राजनीति
थाणे चुनाव नतीजेः कुछ ही देर में शुरू होगी वोटो की गिनती… सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
16 Jan, 2026 08:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ठाणे। ठाणे महानगरपालिका (Thane Municipal Corporation) के लिए मतदान (Voting) 15 जनवरी को संपन्न हुआ था और वोटों की गिनती (Vote Counting) आज, 16 जनवरी को सुबह 10 बजे से शुरू होगी। ठाणे महानगरपालिका चुनाव के नतीजे न केवल ठाणे शहर, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक लिटमस टेस्ट साबित होने वाले हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ‘होम ग्राउंड’ माने जाने वाले ठाणे में इस बार साख की लड़ाई है। शिवसेना में हुई बड़ी बगावत के बाद यह पहला मौका है जब शिंदे गुट और उद्धव गुट (UBT) निकाय चुनाव में आमने-सामने हैं। वहीं, भाजपा अपने दम पर बहुमत पाने और एनसीपी (शरद पवार गुट) मुंब्रा-कलवा बेल्ट में अपना दबदबा कायम रखने के लिए संघर्षरत है। सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू होगी।
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला ‘महायुति’ (भाजपा और शिवसेना-शिंदे गुट) और ‘महाविकास अघाड़ी’ (शिवसेना-UBT, एनसीपी-SP और कांग्रेस) के बीच है। हालांकि, 2026 के इन चुनावों में एक दिलचस्प मोड़ राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को लेकर आया है। इस बार राज और उद्धव ठाकरे के बीच गठबंधन हुआ है, जिसका उद्देश्य मराठी वोटों को बिखरने से रोकना और भाजपा-शिंदे गठबंधन को कड़ी टक्कर देना है।
ठाणे महानगरपालिका में कुल 131 नगरसेवक पदों (सीटों) के लिए चुनाव हुआ है। शहर को 33 प्रभागों (Wards) में विभाजित किया गया है, जहां पैनल सिस्टम के तहत मतदान हुआ। इस बार लगभग 16 लाख पंजीकृत मतदाताओं ने उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला किया है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, 15 जनवरी को हुए मतदान में मतदाताओं ने उत्साह दिखाया था। बहुमत के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को 66 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करना होगा।
यह चुनाव मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए ‘साख की लड़ाई’ है, क्योंकि ठाणे उनका गृह क्षेत्र और राजनीतिक गढ़ माना जाता है। शिवसेना में 2022 में हुई बगावत के बाद यह पहला महानगरपालिका चुनाव है, जिससे यह तय होगा कि ठाणे की जनता असली शिवसेना किसे मानती है- शिंदे गुट को या उद्धव ठाकरे गुट को। एकनाथ शिंदे के लिए यहां जीतना न केवल उनके नेतृत्व को साबित करने के लिए जरूरी है, बल्कि राज्य की राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत रखने के लिए भी अनिवार्य है।
ठाणे शहर में मतगणना के लिए कुल 11 केंद्र बनाए गए हैं, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच EVM खोली जाएंगी। प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे और पुलिस बल की भारी तैनाती की है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, दोपहर तक शुरुआती रुझान स्पष्ट होने की उम्मीद है और शाम तक अंतिम नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। कड़ी सुरक्षा के बीच ठाणे के सभी मतगणना केंद्रों पर EVM खुलेंगे। इसके बाद कुछ ही घंटों में पहली तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। पुलिस ने शहर भर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को सरकार की उपलब्धियों से कराया अवगत
15 Jan, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौजन्य भेंट कर नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन के विस्तार की परियोजना के भूमि-पूजन के लिये अनुरोध किया. प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के आयोजन, प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड सांची सहकारिता अनुबंध की प्रगति रिपोर्ट के साथ प्रदेश में एनटी नक्सल अभियान की प्रगति से अवगत कराया।
1600 मेगावॉट क्षमता के विस्तार की अनुमति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में एनटीपीसी लिमिटेड का सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन स्थित है. ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 1600 मेगावॉट (स्टेज II, 2× 800 MW) क्षमता के विस्तार की अनुमति प्रदान की गई है. इसकी कुल लागत 20 हजार 446 करोड़ रूपये है. परियोजना को वर्ष 2029-30 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है. यह परियोजना अत्याधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसमें एयर कूल्ड कंडेंसर टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया है, जो पारंपरिक वॉटर कूल्ड कंडेंसर (कूलिंग टॉवरों के साथ) की तुलना में पानी की खपत को 1/3 कम करता है।
‘कृषक कल्याण वर्ष’ बना रही सरकार
प्रधानमंत्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष-2026 में “समृद्ध किसान समृद्ध प्रदेश” के लक्ष्य को साकार करने के लिए ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को मध्यप्रदेश में उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के आयोजन के लिये जनवरी, 2026 से नवम्बर 2026 तक विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का विस्तृत कैलेंडर तैयार किया गया है. सभी गतिविधियां 3 साल का लक्ष्य निर्धारित कर संचालित की जाएंगी. इसमें 16 से अधिक विभागों की सहभागिता रहेगी. कृषक कल्याण वर्ष-2026 में सरकार के 10 संकल्प प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना, शीघ्रनाशी फसलों वाले स्थानों पर फूड पार्क और फूड प्रोसेसिंग यूनिट बनाये जाना, कृषि उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये सब्सिडी उपलब्ध कराना, कृषि उद्योगों में किसानों की भागीदारी को बढ़ाना के लिये कार्य करेगी. प्रदेश सरकार अगले 3 साल में 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप की स्थापना के लक्ष्य प्राप्ति के लिये कार्य करेगी।
60% मुसलमान हो जाएंगे तो नहीं बनेगा चटर्जी और बनर्जी का सीएम: भाजपा
15 Jan, 2026 12:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में बांग्लादेशी घुसपैठ (Bangladeshi infiltration) के मसले को अकसर उठाने वाली भाजपा ने टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार (Sukanta Majumdar) का कहना है कि आज वोटों के लिए टीएमसी (TMC) के लोग इन घुसपैठियों का बचाव करते हैं, लेकिन जब मुसलमानों की आबादी 60 फीसदी के पार हो जाएगी तो मुख्यमंत्री उनका ही होगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि ऐसी स्थिति में यहां कोई बनर्जी या फिर चटर्जी मुख्यमंत्री बनने की सोच नहीं सकेगा। उन्होंने साफ कहा कि बंगाल को बचाने के लिए यह जरूरी है कि उसकी डेमोग्रेफी में बदलाव न होने पाए।
उन्होंने साक्षात्कार के दौरान कोलकाता में IPAC के दो ठिकानों पर पड़ी ईडी की रेड पर भी बात की। इसके अलावा रेड वाली जगहों पर खुद सीएम ममता बनर्जी के पहुंचने पर भी वह जमकर बरसे। सुकांत ने कहा कि आखिर प्रतीक जैन के घर और IPAC के दफ्तर में ऐसा क्या था, जिसे बचाने के लिए खुद सीएम ममता बनर्जी को वहां पहुंचना पड़ा। सुकांत ने कहा, ‘किसी भी बंगाली के लिए ममता बनर्जी का दिल इतना नहीं पिघला। यह पार्टी तो बांग्ला और गैर-बांग्ला की बात करती है, लेकिन फिर भी उन्हें प्रतीक जैन पर रेड की चिंता हुई। वह तो बंगाल के नहीं हैं। वह कभी अपनी पार्टी के नेता तक को बचाने नहीं गईं। आखिर IPAC के घर में सरकारी दस्तावेज क्या कर रहे हैं।’
सुकांत ने लेफ्ट को बताया टीएमसी की बी टीम
वह कहते हैं कि जब बंगाल की डेमोग्रेफी चेंज हो जाएगी। यहां 60 फीसदी मुसलमान हो जाएंगे तो फिर कोई बनर्जी या चटर्जी मुख्यमंत्री नहीं बनेगा बल्कि मुसलमान ही बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार कोई ऐक्शन ले तो यही सवाल उठेगा कि संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सुकांत ने कहा कि लेफ्ट के लोग तो टीएमसी के साथ बी टीम के तौर पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल में माछ भात खाने वाला कोई शख्स ही भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने कहा कि लेफ्ट के लोगों ने तो टीएमसी से ही हाथ मिला लिया है। वे अपने वजूद के लिए फिलहाल टीएमसी पर ही निर्भर हैं।
फर्जी मतदान करने वालों से निपटेगा उद्धव और राज ठाकरे का ‘पिटाई दस्ता’
15 Jan, 2026 11:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत (Sanjay Raut) के एक बयान ने मंगलवार को नगर निकाय चुनावों में संभावित हिंसा को लेकर चिंता बढ़ा दी। उन्होंने घोषणा की कि नगर निकाय चुनावों (Municipal elections) के लिए 15 जनवरी को होने वाले मतदान के दिन उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के नेतृत्व वाली पार्टी और मनसे के कार्यकर्ताओं का एक संयुक्त दस्ता गठित किया जाएगा, जिसका काम दोहरा और फर्जी मतदान करने वालों की पिटाई करना होगा।
राउत की धमकी मुंबई और अन्य नगर निकायों के चुनावों के लिए प्रचार के दौरान महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा की गई सार्वजनिक अपील के बाद आई है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बढ़ते प्रभाव के बीच मुंबई के गढ़ की रक्षा के लिए मनसे और शिवसेना (UBT) ने गठबंधन किया है।
शिवसेना (UBT) के नेता ने यहां पत्रकारों से कहा, “हमने (शिवसेना-UBT और MNS) एक टीम बनाई है, जो 15 जनवरी को सुबह सात बजे से सक्रिय हो जाएगी। जैसे ही क्षेत्रवार दोहरे मतदाताओं की जानकारी दस्ते को मिलेगी, संयुक्त टीम ऐसे मतदाताओं से उचित तरीके से निपटेगी।” राउत की यह चेतावनी 29 नगर निकायों के चुनावों के लिए जारी जोरदार प्रचार अभियान की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें एक तरफ भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना व दूसरी तरफ मुंबई महानगर क्षेत्र में शिवसेना (उबाठा)-मनसे गठबंधन के बीच तीखी तकरार देखने को मिली है।
विपक्ष ने राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष फर्जी और दोहरी मतदाता सूची का मुद्दा आक्रामक रूप से उठाया था और मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को दूर करने की मांग की थी। राउत से जब दोहरी मतदाता होने का दावा करके व्यक्तियों पर हमला करने के बाद के कानूनी परिणामों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तर्क दिया कि कानून के दायरे में न आने वालों को पीटना कानून और व्यवस्था की स्थिति भंग करने के बराबर नहीं है। राउत ने पूछा, ‘क्या फर्जी मतदान कानून और व्यवस्था की परिभाषा में आता है?’
तमिलनाडु में राहुल के पोस्ट ने बढ़ाई CM स्टालिन की टेंशन; जानिए पूरा मामला ?
15 Jan, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) तमिलनाडु के दौरे (Tamil Nadu) पर हैं। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट किया है, जिसने तमिलनाडु की राजनीति में नई सियासी चिंगारी भड़का दी है। उनके पोस्ट ने न सिर्फ एक नाज़ुक समय में अभिनेता से नेता बने विजय का साथ दिया है, बल्कि उन अटकलों को भी मजबूत किया है कि कांग्रेस, DMK के साथ अपने करीबी संबंधों के बावजूद, विजय की पार्टी TVK के साथ आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समझ बनाने पर विचार कर सकती है।
दरअसल, राहुल गांधी ने तमिल सुपरस्टार विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ को ‘रोकने की केंद्र सरकार की कोशिश’ तमिल संस्कृति पर हमला है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘तमिल लोगों की आवाज दबाने’ में कभी कामयाब नहीं होंगे। राहुल का यह बयान तमिल फिल्म ‘जन नायकन’ के निर्माता के सुप्रीम कोर्ट में मद्रास हाई कोर्ट के एक अंतरिम आदेश को चुनौती देने के एक दिन बाद आया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाण बोर्ड (CBFC) से मंजूरी मिलने के एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। राहुल का यह बयान सीधे-सीधे बीजेपी और आरएसएस पर उनके उस आरोप की कड़ी का हिस्सा है, जिसमें वे कहते रहे हैं कि देश की संस्थाओं पर भाजपा और संघ का राजनीतिक दबाव और दखल बढ़ता जा रहा है।
समय ने बढ़ाया संदेश का असर
दिलचस्प बात यह रही कि राहुल गांधी का यह बयान पोंगल के दिन आया है, जब वे नीलगिरि के गुडलूर में उत्सव मना रहे थे। वियतनाम से लौटने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। ऐसे में उनके शब्दों में सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि तमिल अस्मिता का संदेश भी साफ झलकता दिखा। बता दें कि ‘जन नायकन’ को लेकर सेंसर बोर्ड, अदालत और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान ने इसे तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस पहले ही फिल्म निर्माताओं के समर्थन में खड़ी थी। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन भी यह कह चुके हैं कि फिल्मों को राजनीतिक वजहों से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा
राहुल गांधी के इस पोस्ट ने अब कांग्रेस के अंदर तमिलनाडु की सियासी रणनीति पर नई चर्चा शुरू कर दी है। नेताओं का एक वर्ग मानता है कि पार्टी को TVK के साथ गठबंधन करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि विजय की लोकप्रियता, खासकर युवाओं और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के बीच, कांग्रेस को एक नया राजनीतिक फायदा दे सकती है। पार्टी के अंदर शुरुआती फीडबैक से पता चलता है कि विजय और राहुल गांधी दोनों के नेतृत्व वाले अभियान ज़मीनी स्तर पर लोगों से मज़बूती से जुड़ सकते हैं और राज्य में माहौल बदल सकते हैं।
कांग्रेस के अंदर ही दो मत
हालांकि, कांग्रेस में हर कोई इस विचार से सहमत नहीं है। कई सीनियर नेताओं का मानना है कि पार्टी को DMK के साथ अपने लंबे समय के गठबंधन के साथ खड़ा रहना चाहिए। उनका कहना है कि इस साझेदारी ने कई सालों से स्थिरता, प्रासंगिकता और राजनीतिक लाभ दिया है। उनके मुताबिक, नई रणनीति के साथ प्रयोग करना, चाहे वह कितना भी रोमांचक लगे, उसमें जोखिम हो सकता है। उनका तर्क है कि कांग्रेस को DMK के साथ मौजूदा गठबंधन से अलग होने के बजाय, मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल करके बेहतर जगह और मौजूदा गठबंधन में मज़बूत भूमिका के लिए बातचीत करनी चाहिए।
एक तीर से तीन शिकार कैसे?
बता दें कि तमिलनाडु में कांग्रेस मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK की सहयोगी है। हाल के दिनों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ी है। कांग्रेस 234 सदस्यों वाली विधानसभा में पहले 40 सीटें चाहती थीं लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें देने के ही संकेत दिए हैं। इससे खिन्न पार्टी का एक धड़ा विजय की टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व से अनुरोध करता रहा है। दूसरी तरफ, बीजेपी AIADMK की अगुवाई वाले गठबंधन के लिए नई-नई रणनीति बना रहा है।
ऐसी सियासी परिस्थितियों में राहुल गांधी की हालिया पोस्ट एक तीर से तीन निशाने जैसा है। पहला तो उन्होंने विजय को उनकी फिल्म के मुद्दे पर समर्थन देकर उनका विश्वास जीतने की कोशिश की है, दूसरा ऐसा कर उन्होंने सहयोगी DMK पर दबाव बढ़ा दिया है कि उसके पास विजय एक विकल्प हो सकते हैं और तीसरा राहुल ने भाजपा पर करारा प्रहार किया है, और उसे तमिल संस्कृति का विरोधी बताकर उसके दक्षिणी विस्तार के मंसूबों को नाकाम करने की कोशिश की है।
मैं मुख्यमंत्री रहूंगा या नहीं स्थिति साफ करें…सिद्धारमैया ने राहुल गांधी के सामने रखी मांग
15 Jan, 2026 09:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक में सत्ता की स्थिति अजीबो-गरीब हालत में है। मंत्रियों से लेकर अधिकारी तक के मन में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी को लेकर संशय बना हुआ है, जिससे राज्य में काम प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर सिद्धारमैया ने आलाकमान से स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है।
सिद्धारमैया भी अब कुर्सी को लेकर खींचतान से परेशान हो गए हैं। उन्होंने हर रोज हो रहे नए कंफ्यूजन को लेकर राहुल गांधी से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मैं कैबिनेट का विस्तार भी करना चाहता हूं। मुझे नई नियुक्तियां करने की भी जरूरत है, लेकिन सत्ता पॉवर को लेकर कंफ्यूजन बढ़ता जा रहा है। उधर डीके शिवकुमार ने पोस्ट करते हुए कहा कि कोशिशें भले ही असफल हो जाएं, प्रार्थना हमेशा सफल होती है।
भोपाल गोमांस मामले में जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर प्रहार… बोले- गोहत्या बर्दाश्त नहीं
15 Jan, 2026 08:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में जिंसी स्लॉटर हाउस (बूचड़खाना) (Jinsi Slaughterhouse) को लेकर उपजे विवाद के बाद कांग्रेस (Congress) मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) पर लगातार हमलावर है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने राज्य में हो रही गोहत्या पर मोहन यादव सरकार पर तीखा प्रहार किया है। पटवारी ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि ‘मुख्यमंत्री मोहन यादव हर बड़े मंच से अभिनंदन करवाते थे कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में गोहत्या और गोमांस का कारोबार सालों से बंद है। लेकिन कल भोपाल नगर निगम के ही स्लॉटर हाउस में गोहत्या के कारोबार की पुष्टि हुई, जहां से देश-विदेश में गोमांस का अवैध व्यापार चल रहा है।’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने ट्वीट में आगे कहा ‘पहले मुख्यमंत्री ने गोमांस को टैक्स फ्री किया, और अब राजधानी में ही भाजपा के नगर निगम द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस में गोमांस का कारोबार फल फूल रहा है। इवेंट प्रेमी मुख्यमंत्री मोहन यादव गोमाता को रोटी खिलाकर रील तो बनवा लेते हैं, लेकिन उन्हीं की सरकार के संरक्षण में गोहत्या हो रही है। अब इन नकली गोभक्तों को कांग्रेस असली सबक सिखाएगी। चाहे कुछ भी हो जाए, गोमाता की इस तरह हत्या बर्दाश्त नहीं करेंगे।’
दरअसल 15-16 दिसंबर की रात बैतूल के रास्ते भोपाल भेजे जा रहे दो कंटेनर हिंदू संगठनों ने पकड़े थे। इसके बाद पुलिस जांच में 26 टन मांस मिला था। ये मांस भोपाल नगर निगम के अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस की गाड़ी से जब्त हुआ था। हिंदू संगठनों ने गाड़ी को जहांगीराबाद पुलिस को सौंप दिया था। इसके बाद मांस के सैंपल को मथुरा (उत्तर प्रदेश) के पशु चिकित्सा महाविद्यालय में फोरेंसिक जांच के लिए भेजा दिया गया था जहां से पुष्टि हुई कि मांस गाय का है, जो कानून के तहत प्रतिबंधित है। आपको बता दें कि इस स्लॉटर हाउस के आधुनिकीकरण पर नगर निगम ने हाल ही में 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि यहां से गोमांस की बिक्री और तस्करी का काम किया जा रहा है।
हो रहा जमकर विरोध
करणी सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को भोपाल नगर निगम के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। वहीं कांग्रेस प्रदेश महामंत्री अमित शर्मा बूचड़खाने पर बुलडोजर एक्शन की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली भाजपा के 'खिचड़ी उत्सव' में दिखा शक्ति प्रदर्शन, कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का जोरदार अभिनंदन
14 Jan, 2026 08:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मकर संक्रांति के अवसर पर दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में बुधवार को जबरदस्त उत्साह और राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिला. अवसर था 'मकर संक्रांति मिलन समारोह' का, जिसमें भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का दिल्ली इकाई द्वारा भव्य अभिनंदन किया गया. ढोल-नगाड़ों की थाप और 'भारत माता की जय', 'जय श्रीराम' नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने अपने नए कार्यकारी अध्यक्ष का स्वागत किया. इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन की उपस्थिति रही.
तिल-गुड़ की मिठास और एकजुटता का संदेश
कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने नितिन नबीन का स्वागत पारंपरिक तरीके से किया. उन्होंने नबीन को मखाने का हार पहनाया और मकर संक्रांति के प्रतीक स्वरूप खिचड़ी व तिल-कुट भेंट किया. कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सचदेवा ने कहा, "आज का दिन दोहरी खुशी का है. एक ओर सूर्य देव उत्तरायण हो रहे हैं, तो दूसरी ओर हमें नितिन नबीन जी जैसा कर्मठ और युवा नेतृत्व मिला है. दिल्ली भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता आज संकल्प लेता है कि हम उनके मार्गदर्शन में दिल्ली की सेवा के लिए खुद को समर्पित करेंगे."
प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस मौके पर समस्त दिल्ली वासियों को पर्व की बधाई देते हुए कहा, ''मकर संक्रांति का यह त्यौहार समाज में समरसता और भाईचारे का प्रतीक है. हमें विश्वास है कि जिस तरह सूर्य का प्रकाश अंधकार को मिटाता है, उसी तरह दिल्ली की जनता के आशीर्वाद से प्रदेश में खुशहाली का नया सवेरा आएगा.''
स्वागत से अभिभूत नितिन नबीन ने दिल्ली भाजपा की टीम की सराहना की. राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा "मकर संक्रांति परिवर्तन का पर्व है. आज दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं का यह जोश बता रहा है कि वे दिल्ली के विकास और संगठन की मजबूती के लिए पूरी तरह तैयार हैं. भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक परिवार है और खिचड़ी उत्सव हमें इसी एकजुटता का पाठ पढ़ाता है." उन्होंने आगामी सांगठनिक कार्यों और चुनावों की ओर इशारा करते हुए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को दिल्ली के घर-घर तक पहुँचाएं.
खिचड़ी भोज और सांस्कृतिक समागम
समारोह के दौरान 'खिचड़ी भोज' का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने एक साथ खाया. इस दौरान दिल्ली के सांसद, विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व मेयर, विधायक, निगम पार्षद सहित हजारों की संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे. मंच पर कुलजीत चहल, वीरेंद्र सचदेवा, राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया विधानसभा, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संजय मयूख, पूर्वांचल मोर्चा दिल्ली अध्यक्ष संजय ओझा, कमलजीत सेहरावत, महामंत्री विष्णु मित्तल मौजूद थे.
बता दें कि कार्यक्रम के दौरान पूरे कार्यालय परिसर को केसरिया झंडों और फूलों से सजाया गया था. मकर संक्रांति की परंपरा को निभाते हुए कार्यकर्ताओं के बीच तिल-गुड़ और खिचड़ी का प्रसाद भी वितरित किया गया. यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब नितिन नबीन जल्द ही पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. दिल्ली भाजपा द्वारा आयोजित इस भव्य स्वागत समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन आने वाली राजनीतिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है. वहीं, कार्यकर्ताओं में नए नेतृत्व को लेकर भारी उत्साह है.
Bihar Politics: दही-चूड़ा भोज में दिखी सियासी नरमी, तेज प्रताप से मिले लालू यादव
14 Jan, 2026 05:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Bihar Politics :मकर संक्रांति के दिन एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप से अहम तस्वीर सामने आई। तेज प्रताप यादव के बुलावे पर उनके पिता और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए। तेज प्रताप के आवास पर लालू यादव की मौजूदगी को लेकर सियासी गलियारों में उनकी “घर वापसी” के कयास तेज हो गए हैं। इस मौके पर लालू यादव ने साफ कहा कि वे तेज प्रताप से नाराज नहीं हैं और उनका आशीर्वाद हमेशा बेटे के साथ रहेगा।
“मतभेद हो सकते हैं, दूरी नहीं”
लालू यादव ने कहा कि परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रिश्तों में दूरी आ जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेगा। इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि तेज प्रताप की पारिवारिक स्तर पर वापसी जल्द हो सकती है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले तेज प्रताप ने दिल्ली में बहन के आवास पर पिता से मुलाकात कर दही-चूड़ा खाने का न्यौता दिया था।
भोज में जुटे बड़े सियासी चेहरे
तेज प्रताप यादव के इस दही-चूड़ा भोज में बिहार की कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और चेतन आनंद शामिल थे। खासतौर पर साधु यादव की मौजूदगी चर्चा में रही, क्योंकि अतीत में उनके और तेज प्रताप के रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। एक ही मंच पर दोनों की मौजूदगी ने Bihar Politics में नई चर्चाओं को जन्म दिया।
पहले भी दे चुके हैं आशीर्वाद
जब विधानसभा चुनाव के दौरान तेज प्रताप को पार्टी और घर से अलग किया गया था, तब उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगी थीं। उस समय भी लालू यादव ने कहा था कि बेटे को हमेशा उनका आशीर्वाद मिलेगा। हालांकि इस आयोजन में तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। तेज प्रताप ने कहा कि यह भोज परंपरा और रिश्तों को निभाने का प्रयास है।
पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री मुरुगन के घर पहुंच की पूजा-अर्चना और बोले, पोंगल अब ग्लोबल त्योहार
14 Jan, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोंगल के पावन अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर पहुंचकर पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने तमिल परंपराओं के अनुसार पोंगल उत्सव में भाग लिया और देशवासियों सहित दुनिया भर में रह रहे तमिल समुदाय को इस पर्व की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा, कि पोंगल अब केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ग्लोबल त्योहार बन चुका है, जो प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन का संदेश देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल त्योहार पर पारंपरिक तमिल रीति-रिवाजों के साथ पूजा की। उन्होंने गाय और उसके बछड़े को चारा खिलाया, उन्हें माला पहनाई और उनकी पूजा-अर्चना की। इस दृश्य ने भारतीय संस्कृति में कृषि, पशुधन और प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि पोंगल केवल फसल कटाई का पर्व नहीं है, बल्कि यह कृतज्ञता, सामूहिकता और जीवन मूल्यों का उत्सव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा, यह त्योहार प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग दिखाता है। इन दिनों देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू जैसे पर्व भी मनाए जा रहे हैं। ये सभी त्योहार भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाते हैं। उन्होंने भारत और विश्वभर में रह रहे तमिल भाइयों और बहनों को पोंगल और अन्य पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
तमिल संस्कृति की महत्ता पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि पिछले वर्ष उन्हें तमिल संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला। उन्होंने तमिलनाडु के लगभग एक हजार वर्ष पुराने गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में पूजा-अर्चना का उल्लेख किया और वाराणसी में आयोजित काशी तमिल संगम के अनुभव को भी साझा किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन आयोजनों के दौरान उन्होंने सांस्कृतिक एकता की जीवंत ऊर्जा को महसूस किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि रामेश्वरम में पंबन पुल के उद्घाटन के दौरान उन्होंने तमिल इतिहास और विरासत की महानता को नजदीक से देखा। उन्होंने कहा, तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है। इतना ही नहीं, यह पूरी मानवता की साझा विरासत है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना पोंगल जैसे त्योहारों से और अधिक सशक्त होती है, जो देश को सांस्कृतिक रूप से एक सूत्र में बांधते हैं।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच राहुल गांधी से मिले सिद्धरमैया और डी.के. शिवकुमार
14 Jan, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैसूरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी खींचतान के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मैसूरु के मंडकल्ली हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से संक्षिप्त मुलाकात की। हालांकि यह मुलाकात काफी छोटी थी, लेकिन राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इसने सत्ता गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नई दिल्ली लौट रहे थे। इसी दौरान हवाई अड्डे पर ट्रांजिट के वक्त उन्होंने दोनों दिग्गज नेताओं से अलग-अलग और फिर एक साथ चर्चा की। दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी मंगलवार को दो बार मैसूरु हवाई अड्डे से गुजरे और दोनों ही मौकों पर सिद्धरमैया और शिवकुमार वहां मौजूद थे। यद्यपि नेताओं के बीच हुई बातचीत का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी आंतरिक प्रतिद्वंद्विता और संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल पर अनौपचारिक चर्चा हुई है। इसके साथ ही राज्य में कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान और केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार की रणनीति पर भी बात होने की खबर है। सिद्धरमैया और शिवकुमार लंबे समय से राहुल गांधी के साथ एक औपचारिक और विस्तृत बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ऐसे में इस संक्षिप्त मुलाकात को आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दिग्विजय सिंह नहीं जाएंगे राज्यसभा, कई नेता दौड़ में, कमलनाथ को मिलेगा मौका
14 Jan, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की सियासत के ‘चाणक्य’ पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने अचानक ऐलान किया कि वह राज्यसभा नहीं जाएंगे इससे सियासी हलकों में हलचल मच गई है। बता दें दिग्विजय सिंह कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, लेकिन इससे पहले ही राज्यसभा नहीं जाने उनकी घोषणा से दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि दिग्विजय सिंह का अचानक राज्यसभा से मोहभंग क्यों हो गया? वहीं यह सवाल भी उठने लगा कि सिंह की जगह अब मप्र से कांग्रेस किसे राज्यसभा भेजेगी।
मीडिया रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिग्विजय सिंह का यह फैसला कोई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रणनीतिक सोच का हिस्सा है। यह कदम कांग्रेस के उस नए राजनीतिक रोडमैप से जुड़ा है, जिसे राहुल गांधी पिछले कुछ सालों से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी नेतृत्व का फोकस अब केवल संसद के अंदर आक्रामक विपक्षी भूमिका निभाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से खड़ा करना प्राथमिकता बन चुका है।
इसी सोच के तहत वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लगाने और युवा नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह को भी इसी रणनीति के तहत राज्यसभा की भूमिका से मुक्त कर दोबारा मैदान में उतारने की तैयारी है। सूत्रों की मानें तो पार्टी दिग्विजय को एक बार फिर मध्य प्रदेश में बड़े संगठनात्मक मिशन की जिम्मेदारी सौंप सकती है। 2017-18 में की गई उनकी 3300 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा आज भी कांग्रेस के लिए एक मजबूत राजनीतिक प्रतीक मानी जाती है। उस परिक्रमा ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जान फूंकी थी, बल्कि 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को वैचारिक और भावनात्मक बढ़त भी दिलाई थी।
अब चर्चा है कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और नर्मदा परिक्रमा या इसी तरह का कोई बड़ा जनसंपर्क अभियान दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कराया जा सकता है, ताकि बिखरे संगठन को जोड़ा जा सके और युवा कार्यकर्ताओं को दिशा दी जा सके। इस बीच दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद कांग्रेस में सामाजिक संतुलन की बहस भी तेज हो गई है। अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मांग रखी है कि राज्यसभा में इस बार दलित समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि मध्य प्रदेश की करीब 17 फीसदी अनुसूचित जाति आबादी की यह लंबे समय से अपेक्षा रही है। हालांकि इस मांग पर दिग्विजय सिंह ने साफ कर दिया कि टिकट का फैसला उनके हाथ में नहीं है, लेकिन यह जरूर तय है कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं।
कमलनाथ कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं। चर्चा है कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका चाहते हैं। यदि उन्होंने दावेदारी ठोकी, तो बाकी नामों की राह मुश्किल हो सकती है। जीतू पटवारी मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। आक्रामक तेवर, विधानसभा में सक्रिय भूमिका और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। वहीं अरुण यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ रह चुके हैं। संगठन और दिल्ली दोनों में उनकी स्वीकार्यता है। अजय सिंह (राहुल भैया) पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, जो लंबे समय से किसी बड़ी जिम्मेदारी की प्रतीक्षा में हैं।
दिग्विजय सिंह के हटने के साथ ही कांग्रेस की एकमात्र सुरक्षित मानी जा रही राज्यसभा सीट अब सियासी मुकाबले का केंद्र बन गई है। पार्टी में कई बड़े नामों की चर्चा शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में लॉबिंग और समीकरण तेज होंगे। सबसे चर्चित नाम पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। समय-समय पर यह संकेत मिलते रहे हैं कि वे एक बार फिर केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। अगर कमलनाथ राज्यसभा की दौड़ में उतरते हैं, तो उनके राजनीतिक कद और अनुभव के चलते बाकी दावेदारों की राह आसान नहीं रहेगी।
राज्यसभा की मध्य प्रदेश में कुल 11 सीटें हैं, जिनमें से आठ पर बीजेपी और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है। 2026 में तीन सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस के लिए फिलहाल सिर्फ एक सीट ही सुरक्षित मानी जा रही है। ऐसे में दावेदारी की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है, क्योंकि हर बड़ा नेता जानता है कि मौका एक ही है और दावेदार कई। कुल मिलाकर दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटना कांग्रेस की बदलती रणनीति, पीढ़ीगत बदलाव और मध्य प्रदेश में संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस खाली होने वाली सीट पर किसे मौका देता है और क्या यह फैसला पार्टी के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
मनरेगा बचाओ संग्राम: सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए बोलीं, योजना पर बुलडोजर चलाया गया
14 Jan, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस की चेयरपर्सन और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान के तहत एक वीडियो जारी कर केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कानून गरीबों, बेरोजगारों और वंचित वर्गों के हितों पर सीधा हमला है और सरकार ने इस ऐतिहासिक योजना पर बुलडोजर चला दिया है।
अपने वीडियो संदेश में सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि करीब 20 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में मनरेगा कानून को संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उन्होंने इसे एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि इस कानून ने ग्रामीण परिवारों के पलायन को रोका और करोड़ों लोगों को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया। मनरेगा ने न सिर्फ गरीब परिवारों को आजीविका का सहारा दिया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान की।
सोनिया गांधी ने कहा, कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने गरीबों, बेरोजगारों और वंचितों के हितों की लगातार अनदेखी की है। उन्होंने कहा, मनरेगा कानून से सिर्फ महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटाया गया, बल्कि इस पर बुलडोजर चला दिया गया। विपक्ष से बिना किसी सलाह-मशविरे के मनमाने बदलाव किए गए। अब किसे कितना, कैसे और कहां रोजगार मिलेगा, यह सब दिल्ली में बैठकर तय किया जा रहा है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि मनरेगा कांग्रेस की देन जरूर है, लेकिन यह कभी पार्टी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह देशहित और जनहित से जुड़ा कानून है। सोनिया गांधी के मुताबिक, मनरेगा को कमजोर करके मोदी सरकार करोड़ों किसानों, गरीबों और भूमिहीन मजदूरों पर सीधा हमला कर रही है। उन्होंने ऐलान किया, इस हमले का हमें मिलकर मुकाबला करना होगा। 20 साल पहले गरीब भाइयों-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलाने के लिए मैंने संघर्ष किया था और अब इस ‘काले कानून’ के खिलाफ लड़ने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं।
कांग्रेस का यह वीडियो पार्टी के 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का हिस्सा है, जो 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा। इस अभियान के तहत कांग्रेस शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन, विधानसभा घेराव, पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान और ‘काम मांगो अभियान’ चलाएगी।
भाजपा मुख्यालय में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी नेताओं की मुलाकात पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा- भाजपा और चीन में कौन सा गुप्त समझौता
14 Jan, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस ने मंगलवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के डेलिगेशन की भाजपा नेताओं से मुलाकाता और चीन के जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी इलाके को अपना बताने पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सीपीसी-भाजपा बैठक की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा- बीजेपी दफ्तर में बीजेपी नेता और सीपीसी नेताओं के बीच मीटिंग हो रही है। भाजपा-चीन में कौन सा गुप्त समझौता हुआ? यह रिश्ता क्या कहलाता है? भाजपा ने देशद्रोह क्यों किया? इसके अलावा कांग्रेस के एक्सअकाउंट पर चीन के विदेश मंत्रालय का वीडियो पोस्ट किया गया। इसमें मंत्रालय प्रवक्ता माओ निंग कहती हैं कि शक्सगाम घाटी चीन का इलाका है, यहां बुनियादी ढांचा बनाना गलत नहीं।
कांग्रेस ने पूछा है कि मोदी सरकार की विदेश नीति वेंटिलेटर पर पड़ी है। अब चीन ने जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी को अपना बताया है। मोदी जी लाल आंख का क्या हुआ? दरअसल, सोमवार को दिल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर में बीजेपी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के डेलिगेशन की बैठक हुई। सीपीसी डेलिगेशन का नेतृत्व सुन हेयान ने किया। सुन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट में वाइस मिनिस्टर हैं। बीजेपी डेलीगेशन का लीडरशिप पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने की। बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाला ने भी ङ्ग पोस्ट में लिखा था कि दोनों पार्टियों के बीच इंटर-पार्टी कम्युनिकेशन को बढ़ाने पर चर्चा की गई।
संघ के दफ्तर पहुंचा चीनी दल
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीनी दल ने आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय दत्तात्रेय होसबाले से उनके दफ्तर में भेंट की। सूत्रों ने बताया कि चीनी प्रतिनिधिमंडल सुबह करीब 11 बजे संघ के कार्यालय पहुंचा। वहां दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। खास बात यह है कि इस बैठक का अनुरोध खुद चीनी पक्ष की ओर से किया गया था। यह घटनाक्रम चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल के सोमवार को यहां भाजपा मुख्यालय का दौरा करने के एक दिन बाद हुआ है। इस दल का नेतृत्व उसके अंतर्राष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सुन हैयान ने किया था।
“जो तोड़ने आए थे, वे इतिहास बन गए; मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा भव्य सोमनाथ कॉरिडोर” : अमित शाह
14 Jan, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गांधीनगर| माणसा में जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री और गांधीनगर से सांसद अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि “1000 वर्ष पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ा था। उस समय सोमनाथ पर हुआ हमला केवल एक मंदिर पर नहीं, बल्कि हमारे धर्म और स्वाभिमान पर हमला था। आज तोड़ने वाले कहीं खो गए हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भव्य सोमनाथ कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है।”
मंगलवार को अमित शाह ने अपने गृह क्षेत्र माणसा और अहमदाबाद में करोड़ों रुपये के विकास परियोजनाओं की श्रृंखला का शुभारंभ किया। मानसा को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए रु. 250 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। साथ ही अमित शाह ने नागरिकों से मानसा को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
शहर की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए भूमिगत सीवरेज परियोजना और फायर स्टेशन का भी लोकार्पण किया गया। इसके अलावा, मानसा के ऐतिहासिक मालव तालाब के पुनर्विकास प्रोजेक्ट तथा मानसा नगरपालिका से जीईबी तक के मार्ग को ‘आइकोनिक रोड’ के रूप में विकसित करने के कार्य का शिलान्यास किया गया। कलोल से मानसा तक 12 किलोमीटर सड़क के नवीनीकरण का कार्य भी शुरू किया गया है।
अमित शाह ने बताया कि “अंबोड में बन रहे बैराज से मानसा के किसानों को सिंचाई का बड़ा लाभ मिलेगा और मेडिकल सुविधाओं के लिए अब स्थानीय लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा।”
केदारनाथ धाम में उत्सव का माहौल, कल सुबह खुलेंगे कपाट
सुपर सकर मशीन द्वारा लगातार चौथे दिन तानसेन नगर में सीवर सफाई कार्य जारी
रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में सूरजपुर बना प्रदेश में प्रथम स्थान पर
पारिवारिक संस्कृति व प्रेम, शांति, सद्भावना रथ को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिखाई हरी झण्डी
हीटवेव का असर गहरा, MP में रात का अलर्ट; मजदूर दोपहर में नहीं करेंगे काम
मोहन यादव ने नमक्कल और अविनाशी में किया रोड शो, NDA के लिए मांगे वोट
अन्नाद्रमुक गठबंधन को लेकर गरजे खरगे, PM मोदी पर लगाया गंभीर आरोप
केदारनाथ धाम में अनुशासन सख्त, मोबाइल उपयोग पूरी तरह बंद
जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश
