राजनीति
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर परिवार ने जताई आपत्ति, कहा- साजिश की बू
6 Mar, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना|नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के निर्णय लिया है. उनके इस फैसले की वजह से एक बार फिर से बिहार की राजनीति गर्माई हुई है. उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से न केवल पार्टी कार्यकर्ता बल्कि परिवार की सदस्य भी गम में हैं. जेडीयू के साथ-साथ परिवार भी नहीं चाहता है कि नीतीश कुमार राज्यसभा जाएं. हालांकि नीतीश कुमार ने खुद ही एक्स पर पोस्ट कर बताया है कि वह अब राज्यसभा जाना चाहते हैं. लेकिन परिवार इस फैसले को साजिश बता रहे हैं|
केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह और संजय झा पर लगे आरोप
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साले अनिल कुमार ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और सांसद संजय झा पर गंभीर आरोप लगाया है. मीडिया से बातचीत में अनिल कुमार ने कहा, “कार्यकर्ताओं का तो साफ कहना है कि ललन सिंह और संजय झा सब कर रहे हैं. टिकट बंटवारे के समय से ही यह सब हुआ है. चिराग पासवान को इतनी सीट देने की क्या जरूरत थी. वहीं तो खेला हुआ है. बिना साजिश के तो ये नहीं हो सकता है|”
अनिल कुमार ने उठाया सवाल
अनिल कुमार ने सवाल उठाया है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनने के 110 दिन बाद ही राज्यसभा का कैंडिडेट बन गए. उन्होंने कहा कि यहां पूरी पार्टी में रावण बैठा है. जब तक निशांत (नीतीश कुमार के बेटे) नहीं आएगा पार्टी नहीं बचेगी. उधर पटना में जेडीयू कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर पर कालिख पोता और नीतीश कुमार के फैसले का विरोध किया|
कार्यकर्ताओं ने बताई साजिश
गौरतलब है कि गुरूवार को सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया था. इसके बाद से ही जेडीयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है. कार्यकर्ता इसे साजिश बता रहे हैं. नीतीश कुमार को इस फैसले को वापस लेने के लिए कह रहे हैं. दूसरी तरफ आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा, “सच सामने आ गया है! नीतीश कुमार जी ने स्वेच्छा से नहीं, बल्कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के भारी दबाव में इस्तीफा देकर राज्यसभा का नामांकन किया है|
Narendra Modi की Alexander Stubb के साथ अहम बैठक, सहयोग बढ़ाने पर जोर
6 Mar, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मिडिल ईस्ट और यूक्रेन में जारी जंग को जल्दी खत्म करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सैन्य संघर्ष से कोई भी मसला हल नहीं हो सकता। भारत सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और शांति स्थापित करने की कोशिशों का समर्थन करता रहेगा। पीएम ने यह बात फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद कही। उन्होंने कहा कि भारत और फिनलैंड दोनों ही कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम इस बात पर सहमत हैं कि सिर्फ सैन्य संघर्ष से कोई भी समस्या हल नहीं हो सकती।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक स्वस्थ ग्रह हमारी साझा प्राथमिकता है। हमें खुशी है कि इस वर्ष हम फिनलैंड के साथ मिलकर भारत में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच की मेजबानी करेंगे। इससे हमारे सतत विकास प्रयासों को नई गति और नए विचार मिलेंगे। भारत और फिनलैंड दोनों ही कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि हम इस बात पर एकमत हैं कि केवल सैन्य संघर्ष से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्ष के शीघ्र अंत और शांति के लिए हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे। हम इस बात पर भी सहमत हैं कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार न केवल आवश्यक है, बल्कि अत्यावश्यक भी है, और आतंकवाद को उसके सभी रूपों में समाप्त करना हमारी साझा प्रतिबद्धता है। इससे पहले पीएम मोदी ने संबोधित करते हुए कहा, 13वें फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर मैं राष्ट्रपति स्टब का हार्दिक स्वागत करता हूं। आप जैसे अनुभवी और बेजोड़े नेता का इस वर्ष के रायसीना डायलॉग का चीफ गेस्ट बनना हमारे लिए बहुत सम्मान और खुशी की बात है।
भारत और फिनलैंड महत्वपूर्ण साझेदार हैं
पीएम मोदी ने आगे कहा कि, वर्ष 2026 की शुरुआत में ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौता हुआ। ये एग्रीमेंट भारत और फिनलैंड के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को और प्रबल करेगा। डिजिटल प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और स्थिरता जैसे क्षेत्रों में भारत और फिनलैंड महत्वपूर्ण साझेदार हैं। नोकिया के मोबाइल फोन और टेलीकॉम नेटवर्क ने करोड़ों भारतीयों को जोड़ा है। फिनलैंड के आर्किटेक्ट के सहयोग से हमने चिनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज बनाया है।
चुनावी मैदान में उतरेंगे नेता, पांच राज्यों के चुनाव में सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
6 Mar, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/भोपाल। मप्र के विधायक और नेता इन दिनों राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं। विधायक आस लगाए हुए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार हो और उन्हें मंत्री बनाया जाए। वहीं नेताओं को इतजार है कि जल्द से जल्द निगम, मंडल, प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियां हो, ताकि सत्ता का सुख उन्हें मिल सके। हालांकि इसके लिए वे करीब डेढ़ साल से इंतजार कर रहे हैं। अब भाजपा सूत्रों को कहना है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले अगर मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां हो गई तो ठीक है वर्ना अगले साल ही विधायकों और नेताओं की मंशा पूरी होने की संभावना है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के साथ ही असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा आलाकमान इन चुनावों में मप्र के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं को तैनात करेगा। यानी अगले महीने से भाजपा पूरी तरह चुनाव में लग जाएगी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अगर मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां अभी नहीं हुईं तो अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि 2021 में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोट 27 मार्च को वोटिंग कराई थी। आखिरी चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को हुई थी। असम में असम में 27 मार्च, 1 और 6 अप्रैल को वोट डाले गए थे। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में तब 6 अप्रैल को वोट डाले गए थे।
जून में राज्यसभा चुनाव की बाधा
गौरतलब है कि प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां बार-बार टलती जा रही हैं। पहले मप्र भाजपा अध्यक्ष चुनाव, फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष, चुनाव, कभी विधानसभा सत्र आड़े आते रहे। अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद मप्र में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में नियुक्तियों का मामला अटका रहेगा। उसके बाद अगले साल होने वाले नगरीय निकाय की तैयारी में पार्टी व्यस्त हो जाएगी। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सत्ता और संगठन ने मिलकर राजनीतिक नियुक्तियों का खाका तैयार कर लिया है। संभावना जताई जा रही है कि होली के बाद निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों की सूची जारी कर दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से नियुक्तियों को लेकर पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। पिछले कुछ महीनों में प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के बीच इस विषय पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। बताया जा रहा है कि संभावित नामों पर दिल्ली स्तर पर भी चर्चा हुई है और संघ के साथ भी कुछ नामों को लेकर विचार-विमर्श किया गया है। इसके बाद अब नियुक्तियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार
मप्र में लंबे समय से खाली पड़े निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। भाजपा संगठन और सरकार ने मिलकर संभावित नामों की सूची तैयार कर ली है और होली के बाद पहली सूची जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी संगठन को मजबूत करने और वरिष्ठ नेताओं के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पद संभालने के बाद प्रदेश के सभी संभागों का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठन को मजबूत बनाने पर जोर दिया था। साथ ही उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया था कि पार्टी में सक्रिय रहने वाले किसी भी कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होने दी जाएगी। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन विस्तार और राजनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
9 मार्च से फिर गूंजेगी Parliament of India, बजट सत्र के दूसरे चरण की तैयारी
6 Mar, 2026 09:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत 9 मार्च से होने जा रही है। इस दिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा दिए गए पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इस दौरान ओम बिरला कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे, बल्कि सदस्यों के बीच बैठेंगे। दरअसल, संविधान और लोकसभा के नियमों के मुताबिक, जब अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर सदन में विचार किया जाता है, तो संबंधित अध्यक्ष कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते हैं।
इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष ने बिरला पर सदन की कार्यवाही के दौरान खुलकर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक के। सुरेश ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक समेत कई विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा सचिवालय को यह नोटिस सौंपा है।
118 विपक्षी सांसदों ने नोटिस पर किए हस्ताक्षर
कम से कम 118 विपक्षी सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए। संविधान विशेषज्ञ पी। डी। टी। आचारी के मुताबिक, जब यह प्रस्ताव सदन के सामने आएगा तो बिरला को अपने बचाव का संवैधानिक अधिकार होगा। वे चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और प्रस्ताव के खिलाफ मतदान भी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने के लिए स्वचालित प्रणाली की जगह पर्ची का इस्तेमाल करना होगा। संविधान के अनुच्छेद 96 के अनुसार, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष उस समय सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते जब उनके खिलाफ पद से हटाने के प्रस्ताव पर विचार हो रहा हो। वहीं अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को साधारण बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
संसद के इतिहास में पहली बार प्रस्ताव पर होगी चर्चा
लोकसभा के नियमों के अनुसार, ऐसे प्रस्ताव के लिए कम से कम दो सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं, जबकि नोटिस पर कितने भी सदस्य हस्ताक्षर कर सकते हैं। प्रस्ताव को सदन में लाने से पहले 14 दिन का नोटिस देना होता है और चर्चा के बाद 10 दिनों के भीतर इसका निपटारा किया जाना आवश्यक है। हालांकि, संसद के इतिहास में अब तक लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है, क्योंकि आमतौर पर सरकार के पास सदन में बहुमत होता है।
कांग्रेस को झटका: विधायक भाजपा में शामिल
6 Mar, 2026 08:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। असम में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के तीन वर्तमान विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ, शशिकांत दास और बसंत दास भाजपा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व संयुक्त सचिव परशा बॉब कलिता और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व महासचिव कंकन नाथ ने भी भाजपा से जुड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ये विधायक पिछले दो वर्षों से सरकार का समर्थन कर रहे थे। अब बिना किसी शर्त के औपचारिक रूप से पार्टी में आए हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज तीन कांग्रेस विधायक हमारी पार्टी में शामिल हुए हैं। यह भाजपा के लिए एक बड़ा दिन है। मुझे यकीन है कि ये भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों के सम्मान को दिखाता है।
जदयू में असंतोष का कांटा निकालने की कोशिश, नीतीश के सहारे रणनीति बना रही BJP
6 Mar, 2026 07:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार। की सियासत से नीतीश युग के अंत के साफ संकेत के बीच भाजपा की राज्य में अपना मुख्यमंत्री बनाने की दशकों पुरानी इच्छा पूरी होती दिख रही है। हालांकि इस नई सियासी परिस्थिति के कारण जदयू में अंदर तक फैले अविश्वास और टूट की आशंका के बीच भाजपा के लिए आगे की राह इतनी भी आसान नहीं रहने वाली। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व ने जदयू के असंतोष के कांटे को नीतीश के जरिये ही निकालने की योजना बनाई है। हालांकि पार्टी की असली अग्निपरीक्षा नई सरकार का गठन करना होगा, क्योंकि इसी के जरिये भाजपा को जदयू के नाराज नेता-कार्यकर्ता को नीतीश के सम्मान का साफ संदेश देना होगा। भाजपा ने बिहार की सत्ता की कमान संभालने के लिए अपने जानते सबसे मुफीद समय चुना है। सबसे मुफीद समय इसलिए कि चंद महीने पहले मिली करारी हार के कारण न सिर्फमुख्य विपक्षी राजद के हौसले पस्त हैं, बल्कि लालू परिवार में जारी जंग के कारण पार्टी के अस्तित्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में नीतीश युग के अंत के बाद नाराज जदयू कार्यकर्ताओं में राजद के प्रति कोई आकर्षण नहीं बचा है। इसके अलावा बीते कुछ वर्षों से पार्टी ने राज्य के जातीय समीकरणों को साधने के लिए खासी मेहनत की है।
कद्दावर नेता की कमी सबसे बड़ी समस्या
बिहार में भाजपा की सबसे बड़ी समस्या कद्दावर नेता की कमी है। पार्टी दूसरे दलों से आयात सहित कई प्रयोग के बावजूद अब तक राज्य में पिछड़ा वर्ग से ऐसा कद्दावर नेता तैयार नहीं कर पाई, जिसकी पहचान पूरे राज्य में हो। ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री के रूप में किसी एक चेहरे की पहचान करना है। ऐसा चेहरा जो न सिर्फ अविश्वास और टूट की आशंका को दूर करे, बल्कि बिहार के लोगों में नई सरकार के लिए भरोसा भी पैदा करे।
नीतीश-जदयू की भी करनी होगी चिंता
पूरे सियासी घटनाक्रम में जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह कार्यकर्ताओं और पार्टी के एक धड़े के बीच खलनायक बन कर उभरे हैं। नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इन्होंने पार्टी के नेताओं को गुमराह किया है। इस उथलपुथल के बीच ओबीसी, एससी वर्ग के अशोक चौधरी, विजय चौधरी, श्रवण कुमार जैसे नेता खामोश हैं। इस स्थिति में अगर सीएम की कुर्सी भाजपा को दिए जाने का निर्णय लिया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
पार्टी की कमान किसके पास और नीतीश का क्या
नीतीश की नई सियासी पारी के बाद पहला और अहम सवाल है कि केंद्र की राजनीति में उनकी भूमिका क्या होगी? क्या भाजपा उन्हें उपप्रधानमंत्री या कोई अन्य सम्मानित पद दे कर बिहार को संदेश देगी? नीतीश राष्टï्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे? अगर नहीं बने रहेंगे तो उनकी जगह कौन लेगा, जिसे जदयू स्वीकार करे? क्या निशांत पार्टी की कमान संभालने के साथ ही डिप्टी सीएम भी बनेंगे?
89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है भाजपा
नीतीश के राज्यसभा के लिए नामांकन करने के साथ ही राज्य में नए सीएम का रास्ता साफ हो गया है और अब भाजपा उस एकमात्र हिंदी भाषी राज्य में अपना खुद का मुख्यमंत्री बनाने की स्थिति में दिख रही है, जहां अब तक यह पद उसके पास नहीं रहा। विधानसभा चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 2020 के बाद दूसरी बार जदयू से बेहतर प्रदर्शन किया था।
जदयू के हो सकते हैं दो उपमुख्यमंत्री
बड़े सियासी उलटफेर के बीच भाजपा यह संदेश देना चाह रही है कि राज्य में सबकुछ नीतीश की इच्छा के अनुसार ही हो रहा है। लिहाजा नई सरकार का रोडमैप बनने तक नीतीश सीएम पद पर रहेंगे। नई सरकार में मौजूदा स्थिति बदलने की उम्मीद है। अब भाजपा की जगह जदयू के दो उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं। संभावना यह भी है कि इनमें एक नीतीश के बेटे निशांत कुमार हों। नीतीश का राज्यसभा का कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होगा। ऐसे में सूत्रों के मुताबिक, नामांकन के बाद सबसे पहले नीतीश के जरिये कार्यकर्ताओं की नाराजगी और राज्य में बनी भ्रम की स्थिति दूर की जाएगी। नई सरकार में जदयू के दो उपमुख्यमंत्री हो सकते हैं।
फेसबुक पोस्ट से बड़ा संकेत: Nitish Kumar ने राज्यसभा जाने की दी जानकारी
5 Mar, 2026 10:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार के सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा में जा रहे है। वहीं इस बात की जानकारी सीएम नीतीश ने फेसबुक पर कर दी। नीतीश ने लिखा कि पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, और उसके बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूं। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूं। मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए गुरुवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि, मीडिया के एक वर्ग में आई खबरों में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को मजबूत दावेदार बताया गया है। सरकार और संगठन का लंबा अनुभव रखने वाले विजय सिन्हा और मंगल पांडे के नामों पर भी विचार किया जा सकता है।
MVA में फैसला: Aaditya Thackeray की दावेदारी पीछे, राज्यसभा के लिए Sharad Pawar का नाम तय
5 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संजय राउत ने पोस्ट में लिखा- महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे
मुंबई। महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को सिर्फ एक सीट मिल सकती है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 साल के शरद पवार के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं हुआ। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दिया था कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे।
इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा- कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइनल कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे। यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं। इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग कह रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है। राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हुई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल खत्म होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।
‘पीएम मोदी ने कर दिया आत्मसमर्पण’, Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
5 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ईरान युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का हवाला देते हुए गुरुवार को आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने राजनीतिक और नैतिक रूप से आत्मसर्मण कर दिया है। खड़गे ने एक्स पर पोस्ट में लिखा- मोदी सरकार का भारत के सामरिक और राष्ट्रीय हितों के प्रति लापरवाही भरा परित्याग सबके सामने है। एक ईरानी जहाज भारत का मेहमान था, हमारे द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 से निहत्थे लौट रहा था, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में उस पर हमला कर उसे डुबो दिया गया। चिंता या शोक का कोई बयान नहीं आया। पीएम मोदी मौन साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 1100 नाविकों के साथ 38 भारतीय ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज फंस गए हैं। कैप्टन समेत दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। कोई समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? खड़गे ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र के देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद मांगने के लिए हताशा भरा वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि भारत सरकार उनकी भलाई कैसे सुरक्षित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से निकासी की कोई योजना है? खड़गे ने दावा किया कि पीएम मोदी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। उन्होंने कहा कि यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों को कमतर दिखाता है और सालों से लगातार पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और कड़ी मेहनत से बनाई और अपनाई गई हमारी विदेश नीति को नष्ट करने वाला है।
हिंद महासागर में बढ़ते तनाव पर Rahul Gandhi का हमला, बोले– सरकार दे जवाब
5 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले जारी हैं। वहीं ईरान भी इजराइल और अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। यह महायुद्ध अब हिंद महासागर तक पहुंच गया है। हिंद महासागर में अमेरिका ने ईरान के युद्धपोत को निशाना बनाया है, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। मिडिल ईस्ट इस वक्त युद्ध की पीड़ा झेल रहा है, जिसकी आहट भारत में भी महसूस होने लगी है। भारत का सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने इस मामले में पीएम मोदी को घेरा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने कहा है कि भारत की तेल सप्लाई खतरे में है, हमारा 40फीसदी से ज्यादा इम्पोर्ट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी के लिए हालत और भी खराब हैं। ऐसे समय में हमें एक मजबूत हाथ की जरूरत है, लेकिन भारत के पास एक समझौता करने वाला पीएम है जिसने हमारी स्ट्रेटेजिक आजादी को छोड़ दिया है। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया कि विश्व एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुका है। समुद्री क्षेत्र में बड़ी चुनौतियां सामने खड़ी हैं। भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है।
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने से संघर्ष भारत की दहलीज तक पहुंच गया, लेकिन पीएम मोदी ने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में कमान एक स्थिर हाथ में रहने की जरुरत होती है। राहुल ने आरोप लगाया कि इसके बजाय, भारत के पास एक समझौतावादी पीएम हैं जिन्होंने हमारी सामरिक स्वायत्तता का समर्पण कर दिया है।
IVF-ART क्लीनिकों की जांच तेज, सरकार बनाएगी फ्लाइंग स्क्वॉड; ट्रांसपोर्ट हड़ताल से यातायात प्रभावित
5 Mar, 2026 03:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बदलापुर|महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने बुधवार को कहा कि राज्य में IVF और ART केंद्रों की निगरानी के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए जाएंगे ताकि गलत कामों को रोका जा सके। यह कदम थाने जिले के बदलापुर में महिला अंडाणु तस्करी के मामले के बाद उठाया गया है। इस रैकेट में गरीब महिलाओं को पैसे के लालच में फंसाया गया था।पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी कर करीब 10 लाख रुपये के दवाएं, गर्भधारण के लिए इंजेक्शन, सोनोग्राफी रिपोर्ट, और नकली नामों से तैयार एफिडेविट जब्त किए। जांच में चार महिलाओं और दो पुरुषों को आरोपी माना गया है, और छह पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए हैं। भविष्य में महिलाओं के IVF केंद्र पर पंजीकरण को उनके आधार से जोड़ा जाएगा, और जिला स्तर पर महिला प्रतिनिधियों सहित समिति बनाई जाएगी।
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टर्स का 'चक्का जाम', रिक्सा और टैक्सी भी शामिल होंगे
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट एक्शन कमिटी (एम-टीएसी) ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ई-चालान मुद्दे पर कोई ठोस फैसला न होने के कारण, 5 मार्च से राज्यव्यापी चक्का जाम किया जाएगा। प्रदर्शन मुंबई में आजाद मैदान पर सुबह 11 बजे होगा और हर जिले के RTO कार्यालयों के बाहर भी विरोध किया जाएगा। यह मुद्दा लगभग 15 लाख ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और लाखों निजी वाहन मालिकों से जुड़ा है, जिसमें 4500 करोड़ रुपये के जुर्माने शामिल हैं। चक्का जाम में ऑटो रिक्शा, टैक्सी, बस और ट्रक ऑपरेटर हिस्सा लेंगे।
ठाणे में ऑटो गैराज परिसर में लगी आग, छह वाहन जलकर खाक
महाराष्ट्र के ठाणे शहर में गुरुवार तड़के एक ऑटो गैराज परिसर में आग लगने से दो कबाड़ हो चुके वाहनों सहित छह चार पहिया वाहन जलकर खाक हो गए। ठाणे नगर निगम के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के यासीन ताडवी ने बताया कि वागले एस्टेट क्षेत्र में अच्युतानंद ऑटो गैराज के खुले स्थान पर रात करीब 1 बजे लगी आग में कोई घायल नहीं हुआ। ताडवी ने बताया कि परिसर में खड़ी छह चार पहिया वाहनों में आग लग गई, जिनमें एक कबाड़ हो चुकी मिनी ट्रक और एक एम्बेसडर कार के साथ-साथ कुछ फेंका हुआ सामान भी शामिल था। उन्होंने बताया कि दमकल कर्मियों ने आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के कर्मचारियों की मदद से रात करीब 1.50 बजे तक आग पर काबू पा लिया। अधिकारी ने आगे बताया कि आग लगने के कारणों की आगे की जांच जारी है।
बीड जिले में बस ने खड़े ट्रक को टक्कर मारी, ड्राइवर और कंडक्टर समेत 13 घायल
महाराष्ट्र के बीड जिले में गुरुवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ। कैज शहर के पास महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की एक बस ने सड़क किनारे खड़े ट्रक को टक्कर मार दी। इस हादसे में ड्राइवर और कंडक्टर समेत कुल 13 लोग घायल हो गए। घायलों में छह महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि यह हादसा कैज-कल्लम रोड पर सुबह करीब 6 बजे हुआ। बस कोल्हापुर से माजलगांव की ओर जा रही थी। रास्ते में यह सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस के ड्राइवर आनंद गायके (40) और कंडक्टर विष्णु तांबडे (42) को भी चोटें आई हैं।कैज पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर स्वप्निल उनावने और उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू की। पुलिस ने एम्बुलेंस की मदद से सभी पीड़ितों को तुरंत कैज के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए अंबाजोगाई शहर के स्वामी रामानंद तीर्थ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अस्पताल के सूत्रों ने जानकारी दी है कि फिलहाल सभी घायलों की हालत स्थिर है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। अधिकारी अब हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह एक्सीडेंट कम रोशनी की वजह से हुआ या किसी की लापरवाही के कारण।
Nitish Kumar की सियासी पलटी की कहानी, मोदी के नाम पर दूर फिर भाजपा के साथ
5 Mar, 2026 02:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। नीतीश कुमार की अपनी इच्छा कभी नहीं थी कि वह बिहार छोड़कर जाएं। जैसे लालू प्रसाद यादव नहीं चाहते थे कि वह बिहार से दूर हों, उसी तरह नीतीश कुमार भी हमेशा बिहार में ही सक्रिय रहना चाहते थे। राज्य की ही सेवा करना चाहते थे। अब भी उन्होंने जब राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की तो वह सेवा भाव दोहराया। बताया जा रहा है कि भाजपा ने एक 'प्रकरण' का हवाला देकर दबाव बनाया और यह फैसला उन्होंने आखिरकार ले ही लिया। अब उन्हें भाजपा के साथ रिश्ता कैसा रखना है, यह वक्त बताएगा। फिलहाल भविष्य को समझने के लिए भाजपा के उनके रिश्तों की पूरी कहानी जानिए।
अटल-आडवाणी को अस्पताल में देख हो गए थे साथ
'अंतरंग दोस्तों की नजर से नीतीश कुमार'- यह किताब नीतीश कुमार के अभिन्न मित्र उदयकांत ने लिखी है। इस किताब की हर लाइन नीतीश कुमार पढ़ चुके हैं, इसलिए इससे ज्यादा किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इसमें जिक्र है कि कैसे लालू प्रसाद के साथ नीतीश कुमार बन-संवर कर दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय के कभी चक्कर लगाते थे। यह भी बताया गया है कि लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कितनी जद्दोजहद हुई थी और कैसे चारा घोटाले में नाम आने समेत कई कारणों से उन्होंने दूरी बनाई थी। इसी किताब में एक वाकये का जिक्र है, जब पहली बार नीतीश कुमार भाजपा के करीब आए थे। वह वाकया बताता है कि भाजपा से दूर-दूर रहने वाले नीतीश कुमार किस तरह अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी से प्रभावित होकर भाजपा के मंच पर पहुंच गए थे।
समता पार्टी 1994 में कैसे बनी, फिर कब जॉर्ज हुए बीमार
किताब में बताया गया है कि बिहार में लालू राज के दौरान माहौल ऐसा खराब हुआ कि जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में 15 सांसदों ने तत्कालीन जनता दल से किनारा कर लिया। इसमें से 14 अंतिम तौर पर बाहर हो गए- मो. यूनुस सलीम, जॉर्ज फर्नांडीस, नीतीश कुमार, सैयद शहाबुद्दीन, अब्दुल गफूर, मंजय लाल, वृषिण पटेल, हरिकिशोर सिंह, रामनरेश सिंह, महेंद्र बैठा, चरणजीत यादव, मोहन सिंह, हरिकेवल सिंह और रवि राय। इनमें से अंतिम चार को छोड़ सभी बिहार से थे। जनता दल से अलग हुए इस गुट का नाम जनता दल (जॉर्ज) हुआ और फिर समता पार्टी। किताब में लिखा है- "1995 के बिहार विधानसभा चुनाव में अपार जनसमर्थन दिखने के बावजूद समता पार्टी के 310 प्रत्याशियों में से सात ही जीत सके। 271 की जमानत जब्त हो गई। पार्टी की आर्थिक-मानसिक हालत बुरी थी। तभी जॉर्ज फर्नांडीस बीमार पड़ गए। नीतीश जब उन्हें देखने मुंबई के अस्पताल पहुंचे तो आश्चर्यजनक रूप से उन्हें वहां लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी दिखे, जो जॉर्ज फर्नांडीस की मिजाजपुर्सी के लिए पहले से थे। जब यह दोनों नेता अस्पताल से निकलने लगे तो जॉर्ज ने नीतीश से कहा कि वह आडवाणी को नीचे तक छोड़ आएं। उतरते समय आडवाणी ने नीतीश को अपनी सभा में शामिल होने का अधिकारपूर्वक न्यौता दिया। ऊपर लौटकर जॉर्ज फर्नांडीस को यह बात बताई तो उन्होंने भी कहा कि अवश्य जाना चाहिए। सभा में अटल-आडवाणी ने बहुत सम्मान से बैठाया। उस मंच से अच्छा संबोधन हुआ और इसके बाद इस मुलाकात के बाद से ही गठबंधन का आधार बन गया। प्रमोद महाजन उसके बाद भाजपा में उनके करीबी हो गए। 1996 में यह गठबंधन जमीन पर उतरा और भाजपा-समता पार्टी ने साथ लोकसभा चुनाव लड़ा। नीतीश भी दूसरी बार सांसद बने और फिर मंत्री भी।" अटल, आडवाणी और प्रमोद महाजन के साथ ही अरुण जेटली से नीतीश कुमार के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। नीतीश ने अटलजी के साथ जेटली की प्रतिमा भी पटना में लगवाई है।
नरेंद्र मोदी से 36 का आंकड़ा क्यों रहा? फिर सुधरा-बिगड़ा भी
नीतीश कुमार लगातार अटल बिहारी वाजपेयी के संरक्षण में चल रही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे। वह टूटे तब, जब गुजरात दंगों के लिए कथित तौर पर दोषी मानने की सोच के बावजूद वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया। 2014 के लोकसभा निर्वाचन से पहले चुनावी तैयारी शुरू होते ही 2013 में नीतीश कुमार ने इसी विरोध में भाजपा का साथ छोड़ा। 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू के 40 प्रत्याशी उतारे, लेकिन जब महज दो सीटें हासिल हुईं तो हार की जिम्मेदारी लेते हुए जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया। इसके बाद 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव महागठबंधन बनाकर लड़े और कुर्सी पर वापस बैठे। इसी सरकार में शराबबंदी हुई, जिसके बाद से राजद-जदयू में टकराव हुआ। सुशील कुमार मोदी ने लालू परिवार और तेजस्वी से जुड़े घोटालों की नई फाइलें खोलीं तो 2017 में नीतीश महागठबंधन से निकल फिर एनडीए के मुख्यमंत्री बन गए।
यह नरेंद्र मोदी की भाजपा थी। बहुत सहज नहीं रहे, खासकर केंद्र में उलटफेर होने से। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में भागीदारी को लेकर झंझट चला, हालांकि विधानसभा चुनाव में अपनी बात चलने पर नीतीश कायम रह गए। इस चुनाव में कथित रूप से भाजपा के इशारे पर चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को भारी नुकसान पहुंचाया। इसका असर 2022 में सामने आया, जब नीतीश जनादेश 2020 को दरकिनार कर महागठबंधन वापस चले गए और सीएम पद की शपथ ली। 2024 के जनवरी में कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देकर भाजपा ने नीतीश की एक पुरानी मांग को जैसे ही माना, रिश्तों में गरमाहट आई और नीतीश फिर एनडीए में आ गए। अब तक वह कायम हैं। राज्यसभा के लिए भेजे जाने के बाद अब आगे क्या रहता है, यह भी देखने वाली बात होगी।
नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन भरा,नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी
5 Mar, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। 10 बार बिहार के सीएम पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने गुरुवार (5 मार्च) को राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन कर दिया. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित एनडीए के सीनियर नेता मौजूद रहे. पिछले साल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद 27 फरवरी को नीतीश कुमार ने 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली थी. उनके राज्यसभा जाने के फैसले ने सभी को चौंका दिया. नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं. इससे पहले नीतीश ने कहा कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नयी सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा. उन्होंने कहा, 'दो दशकों से अधिक समय तक आपने लगातार मुझ पर विश्वास और समर्थन जताया है. उसी विश्वास की ताकत से हमने बिहार और आप सभी की पूरी निष्ठा के साथ सेवा की है. आपके भरोसे और समर्थन की शक्ति से ही आज बिहार विकास और गरिमा की एक नयी पहचान प्रस्तुत कर रहा है.' कुमार ने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें।
नामांकन से पहले क्या बोले नीतीश कुमार?
उन्होंने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा, 'इसी आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए मैं इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखता हूं.' उन्होंने कहा, 'मैं पूरी ईमानदारी के साथ आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में भी आपसे मेरा संबंध बना रहेगा और विकसित बिहार के निर्माण के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का मेरा संकल्प अडिग रहेगा. राज्य में बनने वाली नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा.' वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को भारी जीत दिलाने के बाद कुमार के पद छोड़ने से अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के किसी नेता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना है. यदि ऐसा होता है तो बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा. हिंदी भाषी राज्यों में बिहार ही अब तक ऐसा राज्य रहा है जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा है. बिहार से राज्यसभा की पांच सीट के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है और बृहस्पतिवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है. राज्य विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कुमार का संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है।
नीतीश कुमार की जीवनी: निजी जीवन, परिवार और करियर पर एक नजर
5 Mar, 2026 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बख्तियारपुर|बिहार में गुरुवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। दरअसल, खबरें आईं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बिहार की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति का रुख करने वाले हैं और अब राज्यसभा में बिहार की आवाज बनेंगे। इसे लेकर अटकलें लग ही रही थीं कि नीतीश कुमार ने खुद एक पोस्ट कर के इसकी पुष्टि कर दी। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक स्थापित चेहरा हैं, जिन्होंने बीते 21 साल राज्य का नेतृत्व संभाला है। ऐसे में उनके राज्यसभा जाने की जानकारी देशभर में सियासी जानकारों के लिए चौंकाने वाली रही।ऐसे में यह जानना अहम है कि नीतीश कुमार का इतिहास क्या है? वे राजनीति में कैसे आए? कैसे एक इंजीनियर जो अपने शुरुआती सियासी करियर में चुनाव तक नहीं जीत पाया, बाद में बिना चुनाव लड़े ही लगातार बिहार का मुख्यमंत्री रहा? कैसे बीते 25 साल में नीतीश कुमार बिहार में सत्ता का पर्याय बन गए? आइये जानते हैं...
कौन हैं नीतीश कुमार, क्या है पारिवारिक-शैक्षिक इतिहास?
नीतीश कुमार का जन्म एक मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था। इस वक्त उनकी उम्र 75 साल है। उनकी मां का नाम परमेश्वरी देवी था। पिता राम लखन सिंह आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। कुर्मी (पिछड़ी) जाति से आने वाले नीतीश की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई। बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकैनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद नीतीश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में काम करने लगे। इसी बीच जय प्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े और राजनीति में आ गए।
नीतीश की पत्नी का क्या नाम है?
नीतीश कुमार की शादी 22 फरवरी 1973 को मंजू कुमारी सिन्हा से हुई थी। मंजू बिहार में सरकारी स्कूल टीचर थीं। खुद मंजू ने भी इंजीनियरिंग की थी। वहीं, नीतीश कुमार की पत्नी मंजू का 2007 में निधन हो चुका है। नीतीश और मंजू का एक बेटा है निशांत कुमार। निशांत ने बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। निशांत राजनीति से हमेशा दूर ही रहे। वह राजनीतिक सभाओं या राजनीतिक कार्यक्रमों में कभी भी पिता के साथ नजर नहीं आते। निशांत खुद भी इस बात का एलान कर चुके हैं कि वह कभी भी अपने पिता की तरह राजनीति में नहीं आएंगे। हालांकि, अब नीतीश के राज्यसभा जाने की खबरों के बीच निशांत के राजनीति में उतरने की चर्चाएं तेज हैं।
नीतीश के परिवार में और कौन-कौन?
नीतीश कुमार के परिवार में पांच भाई-बहन हैं। नीतीश के बड़े भाई सतीश कुमार किसान हैं। इसके अलावा नीतीश की तीन छोटी बहनें उषा देवी, इंदु देवी और प्रभा देवी हैं। सतीश की तरह बहनें भी राजनीति से दूर हैं। नीतीश के परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, क्योंकि नीतीश ने राजनीतिक संसाधनों से परिवार को हमेशा दूर रखा है। हालांकि, अब उनके बेटे निशांत कुमार के सियासत में उतरने की अटकलें लग रही हैं।
पहला चुनाव हारे, अब 10 बार के मुख्यमंत्री
नीतीश ने पहली बार 1977 का बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 1985 में फिर से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1987 में लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष बने।
1989 में बिहार की बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। अप्रैल 1990 से नवंबर 1990 तक केंद्रीय कृषि और सहकारिता मंत्री रहे। 1991 में दूसरी बार सांसद चुने गए।
1995 में बिहार विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जॉर्ज फर्नांडीस के साथ समता पार्टी की शुरुआत की। तब चुनाव में उनकी पार्टी केवल छह सीटें ही जीत सकी थी।
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1996 में लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री, भूतल परिवहन मंत्री और कृषि मंत्री रहे।
दो अगस्त 1999 में गैसल ट्रेन दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने केंद्रीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। नीतीश के रेल मंत्री रहते हुए ही टिकटों की तत्काल बुकिंग की सुविधा शुरू की गई थी।
मार्च 2000 में वह पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, केवल सात दिनों तक ही उनका कार्यकाल रहा। इसके बाद 2005, 2010, 2013, 2015, 2017, 2020, 2022, 2024 और 2025 में 10वीं बार मुख्यमंत्री बने।
राजनीति में कदम रखने को तैयार निशांत कुमार? जदयू एंट्री से पहले जानिए उनका प्रोफाइल
5 Mar, 2026 11:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Nishant Political Entry जदयू में आज से निशांत युग शुरू होने जा रहा है। होली की शाम में इसके संकेत मिले और देर रात इसपर मुहर लग गई। होली के दिन हुए बड़े राजनैतिक उलट फेर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को राजी हो गए हैं। वे राज्यसभा जायेंगे। वहीं उनके बेटे निशांत की पॉलिटिकल एंट्री भी कंफर्म हो गई है। बिहार के डिप्टी सीएम के रास्ते निशांत पॉलिटिकल एंट्री करेंगे। जदयू सूत्रों का कहना है कि निशांत कुमार आज विधिवत जनता दल यूनाइटे की सदस्यता लेंगे। सरल और सीधे स्वभाव वाले निशांत सार्वजनिक तौर पर बहुत कम दिखते हैं। अगर कहीं गए भी तो बिना किसी ताम झाम के वे कहीं भी आया जाया करते हैं। मुख्यमंत्री या सरकार की गतिविधियों से वे हमेशा अपने आप को दूर रखा।
लो प्रोफाइल लाइफ जीते हैं निशांत
निशांत भी अपने पिता नीतीश कुमार की तरह इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी(बीआईटी मेसरा),रांची से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में उन्होंने ग्रेजुएशन किया है। लाइम लाइट से दूर रहने वाले निशांत लो प्रोफाइल लाइफ जीते हैं लेकिन, अपने पिता की उपलब्धियों की चर्चा करने से पीछे नहीं रहते। वे खुद के बारे में कुछ नहीं बताते।
सीएम के बेटे हैं दो साल किसी को पता नहीं चला
BIT में निशांत की पढ़ाई केपहले दो साल तक उनके दोस्तों को भी नहीं पता था कि वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं। निशांत ने कभी खूद से भी इस बात की चर्चा किसी से नहीं किया कि मैं बिहार के मुख्यमंत्री का बेटा हूं। उनके लो प्रोफाइल की वजह से उनके साथ पढ़ने वाले दोस्त भी नहीं समझ पाए। पढ़ाई के दौरान वे राजनीति से दूर ही रहें। परिवार के करीबी लोग कहते हैं कि वे आध्यात्मिक हैं। धर्म के प्रति उनकी बहुत ही आस्था है। ओशो, समाजवाद, समकालीन बिहार, RSS से जुड़ी किताबें और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ में अक्सर पढ़ते हैं। नीतीश कुमार भी अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद ओशो पढ़ा था, निशांत भी भारतीय और विदेशी रहस्यमयी साहित्य पढ़ते हैं।
निशांत आज ले सकते हैं जदयू की सदस्यता
बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने बुधवार को कहा कि निशांत कुमार गुरुवार को जदयू सदस्यता ग्रहण करेंगे। जबकि नीतीश कुमार गुरूवार को ही राज्यसभा के लिए अपना नामांकन करेंगे। इससे जुड़े सवाल पर जदयू नेता और मंत्री विजय चौधरी ने बुधवार को पत्रकारों से जुड़े सवाल पर कहा कि उनके राज्यसभा जाने की चर्चा चल रही है। लेकिन, अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही लेना है। नीतीश कुमार के आलावे गुरूवार को एनडीए फोल्डर से बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रालोमो के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, बीजेपी के शिवेश राम भी नॉमिनेशन करेंगे। चर्चा है कि जेडीयू से रामनाथ ठाकुर भी नामांकन दाखिल कर सकते हैं। नॉमिनेशन का अंतिम दिन है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह नामांकन के अवसर पर आज पटना आ रहे हैं।
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