राजनीति
भाषा विवाद पर अमित शाह का तंज: "अंग्रेजी बोलना नहीं होगा गर्व की बात"
19 Jun, 2025 03:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही देश में ऐसा समाज बनेगा जहां अंग्रेजी बोलने वालों को शर्मिंदगी महसूस होगी। यह बयान पूर्व सिविल सेवक और आईएएस (IAS) अधिकारी आशुतोष अग्निहोत्री (Ashutosh Agnihotri) की पुस्तक ‘मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूं’ के विमोचन के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया।
भाषा के संरक्षण पर बल
शाह ने कहा, “इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म आएगी। ऐसा समाज बनने में अब ज्यादा समय नहीं है। हमारी भाषाएं हमारी संस्कृति के रत्न हैं, और इनके बिना हम सच्चे भारतीय नहीं हो सकते।” उन्होंने भारतीय भाषाओं को राष्ट्र की पहचान और आत्मा का आधार बताते हुए इनके संरक्षण और प्रचार पर बल दिया।
2047 तक शिखर पर भारत
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अमृत काल’ के लिए पंच प्रण की नींव रखी है, जिसमें अपनी विरासत पर गर्व करना और गुलामी के हर निशान से मुक्ति शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2047 तक भारत शिखर पर होगा, और इसमें हमारी भाषाओं की अहम भूमिका होगी।
प्रशिक्षण में बदलाव की जरुरत
शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में बदलाव की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को प्रशासन में अधिक महत्व देना चाहिए ताकि देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिले। इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने इसे भारतीय भाषाओं के प्रति गर्व का प्रतीक बताया, जबकि कुछ ने इसे भाषाई विवाद के रूप में देखा।
विवादों में बयान
यह बयान कुछ हलकों में विवादास्पद भी हो सकता है, क्योंकि अंग्रेजी देश में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली भाषा है, खासकर शहरी क्षेत्रों और पेशेवर माहौल में। इस बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर बहस की संभावना है।
बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली बोलने वालों को किया जा रहा टारगेट
19 Jun, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। सीएम ममता बनर्जी ने बांग्लाभाषी लोगों को लेकर बीजेपी को घेरा है। सीएम ममता का आरोप है कि बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन बंगालियों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें भी अवैध बांग्लादेशी प्रवासी बताकर कार्रवाई की जा रही है।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी को शर्म आनी चाहिए...वे देश के नागरिकों को सिर्फ उनकी भाषा के आधार पर बांग्लादेशी बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाली के साथ गुजराती, मराठी और हिंदी में बोलने में भी गर्व महसूस होना चाहिए...अगर आप मुझसे पूछें तो मैं इन सभी भाषाओं में बोल सकती हूं।
ममता के बयान पर बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में हंगामा किया। विडंबना ये है कि ममता के हस्तक्षेप के बाद बांग्लादेश भेजे गए लोग अब लौट भी आये हैं। ऐसे में ममता के आरोप महज राजनीतिक भी नहीं लगते, लेकिन उनकी दलील कमजोर जरूर लगती है। जो लोग बांग्लादेश से वापस लाए गए हैं, सभी मामले एक जैसा ही हैं।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के रहने वाले महबूब शेख को महाराष्ट्र पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने के शक में उठा लिया और बीएसएफ को सौंप दिया था। महबूब शेख समेत पांच ऐसे लोगों को बीएसएफ ने बांग्लादेश की सीमा में भेज दिया, लेकिन ममता सरकार के हस्तक्षेप के बाद महबूब शेख समेत पांचों लोगों को बांग्लादेश से वापस बुला लिया गया है।
पश्चिम बंगाल के ही नॉर्थ 24 परगना जिले से रोजी रोटी के मकसद से महाराष्ट्र गए एक युवा दंपति के साथ भी ऐसा ही हुआ। करीब 20 साल के फाजेर मंडल और तस्लीमा की कुछ ही दिन पहले शादी हुई थी और कंस्ट्रक्शन का काम मिल जाने पर महाराष्ट्र गए थे, लेकिन पुलिस ने उनको पकड़ा उन्हों भी बांग्लादेश भेज दिया। बंगाल में बगदाह के हरिहरपुर गांव के रहने वाले फाजेर मंडल ने बतौर सबूत आधार कार्ड और वोटर आईडी दिखाये थे, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। जाहिर है, बाकियों का मामला भी कुछ ऐसा ही है।
हाल ही में सीनियर इंसपेक्टर ने पुलिस एक्शन को सही ठहराया था। महबूब शेख केस को लेकर पुलिस का कहना था, महबूब से ठोस सबूत, जैसे जन्म प्रमाण पत्र, दिखाने को कहा था... हम सिर्फ आधार या पैन कार्ड को नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं करते हैं, क्योंकि इनका दुरुपयोग हो सकता है...वो वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाया, न ही कोई पारिवारिक पहचान का भी प्रमाण ही दे सका।
पुलिस की दलील अपनी जगह है, लेकिन बांग्लादेश भेजे गये लोगों का औपचारिक तरीके से लौट आना भी एक सबूत ही है। अगर महबूब शेख बांग्लादेशी होते तो क्या उनको वापस लाया जा सकता था? बेशक उनके पास वैध दस्तावेज होंगे और तभी लाये जा सके हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि उन लोगों के पास वैध दस्तावेज थे, लेकिन पुलिस के मांगने पर तो वे कागज नहीं दिखा सके। अब अगर पुलिस की गलती है, तो जांच का विषय है। क्या पुलिस ने उनकी तरफ से पेश किये गये सही कागजात को नजरअंदाज किया?
बिहार की राजनीति में बढ़ता पीके का कद....किस दल की लुटिया डूबो देगा
19 Jun, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच प्रशांत किशोर का यह बयान कि हम या 200 सीटें जीतने वाले हैं, या 4-5 पर सिमट जाएंगे। पीके का यह बयान बिहार के गली-गली में गूंज ही रहा है, इस बयान ने नेताओं की नींद भी गायब कर रखी है। बिहार चुनाव से पहले पीके की पॉलिटिक्स ने लालू के लाल तेजस्वी यादव की नींद हराम कर दी है, सिर्फ राजद ही नहीं एनडीए में भी खौफ पैदा कर दिया है। एनडीए नेताओं ने बोलना शुरू कर दिया है कि पीके की राजनीति में इस बार कुछ बड़ा होने वाला है। दो साल पहले जब प्रशांत किशोर ने अपनी 3,000 किलोमीटर की पदयात्रा बिहार में शुरू की थी, तब नेता और लोग सियासी नौटंकी मान रहे थे। लेकिन 2024 में जन सुराज पार्टी का गठन और उसके ठीक बाद विधानसभा के चार सीटों के उपचुनाव में 10 प्रतिशत वोट हासिल कर पीके ने तहलका मचा दिया।
पीके, जो कभी नरेंद्र मोदी की 2014 में जीत और 2015 में बिहार में महागठबंधन जीत के सूत्रधार थे, अब खुद सियासत के मैदान में हैं। उनकी पहली बड़ी कामयाबी थी 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत, जहां उन्होंने ‘चाय पे चर्चा’ और ‘3डी रैलियों’ जैसे इनोवेटिव कैंपेन तैयार किए। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत ने उन्हें सियासी रणनीति का ‘चाणक्य’ बना दिया। लेकिन इसके बाद पीके ने 2015 में नीतीश कुमार की महागठबंधन सरकार की जीत, 2021 में ममता बनर्जी की तृणमूल जीत और डीएमके की तमिलनाडु में वापसी सभी में पीके का दिमाग था।
2024 के बिहार विधानसभा के उपचुनावों में जन सुराज का प्रदर्शन भले ही कमजोर दिख रहा हो, पार्टी की चारों सीटों पर हार हुई। लेकिन पार्टी ने 10 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया, जो एक नए खिलाड़ी के लिए छोटी बात नहीं। पीके ने दावा किया कि उनका असली मुकाबला एनडीए के साथ है न कि राजद के साथ। वहीं राजद और महागठबंधन ने पीके को ‘बीजेपी की बी-टीम’ करार दिया है। मीसा भारती ने इतना तक कह दिया हैं कि ‘पांडे (पीके की जाति) यादवों को गाली देने का धंधा करते हैं’ बिहार चुनाव जिस तरह से प्रशांत किशोर मेहनत कर रहे हैं, उससे सियासत हिल जाए हैरानी नहीं होगी। बताया जा रहा हैं कि आरएसएस का एक वर्ग पीके के सपने को साकार करने में लगा है।
बिहार में नीतीश के बेटे निशांत के राजनीतिक प्रवेश में रोड़ा बनी भूंजा पार्टी : तेजस्वी यादव
19 Jun, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके करीबी नेताओं पर जमकर निशाना साधा। तेजस्वी ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने पर कहा कि नीतिश के करीबी भूंजा पार्टी वाले निशांत को पार्टी में शामिल नहीं होने देना चाहते।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे को लेकर तेजस्वी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पलायन रोकने नहीं, बल्कि गाली देने बिहार आ रहे हैं। पीएम मोदी लालू यादव और मुझे गाली देने, ठगने और लंबा चौड़ा भाषण देने आ रहे हैं। रोजगार देने, शिक्षा-स्वास्थ्य सुधारने या पलायन रोकने के लिए नहीं। तेजस्वी ने कटाक्ष कर पूछा, क्या पीएम मंच पर तीनों जमाइयों को माला पहनाएंगे? यह बयान उन्होंने जेडीयू नेताओं के कथित पारिवारिक हितों को लेकर दिया।
तेजस्वी ने कहा कि निशांत को राजनीति में आने से रोकने की साजिश रची जा रही है। नीतीश की इच्छा है कि उनके बेटे पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाए, लेकिन भूंजा पार्टी वाले ऐसा होने नहीं दे रहे हैं। यह लोग नीतीश की स्थिति का गलत फायदा उठा रहे हैं, क्योंकि आज मुख्यमंत्री अचेत अवस्था में हैं।
तेजस्वी ने दावा किया कि नीतीश के आसपास मौजूद लोग सिर्फ सत्ता की मलाई खा रहे हैं और अपने स्वार्थ के कामों में लगे हुए हैं। नीतीश के करीबी लोग मलाई खा रहे हैं, रेवड़ियां बांट रहे हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में क्या हो रहा है, सब देख रहे हैं। हम धैर्य रखे हुए हैं कि बीजेपी और जेडीयू कितना और गिरती है, फिर एक-एक का चिट्ठा खोला जाएगा।
पीएम मोदी विदेश दौरे से लौटते ही सर्वदलीय बैठक बुलाकर बताएं कि ट्रंप से फोन पर उनकी क्या बात हुई - कांग्रेस
19 Jun, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विदेश दौरे से लौटते ही सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी राजनीतिक दलों को यह बताना चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर उनकी क्या बातचीत हुई है? पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस में भोज के लिए बुलाया जाना भारत के लिए कूटनीतिक झटका है और इस पर प्रधानमंत्री को ट्रंप के समक्ष नाराजगी जतानी चाहिए थी।
कांग्रेस नेता ने कहा, इसीलिए हमने संसद के विशेष सत्र की मांग की ताकि प्रधानमंत्री राष्ट्र को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी चाहिए थीं। मालूम हो कि PM मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की 35 मिनट तक हुई बातचीत को लेकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के सिलसिले में व्यापार से जुड़े किसी विषय पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की और भविष्य में भी ऐसी कोई मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। रमेश ने उल्लेख किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 बार यह दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने मध्यस्थता करवाई। उन्होंने कहा, ये अप्रत्याशित झटके हैं। हमें दिखावे पर कम और तथ्य पर अधिक निर्भर रहना चाहिए। राष्ट्र को विश्वास में लेने और सामूहिक इच्छाशक्ति और संकल्प व्यक्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विभाजन का काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुनीर को व्हाइट हाउस में भोज पर बुलाए जाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति से नाराजगी जताई जानी चाहिए थी। रमेश ने कहा, अगर इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री होतीं, तो वह निश्चित रूप से अपनी नाराजगी अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन या रीगन को बतातीं।
इससे पहले रमेश ने ‘एक्स पर पोस्ट किया, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, वह व्यक्ति है जिसकी भड़काऊ और उकसाने वाली टिप्पणी सीधे 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमलों से जुड़ी थी। उसे आज व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ दोपहर के भोज पर बुलाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही वजह है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक दिन पहले ही जी7 शिखर सम्मेलन छोड़ दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गले लगाने से मना कर दिया? रमेश ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद 14 बार यह दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम करवाया है, जिसका मतलब है कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को खत्म करा दिया।उनका कहना है, अमेरिकी केंद्रीय कमान के प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला ने आतंकवाद विरोधी अभियानों में पाकिस्तान को अभूतपूर्व साझेदार बताया था। रमेश ने दावा किया, नमस्ते ट्रंप द्वारा हाउडी मोदी को यह तिहरा झटका है! भारतीय कूटनीति बिखर रही है और प्रधानमंत्री पूरी तरह से चुप हैं।
भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, ‘‘कांग्रेस और उसकी ट्रोल सेना इस तथ्य को पचा नहीं पा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की न तो आवश्यकता है और न ही इसे स्वीकार करता है। उन्होंने ‘एक्स पर एक पोस्ट किया, ‘‘कांग्रेस को केवल अपनी छोटी-मोटी बातों के लिए भारत की दृढ़ और सैद्धांतिक विदेश नीति को बदनाम करना बंद करना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मुख्य विपक्षी दल पर निशाना साधा और कहा कि ‘‘कांग्रेस के हर झूठ का पर्दाफाश हो गया है। भाजपा के कई नेताओं ने कांग्रेस पर उस वक्त हमला बोला जब प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ट्रंप के साथ टेलीफोन पर बातचीत की और उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हमले पड़ोसी देश के अनुरोध पर ‘‘रोके थे न कि अमेरिका द्वारा मध्यस्थता या किसी व्यापार समझौते की पेश कश के कारण।
कांग्रेस का पीएम मोदी पर तंज: जो बात ट्रंप से कही, उसे संसद में बताने से क्यों डर रहे?
18 Jun, 2025 10:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन कॉल को लेकर देश में सियासत गरमा गई है. विदेश सचिव के बयान के बाद से कांग्रेस लगातार बीजेपी पर हमलावर है. कांग्रेस इस बातचीत को लेकर लगातार सवाल उठा रही है. कांग्रेस का कहना है कि अगर ऑपरेशन सिंदूर के बाद मोदी-ट्रंप की 35 मिनट बातचीत हुई तो इसे उस समय बताया क्यों नहीं गया?
वहीं, इस बीच कांग्रेस की नेता व प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक बड़ा बयान दिया है. सुप्रिया ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर कहा, मोदी जी क्या मुंह दिखाइएगा देश की बेटियों को जिनका सिंदूर उजाड़ने वाला असीम मुनीर आज आपके दोस्त डोनाल्ड ट्रंप के यहां दावत उड़ा रहा है? आपकी विदेश नीति की तो धज्जियां उड़ चुकी हैं. जो तथाकथित ‘खरीखोटी’ आपने ट्रंप को फोन पर सुनाई वो देश के सामने बोलने में क्या दिक्कत है?
मोदी जी,
क्या मुँह दिखाइएगा देश की बेटियों को जिनका सिंदूर उजाड़ने वाला असीम मुनीर आज आपके दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प के यहाँ दावत उड़ा रहा है?
आपकी विदेश नीति की तो धज्जियाँ उड़ चुकी हैं
जो तथाकथित खरीखोटी आपने ट्रम्प को फ़ोन पर सुनाई वो देश के सामने बोलने में क्या दिक्कत है? — Supriya Shrinate
विदेश सचिव के बयान से गरमाया मामला
दरअसल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री के बयान के बाद यह मामला तूल पकड़ा. विदेश सचिव ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पर पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीब 35 मिनट तक बातचीत हुई. ट्रंप के आग्रह पर पीएम मोदी ने बात की. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है. विदेश सचिव ने बताया कि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बातचीत थी. इस दौरान अमेरिका से न मध्यस्थता पर कोई बात हुई और न ही ट्रेड डील पर.
जयराम रमेश ने बातचीत पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अब तक 14 बार यह डुगडुगी बजा चुके हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम उन्होंने ही करवाया यानी ऑपरेशन सिंदूर को समाप्त करने का सारा श्रेय उन्होंने खुद को दिया. वहीं, आज खबर आई है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 35 मिनट तक फोन पर बात हुई. राष्ट्रपति ट्रंप ने बातचीत के बारे में जो कहा और हमें जो कहा गया, उसमें जमीन आसमान का फर्क है. प्रधानमंत्री एक सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलाते? सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी कहें कि ट्रंप से उनकी क्या बात हुई? 37 दिनों तक प्रधानमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की. आज हमें बताया गया है कि उन्होंने ट्रंप के साथ 35 मिनट तक बात की.
महाराष्ट्र में भाषा की आग: हिंदी की किताबें जलाई गईं, राज ठाकरे ने 'मराठी अस्मिता' का नारा बुलंद किया
18 Jun, 2025 10:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र में एक बार फिर हिंदी भाषा को लेकर सियासत गरमा गई है. राज्य के स्कूलों में हिंदी पढ़ाए जाने के सरकारी आदेश पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने खुली चुनौती दे दी है. पार्टी प्रमुख राज ठाकरे के नेतृत्व में मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंबई, ठाणे और नासिक सहित कई जगहों पर स्कूलों में जाकर हिंदी की किताबें फाड़ीं, उन्हें जलाया और स्कूलों के प्रिंसिपलों को चेतावनी भरे पत्र सौंपे.
राज ठाकरे ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार को सीधे निशाने पर लिया और कहा कि हिंदी कोई राष्ट्र भाषा नहीं है, इसे जबरन न थोपा जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नाम पर राज्य और केंद्र सरकार की मिलीभगत का नतीजा है और इसके पीछे IAS लॉबी का दबाव है.
राज ठाकरे ने अपने बयान में कहा, मैंने 17 जून को ही सरकार को पत्र लिखा था कि हिंदी को अनिवार्य भाषा न बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने मुझे कहा था कि यह अनिवार्यता हटा दी जाएगी, लेकिन अब भी दबाव बनाया जा रहा है. आज मैं राज्य के सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों को पत्र भेज रहा हूं.
मनसे प्रमुख ने स्कूलों को चेतावनी देते हुए कहा कि, हम देखेंगे कि स्कूलों में छात्र हिंदी कैसे पढ़ते हैं. अगर सरकार ने यह निर्णय नहीं बदला तो हम चुप नहीं बैठेंगे. इसके बाद से मनसे कार्यकर्ता विभिन्न स्कूलों में जाकर हिंदी की पाठ्यपुस्तकें फाड़ रहे हैं और विरोध जता रहे हैं.
क्या है सरकारी आदेश?
दरअसल, हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने एक सरकारी निर्णय (GR) जारी किया था, जिसमें त्रिभाषा फार्मूले के तहत कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी के बाद हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाने की बात कही गई है. हालांकि, विवाद के बाद सरकार ने अनिवार्यता शब्द को हटा दिया है और स्पष्ट किया है कि यह वैकल्पिक रहेगा.
GR के अनुसार, अगर किसी कक्षा में 20 से अधिक छात्र हिंदी के बजाय कोई अन्य भाषा पढ़ना चाहते हैं, तो उनके लिए उस भाषा के शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे या ऑनलाइन शिक्षा दी जाएगी.
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दी सफाई
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा, मैंने राज ठाकरे से बात की है और उन्हें समझाने की कोशिश की है. नए सरकारी आदेश में कहीं भी अनिवार्य शब्द का उल्लेख नहीं है. कुछ स्कूलों में पहले से ही मराठी के बाद हिंदी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही है. अब केवल उसे औपचारिक रूप से शामिल किया गया है.
फडणवीस ने कहा कि छात्रों को जो तीसरी भाषा पसंद होगी, उसे चुनने की आजादी दी गई है. सरकार ने किसी पर हिंदी थोपने की कोशिश नहीं की है.
विपक्ष ने भी बोला हमला
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी राज्य सरकार को घेरते हुए सियासी हमला बोला है. प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, त्रिभाषा फार्मूला पंडित नेहरू की सोच थी ताकि हर मातृभाषा का संरक्षण हो, लेकिन अब इस पर जबरन हिंदी थोपी जा रही है, जो पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। मराठी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक संस्कृति है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम RSS के हिंदू राष्ट्र एजेंडे का हिस्सा है और भाषा की विविधता पर हमला है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी BMC (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनावों के मद्देनजर उठाया गया है, ताकि मराठी मतदाताओं को एकजुट किया जा सके. राज ठाकरे पहले भी मराठी अस्मिता के मुद्दों को लेकर राजनीति करते रहे हैं और भाषा का यह मुद्दा एक बार फिर उसी दिशा में संकेत करता है.
राज्य में स्कूल खुल चुके हैं, बच्चों की किताबें भी खरीदी जा चुकी हैं, लेकिन अब इस सियासी घमासान ने बच्चों की पढ़ाई के बीच मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. भाषा के नाम पर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है.
ममता बनर्जी ने केंद्र को घेरा: संविधान की हत्या करने वाले अब मना रहे हैं दिवस
18 Jun, 2025 10:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को केंद्र सरकार के उस फैसले का कड़ा विरोध किया, जिसमें 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में इस दिन को नहीं मनाया जाएगा और इसे संविधान और लोकतंत्र का मजाक करार दिया.
प्रेस से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, हम 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में नहीं मनाएंगे. केंद्र सरकार का यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों और भारतीय संविधान का अपमान है. यह केवल राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित कदम है, जिसे हम किसी भी हाल में स्वीकार नहीं कर सकते.
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक परिपत्र जारी कर सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जाए. यह दिन 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल की स्मृति में तय किया गया है.
बंगाल में नहीं मनाया जाएगा संविधान हत्या दिवस
हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस तर्क को नकारते हुए कहा, हम सब जानते हैं कि आपातकाल का दौर कठिन था, लेकिन उस समय की आलोचना करने का मतलब यह नहीं कि हम संविधान का अपमान करें. आपातकाल स्मृति दिवस जैसा कोई नाम रखा जा सकता था, लेकिन संविधान हत्या दिवस कहना पूरी तरह अनुचित और निंदनीय है.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वर्तमान केंद्र सरकार खुद लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन कर रही है. उन्होंने कहा, जो सरकार हर दिन धार्मिक ध्रुवीकरण, विपक्षियों का दमन, और केंद्रीय संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है, वह किस अधिकार से संविधान की रक्षा की बात करती है? असली संविधान हत्या तो आज हो रही है.
सीएम बनर्जी ने आगे कहा, अगर नए संसद भवन में बैठकर रोज संविधान की आत्मा को कुचला जा रहा है, तो क्या हमें हर दिन संविधान हत्या दिवस नहीं मनाना चाहिए? यह एक ढोंग है, और हम इसमें शामिल नहीं होंगे.
बंगाल विरोधी एजेंडा चलाने का लगाया आरोप
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर बंगाल विरोधी एजेंडा चलाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य को योजनाओं के तहत मिलने वाली फंडिंग रोकी जा रही है और लगातार राजनीतिक द्वेष के तहत दबाव बनाया जा रहा है.
इस मौके पर उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट की उस खंडपीठ के आदेश का स्वागत भी किया, जिसमें केंद्र सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) के तहत 100 दिनों के रोजगार कार्यक्रम को 1 अगस्त से फिर शुरू करने और लंबित फंड जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, यह हमारे संघर्ष की जीत है. केंद्र तीन साल से पश्चिम बंगाल का फंड रोक कर बैठा है. यह मजदूरों के अधिकारों का हनन है.
उन्होंने यह भी सवाल किया कि केंद्र सरकार ने देश में हुए कई आतंकी हमलों के बावजूद कभी आतंकवाद विरोधी दिवस घोषित क्यों नहीं किया. उन्होंने कहा, भाषणों और प्रतीकों की राजनीति से देश नहीं चलता, ज़मीनी विकास और संवैधानिक मर्यादा से चलता है.
संभल हिंसा मामला: सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क समेत 23 लोगों पर आरोप तय, चार्जशीट दाखिल
18 Jun, 2025 10:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संभल हिंसा मामले में एसआईटी ने 1100 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में सपा सांसद जियाउर रहमान बर्क समेत 23 लोगों के नाम हैं. यूपी के संभल में पिछले साल 24 नवंबर को हिंसा हुई थी. सपा सांसद बर्क पर हिंसा से पहले लोगों को भड़काने का आरोप है. जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में चार युवकों की मौत हुई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
इस मामले में कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से 10 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी. सांसद जियाउर रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल पर हिंसा भड़काने का आरोप है. सदर कोतवाली पुलिस ने सांसद बर्क सहित 23 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. इस हिंसा के 90 आरोपी है. सभी सलाखों में हैं.
25 मार्च को एसआईटी ने दिल्ली जाकर नोटिस थमाया था. उसके बाद 8 अप्रैल को थाना नखासा में SIT के सामने सांसद के बयान दर्ज हुए थे. हिंसा के आरोपियों की अभी तक कोई जमानत नहीं हो पाई है
चार लोगों की गई थी जान
संभल में पिछले साल 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी. पिछले दिनों पुलिस ने दावा किया था कि संभल हिंसा का मास्टरमाइंड दुबई में जाकर छिपा बैठा अंतरराष्ट्रीय ऑटो लिफ्टर शारिक साठा है. पुलिस ने यह भी दावा किया था कि हिंसा के दौरान चार लोगों की मौत का जिम्मेदार शारिक साठा के गुर्गे ही थे, जिन्होंने फायरिंग कर चार लोगों की जान ली थी.
सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा
24 नवंबर को जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी. यह हिंसा इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि इसमें चार लोग मारे गए थे, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे. इलाके में लोगों के बीच दहशत फैल गई थी. कई दिनों तक इंटरनेट बंद कर दिया गया था और कर्फ्यू लगाया गया था. हिंसा की जांच एसआईटी को सौंपी गई. पिछले दिनों एसआईटी की टीम जियाउर्रहमान बर्क के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची थी.
सपा सांसद बर्क को 35ए का नोटिस थमाया था, जिसमें उन्हें 8 अप्रैल तक बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया था. इससे पहले जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली एडवोकेट को इस मामले में गिरफ्तार किया गया. जफर पर अशांति फैलाने की साजिश रचने और गंभीर अपराधों में झूठे बयान देने का आरोप दर्ज है.
भ्रष्टाचार के आरोप में गोवा के मंत्री गोविंद गौड़े पर गिरी गाज, CM सावंत ने मंत्रिमंडल से हटाया
18 Jun, 2025 10:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री गोविंद गौड़े को बुधवार को मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के मंत्रिमंडल से हटा दिया गया. राज्य भाजपा अध्यक्ष दामोदर नाइक ने कहा कि यह कदम आदिवासी कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के करीब एक महीने बाद उठाया गया है. यह दूसरा अवसर है, जब सीएम ने किसी कैबिनेट स्तर के मंत्री को कैबिनेट से हटा दिया है.
नाइक ने पीटीआई को बताया कि गौड़े को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया है और उनकी बर्खास्तगी का कारण बाद में घोषित किया जाएगा. गौड़े ने 26 मई को एक राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए आदिवासी कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था, यह विभाग सावंत के पास था. 53 वर्षीय राजनेता उत्तरी गोवा के प्रियोल से भाजपा विधायक हैं.
सीएम ने दूसरी बार किसी मंत्री को हटाया
2022 में पद संभालने के बाद, यह दूसरी बार है जब सावंत ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले पूर्ण कार्यकाल में किसी कैबिनेट मंत्री को हटाया है.
नवंबर 2023 में, सावंत ने नीलेश कैबराल को पीडब्ल्यूडी मंत्री के पद से हटा दिया था. हालांकि गौड़े ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी फैसले की जानकारी नहीं है.
संपर्क करने पर भाजपा गोवा प्रमुख दामोदर नाइक ने कहा कि गौड़े को हटाने का निर्णय “सर्वसम्मति से” और “लंबे समय से प्रतीक्षित” था. नाइक ने को बताया, “यह मुख्यमंत्री और पार्टी का सर्वसम्मत निर्णय था. यह लंबे समय से प्रतीक्षित था.”
पूर्व सीएम मनोहर ने पहली बार बनाया था मंत्री
पिछले महीने एक आदिवासी कार्यक्रम के दौरान गौड़े ने सार्वजनिक रूप से आदिवासी कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया था, जो मुख्यमंत्री के अधीन है.
गौड़े, जो पहली बार 2017 में एक निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए थे, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की कैबिनेट में पहली बार मंत्री बने थे. 2019 में पर्रिकर की मृत्यु के बाद वे सावंत की कैबिनेट में मंत्री बने रहे.
जनवरी 2022 में गौड़े ने सावंत की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय विधायक के तौर पर भाजपा में शामिल हो गए. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें प्रियोल निर्वाचन क्षेत्र से 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया गया. चुनाव जीतने के बाद सावंत ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में बनाए रखा.
अखिलेश यादव ने बदली रणनीति, पसमांदा मुसलमानों के लिए सपा क्यों खोल रही दरवाजे?
18 Jun, 2025 05:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश में दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से सियासी दांव चले जाने लगे हैं. कांग्रेस से लेकर AIMIM तक की नजर मुस्लिम वोटबैंक पर है, जिसके चलते सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी एक्शन में आ गए हैं. सपा अल्पसंख्यक मोर्चा के नेताओं के साथ सोमवार को बैठक करने के बाद अखिलेश यादव पीएम मोदी के नक्शेकदम पर चलते हुए पसमांदा मुसलमानों को भी साधने में जुट गए हैं. मंगलवार को पसमांदा मुस्लिमों के साथ अखिलेश ने बैठक करके बड़ा सियासी दांव चला है.
यूपी में 20 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो दो हिस्सों में बंटी हुई है. एक अशराफ मुस्लिम, जिसमें शेख, पठान, सैय्यद, रांगड़, त्यागी, तुर्क जैसी मुस्लिम सवर्ण जातियां आती है. दूसरा पसमांदा मुस्लिम है, जिसमें ओबीसी की मुस्लिम जातियां शामिल हैं. मुस्लिमों में 15 से 20 फीसदी आबादी अशराफ मुस्लिमों की है तो पसमांदा मुसलमान 80 से 85 फीसदी हैं. बीजेपी की नजर पसमांदा मुस्लिमों पर है तो अखिलेश यादव पसमांदा और अशराफ दोनों ही मुस्लिम तबके के साथ सियासी बैलेंस बनाए रखने की कवायद में है.
पसमांदा मुस्लिमों के साथ अखिलेश की बैठक
अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में अनीस मंसूरी की अध्यक्षता में पसमांदा मुस्लिम समाज की बैठक की. इस दौरान मंच पर सपा विधायक आशु मलिक और इलियास मंसूरी से लेकर वसीम राईनी, महबूब आलम अंसारी, दौलत अली घोसी, शेख सलाहुद्दीन, शहरे आलम कुरैशी, शादाब कुरैशी और अनवार अहमद अन्नू गद्दी उपस्थित थे. इस तरह से सपा ने ओबीसी मुस्लिमों की अलग-अलग जातियों के नेताओं के बहाने सियासी संदेश देने की कोशिश की.
अखिलेश ने अपनी सरकार के दौरान पसमांदा खासकर बुनकरों के लिए कामों का जिक्र किया और बीजेपी सरकार पर बुनकरों की योजनाओं को बंद करने का आरोप लगाया. सपा प्रमुख ने भरोसा दिलाया कि सपा बनने पर बुनकरों की तमाम समस्याओं का निदान करने के साथ उनके प्रशिक्षण, नई तकनीक एवं फैशन बाजार के ट्रेंड से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर भी ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि पसमांदा समाज में तभी खुशहाली आएगी जब यूपी में बीजेपी को हराकर समाजवादी सरकार बनेगी. पसमांदा समुदाय के नेताओं ने भी अखिलेश यादव को भरोसा दिलाया है कि 2027 में सपा की सरकार बनाने में अहम रोल अदा करेंगे.
अखिलेश को क्यों याद आए पसमांदा मुस्लिम
अखिलेश यादव ने पीएम मोदी के नक्शेकदम पर चलते हुए पसमांदा मुस्लिमों को साधने का दांव चला है. पीएम मोदी का फोकस पसमांदा मुस्लिमों पर रहा है और बीजेपी नेताओं को भी पसमांदा मुस्लिमों को पार्टी से जोड़ने का टास्क दिया था. इसके बाद बीजेपी के कई मुस्लिम नेताओं ने पसमांदा के नाम पर संगठन को बनाकर सम्मेलन शुरू कर दिया था. इस तरह से बीजेपी की नजर ओबीसी मुस्लिमों को पार्टी से जोड़ने की थी. बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने पिछले दिनों यूपी में मुस्लिम सम्मेलन किया था, जिसमें ओबीसी मुस्लिम समुदाय की बड़ी आबादी जुटी थी.
बीजेपी की पसमांदा मुस्लिम सियासत को देखते हुए अखिलेश यादव सतर्क हो गए हैं, क्योंकि बीजेपी यूपी में पसमांदा मुस्लिमों के साथ अगड़े मुस्लिमों की तरफ से भेदभाव करने, सियासी भागीदारी से वंचित रखने और उनके हक में अभी तक कुछ नहीं कह कर सियासी एजेंडा सेट करती रही है. कांग्रेस से छिटकने के बाद सूबे में मुस्लिमों की पहली पसंद सपा बनी हुई है. ऐसे में पसमांदा मुस्लिमों के साथ बैठक करके अखिलेश यादव ने मुसलमानों के 80 फीसदी तबके को साधने का दांव चला है. बीजेपी के तमाम ओबीसी मुस्लिमों ने सपा पर सिर्फ अशराफ मुस्लिमों को तवज्जे देने के आरोप लगाए थे. अखिलेश यादव के आसपास अशराफ मुस्लिम नेता नजर आते थे, जिसे लेकर सवाल उठते रहते हैं. इसके अलावा जातिगत जनगणना भी होने जा रही है, जिसमें मुस्लिम जातियों की भी गिनती होनी है. पसमांदा मुस्लिमों की जिस तरह आबादी है, उसके चलते अखिलेश यादव के लिए पसमांदा मुसलमानों को साथ लेकर चलना सियासी मजबूरी भी बन गई है. अखिलेश यादव पीडीए यानि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का फॉर्मूला बनाकर चल रहे हैं, जिसे लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सवाल उठाया था कि सपा के पीडीए में मुस्लिम कहां है.
2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अखिलेश यादव के सामने अपने सियासी समीकरण को दुरुस्त करने की चुनौती खड़ी हो गई है. पसमांदा मुस्लिमों पर डाले जा रहे बीजेपी को डोरे को देखते हुए अखिलेश यादव ने भी पसमांदा मुस्लिमों को सियासी संदेश देने की कवायद शुरू कर दी है ताकि सपा की मुस्लिम सियासत पर कोई असर पड़ सके. 2022 में मुस्लिमों ने 85 फीसदी वोट सपा को दिया था और 2024 में 90 फीसदी मुस्लिम वोट सपा को मिले थे. मुस्लिमों की कुल आबादी का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पसमांदा मुसलमानों का है. इनको साधने के लिए अखिलेश ने अपनी सियासी एक्सरसाइज शुरू कर दी है.
यूपी में पसमांदा मुस्लिम वोटर कितने अहम
यूपी की सियासत में पसमांदा मुस्लिम वोटर काफी अहम है. पसमांदा यानी मुसलमानों के पिछड़े वर्ग, जिनकी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों की कुल आबादी में 85 फीसदी हिस्सेदारी मानी जाती है. यूपी में मुसलमानों की 41 जातियां इस समाज में शामिल हैं, इनमें कुरैशी, अंसारी, सलमानी, शाह, राईन, मंसूरी, तेली, सैफी, अब्बासी, घाड़े और सिद्दीकी प्रमुख हैं. इसके अलावा पसमांदा मुसलमानों में कहार, मल्लाह, कुम्हार, गुज्जर, गद्दी-घोसी, माली, तेली, दर्जी, बंजारा, नट और मोची जैसी जातियां हैं.
पसमांदा मुसलमानों के नेता लगातार दावा करते हैं कि मुस्लिम आबादी में 80-85 प्रतिशत पसमांदा मुसलमान ही हैं, लेकिन उनको उनकी संख्या के हिसाब से हक नहीं मिलता. अल्पसंख्यकों के तमाम संगठनों, संस्थानों में उच्चवर्गीय मुसलमानों का ही वर्चस्व है. मुसलमानों में 80 प्रतिशत बड़ी संख्या है. समाज पर राज 20 फीसदी मुसलमान करते हैं, जो अशराफ मुस्लिम हैं. इन्हें धर्मांतरित मानते हैं और खुद को अरब, मध्य एशिया से आए मुसलमानों के वंशज मानते हैं. यही नहीं ये 20 फीसदी अगड़े मुसलमान सामाजिक और आर्थिक तौर पर मजबूत हैं और सभी सियासी दलों में इन्हीं का वर्चस्व रहा है, लेकिन बदलती हुई राजनीति में मुस्लिमों के दोनों ही तबको को साधकर अखिलेश सियासी बैलेंस बनाने में जुटे हैं.
महागठबंधन ने तय किया सीटों का गणित, पारस-सहनी के लिए RJD-कांग्रेस झुकने को तैयार
18 Jun, 2025 05:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला फाइनल होता नजर आ रहा. इंडिया गठबंधन की चार बैठकों के बाद सीट बंटवारे को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू हो गया है. मुकेश सहनी की वीआईपी और पशुपति पारस की पार्टी के लिए कांग्रेस और आरजेडी त्याग करने के लिए रजामंद हो गए हैं. कांग्रेस और आरजेडी पिछली बार से कम सीटों पर चुनाव लड़ेंगी तो सीपीआई माले ज्यादा सीटों पर चुनावी मैदान में किस्मत आजमाएगी.
इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर 12 जून को घटक दलों की चौथी बैठक तेजस्वी यादव के घर पर हुई थी. तेजस्वी यादव ने महागठबंधन की पार्टियों को सीटों के साथ-साथ चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के नाम की सूची मांगी थी. कांग्रेस और सीपीआई माले ने उम्मीदवारों के नाम आरजेडी को नहीं बताए हैं, लेकिन सीट के नामों की फेहरिस्त जरूर सौंप दी है. इस तरह से इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे की बात आगे बढ़ती ही नहीं बल्कि फाइनल होती दिख रही है.
कांग्रेस ने आरजेडी को सौंपी अपनी फेहरिस्त
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है. महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावारू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और पार्टी विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने सोमवार को आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात की. कांग्रेस नेताओं ने आरजेडी को अपनी सीटों की लिस्ट सौंप दी है.
कांग्रेस ने 2020 के चुनाव में जीती अपनी 19 सीटों के अलावा दूसरे नंबर पर रहने वाली 39 सीटों के नाम को शामिल किया है. साथ ही कांग्रेस ने कुछ अन्य सीटों पर चुनाव लड़ने की प्लानिंग की है, जिस पर पिछली बार लेफ्ट चुनाव लड़ी थी. पिछले चुनाव में 70 सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ी थी और उसकी नजर इस बार के चुनाव में भी 70 सीटों पर ही लड़ने की है, लेकिन इस बार सीट की संख्या के साथ उसका फोकस जीत वाली सीटों पर भी है. इसीलिए कांग्रेस तर्क दे रही है कि पिछली बार उसने अपनी परंपरागत सीटें छोड़ दी थी, लेकिन वो सीटें इस बार चाहिए.
पारस-सहनी के लिए कांग्रेस-RJD करेगी त्याग
बिहार में महागठबंधन के दलों के बीच सीट शेयरिंग पर बात आगे बढ़ने लगी है. 12 जून यानि गुरुवार को तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के सभी दलों को एक हफ्ते के अंदर अपनी सीटों का नाम देने को कहा था. इसी लिहाज से कांग्रेस ने अपने चुनाव लड़ने वाली सीटों के नाम और संख्या की लिस्ट आरजेडी सुप्रीमों को सौंप दी है, लेकिन इंडिया गठबंधन में इस बार पिछली बार से ज्यादा घटक दल हैं. ऐसे में आरजेडी और कांग्रेस को सीटों का त्याग करना होगा.
2020 के चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा-कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट पार्टियां थी, लेकिन इस बार सहयोगी दलों की संख्या बढ़ गई है. बिहार में महागठबंधन का हिस्सा इस बार आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई माले, मुकेश सहनी की वीआईपी और पशुपति पारस की पार्टी है. तेजस्वी के घर पर इंडिया गठबंधन के घटकदलों के नेताओं की गुरुवार को हुई बैठक में यह तय हुआ है कि मुकेश सहनी और पशुपति पारस गठबंधन का हिस्सा रहते हैं तो कांग्रेस-आरजेडी को कुछ सीटों का त्याग करना होगा.
हालांकि, मुकेश सहनी और पशुपति पारस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम और सीटों की संख्या आरजेडी को नहीं सौंपी है. मुकेश सहनी ने ऐलान किया था कि वो 60 सीट पर चुनाव लड़ेंगे जबकि पशुपति पारस कह चुके हैं कि उन्हें सम्मानजनक सीटें मिलेंगी, तभी इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनेंगे. महागठबंधन के पुराने साथी सीपीआई और सीपीएम ने अपनी लिस्ट अब तक नहीं सौंपी है. पिछली बार सीपीआई 6 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और सीपीएम ने 4 सीट पर किस्मत आजमाई थी.
कांग्रेस 55 से 60 सीट पर क्या लड़ेगी चुनाव?
कांग्रेस ने भले ही आरजेडी को 70 सीटों के नाम की सूची सौंपी हो, लेकिन इंडिया गठबंधन की शुरुआती बातचीत से संकेत मिल रहे हैं कि पिछली बार से कम सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस बार 55 से 60 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. कांग्रेस को पिछले चुनाव से 10 से 15 सीटों का समझौता करना होगा.
वहीं, आरजेडी पिछले चुनाव में 144 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन इस बार उसे भी कुछ सीटों पर त्याग करना होगा. पशुपति पारस और मुकेश सहनी को इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनाने में तेजस्वी यादव की ही भूमिका अहम रही है. ऐसे में कांग्रेस के साथ आरजेडी को भी कम सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा. आरजेडी को 2025 में 130 में से 135 सीट पर चुनाव लड़ना पड़ सकता है.
क्या माले को मिलेंगी पहले से ज्यादा सीटें
कांग्रेस और आरजेडी को सीटों का त्याग करना पड़ रहा है तो सीपीआई माले की सीटों में इजाफा हो सकता है. सीपीआई माले ने पिछली बार 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 सीटें जीतने में कामयाब रही है, लेकिन इस बार माले ने 42 सीटों की डिमांड रखी है. माले मध्य बिहार की नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद, कैमूर की सीटों के साथ-साथ चंपारण, मिथिला और जमुई में सीटें मांग रही है. सीपीआई माले का तर्क है कि उसे पहले से अगर ज्यादा सीटें मिलेंगी तो महागठबंधन का परफॉर्मेंस बढ़ेगा. सीपीआई माले को सीटें पिछली बार से कुछ ज्यादा मिल सकती है, लेकिन उसके डिमांड के लिहाज से नहीं.
विनेबिलिटी पर सीट और कैंडिडेट का चयन
इंडिया गठबंधन के सभी घटकदलों ने तय किया है कि कोटा सिस्टम के बजाय जीत के आधार पर सीट बंटवारा किया जाए. इस बार एक-एक सीट पर महागठबंधन के दल बैठकर विनेबिलिटी के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करेंगे. इस तरह से इंडिया गठबंधन ने बिहार चुनाव लड़ने और जीत दर्ज करने की रणनीति बनाने का काम किया है. महागठबंधन की हुई चौथी बैठक में तेजस्वी यादव ने ज्यादा मार्जिन से हारने वाली प्रत्याशियों को बदलने का प्लान बनाया है, जिसमें माना जा रहा है कि 15 हजार से अधिक वोटों से हारने वाली सीटों को रखा गया है.
कांग्रेस के आंतरिक सर्वे के मुताबिक पार्टी के 45 वर्तमान विधायकों के अलावा सभी विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी है. लेकिन जानकारी के मुताबिक सिटिंग विधायकों के टिकट नहीं काटे जाएंगे. इसके अलावा तेजस्वी यादव का फॉर्मूला अगर चला तो ज्यादा मार्जिन से हारी हुई सीटों पर इस बार नए कैंडिडेट चुनाव लड़ते हुए नजर आएंगे. ये कांग्रेस और आरजेडी ही नहीं बल्कि लेफ्ट के दलों के लिए होगा.
2024 के एजेंडे पर चुनाव लड़ने का प्लान
इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग फॉर्मूले के साथ-साथ ज्वाइंट कैंपेन को लेकर रणनीति बनाई जा रही है. 2024 वाले विनिंग फॉर्मूले पर ही एनडीए को सियासी मात देने की रणनीति इंडिया गठबंधन बना रहा है. बिहार में सामाजिक समानता और संविधान के सम्मान को महागठबंधन ने अपने कैंपेन के केंद्र बिंदु में रखकर चुनाव लड़ने की प्लानिंग की है. माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन में अगले 15 दिन में कैंपेन का औपचारिक आगाज हो जाएगा, जिसमें सभी दलों के केंद्रीय नेतृत्व शामिल होंगे.
कांग्रेस का पूरा फोकस बिहार में सामाजिक न्याय के एजेंडे पर है, जो आरजेडी से लेकर लेफ्ट, मुकेश सहनी और पशुपति पारस को भी सूट करता है. आरजेडी की पूरी सियासत ही दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटों की रही है. कांग्रेस भी अब बिहार में इसी एजेंडे पर आगे बढ़ रही है. राहुल गांधी ने 2024 के चुनाव के बाद से बिहार में जितने भी कार्यक्रम किए हैं या फिर शामिल हुए हैं, उसका एजेंडा सामाजिक न्याय ही रहा है. महागठबंधन ने बिहार में सामाजिक समानता और संविधान के सम्मान का एजेंडा सेट करते हुए सियासी जंग फतह करने की रणनीति बनाई है.
ट्रंप-मोदी बातचीत पर विपक्ष का 'ट्रिपल झटका' आरोप, कांग्रेस ने मांगा स्पष्टीकरण
18 Jun, 2025 05:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लगभग 35 मिनट बात की. इस बात की जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी. उन्होंने कहा कि इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने ट्रंप से स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर आपसी सहमति से हुआ न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की वजह से हुआ है. पीएम ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है.
विक्रम मिसरी के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधने लगी. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि यह भारतीय विदेश नीति और कूटनीति को मिला तीसरा झटका है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो बातें मिस्री को बताई हैं वह संसद में भी कहिए. आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि सचिव मिस्री का बयान और व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग दोनों में अलग-अलग बातें लग रही हैं.
‘ट्रिपल झटका’ का कांसेप्ट
मिस्री के बयान के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय विदेश नीति और कूटनीति को मिले ‘ट्रिपल झटके’ को समझिए. उन्होंने कहा कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें आज अपने साथ खास लंच के लिए आमंत्रित किया है. उन्होंने कहा कि यह भारतीय कूटनीति के लिए झटका है. हम इस बारे में चुप हैं, हमने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है.
उन्होंने ट्रिपल झटके का दूसरा कारण बताते हुए कहा कि जनरल माइकल कुरिल्ला जो अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख हैं, उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बेहतरीन साझेदार है. जयराम ने कहा कि हम कह रहे हैं कि पाकिस्तान एक बेहतरीन अपराधी है.
तीसरा कारण बताते हुए जयराम ने कहा कि 10 मई से लेकर अब तक, 14 बार राष्ट्रपति ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर उन्होंने ही कराया. उन्होंने व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं उन्होंने पाकिस्तान और भारत को एक साथ रखा. इतना सब होने के बावजूद पीएम चुप रहे. पीएम ने इसका कोई जवाब नहीं दिया.
मिस्री से कही बातें, संसद में भी कहिए
जयराम ने कहा कि हम लोगों को बताया गया कि पीएम ने राष्ट्रपति ट्रंप से 35 मिनट फोन पर बात की. कांग्रेस नेता ने कहा कि पीएम ने विदेश सचिव से जो बातें कही हैं, उनमें से कुछ बातें संसद में भी कहिए. उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र बुलाया और वही बातें कहिए जो आपने राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर कही हैं. इसके आगे उन्होंने कहा कि हम संसद में बहस चाहते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा करता हूं लेकिन….
मिस्री के बयान पर आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि मैं अपने प्रधानमंत्री पर भरोसा करता हूं. लेकिन अब बात बहुत आगे बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप 14 से 15 बार बयान दे चुके हैं. उन्होंने कहा विदेश सचिव मिस्री अपने बयान में कुछ और कह रहे हैं और मैं व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में कुछ और ही देख रहा हूं. दोनों बातें एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं. उन्होंने कहा कि इसलिए हम बार-बार कहते हैं कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए. कल आप सत्ता में रहें या न रहें, लेकिन देश की एक आवाज अमेरिकी राष्ट्रपति तक पहुंचनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि वैश्विक स्तर पर इस तरह की कवायद की जरूरत है, सिर्फ घरेलू हेडलाइन मैनेजमेंट हमारी प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बढ़ाई महागठबंधन की मुश्किल: बिहार में 16 सीटों की मांग
18 Jun, 2025 01:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसको लेकर अभी से राजनीतिक दलों ने अपने-अपने सियासी समीकरण बनाने शुरू कर दिए हैं. इसी कड़ी में बीते दिन इंडिया ब्लॉक (महागठबंधन ) की बैठक हुई. इस बैठक में आरजेडी और कांग्रेस जैसे प्रमुख दल शामिल हुए. हालांकि इस बैठक में झारखंड की सत्ता में काबिज और महागठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा को न्योता नहीं दिया गया. यही कारण है कि इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है.
चुनावी समीकरण को लेकर हुई महागठबंधन की बैठक से आउट हुई झारखंड मुक्ति मोर्चा के तेवर तल्ख हो गए हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य से जब पूछा गया की महागठबंधन की बैठक में आपके दल को बुलाया नहीं गया तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि हम कोई जबरदस्ती किसी बैठक में शामिल होने नहीं जाएंगे. साथ ही साथ उन्होंने ताल ठोकते हुए यह भी स्पष्ट किया कि हम लोग बिहार में चुनाव लड़ेंगे यह तय है.
हमने धर्म निभाया RJD भी निभाए- सुप्रियो भट्टाचार्य
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि राजद और कांग्रेस को यह बात याद रखनी चाहिए कि हम लोग उन लोगों को पूरे सम्मान के साथ अपने साथ रखे हुए हैं. राजद को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब उनका एक विधायक था तो भी हम लोगों ने उन्हें मंत्री पद दिया था. हमने गठबंधन धर्म झारखंड में निभाया बिहार में राजद को गठबंधन धर्म निभाना चाहिए.
उचित समय आने पर शीर्ष नेतृत्व करेगा विचार- आरजेडी
झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से लगाए गए आरोपों और नाराजगी का आरजेडी ने जवाब दिया. झारखंड आरजेडी महासचिव और मीडिया प्रभारी कैलाश यादव ने कहा कि महागठबंधन के तहत बिहार में जो पार्टी एक विचारधारा की है और बिहार में सक्रिय हैं. उन्हें उस बैठक में बुलाया गया था. उन्होंने कहा कि रही बात झारखंड मुक्ति मोर्चा की तो, जब उचित समय आएगा तो शीर्ष नेतृत्व उस पर विचार करेगा.
उन्होंने कहा कि इस सब के बीच झामुमो का दावा ठोकना और दबाव बनाना यह सही नहीं है. हर पार्टी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर लड़े और ज्यादा प्रदेशों में चुनाव लड़े, ताकि राष्ट्रीय पार्टी बन सके. झामुमो की सोच सही है, लेकिन बिहार में उनका जनाधार क्या है, यह उन्हें भी अच्छे से पता है. बिहार में झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व करता कौन है…? कितने जिलों में उनका संगठन है यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए.
JMM को पेशेंस रखना होगा
आरजेडी नेता ने कहा कि JMM चाहे तो बिहार की सभी सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. हम बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में ही मजबूत स्थिति में हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा का संगठन बिहार में मजबूत नहीं है. हालांकि महागठबंधन के तहत सीट शेयरिंग में उन्हें सम्मान मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें धैर्य रखना होगा.
बीजेपी ने पूरे मामले पर ली चुटकी
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन की बैठक में झारखंड मुक्ति मोर्चा को आमंत्रित नहीं किए जाने पर चुटकी ली है. विधायक और राज्य के पूर्व मंत्री रहे सीपी सिंह ने कहा कि एक पुरानी कहावत है तोप मांगोगे तो ही बंदूक का लाइसेंस मिलेगा. झारखंड मुक्ति मोर्चा 16 सीट मांग रही है, तभी तो शायद उन्हें एक -दो सीट मिलेगा.
इन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी JMM
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने चुकी पिछले दिनों कहा था कि की बिहार के 16 सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव लड़ने की तैयारी में है. 12 सीट तो तय हैं लेकिन हमारी तैयारी 16 सीटों पर चुनाव लड़ने की है. उन्होंने बिहार की उन विधानसभा सीटों के नाम भी गिना दी हैं, जहां से पार्टी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है. पांडेय के मुताबिक, बिहार की चकाई, कटोरिया, ठाकुरगंज, कोचाधामन, रानीगंज, बनमनखी, रुपौली, धमदाहा, पूरनपुर, झाझा, छातापुर, सोनबरसा, रामनगर, जमालपुर, तारापुर और मनिहारी की सीट शामिल है.
हम भाषाओं को लेकर कैसे विभाजित हो सकते हैं? - जगदीप धनखड़
18 Jun, 2025 09:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुडुचेरी । उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को पांडिचेरी विश्वविद्यालय में सवाल किया कि हम भाषाओं को लेकर कैसे विभाजित हो सकते हैं? उपराष्ट्रपति पांडिचेरी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं।अपने सम्बोधन में धनखड़ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अक्षरशः लागू करने की वकालत की है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगी और इससे देश के विकास को भी गति मिलेगी। उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को न लागू करने वाले राज्यों से अपील करते हुए कहा कि वे इसे लागू करें। ये नीति महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पांडिचेरी विश्वविद्यालय में कहा कि पिछले दशक में अभूतपूर्व विकास के कारण भारत दुनिया का सबसे महत्वाकांक्षी राष्ट्र है। उपराष्ट्रपति ने सवाल किया कि हम भाषाओं को लेकर कैसे विभाजित हो सकते हैं? उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि दुनिया में मौजूद कोई भी देश भाषाओं के मामले में भारत की तरह समृद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद में भी सदस्यों को 22 भाषाओं में बोलने की इजाजत है। भारत की भाषाएं समावेशिता का संकेत देती हैं। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि हमें गंतव्य को देखना चाहिए, भविष्य को ध्यान में रखना चाहिए और तूफान से उबरना चाहिए।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को दुनिया की सबसे अच्छी पॉलिसी बताया है। उन्होंने कहा कि ये नीति छात्रों को प्रतिभा और क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के साथ ही आगे बढ़ने और समय का सही इस्तेमाल करने का मौका देती है। उपराष्ट्रपति ने कार्यशालाओं का आयोजन कर के छात्रों को इस नीति के बारे में पूरी तरह से अवगत कराने की भी जरूरत पर जोर दिया है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को विश्व शांति की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की प्रगति के लिए शांति आवश्यक है। यह मजबूत स्थिति से आती है। पुडुचेरी में उपराष्ट्रपति ने जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जेआईपीएमईआर) के छात्रों और कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सर्वप्रथम है और राष्ट्रीय सुरक्षा सभी राजनीतिक पक्षपातपूर्ण हितों से परे है।
ऑपरेशन सिंदूर पर उन्होंने कहा कि दो महीने पहले जब पहलगाम में आतंकियों ने हमला किया था, तब हम सभी चिंतित, चिंतित और सदमे में थे। आतंकवादियों ने हमारे चरित्र को चुनौती दी। धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को वचन दिया कि हम आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के फैसले को सही साबित करने के लिए सशस्त्र बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को यह सबूत मिल गया है कि यह एक अलग भारत है साहसी, आत्मविश्वासी लेकिन गणना करने वाला। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा है कि युद्ध कोई समाधान नहीं है और हमें कूटनीति और वार्ता का सहारा लेना होगा। यह संदेश स्पष्ट रूप से जा चुका है।
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