राजनीति
'राहुल सिर्फ दिखावे के नेता, असली रक्षक मोदी' – गिरिराज सिंह का बयान
11 Jul, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेगूसराय। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा संविधान की किताब दिखाए जाने पर गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी खुद एक डमी हैं। उनके पास संविधान की एक डमी किताब है। पीएम मोदी संविधान की रक्षा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। हमारा उद्देश्य ऐसे डमी लोगों से छुटकारा दिलाना है।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की गाड़ी पर चढ़ने से रोके जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सामाजिक जीवन में इससे बड़ा अपमान और कुछ नहीं हो सकता। अब तक सामाजिक मान्यता यही थी कि ये लोग राज्य के बड़े नेता हैं, लेकिन राहुल गांधी और तेजस्वी ने इन दोनों नेताओं का अपमान किया है।
बता दें राहुल गांधी बुधवार को बिहार के दौरे पर थे। इस दौरान राहुल गांधी ने महागठबंधन की ओर से आयोजित विरोध रैली में शिरकत की। ‘बिहार बंद’ के दौरान पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार को राहुल गांधी की गाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया गया। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सांसद पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमें वाहन पर चढ़ने नहीं दिया गया, अंदर सभी लोग कांग्रेस से थे। यह मेरी जिंदगी की लड़ाई है, मेरे समाज की लड़ाई है। यह संविधान की रक्षा और अल्पसंख्यकों के दर्जे की लड़ाई है। इसमें सम्मान और अपमान की क्या बात है? कहीं कोई अपमान की बात नहीं है, हम लोगों का संबंध सीधे मतदाताओं से है।
आपातकाल की काली छाया: संजय गांधी पर जबरन नसबंदी और बेदखली के आरोप
11 Jul, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आपातकाल पर सवाल उठाए हैं। हाल ही में एक लेख में उन्होंने दिवंगत पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र हल्के में ली जाने वाली चीज नहीं है। खास बात है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश गए थरूर पीएम मोदी की तारीफ को लेकर भी कांग्रेस नेताओं के निशाने पर आ गए थे।
एक मलयालम समाचार में गुरुवार को आपातकाल पर प्रकाशित एक लेख में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य शशि थरुर ने 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल के काले दौर को याद किया और कहा कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए किए गए प्रयास अक्सर क्रूरतापूर्ण कृत्यों में बदल जाते हैं जिन्हें उचित नहीं ठहराया जा सकता था।
थरुर ने लिखा- इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया जो इसका एक संगीन उदाहरण बन गया। पिछड़े ग्रामीण इलाकों में मनमाने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हिंसा और बल का इस्तेमाल किया गया। नई दिल्ली जैसे शहरों में झुग्गियों का सफाया कर दिया गया। हजारों लोग बेघर हो गए। उनके कल्याण पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे हल्के में लिया जाए, यह एक अनमोल विरासत है जिसे निरंतर पोषित और संरक्षित किया जाना चाहिए। थरूर ने कहा कि यह सभी को हमेशा याद दिलाता रहे।
थरूर के मुताबिक आज का भारत 1975 का भारत नहीं है। उन्होंने कहा कि हम ज्यादा आत्मविश्वासी, ज्यादा विकसित और कई मायनों में ज्यादा मजबूत लोकतंत्र हैं। फिर भी, आपातकाल के सबक चिंताजनक रूप से प्रासंगिक बने हुए हैं। थरूर ने चेतावनी दी कि सत्ता को केंद्रीकृत करने, असहमति को दबाने और संवैधानिक रक्षात्मक उपायों को दरकिनार करने की प्रवृत्ति कई रूपों में फिर से उभर सकती है। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसी प्रवृत्तियों को राष्ट्रीय हित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जा सकता है। इस लिहाज से आपातकाल एक कड़ी चेतावनी है। लोकतंत्र के प्रहरियों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
कन्हैया से घबराता है लालू परिवार: प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
11 Jul, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत जोरों पर है। बीते बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में महागठबंधन ने बिहार बंद का आह्वान किया था। संसद में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता राहुल गांधी व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व राजद नेता तेजस्वी यादव बिहार बंद के मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। दोनों नेता जिस गाड़ी में सवार थे, उस पर कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी चढ़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें चढ़ने नहीं दिया गया। इस पर अब चुनावी रणनीतिकार एवं जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर का बयान आया है। पीके ने कहा कि राजद कन्हैया कुमार से डरती है।
पीके ने कहा कि कन्हैया कुमार और उनके जैसे युवा नेताओं से राजद (राजद) के नेतृत्व और खासकर लालू परिवार को डर लगा रहता है। वे उन्हें आगे नहीं आने देना चाहते हैं। राजद को लगता है कि यदि कन्हैया जैसे युवा नेता बिहार की राजनीति में आगे आएंगे, तब तेजस्वी का क्या होगा। राष्ट्रीय जनता दल कभी नहीं चाहती है कि कन्हैया जैसा प्रभावशाली नेता कांग्रेस में सक्रिय रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिहार में राजद की पिछलगू पार्टी है। कांग्रेस बिहार के अंदर वहीं करती है, जो राजद नेतृत्व की ओर से आदेश मिलता है। प्रशांत किशोर ने कहा कि कन्हैया बिहार कांग्रेस में सबसे अधिक प्रतिभावान हैं। कांग्रेस यदि इन नेताओं का इस्तेमाल नहीं करती है, तब यह दिखाता है कि वह बिहार में राजद की पिछलग्गू पार्टी है।
दरअसल, प्रशांत किशोर की पूरी कवायद यही है कि वह मौके को भुनाकर कन्हैया कुमार को अपने पाले में कर लें। अगर वाकई में पीके इसमें कामयाब होते हैं, तब बिहार की राजनीति में भूकंप के झटके के समान होगा।
कहा जाता है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, कन्हैया कुमार की खूबियों से वाकिफ है। लालू नहीं चाहते हैं कि कन्हैया बिहार में पैर जमाए। छात्र राजनीति के दौरान कन्हैया जब जेल से छूटे थे, तब बिहार लौटते ही उन्होंने लालू यादव से मुलाकात की थी। कन्हैया ने लालू यादव का पैर छूकर आशीर्वाद लेने की कोशिश की। इसके बावजूद भी 2019 के लोकसभा चुनाव में कन्हैया को राजद का समर्थन नहीं मिला। कन्हैया तब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरे थे, उन्होंने राजद और लालू यादव से समर्थन की उम्मीद भी जाहिर की थी, लेकिन राजद ने वहां अपना प्रत्याशी उतार दिया था।
इसके बाद कन्हैया जब कांग्रेस में शामिल हुए, फिर से कयास लगाया जाने लगा कि वे बेगूसराय से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। लेकिन इस बार भी राजद की तरफ से उनके खिलाफ वीटो लगा दिया गया। इस कारण कन्हैया को 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस ने बीजेपी नेता मनोज तिवारी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा।
प्रशांत किशोर ने वोटर लिस्ट पुनरीक्षण मामले में बयान दिया है। पीके ने कहा कि वोटर लिस्ट के विरोध में बहुत से लोग हैं। अभी एक साल पहले ही लोकसभा चुनाव हुआ है। चुनाव आयोग ने ही वोटर लिस्ट बनाया। आखिर एक साल के भीतर बिहार में ऐसा क्या हुआ कि पूरे लिस्ट में पुनरीक्षण की जरूरत आ गई है। उन्होंने कहा कि हमारी यही मांग है कि 2024 में लोकसभा चुनाव के लिए जिस लिस्ट का इस्तेमाल हुआ है उसी का इस्तेमाल यहां भी होना चाहिए।
स्टालिन का तंज: पलानीस्वामी अब सिर्फ भाजपा के प्रवक्ता बनकर रह गए
10 Jul, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवरूर: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन ने विपक्षी नेता एडप्पादी पलानीस्वामी की भाजपा की मूल आवाज के रूप में बोलने की शुरुआत करने के लिए आलोचना की है.
मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन कल शाम दो दिवसीय दौरे पर तिरुवरूर जिले पहुंचे. इसके बाद, वह लोगों से मिलने और उनसे आवेदन प्राप्त करने के लिए तिरुवरुर के पवित्रमनिक्कम क्षेत्र में एक रोड शो किया. इसके बाद, मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन ने रेलवे फ्लाईओवर के पास स्थापित पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि की पूर्ण लंबाई वाली कांस्य प्रतिमा का उद्घाटन किया.
दौरे के क्रम में मुख्यमंत्री स्टालिन ने आज सुबह सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण समारोह में भाग लिया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं गर्व से कह सकता हूं कि तमिलनाडु के इतिहास में किसी भी सरकार ने हमारी तरह इतनी योजनाएं लागू नहीं की हैं.
विभिन्न वित्तीय संकटों के बीच, द्रविड़ मॉडल सरकार इस तरह की विभिन्न उपलब्धियां हासिल कर रही है, तथा केंद्र सरकार के उन संकटों पर काबू पा रही है जो बाधा बन सकते थे."
उन्होंने विपक्ष के नेता पलानीस्वामी पर हमला बोलते हुए कहा कि जो यह सब देख नहीं सकते, अब क्या कर रहे हैं? उन्होंने तमिलनाडु, माफ़ कीजिए, तमिलकम को बचाने की यात्रा शुरू कर दी है.
क्योंकि उन्होंने अब AIADMK को उस समूह में शामिल कर दिया है जिसे तमिलनाडु नहीं कहा जाना चाहिए. जो AIADMK को नहीं बचा सकता, वही तमिलनाडु को बचाएगा.
स्टालिन ने कहा, श्रीमान पलानीस्वामी, तमिलनाडु आपसे पहले ही बच चुका है. आपने कूवथुर में नीलामी करके वसूली, भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से भरी एक ऐसी दयनीय सरकार चलाई जो तमिलनाडु ने पहले कभी नहीं देखी थी.
अपने द्वारा किए गए अपराधों से बचने के लिए आपने तमिलनाडु और तमिलनाडु के लोगों को भाजपा के हाथों गिरवी रख दिया है.
साथ ही स्टालिन ने कहा, "तमिलनाडु 9.69 प्रतिशत की विकास दर के साथ देश में पहले स्थान पर है. केंद्र सरकार ने खुद यह कहा है. हम तमिलनाडु का विकास सिर ऊंचा करके कर रहे हैं.
दूसरे राज्यों के लोग तमिलनाडु के बारे में गर्व से बात कर रहे हैं. पलानीस्वामी को ये सब नहीं पता. पलानीस्वामी, आपको तो बस विश्वासघात ही पता है.
आपने उसी को धोखा दिया जिसने आपको लाया और भेजा. आपने उस पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं को धोखा दिया जो आपको दी गई थी और आपने गठबंधन कर लिया. जब आप सत्ता में थे, तो आपने तमिलनाडु के अधिकारों को गिरवी रखकर सभी लोगों के साथ विश्वासघात किया."
सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को धन नहीं देती. वह जीएसटी में हमारा हिस्सा भी नहीं देती, जो हम ठीक से देते हैं.
वह तमिलनाडु को कोई विशेष योजना नहीं देती. हम केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए धन दे रहे हैं. वे हमें शिक्षा निधि देने से इनकार करते हैं.
केंद्र सरकार कीझाडी अध्ययन रिपोर्ट जारी करने से यह कहते हुए इनकार कर रही है कि तमिलों का गौरव उजागर नहीं होना चाहिए. पलानीस्वामी को कीझाडी के बारे में कुछ भी नहीं पता. उनके लिए कीझाडी का मतलब है लेटना.
इतना ही नहीं, आप (पलानीस्वामी) भाजपा के साथ गठबंधन में रहते हुए कैसे यात्रा कर सकते हैं, जो निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्गठन करके और मतदाता सूची में छेड़छाड़ करके तमिलनाडु को धोखा दे रही है?
पलानीस्वामी का कहना है कि हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग की ओर से स्कूल और कॉलेज नहीं बनाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले वह भाजपा की डबिंग आवाज के रूप में बोलते थे, अब वह उनकी मूल आवाज बन गए हैं. एचआरसीई विभाग के अधिनियम में ही लिखा है कि शिक्षण संस्थान शुरू किए जा सकते हैं. आप बिना ये जाने मुख्यमंत्री कैसे हो सकते हैं? समझ नहीं आता.
स्टालिन ने कहा, एमजीआर जब मुख्यमंत्री थे, तब अरुलमिगु पलनी अंदावर कॉलेज खोला गया था. आपने मुख्यमंत्री रहते हुए उस कॉलेज के लिए एक अतिरिक्त भवन का उद्घाटन किया था.
क्या अभी कॉलेज शुरू करना ग़लत है? बीजेपी नेता ये नहीं कहते कि कॉलेज शुरू नहीं होने चाहिए. लेकिन पलानीस्वामी ऐसा कह रहे हैं.
कुंभकोणम के निकट कलैग्नार के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने के विधेयक को पारित हुए दो महीने से अधिक समय हो गए हैं, लेकिन राज्यपाल ने अभी तक अपनी मंज़ूरी नहीं दी है. हम इसका कानूनी तौर पर सामना करके जीतेंगे. चाहे आप कितनी भी यात्राएं कर लें, आप लोगों के खिलाफ बोलकर तमिलनाडु और तमिलनाडु के लोगों के साथ विश्वासघात करेंगे और यह दिखावा करेंगे कि आप किसी भी तरह से लोगों को धोखा दे सकते हैं, लोग आपको कभी स्वीकार नहीं करेंगे.
थरूर का बड़ा बयान: संजय गांधी की भूमिका शर्मनाक, इंदिरा की इमरजेंसी थी तानाशाही की मिसाल
10 Jul, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम: वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि आपातकाल को भारत के इतिहास के केवल एक काले अध्याय के रूप में याद नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके सबक को पूरी तरह से समझा जाना चाहिए.
मलयालम दैनिक दीपिका में गुरुवार को आपातकाल पर प्रकाशित एक लेख में कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य ने 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के बीच प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल के काले दौर को याद किया.
इसके साथ ही उन्होंने ये कहा कि अनुशासन और व्यवस्था के लिए किए गए प्रयास अक्सर क्रूरता के ऐसे कृत्यों में बदल जाते थे, जिन्हें उचित नहीं ठहराया जा सकता.
तिरुवनंतपुरम के कांग्रेसी सांसद ने लिखा, "इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने जबरन नसबंदी अभियान चलाया. ये एक कुख्यात उदाहरण बन गया. इसके लिए गरीब और ग्रामीण इलाकों में मनमाने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती का इस्तेमाल किया गया. नई दिल्ली जैसे शहरों में, झुग्गियों को बेरहमी से ध्वस्त और साफ किया गया. हजारों लोग बेघर हो गए. उनके कल्याण पर ध्यान नहीं दिया गया."
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. यह एक अनमोल विरासत है, जिसे निरंतर पोषित और संरक्षित किया जाना चाहिए.
थरूर ने कहा, "इसे हर जगह के लोगों के लिए एक स्थायी अनुस्मारक के रूप में काम करने दें." उनके मुताबिक, आज का भारत 1975 का भारत नहीं है.
उन्होंने कहा, "हम अधिक आत्मविश्वासी, अधिक विकसित और कई मायनों में एक मजबूत लोकतंत्र हैं. फिर भी, आपातकाल के सबक चिंताजनक तरीकों से प्रासंगिक बने हुए हैं."
थरूर ने चेतावनी दी कि सत्ता को केंद्रीकृत करने असहमति को दबाने और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने का प्रलोभन विभिन्न रूपों में फिर से प्रकट हो सकता है.
उन्होंने कहा, "अक्सर ऐसी प्रवृत्तियों को राष्ट्रीय हित या स्थिरता के नाम पर उचित ठहराया जा सकता है. इस लिहाज से, आपातकाल एक कड़ी चेतावनी है. लोकतंत्र के रक्षकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए."
आपातकाल के सबक भी थरूर ने गिनाए और सत्तारूढ़ मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर तंज कसा. उन्होंने कहा, सूचना की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी अहम हैं. इसके साथ ही लोकतंत्र स्वतंत्र न्यायपालिका पर निर्भर करता है, जो कार्यपालिका के अतिक्रमण के खिलाफ सुरक्षा देने में सक्षम और इच्छुक हो.
इसके अलावा उन्होंने लिखा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में सबसे ज्यादा प्रासंगिक है बहुमत समर्थित एक अहंकारी कार्यपालिका. ये लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है.
कार्यपद्धति और नैतिकता ही पहचान हो: जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं को दिया मूलमंत्र
10 Jul, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैनपाट: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट में भारतीय जनता पार्टी सत्ता और संगठन के साथ जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया. तीन दिनों तक सैद्धांतिक राजनीति, कार्य पद्धति, विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प और भारत के विकास का मूल मंत्र इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के मूल में रहा है. इसके साथ ही सरकार और संगठन के बीच समन्वय भी इस प्रशिक्षण शिविर के हिस्से रहा. इस प्रशिक्षण शिविर में जो लोग आए थे और उन्होंने कार्यकर्ताओं और सरकार को विकसित छत्तीसगढ़ के नारे को अचीव करने का संदेश दिया है. उन्होंने जो बातें छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ ही चल रही सरकार को दिया है. उसमें बदलाव के साथ बहुत कुछ बदलने की जरूरत है. जिससे विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
जेपी नड्डा ने क्या कहा ?: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत के दिन ही पार्टी और संगठन के बीच तालमेल को लेकर कई बातें कही. उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों को संगठन के साथ अधिक ताल-मेल बिठाकर काम करने की जरूरत है. जो भी बातें कही जाए वह हर हाल में पूरी होनी चाहिए .
यदि वादा करें तो उसे पूरा भी करें. छत्तीसगढ़ को आगे ले जाना है. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं चल रही है.सभी योजनाओं का लाभ नीचे तक पहुंचे इसकी पूरी कार्य योजना तैयार होनी चाहिए.छत्तीसगढ़ के गांव गांव,घर-घर तक विकास की योजनाएं पहुंचनी चाहिए. विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प भारतीय जनता पार्टी ने दिया है तो इसे हर हाल में पूरा करना है.- जेपी नड्डा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजेपी
स्वच्छ आचरण और शुचिता पर फोकस: जेपी नड्डा ने कहा कि पार्टी के वैसे लोगों को सजग रहना चाहिए साथ ही सरकार को इस पर ध्यान रखना चाहिए कि अगर ठेकेदार सरकार पर प्रभाव डालेंगे तो अगली बार बहुत कुछ बदला हुआ मिलेगा. सभी लोगों को कार्य और आचरण में सुधार लाने की भी जरूरत है.इस बात को भी तय करना है कि जिसे जो काम दिया गया है वह उसे पूरी ईमानदारी से कर रहा है अथवा नहीं कर रहा है.
"एकात्म मानववाद का संकल्प जरूरी है": प्रशिक्षण के दूसरे दिन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जनता के लिए काम करना ही सरकार का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए. शासन इसी उद्देश्य को पूरा करेगा यह संकल्प होना चाहिए. एकात्म मानवतावाद के सिद्धांत पर उन्होंने कहा कि भाजपा के संस्थापक पुरोधा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्मक का सिद्धांत दिया. जनता के लिए जो काम होता है वह अगर नहीं होगा तो फिर वह सिद्धांत मानव हित के लिए बनाए गए उद्देश्यों को पूरा नहीं करेगा. छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है.नरेंद्र मोदी का लक्ष्य देश को आगे ले जाने का है.
गरीबों के लिए चावल की व्यवस्था हो. प्रधानमंत्री आवास की व्यवस्था हो. उज्जवला गैस सिलेंडर की व्यवस्था हो.बहनों के स्वास्थ्य की व्यवस्था हो.आयुष्मान कार्ड की व्यवस्था हो, पेयजल जल जीवन मिशन की बात हो जो भी योजनाएं जनता के हित के लिए बनाई गई है वह उन तक पहुंचनी चाहिए. जो भी नेता इस काम को कर रहे हैं उनका यह नैसर्गिक दायित्व है कि हर हाल में इसका अनुपालन को सुनिश्चित हो.- शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री
"कार्य के लिए संकल्प जरूरी": शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संकल्प जरूरी है.अगर यह नहीं रहा तो लक्ष्य से भटक जाएंगे. भाजपा निर्धारित कार्य संस्कृति और कार्य पद्धति की पक्षधर है और यही वजह है इस प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है .सभी लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिससे सभी काम से जनता के हित पूरे हों. अगर ऐसा नहीं हुआ तो सरकार का स्वरूप जनहित का नहीं होगा.
"संवाद से तय हो चीजें": छत्तीसगढ़ के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन ने लोक व्यवहार और समय प्रबंधन पर बात रखी. उन्होंने कहा कि लोकप्रिय जनसेवकों ने सबसे ज्यादा इस दृष्टिकोण को अपनाया है.वह ज्यादा से ज्यादा लोगों से संवाद करें.लोगों के बीच रहे लोगों की बातें सुने और लोगों का काम करें.
जनसेवक बनने के लिए संवाद में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को अपनाना महत्वपूर्ण होता है.जनता से आत्मीय संबंध हो.उनको इस बात का भरोसा हो कि हमारे लिए काम करने वाले हमारे जनप्रतिनिधि हमारे बारे में ही सोचते हैं .जब तक यह दृष्टिकोण लोकतांत्रिक तरीके से जनता के विकास के लिए नहीं होगा.इसका समावेश लोक व्यवहार में नहीं होगा.तब तक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से एक जनसेवक जनता के बीच अपनी बड़ी पहचान नहीं बना पाएंगे.- नितिन नवीन, छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रभारी.
मुख्यमंत्री साय ने क्या कहा?: मैनपाट में प्रशिक्षण शिविर के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विकसित भारत,विकसित छत्तीसगढ़ अवसर और चुनौती विषय पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद हमसे पहले कांग्रेस की सरकार छत्तीसगढ़ में थी और उन्हें जनता के साथ जो विश्वासघात किया था.हमने उसे सुधारने का काम किया.
गरीबों के लिए जो 18 लाख मकान स्वीकृत किए गए. पिछली सरकार ने उसे नहीं किया था. हमने उसे देने का काम किया. मातृशक्ति को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के लिए हर महीने ₹1000 महतारी वंदन के तहत दिए जा रहे हैं . किसानों से धान की खरीदी रिकॉर्ड स्तर पर की गई है . साल 2047 तक का हमारा लक्ष्य है की छत्तीसगढ़ की जीडीपी को 47 लाख करोड़ ले जाया जाए और इसी के तहत हम अपना लक्ष्य निर्धारित करके काम कर रहे हैं.- विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़
समापन पर क्या कहा गया?: तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सांसद विधायक प्रशिक्षण वर्ग हर एक दृष्टि से बहुत ऐतिहासिक और बहुत महत्वपूर्ण रहा है. भारतीय जनता पार्टी के कार्य पद्धति का यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है. भारतीय जनता पार्टी एक परिवार है. तीन दिनों के प्रशिक्षण वर्ग से जो हमारी प्रतिबद्धता है, गरीब कल्याण का आम लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का, केंद्र सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ हर एक जरूरतमंद तक पहुंचे. छत्तीसगढ़ विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हो. विकसित भारत का निर्माण हो. यह प्रशिक्षण शिविर मील का पत्थर साबित होने वाला है. इसके लिए हम सब जनप्रतिनिधियों ने एक साथ एक जुट होकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ने की योजना पर काम किया है.
छत्तीसगढ़ की जो ताकत है, छत्तीसगढ़ की जो क्षमता है, उसके बाद जब से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ के आम लोगों के जीवन में परिवर्तन इसको लेकर एक बहुत ऐतिहासिक के प्रशिक्षण वर्ग रहा है. छत्तीसगढ़ को विकसित करने का संकल्प सभी लोगों ने लिया है और यही इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य रहा है.- अरुण साव, डिप्टी सीएम, छत्तीसगढ़
"सरकार तीन दिन पिकनिक मना कर आई": कांग्रेस प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा के तीन दिन के प्रशिक्षण सत्र में डेढ़ साल के भ्रष्टाचार पर मंथन हुआ. खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा और अन्य नेताओं को राज्य सरकार के भ्रष्टाचार पर नसीहत देनी पड़ी. यह प्रशिक्षण शिविर मस्ती की पाठशाला थी, जहां पर सरकारी धन पर पूरी सरकार ने मौज मस्ती और पिकनिक मनाने का काम किया है.
जिस सरगुजा संभाग में भाजपा ने यह तीन दिन का प्रशिक्षण किया.उसी सरगुजा संभाग के हसदेव और तमनार में सरकार अडानी की खदान के लिये जंगल कटवा रही है. चिंतन शिविर में इस पर मंथन करने का साहस किसी नेता ने नहीं दिखाया. मानसूनी बारिश उफान पर है, लेकिन अभी तक सोसायटियों में खाद, उर्वरक नहीं पहुंचा है.किसान परेशान है खाद नहीं मिलने पर उनकी उपज प्रभावित होगी.- दीपक बैज, पीसीसी चीफ
"सरकार घूमने और मौज मस्ती में बिजी": प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बीजेपी की सरकार पिछले साल खरीदे गये धान का निराकरण नहीं कर पाई है.भारी मानसूनी बारिश के बीच पूरे प्रदेश के संग्रहण केन्द्रों में 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खुले में पड़ा है, भीग चुका है. सरकार लापरवाह बनी हुई है. जनता त्राहिमाम कर रही है और सरकार पिकनिक मना रही है. खेती किसानी के समय खाद बीज देने के समय सरकार घूम रही है.
राजनीति के जानकारों ने क्या कहा ?: भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर के वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश भटनागर ने कहा कि संगठन और सरकार को मजबूत करने के लिए अपनी कमियों पर काम करना जरूरी है. यदि भारतीय जनता पार्टी को ऐसा लगा है कि छत्तीसगढ़ के सांसद और विधायकों को इस बात की जानकारी दी जाए कि केंद्र और राज्य सरकार किस तरीके का विकास छत्तीसगढ़ में चाहते हैं तो यह भारतीय जनता पार्टी की बड़ी पहल कही जा सकती है.
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा छत्तीसगढ़ गए और इस शिविर में उन्होंने हिस्सा लिया यह बात जरूर दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी के कार्य प्रणाली को और मजबूत करना है या जो कार्य प्रणाली है उसमें क्या परिवर्तन करना है. इसका एक खाका जरूर खिंच गया होगा. विपक्ष जिन मुद्दों को भाजपा के सामने रखता है, या जिन मुद्दों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार को घेरते है उस पर एक मंथन जरूरी है. - दुर्गेश भटनागर, वरिष्ठ पत्रकार
छत्तीसगढ़ में कुछ और नया करने की जरूरत: दुर्गेश भटनागर ने कहा कि इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में निश्चित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने यह आत्म अवलोकन किया है. बड़ा सवाल यह है कि जिस तरह से बातें बाहर निकाल कर आई है, की एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत होना चाहिए, ठेकेदारों से सरकार को दूर रहना चाहिए, साथ ही जनता के लिए जो वादा करें उसे पूरा करें. अगर इस तरह की बातें इस प्रशिक्षण शिविर में आई है तो निश्चित तौर पर केंद्रीय नेतृत्व को वरिष्ठ नेताओं को यह बातें संज्ञान में है कि छत्तीसगढ़ कुछ और भी करना है. राज्य में भारतीय जनता पार्टी को जनता ने जो जनमत दिया है उस हिसाब से पार्टी, संगठन सरकार की जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी है.
केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, नगर निकायों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, तो ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ के लिए आम जनता के हितों की बात अगर कहीं से सवालों में आती है तो निश्चित तौर पर यह सरकार की सेहत पर असर डालेगा. जनता ने जितना बड़ा जनमत भारतीय जनता पार्टी को दिया है सरकार को उतनी ही मजबूती से उसे पूरा करना होगा. साथ में यह बात जरूर सोचनी होगी कि अगर केंद्रीय नेतृत्व सरकार को ठेकेदारों से दूर रहने की नसीहत दे रही है.भारतीय जनता पार्टी के संगठन में किसी कोने से यह बात जरूर आई होगी कि कही कुछ ऐसा है.- दुर्गेश भटनागर, वरिष्ठ पत्रकार
बीजेपी में सरकार की समीक्षा के लिए टीम करती है काम: दुर्गेश भटनागर ने कहा कि जहां तक मैं भारतीय जनता पार्टी को समझ पाया हूं, यहां पर अपनी चलती हुई सरकार की समीक्षा के लिए भी उनकी एक टीम काम करती है . अगर उसकी रिपोर्ट के आधार पर यह बातें केंद्रीय नेतृत्व के नेता कह रहे हैं कि सरकार को ठेकेदार से दूर रहना चाहिए तो यह सरकार पर एक गंभीर टिप्पणी है.
अगर यह संज्ञान में बातें आई है तो कई बदलाव भी हो सकते हैं. लेकिन अगर यह सिर्फ बातें कहने के लिए कही गई है तो यह माना जा सकता है कि छत्तीसगढ़ की सरकार केंद्रीय नेताओं की नजर में बेहतर परिणाम देने का काम कर रही है. छत्तीसगढ़ और बेहतर हो यह प्रशिक्षण इस उद्देश्य की पूर्ति का मापदंड माना जा सकता है.- दुर्गेश भटनागर, वरिष्ठ पत्रकार
विपक्ष के हमलों पर राजनीतिक विश्लेषकों का मत: विपक्ष के हमलों के सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश भटनागर ने कहा कि विपक्ष की अपनी राय है. सरकार पर हमला करना उसका काम है. लेकिन अगर कोई बात जनहित और राजनीतिक नैतिकता के दायरे में है और सरकार वहां फेल होती दिख रही है तो इसपर बात करनी ही होगी. सरकार सिर्फ यह कहकर अपना पीछा नहीं छुड़ा सकती है कि उनका काम है बोलना. जनता की उम्मीदों पर भाजपा का संगठन और सरकार खड़ीउतरे उसके लिए यह प्रशिक्षण भाजपा को लिए बड़ी पहल मानी जा सकती है.
तख्तापलट से पहले हसीना की अफसर को चेतावनी? प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का ऑडियो लीक
10 Jul, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का एक अज्ञात सरकारी अफसर से बातचीत का ऑडियो लीक हो गया है। बीबीसी ने ऑडियो की पुष्टि करते हुए दावा किया है कि पिछले साल तख्तापलट से पहले पूर्व पीएम ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। फोन कॉल पर शेख हसीना ने कहा कि मैंने उन सभी को आज रात गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। सबको कह दिया गया है, जहां भी आपको वे (प्रदर्शनकारी) दिखें, उन्हें पकड़ लीजिए। मैंने अब खुला आदेश जारी कर दिया है। अब वे घातक हथियारों का उपयोग करेंगे।
वे जहां भी दिखेंगे, उनको गोली मार देंगे। बीबीसी के मुताबिक, यह ऑडियो 18 जुलाई, 2024 को ढाका में बांग्लादेशी पीएम के आवास से की गई एक फोन कॉल के दौरान रिकॉर्ड किया गया था। 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ था। हसीना का ऑडियो इस साल मार्च में लीक हुआ। बीबीसी ने पुलिस दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि इस कॉल के बाद, ढाका में मिलिट्री-ग्रेड राइफलों का इस्तेमाल किया गया। जुलाई, 2024 में बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री पर प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध का भी आरोप है।
नीति आयोग की बड़ी चूक: बिहार को बताया बंगाल, ममता बोलीं- ये अपमान है
10 Jul, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को नीति आयोग की उपाध्यक्ष को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने नाराजगी जताई कि नीति आयोग की एक आधिकारिक रिपोर्ट में बिहार को गलत तरीके से पश्चिम बंगाल के रूप में दिखाया गया है। उन्होंने इस त्रुटि की निंदा की और आयोग से तत्काल माफी व सुधार की मांग की। एक्स पर एक पोस्ट में ममता बनर्जी ने उस पत्र की एक प्रति और भारत के नक्शे का एक स्क्रीनशॉट साझा किया, जो रिपोर्ट के पहले पन्ने पर प्रकाशित हुआ था, जिसमें बिहार को पश्चिम बंगाल के रूप में दिखाया गया था।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी को लिखे पत्र में बनर्जी ने कहा, मैं गहरी चिंता और स्पष्ट अस्वीकृति के साथ यह पत्र लिख रही हूं कि नीति आयोग द्वारा प्रकाशित और उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध ‘पश्चिम बंगाल राज्य के लिए सारांश रिपोर्ट’ में जो नक्शा पश्चिम बंगाल को दर्शाने के लिए दिया गया है, उसमें पश्चिम बंगाल की जगह बिहार का क्षेत्र दिखाया गया है। मुख्यमंत्री ने इस त्रुटि को नीति आयोग की एक गंभीर चूक करार दिया।
केजरीवाल बोले- मुझे मिलना चाहिए नोबेल पुरस्कार, जानिए क्यों दिया ये बयान
10 Jul, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सुशासन के लिए उन्हे नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एलजी के रोकने के बावजूद उन्होंने जितना काम किया उसके बाद शासन और प्रशासन के लिए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सुशासन के लिए उन्हे नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एलजी के रोकने के बावजूद उन्होंने जितना काम किया उसके बाद शासन और प्रशासन के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। केजरीवाल इससे पहले अपने दो करीबी साथियों मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के लिए भारत रत्न की मांग कर चुके हैं। यह संभवत: पहली बार है जब उन्होंने खुद को इस तरह किसी पुरस्कार का हकदार बताया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता जैसमीन शाह की किताब केजरीवाल मॉडल को पंजाबी भाषा में लॉन्च किया गया। पंजाब में मोहाली के कलकट भवन में आयोजित कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने एक नौकरशाह से नेता बनने की अपनी कहानी सुनाई और दिल्ली में उनकी सरकार की ओर से किए गए कामकाज का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी सरकार में हुए कामकाज की जमकर तारीफ की। आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में मैग्सेसे पुरस्कार जीत चुके अरविंद केजरीवाल ने खुद को नोबेल पुरस्कार का भी हकदार बताया। उन्होंने कहा, ‘जितने दिन हमारी सरकार रही हमें काम नहीं करने दिया उसके बावजूद हमने काम किया। इसमें तो मुझे लगता है, गवर्नेंस के ऊपर और एडमिनिस्ट्रेशन के अंदर नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए कि एलजी के रहते हुए मैंने कितने काम कर दिए दिल्ली के अंदर। इतनी मुश्किलों के अंदर।’ केजरीवाल ने कहा कि भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह नाम काम करना चाहते हैं और ना करने देना चाहते हैं। तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल का केंद्र की ओर से नियुक्त किए जाने वाले उपराज्यपाल (एलजी) के साथ टकराव रहा। वह आरोप लगाते रहे कि उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा है।
कर्नाटक संकट के बीच डीके शिवकुमार की प्रियंका से मुलाकात, आज राहुल से मिलेंगे
10 Jul, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्नाटक के मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली में हैं। दरअसल इन दिनों दोनों नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी से राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल की अटकलों को बल दिया है। हालांकि डीके ने इन अटकलों का खंडन किया है। बुधवार को प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात करने के बाद वे गुरुवार को राहुल गांधी से भी मुलाकात करने वाले हैं।
कर्नाटक में बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनने के बारे में सवाल पर डीके ने कहा, यह अटकलें आपके मन में हैं, मेरी नजर और कानों में नहीं। डीके ने कहा, कर्नाटक में मंत्रिमंडल में फेरबदल की कोई योजना नहीं है। पार्टी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा सभी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर, डीके ने कहा, यह राज्य में पार्टी के संगठन को मजबूत करने की एक कवायद है, क्योंकि राज्य में 30-40 जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष नियुक्त होने हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कवायद को कैबिनेट फेरबदल की समीक्षा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। बता दें कि उपमुख्यमंत्री डीके गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने बुधवार सुबह 10 जनपथ पर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की है।
उधर कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सस्पेंस खत्म कर कहा था कि मैं पांच साल तक कर्नाटक का सीएम बना रहूंगा। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और यह सरकार पांच साल तक चट्टान की तरह मजबूत रहेगी। उधर, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने भी कहा कि पार्टी किसी तरह का असंतोष नहीं है।
भारत और नामीबिया का व्यापार 800 मिलियन डॉलर के पार, पीएम मोदी बोले- अभी और रन बनाने हैं
9 Jul, 2025 11:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विंडहोक (नामीबिया), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच दिवसीय विदेशी दौरे के अंतिम चरण में बुधवार को नामीबिया पहुंचे। ब्राजील यात्रा के बाद अफ्रीका की धरती पर कदम रखते ही पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय से मुलाकात की और फिर नामीबिया की संसद को संबोधित किया। अपने ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने लोकतंत्र, विकास, स्वास्थ्य, व्यापार और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को छुआ।
प्रोजेक्ट चीता के लिए नामीबिया को धन्यवाद
प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया द्वारा भारत को चीतों की सौगात देने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा, "आपकी मदद से हमारे देश में चीतों को पुनः बसाया जा सका। मुझे उन्हें कुनो नेशनल पार्क में छोड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वे वहां अच्छी तरह से ढल चुके हैं और उनकी संख्या में भी वृद्धि हुई है।"
जन औषधि योजना में नामीबिया को आमंत्रण
कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने संकट की घड़ी में अफ्रीका के साथ खड़ा होकर वैक्सीन और दवाएं भेजीं। उन्होंने नामीबिया को जन औषधि कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण देते हुए बताया कि भारत उन्नत कैंसर इलाज के लिए ‘भाभाट्रॉन’ मशीन की आपूर्ति करने को तैयार है।
UPI तकनीक अपनाने वाला पहला अफ्रीकी देश बना नामीबिया
पीएम मोदी ने नामीबिया को बधाई दी कि वह भारत की यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) तकनीक को अपनाने वाला पहला अफ्रीकी देश बना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का व्यापार 800 मिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है और इसे और तेज़ी से आगे बढ़ाने की जरूरत है।
साझा भविष्य पर केंद्रित साझेदारी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नामीबिया सिर्फ अतीत की साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक साझा भविष्य की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने नामीबिया के ‘विजन 2030’ में सहयोग का भरोसा दिलाया और बताया कि 1,700 से अधिक नामीबियाई छात्र भारतीय छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित हो चुके हैं।
संविधान की ताकत से गरीब बना प्रधानमंत्री: मोदी
नामिबियाई संसद में संविधान की ताकत का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा: “भारत का संविधान ही है, जिसने एक गरीब आदिवासी परिवार की बेटी को देश का राष्ट्रपति बनाया और मुझे, एक गरीब परिवार में जन्मे व्यक्ति को, लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया। जिसके पास कुछ भी नहीं होता, उसके पास संविधान की गारंटी होती है।”
भारत ने नामीबिया के स्वतंत्रता संग्राम में निभाई थी भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि भारत ने हमेशा नामीबिया के स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन किया। भारत के लेफ्टिनेंट जनरल दीवान प्रेम चंद ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का नेतृत्व करते हुए नामीबिया में अहम भूमिका निभाई थी।
दोस्ती की मिसाल: सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त किया मोदी ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नामीबिया सरकार की ओर से सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी मित्रता का प्रतीक बताया, जिसकी जड़ें समय के साथ और भी गहरी होती जा रही हैं।
प्रोजेक्ट चीता का दूसरा चरण जल्द
विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) दम्मू रवि ने बताया कि 2022 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट चीता अब अपने दूसरे चरण में प्रवेश करने जा रहा है। इसके तहत भारत-नामीबिया के विशेषज्ञ मिलकर भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं।
नामीबिया में पीएम मोदी को स्टैंडिंग ओवेशन
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से पहले और बाद में नामीबिया की संसद ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन देकर सम्मानित किया। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र और वैश्विक मित्रता की जीत बताया।
पीएम मोदी ने विदेशी नेताओं को राम मंदिर की प्रतिकृति और मधुबनी पेंटिंग भेंट की
9 Jul, 2025 09:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पीएम मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो के पीएम को भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक प्रतीकों के अनमोल उपहार प्रदान किए। पीएम ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो की पीएम कमला प्रसाद बिसेसर को अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर की चांदी से बनी भव्य प्रतिकृति और सरयू नदी के पवित्र जल से भरा कलश भेंट किया। ये दोनों उपहार भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर की चांदी की यह भव्य प्रतिकृति उत्तर प्रदेश के निपुण कारीगरों द्वारा तैयार की गई है, जो मंदिर की शानदार वास्तुकला और जटिल नक्काशी को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है। यह प्रतिकृति धर्म, आस्था और दिव्य शक्ति का प्रतीक है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने सरयू नदी के पावन जल से भरा एक कलश भी भेंट स्वरूप दिया, जो हिंदू परंपरा में पवित्रता, कल्याण और मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। अयोध्या से बहती सरयू नदी भगवान श्रीराम की जन्मभूमि से जुड़ी हुई है।
पीएम मोदी ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली को एक विशिष्ट और प्रतीकात्मक उपहार स्वरूप ‘चांदी का शेर’ भेंट किया। यह शेर केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि भारत की शौर्य, नेतृत्व और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। शुद्ध चांदी से निर्मित यह शेर राजस्थान की पारंपरिक धातु-कला और रत्न शिल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल को भारत की प्राचीन लोक कला मधुबनी पेंटिंग की एक सुंदर कृति उपहार में दी। बिहार के मिथिला क्षेत्र की यह परंपरा प्राकृतिक रंगों, मोटी रेखाओं और ज्यामितीय पैटर्न के जरिए अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।
ओवैसी के विवादित बयान पर संत जितेंद्रानंद का तीखा पलटवार
9 Jul, 2025 08:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बोले- अगर मुसलमान बंधक तो जहां स्वतंत्रता मिले वहां चले जाएं
वाराणसी। एआइएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि भारत के मुसलमान इस देश में बंधक की तरह रह रहे हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भूचाल ला दिया है। इस पर कई प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने ओवैसी के बयान को देशद्रोही मानसिकता वाला बताया है। उन्होंने कहा कि ओवैसी का यह बयान हिंदुस्तान में मुसलमान बंधक है, तो जहां उन्हें स्वतंत्रता मिले वहां जाना चाहिए। ओवैसी पढ़े लिखे हैं उन्हें इन प्रश्नों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां संविधान का शासन है इसलिए स्वाभाविक है कि उन्हें बंधक महसूस होगा। उन्होंने कहा कि जहां सरिया का शासन है और भारत में भी जहां सरिया परस्त सरकार है वहां पर भी मुसलमान के आर्थिक स्थिति का आकलन करना चाहिए। शेष भारत में जो मुसलमान है वह कैसे स्वतंत्रता अपने पर्व मनाते हैं।
ओवैसी ने कहा कि भारत के अल्पसंख्यक अब दूसरे दर्जे के नागरिक भी नहीं हैं। हम बंधक हैं। अगवा कर बांग्लादेश में फेंक दिया जाना क्या संरक्षण है। दरअसल, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने एक्स पर लिखा था भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों से ज्यादा सुविधाएं और सुरक्षा मिलती है। इसके जवाब में ओवैसी ने लिखा- रिजिजू भारत के मंत्री हैं, कोई सम्राट नहीं। सिंहासन नहीं संविधान के तहत पद पर बैठे हैं। अल्पसंख्यकों के अधिकार खैरात नहीं, मौलिक अधिकार हैं। हर दिन हमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, जिहादी या रोहिंग्या कहकर बुलाया जाना क्या कोई सुविधा है।
इसके बाद रिजिजू ने लिखा- ठीक है, फिर हमारे पड़ोसी देशों से अल्पसंख्यक भारत आना क्यों पसंद करते हैं। पीएम मोदी की योजनाएं सभी के लिए हैं। अल्पसंख्यक मामलों की योजनाएं ज्यादा लाभ देते हैं।
बयानबाज़ी का तूफान: ‘पटक’ वाले बयान पर उद्धव ठाकरे ने कहा– ये राजनीति नहीं, जंगलराज है
9 Jul, 2025 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र में भाषा विवाद अब और भी तीखा हो गया है। झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पटक-पटक कर मारेंगे वाले बयान पर सियासत गरमा गई है। इस बयान को लेकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी और निशिकांत दुबे पर कड़ा हमला बोला है।
उद्धव ठाकरे ने निशिकांत पर निशाना साधते हुए कहा, कि कुछ लोग लकड़बग्घे की तरह महाराष्ट्र की शांति और सौहार्द पर हमला कर रहे हैं। भाषा विवाद को उकसाकर समाज में फूट डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बीजेपी पर “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाने और राजनीतिक लाभ के लिए समाज को बांटने का आरोप लगाया।
ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि हम किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं हैं, संसद में हमारे सांसद भी हिंदी बोलते हैं। लेकिन जबरन कोई भाषा थोपे जाने के खिलाफ हमारा विरोध है।
इसी बीच उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार की आलोचना करते हुए कहा कि गैर-मराठी लोगों पर हुई घटनाओं की तुलना आतंकवादी हमले से करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और मराठी समाज का अपमान है। क्या बीजेपी नेताओं के घरों में पहलगाम के आतंकी छिपे हैं? ठाकरे ने फडणवीस द्वारा उनकी रैली को रुदाली कहे जाने पर पलटवार करते हुए कहा, यह मराठी गौरव का अपमान है। बीजेपी को रोने के लिए भी दूसरों से शब्द और लोग उधार लेने पड़ते हैं।
योगेश कदम ने भी निशिकांत को दी चेतावनी
महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री योगेश कदम ने भी निशिकांत दुबे के बयान की निंदा करते हुए कहा कि, वह चार बार के सांसद हैं, उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। ऐसे बयान सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्हें दोहराने पर कड़ी प्रतिक्रिया होगी।
क्या है मामला?
भाषा विवाद की शुरुआत तब हुई जब राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के कार्यकर्ताओं ने एक दुकानदार की पिटाई सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि उसने मराठी में जवाब नहीं दिया। इसके बाद राज ठाकरे का बयान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा, मारो लेकिन वीडियो मत बनाओ। इस पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने चुनौती देते हुए कहा था, अगर खुद को बहुत बड़ा समझते हो तो यूपी-बिहार आओ, पटक-पटक कर मारेंगे। उन्होंने एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) से उर्दू, तमिल और तेलुगु बोलने वालों पर भी कार्रवाई करने की चुनौती दी थी। इस विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है और महाराष्ट्र में भाषायी अस्मिता बनाम राष्ट्रीय एकता की बहस को हवा दे दी है।
“बिहार में पीके की एंट्री से सियासी हलचल: महागठबंधन परेशान, बीजेपी भी सतर्क”
9 Jul, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रशांत किशोर अब बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित चेहरे बन चुके हैं। उनकी पार्टी जन सुराज ने सिर्फ दो साल में ही राज्य की राजनीति में ऐसा असर डाला है कि न सिर्फ महागठबंधन परेशान है, बल्कि बीजेपी भी चिंतित है। प्रशांत की जन सुराज यात्रा ने बिहार के कोने-कोने में पहुंचकर जनता से सीधा संवाद किया और राज्य की पारंपरिक जातिगत राजनीति में नया मोड़ ला दिया। पहले जिन्हें विपक्ष बीजेपी की बी टीम कहकर खारिज करता था, आज वही जनसुराज बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी कर रही है।
बिहार की राजनीति में सालों से उपेक्षित महसूस कर रहे ब्राह्मण और भूमिहार समुदाय को पहली बार महसूस हो रहा है कि उनका कोई नेता सीएम पद की दौड़ में दावेदार बनकर उभरा है। भले ही प्रशांत किशोर बार-बार यह कहते हैं कि वह सीएम बनने की महत्वाकांक्षा नहीं रखते, लेकिन उनके समर्थक गांव-गांव में प्रचार कर रहे हैं कि प्रशांत किशोर ही राज्य का भविष्य हैं।
बीजेपी के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि वह अब तक सवर्णों के समर्थन को सुनिश्चित मानती थी लेकिन जन सुराज की बढ़ती लोकप्रियता ने यह समीकरण बिगाड़ दिया है। महज कुछ फीसदी वोटों का इधर-उधर होना भी सीटों का गणित बदल सकता है और यही कारण है कि बीजेपी के प्रत्याशी बेचैन हैं। प्रशांत ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए ब्राह्मण, राजपूत, दलित, कुर्मी फॉर्मूला अपनाया है। इस फॉर्मूले के जरिए जनसुराज ने कई समुदायों को एक मंच पर लाने की कोशिश की है।
राजपूत वोटरों को साधने के लिए पूर्व सांसद उदय सिंह (पप्पू) को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। दलित समुदाय को जोड़ने के लिए मनोज भारती को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। अति पिछड़ा वर्ग 36.01 फीसदी और मुस्लिम समुदाय 17.70फीसदी को भी रणनीति का हिस्सा बनाया है। पार्टी ने मुस्लिम समुदाय के लिए 40 विधानसभा सीटें रिजर्व कर रखी हैं और आर्थिक मदद का वादा भी किया है।
प्रशांत ने युवा वोटरों को प्रभावित करने के लिए पलायन, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर फोकस किया है। उन्होंने लोगों से यह नहीं कहा कि किसे वोट देना है, बल्कि उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि वोट क्यों देना चाहिए। उनकी कंबल पॉलिटिक्स जिसमें गरीबों को ठंड में कंबल और जरूरतमंदों को मदद दी जाती है जमीन पर लोकप्रियता बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।
तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करने वाले प्रशांत किशोर ने अब बीजेपी और पीएम मोदी को भी निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’, भारत-पाक युद्धविराम और हिंदुत्व के मुद्दों पर उनकी सीधी आलोचना ने बीजेपी को असहज कर दिया है। बीजेपी जानती है कि जब कांग्रेस या आरजेडी हिंदुत्व पर हमला करते हैं तो यह उसके लिए फायदेमंद होता है, लेकिन जब प्रशांत वही बात करते हैं, तो जनता उसे गंभीरता से लेती है। यही कारण है कि बीजेपी के लिए प्रशांत का नैरेटिव खतरनाक साबित हो सकता है।
भारत की राजनीति में यात्राओं की अहमियत को कोई नकार नहीं सकता। चाहे वह लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा हो या राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा। प्रशांत की जन सुराज यात्रा भी इसी श्रेणी में आती है। 2022 से शुरू हुई इस यात्रा ने न सिर्फ लोगों को जागरूक किया, बल्कि बिहार में एक नए विकल्प की जमीन भी तैयार कर दी है। पीके की जनसुराज पार्टी ने बिहार की जातिगत राजनीति को एक नया मोड़ दिया है। वे न केवल सवर्ण वोटरों को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि ओबीसी, दलित और मुस्लिम वर्ग में भी अपनी जगह बना रहे हैं। महागठबंधन के लिए तो खतरे की घंटी है ही, बीजेपी के लिए यह चुनौती कहीं ज्यादा गंभीर और गहरी है।
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