राजनीति
मॉनसून सत्र 2025 से पहले आज सर्वदलीय बैठक, किरेन रिजिजू करेंगे अध्यक्षता
20 Jul, 2025 08:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मॉनसून सत्र 2025 की शुरुआत सोमवार 21 जुलाई 2025 से हो रहा है, जो 21 अगस्त तक जारी रहेगा. इससे पहले आज रविवार 20 जुलाई को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू संसद करेंगे. जानकारी के मुताबिक यह बैठक यह संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में सुबह 11 बजे होगी.
बता दें, मॉनसून सत्र 2025 से पहले इस सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य सिर्फ दोनों सदनों को सुचारु रूप से चलाना और राजनीतिक दलों के बीच सहयोग और समन्वय को बनाना है. संसद में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सदन नेताओं को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. इस बैठक के दौरान, केंद्र सरकार अपना विधायी एजेंडा प्रस्तुत करेगी और सत्र में चर्चा के लिए प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी. इस बार मानसून सत्र 2025 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा और इसमें 21 बैठकें होंगी. वहीं, 12 अगस्त से 18 अगस्त के बीच कोई बैठक निर्धारित नहीं की गई है.
इससे पहले मीडिया को संबोधित करते हुए, मंत्री रिजिजू ने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों और लंबित विधेयकों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि संसद शुरू होने वाली है. संसद में जो भी मुद्दा आएगा, हम उसे सुनेंगे. इससे पहले शनिवार को खड़गे और राहुल जी के साथ मेरी बहुत अच्छी बैठक हुई.
उन्होंने कहा कि मैं अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ नियमित बैठकें करता रहता हूं. एक संसदीय मंत्री होने के नाते, सभी के साथ समन्वय बनाए रखना मेरी जिम्मेदारी है. इस सत्र के दौरान जिन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होने की संभावना है, उनमें जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 और मर्चेंट शिपिंग विधेयक, 2024 शामिल हैं. कुल मिलाकर, सात लंबित विधेयकों को विचार और पारित होने के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जबकि आठ विधेयकों को चर्चा के लिए बहाल करने का प्रस्ताव है.
खड़गे का मोदी पर निशाना- 'विदेश घूमने का वक्त है, मणिपुर जाने का नहीं'
19 Jul, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूरु में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने मणिपुर की हिंसा पर पीएम मोदी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया और कहा, 'प्रधानमंत्री 42 देशों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन मणिपुर एक बार भी नहीं गए.' मणिपुर में एक साल से अधिक समय से जातीय हिंसा और अस्थिरता बनी हुई है, जिस पर केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है.
मणिपुर हिंसा पर मोदी को घेरा
खरगे ने कहा कि देश का पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर एक साल से ज्यादा समय से हिंसा से जूझ रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने वहां जाकर लोगों का दुख बांटना जरूरी नहीं समझा. उन्होंने कहा, '42 देशों में घूम आए, मगर मणिपुर जाना जरूरी नहीं समझा. क्या मणिपुर भारत का हिस्सा नहीं है?'
संविधान बदलने की कोशिश का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी और आरएसएस पर संविधान बदलने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, 'बीजेपी और आरएसएस संविधान को बदलना चाहते हैं, लेकिन देश की जनता उन्हें ऐसा करने नहीं देगी.' उन्होंने लोगों से संविधान की रक्षा के लिए सजग रहने की अपील भी की.
कांग्रेस बनाम बीजेपी: काम और बातों का फर्क
खरगे ने कांग्रेस और बीजेपी की तुलना करते हुए कहा, 'कांग्रेस पार्टी में लोग काम करते हैं, जबकि मोदी की बीजेपी में लोग सिर्फ बातें करते हैं.' उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी है और विकास को केंद्र में रखा है.
कर्नाटक सरकार पर लगे आरोपों का खंडन
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर वित्तीय संकट के आरोपों का जवाब देते हुए खरगे ने कहा, 'बीजेपी कहती है कि कर्नाटक सरकार कंगाल हो गई है, लेकिन यह सरासर गलत है.'
उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया सरकार राज्य को बेहतर दिशा में ले जा रही है और बीजेपी का यह आरोप बेबुनियाद है.
महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी गर्मी, NCP के दो गुटों के विलय पर विराम
19 Jul, 2025 03:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
NCP के विलय की अटकलों पर विराम, सुनील तटकरे ने दी सफाई: “कोई बातचीत नहीं चल रही”
मुंबई।
महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और अजित पवार के संभावित सुलह की अटकलों पर विराम लग गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रदेश अध्यक्ष और अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया है कि दोनों गुटों के बीच किसी भी तरह की विलय या सुलह की बातचीत नहीं चल रही है।
हाल ही में ठाकरे भाइयों के पुनः एक मंच पर आने के बाद पवार परिवार के पुनर्मिलन की अटकलें तेज हो गई थीं। राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे थे कि चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार भी फिर से साथ आ सकते हैं। लेकिन अब तटकरे ने इन अटकलों को खारिज कर माहौल स्पष्ट कर दिया है।
“हम एनडीए (महायुति) में हैं और वहीं रहेंगे। अगर कोई गंभीर मुद्दा होगा, तो बीजेपी नेतृत्व से बात कर तय किया जाएगा। अभी किसी प्रकार की चर्चा नहीं हो रही है,” - सुनील तटकरे, प्रदेश अध्यक्ष, NCP (अजित पवार गुट)
राजनीतिक और पारिवारिक मुलाकातों को न दें सियासी रंग
शरद पवार और अजित पवार समय-समय पर पारिवारिक आयोजनों या कुछ राजनीतिक मंचों पर एकसाथ देखे जाते रहे हैं। हालांकि, इन मुलाकातों को लेकर अक्सर सुलह की चर्चाएं चलती रही हैं, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एकीकरण की संभावना बहुत कम मानी जा रही है।
दो साल पहले टूटा था साथ, अजित पवार ने बनाई दूरी
शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी बनाई थी। लंबे समय तक दोनों नेता एक साथ रहे। लेकिन जुलाई 2023 में अजित पवार ने बीजेपी का दामन थामते हुए महायुति में शामिल होने का फैसला लिया, जिससे पार्टी में विभाजन हो गया। चुनाव आयोग ने बाद में अजित पवार के गुट को ही "असली एनसीपी" के रूप में मान्यता दी थी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार, पवार परिवार के पुनर्मिलन की संभावना न के बराबर है। एनडीए में रहते हुए अजित पवार की रणनीति अलग है, जबकि शरद पवार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के एक अहम स्तंभ बने हुए हैं।
21 जुलाई को पटना में आजाद समाज पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन, तय होगी चुनावी रणनीति
19 Jul, 2025 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार चुनाव में आजाद समाज पार्टी की एंट्री, 100 सीटों पर लड़ेगी चुनाव
पटना –
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जहां अब तक मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और इंडिया गठबंधन के बीच माना जा रहा था, वहीं अब बाहरी दल भी मैदान में उतरने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी कांशीराम ने भी बिहार चुनाव में उतरने का ऐलान किया है।
100 सीटों पर चुनाव की तैयारी, 60 पर प्रभारी नियुक्त
बुधवार को पटना में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जौहर आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि आजाद समाज पार्टी बिहार की 100 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इनमें से 60 सीटों पर प्रभारी पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं और बाकी पर तैयारी अंतिम चरण में है।
46 सीटों पर महागठबंधन को सीधी चुनौती
पार्टी का दावा है कि जिन 100 सीटों पर वह चुनाव लड़ेगी, उनमें से 46 सीटों पर सीधा मुकाबला महागठबंधन से होगा। जौहर आजाद ने आरोप लगाया कि महागठबंधन सभी वर्गों को साथ लेकर नहीं चल रहा है, जिससे जनता में असंतोष है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठनात्मक तैयारी पूरी कर ली है।
21 जुलाई को राष्ट्रीय अधिवेशन
आजाद समाज पार्टी ने घोषणा की है कि 21 जुलाई को पटना में राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। इसमें पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद खुद मौजूद रहेंगे और बिहार चुनाव के लिए अंतिम रणनीति की घोषणा करेंगे।
लोजपा (रामविलास) का पलटवार
चंद्रशेखर आजाद की चुनावी घोषणा पर लोजपा (रामविलास) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता शशि भूषण प्रसाद ने कहा, "लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन इससे लोजपा को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।" उन्होंने दावा किया कि दलित समाज चिराग पासवान के साथ मजबूती से खड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि आजाद समाज पार्टी बिहार में दलित वोट बैंक, खासकर रविदास समाज में पैठ बनाने की कोशिश करेगी। वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद मायावती और भाकपा (माले) के कोर वोटरों में सेंध लगाने की कोशिश करेंगे, जिससे आरजेडी को सीधा नुकसान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि आजाद समाज पार्टी 500 से 1000 वोट भी काटने में सफल रही, तो कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
एनडीए पर असर की संभावना नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीए को आजाद समाज पार्टी से सीधा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि पासवान और रविदास वोटर अलग-अलग राजनीतिक ध्रुवों पर हैं। पासवान समाज अब भी एनडीए और चिराग पासवान के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।
शिंदे बोले – मुंबई की सड़कों पर जल्द खत्म होंगे गड्ढों के दिन
19 Jul, 2025 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबईकरों को दो साल और झेलने पड़ेंगे गड्ढे, फिर 25 साल की राहत का वादा: शिंदे
मुंबई
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र विधानसभा में स्वीकार किया है कि मुंबईवासियों को आगामी दो वर्षों तक सड़कों पर गड्ढों से जूझना पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि दिसंबर 2027 तक मुंबई की सभी सड़कें सीमेंट कंक्रीट की होंगी और इसके बाद आने वाले 25 वर्षों तक शहर को गड्ढों से मुक्ति मिल जाएगी।
शिंदे ने यह बयान विधानमंडल में नियम 293 के तहत जनहित मुद्दों पर हुई बहस के दौरान दिया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के दौरान जब वे मुख्यमंत्री थे, तब वर्तमान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उन्होंने तत्कालीन मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल से फोन पर सड़कों की स्थिति पर चर्चा की थी। उस समय आयुक्त ने बताया था कि हर साल सिर्फ 50 किलोमीटर सड़कों का ही कंक्रीटीकरण किया जाता है।
जब पूछा गया कि क्या इसकी कोई सीमा तय है, तो आयुक्त ने इससे इनकार किया। इसके बाद सरकार ने दो चरणों में सभी सड़कों के कंक्रीटीकरण का निर्णय लिया। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ सड़कों का कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य दिसंबर 2027 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
भूमिपुत्रों की वापसी की बात
सदन में एक सवाल के जवाब में शिंदे ने कहा कि सरकार की नीति, बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं और विकास कार्यों का मुख्य उद्देश्य ‘भूमिपुत्रों’ को फिर से मुंबई लौटने का अवसर देना है, न कि उन्हें शहर से बाहर करना।
फेरीवालों पर अदालत का फैसला बाकी
फेरीवालों के मुद्दे पर शिंदे ने कहा कि सर्वेक्षण में एक लाख फेरीवालों में से सिर्फ 30,000 के पास ही वैध लाइसेंस पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और सुनवाई पूरी होने के बाद ही फेरीवालों और गैर-फेरीवालों के लिए क्षेत्र तय किए जाएंगे।
उद्धव बोले: जनता का विश्वास चुराया नहीं जा सकता, यही असली ताकत है
19 Jul, 2025 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ठाकरे नाम को मिटाने वालों का खुद हो जाएगा अंत" – उद्धव ठाकरे की चेतावनी
मुंबई।
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि ‘ठाकरे’ सिर्फ एक नाम या ब्रांड नहीं, बल्कि महाराष्ट्र, मराठी मानुष और हिंदू गौरव की पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां इस पहचान को खत्म करने की साजिश कर रही हैं। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने चुनाव आयोग, भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला।
ठाकरे नाम किसी को नहीं दिया जा सकता: उद्धव
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर सकता है या किसी और को दे सकता है, लेकिन ‘ठाकरे’ नाम को कोई नहीं छीन सकता। यह नाम उनके दादा केशव ठाकरे और पिता बाला साहेब ठाकरे की विरासत है, जो मराठी जनमानस में गहराई तक रची-बसी है।
भाजपा और शिंदे पर सीधा निशाना
उद्धव ठाकरे ने बिना नाम लिए भाजपा पर आरोप लगाया कि कुछ ताकतें सत्ता में बने रहने के लिए ठाकरे ब्रांड को मिटाना चाहती हैं। उन्होंने कहा, “जो हमारी पहचान चुराने की कोशिश कर रहे हैं, वे खुद समय के साथ खत्म हो जाएंगे।”
100 साल में कुछ नहीं बनाया, अब पहचान चुरा रहे
ठाकरे ने शिवसेना विभाजन को लेकर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी खुद कोई संगठन या विचारधारा नहीं गढ़ पाए, वे अब ठाकरे ब्रांड चुराने का प्रयास कर रहे हैं। यह हमला सीधे तौर पर भाजपा, आरएसएस और एकनाथ शिंदे पर माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की शरण
चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना और धनुष-बाण का चिन्ह दिया था, जबकि उद्धव गुट को शिवसेना (यूबीटी) नाम और मशाल का चिन्ह मिला। ठाकरे गुट ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई 11 अगस्त को प्रस्तावित है।
प्यार और विश्वास कोई नहीं छीन सकता
इंटरव्यू के अंत में उद्धव ठाकरे ने कहा, “चुनाव चिन्ह छीना जा सकता है, लेकिन जनता का विश्वास और प्यार कोई नहीं छीन सकता। हम सब — मैं, आदित्य और राज — ठाकरे ब्रांड को और मजबूत करेंगे।”
इस्लामपुर’ से ‘ईश्वरपुर’ तक: 1986 से चली आ रही मांग को मिली आगे बढ़ने वाली मंजूरी
18 Jul, 2025 10:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सांगली। महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने सांगली ज़िले के इस्लामपुर का नाम बदलकर ईश्वरपुर कर दिया है। यह घोषणा राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन की गई। महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में बताया कि सांगली ज़िले के इस्लामपुर का नाम अब ईश्वरपुर होगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने विधानसभा में इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया और अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस नाम बदलने की मांग 1986 से चली आ रही थी, इस मांग को हिंदूवादी संगठन शिव प्रतिष्ठान द्वारा लगातार उठाया जा रहा था। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में दो टूक कहा कि अगर हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म के व्यक्ति ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल किया है, तब उस रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही, गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लेने या चुनाव जीतने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार बलपूर्वक या धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण से संबंधित मामलों से निपटने के लिए कड़े प्रावधान लाने पर विचार कर रही है।
बिहार में बढ़ रहा पीके का जन सुराज कुनबा: भोजपुरी स्टार रितेश पांडेय और पूर्व आईपीएस जय प्रकाश सिंह भी शामिल
18 Jul, 2025 07:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, भोजपुरी गायक रितेश पांडे और पूर्व आईपीएस अधिकारी जयप्रकाश सिंह जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए। पार्टी में उनका स्वागत कर किशोर ने कहा कि हम लोगों ने जानबूझकर उस दिन चुना है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार आ रहे हैं और अपनी बड़ी-बड़ी बातों से लोगों को लुभाने की कोशिश करने वाले है। इस मौके पर सारण जिले निवासी सिंह, जो हिमाचल प्रदेश कैडर में एडीजीपी रैंक तक पहुंचे थे, ने कहा कि उन्होंने 25 साल की सेवा के बाद वीआरएस ले लिया क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि जन सुराज मेरे गृह राज्य में इतिहास बनाने के लिए तैयार है।
पांडे ने एक तात्कालिक हिंदी गीत गाया, जिसमें जन सुराज पार्टी की आकांक्षा को रेखांकित किया गया कि राज्य की धरती पर सभी को रोज़ी रोटी मिले। यह प्रत्याशित जुड़ाव हाल ही में लोकप्रिय यूट्यूबर मनीष कश्यप के हाई-प्रोफाइल पार्टी में शामिल होने के बाद हुआ है, जिन्होंने पीके के मार्गदर्शन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर जन सुराज पार्टी का दामन थामा था। इसके अलावा, राजनीतिक गलियारों में भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के जन सुराज पार्टी के साथ जुड़ने की अटकलें भी गर्म हैं।
प्रशांत किशोर ने गाँव-गाँव पदयात्राओं के ज़रिए करीब दो साल तक ज़मीनी स्तर पर व्यापक जुड़ाव के बाद, पिछले साल 2 अक्टूबर को औपचारिक रूप से जन सुराज पार्टी की शुरुआत की थी। चुनाव आयोग ने पार्टी को स्कूल बैग चुनाव चिन्ह आवंटित किया है।
शक्तिसिंह गोहिल के इस्तीफे के बाद अमित चावड़ा को फिर सौंपी गई जिम्मेदारी, जानिए उनका राजनीतिक सफर
18 Jul, 2025 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद: कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को अमित चावड़ा को अपनी गुजरात इकाई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया. पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तुषार चौधरी को विधायक दल का नेता बनाया गया है.
आंकलाव से विधायक अमित चावड़ा दूसरी बार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं. चावड़ा ने शक्तिसिंह गोहिल का स्थान लिया है जिन्होंने पिछले दिनों विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की हार के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.
चावड़ा वर्ष 2018 से 2021 तक गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और जनवरी, 2023 से विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी निभा रहे थे. कांग्रेस ने सी वी चंद रेड्डी को जिला अध्यक्षों के चुनावों की प्रक्रिया में समन्वय का अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी प्रभारी नियुक्त किया है.
वहीं डॉ. तुषार चौधरी को विपक्षी दल का नेता बनाया गया है. इसके साथ ही, गुजरात की तीन राष्ट्रीय पार्टियों में से दो में अपने राज्य के ओबीसी समुदाय के नेता हैं. खास बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने गुजरात में इशुदान गढ़वी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जो ओबीसी समुदाय से आते हैं. दूसरी तरफ भाजपा की ओर से नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी.
कौन हैं अमित चावड़ा?
मध्य गुजरात के आणंद जिले में सोलंकी और चावड़ा परिवारों का दबदबा रहा है. अमित चावड़ा के दादा ईश्वर सिंह चावड़ा आणंद सीट से सालों तक सांसद रहे. अमित चावड़ा ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वे अंकलाव सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं और इससे पहले वे गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
शक्तिसिंह गोहिल के इस्तीफे के बाद खाली हुआ था प्रदेश अध्यक्ष का पद
हाल ही में गुजरात में विसावदर और कड़ी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे, जिसमें कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा.जिसके बाद शक्तिसिंह गोहिल ने मीडिया के सामने आकर हार की ज़िम्मेदारी स्वीकार की और प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. जिसके बाद नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कांग्रेस में कई नाम सामने आए. आखिरकार कांग्रेस कमेटी ने अमित चावड़ा पर दांव लगाया.
दशरथ मांझी के बेटे को मिला कांग्रेस का साथ, चुनाव लड़ने की अटकलें तेज
18 Jul, 2025 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गया : बिहार में विधानसभा चुनाव को कुछ महीने ही बचे हैं. सभी गठबंधन और दलों में प्रत्याशियों की दावेदारी की कमी नहीं है. इनमें कुछ नाम अपने क्षेत्र में चर्चित भी हैं, जो अपनी दावेदारी को मजबूत बनाने में लगे हैं. इन्हीं चर्चित नामों में एक 'पर्वत पुरुष दशरथ मांझी' के पुत्र भागीरथ मांझी भी हैं. वह कांग्रेस के टिकट पर बोधगया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं. उनका दावा है कि राहुल गांधी ने आश्वासन दिया है.
बोधगया से चुनाव लड़ने की इच्छा: भागीरथ मांझी के मुताबिक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले महीने जब जून में बिहार के गया और राजगीर के दौरे पर आ थे, तब उन्होंने ने हमारे परिवार से मुलाकात की थी. उस दौरान हमारे परिवार ने उनका भरपूर स्वागत किया था. साथ ही हम से राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के संबंध में बात की थी, जिस पर हम ने बोधगया से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की.
राहुल गांधी ने बनाया था बायोडाटा: भागीरथ मांझी कहते हैं वह चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, सिर्फ कांग्रेस आलाकमान से मंजूरी मिलने की देरी है. वह इसलिए भी भरोसे में हैं, क्योंकि राहुल गांधी ने ही उनकी उम्मीदवारी को लेकर उनका बायोडाटा तैयार कर के दिया है. उन्होंने कहा कि मुझे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि बिहार चुनाव में उन्हें कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जरूर लड़वाया जाएगा, हमें राहुल गांधी की बातों पर पूरा भरोसा है.
"हमने जब चुनाव लड़ने की इच्छा जताई तो उन्होंने राजगीर जाने के क्रम में मेरे से पूरी जानकारी लेकर मेरा बायोडाटा तैयार करवाया है. उसकी एक कॉपी मुझे भी उन्होंने दी थी, जिस पर उन्होंने पार्टी से चुनाव लड़ाने की अनुशंसा की है."- भागीरथ मांझी, दशरथ मांझी के पुत्र
नीतीश के प्रति जताई नाराजगी?: भगीरथ मांझी ने इसी साल कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है. इससे पहले वो जेडीयू में भी रहे हैं. हालांकि उनका कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से वह नाराज नहीं, दुःखी हैं. वो सीएम के कार्यों से भी संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ पिताजी (दशरथ मांझी) को अपनी कुर्सी पर बैठाकर हाईलाइट किया. सम्मान तो दिया लेकिन परिवार की सहायता नहीं की.
भगीरथ मांझी ने कहा कि हम आर्थिक तंगियों से जूझ रहे हैं. परिवार टूटी हुई झोपड़ी में रह रहा है. घर की स्थिति हमारी वैसी ही रही जैसे कि मांझी समाज के आम लोगों की होती है. हालांकि वो ये भी कहते हैं कि उनके पिता ने जो भी सामाजिक कामों की मांग नीतीश कुमार से की, उनमें कुछ काम उन्होंने किया भी है लेकिन फिर भी परिवार को सिर्फ आश्वासन ही मिला. सीएम ने उनको एक बार भी टिकट देना जरूरी नहीं समझा.
मांझी को बताया 'परिवारवादी' नेता: भागीरथ मांझी को सबसे ज्यादा शिकायत केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी से है. वह कहते हैं कि वो बाबा दशरथ मांझी के परिवार (जाति) के हैं. उनके पिता के नाम पर राजनीतिक लाभ भी लेते हैं. अपनी पार्टी के कार्यक्रमों में वो दशरथ मांझी की तस्वीर लगाते हैं. मंच से उनका परिजन होने की बात करते हैं लेकिन कभी दशरथ मांझी के परिवार के लिए कुछ नहीं किया. सिर्फ बेटे-बहू और दामाद को ही आगे बढ़ाया.
'चिराग को नहीं जानता हूं': दलितों के उभरते नेता केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को भागीरथ मांझी ने पहचानने से भी इंकार कर दिया. वो कहते हैं कि मेरी उनसे कभी मुलाकात नहीं हुई. अतरी विधान सभा क्षेत्र में 2020 के विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए आए थे लेकिन हमारे घर पर नहीं आए. वह दशरथ मांझी की बात करते होंगे लेकिन परिवार की स्थिति को कभी जानने की कोशिश नहीं की. हम चिराग पासवान को नहीं जानते हैं कि वह कैसे नेता हैं.
'सामाजिक न्याय के नेता हैं लालू यादव': वहीं, लालू यादव को वह सामाजिक न्याय दिलाने वाले नेता के रूप में देखते हैं, लेकिन उन के बारे में भी वह कहते हैं कि दशरथ मांझी के परिवार के लिए उन्होंने भी कुछ कराने में रुचि नहीं दिखाई. भगीरथ मांझी तो तेजस्वी यादव से भी वो अंजान ही हैं लेकिन वो खुद को राहुल गांधी का जबरा फैन बताते हैं और उनकी जमकर तारीफ भी करते हैं.
गया में 'मांझी' फैक्टर असरदार: गया जिले की राजनीति में वर्षों से मांझी समुदाय के नेताओं का ही वर्चस्व माना जाता है. पिछले 25 वर्षों से गया लोकसभा का प्रतिनिधित्व मांझी समाज के नेता कर रहे हैं. अभी गया लोकसभा सीट से जीतनराम मांझी सांसद हैं. इससे पहले जेडीयू के टिकट पर भगवतिया देवी के बेटे विजय कुमार मांझी एमपी थे. उनसे पहले 10 सालों तक बीजेपी के हरि मांझी सांसद थे.
जीतनराम परिवार का दखल: गया जिले की तीन सुरक्षित सीट में दो सीटों बाराचट्टी और इमामगंज पर भी पिछले 10 सालों से ज्यादा समय से मांझी जाति के नेता ही विधायक हैं. 9 सालों तक इमामगंज से जीतनराम मांझी विधायक रहे, जबकि अभी उनकी बहू और मंत्री संतोष कुमार सुमन की पत्नी दीपा मांझी विधायक हैं. वहीं, बाराचट्टी से ज्योति देवी (मांझी) विधायक हैं. इससे पहले आरजेडी की पूर्व सांसद भगवतिया देवी की बेटी समता देवी विधायक थीं.
मांझी बनाम मांझी का मुकाबला: गया जिले में 10 विधानसभा सीट हैं. इसमें तीन सीट सुरक्षित सीटों में से दो पर हम पार्टी का कब्जा है, जबकि एक सीट पर आरजेडी के कुमार सर्वजीत का कब्जा है. वह पासवान जाति से आते हैं. ऐसे में जानकार कहते हैं कि कांग्रेस और महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) गया जिले में दशरथ मांझी के परिवार के पुत्र को टिकट देकर जीतनराम मांझी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है. मांझी जाति में मैसेज देने के लिए कांग्रेस का ये मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है.
कौन थे दशरथ मांझी?: भागीरथ मांझी के पिता दशरथ मांझी को माउंटेन मैन (पर्वत पुरुष) के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना डाली थी. 22 वर्षों तक लगातार वह छेनी-हथौड़ा लेकर कोशिश करते रहे और आखिरकार पहाड़ का सीना चीड़कर रास्ता बना दिया. उनकी पत्नी फाल्गुनी देवी (फगुनिया) की पहाड़ से फिसलकर गिरने के कारण मौत हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने रास्ता बनाने की कसम खाई थी.
इंदिरा गांधी के साथ घटना मशहूर: इंदिरा गांधी के साथ उनका एक प्रसंग है कि 1980 में एक रैली के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का मंच टूट गया था. उस समय वहां मौजूद दशरथ मांझी ने उनके टूटते स्टेज को कांधा दिया था. बाद में वह पैदल ही रेलवे ट्रैक के किनारे-किनारे 1000 किलोमीटर का सफर दो महीने में तय करके दिल्ली पहुंच गए. हालांकि उनकी इंदिरा गांधी मुलाकात नहीं हो पाई. बाद में पता चलने पर इंदिरा गांधी ने मदद के रूप में पैसे भी भिजवाईं लेकिन गांव के मुखिया ने सहायता राशि पहुंचने नहीं दिया.
काम करने वाले शांत, प्रचार करने वाले बुलंद आवाज़ में! तंज– लाउडस्पीकर वे चला रहे
18 Jul, 2025 10:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस द्वारा आयोजित एक बैठक में देश भर से आए आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनके प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस दौरान छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा समेत अन्य इलाकों से आए आदिवासी नेताओं ने कहा कि उनके जल, जंगल जमीन पर हमले हो रहे हैं और भाजपा शासित राज्यों में उनकी जमीनें छीनकर अडानी-अंबानी को दी जा रही हैं। एक आदिवासी नेता की शिकायत पर राहुल गांधी ने कहा कि काम हम करते हैं, लेकिन लाउडस्पीकर वे (भाजपा वाले) चला रहे हैं, क्योंकि उनके पास प्रचार तंत्र है।
इस दौरान महाराष्ट्र से आए एक अन्य आदिवासी नेता ने कहा कि कांग्रेस हमारे साथ है, संविधान हमारे साथ है, कानून हमारे साथ है, लेकिन जमीन पर उसे अमल में नहीं लाया गया, खासकर महाराष्ट्र में आदिवासी समुदाय उपेक्षित है। उन्होंने कहा कि अगर हमें आदिवासियों के हितों की रक्षा करनी है तो हमें एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी को भी साथ लेकर चलना होगा, तभी अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे और विकास कर सकेंगे। अन्यथा हम बंटकर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि समाज में सद्भाव के बिना विकास नहीं हो सकता।
बिहार में भाजपा की कठपुतली बना चुनाव आयोग
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कठपुतली बनने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह चुनाव आयोग कम और भाजपा का ‘चोरी आयोग’ ज्यादा नजर आता है। श्री गांधी ने सोशल मीडिया एक पर एक पोस्ट में गुरुवार को कहा कि बिहार में चुनाव आयोग मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर रंगे हाथ वोट चोरी करता पकड़ा गया। काम सिर्फ चोरी, नाम ‘एसआईआर’ पर्दाफाश करने वाले पर प्राथमिकी होगी। उन्होंने चुनाव आयोग को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आयोग अब भी ‘चुनाव आयोग’ है या पूरी तरह भाजपा की‘चुनाव चोरी’ शाखा बन चुका है।
बंद कमरे में उद्धव और फड़णवीस आमने-सामने, 20 मिनट की बातचीत से गरमाई सियासत
18 Jul, 2025 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई, महाराष्ट्र में क्या एक बार फिर से सियासत नई करवट लेने वाली है? क्या शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और बीजेपी फिर से साथ आने वाले हैं? यह सब अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के महाराष्ट्र की बीजेपीनीत एनडीए सरकार के साथ आने का ऑफर देने के एक दिन बाद गुरुवार को शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे की सीएम से मुलाकात हुई है। यह बैठक विधान परिषद के सभापति राम शिंदे के कक्ष में करीब 20 मिनट तक चली। इस मीटिंग में आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में कई मद्दों पर चर्चा हुई। इनमें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद, राज्य में तीन-भाषा नीति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
हालांकि दोनों नेताओं की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन इस मुलाकात को महाराष्ट्र की राजनीति में संभावित नए समीकरणों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि बुधवार को विधान परिषद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा बनने का ऑफर दिया था। विधान परिषद में नेता विपक्ष अंबादास दानवे के विदाई समारोह में बोलते हुए फड़णवीस ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि उद्धव जी, 2029 तक मेरी तो उस तरफ (विपक्ष) आने की संभावना नहीं है, लेकिन अगर आप इधर (सत्ता पक्षा की तरफ) आना चाहें तो रास्ता निकाला जा सकता है।
असेंबली परिसर बना अखाड़ा: महाराष्ट्र में विधायकों के बीच जमकर मारपीट
18 Jul, 2025 08:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई, महाराष्ट्र विधानसभा परिसर आज उस वक्त अखाड़ा बन गया, जब सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक आपस में ही भिड़ गए। इस दौरान दोनों तरफ से विधायकों के बीच धक्कामुक्की, छीनझपटी और लात-घूंसे चले। ये सारा नजारा वहां मीडिया के कैमरे में कैद हो गया। दरअसल भाजपा विधायक गोपीचंद पडलकर और एनसीपी (शरद पवार गुट) विधायक जितेंद्र आव्हाड के बीच कुछ समय से तनातनी चल रही थी। जो आज हिंसक रूप में तबदील हो गई। इससे पहले गोपीचंद पडलकर और जितेंद्र आव्हाड के बीच तीखी बहस हुई थी।
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को विधानसभा परिसर गेट के पास गालियां भी दीं। अभी यह मामला गरम ही थी कि गुरुवार को पडलकर और आव्हाड समर्थकों के बीच तीखी बहस हो गई है और देखते ही देखते दोनों नेताओं के समर्थक विधान भवन की लॉबी में आपस में भिड़ गए और मारपीट कर बैठे। इस बीच, एनसीपी विधायक जितेंद्र आव्हाड ने गंभीर आरोप लगाया है।
औवेसी की पार्टी से अलग हुई इकलौती गैर मुस्लिम पार्षद, पिता से विवाद के कारण उठाया कदम
17 Jul, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खरगोन। मध्य प्रदेश खरगौन नगर पालिका परिषद में वार्ड क्रमांक 2 की एआईएमआईएम की एकमात्र गैर मुस्लिम पार्षद ने धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर पार्टी से इस्तीफा दिया है। खरगोन की वार्ड क्रमांक 2 से एआईएमआईएम के टिकट से चुनाव जीतने वाली पार्षद अरुण उपाध्याय ने राष्ट्रीय कार्यालय हैदराबाद को अपने इस्तीफे में कहा कि वे निजी कारणों के चलते प्रदेश कोर कमेटी के पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रही हैं।
उन्होंने बुधवार को इस्तीफा के कारण पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके पति श्यामलाल उपाध्याय 2022 में चुनाव जीतने के बाद से पार्षद पद छोड़ने का दबाब बना रहे थे। पद छोड़ने से मना करने के बाद उन्होंने विगत दो वर्षों से उन पर फंड लेकर धर्म परिवर्तन करवाने का आरोप लगाकर विभिन्न फोरमों पर शिकायत भी की है। उन्होंने बताया कि वे जान से मारने की भी धमकी देते हैं, इसलिए अलग होकर उनके विरुद्ध तलाक का केस भी दायर किया है। इसके अलावा उन्होंने 15 दिन पहले पति के खिलाफ पुलिस अधीक्षक से शिकायत भी की है।
उन्होंने बताया कि न उन्होंने स्वयं धर्म परिवर्तन किया है, और ना ही वे फंड लेकर लोगों का धर्म परिवर्तन करवा रही हैं। उन्होंने कहा कि पति से विवाद कारण पार्टी थी, इसलिए वे औवेसी की छोड़ रही हैं, लेकिन पार्षद के रूप में काम करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि मैंने पति से इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए भी कहा है।
2022 के निकाय चुनाव में ओवैसी की पार्टी से प्रदेश में करीब आधा दर्जन पार्षद जीते थे। इसमें खरगोन की हिन्दू महिला अरुणा सहित तीन पार्षद भी शामिल थे। वे एआईएमआईएम से प्रदेश की पहली हिंदू पार्षद बनकर चर्चा में रहीं। वार्ड 2 से अरुणा के सामने भाजपा प्रत्याशी सुनीता गांगले और कांग्रेस की शिल्पा सोनी मैदान में थीं। उन्होंने 643 वोट हासिल किए थे। वार्ड में 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी होने के बावजूद उन्होंने जीत हासिल की थी।
चुनावी ‘फ्रीबीज़ पॉलिटिक्स’: केजरीवाल मॉडल का बिहार में प्रयोग
17 Jul, 2025 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा ऐलान किया है। अब बिहार के लोगों को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलेगी। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं, बल्कि एक ऐसा तोहफा है जिससे लाखों परिवारों को सीधा फायदा होगा। यह योजना 1 अगस्त 2025 से लागू हो जाएगी, और सबसे अच्छी बात ये है कि इसका फायदा आपको जुलाई 2025 के बिजली बिल से ही मिलना शुरू हो जाएगा।
क्यों खास है ये ऐलान?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद ट्वीट करके इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार हमेशा से सस्ती बिजली देने के पक्ष में रही है और अब ये तय कर लिया गया है कि राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक बिजली का कोई शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन यहीं पर एक सवाल भी उठता है – ये फ्री क्या सच में ‘फ्री’ होता है? दरअसल, ‘फ्रीबीज’ यानी मुफ्त की योजनाओं का चलन भारतीय राजनीति में नया नहीं है। इसकी शुरुआत दिल्ली में अरविंद केजरीवाल मॉडल से हुई, जहां मुफ्त बिजली और पानी ने उनकी पार्टी को जबरदस्त सफलता दिलाई। इसके बाद, कई राज्यों में ऐसी योजनाओं की बाढ़ सी आ गई, जैसे तमिलनाडु में अम्मा कैंटीन, पंजाब में मुफ्त बिजली, राजस्थान में सस्ते सिलेंडर आदि। हर राज्य सरकार अपने वोट बैंक को साधने के लिए ऐसी घोषणाएं करती है।
सरकार पर कितना बोझ?
इस योजना का सीधा फायदा 1 करोड़ 67 लाख परिवारों को मिलेगा। खासकर उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को, जिनके लिए बिजली का बिल एक बड़ी चिंता का विषय होता है। अब उन्हें इस बोझ से काफी हद तक राहत मिलेगी। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू ये है कि सरकार पर इस ‘फ्री’ बिजली का भारी बोझ पड़ने वाला है।जब सरकार मुफ्त में कुछ देती है, तो इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई लागत नहीं होती। बल्कि, उस लागत को टैक्सपेयर्स यानी हम और आप जैसे लोग ही किसी न किसी रूप में चुकाते हैं।यह पैसा सरकार के खजाने से आता है, जो अंततः जनता से वसूले गए टैक्स का ही हिस्सा होता है। बिहार जैसे राज्य के लिए पैसा कहां से आएगा? यह एक बड़ा सवाल है। बिहार एक ऐसा राज्य है जो विकास के कई मानकों पर अभी भी पीछे है और उसकी वित्तीय स्थिति हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। ऐसे में 125 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी योजना पर आने वाला करोड़ों रुपये का खर्च सरकार कैसे वहन करेगी, यह देखने वाली बात होगी।
राजस्व में कमी: मुफ्त बिजली देने से बिजली कंपनियों का राजस्व कम होगा, जिसकी भरपाई सरकार को करनी पड़ेगी।
अन्य विकास कार्यों पर असर: मुफ्त योजनाओं पर भारी भरकम खर्च करने से शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए फंड कम पड़ सकते हैं।
कर्ज का बढ़ना: यदि राज्य के पास पर्याप्त राजस्व नहीं है, तो उसे इन योजनाओं को चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है, जिससे राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा।
सिर्फ मुफ्त बिजली नहीं, सौर ऊर्जा का भी मिलेगा सहारा!
नीतीश कुमार ने सिर्फ मुफ्त बिजली का ही ऐलान नहीं किया है, बल्कि एक और बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि अगले तीन सालों में सरकार इन सभी घरेलू उपभोक्ताओं की सहमति से उनके घरों की छतों पर या पास के सार्वजनिक स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्र (Solar Power Plants) लगाएगी.‘कुटीर ज्योति योजना’ के तहत सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।बाकी लोगों को भी सरकार उचित सहयोग देगी. यह एक स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि इससे न केवल बिजली का खर्च बचेगा, बल्कि अगले तीन सालों में बिहार को लगभग 10,000 मेगावाट सौर ऊर्जा मिलेगी। इसका मतलब है कि बिजली संकट काफी हद तक खत्म हो जाएगा और बिहार आत्मनिर्भर बनेगा। यदि सौर ऊर्जा का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल होता है, तो यह लंबी अवधि में मुफ्त बिजली के बोझ को कम करने में मदद कर सकता है।
चुनावी माहौल में बड़ा दांव?
यह फैसला बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आया है, और इसे नीतीश सरकार का एक बड़ा दांव माना जा रहा है। इस कदम से जनता के बीच सरकार की छवि मजबूत होगी और बिजली के मुद्दे पर उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। अब देखना यह होगा कि यह योजना बिहार के विकास में कितनी सहायक होती है और आम जनता के जीवन में कितना बड़ा बदलाव लाती है, और क्या यह ‘फ्रीबीज’ का मीठा फल, राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए कहीं खट्टा तो साबित नहीं होगा।
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