राजनीति
उपराष्ट्रपति को दिल का इलाज: जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य को तरजीह देते हुए त्यागा पद
22 Jul, 2025 09:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जगदीप धनखड़ ने उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया है।
धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा, मैं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए और डॉक्टरों की सलाह का पालन करते हुए भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं। यह इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(क) के अनुसार है। मैं भारत की राष्ट्रपति को हार्दिक धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मुझे लगातार सहयोग और एक शांतिपूर्ण कार्य संबंध प्रदान किया। यह मेरे लिए बेहद सुखद अनुभव रहा।
उन्होंने आगे कहा, मैं माननीय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का भी आभार प्रकट करता हूं। प्रधानमंत्री का सहयोग मेरे लिए बेहद मूल्यवान रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है। धनखड़ ने कहा, मुझे माननीय सांसदों से जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला, वह मेरे लिए सदा अमूल्य रहेगा और मेरी स्मृति में अंकित रहेगा। मैं इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में मिले अमूल्य अनुभवों और ज्ञान के लिए अत्यंत आभारी हूं।
उन्होंने आगे लिखा कि इस महत्वपूर्ण कालखंड में भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और असाधारण विकास का साक्षी बनना और उसमें सहभागी होना मेरे लिए गर्व और संतोष की बात रही है। हमारे राष्ट्र के इस परिवर्तनकारी युग में सेवा करना मेरे लिए एक सच्चा सम्मान रहा है। जब मैं इस प्रतिष्ठित पद को छोड़ रहा हूं, तो मैं भारत के वैश्विक उत्थान और उसकी अद्भुत उपलब्धियों पर गर्व से भर जाता हूं, और उसके उज्ज्वल भविष्य में मेरी पूर्ण आस्था है।
इससे पहले उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि ईश्वर की कृपा रही तो वह अगस्त, 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ का पांच साल का कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त हो रहा है। पेशे से वकील धनखड़ उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे।
2022 में जगदीप धनखड़ को 14वें उप राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। 6 अगस्त 2022 को हुए उप राष्ट्रपति के चुनाव में धनखड़ ने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। धनखड़ को कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को 182 वोट मिले थे।
पहलगाम हमले पर सियासी संग्राम: खरगे के सवालों पर नड्डा का पलटवार
22 Jul, 2025 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही और पहले ही दिन जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ऑपरशन सिंदूर पर चर्चा की मांग कर रहा है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिस पर भाजपा अध्यक्ष और सदन के नेता जेपी नड्डा ने भी जोरदार जवाब दिया।
खरगे ने पहलगाम हमले के आरोपियों को लेकर पूछे कड़े सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर राज्यसभा में सवाल उठाते हुए कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी अभी तक न पकड़े गए हैं और न ही मारे गए हैं। सभी पार्टियों ने एकजुट होकर सरकार को इस मुद्दे पर समर्थन दिया, ऐसे सरकार की तरफ से हमें पहलगाम हमले पर और उसके बाद के घटनाक्रम पर हमें जानकारी दी जानी चाहिए।
सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही का लगाया आरोप
खरगे ने कहा कि पहलगाम हमले में सरकार से सुरक्षा लापरवाही हुई और ये खुद एलजी ने स्वीकार किया है। साथ ही कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भी कई खुलासे किए। ऐसे में सरकार को हमें जानकारी दी जानी चाहिए। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप 24 बार कहा कि मेरी मध्यस्थता से समझौता हुआ, तब भारत-पाकिस्तान का संघर्ष थमा। ये देश के लिए अपमानजनक है कि एक बाहर का आदमी ऐसा दावा कर रहा है।
नड्डा बोले- आजादी के बाद नहीं हुआ ऐसा ऑपरेशन
इस पर सदन के नेता और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि इस सदन के माध्यम से देश में ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि हम ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा नहीं चाहते, हम चर्चा करेंगे और इस मुद्दे पर हर बात को सदन के पटल पर रखा जाएगा। मैं ये भी कहना चाहूंगा कि देश की आजादी के बाद देश में आज तक ऐसा ऑपरेशन नहीं हुआ, जैसा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर में हुआ। सदन में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए नोटिस दिया गया है और जो भी समय तय किया जाएगा, सरकार इस पर चर्चा करेगी और हर सवाल का जवाब दिया जाएगा।
महाराष्ट्र में सियासी भूचाल के संकेत, तीन दिग्गजों की गुप्त बैठक के बाद बढ़ी हलचल
21 Jul, 2025 08:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत जल्द बड़ा उलटफेर होने वाला है। इस तरह की चर्चा के पीछे का कारण हैं राज्य के तीन दिग्गजों की गुप्ट मीटिंग होना। पहले शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करते हैं। इसके कुछ समय बाद पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की मीटिंग फडणवीस से होती है। बाद में तीनों ही नेताओं के बीकेसी यानी बांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स एक होटल में होने की खबरें आती हैं। कहा जा रहा है कि बीते विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे और सीएम की मीटिंग सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा का मुद्दा रही है।
बातचीत में अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि ये मुलाकात अचानक नहीं बल्कि पहले से तय थी। हालांकि, 20 मिनट की उस मीटिंग में क्या बात हुई, ये सिर्फ तीन ही नेता जानते हैं। क्योंकि ठाकरे और फडणवीस दोनों ने ही यह सुनिश्चित किया था कि साथ में किसी भी बड़े नेता को नहीं लाया जाए।
इसमें एक बात और है कि ये मीटिंग ऐसे समय पर हुई जब राज्य सरकार में साथ शिवसेना के नेता और विधायक शिवसेना (यूबीटी) नेताओं के जुबानी हमलों का सामना कर रहे हैं। खबर है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के नेता इस बात पर नाराज हैं कि अंबादास दानवे और अनिल परब जैसे शिवसेना (यूबीटी) के नेता शिवसेना मंत्रियों से जुड़ी फाइलों की डिटेल निकालने में कैसे सफल रहे और उनके जरिए हमले कर रहे हैं। कुछ हफ्तों पहले ही दानवे ने सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसात को उनके बेटे के होटल खरीदने के मामले में घेरा था। जबकि, परब ने शुक्रवार को ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम पर कांदिवली में अवैध डांस बार को लेकर सवाल उठाए। खास बात है कि इसका लाइसेंस कदम की मां के नाम पर है। रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे गुट के नेताओं को संदेह है कि संबंधित विभाग का अधिकारी उनके विरोधी दल को जानकारियां दे रहा है। अब सवाल है कि क्या उन घटनाक्रमों के बीच महाराष्ट्र में फिर बड़ा उलटफेर होने वाला है।
राज्य में हनीट्रैप को लेकर भी चर्चाएं हैं, जिसमें कथित तौर पर 72 राजनेता और अधिकारी घिरे हुए हैं। हालांकि, शुक्रवार को फडणवीस ने साफ किया है कि ऐसा कुछ नहीं है। इधर, कांग्रेस नेता इस मामले में जांच की बात कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने विधानसभा में पेन ड्राइव दिखाई और दावा किया कि उनके पास बड़ी जानकारी है। वहीं, विजय वडेट्टिवार का कहना है कि उनके पास फोटो और वीडियो हैं। बीएमसी यानी बृह्नमुंबई महानगर पालिका चुनाव की चर्चाएं भी हैं। मॉनसून के बाद चुनाव की अटकलों के बाद राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी भी हैं। हालांकि, अखबार से बातचीत में इस प्रक्रिया में शामिल अधिकारी बताते हैं कि मानसून के तुरंत बाद चुनाव होने की संभावनाएं कम हैं। कहा जा रहा है कि निकाय चुनाव 2 या 3 चरणों में हो सकते हैं। संभावनाएं ये भी हैं कि मुंबई, पुणे, ठाणे और नाशिक में अंत में चुनाव हों।
तेज प्रताप यादव का डिजिटल कदम: लॉन्च किया नया सोशल मीडिया पेज
21 Jul, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई पार्टी बनाने की अटकलें हुई तेज
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर ‘टीम तेज प्रताप यादव’ नाम से नया पेज लॉन्च किया है। यह पेज फेसबुक और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर बनाया गया है, जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की तस्वीरें भी साझा की हैं। तेज प्रताप ने इस पेज पर एक नारा लिखा है, जिसका कायम है प्रताप, वो है आपका अपना तेज प्रताप, और समर्थकों से इसे फॉलो करने की अपील की है। तेज प्रताप ने अपने पेज पर यह भी बताया कि उन्होंने जनता दरबार सीधी बात, सीधा समाधान के तहत राज्यवासियों की समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान के लिए कार्रवाई की। इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में तेज प्रताप की नई पार्टी बनाने की चर्चा शुरू हो गई है, हालांकि उन्होंने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, तेज प्रताप के राजनीतिक करियर में हाल ही में विवाद भी हुआ था। उन्होंने सोशल मीडिया पर अनुष्का नाम की एक लड़की के साथ तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें दावा था कि वे 12 साल से रिश्ते में हैं। इस पर राजद सुप्रीमो लालू यादव ने उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने पोस्ट डिलीट कर दी थी, लेकिन वायरल तस्वीरों ने विवाद को हवा दी। इसके चलते लालू प्रसाद ने तेज प्रताप से पारिवारिक संबंध भी तोड़ने का फैसला किया। राजद ने तेज प्रताप के निष्कासन का पत्र बिहार विधानसभा को अभी तक औपचारिक रूप से नहीं भेजा है। इसलिए, आगामी विधानसभा मानसून सत्र में तेज प्रताप यादव के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव के साथ बैठने की संभावना बनी हुई है। इस बीच, तेज प्रताप की राजनीतिक सक्रियता और नए पेज ने उनकी आगामी योजनाओं को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
विपक्ष का दबाव तेज: लोकसभा अध्यक्ष लेंगे काम रोको प्रस्ताव पर फैसला?
21 Jul, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संसद में कभी भी काम रोको प्रस्ताव पर सरकार ने चर्चा नहीं हुई।पिछले 11 वर्षों में बड़ी-बड़ी घटनाएं हुई हैं। जब भी विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव पेश करता है। उसे लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति, खारिज कर देते हैं। जिसके कारण विपक्ष और आसंदी के बीच सत्र के दौरान तनाव बना रहता है। पहलगाम की घटना के बाद विपक्ष संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रही थी। सरकार ने संसद का विशेष सत्र नहीं बुलाया। मणिपुर की घटना को लेकर भी विपक्ष काम रोको प्रस्ताव लाया था। सरकार ने उसे भी स्वीकार नहीं किया था।
संसद में बिजनेस कमेटी कभी भी काम रोको प्रस्ताव पर सहमत नहीं होगी। संसद की बिजनेस कमेटी में सत्ता पक्ष का बहुमत होता है। किसी भी गंभीर विषय पर सरकार काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा क्यों नहीं कराती है। इसके क्या कारण हो सकते हैं?
नियमों के अनुसार काम रोको प्रस्ताव तभी स्वीकार किया जा सकता है।जब मामला अत्यंत गंभीर तात्कालिक और सार्वजनिक महत्व का हो। जहां सरकार की विफलता हो, काम रोको प्रस्ताव नियम 56-60 के अंतर्गत लाया जाता है। इसमें कड़ी शर्तों का प्रावधान है। अध्यक्ष को अधिकार होता है, वह अपने स्तर पर इसे अस्वीकार कर सकता है। काम रोको प्रस्ताव स्वीकार नहीं करने दशा मे सभापति यह सुझाव देते हैं। इस नियम से अलग सदन में चर्चा करने का मौका विपक्ष को दिया जाएगा। इससे सरकार को सहायता मिलती है।वह जो भी जवाब देना चाहे या ना देना चाहे, सामान्य प्रक्रिया के तहत एक निश्चित समय का आवंटन कर सदन में चर्चा होती। इसमें विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलता है। ना ही इस मतदान हो सकता है। काम रोको प्रस्ताव सरकार के लिए दो धारी तलवार की तरह होता है। इसमें सरकार गिर भी सकती है। वहीं सरकार को विपक्ष के सारे सवालों का जवाब देना होता है।
सरकार ने विशेष सत्र बुलाने की मांग को इसलिए अस्वीकार किया था। केवल उसी मुद्दे पर सदन में चर्चा होती, जिसके लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार को जवाब देना मुश्किल हो सकता था। इसलिए संसद सत्र की अधिसूचना पहले 8-10 दिन पहले जारी होती थी। इस बार काफी समय पहले मानसून सत्र की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसको देखते हुए स्पष्ट है, सरकार और सभापति विपक्ष के काम रोको प्रस्ताव मान्य नहीं करेंगे। जिसके कारण संसद का मानसून सत्र काफी हंगामेदार होगा। संसद की कार्रवाई हो हल्ले और हंगामा की भेंट मानसून सत्र चढ़ेगा। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।
उद्धव ठाकरे का बेबाक बयान: “राज हमारे साथ आएं, इससे परेशानी किसे?”
21 Jul, 2025 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे बंधुओं का मेल सुर्खियों में है। करीब दो दशकों तक अलग राहों पर चले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, अब साथ आते दिख रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक बातचीत में राज ठाकरे के साथ संभावित गठबंधन और राजनीतिक समीकरणों को लेकर खुलकर बात की।
बातचीत के दौरान उद्धव ने दो टूक सवाल किया, हमारे साथ आने से किसे दिक्कत है? यह सवाल पूछकर उद्धव ने सीधे तौर पर उन राजनीतिक हलकों पर निशाना साधा, जो ठाकरे भाइयों के पुनर्मिलन से असहज महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को इस मिलन से “पेट में दर्द” हो रहा है, तो यह उनकी समस्या है, वह इसे नजरअंदाज करते हैं। उद्धव ने बताया कि राज ठाकरे के साथ दोबारा जुड़ने से मराठी समाज ही नहीं, बल्कि मुस्लिम, गुजराती और हिंदी भाषी समुदायों ने भी खुशी जताई है। उन्होंने इसे छोटी बात नहीं, बहुत बड़ी बात बताया और कहा कि यह सांस्कृतिक और सामाजिक एकता की ओर एक मजबूत संकेत है।
राजनीति नहीं, अस्मिता पहले
उन्होंने कहा कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता और सांस्कृतिक एकजुटता है। उन्होंने साफ किया कि वो महाराष्ट्र और मराठी लोगों के हितों के लिए जो जरूरी होगा, वह करेंगे।
महाविकास अघाड़ी और मनसे समीकरण
मनसे के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवालों पर उद्धव ने कहा कि कांग्रेस और अन्य घटक दलों को स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र फैसले लेने का अधिकार है। उन्होंने माना कि मुंबई की राजनीति महाराष्ट्र से अलग नहीं है और हर नगर निकाय अपने स्तर पर निर्णय लेगा।
क्या बदलेगा समीकरण?
राज और उद्धव का साथ आना, न केवल मुंबई महानगरपालिका चुनावों पर असर डालेगा, बल्कि महाविकास अघाड़ी के भीतर समीकरणों को भी झटका दे सकता है। आने वाले दिनों में यह गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में नए ध्रुवीकरण की नींव रख सकता है।
आप विधायक अनमोल गगन ने वापस लिया इस्तीफा, सियासी अटकलों पर विराम
21 Jul, 2025 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । पंजाब के खरड़ से आम आदमी पार्टी की विधायक अनमोल गगन मान ने बतौर विधायक इस्तीफा वापिस ले लिया है। पार्टी के पंजाब अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने आज उनसे मुलाकात की जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा वापिस लेने का फैसला लिया है। दरअसल, को उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही उन्होंने राजनीति छोड़ने का ऐलान किया था। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष अमन अरोड़ा के मुताबिक पार्टी ने उनका इस्तीफा नामंजूर किया जिसे विधायक ने स्वीकार किया है और वे पार्टी के लिए काम करती रहेंगी। अमन अरोड़ा ने एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात पारिवारिक माहौल में हुई और उन्होंने पार्टी द्वारा उनके इस्तीफे को अस्वीकार करने के फैसले को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि वे पार्टी और क्षेत्र की प्रगति के लिए काम करते रहेंगे और अनमोल अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी परिवार का हिस्सा रही हैं और रहेंगी।
कांग्रेस में अंदरूनी टकराव, सिद्दारमैया की नाराज़गी से मंच से लौटे डीके शिवकुमार
21 Jul, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह सतह पर आ गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की कथित खींचतान मंगलुरु में आयोजित साधना समवेश कार्यक्रम में सार्वजनिक हो गई। मंच पर सिद्दारमैया, शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन तभी जब एक कांग्रेस नेता ने सिद्दारमैया से शिवकुमार का ज़िक्र करने को कहा, तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी— डीके शिवकुमार यहां नहीं हैं, वे बेंगलुरु चले गए हैं, हम केवल मौजूद लोगों का स्वागत कर सकते हैं।
हैरानी की बात यह रही कि शिवकुमार कार्यक्रम में कुछ समय पहले तक मौजूद थे और अपना भाषण देने के बाद किसी आपात स्थिति का हवाला देते हुए बेंगलुरु लौट गए। इस घटनाक्रम ने दोनों नेताओं के बीच गहराते मतभेदों और सत्ता संघर्ष की चर्चाओं को फिर से तेज कर दिया है। यहां बताते चलें कि 2023 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम तथा पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि दोनों नेताओं के बीच सत्ता साझा करने का एक अनौपचारिक समझौता हुआ है, जिसके तहत ढाई साल बाद शिवकुमार को सीएम पद सौंपा जा सकता है। यह समझौता कभी आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुआ, लेकिन शिवकुमार के समर्थकों की बयानबाज़ी से यह साफ होता जा रहा है कि असंतोष बढ़ रहा है।
भाजपा ने साधा निशाना तो कांग्रेस ने बताया गलतफहमी
विपक्षी दल भाजपा ने इस घटना को लेकर कांग्रेस की आंतरिक अस्थिरता का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे महज गलतफहमी बता कर पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी हाईकमान मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने फिलहाल इस विवाद पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही नेताओं के बीच एक सुलह बैठक आयोजित की जा सकती है।
शशि थरूर का बड़ा बयान: "पहली वफादारी देश के लिए है, पार्टी के लिए नहीं"
21 Jul, 2025 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने कहा कि किसी भी नेता की पहली वफादारी देश के प्रति होनी चाहिए, पार्टी के प्रति नहीं। थरूर कोच्चि में शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय विकास पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
थरूर ने कहा कि पार्टियां सिर्फ एक रास्ता हैं, देश को बेहतर बनाने का जरिया हैं। अगर देश ही नहीं बचेगा, तो पार्टियों का क्या फायदा? इसलिए जब देश की सुरक्षा का सवाल हो, तब सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम कहते हैं कि देश के लिए दूसरे दलों से मिलकर काम करना चाहिए, तो कुछ लोग इसे पार्टी से गद्दारी समझ लेते हैं। यही सबसे बड़ी दिक्कत है। राजनीति में मुकाबला चलता रहता है, लेकिन मुश्किल वक्त में सभी को एकजुट होना चाहिए। थरूर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की तारीफ की थी और ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार व सेना का समर्थन किया था। इसके बाद कांग्रेस पार्टी में उनके बयान को लेकर नाराजगी दिखी थी।
सियासी हलचल तेज: आदित्य ठाकरे ने की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात
21 Jul, 2025 09:04 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
3 दिन पहले सीएम ने उद्धव से मुलाकात की थी
मुंबई । शिवसेना (यूबीटी) नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने शनिवार शाम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार, दोनों अलग-अलग कार्यक्रम के लिए 3 घंटे मुंबई के सोफिटेल होटल में थे। इस दौरान दोनों की करीब 1 घंटे तक बातचीत हुई।
हालांकि, दोनों नेताओं ने किसी भी मीटिंग से इनकार किया है। सीएम ऑफिस के अनुसार मुख्यमंत्री होटल में मौजूद थे, लेकिन आदित्य ठाकरे से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई। सीएम किसी और कार्यक्रम के लिए होटल में आए थे, जबकि आदित्य डिनर के लिए अपने दोस्तों के साथ होटल में मौजूद थे। इससे पहले 17 जुलाई को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे सीएम देवेंद्र फडणवीस से मिले थे। यह मुलाकात विधान परिषद अध्यक्ष राम शिंदे के कमरे में हुई थी। करीब आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में वर्ली विधायक आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। दरअसल, यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब देवेंद्र फडणवीस ने 16 जुलाई को विधान परिषद में हल्के-फुल्के अंदाज में उद्धव ठाकरे को साथ आने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे से कहा था- भाजपा उनके साथ विपक्ष में शामिल होने की संभावना नहीं रखती, लेकिन वह सत्ता पक्ष में आ सकते हैं।
दो दिवसीय यात्रा पर पीएम मोदी जाएंगे ब्रिटेन, दोनों व्यापार समझौता करेंगे बात
20 Jul, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के इस माह ब्रिटेन जा सकते हैं। उनके 23-24 जुलाई को यूके जाने की संभावना है। पीएम मोदी की इस यात्रा में भारत और यूके के बीच व्यापार समझौता हो सकता है। दोनों देश सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात कर सकते हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब टैरिफ को लेकर अमेरिका और खासकर ट्रंप लगातार धमकाने में लगे हैं, तो पीएम मोदी की ब्रिटेन यात्रा की अहमियत और बढ़ जाती है।
मई में भारत और यूके आपस में एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए थे। इससे भारत के 99 फीसदी निर्यात पर लगने वाले टैक्स कम हो जाएंगे। वहीं यूके की कंपनियां आसानी से व्हिसकी, कारें और अन्य सामान भारत में बेच सकेंगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस समझौते को लागू होने में करीब एक साल लग सकता है। पीएम मोदी ने इन समझौतों को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया था।
पीएम मोदी का यह ब्रिटेन दौरा उस समय होने वाला है, जब ट्रंप और नाटो चीफ मार्क रुटे ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत को धमकाने और 100 फीसदी द्वितीय प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नाटो प्रमुख से कहा है कि भारत को अपनी प्राथमिकता पता है और वह पहले अपनी जरुरतों पर ही ध्यान देगा। इस वजह से अगर ऐसे समय में पीएम मोदी ब्रिटेन जा रहे हैं तो यह और भी अहम है, क्योंकि वह अमेरिका का भी पुराना सहयोगी है और नाटो का भी एक अहम किरदार है।
ब्रिटेन से पीएम मोदी 25-26 जुलाई को मालदीव जाएंगे। वहां वह राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। मालदीव में उनका दौरा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा। भारत और मालदीव के बीच दोस्ती हमेशा से मजबूत रही है। यह दौरा इस दोस्ती को और भी गहरा करेगा। पीएम मोदी का मालदीव जाना चीन की वजह से बहुत खास है। पिछले कुछ समय में चीन ने भारत के इस सबसे करीबी पड़ोसी पर संदिग्ध नजर डालने की कोशिश की थी। ऐसे में पीएम मोदी का खुद वहां के राष्ट्रीय दिवस पर मौजूद रहना, ड्रैगन को भी सीधा संदेश हो सकता है।
राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, मेक इन इंडिया’ के नाम पर हम सिर्फ असेंबली कर रहे
20 Jul, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत को असेंबली लाइन से आगे निकलकर एक सच्ची विनिर्माण शक्ति बनाने के लिए ज़मीनी स्तर पर बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर देकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि मेक इन इंडिया के नाम पर भारत सिर्फ उत्पादों की असेंबली कर रहा है, उनका सही मायने में निर्माण नहीं किया जा रहा है। राहुल गांधी ने पोस्ट में कहा कि भारत में बनने वाले ज़्यादातर टीवी के 80 प्रतिशत कलपुर्जे चीन से आते हैं। उन्होंने बताया कि नीति और समर्थन की कमी, भारी कर और निगमों का एकाधिकार, उन छोटे उद्यमियों को रोक रहे हैं जो विनिर्माण करना चाहते हैं। राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर सवाल उठाकर कहा कि मेक इन इंडिया’ के नाम पर हम सिर्फ असेंबली कर रहे हैं, असली मैन्युफैक्चरिंग नहीं। आईफोन से लेकर टीवी तक के पुर्ज़े विदेश से आते हैं, हम बस जोड़ते हैं। छोटे उद्यमी निर्माण करना चाहते हैं, लेकिन न नीति है, न सपोर्ट। उल्टा, भारी टैक्स और चुने हुए कॉरपोरेट्स का एकाधिकार, जो कि देश के उद्योग को जकड़ रखा है। जब तक भारत उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बनता, रोज़गार, विकास और मेक इन इंडिया की बातें सिर्फ भाषण रहेंगी। ज़मीनी बदलाव चाहिए ताकि भारत असेंबली लाइन से निकलकर असली मैन्युफैक्चरिंग पावर बने और चीन को बराबरी की टक्कर दे सके। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान, राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार की मेक इन इंडिया पहल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को पुनर्जीवित करने में विफल रही है, जो 2014 में सकल घरेलू उत्पाद के 15.3 प्रतिशत से घटकर 12.6 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले 60 वर्षों में सबसे कम है। उन्होंने कहा था कि चीन बीते 10 वर्षों से बैटरी, रोबोट, मोटर और ऑप्टिक्स पर काम कर रहा है और इस क्षेत्र में वह भारत से कम से कम दस वर्षों की बढ़त बनाए हुए है।
सीएम सरमा ने ममता को दिखाया आईना, हम सीमा पार से जारी, अनियंत्रित मुस्लिम घुसपैठ को रोक रहे
20 Jul, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा असम भाजपा की भाषाई राजनीति की आलोचना करने के बाद, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने लिखा कि दीदी, मैं आपको याद दिला दूँ असम में, हम अपने ही लोगों से नहीं लड़ रहे हैं। बल्कि हम सीमा पार से जारी, अनियंत्रित मुस्लिम घुसपैठ का निडरता से विरोध कर रहे हैं, जिसने पहले ही भयावह जनसांख्यिकीय बदलाव का कारण बना हुआ है। कई ज़िलों में, हिंदू अब अपनी ही जमीन पर अल्पसंख्यक बनने के कगार पर हैं।
सीएम सरमा ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कहानी नहीं है, बल्कि एक कूट सत्य है। यहाँ तक कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी ऐसी घुसपैठ को बाहरी आक्रमण बताया है। और फिर भी, जब हम अपनी ज़मीन, संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए उठ खड़े होते हैं, तब आप उसका राजनीतिकरण करना पसंद करते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि हम लोगों को भाषा या धर्म के आधार पर नहीं बाँटते। असमिया, बांग्ला, बोडो, हिंदी—सभी भाषाएँ और समुदाय यहाँ सह-अस्तित्व में रहे हैं। लेकिन कोई भी सभ्यता जीवित नहीं रह सकती अगर वह अपनी सीमाओं और अपनी सांस्कृतिक नींव की रक्षा करने से इंकार कर दे।
सरमा ने कहा कि जबकि हम असम की पहचान को बनाए रखने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं, आपने, दीदी, बंगाल के भविष्य के साथ समझौता किया है, एक खास समुदाय द्वारा अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा देना, वोट बैंक के लिए एक धार्मिक समुदाय का तुष्टिकरण करना, और सीमा पर घुसपैठ के बावजूद राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुँचाने पर चुप रहना, यह सब सिर्फ आप सत्ता में बने रहने के लिए कर रही है। असम अपनी विरासत, अपनी गरिमा और अपने लोगों की रक्षा के लिए साहस और संवैधानिक स्पष्टता के साथ लड़ता रहेगा।
नीतीश की फ्री बिजली पर यूपी के ऊर्जा मंत्री का तंज- ना बिजली आएगी, ना बिल आएगा...
20 Jul, 2025 10:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मथुरा। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री एके शर्मा ने बिहार में मुफ्त बिजली की घोषणा पर हकीकत बयान करने जैसा तंज कसा है। ऊर्जा मंत्री शर्मा ने कहा कि बिहार में बिजली मुफ्त है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब बिजली सप्लाई होगी।
इसी के साथ यूपी के ऊर्जा मंत्री शर्मा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्लान को घेरे में लेते हुए तंज करते हुए कहा, ना बिजली आएगी और ना ही बिल आएगा... फ्री हो गई बिजली। हम बिजली दे रहे हैं। यहां बताते चलें कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सीएम नीतीश कुमार द्वारा 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा के संदर्भ में आया है।
यहां मंत्री शर्मा ने बयान दिया वहां राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया। दरअसल बिहार में नीतीश सरकार भाजपा के समर्थन से चल रही है और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में घोषणा की थी कि 1 अगस्त 2025 से सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाएगी। वैसे तो सीएम की इस घोषणा को चुनावी वादे के तौर पर ही देखा जा रहा है, लेकिन यूपी के मंत्री शर्मा के बयान ने इस पर न सिर्फ सवाल खड़े कर दिए, बल्कि लोग तो यही कह रहे हैं कि उन्होंने हकीकत बयान कर दिया है। आखिर उत्तर प्रदेश में भी तो भाजपा की ही योगी सरकार है, जिसके कि शर्मा ऊर्जा मंत्री हैं। उनसे ज्यादा सरकार के बयानों की हकीकत कौन जान सकता है। ऐसे में कहा यही जा रहा है कि मंत्री शर्मा के बयान से स्पष्ट हो रहा है कि बिहार में मुफ्त बिजली की घोषणा को लेकर यूपी सरकार आशंकित है और इसे व्यवहारिक रूप से लागू करने की संभावनाओं पर संदेह जताया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि बिहार की तर्ज पर यूपी में बिजली फ्री करने की मांग उठे उससे पहले ही मंत्री ने अपने बयान से स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि जहां बिजली जलेगी वहां तो बिल आएगा ही आएगा। बहरहाल मामला जो भी हो इस चुनावी बेला में राजनीतिक गलियारा तो गरमाने का काम हो ही गया।
‘इंडिया’ गठबंधन की ऑनलाइन बैठक, जानें संसद सत्र के दौरान सरकार को घेरने की रणनीति
20 Jul, 2025 09:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने शनिवार को संसद के आगामी मानसून सत्र के लिए प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में 24 राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य शामिल थे। यह गठबंधन की कई हफ्तों बाद पहली समन्वित बैठक थी, जिसका उद्देश्य सोमवार से शुरू होने वाले सत्र के लिए एकजुटता का संदेश देना था।
इस ऑनलाइन मीटिंग में कांग्रेस, डीएमके, राजद, सपा, एनसीपी-एसपी, शिवसेना (यूबीटी), झामुमो, माकपा, भाकपा, भाकपा-माले, फॉरवर्ड ब्लॉक, आईयूएमएल और केरल कांग्रेस समेत 24 पार्टियों ने हिस्सा लिया। बैठक में कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई जिनमें बिहार में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन, पहलगाम में हालिया आतंकी हमला और विवादास्पद ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं। इसके अलावा, विपक्षी नेता ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के दावे और जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की मांग संग कई मुद्दे उठाएंगे। कांग्रेस ने संसद में जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य बनाने, महिलाओं पर अत्याचार, बेरोजगारी, किसानों की परेशानी, देश की सुरक्षा और अहमदाबाद एयर प्लेन क्रैश जैसे मुद्दे भी रखने की बात कही है।
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