राजनीति
‘बहुतों की चुप्पी को सहमति न समझें’: टी राजा सिंह ने नेतृत्व पर नाराज़गी जताकर पार्टी छोड़ी
30 Jun, 2025 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: तेलंगाना में भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. हैदराबाद के गोशामहल निर्वाचन क्षेत्र से विधायक टी राजा को विवादित बयानों के लिए जाना जाता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेतृत्व विवाद के बीच उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दिया.
राजा सिंह ने एक्स पर इस्तीफा पत्र साझा करते हुए लिखा, बहुत से लोगों की चुप्पी को सहमति नहीं समझा जाना चाहिए. मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन अनगिनत कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के लिए बोल रहा हूं, जो हमारे साथ विश्वास के साथ खड़े थे और जो आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
तेलंगाना भाजपा के नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व एमएलसी रामचंद्र राव का नाम लगभग तय हो गया है. उन्होंने सोमवार दोपहर अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया. राव के खिलाफ कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है, इसलिए उनके सर्वसम्मति से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है.
इसके बाद राजा सिंह ने भाजपा से अपने इस्तीफे की घोषणा की और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष जी किशन रेड्डी को संबोधित पत्र में कहा कि उन्होंने यह पत्र भारी मन और गहरी चिंता के साथ लिखा है.
टी राजा सिंह कथित तौर पर तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नजरअंदाज किए जाने से नाराज थे. भेजे इस्तीफा पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी के कुछ गुटों ने उनके समर्थकों को धमकाया और आंतरिक नेतृत्व चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका.
राजा सिंह ने इस मुद्दे पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी पर भी निराशा व्यक्त की. उन्होंने चेतावनी दी कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने से पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा.
राजा सिंह ने कहा, "यह फैसला न केवल मेरे लिए बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं, नेताओं और मतदाताओं के लिए भी एक झटका और निराशा की तरह है, जो हर उतार-चढ़ाव में पार्टी के साथ खड़े रहे हैं. ऐसे समय में जब भाजपा तेलंगाना में अपनी पहली सरकार बनाने की दहलीज पर खड़ी है, इस तरह का चुनाव हमारी दिशा के बारे में गंभीर संदेह पैदा करता है."
केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह किया गया...
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में कई योग्य वरिष्ठ नेता, विधायक और सांसद हैं जिन्होंने भाजपा को मजबूत बनाने के लिए अथक काम किया है और जिनके पास पार्टी को आगे ले जाने के लिए ताकत, विश्वसनीयता और संपर्क है. दुर्भाग्य से, ऐसा लगता है कि कुछ व्यक्तियों ने, निजी हितों से प्रेरित होकर, केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह किया है और पर्दे के पीछे से शो चलाकर निर्णय लिए हैं. यह न केवल जमीनी कार्यकर्ताओं के बलिदान को कमतर आंकता है बल्कि पार्टी को टालने योग्य असफलताओं की ओर धकेलने का जोखिम भी उठाता है.
उन्होंने कहा, "मैं एक समर्पित कार्यकर्ता रहा हूं, लोगों के आशीर्वाद और पार्टी के समर्थन से लगातार तीन बार विधायक चुना गया हूं. लेकिन आज मुझे अपने रुख पर कायम रहना या यह दिखावा करना मुश्किल लगता है कि सब ठीक है. यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के बारे में नहीं है, यह पत्र लाखों वफादार भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के दर्द और हताशा को दर्शाता है जो खुद को दरकिनार और अनसुना महसूस करते हैं."
भाजपा को सत्ता में लाने का अच्छा अवसर था...
उन्होंने कहा, "तेलंगाना में भाजपा को सत्ता में लाने के लिए हमारे पास वर्षों में सबसे अच्छा अवसर था, लेकिन उम्मीद धीरे-धीरे निराशा और हताशा में बदल रही है, इसका कारण मेरे लोग नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व को शीर्ष पर बैठाया जाना है. बहुत दुख के साथ मैंने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर को सूचित करें कि टी. राजा सिंह अब तेलंगाना विधानसभा के सदस्य नहीं हैं."
मैं अपनी आवाज उठाता रहूंगा...
राजा सिंह ने कहा, "मैं भले ही पार्टी से अलग हो रहा हूं, लेकिन मैं हिंदुत्व की विचारधारा और हमारे धर्म और गोशामहल के लोगों की सेवा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं. मैं अपनी आवाज उठाता रहूंगा और हिंदू समुदाय के साथ और भी मजबूती से खड़ा रहूंगा."
उन्होंने कहा कि यह एक कठिन निर्णय है, लेकिन जरूरी भी है. बहुत से लोगों की चुप्पी को सहमति नहीं समझा जाना चाहिए. मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन अनगिनत कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के लिए बोल रहा हूं जो हमारे साथ विश्वास के साथ खड़े थे और जो आज निराश महसूस कर रहे हैं."
आखिर में उन्होंने लिखा, "मैं हमारे वरिष्ठ नेतृत्व - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, अमित शाह और बीएल संतोष से भी विनम्रतापूर्वक अपील करता हूं कि वे इस कदम पर पुनर्विचार करें. तेलंगाना भाजपा के लिए तैयार है, लेकिन हमें उस अवसर का सम्मान करने और उसे हाथ से न जाने देने के लिए सही नेतृत्व चुनना चाहिए."
भगदड़ पर कांग्रेस हमलावर: राहुल और खड़गे ने उठाए सवाल, जांच की मांग
30 Jun, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, ओडिशा के पुरी स्थित श्री गुंडिचा मंदिर के पास रविवार सुबह हुई भगदड़ की घटना को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने इस हादसे को बेहद दुखद और दर्दनाक बताया। साथ ही पीडि़तों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। बता दें कि इस हादसे में अब तक तीन श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हादसा उस वक्त हुआ, जब सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु सुबह करीब चार बजे रथ यात्रा के दर्शन के लिए जुटे थे। वहीं इस हादसे को लेकर कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी गहरा दुख जताया।
उन्होंने कहा कि यह हादसा प्रशासन की लापरवाही और अव्यवस्था का नतीजा है, जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। खडग़े ने कहा कि रथ यात्रा के दौरान शुक्रवार को भी 500 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए थे और अब यह हादसा हुआ है। यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन की तैयारी पूरी तरह नाकाम रही। साथ ही खडग़े ने राज्य सरकार से इस मामले में गंभीर जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राहत कार्य तेज करे प्रदेश सरकार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह त्रासदी इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि इस तरह के बड़े आयोजनों के लिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारी बहुत मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने ओडिशा सरकार से राहत कार्यों को तेज करने की अपील की और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से हरसंभव मदद करने को कहा। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिवार के प्रति गंभीर संवेदतना व्यक्त की। राहुल ने कहा कि मैं मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
हल्दी बोर्ड मुख्यालय का शुभारंभ, अमित शाह बोले – देश को होगा 1 अरब डॉलर का लाभ
30 Jun, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि केंद्र ने 2030 तक एक अरब अमरीकी डॉलर मूल्य के हल्दी निर्यात का लक्ष्य रखा है। निजामाबाद में हल्दी बोर्ड के राष्ट्रीय मुख्यालय के उद्घाटन के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि बोर्ड पैकिंग, ब्रांडिंग, विपणन और हल्दी के निर्यात पर ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने कहा कि हल्दी बोर्ड किसानों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, उनके उत्पाद के निर्यात के साथ ही अनुसंधान और विकास के लिए कार्य करेगा। शाह ने कहा कि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत सरकार ने 2030 तक एक अरब अमरीकी डॉलर मूल्य के हल्दी निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। हमने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के (हल्दी) निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तैयारी भी कर ली है। जो (हल्दी) बोर्ड बनेगा, वह यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा कि हल्दी का उच्चतम मूल्य किसानों तक पहुंचे।
शाह ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में हल्दी बोर्ड स्थापित करने का वादा किया था और इस संबंध में आदेश बाद में जारी किए गए थे। इससे पहले, हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर अमित शाह के पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और अन्य नेताओं ने उनकी अगवानी की। भाजपा की तेलंगाना इकाई ने रविवार को एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले हल्दी बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। अब उन्होंने किसानों के सपने को पूरा किया है। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हल्दी की फसल की गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान और किसानों की आय में सुधार के लिए 200 करोड़ रुपए आबंटित किए हैं।
आप प्रमुख केजरीवाल का हमला तेज, बोले – मोदी सरकार की गारंटी सिर्फ जुमला
30 Jun, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, आम आदमी पार्टी ने रविवार को दिल्ली में झुग्गियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मोदी की गारंटी झूठी, फर्जी और नकली है। आगे कभी जिंदगी में मोदी की गारंटी पर भरोसा मत करना। केजरीवाल ने कहा कि चुनाव के समय मोदी जी ने आपको गारंटी दी थी कि ‘जहां झुग्गी-वहां मकान।’ उनका मतलब था- ‘जहां झुग्गी-वहां मैदान।’ वह यह कहना चाहते थे मुझे वोट दे दो, मैं सारी झुग्गियां तोड़ दूंगा और मैदान बना दूंगा। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि इसी जंतर-मंतर से जैसे कांग्रेस का सफाया किया गया था, वैसे ही बीजेपी की भी सरकार जाएगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी झुग्गियों पर बुलडोजर चलवाती रही, तो रेखा गुप्ता की सरकार तीन साल से ज्यादा नहीं चल पाएगी। उन्होंने बीजेपी-कांग्रेस को भाई-बहन बताते हुए दिल्ली के लोगों को एक कसम भी खिलवा दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी, कांग्रेस एक जैसी पार्टी हैं। दिल्ली का चुनाव दोनों ने मिलकर लड़ा। दोनों पार्टियों का एक ही सिस्टम है।
आम आदमी पार्टी के आने से पहले कांग्रेस ने भी खूब झुग्गियां तोड़ी। बीजेपी-कांग्रेस अमीरों की पार्टियां है। केवल आम आदमी पार्टी देश की पार्टी ही जनता की पार्टी है। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली के 40 लाख लोग झुग्गियों में रहते हैं। अगर ये इक_े हो गए तो किसी की औकात नहीं कि वह आपकी झुग्गियां तोड़ दे। इसी के साथ उन्होंने कार्यक्रम में आए लोगों को एक शपथ भी दिलवा दी कि आज के बाद कभी भी बीजेपी और कांग्रेस को वोट नहीं दूंगा। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी ने 75 साल में कभी भी स्कूल-अस्पताल, बिजली-पानी पर बात नहीं की। ये केवल लूटने का काम करते हैं।
टीएमसी में मतभेद गहराए, कल्याण बनर्जी का महुआ मोइत्रा पर निजी हमला
30 Jun, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी एक बार फिर खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। यह तकरार कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप केस को लेकर ममता बनर्जी की विवादित टिप्पणी के बाद सामने आई है, लेकिन अब यह विवाद व्यक्तिगत आरोपों तक पहुंच गया है। कल्याण बनर्जी ने कहा कि 40 साल की शादी तोड़ी, अब मुझे नैतिकता सिखा रही है! कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा के वैवाहिक जीवन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि महुआ हनीमून से लौटकर मुझसे लडऩे आ गई हैं। मुझे नारी विरोधी बता रही हैं? उन्होंने एक 40 साल पुरानी शादी तोड़ दी और 65 साल के व्यक्ति से शादी की। क्या उन्होंने उस महिला को चोट नहीं पहुंचाई?
बता दें कि महुआ मोइत्रा ने बीजेडी के पूर्व सांसद पिनाकी मिश्रा से शादी की है। कल्याण बनर्जी ने कहा, जो सांसद संसद से नैतिकता के उल्लंघन पर निष्कासित हो चुकी हैं, वह मुझे ज्ञान दे रही हैं, वह सबसे ज्यादा महिला विरोधी हैं। उन्हें सिर्फ अपना भविष्य और पैसा बनाना आता है। यह हमला तब हुआ, जब बनर्जी ने कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप केस पर टिप्पणी करते हुए बलात्कार पीडि़ता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि जो ऐसे लोगों संग घूमती हैं, उन्हें सोचना चाहिए कि वे किनके साथ जा रही हैं। इस बयान की चौतरफा आलोचना हुई, जिसे पीडि़ता को शर्मिंदा करने वाला और महिला विरोधी करार दिया गया।
‘पिछले 25 साल से हमें गालियां दे रहे हैं’ – केजरीवाल ने विपक्ष पर साधा निशाना
29 Jun, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Arvind Kejriwal: दिल्ली की रेखा सरकार के बुलडोजर एक्शन के खिलाफ लामबंद हुई आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीएम रेखा गुप्ता और केंद्र की भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। अरविंद केजरीवाल ने कहा “भाजपा दिल्ली में 25 साल बाद सत्ता में लौटी है। 25 सालों तक ये हमें गालियां देते रहे थे और अभी भी गालियां ही दे रहे हैं। दिल्ली में मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर एफआईआर दर्ज करा दी।”
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा “तुम लोगों को कुछ काम करने के लिए वोट दिया गया था। एफआईआर करने के लिए जनता ने वोट नहीं दिया है। इन्हें (BJP) एफआईआर-एफआईआर खेलने का शौक है। इन्हें सरकार चलानी ही नहीं है। इनकी मंशा ही नहीं है। दिल्ली में अब इनकी लूट चालू हो गई है।” केजरीवाल ने कहा “इन लोगों ने हमें 25 साल तक गालियां दी। 10 साल थोड़ी शांति थी। अगर यही हाल रहा तो 5 साल के बाद अगले पांच साल तक भाजपा दिल्ली में नहीं आने वाली।”
दिल्ली के सहारे यूपी और बिहार पर रहा फोकस
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुलडोजर एक्शन के सहारे यूपी और बिहार पर ज्यादा फोकस किया। उन्होंने कहा “बीजेपी का प्लान दिल्ली की सभी झुग्गियां तोड़ने का है। इनकी गंदी नजर आपके घरों पर टिकी हुई है। दिल्ली में 40 लाख से ज़्यादा झुग्गीवाले हैं। यह सभी इकट्ठे होकर सड़कों पर आकर आंदोलन करेंगे। मैं बीजेपी को चेतावनी देना चाहता हूं कि सुधर जाओ, झुग्गियां तोड़ना बंद करो।
अगर झुग्गियां तोड़ना बंद नहीं किया तो तुम्हारा सिंहासन डोलने में वक्त नहीं लगेगा। बीजेपी की केंद्र सरकार, राज्य सरकार, LG और पुलिस है। ये जहां चाहे बुलडोजर चला दें, लेकिन एक बात याद रखना तुम उत्तर प्रदेश और बिहार के बेटे-बेटियों के घर तोड़ोगे तो वो भी प्रधानमंत्री आवास में से प्रधानमंत्री को भी बाहर करने की औकात रखते हैं। तुम चाहते हो कि पूर्वांचल के लोग दिल्ली छोड़कर बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में चले जायें, वो यही रहेंगे और बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ेंगे।”
अपने पूर्वानुमान की दिलाई याद
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली चुनाव से पहले अपने उस पूर्वानुमान की भी याद दिलाई। जिसमें उन्होंने भाजपा पर गरीब विरोधी होने का दावा किया था। केजरीवाल ने कहा “चुनाव से पहले मैंने दिल्ली के गरीबों और झुग्गीवालों के लिए वीडियो जारी करके कहा था कि अगर बीजेपी की सरकार आ गई तो यह एक साल में ही झुग्गियां तोड़ देंगे। इन्होंने 2-3 महीनों में झुग्गियां तोड़कर आपके सिर से छत छीन ली है। इन्होंने गरीबों का घर और रोजगार दोनों छीन लिया है। मोदी जी ने आप लोगों को ‘जहां झुग्गी-वहां मकान’ की गारंटी दी थी लेकिन उनका मतलब ‘जहां झुग्गी-वहां मैदान’ था और अब इन्होंने झुग्गियां तोड़कर मैदान बना दिया है। मोदी जी की गारंटी झूठी है। अब आप लोग ध्यान रखना कि कभी भी मोदी जी की झूठी गारंटियों पर भरोसा नहीं करना है।”
रेखा सरकार के मंत्री ने किया पलटवार
AAP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली की रेखा सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने केजरीवाल पर पलटवार किया है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा “मैं अरविंद केजरीवाल, आतिशी और आम आदमी पार्टी के तमाम नेताओं से कहना चाहता हूं कि आप रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए चाहे जितना विरोध प्रदर्शन कर लें। लेकिन हम उन्हें अब इस देश में नहीं रहने देंगे। हम ऐसी राजनीति में भी शामिल नहीं होंगे। जिससे दिल्ली के लोगों का जीवन खतरे में पड़े। परसों ही एक हत्या की घटना सामने आई थी। ये रोहिंग्या और बांग्लादेशी हर जगह अपराध करते हैं। हम उन्हें यहां नहीं रहने देंगे। उनके ठिकाने गिरा दिए जाएंगे।”
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोनिया गांधी को संविधान की हत्यारी कहा
29 Jun, 2025 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर बड़ा आरोप लगाकर उन्हें संविधान की हत्यारी करार दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि साल 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के रहते हुए भी देश के सभी अहम निर्णय सोनिया गांधी द्वारा लिए जा रहे थे, जो संविधान के खिलाफ है।
सांसद दुबे ने अपनी बात को लेकर एक पुराना संदर्भ देकर बताया कि सोनिया और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के दौरान रक्षा समझौते पर बातचीत हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया, किस संविधान ने सोनिया को यह अधिकार दिया कि वे एक विदेशी राष्ट्र के प्रमुख से रक्षा समझौते पर चर्चा करें?
सांसद दुबे ने इस दौरान पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा अगवा किए 12 भारतीय स्कूली बच्चों की घटना का उल्लेख कर कहा कि सोनिया ने इस मुद्दे को पुतिन के साथ उठाया था। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा: क्या उस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के एक भी आतंकी ठिकाने को नष्ट किया? इसके विपरीत कश्मीर की जेलों से 1000 से ज्यादा आतंकवादियों को रिहा किया।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस के नेतृत्व पर प्रहार कर कहा कि काश राहुल गांधी, गांधी परिवार द्वारा बनाए संविधान की सही व्याख्या करते। निशिकांत के इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इस परछाई प्रधानमंत्री के प्रमाण के रूप में दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अभी तक इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन जानकारों का मानना है कि आगामी सत्र और चुनावी माहौल में यह मुद्दा फिर से गर्माया जा सकता है।
चुनावी साल में नीतीश ने 21,391 नव नियुक्त सिपाहियों को नियुक्ति पत्र सौंपे
29 Jun, 2025 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बापू सभागार में आयोजित समारोह में 21,391 नव नियुक्त सिपाहियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इसमें बड़ी संख्या में महिला सिपाही भी शामिल हैं। यह नियुक्ति राज्य में पुलिस बल की कमी को दूर करने और कानून-व्यवस्था को बेतहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सीएम नीतिश ने कहा कि युवाओं को सरकारी रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और पुलिस बल में निरंतर भर्ती के माध्यम से अपराध नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पुलिस उपस्थिति बढ़ाने पर हमारी सरकार के द्वारा काम किया जा रहा है।
इसके पहले, मुख्यमंत्री नीतीश ने पोस्ट में लिखा था कि 24 नंबवर 2005 को जब नई सरकार बनी थी, तब बिहार पुलिस में सिर्फ 42,481 कर्मी कार्यरत थे। 2006 से पुलिस बल की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया तेज की गई। अब तक 2.29 लाख से अधिक पदों का सृजन किया जा चुका है और जल्द ही सभी स्वीकृत पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी होगी। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को व्यापक मजबूती मिलेगी।
बिहार सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इस नियुक्ति प्रक्रिया में सैकड़ों महिला सिपाही शामिल की गई हैं, जो विभिन्न जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने में योगदान देंगी।
बिहार में चुनाव से पहले बीजेपी-कांग्रेस के बीच डिजिटल वॉर शुरु
29 Jun, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो रही है। अब राजनीतिक दलों के बीच डिजिटल वॉर बढ़ती जा रही है। कांग्रेस ने एआई आधारित तस्वीर के माध्यम से चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर उस जिन्न की संज्ञा दी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष की चुनावी हार की हताशा करार दिया है।
बिहार यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक एआई जनित इमेज साझा की है, इसमें चुनाव आयोग को जिन्न के रूप में दिखाया है। चित्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिराग लिए हुए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके बगल में खड़ा दिखाया गया है। जिन्न बना चुनाव आयोग कह रहा है, हुक्म मेरे आका”। साथ ही यूथ कांग्रेस ने टिप्पणी की, अब बिहार में आका का हुक्म ही आखिरी फैसला है...”
इस पर बीजेपी ने कांग्रेस व विपक्ष पर पलटवार कर कहा, “चुनाव से पहले जब विपक्ष चुनाव आयोग, मतदान प्रणाली और ईवीएम पर हमले शुरू कर दे, तब माना लीजिए उनकी चुनावी गाड़ी का पहिया पंचर हो चुका है।”
तेजस्वी यादव पर निशाना साधकर भाजपा ने लिखा, “95 चुनाव हार चुके नेता के भरोसे चुनाव यात्रा पर न निकलें, ठीकरा फिर ड्राइवर पर ही फूटेगा।”
बीते सप्ताह कांग्रेस ने नीतीश कुमार को “बेरोजगारी का बादशाह” बताकर एआई इमेज में उन्हें शाही मुकुट पहने दिखाया था। साथ में संदेश लिखा था “नीतीश के राज में बर्बाद है बिहार”, और उन्हें “पलायन का राजा” कहा गया।
एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस ने भाजपा और जेडीयू के गठबंधन को “गुंडा राज” और “लूटबंधन” बताया था। इसमें प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की एक काल्पनिक बातचीत को कार्टून के रूप में दिखाया गया, जिसमें भाजपा की क्रोनोलॉजी को व्यंग्यात्मक तरीके से पेश किया गया।
संविधान पर मायावती का BJP को कड़ा संदेश: 'छेड़छाड़ हुई तो बर्दाश्त नहीं', 'देश को अंदर से खोखला' करने का भी आरोप
28 Jun, 2025 08:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आपातकाल के मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला. उन्होंने देश में संविधान के मूल स्वरूप में बदलाव की कोशिशों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि BSP ऐसे किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेगी और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर आंदोलन भी किया जाएगा.
मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत भारत के संविधान के महत्व और उसकी मूल भावना की चर्चा करते हुए की. उन्होंने कहा कि देश के संत समाज, खासकर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर दलितों, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक समतामूलक संविधान की नींव रखी थी. उन्होंने कहा कि देश में संत समाज के हित के लिए और सर्वजन सुखाय-सर्वजन हिताय के सिद्धांतों पर चलते हुए जो संविधान तैयार किया गया, वह आज गंभीर संकट में है.
बीजेपी पर सीधा निशाना
BSP प्रमुख ने कहा कि पहले कांग्रेस और अब बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने संविधान के साथ ईमानदारी नहीं बरती. उन्होंने दोनों ही दलों पर आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए संविधान के प्रावधानों को कमजोर करने का काम किया है. पहले कांग्रेस और अब बीजेपी व उसके सहयोगी दलों ने संविधान को सही मायनों में लागू नहीं किया है. ये पार्टियां अपनी जनविरोधी नीतियों को छिपाने के लिए संविधान में अनावश्यक बदलाव कर रही हैं.
मायावती बोलीं- कांग्रेस और बीजेपी अंदर से एक
मायावती ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी दिखावे में एक-दूसरे के विरोधी हो सकते हैं, लेकिन असलियत में दोनों संविधान संशोधन के मामलों में एकजुट हैं. आज कांग्रेस और बीजेपी अंदर ही अंदर एक हैं. उन्होंने कहा कि संविधान में से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ जैसे शब्दों को हटाने की कोशिशें हो रही हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे और बहुलतावादी समाज के लिए खतरनाक संकेत हैं. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. संविधान से छेड़छाड़ की कोई भी कोशिश होगी तो BSP चुप नहीं बैठेगी. पार्टी इसके खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करेगी.
‘आरक्षण को खत्म करने की साजिश’
मायावती ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की भी योजनाएं चल रही हैं और इसे धीरे-धीरे निष्क्रिय किया जा रहा है. आरक्षण से संबंधित कई मामले आज भी लंबित हैं. बीजेपी और उसके सहयोगी दल समाज के वंचित वर्गों को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं. BSP प्रमुख ने साफ किया कि उनकी पार्टी संविधान की मूल आत्मा से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान और दलित-पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए BSP हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी.
कोलकाता में रेप मामले को लेकर तनाव: BJP-पुलिस झड़प के बाद SIT गठित, विरोध प्रदर्शन जारी
28 Jun, 2025 08:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में एक छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के खिलाफ शनिवार को कोलकाता की सड़कों पर जबरदस्त राजनीतिक विरोध देखने को मिला. कांग्रेस छात्र परिषद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. घटना की न्यायिक जांच की मांग के साथ दोनों दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। उधर, पुलिस ने जांच तेज करते हुए चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है.
कोलकाता में कस्बा थाने के सामनेकांग्रेस छात्र परिषद के समर्थकों ने प्रदर्शन किया. उन्होंने न्यायिक जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस गंभीर अपराध को दबाने की कोशिश कर रही है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महिला सुरक्षा की स्थिति बंगाल में लगातार खराब होती जा रही है.
पुलिस और भाजपा कार्यकर्ता भिड़े
दूसरी ओर, भाजपा ने भी शनिवार को इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरने का ऐलान किया. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने गरियाहाट चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन दोपहर लगभग 12 बजे शुरू हुआ और कुछ ही देर में गरियाहाट का मुख्य चौराहा ठप हो गया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने कस्बा पुलिस स्टेशन के सामने नारेबाजी की.
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब भाजपा नेता सुकांत मजूमदार, जगन्नाथ चटर्जी और अनुपम भट्टाचार्य ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की. पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बिना अनुमति के किसी भी सार्वजनिक सभा की इजाजत नहीं दी जाएगी. इसे लेकर पुलिस और भाजपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गये.
पुलिस अधिकारियों ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार को रोकने की कोशिश की और उन्हें घेर लिया। जब उनसे प्रदर्शन रोकने को कहा गया, तो सुकांत ने सवाल किया, “यहां धारा 144 लागू नहीं है, तो हमें क्यों रोका जा रहा है?” इस पर एक पुलिस अधिकारी ने जवाब दिया कि “कोई अनुमति नहीं है और आपने बैरिकेड तोड़ा है, इसलिए आपको गिरफ्तार किया जाएगा.”
जांच के लिए SIT का गठन
इस बीच, कोलकाता पुलिस ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. सहायक पुलिस आयुक्त एसएसडी प्रदीप घोषाल एसआईटी का नेतृत्व कर रहे हैं. SIT को जल्द से जल्द इस मामले की तह तक जाकर आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने का निर्देश दिया गया है.
कोलकाता लॉ कॉलेज में छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म की घटना अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि इसका राजनीतिक रंग भी गहराता जा रहा है. जहां एक ओर जांच एजेंसियां और फॉरेंसिक टीम सबूत इकट्ठा करने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इस घटना को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह मामला तूल पकड़ते जा रहा है.
सत्ता को चुनौती! हिंदी थोपने के खिलाफ उद्धव-राज की हुंकार, 5 जुलाई को मुंबई में होगा बड़ा प्रदर्शन
28 Jun, 2025 08:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने के फैसले को लेकर सियासी बवाल मच गया है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू इस नीति का जमकर विरोध हो रहा है. ऐसे में ठाणे में एनसीपी (शरद पवार गुट) के कार्याध्यक्ष प्रकाश पाटिल ने शरद पवार, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की तस्वीरों वाला एक बैनर लगाकर खूब चर्चा बटोरी है. यह बैनर मराठी भाषा के समर्थन और हिंदी की अनिवार्यता के विरोध में लगाया गया है.
बैनर में लिखा है कि मराठी भाषा और संस्कृति को बचाना हर महाराष्ट्रीयन की जिम्मेदारी है. इस बैनर ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है और सोशल मीडिया पर भी यह खूब वायरल हो रहा है. बता दें कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इस फैसले को मराठी अस्मिता पर हमला करार दिया है. दोनों पार्टियों के नेता उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 5 जुलाई को मुंबई में एक विशाल संयुक्त आंदोलन करने जा रहे हैं. इस आंदोलन में अन्य विपक्षी दलों और मराठी भाषा प्रेमियों के भी शामिल होने की संभावना है.
क्यों हो रहा है विरोध?
महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 1 से 5 तक के मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का फैसला किया है. सरकार का कहना है कि यह नीति छात्रों को देश की एक प्रमुख भाषा से जोड़ेगी. लेकिन विपक्षी दलों का तर्क है कि यह कदम मराठी भाषा और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करेगा. राज ठाकरे ने इसे ‘हिंदी थोपने’ की कोशिश बताया. साथ ही कहा कि महाराष्ट्र में मराठी का सम्मान सर्वोपरि है.
5 जुलाई को मुंबई में होगा बड़ा प्रदर्शन
शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे ने 5 जुलाई को मुंबई के गिरगांव चौपाटी से आजाद मैदान तक एक विशाल मार्च निकालने की योजना बनाई है. पहले यह प्रदर्शन 6 और 7 जुलाई को अलग-अलग होने वाला था, लेकिन एकादशी के त्योहार को ध्यान में रखते हुए तारीख बदलकर 5 जुलाई कर दी गई. इस मार्च में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. साथ ही मुंबई पुलिस ने सुरक्षा के लिए ड्रोन निगरानी और भारी पुलिस बल तैनात करने की तैयारी भी की है.
सियासी समीकरण पर क्या होगा असर?
यह आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, जो पहले एक-दूसरे के सियासी प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, अब मराठी अस्मिता के मुद्दे पर एक साथ आ रहे हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह एकता आगामी नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति हो सकती है. वहीं बीजेपी ने इस आंदोलन को ‘नौटंकी’ करार देते हुए कहा है कि हिंदी को अनिवार्य नहीं, बल्कि वैकल्पिक बनाया गया है.
क्या है सरकार का रुख?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विवाद को शांत करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि हिंदी को अनिवार्य नहीं बनाया गया है और छात्र अपनी पसंद की तीसरी भाषा चुन सकते हैं. शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने भी साफ किया कि मराठी अनिवार्य रहेगी, अंग्रेजी दूसरी भाषा होगी और तीसरी भाषा वैकल्पिक होगी. लेकिन विपक्ष का कहना है कि सरकारी आदेश में अभी भी अस्पष्टता है, जिससे हिंदी को थोपने का डर बना हुआ है.
AAP सरकार सवालों के घेरे में: सिंगला को क्लीन चिट मिलने पर बादल ने पूछा- 'सबूतों पर सफाई दे CM'
28 Jun, 2025 07:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक डॉ. विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के एक मामले में पंजाब पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है. यह मामला 2022 में मोहाली के फेज-8 थाने में दर्ज किया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विजय सिंगला ने सरकारी ठेकों के आवंटन के बदले एक फीसदी कमीशन की मांग की थी. पंजाब पुलिस ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि विजय सिंगला के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं. हालांकि उनके ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) रहे प्रदीप के खिलाफ जांच अभी भी जारी रहेगी.
पंजाब पुलिस की इस क्लोजर रिपोर्ट से शिकायतकर्ता भी सहमत है. लेकिन इस फैसले ने पंजाब की सियासत में हलचल मचा दी है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आप सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधा है. शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने सवाल उठाया है कि मुख्यमंत्री ने खुद दावा किया था कि उनके पास विजय सिंगला के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हैं, जिसके आधार पर उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया गया था. बादल ने पंजाब सीएम और दिल्ली पार्टी प्रमुख पर तंज कसते हुए पूछा कि ‘अब उन सबूतों का क्या हुआ? क्या दिल्ली लॉबी के दबाव में विजय सिंगला को क्लीन चिट दी गई है?’
मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए: बादल
सुखबीर सिंह बादल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि विजय सिंगला ने उनके सामने अपना अपराध स्वीकार किया था. अब इस क्लीन चिट से सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच एजेंसियों पर दबाव डाला गया. बादल ने मांग की है कि इस मामले की जांच को राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जाए और एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा इसकी निष्पक्ष जांच हो ताकि सच सामने आ सके. विपक्ष का आरोप है कि आप सरकार अपने नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने में नरम रवैया अपना रही है, जबकि विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में तेजी दिखा रही है.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला ठेके के कमीशन से जुड़ा है जिसमें शिकायतकर्ता राजिंदर सिंह ने प्रदीप कुमार (OCD) को 58 करोड़ रुपये के कार्यों के ठेके में से 2 फीसदी कमीशन जो कि लगभग 1.16 करोड़ रुपये मांगे थे. जिसमें से 17 करोड़ रुपये के कार्य पहले ही ठेकेदारों को दिए जा चुके थे. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि जब उन्होंने कमीशन देने से इनकार किया, तो उन्हें बार-बार व्हाट्सएप कॉल और धमकियां मिलनी शुरू हो गई. यह कहते हुए कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनका करियर खत्म कर दिया जाएगा. शिकायत में आगे कहा गया कि 20 मई को उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई, और बताया गया कि आगे के कामों के आवंटन के लिए 1 फीसदी कमीशन देना अनिवार्य होगा. 23 मई को राजिंदर सिंह सचिवालय गए, जहां उन्होंने मंत्री और उनके ओएसडी से मुलाकात की और कथित तौर पर मंत्री को रिश्वत (5 लाख रुपये) देने का निर्देश देते हुए रिकॉर्ड भी किया.
कांग्रेस का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: 'वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ बिहार के लोगों के अधिकारों पर डाका डालने जैसा'
28 Jun, 2025 07:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस ने गुरुवार को बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध किया. कांग्रेस ने कहा कि बिहार के लोगों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है. बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले साजिशन मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जा रहा है. इसमें घर-घर जाकर वोटरों को सत्यापित किया जाएगा और उनसे उनकी नागरिकता साबित करने को कहा जाएगा.
AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि ये खुले तौर से साजिश है, डाका है. ये डाका सिर्फ बिहार के वोटरों पर नहीं, उनके अधिकारों पर, उनकी पहचान पर, उनकी नागरिकता पर डाला जा रहा है. बिहार के लोगों के वजूद को खत्म करने की यह साजिश रची जा रही है.
नागरिकता कैसे साबित करनी होगी?
1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोगों के लिए- उन्हें अपनी जन्म तिथि या स्थान की सत्यता स्थापित करने के लिए कोई एक वैध दस्तावेज देना होगा.
1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म हुआ है तो- उन्हें अपने साथ-साथ अपने माता-पिता में से किसी एक का वैध दस्तावेज भी देना होगा.
2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं के लिए- इनको अपना और अपने माता-पिता के वैध दस्तावेज देने होंगे.
वोटर लिस्ट की जांच पर सवाल
आखिर ये अब क्यों किया जा रहा है?
इस पूरी प्रक्रिया को, मानसून के दिनों में बिहार के बाढ़-प्रभावित इलाकों में, एक महीने में कैसे पूरा किया जाएगा?
लोकसभा चुनाव के वक्त जब इसी वोटर लिस्ट पर वोट पड़े हैं, तो विधानसभा में क्यों नहीं?
साफ है, जब भी BJP पर संकट आता है, वो चुनाव आयोग की तरफ भागते हैं. चुनाव आयोग मोदी जी के तीन बंदर हैं. न सच सुनते हैं, न सच देखते हैं, न सच बोलते हैं.
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने किया विरोध
बिहार में विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) ने राज्य विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में गहन पुनरीक्षण के प्रस्ताव का शुक्रवार को कड़ा विरोध किया. उन्होंने इस कवायद को आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की मदद करने के लिए एक षड्यंत्र करार दिया.
यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य सहित अन्य नेताओं ने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का विरोध किया जाएगा. गठबंधन ने कहा कि वह निर्वाचन आयोग के पास एक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा और यदि वे हमें संतुष्ट करने में असफल रहे तो आगे की कार्रवाई की जाएगी.
तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल
तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को लेकर इतना गंभीर था, तो उसने पिछले वर्ष के लोकसभा चुनावों के तुरंत बाद ऐसा क्यों नहीं किया? उसने इस हफ्ते के आरंभ तक इंतजार क्यों किया? उन्होंने दावा किया, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हाल ही में दिल्ली गए थे, जाहिर तौर पर वह विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जेडीयू की संभावनाओं के बारे में गठबंधन सहयोगियों के साथ अपनी आशंकाओं को साझा करने के लिए गए थे. हमें संदेह है कि बाद में सत्तारूढ़ गठबंधन ने निर्वाचन आयोग को कुछ ऐसा करने का निर्देश दिया, जिससे चुनावों में उसे मदद मिल सके.
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि हमें संदेह है कि इस कवायद का उद्देश्य, जिसमें मतदाताओं से ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो बहुत कम लोगों के पास हो सकते हैं, बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित करना है, विशेष रूप से दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग जैसे वंचित वर्गों को.
बीजेपी-आरएसएस की जनविरोधी सोच
उन्होंने आरोप लगाया कि एक बार जब नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, तो अगला कदम इन लोगों को सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित करना हो सकता है. यह बीजेपी-आरएसएस की जनविरोधी सोच के अनुरूप है, जिसे दत्तात्रेय होसबाले ने संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाने की वकालत करके अभिव्यक्त किया है. तेजस्वी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के लिए सिर्फ 25 दिनों में इतनी बड़ी कवायद करना असंभव है, जैसा कि उसने प्रस्तावित किया है. अगर वास्तव में यह संभव है, तो मैं केंद्र को चुनौती देता हूं कि वह दो महीने के भीतर जाति जनगणना कराए.
निर्वाचन आयोग पर साधा निशाना
पवन खेड़ा ने कहा कि महात्मा गांधी के तीन बंदरों ने कुछ भी बुरा न देखा, न सुना और न कहा. इसी प्रकार निर्वाचन आयोग कुछ भी सच न देखता है, न सुनता है और न बोलता है. जब हमारे नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव कराने के तरीके पर संदेह जताया, तो बीजेपी की ओर से इसका खंडन आया. यह रिश्ता क्या कहलाता है?
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के जनमत सर्वेक्षणों से परेशान हैं, जिनमें दिखाया गया है कि बिहार में एनडीए का प्रदर्शन खराब रहने वाला है. इसलिए, उन्होंने शायद निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल मास्टरस्ट्रोक के रूप में किया है. कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग के लिए बिहार एक प्रयोगशाला है और देश में अन्य जगहों पर भी इसी तरह के प्रयोग हो सकते हैं.
निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र
एक दिन पहले निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर अपना विरोध जताने वाले भट्टाचार्य ने दावा किया कि प्रस्तावित कवायद तार्किक रूप से बेतुकी है और यह एक दुःस्वप्न साबित होगा क्योंकि यह कवायद मानसून के दौरान की जा रही है जबकि इस दौरान राज्य के बड़े हिस्से बाढ़ से प्रभावित होते हैं.
टीएमसी का दावा: भाजपा के इंटर्नल सर्वे में 46–49 सीटों की आशंका, इसलिए गहराई से वोटर संशोधन
28 Jun, 2025 02:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता । पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के पुनर्निरीक्षण की आड़ में पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने की भयावह कोशिश की जा रही है। चुनाव आयोग के अभियान की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्षी इंडी गठबंधन की पार्टियां इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाएंगी।
टीएमसी ने टाइमिंग पर उठाए सवाल
चुनाव आयोग ने बीते सोमवार को दिशा निर्देश जारी किए, जिनके तहत बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनर्निरीक्षण करने और अयोग्य नामों को हटाया जाना है। निर्देशों के तहत सिर्फ योग्य और वैध मतदाताओं के नाम ही मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। हालांकि विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग यह पूरी कवायद कर रहा है। इससे पहले बिहार में मतदाता सूची में संशोधन अंतिम बार साल 2003 में किए गए थे। टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि 'अब अचानक से मतदाता सूची की जांच क्यों की जा रही है?'
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