन रही. चुनावी नतीजों ने संगठन और रणनीति पर सवाल खड़े किए. भाजपा के मजबूत संगठन और समाजवादी पार्टी की आक्रामक विपक्षी राजनीति के बीच बसपा को राजनीतिक स्पेस बचाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ा |
बिहार विधानसभा चुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और उसे महज एक सीट से संतोष करना पड़ा. हालांकि बसपा नेतृत्व ने पराजय को विराम नहीं, पुनर्निर्माण का अवसर बताया. पार्टी ने साफ किया कि वह न किसी की 'बी-टीम' बनेगी और न ही अवसरवादी गठबंधनों का हिस्सा |
2025 में मायावती फिर से पार्टी की राजनीति के केंद्र में रहीं. उन्होंने सार्वजनिक मंचों और आंतरिक बैठकों में यह संदेश दोहराया कि बसपा का मूल लक्ष्य दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों का राजनीतिक-सामाजिक सशक्तिकरण है. कांशीराम की विचारधारा से समझौते की किसी भी संभावना को खारिज करते हुए मायावती ने संगठन को चेताया कि ढुलमुल रवैया, गुटबाजी और निष्क्रियता अब स्वीकार नहीं की जाएगी. इसके बाद प्रदेश और मंडल स्तर पर पदाधिकारियों में फेरबदल हुआ |
आकाश आनंद पर लिए फैसलों पर रही चर्चा
इसी क्रम में आकाश आनंद को लेकर लिए गए सख्त फैसले, पहले हटाना और 41 दिन बाद वापसी ने यह संकेत दिया कि नेतृत्व अनुशासन के सवाल पर कोई नरमी नहीं बरतेगा. साल 2025 में बसपा की सबसे बड़ी कमजोरी जमीनी संगठन रही. इसे दुरुस्त करने के लिए जिलों में कैडर मीटिंग्स, समीक्षा बैठकें और बहुजन संवाद कार्यक्रम शुरू किए गए. डिजिटल और सोशल मीडिया पर मौजूदगी बढ़ाने की कोशिशें हुईं, लेकिन भाजपा और सपा की तुलना में यह प्रयास अभी कमजोर ही रहे |
वैचारिक मोर्चे पर बसपा ने खुद को स्पष्ट रूप से अलग रखा. भाजपा पर संविधान कमजोर करने और आरक्षण पर दोहरे रवैये के आरोप लगाए गए, जबकि समाजवादी पार्टी पर दलित हितों की उपेक्षा और राजनीतिक अवसरवाद का ठप्पा लगाया गया | पार्टी ने दो टूक कहा कि उसकी राजनीति सत्ता से ज्यादा सम्मान और अधिकार की है.
2027 को लेकर बसपा की रणनीति तय
बसपा ने 2025 को खुलकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के तौर पर इस्तेमाल किया. नेतृत्व ने संकेत दिए कि पार्टी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी. उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को समय से मजबूत करने, जातिगत समीकरणों के साथ युवा और महिला मतदाताओं पर फोकस की रणनीति पर मंथन हुआ |
हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी तक ऐसा कोई बड़ा आंदोलन नहीं दिखा, जिससे निर्णायक बढ़त का दावा किया जा सके | राजनीतिक रूप से सबसे बड़ी चुनौती पार्टी का परंपरागत दलित वोट बैंक रहा. भाजपा की सामाजिक योजनाओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व ने इस वर्ग में पैठ बनाई, जो बसपा के लिए चिंता का कारण बनी |
इसके बावजूद कुछ इलाकों में दलित समाज का भावनात्मक जुड़ाव अब भी पार्टी के साथ दिखा, जिसे नेतृत्व भविष्य की नींव मान रहा है. लेकिन, इस वोट बैंक पर विरोधी पार्टी कांग्रेस और सपा की निगाहें लगी हुई हैं | सबसे ज्यादा सपा इस वोट बैंक को अपने लाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है. इसके लिए उसने आंबेडकर वाहिनी का गठन करके लगातार मूवमेंट चला रही है |
बसपा के लिए आत्ममंथन का साल रहा 2025
राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत बताते हैं कि कुल मिलाकर, 2025 बसपा के लिए संघर्ष और आत्ममंथन का वर्ष रहा. यह न तो पुनरुत्थान का निर्णायक मोड़ बना और न ही पतन की मुहर. बसपा आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में संभावनाओं से भरी है, पर चुनौतियों से घिरी हुई है. असली परीक्षा 2027 में होगी, लेकिन इस वर्ष कांशीराम की रैली में उमड़ी भीड़ ने उन्हें संजीवनी प्रदान की है, जिस कारण संगठन में एक बार ऑक्सीजन मिली है |
प्रियंका गांधी के बेटे रेहान की गर्लफ्रेंड संग होगी सगाई, वाड्रा परिवार में जल्द बजेंगी शहनाइयां
30 Dec, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के घर जल्द ही एक मांगलिक उत्सव की रौनक देखने को मिलेगी। चर्चा है कि उनके बेटे रेहान वाड्रा जल्द ही अपनी लंबे समय की मित्र अवीवा बेग के साथ सगाई के बंधन में बंधने जा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों परिवारों ने इस रिश्ते को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है और विवाह की दिशा में यह पहला कदम उठाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि रेहान वाड्रा और अवीवा बेग पिछले सात वर्षों से एक-दूसरे के मित्र हैं। हाल ही में रेहान ने अवीवा को प्रपोज किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। अवीवा बेग का परिवार देश की राजधानी दिल्ली का ही रहने वाला है। हालांकि अभी तक सगाई की किसी निश्चित तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही एक निजी समारोह में दोनों अंगूठियों का आदान-प्रदान करेंगे। वाड्रा परिवार के चश्मचराग रेहान फिलहाल सक्रिय राजनीति की चकाचौंध से दूर अपनी एक अलग पहचान बनाने में जुटे हैं। 29 अगस्त 2000 को जन्मे 24 वर्षीय रेहान ने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली और देहरादून से पूरी करने के बाद लंदन की प्रतिष्ठित एसओएएस यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद रेहान की रुचि कला और सृजनात्मकता के क्षेत्र में अधिक रही है। वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही नजर आते हैं, हालांकि कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक दौरों पर उन्हें अपनी मां प्रियंका गांधी के साथ देखा गया है। पेशेवर तौर पर रेहान एक स्थापित विजुअल और इंस्टॉलेशन आर्टिस्ट हैं। उन्हें बचपन से ही फोटोग्राफी, विशेषकर वाइल्डलाइफ और नेचर फोटोग्राफी का बेहद शौक रहा है। रेहान अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कई प्रदर्शनियों के माध्यम से कर चुके हैं। उनकी पहली सोलो एग्जीबिशन डार्क परसेप्शन को काफी सराहना मिली थी। इसके अलावा कोलकाता में आयोजित द इंडिया स्टोरी में भी उनकी कला को प्रदर्शित किया जा चुका है। दिसंबर 2022 में उनकी दूसरी बड़ी प्रदर्शनी आयोजित हुई थी, जिसने कला जगत का ध्यान उनकी ओर आकर्षित किया था। अब जब दोनों परिवारों ने इस रिश्ते पर अपनी मुहर लगा दी है, तो उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में गांधी-वाड्रा परिवार में वैवाहिक आयोजनों की हलचल तेज होगी। रेहान और अवीवा की सगाई की खबरों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता पैदा कर दी है।
गुजरता साल 2025: भारतीय राजनीति की चुनावी रणभूमि में दिग्गजों की हार और बदलती दिखी सियासी जमीन
30 Dec, 2025 08:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राजनीति का मैदान भी किसी अन्य क्षेत्र की तरह अनिश्चितताओं से भरा होता है। यहाँ एक साल किसी के लिए सुनहरी उपलब्धियां लेकर आता है, तो किसी के लिए भारी नुकसान का सबब बन जाता है। साल 2025 भारतीय राजनीति के कई बड़े चेहरों के लिए अग्निपरीक्षा की तरह रहा, जहाँ सत्ता के समीकरणों ने कई दिग्गजों को अर्श से फर्श पर ला खड़ा किया। सत्ता की राजनीति में सफलता का पैमाना केवल चुनावी जीत होती है, और जब यह हाथ से फिसलती है, तो नेतृत्व और रणनीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगते हैं।
केजरीवाल की दिल्ली में विदाई
आम आदमी पार्टी और इसके संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए साल 2025 किसी बड़े झटके से कम नहीं रहा। दिल्ली विधानसभा चुनावों में जनता ने ऐसा जनादेश दिया कि खुद अरविंद केजरीवाल अपनी सीट भी नहीं बचा सके। उनके सबसे भरोसेमंद साथी मनीष सिसोदिया, जिनका चुनावी क्षेत्र पटपड़गंज से बदलकर जंगपुरा किया गया था, उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। दिल्ली की सत्ता हाथ से निकलने के बाद केजरीवाल ने पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया। पंजाब और गुजरात के उपचुनावों में मिली छोटी जीत ने उनके मनोबल को सहारा तो दिया है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में मिली शिकस्त का दर्द केवल सत्ता में वापसी से ही कम हो सकता है।
बिहार में तेजस्वी का संघर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 तेजस्वी यादव के लिए करो या मरो की स्थिति वाला था। अपने पिता लालू यादव के मार्गदर्शन और सक्रिय उपस्थिति के बावजूद तेजस्वी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। जहाँ वे मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे थे, वहीं नतीजों ने उन्हें विपक्ष की कतार में भी काफी पीछे धकेल दिया। आरजेडी को महज 25 सीटें मिलीं, जो नेता प्रतिपक्ष का पद बचाने के लिए पर्याप्त थीं। हार के बाद सहयोगी दलों या पारिवारिक सदस्यों पर जिम्मेदारी डालना आसान है, लेकिन एक नेतृत्वकर्ता के तौर पर हार का सबसे बड़ा बोझ उन्हीं के कंधों पर है।
राहुल गांधी की चुनौतियां और वोट-चोरी मुहिम
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए दिल्ली और बिहार दोनों राज्यों के नतीजे निराशाजनक रहे। दिल्ली में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका, जबकि बिहार में पार्टी की स्थिति ओवैसी की पार्टी के बराबर सिमट कर रह गई। इन चुनावों के बाद राहुल गांधी ने वोट-चोरी के खिलाफ एक नया अभियान शुरू किया है, जिसे वोट चोर, गद्दी छोड़ का नारा दिया गया है। हालाँकि, उनकी वोटर अधिकार यात्रा जमीन पर वोटर्स को आकर्षित करने में नाकाम रही।
प्रशांत किशोर की जन सुराज और मुकेश सहनी का शून्य
रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर के लिए 2025 एक कड़ा सबक लेकर आया। उनकी जन सुराज पार्टी ने बड़े स्तर पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। स्वयं प्रशांत किशोर ने इस हार की जिम्मेदारी ली, लेकिन उनकी भविष्य की रणनीति अब भी रहस्य बनी हुई है। वहीं, विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी, जिन्हें महागठबंधन की ओर से उपमुख्यमंत्री का चेहरा बनाया गया था, वे शून्य पर सिमट गए। 2020 में चार सीटें जीतने वाले सहनी के लिए यह राजनीतिक अस्तित्व का संकट बन गया है।
दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव जैसे नेताओं के लिए पारिवारिक अंतर्कलह और पार्टी से अलग राह चुनना भारी पड़ा। राजनीति के इस दौर में पुष्पम प्रिया चौधरी जैसे चेहरे भी नजर आए, जो पांच साल के संघर्ष के बाद भी खुद को उसी मुकाम पर खड़ा पा रही हैं जहाँ से उन्होंने शुरुआत की थी। 2025 का यह चुनावी साल स्पष्ट करता है कि राजनीति में पुराने समीकरणों और नारों से ज्यादा जनता की नब्ज पहचानना अनिवार्य है।
UP SIR उम्मीदवारों के लिए अपडेट: ड्राफ्ट रोल अब नहीं कल, नई तारीख घोषित
30 Dec, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के क्रम में 31 दिसंबर को ड्राफ्ट रोल जारी होना था. हालांकि अब इसकी नई तारीख बताई गई है |
सोशल मीडिया साइट एक्स पर राज्य निर्वाचन आयोग ने लिखा कि- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अर्हता तिथि 01 जनवरी, 2026 के आधार पर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषित तिथियों में संशोधन करते हुए नई तिथियां जारी कर दी गई है |
UP SIR का ड्राफ्ट रोल कब होगा जारी?
आयोग ने लिखा कि संशोधित तिथियों के अनुसार अब मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 06 जनवरी, 2026 को किया जाएगा | दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी, 2026 तक निर्धारित की गई है |
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार 6 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण, गणना प्रपत्रों पर निर्णय और दावे एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा | उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 6 मार्च, 2026 को किया जाएगा |
यूपी में दो करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम कटे
उत्तर प्रदेश में चार नवंबर को शुरू हुई SIR की कवायद में लगभग दो करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं | उन्हें नाम शामिल कराने के लिये फार्म संख्या छह जमा करना होगा | प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इन 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार मतदाताओं में से जो मसौदा सूची में शामिल हुए हैं, उनमें से एक करोड़ से अधिक 'अनमैप्ड' श्रेणी में हैं. ऐसे मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे ताकि वे निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 12 दस्तावेजों की सूची में से किसी एक को जमा करें, ताकि उन्हें ‘मैप्ड’ श्रेणी में शामिल किया जा सके |
उत्तर प्रदेश में लगभग 52 दिन तक संचालित SIR के पहले चरण की अवधि दो बार बढ़ाए जाने के बाद 26 दिसंबर को समाप्त हुई. रिणवा ने बताया, ‘निर्वाचन आयोग एक जनवरी से अब एक महीने की प्रक्रिया शुरू करेगा | इस दौरान दो करोड़ 88 लाख 75 हजार नाम अलग-अलग कारणों से मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं. जो लोग दोबारा नाम जुड़वाना चाहते हैं, वे फॉर्म संख्या छह भरकर दोबारा आवेदन कर सकते हैं |
सीएम नीतीश ने जिस महिला डॉक्टर नुसरत का हिजाब खींचा उसने नहीं की नौकरी ज्वाइन
30 Dec, 2025 07:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में डॉक्टर्स को अपॉइंटमेंट लेटर वितरित करने के दौरान महिला डॉक्टर के साथ मंच पर जो हुआ उसकी चर्चा देश और दुनिया में अभी भी जारी है। घटना के संबंध में खुद डॉक्टर नुसरत ने कहा था, जब नकाब खींचा, तो समझ नहीं आया कौन, कहां से मुझे खींच लेगा। वहां सब हंसने लगे थे। इतना कुछ पहले हो गया था, न जाने और क्या करते। मैं जल्दी-जल्दी वहां से निकली ताकि मुझे कोई देख न ले। थोड़ी देर बाद दोबारा वहां गई अपॉइंटमेंट लेटर फाड़कर फेंकने, लेकिन तब तक सब जा चुके थे। यह घटना नुसरत परवीन के साथ घटी, जिनका हिजाब बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने जॉइनिंग लेटर देते वक्त खींच दिया था।
जानकारी के मुताबिक तारीख 15 दिसंबर थी। इसके बाद से नुसरत सामने नहीं आई हैं। अब तक कुछ कहा भी नहीं है। बिहार सरकार की ओर से जॉइनिंग की तारीख बढ़ाने के बाद भी उन्होंने नौकरी जॉइन नहीं की है। नुसरत और उनका परिवार पटना से कोलकाता चला गया। भाई का दावा है कि पति ने नुसरत को मीडिया से बात करने और बाहर निकलने से मना किया है। परिवार भी इसका विरोध नहीं कर रहा, क्योंकि हम नहीं चाहते कि पति-पत्नी का रिश्ता बिगड़े।
नुसरत और उनका परिवार पटना में रह रहा था। नुसरत तिब्बी कॉलेज में पीजी कर रही हैं। पति डॉ. आसिफ साइकियाट्रिस्ट हैं। वे हाजीपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं और पटना के चांद मेमोरियल अस्पताल में प्रैक्टिस करते हैं। डॉ. नुसरत पटना के राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल से पढ़ाई कर रही हैं। यहां बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई होती है। नुसरत की नियुक्ति आयुष डॉक्टर के पद पर हुई है। उन्हें 20 दिसंबर 2025 को पटना सिटी के पीएचसी सदर में जॉइन करना था। हिजाब विवाद के बाद नुसरत ने नौकरी जॉइन नहीं की। इस दौरान इस जॉइनिंग की तारीख 31 दिसंबर कर दी गई। अगर वे इस तारीख तक जॉइन नहीं करती हैं, तो उनका अपॉइंटमेंट रद्द हो सकता है।
इस विवाद के बाद सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ लखनऊ, रांची और श्रीनगर में शिकायत दर्ज कराई गई। सपा की प्रदेश प्रवक्ता सुमैया राणा ने लखनऊ के कैसरबाग थाने में सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सुमैया मशहूर शायर मुनव्वर राणा की बेटी हैं। झारखंड की राजधानी रांची के इटकी थाने में सोशल वर्कर मो. मुर्तजा आलम ने शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि धार्मिक पोशाक के साथ सार्वजनिक मंच पर किया गया ऐसा व्यवहार आपत्तिजनक है। वहीं जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दल पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर पुलिस में नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और नीतीश के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
अरावली के बाद अब सुप्रीम कोर्ट एनजीटी विषय पर भी करें हस्तक्षेप
30 Dec, 2025 06:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि अरावली पहाड़ियों के मामले में आदेश के बाद अब सुप्रीम कोर्ट को एनजीटी के विषय पर भी हस्तक्षेप करना चाहिए। मंगलवार को पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि पिछले एक दशक में एनजीटी की शक्तियों को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करे ताकि यह संस्था बिना किसी भय या पक्षपात के कानून के अनुरूप स्वतंत्र रूप से काम कर सके।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि कल सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा में बदलाव को लेकर 20 नवंबर, 2025 को दिए गए अपने ही फैसले को स्वतः संज्ञान लेते हुए वापस ले लिया, जबकि मोदी सरकार ने उस फैसले को पूरे उत्साह के साथ अपनाया था। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अत्यंत जरुरत और स्वागतयोग्य था। उन्होंने कहा कि अब पर्यावरण से जुड़े तीन अन्य अत्यंत अहम और तात्कालिक मुद्दे हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट को अरावली मामले की तरह ही स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करना चाहिए।
रमेश ने कहा कि 6 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार के सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमाओं को दोबारा तय करने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी, इसके तहत करीब 57 बंद खदानों को खोलने का रास्ता बनाया जा रहा था। इस प्रस्ताव को साफ तौर से खारिज कर देना चाहिए। रमेश के मुताबिक 18 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही 16 मई, 2025 के उस फैसले की समीक्षा का दरवाजा खोल दिया था, जिसमें पूर्व प्रभाव से दी जाने वाली पर्यावरणीय मंजूरियों पर रोक लगाई गई थी।
उन्होंने कहा कि ऐसी मंजूरियां न्यायशास्त्र के बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ हैं और शासन व्यवस्था का उपहास बनाती हैं। कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया। इस फैसले की समीक्षा अनावश्यक थी। पूर्व प्रभाव से मंजूरी कभी भी नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि कानूनों, नियमों और प्रावधानों को अक्सर जानबूझकर दरकिनार किया जाता है कि परियोजना शुरू हो जाने के बाद निर्णय प्रक्रिया को मैनेज कर लिया जाएगा।
संजय राउत का शिंदे गुट पर तंज.........पहले शिवसेना हमेशा अग्रणी रही, अब बीजेपी के सामने झुक गई
30 Dec, 2025 05:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल है। महायुति द्वारा सीटों के बंटवारे का फार्मूला सामने आने के बाद, यूबीटी शिवसेना सांसद संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा प्रहार किया है। सांसद राउत ने आरोप लगाया कि शिंदे गुट भाजपा के सामने झुक गया है और उनके द्वारा दी गई सीटों पर चुनाव लड़ेगा। राउत ने कहा कि पिछले 60 वर्षों में शिवसेना ने कभी किसी के सामने समझौता नहीं किया, लेकिन अब शिंदे गुट ने भाजपा के पास जाकर मराठी अस्मिता पर सवाल उठाया है।
सांसद राउत ने कहा कि अब शिवसेना को सीटें भाजपा के कारण मिल रही हैं, जबकि पहले शिवसेना हमेशा अग्रणी रही है। उन्होंने शिंदे गुट पर कटाक्ष कर इस मराठी लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। संजय राउत ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के साथ गठबंधन में करीब 140 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा, एनसीपी के शरद पवार गुट के साथ भी कुछ सीटों का आदान-प्रदान होगा। बीएमसी चुनावों से पहले उद्धव और राज ठाकरे ने मिलकर ‘भूमिपुत्र’ के मुद्दे को फिर से जोर देने की कोशिश की है।
इस बीच,एनसीपी-एससीपी ने मुंबई के सात वार्डों के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 37 उम्मीदवारों की सूची के एक दिन बाद 27 और उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी की है। इस राजनीतिक गतिरोध ने महाराष्ट्र की सियासत में एक नई हलचल पैदा कर दी है, जहां पुराने और नए गठबंधनों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। बंटवारे, गठबंधन और मराठी अस्मिता का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में नई ज्वाला पैदा कर रहा है।
“मैं तो खुद वनवास भुगत रहा हूं”, इंदौर में छलका जीतू पटवारी का दर्द; क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं?
30 Dec, 2025 12:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह और गुटबाजी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन इस बार खुद प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक बयान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर प्रवास के दौरान अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच पटवारी का दर्द छलक उठा, जिसने पार्टी के भीतर चल रहे तालमेल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यकर्ता के सामने छलकी बेबसी: “मैं तो वनवास में हूं”
इंदौर में एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान जब कार्यकर्ताओं ने संगठन और अपनी समस्याओं को लेकर पटवारी से बात की, तो पीसीसी चीफ ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, “भैया, मैं तो खुद वनवास भुगत रहा हूं।” जीतू पटवारी का यह छोटा सा वाक्य अब मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़े मायने निकाल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल हंसी-मजाक नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर उनकी स्थिति और वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके समीकरणों की ओर इशारा करता है।
क्या वरिष्ठों से तालमेल की कमी है वजह?
पटवारी के इस “वनवास” वाले बयान के बाद कांग्रेस के भीतर समन्वय को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं:
अनदेखी का आरोप: क्या कांग्रेस के भीतर जीतू पटवारी की बातों की सुनवाई नहीं हो रही है?
वरिष्ठ नेताओं से दूरी: क्या कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के साथ पटवारी का तालमेल नहीं बैठ पा रहा है?
संगठन में खींचतान: हाल के दिनों में कई नियुक्तियों को लेकर जिस तरह के विवाद सामने आए, क्या यह “वनवास” उसी गुटबाजी का परिणाम है?
बीजेपी को मिला हमला करने का मौका
जीतू पटवारी के इस बयान के बाद बीजेपी ने भी चुटकी लेना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि जिस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष खुद को “वनवासी” और “बेबस” महसूस कर रहा हो, वह पार्टी जनता की लड़ाई क्या लड़ेगी।
एक्स-फैक्टर: जीतू पटवारी ने विधानसभा चुनाव में अपनी हार के बाद पीसीसी चीफ की कमान संभाली थी, लेकिन तब से लेकर अब तक संगठन विस्तार और बड़े नेताओं को साथ लेकर चलने में उन्हें कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
जीतू पटवारी और संजय शुक्ला को बड़ी राहत, राजवाड़ा धरना मामले में कोर्ट ने किया दोषमुक्त
30 Dec, 2025 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Indore News : इंदौर की विशेष अदालत (MP-MLA Court) ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को एक बड़े कानूनी मामले में राहत दी है। कोरोना महामारी के दौरान कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन कर राजवाड़ा पर धरना देने के आरोपी जीतू पटवारी, संजय शुक्ला, विशाल पटेल और विनय बाकलीवाल को कोर्ट ने दोषमुक्त (Acquitted) कर दिया है।
क्या था 13 जून 2020 का पूरा घटनाक्रम?
बता दें कि जून 2020 में जब पूरा देश कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की बंदिशों से गुजर रहा था, तब इंदौर के राजवाड़ा स्थित देवी अहिल्या प्रतिमा के नीचे तत्कालीन कांग्रेस विधायकों ने एक प्रदर्शन किया था।
सराफा थाना पुलिस ने आरोप लगाया था कि इन नेताओं ने बिना अनुमति भीड़ जुटाई और तत्कालीन कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के धारा 144 के आदेशों का उल्लंघन किया। पुलिस ने इनके खिलाफ भादवि की धारा 188 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था।
कोर्ट में क्यों टिक नहीं पाया पुलिस का केस?
विशेष न्यायाधीश श्री देव कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं, जो बचाव पक्ष के लिए जीत का आधार बनीं:
स्वयं ही फरियादी और विवेचक: इस मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी अमृता सोलंकी ही फरियादी थीं और उन्होंने ही मामले की जांच (Investigating Officer) की। कोर्ट ने इसे निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के विपरीत माना।
स्वतंत्र गवाहों की कमी: राजवाड़ा जैसे सार्वजनिक स्थान पर हुई घटना में पुलिस ने किसी भी आम नागरिक को गवाह नहीं बनाया। सभी गवाह सराफा थाने के ही पुलिसकर्मी थे।
तकनीकी साक्ष्यों का अभाव: पुलिस ने दावा किया था कि प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है, लेकिन कोर्ट में कोई भी वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
स्पष्टता की कमी: कोर्ट में गवाही के दौरान पुलिसकर्मी यह स्पष्ट नहीं कर सके कि नेताओं की मांगें क्या थीं या प्रदर्शन में असल में कितने लोग शामिल थे।
एडवोकेट सौरभ मिश्रा और जय हार्डिया की दलीलें
नेताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सौरभ मिश्रा और जय हार्डिया ने कोर्ट को बताया कि यह मामला केवल राजनीतिक आधार पर दर्ज किया गया था। पुलिस यह साबित करने में विफल रही कि वहां वास्तव में किसी आदेश का उल्लंघन हुआ या उससे जनहानि का खतरा पैदा हुआ। साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए अदालत ने सभी चारों नेताओं को ससम्मान बरी करने का आदेश दिया।
महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि यह दुनिया की जरूरत है कि हम विश्वगुरु बनें : भागवत
30 Dec, 2025 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने रविवार को कहा कि भारत को एक बार फिर ‘विश्वगुरु’ (World Teacher) बनने की दिशा में काम करना चाहिए। कहा कि यह कोई महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि दुनिया की ज़रूरत है।
हैदराबाद में ‘विश्व संघ शिविर’ (World Federation Camp) को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि करीब 100 साल पहले योगी अरविंद ने घोषणा की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान ईश्वर की इच्छा है और उसके लिए हिंदू राष्ट्र का उदय आवश्यक है। वह समय अब आ गया है। उन्होंने कहा कि देश को ‘विश्वगुरु’ बनने के लिए संघ के प्रयासों सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कड़ी मेहनत की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संघ व्यक्तियों के विकास और उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए विभिन्न कार्यस्थलों पर रखने पर ध्यान केंद्रित करता है। तकनीकों पर मानवीय नियंत्रण जरूरी संघ प्रमुख ने कहा कि सोशल मीडिया और एआई जैसी तरक्की तो होंगी ही, लेकिन इन पर मानवीय नियंत्रण बना रहना चाहिए। इससे तकनीकों के नकारात्मक परिणाम नहीं होंगे।
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