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सुप्रीम कोर्ट की ईडी को फटकार- एजेंसी का इरादा आरोपियों को जेल में रखने का है
16 Jan, 2025 02:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मनी लॉन्ड्रिंग केसों की जांच करने वाली ईडी को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी लोगों को जेल में रखना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में नाबालिगों, महिलाओं या बीमार लोगों को जमानत देने पर पीएमएलए के प्रावधानों के विपरीत ‘अनजाने’ में दलीलें रखने पर ईडी को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एजेंसी का इरादा आरोपियों को जेल में रखने का है। वह ऐसी बेतुकी दलीलों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ईडी ने अपनी गलती मानी। ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने माना कि एक विधि अधिकारी ने दलील पेश करते समय गलती की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर आरोप गंभीर हैं तो नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। इस पर कोर्ट ने साफ कहा कि संवादहीनता का कोई सवाल ही नहीं है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी उस बात पर थी, जब ईडी की ओर से पेश एक विधि अधिकारी ने 19 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भले ही कोई व्यक्ति 16 साल से कम उम्र का हो, महिला हो, बीमार या कमजोर व्यक्ति हो, कड़ी शर्तें पीएमएलए उन पर लागू होगी। तब ईडी की ओर से पेश अधिकारी शशि बाला की जमानत याचिका का विरोध कर रहे थे। शशि बाला पर शाइन सिटी ग्रुप ऑफ कंपनीज स्कैम मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। वह पेशे से एक सरकारी शिक्षिका हैं।
मोदी सरकार ने कर दी मनमोहन सिंह के स्मृति स्थल के निर्माण की घोषणा
16 Jan, 2025 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की निधन के बाद से ही अंतिम संस्कार से लेकर स्मारक तक विवादों में रहा है। कांग्रेस पूर्व पीएम के निधन पर केंद्र सरकार को घेरती रही है। अब केंद्र सरकार ने कांग्रेस को झटका देते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के स्मृति स्थल के निर्माण की घोषणा कर दी है। केंद्र सरकार ने मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए 1.5 एकड़ जमीन चिह्नित की है। डॉ सिंह का स्मारक दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति परिसर में बनाया जाएगा। जहां पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के लिए समाधि स्थल बनाया जा रहा है।
डॉ मनमोहन सिंह के स्मारक के लिए आवास और शहरी मामलों ने चिह्नित जगह की जानकारी दी है। मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर दिवंगत प्रधानमंत्री के परिवार को इस फैसले के बारे में सूचित किया है। उनसे ट्रस्ट पंजीकृत करने का अनुरोध किया है। इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार द्वारा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के लिए एक स्मारक की घोषणा के बाद सरकारी अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्मृति का दौरा किया था।
पूर्व पीएम सिंह के परिवार से स्थल का निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया है। सूत्रों से पता चला कि उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सिंह का परिवार शोक में है, इसलिए सदस्यों ने सरकार की पेशकश पर कोई फैसला नहीं लिया है। मनमोहन सिंह की समाधि स्थल के लिए विवाद हुआ था। केंद्र की मोदी सरकार ने कांग्रेस पर दिग्गज नेता की मौत के बाद राजनीति करने का आरोप लगाया था। तो कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए ‘अपमान’ करने का आरोप लगाया था। बताया जा रहा है कि मेमोरियल के निर्माण में समय लग सकता है। केंद्र ने बताया कि परिवार से इस बात पर चर्चा की जाएगी कि वे किस तरह का स्मारक बनाना चाहते हैं। इसके बाद परिवार सरकार को सूचित करेगा।
राष्ट्रीय स्मृति को यमुना तट पर राष्ट्रपतियों, उप-राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और पूर्व राष्ट्रपतियों, पूर्व उप-उपराष्ट्रपतियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के अंतिम संस्कार और स्मारकों के लिए एक सामान्य स्थल के रूप में विकसित किया गया था। वर्तमान में, परिसर में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी, पीवी नरसिम्हा राव, चंद्रशेखर और आई के गुजराल समेत सात नेताओं के स्मारक हैं। शेष दो स्थल अब मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी के लिए निर्धारित किए गए हैं।
प्रयागराज महाकुंभ आरंभिक दो मुहूर्त में कीर्तिमान बने : चार दिन में सात करोड़ श्रृद्धालुओं ने डुबकी लगाई
16 Jan, 2025 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज। प्रयागराज महाकुंभ आरंभ हो गया है । ग्रहों की स्थिति के अनुसार इस वर्ष यह मुहूर्त 144 वर्ष बाद आया है । देश में आई साँस्कृतिक चेतना है और अमृत मुहूर्त में डुबकी लगाने केलियै जन सैलाव उमड़ पड़ा है । चार दिनों में महाकुंभ आने वाले श्रृद्धालुओ का आंकड़ा लगभग सात करोड़ के पार हो गया । अनुमान है पूरी कुंभ अवधि में यह संख्या पचास करोड़ से अधिक हो सकती है ।महाकुंभ आयोजन केवल स्नान तक सीमित नहीं है । यह आध्यात्म साधना, भक्ति, सृष्टि की सकारात्मक ऊर्जा और आत्मशक्ति से जुड़ा है । यह संसार का सबसे बड़ा सार्वजनिक समागम है । पौष पूर्णिमा 13 जनवरी से आरंभ हुआ यह महाकुंभ समागम डेढ़ माह चलेगा। यूँ तो पूरी महाकुंभ अवधि में पुण्य प्राप्ति का योग होता है । फिर भी स्नान की विशेष तिथियों में जन सैलाव उमड़ पड़ता है । आरम्भिक चार दिनों में ही संगम में डुबकी लगाने वालों का ऑकड़ा सात करोड़ पार हो गया है । इस वर्ष महाकुंभ में कुल छै विशिष्ट तिथियाँ हैं। इनमें दो विशिष्ट मुहूर्त की तिथियाँ पौष पूर्णिमा और मकर संक्राति की दोनों तिथियों पर देश विदेश के लगभग पाँच करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई थी। पहले दिन 13 जनवरी पौष पूर्णिमा को लगभग डेढ़ करोड़ और 14 जनवरी मकर संक्रांति को लगभग साढ़े तीन करोड़ तीर्थ यात्रियों ने संगम में डुबकी लगाई । इनके बाद प्रतिदिन महाकुंभ आने वाले श्रृद्धालुओ की संख्या एक करोड़ का आँकड़ा छू रही है । महाकुंभ आने वाले साधु संत और साधकों की संख्या लगभग डेढ़ लाख है । चारों शंकराचार्य पीठों, सभी अखाड़ों और प्रमुख संतों के पाँडाल लगे हैं। पाँच सौ से अधिक पंडालों में प्रतिदिन प्रवचन चल रहे हैं। लगभग पन्द्रह हजार साधु संत कल्पवास कर रहे हैं। कल्पवास की अवधि एक माह होती है । इस अवधि में साधक सात्विक और संतुलित भोजन करते हैं । निरंतर साधना और नियमित दिनचर्या द्वारा अपनी आन्तरिक ऊर्जा को जाग्रत करते हैं। योग विज्ञान के अनुसार यदि व्यक्ति मन को नियमित करके अपनी ऊर्जा शरीर ब्रह्मस्तान चक्र पर केन्द्रित करने का अभ्यास करले तो वह अंतरिक्ष की अनंत ऊर्जा से जुड़ जाता है । महाकुंभ परंपरानुसार पहले संतों के स्नान होते हैं उनके बाद जन सामान्य स्नान करते हैं। माना जाता है कि आध्यात्म साधकों और संतों के स्नान के बाद जल में अतिरिक्त ऊर्जा का संचार होता है । उस ऊर्जावान जल में स्नान करने से जन सामान्य को भी अतिरिक्त आंतरिक शक्ति अनुभव होती है। इसीलिए अखाड़ो और संतों के स्नान के बाद जन सामान्य का स्नान आरंभ होता है।
महाकुंभ की प्रमुख तिथियाँ
महाकुंभ की पूरी अवधि अमृतकाल मानी जाती है । इस अवधि में कभी भी किये गये स्नान का महत्व है । फिर भी कुछ विशिष्ट तिथियाँ होती हैं । जिनमें स्नान करना अमृत स्नान माना जाता है । इनमें पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति का शाही स्नान हो चुका है । तीसरी तिथि 29 जनवरी है । पंचांग के अनुसार उस दिन मौनी अमावस्या है । मोनी अमावस को भी संतों के स्नान के बाद जन सामान्य भी त्रिवेणी में स्नान करेंगे। पंचांग के अनुसार इस दिन आकाशीय क्षेत्र में कुछ ऐसी ऊर्जा उत्पन्न होती है जो जल को ऊर्जामय बनाती है । इसलिये इसदिन पवित्र नदियों में स्नान का महत्व है । अनुमान है मोनी अमावस को भी तीन करोड़ से अधिक श्रृद्धालु प्रयागराज आ सकते हैं। इसके बाद का मुहूर्त तिथि 3 फरवरी है । यह बसंत पंचमी का दिन है । पौराणिक आख्यानों के अनुसार यह तिथि ज्ञान की देवी माता सरस्वती का प्रकटोत्सव का दिन है । इस दिन भी पहले संतों का शाही स्नान होगा और फिर अन्य श्रृद्धालु डुबकी लगायेंगे । इसके बाद मुहूर्त तिथि 12 फरवरी है । यह माघ पूर्णिमा का दिन है । सामान्यतः यह कल्पवास की पूर्णता का दिन है । महाकुंभ अवधि में संतों और साधकों का कल्पवास पौष पूर्णिमा से आरंभ हुआ था । वह एक माह की अवधि माह पूर्णिमा को पूरी हो रही है । यद्यपि जिन संतों और साधकों ने बाद की तिथियों से अपना कल्पवास आरंभ किया है । उनका अभी निरन्तर रहेगा । लेकिन अधिकांश साधकों का कल्पवास माह पूर्णिमा को पूरा हो जायेगा । इसके बाद अमृत स्नान की तिथि 26 फरवरी है । यह महाशिवरात्रि का दिन है । शिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की तिथि है । यही महाकुंभ के समापन की तिथि है । अखाड़ों और संत साधकों का महाकुंभ वास इसी दिन पूर्ण हो जाता है और वे प्रातः स्नान के बाद मध्यान्ह तक विदा हो जाते हैं। लेकिन सामान्य श्रृद्धालुओ के समूह बने रहते हैं। अनुमान है इस वर्ष महाकुंभ के औपचारिक समापन के बाद कमसेकम एक सप्ताह और भी जन सामान्य की उपस्थिति बनी रहेगी ।
सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन
उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी जी और उनकी टीम को इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के समागम महाकुंभ में श्रृद्धालुओं के आने का अनुमान संभवतः पहले हो गया था । इसको ध्यान में रखकर कुंभ क्षेत्र का विस्तार किया और इसे ध्यान में रखकर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रबंध किये। इन दोनों कार्यों केलिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है । पूरे महाकुंभ क्षेत्र में हवाई निरीक्षण और भीड़ प्रबंधन के लिए 11 टेथर्ड ड्रोन के साथ ही एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाये गए हैं । टेथर्ड ड्रोन का सिस्टम नियंत्रण का दायित्व एडीजी रैंक के अधिकारियों को सौंपी गई है । टेथर्ड ड्रोन केबल ग्राउंड स्टेशन से जुड़े होते हैं । इन केबल्स के माध्यम से ही ड्रोन्स तक बिजली आपूर्ति की जाती है । बिजली प्रवाह निरंतर हो इसकी व्यवस्था भी की गई है । इस अतिरिक्त प्रबंध के चलते सामान्य ड्रोन की तुलना में इनकी कार्य क्षमता और समयावधि भी अधिक होती है। ये ड्रोन्स बिना रुके लगातार 12 घंटे तक निगरानी करते हैं । ये 120 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं और 3 किलोमीटर क्षेत्र को कवर कर सकते हैं। नवीनतम थर्मल और आईआर कैमरों से सुसज्जित ये ड्रोन दिन और रात, दोनों समय 4K लाइव फुटेज के साथ 36x ऑप्टिकल और 8x डिजिटल जूम क्षमता से भी लैस हैं.चार टेथर्ड ड्रोन यूपी पुलिस के सुरक्षा विभाग ने तैनात किए हैं जबकि चार यातायात विभाग और तीन आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) तैनात किए हैं। इन ड्रोन्स का उपयोग भीड़ प्रबंधन से लेकर यातायात प्रबंधन, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, आपातकालीन प्रतिक्रिया के साथ ही मैनपावर के प्रबंधन के लिए किया जा रहा है।
एंटी ड्रोन सिस्टम भी तैनात
भीड़ प्रबंधन के साथ पूरे महाकुंभ क्षेत्र में सुरक्षा एवं निगरानी के भी विशिष्ट प्रबंध किये गये हैं। पूरे उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से सुरक्षा सैनिक बुलाये गये हैं। इसके अतिरिक्त आधुनिक संयंत्रों के साथ विशिष्ट बल भी तैनात किये गये हैं। इसमें निगरानी केलिये ड्रोन का उपयोग भी किया जा रहा है। साथ ही हवाई खतरे से निपटने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनात किया गया है। इनकी मानिटरिंग केलिये विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है । संपूर्ण मेला क्षेत्र में तीन स्थलों पर एंटी-ड्रोन सिस्टम भी तैनात किए गए हैं । इस बार कुछ संदिग्ध ड्रोन भी देखे गये थे।इसलिये इस बार एन्टी ड्रोन सिस्टम भी तैनात किये गये हैं, जो आठ किलोमीटर के दायरे में दुश्मन ड्रोन का पता लगाकर उनके सिग्नल जाम करने में सक्षम हैं । यह एन्ट्री ड्रोन सिस्टम पूरे महाकुंभ परिक्षेत्र के अतिरिक्त एक रडार-आधारित सिस्टम भी तैनात किया गया है जो 15 किमी दूर तक किसी संदिग्ध ड्रोन का पता लगा सकता है और तीन किलोमीटर के भीतर उन्हें निष्क्रिय कर सकता है । मीडिया के समाचारों के अनुसार महाकुंभ आरंभ होने के आरंभिक सप्ताह में मेला क्षेत्र की सीमा में अब तक नौ अवैध ड्रोन निष्क्रिय किए जा चुके हैं। इनमें से छह ड्रोन तो अकेले 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन ही निष्क्रिय किए गए । इनमें से एक ड्रोन रेड जोन के करीब निष्क्रिय किया गया था। यूपी पुलिस के टेथर्ड ड्रोन के संचालन की निगरानी एडीजी रैंक के अधिकारी के साथ ही एसपी ट्रेनिंग और एसपी सुरक्षा कर रहे हैं जबकि यातायात विभाग के ड्रोन की निगरानी एडीजी (ट्रैफिक) और आईजी ट्रैफिक को सतत निगरानी करने , एटीएस के ड्रोन की निगरानी एडीजी एटीएस के जिम्मे है। पूरे कुंभ क्षेत्र में 60 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं। पूरे क्षेत्र को गूगल से नेविगेट किया जा रहा है।
स्वच्छता के विशिष्ट प्रबंध
महाकुंभ स्नान केलिये इस वर्ष महाकुंभ में प्रतिदिन आने वाले श्रृद्धालुओ का औसत एक करोड़ से अधिक है । इतने बड़े समूह के समन्वय के साथ स्वच्छता भी एक चुनौतीपूर्ण होता है । प्रतिदिन कितने नरियल कितनी फूल मालाएँ और कितनी पूजन सामग्री त्रिवेणी संगम में प्रभावित किये जा रहे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने सफाई की व्यवस्था भी इतनी प्रभावी की है जिससे पानी एक दम स्वच्छ दीख रहा है । महाकुंभ क्षेत्र में सफाई टोलियाँ चौबीस घंटे काम रही हैं । महाकुंभ आरंभ होने के पहले सप्ताह में लगभग आठ करोड़ से अधिक श्रृद्धालु डुबकी लगा चुके हैं । इतने समूह के डुबकी लगाने के बाद भी पानी साफ है । इस साफ सफाई के लिए सैकड़ों कार्यकर्ता और कर्मचारी तैनात किये गये हैं । संगम में 40 नावों के साथ सफाई कर्मचारी चौबीस घंटे तैनात हैं । वे हाथों में जाल लेकर सतत सक्रिय रहते हैं । जैसे ही उन्हें फूल, नारियल या कोई वस्तु दिखते ही वहाँ तैनात कर्मचारी उस वस्तु को जाल में फंसाकर निकाल लेते हैं । संगम प्रवाहित जल की स्वच्छता के साथ संगम के तट पर सफाई के लिए भी अतिरिक्त टीमें तैनात की गई है। सफाई टीमों केलिये एक विशिष्ट ड्रेस भी तैयार की गई है । इसके पीछे बड़े अक्षरों में "मैदान साफ" लिखा है ।
विदेशों से भी श्रृद्धालु आये
महाकुंभ का यह योजन केवल भारत वासियों केलिये श्रृद्धा, आस्था अथवा आकृषण का केन्द्र नहीं अपितु विदेश से आने वाले श्रृद्धालुओ की भी बड़ी संख्या है । इनमें दोनों प्रकार के तीर्थ यात्री हैं। जो पर्यटक समूह के रूप में कुंभ देखने आये हैं वे भी और श्रृद्धा सहित अपने परिवार सहित कुंभ स्नान के लिये आये विदेशी यात्री भी। इसी क्रम में गुरुवार 16 जनवरी को 10 देशों के 21 सदस्यीय दल ने संगम में डुबकी लगाई। इस दल के आवास की व्यवस्था अरैल क्षेत्र स्थित टेंट सिटी में की गई थी । यह परिसर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने अति विशिष्ट यात्रियों के लिये निर्मित किया है। जो पूरी कुंभ अवधि तक रहेगा । इस दल के सदस्यों ने हेलीकॉप्टर से महाकुंभ क्षेत्र का अवलोकन भी किया । इस अंतर्राष्ट्रीय दल में फिजी, फिनलैंड, गयाना, मलेशिया, मॉरीशस, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधि शामिल हैं। इस दल के अतिरिक्त नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका, ब्राजील, जर्मनी, थाईलैंड, जापान, इंग्लैंड, अमेरिका और स्पेन जैसे देशों के यात्रियों ने भी संगम में डुबकी लगाई ।
विदेशी यात्रियों की प्रतिक्रायाएँ
अनेक विदेशी पर्यटकों ने अपने अनुभव मीडिया को भी साँझा किये । रूस की जेरेमी पिछले सात सालों से सनातन धर्म के अनुसार जीवन जी रहीं हैं। उन्होंने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई और मंदिरों के दर्शन भी किये । उन्होंने कुंभ स्नान करना आनंद दायक अनुभव बताया और कहा कि सनातन धर्म तर्कशील है। इसमें अंधविश्वास नहीं अपितु अनुभव सिद्ध परंपराएँ हैं। एक श्रद्धालु जोनाथन पहली बार कुंभ में आए । उन्होंने कहा कि "उन्हे बहुत अच्छा लगा, यहां के लोग बहुत प्यारे हैं"। उन्होंने शाकाहारी भोजन किया । भोजन, मंदिर तथा तीर्थस्थलों और मंदिरों को अद्भुत बताया । पौलेंड से आईं सुश्री क्लाउडिया ने कुंभ स्नान को जीवन को जीवन का सबसे अलग एवं सुखद बताया । स्पेन से अपने मित्रों के साथ आये जोंस ने बताया की स्नान के बाद उन्होने अतिरिक्त ऊर्जा अनुभव की । यात्रा को आनन्द दायक बताया । इस दल में स्पेन, ब्राजील और पुर्तगाल के उनके मित्र हैं । साउथ अफ्रीका के केपटाउन से आईं निक्की ने भी अपना अनुभव अद्भुत बताया । उन्होंने बताया कि स्नान के बाद उन्होंने अपने भीतर अतिरिक्त शक्ति अनुभव की। उन्होने इतने लोगों की इतनी अच्छी व्यवस्था केलिये स्थानीय नागरिकों और प्रशासन की भी प्रशंसा की ।जापान से आए मसाजी ने बताया कि वह दूसरी बार कुंभ स्नान को आए हैं । यहां आकर जो प्रसन्नता मिलती है उसे शब्दों से नहीं कहा जा सकता । उन्होने कहा "मैं हिंदू नहीं हूं, इसके बावजूद यह मेरे लिए अद्भुत अनुभव है । जापान से आई एक अन्य श्रद्धालु मिसाकी ने भी माना कि उन्हें यहां का शांति का अनुभव हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया से आईं श्रद्धालु मंजरिका एक शिक्षक हैं । वे भारत घूमने आईं हैं। उन्होंने महाकुंभ की चर्चा सुनी और यहाँ आईं। उन्होंने कहा जैसा अनुभव यहाँ मिला वो कहीं नहीं।
रेल की पटरियों के किनारे पवन ऊर्जा से हवा में बनेगी बिजली
16 Jan, 2025 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारतीय रेलवे जल्द ही रेलवे की पट्रियों के किनारे बड़े पैमाने पर विंड टरबाइन लगाने जा रही है। रेल की पटरी पर जब ट्रेन 100 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार पर चलती हैं। ऐसी स्थिति में टरबाइन पर लगे हुए पंखे बड़ी तेजी के साथ घूमेंगे, और उससे पवन ऊर्जा रेलवे को बड़े पैमाने पर उपलब्ध होगी।
एक उच्च स्तरीय बैठक में पिछले साल विंड टरबाइन लगाने के बारे में विचार हो चुका है। इसका पायलट प्रोजेक्ट भी तैयार कर लिया गया था। 2023 में पश्चिम रेलवे ने वर्टिकल एक्सिस टरबाइन के माध्यम से 110 किलोवाट बिजली तैयार की थी। जोनल रेलवे ने ऐसे पांच टरबाइन लगाए थे। यह परीक्षण पूरी तरह सफल सिद्ध हुआ है।
भारतीय रेलवे अब 2030 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए देशभर की रेलवे पटरीयों के किनारे विंड टरबाइन के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य पूरा करने जा रही है। एक बहुत बड़ी सफलता हासिल करने रेलवे आगे बढ़ रही है।
पीएम मोदी ने मुंबई के खारघर में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े श्री राधा मदन मोहन जी मंदिर का किया उद्घाटन
15 Jan, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवी मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवी मुंबई के खारघर में इस्कॉन के प्रयासों से निर्मित श्री श्री राधा-मदनमोहनजी मंदिर का उद्घाटन किया। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। इस अवसर पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि ज्ञान और भक्ति की महान भूमि पर इस्कॉन के प्रयासों से श्री श्री राधा-मोहन मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है।
इस्कॉन के संतों से अपार प्रेम और स्नेह मिला
मंदिर परिसर में इस्कॉन के 5 हजार से अधिक संतों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस्कॉन के संतों का अपार प्रेम और स्नेह ही है कि मुझे ऐसे अलौकिक अनुष्ठान में अपनी भूमिका निभाने का पुण्य मिला। राधा मोहन मंदिर की रूपरेखा, इसका स्वरूप, अध्यात्म और विज्ञान की पूरी परंपरा इसमें दिखाई देती है। नई पीढ़ी की रुचि और आकर्षण के अनुरूप यहां महाभारत, रामायण पर आधारित संग्रहालय भी बनाया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर परिसर आस्था के साथ-साथ भारत की चेतना को समृद्ध करने का पवित्र केंद्र बनेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भर में फैले इस्कॉन के अनुयायी भगवान कृष्ण की भक्ति के धागे से बंधे हैं। एक और धागा है जो इन सभी को एक-दूसरे से जोड़े रखता है, जो हर भक्त को 24 घंटे मार्गदर्शन करता रहता है। यह श्री स्वामी प्रभुपाद के विचारों का धागा है।
भारत एक असाधारण और अद्भुत भूमि है
पीएम मोदी ने कहा कि भारत एक असाधारण और अद्भुत भूमि है। यह सिर्फ भौगोलिक सीमाओं से बंधा हुआ जमीन का टुकड़ा नहीं है। भारत एक जीवंत भूमि है, एक जीवंत संस्कृति है, एक जीवंत परंपरा है। उन्होंने कहा कि इस संस्कृति की चेतना इसकी आध्यात्मिकता है। भारत को समझने के लिए सबसे पहले आध्यात्मिकता को आत्मसात करना होगा। जो लोग दुनिया को भौतिक दृष्टि से देखते हैं, वे भारत को विभिन्न भाषाओं और प्रांतों के समूह के रूप में देखते हैं। जब आप खुद को सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हैं, तो आपको भारत का विशाल रूप दिखाई देता है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारी आध्यात्मिक संस्कृति का आधार सेवा है। अध्यात्म में लोगों की सेवा और जनसेवा एक हो जाती है। श्री कृष्ण ने हमें सच्ची सेवा का अर्थ बताया है। उन्होंने बहुत ही सुंदर तरीके से समझाया कि सच्ची सेवा वह है जिसमें आपका कोई स्वार्थ न हो।
धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के मूल में सेवा भावना
पीएम मोदी ने कहा कि सेवा भावना हमारे धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के मूल में है और इस्कॉन जैसी विशाल संस्था भी इसी सेवा भावना से काम करती है। कुंभ में इस्कॉन सेवा के कई बड़े काम कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे संतोष है, हमारी सरकार भी इसी सेवा भावना के साथ पूरे समर्पण के साथ देशवासियों के हित में निरंतर काम कर रही है। हर घर में शौचालय बनाना, हर गरीब महिला को उज्ज्वला गैस कनेक्शन देना, हर घर में नल का पानी पहुंचाना, गरीबों को पांच लाख तक का मुफ्त इलाज देना, बेघरों को पक्के मकान देना, ये इसी सेवा भावना से, इसी समर्पण भावना से किए गए काम हैं। जो मेरे लिए हमारी महान सांस्कृतिक परंपरा का प्रसाद है। सेवा भावना ही सच्चा सामाजिक न्याय लाती है, सच्ची धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे मंदिर और धार्मिक स्थल सदियों से सामाजिक चेतना के केंद्र रहे हैं, हमारी सरकार कृष्ण सर्किट के जरिए देश के अलग-अलग धार्मिक स्थलों को जोड़ रही है> इस्कॉन के तत्वावधान में युवा सेवा और समर्पण की भावना से राष्ट्रहित में काम करेंगे। हमें संवेदनशील मनुष्यों का समाज बनाना है। ऐसा समाज जो मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़े, जहां अपनत्व का विस्तार हो। इस्कॉन खारघर के प्रमुख सूरदास जी ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि इस्कॉन से आपका पुराना नाता रहा है। आप राजाओं के राजा तो हैं ही, साथ ही ऋषि भी हैं।
'इस तरह का आचरण बर्दाश्त नहीं', सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को फटकार, आखिर क्यों?
15 Jan, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। स्थापित कानून के विपरीत पक्ष पेश करने पर केंद्र को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र की ओर से कानून के विपरीत पक्ष पेश करने के आचरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी पीएमएलए के तहत एक महिला आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की है। जिसमें पीएमएलए में महिलाओं को जमानत के कड़े प्रावधानों से छूट दिए जाने के बावजूद ईडी ने विरोध किया था। जस्टिस एएस ओका ने कहा कि वह जमानत की हकदार हैं। उनकी जमानत पर आपत्ति क्यों दर्ज कराई गई? जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि बिल्कुल वह जमानत की हकदार हैं। कृपया हमें जवाब दाखिल करने दें। गलत संचार के कारण कुछ भ्रम की स्थिति थी।
कैसे चलेगा- सुप्रीम कोर्ट का कहना
जस्टिस ओका ने कहा कि हम मानते हैं कि हमें पूरा कानून नहीं पता, लेकिन कई बार हमें कानून के कुछ प्रावधान पता होते हैं। अगर कोर्ट के सामने पेश होने वाला सरकारी वकील इसी आधार पर आगे बढ़ेगा तो कैसे चलेगा? ऐसे पक्ष पर क्या विचार किया जाना चाहिए? कोर्ट ने कहा कि ऐसी दलीलें नहीं सुनी जाएंगी। एएसजी मेहता ने कहा कि ऐसा इरादा नहीं था, लेकिन मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया सामग्री देखें। महिला को सीआरपीसी के साथ-साथ पीएमएलए के तहत भी विशेष उपचार मिलता है, लेकिन यहां महिला खुद मास्टरमाइंड है। यही मैं दिखाने की कोशिश कर रहा हूं। हमें शुक्रवार तक का समय दें। तब तक हम आपके सामने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने महिला की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
स्कूलों में बम की फर्जी धमकी देने का आरोपी निकाला 12वीं का छात्र, अफजल गुरु से लिंक
15 Jan, 2025 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दिल्ली के 400 स्कूलों में बम की फर्जी धमकी देने वाले को दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को पकड़ लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी 12वीं का छात्रा है। उसकी फैमिली एक एनजीओ के संपर्क में थी, जो अफजल गुरु की फांसी का विरोध कर रहा था।
दरअसल, दिल्ली में 2024 में मई से लेकर दिसंबर तक 50 बम की धमकियां भेजी गईं। इसमें सिर्फ स्कूल ही नहीं अस्पताल, एयरपोर्ट और एयरलाइन कंपनियां भी शामिल हैं। इस महीने 4 बार स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है।
मामले के सामने आते ही भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेसवार्ता कर कहा कि सभी को पता है कि आप का इसतरह के एनजीओ से गहरा संबंध है, जिन्होंने अफजल गुरु की फांसी का विरोध किया था। फरवरी 2015 में अफजल गुरु की बरसी पर टुकड़े-टुकड़े के नारे लगाए गए थे और आप ने महीनों तक उस फाइल को बंद रखा। आप को सामने आकर इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
वहीं दिल्ली पुलिस ने बताया कि मामले में एक राजनीतिक दल का नाम सामने आया स्पेशल पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) मधुप तिवारी ने प्रेसवार्ता कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारी टीमों ने 8 जनवरी को आए ई-मेल के बाद नाबालिग को ट्रैक किया। ई-मेल भेजने वाला नाबालिग था, इसलिए टीम ने फोरेंसिक जांच के लिए उसका लैपटॉप और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने नाबालिग के भेजे 400 धमकी भरे ईमेल ट्रैक किए। छात्र के पिता के बैकग्राउंड की भी जांच की। वे एक एनजीओ के साथ काम कर रहे हैं। जांच में सामने आया हैं कि यह एनजीओ अफजल गुरु की फांसी के विरोध से जुड़ा था और एक राजनीतिक दल की भी मदद कर रहा है। पुलिस ने राजनीतिक दल का नाम नहीं जाहिर किया है। पुलिस अब इस एंगल पर जांच कर रही है कि इस बच्चे के पीछे कहीं कोई और नहीं जो मेल करवा रहा है।
भाजपा नेता त्रिवेदी ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी के माता-पिता ने गुरु की दया याचिका का समर्थन किया था। इन दोनों के बीच एक सीधा दिखाई देता है। क्या आप इसमें शामिल है? इन एनजीओ के लोग कौन हैं और क्या उनका आम आदमी पार्टी से संबंध है?
मैं अरविंद केजरीवाल से अपील करता हूं कि वे सामने आएं और आप को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन लोगों के साथ उनका क्या संबंध है। अगर नाबालिग यह सब कर रहे हैं, तब इसतरह के एनजीओ देश के बच्चों के दिमाग में किस तरह का जहर घोल रहे हैं? हम आप से स्पष्ट जवाब चाहते हैं। अगर उन्होंने साफ जवाब नहीं दिया, तब संदेह और गहरा हो जाएगा।
एलओसी के पास लैंड माइन ब्लास्ट, 6 सेना के जवान घायल
15 Jan, 2025 10:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू । जम्मू-कश्मीर के राजौरी में एलओसी के पास लैंड माइन ब्लास्ट में सेना के 6 जवान घायल हुए हैं। धमाका भवानी सेक्टर के मकरी इलाके में हुआ। इस दौरान सेना के जवान खंबा फोर्ट के पास पेट्रोलिंग कर रहे थे। घायलों को आर्मी अस्पताल भेजा गया है। धमाके की जांच की जा रही है। बताया जा रहा गोरखा राइफल्स के जवानों की एक टुकड़ी सुबह करीब 10.45 बजे रा
आपातकाल के बंदियों को प्रतिमाह 20,000 रुपए पेंशन देगी ओडिशा सरकार
15 Jan, 2025 09:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने 1975-77 में आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों के लिए 20 हजार रुपए मासिक पेंशन और मुफ्त स्वास्थ्य सेवा को मंजूरी दे दी है। राज्य गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक यह पेंशन 26 जून 1975 से 21 मार्च, 1977 तक मीसा बंदी या डीआईआर या डीआईएसआईआर के तहत जेल में बंद व्यक्तियों को प्रदान की जाएगी। इसमें कहा गया है कि पेंशन जीवित व्यक्तियों (जो 1 जनवरी, 2025 तक जीवित थे) को ही स्वीकृत की जाएगी, भले ही वे जेल में कितने भी समय तक रहे हों।
गृह विभाग ने कहा कि वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रावधानों के मुताबिक मुफ्त चिकित्सा उपचार का लाभ उठा सकते हैं। ये लाभ 1 जनवरी, 2025 से शुरू होने वाली अवधि के लिए प्रदान किए जाएंगे। 1 जनवरी, 2025 से पहले की अवधि के लिए कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन दोगुनी करने के अलावा सीएम मोहन माझी ने 2 जनवरी को घोषणा की थी कि आपातकाल के दौरान मीसा के तहत गिरफ्तार किए गए लोगों को 20 हजार रुपए मासिक पेंशन दी जाएगी।
आपातकाल को लोकतंत्र के सबसे काले दौरों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि मीसा कानून के तहत कारावास झेलने वाले देशभक्तों के सम्मान में हमारी सरकार पेंशन, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और मुफ्त बस पास मुहैया कराएगी। देश के तीन राज्यों ने आपातकाल के दौरान मीसा या डीआईआर बंदियों के लिए पेंशन शुरू की है। मध्य प्रदेश जहां आपातकाल पीड़ितों को 15,000 से 25,000 रुपए प्रति वर्ष दे रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ 5,000 से 25,000 प्रति माह और राजस्थान 20 हजार रुपये प्रति माह दे रहा है।
अगस्त 2019 में सीएम नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली पिछली बीजू जनता दल सरकार ने मधुबाबू पेंशन योजना के तहत आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को 500 रुपए पेंशन देने की घोषणा की थी, लेकिन इसकी अल्प राशि को लेकर आलोचना हुई थी।
परीक्षा पे चर्चा में पीएम से मिलने 3.25 करोड़ लोगों ने कराया पंजीयन
15 Jan, 2025 08:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली,। पीएम नरेंद्र मोदी के साथ परीक्षा पे चर्चा का हिस्सा बनने के लिए इस साल रिकॉर्ड संख्या में छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों ने अपना पंजीकरण कराया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक अभी तक इसमें शामिल होने के लिए 3.25 करोड़ से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराए हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
परीक्षा पे चर्चा में रजिस्ट्रेशन कराने वालों में बड़ी संख्या में विदेशी छात्र भी शामिल हैं। रजिस्ट्रेशन की यह प्रक्रिया चालू है लेकिन 14 जनवरी, मंगलवार को पंजीकरण का आखिरी दिन था। पीएम मोदी की उल्लेखनीय पहल, परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), परीक्षा से जुड़े तनाव को कम करने का तरीका सिखाती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह पहल परीक्षा को जश्न के पर्व में परिवर्तित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में निरंतर प्रगति कर रही है।
गौरतलब है कि इस चर्चा में पीएम मोदी परीक्षा से जुड़े छात्रों के कई प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इसके साथ ही पीएम छात्रों को यह मार्ग भी दिखाते हैं कि कैसे बिना तनाव और दबाव के परीक्षाओं में शामिल होना है। पीपीसी 2025 के 8वें संस्करण ने भारत और विदेशों के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से 3.25 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ एक अभूतपूर्व उपलब्धि अर्जित की है।
पीपीसी 2025 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण माईगोवडॉटइन पर 14 दिसंबर 2024 से शुरु हुआ और 14 जनवरी 2025 तक जारी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला यह इंटरैक्टिव कार्यक्रम शिक्षा का एक बहुप्रतीक्षित उत्सव बन गया। पीपीसी के अनुरूप, 12 जनवरी 2025 से 23 जनवरी 2025 तक स्कूल स्तर पर कई आकर्षक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों के समग्र विकास को प्रोत्साहन देना और परीक्षाओं को उत्सव के रूप में मनाने के लिए प्रेरित करना है। इन गतिविधियों के जरिए से शिक्षा को दबावपूर्ण गतिविधि के बजाय एक यात्रा के रूप में मनाना सिखाया जाता है।
CISF की दो नई बटालियनों को मिली मंजूरी, इतने हजार युवाओं को मिलेगी नौकरी- गृह मंत्रालय
14 Jan, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने हवाई अड्डों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के लिए 2,000 से अधिक कर्मियों वाली दो नई बटालियनों को मंजूरी दे दी है। नई बटालियन के गठन से बल के कर्मियों की संख्या करीब 2 लाख हो जाएगी। इस फैसले से न सिर्फ सीआईएसएफ की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।
2,000 से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार
सीआईएसएफ के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा, "गृह मंत्रालय (एमएचए) ने दो नई बटालियनों के गठन को मंजूरी देकर सीआईएसएफ के महत्वपूर्ण विस्तार को मंजूरी दी है।" उन्होंने कहा, "हाल ही में मंजूर महिला बटालियन के साथ इस फैसले से बल की क्षमता बढ़ेगी, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और 2,000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।" प्रवक्ता ने कहा कि मंजूरी सोमवार को मिल गई है।
पिछले साल महिला बटालियन को मंजूरी मिली थी
पिछले साल के अंत में बल के लिए महिला बटालियन को मंजूरी दी गई थी। बल में वर्तमान में 12 रिजर्व बटालियन हैं, जिनमें से प्रत्येक में 1,025 कर्मी हैं। आंतरिक सुरक्षा से संबंधित तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों का एक पूल बनाकर CISF की “बढ़ती” मांगों को पूरा करने में भी नई बटालियन महत्वपूर्ण होंगी। देश के 68 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा के अलावा, 1969 में गठित CISF परमाणु और एयरोस्पेस क्षेत्र में कई प्रतिष्ठानों और ताजमहल और लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्मारकों को आतंकवाद विरोधी सुरक्षा प्रदान करता है।
पैसेंजर ट्रेन के पांच डिब्बे पटरी से उतरे, यात्रियों की सांसें अटकीं, अफरातफरी मची
14 Jan, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: विल्लुपुरम रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया। यहां यात्रियों को ले जा रही एक पैसेंजर ट्रेन अचानक पटरी से उतर गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार पैसेंजर ट्रेन के पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि आवाज सुनते ही ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस हादसे के बाद अन्य ट्रेनों के लिए रास्ता साफ कर दिया गया। वहीं ट्रेन में बैठे अन्य यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
टला हादसा
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि विल्लुपुरम से पुडुचेरी जा रही एक पैसेंजर ट्रेन के पांच डिब्बे विल्लुपुरम रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गए। तेज आवाज सुनते ही ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया। ट्रेन रुकने से बड़ा हादसा टल गया। ट्रेन रुकने के बाद सभी यात्रियों को ट्रेन से सुरक्षित निकाल लिया गया। रेलवे के कर्मचारी और इंजीनियर मौके पर पहुंचकर पटरी से उतरी ट्रेन की मरम्मत करने में सक्रियता से जुटे वहीं, विल्लुपुरम रेलवे पुलिस ने भी मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
सुबह 5.30 बजे हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि पैसेंजर ट्रेन करीब 500 यात्रियों को लेकर विल्लुपुरम से पुडुचेरी जा रही थी। ट्रेन सुबह 5.25 बजे विल्लुपुरम से रवाना हुई थी। ट्रेन एक मोड़ पार कर रही थी, तभी उसका एक डिब्बा पटरी से उतर गया। ट्रेन के डिब्बे के पटरी से उतरने से इतनी तेज आवाज हुई कि लोको पायलट ने उसे सुन लिया और तुरंत ट्रेन रोक दी। इस हादसे की वजह से विल्लुपुरम रूट पर सुबह 8.30 बजे तक ट्रेन सेवाएं बाधित रहीं। आपको बता दें कि विल्लुपुरम-पुडुचेरी मेमू एक छोटी दूरी की ट्रेन है, जो करीब 38 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
मकर संक्रांति पर महानिर्वाणी अखाड़े के संतों ने किया अमृत स्नान- महाकुंभ मेला
14 Jan, 2025 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज: महाकुंभ के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति पर मंगलवार सुबह से ही अखाड़ों के संतों का स्नान जारी है. सुबह 10 बजे तक एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई. मेला प्रशासन ने जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़े के संतों ने संगम में अमृत स्नान किया. अमृत स्नान के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर चेतन गिरि जी महाराज ने कहा कि प्रयागराज में हर 12 साल में पूर्ण कुंभ लगता है और यह महाकुंभ 144 साल बाद आ रहा है जब 12 पूर्ण कुंभ हो रहे हैं. महाकुंभ में स्नान का मौका भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है. उन्होंने बताया कि महानिर्वाणी अखाड़े के 68 महामंडलेश्वर और हजारों संतों ने अमृत स्नान किया।
महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के बाद तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा और आनंद अखाड़े के संतों ने अमृत स्नान किया. इसमें सबसे आगे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी चल रहे थे और उनके पीछे अखाड़े के ध्वज और फिर पूज्य देवता कार्तिकेय स्वामी और सूर्य नारायण पालकी पर सवार थे।
इनके पीछे नागा संन्यासियों का समूह था। इन सबके बीच निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि रथ पर सवार थे। अमृत स्नान के बाद निरंजनी अखाड़े के महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि हम 7:15 बजे स्नान घाट पर पहुंचे और 7:45 बजे हमने स्नान किया और घाट खाली कर दिया। आधे घंटे में निरंजनी अखाड़े और आनंद अखाड़े के हजारों साधु-संतों ने स्नान किया। निरंजनी अखाड़े के 35 महामंडलेश्वर और हजारों नागा संन्यासियों ने अमृत स्नान किया।
निरंजनी अखाड़े की साध्वी और पूर्व मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि घाट पर युवाओं की भीड़ यह बताती है कि युवाओं में सनातन धर्म के प्रति कितनी आस्था है। जब भी किसी ने सनातन धर्म को चुनौती दी, तो युवा और संत समाज ने आगे आकर धर्म की रक्षा की। निरंजनी अखाड़े और आनंद अखाड़े के बाद सबसे बड़ी संख्या में जूना अखाड़ा और आह्वान अखाड़े के हजारों संतों ने अमृत स्नान किया। इनमें जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि रथ पर सवार होकर स्नान घाट पर आए और उनके साथ हजारों नागा संन्यासी भी थे। एक के बाद एक तेरह अखाड़ों का अमृत स्नान शाम चार बजे तक पूरा हो जाएगा।
फलों को खाने का सबसे अच्छा समय होता है सुबह का
14 Jan, 2025 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । हेल्थ एक्सपर्ट अक्सर लोगों को अपनी डाइट में फलों को शामिल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, कई लोग यह नहीं जानते कि फल कब और कैसे खाना चाहिए ताकि उनका अधिकतम लाभ मिल सके। डायटीशियन्स के अनुसार, फलों को खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का है। सुबह का समय इसलिए उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इस वक्त हमारा पाचन तंत्र सक्रिय होता है। रातभर कोई भोजन न करने के कारण पाचन तंत्र ने पर्याप्त आराम किया होता है और अब उसे ताजगी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस समय फल खाने से शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स मिलते हैं, जो न केवल ताजगी लाते हैं बल्कि पाचन को भी दुरुस्त रखते हैं। फलों में पानी की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। सुबह के समय फल खाने से न केवल शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि पूरे दिन के लिए ताजगी भी बनी रहती है। वहीं, एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि रात के समय फल खाना अच्छा नहीं होता।
रात में हमारी पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, और फल जल्दी पच नहीं पाते हैं। इस वजह से पेट में ऐंठन, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, फलों में प्राकृतिक शुगर भी होती है, जिसे रात में पचने में अधिक समय लगता है, और इससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है। यही नहीं, रात में फल खाने से ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है। डायटीशियन्स के मुताबिक, जिन लोगों को पाचन समस्याएं, जैसे गैस, अपच, या एसिडिटी होती हैं, उन्हें रात के समय फल नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा, डायबिटीज के रोगियों को भी रात में फल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उनका ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। जो लोग रात में भारी भोजन करने की आदत रखते हैं, उनके लिए भी फल खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे नींद में खलल और पाचन समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसलिए, एक्सपर्ट की सलाह है कि फल का सेवन सुबह से लेकर दोपहर तक किया जाए, ताकि शरीर उन्हें बेहतर तरीके से पचा सके और उनका पूरा पोषण मिल सके। बता दें कि फलों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इनमें प्राकृतिक पोषक तत्वों का भंडार होता है। फलों में विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को जरूरी एनर्जी देने के साथ-साथ बीमारियों से लड़ने की ताकत भी प्रदान करते हैं।
गले की खराश, सर्दी-जुकाम और खांसी के लिए रामबाण है शहद और काली मिर्च
14 Jan, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । शहद और काली मिर्च दोनों ही प्रकृति के अद्भुत उपहार हैं, जो अपनी औषधीय गुणों के लिए सदियों से प्रसिद्ध रहे हैं। जहां शहद में एंटीऑक्सिडेंट्स, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, वहीं काली मिर्च में पिपेरिन होता है, जो मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करता है।
इन दोनों का संयोजन किसी जादू से कम नहीं है, और यह आपकी सेहत के लिए कई तरीके से लाभकारी साबित हो सकता है। अगर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को और अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं, तो शहद और काली मिर्च का कॉम्बिनेशन आपके लिए एक बेहतरीन उपाय हो सकता है। सुबह-सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में एक चमच शहद और एक चुटकी काली मिर्च पाउडर मिलाकर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है। यह मिश्रण न केवल वजन घटाने में सहायक है, बल्कि आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ डिटॉक्सिफिकेशन में भी मदद करता है। शहद और काली मिर्च के मिश्रण का सेवन इम्यून सिस्टम को भी बूस्ट करता है। शहद में मौजूद फ्लावोनॉयड्स और काली मिर्च में पिपेरिन आपके शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम करते हैं। इसके साथ ही, यह दोनों तत्व गले की खराश, सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी कारगर साबित होते हैं।
इसके अलावा, शहद और काली मिर्च का यह मिश्रण गट हेल्थ को भी सुधारता है। यह आपकी पाचन प्रक्रिया को तेज करता है और आपके पेट को साफ रखने में मदद करता है। काली मिर्च के एंटी-बैक्टीरियल गुण आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारने का काम करते हैं, जिससे आपका गट हेल्थ बेहतर होता है। शहद और काली मिर्च का संयोजन हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यह रक्त संचार को बेहतर करता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके अतिरिक्त, यह आपके शरीर से अतिरिक्त चर्बी को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे आपका दिल स्वस्थ रहता है।
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