राजनीति
25,000 करोड़ के MSC बैंक घोटाले में पवार परिवार को बड़ी राहत
28 Feb, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। की एक विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की उस रिपोर्ट को मान लिया है, जिसमें महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (शिखर बैंक) में लोन बांटते समय करीब 25,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में दिवंगत उप मुख्यमंत्री अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को क्लीन चिट दी गई थी। कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए कहा है कि मामले में कोई भी सजा लायक अपराध साबित नहीं हुआ है। विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा की दिवंगत उपमुख्यमंत्री की 'सी-समरी' रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इससे अजित पवार समेत उन सभी राजनीतिक नेताओं को राहत मिली, जिसका नाम इस घोटाले में शामिल था। अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए कहा कि कथित 25,000 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में कोई दंडनीय अपराध साबित नहीं हुआ है।
70 से अधिक अन्य लोगों को क्लीन चिट
मुंबई की एक विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा 25,000 करोड़ रुपये के महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) मामले में दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिससे महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और इस मामले में 70 से अधिक अन्य लोगों को क्लीन चिट मिल गई।
कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता
अदालत ने कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य द्वारा दायर विरोध याचिकाओं के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका को भी खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने सी-सारांश रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि सहकारी चीनी कारखानों से जुड़े कथित ऋण और वसूली अनियमितताओं में कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता है। इस आदेश में ईओडब्ल्यू के इस निष्कर्ष का भी समर्थन किया गया कि अजित पवार, सुनेत्रा पवार, उनके रिश्तेदारों और अन्य संस्थाओं से संबंधित लेन-देन में 'कोई आपराधिक अपराध' नहीं था।
तीन प्रमुख लेन-देन की जांच
यह मामला 2019 में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा एमएससीबी और जिला सहकारी बैंकों पर लगे आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद शुरू हुआ था। इन बैंकों ने चीनी कारखानों को ब्याज मुक्त ऋण जारी किए ताकि बैंक अधिकारियों और राजनेताओं से जुड़े लोगों के पक्ष में ऋण खाते बनाए जा सकें। यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनियों ने बाद में अपनी यूनिट संपत्तियों को बेहद कम कीमतों पर बेच दिया। ईओडब्ल्यू की 35 पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट में तीन प्रमुख लेन-देन की जांच की गई और ऋण स्वीकृत करने या सतारा में जरंदेश्वर शुगर सहकारी कारखाना सहित चीनी कारखानों की बिक्री में कोई आपराधिक अनियमितता नहीं पाई गई।
343 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली
आरोप लगाया गया था कि कारखानों को अलाभकारी पाया गया, फिर उन्हें गैर-निष्पादित संपत्ति घोषित कर दिया गया और पवार परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों सहित बैंक अधिकारियों और राजनेताओं के रिश्तेदारों से जुड़ी कंपनियों को बहुत कम कीमतों पर बेच दिया गया। ईओडब्ल्यू ने अब कहा है कि बैंक को कोई नुकसान नहीं हुआ है, और यह भी कहा है कि उसने जांच के दायरे में आए ऋणों से 1343 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली कर ली है।
कांग्रेस ने ओडिशा में हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका जताई
28 Feb, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भुवनेश्वर। आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर ओडिशा में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने चौथी सीट को लेकर संभावित 'हॉर्स ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) की आशंका जताई है। पार्टी का कहना है कि इस सीट के लिए न तो सत्तारूढ़ भाजपा और न ही विपक्षी बीजद के पास पर्याप्त संख्या बल है। राज्यसभा की चार सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा के दो सीटें जीतने और बीजद के एक सीट पर जीत दर्ज करने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि चौथी सीट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्ता चरण दास, जो आगामी द्विवार्षिक चुनावों को लेकर पार्टी नेतृत्व से चर्चा के लिए नई दिल्ली रवाना हुए, ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, “राजनीति में हॉर्स ट्रेडिंग को रोकना जरूरी है। राज्यसभा चुनाव में किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता में होने के कारण भाजपा नेता यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी चार में से तीन सीटें जीतेगी। दास ने कहा, “भाजपा के लोग सत्ता में हैं, वे कुछ भी कर सकते हैं। वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।”
ओडिशा विधानसभा का राज्यसभा चुनाव गणित: कुल विधानसभा सदस्य- 147
▪️ भाजपा
79 विधायक
3 निर्दलीयों का समर्थन
कुल प्रभावी संख्या: 82
तीन राज्यसभा सांसद चुनने के लिए जरूरी संख्या से 8 कम
▪️ बीजद
48 विधायक
एक सांसद चुनने के बाद 18 प्रथम वरीयता मत शेष
दूसरी सीट के लिए 12 और मतों की आवश्यकता
▪️ कांग्रेस
14 विधायक
▪️ माकपा (CPI-M)
1 विधायक
कांग्रेस की कोशिशें
दास के अनुसार, ओडिशा की राज्यसभा गणित के मुताबिक भाजपा दो और बीजद एक सीट जीत सकती है। उन्होंने सवाल उठाया, “चौथी सीट के लिए किसी भी दल, यहां तक कि कांग्रेस के पास भी पर्याप्त संख्या नहीं है। फिर भाजपा नेता तीन सीटें जीतने का दावा कैसे कर रहे हैं? बिना हॉर्स ट्रेडिंग के यह कैसे संभव है? उन्होंने कहा कि चौथी सीट के लिए न तो भाजपा और न ही बीजद के पास 30 प्रथम वरीयता मत हैं। दास ने कहा कि हॉर्स ट्रेडिंग रोकने के लिए बीजद और कांग्रेस को किसी प्रतिष्ठित निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए, जो राज्य के हितों की लड़ाई लड़ सके। उन्होंने कहा, “मैं संभावित उम्मीदवारों के पांच नाम लेकर दिल्ली जा रहा हूं। इस संबंध में चर्चा के लिए मैंने बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक से भी समय मांगा है।”जब उनसे पूछा गया कि बीजद, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों से समान दूरी बनाए हुए है, उनकी पसंद के उम्मीदवार का समर्थन कैसे करेगा, तो दास ने कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा, “हम किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को मैदान में उतार सकते हैं, जिसे बीजद समर्थन दे। हॉर्स ट्रेडिंग रोकने का यही एक तरीका है।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस जल्द ही अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेगी।एक अन्य सवाल के जवाब में दास ने कहा कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और राज्यसभा चुनाव में किसी तरह के दलबदल का सवाल ही नहीं है।दो दिन पहले भाजपा के ओडिशा प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर ने कहा था कि पार्टी ओडिशा से राज्यसभा की अधिकतम सीटें जीतेगी।
दूसरी सीट की जुगत में लगी बीजद
इस बीच, बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने राज्यसभा चुनाव सहित विभिन्न मुद्दों पर पार्टी विधायकों के साथ चर्चा की। पार्टी के कुछ विधायकों ने बताया कि राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) ने राज्यसभा चुनाव को लेकर निर्णय लेने का अधिकार पटनायक को सौंप दिया है। वरिष्ठ विधायक अरुण कुमार साहू ने कहा, “सभी विधायक पटनायक के निर्णय का पालन करेंगे। हालांकि बीजद के पास एक सीट जीतने लायक संख्या है, लेकिन पार्टी ने द्विवार्षिक चुनाव के लिए छह सेट नामांकन फॉर्म खरीदे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि वह एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है।
फिर से सत्ता में लौटने के लिए ममता ने साध लिए युवा और महिला वोटर......दो योजनाएं बनेगी चुनाव में गेंमचेंजर
27 Feb, 2026 08:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकत्ता । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर जारी है। राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच दिख रहा है। 294 सदस्यीय विधानसभा में टीएमसी की मजबूत पकड़ है, जबकि भाजपा 77 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। अन्य वाम दलों और नवगठित पार्टियों का गठबंधन चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है, लेकिन असली टक्कर युवाओं और महिलाओं के वोट पर केंद्रित है।
इस लेकर ममता बनर्जी ने इस बार दो प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से राजनीतिक मोर्चा मजबूत किया है। पहली, पहले से चल रही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना, जो 2.42 करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता देना है। इस योजना में मासिक सहायता 1,500 रुपये कर दी गई है, और 2021 में महिलाओं के समर्थन ने टीएमसी को निर्णायक बढ़त दिलाई थी। दूसरी, नई ‘युवा साथी’ योजना, जिसमें 21-40 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को मासिक 1,500 रुपये दिए जाएंगे। न्यूनतम योग्यता 10वीं पास है और आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के नौ दिनों में करीब 78 लाख युवाओं ने आवेदन किया। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस आयु वर्ग के मतदाता कुल वोटरों का करीब 45 प्रतिशत हो सकते हैं, जिससे योजना चुनावी समीकरण बदल सकती है।
वहीं राज्य में सियासी मुद्दों में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) भी अहम है। भाजपा एसआईआर को अपनी रणनीति के तहत लाभकारी मानती है, जबकि ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के द्वारा की जा रही एसआईआर प्रक्रिया को राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने मृत 61 लोगों के परिवारों से एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा कर मानवीय संदेश भी दिया। 2021 में टीएमसी को 49 प्रतिशत वोट शेयर और 213 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 38 प्रतिशत से अधिक वोट और 77 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा घुसपैठ और हिंदुत्व जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। वहीं, ममता की योजनाएं सीधे लाभ पर केंद्रित होने के कारण महिला और युवा वोटरों को आकर्षित करने की संभावना रखती हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का आगामी चुनाव आर्थिक कल्याणकारी योजनाओं और वैचारिक मुद्दों के बीच बेहद रोचक और कड़ा मुकाबला साबित होने वाला है। ममता की दोहरी रणनीति—युवाओं और महिलाओं पर फोकस—भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है और चुनावी समीकरण को नया आकार दे सकती है।
अमेरिका की रिपोर्ट ने बढ़ाया ‘आतंकिस्तान’ का खतरा, पाकिस्तान पर पड़ेगा असर
27 Feb, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
America Report on Pakistan: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग छिड़ी हुई है. इस बीच पाकिस्तान के लिए एक और बुरी खबर आई है. आतंक की फैक्ट्री चलाने वाला पाकिस्तान अब आटे के लिए तरस सकता है. अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार पाकिस्तान में गेहूं के उत्पादन में कटौती होने की उम्मीद है. अमेरिका के कृषि विभाग(USDA) की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में इस बार 20-22 लाख टन गेहूं कम पैदा होगा. वहीं इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
पाकिस्तान की अधिकांश आबादी गेहूं पर निर्भर
पाकिस्तान में बड़ी आबादी गेहूं या फिर उससे बने उत्पादों पर निर्भर है. इसमें रोटी, डबल रोटी, खमीरी रोटी और नान जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं. ऐसे में 22 लाख टन गेहूं की कम पैदावर पाकिस्तान में भुखमरी को बढ़ा सकता है. पाकिस्तान में धान और मक्के की भी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है, लेकिन इसमें ज्यादातर उत्पादन एक्सपोर्ट कर दिया जाता है. ऐसे में पाकिस्तान की आबादी गेहूं पर निर्भर करती है।
पाकिस्तान की कुल GDP में गेहूं का 3 फीसदी हिस्सा
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की कुल जीडीपी में तकरीबन 2 से 3 प्रतिशत हिस्सा गेहूं और उससे बने उत्पादों का है. अमेरिका की गेहूं उत्पादन में कटौती को लेकर रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग छिड़ी हुई है. वहीं इस लड़ाई में बलोच लड़ाके अफगानिस्तान का साथ दे रहे हैं. पाकिस्तान की चिंता इस बात से भी ज्यादा बढ़ी है कि बलोच के एक बड़े हिस्से पर गेहूं की खेती की जाती है.बता दें बलोच इलाका तीन देशों पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में आता है. इनमें सबसे बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में आता है. वहीं इसके अलावा दूसरा बड़ा हिस्सा ईरान के सिस्तान और बलूचेस्तान प्रांत में आता है. जबकि तीसरा हिस्सा अफगानिस्तान के दक्षिण क्षेत्रों में आता है।
मुश्किल में पड़ी पाकिस्तान की गेहूं की खेती
पाकिस्तान में खेती की बढ़ती लागत और घटती पैदावार ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है. वहीं पाकिस्तान सरकार की तरफ से भी किसानों के लिए उदासीनता है. सरकार की तरफ से किसानों को कोई भी मदद नहीं दी जा रही है.पाकिस्तान में गेहूं की पैदावार कम होने में लंबे समय से सूखा होना बड़ी वजह है. कई इलाके बारिश पर निर्भर करते हैं. सूखे की मार के कारण पाकिस्तान में गेहूं की खेती का एरिया 2025-26 में 10.37 मिलियन हेक्टेयर से घटकर 9.1 मिलियन हेक्टेयर तक रह गया है।
मुझसे नाराज थीं प्रियंका...जैसे ही वायनाड पहुंचे वह करने लगी बात यह यहां का जादू है
27 Feb, 2026 07:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भूस्खलन पीड़ितों के घरों के शिलान्यास समारोह में राहुल गांधी ने सुनाया किस्सा
वायनाड। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी बहन प्रियंका गांधी के बारे में एक बेहद दिलचस्प किस्सा शेयर किया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, कि वायनाड ने उनके बीच की नाराजगी को किसी भी शांति वार्ता से ज्यादा तेजी से सुलझा दिया। राहुल गांधी 2024 के वायनाड भूस्खलन पीड़ितों के लिए कांग्रेस द्वारा बनाए जा रहे घरों के शिलान्यास समारोह में हिस्सा लेने यहां पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने राजनीति और अपने निजी जीवन को लेकर कुछ खास बातें शेयर कीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वायनाड की जनता को अपना बड़ा परिवार बताते हुए राहुल गांधी ने अपनी और बहन प्रियंका के बीच हुई हालिया अनबन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह और उनकी बहन अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़ते रहते हैं। राहुल गांधी ने बताया कि मेरी बहन मुझसे बात नहीं कर रही थी। बात इतनी बढ़ गई थी कि इसका जिक्र उन्हें अपनी मां सोनिया गांधी से भी करना पड़ा। राहुल ने बताया कि जब मेरी मां ने पूछा कि प्रियंका कैसी है, तो मैंने उन्हें बताया कि वह मुझसे नाराज है और बात नहीं कर रही है। इसके बाद राहुल ने इस नाराजगी को दूर करने के लिए अपनाई गई तरकीब भी बताई।
राहुल ने कहा कि मैंने मां (सोनिया) से कहा कि मैंने उसे (प्रियंका) को जाल में फंसा लिया है। एक बार जब वह वायनाड आ जाएगी, तो वह मुझसे बात किए बिना नहीं रह पाएगी। हालांकि, उनकी यह तरकीब तुरंत काम नहीं आई और फ्लाइट में भी प्रियंका उनसे नाराज ही रहीं। राहुल ने आगे कहा लेकिन जैसे ही हम वायनाड पहुंचे, उसने मुझसे फिर से बात करना शुरू कर दिया। यही वायनाड का जादू है।
बता दें राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में केरल के वायनाड और यूपी के रायबरेली, दोनों ही सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने वायनाड सीट खाली कर दी थी, जिसके बाद हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर अब उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। राहुल ने कहा कि नेताओं को अपने बारे में ज्यादा खुला और पारदर्शी होना चाहिए। उन्होंने मंच से कहा कि मैं 2004 से राजनीति में हूं, करीब 22 साल हो गए हैं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, चीजों के बारे में आपके सोचने का नजरिया बदलने लगता है।
शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर तंज: सिर्फ विलाप कर रही है
27 Feb, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ग्वालियर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फसल बीमा की राशि, भारत अमेरिका ट्रेड डील सहित अन्य राजनीतिक मुद्दों पर अपना बयान दिया।केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस पर उनको नमन करते हुए कहा कि भारत माता की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्योछावर किया और वह आज भी हमारी प्रेरणा हैं। वह देश के लिए संपूर्ण जीवन देकर गए। हम देश के लिए जिए यही संकल्प करें और देश के लिए जीने का मतलब यही है कि हम अपनी ड्यूटी अपना कर्तव्य जो काम हमारी तरफ तय किया गया है उसे कैसे मेहनत से करें, ईमानदारी से करें, प्रामाणिकता के साथ करें और केवल अपना ही ना सोच अपने साथ-साथ समाज का भी देश का भी विचार करें। स्वदेशी अपनाएं,अपने देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान करें।
शक्तिशाली भारत का निर्माण
इजराइल की संसद में पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कई चीजें पहली बार हो रही हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एक वैभवशाली गौरवशाली संपन्न समृद्ध शक्तिशाली आत्मनिर्माण और विकसित भारत का निर्माण हो रहा है। यह हम नहीं कहते जमाना कहता है। भारत आगे बढ़ रहा है और मेरा विश्वास है कि आज जिस गति से भारत आगे बढ़ रहा है हम विश्व बंधु तो हैं ही, हम अपनी नहीं सोचते हम दुनिया की भी सोचते हैं। दुनिया को बेहतर दिशा देने में हम सक्षम होंगे।
अन्नदाताओं के चरणों में मेरा बार-बार प्रणाम
मध्य प्रदेश में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कल वोत्सवाना से आठ चीतों के कूनो आने को लेकर शिवराज सिंह ने कहा कि चीतों का स्वागत है। इससे पर्यटन बढ़ेगा। उनको फिर से स्थापित करने का यह काम हुआ है। इससे न केवल टूरिज्म में बढ़ेगा जीव के प्रति जो हमारा कर्तव्य है हम उसकी पूर्ति भी करेंगे और पर्यावरण भी अच्छा होगा। फसल बीमा की राशि किसानों के खातों में कब तक आएगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा अन्नदाताओं के चरणों में मेरा बार-बार प्रणाम है। मेरे लिए किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा है। मैं हमेशा खेतों में ही रहता हूं। हम एक के बाद एक अलग-अलग योजनाओं के क्रियान्वयन के जरिए किसानों के जीवन को बेहतर बनाने का काम कर रहे हैं। उनका जायज हक उन्हें जरूर मिलेगा।
किसानों के हित सुरक्षित
भारत- अमेरिका ट्रेड डील को कांग्रेस द्वारा किसान विरोधी कहने के सवाल पर कहा कि यह कांग्रेस कह रही है, जो देश के लिए कुछ नहीं कर पाए हैं वह सिर्फ कहेंगे। वह सिर्फ विलाप कर रहे हैं, सच यह है कि भारत के सभी हित सुरक्षित हैं। किसानों के हित सुरक्षित हैं। एक कृषि मंत्री भी कह रहा है, एक किसान भी कह रहा है, किसान निश्चिंत रहें। वहीं ASI की रिपोर्ट में भोजशाला के हिंदू मंदिर होने के खुलासे के सवाल पर शिवराज सिंह ने कहा कि सारी रिपोर्ट कोर्ट में है।
ओडिशा राज्यसभा चुनाव में सियासी चाल तेज, बीजद ने छह नामांकन फॉर्म लेकर बढ़ाई हलचल
27 Feb, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भुवनेश्वर। ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अधिसूचना जारी होते ही बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने एक साथ छह नामांकन फॉर्म हासिल कर लिए, जिससे पार्टी की रणनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
दरअसल, 147 सदस्यीय विधानसभा के आंकड़ों के मुताबिक बीजद को एक सीट पक्की मानी जा रही है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है। चौथी सीट के लिए किसी भी दल के पास जरूरी 30 प्रथम वरीयता वोट नहीं हैं। भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिलाकर कुल संख्या 82 हो जाती है, जो तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक आंकड़े से आठ कम है।
वहीं, बीजद के पास दो विधायकों के निलंबन के बाद 48 विधायक रह गए हैं। एक सीट जीतने के बाद उसके पास 18 प्रथम वरीयता वोट बचेंगे, जबकि दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 12 और वोटों की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि सीपीआई-एम का एक विधायक है। इस बीच कांग्रेस ने बीजद प्रमुख नवीन पटनायक से मुलाकात का समय मांगा है और चौथी सीट के लिए संयुक्त उम्मीदवार उतारने की इच्छा जताई है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘संख्या बल कम होने के बावजूद हम राज्यसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। मैं दिल्ली जाकर हाईकमान से चर्चा करूंगा और उसके बाद तय होगा कि पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी या किसी बाहरी उम्मीदवार को समर्थन देगी।’ उधर, बीजद की राजनीतिक मामलों की समिति सर्वसम्मति से नवीन पटनायक को उम्मीदवारों के चयन का अंतिम अधिकार सौंप दिया है।
विधानसभा में विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने कहा कि सभी विधायक पार्टी अध्यक्ष के फैसले के अनुसार मतदान करेंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पांच मार्च तक चलेगी। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च को होगी, जबकि 9 मार्च नाम वापसी की अंतिम तिथि तय की गई है। वहीं राज्यसभा चुनाव का मतदान 16 मार्च को होगा। ये चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि अप्रैल में बीजद के निरंजन बिशी और मुन्ना खान व भाजपा के सुजीत कुमार और ममता मोहंता का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं, स्वास्थ्य को लेकर कभी लापरवाही नहीं बरती
27 Feb, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने पिछले साल अचानक दिए इस्तीफे को लेकर दिया बयान
चुरू। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पिछले साल जुलाई में दिए गए अपने अचानक इस्तीफे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने गुरुवार को राजस्थान के चूरू में एक जनसभा को संबोधित करते साफ किया कि उनका इस्तीफा खराब स्वास्थ्य की वजह से नहीं था, बल्कि उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया था। धनखड़ ने कहा कि कहते हैं पहला सुख निरोगी काया। मैंने स्वास्थ्य के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती। मैंने जब कहा कि मैं पद त्याग रहा हूं, तो मैंने कभी यह नहीं कहा कि मैं बीमार हूं। मैंने कहा कि मैं स्वास्थ्य को अहमियत दे रहा हूं और देनी भी चाहिए।
बता दें 21 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति को सौंपे गए अपने त्यागपत्र में धनखड़ ने लिखा था कि वह स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। पिछले साल अगस्त में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे और उसके बाद उनकी चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। राहुल गांधी ने कहा था कि धनखड़ ने इस्तीफा क्यों दिया, इसके पीछे एक बड़ी कहानी है। आप में से कुछ लोग इसे जानते होंगे, कुछ नहीं। भारत के उपराष्ट्रपति ऐसी स्थिति में क्यों हैं कि वह एक शब्द नहीं कह सकते... और उन्हें छिपना पड़ रहा है... अचानक वह व्यक्ति जो राज्यसभा में खूब गरजता था, वह पूरी तरह से शांत हो गया।
धनखड़ के इस चूरू दौरे की मेजबानी पूर्व कांग्रेस सांसद राम सिंह कस्वां और ओलंपियन व पूर्व कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया ने की। बता दें राम सिंह कस्वां चूरू के मौजूदा कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां के पिता हैं। अपने दौरे का कारण बताते हुए धनखड़ ने कहा कि वह राम सिंह कस्वां के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे और यही फिक्र उन्हें चूरू खींच लाई। धनखड़ ने यह भी याद किया कि जब भी वह खुद अस्वस्थ हुए हैं, तो उनका हालचाल जानने वालों में राम सिंह हमेशा सबसे आगे रहे।
नई रणनीति पर काम: भाजपा संगठन में युवाओं को मिलेगा बड़ा रोल
27 Feb, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) में नए युवा अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) के आने के बाद संगठन में युवा और नए नेतृत्व को जगह देने की तैयारी शुरू हो गई है। महासचिव और सचिव (General Secretaries and Secretaries) स्तर पर 60 साल से कम उम्र के नेताओं को तरजीह दी जाएगी, जबकि उपाध्यक्ष स्तर पर अनुभवी वरिष्ठ नेताओं को बनाए रखने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय संगठन में आधे से ज्यादा पदाधिकारियों के बदलाव की संभावना है और इनमें कई नए चेहरे विभिन्न राज्यों से केंद्रीय संगठन में शामिल किए जाएंगे।
नए नेतृत्व में युवा चेहरे
भविष्य की भाजपा को तैयार करने के प्रयास में अध्यक्ष समेत लगभग 40 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में करीब 60 फीसदी नए चेहरों को शामिल करने की योजना है। महासचिव और सचिव स्तर पर उम्र सीमा 60 साल के आसपास रखी जाएगी, लेकिन उपाध्यक्ष स्तर पर कुछ लचीलापन रखा जाएगा ताकि अनुभवी नेताओं को संगठन में शामिल रखा जा सके। मौजूदा टीम के आधे से अधिक पदाधिकारी बदलने की संभावना है, जबकि 60 साल से अधिक उम्र वाले महासचिव और सचिवों को नई भूमिका दी जा सकती है।
पदों की संरचना और महिलाओं की भागीदारी
भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में अध्यक्ष के अलावा 13 उपाध्यक्ष, 10 महासचिव, 15 सचिव और एक कोषाध्यक्ष शामिल होते हैं। सूत्रों के अनुसार, नई टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी के संविधान में एक तिहाई महिला पदाधिकारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन यह केवल राजनाथ सिंह के कार्यकाल में ही संभव हो पाया था। नई टीम में देश के सभी हिस्सों का प्रतिनिधित्व और जातीय व सामाजिक समीकरणों का संतुलन भी रखा जाएगा।
बदलाव पर प्रक्रिया और समय
भाजपा की नई टीम को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा में अभी समय लग सकता है। चूंकि बदलाव व्यापक स्तर पर होंगे, इसलिए कई स्तरों पर चर्चा और विचार-विमर्श अभी बाकी है। संसद सत्र और आगामी चुनावों पर पार्टी का ध्यान अधिक होने के कारण बदलाव की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
लोकायुक्त जांच के मुद्दों पर विस्तृत बहस कराने की अपील
27 Feb, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजनीति। मध्य प्रदेश विधानसभा में लोकायुक्त और नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों को लेकर सियासत तेज हो गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र सौंपकर लोकायुक्त तथा CAG के प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा कराए जाने की मांग की है।
महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर चर्चा की आवश्यकता
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि लोकायुक्त और Comptroller and Auditor General of India (CAG) द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों पर अब तक विधानसभा में विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि ये प्रतिवेदन शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और संभावित अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, जिन पर सदन में विचार-विमर्श आवश्यक है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
उमंग सिंघार ने पत्र में आग्रह किया है कि जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से इन रिपोर्टों को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जाए. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की जिम्मेदारी है कि वह लोकायुक्त और CAG जैसी संवैधानिक संस्थाओं की रिपोर्टों पर गंभीरतापूर्वक विचार करे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा होती है तो न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होगी. इससे जनता के बीच सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ आधार मिलेगा।
बजट सत्र में टकराव के आसार
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है. अब यह देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस अनुरोध पर क्या निर्णय लेते हैं और क्या आने वाले दिनों में इन महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा होती है या नहीं।
AIADMK को झटका: ओ. पन्नीरसेल्वम ने थामा DMK का दामन, सियासी समीकरण बदले
27 Feb, 2026 02:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई. तमिलनाडु (Tamil Nadu) में विधानसभा चुनावों (assembly elections) से ठीक पहले सियासत (political) में हलचल तेज हो गई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK से निष्कासित नेता ओ. पन्नीरसेल्वम (Panneerselvam) आज सत्ताधारी पार्टी DMK में शामिल हो गए हैं.
पन्नीरसेल्वम तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन्हें दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता रहा है. AIADMK में उनके और एडप्पादी के. पलानीस्वामी के बीच लंबे समय तक नेतृत्व संघर्ष चला, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने से साउथ तमिलनाडु का वोट बैंक प्रभावित हो सकता है. यहां थेवर समुदाय में पन्नीरसेल्वम का समर्थन मजबूत माना जाता है.
DMK कार्यकर्ता ने जताई खुशी
पन्नीरसेल्वम के डीएमके में शामिल होने पर डीएमके कार्यकर्ता अभिषेक ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा, ‘ये एक शानदार दिन है. लोग साबित कर रहे हैं कि हम फिर से एक मजबूत सरकार बनाने जा रहे हैं. हम अभी मजबूत हैं और आगे और भी मजबूत होंगे. इसलिए, ये अच्छा होगा ये (ओपीएस के डीएमके में शामिल होने की संभावना) हमारी नेतृत्व क्षमता को दिखाता है कि कोई दूसरा (पूर्व) मुख्यमंत्री भी हमारे साथ जुड़ सकता है. हमें हराने वाला कोई नहीं है.’
तीन बार मुख्यमंत्री बने पन्नीरसेल्वम
बता दें कि ओ.पन्नीरसेल्वम पहली बार 2001 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे. हालांकि 6 महीने बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद 2014 में उन्होंने दूसरी बार राज्य के सीएम पद का कार्यभार संभाला. लेकिन इस बार वो एक महीने तक ही इस पद पर बने रह सके. पनीरसेल्वम 2016 में तीसरी बार राज्य के सीएम बने थे, लेकिन 2017 में उन्होंने एक बार फिर इस्तीफा दे दिया था.
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव, सुनेत्रा पवार बनीं NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष
27 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra politics) में बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को सर्वसम्मति से एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। पार्टी बैठक में लिया गया यह फैसला राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। अजित पवार की विमान हादसे में मौत के बाद पार्टी और सत्ता दोनों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल।
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति अचानक नए मोड़ पर आ गई थी। उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को सौंपी गई और अब उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कमान भी मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा चल रही थी, लेकिन अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए नया नेतृत्व तय किया और सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया।
मुंबई अधिवेशन में सर्वसम्मति से फैसला
एनसीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन 2026 मुंबई के वर्ली इलाके में आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। अधिवेशन के दौरान सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को सभी नेताओं ने एकमत से मंजूरी दी। पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की। साथ ही यह भी तय किया गया कि प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहेंगे, जबकि महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सांसद सुनील तटकरे संभालेंगे।
बारामती से विधायक बनने की चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि सुनेत्रा पवार जल्द ही बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। यह सीट अजित पवार की राजनीतिक पहचान मानी जाती रही है। अगर उपचुनाव होता है तो सांसद सुप्रिया सुले ने उम्मीद जताई है कि यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में सुनेत्रा पवार विधानसभा पहुंचकर राज्य की राजनीति में और मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।
असम में चुनावी तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर
27 Feb, 2026 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) से पहले सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने गठबंधन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए नई तारीख 10 मार्च तय की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ बातचीत एक-दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि असम गण परिषद के साथ 9–10 मार्च तक सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद गठबंधन औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा करेगा।
कुछ दलों से सहमति, कुछ से बातचीत जारी
सरमा के अनुसार, राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ सीटों को लेकर समझौता पहले ही हो चुका है। देरी की एक वजह हाल में हुए राज्यसभा चुनाव भी बताए गए, जिनके कारण सहयोगी दल रणनीतिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
असम में एनडीए के प्रमुख घटक दलों में
भारतीय जनता पार्टी
असम गण परिषद
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं।
इसके अलावा जनशक्ति पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा है, हालांकि वर्तमान विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।
पहले कई बार बदली समयसीमा
मुख्यमंत्री इससे पहले भी सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग समयसीमाएं घोषित कर चुके थे। फरवरी और जनवरी में भी समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम सहमति टलती रही। अब 10 मार्च को निर्णायक तारीख माना जा रहा है।
परिसीमन के बाद बदला चुनावी गणित
2023 के परिसीमन के बाद राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली हैं। कुछ सीटें सामान्य से आरक्षित श्रेणी में गई हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया है। इससे दलों के बीच सीट समायोजन और अधिक जटिल हो गया है।
वर्तमान विधानसभा की स्थिति
126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि उसके सहयोगी दल भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। विपक्षी खेमे में
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
शामिल हैं, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक हैं।
चुनाव से पहले ताकत का संतुलन साधने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन साधना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 10 मार्च की प्रस्तावित घोषणा को राज्य की चुनावी राजनीति का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।
संजय राउत को राहत, BJP नेता की पत्नी की मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी
27 Feb, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सत्र अदालत ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भाजपा नेता किरिट सोमैया (Kirit Somaiya) की पत्नी मेधा सोमैया (Medha Somaiya) द्वारा दायर शिकायत में उन्हें बरी कर दिया।
इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली।
राउत की ओर से अधिवक्ता मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य नहीं रखा था। वहीं, मेधा सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने कहा कि जिस कथित घोटाले का आरोप लगाया गया, जांच में उसका कोई आधार नहीं मिला, इसलिए सार्वजनिक आरोप मानहानिकारक थे।
दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राउत ने मीडिया से बातचीत में मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण परियोजना में 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था और इसमें सोमैया दंपत्ति के जुड़े होने की बात कही थी।
शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी। परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे 100 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं बताया गया।
मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है।
अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।
भाजपा की राष्ट्रीय टीम में बड़े बदलाव की तैयारी, 60 साल से कम उम्र के नेताओं को मिलेगा मौका
27 Feb, 2026 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा (BJP) में नए युवा अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) के आने के बाद संगठन में युवा और नए नेतृत्व को जगह देने की तैयारी शुरू हो गई है। महासचिव और सचिव (General Secretaries and Secretaries) स्तर पर 60 साल से कम उम्र के नेताओं को तरजीह दी जाएगी, जबकि उपाध्यक्ष स्तर पर अनुभवी वरिष्ठ नेताओं को बनाए रखने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय संगठन में आधे से ज्यादा पदाधिकारियों के बदलाव की संभावना है और इनमें कई नए चेहरे विभिन्न राज्यों से केंद्रीय संगठन में शामिल किए जाएंगे।
नए नेतृत्व में युवा चेहरे
भविष्य की भाजपा को तैयार करने के प्रयास में अध्यक्ष समेत लगभग 40 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में करीब 60 फीसदी नए चेहरों को शामिल करने की योजना है। महासचिव और सचिव स्तर पर उम्र सीमा 60 साल के आसपास रखी जाएगी, लेकिन उपाध्यक्ष स्तर पर कुछ लचीलापन रखा जाएगा ताकि अनुभवी नेताओं को संगठन में शामिल रखा जा सके। मौजूदा टीम के आधे से अधिक पदाधिकारी बदलने की संभावना है, जबकि 60 साल से अधिक उम्र वाले महासचिव और सचिवों को नई भूमिका दी जा सकती है।
पदों की संरचना और महिलाओं की भागीदारी
भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में अध्यक्ष के अलावा 13 उपाध्यक्ष, 10 महासचिव, 15 सचिव और एक कोषाध्यक्ष शामिल होते हैं। सूत्रों के अनुसार, नई टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी के संविधान में एक तिहाई महिला पदाधिकारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन यह केवल राजनाथ सिंह के कार्यकाल में ही संभव हो पाया था। नई टीम में देश के सभी हिस्सों का प्रतिनिधित्व और जातीय व सामाजिक समीकरणों का संतुलन भी रखा जाएगा।
बदलाव पर प्रक्रिया और समय
भाजपा की नई टीम को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा में अभी समय लग सकता है। चूंकि बदलाव व्यापक स्तर पर होंगे, इसलिए कई स्तरों पर चर्चा और विचार-विमर्श अभी बाकी है। संसद सत्र और आगामी चुनावों पर पार्टी का ध्यान अधिक होने के कारण बदलाव की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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