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संसद सुरक्षा पर बड़ा सवाल, पीएम पर हमले की कथित योजना
5 Feb, 2026 02:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ही बजट सत्र के 7वें दिन आज (05 फरवरी) राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पास किया गया। जो करीब 2004 के बाद यानी 22 साल में पहली बार हुआ है। इस बीच न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कांग्रेस ने पीएम मोदी पर शारीरिक हमले की साजिश रची, जिसके चलते लोकसभा को संबोधित नहीं करने का निर्णय लिया गया।
पीएम संसद में मौजूद थे और बोलने के लिए तैयार थे
न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में भाषण नहीं दिया। पक्की जानकारी थी कि कांग्रेस लोकसभा में पीएम मोदी पर शारीरिक हमला करने की साजिश बना रही थी और इसलिए विपक्ष ने अपनी महिला सांसदों को भेजा गया था। इसलिए स्पीकर ने सदन को स्थगित करने का फैसला किया, भले ही पीएम मोदी संसद में मौजूद थे और बोलने के लिए तैयार थे।
भाजपा सासंद मनोज तिवारी ने क्या किया था दावा?
इससे पहले पहले पीएम मोदी के संबोधन टलने पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया था कि यह विरोध पहले से तय योजना के तहत किया गया था। उनका दावा है कि महिला सांसद प्रधानमंत्री की सीट के आसपास घेराव जैसी स्थिति बना रही थीं। उन्होंने कहा कि स्थिति डराने वाली थी और संसदीय कार्य मंत्री की तत्परता से हालात काबू में आए। मनोज तिवारी ने आगे बताया था कि शाम करीब पांच बजे जब सदन फिर से शुरू हुआ और प्रधानमंत्री के जवाब की उम्मीद थी, तभी विपक्ष की कुछ महिला सांसद ट्रेजरी बेंच की सीटों के पास पहुंच गईं। इनमें वर्षा गायकवाड़ और ज्योतिमणि शामिल थीं। उन्होंने 'डू व्हॉट इज राइट' लिखा बड़ा बैनर पकड़ रखा था। यह विरोध एक दिन पहले निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसदों के समर्थन में बताया गया। महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की सीट के आसपास खड़े होकर विरोध जताया।
विपक्ष की नारेबाजी के बीच प्रस्ताव पारित
विपक्ष की लगातार नारेबाजी के बीच गुरुवार (05 फरवरी) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ध्वनि मत की शुरुआत की, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निचले सदन में संबोधन के बिना ही प्रस्ताव पारित हो गया। बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब प्रधानमंत्री मोदी से अपेक्षित था, लेकिन विपक्षी सदस्यों द्वारा बार-बार व्यवधान डालने और नारेबाजी करने के बाद स्पीकर ने लोकसभा को स्थगित कर दिया।
लोकसभा में क्यों टला PM का संबोधन?: भाजपा बोली- महिला सांसदों ने पीएम की सीट को घेरा, स्थिति डराने वाली थी
2004 के बाद फिर दोहराया गया इतिहास
ऐसे में 22 साल बाद इतिहास एक बार फिर दोहराया गया है, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बिना प्रधानमंत्री के जवाब के धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में पास किया गया है। इससे पहले साल 2004 में मनमोहन सरकार के दौरान भी ऐसा ही कुछ हुआ था। उस समय भाजपा ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका था।
जांच रिपोर्ट में देरी, पार्थ पवार को नहीं मिली राहत
5 Feb, 2026 02:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे में कथित जमीन घोटाले की जांच विकास खड़गे के नेतृत्व वाली समिति कर रही है। इस समिति ने अभी तक अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है। वहीं महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार को राहत के सवाल पर कहा कि रिपोर्ट आने से पहले किसी को भी क्लीन चिट देने का कोई सवाल ही नहीं है। पुणे के पॉश मुंडवा इलाके में 40 एकड़ जमीन 300 करोड़ रुपये में अमाडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को बेची गई थी, जिसमें पार्थ पवार एक प्रमुख पार्टनर हैं। यह मामला तब जांच के दायरे में आया जब पता चला कि यह प्लॉट सरकार का है और इसे बेचा नहीं जा सकता था। आरोप है कि फर्म को 21 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी से भी छूट दी गई थी।बावनकुले ने कहा कि समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट जमा करने के लिए सरकार से आठ दिन का अतिरिक्त समय मांगा है। उन्होंने कहा रिपोर्ट अभी तक आधिकारिक तौर पर राज्य सरकार को नहीं सौंपी गई है। इसलिए, पार्थ पवार या किसी और को क्लीन चिट देने का कोई सवाल ही नहीं है। मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे ऐसे गंभीर मुद्दे पर अटकलें न लगाएं और जनता को गुमराह न करें।
कौन कर रहा है जांच?
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खड़गे की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति इस जमीन को बेचने में हुए खामियों की जांच कर रही है। यह पैनल नवंबर की शुरुआत में राजनीतिक विवाद के बीच बनाया गया था और शुरू में इसे पिछले साल 6 दिसंबर तक अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया था। बाद में समिति की मांग पर डेडलाइन को दो बार बढ़ाया गया।
नाबालिगों की सामूहिक मौत: मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चेतावनी
4 Feb, 2026 10:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूपी के गाजियाबाद जिले में मंगलवार की देर रात एक साथ 9वीं मंजिल से कूदकर खुदकुशी करने के मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। तीनों लड़कियों के खुदकुशी करने के बाद जब पुलिस की फील्ड यूनिट टीम कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई, तब वह भी हैरान रह गई। कमरे में जलती आर्टिफिशियल एलईडी लाइटें और फर्श पर कई तस्वीरें बिछी हुई थीं। फोटो तीनों बहनों के बचपन की थीं, किसी में पिता के साथ तो कई परिवार के अन्य सदस्यों के साथ की फोटो थीं। यह कमरा घर का पूजा कक्ष था। आमतौर पर बच्चों से लेकर बड़ों तक का इस कमरे में आना था। कमरे की दीवारों पर बने क्रॉस के निशान और स्केच से लिखी हुईं बातें एक अलग ही मानसिकता और मनौवैज्ञानिक पहलू की तरफ इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आमतौर पर बच्चे जब मानसिक स्तर पर किसी सोच में डूबते हैं तब इस तरह की चीजें करते हैं। कोरियन कल्चर से दूरी और इसे लेकर पिता की डांट शायद बच्चों के मन पर गहरा असर गई। हालांकि दीवारों पर बने क्रॉस की फोटो फॉरेंसिक टीम ने एकत्र कर विशेषज्ञों को भेजी है। ताकि इसके पीछे छिपे राज को सामने लाया जा सके।
दीवार पर लिखा मिला 'मेक मी ए हार्ट ऑफ अलोन'
पुलिस को किशोरियों के कमरे से आठ पेज का एक सुसाइड नोट मिला है। हालांकि पुलिस ने पूरी डायरी अपने कब्जे में ले ली है। वहीं कमरे की दीवार पर मेक मी ए हार्ट ऑफ अलोन लिखा हुआ मिला है।कमरे से मिले सुसाइड नोट में किशोरियों ने पापा से माफी मांगी है। साथ ही एक डायरी का जिक्र भी किया है। नोट में लिखा है कि 'इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो क्योंकि ये सब सच है। आई एम सॉरी, पापा।' सुसाइड नोट में एक इमोजी भी बना है, जिसमें एक लड़की रोते हुए दिखाई गई है।' हालांकि, नोट में जिस डायरी का जिक्र उन्होंने किया गया है, उसकी पूरी डिटेल अभी तक सामने नहीं आ पाई हैं।दरअसल, गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ थाना इलाके की भारत सिटी सोसाइटी में यह घटना घटी। फिलहाल गाजियाबाद पुलिस इस घटना की बारीकी से जांच में जुटी है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि तीनों नाबालिगों ने देर रात करीब दो बजे एक साथ सोसायटी की 9वीं मंजिल से छलांग लगाई।
जानकारी के मुताबिक, किशोरियों के माता-पिता दूसरे कमरे में सो रहे थे। तीनों बहनों ने अपने कमरे की खिड़की से छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि ये तीनों बहनें पिछले कुछ महीनों से ऑनलाइन गेम खेलने की आदी हो चुकी थीं और कोरोना महामारी के बाद से इनका स्कूल भी रेगुलर नहीं था। तीनों बहनें पिछले कुछ माह से ऑनलाइन टास्क बेस्ड कोरियन लवर गेम खेल रही थीं। उनकी उम्र 16, 14 और 12 वर्ष थी। तीनों ने सामूहिक आत्महत्या क्यों की, इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि परिजनों से पूछताछ की जा रही है और मोबाइल फोन व डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
मंगलवार को गेम का आखिरी टास्क था: मीडिया रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिता ने बताया है कि लड़कियों को ऑनलाइन कोरियन गेम खेलने की लत थी। उन्होंने बताया कि मंगलवार को गेम का आखिरी टास्क था। नाबालिग लड़कियां आखिरी टास्क पूरा करने के बाद सोसायटी के 9वें फ्लोर से कूद गईं। पिता ने बताया कि पुलिस उनके फोन जांच के लिए ले गई है। उन्होंने यह भी बताया कि गेम में कुल 50 टास्क थे। कूदने के लिए बच्चियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का उपयोग किया था।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चियों के पिता ने आगे बताया कि बीच वाली बच्ची इस गेम की लीडर थी। तीनों बच्चियां हर काम एक साथ ही करती थीं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि तीनों ऐसा कोई गेम खेलती हैं, इसका परिवार में किसी को पता नहीं था।
तीन बेटियों की आत्महत्या से मचा हड़कंप, कई सवाल खड़े
4 Feb, 2026 07:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना में तीन सगी बेटियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर सामने आई है। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया, बल्कि समाज और प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, तीनों बेटियाँ एक ही परिवार से थीं। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, हालांकि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। मानसिक तनाव, पारिवारिक परिस्थितियां या किसी बाहरी दबाव की भी जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते लापता लोगों के मामले भी गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। बीते कुछ समय में बच्चों, युवतियों और युवाओं के गुमशुदा होने की घटनाओं में इज़ाफा हुआ है। कई मामलों में परिजनों की शिकायत के बावजूद लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि आत्महत्या जैसी घटनाएं और बढ़ती गुमशुदगी, दोनों ही सिस्टम की संवेदनशीलता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, पारिवारिक संवाद और समय पर काउंसलिंग बेहद ज़रूरी है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि लापता मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है और संबंधित थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं तीन बेटियों की आत्महत्या के मामले में भी निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया है।यह घटनाएं समाज के लिए एक चेतावनी हैं कि मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग और नागरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
राउत बोले- एनसीपी से ज्यादा बीजेपी की लाइन पर चल रहे पटेल
4 Feb, 2026 06:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने बुधवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता प्रफुल्ल पटेल पर निशाना साधा। राउत ने कहा कि पटेल अपनी पार्टी से ज्यादा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के करीब हैं। उन्होंने कहा कि पटेल को वही करना चाहिए जो महाराष्ट्र और मराठी मानुष के लिए स्वीकार्य हो।
संजय राउत ने क्या कहा?
संजय राउत ने कहा, एनसीपी पवारों की पार्टी है, पटेलों की नहीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे भी भाजपा की ओर झुकाव रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, प्रफुल्ल पटेल को वहीं करना चाहिए जो केवल महाराष्ट्र और मराठी मानुष के लिए मंजूर हो। एनसीपी पवारों की पार्टी है, पटेलों की नहीं। वह अपनी पार्टी के नेता नेता होने से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बड़े भक्त हैं।
प्रफुल्ल पटेल ने क्या कहा था?
प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को कहा था कि वह एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की दौड़ में नहीं हैं। यह पद दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पास था।उन्होंने यह भी कहा कि अजितपवार की पिछले हफ्ते एक विमान में हादसे में मौत के बाद पार्टी के फैसलों पर ऐसे लोग बोल रहे हैं, जिनका एनसीपी से कोई लेना-देना नहीं है।विपक्षी दल प्रफुल्ल पटेल पर यह कहते हुए निशाना साध रहे हैं कि अजित पवार के निधन के बाद वह एनसीपी की कमान संभालना चाहते हैं। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि मूल एनसीपी और शिवसेना में जो टूट हुई है, उसके लिए भाजपा जिम्मेदार है। एनसीपी की स्थापना शरद पवार और शिवसेना की बाल ठाकरे ने की थी। संसद में गतिरोध बरकरार: लोकसभा में पीएम मोदी का भाषण टला, विपक्षी दलों के हंगामे के बीच दिनभर नहीं हो सका काम
चंद्रपुर के महापौर को लेकर राउत ने क्या कहा?
चंद्रपुर के महापौर का पद कौन संभालेगा, इस सवाल को लेकर राउत ने कहा कि वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही बहुमत नहीं मिला है और वे छोटे दलों पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वहां के शिवसेना (यूबीटी) पार्षदों को निर्देश दिया है कि वे भाजपा के साथ किसी भी तरह का गठबंधन न करें।
चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
66 सीटों वाले चंद्रपुर नगर निगम में कांग्रेस को 27 सीटें मिलीं, भाजपा को 23 सीटें मिलीं और शिवसेना (यूबीटी) को छह सीटें मिलीं। बसपा और शिवसेना को एक-एक सीट मिली है।
हजारों करोड़ के निवेश घोटाले में 1800 करोड़ की रकम लापता
4 Feb, 2026 05:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
व्यूनाउ ग्रुप के सीईओ और संस्थापक सुखविंदर सिंह खारौर ने अन्य आरोपियों/संस्थाओं के साथ मिलकर हजारों करोड़ रुपये का 'क्लाउड पार्टिकल घोटाला' किया है। उन्होंने आम जनता (निवेशकों) की मेहनत की कमाई अपने निजी लाभ के लिए हड़प ली। सेल एंड लीज बैक (एसएलबी) मॉडल पर आधारित क्लाउड पार्टिकल का मूल व्यवसाय अस्तित्वहीन पाया गया। निवेशकों को धोखा देने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। यह भी पता चला है कि डेटा सेंटर ग्राहकों से कोई किराया नहीं लिया जाता था या बहुत कम राशि ली जाती थी। वजह, क्योंकि व्यूनाउ ग्रुप का पूरा व्यवसाय केवल एक धन-चक्रण योजना थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुताबिक, क्लाउड पार्टिकल्स की बिक्री के बदले निवेशकों से कुल मिलाकर लगभग 3700 करोड़ रुपये एकत्र किए गए थे। इसमें से लगभग 1800 करोड़ रुपये निवेशकों को किराए के रूप में लौटा दिए गए और शेष अपराध से प्राप्त धन (पीओसी) का उपयोग व्यापारिक उद्देश्यों के अलावा अन्य कामों के लिए किया गया। मेसर्स वीएमएसएल और समूह की कंपनियों द्वारा चैनल पार्टनर्स को उच्च कमीशन देने, विभिन्न विलासितापूर्ण वाहनों, सोने और हीरों की खरीद, फर्जी संस्थाओं के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये की धनराशि का हस्तांतरण और संपत्तियों में निवेश करने में इसका दुरुपयोग किया गया।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत, मेसर्स वुएनो समूह की कंपनियों से संबंधित धन शोधन जांच के सिलसिले में 30.01.2026 को 19.10 करोड़ रुपये मूल्य का अनंतिम कुर्की आदेश जारी किया है। ईडी ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा बीएनएस, 2023 के प्रावधानों के तहत दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। ईडी के मुताबिक, जांच के दौरान पहले से जब्त/अचल संपत्तियों के अतिरिक्त, अचल संपत्तियों, सावधि जमाओं और सूचीबद्ध शेयरों के रूप में 19.10 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त संपत्तियां बरामद की गईं। अचल संपत्तियां सुखविंदर सिंह खारौर, मेसर्स व्यूनो इंफोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नितिन श्रीवास्तव और उनकी पत्नी रुचि श्रीवास्तव तथा व्यूनो ग्रुप के लेखाकार विजय झा के परिवार के सदस्यों की हैं, जबकि शेयर सुखविंदर सिंह खारौर और डिंपल खारौर के हैं।इससे पहले, 6 फरवरी 2025 के अनंतिम कुर्की आदेश के तहत बैंक बैलेंस, वाहनों और अचल संपत्तियों के रूप में लगभग 178.12 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई थी। 14 अगस्त 2025 को तलाशी अभियान के दौरान 73.72 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति भी फ्रीज कर दी गई थी। जांच के दौरान, आरोपी सुखविंदर सिंह खरौर और डिंपल खरौर को 28 फरवरी 2025 को और आरिफ निसार को 24 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल ये आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बाद, उनके और उनसे संबंधित संस्थाओं के खिलाफ 24 अप्रैल 2025 को पीएमएलए विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई। केस की आगे की जांच जारी है।
NCP नेतृत्व पर मंथन, सुनेत्रा पवार के नाम की चर्चा तेज
4 Feb, 2026 05:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का भी नेतृत्व करना चाहिए। लोहा से विधायक प्रताप चिखलीकर ने यह इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि है कि एनसीपी कार्यकर्ता यह चाहते हैं।चिखलीकर अपने गृह नगर बारामती (पुणे जिला) में 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियां विसर्जित करने से पहले मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को पार्टी प्रमुख बनना चाहिए। हम सभी ने उनसे एनसीपी का नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया है।पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं की भी यही इच्छा मुंबई में हुई एक बैठक का हवाला देते हुए चिखलीकर ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रफुल्ल पटेल सहित अन्य नेता मौजूद थे। उनकी भी यही राय थी कि सुनेत्रा पवार को संगठन की कमान सौंपी जाए।
सुनेत्रा पवार को मुख्यमंत्री जल्दी बनाने के निर्णय का किया बचाव
विधायक ने अजीत पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह सही है कि निर्णय जल्दी लिया गया, लेकिन अगर परिवार और संगठन को संभालना है तो नेतृत्व किसी को सौंपना पड़ता है। सभी की भावनाओं का सम्मान करते हुए सुनेत्रा पवार ने यह जिम्मेदारी स्वीकार की।
बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: 16 वर्ष से कम उम्र पर सोशल मीडिया रोक
4 Feb, 2026 04:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज के समय में सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. दुनिया के लगभग सभी देशों में इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. सोशल मीडिया लोगों के लिए जितना फायदेमंद है, उतना ही नुकसानदायक भी हो सकता है. इसी के चलते ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और डेनमार्क जैसी सरकारें बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. वहीं इन देशों के बाद अब स्पेन और ग्रीस भी 16 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं.
स्पेन के प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर क्या बोले?
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को घोषणा की कि देश में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना बहुत जरूरी है.
उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि यह कदम युवाओं के सुरक्षित भविष्य और उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है.
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि कम उम्र के बच्चे अक्सर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनके भविष्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.
प्रधानमंत्री कंटेंट को लेकर क्या कहा?
संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित एक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री सांचेज़ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और डीपफेक जैसे अवैध व आपत्तिजनक कंटेंट की व्यापक मौजूदगी पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने इन डिजिटल खतरों पर कड़े सवाल खड़े करते हुए तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही तय करने और युवाओं को इस ‘डिजिटल वाइल्ड वेस्ट’ से सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया.
सरकार ‘आयु जांच प्रणाली’ के लिए बाध्य करेगी
उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकारें अब इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगी. यह पाबंदी सिर्फ नाममात्र की नहीं होगी, बल्कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों को एक मजबूत ‘आयु जांच प्रणाली’ अपनाने के लिए बाध्य करेगी.
ठोस तकनीक पर ध्यान देना होगा
कंपनियों को अब केवल औपचारिकता निभाने वाले ‘चेक बॉक्स’ से आगे बढ़कर ऐसी ठोस तकनीक पर ध्यान देना होगा, जो असल में बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने से रोक सके. फिलहाल अधिकतर ऐप्स पर न्यूनतम आयु 13 वर्ष निर्धारित है, लेकिन बच्चे अपनी गलत उम्र दर्ज कर बड़ी आसानी से अपना अकाउंट बना लेते हैं.
मजदूरों की मौतों पर सरकार की चिंता, कलेक्टरों को सख्त निर्देश
4 Feb, 2026 04:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना में पंजीकृत असंगठित श्रमिकों की सामान्य और दुर्घटनाजनित मौतों की बढ़ती संख्या ने श्रम विभाग की चिंता बढ़ा दी है. इन मौतों पर हो रहे भारी खर्च को देखते हुए अब सरकार ने रोकथाम पर जोर देने का फैसला किया है. इसके तहत सभी जिलों में श्रमिकों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनकी निगरानी कलेक्टर करेंगे.
सामान्य मृत्यु पर 2 लाख दिए जाते हैं
मध्य प्रदेश में 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के असंगठित श्रमिक मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना में पंजीकृत हैं. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश में पंजीकृत श्रमिकों के बीच 57 हजार सामान्य मौतें और करीब 5,800 दुर्घटनाजनित मौतें दर्ज हुईं, जिनमें संबल योजना के तहत हितलाभ वितरित किए गए. प्रदेश की औसत आयु 67 वर्ष है, लेकिन 60 वर्ष से पहले होने वाली मौतों पर योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर दो लाख और दुर्घटना मृत्यु पर चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है.
प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को निर्देश जारी
हर साल 60 हजार से अधिक मामलों में हितलाभ दिए जाने से योजना पर खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसी को देखते हुए श्रम विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि जिलों में श्रमिक स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए जाए. ये शिविर औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, ईंट भट्टों, कारखानों और कृषि आधारित कार्यस्थलों पर लगाए जाएंगे. शिविरों का आयोजन मासिक ग्राम सभा और वार्ड सभाओं के साथ किया जाएगा तथा अनुग्रह सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी भी ग्राम सभा की विषय सूची में शामिल की जा सकेगी.
कार्यस्थल सुरक्षा पर सख्ती
कार्यस्थलों पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन के निर्देश भी दिए गए हैं. कारखानों और निर्माण स्थलों पर हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, ग्लब्स, मास्क सहित सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराया जाएगा. इसके साथ ही श्रमिकों को सड़क सुरक्षा और सुरक्षित परिवहन के प्रति भी जागरूक किया जाएगा.
नियमित स्वास्थ्य जांच और समन्वय
श्रमिकों को नियमित स्वास्थ्य जांच, जैसे बीपी, शुगर, बीएमआई और कार्डियक रिस्क से जोड़ा जाएगा. उच्च जोखिम वाले श्रमिकों की पहचान कर उन्हें समय पर चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा. इसके लिए श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय से प्रत्येक जिले में संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी.
भोपाल में SIR को लेकर कांग्रेस की हाई लेवल बैठक, नेताओं ने नाम कटौती को बताया लोकतंत्र पर वार
कार्यशील आयु वर्ग में मौतों के कारणों का विश्लेषण कर उन्हें रोकने के उपायों पर मासिक समीक्षा करने के भी निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं. सरकार का मानना है कि निवारक स्वास्थ्य उपायों और सुरक्षा जागरूकता से श्रमिकों की मृत्यु दर घटेगी और संबल योजना पर बढ़ते खर्च को भी नियंत्रित किया जा सकेगा.
“कोरिया हमारी जिंदगी” लिखकर गईं तीन बहनें, ऑनलाइन लत पर सवाल
4 Feb, 2026 02:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीन नाबालिग लड़कियों ने एक अपार्टमेंट की नौंवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। शुरुआत में लोगों को यह आत्महत्या का एक सामान्य मामला लगा, लेकिन जब पुलिस ने इस जांच की तो सामने आया कि यह आत्महत्या किसी अवसाद या परेशानी के चलते नहीं, बल्कि एक लत की वजह से थी, जिसे छोड़ने के बजाय लड़कियों ने मौत को गले लगाना सही समझा।
आइये जानते हैं कि गाजियाबाद में तीन लड़कियों की मौत के मामले में पुलिस की जांच अभी कहां तक पहुंची है और इसके पीछे क्या वजह सामने आई है?
गाजियाबाद का यह केस है क्या, बच्चियों की कब-कैसे हुई मौत?
मामला गाजियाबाद के टीलामोड़ थानाक्षेत्र इलाके का है। यहां 3 फरवरी (मंगलवार) देर रात करीब दो बजे तीन नाबालिग लड़कियां अचानक एक अपार्टमेंट के नौंवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट की खिड़की से कूद गईं। जब यह घटना हुई, तब लड़कियों के माता-पिता दूसरे कमरे में सो रहे थे। लड़कियों की उम्र 16, 14 और 12 वर्ष थी। पुलिस जब जांच के लिए पहुंची तो यह साफ नहीं हुआ कि बच्चियों के आत्महत्या की क्या वजह है। इसके बाद उनके परिजनों से पूछताछ शुरू की गई। परिवार के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।एसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, 'रात करीब 2:15 बजे सूचना मिली कि भारत सिटी में 9वीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियां कूद गईं। मौके पर तीन बच्चियों की गिरने के कारण मौत हो गई। तीनों को लोनी के अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। किशोरियों के पिता ऑनलाइन ट्रेडिंग का करते हैं और तीन वर्ष से भारत सिटी सोसायटी में किराये पर रह रहे हैं, मूल रूप से दिल्ली निवासी हैं।'
कैसे पता चला लड़कियों ने आत्महत्या की?
पुलिस ने जब घटनास्थल की छानबीन की तो उसे किशोरियों के कमरे से आठ पन्ने का एक कथित सुसाइड नोट मिला। इस सुसाइड नोट में बच्चियों की हैडराइटिंग में सुसाइड करने के लिए अपने माता-पिता से माफी मांगी गई है। इसमें लिखा है- 'इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो क्योंकि ये सब सच है। आई एम सॉरी, पापा।' सुसाइड नोट में एक इमोजी भी बना है, जिसमें एक लड़की रोते हुए दिखाई गई है।'
'पापा सॉरी...', रोती हुई इमोजी के साथ पत्र में 'डायरी' का जिक्र; गाजियाबाद की तीन बहनों की सुसाइड की कहानी
गाजियाबाद के डीसीपी निमिष पाटिल ने कहा, "अभी तक की जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियों ने आत्महत्या की है। हमें एक नोट भी प्राप्त हुआ है, जिसकी आधिकारिक जांच की जा रही है। जांच में किसी एप का नाम नहीं है, लेकिन नोट में लिखा है कि लड़कियां कोरियन कल्चर से प्रभावित थीं। उसी के चलते उन्होंने आत्महत्या की है। लड़कियों के पिता की दो शादियां हुई थी, इनकी माएं अलग-अलग हैं।"
जांच में कैसे जुड़ा कोरियाई गेम की लत का एंगल?
एसीपी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, शुरुआती जांच में लड़कियों के एक कोरियाई टास्क-आधारित इंटरएक्टिव- 'लव गेम' की लत में पड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने बताया कि लड़कियों को ऑनलाइन गेमिंग की लत कोरोनावायरस महामारी में लगे लॉकडाउन के दौरान लगी थी। तीनों बहनें साथ ही कोरियाई गेम खेलती थीं। धीरे-धीरे वे हर काम एक साथ करने लगीं थीं। नहाने से लेकर खाना-पीना, सोना और स्कूल जाने तक। पुलिस के मुताबिक, "लड़कियों के माता-पिता ने भी उनके मोबाइल फोन की लत को लेकर हाल के दिनों में नाराजगी जताई थी। परिवारवालों ने उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, इससे वे लड़कियां काफी व्यथित थीं और हो सकता है कि इस नाराजगी से ही उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया हो।" डीसीपी पाटिल के मुताबिक, इस गेम का असर इतना था कि लड़कियों की शिक्षा तक अनियमित हो गई थी। तीनों लड़कियां दो साल से स्कूल नहीं गई थीं। यहां तक कि पहले भी पढ़ाई में उनका प्रदर्शन लगातार खराब हो रहा था। उन्होंने कहा अभी यह साफ नहीं है कि मोबाइल फोन और गेमिंग की लत उन्हें कब लगी। हालांकि, यह तय है कि वे मोबाइल फोन के इस्तेमाल की पूरी तरह लती थीं।
क्या है लव गेम, जिसकी लत लगने की आशंका?
पुलिस को आशंका है कि लड़कियों को कोरियन लव गेम की लत थी। यह एक ऑनलाइन, टास्क-आधारित इंटरैक्टिव गेम है, जिसमें खिलाड़ी एक वर्चुअल पार्टनर के साथ जुड़ते हैं। इस गेम में खिलाड़ी एक वर्चुअल साथी चुनते हैं, जो उनसे कोरियन भाषा में बात करता है, प्यार भरे संदेश भेजता है और उन्हें रोजाना नए काम (टास्क) सौंपता है। यह गेम मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से फैलता है।
इसकी लत क्यों लग जाती है?
भावनात्मक जुड़ाव: खिलाड़ी अपने वर्चुअल पार्टनर के साथ एक फैंटेसी दुनिया में जीने लगते हैं। गाजियाबाद की घटना में लड़कियों ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि 'कोरिया ही हमारी जिंदगी है', जो उनके गहरे मानसिक जुड़ाव को दर्शाता है।
पहचान का बदलना: अत्यधिक लत के कारण खिलाड़ी अपनी भारतीय पहचान को भूलकर खुद को कोरियन मानने लगते हैं। वे अपने कोरियन नाम भी रख लेते हैं।
दबाव और धमकियां: जैसे-जैसे गेम आगे बढ़ता है, टास्क कठिन और व्यक्तिगत होते जाते हैं। कुछ मामलों में, निर्देशों को न मानने पर खिलाड़ियों को धमकाया भी जाता है, जिससे वे मानसिक तनाव और दबाव में आ जाते हैं।
कितना बड़ा खतरा हो सकता है ये गेम?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विशेषज्ञ और पुलिस इस गेम की तुलना कुख्यात ब्लू व्हेल चैलेंज से कर रहे हैं, जो कि 2016-18 के बीच काफी वायरल हुआ था। तब कई रिपोर्ट्स से सामने आया था कि बच्चों ने कथित तौर पर इस गेम के टास्क पूरे करने के दौरान मौत तक को गले लगा लिया।दरअसल, इस तरह के गेम शुरुआती आसान कामों के बाद, बाद के टास्क जोखिम भरे या हानिकारक हो सकते हैं। इतना ही नहीं इसकी लत लगने पर बच्चे अपने दूसरे काम, जैसे- पढ़ाई, स्कूल जाना और खेल खेलना तक छोड़ देते हैं और परिवार से कटने लगते हैं।
SIR विवाद पर SC में बहस, कोर्ट पहुंचीं सीएम ममता
4 Feb, 2026 01:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुनवाई हो रही है। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद हैं। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही है।मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था।
32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं- बंगाल सरकार
अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीएम ममता बनर्जी
ECI के SIR से जुड़े आदेश रद्द करने की मांग
अपनी याचिका में, प्रशिक्षित अधिवक्ता ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा 24 जून, 2025 और 27 अक्तूबर, 2025 को जारी किए गए सभी एसआईआर संबंधी आदेशों और उनसे जुड़े सभी निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग को आगामी विधानसभा चुनाव अपरिवर्तित 2025 मतदाता सूची के आधार पर कराने का निर्देश देने के लिए परमादेश याचिका भी दायर की है। उनका तर्क है कि एसआईआर का 2002 की आधारभूत सूची पर निर्भरता और इसकी कठिन सत्यापन प्रक्रिया वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकारों के लिए खतरा है।
टीएमसी सांसदों की याचिका पर सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इसके अलावा मुख्यमंत्री ममता ने अलग से एक याचिका दाखिल की है।
संसद में बोले पीयूष गोयल, ट्रेड डील को बताया ऐतिहासिक
4 Feb, 2026 01:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय वाणिज्य एंव उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार, 4 फरवरी को India-US ट्रेड डील पर बात करते हुए संसद में कहा यह व्यापार समझौता ऐतिहासिक है. इससे भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं है. पीयूष गोयल ने यह बात अमेरिका द्वारा भारत पर लगाई गई टैरिफ कम करने को लेकर कही है. उन्होंने बताया कि 1 साल तक चले कई दौर के विचार विमर्श के बाद व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में सफल रहे. यह समझौता भारत को विकसित बनाने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण है.पीयूष गोयल ने कहा, “दोनों पक्षों के हितों को देखते हुए स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे. भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है. अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र थे जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील थे. इसकी बातचीत पिछले करीब 1 साल तक चली है, जिसमें काफी विचार विमर्श के बाद व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे. यह समझौता विशेष रूप से श्रम प्रदान क्षेत्रों और विनिर्माण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है. खाद और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूर्ण ध्यान रखा गया है.”
‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ का लक्ष्य होगा पूरा
संसद में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “मैं इस सम्मानित सदन को यह दोहराना चाहता हूं कि उर्वरक और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है. यह समझौता लघु एवं मध्यम व्यापारियों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्योगपतियों, कुशल श्रमिकों और उद्योगों को नए अवसर प्रदान करेगा. इससे उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच आसान होगी और भारत के ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’, ‘डिजाइन इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ और ‘इनोवेट इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के लक्ष्यों को साकार करने में मदद मिलेगी.”
संसद के गेट पर भिड़ंत, राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को बताया ‘गद्दार दोस्त’, बीजेपी नेता ने कहा- ‘देश का दुश्मन’
50 से 18 प्रतिशत होगी टैरिफ
सोमवार, 2 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत पर लगी 50 प्रतिशत टैरिफ को कम कर 18 प्रतिशत किया जा रहा है. पीयूष गोयल ने बताया कि अमेरिका द्वारा कई अन्य देशों पर लगाई टैरिफ की अपेक्षा भारत पर कम कर दिया गया है. यह फैसला दोनों पक्षों (भारत-अमेरिका) के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
सहारा कर्मचारियों की लड़ाई रंग लाई, सुमित राय की सहारा मीडिया से छुट्टी
4 Feb, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ/नई दिल्ली। सहारा इंडिया परिवार में एक अहम प्रशासनिक बदलाव के तहत सहारा मीडिया के हेड और सीईओ सुमित राय को उनके पद से हटाकर सहारा इंडिया के कमांड ऑफिस, लखनऊ में अटैच कर दिया गया है। इस आदेश के बाद सहारा मीडिया कर्मचारियों में खुशी की लहर देखी जा रही है और इसे कर्मचारियों के लंबे आंदोलन की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। सहारा इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सुमित राय (Executive Director, SIMC Delhi/NCR) को तत्काल प्रभाव से कॉरपोरेट HR, लखनऊ के अधीन कर दिया गया है और उन्हें तीन दिन के भीतर लखनऊ में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। अटैचमेंट की अवधि के दौरान वे एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आर.एस. दूबे को रिपोर्ट करेंगे। यह आदेश उच्च प्रबंधन की स्वीकृति से जारी किया गया है।
कर्मचारियों के आंदोलन से जुड़ा मामला
सहारा मीडिया के कर्मचारियों का बीते कई महीनों से नई दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, वाराणसी, पटना और देहरादून में लगातार आंदोलन चल रहा था। कर्मचारियों की प्रमुख मांग थी कि उन्हें सीधे सहारा इंडिया के शीर्ष प्रबंधन से बातचीत का मौका मिले और उनके लंबित मुद्दों—जैसे वेतन, सर्विस कंडीशन और भविष्य की भूमिका—पर स्पष्ट निर्णय हो। मीडियाकर्मियों का आरोप रहा है कि सुमित राय मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच एक बड़ी बाधा बने हुए थे और कर्मचारियों की बात उच्च प्रबंधन तक ठीक से नहीं पहुंचने दे रहे थे। इसी कारण उन्हें हटाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
क्यों हटाए गए सुमित राय? दो तरह के दावे
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर फिलहाल दो तरह की बातें सामने आ रही हैं
पहला दावा यह है कि कर्मचारियों के लगातार आंदोलन और दबाव के चलते उच्च प्रबंधन ने सुमित राय को सहारा मीडिया से हटाकर कमांड ऑफिस लखनऊ अटैच कर दिया।
दूसरा दावा यह है कि खुद सुमित राय ने आंदोलन से परेशान होकर उच्च प्रबंधन से अनुरोध किया और स्वेच्छा से सहारा इंडिया में अटैच होने की मांग की।
हालांकि, सहारा प्रबंधन की ओर से अभी तक इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है।
कर्मचारियों में खुशी, मैनेजमेंट से सीधी बात का रास्ता खुला
सहारा मीडिया कर्मचारियों का कहना है कि सुमित राय के हटने के बाद अब वे सीधे सहारा इंडिया के शीर्ष प्रबंधन से संवाद कर सकेंगे। कर्मचारियों के अनुसार, यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति के ट्रांसफर का नहीं, बल्कि पूरे मीडिया यूनिट के भविष्य से जुड़ा अहम मोड़ है। कर्मचारियों ने इसे “बड़ी संस्थागत जीत” बताया है और कहा है कि अब उनकी समस्याएं बिना किसी फिल्टर के सीधे मैनेजमेंट तक पहुंचेंगी।
अगला मीडिया हेड कौन?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि सहारा मीडिया का अगला हेड कौन होगा। इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक, सहारा प्रबंधन जल्द ही मीडिया यूनिट के लिए नया नेतृत्व तय कर सकता है। कुल मिलाकर, सुमित राय को सहारा मीडिया से हटाकर लखनऊ कमांड ऑफिस भेजा जाना न सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि इसे सहारा मीडिया के इतिहास में कर्मचारियों के आंदोलन से जुड़ा एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार वेटर को राहत
4 Feb, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता की एक अदालत ने पार्क स्ट्रीट इलाके के मशहूर रेस्टोरेंट ओलिपब के वेटर शेख नसीमुद्दीन को जमानत दे दी है। उन पर आरोप था कि उन्होंने मटन स्टेक की जगह बीफ स्टेक परोस दिया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। कोलकाता के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने मंगलवार को यह जमानत दी। शेख नसीमुद्दीन को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और वे तब से न्यायिक हिरासत में थे। उन्हें मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया।
अमेरिका से डील की कीमत: रूस से तेल की खरीद कम करेगा भारत, क्या बदल रही देश की ऊर्जा नीति; समझिए इसके मायने?
अदालत में क्या हुआ?
सीजेएस कोर्ट में वेटर के वकील ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि जांच में कोई नई बात सामने नहीं आई है। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। वहीं दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने नसीमुद्दीन को जमानत दे दी।
सदन में हंगामे पर सख्ती: निलंबित सांसदों के दैनिक भत्ता से समितियों तक एंट्री पर रोक; और क्या नहीं कर पाएंगे?
अफसरों पर बृजभूषण का तंज, बोले- जरूरत पड़ी तो CM को भी रोकूंगा
4 Feb, 2026 02:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश के चरखारी विधानसभा से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत अपने बयानों को लेकर सुर्खियों पर हैं. इन दिनों वह आक्रामक मूड में नजर आ रहे हैं. पिछले दिनों उनकी मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह से भी नोकझोक हुई थी. अब उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे कहते दिखाई दे रहे हैं कि अभी तो मंत्री को रोका था, अब मुख्यमंत्री को रोकेंगे. इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को भी नसीहत देते हुए कहा कि जो अधिकारी काम नहीं करता था, उसे हम चूड़ियां और पेटीकोट पहना देते थे. इससे पहले भी बृजभूषण राजपूत कई वार विवादास्पद बयानबाजी कर चुके हैं.हाल ही में बृजभूषण राजपूत की यूपी सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के साथ नोकझोक हुई थी. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. हालांकि, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोकने के मामले में उन्होंने सफाई भी दी थी. जिसमें कहा, “मैं कोई ठेका-पट्टा या पदोन्नति नहीं मांग रहा था. हर घर नल योजना से गांव के रास्ते खराब हुए हैं. जनता का मुद्दा है. मैं इसे कमरे में नहीं, सड़क पर ही उठाऊंगा.” विधायक बृजभूषण राजपूत इन दिनों बेबाक बयानबाजी करते नजर आ रहे हैं.
क्या बोले बृजभूषण राजपूत?
बृजभूषण राजपूत का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वह 2 मिनट 3 सेकंड का है. इस वीडियो में विधायक अपने पुराने अंदाज में दिखाई दे रहे हैं और अधिकारियों, अपने विरोधियों को खुली चुनौतियां भी देते दिखाई दे रहे हैं. पहले तो उन्होंने अपने ही सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोके जाने की वजह बताई, फिर कहा, “हम भाजपा में आने से पहले बुंदेलखंड अधिकार सेना चलाते थे. जो अधिकारी काम नहीं करता था, उसे चूड़ियां और पेटीकोट पहना देते थे.” इसके अलावा उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि बंधक बनाना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है.
पुलिस गोली न चलाए तो क्या गोली खाए? जो जिस भाषा…’, सीएम योगी की अपराधियों को दो टूक
केंद्रीय मंत्री को बना चुके बंधक
विधायक ने अपने पुराने किस्से भी सुनाए. उन्होंने कहा, कांग्रेस सरकार के समय झांसी में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन को उनके ही घर पर बंधक बना लिया था. उनको तभी छोड़ा गया, जब पीएमओ से बुंदेलखंड की समस्याओं पर बातचीत का बुलावा आया. अब वो यह बयान देकर किसकी ओर इशारा करना चाह रहे थे या किसी को धमकी दे रहे थे. यह तो वही बता पाएंगे, लेकिन उनकी वीडियो आजकल काफी सुर्खियों पर है. उनके आक्रामक अंदाज की हर कोई चर्चा कर रहा है.
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मनरेगा की ‘डबरी’ और ‘बिहान’ के सहयोग से सविता बनीं आत्मनिर्भर
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लेमरू में दौड़ी जिंदगी की नई रफ्तार, संजीवनी 108 सेवा से ग्रामीणों को मिल रहा त्वरित उपचार
छत के नेट से टीम इंडिया की कैप तक का सफर
केदारनाथ धाम में उत्सव का माहौल, कल सुबह खुलेंगे कपाट
सुपर सकर मशीन द्वारा लगातार चौथे दिन तानसेन नगर में सीवर सफाई कार्य जारी
रायपुर प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में सूरजपुर बना प्रदेश में प्रथम स्थान पर
