राजनीति
आपातकाल को आरएसएस प्रमुख बालासाहेब देवरस का समर्थन, भाजपा को देवरस की भूमिका स्वीकार नहीं?- हर्षवर्धन सपकाल
26 Jun, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। देश की तत्कालीन परिस्थितियों के कारण इंदिरा गांधी को आपातकाल का निर्णय लेना पड़ा था। उस समय हुई कुछ घटनाओं की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने स्वीकारी है, लेकिन भाजपा आज भी आपातकाल पर केवल ढकोसला करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस ने आपातकाल का समर्थन किया था और यह भी स्पष्ट किया था कि जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से आरएसएस का कोई संबंध नहीं था। तो क्या भाजपा को बालासाहेब देवरस की भूमिका स्वीकार नहीं है? यह सवाल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने उठाया है। मुंबई के तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोलते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल का जो निर्णय लिया था, वह संविधानिक था। उस समय कुछ ताकतें देश में अराजकता फैलाना चाहती थीं। बाद में आपातकाल हटाकर चुनाव करवाए गए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान देश की संपत्ति नहीं बेची, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ उद्योगपतियों को नहीं सौंपीं। लेकिन पिछले 11 वर्षों से देश में एक अघोषित आपातकाल चल रहा है। हवाई अड्डे, बंदरगाह, खदानें, बैंक, सरकारी जमीनें चहेते उद्योगपतियों को बेची जा रही हैं। धारावी की जमीन बेची गई है। आज देश में तानाशाही है और भाजपा का यह ‘भस्मासुर’ लोकतंत्र को निगलने को तैयार है।
- सरकारी विज्ञापन में राजमुद्रा गायब, सेंगोल क्यों?
भाजपा सरकार ने आपातकाल की सालगिरह के मौके पर करोड़ों रुपये फूंकते हुए भव्य विज्ञापन जारी किए हैं। इन विज्ञापनों में भारत सरकार की राजमुद्रा गायब कर दी गई है और उसकी जगह सेंगोल दिखाया गया है। सेंगोल किसका प्रतीक है, यह अलग से बताने की जरूरत नहीं है। भाजपा लोकतंत्र और संविधान खत्म कर गोलवलकर की ‘बंच ऑफ थॉट्स’ को लागू करना चाहती है, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
- कांग्रेस का मुखपत्र ‘शिदोरी’ का आपातकाल विशेषांक
कांग्रेस के मुखपत्र ‘जनमानसाची शिदोरी’ मासिक पत्रिका का आपातकाल विशेषांक प्रकाशित किया गया है। इस अंक में इंदिरा गांधी, पुपुल जयकर, वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर, ‘सामना’ के संपादक और सांसद संजय राऊत सहित कई प्रतिष्ठित लेखकों के लेख शामिल हैं। यह विशेषांक आपातकाल से जुड़ी सच्चाई को जनता के सामने लाएगा और भाजपा के झूठे प्रचार का करारा जवाब देगा, ऐसा कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
- मतदान घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनावों में हुई मतदाता सूची में धांधली को लेकर ट्वीट किया है। आरटीआई के जरिए यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र में 8% मतदाताओं की अचानक वृद्धि हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रफुल्ल गुडदे पाटील ने यह जानकारी आरटीआई से प्राप्त की है। यह भी उजागर हुआ है कि कई मतदाताओं का नाम एक ही मोबाइल नंबर से दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग ने इसकी जांच करने को कहा था, लेकिन अब तक कोई जांच नहीं हुई है। गुडदे पाटील ने इस पर दो याचिकाएं अदालत में भी दाखिल की हैं। लेकिन फडणवीस ने अब तक इन सवालों के जवाब नहीं दिए हैं। इस मतदाता घोटाले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने तक फडणवीस को पद से हट जाना चाहिए, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
- चांदी की थाली में मेज़बानी !
संसद और विधानसभा की अनुमान समिति के सदस्यों ने धुले के विश्रामगृह के कमरा नंबर 102 में पाँच हज़ार रुपये की शाही दावत खाई, जिसमें 550 रुपये किराए की चांदी की थाली का इस्तेमाल हुआ। यह पैसा अनुमान समिति के बजट से खर्च किया गया था क्या? यह पूछते हुए सपकाल ने कहा कि यह समिति के नाटक का दूसरा भाग है। शाही भोजन के बाद अब वे देश को बताएंगे कि कैसे बचत करनी चाहिए। किसानों की कर्जमाफी के लिए, बहनों को 2100 रुपये देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं, लेकिन मेहमानों की दावत के लिए जरूर पैसे हैं- यह सरकार का असली चेहरा है, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।
‘आपातकाल’ का काला दौर, जब कांग्रेस ने कुचल दी थी लोकतंत्र की आवाज
25 Jun, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का ‘सबसे काला अध्याय’ और ‘संविधान हत्या दिवस’ बताया और आपातकाल के खिलाफ लडऩे वालों को सलाम किया। श्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, आपातकाल लागू होने के 50 साल पूरे हो गए हैं।
भारत के लोग इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की आजादी को खत्म कर दिया गया और कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया। ऐसा लग रहा था जैसे उस समय सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘दि एमर्जेंसी डायरीज’ में आपातकाल के वर्षों के दौरान मेरी यात्रा का वर्णन है। इसने उस समय की कई यादें ताज़ा कर दीं। श्री मोदी ने कहा कि मैं उन सभी लोगों से अपील करता हूँ जो आपातकाल के उन काले दिनों को याद करते हैं या जिनके परिवारों ने उस दौरान कष्ट झेले हैं, वे अपने अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा करें। इससे युवाओं में 1975 से 1977 तक के शर्मनाक समय के बारे में जागरूकता पैदा होगी।
उन्होंने आपातकाल के खिलाफ लडऩे वालों को सलाम किया, जिनकी सामूहिक लड़ाई ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को लोकतंत्र बहाल करने और चुनाव कराने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि 42वें संशोधन में संविधान में व्यापक परिवर्तन किए गए जो आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस सरकार की चालों का एक ज्वलंत उदाहरण है, जिसे जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने बाद में पलट दिया था। गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और दलितों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई। श्री मोदी ने कहा कि हम अपने संविधान में निहित सिद्धांतों को मजबूत करने और विकसित देश के अपने दृष्टिकोण को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराते हैं। हम प्रगति की नई ऊंचाइयों को छूएं और गरीबों तथा दलितों के सपनों को साकार करें। यही हमारी प्रतिबद्धता है।
EC ने राहुल गांधी को बुलाया चर्चा के लिए, चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवालों का देगा जवाब
25 Jun, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Rahul Gandhi: भारत के चुनाव आयोग ने हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर आमंत्रित किया है, जिसमें उन्हें चुनाव प्रक्रिया से संबंधित किसी भी शिकायत या विसंगति पर चर्चा के लिए बुलाया गया है। यह कदम तब उठाया गया जब राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में कथित धांधली के आरोप लगाए थे। इस निमंत्रण ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि चुनाव आयोग अपनी पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कितना गंभीर है। यह लेख इस मुद्दे के विभिन्न पहलुओं और इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डालता है।
चुनाव आयोग चर्चा के लिए तैयार
चुनाव आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वह राहुल गांधी के सभी सवालों और चिंताओं पर खुले तौर पर चर्चा करने को तैयार है। बता दें कि राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के संदर्भ में कुछ गंभीर आरोप लगाए थे, जिसमें उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की विश्वसनीयता और मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इन आरोपों ने विपक्षी दलों और जनता के बीच व्यापक बहस छेड़ दी थी।
EC ने चुनाव आयोग को दिया था जवाब
चुनाव आयोग ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 पर एक न्यूजपेपर में प्रकाशित आपके लेख के मद्देनजर मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि नवंबर 2024 में विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की ओर से इसी तरह के मुद्दे उठाए गए थे। आयोग ने 24 दिसंबर 2024 को आईएनसी को एक विस्तृत जवाब दिया था, जिसकी प्रति ईसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
EC ने राहुल गांधी को भेजा न्योता
चुनाव आयोग ने बातचीत के लिए राहुल गांधी को मेल और पत्र के माध्यम से न्योता भेजा है। इसके अलावा EC ने कांग्रेस नेता को अपनी सुविधानुसार जल्द तारीख और समय तय कर आयोग को सूचित करने को भी कहा है।
फडणवीस ने अंधेरे में तीर चलाने का लगाया आरोप
बता दें कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में कथित हेराफेरी को लेकर मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर जुबानी हमला किया। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची में अवैध नाम जोड़े जाने का आरोप लगाया और भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) की निष्पक्षता पर संदेह जताया, वहीं भाजपा नेता ने कांग्रेस सांसद का मजाक उड़ाया और उन पर चुनाव पर संदेह जताने के लिए “अंधेरे में तीर चलाने” का आरोप लगाया।
कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी: उपचुनाव में हार और आंतरिक कलह ने खड़े किए सवाल
25 Jun, 2025 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Setback to Congress in By-Election: गुजरात, पश्चिम बंगाल और पंजाब की 5 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए संकट का अलर्ट दिख रहे हैं। कांग्रेस में पिछले छह महीने से चल रहा संगठन सृजन कार्यक्रम कम से कम चुनावी नतीजों में बेअसर साबित हुआ है। गुजरात पर फोकस करने के बावजूद यहां की दोनों सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है, वहीं पंजाब में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद अमरिंदर सिंह राजा वरिंग की लुधियाना संसदीय सीट के तहत आने वाली विधानसभा सीट (लुधियाना पूर्व) पर भी पार्टी को पराजय मिली है। इस हार के बाद पंजाब कांग्रेस प्रमुख वरिंग को मंगलवार को दिल्ली में प्रस्तावित प्रेसवार्ता को रद्द करना पड़ा वहीं उपचुनाव में हार के बाद शक्ति सिंह गोहेल ने गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
उपचुनाव में हार ने कांग्रेस में निराशा और असंतोष बढ़ने का खतरा
दरअसल अपने आपको भविष्य के चुनाव के लिए खड़ी कर रही कांग्रेस में संगठन को मजबूत बनाने का काम चल रहा है। गुजरात में लंबी प्रक्रिया के बाद 40 जिलों में अध्यक्षों की घोषणा की गई। इस बीच दो सीटों के उपचुनाव नतीजों ने गुजरात में कांग्रेस संगठन की पोल खोल दी है। जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा को लेकर कांग्रेस में असंतोष चल ही रहा है कि अब उपचुनाव में हार ने पार्टी में निराशा और असंतोष का खतरा बढ़ा दिया है।
आप की ताकत से कांग्रेस परेशान
दिल्ली चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद आप ने गुजरात और पंजाब में एक-एक सीट जीतकर अपनी ताकत फिर दिखाई है। इस जीत से कांग्रेस हैरान और परेशान है। कांग्रेस के रणनीतिकार आप से गठबंधन नहीं चाहते हैं, लेकिन दूसरा विकल्प भी नहीं सूझ रहा है।
विरोध के बनाया मुस्लिम जिलाध्यक्ष
गुजरात में हाल ही जारी की गई जिलाध्यक्षों की सूची में किसी भी मुस्लिम नेता का नाम शामिल नहीं था। गुजरात व दिल्ली में कई नेताओं के ऐजााज के बाद भरूच शहर में मुस्लिम नेता को जिलाध्यक्ष बनाया गया।महज एक महिला को जिलाध्यक्ष बनाने पर भी विवाद बना हुआ है।
कांग्रेस में उठी बदलाव की मांग: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज
25 Jun, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Karnataka Political crisis: कर्नाटक में सत्तापक्ष कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा में फिर सियासी कलह जमीन पर नजर आने लगी है और स्थापित नेताओं के खिलाफ मुहिम उफान पर है। कांग्रेस विधायक और योजना आयोग के उपाध्यक्ष का एक ऑडियो क्लिप वायरल है, जिसमें वे भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगा रहे हैं। इससे राजनीतिक गलियारे में उबाल आ गया है और मुख्यमंत्री एन.सिद्धरामैया के खिलाफ चल रही मुहिम को हवा मिली है।
उधर, भाजपा में जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों ने प्रदेश नेतृत्व खासकर पूर्व सीएम येडि़यूरप्पा के पुत्र प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र के खिलाफ गुटबाजी को हवा दी है। दोनों दलों के गुट अपने-अपने पक्ष में माहैाल बना रहे हैं, तो नेतृत्व के सामने डैमेज कंट्रोल की चुनौती है।
दोनों दलों में यह चल रहा
कांग्रेस: सीएम सिद्धरामैया की मुसीबतें बढ़ीं
-आलाकमान के निर्देश पर सीएम की इच्छा के खिलाफ जातिगत जनगणना पुन: करवाने का फैसला
-एक पखवाड़े के भीतर तीसरी बार मुख्यमंत्री दिल्ली प्रवास पर, कैबिनेट फेरबदल की अटकलों को हवा
-पार्टी में गुटबाजी, माना जा रहा है कि दिसम्बर में हो सकता नेतृत्व परिवर्तन
-सूत्रों के अनुसार प्रभारी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला चाहते हैं चार लोगों को हटाने और कैबिनेट फेरबदल, लेकिन सीएम तैयार नहीं,
-डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार दिसंबर में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में
-राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष व विधायक बीआर पाटिल के आवास विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार के ऑडियो से सियासी खलबली। उन्होंने कहा कि मैंने मुंह खोला तो सरकार हिल जाएगी
भाजपा: काबू में नहीं आ रहे येड्डी परिवार के विरोधी
-भाजपा का बड़ा वर्ग पूर्व सीएम येडीयुरप्पा व उनके पुत्र व प्रदेशाध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र के खिलाफ
-नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पर आलाकमान के बड़े और कड़े फैसलों के बावजूद बागी पीछे हटने को तैयार नहीं
-विजयेंद्र ने बिना प्रमुख नेताओं से परामर्श किए दस जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करने से बागी भड़के
-केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी प्रदेश भाजपा के नेताओं में तालमेल बैठाने में जुटे
-केंद्रीय नेतृत्व ने असंतुष्ट नेताओं का मनाने जिम्मा जोशी को सौंपा लेकिन बागी विजयेंद्र को हटाने की मांग पर अड़े।
-पूर्व सांसद जी.एम. सिद्धेश्वर और विधायक बीपी हरीश ने जोशी से मुलाकात कर विजयेंद्र को हटाने की मांग रखी।
-पर्दे के पीछे आरएसएस भी जुटा भाजपा में जुटा गुटबाजी समाप्त करने में
राज्यसभा टिकट पर सस्पेंस: केजरीवाल की जगह ये दो चेहरे बन सकते हैं AAP की पहली पसंद
25 Jun, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Arvind Kejriwal: पंजाब में लुधियाना वेस्ट उपचुनाव के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस जीत के साथ ही राज्यसभा की एक सीट खाली होने वाली है, क्योंकि AAP के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा ने विधानसभा चुनाव जीत लिया है और अब वह अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देंगे। इस सीट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। नतीजे आने से पहले कयास लगाए जा रहे थे यदि संजीव अरोड़ा चुनाव जीतते है तो अरविंद केजरीवाल राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि अब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि वह खुद राज्यसभा नहीं जाएंगे। उनके इस बयान ने सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। अब सवाल यह है कि AAP इस महत्वपूर्ण सीट पर किसे भेजेगी?
ये दो नाम है सबसे बड़े दावेदार
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद द्वारा राज्यसभा जाने से इनकार करने पर दो नाम सबसे बड़े दावेदार है। इसमें पहला नाम मनीष सिसोदिया का है और दूसरा सत्येंद्र जैन का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन दोनों नामों पर चर्चा चल रही है।
मनीष सिसोदिया सबसे बड़े दावेदार
राज्यसभा जाने की सूची में मनीष सिसोदिया सबसे बड़े दावेदार माने जा रहे हैं। इस समय सिसोदिया पंजाब में AAP के प्रभारी भी हैं और पार्टी का इतिहास रहा है कि प्रभारी को राज्यसभा भेजा जाता है, जैसा कि राघव चड्ढा के मामले में देखा गया। हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद सिसोदिया की सियासी जमीन को मजबूत करने के लिए यह एक सुनहरा अवसर हो सकता है।
सत्येंद्र जैन भी पीछे नहीं
वहीं, सत्येंद्र जैन भी इस रेस में पीछे नहीं हैं। 2015 से 2023 तक दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे जैन, केजरीवाल के विश्वस्त सहयोगियों में से एक हैं। उनके नेतृत्व में दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक मॉडल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा बटोरी। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी गिरफ्तारी और दिल्ली विधानसभा चुनाव में शकूर बस्ती सीट पर हार ने उनकी सियासी राह को चुनौतीपूर्ण बनाया है। फिर भी, उनकी मुखर छवि और अनुभव उन्हें राज्यसभा के लिए एक मजबूत उम्मीदवार बनाते हैं। जैन की संगठनात्मक क्षमता और दिल्ली मॉडल को लागू करने में उनकी भूमिका AAP के लिए महत्वपूर्ण रही है।
अरविंद केजरीवाल क्यों नहीं जा रहे राज्यसभा
अरविंद केजरीवाल ने उपचुनाव के नतीजे आने के बाद स्पष्ट कर दिया है कि वे राज्यसभा नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति तय करेगी कि कौन राज्यसभा जाएगा। बता दें कि पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होंगे। इसलिए माना जा रहा है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल अपना पूरा ध्यान आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत पर फोकस करना चाहते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि उन्होंने राज्यसभा जाने से इनकार किया है।
केंद्र पर बरसे स्टालिन: बोले, ‘राज्यों के हक छीने जा रहे हैं’
25 Jun, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी का असली मकसद संस्कृत थोपना है और हिंदी महज एक मुखौटा है। स्टालिन ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है संस्कृत भाषा के प्रचार के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, जबकि तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं को कुछ नहीं मिलता है। गौरलतब है कि एक रिपोर्ट में हाल ही में दायर किए गए एक आरटीआई का हवाला देते हुए यह खुलासा किया गया कि केंद्र सरकार ने 2014-15 और 2024-25 के बीच संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर करीब 2500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। वहीं दूसरे पांच शास्त्रीय भारतीय भाषाओं, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया पर करीब 147 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं। ऐसे में संस्कृत पर 17 गुना अधिक पैसे खर्च किए गए हैं।
रिपोर्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए द्रविड़ मुनेत्र कडग़म नेता ने लिखा कि संस्कृत को करोड़ों रुपए मिलते हैं, तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं को मगरमच्छ के आंसू के अलावा कुछ नहीं मिलता। इससे पहले मार्च में भी स्टालिन ने केंद्र सरकार पर ऐसे ही आरोप लगाए थे। स्टालिन ने कहा था, हम हिंदी थोपे जाने का विरोध करेंगे। हिंदी मुखौटा है, संस्कृत छिपा हुआ चेहरा है। बता दें कि तमिलनाडु सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले को अनिवार्य बनाने का विरोध कर रही है।
शशि थरूर का बड़ा बयान: मोदी की तारीफ का मतलब भाजपा जॉइन करना नहीं
25 Jun, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने साफ कर दिया है कि वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं होने वाले हैं। दरअसल, हाल ही में प्रकाशित एक लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया था। खास बात है कि थरूर ने पीएम मोदी की तारीफ ऐसे समय पर की थी, जब कांग्रेस विदेश नीति के मुद्दे पर लगातार एनडीए सरकार को घेर रही है। रिपोट्र्स के अनुसार, थरूर ने कहा कि यह एक लेख है, जिसमें मैंने आउटरीच मिशन की सफलता के बारे में बताया है, जो सभी दलों की एकजुटता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दूसरे देशों से बातचीत में गतिशीलता और ऊर्जा दिखाई है। भाजपा की विदेश नीति या कांग्रेस की विदेश नीति जैसा कुछ नहीं है। सिर्फ भारत की विदेश नीति है। उन्होंने कहा कि मैं जब 11 साल पहले संसद की विदेश मामलों की समिति का अध्यक्ष बना था, तब यह बात कही थी। उन्होंने कहा कि यह संकेत नहीं है कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी में जा रहा हूं।
यह राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश है। थरूर ने एक लेख में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद किया गया राजनयिक संपर्क राष्ट्रीय संकल्प और प्रभावी संवाद का क्षण था। लेख में थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा, उनका बहुआयामी व्यक्तित्व और संवाद की तत्परता वैश्विक मंच पर भारत के लिए एक अहम पूंजी बनी हुई है, लेकिन इसे अधिक समर्थन की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर थरूर के इस लेख को साझा किया और कहा कि थरूर लिखते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित वैश्विक पहुंच से सबक।
"आपातकाल लगाये जाने के 50 वर्ष पूर्ण" आपातकाल के संघर्ष को नई पीढ़ी को जानना बेहद जरूरी : कैलाश सोनी
25 Jun, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलाश सोनी
पूर्व राज्यसभा सांसद
एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ
आजादी के बाद देश के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 मनहूस काला दिन है। इस दिन दुनिया की श्रेष्ठतम शासन व्यवस्था लोकतंत्र को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता की भूख के लिये सारे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन कर मध्यरात्रि में देश पर आपातकाल लगाकर अपनी तानाशाही स्थापित कर दी। देश की वर्तमान पीढ़ी को इस काले इतिहास के सारे घनाक्रम को जानना बहुत जरूरी है, इससे आने वाले समय में देश की चेतना लोकतंत्र की चुनौतियों व खतरों से सतर्क रहें। लोकतंत्र चिरजीवी होकर अबाध गति से स्थापित रहे। वर्तमान सरकार ने इस दिन को संविधान हत्या दिवस घोषित कर बड़ा काम किया है। नई पीढ़ी की लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति निष्ठा बढ़े, इसके लिए इस दिन एक श्रेष्ठ कार्यक्रम का आयोजन अम्बेडकर भवन दिल्ली में किया गया है। अन्य संस्थान, पत्रकार, लेखक, पूरे देश में इस काले इतिहास पर 25 एवं 26 जून को विभिन्न आयोजन कर रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि देश में लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था कितनी गहरी है। देश को यह जानना नितांत आवश्यक है कि 12 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। उनके ही दल में कांग्रेस में विचार- विमर्श हुआ कि वर्तमान में जो चुने हुये प्रतिनिधि है, वे बैठकर अपने नये नेता का चुनाव कर लेंगे। दूसरे दिन बैठक में निर्णय होना था, परंतु 25 जून 1975 की मध्य रात्रि में आनन- फानन में इमरजेंसी घोषित कर दी गई। इंटरनल इमरजेंसी के लिए यह आवश्यक है देश के आधे से अधिक प्रदेश जब लिखित में ये मांग करें कि हमारे यहां कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है, तब केन्द्रीय मंत्रिमंडल में सबकी सहमति से राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद देश के भीतर आपातकाल घोषित हो सकता है। ऐसी किसी भी प्रक्रिया का पालन किये बगैर उस समय के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर करके अवैधानिक तरीके से देश पर आपातकाल थोपने का पाप किया गया। काश उस समय संविधान के प्रति आस्था रखने वाले राष्ट्रपति होते, तो इस तानाशाही और नृशंसता से देश बच जाता। व्यक्तिनिष्ठा भय में काम करने वाले सदैव देश के लिये खतरा बनते हैं।
आपातकाल लगाने के समय दूसरा पाप इस देश की न्यायपालिका ने किया। इतिहास में इस देश ने वह न्यायपालिका भी देखी जब तीन- तीन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को सुपर सीड करके अपनी मर्जी से मुख्य न्यायाधीश बनाये गये। देश के सामने बेशर्मी के साथ भूतलक्षी प्रभाव से कानूनों में परिवर्तन करके श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने पक्ष में निर्णय लिया। देश के 9 उच्च न्यायालयों के निर्णयों को बदलकर उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने 4- 1 के सहमत से आपात काल को वैध घोषित कर दिया, इसमें वो जज भी शामिल थे, जो वरीयता तोड़कर बनाये गये थे। काश न्यायपालिका उस समय ठीक निर्णय कर पाती तो देश को आपातकाल नहीं भोगना पड़ता। श्रीमती गांधी द्वारा अपनी सत्ता के लिये पूरे देश को कारागार बना दिया गया। देश के महान विचारक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल जी, जार्ज फर्नाडीज, सर्वोदयी, समाजवादी, भारतीय जनसंघ, आर.एस.एस., आनंदमार्गी, कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के भी नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया। दो सौ से अधिक पत्रकार, विदेशी पत्रकार देश में प्रतिबंधित कर दिये। एक लाख 8 हजार से अधिक लोगों को मीसा डी.आई.आर. में और हजारों लोगों को धारा 151 में बंद कर दिया गया। मीडिया पर पाबंदी लगा दी गई। इस बारे में कोई अपील कोर्ट में नहीं की जा सकती थी। देश में पुलिस को असीमित अधिकार दे दिये गये थे। किसी को पुलिस द्वारा गोली मार देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो सकती थी। उस समय के हुकमरानों का आदेश ही कानून बन गया था। दुनिया मानती है कि हिंदुस्तान के लोगों के खून में ही लोकतंत्र है। यहां के संस्कारों में सभी को समान रूप से जीवन यापन की आजादी है। कुछ समय के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों में अस्थिरता आ सकती है, परंतु देश फिर ताकत के साथ खड़ा हो जाता है।
आपातकाल के सबसे बड़े याद्धा वे रहे, जिन्हें जेलों में बंद कर दिया गया था। जेल से छूटने का समय निश्चित नहीं था। कैदियों को तो मालूम था कि वे कब छूटेंगे, परंतु राजनैतिक बंदियों को नहीं पता था। आपातकाल के दौरान जेल के भीतर कई लोग पागल हो गये, 100 से अधिक लोगों की असमय मौत हो गई। इन सबके बावजूद आर.एस.एस. के आव्हान पर आपातकाल से आजादी और लोकतंत्र को बहाल करने के लिए आंदोलन चलाये गये। आंदोलन के दौरान हजारों लोगों को जेल में डाला गया। उन्हें इतनी यातनायें दी गई कि कुछ लोगों की असमय मौत भी हो गई। डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी सहित लोकतंत्र में आस्था रखने वाले अन्य लोगों ने दुनिया में अपनी बात पहुंचाई, ताकि देश में लोकतंत्र को सुरक्षित रखा जा सके। आपातकाल के संघर्ष को अटल जी और जार्ज फर्नांडीज ने आजादी की दूसरी लड़ाई बताया। लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष करने वालों को सम्मान देने का निर्णय सबसे पहले उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह ने किया, जिसे बाद में मुख्यमंत्री रही सुश्री मायावती ने बंद कर दिया। इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यह उचित नहीं है। लोकतंत्र पुन: स्थापित करने के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानी वे लोग हैं, जो जब- जब लोकतंत्र पर आघात होगा, तब- तब देश के लोगों को लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाये रखने के लिए प्रेरित करेंगे। देश की नई पीढ़ी को आपातकाल के संघर्ष को जानना बेहद जरूरी है, ताकि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखा जा सके। साथ ही लोग लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा ले सकें।
आप को उपचुनाव में मिली बढ़त, केजरीवाल और मान होंगे रणनीतिक बैठक में शामिल
24 Jun, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नई दिल्ली विधानसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को जीत का जश्न मनाकर मायूस कार्यकर्ताओं में जोश भरने का माध्यम मिल गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए आप बुधवार को दिल्ली स्थित कपूरथला हाउस में समारोह करने जा रही है।जिसमें पंजाब व गुजरात में विधानसभा उपचुनाव में जीत का जश्न मनाया जाएगा। दोनों राज्यों में आप को एक-एक सीट पर जीत मिली है । फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद से आप के कार्यकर्ता ही नहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता तक खुश नहीं थे।कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं में साफतौर पर मायूसी देखी जा रही है। यहां तक कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली की जगह दूसरे राज्यों में समय दे रहा था। खासकर पंजाब पर ही पार्टी का ध्यान था।मगर इसी बीच जिस तरह से पहले से भी लगभग दोगुने अंतर से उपचुनाव में दोनों सीटें जीत लेने से पार्टी को बल मिला है। राजनीति के जानकारों की मानें तो उपचुनाव में पांच में से दो सीटें जीत लेने से पार्टी के कार्यकर्ताओं में कुछ जोश आया है। इस आयोजन में आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ ही गुजरात, पंजाब, दिल्ली के आप के सभी बड़े नेता शामिल होंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ चीन में एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर जोर देंगे
24 Jun, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार 25 जून को चीन के किंगदाओ शहर में शुरू हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के दो दिवसीय सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस सम्मेलन में वे आतंकवाद और उग्रवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देंगे।
सम्मेलन का आयोजन चीन के पूर्वी शांदोंग प्रांत के प्रमुख बंदरगाह शहर किंगदाओ में किया जा रहा है, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी उपायों और रक्षा साझेदारी को लेकर गहन विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग कर आतंकवाद के खिलाफ एक सशक्त और समन्वित वैश्विक नीति की आवश्यकता पर भारत की स्पष्ट भूमिका रख सकते हैं। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है, कि सिंह सम्मेलन में यह भी स्पष्ट करेंगे कि आतंकवाद किसी भी देश के विकास और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, और इससे निपटने के लिए सभी देशों को पारदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ कार्य करना होगा।
इस सम्मेलन में पाकिस्तान, चीन, रूस, और मध्य एशियाई देशों सहित एससीओ के सभी सदस्य देशों के रक्षा मंत्री शामिल होंगे। भारत, जो 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बना, लगातार इस मंच पर आतंकवाद और सीमा-पार से हो रही घुसपैठ जैसे विषयों को मजबूती से उठाता आया है।
विशेषज्ञों के अनुसार किंगदाओ में होने वाली यह बैठक न सिर्फ रक्षा संबंधों को लेकर चर्चा का अवसर होगी, बल्कि भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ रणनीतिक और कूटनीतिक संदेश देने का भी एक अवसर है। इस सम्मेलन के दौरान अन्य सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें होने की संभावना है, जिनमें रक्षा सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और आतंकवाद विरोधी अभ्यास जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है।
सपा से निष्कासित विधायकों का क्या होगा भविष्य? विधानसभा अध्यक्ष ने साफ की तस्वीर
24 Jun, 2025 05:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना रामलला के दर्शन करने के मंगलवार को अयोध्या पहुंचे। सर्किट हाउस में जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया और उन्हें गार्ड आफ आनर दिया गया।
समाजवादी पार्टी से निष्कासित तीनों विधायकों के राजनीतिक भविष्य को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जो नियम है उसके मुताबिक कोई भी विधायक पार्टी की मंशा के अनुरूप काम नहीं करता है तो उस पार्टी का अधिकार होता है कि रूल 10 के अंतर्गत अध्यक्ष के समक्ष अपनी याचिका दाखिल कर सके।
पिटीशन का निर्णय गुण दोष के आधार पर होता है लेकिन इस प्रकरण में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उनकी सदस्यता को लेकर किसी भी प्रकार का पिटिशन नहीं लगाया गया है। जो विधायक किसी राजनीतिक दल से निष्कासित होते हैं, उनको असंबद्ध रूप से मान्यता मिलती है। अभी कल समाजवादी पार्टी ने निष्कासन किया है, इसकी आधिकारिक सूचना मेरे पास नहीं है। जो सदस्य निष्कासित हुए हैं, उनको अलग से मान्यता देने के लिए भी किसी प्रकार का कोई भी आवेदन मेरे पास नहीं आया है। जिस समय आवेदन आएगा, उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह और ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडेय को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया है। अब इनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वाराणसी में खास बैठक
24 Jun, 2025 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वाराणसी में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक ताज होटल में संपन्न हुई। बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के बीच संघीय एकता, राष्ट्रीय अखंडता और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर आपसी समझ को और बेहतर बनाने के उपायों की रूपरेखा इस दौरान तय की गई।
आयोजन के दौरान जीआइ उत्पादों की प्रदर्शनी का गृहमंत्री ने अवलोकन किया तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के उत्पादों की एक टोकरी भी उनको भेंट की।
वाराणसी में पहली आयोजित परिषद की इस बैठक में उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ बैठक में नीति आयोग के अधिकारी व चारों राज्यों के अधिकारी भी मौजूद हैं। वहीं बैठक के पूर्व सीएम योगी आदित्यनाथ सुबह श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे।
लुधियाना में फेल हुआ सुखबीर बादल का जादू, शिअद को झेलनी पड़ी करारी हार
24 Jun, 2025 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। तमाम विवादों के बाद पार्टी की पुन: कमान संभालने वाले सुखबीर बादल ने उपचुनाव के जरिये अपने राजनीतिक करियर को मजबूत करने की कोशिश की और चुनाव प्रचार की कमान भी संभाली, लेकिन सफलता नहीं मिली।
2022 से 2025 के बीच शिअद की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। 2022 में भी पार्टी चौथे स्थान पर थी और 2025 में भी वही स्थिति रही। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद यह छठा उपचुनाव था। नवंबर में चार विधानसभा हलकों का चुनाव शिअद ने लड़ा ही नहीं।
सुखबीर बादल के नेतृत्व में एक बार फिर लुधियाना पश्चिम का उप चुनाव लड़ा गया। पार्टी को उम्मीद थी कि वह शहरी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा सकेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 2007 में शिअद ने इस सीट पर अंतिम बार जीत हासिल की थी, लेकिन इसके बाद यह सीट भाजपा के पास चली गई। इस बार भी शिअद इसे हासिल नहीं कर पाया।
'पार्टी नहीं मैंने चुनाव लड़ा...', लुधियाना उपचुनाव में हार के बाद आशु ने दिया इस्तीफा
24 Jun, 2025 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार भारत भूषण आशु ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। आशु के अनुसार उन्होंने अपना इस्तीफा पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को भेज दिया है।
आशु ने लिखा, ‘पार्टी नहीं, बल्कि मैं चुनाव लड़ रहा था और मैं हार की जिम्मेदारी लेता हूं। इसलिए मैंने कार्यकारी अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा भेजा है।’ उल्लेखनीय है कि आशु के चुनाव प्रचार की कमान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विधायक राणा गुरजीत सिंह, विधायक परगट सिंह ने संभाली थी।
जबकि पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं लुधियाना से लोकसभा सदस्य अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी सहित कई अन्य नेता चुनाव प्रचार से दूर रहे। जिसके चलते कांग्रेस पार्टी में दरार पहले ही स्पष्ट हो गई थी।
यह भी चर्चा रही कि प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट में विजय चिन्ह बनाया और बाद में डिलीट कर दिया। जब आशु से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने कोई तस्वीर देखी है, लेकिन अगर किसी ने ऐसा किया है, तो यह उनकी अपनी सोच है।
लुधियाना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी एवं विधायक राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार आशु एक मर्द हैं और वे मरते नहीं। हम उनकी हार को स्वीकार करते हैं। राणा ने कहा कि हम उनका धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने मदद की और उनका भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने मदद नहीं की। उन्होंने कहा कि वह संजीव अरोड़ा को उनकी जीत पर बधाई देते हैं।
वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए कहा कि वह लुधियाना पश्चिम हलके के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सराहना करते हैं, जिन्होंने तमाम मुश्किलों और सरकारी तंत्र के खिलाफ बेहतरीन लड़ाई लड़ी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक उपचुनाव था। हमारी लड़ाई जारी रहेगी और हम इसे 2027 में इसके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाएंगे।
वड़िंग ने कहा कि हम गंभीरता से आत्ममंथन भी करेंगे, क्योंकि हमारा मानना है कि हम इससे कहीं बेहतर कर सकते थे। यह भी पता चला है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पार्टी हाईकमान को आशु की हार और हार के कारणों से अवगत करा दिया है।
पार्टी बड़े नेताओं खासकर लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की अनुपस्थिति को आशु की हार के पीछे सबसे बड़ा कारण मान रही है। पार्टी हाईकमान ने उपचुनाव में पार्टी की हार पर मंथन के लिए जल्द ही एक बैठक बुलाने का भी फैसला किया है, जिसकी तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।
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