राजनीति
सनातन धर्म पर शरद पवार के विधायक का हमला, बोले- इसी ने देश को किया बर्बाद
4 Aug, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ठाणे। एनसीपी(शरद गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने कहा है कि सनातन धर्म ने भारत को बर्बाद कर दिया। सनातन धर्म नाम का कोई धर्म कभी था ही नहीं। इसकी विचारधारा विकृत है। हम हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तथाकथित सनातन धर्म ने हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज को राज्याभिषेक से वंचित रखा, छत्रपति संभाजी महाराज को बदनाम किया। इसके अनुयायियों ने ज्योतिराव फुले की हत्या की कोशिश की।
आव्हाड ने कहा कि सावित्रीबाई फुले पर गोबर और गंदगी फेंकी गई। इसी सनातन धर्म ने शाहूजी महाराज की हत्या की साजिश रची। इसने डॉ. बीआर अंबेडकर को पानी पीने और स्कूल जाने तक नहीं दिया। आव्हाड ने ये भी कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर ही थे, जो सनातन धर्म के खिलाफ उठे, मनुस्मृति को जलाया और उसकी दमनकारी परंपराओं को खारिज किया। आव्हाड का ये बयान मालेगांव ब्लास्ट के सभी 7 आरोपियों को बरी किए जाने और भगवा आतंकवाद पर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है। महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को धमाका हुआ था। इसमें 6 लोग मारे गए थे और करीब 100 लोग घायल हुए थे। मालेगांव ब्लास्ट केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी। 2011 में केस एनआईए को सौंप दिया गया था।
तेजस्वी यादव को चुनाव आयोग का नोटिस, पूछा- दो वोटर ID क्यों और कैसे?
4 Aug, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को निर्वाचन आयोग ने दो अलग-अलग वोटर आईडी (एपिक नंबर) रखने के मामले में नोटिस जारी किया है। आयोग ने तेजस्वी यादव से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है और तय समयसीमा के भीतर लिखित जवाब देने को कहा है। जानकारी के मुताबिक, तेजस्वी यादव के नाम पर दो एपिक नंबर आरएबी0456228 और आरएबी2916120 मौजूद हैं। इनमें से पहला नंबर 2020 के नामांकन पत्र और 2015 की मतदाता सूची में भी दर्ज था, जबकि दूसरा नंबर अस्तित्वहीन पाया गया है। चुनाव आयोग को संदेह है कि यह दूसरा एपिक नंबर फर्जी हो सकता है।
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह मामला मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि या फर्जी दस्तावेज से जुड़ा हो सकता है, इसलिए इसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। साथ ही, आयोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दूसरा एपिक नंबर आधिकारिक रूप से जारी हुआ था या नहीं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने लगाया था ये आरोप
तेजस्वी यादव ने पहले इस विषय पर कहा था कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया है, लेकिन आयोग ने यह दावा निराधार बताया है और कहा है कि उनका नाम अब भी मसौदा मतदाता सूची में दर्ज है। चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव को तथ्यात्मक जानकारी के साथ जवाब देने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में तेजस्वी यादव का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है। आयोग ने यह भी बताया कि साल 2015 की मतदाता सूची में भी तेजस्वी के पास यही एपिक संख्या (आरएबी0456228) थी। ऐसे में उनका यह दावा कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है, पूरी तरह से बेबुनियाद है। आयोग ने पहले ही इस दावे को असत्य और भ्रामक करार देते हुए खारिज कर दिया है।
आरएबी2916120 को लेकर विवाद
एपिक संख्या आरएबी2916120 को लेकर विवाद है। जांच में यह संख्या अस्तित्वहीन पाई गई है। आयोग ने साफ किया कि यह एपिक न तो किसी आधिकारिक दस्तावेज में दर्ज है और न ही अब तक इसके कोई वैध रिकॉर्ड मिल पाए हैं।
राहुल गांधी के घर आयोजित होने जा रही है INDIA ब्लॉक की बैठक – जानिए तारीख व एजेंडा
4 Aug, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया (इंडियन नेशनल डिवेलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) की अगली बैठक सात अगस्त को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आवास पर होगी। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक डिनर के दौरान होगी और इसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इन मुद्दों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को मामला अहम रहने वाला है। राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में करीब 70-80 सीटों पर धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बहुत मामूली बहुमत से जीते हैं और यदि 15 सीटें भी सही तरीके से हुई होतीं, तो वह प्रधानमंत्री नहीं बन पाते। इसके साथ ही बैठक में बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, महाराष्ट्र में फर्जी वोटर जोडऩे का आरोप, ऑपरेशन सिंदूर, भारत-अमरीका व्यापार समझौता और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से संभावित टैरिफ (शुल्क) धमकी शामिल है।
पिछली बैठक 19 जुलाई को वर्चुअल हुई थी, जिसमें 24 से ज्यादा दलों के नेता शामिल हुए थे, जिसमें एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार, राजद नेता और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे शामिल थे। इस बार फारूक अब्दुल्ला (नेशनल कान्फ्रेंस) ने भी पुष्टि की है कि वह बैठक में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि वह बिहार की एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे, जिसे भाजपा-जदयू गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
SIR को लेकर आज संसद में गरमा सकता है माहौल, केंद्र की नजर दो अहम विधेयकों पर
4 Aug, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मानसून सत्र के दौरान संसद में लगातार गतिरोध के बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में दो अहम विधेयकों राष्ट्रीय खेल संचालन विधेयक और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक को पारित कराने की कोशिश कर सकती है। विपक्ष की तरफ से बिहार में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर चर्चा की मांग को सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के कारण संसद में हंगामा जारी है। इस मुद्दे पर संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित हो रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग (ईसी) की यह प्रक्रिया विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से हटाने और एनडीए (भाजपा गठबंधन) के पक्ष में चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है।
वहीं, निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया देशभर में लागू की जाएगी, ताकि केवल योग्य मतदाता ही वोट डाल सकें और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘वोट चोरी’करार दिया है। ईसी ने शनिवार को उनके आरोपों को बेबुनियाद, बिना सबूत और भ्रामक बताया।
संसद में अब तक सिर्फ आतंकी हमले, आपरेशन सिंदूर पर चर्चा
21 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र में अब तक संसद की कार्यवाही लगभग ठप रही है। केवल पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मुद्दों पर ही दोनों सदनों में दो दिन तक चर्चा हो सकी। सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक, अगर विपक्ष का विरोध जारी रहता है तो सरकार हंगामे के बीच ही विधेयकों को पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
एसआईआर चुनाव आयोग का प्रशासनिक कार्य
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि एसआईआर चुनाव आयोग का प्रशासनिक कार्य है और संविधान के मुताबिक, संसद को ईसी की कार्यप्रणाली पर चर्चा करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ का हवाला देते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर संसद में बहस नहीं हो सकती। रिजिजू ने कहा कि अगर संसद में चर्चा होती है, तो आमतौर पर संबंधित मंत्री जवाब देते हैं। लेकिन ईसी एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, उसका कोई मंत्री नहीं होता।
धनखड़ हमें बोलने नहीं देते....उन्होंने बोलना शुरु किया उन्हें हटा दिया : खरगे
3 Aug, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि धनखड़ ने राज्यसभा के सभापति पद पर रहते हुए विपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया। जब धनखड़ ने खुलकर बोलना शुरु किया और केंद्र के साथ अन्य मुद्दों पर तालमेल बैठाने से इंकार किया, तब उन्हें अपने पद से ही हटा दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने दावा किया कि पूर्व सभापति को जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में विपक्षी सांसदों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर, केंद्र सरकार की मंशा अनुरूप कार्य न करने की वजह से हटा दिया गया। कांग्रेस नेता खरगे ने कहा, उनसे कहा गया कि या वह प्रस्ताव को वापस ले लें या इस्तीफा दें दें। उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर खरगे ने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान खरगे ने कभी भी विपक्षी सांसदों को बोलने की अनुमति नहीं दी। कांग्रेस सांसद रजनी अशोक राव पाटिल के मामले का जिक्र कर खरगे ने कहा, पिछले उपराष्ट्रपति हमें बोलने नहीं देते थे। वे हमें निलंबित कर देते थे, हमारी एक महिला सांसद को सात महीने के लिए निलंबित किया गया था। गौरतलब है कि कांग्रेस सांसद पाटिल पर 2023 में बजट सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही का वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर साझा करने का आरोप लगा था, इसके बाद तत्कालीन सभापति धनखड़ ने सदन के नियमों के उल्लंघन के मामले में उन्हें निलंबित किया था। बाद में अगस्त 2023 में उनके निलंबन को रद्द किया गया। खरगे ने कहा, एक समय पर सरकार का बचाव करने को लेकर आलोचना का सामना कर रहे धनखड़ ने खुलकर बोलना शुरू कर दिया। जस्टिस वर्मा केस में उन्होंने नियमों की बात की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के ऊपर आए प्रस्ताव के बारे में बात की, तब उन्हें धमकाया गया और उन पर प्रस्ताव को वापस लेने का दवाब डाला गया।
चुनाव आयोग का तेजस्वी को पलटवार, आंख खोलकर देख लो.......सूची में अपना नाम
3 Aug, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने दावा किया कि उनका नाम इलेक्शन कमीशन द्वारा बिहार के लिए जारी ड्राफ्ट वोटर सूची में नहीं है। तेजस्वी ने कहा, मैंने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान गणना फॉर्म भरा था। लेकिन अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मेरा नाम नहीं है। मैं आगामी विधानसभा चुनाव कैसे लड़ूंगा? तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने आयोग के पोर्टल पर अपना ईसीआईपी इलेक्ट्रॉनिक इलेक्टोरल फोटो पहचान पत्र) नंबर आरएबी2916120 डालकर सर्च करने पर कोई रिकॉर्ड नहीं हैं ऐसा लिखा आ रहा है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दावे का फैक्ट चेक कर बताया कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम शामिल है। आयोग ने इसके लिए बाकयदा मतदाता सूची का वह प्रारूप भी जारी किया है, जिसमें तेजस्वी की फोटो के साथ उनका नाम, उम्र, पिता का नाम, मकान संख्या दर्ज है। राजद नेता के आरोपों पर चुनाव आयोग ने फौरन डेटा शेयर कर कहा, तेजस्वी ने आरोप लगाया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। हमारे द्वारा लिस्ट शेयर की है और उनसे अनुरोध कर रहे हैं कि वे ध्यान से अपना नाम देख लें। आयोग ने जो रिकॉर्ड शेयर किया उसमें तेजस्वी यादव का ईसीआईपी नंबर आरएबी 0456228 था। आयोग द्वारा शेयर किए गए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में तेजस्वी यादव का नाम सीरियल नंबर 416 पर दर्ज दिखाई दिया।
तेजस्वी के दावे का आयोग द्वारा फैक्ट चेक होने के बाद बीजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन पर तंज कसा है। उन्होंने कहा, तेजस्वी आपकी योग्यता पर मुझे ही नहीं, आपके परिवार और पूरे बिहार को भी शंका है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम खोजना आपके लिए बहुत मुश्किल लग रहा होगा। आपका नाम ससम्मान पिताजी के साथ दर्ज है, आप देख सकते हैं। भ्रामक और फर्जीवाड़े की दुकानदारी बंद करे। राजद का भ्रम और डर दोनों बार-बार बोगस साबित हो रहा है।
चुनाव आयोग के मुताबिक बिहार में एसआईआर प्रक्रिया 1 सितंबर, 2025 को फाइनल वोटर सूची प्रकाशित होने के साथ समाप्त होगी। यानी जो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आयोग ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड की है, वह फाइनल नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने आश्वासन दिया है कि बिहार के सभी मतदाताओं और राजनीतिक दलों को संशोधित वोटर लिस्ट पर 1 अगस्त से 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियां देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
सीईसी ने कहा कि बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक निबंधन अधिकारी (ईआरओएस) राज्य में मतदाताओं या किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 1 अगस्त से 1 सितंबर तक आगे आकर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने तथा मतदाताओं से जुड़ी जानकारी में सुधार के लिए दावे और आपत्तियां देने के लिए आमंत्रित करेगा। अगर तेजस्वी यादव का नाम सही में वोटर लिस्ट में नहीं होता, तब भी उन्हें इस गलती को ठीक कराने के लिए दो महीने का समय मिलता।
बिहार में 24 जून से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने 27 जुलाई को बताया था कि बिहार में मतदाता सूची में पंजीकृत 91.69 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म जमा कर दिए हैं और 1 अगस्त को प्रकाशित होने वाले ड्राफ्ट में उनका नाम शामिल होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि 24 जून, 2025 तक 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने गणना फॉर्म जमा कर दिए थे, जो एसआईआर प्रक्रिया में लोगों की भारी भागीदारी का संकेत है। इसका मतलब है कि 65 लाख मतदाताओं के नाम 1 अगस्त की मसौदा सूची में शामिल नहीं होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम न होने के कारणों में मतदाता की मृत्यु, स्थायी स्थानांतरण और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत होना शामिल है।
राहुल गांधी के दावों पर रोहन जेटली की दो टूक.........बिल 2020 में आया पिता की मौत 2019 में हुई
3 Aug, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के दावों पर कि दिवंगत पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था, डीडीसीए प्रमुख और उनके सुपुत्र रोहन जेटली ने कांग्रेस नेता को दृढ़ता से जवाब दिया। उन्होंने राहुल गांधी को याद दिलाया कि उनके पिता का निधन इन कानूनों के लागू होने से पहले ही हो गया था। रोहन जेटली ने लिखा, राहुल गांधी अब दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया था। मैं उन्हें याद दिला दूं कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था। कृषि कानून 2020 में लागू हुए थे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके पिता का स्वभाव किसी को भी विरोधी विचारों के लिए धमकाने का नहीं था। रोहन जेटली ने कहा, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पिता के स्वभाव में किसी को भी विरोधी विचार के लिए धमकाना नहीं था। वह एक कट्टर लोकतांत्रिक व्यक्ति थे और हमेशा आम सहमति बनाने में विश्वास रखते थे।
उन्होंने कहा कि पिता अरुण जेटली हमेशा खुले और स्वतंत्र विचारों के समर्थक थे और परस्पर स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने के लिए चर्चा को महत्व देते थे। रोहन ने राहुल गांधी से उन लोगों के बारे में बोलते समय सचेत रहने का आग्रह किया जो अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने मनोहर पर्रिकर के साथ भी इसी तरह की घटना का उल्लेख किया, इस घटना को भी उन्होंने घटिया बताया। इसके पहले दिन में, राहुल गांधी ने दावा किया था कि जब वे कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहे थे, तब अरुण जेटली को उन्हें धमकाने के लिए भेजा गया था।
370 हटने के बाद आंतरिक स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई, महबूबा का आरोप
3 Aug, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की नीति को पूरी तरह विफल करार दिया है। अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण की छठी वर्षगांठ से पूर्व मुफ्ती ने कहा कि 5 अगस्त, 2019 से छह साल बीत चुके हैं, और जिस दावे के साथ विशेष दर्जा हटाया गया था कि जम्मू-कश्मीर में सब कुछ ठीक हो जाएगा, वह पूरा नहीं हुआ है।
मुफ्ती ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में आंतरिक स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है। उन्होंने सुरक्षा बलों द्वारा लगातार की जा रही गिरफ्तारियों और जम्मू-कश्मीर में बिगड़ते हालात की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति के कारण भारत की तुलना पाकिस्तान से की जा रही है, जबकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारत के मुकाबले बहुत छोटी है। मुफ्ती ने इसे भाजपा की आक्रामक नीति का परिणाम बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा की आक्रामक नीति और क्षेत्रीय कूटनीति पर इसके व्यापक प्रभाव की भी आलोचना की।
अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण
अगस्त 2019 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। इसके तहत जम्मू और कश्मीर को दिया गया विशेष दर्जा समाप्त हो गया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों - जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने और तत्कालीन राज्य को केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के बाद से, जम्मू और कश्मीर में क्षेत्रीय राजनीतिक दल राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रमुख मांग कर रहे हैं।
मुफ्ती के बयान से स्पष्ट है कि पीडीपी अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों से संतुष्ट नहीं है और केंद्र की नीतियों को विफल मानती है।
राहुल बोले- अरुण जेटली ने किसान कानून पर धमकाया
3 Aug, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को किसान कानून और सरकार का विरोध करने पर पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली पर धमकाने का आरोप लगाया। राहुल ने कहा कि मुझे याद है कि जब में किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था, तो अरूण जेटली को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था।
राहुल ने बताया कि जेटली ने उनसे कहा था कि तुम सरकार के खिलाफ विरोध करना जारी रखोगे और किसान कानूनों के खिलाफ लड़ोगे तो तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद मैने जेटली की तरफ देखा और कहा कि आपको कोई भी आइडिया नहीं है कि आप किससे बात कर रहे हैं। राहुल के बयान पर अरूण जेटली के बेटे रोहन जेटली ने कहा कि राहुल गांधी कह रहे हैं कि मेरे पिता ने उन्हें किसान कानूनों पर धमकाया। लेकिन सच्चाई ये है कि मेरे पिता का निधन 2019 में हुआ था और कानून 2020 में लाए गए थे। रोहन जेटली ने कहा कि ऐसे लोग जो अब हमारे बीच नहीं हैं, उनके बारे में बोलते वक्त सोच-समझकर बोलना चाहिए। राहुल गांधी ने पहले भी मनोहर पर्रिकर जी के अंतिम दिनों पर भी राजनीति की थी, जो बहुत ही गलत था।
राहुल गांधी माफी मांगे
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि मैं राहुल गांधी को याद दिलाना चाहता हूं कि अरुण जेटली जी का निधन 24 अगस्त 2019 को हुआ था, जबकि कृषि कानून 17 सितंबर 2020 को लोकसभा और 20 सितंबर 2020 को राज्यसभा में पास हुए थे। जब ये बिल संसद में लाए गए, तब तक अरुण जेटली जी का निधन हो चुका था।
किसान कानून सितंबर 2020 को संसद में पेश हुए थे
तीन किसान कानूनों को सितंबर 2020 में संसद में पेश किया गया और उसी महीने इन्हें पारित कर दिया गया था। हालांकि, देशभर के किसानों, खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों ने इन कानूनों का भारी विरोध किया। नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर लंबा आंदोलन शुरू हुआ, जिसे एक साल से ज्यादा चला। विरोध के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर 2021 को इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी। औपचारिक रूप से 1 दिसंबर 2021 को संसद ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर दिया था।
EPIC नंबर डालने पर आया "नो रिकॉर्ड फाउंड" : बोले तेजस्वी यादव
2 Aug, 2025 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना/नई दिल्ली।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने शनिवार (2 अगस्त, 2025) को दावा किया कि उनका नाम चुनाव आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी ने कहा, “मैंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म भरकर सबमिट किया था, लेकिन नई सूची में मेरा नाम नहीं है। ऐसे में मैं चुनाव कैसे लड़ूंगा?”
तेजस्वी ने मीडिया के सामने अपना EPIC नंबर डालकर वोटर लिस्ट चेक करने का प्रयास किया, जिसमें "No Record Found" का मैसेज आया। उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि जब उन्होंने सभी जरूरी प्रक्रिया पूरी की, तो उनका नाम कैसे हट गया?
चुनाव आयोग का पलटवार:
तेजस्वी के इस दावे के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में क्रम संख्या 416 पर दर्ज है। आयोग ने उनके बयान को "तथ्यात्मक रूप से गलत" और "झूठा" करार दिया।
तेजस्वी के आरोप:
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पूरे बिहार में विशेष पुनरीक्षण के नाम पर 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हर विधानसभा क्षेत्र से औसतन 20-30 हजार नाम हटा दिए गए। उन्होंने पूछा, “क्या इन लोगों को कोई नोटिस दिया गया? क्या ये पारदर्शी प्रक्रिया है?”
उन्होंने चुनाव आयोग पर पक्षपात करने और राजनीतिक उद्देश्य से टारगेटेड डिलीशन का आरोप लगाया। तेजस्वी ने यह भी कहा कि इस बार जो ड्राफ्ट सूची जारी की गई है, उसमें बूथ नंबर, पता और EPIC नंबर जैसी जरूरी जानकारियाँ नहीं दी गई हैं ताकि यह पता न चले कि किन लोगों के नाम काटे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार:
तेजस्वी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह चुनाव आयोग को आदेश दे कि किन बूथों से किन-किन मतदाताओं के नाम हटाए गए, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करे।
राजनीतिक बयानबाजी तेज़:
तेजस्वी ने चुनाव आयोग को “गोदी आयोग” बताते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह निष्पक्ष चुनाव संभव है?
पृष्ठभूमि:
बिहार में 1 सितंबर, 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। फिलहाल ड्राफ्ट सूची पर 1 अगस्त से आपत्तियां और दावे स्वीकार किए जा रहे हैं। आयोग के अनुसार, यदि किसी का नाम छूटा हो, तो सुधार और समावेशन के लिए अभी समय है।
2024 लोकसभा चुनाव में भारी धांधली का दावा, कांग्रेस पेश करेगी सबूत: राहुल गांधी
2 Aug, 2025 01:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आयोग के दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा, रिटायर हो या पोस्ट पर - राहुल गांधी ने कहा
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली पूरी तरह खत्म हो चुकी है और चुनाव आयोग अब निष्पक्ष नहीं रहा।
राहुल गांधी ने यह बयान कांग्रेस के वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव 2025 में दिया। उन्होंने कहा कि 2024 के चुनावों में “भारी धांधली” हुई, जिसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी को बहुत ही मामूली बहुमत मिला।
धांधली के पुख्ता सबूत पेश करेगी कांग्रेस
राहुल गांधी ने दावा किया कि उनकी पार्टी आने वाले दिनों में ऐसे सबूत सामने लाएगी, जो यह स्पष्ट करेंगे कि चुनाव किस तरह रिग किए गए। उन्होंने कहा, “हम जल्द दिखाएंगे कि चुनाव को कैसे और किस तरह से रिग किया गया। यह बहुमत असली नहीं है।”
15 सीटों पर गड़बड़ी का आरोप
राहुल ने दावा किया कि कम से कम 15 लोकसभा सीटों पर सीधे तौर पर धांधली हुई। “अगर ये सीटें ठीक से वोटिंग के बाद तय होतीं, तो मौजूदा प्रधानमंत्री अपनी कुर्सी तक नहीं पहुंच पाते।” “चुनाव आयोग अब मर चुका है” अपने सबसे तीखे हमले में राहुल गांधी ने कहा, “चुनाव आयोग अब निष्पक्ष संस्था नहीं रही। वह खत्म हो चुका है। चुनावी प्रक्रिया भी पूरी तरह ध्वस्त है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने भाजपा के पक्ष में काम किया और वोटों की चोरी को नजरअंदाज किया।
‘एटम बम’ जैसे सबूतों का दावा
राहुल ने कहा कि कांग्रेस को इस धांधली का पहले से शक था और पार्टी ने छह महीने तक जांच की। “हमने बिना चुनाव आयोग की मदद के खुद जांच की। हमें जो सबूत मिले हैं, वे एटम बम की तरह हैं। जब ये सामने आएंगे, तो देश में चुनाव आयोग नजर नहीं आएगा।”
चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग में बैठे अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “जो भी अधिकारी इस धांधली में शामिल हैं—चाहे वे रिटायर्ड हों या सक्रिय—हम उन्हें बख्शेंगे नहीं। यह राष्ट्रविरोध है और हम इन्हें ढूंढ निकालेंगे।”
BJP को बड़ी बढ़त, राज्यसभा में 100 के पार पहुंची सांसदों की संख्या
2 Aug, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा में बड़ी राजनीतिक उपलब्धि हासिल की है। पार्टी के सांसदों की संख्या अब 100 के पार पहुंच गई है, जो अप्रैल 2022 के बाद पहली बार हुआ है. वर्तमान में राज्यसभा की कुल ताकत 240 सांसदों की है, जिसमें 12 मनोनीत सदस्य शामिल हैं और 5 सीटें खाली हैं। BJP के पास अब अकेले 102 सांसद हैं, जबकि इसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास 134 सांसद हैं, जो बहुमत के आंकड़े 121 से काफी अधिक है।
BJP को ऐसे मिली ताकत
यह बढ़त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हाल ही में तीन नए सदस्यों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने के बाद संभव हुई। इनमें प्रमुख वकील उज्ज्वल निकम, पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला, और केरल के समाजसेवी सी. सदानंदन मास्टर शामिल हैं। ये तीनों अब औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो गए हैं, जिससे पार्टी की राज्यसभा में सीटें 99 से बढ़कर 102 हो गईं। उज्ज्वल निकम ने पहले भी BJP के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था, जबकि शृंगला और सदानंदन मास्टर अपने-अपने क्षेत्रों में प्रतिष्ठित नाम हैं।
NDA बहुमत से ऊपर
NDA गठबंधन, जिसमें BJP के सहयोगी दल शामिल हैं, अब राज्यसभा में 134 सांसदों के साथ मजबूत स्थिति में है। यह आंकड़ा बहुमत के लिए आवश्यक 121 से 13 अधिक है। इससे पहले अप्रैल 2022 में BJP ने पहली बार 100 का आंकड़ा पार किया था, लेकिन बाद में सांसदों की संख्या घटकर 99 हो गई थी। इस नए बदलाव ने BJP और NDA को विधायी प्रक्रिया में और अधिक आसानी प्रदान की है।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए रणनीतिक
उपराष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले यह बढ़त BJP के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्यसभा में मजबूत स्थिति के कारण पार्टी को उपराष्ट्रपति चुनाव में अपने उम्मीदवार को जिताने में आसानी होगी। यह उपलब्धि BJP की राजनीतिक ताकत और संसद के उच्च सदन में उसकी बढ़ती पकड़ को दर्शाती है।
इतिहास में BJP की दूसरी बार 100+ सांसद
BJP इतिहास में दूसरी बार राज्यसभा में 100 से अधिक सांसदों वाली पार्टी बनी है. इससे पहले 1988-90 में कांग्रेस के पास 108 सांसद थे, जो उच्च सदन में सबसे अधिक था. BJP ने 2022 में पहली बार यह आंकड़ा पार किया था और अब 2025 में फिर से यह उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि पार्टी के संगठनात्मक कौशल और रणनीतिक नियोजन को दर्शाती है।
युद्ध नहीं, संवाद जरूरी’ — मोदी के बयान पर अय्यर ने उठाए सवाल, पूछा पाकिस्तान के साथ लागू क्यों नहीं?
2 Aug, 2025 12:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत की विदेश नीति में 'न सिद्धांत, न लक्ष्य : अय्यर का हमला
नई दिल्ली।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के एक बयान ने देश की विदेश नीति को लेकर नई सियासी बहस छेड़ दी है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच फिर से बातचीत शुरू करने की वकालत करते हुए सवाल उठाया कि जब भारत चीन के साथ कूटनीतिक बातचीत करने को तैयार है, तो पाकिस्तान के साथ क्यों नहीं?
अय्यर ने मौजूदा विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में जब भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर था, उस समय चीन पूरी तरह पाकिस्तान के साथ खड़ा था और उसे सैन्य सहयोग भी दे रहा था। इसके बावजूद भारत चीन के साथ वार्ता कर रहा है। फिर पाकिस्तान के प्रति यह शत्रुतापूर्ण रुख क्यों?
उन्होंने यह भी कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” के समय चीन ने पाकिस्तानी वायुसेना का समर्थन किया था। ऐसे में यदि बीजिंग से बातचीत संभव है, तो इस्लामाबाद से क्यों नहीं?
'यह युद्ध का युग नहीं': अय्यर ने पीएम मोदी के बयान का दिया हवाला
अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस पुराने बयान की भी याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था कि “यह युद्ध का युग नहीं है और संवाद ही एकमात्र रास्ता है।” इस पर अय्यर ने सवाल किया कि यह सिद्धांत पाकिस्तान के मामले में क्यों नहीं अपनाया जा रहा?
‘विदेश नीति में ना सिद्धांत, ना लक्ष्य’
कांग्रेस नेता ने सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमारी विदेश नीति में न तो स्पष्ट सिद्धांत हैं और न ही कोई लक्ष्य। यह नीति किस दिशा में जा रही है?”
ट्रंप के मध्यस्थता वाले बयान पर भी उठाए सवाल
अय्यर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता कर रहे हैं। अय्यर ने पूछा कि भारत सरकार ने ट्रंप के इन बयानों का सख्ती से खंडन क्यों नहीं किया?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास न तो सच बोलने का साहस है और न ही अपने तथाकथित मित्रों या विरोधियों के सामने स्पष्ट रुख अपनाने की हिम्मत।
‘पाकिस्तान को फायदा, भारत भुगत रहा नुकसान’
अय्यर ने कहा कि ट्रंप के बयानों का पाकिस्तान ने भले स्वागत किया हो, लेकिन भारत ने बार-बार किसी भी तरह की मध्यस्थता से इनकार किया है। इसका परिणाम यह है कि पाकिस्तान को राजनीतिक लाभ मिल रहा है और भारत को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कुछ देर में किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी करेंगे पीएम मोदी, काशी को देंगे 2200 करोड़ का गिफ्ट
2 Aug, 2025 11:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त को भारत द्वारा रूस से तेल खरीद बंद करने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक अच्छा कदम बताया। समाचार एजेंसी ANI के सवाल पर ट्रंप ने कहा- ‘मैंने सुना है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। मुझे नहीं पता कि यह सही है या नहीं, लेकिन यह एक अच्छा कदम है. देखते हैं क्या होता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आय को सीमित करने के लिए वैश्विक दबाव बना रहा है। ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ और रूस से तेल व सैन्य उपकरण खरीदने के लिए अतिरिक्त जुर्माने की भी घोषणा की है, जिसे अब 7 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि, भारत सरकार ने इन खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 2 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे लगभग 2,200 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इन परियोजनाओं में स्मार्ट डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट और बिजली लाइनों के भूमिगत करने जैसे कार्य शामिल हैं। पीएम का यह दौरा वाराणसी के बुनियादी ढांचे और विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेता भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। बीजेपी कार्यकर्ता पीएम के स्वागत के लिए व्यापक तैयारियां कर रहे हैं, जिसमें शहर भर में होर्डिंग्स, झंडे और स्वागत द्वार लगाए गए हैं।
‘डिप्लोमेसी नहीं चलती दोस्ती से’: ट्रंप के बयान पर कांग्रेस ने घेरा पीएम मोदी को
1 Aug, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयात पर 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल व हथियार खरीदने के लिए अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा के बाद कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इस कदम को भारत के व्यापार के लिए बड़ा झटका करार देते हुए कहा कि दोस्ती- कूटनीति और कठिन वार्ता का विकल्प नहीं हो सकती। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि अमरीका द्वारा भारत के सभी निर्यातों पर 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीदने की सजा एक बड़ा झटका है। यह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
दोस्ती कूटनीति और मेहनत से की गई वार्ता का विकल्प नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमरीका दौरे के दौरान दिए गए बयान का जिक्र करते हुए तंज कसा, एमआईजीए+एमएजीए=एमईजीए का क्या हुआ? बता दें कि पीएम मोदी ने अपने अमरीकी दौरे पर वाशिंगटन में ‘मेक इंडिया ग्रेट अगेन’ (एमआईजीए) और ‘मेक अमरीका ग्रेट अगेन’ (एमएजीए) का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच ‘एमईजीए’ साझेदारी की बात कही थी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि पिछले दो दिनों से अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहे हैं। मुझे लगता है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को बदल देना चाहिए। ये दोनों प्रधानमंत्री को विदेश नीति पर सलाह देते हैं और आज आप इसके परिणाम देख रहे हैं। टैरिफ लगाना ठीक नहीं है, लेकिन उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण है राष्ट्रपति ट्रम्प और पाकिस्तानी सरकार के बीच हुई बातचीत।
मोदी ने ट्रंप का सम्मान बढ़ाया, अमरीका ने छुरा घोंंपा
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा पर यूपी के आजाद समाज पार्टी के नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया आई है। चंद्रशेखर ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप पागल हो गए हैं। मैं साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि वह किसी भी तरह से हमारे दोस्त नहीं हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने उनका सम्मान बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कई बार हमारा अपमान किया है। अमरीका ने बार-बार छुरा घोंपा। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं और हमारी सरकार का अपमान कर रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि ट्रंप जिस तरह से भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। उन्हें कोई अधिकार नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धविराम में मध्यस्थता करके हमारी सरकार को नीचा दिखाने की कोशिश की। ट्रंप बार-बार कहते रहे कि सीजफायर हमने कराया है। ट्रंप पकिस्तान पर प्यार लूटा रहे हैं। अमरीका पाकिस्तान की आर्थिक मदद कर रहा है। यही नहीं अमरीका पाकिस्तान को हीरो बता रहा है।
11 सालों से दोस्ती का यह नतीजा मिला
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा पर अखिलेश यादव ने कहा कि पिछले 11 सालों से यह सरकार लगातार दोस्ती के बाद दोस्ती करती रही और आज हमें ये दिन देखने पड़ रहे हैं। यह शुरुआत है बुरे दिनों की। इस देश के नौजवानों को नौकरी चाहिए। अर्थव्यवस्था बेहतर होगी तो रोजगार मिलेगा। अगर इस तरह की रुकावट होगी तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था का क्या होगा?
टैरिफ शायद सौदेबाजी का तरीका
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि 25 प्रतिशत टैरिफ और उसके ऊपर से जुर्माना इस टैरिफ को और ज्यादा बढ़ाएगा। अगर यह ऐसे ही रहा, तो यह भारत और अमरीका के बीच के ट्रेड को बर्बाद भी कर सकता है। चूंकि अभी ट्रेड डील पर बात चल रही है, इसलिए हो सकता है, ट्रंप द्वारा की गई यह घोषणा अमरीकी सौदेबाजी का एक तरीका हो। कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमारे लिए यह बहुत ही गंभीर मामला है.. 25 प्रतिशत टैरिफ, उसके साथ ही रूस से तेल खरीदने को लेकर जुर्माना इस टैरिफ को 35-45 प्रतिशत तक ले जा सकता है। इस टैरिफ की वजह से दोनों देशों के बीच का व्यापार बर्बाद हो सकता है। अभी ट्रेड डील के ऊपर बात चल रही है… ऐसे में हो सकता है कि यह 25 फीसदी टैरिफ सौदेबाजी का तरीका हो… ।
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