राजनीति
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज, अब बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन? रेस में 5 बड़े नाम
5 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की सियासत ने एक बार फिर सभी को चौंका दिया है. विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद सीएम पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद को छोड़कर अब राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं. गुरुवार 5 मार्च को वे राज्यसभा के लिए नामांकन भर सकते हैं. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में नए सीएम फेस को लेकर चर्चा तेज हो गई है. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर बिहार को जल्द ही नया सीएम चेहरा मिल सकता है।
राज्यसभा के लिए भर सकते हैं नामांकन
राजनीतिक सूत्रों और भाजपा-जदयू के नेताओं के अनुसार, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए अपना नामांकन आज दाखिल कर सकते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री आज यानी गुरुवार को पटना में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नामांकन में शामिल होने के लिए आ सकते हैं. इसी दौरान नीतीश कुमार के नए भविष्य को लेकर भी आधिकारिक घोषणा हो सकती है. फिलहाल इस बात की किसी भी तरह से आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार ने नामांकन पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं।
बिहार का अगला सीएम कौन?
नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफे के बाद सबसे बड़ी चर्चा का विषय है कि बिहार की कमान किसके हाथ में होगी. सूत्रों के अनुसार, इस बार बिहार में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भाजपा से ही हो सकते हैं. सीएम चेहरे के लिए कई नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. इस रेस में दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का नाम जोर-शोर से उभरकर सामने आ रहा है. वहीं इसके अलावा दिलीप जायसवाल, दीघा से भाजपा विधायक संजीव चौरसिया जैसे नाम भी चर्चा में हैं। सीएम फेस की इस रेस में ‘डार्क हॉर्स’ के रूप में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी बड़े दावेदार माने जा रहे हैं. इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री की रेस में विजय चौधरी और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
बिहार का राजनीतिक समीकरण
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में भाजपा और जेडीयू की भूमिका पूरी तरह बदल सकती है. फिलहाल मौजूदा एनडीए सरकार में सत्ता की कमान जेडीयू के पास है. इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा हैं.राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाते ही सत्ता की कमान जेडीयू के बजाय भाजपा के हाथों में होगी. वहीं भाजपा नेता के सीएम बनने पर नई सरकार में जेडीयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।
कांग्रेस का राज्यसभा कार्ड खुला, 6 प्रत्याशियों की सूची जारी; सिंघवी-नरेंद्र रेड्डी को तेलंगाना से मौका
5 Mar, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: कांग्रेस पार्टी ने तेलंगाना से दो राज्यसभा सीटों के लिए अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी को नॉमिनेट करने का फैसला किया है. पार्टी ने गुरुवार को 10 राज्यों में 16 मार्च को होने वाले दो साल में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए छह उम्मीदवारों की घोषणा की.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी तेलंगाना से मौजूदा सदस्य हैं, जबकि रेड्डी अभी मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के सलाहकार हैं. तेलंगाना में अप्रैल में दो सीटें खाली होगी. इस बीच फूलो देवी नेताम, करमवीर बौद्ध और क्रिस्टोफर तिलक को क्रमशः छत्तीसगढ़, हरियाणा और तमिलनाडु से मैदान में उतारा गया है.
एआईसीसी के जनरल सेक्रेटरी के सी वेणुगोपाल ने एक ऑफिशियल कम्युनिकेशन में नामों की घोषणा की. एआईसीसी की घोषणा के बाद नरेंद्र ने सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित कांग्रेस नेताओं का शुक्रिया अदा करने के लिए सोशल मीडिया एक्स का सहारा लिया.
रैली में गरजे टीवीके प्रमुख विजय, तमिलनाडु चुनाव को बताया भावनाओं की लड़ाई
5 Mar, 2026 08:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तंजावुर। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों और समीकरणों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। इसी बीच, अभिनेता से नेता बने विजय थलापति ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम की तरफ से मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने बुधवार को एक सभा में चुनाव को लेकर अपनी भावनाएं जाहिर कीं और सत्ताधारी दल पर निशाना साधा।
विजय ने तंजावुर में अपनी पार्टी के पदाधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘आने वाला विधानसभा चुनाव दूसरों के लिए एक आम चुनाव हो सकता है, लेकिन मेरे और मुझे चाहने वाले लोगों के लिए यह जज्बातों का समंदर है’। उन्होंने तमिलनाडु की जनता से अपील की कि वे आगामी चुनावों में उन्हें एक मौका दें।
अपने संबोधन में विजय ने कहा कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘सीटी’ है। यह ‘सीटी’ तमिलनाडु के हर घर और हर मतदान केंद्र में गूंजनी चाहिए, ताकि पार्टी को शानदार जीत मिल सके। उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा, ‘दिल्ली की टीम क्रिकेट में भी तमिलनाडु की टीम को नहीं हरा सकती’। इसके जरिए उन्होंने आईपीएल टीम सीएसके के नारे ‘व्हिसिल पोडू’ का भी जिक्र किया।
विजय थलापति ने सत्ताधारी डीएमके पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने एक बार फिर डीएमके को ‘तीया शक्ति’ यानी ‘बुरी ताकत’ कहा। विजय ने यह भी दावा किया कि अब तो राज्य के बच्चे भी डीएमके को इसी नाम से बुलाने लगे हैं।
अर्धकुंभ और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की रणनीति
3 Mar, 2026 11:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में मार्च का महीना हलचल भरा रहने वाला है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आगामी 7 मार्च को हरिद्वार दौरे पर आ रहे हैं. जिसकी तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है. यह मुख्य रूप से सहकारिता सम्मेलन है. इसके अलावा उनका यह दौरा आधिकारिक रूप से साल 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ की तैयारियों की समीक्षा से जुड़ा है.
वहीं, धामी सरकार के चार साल के उपलक्ष्य में भले ही यह आयोजन हो रहा हो, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है. खास कर हरिद्वार जैसे स्थान का चयन भी बेहद अहम है.
होली मिलन से अर्धकुंभ तक राजनीतिक संकेत: बीती 2 मार्च को देहरादून स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित होली मिलन समारोह के दौरान सीएम धामी ने इस दौरे की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया कि साल 2027 में हरिद्वार में प्रस्तावित अर्धकुंभ के आयोजन के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की है
उन्होंने इसके लिए केंद्र का आभार जताते हुए कहा कि यह राशि आयोजन की आधारभूत संरचना को मजबूत करने में सहायक होगी. उन्होंने कहा कि आगामी 2027 का अर्धकुंभ दिव्य और भव्य होगा, इसके लिए मेला प्रशासन अधिकारी और कर्मचारी अभी से जुटे हुए हैं.
समयबद्ध तरीके से सभी काम पूरे किए जाएंगे और आयोजन को ऐतिहासिक बनाया जाएगा. सीएम धामी की मानें तो 7 मार्च को गृह मंत्री अमित शाह हरिद्वार के बैरागी कैंप पहुंचेंगे. जहां अर्धकुंभ की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और संबंधित अधिकारियों से फीडबैक लेंगे, साथ ही जनता से संवाद भी करेंगे.
उच्चस्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा: गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले आज भी मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण हों.
सीएम धामी ने विशेष रूप से सुरक्षा यातायात प्रबंधन पार्किंग व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सतर्कता बरतने को कहा. उन्होंने ये भी निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
सीएम धामी ने कहा कि हरिद्वार के बैरागी कैंप में प्रस्तावित कार्यक्रम में ऐतिहासिक भीड़ उमड़ने की संभावना है. केंद्र की ओर से 500 करोड़ की राशि जारी किया जाना, इस बात का संकेत है कि कुंभ जैसा धार्मिक आयोजन राज्य के लिए कितना महत्वपूर्ण है. उन्होंने ये भी संकेत दिए कि अमित शाह राज्य के लिए कुछ नई योजनाओं की घोषणाएं भी कर सकते हैं.
चुनावी शंखनाद की आहट: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल धार्मिक आयोजन की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा. धामी सरकार के चार साल पूरे होने के अवसर पर यह एक बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी हो सकता है.
बीजेपी कार्यालय की मानें तो गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश बीजेपी की टोली की बैठक में भी शामिल होंगे. जिसमें कोर कमेटी के सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे. बैठक में विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति पर मंथन होने की संभावना है.
"गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में आगामी चुनाव की तैयारियों की समीक्षा होगी. जिसमें भविष्य की रणनीति को और पुख्ता किया जाएगा."- महेंद्र भट्ट, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
हरिद्वार की सीटें क्यों अहम? हरिद्वार जिला, राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हरिद्वार ग्रामीण, खानपुर, मंगलौर और पिरान कलियर जैसी सीटों पर सफलता नहीं मिल सकी थी. ऐसे में बीजेपी इस बार धार्मिक आयोजन और विकास कार्यों के जरिए यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है.
"कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ नहीं है. बल्कि, आगामी कुंभ की वैश्विक तैयारी का संदेश देना भी है. हमारी सरकार ने चार साल में जो विकास कार्य किए हैं, उन्हें प्रदर्शनी के माध्यम से जनता के सामने रखा जाएगा. जब केंद्र का बड़ा नेता आता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इस बार हम और बड़ी बढ़त के साथ सरकार बनाएंगे."- मदन कौशिक, हरिद्वार विधायक/पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
कांग्रेस का पलटवार: दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक स्टंट बताया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी बात रखी है. उन्होंने सूबे के वर्तमान हालातों पर चिंता जताते हुए घेरा है.
"राज्य में जिस प्रकार का माहौल बनाया जा रहा है, वो चिंता का विषय है. अगर हरिद्वार जैसी पवित्र नगरी में आकर गृह मंत्री विकास की बात करते हैं तो स्वागत है, लेकिन भटकाने वाली राजनीति ठीक नहीं है. बीजेपी चाहे केंद्र की पूरी सरकार को उत्तराखंड भेज दे, जनता बदलाव का मन बना चुकी है."- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
राजनीतिक विश्लेषक की राय: राजनीति के वरिष्ठ जानकार सुनील दत्त पांडे का मानना है कि बीजेपी कुंभ और विधानसभा चुनाव दोनों को समानांतर साधने की कोशिश कर रही है. उनके अनुसार, पहले अमित शाह फिर बाद में प्रधानमंत्री मोदी का प्रस्तावित दौरा यह दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक रणनीति के साथ जोड़ा जा रहा है. हरिद्वार में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को चुनौती मिलती रही है. ऐसे में यह कार्यक्रम कितना असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
पीएम मोदी का भी दौरा प्रस्तावित: बता दें कि 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रस्तावित दौरा है. यानी गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है. यदि ऐसा होता है तो धामी सरकार के चार साल पूरे होने का यह आयोजन राज्य में चुनावी बिगुल साबित हो सकता है.
बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए 9 उम्मीदवारों की सूची जारी
3 Mar, 2026 10:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने 9 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में सबसे पहला और चर्चित नाम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का है, जिन्हें बिहार से मैदान में उतारा गया है.
इस फैसले के पीछे पार्टी की सबसे प्रमुख रणनीतिक कदम नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा भेजना है. क्योंकि पार्टी अध्यक्ष के रूप में नवीन को संसद के उच्च सदन में जगह देकर भाजपा सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका शीर्ष नेता संसदीय बहस, नीति-निर्माण और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले सके.
चुनाव आयोग ने 16 मार्च को ही 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की है, जिसमें भाजपा को अपने गठबंधन और सत्ताधारी राज्यों की वजह से मजबूत स्थिति हासिल होने की उम्मीद है. उम्मीदवारों की पूरी सूची इस प्रकार है
नितिन नबीन (बिहार)
शिवेश कुमार (बिहार)
तेराश गोवाल्ला (असम)
जोगेन मोहन (असम)
लक्ष्मी वर्मा (छत्तीसगढ़)
संजय भाटिया (हरियाणा)
मनमोहन सामल (ओडिशा)
सुजीत कुमार (ओडिशा)
राहुल सिन्हा (पश्चिम बंगाल)
भाजपा ने इन नामों को उन राज्यों से चुना है जहां पार्टी या एनडीए गठबंधन विधानसभा में मजबूत स्थिति में है. बिहार से दो उम्मीदवार उतारकर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस महत्वपूर्ण राज्य में अपनी उपस्थिति और प्रभाव बढ़ाना चाहती है. पार्टी की इस फैसले के पीछे आखिर रणनीति क्या है ,यदि देखें तो इस फैसले के पीछे कई बातें पार्टी सूत्रों के माध्यम से बताई जा रहीं हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे मुख्य वजह और सबसे बड़ा कदम नितिन नविन को बिहार से राज्यसभा भेजना बताया जा रहा है. पार्टी अध्यक्ष के रूप में नवींन को संसद के उच्च सदन में जगह देकर भाजपा सुनिश्चित करना चाहती है कि उसका शीर्ष नेता संसदीय कार्यों, और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रूप से भाग ले सके.
यदि देखा जाए तो बिहार में आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता की सीट खाली हो रही है और एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल है, इसलिए मजबूत उम्मीदवार के जरिए यह सीट आसानी से जीती जा सकती है।दूसरी रणनीति क्षेत्रीय संतुलन बनाने की है. असम और छत्तीसगढ़ जैसे भाजपा शासित राज्यों से स्थानीय चेहरों को जगह देकर पार्टी संगठन को मजबूत करने का संदेश देना चाहती है.
इसी तरह ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी उम्मीदवार उतारकर भाजपा विपक्षी राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है. हरियाणा से संजय भाटिया जैसे अनुभवी नेता को शामिल कर अनुभव का लाभ उठाने की योजना है. विशेष रूप से महिलाओं में लक्ष्मी वर्मा और बाकी स्थिति स्थानीय, जनजातीय और क्षेत्रीय नेताओं को जगह देकर भाजपा सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह सूची भाजपा की उस व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है जिसमें 2026 के राज्यसभा चुनावों के जरिए ऊपरी सदन में अपनी ताकत बढ़ाई जाए, ताकि केंद्र में मोदी सरकार की नीतियों को और मजबूती मिल सके.
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, यह पहली सूची है और शेष नामों की घोषणा जल्द की जाएगी। राज्यसभा चुनाव अप्रत्यक्ष होते हैं, इसलिए विधायकों के समर्थन पर सब कुछ निर्भर करेगा. लेकिन एनडीए की मजबूत स्थिति को देखते हुए भाजपा इन 9 में से अधिकांश सीटें जीतने का भरोसा जता रही है.
इस मुद्दे पर नाम ना लेने की शर्त पर भाजपा के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता का कहना है कि यह फैसला पार्टी का संगठनात्मक सोच का फैसला ,उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से शीर्ष नेतृत्व को सभी फैसलों में सम्मिलित करती है और अभी पार्टी अध्यक्ष संसद के सदस्य नहीं है इसलिए संसदीय प्रणाली में उन्हें शामिल करना आवश्यक था इसलिए पार्टी ने ये फैसला लिया. साथ ही उन्होंने 9 की 9 सभी सीटें जीतने का भी दावा किया और फैसले को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी का भी संकेत बताया.
DMK-कांग्रेस सीट बंटवारे पर जारी ठनी, कौन कितनी सीट देने को तैयार?
3 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तमिलनाडु। तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव का आयोजन होना है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। चुनावी तैयारियों के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M K स्टालिन से कांग्रेस के सीनियर लीडर P चिदम्बरम ने मुलाकात की है। जानकारी के मुताबिक, करीब एक घण्टे तक चली मीटिंग में सीट शेयरिंग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई है। हालांकि, P चिदम्बरम ने CM स्टालिन के निवास पर हुई इस मुलाकात के बाद मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।
अब तक, तमिलनाडु के AICC इंचार्ज, गिरीश चोडांकर, कांग्रेस सीट-शेयरिंग कमिटी के हेड के तौर पर DMK के साथ बातचीत कर रहे थे, सूत्रों के मुताबिक उनके टोन को लेकर MK स्टालिन ने आपत्ति दर्ज करवाई थी जिसके बाद अपनी स्ट्रैटेजी बदलते हुए, कांग्रेस हाईकमान ने आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए DMK के साथ सीट-शेयरिंग पर बातचीत करने के लिए तमिलनाडु के सीनियर कांग्रेस लीडर पी चिदम्बरम को भेजा।
सूत्रों के मुताबिक, पहले सत्ता में साझेदारी की मांग पर अड़ी कांग्रेस अब सिर्फ बढ़ी हुई सीटों तक सीमित हो गयी है। पहले 41 सीटों की मांग पर अड़ी कांग्रेस अब 36 सीटों तक आई है लेकिन DMK की ओर से साफ-साफ कह दिया गया है पिछली बार जो 25 सीटें दी गयी थीं उससे एक सीट भी ज्यादा देने की हालत में DMK नहीं है। अगर कांग्रेस चाहे तो एक राज्यसभा की सीट अतिरिक्त दी जा सकती है।
चिदम्बरम के साथ सीएम MK स्टालिन की आज की बैठक के बाद सूत्र इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि 29 सीट और 2 राज्यसभा सीट का फाइनल ऑफर DMK ने कांग्रेस को दिया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से विचार विमर्श के बाद इस पर जल्द फैसला लिए जाने की संभावना है। गौरतलब है कि सोमवार को DMK ने कांग्रेस को दो टूक कह दिया था कि जो 25 सीटें DMK दे रही है अगर कांग्रेस उस पर राजी नहीं है तो वो गठबंधन से बाहर जाने के लिए स्वतंत्र है।
निशांत कुमार बन सकते हैं पार्टी के नए स्टार नेता?
3 Mar, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। पिछले काफी समय से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) के बेटे निशांत कुमार (Nishant Kumar) के राजनीति में आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन अब नीतीश (Nishant Kumar) के करीबी कहे जाने श्रवण कुमार (Shravan Kumar) ने निशांत के राजनीति में एंट्री पर मुहर लगा दी है। श्रवण कुमार बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। श्रवण कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि होली के मौके पर वो यह बात सभी से शेयर करना चाहते हैं कि निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में आने वाले हैं। इतना ही नहीं मंत्री श्रवण कुमार ने निशांत को शुभकामनाएं भी दी हैं।
श्रवण कुमार ने कहा, ‘होली के अवसर पर यह शेयर करना चाहता हूं कि जिसकी चर्चा लंबे अरसे से हो रही है। निशांत कुमार की चर्चा काफी समय से हो रही है। होली के अवसर पर मैं आप लोगों से कहना चाहता हूं कि निशांत कुमार की एंट्री राजनीति में बहुत जल्द होने वाली है। उनकी एंट्री बहुत सक्रिय राजनीति में होगी। लंबे अरसे से लाखों नौजवान उनके राजनीति में आने का सुझाव दे रहे हैं। जो नौजवान उनके राजनीति में आने की मांग कर रहे हैं तो मैं समझता हूं कि उनकी इच्छा जल्द पूरी होगी। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ राजनीति में आगे बढ़ने की शुभकामनाएं।’
राजद की रणनीति: तेजस्वी यादव को राज्यसभा नहीं भेजने पर अंदरूनी चर्चाएँ
3 Mar, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज है। महागठबंधन और एनडीए दोनों ही गठबंधनों में पांचवीं सीट के लिए रणनीतियां लगातार बदल रही हैं। चर्चा थी कि राजद अध्यक्ष तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन महागठबंधन के सूत्र ने इस चर्चा को पूरी तरह खारिज किया। राजद सूत्र ने स्पष्ट किया कि राजद की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव न आया और तेजस्वी राज्यसभा चुनाव 2026 में नहीं उतरने वाले है। वे अपनी वर्तमान जिम्मेदारी यानी बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में ही काम करते रहने वाले है।
लेकिन अब सवाल उठता है कि राजद का उम्मीदवार कौन होगा। राजद के दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है और दोनों ही लालू प्रसाद यादव के करीबी हैं। इस बार पार्टी को अपने महागठबंधन के सीमित संख्याबल के बावजूद किसी एक को जीतने के लिए पूरी मेहनत करनी होगी। सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा उम्मीदवार के लिए राजद के अंदर से दो नाम उभरकर सामने आए हैं। पहला नाम है भूमिहार समाज के एडी सिंह यानी अमरेंद्रधारी सिंह, जो पटना के पालीगंज से हैं। दूसरा नाम है प्रेमचंद गुप्ता, जो लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। फिलहाल खबरों और सूत्रों के अनुसार, इस रेस में गुप्ता का पलड़ा थोड़ा भारी दिख रहा है। हालांकि, नॉमिनेशन प्रक्रिया अभी बाकी है और पूरी तस्वीर तब स्पष्ट होगी।
राजद इस राज्यसभा चुनाव में किसी भी हालत में हार नहीं मानने का संकेत दे रही है। तेजस्वी यादव के न उतरने के बाद अब पार्टी पूरी ताकत और रणनीति के साथ अपने दो करीबी नेताओं में से किसी एक को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। यह चुनाव बिहार की सियासी गुत्थियों और महागठबंधन की ताकत की परीक्षा भी साबित होगा। इस तरह, राज्यसभा चुनाव 2026 में राजद के लिए निर्णायक मोड़ यही है कि लालू प्रसाद यादव किसे अपनी नजरों में चुने और किसे राज्यसभा का टिकट दें। संभावना के मुताबिक, गुप्ता इस बार लालू यादव के दांव पर भारी नजर आ रहे हैं, लेकिन अंतिम नतीजा नॉमिनेशन और वोटिंग के बाद ही स्पष्ट होगा। इस पूरी प्रक्रिया से यह साफ हो गया है कि तेजस्वी के चुनाव में न उतरने के फैसले के बाद भी राजद पूरी रणनीति के साथ मैदान में है और अपने करीबी नेताओं में से किसी एक को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर रहा है।
चुनावी बयानबाजी तेज़: बीजेपी ने आप पर पंजाब और दिल्ली में वादाखिलाफी का आरोप लगाया
3 Mar, 2026 10:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की हालिया टिप्पणियों पर निशाना साधकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने उन पर दिल्ली के साथ धोखा करने और पंजाब में किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रक्ता पूनावाला ने आरोप लगाया कि आप सरकार ने अपने कार्यकाल में दिल्ली को बर्बाद किया और पिछले एक साल में दिल्ली में हुए घटनाक्रमों पर टिप्पणी करने के केजरीवाल के अधिकार पर सवाल उठाया।
बीजेपी प्रवक्ता पूनावाला ने कहा कि वे ही थे जिन्होंने पाठशाला की जगह मधुशाला बनाई। दो कमरों वाले रसोई-घर के घर में रहने का वादा किया था, लेकिन वीवीआईपी सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए शीश महल बनवा दिया। उन्होंने हर विभाग में भ्रष्टाचार और घोटाले किए, और दिल्ली को बर्बाद करने के बाद अब पंजाब को बर्बाद करने जा रहे हैं। उन्हें पिछले एक साल में दिल्ली में जो कुछ हुआ है, उस पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने पंजाब में आप के शासनकाल को लेकर निशाना साधाकर राज्य की जनता से किए चुनावी वादों के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आप के वादे के मुताबिक कितनी महिलाओं को हजार रुपये मिले हैं? आप के वादे के मुताबिक कितने बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता मिला है आपने किसानों से जिन फसलों पर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का वादा किया था, कितने किसानों को वह मिला है? सरकार बनने के सात दिनों के भीतर जिन ड्रग डीलरों को आप खत्म करने का वादा कर रहे थे, उन्हें आपने (आप) कितनी बार पकड़ा है? दिल्ली को धोखा देने के बाद, आप पंजाब को भी धोखा दे रहे हैं और दिल्ली की जनता को उपदेश देने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।
राजनीतिक समीकरण: तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK गठबंधन की सीटों पर चर्चा जारी
3 Mar, 2026 09:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई । तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई ने साफ किया कि कांग्रेस और द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत के बाद समझौता होगा। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों के बीच कोई भ्रम नहीं है। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में बातचीत होती है, और हर पार्टी अधिक सीटों की मांग करती है, और अंततः समझौता होता है। हम डीएमके से कुछ और सीटों की मांग कर रहे हैं, और समझौता हो जाएगा।
कांग्रेस नेता सेल्वपेरुंथगई ने कहा कि डीएमके और कांग्रेस, इंडिया ब्लॉक गठबंधन, स्वाभाविक गठबंधन है, एक वैचारिक गठबंधन है। असहमति की क्या बात है? हर चुनाव में, सभी पार्टियां, यहां तक कि छोटी पार्टियां भी, अधिक सीटों की मांग करती हैं। हमारे मुख्यमंत्री स्टालिन इस पर जरूर विचार करने वाले है। कोई समस्या नहीं है, सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कांग्रेस और तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) की बातचीत की अफवाहों को खारिज कर कहा कि हमने टीवीके से बात नहीं की। किसने कहा कि हमने टीवीके से बात की? मैं पीसीसी अध्यक्ष हूं। मेरे हाई कमांड ने भी मुझे उनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बात करने का कोई निर्देश नहीं दिया। हम कोई गुप्त राजनीति नहीं करते।
ये बयान राज्य में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और डीएमके के बीच चल रही बातचीत के बीच आए हैं। इस बीच, तमिलनाडु के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) प्रभारी गिरीश चोडंकर ने भी डीएमके नेतृत्व के साथ सीटों के बंटवारे पर चल रही बातचीत को लेकर आशा व्यक्त की। चोडंकर ने कहा कि हमने अपनी-अपनी इच्छा सूची साझा कर ली है और जैसे ही यह अंतिम रूप ले लेगी, हम आपको सूचित किया जाएगा। हमें पूरी उम्मीद और विश्वास है कि हमारी इच्छाएं पूरी होंगी।
राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार में NDA गठबंधन पांचों सीटों पर कब्जा जमा सकता है, चिराग पासवान का दावा
3 Mar, 2026 08:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटें जीतने को तैयार है। उन्होंने आगामी चुनावों में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) (राम विलास) की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात की। केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा कि विपक्ष के प्रयासों के बावजूद उनकी हार निश्चित है और गठबंधन पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनावों के संबंध में बैठकें हो चुकी हैं। गठबंधन के भीतर चर्चाएं शुरू हैं।
पासवान ने कहा कि मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए सभी 5 सांसद एनडीए के ही रहने वाले है। वे किस पार्टी से होते हैं, यह बाद की बात है, लेकिन सभी 5 सांसद एनडीए के ही। वे (तेजस्वी यादव) चाहे जो कोशिश करें, लेकिन विधानसभा चुनावों की तरह यहां भी उनकी हार निश्चित है। हमें संख्या बल को लेकर जरा भी संदेह नहीं है। पूरा का पूरा एनडीए गठबंधन एकजुट है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को आगामी द्विवार्षिक राज्यसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है। ये चुनाव 10 राज्यों की 37 सीटों को भरने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं, क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है। चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिसूचना 26 फरवरी को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च है, जिसके बाद 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। उम्मीदवार 9 मार्च तक अपने नामांकन वापस ले सकते हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी।
बंगाल पर अमित शाह का बड़ा दावा—तुष्टिकरण की राजनीति से रुका विकास, कर्ज 8 लाख करोड़ पार
2 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बंगाल में चुनावी बिगुल फूंका। उन्होंने पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में एक जनसभा के दौरान तृणमूल कांग्रेस की नीतियों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण से राज्य का विकास नहीं हो सकता। शाह ने दावा किया कि राज्य आठ लाख करोड़ के कर्ज में डूबा है। शाह ने मदरसों को मिलने वाली आर्थिक मदद पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दूसरे राज्यों के विपक्षी दलों की सियासत पर भी हमले बोले। उन्होंने बिहार, असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए तेजस्वी यादव, गौरव गोगोई और एमके स्टालिन की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की।
आगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भाजपा की परिवर्तन यात्रा का उद्देश्य राज्य में बदलाव लाना और बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि भाजपा पश्चिम बंगाल में भ्रष्ट तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाकर विकास का नया दौर शुरू करना चाहती है। शाह ने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राज्य का विकास प्रभावित हुआ है और बंगाल की स्थिति लगातार खराब हुई है।
ममता बनर्जी पर शाह ने साधा निशाना
अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर गलती से फिर तृणमूल कांग्रेस सत्ता में लौटती है तो सरकार ममता बनर्जी नहीं बल्कि उनके ‘भतीजे’ द्वारा चलाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी राज्य के विकास में रुचि नहीं रखतीं और सिर्फ अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाना चाहती हैं। शाह ने यह भी कहा कि पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा भेजा जा रहा है, जिनके कार्यकाल में बंगाल में भ्रष्टाचार बढ़ा।
घुसपैठियों पर कही ये बात
गृह मंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल को घुसपैठियों के लिए सुरक्षित जगह बना दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर घुसपैठियों को राज्य से बाहर किया जाएगा और सीमा वाले राज्य की सुरक्षा मजबूत की जाएगी। शाह ने भरोसा दिलाया कि किसी भी हिंदू शरणार्थी की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी। साथ ही उन्होंने वादा किया कि भाजपा सत्ता में आने पर राज्य सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन सुनिश्चित करेगी।
गोरखालैंड पर फिर गरमाई राजनीति, भाजपा अध्यक्ष से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात
2 Mar, 2026 03:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिलीगुड़ी|देश की संघीय संरचना और राज्यों के पुनर्गठन से जुड़ा गोरखालैंड का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर अलग गोरखालैंड राज्य की पुरानी मांग दोहराई। साथ ही यह भी कहा कि यदि अलग राज्य संभव नहीं है तो उत्तर बंगाल को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए।सिलीगुड़ी में हुई इस बैठक में गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों ने पहाड़ी क्षेत्रों की प्रशासनिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं को विस्तार से रखा। बैठक में दार्जिलिंग से भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट और भाजपा विधायक नीरज जिम्बा भी मौजूद थे।बैठक के बाद सांसद राजू बिष्ट ने कहा, हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है और गोरखा समाज की पीड़ा को सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा संवाद के जरिए समाधान में विश्वास करती है और यदि 2026 में राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो पहाड़ की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद के रूप में वे गोरखा समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं।
गोरखालैंड की मांग नई नहीं
गोरखालैंड की मांग 1980 के दशक से राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा रही है। दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में अलग राज्य की मांग को लेकर कई बार आंदोलन हुए। 2007 के आंदोलन के बाद गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन किया गया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्वशासन के जरिए समस्याओं का समाधान करना था। हालांकि, गोरखा संगठनों का आरोप है कि जीटीए के गठन के बावजूद मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
राज्य पुनर्गठन और राष्ट्रीय संदर्भ
देश में समय-समय पर नए राज्यों के गठन का इतिहास रहा है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ बने, जबकि 2014 में तेलंगाना का गठन हुआ। ऐसे में गोरखालैंड की मांग को भी समर्थक संवैधानिक दायरे में वैध राजनीतिक मांग बताते रहे हैं। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के विभाजन के किसी भी प्रस्ताव का लगातार विरोध किया है।
राजनीतिक समीकरण
दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर लंबे समय से भाजपा का वर्चस्व रहा है। पहाड़ी क्षेत्र में भाजपा को लगातार समर्थन मिलता रहा है, लेकिन अलग राज्य की मांग पूरी न होने को लेकर स्थानीय असंतोष भी समय-समय पर सामने आता रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य विभाजन का मुद्दा भाजपा के लिए भी संतुलन साधने वाली चुनौती है, क्योंकि एक ओर पहाड़ की आकांक्षाएं हैं तो दूसरी ओर पूरे राज्य की राजनीतिक संवेदनशीलता।
केंद्र की पहल
पहाड़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले भी वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और मध्यस्थ नियुक्त करने की पहल की है, ताकि संवाद के जरिए समाधान का रास्ता निकाला जा सके। इसी क्रम में गोरखा नेताओं के साथ भाजपा नेतृत्व की ताजा बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोरखालैंड का प्रश्न केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संघीय ढांचे, पहचान की राजनीति और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि संवाद और राजनीतिक सहमति के जरिए इस लंबे समय से लंबित मांग का कोई ठोस समाधान निकल पाता है या नहीं।
खामेनेई की मौत पर विपक्ष ने उठाया मोदी सरकार पर सवाल, कहा- भारत पहले कभी इतना कमजोर नहीं दिखा
2 Mar, 2026 10:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईरान (Iran) के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत के बाद भारत की प्रतिक्रिया को लेकर विपक्ष (Opposition) ने केंद्र सरकार (Central government) पर निशाना साधा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले के बाद भारत की तरफ से फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, जिसके कारण कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मोदी सरकार की चुप्पी “भारत की नैतिक नेतृत्व क्षमता के परित्याग” और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ बोलने में अनिच्छा को दर्शाती है। उन्होंने लिखा कि भारत पहले कभी इतना कमजोर नहीं दिखा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी कहा कि मोदी सरकार की चुप्पी भारत के मूल सिद्धांतों और पारंपरिक विदेश नीति के खिलाफ है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “ऐसे समय में जब घातक हमले और युद्ध आम नागरिकों से लेकर शीर्ष नेताओं तक को निशाना बना रहे हैं, सरकार को अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह बताना चाहिए कि भारत एक तटस्थ देश के रूप में शांति बहाली के लिए क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।”
मोदी सरकार का रुख
विदेश मंत्रालय ने अब तक औपचारिक बयान में कहा कि भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम से गहरी चिंता में है। सभी पक्ष संयम बरतें, तनाव बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मंत्रालय ने यह भी कहा कि संवाद और कूटनीति के मार्ग अपनाए जाने चाहिए और सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
विस चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने केरल का दौरा करेगा आयोग
2 Mar, 2026 09:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केरल में अगले महीने प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने निर्वाचन आयोग इस सप्ताह प्रदेश का दौरा करेगा। आयोग का नेतृृत्व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि आयोग के पांच मार्च की रात को केरल पहुंचने की संभावना है। वह छह और सात मार्च को अपना आधिकारिक दौरा शुरू करेंगे। केरल के अलावा, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
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