राजनीति
बीजेपी नेता का आरोप, उद्धव ठाकरे ने किया 3 लाख करोड़ का घोटाला
6 Jan, 2026 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अमित साटम ने रविवार को शिवसेना (Ubatha) अध्यक्ष और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही साटम ने कहा कि उन्होंने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से ‘मराठी समुदाय का अपमान’ किया है।
साटम के सहयोगी और राज्य मंत्री आशीष शेलार ने भी ठाकरे पर उस मांग के लिए निशाना साधा जिसमें उन्होंने 68 नगरमहापालिका वार्डों के नतीजों को रद्द करने की मांग की, जहां सत्तारूढ़ ‘महायुति’ पार्टी के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया है। शेलार ने कहा कि शिवसेना (उबाठा)अध्यक्ष 2020 में बिना किसी विरोध के विधान परिषद के सदस्य बनने के बाद मुख्यमंत्री बने थे।
साटम की ये टिप्पणियां ठाकरे के इस दावे के बीच आई हैं कि अगर बृहन्मुंबई महानगरपालिका का व्यय बजट 15,000 करोड़ रुपये था, तो विभिन्न कार्यों के लिए ठेकेदारों को पेशगी के रूप में दी जाने वाली राशि तीन लाख करोड़ रुपये है, जो एक ‘घोटाला’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकाय चुनावों के लिए रिश्वत की रकम का इस्तेमाल किया जा रहा है।
भाजपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष साटम ने संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि ठाकरे तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार थे। साटम ने ठाकरे के एक हालिया तंज की भी कड़ी निंदा की और कहा कि यह टिप्पणी व्यक्तिगत अपमान नहीं बल्कि हर मराठी व्यक्ति का अपमान है। साटम ने कहा, ‘उन्होंने (ठाकरे ने) सिर्फ मुझे ही गाली नहीं दी है। उन्होंने हर मराठी व्यक्ति को गाली दी है। उन्होंने मराठी मानुष का अपमान किया है।’’ उन्होंने कहा कि वह एक साधारण परिवार से आते हैं और किसी के संरक्षण के कारण राजनीति में ऊपर नहीं पहुंचे हैं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ठाकरे के कार्यकाल के दौरान भारी खर्च के बावजूद मुंबई के बुनियादी ढांचे की स्थिति खराब हो गई थी। साटम ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सड़कों पर 21,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की हालत ऐसी थी कि ‘यह बताना मुश्किल था कि सड़कों पर गड्ढे हैं या गड्ढों के अंदर सड़कें हैं’। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर कोविड-19 महामारी के दौरान अनियमितताओं का भी आरोप लगाया और कहा कि महालक्ष्मी में कोविड-19 देखभाल केंद्र बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए स्थापित किया गया था।
कोरोना के दौरान जमकर हुई घोटालेबाजी- साटम
साटम ने आरोप लगाया, ‘हर चीज में भ्रष्टाचार था – शवों को ले जाने वाले बैग से लेकर पीपीई किट तक – किसी भी चीज को बख्शा नहीं गया। भाजपा नेता ने दावा किया कि ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते हुए लगभग 1,700 बार और रेस्तरां मालिकों से जबरन वसूली की थी। उन्होंने तटीय सड़क परियोजना के बारे में ठाकरे के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई थी।
साटम ने जोर देकर कहा,‘तटीय सड़क परियोजना का सारा श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जाता है।’ उन्होंने ठाकरे पर तीन लाख करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के अपने आरोप को दोहराया। उन्होंने ठाकरे से पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण कार्य को दिखाने को कहा। यह उस अवधि का जिक्र करते हुए कहा जब अविभाजित शिवसेना का बीएमसी पर नियंत्रण था। उन्होंने बीएमसी पर ठाकरे की पार्टी के शासन का संदर्भ देते हुए उन्हें पिछले 25 वर्षों में मराठी लोगों के लिए किए गए एक भी महत्वपूर्ण काम को दिखाने की चुनौती दी।
साटम ने कहा कि भाजपा बीडीडी चॉल के निवासियों को घर उपलब्ध कराने सहित कम से कम 10 प्रमुख कार्यों की सूची दे सकती है, लेकिन ठाकरे परिवार ने इसके बजाय कई ‘मातोश्री’ आवासों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया। इस बीच, मंत्री शेलार ने 68 नगर निगम वार्डों के परिणामों को लेकर ठाकरे की शिकायत को खारिज कर दिया, जहां भाजपा के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया था।
उन्होंने कहा, ‘उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के बाद 14 मई, 2020 को निर्विरोध विधान परिषद के सदस्य बन गए। उन्होंने इस पर कोई शिकायत नहीं की।’ शेलार ने कहा, ‘अगर ठाकरे को नगर निकाय चुनावों में कुछ उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने पर टिप्पणी करनी है, तो उन्हें पहले विधान परिषद सदस्य(एमएलसी) पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर आलोचना करनी चाहिए।’
महाराष्ट्र में महायुति में बढ़ने लगी दरार, भाजपा मंत्री ने अजित पवार को दी ‘सावधानी बरतने’ की नसीहत
6 Jan, 2026 10:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जालना । महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) और सहयोगियों के बीच दरार बढ़ती नजर आ रही है। खासतौर पर भाजपा और अजित पवार (Ajit Pawar) की एनसीपी (NCP) के बीच मतभेद दिखाई दे रहा है। बीते दिनों अजित पवार ने पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ के स्थानीय निकायों में अनियमितताओं को लेकर हमला बोला था। इसे अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा पर हमला माना गया था। वजह, दोनों जगहों पर 2017 से 2022 तक भाजपा का शासन रहा है। अब महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने अजित पवार को सलाह दी है कि वह सहयोगियों पर निशाना न साधें।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में भाजपा, अजित पवार की एनसीपी और शिंदे गुट की शिवसेना के गठबंधन वाली महायुति सरकार है। हालांकि स्थानीय निकाय चुनाव में 29 नगर निगम चुनाव में तीनों अलग-अलग मैदान में उतरे हैं। वोटिंग 15 जनवरी को होने वाली है।
अजित पवार ने क्या कहा था
पिछले हफ्ते शुक्रवार और शनिवार को अपनी प्रेस कांफ्रेंस में शरद पवार ने पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ स्थानीय निकायों में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने स्थानीय निकायों पर आरोप लगाया, जिनके चलते पुणे में विकास कार्य पटरी से उतर गया। इसके अलावा उन्होंने पिंपरी चिंचवाड़ के कर्ज में फंसने को लेकर भी हमला बोला। यह सारी बातें भाजपा के खिलाफ जा रही हैं।
बावनकुले ने क्या कहा
इस बीच जालना नगर निगम चुनाव में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे चंद्रशेखर बावनकुले ने अजित पवार को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि एक संयुक्त बैठक के दौरान यह तय किया गया था कि गठबंधन के साथी दल प्रचार के दौरान एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेंगे। इसके बावजूद अजित पवार ने समझौता तोड़ा है। भविष्य में उन्हें इस बात का ख्याल रखना चाहिए।
बावनकुले ने इस दौरान महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा पवार को लेकर दिए गए बयान का भी बचाव किया। चव्हाण ने कहा था कि अगर भाजपा आरोप लगाना शुरू कर देगी तो फिर पवार के लिए काफी मुश्किल हो जाएगी। उन्होंने पवार से कहा कि कुछ भी आरोप लगाने से पहले अपनी तरफ देख लें।
CM ममता बनर्जी का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेटर, कहा- तुरंत रोको SIR
6 Jan, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत रोकने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि इससे बड़े पैमाने मतदाताओं के मताधिकार का हनन हो सकता है तथा भारतीय लोकतंत्र की नींव को ‘अपूरणीय क्षति’ पहुंचा सकती है। तीन जनवरी को मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में बनर्जी ने राज्य में एसआईआर में कथित अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक खामियों पर ‘गंभीर चिंता’ जताई और कहा कि यह प्रक्रिया ‘अनियोजित, अपर्याप्त तैयारी और आननफानन में’ की गई है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और यह हमारे लोकतंत्र के मूल ढांचे और संविधान की भावना पर प्रहार करती है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि ‘अत्यधिक जल्दबाजी’ और ‘पर्याप्त तैयारी की कमी’ के कारण गंभीर खामियां उत्पन्न हुई हैं, जिनमें दोषपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली, असंगत निर्देश और इस कार्य के लिए नियुक्त अधिकारियों का अपर्याप्त प्रशिक्षण शामिल है।
‘लोकतंत्र की नींव पर हमला’
ममता ने पत्र में लिखा, ‘‘यदि इसे वर्तमान स्वरूप में जारी रहने दिया गया, तो एसआईआर से अपूरणीय क्षति होगी, बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार का हनन होगा और लोकतंत्र की नींव पर हमला होगा।’’ मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से तत्काल सुधारात्मक उपाय करने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा न करने पर ‘मनमानी और अनियोजित प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए’। ममता ने सुनवाई प्रक्रिया के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को कथित रूप से नियुक्त न किए जाने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे एसआईआर की ‘निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं’।
निर्वाचन आयोग को इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बनर्जी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को उसकी देखरेख या निर्देश के तहत की गई किसी भी अवैध, मनमानी या पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के लिए पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
AAP सांसद ने राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स को दी बधाई, मोदी सरकार की भी तारीफ
6 Jan, 2026 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने नए लेबर कोड के तहत गिग वर्कर्स (Gig workers) और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट जारी करने के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि यह गिग वर्कर्स की कड़ी मेहनत को “मान्यता, सुरक्षा और सम्मान” देने की दिशा में पहला कदम है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस हफ्ते की शुरुआत में ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (सेंट्रल) रूल्स, 2025’ नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इनमें गिग वर्कर्स को अलग-अलग सोशल सिक्योरिटी बेनेफिट्स और सुरक्षा पाने के लिए योग्य होने के नियम गए हैं।
राघव चड्ढा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दी बधाई
राघव चड्ढा ने आज अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स को बधाई। आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के सोशल सिक्योरिटी नियमों का ड्राफ्ट आपके काम को मान्यता, सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में पहला कदम है। भले ही Zomato, Swiggy, Blinkit, आदि प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन इस देश के लोगों और सरकार ने सुनी। यह एक छोटी जीत है, लेकिन एक महत्वपूर्ण जीत है।”
राघव चड्ढा लंबे समय से गिग वर्कर्स के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, यहां तक कि कई बार संसद में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया है।
केंद्र सरकार के कदम का भी किया स्वागत
‘आप’ सांसद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में कहा, “ये ड्राफ्ट नियम सिर्फ इसलिए नहीं बनाए गए कि मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया, बल्कि यह इसलिए हुआ क्योंकि आप सभी ने भी अपनी आवाज उठाई। कंपनियों और प्लैटफॉर्म्स ने आपकी बात नहीं सुनी, लेकिन सरकार ने सुनी, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।”
राघव चड्ढा ने कहा कि नए नियमों के तहत, गिग वर्कर्स को कानूनी मान्यता मिलेगी और उन्हें एक यूनिक पहचान दी जाएगी। हाल ही में संसद सत्र में ‘आप’ के राज्यसभा सांसद ने भारत के गिग वर्कर्स के ‘दुख-दर्द” के बारे में बात की थी, जो बहुत ज्यादा दबाव में और कभी-कभी खराब मौसम की स्थिति में काम करते हैं।
राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स और दूसरे ऐप-बेस्ड डिलीवरी और सर्विस बिजनेस पर रेगुलेशन की मांग की थी, खासकर गिग वर्कर्स के फायदों की जरूरत पर जोर दिया था।
उन्होंने संसद में अपने भाषण में गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा और सही वेतन की मांग की थी। पहली बार, ‘गिग वर्कर्स’ और ‘प्लैटफॉर्म वर्कर्स’ की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रावधान सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में दिए गए हैं, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुआ है।
क्या होंगे फायदे
यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के लिए जीवन बीमा और विकलांगता कवर, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मैटरनिटी बेनिफिट्स, बुढ़ापा सुरक्षा वगैरह से जुड़े मामलों पर सही सोशल सिक्योरिटी उपायों को बनाने का प्रावधान करता है। यह कोड कल्याणकारी योजनाओं को फाइनेंस करने के लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाने का भी प्रावधान करता है। यह कोड गिग वर्कर्स और प्लैटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण के लिए एक नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड बनाने का भी प्रावधान करता है।
इसके अलावा, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 26.08.2021 को असंगठित श्रमिकों, जिसमें प्लैटफॉर्म वर्कर्स, प्रवासी श्रमिक आदि शामिल हैं, का एक व्यापक नेशल डेटाबेस बनाने के लिए ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का मकसद असंगठित श्रमिकों को सेल्फ-डिक्लेरेशन के आधार पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21.10.2024 को ई-श्रम- ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ भी लॉन्च किया है, जिसमें अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को एक ही पोर्टल यानी ई-श्रम पर इंटीग्रेट किया गया है।
10 साल का सूखा खत्म कर पाएंगी प्रियंका गांधी? असम की सत्ता के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस
6 Jan, 2026 08:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देशभर में कई चुनावों में करारी हार का सामना करने के बाद अब कांग्रेस किसी तरह से यह सूखा खत्म करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी ने केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुदुच्चेरी (Kerala, Tamil Nadu, West Bengal, Puducherry) के लिए शनिवार को स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है। प्रियंका गांधी को असम में स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह केरल में दिग्गज नेता मधुसूदन मिस्त्री को, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी का जिम्मा छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव को दिया गया है। पश्चिम बंगाल के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बीके हरिप्रसाद को बनाया गया है।
पश्चिम बंगाल में यही उम्मीद है कि मुख्य लड़ाई ममता बनर्जी की टीएमसी और बीजेपी के बीच होगी। वहीं तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमे के बीच लड़ाई होगी। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही गठबंधन में सहयोगी हैं। अब कांग्रेस की मुख्य लड़ाई असम में होनी है। इसीलिए असम की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपी गई है।
असम की सत्ता के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस
कांग्रेस चाहती है कि इस बार असम की सत्ता बीजेपी से छीन ली जाए। बीजेपी असम में 2016 से ही सत्तासीन है। ऐसे में कांग्रेस एंटीइनकंबेंसी का भी फायदा उठाना चाहती है। असम में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री तरुण गोगोई थे और अब उनके बेटे गौरव गोगोई कांग्रेस की तरफ से आगे किए जा सकते हैं। फिलहाल वह लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं।
प्रियंका गांधी के लिए क्यों अहम है असम
असम में पहली बार गांधी परिवार को कोई सदस्य इतनी बड़ी जिम्मेदारी ले रहा है। इसलिए प्रियंका गांधी का स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया जाना बेहद अहम माना जा रहा है। स्क्रीनिंग कमेटी का काम होता है कि वह प्रत्याशियों की संभावित लिस्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजता है और वहां इनपर मुहर लगाई जाती है। गांधी के करीबी माने जाने वाले इमरान मसूद और सप्तगिरि शंकर को असम स्क्रीनिंग कमेटी का सदस्य बनाया गाय है।
बता दें कि 2019में प्रियंका गांधी ने राजनीति में कदम रखा था और फिर 2022 में ही कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना करना पड़ा। यह चुनाव कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की देखरेख में ही लड़ा था। बीते कुछ समय से प्रियंका गांधी केंद्र की नीतियों के खिलाफ झंडा बुलंद कर रही हैं। जी राम जी विधेयक को लेकर भी उन्होंने संसद के बाहर और अंदर केंद्र सरकार का जमकर विरोध किया।
असम के पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 126 सीटों वाले राज्य में एनडीए ने 75 और कांग्रेस के गठबंधन ने 50 सीटें जीती थीं। ऐसे में दोनों के बीच सीटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं था। दोनों गठबंधनों के बीच वोट शेयर का केवल 1.6 फीसदी का अंतर था।
कांग्रेस का गांव चलो अभियान, 5 जनवरी से 20 फरवरी तक चलेगा कार्यक्रम, ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटी का होगा गठन
5 Jan, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। कांग्रेस (Congress) 5 जनवरी से ‘गांव चलो अभियान’ की शुरुआत करेगी। यह कार्यक्रम 20 फरवरी तक पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की अगुआई में चलेगा। इस दौरान ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटी का गठन होगा। वहीं कांग्रेस ने 26 हजार ग्राम पंचायतों में पहली बार कमेटी गठित का लक्ष्य रखा है।
इसे लेकर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि जीतू पटवारी के नेतृत्व कार्यकर्ता उत्साह से भरा है। अभी हमारे पंचायत कमेटी और ग्राम कमेटियों की घोषणा भी नहीं हुई है, यह प्रक्रिया में है। लेकिन 5 हजार सिफारशी पत्र आना बताते हैं कि कहीं न कहीं कांग्रेस के पक्ष में उत्साह है। जीतू पटवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता उत्साहित हैं। तीन विधानसभा में ऐसा उत्साह पहले भी था जो बीते चुनाव बताते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अमरवाड़ा विधानसभा चुनाव में हम 20 राउंड जीते, 21 वे राउंड टेबल पर हराया गया। बुधनी में डेढ़ लाख की वोट और विजयपुर विधानसभा में सरकार ने सारे संसाधन खर्च कर दिए। इसके बाद विजयपुर सरकार हार गई। जनता का ध्यान भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर नहीं है। आने वाले भविष्य को कांग्रेस में देख रही है। 5000 लोगों के पत्र साधारण बात नहीं है।
रीवा में सिमरिया नगर पंचायत कांग्रेस सरकार के विरोध के बाद जीती। सिंगरौली में क्या हुआ, आने वाला समय कांग्रेस का है और कार्यकर्ता उत्साह के साथ इन सब चुनाव को लड़ने के लिए तैयार है। आने वाले समय में आपकी देखेंगे सारी समितियां जब होगी तो कांग्रेस आपको सरकार के खिलाफ सड़क पर मजबूती से लड़ती नजर जाएगी।
बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और जीतू पटवारी केवल इवेंट और प्रचार प्रसार की राजनीति करते हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में उनके उम्मीदवार नहीं मिल पाए। 29 सीटों पर कांग्रेस की उम्मीदवार नहीं थे। जिला अध्यक्षों का चयन हुआ तो उनमें से दो जिला अध्यक्ष ने दो महीने के अंदर इस्तीफा दे दिया। ब्लॉक कांग्रेस की भी अधिकांश कमेटियों का गठन नहीं हो सका। ऐसे में ग्राम स्तर तक संगठन को पहुंचना यह केवल और केवल नाटक नौटंकी है। कांग्रेस दिशाहीन हो गई है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के पास न नेता है, न नियत है, न इच्छा शक्ति है। केवल और केवल प्रचार प्रसार के लिए इस तरह के झूठे आंकड़े दिए जाते हैं। जीतू पटवारी का नेतृत्व पूरी तरह विफल है।
BJP में अनुशासन का संदेश…. वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष पद की गरिमा को बनाए रखने की नसीहत..
5 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party – BJP) के सांगठनिक ढांचे में हाल ही में हुए बदलावों के बाद पार्टी के भीतर एक नई कार्यशैली और कड़े अनुशासन का संदेश दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर जहां नए कार्यकारी अध्यक्ष के पद की गरिमा को लेकर कड़े निर्देश जारी हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में नए प्रदेश अध्यक्ष ने पदभार संभालते ही बागी और गुटबाज तेवर रखने वालों को आईना दिखाना शुरू कर दिया है।
भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (National Executive President Nitin Naveen) के मनोनयन के बाद पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में पद सर्वोपरि है। चूंकि नए अध्यक्ष उम्र और अनुभव में कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए अक्सर आपसी चर्चाओं में वरिष्ठ नेता उन्हें नाम से संबोधित कर देते थे। पार्टी ने अब सभी नेताओं और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि बातचीत के दौरान ‘प्रोटोकॉल’ का पूरा ध्यान रखा जाए।
निर्देश दिया गया है कि पुराने निजी संबंध चाहे जो भी रहे हों, लेकिन चर्चा के दौरान पद की गरिमा के अनुरूप ही सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। विशेष रूप से इसलिए भी क्योंकि कार्यकारी अध्यक्ष के जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है। हालांकि, स्वयं नितिन नबीन की सादगी चर्चा का विषय है। वे आज भी अपने वरिष्ठों से उसी पुराने सम्मान और सहजता के साथ मिल रहे हैं।
खेमेबाजी पर पंकज चौधरी का कड़ा प्रहार
वहीं, उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कमान संभालते ही यह साफ कर दिया है कि वे अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेंगे। हाल ही में एक खास जाति से जुड़े विधायकों की अलग बैठक और खेमेबाजी की खबरों पर अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसी गतिविधियां पार्टी के संविधान और आदर्शों के खिलाफ हैं। सियासी गलियारों में इस सख्ती के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे ‘मिशन-2027’ के लिए टिकट पक्का करने की होड़ मान रहे हैं, तो कुछ इसे नए अध्यक्ष की पहली बड़ी परीक्षा।
अध्यक्ष के इस कड़े रुख से उन लोगों के पसीने छूट रहे हैं जो अब तक गुट बनाकर काम कर रहे थे। उन्हें डर है कि उनकी पिछली कारगुजारियां और जातिगत राजनीति की जानकारी नए अध्यक्ष तक पहुंच गई, तो उनके राजनीतिक भविष्य पर संकट आ सकता है। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग अध्यक्ष के इस अनुशासन की सराहना कर रहा है, उनका मानना है कि चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाना जरूरी था। वहीं, कुछ लोग इसे अतिरेक मान रहे हैं। फिलहाल, भाजपा मुख्यालय से लेकर जिलों तक में इस नए अनुशासन की चर्चा जोरों पर है।
’25 हजार में बिहार की लड़कियां… गिरधारी साहू के बयान का कड़ा विरोध… पार्टी ने दी ये हिदायत
5 Jan, 2026 09:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य (Cabinet Minister Rekha Arya) के पति गिरधारी साहू के बयान को लेकर उत्तराखंड से बिहार तक माहौल गर्मा गया है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें वह यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि बिहार की लड़कियां (Bihar Girls) 20-25 हजार में शादी के लिए मिल जाती हैं। उनके बयान पर उत्तराखंड भाजपा (Uttarakhand BJP) ने कड़ा विरोध जताया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बिहार की महिलाओं को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति को हिदायत दी है।
उन्होंने मंत्री के पति को भविष्य में इस तरह की बयानबाजी न करने और सोच समझकर बयान देने की नसीहत दी। उनके बयान की कड़ी निंदा हो रही है और बिहार महिला आयोग ने भी इसका संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा है। संभव है कि सीएम द्वारा जल्द ऐक्शन लिया जाएगा।
इस तरह के बयान अति निंदनीय
इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी कैबिनेट मंत्री के पति को हिदायद दी। महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री के पति को इस तरह की बयानबाजी न करने को कहा गया है। हालांकि भट्ट ने कहा कि मंत्री के पति अपने बयान के लिए माफी भी मांग चुके हैं।
भाजपा का बयान देने वाले से संबंध नहीं: मनवीर
देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने वाले नेता का भाजपा से कोई संबंध नही है और पार्टी बयान की कड़ी निंदा करती है। शनिवार को बलवीर रोड स्थित प्रदेश मुख्यालय में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए चौहान ने कहा कि महिलाओं के बारे में अनर्गल बयानबाजी करने वाले कथित नेता न भाजपा संगठन में पदाधिकारी है और न ही उनका पार्टी से संबंध है। महिलाओं के संबंध मे ऐसी संयमित टिप्पणी की कड़ी निंदा करती है।
अजय चौटाला ने शासकों को गद्दी से उतारकर पीटने वाले बयान पर दी सफाई, भाजपा ने किया विरोध
5 Jan, 2026 08:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । जननायक जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला (Ajay Chautala) ने महेंद्रगढ़ में दिए गए बयान (statement) को लेकर उठे विवाद पर अपनी सफाई दी है। चौटाला ने कहा कि उन्होंने कोई विवादित या गलत बयान नहीं दिया है। भाजपा (BJP) के मंत्री बेवजह उनके बयान पर आपत्ति जता रहे हैं और बिना वजह मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अजय सिंह चौटाला ने कहा कि उन्होंने अपने बयान में सिर्फ पड़ोसी देशों में हुए हालातों का जिक्र किया है। दुनिया के कई देशों में ऐसा देखा गया है कि जब जनता पर अत्याचार बढ़ा, तब जनता ने शासकों के खिलाफ खड़े होकर बदलाव किया और तख्तापलट जैसी परिस्थितियां बनीं। उन्होंने कहा कि वह आज भी अपने उसी बयान पर कायम हैं और उसमें कुछ भी गलत नहीं है।
चौटाला ने कहा कि आज देश में भी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और अब युवाओं को संगठित होने की जरूरत है। देश में बदलाव लाने की ताकत सिर्फ युवाओं के पास है और आने वाले समय में युवा ही निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अजय चौटाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कई मंत्री उनके बयान को लेकर पागल हो रहे हैं, जबकि असल मुद्दों पर कोई बात नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि देश ने पहले भी बदलाव देखा है। आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने लोगों का दमन किया था लेकिन उसी दौर में देश में क्रांति आई और बदलाव हुआ। आज फिर देश को बदलाव की जरूरत है।
‘संवैधानिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा’
अजय चौटाला ने आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज देश की लगभग सभी संवैधानिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षण संस्थानों को भी नहीं छोड़ा गया है। सिरसा की चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी आरएसएस का प्रभाव है और यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर आरएसएस से जुड़े लोगों को संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए चौटाला ने कहा कि कांग्रेस बीजेपी की बी-टीम की तरह काम कर रही है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा रही।
क्या कहा था चौटाला ने
अजय चौटाला ने महेंद्रगढ़ में पड़ोसी देशों की हिंसा का जिक्र करते हुए कहा था कि जिस तरीके से बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में हुआ, वैसा ही आंदोलन यहां करना पड़ेगा। शासकों को गद्दी से खींचकर सड़कों पर दौड़ाकर पीटने का काम करना पड़ेगा। इन्हें देश छोड़ने पर मजबूर करना होगा। हमारे पड़ोसी देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों की तरह, श्रीलंका में जिस तरह बांग्लादेश के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, जिस तरह नेपाल के युवाओं ने सरकार को देश छोड़ने पर मजबूर किया, उसी तरह की रणनीति भारत में भी मौजूदा सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए अपनानी होगी।
अजय चौटाला का बयान हिंसा को बढ़ावा देने वाला: भाजपा
अजय चौटाला के इस बयान से सियासी बवाल मचा हुआ है। भाजपा ने आरोप लगाया कि जननायक जनता पार्टी ताऊ देवीलाल के नाम पर राजनीति करती है, जिन्होंने आपातकाल के खिलाफ और लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ाई लड़ी थी लेकिन अजय चौटाला के बयान उनकी विरासत के ठीक उलट मार-काट और हिंसा को बढ़ावा देने वाले हैं। हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि इससे साफ हो गया है कि अजय चौटाला का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा नहीं रहा है। अपने घटिया बयान पर उन्हें प्रदेश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का सुशासन जजपा नेता को हजम नहीं हो रहा है। सत्ता के लिए छटपटाहट में उन्होंने अपनी घटिया सोच को लोगों के सामने उजागर किया है। वहीं, कैबिनेट मंत्री अनिल ने कहा कि अजय चौटाला के बयान का यह मतलब लग रहा है कि उनको हिंदुस्तान के लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। उनको अपनी राजनीतिक पार्टी में भरोसा नहीं रहा, इसलिए युवाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं।
उद्धव ने कहा, मोदी ने कैलाश और गंगा धरती पर ला दी
4 Jan, 2026 09:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र में चुनावी सरगर्मियों के बीच शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग (EC) पर तीखा हमला बोला है। मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि देश में अब लोकतंत्र नहीं बल्कि 'भीड़तंत्र' चल रही है, जहां वोट चोरी के साथ-साथ अब उम्मीदवारों की भी 'चोरी' शुरू हो गई है।
‘अब उम्मीदवारों की चोरी...’
पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने भाजपा गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, "हम उन्हें वोट चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ते हैं, लेकिन अब तो उन्होंने उम्मीदवारों को ही चुराना शुरू कर दिया है। यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।"
ठाकरे का इशारा सत्ता पक्ष द्वारा विपक्षी उम्मीदवारों को अपने पाले में करने की कोशिशों की ओर था। दरअसल महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के मतदान से पहले ही सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने 68 सीटें जीत ली हैं। नॉमिनेशन वापस लेने के आखिरी दिन भाजपा के उम्मीदवार 44 सीटों पर बिना किसी विरोध के चुने गए, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना भी 22 सीटों पर और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी भी दो सीटों पर जीती।
पीएम मोदी पर तंज कसा
पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, "पीएम मोदी की तुलना हमसे मत कीजिए। उन्होंने तो कैलाश पर्वत बनाया, वे धरती पर गंगा लेकर आए और समुद्र मंथन में भी वह थे! लेकिन हम आज भी छत्रपति शिवाजी महाराज की उस मूर्ति का इंतजार कर रहे हैं, जिसका पूजन मोदी जी ने सालों पहले अरब सागर में किया था।"
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गिनाईं ‘जी राम जी योजना’ की खूबियां, कांग्रेस पर साधा निशाना
4 Jan, 2026 05:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री (Union Agriculture Minister) शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने कांग्रेस (Congress) जी राम जी योजना (Ji Ram Ji Scheme) के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम है। कांग्रेस को ग्राम , काम और राम से परेशानी है। आरोप लगाओ और भाग जाओ, यही कांग्रेस की आदत है। नेता प्रतिपक्ष, चर्चा के समय क्यों नहीं थे, कांग्रेस जवाब दे। विकसित भारत जी राम जी एक बड़ा रिफॉर्म है।
शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, ‘कांग्रेस को पेट में दर्द इसलिए है क्योंकि भ्रष्टाचार के रास्ते बंद हो रहे हैं। संसद संवाद के लिए होती है, लेकिन सच सामने न आ जाए इसलिए मेरी आवाज दबाने की कोशिश की गई। विकसित भारत जी राम जी योजना भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार है। मोदी सरकार मजदूरों के हित और विकास के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है।’
केंद्रीय कृषि मंत्री के मुताबिक, कांग्रेस तो झूठ की दुकान है, भ्रम की फैक्ट्री है, अफवाहों का बाजार है। मजदूरों को काम नहीं मिलेगा ये अफवाह कांग्रेस फैला रही है। ‘जी राम जी’ योजना में मजदूरों के हित पूरी मजबूती से सुरक्षित हैं, जहां 100 नहीं बल्कि 125 दिन रोजगार की गारंटी है।
उन्होंने पूछा कि कांग्रेस जवाब दे जब इतनी महत्वपूर्ण योजना पर चर्चा हो रही थी, तब नेता प्रतिपक्ष कहां थे? संसद में मौजूद क्यों नहीं थे, बहस में हिस्सा क्यों नहीं लिया था? बाद में बाहर आकर भ्रम फैलाना राजनीति नहीं, गैर-जिम्मेदारी है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ‘अब ऊपर से आदेश नहीं, नीचे गांव से फैसला होगा। कौन सा काम होगा, ये ग्राम सभा और ग्राम पंचायत, सरपंच, चुने हुए जनप्रतिनिधि और गांव के भाई-बहन तय करेंगे। ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ गांव के लोग खुद बनाएंगे और उसी से विकास आगे बढ़ेगा।
असम विधानसभा चुनाव अभूतपूर्व होने वाले हैं : गौरव गोगोई
4 Jan, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी । असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि 2026 के असम विधानसभा चुनाव अभूतपूर्व होने हैं, यह मुकाबला राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि असम की जनता और उस व्यक्ति के बीच होगा, जिसे उन्होंने स्वयं को राजा समझने वाला कहा। उन्होंने कहा कि जनता पहले से ही राजा की पहचान जानती है। कांग्रेस नेता गोगोई ने बताया कि विपक्षी दल जनता में व्याप्त आक्रोश और हताशा को समझते हुए उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल वित्तीय प्रलोभन, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और चुनावी कानूनों के कथित उल्लंघनों के द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन असम की जनता इससे प्रभावित नहीं होगी। गोगोई ने कहा कि राज्य की जनता एकजुट होकर यह संदेश देगी कि धन, बल, अहंकार, धमकियाँ और विभाजनकारी राजनीति उनकी गरिमा को कुचल नहीं सकती। उन्होंने असम की भूमि, संस्कृति, विरासत, शांति और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करने का संकल्प जताया। कांग्रेस नेता गोगोई ने कहा कि असम चुनावों के परिणाम राष्ट्रीय महत्व के होंगे और पूरे देश पर प्रभाव डालने वाले है। उन्होंने वर्तमान सरकार पर नागरिकों को प्रजा की तरह मानने और उनके अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया। सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का दुरुपयोग लाभार्थियों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है।
महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बीच महायुति गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप शुरू
4 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बीच महायुति गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि वह आज उन्हीं लोगों के साथ सरकार में हैं, जिन्होंने कभी उन पर गंभीर आरोप लगाए थे।
अजित पवार का यह बयान भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल के आरोपों के बाद में आया है। मुरलीधर ने पुणे नगर निगम चुनावों को लेकर सवाल उठाया था कि एनसीपी ऐसे उम्मीदवारों को टिकट क्यों दे रही है, जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अजित पवार ने बिना भाजपा का नाम लिए कहा कि जिन लोगों ने कभी उन पर 70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले जैसे आरोप लगाए थे, वही लोग आज उनके साथ सत्ता में हैं। सिर्फ आरोप लगने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता है, जब तक अदालत में अपराध साबित न हो जाए। वहीं, अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा है कि अगर उन्होंने बोलना शुरू किया, तो अजित पवार मुश्किल में पड़ सकते हैं। उन्हें आरोप लगाने से पहले खुद के गिरेबान में झांकना चाहिए।
पहले खुद के गिरेबान में झांके अजित
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार आखिर किस पार्टी की बात कर रहे हैं। क्या वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा पर शक कर रहे हैं? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से किसी का भला नहीं होगा। अगर भाजपा भी इसी तरह जवाब देने लगे, तो यह अजित पवार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। यह सियासी टकराव ऐसे समय पर सामने आया है, जब 15 जनवरी को पुणे नगर निगम चुनाव हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार में सहयोगी होने के बावजूद भाजपा और एनसीपी नगर निकाय चुनाव अलग-अलग लड़ रही हैं। वहीं, अजित पवार की पार्टी शरद पवार गुट के साथ मैदान में है।
अजित एनसीपी को शरद पवार की पार्टी में मर्ज करें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा है कि अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) में विलय कर लेना चाहिए। संजय राउत ने सवाल उठाया कि जब अजित पवार खुद भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, तो वे फिर महायुति सरकार में क्यों बने हुए हैं।
पीएम मोदी ने कहा, सवा सौ साल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का भारत वापस लौटना शुंभ संकेत
4 Jan, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है, भारत की धरोहर लौटी है। आज से भारतीय जनमानस, भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेगा, भगवान बुद्ध के आशीर्वाद ले पाएगा। मैं इस शुभ अवसर पर यहां मौजूद सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं।
उन्होंने कहा, 2026 के शुरुआत में ही यह शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 का ये मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जो भगवान बुद्ध की चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी कामना है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए।
उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना... ये दोनों ही पड़ाव अपने-आप में बहुत बड़ा सबक है। सबक ये है कि गुलामी कोई राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, गुलामी हमारी विरासत को तबाह करती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के साथ यहीं हुआ। गुलामी के कालखंड में इन्हें भारत से छीना गया। तब से करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर ही रहे हैं। इसलिए उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध का ज्ञान, उनका दिखाया मार्ग... पूरी मानवता का है। यह भाव हमने बीते कुछ महीनों में बार-बार अनुभव किया। बीते कुछ महीनों में भगवान बुद्ध के पावन अवशेष जिस भी देश में गए, वहां आस्था और श्रद्धा का ज्वार उमड़ आया।
प्रधानमंत्री ने कहा, भगवान बुद्ध सबके हैं... सबको जोड़ते हैं। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझता हूं, क्योंकि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन में बहुत ही गहरा स्थान रहा है। मेरा जन्म जिस वडनगर में हुआ, वो बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। जिस भूमि पर भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिए, वो सारनाथ आज मेरी कर्मभूमि है। भारत केवल भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का संरक्षक नहीं है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है।
चुनाव से पहले बंगाल में कांग्रेस को आई खुशखबर.............टीएमसी सांसद मौसम नूर की कांग्रेस में वापसी
4 Jan, 2026 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकत्ता । पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम मोड़ सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में आधिकारिक तौर पर वापसी की है। 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ घटनाक्रम कांग्रेस के लिए बड़ी सियासी राहत और बंगाल से आई “खुशखबरी” के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम को सिर्फ दल-बदल नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक धुरी का संकेत माना जा रहा है।
बात दें कि मौसम नूर का ताल्लुक मालदा के प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से है। वे उत्तर बंगाल के दिग्गज नेता रहे गनी खान चौधरी की भतीजी हैं, जिनका मुस्लिम बहुल इलाकों में दशकों तक मजबूत जनाधार रहा। इसके बाद उनकी कांग्रेस में घर वापसी से पार्टी को उत्तर बंगाल, खासकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद है। ये वे इलाके हैं जहां कभी कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन समय के साथ टीएमसी और बीजेपी के उभार ने पार्टी को कमजोर कर दिया।
शनिवार को मौसम नूर ने दिल्ली स्थित एआईसीसी के मुख्यालय में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर कांग्रेस नेतृत्व और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार की मौजूदगी ने कदम को और राजनीतिक वजन दिया। पार्टी ने इस “बंगाल ब्रेकथ्रू” करार दिया, जो यह संकेत देता है कि कांग्रेस अब राज्य में दोबारा सियासी जमीन मजबूत करने के मूड में है। गौरतलब है कि मौसम नूर का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होना है, लेकिन उससे पहले उनकी वापसी कांग्रेस की चुनावी रणनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
टीएमसी से उनकी दूरी की वजह भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय रही है। सूत्रों के मुताबिक 2019 में टीएमसी में शामिल होने के बाद शुरुआत में उन्हें जिला अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी मिली, लेकिन बाद में उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया। पार्टी के भीतर निर्णय प्रक्रिया और कार्यक्रमों में उनकी भूमिका लगातार सीमित होती गई, जिससे असंतोष बढ़ता गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी में उन्हें वह सम्मान और प्रभाव नहीं मिला, जिसकी वह अपेक्षा कर रही थीं।
प्रधानमंत्री आवास योजना से स्वयं के पक्के मकान का सपना हुआ साकार
केदारनाथ मंदिर में नए नियम लागू, मोबाइल इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन
मनरेगा की ‘डबरी’ और ‘बिहान’ के सहयोग से सविता बनीं आत्मनिर्भर
दिलीप घोष बोले- बंगाल में खिलेगा कमल, BJP की जीत का भरोसा
लेमरू में दौड़ी जिंदगी की नई रफ्तार, संजीवनी 108 सेवा से ग्रामीणों को मिल रहा त्वरित उपचार
छत के नेट से टीम इंडिया की कैप तक का सफर
केदारनाथ धाम में उत्सव का माहौल, कल सुबह खुलेंगे कपाट
सुपर सकर मशीन द्वारा लगातार चौथे दिन तानसेन नगर में सीवर सफाई कार्य जारी
रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में सूरजपुर बना प्रदेश में प्रथम स्थान पर
