राजनीति
लालू का नीतीश पर हमला, अब बिहार सीधा गुजरात से ऑपरेट हो रहा
17 Jul, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। राष्टीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और पूर्व सीएम लालू यादव ने नीतीश सरकार पर सवाल उठाया है। बुधवार को उन्होंने पोस्ट किया, अब बिहार सीधा गुजरात से ऑपरेट हो रहा है। इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक फोटो भी डाली है। उसमें नीतीश को पीएम मोदी की कठपुतली बताया गया है।
वहीं बिहार की वोटर लिस्ट से 30 लाख मतदाताओं के नाम हटने पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने कहा कि मतदाता सूची से नाम काटने से पहले नोटिस मिलेगा। एक अगस्त को प्रारूप प्रकाशित होगा। इसमें सभी गणना प्रपत्र भरने वाले मतदाताओं का नाम शामिल रहेगा। इसके साथ ही एक अलग से सूची प्रकाशित की जाएगी। इसमें पहचान किए जाने वाले स्थानांतरित, दोहरे वोटर और मृत वोटरों का नाम शामिल होगा। इन दोनों सूचियों पर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया एक अगस्त से एक सितंबर तक चलेगी।
इसके बाद 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में वोटरों की कुल संख्या 7,89,69,844 है। इनमें अबतक स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित होने वाले 12 लाख वोटर की पहचान हुई है।
संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से, जोरदार हंगामे के आसार
17 Jul, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आठ विधेयकों को पेश करने की तैयारी में केंद्र सरकार
नई दिल्ली । संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस मानसून सत्र में सरकार आठ नए विधेयक पेश करेगी। इनमें मणिपुर में राष्ट्रपति शासन से जुड़ा विधेयक भी शामिल है। सरकार मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर विचार कर रही है। इससे साफ है कि सरकार की इस उत्तर पूर्वी राज्य में फिलहाल राष्ट्रपति शासन हटाने की कोई योजना नहीं है। मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। राष्ट्रपति शासन के लिए सरकार को हर छह महीने में संसद की मंजूरी लेनी होती है। फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की समयसीमा 13 अगस्त है।
बता दें कि बीते अप्रैल माह में खत्म हुए संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 18 फीसदी रही थी। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक राज्यसभा में भी भरपूर कामकाज हुआ और इस सदन की उत्पादकता 119 फीसदी रही। संसद के दोनों सदनों में 16 विधेयक पारित किए गए। इस सत्र के दौरान काफी हंगामा भी हुआ, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया गया।
ये विधेयक हो सकते हैं संसद में पेश
संसद के आगामी सत्र में सरकार मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय संस्थान प्रबंधन (संशोधन) विधेयक 2025, कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2025, भू-विरासत स्थल एवं भू-अवशेष (संरक्षण एवं रखरखाव) विधेयक 2025, खान एवं खान (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक 2025 को लोकसभा में पेश और पारित करा सकती है। साथ ही गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक 2024, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2024, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 और आयकर विधेयक 2025 को भी लोकसभा में पारित किए जाने की उम्मीद है।
राहुल गांधी ने हिमंत बिस्वा सरमा को भारत का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताया, सरमा ने कहा राहुल खुद जमानत पर
17 Jul, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद को ‘राजा समझते हैं, लेकिन राज्य की जनता भ्रष्टाचार के लिए उन्हें जेल में पहुंचा देगी। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि आपके मुख्यमंत्री में भय व्याप्त है, वह जानते हैं कि निडर कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें जेल में डाल देंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि असम का मुख्यमंत्री भारत का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री है - और, कुछ ही समय में कांग्रेस के बब्बर शेर उसे जेल पहुंचाएंगे। इसका डर उसकी आंखों में साफ दिख रहा है - क्योंकि उसे अब न मोदी बचा पाएंगे और न ही शाह!
राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस नेता यह भूल गए कि वह स्वयं देश भर में दर्ज कई आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पोस्ट में कहा, मैंने सुना है कि आप नेशनल हेराल्ड घोटाले में 5,000 करोड़ रूपये से अधिक के भारी भ्रष्टाचार के आरोपों में जमानत पर बाहर हैं। आपको भारत के सबसे भ्रष्ट कांग्रेस अध्यक्षों में एक के रूप में याद किया जाएगा। साफ कहूं तो मुझे आपकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता—क्योंकि मैं जानता हूं और देश जानता है, कि आप आज भारत के सबसे भ्रष्ट नेताओं में से एक हैं। आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग और भाजपा एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इससे पहले राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा ने मतदाता सूची संशोधन के जरिए ‘‘धांधली करके महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीता है। वे बिहार में भी यही हथकंडे अपना रहे हैं और असम में भी यही करेंगे। हमें सावधान रहना होगा।
तेजस्वी यादव का आरोप: करीबी मुकाबले वाली सीटों पर वोट काटने की चाल
16 Jul, 2025 08:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के विरोध में विरोधी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। इस बीच, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने फिर आंकड़ों के जरिए आरोप लगाया कि बीते चुनाव में कम अंतर से हार और जीत वाली सीटों पर वोट छांटने की कोशिश हो रही है।
राजद नेता तेजस्वी ने पोस्ट में कहा कि वे लोग इसतरह से लोकतंत्र को खत्म नहीं होने देने वाले है। उन्होंने लिखा, बिहार में कुल 7 करोड़ 90 लाख मतदाता हैं। कल्पना कीजिए, भाजपा के निर्देश पर अगर न्यूनतम एक प्रतिशत मतदाताओं को भी छांटा जाता है, करीब 7 लाख 90 हजार मतदाताओं के नाम कटे जा सकते है। यहां हम लोगों केवल एक प्रतिशत की बात की है, जबकि इनका इरादा इससे भी अधिक चार से पांच प्रतिशत का है। उन्होंने लिखा, अगर हम इस एक प्रतिशत, यानी 7 लाख 90 हजार मतदाताओं को 243 विधानसभा क्षेत्रों से विभाजित करते हैं, तब प्रति विधानसभा 3251 मतदाताओं का नाम कटेगा। बिहार में कुल 77,895 पोलिंग बूथ हैं और हर विधानसभा में औसतन 320 बूथ हैं। अब अगर एक बूथ से 10 वोट भी हटते हैं, तब विधानसभा के सभी बूथों से कुल 3200 मत हट जाएंगे।
राजद नेता तेजस्वी ने लिखा कि अब पिछले दो विधानसभा चुनावों के क्लोज मार्जिन से हार-जीत वाली सीटों का आंकड़ा 2015 विधानसभा चुनाव में 3000 से कम मतों से हार-जीत वाली कुल 15 सीटें थीं, जबकि 2020 में ऐसी 35 सीटें थीं। अगर 5000 से कम अंतर से हार-जीत वाली सीटों में 2015 में 32 सीटें थीं और 2020 में ऐसी कुल 52 सीटें थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के माध्यम से भाजपा का निशाना अब ऐसी हर सीट पर है। ऐसी ही सीटों के चुनिंदा बूथों, समुदायों और वर्गों के बहाने से ये लोग वोट छांटना चाहते हैं, लेकिन हम सब सतर्क हैं, हमारे कार्यकर्ता हर जगह हर घर जाकर इनकी बदनीयती का भंडाफोड़ करते रहने वाले है। हम लोकतंत्र को इसतरह से खत्म नहीं होने दे सकते है।
कांग्रेस की रणनीति बैठक में थरूर नदारद, उठे सवाल amid मोदी सरकार पर हमले की योजना
16 Jul, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। 21 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत हो रही है। विपक्ष के तेवर को देखकर लग रहा हैं कि मानसून सत्र धमाकेदार और हंगामेदार होगा। कांग्रेस ने अभी से रणनीति बना ली है। इस लेकर कांग्रेस की मंगलवार को एक अहम बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर राहुल गांधी बैठक में शामिल हुए, मगर शशि थरूर बैठक से नदारद रहे।
दरअसल संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस ने पहलगाम से लेकर बिहार वोटर लिस्ट पर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस ने फैसला किया कि 21 जुलाई से आरंभ हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान वे पहलगाम हमले के आतंकियों के बारे में अब तक पता नहीं चलने, ऑपरेशन सिंदूर को रोकने और बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान और कुछ अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।
इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में पार्टी के उपनेता प्रमोद तिवारी और महासचिव जयराम रमेश, लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक के सुरेश और सचेतक मणिकम टैगोर आदि नेताओं ने भाग लिया। मगर बैठक में शशि थरूर गायब रहे। अब सवाल है कि जब कांग्रेस की कोर टीम मोदी सरकार के खिलाफ रणनीति बना रही थी, तब शशि थरूर कहां गायब थे? इसका जवाब है कि थरूर देश से बाहर हैं। इसलिए आज 15 जुलाई की बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। पार्टी को इसकी जानकारी दे दी गई है।
बैठक के बाद राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता तिवारी ने कहा कि देश यह पूछ रहा है कि पहलगाम में 26 महिलाओं के मांग का सिंदूर उजाड़ने वाले आतंकी कहां हैं और अब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि यह भी मुद्दा है कि अमेरिका के दबाव में ऑपरेशन सिंदूर को रोका गया।
मोदी सरकार में संगठन और गवर्नमेंट में ताजगी: मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा
16 Jul, 2025 01:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली
केंद्र सरकार के गठन के लगभग एक साल बाद भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब चौतरफा बदलावों की ओर देख रहा है।संगठन ही नहीं, बल्कि सरकार में भी बदलाव की गतिविधियां तेज हो गई हैं। तमाम मीडिया सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार अब रुके हुए अहम फैसलों पर तेजी लाने जा रही है। चर्चा है कि मोदी सरकार अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल करने वाली है। इसके पीछे बीते कुछ डायन में जिस तरह की हलचलें हुईं हैं, वो बदलाव की ओर इशारा करती हैं। मसलन, चार राज्यसभा सदस्यों के मनोनयन, हरियाणा और गोवा में नए राज्यपालों और लद्दाख में उपराज्यपाल की नियुक्तियों ने मंत्रिमंडल बदलाव की चर्चा को और हवा दे दी है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कैबिनेट विस्तार 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले होगा या सत्र समाप्त होने के बाद। इस बीच, मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। हालांकि, आधिकारिक तौर पर बताया गया कि बैठक में संसद सत्र की रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें मंत्रिमंडल से संबंधित विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ होगा। सूत्रों के अनुसार, ऐसे कुछ मंत्री जो वर्तमान में एक से अधिक मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रहे हैं, उनका बोझ कम किया जा सकता है। मंत्रिपरिषद में नौ नए मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश है, क्योंकि निर्धारित सीमा के तहत अभी इतनी सीटें खाली हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल पहले 9 जून को 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद के साथ शपथ ली थी।
फेरबदल के संभावित आधार
मंत्रिमंडल में फेरबदल का मुख्य आधार परफॉर्मेंस को बताया जा रहा है. इसके अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे आगामी चुनावी राज्यों को मंत्रिपरिषद में अधिक प्रतिनिधित्व देने पर भी ज़ोर दिया जा सकता है। नए चेहरों को शामिल करके मंत्रिपरिषद को और अधिक युवा बनाने की भी तैयारी है।
किन मंत्रालयों में हो सकता है बदलाव?
सूत्रों की मानें तो आदिवासी मामले, अल्पसंख्यक मामले और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में फेरबदल की संभावना है।अन्य मंत्रालयों में राज्य मंत्री स्तर पर भी बदलाव देखे जा सकते हैं। गौरतलब है कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में सभी विभागों और मंत्रियों से उनके कामकाज का अहम प्रेजेंटेशन भी लिया था, जिसके आधार पर मंत्रियों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार की गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने की सभापति धनखड़ से मुलाकात
16 Jul, 2025 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मंगलवार को मुलाकात कर कहा कि विपक्ष सत्र को एक सार्थक रूप में देखना चाहता है। उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से मुलाकात के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स पर पोस्ट किया -विपक्ष 21 जुलाई से शुरू होने वाले राज्यसभा सत्र को एक सार्थक सत्र के रूप में देखना चाहता है। इसके लिए कई रणनीतिक, राजनीतिक, विदेश नीति और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर बहस और चर्चा जरूरी है, जो जनता के लिए चिंता का विषय है।
वहीं विपक्ष इस बार संसद के मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम आतंकी हमले, चीन के रवैये समेत कई मुद्दों पर चर्चा को लेकर अड़ा हुआ है। कहा जा रहा है कि इस बार सत्र की शुरूआत हंगामेदार होगी। वहीं मंगलवार को कांग्रेस ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के चीन के दौरे का हवाला देते हुए कहा कि पड़ोसी देश से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जरूरत है और उम्मीद है कि पीएम मोदी संसद के मानसून सत्र में इसके लिए सहमति देंगे।
नीतीश सरकार का ऐलान, अगले पांच साल में एक करोड़ युवाओं को रोज़गार
16 Jul, 2025 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार को 30 प्रमुख प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी, जिसमें अगले पाँच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोज़गार देने की योजना भी शामिल है। इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले घोषित फ़ैसले को सत्तारूढ़ एनडीए सरकार द्वारा बिहार में बढ़ती बेरोज़गारी और रोज़गार सृजन पर कथित निष्क्रियता को लेकर विपक्ष की आलोचना का जवाब देने के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
इसके पहले मुख्यमंत्री नीतिश ने पोस्ट में इसी तरह की घोषणा की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि 2005 से 2020 के बीच बिहार में आठ लाख से ज़्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियाँ दी गईं। कुमार ने कहा, अगले पाँच वर्षों (2025 से 2030) के लिए, हम एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरियाँ और रोज़गार के मौका प्रदान करके इस लक्ष्य को दोगुना करने का लक्ष्य रख रहे हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, निजी क्षेत्र, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों में, नई नौकरियाँ और रोज़गार के अवसर भी पैदा किए जाएँगे।
उन्होंने कहा, इसके लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन हो रहा है। वर्तमान में, सात निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के युवाओं को स्वरोज़गार के अवसरों से जोड़ने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अगले पाँच वर्षों में, सात निश्चय के अंतर्गत युवा कौशल विकास के लिए चल रहे कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा। कुमार ने घोषणा की कि बिहार में कौशल विकास के लिए समर्पित एक नया विश्वविद्यालय स्थापित होगा, जिसका नाम राज्य के प्रतिष्ठित नेता जननायक कर्पूरी ठाकुर के सम्मान में जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय रखा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को इसतरह के कौशल से लैस करना है जो रोज़गार के नए अवसर खोल दें।
"मान केजरीवाल की तरह, मैं भी बंधा हूं नियमों से"
16 Jul, 2025 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चड़ीगढ़। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि उन्हें भी दिल्ली से मिले निर्देशों का पालन करना पड़ता है, जैसे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को आम आदमी पार्टी (आप) के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के निर्देशों का पालन करना होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि हर पार्टी की अपनी मजबूरियां होती हैं। कटारिया ने कहा कि उनके राज्यपाल रहते हुए कभी भी मुख्यमंत्री से टकराव नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उन्होंने फाइलों पर उल्टी-सीधी बातें लिखने की परंपरा को तोड़ा है और मुख्यमंत्री मान उनका पूरा सम्मान करते हैं, और वे भी मुख्यमंत्री का सम्मान करते हैं।
पंजाब सरकार के साथ कामकाज और मतभेदों से जुड़े सवाल पर कटारिया ने कहा कि भले ही सरकार वैचारिक रूप से अलग हो, लेकिन काम उसी के साथ करना होता है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें कोई बात समझ नहीं आती, वे मुख्यमंत्री से बात करके समझने की कोशिश करते हैं।
कांग्रेस से कई नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर कटारिया ने कहा कि कांग्रेस बिखर रही है और लोग उनकी विचारधारा को पसंद नहीं करते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई अच्छे लोग भी रहे हैं, जैसे प्रणब मुखर्जी और नरसिम्हा राव, जिन्होंने देश को आर्थिक रूप से नई दिशा दी। कटारिया ने आरोप लगाया कि बाद में पार्टी में मूल्यों की जगह राजनीति प्रमुख हो गई और तुष्टीकरण के आधार पर देश को कमजोर किया गया, जिससे कांग्रेस कमजोर होती गई। उन्होंने कहा कि अच्छे लोग कांग्रेस में खुद को सहज महसूस नहीं करते थे, इसलिए वे पार्टी छोड़ गए।
राज्यपाल कटारिया ने कहा कि पंजाब में नशा और धर्मांतरण को दो बड़ी समस्याएँ है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के खिलाफ मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने अपने सीमावर्ती जिलों के दौरे का जिक्र किया, जहाँ महिलाओं ने उनसे अपने बच्चों को नशे से बचाने की गुहार लगाई थी। उनकी आँखों में दर्द और करुणा ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान शुरू किया है और खुद पैदल यात्रा में शामिल हुए, जिसे लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला।
कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र में पहलगाम हमला, बिहार में मतदाता सूची का पुनरीक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई
16 Jul, 2025 08:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा और 12 अगस्त तक चलेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी मानसून सत्र में सरकार कुछ नए बिल पेश करने की तैयारी में है. मुख्य विपक्षी पार्टी ने कांग्रेस ने भी संसद में सरकार को घेरने की रणनीति बनाने में जुट गई है.
इसी कड़ी में, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार शाम 10, जनपथ स्थित अपने आवास पर पार्टी के संसदीय रणनीति समूह के साथ बैठक की. जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में उपनेता प्रमोद तिवारी और जयराम रमेश, के. सुरेश और मणिकम टैगोर और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया.
रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने आगामी मानसून सत्र में पहलगाम आतंकी हमला, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध जैसे मुद्दों को उठाने का फैसला किया है. साथ ही कांग्रेस मानसून सत्र के दौरान किसानों की समस्याओं, बढ़ती बेरोजगारी, देश की सुरक्षा और अहमदाबाद विमान दुर्घटना के मुद्दों को भी उठाएगी.
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि पहलगाम में 26 लोग मारे गए थे और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने 22 अप्रैल के आतंकवादी हमले पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी. उन्होंने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि वे आतंकवादी कहां हैं जिन्होंने पहलगाम में 26 लोगों की हत्या की और हमारी बहनों को विधवा बना दिया? उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?"
पहलगाम हमले पर सरकार से जवाब मांगेगी कांग्रेस
तिवारी ने कहा कि पहलगाम हमले पर सरकार से जवाब मांगना कांग्रेस की पहली प्राथमिकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना इसलिए हुई क्योंकि इलाके में कोई सुरक्षा तैनात नहीं थी और कोई त्वरित प्रतिक्रिया दल भी नहीं था. उन्होंने आगे कहा कि जब पूरा देश इस हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा था. इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, लेकिन अचानक युद्धविराम की घोषणा कर दी गई.
क्या कांग्रेस प्रधानमंत्री से जवाब मांगेगी, इस सवाल पर तिवारी ने कहा, "निश्चित रूप से, जब पुरस्कार लेने की बात होती है तो प्रधानमंत्री आगे होते हैं. जब 26 कीमती जानें जा चुकी हैं, तो प्रधानमंत्री को इस पर भी जवाब देना होगा."
कांग्रेस नेता ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 बार दावा किया है कि उन्होंने युद्धविराम करवाया है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के दावों का एक बार भी खंडन नहीं किया है. उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप के 22 बार किए गए दावों पर प्रधानमंत्री मोदी की रहस्यमयी चुप्पी बेहद चौंकाने वाली है."
हमले के लिए कौन जिम्मेदार
तिवारी ने सवाल किया कि वे खूंखार आतंकवादी कहां हैं? क्या उन्हें धरती ने निगल लिया है या आसमान ने? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने कहा कि हमारी चिंता यह है कि पहलगाम में खुफिया और सुरक्षा चूक क्यों हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और नैतिक रूप से कौन जिम्मेदार है और वे आतंकवादी कहां हैं. हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की अनुमति देगी. कांग्रेस नेता ने कहा, "हम निश्चित रूप से इस बात का जवाब मांगेंगे कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई."
बिहार में मतदाता सूची के मुद्दे पर प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि इससे पहले हरियाणा और महाराष्ट्र में लोकतंत्र की 'हत्या' की गई थी और अब बिहार में जो कुछ सामने आ रहा है वह चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, "बिहार में मतदाता सूची का SIR लोकतंत्र के लिए खतरा है." उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी.
1962 के युद्ध की संसद में खुली चर्चा हो सकती है तो फिर आज क्यों नहीं?
15 Jul, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस ने की चीन के मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र में चर्चा की मांग
नई दिल्ली। चीन को लेकर कांग्रेस ने फिर केंद्र सरकार पर हमलावर बोला। कांग्रेस ने चीन के मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र में चर्चा की मांग की है। कांग्रेस ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के चीन के दौरे का हवाला देते हुए मंगलवार को कहा कि चीन से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जरूरत है और उम्मीद है कि पीएम मोदी 21 जुलाई से शुरु हो रहे संसद के मानसून सत्र में इसके लिए सहमति देंगे।
कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सवाल किया कि जब 1962 के युद्ध के समय संसद में खुली चर्चा हो सकती है तो फिर आज क्यों नहीं हो सकती? रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि सोमवार को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के साथ अपनी बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध पिछले साल अक्टूबर में कजान में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद से सुधर रहे हैं और यह भी कहा कि हमारे संबंधों का निरंतर सामान्य होना दोनों देशों के लिए लाभदायक हो सकता है।
रमेश ने कहा कि शायद विदेश मंत्री को याद दिलाना जरूरी है कि पीएम मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई पिछली मुलाकात के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में क्या-क्या घटनाक्रम हुए। रमेश ने दावा किया कि चीन ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को समर्थन दिया और पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली और जे-10सी लड़ाकू विमान, पीएल-15ई एयर-टू-एयर मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियारों के लिए टेस्टिंग ग्राउंड की तरह इस्तेमाल किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय सेना के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत ऑपरेशन सिंदूर में तीन दुश्मनों से लड़ा, जिनमें चीन भी शामिल था, जिसने पाकिस्तान को खुफिया जानकारी मुहैया कराई।
गडकरी से नाराज हुए सिद्धरमैया, सिगंदूर पुल के उद्घाटन में नहीं हो शामिल
15 Jul, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कर्नाटक के शिवमोगा में देश के दूसरे सबसे लंबे केबल-आधारित सिगंदूर पुल का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने बहिष्कार किया और दावा किया कि उन्हें इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया था।
सिद्धरमैया ने बाद में पीएम मोदी को पत्र लिखकर केंद्र पर प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में दावा किया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य सरकार से परामर्श किए बिना शिवमोगा के सागरा तालुक में कार्यक्रम आयोजित किया और बिना किसी पूर्व सूचना के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम अंकित किया गया था। इससे पहले गडकरी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि सिद्धरमैया को 11 जुलाई को कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए निमंत्रण दिया गया था। कार्यक्रम संबंधी किसी भी संभावित चुनौती को देखते हुए 12 जुलाई को एक और पत्र भेजा गया, जिसमें डिजिटल के जरिए उनकी उपस्थिति का अनुरोध किया गया था। उन्होंने सीएम को लिखे गए दोनों पत्र भी ‘एक्स’ पर पोस्ट किए हैं।
हालांकि, सिद्धरमैया ने सोमवार को एक सवाल के जवाब में कहा था कि हममें से कोई भी भाग नहीं ले रहा है, क्योंकि मुझे आमंत्रित नहीं किया गया। मैंने नितिन गडकरी से फोन पर बात की और उन्हें इस बारे में सूचित किया। उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम स्थगित कर देंगे। फिर मैंने उन्हें एक पत्र लिखा। संभवत: बीजेपी नेताओं के दबाव डालने के कारण मुझे कुछ बताए बिना वे ऐसा कर रहे हैं। मैं नहीं जा रहा हूं। मेरा इंडी में एक पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम है। कार्यक्रम एक महीने पहले से तय था, मैं वहां जा रहा हूं। उन्होंने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि विरोध स्वरूप हममें से कोई भी नहीं जा रहा है। न तो मैं, न पीडब्ल्यूडी मंत्री, न जिला प्रभारी मंत्री और न ही सागर विधायक।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें केंद्र द्वारा आमंत्रित किया जाना चाहिए था, ठीक कहा न? टकराव किसने शुरू किया है? उन्होंने ही टकराव शुरू किया है। ‘प्रोटोकॉल’ का पालन करना होगा। यह कार्यक्रम हमारे राज्य में हो रहा है, हम एक संघीय व्यवस्था में हैं। सिद्धरमैया के दावे को खारिज करते हुए गडकरी ने अपने पोस्ट में कहा कि केंद्र सरकार स्थापित ‘प्रोटोकॉल’ का पालन करती रही है और कर्नाटक सरकार और मुख्यमंत्री के योगदान और सहयोग की निरंतर सराहना करती रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सहकारी संघवाद और सभी राज्यों के साथ घनिष्ठ समन्वय के लिए प्रतिबद्ध है।
बीजेपी सांसद राघवेंद्र ने एक्स पर कहा कि 9 जुलाई को उन्होंने सीएम को पुल के उद्घाटन के लिए बेहद आदर के साथ आमंत्रित किया था। सीएम जिस तरह से सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि उन्हें निमंत्रण देर से मिला है, क्या यह उचित है? उन्होंने कहा कि शरावती नदी पर बना यह पुल छह दशकों के संघर्ष और हजारों लोगों की मेहनत का परिणाम है। इतना ही नहीं यह हजारों लोगों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि उनकी भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं।
बता दें अधिकारियों के मुताबिक सागरा तालुक में अंबरगोडलु-कलासवल्ली के बीच ‘शरावती बैकवाटर’ पर बने इस पुल का निर्माण 472 करोड़ रुपए की लागत से हुआ है। इस पुल से सागरा से सिगंदूर के आसपास के गांवों की दूरी काफी कम होने की उम्मीद है, जो चौदेश्वरी मंदिर के लिए जाना जाता है।
औवेसी के लिए सुप्रीम कोर्ट से आई राहत भरी खबर....मान्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका वापस
15 Jul, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लिए राहत भरी खबर आई है। याचिकाकर्ता ने पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका वापस ले ली है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि वह नई याचिका दाखिल कर सकता है।
यह याचिका शिवसेना (तेलंगाना विंग) के अध्यक्ष तिरुपति नरसिम्हा मुरारी की ओर से दाखिल हुई थी। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि एआईएमआईएम संविधान में निहित सेक्युलरिज्म के सिद्धांत का पालन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल एक विशेष समुदाय के हितों की बात करती है, जो कि भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है।
वकील जैन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर मैं चुनाव आयोग के पास जाकर कहूं कि मैं वेदों और पुराणों को आधार बनाकर पार्टी बनाना चाहता हूं, तब मेरा रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। फिर भी आयोग ने कैसे एआईएमआईएम को अल्पसंख्यक वर्ग के धार्मिक विचारों पर आधारित पार्टी के तौर पर मान्यता दी गई? उन्होंने कहा कि संविधान में सिर्फ माइनॉरिटी एजुकेशन इंस्टीट्यूशन के गठन का अधिकार है, राजनीतिक पार्टी बनने का अधिकारी नहीं है।
याचिका में कहा गया था कि चुनाव आयोग ने एआईएमआईएम को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता देकर संविधान के सेक्युलर ढांचे का उल्लंघन किया है। औवेसी की पार्टी का एजेंडा सांप्रदायिक और एकपक्षीय है। पार्टी का एकमात्र मकसद सिर्फ मुस्लिम समुदाय के पक्ष में काम करना है। याचिकाकर्ता का दावा था कि यह पार्टी देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के खिलाफ कार्य कर रही है।
लोकसभा में उपस्थिति दर्ज कराने के सिस्टम को लेकर कांग्रेस सांसद को आपत्ति
15 Jul, 2025 05:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में उपस्थिति दर्ज कराने के सिस्टम को लेकर कांग्रेस सांसद ने आपत्ति जाहिर की है। कांग्रेस सांसद माणिकम टैगोर ने सवाल उठाया है। सांसद ने कहा कि लोकसभा में उपस्थिति दर्ज कराने की नई प्रणाली से प्रधानमंत्री और मंत्रियों को छूट क्यों दी गई है? गौरतलब है कि लोकसभा में आगामी मानसून सत्र से सदस्यों के लिए उपस्थिति दर्ज कराने की नई व्यवस्था शुरू हो रही है। इसके तहत वे लॉबी में जाकर नहीं, बल्कि अपनी आवंटित सीट पर ही उपस्थिति दर्ज कर सकते है। गौरतलब है कि मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हस्ताक्षर करने की जरूरत नहीं है।
लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक टैगोर ने पोस्ट किया कि लोकसभा में सीट पर ही उपस्थिति दर्ज करने के लिए नया मल्टीमीडिया सिस्टम मॉनसून सत्र में प्रभावी होगा। लेकिन हमने पहले ही वक्फ विधेयक पर मत विभाजन के दौरान इस सिस्टम को विफल होते देखा है जब प्रणाली प्रामाणिक तरीके से काम नहीं कर रही थी। एक दोषपूर्ण प्रणाली को क्यों दोहराया जाए? उन्होंने सवाल किया कि अगर उपस्थिति दर्ज कराने की यह प्रक्रिया, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है, तब प्रधानमंत्री और मंत्रियों को इससे छूट क्यों?
टैगोर ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को प्रक्रिया से ऊपर होने के बजाय उदाहरण पेश करने के लिए नेतृत्व नहीं करना चाहिए? इससे पता चलेगा कि प्रधानमंत्री वास्तव में कितने दिन तक लोकसभा में मौजूद रहते हैं। उन्होंने कहाकि केवल उपस्थिति को डिजिटल बनाने के बजाए, हमें प्रणालीगत सुधारों की जरूरत है। सभी के लिए अनिवार्य उपस्थिति, पारदर्शी भागीदारी, बोलने के रिकॉर्ड और मतदान के स्वत: प्रकाशन की व्यवस्था हो। कांग्रेस सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल उपकरण उतने ही अच्छे होते हैं, जितनी उनके पीछे की मंशा।
भारत का आतंकवाद के मामले पर चीन को सख्त संदेश, कहा लागू हो ‘जीरो टॉलरेंस’की नीति
15 Jul, 2025 04:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक से ठीक चौबीस घंटे पहले यानी भारत के विदेश मंत्री डॉ.एस.जयशंकर की चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बीजिंग में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। जिसमें जयशंकर ने अपने चिर-परिचित अंदाज के साथ साफ शब्दों में चीन को आतंकवाद के खिलाफ बनी हुई भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’(शून्य सहिष्णुता) की नीति को न केवल स्पष्ट कर दिया। बल्कि ड्रैगन से भी मामले पर अपनी जैसी समान नीति को ही बनाए रखने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा हम दोनों एससीओ फॉर्मेट की विदेश मंत्रियों की बैठक में मिलेंगे। जिसका प्राथमिक मैंडेट आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ से मुकाबला करना ही है। यह मामला समूह की एक साझा चिंता भी है। इस दृष्टिकोण से भारत उम्मीद करता है कि आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति समूह में कड़ाई के साथ लागू होगी। इसके अलावा जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 2020 के मध्य में हुए एलएसी विवाद के संबंध में तनाव घटाने के लिए डी-एक्सलेशन (सीमा पर तनाव को कम करना) पर ध्यान केंद्रित पर बल दिया। दोनों के बीच वैश्विक और घरेलू मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने 14 जुलाई को एक बयान जारी कर दी। बताते चलें कि विदेश मंत्री डॉ.जयशंकर एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा पर हैं। इससे पहले उन्होंने सिंगापुर का दौरा किया था। चीन के विदेश मंत्री से पहले जयशंकर ने चीन के उप-राष्ट्रपति हान झेंग के साथ मुलाकात की थी।
आतंकवाद के बहाने चीन संग पाक को संदेश
जानकारों का मानना है कि एससीओ की बैठक से ऐन पहले आतंकवाद के मामले पर भारत का रुख साफ करने के पीछे विदेश मंत्री जयशंकर की मंशा बीते जून महीने में चीन में हुई समूह के रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद जारी किए जाने वाले संयुक्त घोषणापत्र में जानबूझकर पहलगाम आतंकी हमले की घटना को शामिल न करने की चीन-पाकिस्तान की नापाक मिलीभगत पर लगाम लगाने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है। जिससे भारत के दोनों निकट प्रतिद्वंदी देश समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले इस संबंध में जरूरी सबक हासिल कर सकें। एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई भारत की जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह पहला ऐसा मौका होगा। जब भारत, पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्री एससीओ के मंच पर एक-साथ मौजूद रहेंगे। बैठक से इतर जयशंकर की समूह के बाकी भागीदार देशों के अपने समकक्ष मंत्रियों, प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी। लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के साथ डॉ.जयशंकर की ऐसी किसी बैठक की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में पाक समर्थित टीआरएफ के आतंकियों ने कुल 26 निर्दोष नागरिकों की बड़ी ही बेरहमी से उनका धर्म पूछकर हत्या कर दी थी। जिसमें 25 भारतीय और 1 नेपाल का नागरिक शामिल था।
शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद संबंधों में सुधार
जयशंकर ने कहा कि रूस के कजान में अक्टूबर-2024 में हुई दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों (पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग) की बैठक के बाद के नौ महीने में संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हम अच्छी प्रगति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आगे भी इस गति को जस का तस बनाए रखने की जिम्मेदारी भी हमारी है। शीर्ष स्तर पर हुई बातचीत का परिणाम सीमा पर तनाव वाले इलाकों के समाधान के रूप में निकला है और अब हमें इस शांति और सौहार्द को बनाए रखना है। क्योंकि यही हमारे आपसी सामरिक विश्वास और द्विपक्षीय संबंधों के सहज विकास का मूलभूत आधार है। साथ ही इसी दौरान हमें सीमा से जुड़े अन्य विषयों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जिसमें सीमा पर तनाव घटाना (डी-एक्सलेशन) शामिल है।
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