राजनीति
महाराष्ट्र : कांग्रेस ने बिना बताए BJP के साथ डीलिंग करने पर अपने 12 पार्षदो को किया निलंबित, जाने मामला
8 Jan, 2026 08:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । महाराष्ट्र (Maharashtra) के ठाणे जिले में स्थित अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव (Ambernath Municipal Council Elections) के बाद सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस (Congress) ने स्थानीय स्तर पर भाजपा (BJP) के साथ मिलकर मोर्चा बनाने और पार्टी नेतृत्व को सूचित किए बिना निर्णय लेने के आरोप में अपने सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता का कहना है कि यह भाजपा के साथ कोई औपचारिक गठबंधन नहीं था। उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्दों को लेकर पार्षदों द्वारा उठाया गया एक कदम था। जानिए अंबरनाथ नगर निकाय के चुनाव परिणाम के बाद पैदा हुए इस विवाद की पूरी सच्चाई और क्यों पार्टी को अपनी पूरी ब्लॉक यूनिट भंग करने जैसा बड़ा फैसला लेना पड़ा।
शिवसेना को ऐसे बाहर किया
ठाणे जिले के अंबरनाथ कस्बे में भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ चुनाव के बाद समझौता किया था और बहुमत के जादुई आंकड़े 31 सीट को प्राप्त करने में सफल हुई। हालांकि, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 27 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। प्रतिद्वंद्वी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर हुए विवाद के बाद, कांग्रेस ने पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की।
यूनिट ही भंग
कांग्रेस ने अपने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को भी निलंबित कर दिया है। पार्टी की महाराष्ट्र इकाई ने एक पत्र में उन्हें सूचित किया है कि ब्लॉक इकाई भी भंग कर दी गई है।
पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित हुए सभी पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। इसमें कहा गया कि स्थानीय निकाय में भाजपा के साथ गठबंधन करने का निर्णय पार्टी के राज्य नेतृत्व को सूचित किए बिना लिया गया था।
इसी बीच, कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, ‘स्थानीय स्तर पर शिवसेना के कथित भ्रष्टाचार का विरोध करने के लिए निर्दलीय पार्षदों सहित कई पार्षदों ने पार्टी चिह्नों और संबद्धताओं को दरकिनार करते हुए अंबरनाथ विकास मोर्चा (अंबरनाथ विकास अघाड़ी) का गठन किया है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है। लेकिन समर्थन बिना अनुमति के किया गया था, इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।’
कांग्रेस के बारह, भाजपा के 14, राकांपा के चार और एक निर्दलीय नवनिर्वाचित पार्षद ने 31 दिसंबर को भाजपा के स्थानीय कार्यालय में बैठक की और गठबंधन बनाने की जानकारी ठाणे के जिला अधिकारी को देते हुए एक पत्र सौंपा।
सीट का गणित
अंबरनाथ नगर निकाय सदन में कुल 60 सदस्य हैं। 20 दिसंबर को हुए चुनावों में, शिवसेना ने 27 सीटें जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12, राकांपा को चार सीट मिलीं, जबकि दो निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।
संक्रांति के बाद BJP संगठन में बड़े बदलाव के आसार… राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं नितिन नबीन
8 Jan, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party- BJP) में परिवर्तन की प्रक्रिया जोरों पर है। दिसंबर 2025 में बिहार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नितिन नबीन (Nitin Nabin) (45 वर्ष) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (National Executive Chairman) नियुक्त किया गया है। वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा नेता हैं जो इस शीर्ष संगठनात्मक पद तक पहुंचे हैं। नितिन नबीन बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक हैं और नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वे पार्टी के युवा मोर्चा में लंबे समय तक सक्रिय रहे तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 से इस पद पर हैं। अब जनवरी 2026 के मध्य तक नितिन नबीन को औपचारिक रूप से भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के चुनाव को भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अनुमोदित किया जाएगा, जो इस महीने के अंत तक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद नितिन नबीन द्वारा अपनी नई टीम बनाने के लिए संगठनात्मक फेरबदल किए जाने की उम्मीद है, जो एक ‘समावेशी’ प्रक्रिया होगी। भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम भाजपा और संघ परिवार के बीच तालमेल और समन्वय को दर्शाएगी।
मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद
एक रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के संगठनात्मक स्तरों में व्यापक फेरबदल से जुड़ी इस प्रक्रिया के कारण केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने यह भी बताया कि जून 2024 में इसके गठन के बाद से इसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा कर रही है। जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल होने की उम्मीद है, जिसमें युवा नेतृत्व के साथ-साथ जाट समुदाय के चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार और संगठन दोनों में जाट समुदाय का घटता प्रतिनिधित्व भी हमारे उच्च कमान के विचार-विमर्श के बिंदुओं में से एक है।
सरकार और संगठन में आएंगे संघ परिवार से जुड़े लोग
पार्टी सूत्रों ने कहा कि नबीन ने भाजपा और उसके वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस के बीच संबंधों और समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, इससे यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे केंद्र सरकार और पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के बीच ‘सक्रिय समन्वय’ सुनिश्चित करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और आरएसएस पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों के कामकाज की समीक्षा करने जा रहे हैं और संगठन तथा सरकारी या अर्ध-सरकारी निकायों, जिनमें विभिन्न आयोग भी शामिल हैं, में कई नई नियुक्तियों पर चर्चा करेंगे। एक पार्टी नेता ने कहा कि इससे राज्य के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लिए केंद्रीय स्तर पर संगठनात्मक या सरकारी भूमिकाएं निभाने का रास्ता खुल जाएगा, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबे समय से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि ऐसे कई नेताओं को समायोजित किए जाने की संभावना है, जिनमें वे नेता भी शामिल हैं जो अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में पार्टी के साथ रहे हैं। ये नेता बिहार जैसे राज्यों के साथ-साथ उन राज्यों से भी होंगे जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और आरएसएस की हालिया समन्वय बैठकों के दौरान, आरएसएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे नेताओं की पहचान की जानी चाहिए जो तीन-चार दशकों से संघ परिवार से जुड़े हुए हैं लेकिन संगठन, सरकार या किसी अन्य सार्वजनिक संस्था में उन्हें स्थान नहीं मिला है। नितिन नबीन उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं के समूह में शामिल हैं जो इस प्रक्रिया का समन्वय कर रहे हैं।
मकर संक्रांति के बाद फेरबदल की संभावना
भाजपा सूत्रों ने बताया कि हमारा ध्यान उन लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं देने पर है जिन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा और संघ के लिए समर्पित कर दिया है। यह प्रक्रिया जारी है, लेकिन घोषणाओं के लिए सीमित अवसर ही उपलब्ध होंगे। सूत्रों ने बताया कि अधिकांश महत्वपूर्ण नियुक्तियां मकर संक्रांति के बाद से लेकर बजट सत्र के प्रारंभ होने तक होने की उम्मीद है, जो फरवरी की शुरुआत से शुरू होगा। इस प्रक्रिया के लिए एक और समयसीमा आगामी राज्य चुनावों की घोषणा से पहले होने की संभावना है।
शशि थरूर ने PM मोदी के बारे में ट्रंप के दावों पर दिया बयान, बोले- राष्ट्रहित का मतलब परेशानी खड़ी करना नहीं है
8 Jan, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) की टिप्पणियों पर राजनीति जारी है। अब कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने इसे लेकर कहा कि हर देश अपने राष्ट्र हितों को सबसे आगे रखता है। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरे लिए राष्ट्रहित का मतलब कहीं दुश्मन नहीं बनाना है। ट्रंप ने दावा किया था कि पीएम मोदी ने उनसे मिलने के लिए समय मांगा था।
थरूर ने कहा, ‘हर देश के लिए उसका राष्ट्रहित सबसे ऊपर होता है। मेरे लिए उन राष्ट्र हितों का मतलब है कि हम अपने लिए कहीं भी बड़ी परेशानियां खड़ी न करें या बड़े दुश्मन न बनाएं। हम जहां तक संभव हो, सभी के साथ संपर्क के रास्ते बचाकर रखना चाहते हैं। अपने लेखनी में भी मैंने इस नजरिए का समर्थन किया है।’
उन्होंने कहा, ‘एक ओर जहां रूस के साथ हमारे अच्छे रिश्ते हैं, चीन के साथ ठीक संबंध हैं, अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते हैं, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे साथ जापानी, दक्षिण कोरियाई और दक्षिए पूर्व एशिया के देश हैं। ये सभी बातें हमारी नीति का हिस्सा हैं।’
उन्होंने कहा, ‘जीवन में, राजनीति में और कूटनीति में, अक्सर आपके पास जितने अधिक विकल्प होते हैं, आप किसी एक देश के मनमाने व्यवहार या उतार-चढ़ाव से उतने ही अधिक सुरक्षित रहते हैं। फिलहाल इसे यहीं रहने देते हैं।’
ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को कहा कि रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए शुल्क के कारण प्रधानमंत्री मोदी उनसे ‘ज्यादा खुश नहीं हैं।’ ट्रंप ने ‘हाउस जीओपी सदस्य रिट्रीट’ में अपने संबोधन में यह भी दावा किया, ‘प्रधानमंत्री मोदी मुझसे मिलने आए और बोले, ‘श्रीमान्, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?’ मैने कहा, ‘जी हां।’
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इस तरह का दावा किया हो। इससे पहले उन्होंने भारत पर लगाए गए टैरिफ को बढ़ाने की चेतावनी दी थी। साथ ही कहा था कि पीएम मोदी को पता है कि उन्हें खुश रखना बहुत जरूरी है।
सोमनाथ मंदिर विवाद? BJP ने नेहरू, गजनी-खिलजी को बताया जिम्मेदार
8 Jan, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) के जीर्णोद्धार को लेकर भाजपा (BJP) ने एक बार फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) पर निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को कहा कि नेहरू अपनी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं चाहते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोमनाथ मंदिर को अतीत में महमूद गजनी और अलाउद्दीन खिलजी ने लूटा था, लेकिन स्वतंत्र भारत में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत थी।
सुधांशु त्रिवेदी ने पंडित नेहरू द्वारा 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि नेहरू ने खान को प्रिय नवाबजादा कहा और सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को झूठा बताया। उन्होंने कहा लियाकत अली खान के सामने आत्मसमर्पण करते हुए नेहरू ने लिखा कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण जैसा कुछ भी नहीं हो रहा। त्रिवेदी ने पूछा आखिर पंडित नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था कि उन्हें सोमनाथ मंदिर के बारे में पत्र लिखना पड़ा?
‘ट्रस्ट को मदद देने से साफ मना किया’
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिख कर सोमनाथ ट्रस्ट को मदद से साफ मना कर दिया, जिसमें अभिषेक समारोह के लिए नदी से पानी के अनुरोध भी शामिल थे। पाकिस्तान में भारत के राजदूत को लिखे पत्र में नेहरू ने मंदिर में अभिषेक के लिए सिंधु के पानी के इस्तेमाल को मंजूरी देने से मना कर दिया। यह आदेश दिया कि भविष्य में ऐसे किसी अनुरोध से पहले से मंजूरी लेनी चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट कर आरोप लगाया कि नेहरू अपनी तुष्टीकरण की राजनीति के लिए मुगल आक्रांताओं का महिमामंडन करने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री के पत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि नेहरू ने पाकिस्तानी दुष्प्रचार का सामना करने या भारत की सभ्यतागत स्मृति का बचाव करने के बजाय, हिंदू धर्म के ऐतिहासिक प्रतीकों को कम महत्व देकर पाकिस्तान को खुश करने का विकल्प चुना और आंतरिक आत्मविश्वास के बजाय बाहरी तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी।
कांग्रेस ने कहा, नेहरू के बारे में झूठ फैलाया जा रहा
कांग्रेस ने सोमनाथ मंदिर और पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भाजपा के दावे को झूठ करार दिया है। पार्टी ने बुधवार को कहा कि नेहरू ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल की सहमति से तय उस नीति का पालन किया था कि धर्मस्थल के निर्माण में सरकारी पैसे का उपयोग नहीं होना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पार्टी नेता ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें आरोपों पर विस्तृत जवाब दिया गया है। कांग्रेस नेता ने कहा, भाजपा पंडित नेहरू और सोमनाथ को लेकर झूठ फैला रही है। रमेश ने पूछा कि राम मंदिर शिलान्यास में तत्कालीन राष्ट्रपति कोविंद और उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को क्या इसलिए नहीं आमंत्रित किया गया कि कि वे दलित और आदिवासी हैं?
राजस्थान से केरल तक सियासी कनेक्शन, सचिन पायलट बने कांग्रेस के रणनीतिकार
8 Jan, 2026 04:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस पार्टी ने आगामी केरल विधानसभा चुनावों को लेकर संगठनात्मक तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट को केरल विधानसभा चुनाव के लिए सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। पायलट के साथ पार्टी ने केजे जॉर्ज, कन्हैया कुमार और इमरान प्रतापगढ़ी को भी सीनियर ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी है। चारों नेताओं को टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति, प्रचार अभियान और समन्वय जैसे अहम कार्यों की निगरानी करनी होगी।
राजस्थान से इकलौते नेता को जिम्मेदारी
इस नियुक्ति को राजस्थान की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी द्वारा जारी सूची में राजस्थान से केवल सचिन पायलट को ही यह अहम जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले बिहार विधानसभा चुनावों में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीनियर ऑब्जर्वर बनाया गया था। अब दक्षिण भारत के अहम राज्य केरल में पायलट को यह दायित्व देकर कांग्रेस नेतृत्व ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान के युवा नेतृत्व पर भरोसा जता रही है।
टिकट वितरण से चुनाव मैनेजमेंट तक भूमिका
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, सीनियर ऑब्जर्वर के रूप में सचिन पायलट और अन्य नेताओं की भूमिका केवल प्रतीकात्मक नहीं होगी। वे केरल में उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय नेताओं के साथ संवाद, संगठनात्मक संतुलन, प्रचार कार्यक्रमों की निगरानी और चुनाव मैनेजमेंट की रणनीति पर सीधे नजर रखेंगे। खास तौर पर गुटबाजी से बचाव और जमीनी फीडबैक को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
दक्षिणी राज्यों में पायलट पर भरोसा
यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस ने दक्षिणी राज्यों के चुनावों में सचिन पायलट को बड़ी जिम्मेदारी दी हो। इससे पहले भी वे पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। पार्टी नेतृत्व मानता है कि पायलट का युवा चेहरा, संगठनात्मक समझ और संवाद क्षमता दक्षिणी राज्यों में कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
केरल, असम कांग्रेस के लिए अहम
कांग्रेस ने केरल, असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुद्दुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं। इन पांच में से तीन राज्यों—केरल, असम और पुद्दुचेरी—में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है। ऐसे में इन चुनावों को पार्टी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम मान रही है।केरल में परंपरागत रूप से वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) और कांग्रेस नीत यूडीएफ के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है। इस बार भी दोनों गठबंधनों के बीच कड़ा संघर्ष माना जा रहा है। वहीं असम में कांग्रेस का मुकाबला सत्ताधारी बीजेपी से है, जहां पार्टी अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है।
राजस्थान की राजनीति में भी मायने
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केरल जैसे अहम राज्य में सचिन पायलट को सीनियर ऑब्जर्वर बनाना राजस्थान की आंतरिक राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व पायलट को केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका को और मजबूत करना चाहता है। आगामी समय में राजस्थान में संगठनात्मक या राजनीतिक बदलावों के संदर्भ में भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस नेतृत्व का फोकस इन चुनावों में संगठन को धार देने, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे से जोड़ने पर है। सीनियर ऑब्जर्वर के तौर पर सचिन पायलट की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके अनुभव और सक्रिय भूमिका से केरल सहित अन्य राज्यों में कांग्रेस को चुनावी बढ़त मिल सकती है।कुल मिलाकर, केरल विधानसभा चुनावों में सीनियर ऑब्जर्वर के रूप में सचिन पायलट की नियुक्ति न सिर्फ दक्षिण भारत की चुनावी राजनीति के लिए अहम है, बल्कि राजस्थान से राष्ट्रीय राजनीति तक कांग्रेस के शक्ति संतुलन को भी दर्शाती है।
जेएनयू में मोदी-शाह विरोधी नारों पर गुस्साए CM फडणवीस, बोले-शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचलेंगे
8 Jan, 2026 09:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने मंगलवार को कहा कि जेएनयू (JNU) में पैदा हुईं शरजील इमाम की औलादों के इरादों को कुचल दिया जाएगा। यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में विरोध प्रदर्शन को लेकर हुए विवाद के मद्देनजर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़क उठे, जिसमें 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हो गए। खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार किए जाने के विरोध में जेएनयू में हुए प्रदर्शन ने विवाद को जन्म दिया, जहां कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे।
जेएनयू में नारों के संबंध में एक सवाल के जवाब में फडणवीस ने कहा- हम जेएनयू में पैदा शरजील इमाम की इन औलादों के इरादों को कुचल देंगे। हम ऐसे इरादों को कुचल देंगे।
जेएनयू में मोदी, शाह के खिलाफ विवादास्पद नारे लगाए गए, जांच शुरू
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने जोर देते हुए कहा कि “किसी भी गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” और सोमवार की घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जेएनयू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मंगलवार को किए गए सिलसिलेवार पोस्ट में कहा- विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें नफरत की प्रयोगशालाओं में परिवर्तित होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है।
उसने कहा- लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना में शामिल छात्रों को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें तत्काल निलंबन, निष्कासन और विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करना शामिल है।
विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच के आदेश भी दिए। वहीं केंद्रीय और दिल्ली के मंत्रियों सहित भाजपा नेताओं ने इस घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि नारे “शहरी नक्सलवादी मानसिकता को दर्शाते हैं जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है”।
DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार
8 Jan, 2026 09:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चैन्नई। तमिलनाडु (Tamil Nadu) में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (Chief Minister M. K. Stalin) की अगुवाई वाली सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मात्र 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस नेता अब अन्य विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल गांधी से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके से गठबंधन की संभानवाएं तलाशने का अनुरोध करने की तैयारी में हैं।
यह स्थिति सीएम स्टालिन के लिए टेंशन दे सकती है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे के हिसाब से 40 सीटों का टारगेट सेट किया था लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें ऑफर की हैं। अब ऐसी तनातनी के बाद कांग्रेस 38 सीटों तक पहुंच पाई है लेकिन स्टालिन की पार्टी टस से मस नहीं हो रही। लिहाजा, कांग्रेस ने दूसरे विकल्पों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से संभावित गठबंधन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने रखने की तैयारी में हैं।
सत्ता में हिस्सेदारी की भी मांग
कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है तो सरकार में हिस्सेदारी भी चाहती है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
TVK ने कांग्रेस को बताया ‘स्वाभाविक सहयोगी’
टैगोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने कांग्रेस को अपना ‘प्राकृतिक सहयोगी’ बताया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज़ हो गई है। TVK के प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच दोस्ताना संबंध हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना काफ़ी अधिक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस के अंदरूनी हितों के कारण बातचीत में देरी हो सकती है।
फैसला विजय करेंगे
इस बीच TVK नेता निर्मल कुमार ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख विजय ही करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता सभी से सलाह-मशविरा कर गठबंधन को लेकर घोषणा करेंगे। चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है।” कुल मिलाकर, डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर असमंजस, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग और TVK के साथ संभावित गठबंधन,इन सबने तमिलनाडु की राजनीति को चुनाव से पहले और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस किस रास्ते पर आगे बढ़ती है।
दिल्ली विधानसभा शीतकालीन सत्र: चौथे दिन तीन बिल, कैग रिपोर्ट सहित प्रदूषण पर चर्चा की तैयारी
8 Jan, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन गुरूवार को कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी. इसके साथ ही सदन में तीन महत्वपूर्ण बिल भी पेश किए जाएंगे. साथ ही 8 कैग रिपोर्ट भी सीएम रेखा गुप्ता द्वारा सदन में पेश की जाएंगी. विधानसभा सचिव रंजीत सिंह द्वारा जारी कार्य सूची के अनुसार चौथे दिन की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे से शुरू होगी, जिसमें प्रश्नकाल से लेकर के विधेयक प्रस्तुति तक कई अहम विषय शामिल होंगे. कार्य सूची के अनुसार बैठक की शुरुआत प्रश्नकाल से होगी, जिसमें सदस्यों द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्नों के उत्तर दिए जाएंगे. इसके बाद विशेष उल्लेख के तहत नियम 280 के अंतर्गत अध्यक्ष की अनुमति से सदस्यों द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मामलों को सदन के पटल पर उठाया जाएगा. फिर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों का प्रस्तुतीकरण और उस पर मतदान होगा. इसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा दिल्ली विनियोजन (संख्या-1) विधेयक, 2026 (2026 का विधेयक संख्या 04) पेश करेंगी. साथ ही यह भी प्रस्ताव करेंगी कि विधेयक (बिल) पर विचार किया जाए और इसे पारित किया जाए.
ये कैग रिपोर्ट होंगी पेश
फिर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा 31 मार्च 2021 को समाप्त हुए वर्ष के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार से संबंधित कैग रिपोर्ट पेश की जाएगी. साथ ही 31 मार्च 2020-2021 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए दिल्ली सरकारी संबंधी राजस्व, आर्थिक सामाजिक और सामान्य क्षेत्र उपकरणों पर कैग रिपोर्ट पेश की जाएगी. इसके साथ ही दिल्ली सरकार से संबंधित विशेष देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों के निष्पादन से संबंधित वर्ष 2023 की कैग रिपोर्ट भी पेश की जाएगी. 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष के लिए भी दिल्ली सरकार से सम्बंधित राज्य वित्त लेखा परीक्षा की कैग रिपोर्ट भी पेश की जाएगी. 31 मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्त वर्ष से संबंधित और 2024 की कैग रिपोर्ट भी पेश की जाएगी. 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष के लिए दिल्ली सरकार से संबंधित 2024 की कैग रिपोर्ट संख्या 5 पेश की जाएगी. वहीं, 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वर्ष के लिए जल बोर्ड से संबंधित कैग रिपोर्ट भी पेश की जाएगी. वहीं, शिक्षा मंत्री आशीष सूद इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली (आईआईआईटीडी) वित्त वर्ष 2021-22 और 2022- 23 की कैग रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे. इस तरह सरकार आज कुल आठ कैग रिपोर्ट पेश करने की तैयारी में रहेगी. इसके बाद विधायी कार्य मंत्री प्रवेश साहिब सिंह द्वारा छह जनवरी को विधानसभा में पेश किए गए न्यायालय शुल्क (संशोधन विधेयक) 2026 पर विचार करने और इसे पारित करने का प्रस्ताव रखेंगे.
मंत्री प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा द्वारा पेश किए जाएंगे ये दो बिल
दिल्ली जनविश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक 2026 को सदन के पटल पर रखेंगे. इसके साथ ही श्रम मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा दिल्ली दुकान और प्रतिष्ठा संशोधन विधेयक 2026 को भी सदन के पटल पर रखा जाएगा. इसके अलावा मंगलवार को सदन में पेश की गई कार्य मंत्रणा समिति और विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट की सहमति से सदन को अवगत कराया जाएगा. इसके अलावा विधायक अजय महावर और अभय वर्मा द्वारा लोक लेखा समिति की रिपोर्ट भी पेश की जाएगी. जबकि पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा पर्यावरण की वर्तमान स्थिति तथा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख कदमों के संबंध में अपना वक्तव्य भी देंगे. वहीं, शिक्षा मंत्री आशीष सूद राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के संबंध में वक्तव्य देंगे. विधायक अनिल शर्मा द्वारा अटल कैंटीन योजना के सफल के क्रियान्वयन पर दिल्ली सरकार को बधाई दी जाएगी. अंत में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर मंत्री रविंद्र सिंह इन्द्राज द्वारा चर्चा जारी रहेगी.
कुल मिलाकर गुरूवार को होने वाला विधानसभा सत्र नीतिगत फैसलों और जनहित के मुद्दों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कांग्रेस और AIMIM से कैसे हुआ गठबंधन? CM फडणवीस ने BJP नेताओं को लगाई फटकार
7 Jan, 2026 06:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) ने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस (Congress) और एआईएमआईएम (AIMIM) के साथ गठबंधन (Alliances) करने के आरोप में भाजपा (BJP) नेताओं की कड़ी आलोचना की और कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के गठबंधन पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की मंजूरी के बिना किया गया था और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन था।
फडणवीस ने कहा, “मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा। यदि किसी स्थानीय नेता ने ऐसा निर्णय अपनी मर्जी से लिया है, तो यह अनुशासन के विरुद्ध है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
बुधवार को खबरें आईं कि भाजपा ने महाराष्ट्र की कुछ नगर परिषदों में प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ चुनावोत्तर गठबंधन किया है। पिछले महीने हुए नगर निगम चुनावों के बाद, कुछ भाजपा नेताओं ने अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ के बैनर तले अंबरनाथ नगर परिषद का नेतृत्व गठित किया था।
कर्नाटक में बीजेपी का आरोप, महिला कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए
7 Jan, 2026 05:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हुबली। कर्नाटक के हुबली में महिला कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के दौरान हुए हंगामे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनकी कार्यकर्ता के साथ मारपीट की और गिरफ्तारी के दौरान उनके कपड़े फाड़ दिए। वहीं, पुलिस ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दावा किया है कि महिला ने खुद अपने कपड़े उतारे और पुलिसकर्मियों पर हमला किया।
हुबली के चालुक्य नगर में सर्वे को लेकर लोगों और अधिकारियों के बीच विवाद शुरू हुआ था। विवाद इतना बढ़ा कि गाली-गलौज और मारपीट की नौबत तक आ गई। इस मामले में पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित तीन अलग-अलग केस दर्ज किए। इसी कड़ी में 5 जनवरी को पुलिस जब आरोपी महिला को हिरासत में लेने पहुंची, तब ये हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें महिला कार्यकर्ता बस के अंदर महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों से घिरी दिख रही है। भाजपा का दावा है कि जब महिला ने गिरफ्तारी का विरोध किया, तब पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी कर मारपीट की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए।
हुबली के पुलिस कमिश्नर शशि कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने घटना का दूसरा पक्ष रखा। कमिश्नर के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान महिला ने जबरदस्त विरोध किया और एक सब-इंस्पेक्टर को दांत से काट लिया। साथ ही अन्य पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई की। पुलिस का कहना है कि महिला ने पुलिस वाहन में ले जाते समय विरोध जताने के लिए खुद अपने कपड़े उतार दिए थे। कमिश्नर ने बताया कि हमारे महिला स्टाफ ने ही लोगों की मदद से कपड़े मंगवाए और उन्हें पहनाए
जेएनयू की टुकड़े-टुकड़े गैंग को केंद्रीय मंत्री गिरिराज की चेतावनी..............ये मोदी का भारत है
7 Jan, 2026 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी का मामला गर्मा गया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, जेएनयू टुकड़े-टुकड़े गैंग, राहुल गांधी जैसी देश विरोधी मानसिकता वाले लोग, चाहे वह राजद हो, टीएमसी हो, या वामदल हो उनका कार्यालय बन गया है। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह भारत है, यह 21वीं सदी का नरेंद्र मोदी का भारत है। मैं टुकड़े-टुकड़े गैंग से कहना चाहता हूं कि जो लोग उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोगों का समर्थन करते हैं, जो पाकिस्तान की सोच रखते थे और चिकन नेक को अलग करने की बात करते, वे देशद्रोही हैं।
वहीं जेएनयू में नारेबाजी पर दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, बात सिर्फ जेएनयू की नहीं है, कुछ लोग हैं जो इस प्रकार के देश विरोधी, धर्म विरोधी नारे लगाते हैं। ये अफजल गुरु के लिए भी नारे लगाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, आतंकियों के समर्थन में, नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाते हैं लेकिन कुल मिलाकर इनके नारे बस नारे तक ही सीमित रह जाते हैं। जहां नक्सलवादी होते थे वहां नक्सलवादी खत्म हो गए हैं, जहां आतंकवादी होते थे वहां आतंकवादी खत्म हो गए हैं और जिन लोगों ने दिल्ली के खिलाफ साजिश रची उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है, तब यह बस उनकी छटपटाहट है।
वहीं भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने कहा, इस देश में कोई भी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर नहीं है। इस देश में न्याय व्यवस्था से ऊपर कुछ भी नहीं है और सरकार भी इसका पालन करने के लिए बाध्य है। इस तरह से उस न्याय का विरोध करना और सिर्फ राजनीति करना, इसका मतलब है कि आप देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं।
दिल्ली विधानसभा में क्यों लगे अरविंद केजरीवाल माफी मांगो के नारे
7 Jan, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली विधानसभा सत्र का दूसरा दिन मंगलवार को हंगामे के साथ शुरू हुआ। हंगामा इतना बढ़ गया कि स्पीकर को आधे घंटे के लिए सदन को स्थगित करना पड़ा है। बीजेपी नेताओं ने सदन के अंदर पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल माफी मांगो के नारे लगाए जिससे विधानसभा के अंदर माहौल गरमा गया। शिक्षा मंत्री आशीष सूद सहित तमाम विधायकों का कहना है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी आप ने कुत्तों की गिनती के लिए सरकारी टीचरों की नियुक्ति को लेकर झूठ फैलाया, जबकि ऐसा कोई सर्कुलर जारी नहीं हुआ है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री सूद ने दिल्ली विधानसभा शुरू होने से पहले ही कुत्तों की गिनती के लिए सरकारी टीचरों वाले मामले पर बात की थी। सूद ने सोमवार को पूर्व सीएम केजरीवाल को पत्र भी लिखा था। इसके बाद मंगलवार को विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही बीजेपी विधायक मुखर हो गए। सब सदन के बाहर बैनर लिए नारेबाजी जारी है। कुत्ते के मामले को लेकर झूठ फैलाने के लिए उनसे माफी मांगने को कहा जा रहा है।
शिक्षा मंत्री सूद ने कहा कि केजरीवाल ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को मैंने सर्कुलर पढ़कर बताया था। मैंने कहा था कि सर्कुलर में अगर कहीं भी शिक्षक के लिए कुत्तों की गिनती के बारे में लिखा हो तब मैं माफी मागूंगा। वह कोई साक्ष्य नहीं दिखा सके। उन्होंने इस मुद्दे को उठाना बंद कर दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर सरकार को बदनाम किया जा रहा है इसलिए मैंने उनसे कहा है कि लोगों के बीच विषय को लेकर भ्रम न फैलाएं। एक पार्टी के राष्ट्रीय मुखिया झूठ बोल रहे हैं।
असम में प्रिंयका गांधी वाड्रा को कमान देना..........सीएम सरमा के लिए एक बड़ी चुनौती मान रही कांग्रेस
7 Jan, 2026 08:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि असम में एक निष्क्रिय आंतरिक नेटवर्क, इस पार्टी संभावित स्लीपर सेल कहती है, वे अभी भी सक्रिय है। वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, जो कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए, अमस में कांग्रेस ढांचे के भीतर कुछ व्यक्तियों पर अपना प्रभाव बनाए हुए हैं। कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि प्रियंका गांधी वाड्रा की अधिक सक्रिय भागीदारी इस प्रभाव को बेअसर करने में मददगार साबित होगी।
बीते असम विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर्दे के पीछे काफी सक्रिय रहीं, हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आईं। तब कांग्रेस नेता भूपेश बघेल राज्य के वरिष्ठ पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत थे। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि प्रियंका का सशक्त नेतृत्व, रणनीतिक स्पष्टता और कार्यकर्ताओं से जुड़ने की क्षमता संगठन को नई ऊर्जा प्रदान करने और शर्मा के जाने के बाद बचे किसी भी अप्रत्यक्ष प्रभाव का मुकाबला करने में सहायक हो सकती है।
पार्टी का असम पर दुबारा ध्यान केंद्रित करना स्पष्ट राजनीतिक गणनाओं से प्रेरित है। पश्चिम बंगाल, जहाँ कांग्रेस का कोई मजबूत संगठनात्मक आधार नहीं है, या तमिलनाडु, जहाँ वह एक कनिष्ठ सहयोगी बनी हुई है, के विपरीत, पार्टी नेताओं के अनुसार, असम कांग्रेस को वापसी का मौका देता है। प्रियंका गांधी केरल में संगठनात्मक जिम्मेदारी भी नहीं ले सकतीं, क्योंकि आंतरिक नियमों के अनुसार नेता उन राज्यों में पद धारण नहीं कर सकते जहाँ से वे सांसद हैं, क्योंकि इससे निहित स्वार्थों की आशंका पैदा हो सकती है। इन सीमाओं को देखते हुए, असम प्रियंका गांधी के लिए कमान संभालने और राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने के लिए सबसे आशाजनक क्षेत्र के रूप में उभरा है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि प्रियंका की उपस्थिति से पार्टी को एक मजबूत छवि बनाने, लगातार सुर्खियों में बने रहने और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी। उनकी भागीदारी से असम में सत्ता पुनः प्राप्त करने के प्रति पार्टी की गंभीरता का संकेत मिलेगा और गठबंधन सहयोगियों को भी गति मिलेगी। पिछले विधानसभा चुनावों में, महाजोत गठबंधन को 43.68 प्रतिशत वोट मिले, जबकि एनडीए को 44.51 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। एनडीए ने 75 सीटें जीतीं, जबकि महाजोत को 50 सीटें मिलीं।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने बयानों और उठे विवादों पर दी सफाई, कहा- मैं कभी पार्टी लाइन से अलग नहीं हुआ
6 Jan, 2026 07:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने सोमवार को कहा कि वह कभी भी पार्टी लाइन से अलग नहीं हुए हैं। उनके हालिया बयानों और लेख ने पार्टी को डिफेंसिव मोड में ला दिया था। आगामी राज्य विधानसभा चुनाव (assembly elections) के लिए रणनीति तैयार के चलते केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Kerala Pradesh Congress Committee) द्वारा सुल्तान बाथरी में आयोजित ‘लक्ष्य 2026’ नेतृत्व शिविर में भाग लेने के बाद वह पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव में हार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ समेत कई मुद्दों पर बात की।
पार्टी लाइन पर क्या बोले
उन्होंने कहा, ‘मेरा सवाल यह है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी की विचारधारा का उल्लंघन किया है? मैंने विभिन्न विषयों पर अपनी राय व्यक्त की है, लेकिन अधिकतर मामलों में पार्टी और मैं एक ही रुख पर कायम रहे हैं।’ थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में मंत्रियों के सामने जो सवाल उठाए थे, उनकी एक स्पष्ट दिशा थी और पार्टी को उनसे परेशान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विवाद आमतौर पर तब उत्पन्न होते हैं जब मीडिया की खबरें पूरी सामग्री पढ़े बिना केवल सुर्खियों पर आधारित होती हैं। थरूर ने कहा, ‘जब मैं लोगों से पूछता हूं कि क्या उन्होंने वास्तव में मैंने जो लिखा है उसे पढ़ा है, तो ज्यादातर लोगों ने नहीं पढ़ा होता है। पूरा पाठ पढ़ने के बाद, उन्हें असली मुद्दा समझ में आता है।’ उन्होंने कहा कि वह 17 साल से पार्टी में हैं और अपने सहयोगियों के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘अभी किसी तरह की अचानक गलतफहमी की कोई जरूरत नहीं है।’
कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव का जिक्र
यह पूछे जाने पर कि क्या ये मुद्दे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के बाद शुरू हुए, थरूर ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करती है और अतीत में कई नेताओं ने आंतरिक चुनाव लड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने चुनाव लड़ा और हार गया। बात यहीं खत्म हो गई। मुझे इसमें कोई कहानी नजर नहीं आती। पार्टी के इतिहास में कई चुनाव हुए हैं, तथा कई में जीत और हार हुई है।’
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का बचाव करने वाली उनकी टिप्पणी पर थरूर ने कहा कि यह आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर शिष्टाचार का एक कार्य था। उन्होंने कहा, ‘हमारी संस्कृति हमें बड़ों का सम्मान करना सिखाती है, और मैंने वही किया।’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा के रूप में देखे जाने वाले बयानों को लेकर एक अन्य विवाद का जिक्र करते हुए, थरूर ने कहा कि उन्होंने केवल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कही गई बातों को पेश किया था। उन्होंने कहा, ‘मैंने लोगों से पूछा कि मैंने उनकी प्रशंसा कहां की है। अगर कोई पूरा पोस्ट पढ़ेगा तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उसमें ऐसा कुछ भी नहीं था।’
क्या विधानसभा चुनाव लड़ेंगे सांसद थरूर?
केरल विधानसभा चुनाव और उम्मीदवारों के चयन के संबंध में थरूर ने कहा कि पार्टी नेताओं से परामर्श किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस सांसद विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, उन्होंने कहा कि कुछ सांसद इच्छुक हैं, लेकिन यह निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करता है।
केरल सरकार पर सवाल
उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों के लिए बोलता और लिखता हूं जो भविष्य की तलाश में दूसरे राज्यों और देशों में पलायन करते हैं।’ थरूर ने कहा कि केरल को अधिक अवसर पैदा करने के लिए निवेश के द्वार खोलने चाहिए। उन्होंने कहा, ‘केरल का विकास तभी होगा जब रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।’ कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि सभी क्षेत्रों का अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।
थरूर ने कहा, ‘हमारी आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और हम पर भारी कर्ज है। कर्ज चुकाने में विकास कार्यों के लिए निर्धारित बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है।’ उन्होंने कहा कि पार्टी जनता के साथ एकजुट होकर खड़ी रहेगी और उन्हें विश्वास है कि यूडीएफ केरल में सत्ता में आएगा। कांग्रेस द्वारा 100 सीट जीतने का दावा किए जाने के बारे में थरूर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने यह दावा किया था और यह संभव है।
मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में थरूर ने कहा कि कांग्रेस में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘कई लोग योग्य हो सकते हैं, लेकिन हमारी पार्टी में अंतिम निर्णय विधायकों से परामर्श करने के बाद ही लिया जाता है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह केरल की राजनीति में सक्रिय रहेंगे, थरूर ने कहा कि संसदीय प्रतिबद्धताओं के बावजूद वह राज्य में सक्रिय रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘आपको याद रखना चाहिए कि 2021 में, कोविड-19 महामारी के दौरान भी, मैंने 56 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया था। मैं हमेशा से विधानसभा चुनाव में प्रचार करता आया हूं, तथा इस बार आप मुझे और भी अधिक सक्रिय देखेंगे।’ थरूर के बयानों और लेखों की राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेता कड़ी आलोचना करते रहे हैं।
‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का मुद्दा फिर गरमाया, भाजपा बोली-कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए
6 Jan, 2026 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को कहा कि 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम (Khalid and Sharjeel Imam) को जमानत देने से इनकार करने का उच्चतम न्यायालय का आदेश कांग्रेस के मुंह पर एक ‘‘करारा तमाचा’’ है। साथ ही पार्टी ने विपक्षी दल से ‘‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’’ का समर्थन करने के लिए माफी मांगने को कहा।
भाजपा ने खालिद और इमाम को भारत में विभाजनकारी ताकतों के ‘पोस्टर ब्वॉय’ बताते हुए दावा किया कि उन्हें बचाने के लिए कांग्रेस का पूरा तंत्र उन्हें ‘‘निर्दोष पीड़ित’’ के रूप में पेश कर रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में खालिद और इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया और कहा कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने इस मामले में हालांकि अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
इसने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से पता चलता है कि खालिद और इमाम 2020 के दिल्ली दंगों की ‘‘साजिश रचने, लामबंदी करने और रणनीतिक दिशा-निर्देश देने’’ में शामिल थे।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने उच्चतम न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘सत्यमेव जयते।’’
पूनावाला ने पूछा, ‘‘जब उच्चतम न्यायालय से इतना बड़ा और स्पष्ट फैसला आ चुका है, तो क्या कांग्रेस दिल्ली में मारे गए अंकित शर्मा, रतन लाल और दिलबर नेगी के परिवारों से माफी मांगेगी?’’ उन्होंने समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी से भी यह पूछा कि क्या वे दंगों में मारे गए हिंदुओं के परिवारों से माफी मांगेंगी।
पूनावाला ने आरोप लगाया कि दिल्ली दंगे ‘‘हिंदू विरोधी भावना के सबसे बड़े उद्योग, ‘एम’ फैक्टर और वोट बैंक फैक्टर’’ का एक उदाहरण थे। उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं।’’
पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को ‘‘अफजल से लेकर उमर और शरजील तक टुकड़े-टुकड़े गैंग’’ का समर्थन करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शीर्ष अदालत के फैसले को राहुल गांधी और कांग्रेस के परिवेशी तंत्र के चेहरे पर ‘‘करारा तमाचा’’ बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने ‘‘टुकड़े-टुकड़े गैंग के ‘पोस्टर ब्वॉय’ उमर खालिद और शरजील इमाम को निर्दोष पीड़ित’’ के रूप में पेश किया।
केदारनाथ मंदिर में नए नियम लागू, मोबाइल इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन
मनरेगा की ‘डबरी’ और ‘बिहान’ के सहयोग से सविता बनीं आत्मनिर्भर
दिलीप घोष बोले- बंगाल में खिलेगा कमल, BJP की जीत का भरोसा
लेमरू में दौड़ी जिंदगी की नई रफ्तार, संजीवनी 108 सेवा से ग्रामीणों को मिल रहा त्वरित उपचार
छत के नेट से टीम इंडिया की कैप तक का सफर
केदारनाथ धाम में उत्सव का माहौल, कल सुबह खुलेंगे कपाट
सुपर सकर मशीन द्वारा लगातार चौथे दिन तानसेन नगर में सीवर सफाई कार्य जारी
रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में सूरजपुर बना प्रदेश में प्रथम स्थान पर
पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी
