राजनीति
बिहार में महिलाओं की आवाज से बदल रहा परिदृश्य, शिक्षा-स्वास्थ्य में आया सकारात्मक बदलाव
21 Jun, 2025 10:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार में महिला संवाद कार्यक्रम ने महिला सशक्तिकरण की एक नई पहल की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से शुरू किया गया यह कार्यक्रम 70,000 से अधिक स्थानों पर आयोजित हुआ. स्वास्थ्य, शिक्षा, और समाज कल्याण जैसे विभिन्न विषयों पर लाखों सुझाव प्राप्त हुए हैं. इन सुझावों के आधार पर सरकार महिलाओं की ज़रूरतों के अनुरूप योजनाओं में बदलाव करेगी और बेहतर बुनियादी ढाँचा प्रदान करेगी.
बिहार अब महिला संवाद के जरिए आधी आबादी के सशक्तीकरण की नई इबारत लिख रहा है. समाज के बदलते परिवेश में महिलाओं को मुखर होकर अपनी बात रखने का सशक्त मंच राज्य सरकार प्रदान कर रही है. इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक आयोजित कर की थी. पूरे राज्य में एक साथ 18 अप्रैल 2025 से हुई थी.
यह कार्यक्रम करीब एक महीने चला. इस दौरान पंचायत से लेकर जिला और राज्य स्तर पर महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पूरे राज्य में 70 हजार से अधिक स्थानों पर महिला संवाद आयोजित किए गए.
कार्यक्रम में मिले एक लाख से ज्यादा सुझाव
महिला संवाद कार्यक्रम में 40 विभागों से जुड़े अलग-अलग विषयों पर लाख से अधिक संख्या में सुझाव प्राप्त हुए हैं. इन तमाम सुझावों के आधार पर महिलाओं ने मूलभूत समस्याओं या जरूरतों को उजागर किया. ताकि इन सुझावों के आधार पर योजनाओं में जरूरी या महिलाओं के अनुकूल बदलाव किए जा सकें और इसके आधार पर सरकार जनोन्नमुखी कार्य की टिकाऊ रूपरेखा तैयार कर सकें. इसके आधार पर सुदूर इलाकों में रहने वाली महिलाओं की समस्याओं का समाधान करने में सरकार को काफी मदद मिलेगी.
महिलाओं को सीधे तौर पर मिलेगा लाभ
अब तक हुए महिला संवाद कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, पीएचईडी समेत अन्य विभागों से जुड़ी सुझाव बड़ी संख्या में प्राप्त हुई. इन सभी सुझावों को अलग-अलग करके इनकी समुचित समीक्षा संबंधित विभाग के स्तर पर की जा रही है. ताकि इसकी बदौलत ठोस और टिकाऊ के साथ लोक उपयोगी योजनाओं की रूपरेखा तैयार हो सके. महिलाओं को इससे सीधे तौर पर लाभ मिल सके, स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खासतौर से फोकस की जा रही है और उनकी जरूरतों के हिसाब से तमाम सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद शुरू की जा रही है.
सुझाव से तैयार होगी रूपरेखा
महिला संवाद कार्यक्रम में जितने तरह के सुझाव प्राप्त हुए हैं, उसके आधार पर कई नई कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी. साथ ही जहां स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, चापाकल जैसी अन्य जो भी जरूरी मूलभूत संरचाओं के निर्माण की आवश्यकता है, उसका निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा. इसके लिए सभी संबंधित विभागों के स्तर पर वृहद और महत्वपूर्ण कार्ययोजना तैयार कर इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा. इसकी पूरी रूपरेखा तैयार हो गई है.
निकाय चुनाव में राज ठाकरे से गठबंधन पर उद्धव का बड़ा संकेत: "जनता जो चाहेगी वही होगा"
21 Jun, 2025 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचाने वाला शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बीच संभावित गठबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं. शुक्रवार को शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधायकों और सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने मनसे के साथ गठबंधन पर चर्चा करते हुए सभी नेताओं को जमीनी स्तर पर स्थानीय माहौल का जायजा लेने का निर्देश दिया.
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने साफ किया कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन पार्टी को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि, गठबंधन हो या नहीं, हमें अकेले लड़ने के लिए भी पूरी तरह तैयार रहना चाहिए. यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे और राज ठाकरे के संभावित साथ आने की अटकलें लगाई जा रही थीं.
गठबंधन पर फील्ड रिपोर्ट की मांग
बैठक में उद्धव ठाकरे ने विधायकों और सांसदों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की राय लें कि मनसे के साथ गठबंधन पर उनकी क्या सोच है. उन्होंने यह भी कहा कि केवल राजनीतिक लाभ को देखकर नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा. ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की जाएगी और सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.
अकेले लड़ने की रणनीति भी तैयार
उद्धव ठाकरे ने कहा, “गठबंधन की चर्चा अपने स्थान पर है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि हम अकेले चुनाव लड़ते हैं तो हमारी रणनीति क्या होगी. इसलिए पार्टी को पूरी ताकत के साथ अकेले भी चुनाव लड़ने की तैयारियां करनी होंगी. उन्होंने पार्टी नेताओं से आगामी मानसून सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति बनाने और मुंबई महानगरपालिका चुनावों को प्राथमिकता देने की भी बात कही.
शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि यह संगठनात्मक बैठक शिवसेना की सालगिरह के अवसर पर रखी गई थी. उन्होंने कहा कि, विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और पार्टी ने इसकी तैयारियां कर ली हैं. बैठक में विधायक और सांसद मौजूद थे और सभी को संगठन को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए.
गठबंधन की चर्चा कैसे शुरू हुई?
राजनीतिक गलियारों में मनसे-शिवसेना गठबंधन की चर्चा उस वक्त तेज हुई जब प्रसिद्ध अभिनेता महेश मांजरेकर ने राज ठाकरे का एक इंटरव्यू लिया. इस दौरान जब उनसे शिवसेना के साथ गठबंधन की संभावना के बारे में पूछा गया तो राज ठाकरे ने कहा था, मुझे साथ आना मुश्किल नहीं लगता. हमारे झगड़े महाराष्ट्र की जनता के मुद्दों के सामने छोटे हैं. इसके बाद उद्धव ठाकरे ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा, मुझे छोटे-मोटे विवादों को किनारे रखने में कोई हर्ज नहीं है. जो महाराष्ट्र की जनता चाहेगी वही होगा.
इन बयानों के बाद से दोनों पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं को बल मिला है. कुछ मौकों पर दोनों पक्षों के नेताओं के बीच अनौपचारिक बैठकें भी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.
हालांकि दोनों ही पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से सकारात्मक संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन उद्धव ठाकरे की बैठक और उसमें दिए गए संदेश से यह स्पष्ट है कि शिवसेना (उद्धव गुट) गठबंधन के विकल्प के साथ-साथ अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति भी बना रही है और इसे लेकर महाराष्ट्र की सियासत में जमकर कयास लग रहे हैं.
बीजेपी को झटका: बिहार चुनाव से पहले विधायक मिश्री लाल यादव की सदस्यता रद्द
21 Jun, 2025 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या कम हो गई है. बीजेपी विधायक मिश्री लाल यादव की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई है. विधानसभा सचिवालय की तरफ से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है. मिश्री लाल बिहार की अलीनगर सीट से विधायक थे. विधानसभा सचिवालय की ओर से यह कदम दरभंगा एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा के बाद उठाया गया है.
दरभंगा एमपी एमएलए विशेष कोर्ट ने उनके खिलाफ जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 8 तथा संविधान के अनुच्छेद 191 (3) के प्रावधानों के तहत सजा सुनाई थी. पिछले महीने की 27 तारीख को ही एडीजे सुमन कुमार दिवाकर ने मिश्री लाल के सजा पर फैसला सुनाया था. कोर्ट की ओर से उन्हें 2 साल की सजा सुनाई गई. ऐसे में जनप्रतिनिधि कानून के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर सदस्यता समाप्त हो जाती है. इसी कारण मिश्री लाल यादव की सदस्यता भी अब खत्म हो गई है.
वर्तमान विधानसभा के तीसरे विधायक
मिश्री लाल यादव वर्तमान विधानसभा सत्र में तीसरे ऐसे विधायक हैं, जिनकी सदस्यता खत्म हुई है. इससे पहले माले के विधायक मनोज मंजिल और अनंत सिंह की सदस्यता खत्म हुई थी.मिश्री लाल यादव पहले पूर्व मंत्री मुकेश साहनी की पार्टी वीआईपी में थे. वह वीआईपी की टिकट पर ही जीत कर अलीनगर से विधानसभा में पहुंचे थे. हालांकि बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.
छह साल पहले दर्ज हुआ था मामला
छह साल पहले 30 जनवरी 2019 को समैला निवासी उमेश मिश्रा ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी. जिसमें उन्होंने यह आरोप लगाया था कि उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया था और लूटपाट की गई थी. इसी मामले में एमपी एमएलए कोर्ट ने सुनवाई की थी. कोर्ट ने मिश्री लाल यादव और गोसाई टोल पछाड़ी के निवासी सुरेश यादव को दोषी करार दिया था. पहले उन्हें तीन महीने की सजा सुनाई गई थी लेकिन वादी की ओर से अपील किए जाने के अदालत ने सजा को बढ़ाकर दो साल कर दिया.
बीजेपी विधायकों की संख्या 78 पहुंची
बिहार के मौजूदा विधानसभा में बीजेपी के 79 विधायक थे. अब मिश्री लाल यादव की सदस्यता खत्म होने के बाद यह संख्या घट कर 78 हो गई है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मिश्री लाल यादव की सदस्यता खत्म होना उनके साथ-साथ पार्टी के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है.
सिसोदिया का BJP पर सीधा हमला: "दिल्ली की परेशान जनता को छोड़, मेरे खिलाफ षड्यंत्र रच रही है भाजपा
20 Jun, 2025 10:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि दिल्ली में शानदार स्कूल बने और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत शानदार काम हुआ, यह पूरा देश जानता है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति से प्रेरित होकर एजेंसियों ने एफआईआर दर्ज करवाई है. उन्होंने हमला बोला कि भाजपा ने पिछले 10 साल में सभी एजेंसियों का दुरुपयोग करके आप के हर नेता की पूरी कुंडली खंगाल डाली, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला.
मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने उनके ऊपर ये आरोप लगाए थे और जब उन्होंने मनोज तिवारी पर मानहानि का मुकदमा किया, तो वह जमानत पर बाहर हैं. उन्होंने कहा मेरे ऊपर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और यह पूरी तरह से झूठा मामला है.
पूरी दिल्ली का बुरा हाल है- मनीष
मनीष सिसोदिया ने कहा कि पिछली एक बारिश में पूरी दिल्ली का बुरा हाल हो गया है. सड़कें टूटी पड़ी हैं और पूरी दिल्ली में पावर कट हो रहे हैं. प्राइवेट स्कूल वालों ने लूट मचा रखी हैं. यहां तक कि भाजपा के कट्टर समर्थक भी रो रहे हैं कि उन्हें प्राइवेट स्कूल वाले लूट रहे हैं.
मनीष सिसोदिया ने कहा कि ऐसे में भाजपा जनता का ध्यान भटकाने के लिए फर्जी केस करती है और एफआईआर-एफआईआर खेलती है. पहले भी कुछ नहीं निकला था, और इस बार भी कुछ नहीं निकलेगा, लेकिन भाजपा जनता का मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ये केस करती है.
भाजपा से कार्यकर्ता भी परेशान-सिसोदिया
मनीष सिसोदिया ने कहा कि पूरी दिल्ली में भाजपा के किसी कार्यकर्ता को समझ नहीं आ रहा है कि उनकी सरकार दिल्ली में क्या करने वाली है या क्या कर रही है. भाजपा के कार्यकर्ता भी प्राइवेट स्कूलों के हाथों लुट रहे हैं. भाजपा के कट्टर समर्थक भी परेशान हैं कि पावर कट से बुरा हाल है. एक बारिश में पूरी दिल्ली बेहाल हो गई है.
तेजस्वी यादव का केंद्र पर वार: "बिहार को सिर्फ वादे मिले, बीजेपी-नीतीश ने धोखा दिया
20 Jun, 2025 09:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीतीश सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे राजनीतिक वार किए. उन्होंने राज्य में हुई हालिया घटनाओं और प्रधानमंत्री की बिहार यात्रा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए. तेजस्वी ने कहा कि बिहार में रोज कोई न कोई घटना घट रही है, लोग पीड़ित हो रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं जाते. राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि राज्य में घटना होती है, लोग मरते हैं, लेकिन सरकार का कोई नुमाइंदा पीड़ितों से मिलने नहीं जाता. नीतीश कुमार बीजेपी की मीटिंग में तो जरूर पहुंच जाते हैं.
वहीं, पीएम मोदी की बिहार यात्रा पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि उनका कार्यक्रम सरकारी नहीं बल्कि राजनीतिक रैली है. उन्होंने कहा कि आज बिहार में जो कार्यक्रम हो रहा है, वो सरकारी आयोजन नहीं, पूरी तरह से एक चुनावी प्रचार सभा है. इसके अलावा उन्होंने सिवान में पीएम की रैली में कही गई बातों को लेकर भी निशाना साधा है.
तेजस्वी बोले- पीएम को बताना चाहिए बिहार को क्या दिया?
तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण सिर्फ जुमलों का पुलिंदा है. जब बिहार को कुछ दिया ही नहीं गया तो फिर ऐसे भाषणों का क्या औचित्य है. पीएम को बताना चाहिए कि उन्होंने बिहार को क्या दिया? क्या बिहार के नौजवानों को रोजगार मिला, शिक्षा में क्या सुधार हुआ, स्वास्थ्य सेवाएं पहले से बेहतर हुई? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार के लिए केवल वादा किया, लेकिन उसे निभाया नहीं गया.
आरजेडी नेता ने कहा कि मौजूदा समय में बिहार का हर नागरिक केवल एक बात कह रहा है कि ‘बिहार में जुमलों का साया देखो, फिर वही आया है’. उन्होंने कहा कि जनता अब बीजेपी के खोखले वादे को समझ और पहचान चुकी है.
तेजस्वी यादव का यह प्रेस कॉन्फ्रेंस स्पष्ट संकेत देता है कि विपक्ष अब आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर आक्रामक रणनीति अपना रहा है। नीतीश कुमार और भाजपा के गठबंधन पर सीधा वार कर, राजद ने स्पष्ट किया है कि बिहार की जमीन पर असल मुद्दों बेरोजगारी, महंगाई और बदहाल कानून व्यवस्था को लेकर लड़ाई लड़ी जाएगी.
पहले कहा था नीतीश की सरकार RSS और BJP के नियंत्रण में
दो दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि नीतीश कुमार की सरकार अब पूरी तरह RSS और BJP के नियंत्रण में है. तेजस्वी ने दावा किया कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी RSS कोटे से अधिकारियों की नियुक्तियां हो रही हैं.
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में दलित, पिछड़ा, अति-पिछड़ा और मुस्लिम वर्ग के साथ निरंतर अन्याय किया जा रहा है. उन्होंने कहा 65 फीसदी आरक्षण को रोकना हो, नौकरियों में आरक्षित वर्गों के अधिकार छीनना हो या प्रशासनिक पदों पर वंचित समुदायों के अधिकारियों को दरकिनार करना हो यह सब RSS के निर्देश पर हो रहा है.
मुख्यमंत्री इस पर चुप हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षित वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी आरोप लगाकर कार्रवाई की जा रही है ताकि उन्हें डराया जा सके. भूंजा पार्टी रिटायर्ड अधिकारी की अगुवाई में बिहार को दोनों हाथों और पैरों से लूट रही है.
बिहार दौरे के दौरान बोले पीएम मोदी- ‘पंजा’ और ‘लालटेन’ ने बिहार को पलायन का प्रतीक बना दिया था
20 Jun, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार दौर पर पहुंचे हैं। पीएम मोदी ने सिवान में 6,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की जल, बिजली और रेल क्षेत्र से जुड़ी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि आपने मिलकर बिहार से जंगलराज का सफाया किया है। आज के युवा सिर्फ कहानियों में ही 20 साल पहले के बिहार की बदहाली सुनते हैं। ‘पंजा’ और ‘लालटेन’ ने बिहार को पलायन का प्रतीक बना दिया था, लेकिन बिहार के लोग मुश्किल हालात में भी कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करते हैं।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी सीवान के पचरुखी प्रखंड के जसौली गांव पहुंचे। सीएम नीतीश कुमार के साथ ओपन गाड़ी में सवार पीएम मोदी समर्थकों के बीच से गुजरकर मंच तक पहुंचे। हाथ हिलाकर उन्होंने समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया. दोनों डिप्टी सीएम भी इस दौरान गाड़ी में मौजूद थे। मंच पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया गया।
पीएम मोदी शुक्रवार को तय कार्यक्रम के तहत पहले यूपी के कुशीनगर गए। जहां से हेलीकॉप्टर पीएम मोदी को लेकर जसौली में बने हेलीपैड पर उतरा। यहां से सड़क मार्ग होते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। पीएम मोदी ने सीवान में जल, रेल और बिजली से जुड़ी हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस दौरान राज्य के सीएम नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मंच पर मौजूद थे।
पीएम मोदी ने बिहार के सिवान में 6,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की जल, बिजली और रेल क्षेत्र से जुड़ी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। ये परियोजनाएं नमामि गंगे योजना के अंतर्गत आती हैं, जिनका उद्देश्य राज्य की बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना है। पीएम ने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है, और केंद्र सरकार बिहार के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने हाल के विदेश का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौर में मेरी दुनिया के बड़े-बड़े देशों के नेताओं से बातचीत हुई है। वे सभी भारत की तेज़ प्रगति को देखकर काफी प्रभावित हुए। सभी मानते हैं कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने जा रहा है। इस दिशा में बिहार की भूमिका बहुत अहम है।
पीएम मोदी ने कहा कि आपने मिलकर बिहार से जंगलराज का सफाया किया है। आज के युवा सिर्फ कहानियों में ही 20 साल पहले के बिहार की बदहाली सुनते हैं। ‘पंजा’ और ‘लालटेन’ ने बिहार को पलायन का प्रतीक बना दिया था, लेकिन बिहार के लोग मुश्किल हालात में भी कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने बिहार के स्वाभिमान को बहुत ठेस पहुंचाई और ऐसी लूट-खसोट मचाई कि गरीबी बिहार की पहचान बन गई। एनडीए सरकार ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में इन चुनौतियों को पार करते हुए बिहार को विकास की पटरी पर लाया है। पीएम ने चेताया कि आज जब बिहार तेज गति से आगे बढ़ रहा है, तब जंगलराज लाने वाले फिर से मौके की तलाश कर रहे हैं। वे फिर अपने पुराने कारनामों को दोहराने की फिराक में हैं। जनता को ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा और विकास की इस यात्रा को रुकने नहीं देना है।
इस मौके पर बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि जब से एनडीए को काम करने का मौका मिला है, बिहार में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। पहले की सरकारों में लोग अपने घर से बाहर निकलने में डरते थे। आज महिलाएं आत्मविश्वास के साथ घूम फिर सकती हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। हमने महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया और आज उनका सशक्तिकरण स्पष्ट रूप से दिख रहा है। नीतीश ने जातीय जनगणना कराने के लिए भी पीएम मोदी का आभार जताया।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मैं पीएम मोदी का धन्यवाद करता हूं कि वे आज सिवान में नमामि गंगे योजना के तहत 6,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने आए हैं। जब भी पीएम मोदी बिहार आते हैं, वे राज्य को नई सौगात देते हैं। पूरा बिहार उनके आने का इंतजार करता रहता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्य को नई दिशा मिल रही है।
बता दें पीएम मोदी पिछले 9 महीने में छह बार बिहार आ चुके। इस साल ही बिहार में विधानसभा चुनाव होना है। पीएम नरेंद्र मोदी के इस कार्यक्रम में शामिल होने सुबह से ही समर्थकों के भीड़ आने लगी थी। महिला और बुजुर्ग भी बड़ी तादाद में पैदल चलकर सभास्थल पहुंचे। पूरा पंडाल मोदी समर्थकों से भरा था।
'हम मरे हुए को क्यों मारेंगे...' उद्धव ठाकरे की आलोचना करते-करते शिंदे ने एक्टर डिनो मोरिया का क्यों लिया नाम?
20 Jun, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए उनकी टिप्पणी पर करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि, महाराष्ट्र ने पहले ही चुनाव में 'आओ मुझे मारो' कहने वालों को हरा दिया है. उन्होंने कहा, 'हम मरे हुए को क्यों मारेंगे'. साथ ही उन्होंने मीठी नदी से गाद निकालने से जुड़े घोटाले को लेकर ठाकरे की आलोचना की.
दरअसल, शिवसेना के 59वें स्थापना दिवस के अवसर पर उद्धव ठाकरे ने अपनी विपक्षी पार्टी को 'आओ मुझे मार डालो' की चुनौती दी थी. साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ दल की कड़ी आलोचना की. बता दें कि, शिवसेना के 59वें स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को मुंबई में दो कार्यक्रम आयोजित किए गए. यूबीटी का शिवसेना स्थापना दिवस 2025 समारोह षणमुखानंद हॉल में आयोजित किया गया.
एकनाथ शिंदे ने वर्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे पर तंज कसा. शिंदे ने सवाल किया, "पहलगाम हमले के बाद मैं महाराष्ट्र में मराठी बहनों से मिलने गया था. जब मैंने उन्हें सांत्वना दी तो आप कहां थे... क्या आप छुट्टी पर थे. उन्होंने फिर आगे कहा, अगर बालासाहेब होते तो ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार की खुलकर तारीफ करते लेकिन ये लोग आरोप लगाने के अलावा कुछ नहीं करते.
शिंदे ने ठाकरे पर तंज कसते हुए आगे कहा, आप सेना की कार्रवाई का हिसाब कैसे मांग सकते हैं. अपनी ही सेना पर शक करना देशद्रोह से कम नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की ओर से अलग-अलग देशों में भेजे गए प्रतिनिधिमंडलों में मिलिंद देवड़ा और श्रीकांत शिंदे भी शामिल थे. यह महाराष्ट्र के लिए सम्मान की बात है.
आगे बोलते हुए एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर पैसे लेने का आरोप लगाया. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने सवाल करते हुए आगे कहा कि, बालासाहेब के बाद शिवसेना ने मराठी लोगों के लिए क्या किया. उनको मराठी लोगों को इसका हिसाब देना चाहिए.
शिंदे ने आगे कहा कि, उन्होंने (उद्धव ठाकरे) 20 साल नगर निगम सरकार में बिताए और सिर्फ खिचड़ी में पैसे खाए, कोविड में पैसे खाए, कचरे में पैसे खाए, टरमैक में पैसे खाए और इस तरह के काम किए और उन्होंने मुंबई में बुनियादी ढांचे को बर्बाद कर दिया.
मीठी नदी से गाद निकालने से जुड़ा घोटाला
शिंदे ने कहा कि, उन्हें (उद्धव ठाकरे) लगता है कि मुंबई नगर निगम सिर्फ सोने के अंडे देने वाली मुर्गी है और उनका जीवन बीएमसी के खजाने में है. शिंदे ने आरोप लगाया कि, मुंबई में सभी कामों में पैसे खाने की आदी यूबीटी ने मीठी नदी की गाद में भी पैसे खाए हैं.
शिंदे ने ठाकरे पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि, वे कितने पैसे खाते हैं. क्या इससे उनका पेट नहीं भरता. उन्होंने यह भी तंज कसा कि अब आप (उद्धव ठाकरे) मीठी नदी के मगरमच्छ की पकड़ से नहीं बच पाएंगे. उन्होंने कहा कि, अगर डिनो मोरिया अपना मुंह खोलते हैं, तो देखिए कितने लोग 'मोर्या' बनेंगे."
मुंबई में बुनियादी ढांचे के बारे में बोलते हुए, शिंदे ने कहा, "यूबीटी ने मुंबई मेट्रो को रोक दिया लेकिन हमने कोस्टल रोड, अटल सेतु और कार शेड परियोजनाओं को शुरू किया है. मुंबई की सड़कें दो चरणों में कंक्रीट की होंगी. उन्होंने कहा कि, अगले दो सालों में पूरी मुंबई गड्ढों से मुक्त हो जाएगी. शिंदे ने यह भी कहा कि, केंद्र सरकार की मदद से कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं. उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि मुंबई के पास वधावन पोर्ट और एयरपोर्ट का काम जल्द ही पूरा हो जाएगा.
क्या है मामला?
फिल्म अभिनेता डिनो मोरिया मीठी नदी से गाद निकालने से जुड़े 65 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से संबंधित धन शोधन जांच के सिलसिले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए थे.
ईडी का मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा मई में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है. इस प्राथमिकी में ठेकेदारों और निगम अधिकारियों सहित 13 लोगों के खिलाफ मीठी नदी की गाद निकालने के लिए 2017-2023 तक दिए गए ठेकों में 65.54 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के लिए मामला दर्ज किया गया था.
मीठी नदी मुंबई से होकर बहती है और महानगर के लिए बरसात में जल निकास का काम करती है. बीएमसी पर 1997 से 2022 तक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना का नियंत्रण था. 2022 में निगम परिषद के भंग होने के बाद, बीएमसी पर राज्य सरकार का नियंत्रण था जिसका नेतृत्व उस समय एकनाथ शिंदे कर रहे थे.
पुलिस ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि बीएमसी अधिकारियों ने गाद निकालने के ठेके के लिए निविदा को इस तरह से तैयार किया कि इससे मशीनरी के एक विशेष आपूर्तिकर्ता को लाभ हुआ और ठेकेदारों ने कथित तौर पर मुंबई से गाद को बाहर ले जाने के लिए फर्जी बिल बनाए. मोरिया (49) और उनके भाई से पिछले महीने भी इस मामले में मुंबई पुलिस की ईओडब्ल्यू ने पूछताछ की थी.
समझा जाता है कि मोरिया बंधुओं से पुलिस ने कथित बिचौलिए केतन कदम के साथ उनके कथित संबंधों के बारे में पूछताछ की, जिसे मामले में एक अन्य आरोपी जय जोशी के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा सैंटिनो से जुड़ी एक कंपनी में किए गए कुछ वित्तीय लेन-देन के बारे में भी पूछताछ की गई थी.
पाकिस्तान की मदद से सत्ता पाने की कोशिश कर रही कांग्रेस-केशव
20 Jun, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ। यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस अब पाकिस्तान की मदद से सत्ता में आने का ख्वाब देख रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश की जनता पर भरोसा नहीं है। सोशल साइट ‘एक्स’ पर दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब देश की जनता के बजाय ‘पाकिस्तान के नेताओं’ के भरोसे पर ज्यादा निर्भर है। पाकिस्तान के भरोसे कांग्रेस सत्ता पाने का ख्वाब पाल रही है। उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ने ये टिप्पणी कांग्रेस नेताओं के भारत-पाकिस्तान के संबंधों को लेकर दिए गए बयानों के जवाब में दी।
मोदी सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी
20 Jun, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। 8वां वेतन आयोग लागू होने के साथ ही देश के 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बड़ा बदलाव होगा। संशोधित वेतन संरचना 1 जनवरी, 2026 से लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, आयोग के गठन में देरी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। आयोग का एक प्रमुख फोकस फिटमेंट फैक्टर होगा। जबकि 7वें वेतन आयोग ने कारक को 2.57 पर सेट किया था, इस 8वें वेतन आयोग के तहत बढ़ाकर 2.86 किए जाने की संभावना है।
अगर फिटमेंट फैक्टर में 2.57 से बढ़कर 2.86 होगा तब समायोजन संभावित रूप से न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से करीब 51,480 रुपये तक बढ़ा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय आयोग के नवनियुक्त सदस्यों पर निर्भर रहेगा।
भत्तों और योगदानों पर प्रभाव
आधार वेतन समायोजन के अलावा, हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) और ट्रैवल अलाउंस (टीए) जैसे भत्तों में भी कर्मचारी पोस्टिंग और यात्रा आवश्यकताओं के आधार पर अपडेट देखने को मिल सकते हैं। नतीजतन, एक ही वेतन ग्रेड के दो कर्मचारियों की कुल आय उनके भत्ते के हक में भिन्नता के कारण अलग-अलग हो सकती है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) और केंद्र स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) में योगदान भी प्रभावित होगा। वर्तमान में, सरकारी कर्मचारी अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते (डीए) का 10 प्रतिशत एनपीएस में योगदान करते हैं, जिसमें सरकार 14 प्रतिशत योगदान देती है। वेतन संशोधन के बाद, ये योगदान तदनुसार बढ़ जाएगा। सीजीएचएस के लिए सदस्यता दरें वेतन स्लैब से जुड़ी हुई हैं, इस प्रकार, मूल वेतन में वृद्धि के परिणामस्वरूप सीजीएचएस शुल्क में भी वृद्धि होगी।
वेतन ग्रेड में अनुमानित वेतन बढ़ोतरी
उदाहरण के लिए:
ग्रेड 2000 (स्तर 3): मूल वेतन 57,456 रुपये तक बढ़ सकता है, जिसमें ग्रॉस मंथली वेतन 74,845 रुपये और शुद्ध टेक-होम वेतन करीब 68,849 रुपये तक पहुंच सकता है।
ग्रेड 4200 (स्तर 6): 93,708 रुपये के अपेक्षित मूल वेतन के परिणामस्वरूप 1,19,798 रुपये का ग्रॉस वेतन हो सकता है, जिससे लगभग 1,09,977 रुपये का कुल मासिक वेतन हो सकता है।
ग्रेड 5400 (स्तर 9): मूल वेतन 1,40,220 रुपये तक बढ़ सकता है, जिसमें ग्रॉस वेतन 1,81,073 रुपये और कुल टेक-होम वेतन करीब 1,66,401 रुपये हो सकता है।
ग्रेड 6600 (स्तर 11): संशोधित मूल वेतन 1,84,452 रुपये तक पहुंच सकता है, जिसमें ग्रॉस मासिक आय 2,35,920 रुपये होने की उम्मीद है, जिसके चलते लगभग 2,16,825 रुपये का टेक-होम वेतन होगा।
कांग्रेस को अपनी हार की कुंठा से बाहर निकलना होगा : नकवी
20 Jun, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जब देश के ज्यादातर विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़े हैं, वहीं कांग्रेस को पीएम मोदी पर भरोसा नहीं है। कांग्रेस को कन्फ्यूजन के कुंड और कॉन्सपिरेसी के झुंड से बाहर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस कभी प्रधानमंत्री मोदी को, कभी देश को नकारा बता रही है, तब मुझे नहीं लगता कि पार्टी में आने वाले समय में मौजूदा राजनीतिक स्थिति में किसी भी प्रकार से सकारात्मक स्थिति पैदा होगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी हार की कुंठा से बाहर निकलना होगा। कांग्रेस को खुले मन से यह स्वीकार करना होगा कि अब देश की जनता ने आपको सिरे से नकार दिया है। समस्या यह है कि कांग्रेस अपनी हार पचा नहीं पा रही है, इसलिए उसकी ऐसी स्थिति हो चुकी है। वैसे मौजूदा समय में कांग्रेस की विश्वसनीयता पूरी तरह से खत्म हो चुकी है।
इसके अलावा, मध्यस्थता के मुद्दे पर बीजेपी नेता नकवी ने कहा कि पीएम मोदी ने कभी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को भी स्वीकार नहीं किया है, चाहे कश्मीर का मसला हो या कोई और मसला। भारत हर मुद्दे का समाधान करने की क्षमता अपने अंदर रखता है।
उन्होंने ट्रंप की ओर से मध्यस्थता के बयान पर कहा कि कुछ लोग श्रेय लेने की होड़ में गड़बड़ी कर देते हैं, यह उसी का नतीजा है। लेकिन, हम इस तरह के बयानों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध में फंसे भारतीयों को स्वदेश लाने का अभियान जारी है। अब तक कई भारतीयों को स्वदेश लाया जा चुका है। यह हम सभी लोगों के लिए संतोष का विषय है। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनशीलता को दिखाता है।
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा आज गुजरात आएंगे
20 Jun, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद| केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गुजरात दौरे पर आ रहे हैं| अमित शाह 21 जून को योग दिवस के कार्यक्रम में भाग लेने आ रहे हैं, जबकि जेपी नड्डा गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. विजय रूपाणी की स्मृति में होनेवाली प्रार्थना सभा शामिल होने गुजरात आएंगे| 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अहमदाबाद के प्रह्लादनगर गार्डन में योग दिवस समारोह का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह अहमदाबाद आएंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुजरात राज्य योग बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए शुक्रवार रात 8:00 बजे अहमदाबाद पहुंचेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शुक्रवार को गुजरात आएंगे| राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय विजयभाई रूपाणी के लिए शुक्रवार को गांधीनगर स्थित भाजपा कार्यालय कमलम में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया है। इस प्रार्थना सभा में जेपी नड्डा शामिल होंगे और दिवंगत विजय रूपाणी को श्रद्धांजलि देंगे। उनके साथ महासचिव वी. सतीश, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद रहेंगे।
मैं कांग्रेस पार्टी का सदस्य हूं। पार्टी को तय करने दीजिए कि वह मेरे बारे में क्या सोचती है - शशि थरूर
20 Jun, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य शशि थरूर ने स्वीकार किया है कि पार्टी नेतृत्व में कुछ नेताओं से उनके मतभेद हैं। लेकिन नीलांबुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के मद्देनजर वह इस बारे में बात नहीं करेंगे। थरूर ने कहा कि कांग्रेस, उसके मूल्य और उसके कार्यकर्ता उन्हें बहुत प्रिय हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद, नरेन्द्र मोदी सरकार के रुख का समर्थन करने के कारण थरूर कुछ पार्टी सहयोगियों के निशाने पर रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि उन्होंने 16 वर्ष तक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ निकटता से काम किया है और वह उन्हें अपना करीबी मित्र एवं भाई मानते हैं।
थरूर ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व में कुछ लोगों से मेरी राय अलग है। आप जानते हैं कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूं, क्योंकि उनमें से कुछ मुद्दे सार्वजनिक हैं और आपने (मीडिया ने) इस बारे में खबरें दी हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके मतभेद राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हैं या प्रदेश नेतृत्व के साथ। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य ने संकेत दिया कि वह उपचुनाव के नतीजों के बाद उन मतभेदों के बारे में बात कर सकते हैं। थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पार्टी के एक नेता द्वारा उन्हें ‘‘भाजपा का सुपर प्रवक्ता बताये जाने के बाद कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन नहीं किया। पूर्व कांग्रेस सांसद उदित राज ने थरूर को भाजपा का ‘‘सुपर प्रवक्ता करार दिया था क्योंकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के तहत विदेश दौरे पर गए तिरुवनंतपुरम से सांसद ने कथित तौर पर कहा था कि भारत ने पहली बार 2015 में नियंत्रण रेखा पार की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने बृहस्पतिवार को इसे ‘‘गलत धारणा करार दिया।
थरूर ने यह भी कहा कि उन्होंने इस विषय पर बहस में न पड़ने का फैसला किया क्योंकि वह प्रतिनिधिमंडल के दौरे में बहुत व्यस्त थे और वह उन बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते जो उनके द्वारा कही गई बातों को समझे बिना दिये गए हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह पार्टी छोड़ने जा रहे हैं, उन्होंने कहा कि वह ‘‘कहीं नहीं जा रहे हैं। मैं कांग्रेस पार्टी का सदस्य हूं। पार्टी को तय करने दीजिए कि वह मेरे बारे में क्या सोचती है। उनसे जब पूछा गया कि वह उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान का हिस्सा क्यों नहीं थे, तो थरूर ने कहा कि उन्हें इसके लिए आमंत्रित नहीं किया गया था, जबकि पिछले साल वायनाड में हुए उपचुनाव सहित अन्य उपचुनावों के दौरान आमंत्रित किया जाता रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं वहां नहीं जाता, जहां मुझे आमंत्रित नहीं किया गया हो। उन्होंने साथ ही कहा कि वह चाहते हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रचार अभियान के प्रयास सफल हों और नीलांबुर से संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) उम्मीदवार की जीत हो।
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के केंद्र के न्योते को स्वीकार करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जब वह संसद की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष बने थे, तब उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका ध्यान भारत की विदेश नीति एवं उसके राष्ट्रीय हित पर है, न कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विदेश नीति पर।
केंद्र ने रोकी प्रियांक खरगे की अमेरिका यात्रा, कर्नाटक कांग्रेस बोली- 'यह प्रतिशोध की राजनीति!'
19 Jun, 2025 06:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार के बीच टकराव उस वक्त तेज हो गया जब राज्य के ग्रामीण विकास और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा की अनुमति नहीं दी गई. कर्नाटक कांग्रेस ने इस फैसले को राजनीतिक भेदभाव करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है.
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताई और कहा कि यह कोई नई बात नहीं है. उन्होंने बताया कि जब वे बिजली मंत्री थे, तब भी विदेश यात्राओं के उनके कई प्रस्ताव विदेश मंत्रालय द्वारा खारिज कर दिए गए थे.
शिवकुमार ने कहा, हाल ही में भी मुझे एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग नहीं लेने दिया गया, लेकिन एक केंद्रीय मंत्री को उसी कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति मिल गई. यह स्पष्ट रूप से राजनीतिक भेदभाव का मामला है.
अमेरिका यात्रा की अनुमति नहीं मिलने पर बिफरे प्रियांक
कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खांडरे ने भी इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि जब एक विपक्षी मंत्री के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो उसके पीछे राजनीतिक मंशा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
मंत्री प्रियांक खरगे को अमेरिका में होने वाले एक आधिकारिक कार्यक्रम में भाग लेने जाना था, लेकिन विदेश मंत्रालय ने उनकी यात्रा को अनुमति नहीं दी. खरगे ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ रोजगार और निवेश को बढ़ावा देना था, न कि निजी लाभ.
उन्होंने कहा, हम विदेशों में जाकर खेल खेलने नहीं जाते, हम वहां रोजगार और निवेश के अवसर तलाशते हैं. अगर हम राज्य के लिए निवेश लाते हैं, तो यह देश के लिए भी फायदेमंद है.
कर्नाटक कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बोला हमला
उन्होंने आगे बताया कि इससे पहले भी वे और एमबी पाटिल अमेरिका की यात्रा पर गए थे, जहां पर 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और आशय पत्र (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए थे. उन्होंने कहा, हमने इन्वेस्ट कर्नाटक के माध्यम से यह काम किया था. हाल ही में हमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है, जिससे राज्य एक इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस हब के रूप में उभर रहा है.
प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की सफल योजनाओं से घबराई हुई है और उसे बाधित करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा, वे मेक इन इंडिया जैसे बड़े-बड़े नारे देते हैं, लेकिन जब कोई राज्य सच में इन पहलों को आगे बढ़ाना चाहता है, तो उसे रोका जाता है. अगर कर्नाटक सफल होता है, तो देश भी सफल होता है.
कांग्रेस की राज्य इकाई ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए इसे संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया.
बीएमसी चुनाव से पहले ठाकरे बंधुओं के एक होने के संकेत, उद्धव साध रहे शिवसैनिकों से संवाद
19 Jun, 2025 05:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे बंधुओं के रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलती नजर आ रही है. विधानसभा चुनाव के बाद से ही शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बीच सुलह-समझौता की पटकथा लिखी जा रही है, जिस पर अब फाइनल मुहर लगने के आसार दिखने लगे हैं. उद्धव ठाकरे राज ठाकरे से हाथ मिलाने के लिए शिवसैनिकों का सियासी मिजाज समझने में जुट गए हैं.
उद्धव ठाकरे ने बुधवार को मुंबई के अपने आवास मातोश्री पर पार्टी के पूर्व पार्षदों से राज ठाकरे से संभावित गठबंधन करने के मुद्दे पर राय ली. इस दौरान पूर्व पार्षदों ने राज ठाकरे की पार्टी मनसे से गठबंधन को फायदे वाला बताया. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जिस तरह उद्धव ने पूर्व पार्षदों से बात की है, उससे ये जाहिर होता है कि बीएमसी चुनाव में ठाकरे बंधुओं की सियासी केमिस्ट्री एक साथ नजर आ सकती है?
ठाकरे बंधुओं के बीच पक रही सियासी खिचड़ी
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे रिश्ते में चचेरे भाई हैं. शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के बेटे उद्धव हैं तो भतीजे राज ठाकरे हैं. एक समय दोनों नेता एक ही मंच पर मराठी मानुस के लिए आवाज उठाते थे. हालांकि, जब राज ठाकरे को लगने लगा कि उद्धव को उनके ऊपर तरजीह दी जा रही है तो 2005 में शिवसेना से अलग हो गए थे. इसके बाद राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नाम से अपनी नई पार्टी बना ली. इसके बाद से उद्धव और राज ठाकरे अलग-अलग अपनी सियासत करते रहे, पर 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र की सियासी परिस्थिति बदल गई है.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उद्धव और राज ठाकरे दोनों को करारा झटका लगा है, जिसके बाद से बालासाहेब ठाकरे के सियासी वारिस माने जाने वाले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों की राजनीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे में विधानसा चुनाव के बाद से ही उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच कई मुलाकातें हो चुकी हैं. इसके अलावा राज ठाकरे ने एक पॉडकास्ट के दौरान उद्धव के साथ फिर से जुड़ने की इच्छा जताई तो उद्धव खेमा ने भी फौरन अपनी दोनों बांहें फैला दी. सामना में लिखा गया था कि राज और उद्धव एक साथ आने को तैयार हैं. इसके बाद दोनों दलों के नेताओं ने सकारात्मक बयान देकर महाराष्ट्र का ध्यान ठाकरे बंधुओं की ओर खींचा है और दोनों भाई के साथ पर सियासी लाभ की बात कही जाने लगी.
सियासी मिजाज समझने में जुटे उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ आते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति पर इसका असर पड़ेगा. इस बात को समझने के लिए उद्धव ठाकरे ने बुधवार को अपने पार्षदों के साथ बैठक की है और उनसे तमाम मुद्दों पर बात करते हुए राज ठाकरे की पार्टी के साथ हाथ मिलाने का मिजाज जाना. उद्धव ठाकरे ने अपने पूर्व पार्षदों से पूछा कि उन्हें राज ठाकरे की पार्टी मनसे के साथ गठबंधन करना चाहिए या नहीं? गठबंधन करने पर शिवसेना (यूबीटी) को क्या सियासी लाभ मिलेगा?
शिवेसना (यूबीटी) के पूर्व पार्षदों ने उद्धव ठाकरे से कहा कि अगर राज ठाकरे की पार्टी के साथ गठबंधन होता है तो निश्चित रूप से फायदा होगा. पूर्व पार्षदों ने उद्धव ठाकरे के सामने माना कि गठबंधन को लेकर मुंबई में अनुकूल माहौल है. उद्धव ठाकरे ने पूर्व पार्षदों को भरोसा दिलाया कि मुंबई महा नगरपालिका के लिए वह किस पार्टी के साथ गठबंधन करेंगे, इस बारे में वह सभी नेताओं को विश्वास में लेकर फैसला लेंगे.
बीएमसी चुनाव में ठाकरे बंधु साथ दिखेंगे?
उद्धव ठाकरे ने जिस तरह से अपनी पार्टी के पार्षदों के साथ मनसे से गठबंधन करने पर राय जानी है, उससे साफ नजर आ रहा है कि उनका मन मुंबई में होने वाले बीएमसी चुनाव को लेकर है.
विधानसभा चुनाव के बाद अब सबकी निगाहें मुंबई के बीएमसी के चुनाव पर है. बीजेपी महाराष्ट्र की सत्ता अपने नाम करने के बाद अब मुंबई में अपना सियासी दबदबा कायम करने की फिराक में है. बीएमसी पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) का प्रभाव है, जिसे बीजेपी सिर्फ कमजोर करने की नहीं बल्कि उसे अपने नाम करने के लिए सियासी दांव चल रही है.
महाराष्ट्र के बदले हुए सियासी समीकरण में उद्धव ठाकरे के लिए अपने आखिरी किले बीएमसी को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. इसीलिए उद्धव अपने पूर्व पार्षदों के साथ बैठक कर उनके सियासी मिजाज को जानना चाह रहे हैं ताकि अपने सियासी वर्चस्व को बचाए रख सके. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज ठाकरे की अगुवाई वाली एमएनएस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के बीच आगामी नगर निगम चुनावों, खासतौर पर आर्थिक रूप से समृद्ध बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों को ध्यान में रखते हुए आपसी मतभेद खत्म करने की संभावना बन सकती है.
बीएमसी चुनाव का बुना जा रहा ताना-बाना
हालांकि, अभी तक नगर निकाय चुनावों की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सियासी ताना बाना बुना जा रहा है. उद्धव ने अपने पार्षदों से कहा कि आप हमारे साथ मजबूती से रहे हैं, आप वफादार हैं. उन्होंने कहा कि पूर्व पार्षदों को शिवसेना भवन में आकर आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए. उद्धव ठाकरे ने बताया कि शिवसेना भवन में चुनाव कार्यालय खोला जाएगा. बैठक में उद्धव ठाकरे ने उम्मीद जताई कि चुनाव अक्टूबर से नवंबर के बीच हो सकते हैं.
2017 में मुंबई महानगरपालिका के चुनाव हुए थे, जिसमें उद्धव ठाकरे के 84 और राज ठाकरे के 7 पार्षदों ने जीत हासिल की थी. उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र की सत्ता गंवाने के बाद अब बीएमसी से अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहते हैं, क्योंकि यह उनकी सियासत को बचाए रखने का आखिरी किला माना जा रहा है. यही वजह है कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच जमी दुश्मनी की बर्फ पिघलने लगी है. माना जा रहा है कि बीएमसी चुनाव में ठाकरे बंधुओं की सियासी केमिस्ट्री देखने को मिल सकती है?
'जन्मदिन' बहाना, युवाओं को साधना असली निशाना: कांग्रेस की नई रणनीति में मोदी पर भी वार
19 Jun, 2025 05:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली के होली फैमिली हॉस्पिटल में हुआ था. इस तरह राहुल गांधी गुरुवार को 55 साल के हो गए हैं. राहुल की जिंदगी के 55 साल का सफर ऐसे समय पर पूरा हुआ है, जब उनकी पार्टी कई चुनौतियों से गुजर रही है. कांग्रेस के हाथों से एक के बाद एक राज्य की सत्ता निकलती जा रही है और जनाधार लगातार सिमटता जा रहा है. ऐसे में राहुल गांधी के जन्मदिन के बहाने यूथ कांग्रेस ने युवाओं को पार्टी से जोड़ने का एक खास प्लान बनाया है, जिसके जरिए मकसद मोदी सरकार पर निशाना साधना भी है और युवाओं के दिल में जगह बनाने की स्ट्रैटेजी भी है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई में बीजेपी 11 साल से सत्ता पर काबिज है और देश के आधे से ज्यादा राज्यों में उसकी सरकार है. 2024 में बीजेपी को बहुमत के आंकड़े से पीछे रखने में कांग्रेस जरूर कामयाब रही, लेकिन उसे सत्ता से बाहर नहीं कर सकी. ऐसे में राहुल के सामने गांधी परिवार की सियासी विरासत को बचाए रखने के साथ-साथ कांग्रेस को दोबारा से खड़े करने की चुनौती है. यही वजह है कि राहुल गांधी के 55वें जन्मदिन के मौके पर दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने रोजगार मेला लगाकर युवाओं को साधने के साथ मोदी सरकार को नौकरी के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करने की प्लानिंग की है.
यूथ कांग्रेस का दिल्ली में रोजगार मेला
राहुल गांधी के जन्मदिन के मौके पर बुधवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में यूथ कांग्रेस ने एक बड़ा रोजगार मेला आयोजित किया है. इस मेले में देश की तमाम बड़ी प्राइवेट कंपनियां आ रही हैं, जिसके लिए कांग्रेस नेता कई दिनों से प्रचार-प्रसार करके लोगों को जुटाने का काम कर रहे थे. माना जा रहा है कि इस रोजगार मेले में 100 से भी ज्यादा कंपनियां हिस्सा लेंगी और युवाओं को उनकी काबिलीयत के लिहाज से रोजगार देंगी. दिल्ली यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर का यह सबसे बड़ा रोजगार मेला है.
दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रोजगार मेला सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा. रोजगार के लिए 20 हजार युवाओं ने अपने पंजीकरण कराए हैं. रोजगार मेले में आने वाली कंपनियों में जेप्टो, एयरटेल, ब्लिंकिट, टाटा, एचडीएफसी बैंक, फ्लिपकार्ट, महिंद्रा और एक्सिस बैंक शामिल हो रही हैं. इसके अलावा कई आईटी कंपनियां और कंसल्टेंसी कंपनी भी शिरकत करेंगी. दिल्ली के रोजगार मेले में भर्ती करने वाली कंपनियां करीब 5,000 रिक्तियों की पेशकश करेंगी.
युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने का प्लान
राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार रोजगार के मुद्दे पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ी करती रही हैं. कांग्रेस कहती रही है कि पीएम मोदी ने हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, जिसे पूरा नहीं किया. कांग्रेस दो करोड़ नौकरी वाले मुद्दे पर मोदी सरकार को संसद से लेकर सड़क तक घेरती रही है. राहुल गांधी के 55वें जन्मदिन पर रोजगार मेला लगाकर कांग्रेस ने एक तीर से कई सियासी शिकार करने की स्ट्रैटेजी बनाई है. एक तरफ युवाओं को साधने का प्लान है तो दूसरी तरफ मोदी सरकार को रोजगार देने के मुद्दे पर कठघरे में खड़ा करने की योजना है.
देवेंद्र यादव कहते हैं कि रोजगार मेले का यह आयोजन देश के युवाओं के प्रति राहुल गांधी की चिंता को प्रत्यक्ष रूप से दर्शाता है. राहुल ने संसद और सार्वजनिक सभाओं में लगातार बेरोजगारी का मुद्दा उठाया है और इस बात पर रोशनी डाली है कि कैसे सरकार के वादे रोजगार में तब्दील नहीं हुए हैं. यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि मोदी सरकार ने दो करोड़ रोजगार प्रतिवर्ष देने का वादा किया था, लेकिन खुद सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि देश में पिछले 40-50 सालों में बेरोजगारी अब सबसे अधिक है. बेरोजगारी के मुद्दे को सबसे अधिक प्रमुखता से राहुल गांधी ने सड़क से लेकर संसद तक लगातार उठाया है. वो देश के बेरोजगार युवाओं की मुखर आवाज बने हैं.
युवाओं को साधने का लार्जर प्लान
कांग्रेस ने रोजगार मेले के आयोजन के जरिए सिर्फ दिल्ली ही नहीं, देशभर में युवाओं को साधने की तैयारी शुरू कर दी है. तालकटोरा स्टेडियम में लगने वाले रोजगार मेले में कांग्रेस युवा नेता जुटेंगे, जिसमें यूथ कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ सचिन पायलट, इमरान प्रतापगढ़ी से लेकर कन्हैया कुमार जैसे पार्टी के कई युवा शामिल होंगे. यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब कहते हैं कि कांग्रेस रोजगार मेले के आयोजन को दिल्ली तक सीमित नहीं रखेंगी बल्कि वह आने वाले दिनों में देश के अलग-अलग सूबों में आयोजन कराने की प्लानिंग की है.
उदय भानु चिब कहते हैं इससे पहले यूथ कांग्रेस ने ऐसा ही रोजगार मेला राजस्थान में आयोजित किया था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी मिली थी. उसी तर्ज पर ही दिल्ली में रोजगार मेला लगाने का प्लान बनाया गया है, जहां पर एनसीआर के युवाओं को सीधे कंपनियों के साथ इंटरव्यू का मौका मिलेगा. ऐसे में साथ ही साथ बहुत से युवाओं को ऑफर लेटर दिया जाएगा. रोजगार मेले में हर स्तर की शैक्षिक योग्यता के लिए नौकरी देने की व्यवस्था होगी, चाहें 12वीं पास हो या पीएचडी.
कांग्रेस चुनावी राज्यों में लगाएगी जॉब फेयर
कांग्रेस ने युवाओं को साधने के लिए सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि चुनाव संभावित राज्यों में रोजगार मेलों के आयोजन कराने की स्ट्रैटेजी बनाई है. दिल्ली के बाद जल्द ही बिहार में भी कांग्रेस रोजगार मेले का आयोजन कर सकती है, जहां इसी साल आखिर में विधानसभा चुनाव है. उसके बाद अगले साल 2026 में केरल, बंगाल, असम और तमिलनाडु व पुद्दुचेरी में चुनाव होने हैं. इसके अलावा 2027 में गोवा, यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व मणिपुर में चुनाव होने हैं. ऐसे में कांग्रेस इन राज्यों में नौकरी के मुद्दे को सियासी धार देने और युवाओं को साधने के लिए रोजगार मेले का आयोजन कराने का दांव चल सकती है.
मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस रोजगार के मुद्दे को सियासी एजेंडे के तौर पर सेट करना चाहती है. राहुल गांधी लगातार रोजगार के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने में जुटे ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर युवाओं और छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं पर बात कर रहे हैं. कांग्रेस ने कन्हैया कुमार के नेतृत्व में बिहार में रोजगार और पलायन के मुद्दे पर यात्रा निकाली थी, जिसमें राहुल गांधी भी बेगुसराय में शामिल हुए थे. इसके बाद राहुल गांधी दरभंगा में दलित-ओबीसी छात्रों से संवाद करने पहुंचे थे. कांग्रेस अपने चुनावी घोषणापत्र में युवाओं को रोजगार देने का जिक्र करती रही है. इस तरह से कांग्रेस की युवाओं को साधने की कवायद के तौर पर रोजगार मेले को देखा जा रहा है.
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