राजनीति
राहुल गांधी के दौरे का भोपाल में काउंटर, सीएम बोले- हमने कांग्रेस के कलंक को धोया
17 Jan, 2026 05:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल: मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग त्रासदियों को लेकर सियासत तेज हो गई है. इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी जहां भागीरथपुरा पहुंचकर पीड़ित परिवारों के साथ खड़े नजर आए, उसी समय भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूनियन कार्बाइड कारखाने का निरीक्षण कर कांग्रेस पर पलटवार किया. सीएम ने भोपाल गैस कांड को कांग्रेस का कलंक बताते हुए राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग कर डाली.
भोपाल गैस त्रासदी कांग्रेस का कलंक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में यूनियन कार्बाइड कारखाने का निरीक्षण करने के बाद कहा "मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के इतिहास में भोपाल गैस त्रासदी जैसी भीषण घटना कभी नहीं हुई. 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से निकली जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस ने भोपाल में मौत का तांडव मचाया, जो कांग्रेस शासनकाल का सबसे बड़ा कलंक है. सीएम ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि इतना खतरनाक जहर 25 वर्षों तक वहीं पड़ा रहा और कांग्रेस सरकारों ने इसे हटाने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की, जिससे यह इलाका डरावना और भुतहा बन गया."
हमने जिम्मेदारी निभाई, पीड़ितों के साथ सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कोर्ट और कोर्ट के बाहर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निष्पादन कराया. सरकार आज भी गैस त्रासदी में जान गंवाने वालों और बीमार पीड़ितों के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ी है. जीवन की कठिन परिस्थितियों में सरकार हर संभव सहायता और सहानुभूति के साथ पीड़ित परिवारों का साथ दे रही है.
जहर हटाकर दाग धोने का काम किया
सीएम डॉ. यादव ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने इस क्षेत्र को लावारिस छोड़ दिया और जहरीले कचरे के निष्पादन में लगातार टालमटोल करती रही. जनवरी 2025 में उनकी सरकार ने कोर्ट के मार्गदर्शन में यूनियन कार्बाइड के जहर का सुरक्षित निष्पादन कर उसे पूरी तरह राख किया. यह पूरी दुनिया के लिए संदेश है कि मध्य प्रदेश के वैज्ञानिक और प्रशासन खतरनाक रसायनों से बिना जनहानि के निपटने में सक्षम हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम कांग्रेस के कुशासन के कलंक को मिटाने और प्रदेश की प्रतिष्ठा बढ़ाने की दिशा में अहम है.
एंडरसन को भगाने का आरोप, राहुल से माफी की मांग
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने न केवल भोपाल के लोगों को मरने के लिए छोड़ा, बल्कि यूनियन कार्बाइड के मालिक वॉरेन एंडरसन को देश से भगाने में भी उसकी भूमिका रही. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस पूरे मामले में माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि यह त्रासदी उनकी दादी और पिता के शासनकाल में हुई. बाद में मनमोहन सिंह की सरकार ने भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
सीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों में रोजगार के नए अवसर तलाश रही है. भविष्य में यहां स्मारक निर्माण सहित पुनर्निर्माण के कार्य सभी पक्षों से सुझाव लेकर आगे बढ़ाए जाएंगे.
गैस पीड़ित लोगों से नहीं मिले सीएम
गैस पीड़ित संगठन से जुड़ी रचना ढींगरा ने बताया कि मुख्यमंत्री यूनियन कार्बाइड का दौरा करने के लिए आए हैं. इसीलिए गैस त्रासदी के पीड़ित लोग उनसे मिलने के लिए आए हैं. यहां गैस पीड़ित विधवा महिलाएं भी हैं जिनको एक हजार रुपये की पेंशन भी नहीं मिल रही है. फैक्ट्री के अंदर और बाहर आज भी हजारों क्विंटल जहरीला कचरा दबा पड़ा है. गैस पीड़ितों को रोजगार व अन्य कार्यों के लिए 188 करोड़ रुपये आज भी पड़ा हुआ है, लेकिन किसी भी पीड़ित को रोजगार नहीं मिल पाया. इसी को लेकर हम मुख्यमंत्री से मिलने आए हैं. हालांकि सीएम ने यूनियन कार्बाइड के निरीक्षण के दौरान किसी से बात नहीं की.
हार के बाद ठाकरे बंधुओं का संदेश: मराठी अस्मिता की लड़ाई जारी रहेगी
17 Jan, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अलग-अलग बयानों में साफ कर दिया है कि चुनावी हार के बावजूद मराठी पहचान, अधिकार और सम्मान की राजनीतिक लड़ाई थमी नहीं है।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव परिणामों के बाद जारी अपने संदेश में मराठी समाज, मराठी भाषा और महाराष्ट्र के विकास के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि चुनाव में अपेक्षित परिणाम न मिलने का अर्थ यह नहीं कि पार्टी या कार्यकर्ता हिम्मत हार जाएं। राज ठाकरे ने कहा कि यह चुनाव पैसों और सत्ता की ताकत के खिलाफ शिवशक्ति की लड़ाई थी, जिसमें मनसे कार्यकर्ताओं ने पूरी मजबूती से मुकाबला किया।
उन्होंने मनसे और शिवसेना के सभी निर्वाचित पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा। राज ठाकरे ने माना कि संगठन से कुछ कमियां भी रहीं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन्हीं अनुभवों से सीख लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
राज ठाकरे ने अपने बयान में दो टूक कहा कि उनका संघर्ष मराठी लोगों, मराठी भाषा, मराठी पहचान और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है। उन्होंने निर्वाचित पार्षदों से अपील की कि वे नगर निकायों में मराठी समाज के हितों की मजबूती से रक्षा करें और यदि मराठी लोगों के खिलाफ कोई अन्याय होता है तो उसका जवाब पूरी ताकत से दें। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में सत्ता में बैठे लोग और उनके समर्थक बार-बार मराठी समाज को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट रहना जरूरी है। उन्होंने संगठन को फिर से खड़ा करने और जमीनी स्तर पर काम तेज करने का आह्वान किया।
अपने संदेश के अंत में राज ठाकरे ने भावुक अपील करते हुए कहा कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन उनकी राजनीति और जीवन का हर पल मराठी के लिए समर्पित है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब निराश होने के बजाय फिर से जुटकर पार्टी को नई दिशा देनी होगी और मराठी समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाना होगा।
- लड़ाई अभी खत्म नहीं
उधर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भी बीएमसी चुनावों में हार के बाद पहली प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मराठी समाज को उसका हक, अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाता। पार्टी के बयान में संकेत दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में शिवसेना (यूबीटी) मराठी अस्मिता, स्थानीय अधिकारों और मुंबई-महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों को और आक्रामक तरीके से उठाएगी।
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में आडवाणी और जोशी नहीं कर सकेंगे मतदान
17 Jan, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के इतिहास में 20 जनवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बनेगा। 45 साल के नितिन नवीन का पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि इस चुनाव में एक चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के संस्थापक सदस्य लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी पहली बार होगा जब वह मतदान नहीं कर सकेंगे। दिसंबर 2025 से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे नितिन नवीन अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने जा रहे हैं।
बता दें बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन बीजेपी के दिग्गज नेता दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हैं। आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले नवीन को संगठन में गहरी पैठ और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में पार्टी की चुनावी जीत में बड़ी भूमिका के लिए जाना जाता है। 19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे।
1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद यह पहला मौका है जब इन दोनों दिग्गजों का नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं है। इसके पीछे कोई राजनीतिक नाराजगी नहीं, बल्कि तकनीकी कारण हैं।
पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय परिषद का सदस्य बनने के लिए संबंधित राज्य में संगठनात्मक चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश बीजेपी में चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में मंडल, जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव नहीं हो जाते वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का चयन नहीं हो सकता। इसी कारण दोनों नेताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।
बता दें इससे पहले लालकृष्ण आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य हुआ करते थे। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद वे दिल्ली से सदस्य बने थे। बीजेपी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के लक्ष्मण ने चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 19 जनवरी को दोपहर 2 से 4 बजे तक नामांकन दाखिल किया जाएगा। 19 जनवरी को ही शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और वापसी होगी। 20 जनवरी को यदि जरुरी हुआ तो मतदान होगा, अन्यथा निर्विरोध चुनाव की घोषणा की जाएगी। जेपी नड्डा का स्थान लेने वाले नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए संगठन को तैयार करना और आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन को सुधारना होगी। युवा नेतृत्व के जरिए बीजेपी अब अपनी अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
सियासी बयानबाज़ी तेज: संजय राउत ने डिप्टी सीएम शिंदे को बताया ‘जयचंद’
17 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई. बीएमसी (BMC) सहित महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के नतीजे अब साफ हो चुके हैं. यहां बीजेपी (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) (एकनाथ शिंदे) की महायुती ने राज्य की 29 में 23 नगर पालिकाओं में प्रचंड जीत हासिल की है. वहीं बीएमसी चुनाव में महायुति ने कुल 227 में से 118 सीटें अपने नाम कर लिए हैं. मुंबई महानगर निगम में भाजपा और शिवसेना की बढ़त ने पूरे देश का ध्यान खींचा है, जहां 28 साल से चली रही ठाकरे परिवार की धाक पर गहरा धक्का लगा. हालांकि शाम होते-होते चुनावी परिदृश्य पूरी तरह बदल गए. जहां पहले यह माना जा रहा था कि बीएमसी में बीजेपी के नेतृत्व में महायुति प्रचंड जीत हासिल कर लेगी, लेकिन अंतिम नतीजों में उसे बहुमत से केवल 4 सीटें ज्यादा मिली हैं. इसमें बीजेपी ने 89, जबकि शिवसेना ने 29 सीटें मिलीं.
मुंबई नगर निगम चुनाव में कई सीटों पर कांग्रेस ने शिंदे सेना को करारा झटका दिया है. यहां 24 सीटें जीतकर कांग्रेस चौथी बड़ी पार्टी बनी है. कहा तो ये भी जा रहा है कि अगर उद्धव ठाकरे ने भाई राज के साथ हाथ मिलाने की जगह कांग्रेस के साथ ही मिलकर बीएमसी चुनाव लड़ा होता तो नतीजे कुछ और होते. उद्धव की शिवसेना बीएमसी में 65 सीटें मिली हैं और वह बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना महज 6 सीटों पर सिमट गई. बीएमसी चुनाव में एआईएमआईएम ने भी 6 सीटें अपने नाम की है.
इस तरह मुंबई के मेयर पद के चुनाव में अब शिंदे सेना की भूमिका भी अहम हो गई है. खबर है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मेयर पद पर दावा ठोंक दिया है. वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि मुंबई का मेयर मराठी, हिंदू और महायुति से होगा. ऐसे में बीएमसी चुनाव के फाइनल नतीजे साफ होने के बाद अब सबकी नजरें इसी सवाल पर आ टिकी हैं कि मुंबई का मेयर कौन होगा.
श्रद्धा और भव्यता का संगम: प. बंगाल में महाकाल की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाने का एलान
17 Jan, 2026 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने सिलीगुड़ी (Siliguri) के माटिगाड़ा में मंदिर परिसर में भगवान शिव (Lord Shiva) के महाकाल अवतार की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बनाने की शुक्रवार को घोषणा की, जिसका शिलान्यास उन्होंने विभिन्न धार्मिक समुदायों के नेताओं की मौजूदगी में किया। इस अवसर पर बनर्जी ने कहा कि 216 फुट ऊंची इस संरचना में भगवान शिव की 108 फुट ऊंची कांस्य मूर्ति होगी। उन्होंने बताया कि ‘महाकाल महातीर्थ’ नामक यह परिसर 17.41 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा और लगभग ढाई साल में पूरा होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम जनता के लिए खुलने के बाद इसका संचालन महाकाल मंदिर न्यास करेगा। बनर्जी ने कहा, ‘‘हमने जमीन सौंप दी है और परिसर के निर्माण के लिए निविदा जारी कर दी है। यह परिसर दुनियाभर में भगवान शिव के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में से एक होगा। जमीन पर भराव और समतल करने का काम तुरंत शुरू किया जाएगा। इस परिसर में प्रतिदिन एक लाख तीर्थयात्रियों को संभालने की क्षमता होगी।’’
उन्होंने बताया कि यह मंदिर परिसर बंगाल के मैदानी इलाकों की आध्यात्मिक विरासत को इसकी पहाड़ियों से जोड़ेगा, क्योंकि दार्जिलिंग में पहले से ही महाकाल मंदिर मौजूद है। बनर्जी ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने उत्तर बंगाल में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सिलीगुड़ी में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसके लिए जमीन पहले ही चिह्नित कर ली है और निर्माण के लिए निर्धारित निजी पक्ष को यह भूखंड मुफ्त में सौंप दिया जाएगा।’’ बनर्जी ने इस मौके पर स्कूल भवन, लग्जरी बसें और चाय बागान श्रमिकों के बच्चों के लिए ‘क्रेच’ समेत कई सामाजिक सेवा परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया।
मुंबई की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव: BMC में महायुति का कब्जा, BJP बनाएगी मेयर
17 Jan, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के निकाय चुनाव (Local Body Elections.) में शुक्रवार को भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (Mahayuti Alliance) को बड़ी जीत मिली। बीएमसी में भी भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन ने मिलकर ठाकरे बंधुओं की शिवसेना यूबीटी और एमएनएस को हरा दिया। शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे तक के आंकड़े के अनुसार, भाजपा 88, शिवसेना 28, शिवसेना यूबीटी 65, एमएनएस 6, कांग्रेस 24 वार्डों में या तो जीत चुकी है या फिर बढ़त बनाए हुए है। बीएमसी में भाजपा का पहली बार मेयर बनने जा रहा है, जोकि भगवा दल के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पिछले तीन दशक से बीएमसी की कमान ठाकरे परिवार के पास ही रही है। ऐसे में अब इसमें बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भाजपा की इस जीत के पीछे 5 बड़ी वजहे हैं।
पीएम मोदी पर जनता का भरोसा
पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से भाजपा पीएम मोदी के नेतृत्व में विभिन्न चुनावों में जीत दर्ज करती आई है। लोकसभा में लगातार तीन बार से सत्ता में आ रही भाजपा पिछले साल हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी बंपर सीटों से जीती। एक दशक में विपक्ष को भाजपा ने बुरी तरह से उन राज्यों में भी पराजित किया है, जहां कुछ दशक पहले कोई सोच नहीं सकता था। मुंबई में मिली इस जीत के पीछे भी पीएम मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। जीत के बाद देवेंद्र फडणवीस ने भी इसका जिक्र किया और कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विकास के विजन के साथ भाजपा ने चुनाव लड़ा और जीत मिली। फिलहाल, विपक्ष के पास पीएम मोदी का तोड़ ढूंढ पाना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है।
शिवसेना में टूट
साल 2019 में शिवसेना और भाजपा की राह तब अलग हो गई, जब विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने ढाई साल के लिए सीएम पद की मांग कर दी। इसके बाद, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने साथ मिलकर सरकार बनाई और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। हालांकि, 2022 में शिवसेना टूट गई और एकनाथ शिंदे कई विधायकों और सांसदों को अपने साथ ले गए। भाजपा ने शिंदे को सीएम बना दिया। बाद में शिंदे की पार्टी को शिवसेना नाम से जाना गया और उद्धव ठाकरे को शिवसेना यूबीटी। इसके बाद से उद्धव ठाकरे की ताकत लगातार कमजोर होती चली गई। इस बीएमसी चुनाव में भी एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 28 वार्ड्स में जीत हासिल की और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के वोट काटे, जिसका सीधा लाभ भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को मिला।
मनसे के साथ आने पर उत्तर भारतीय शिवसेना यूबीटी से नाराज?
साल 2006 में अलग पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए उद्धव के साथ गठबंधन किया था। मुंबई में रहने वाले मराठी वोटर्स का मनसे को काफी सपोर्ट मिलता रहा है और इस चुनाव में भी शिवसेना और मनसे के गठबंधन को मराठी मतदाताओं के जमकर वोट पड़े। लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो उत्तर भारतीयों का समर्थन भाजपा को ज्यादा मिला। दरअसल, राज ठाकरे की मनसे उत्तर भारतीयों के खिलाफ लंबे समय से हिंसा करती आई है और यही वजह है कि इसका फायदा भाजपा गठबंधन को सीधे तौर पर मिला। मनसे और शिवसेना के गठबंधन ने कुछ खास कमाल नहीं दिखाया और महायुति के सामने हार गया।
भाजपा ने लगा दी पूरी ताकत, खुद फडणवीस ने संभाली कमान
बीएमसी चुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी कमान संभाली और जमकर प्रचार किया। भाजपा के तमाम महाराष्ट्र के मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया और जनता का समर्थन हासिल किया। उद्धव और राज ठाकरे ने भी चुनावी रैलियां कीं और भीड़ भी इकट्ठी हुई, लेकिन वोटों में यह तब्दील नहीं हो सकी। शिवसेना यूबीटी और मनसे के मुकाबले भाजपा और शिवसेना का चुनाव प्रचार ज्यादा मजबूत रहा और यही नतीजों में भी दिखाई दिया।
उद्धव के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी का भाजपा को फायदा
देश के सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी पर पिछले लगभग तीन दशकों से ठाकरे परिवार का कब्जा रहा है। पहली बार भाजपा को जीत मिली है। शिवसेना (अविभाजति) को पिछले बार तक भाजपा से ज्यादा वार्ड पर जीत मिली, जिससे उसका लंबे समय तक मेयर रहा। लंबे समय तक राज करने की वजह से शिवसेना यूबीटी के खिलाफ एक एंटी इनकमबेंसी भी बनी और जिसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिला। साथ ही, एकनाथ शिंदे की शिवसेना का साथ होने के कारण भाजपा का पलड़ा भारी रहा।
करारी हार के बाद बढ़ा सियासी दबाव: क्या देवेंद्र फडणवीस सरकार छोड़ेंगे अजीत पवार?
17 Jan, 2026 08:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई । महाराष्ट्र (Maharashtra) के सभी नगर निकाय चुनावों (municipal elections) के परिणाम आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी ने पुणे (PMC) और पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) में अपना दबदबा न केवल बरकरार रखा है, बल्कि उसे और मजबूत किया है। अजीत पवार (Ajit Pawar) और शरद पवार (Sharad Pawar) की एकजुटता का दांव भाजपा (BJP) के विजय रथ को रोकने में नाकाम रहा। भाजपा ने दोनों नगर निगमों में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है।
पुणे में भाजपा को 165 में से 110 सीटें मिली हैं। वहीं, एनसीपी और शरद पवार कैंप को मात्र 2 सीटें मिली हैं। पिंपरी-चिंचवाड़ (PCMC) की 128 सीटों में से भाजपा को 81 और अजीत गुट को सिर्फ 36 सीटें मिली हैं। भाजपा ने पहली बार इन दोनों नगर निगमों में अपने दम पर सत्ता हासिल की है। इससे पहले वह गठबंधन का हिस्सा रही थी।
पवार फैमिली का भविष्य क्या है?
अजीत पवार और शरद पवार के फिर से साथ आने के बावजूद मिली इस करारी हार ने दोनों गुटों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। महायुति सरकार में रहते हुए भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ना और भ्रष्टाचार के आरोप लगाना उनके लिए उल्टा पड़ गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने यहां तक कह दिया कि पार्टी को अजीत पवार को साथ लेने पर पछतावा है। अब अजीत पवार को या तो भाजपा के सामने झुककर रहना होगा या फिर पूरी तरह अपने चाचा के साथ विलय की संभावना तलाशनी होगी।
शरद पवार की पार्टी 24 नगर निकायों में अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। पुणे जैसे अपने गढ़ में मात्र 2 सीटें जीतना पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के चरमराने का संकेत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दोनों NCP गुटों का स्थायी रूप से मिल जाना ही उनके बचने का एकमात्र रास्ता हो सकता है। कार्यकर्ताओं में भी अब स्थिरता की मांग बढ़ रही है।
भाजपा की जीत के 4 कारण
1. परिवारवाद पर प्रहार: भाजपा ने नीति बनाई कि किसी भी मौजूदा विधायक या सांसद के रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया जाएगा। इससे मुरलीधर मोहोल और मेधा कुलकर्णी जैसे बड़े नेताओं के रिश्तेदारों को भी टिकट नहीं मिला, जिससे आम कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया।
2. नए चेहरों को मौका: पुणे में भाजपा ने अपने 97 में से 30 मौजूदा पार्षदों के टिकट काटकर नए और जमीनी कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा।
3. विपक्ष के मजबूत चेहरों को तोड़ा: चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बापू पठारे के परिवार (NCP-SP) और अभिजीत शिवरकर (कांग्रेस) जैसे प्रभावी स्थानीय नेताओं को अपने पाले में कर लिया।
4. इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: मेट्रो विस्तार, रिंग रोड और कोस्टल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने शहरी मतदाताओं को भाजपा की ओर आकर्षित किया।
इस जीत के साथ देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। अब सबकी नजरें जिला परिषद चुनावों पर हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अजीत पवार और शरद पवार का गठबंधन जारी रहता है या हार के बाद वे फिर से अलग रास्ते चुनते हैं।
PM मोदी करेंगे दो अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने का कार्य, कल होगा शुभारंभ
16 Jan, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) शनिवार को दो दिन के लिए असम दौरे (Assam Tour) पर रहेंगे। इस दौरान वे दो अमृत भारत ट्रेनों (Amrit Bharat Trains) को हरी झंडी (Green Flag) दिखाएंगे। वहींं, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर (Kaziranga Elevated Corridor) की आधारशिला रखेंगे। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। पूर्वोत्तर राज्य में, जहां 2026 के पहले छमाही में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं, उनकी यह यात्रा एक महीने से भी कम समय में दूसरी यात्रा होगी।
एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि प्रधानमंत्री 17 जनवरी की शाम को असम पहुंचेगें। इसके बाद वे शहर के अर्जुन भोगेश्वर बरुआ स्पोर्ट्स स्टेडियम में 10,000 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बोडो लोक नृत्य ‘बागुरुम्बा’ को देखने वाले हैं। उन्होंने कहा कि मोदी अगले दिन कालीबोर के लिए रवाना होंगे, जहां वे 6,957 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला रखेंगे।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा डिब्रूगढ़-गोमती नगर (लखनऊ) और कामाख्या-रोहतक नामक दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने और कालियाबोर में एक जनसभा को संबोधित करने की उम्मीद है।
बीजेपी और चुनाव आयोग के कर्मचारियों के बीच बैठक क्यों? अभी आचार संहिता लागू है
16 Jan, 2026 05:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के बयान ने मुंबई के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। राउत ने बीएमसी चुनावों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव परिणामों के बीच जब शुरुआती रुझानों में बीजेपी समर्थित महायुति को बड़ी बढ़त मिलती दिखी, तब राउत ने मीडिया से बात करते हुए वोटिंग पैटर्न और वोटर लिस्ट को लेकर सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राउत ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे डरें नहीं, क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति ने बीएमसी चुनावों में बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहर में जो वोटिंग पैटर्न चल रहा है, वह एक गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के नाम, जिन्होंने विधानसभा चुनावों में भी वोट दिया था, उन इलाकों से गायब हैं जहां शिवसेना (यूबीटी), मनसे या कांग्रेस हैं। ईवीएम मशीन ठीक से काम नहीं करती...चुनाव आयोग हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। कल, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और चुनाव आयोग के कर्मचारियों के बीच एक बैठक हुई, क्यों? आचार संहिता अभी भी लागू है।
उन्होंने कहा कि वोटिंग प्रतिशत आने से पहले ही एग्जिट पोल आ गए...बीजेपी ने अपनी जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया...हमने लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे डरें नहीं...। मतगणना से मिल रहे शुरुआती रुझानों के मुताबिबक बीजेपी-शिवसेना महायुति गठबंधन लगभग 52 वार्डों में आगे चल रहा है, यह शुरुआती डेटा पोस्टल बैलेट की गिनती से मिल रहा है। एसईसी और बीएमसी के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार है। अब तक गिने गए पोस्टल बैलेट के मुताबिक बीजेपी 35 सीटों पर, शिवसेना 17 सीटों पर आगे है।
वहीं ठाकरे भाइयों के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) 22 सीटों पर आगे बताई जा रही है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अब तक 8 सीटों पर आगे है। शुरुआती गिनती में कांग्रेस 4 सीटों पर आगे थी। राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने वोटिंग खत्म होने के बाद कहा था कि 29 नगर निगमों में लगभग 50 प्रतिशत वोटिंग हुई। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मुंबई नगर निगम चुनावों में 52.94 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो 2017 के पिछले चुनावों में 55.53 प्रतिशत से कम है।
बता दें बीएमसी जिसका सालाना बजट 74,400 करोड़ रुपए से ज्यादा है, उसमें चार साल की देरी के बाद हो रहे चुनावों में 227 सीटों के लिए 1,700 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। मुंबई को छोड़कर, बाकी शहरी निकायों में मल्टी-मेंबर वार्ड हैं। ये 2022 में शिवसेना में फूट के बाद पहले बीएमसी चुनाव थे, जब अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पार्टी के ज्यादातर विधायकों के साथ अलग हो गए और बीजेपी के साथ गठबंधन करके मुख्यमंत्री बने थे।
20 जनवरी को भाजपा को मिलेगा नया अध्यक्ष, चुनाव की अधिसूचना जारी
16 Jan, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 20 जनवरी (January 20) को नया अध्यक्ष (president) मिल सकता है। पार्टी ने आज शुक्रवार को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नोटिफिकेशन के अनुसार 16 जनवरी को निर्वाचक मंडल मतदाताओं की सूची प्रकाशित की जाएगी। 19 जनवरी को अध्यक्ष पद हेतु नामांकन दाखिल किए जाएंगे, और यदि आवश्यक हुआ तो मंगलवार 20 जनवरी को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराए जाएंगे।
औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को
हालांकि, संभावना इसी बात की ज्यादा है कि वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन इकलौते उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस तरह 19 जनवरी को ही वे पार्टी के अगले अध्यक्ष बन जाएंगे। हालांकि, इसकी औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को की जा सकती है। नितिन नवीन के प्रस्तावक के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और वर्तमान पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा प्रस्तावक हो सकते हैं।
क्या देश की राजनीतिक कमान युवाओं के हाथों में?
नितिन नबीन को पार्टी का अध्यक्ष बनाकर भारतीय जनता पार्टी एक नए युग की राजनीति की शुरुआत करना चाहती है। पहले उसने 75 वर्ष से ऊपर आयु के नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में डालकर भारतीय राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत की थी जिसमें यह तय हो गया था कि नेता भी एक उम्र के बाद राजनीति से ‘रिटायर’ होंगे और वे देश की राजनीतिक कमान युवाओं के हाथों में सौंपेंगे। बेहद सामान्य कार्यकर्ता और विधायक को पार्टी का अध्यक्ष बनाकर भाजपा अपनी युवा कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह भी भी पार्टी के सर्वोच्च पद पर पहुंच सकते हैं।
भाजपा में 45 वर्ष के नितिन नबीन के नेतृत्व से क्या संकेत?
भारतीय जनता पार्टी के इस कदम से देश की दूसरे राजनीतिक दलों पर भी एक नैतिक दबाव बनेगा। कई राजनीतिक दलों में पारिवारिक परंपरा से अध्यक्ष बनते आ रहे हैं। कई राजनीतिक दलों के अध्यक्षों की उम्र 70 से 80 वर्ष तक हो चुकी है, लेकिन भाजपा 45 वर्ष के नितिन नबीन को पार्टी का अध्यक्ष बनाकर यही संकेत देना चाहती है कि युवाओं के देश भारत की कमान भी युवाओं के हाथों में ही होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, स्याही विवाद में जनता को भ्रमित करने का आरोप
16 Jan, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। एक तरफ महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीएमसी (BMC) समेत 29 निगमों को लेकर चल रही मतगणना (Voting) के शुरुआती रुझानों में भाजपा (BJP) को बड़ी बढ़त मिलती हुई नजर आ रही है। वहीं दूसरी ओर अब लोकसभा (Lok Sabha) में विपक्ष के नेता और कांग्रेस (Congress) सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने चुनाव आयोग (Election Commission) पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जनता को गुमराह कर रहा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में कुछ अखबारों का स्क्रीनशॉट साझा किया। इसमें गुरुवार को नगर निगम चुनाव के मतदान के दौरान वोट डालने के बाद उंगली पर लगाई जा रही स्याही मिटाने के मामले को उठाया। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र में भरोसे की गिरावट बताया। साथ ही कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जनता को भ्रमित करना हमारे लोकतंत्र में भरोसे की कमी का कारण है। उन्होंने अंत में जोर देते हुए रहा कि वोट चोरी एक देश विरोधी काम है।
शुरुआती रुझानों में BJP+ मजबूत, 121 सीटों पर बनाई बढ़त
16 Jan, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। बीएमसी समेत महाराष्ट्र के 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को संपन्न हुए और नतीजे आज यानी 16 को घोषित किए जा रहे हैं, जिसके लिए रुझान सामने आने लगे हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा बीएमसी समेत कई नगरपालिकाओं में आगे चल रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे भाजपा मुख्यालय का दौरा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज दोपहर 3:30 बजे भाजपा मुख्यालय का दौरा करेंगे। यह दौरा बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए किया जा रहा है।
शुरुआती नतीजों में भाजपा के दो और जीत
मुंबई में बीएमसी चुनाव 2026 के शुरुआती नतीजे सामने आए हैं। वार्ड नंबर 10 से भाजपा के जितेन्द्र पटेल को विजेता घोषित किया गया। वार्ड नंबर 3 से भाजपा नेता प्रवीन डरेकर के भाई, प्रकाश डरेकर ने जीत हासिल की। बीएमसी में कुल 227 सीटों के लिए मतगणना जारी है और बाकी वार्डों के नतीजे आने में अभी समय लगेगा।
शिंदे गुट की यामिनी जाधव ने वॉर्ड 209 से जीत दर्ज की
मुंबई में जारी मतगणना के बीच पूर्व विधायक यामिनी जाधव ने बीएमसी के वॉर्ड नंबर 209 से जीत हासिल की है। वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की उम्मीदवार थीं और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया। इस जीत से मुंबई नगर निगम में शिंदे गुट की शिवसेना की स्थिति मजबूत हुई है, खासकर दक्षिण मुंबई के अहम इलाकों में। मतगणना जारी है और हर वॉर्ड के नतीजे धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही बीएमसी पर नियंत्रण की लड़ाई और तेज हो गई है।
छत्रपति संभाजीनगर में भी भाजपा को बढ़त
छत्रपति संभाजीनगर की 115 सीटें पर हुए मतदान के बाद आज सामने आए रुझानों में भाजपा+ 41 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। शिवसेना (यूबीटी)+ 10, कांग्रेस+ 3, एनसीपी+ 2 और अन्य 14 सीटों पर आगे चल रहे हैं।
नासिक में बराबरी की टक्कर
हालांकि नासिक में मुकाबला कुछ हद तक बराबरी का दिख रहा है। भाजपा+ 12, शिवसेना (यूबीटी)+ 9, एनसीपी+ 11 और अन्य 4 सीटों पर आगे हैं।
नागपुर में भाजपा को मजबूत बढ़त
अब तक के रुझानों में नागपुर में भी भाजपा का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। यहां भाजपा गठबंधन 106 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस+ 29 सीटों, शिवसेना (यूबीटी)+ 1, एनसीपी+ 2 और अन्य 5 सीटों पर आगे हैं।
ठाणे में किसका बोल बाला?
ठाणे में भाजपा गठबंधन 29 सीटों पर आगे है। शिवसेना (यूबीटी)+ 5, एनसीपी+ 4 और अन्य 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।
पुणे की 65 सीटों पर भाजपा को बढ़त
पुणे में भाजपा गठबंधन 92 सीटों पर आगे है। कांग्रेस+ 4 और एनसीपी+ 8 सीटों पर आगे हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी)+ का अब तक खाता नहीं खुला है।
मुंबई से नागपुर तक भाजपा गठबंधन की मजबूत बढ़त
महाराष्ट्र की प्रमुख महानगरपालिकाओं में चुनावी रुझान सामने आ चुके हैं। इन शुरुआती आंकड़ों में भाजपा और उसके सहयोगी दल (भाजपा+) कई शहरों में साफ बढ़त बनाए हुए हैं।मुंबई महानगरपालिका में भाजपा+ 121 सीटों पर आगे चल रही है। शिवसेना (यूबीटी)+ 67 सीटों पर, कांग्रेस+ 10, एनसीपी+ 2 और अन्य 24 सीटों पर आगे हैं।
इन शहरों में कौन आगे? कौन पीछे?
मुंबई: भाजपा आगे
पुणे: भाजपा आगे
कल्याण-डोंबिवली: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
ठाणे: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
नवी मुंबई: भाजपा आगे
मीरा-भायंदर: भाजपा आगे
उल्हासनगर: भाजपा आगे
वसई-विरार: भाजपा आगे
भिवंडी: कांग्रेस आगे
पनवेल: भाजपा आगे
नागपुर: भाजपा आगे
पिंपरी-चिंचवड़: भाजपा आगे
नासिक: भाजपा आगे
छत्रपति संभाजी नगर: भाजपा आगे
कोल्हापुर: कांग्रेस आगे
सांगली-मिरज-कुपवाड़: भाजपा आगे
सोलापुर: भाजपा आगे
मालेगांव: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
अहिल्यानगर: एनसीपी (अजित पवार गुट) आगे
जलगांव: भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना आगे
धुले: भाजपा आगे
इचलकरंजी: भाजपा आगे
नांदेड़: भाजपा आगे
परभणी: मतगणना जारी
जालना: भाजपा आगे
लातूर: कांग्रेस आगे
अमरावती: भाजपा आगे, कांग्रेस से कड़ा मुकाबला
अकोला: भाजपा आगे
चंद्रपुर: कांग्रेस आगे
BMC रुझान आते ही सियासत गरमाई, संजय राउत ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल
16 Jan, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव के वोटों कि गिनती अभी पूरी नहीं हुई है. इससे पहले ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. मुंबई में शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने चुनाव आयोग पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने प्रेसवार्ता कर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. संजय राउत बोले कि मतदाता सूची से हजारों लोगों के नाम गायब थे. जहां पर शिवसेना मजबूत स्थिति में थी, वहां से हजारों लोगों के नाम गायब कर दिए गए. महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा, “शिवसेना (यूबीटी), एमएनएस और कांग्रेस के समर्थन वाले क्षेत्रों से हजारों मतदाताओं के नाम गायब थे। कई वार्डों में ईवीएम में खराबी आई और शिकायतों को नजरअंदाज किया गया। आचार संहिता के दौरान नगर निगम अधिकारियों और भाजपा नेताओं के बीच हुई बैठकें लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक हैं।”
वोट कहीं डालें बीजेपी को जा रहा: संजय राउत
संजय राउत ने दावा किया कि कई जगहों पर आम जनता किसी को वोट दे रही थी, लेकिन ईवीएम में वोट सिर्फ कमल निशान पर ही दर्ज हो रहा था. इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग पर सवाल करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान खुलेआम पैसा बांटा गया और सत्ता के दबाव में मतदान को प्रभावित किया गया, जो लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है. BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए 19 जनवरी को नितिन नबीन दाखिल करेंगे नामांकन, PM मोदी और शाह बनेंगे प्रस्तावक इसके अलावा संजय राउत ने वाराणसी में हिंदू देवी-देवताओं की कुछ प्राचीन मूर्तियों को कथित तौर पर तोड़े जाने के मुद्दे पर कहा, “अहिल्याबाई होलकर की विरासत महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है. जीर्णोद्धार के दौरान उनकी प्रतिमा और ऐतिहासिक संरचनाओं को हटाना दुखद है और महाराष्ट्र नेतृत्व को इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।”
दिग्विजय सिंह के राज्यसभा सीट छोड़ने पर कांग्रेस विधायक का बयान, कहा- इनको इग्नोर करके काम नहीं चलेगा
16 Jan, 2026 10:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दतिया । कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने राज्यसभा सीट (Rajya Sabha seat) छोड़ने का ऐलान किया है। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। ऐसे में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Congress MLA Rajendra Bharti) का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा- दिग्विजय सिंह ऐसे नेता हैं जिन्हें इग्नोर करके किसी का काम नहीं चल सकता।
ऐसे नेताओं की कांग्रेस को जरूरत है
उन्होंने जोर देते हुए कहा- दिग्विजय सिंह जितने जीनियस और मेहनती हैं, वैसे नेताओं की कांग्रेस को और जरूरत है। उन्हें जनता और पार्टी के लिए समर्पित बताते हुए कहा- उनकी खासियत यही है कि वे लगातार स्वीकार्य और प्रिंसिपल्ड बने हुए हैं। आगे कहा- दिग्विजय सिंह जी कांग्रेस पार्टी के लिए, मध्य प्रदेश के लिए, जनता के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं। उन्हें किसी भी तरह से इग्नोर करके काम नहीं चल सकता है। जिस तरह से वो मेहनती हैं, कांग्रेस के अंदर ऐसे और भी नेताओं की जरूरत है।
हर बात हर किसी के समझने की नहीं होती
विधायक ने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह राजनीति में अपने बयान और फैसलों को लेकर पूर्ण रहस्य रखते हैं और हर बात हर किसी के समझने की नहीं होती। राजेंद्र भारती ने दिग्विजय सिंह की 10 साल तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाली घोषणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह ने खुद कहा था कि वे 10 साल तक कोई पद नहीं लेंगे और उन्होंने इसे निभाया भी..विधायक ने कहा वह बात के पक्के हैं और ऐसे नेताओं की पार्टी को सख्त ज़रूरत है।
आपको बताते चलें कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जबसे राज्यसभा सीट छोड़ने का ऐलान किया है, तबसे इस बात की चर्चाएं तेज हो गई हैं कि नया दावेदार कौन होगा। ऐसे में जब अगला कौन, उनसे पूछा गया तो बात को गोल मोल कर दिया। दिग्विजय सिंह 2 बार से राज्यसभा सांसद हैं। कांग्रेस के विधायकों की गिनती को देखते हुए उनका तीसरी बार सदन में जाना लगभग तय था, लेकिन उन्होंने अपने ना जाने का ऐलान किया है।
VB-G RAM G पर कांग्रेस छेड़ने जा रही बड़ी लड़ाई; कहा-“ग्रामीण भारत के साथ बड़ा अन्याय”
16 Jan, 2026 09:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदलकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 कर दिया गया है। देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया है। अब कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने MGNREGA योजना को खत्म करने को संवैधानिक और कानूनी रूप से चुनौती देने का फैसला किया है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाया जाएगा।
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार (15 जनवरी) को दो टूक कहा कि राज्य सरकार MGNREGA योजना को खत्म करने को संवैधानिक और कानूनी रूप से चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर 22 जनवरी से राज्य विधानसभा का संयुक्त सत्र बुलाया गया है, जिसमें मनरेगा को हटाकर लागू किए गए नए कानून VB-G RAM G Act, 2025 पर विशेष चर्चा होगी।
“ग्रामीण भारत के साथ बड़ा अन्याय”
प्रियंक खड़गे ने कहा, “मनरेगा को खत्म करना ग्रामीण इलाकों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। हमने दो दिन का विशेष सत्र इसी मुद्दे पर बुलाया है। हमने जनता के सामने साफ किया है कि नए कानून और मनरेगा में क्या फर्क है और इसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। हम इस फैसले को संविधान, कानून और जनता—तीनों के सामने चुनौती देंगे।”
केंद्र के फैसले पर कांग्रेस का तीखा हमला
इससे पहले कर्नाटक सरकार के मंत्री एच.के. पाटिल ने भी केंद्र के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘तानाशाही भरा और क्रूर निर्णय बताया था। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण लोगों को काम का अधिकार दिया था, जिसे अब छीन लिया गया है। पाटिल ने कहा, “मनरेगा ग्रामीण मज़दूरों और कृषि श्रमिकों के लिए जीवनरेखा थी। केंद्र सरकार ने यह अधिकार उनसे छीन लिया है।”
देशभर में कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ’ आंदोलन
मनरेगा को हटाने के विरोध में कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ’ नाम से तीन चरणों वाला राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का एलान किया है। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर रोजगार गारंटी योजना को केंद्रीकृत करने और मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति ने “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम से एक व्यवस्थित अभियान को मंजूरी दी है।
आंदोलन का कार्यक्रम:
उन्होंने कहा, “पहला चरण 8 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालयों में पूरे दिन की तैयारी बैठक के साथ शुरू होगा।” वेणुगोपाल ने आगे कहा, “10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस होंगी, जिसके बाद 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों पर महात्मा गांधी और बीआर अंबेडकर की मूर्तियों के पास एक दिन का उपवास रखा जाएगा।” पार्टी के अनुसार, अभियान का दूसरा चरण 12 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगा। वेणुगोपाल ने कहा, “सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर पर चौपाल आयोजित की जाएंगी, और कांग्रेस अध्यक्ष का एक पत्र पहुंचाया जाएगा।”
मनरेगा पर सियासत गरम
उन्होंने कहा कि विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पैम्फलेट बांटने की भी योजना है। उन्होंने कहा, “30 जनवरी को शहीद दिवस पर, पार्टी मनरेगा मजदूरों के साथ वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना देगी।” वेणुगोपाल ने कहा, “तीसरा चरण 31 जनवरी को जिला स्तर पर डीसी और डीएम कार्यालयों में मनरेगा बचाओ धरने के साथ शुरू होगा और 6 फरवरी तक चलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी तक विधानसभा भवनों का राज्य स्तरीय घेराव किया जाएगा और 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच देश भर में चार आंचलिक AICC रैलियां होंगी।” यानी मनरेगा को लेकर अब केंद्र और कांग्रेस शासित राज्यों के बीच टकराव तेज़ हो गया है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक योजना की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकारों की है।
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