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जेल में हिंसा: पुंछ में कैदियों के बीच मारपीट, एक की हालत नाजुक
10 Jul, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुंछ : जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिला जेल में कैदियों के बीच मारपीट का मामला सामने आया. मारपीट के दौरान कश्मीर का एक कैदी नजीर अहेमद गम्भीर रूप से घायल हो गया. उसे इलाज के लिए राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल पुंछ लाया गया. जहां पर उस का इलाज चल रहा है. डॉक्टरों ने उसकी हालत स्थिर बतायी है.
क्यों हुई मारपीटः मिली जानकारी के अनुसार घटना बुधवार की है. पुंछ जिला जेल में उस समय तनाव उतपन्न गया जब कैदियों के बीच किसी मामले को लेकर कहा सुनी शुरू हो गई. बाद में यह विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच गया. कैदियों के बीच मारपीट शुरू हो गई. इस दौरान जेल में अफरातफरी मच गयी. बड़ी संख्या में कैदी एक दूसरे से मारपीट कर रहे थे. वहीं कुछ कैदी, छुपकर बैठे थे.
सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग कियाः मारपीट की सूचना जेल अधिकारियों को मिली. तुरंत मौके पर पहुंचे. सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण में लाने और हिंसा को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप किया. दोनों पक्षों को अलग किया. इस दौरान सुरक्षा बलों ने हलका बल का प्रयोग किया. कैदियों को सुरक्षित किया गया. हालांकि, इस दौरान मारपीट के कारण कुछ कैदी घायल हो गये थे.
जेल के बाहर सुरक्षा दुरुस्तः मारपीट के दौरान एक कैदी गम्भीर रूप से घायल हो गया. उसे तुरंत इलाज के लिए राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया. इस घटना के बाद हालत पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और जिला पुलिस को जेल परिसर और जेल के बहार बड़ी संख्या में तैनात किया गया. इस घटना पर जेल प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की जानकारी साझा नहीं की गयी.
घटना की जांच शुरूः जेल सूत्रों के अनुसार जेल में हुई मारपीट के कारणों का पता लगाने के लिए एक आंतरिक जांच शुरू कर दी गयी. कोई सुरक्षा चूक तो नहीं हुई है. घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी स्थिति का आकलन करने के लिए जेल का दौरा किया. राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद शफीक ने कहा कि कैदी का इलाज चल रहा है. उसकी हालत फिलहाल स्थिर है.
पश्चिम बंगाल बना भारत बंद का केंद्र, वामपंथी दलों ने किया जोरदार प्रदर्शन
9 Jul, 2025 07:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। देशभर में 9 जुलाई को अलग-अलग सरकारी क्षेत्रों के 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल कर रहे। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने भारत बंद का आह्वान किया है। भारत बंद से देश में सार्वजनिक सेवाओं में बड़ी दिक्कतें आई है। इस कारण कामकाज सहित लोगों के आवागमन और बैंकिंग कार्यों पर बड़ा असर दिखा है। इस बीच देशभर में भारत बंद का असर भी दिखने लगा है। इसका असर सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में दिखाई दे रहा है। यहां सिलीगुड़ी में सरकारी बसों का परिचालन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा वामपंथी दलों के संगठनों ने कोलकाता के जाधवपुर में पैदल मार्च निकालकर भारत बंद में हिस्सा लिया।
जाधवपुर में एक बस ड्राइवर ने कहा, ये लोग सही बात कह रहे हैं (भारत बंद का जिक्र करते हुए), लेकिन हमें अपना काम करना है। हम मजदूर हैं, इसलिए हम बंद का समर्थन करते हैं। हम लोगों ने हेलमेट इसलिए पहना है ताकि कुछ होने पर हम सुरक्षित रहें। बता दें कि जाधवपुर में बस स्टैंड के पास भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। साथ ही बस चालकों ने सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट पहन रखा है। बता दें कि भारत बंद के बावजूद जाधवपुर में निजी और सरकारी बसें चलाई जा रही हैं।
जाधवपुर में पुलिस की तैनाती को बढ़ा दिया गया है। बावजूद इसके वामपंथी दलों के यूनियन के सदस्य जाधवपुर रेलवे स्टेशन में घुस गए और केंद्र सरकार की कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। कुछ जगहों में छोटी-मोटी आगजनी भी हुई है। हालांकि हालात अभी काबू में हैं।
महिसागर नदी हादसा: पुल गिरने से 10 की मौत, प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्त किया दुख
9 Jul, 2025 06:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वडोदरा: गुजरात के वडोदरा के पास बुधवार को बड़ा एक हादसा हुआ. आणंद जिले के मुजपुर के पास महिसागर नदी पर बना 'गंभीरा पुल' अचानक ढह गया. इससे चार वाहन नदी में गिर गए. इस हादसे में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. वहीं, 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इसके साथ-साथ राहत बचाव दल ने 5 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है. घटना के बाद पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए और बचाव अभियान में मदद की.
वडोदरा जिले के पादरा और आणंद के गंभीरा इलाकों को जोड़ने वाला एक पुल आज सुबह ढह गया. इस पुल का इस्तेमाल मध्य गुजरात से सौराष्ट्र जाने वाले वाहनों के लिए मुख्य मार्ग के रूप में किया जाता था. पुल के ढहने का मुख्य कारण रखरखाव में कमी बताया जा रहा है. मृतकों की पहचान नहीं हो पायी है. इस हादसे से इलाके में लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष है.
10 लोगों की मौत, 5 को बचाया गया
हादसे की खबर मिलते ही आस पास के गांव के लोगों की भीड़ जुट गई. फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम ने तुरंत कार्रवाई की. नदी से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. हादसे का शिकार हुए वाहनों के नदी में होने की आशंका है और बचाव कार्य अभी भी जारी है.
राहत एवं बचाव कार्य
दुर्घटना के समय पुल के ऊपर से कई वाहन गुजर रहे थे. स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस, दमकल और बचाव दल को सूचित किया और बचाव अभियान शुरू किया गया. वडोदरा और आणंद जिलों के अधिकारी मौके पर पहुंच गए. हादसे में एक बोलेरो, एक जीप समेत चार वाहन नदी में गिरे. हादसे के बाद एक टैंकर को पुल पर लटका हुआ दिखा. लोगों का आरोप है कि कई दशकों से इस पुल की मरम्मत नहीं की गई थी. रखरखाव में कमी के चलते पुल जर्जर हो गया था.
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया कि महिसागर नदी पर स्थित गंभीरा पुल का एक हिस्सा ढहने से पाँच से छह वाहन नदी में गिर गए. यह पुल मध्य गुजरात और राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्रों को जोड़ता है. उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण 1985 में हुआ था और जरूरत पड़ने पर समय-समय पर इसका रखरखाव किया जाता था. मंत्री ने कहा, 'घटना के पीछे के सही कारण की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तकनीकी विशेषज्ञों को घटनास्थल पर पहुँचने और पुल ढहने के कारणों की जाँच करने का निर्देश दिये हैं.
तस्वीरों में दो खंभों के बीच पुल का पूरा स्लैब ढहा हुआ दिखाई दे रहा है. एक ट्रक किनारे पर खतरनाक रूप से लटका हुआ है. पादरा पुलिस निरीक्षक विजय चरण ने पहले बताया था कि यह घटना सुबह करीब 7.30 बजे हुई. 900 मीटर लंबे गंभीरा पुल में 23 खंभे हैं.
पीएम मोदी ने हादसे पर दुख जताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुल के ढहने की घटना पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि हादसे में जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है वह बेहद दुखद है. उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. इसके अलावा पीएमओ ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की. घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएँगे.
गंभीरा पुल का महत्व
आणंद जिले के गंभीरा गांव और वडोदरा जिले के पादरा तालुका के मुजपुर को जोड़ने वाला गंभीरा पुल, दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र को जोड़ने वाला एक पुल है. ये वर्तमान में दहेज विशेष आर्थिक क्षेत्र, जंबूसर फार्मा विशेष आर्थिक क्षेत्र, सूरत, हजीरा और मुंबई को सौराष्ट्र से जोड़ता है. इसके साथ ही, सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के लोग तटीय राजमार्ग पर स्थित गंभीरा पुल का उपयोग मुंबई, पुणे, नासिक सहित दक्षिण भारत जाने के लिए करते हैं.
गंभीरा पुल के ढहने से वैकल्पिक मार्गों पर हजारों लग्जरी कारों, ट्रकों और वाहनों का दैनिक यातायात बढ़ने की संभावना है. मुंबई और दक्षिण गुजरात को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे के साथ-साथ पुराने अहमदाबाद-वडोदरा राजमार्ग पर यातायात का भार बढ़ जाएगा. लगभग 45 साल पुराने गंभीरा पुल का नाम आणंद जिले में महिसागर नदी के तट पर स्थित अंकलाव गाँव के नाम पर रखा गया है.
गंभीरा पुल वर्तमान में पादरा, जंबूसर, आमोद, वागरा और भरूच जिलों में विभिन्न विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में फलते-फूलते उद्योगों और औद्योगिक प्रगति में एक प्रमुख भूमिका निभाता है. गंभीरा पुल के ढहने से सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के बीच की दूरी 150 किलोमीटर बढ़ जाएगी. गंभीरा पुल के ढहने के कारण, अधिकारियों ने वाहनों को वडोदरा से वासद मार्ग से जाने का निर्देश दिया है.
जगुआर फाइटर जेट क्रैश: चूरू में विमान गिरा, दोनों पायलट शहीद, गांव में फैला मलबा
9 Jul, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राजस्थान के चूरू में भारतीय वायु सेना का जगुआर फाइटर जेट क्रैश हो गया है। इस हादसे में विमान के पायलट और को-पायलट शहीद हो गए हैं। जिस जगह प्लेन क्रैश हुआ, वहां बड़े इलाके में फाइटर जेट का मलबा बिखरा पड़ा है।
यह हादसा बुधवार (9 जुलाई) को दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर हुआ। भारतीय वायु सेना ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की है।
चूरू एसपी जय यादव ने बताया- राजलदेसर थाना क्षेत्र के गांव भाणूदा में प्लेन क्रैश हुआ है। इसमें दो लोगों की मौत हुई है। मलबे के पास से बुरी तरह क्षत-विक्षत शव के टुकड़े मिले हैं। बताया जा रहा है कि हादसे से पहले तकनीकी कारणों से पायलट इजेक्ट नहीं कर पाए। पिछले 5 महीनों में देश भर में तीन जगुआर क्रैश हो चुके हैं।
सूरतगढ़ से उड़ा था ट्रेनी जगुआर जेट
सेना के सूत्रों के मुताबिक यह जगुआर फाइटर जेट श्रीगंगानगर के पास सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ा था। यह जेट टू सीटर था, ट्रेनिंग के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने पहले विमान की गड़गड़ाहट सुनी, फिर जोरदार धमाके की आवाज आई। इसके बाद प्रशासन को घटना की जानकारी दी गई। घटना के ठोस कारणों का पता फिलहाल नहीं चला है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। घटनास्थल पर सेना का एक हेलिकॉप्टर भी पहुंचा है, इस हेलिकॉप्टर को सड़क पर लैंड कराया गया।
'सिंदूर' फ्लाईओवर के रूप में नया जीवन पाएगा 150 वर्ष पुराना मुंबई ब्रिज
9 Jul, 2025 05:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: दक्षिण मुंबई में पुनर्निर्मित 'कर्नाक' फ्लाईओवर, 'सिंदूर' फ्लाईओवर के नाम से जाना जाएगा. मुंबई नगर निगम ने बदल दिया है. निगम प्रशासन ने कहा कि कर्नाक फ्लाईओवर को दिया गया 'सिंदूर' नाम भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किए गए सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' से प्रेरित है. नगर निगम प्रशासन ने बताया कि इस पुल का उद्घाटन गुरुवार, 10 जुलाई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे.
कर्नाक फ्लाईओवर किसके नाम पर था: यह पुल दक्षिण मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ता है. पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले इस पुल को पहले कर्नाक ब्रिज के नाम से जाना जाता था. इस पुल का नाम 1839 से 1841 तक मुंबई प्रांत के तत्कालीन गवर्नर जेम्स रिवेट कर्नाक के नाम पर रखा गया था. अब इस पुल का नाम भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम पर 'सिंदूर ब्रिज' रखा गया है.
समय पर पूरा हुआ पुल का निर्माण: सिंदूर फ्लाईओवर, मस्जिद बंदर रेलवे स्टेशन के पास स्थित है. यह पी. डिमेलो रोड को जोड़ता है. अब इस पुल पर दोनों तरफ से यातायात संभव होगा. अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर के नेतृत्व में इंजीनियरों ने इस पुल का निर्माण किया है. अभिजीत बांगर ने कहा कि नगर निगम के पुल विभाग के इंजीनियरों ने समय पर सिंदूर फ्लाईओवर का निर्माण पूरा किया.
2022 में ध्वस्त किया गया था पुल: नगर निगम प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पुल छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस रेलवे स्टेशन, मस्जिद बंदर और मोहम्मद अली रोड पर यातायात के लिए महत्वपूर्ण है. लगभग 150 साल पुराने ब्रिटिशकालीन कर्नाक ब्रिज को यातायात के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया था. मध्य रेलवे की रिपोर्ट के बाद, इस पुल को यातायात के लिए बंद कर दिया गया. अगस्त 2022 में इसे ध्वस्त कर दिया गया.
पुल की लंबाई 328 मीटर: इसके बाद, नए पुल का डिज़ाइन तैयार किया गया. इस नए डिज़ाइन को मध्य रेलवे ने मंज़ूरी दे दी. इसके बाद, पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ. पुल की कुल लंबाई 328 मीटर है, जिसमें से 70 मीटर रेलवे सीमा के भीतर है. पुल पर दो स्टील के गर्डर हैं, जिनमें से प्रत्येक का वज़न 550 मीट्रिक टन है. ये गर्डर 70 मीटर लंबे, 26.5 मीटर चौड़े और 10.8 मीटर ऊंचे हैं. आरसीसी पिलरों पर रखे गए हैं.
कैसे रखा गया गार्डरः दक्षिणी गर्डर को 19 अक्टूबर, 2024 को सफलतापूर्वक रखा गया था. उत्तरी गर्डर को 26 और 30 जनवरी, 2025 को रखा गया. इसके लिए मध्य रेलवे ने एक विशेष मेगा ब्लॉक लिया था. इस दौरान 550 टन वज़नी गर्डर को रेलवे ट्रैक से 58 मीटर ऊपर उठाया गया. मुंबई नगर निगम के अनुसार, बाद में इसे लगभग 2 मीटर नीचे लाकर आरसीसी पिलरों पर ठीक से रखा गया.
“CDS की चेतावनी: एक साथ सक्रिय हैं चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश – भारत को घेरने की साजिश”
9 Jul, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
CDS Gen Chauhan: सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के कार्यक्रम में कहा कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच अपने-अपने हितों को लेकर बढ़ता झुकाव भारत की स्थिरता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने 7-10 मई के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि यह शायद पहली बार था जब दो परमाणु हथियार संपन्न देश सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल हुए।
पाकिस्तान-चीन का सैन्य गठजोड़ भारत के लिए खतरा
सीडीएस चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले पांच वर्षों में अपने 70-80 प्रतिशत हथियार और उपकरण चीन से हासिल किए हैं। इसके अलावा, चीनी सैन्य कंपनियों की पाकिस्तान में वाणिज्यिक देनदारियां भी हैं, जिससे रणनीतिक जोखिम बढ़ गया है। हिंद महासागर क्षेत्र में आर्थिक संकट और बाहरी शक्तियों के बढ़ते दखल ने भारत के लिए नई कमजोरियां खड़ी कर दी हैं।
सामाजिक और आंतरिक सुरक्षा की चुनौती
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में सामाजिक और आंतरिक सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारत में बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुजातीय समाज होने के कारण सामाजिक एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि आंतरिक रूप से देश कमजोर होगा, तो बाहरी खतरे और अधिक प्रभावी होंगे। इसलिए आंतरिक सुरक्षा को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना चाहिए।
बांग्लादेश में अस्थिरता से बढ़ सकता है खतरा
सीडीएस चौहान ने कहा कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच किसी भी तरह का रणनीतिक सहयोग भारत की सुरक्षा पर सीधा असर डालेगा। उन्होंने चेताया कि इन तीनों देशों के साझा हित भारत के खिलाफ एक सामरिक चुनौती बन सकते हैं, खासकर तब जब बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति अस्थिर बनी हुई है और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण ले चुकी हैं।
जनरल चौहान की यह चेतावनी स्पष्ट करती है कि भारत को अपनी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीति को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संभावित गठजोड़ से उत्पन्न खतरों का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके।
“भक्ति की राह पर कदम बढ़े: कैलाश यात्रियों का दूसरा जत्था टनकपुर पहुंचा”
9 Jul, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंपावत: उत्तराखंड में पांच साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा का दूसरा जत्था टनकपुर पहुंच गया है. इस जत्थे में देशभर के 48 यात्री शामिल हैं. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी भी शामिल रहीं. वहीं, टनकपुर पहुंचने पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. जहां सभी यात्री कुमाऊनी संस्कृति से रूबरू हुए.
पहले जत्थे में शामिल रहे 45 यात्री: बता दें कि पहली बार हल्द्वानी के काठगोदाम की जगह टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हुई है. इससे पहले पहला जत्था बीती 4 जुलाई को टनकपुर पहुंचा था. जिन्हें अगले दिन यानी 5 जुलाई को सीएम पुष्कर धामी ने अगले पड़ाव के लिए रवाना किया था. इस दल में 45 कैलाश मानसरोवर यात्री शामिल रहे.
पहले जत्थे में शामिल रहे 48 यात्री शामिल: वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रियों के दूसरे जत्थे में देश के विभिन्न राज्यों से 48 यात्रियों शामिल हुए हैं. जिसमें 34 पुरुष और 14 महिला यात्री ऐतिहासिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के साक्षी बनेंगे. इनमें पश्चिम बंगाल, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, असम, गुजरात समेत अन्य राज्यों के यात्री शामिल हैं.
मीनाक्षी लेखी भी पहुंचीं: कैलाश मानसरोवर यात्रियों के दूसरे जत्थे के साथ पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी भी टनकरपुर पहुंचीं. वहीं, कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों की ओर से यात्रियों के ठहराव, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण और यात्रा मार्गदर्शन के समुचित व्यवस्था की गई है.
इस रूट से होकर जाएंगे यात्री: कैलाश मानसरोवर यात्रा का दूसरा दल टनकपुर में रात्रि विश्राम के बाद 9 जुलाई की सुबह अपनी अगली यात्रा चंपावत-लोहाघाट से होते हुए गुंजी पहुंचेगा. जिसके बाद नाभिढांग, लिपुलेख दर्रे से होते हुए कैलाश मानसरोवर पहुंचेगा. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से स्वास्थ्य सहायता, ठहराव, वाहन सुविधा जैसी अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है.
कैलाश मानसरोवर यात्रियों का दूसरा जत्था 8 जुलाई की शाम को टनकपुर टीआरसी पहुंचा. जहां कुमाऊं मंडल विकास निगम अधिकारियों और मां पूर्णागिरि पर्यावरण संरक्षण समिति ने उनका फूल माला पहनाकर भव्य स्वागत किया. जिसके बाद यात्रियों ने पर्यावरण संरक्षण समिति के साथ टीआरसी परिसर में एक पौधा मां के नाम अभियान के तहत लगाया.
उन्होंने देवभूमि को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ राज्य बनाने के लिए हर वर्ग को आगे आने का संदेश भी दिया. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया. जिसमें कैलाश मानसरोवर यात्रियों के समक्ष बच्चों ने कुमाऊंनी लोक गीतों और देश भक्ति गीतों पर सुंदर प्रस्तुति दी. वहीं, पारंपरिक लोक गीतों पर सभी यात्री जमकर झूमे.
“भूस्खलन से कांपा उत्तराखंड: क्या टेक्टोनिक मूवमेंट और मानवीय हस्तक्षेप बना असली खतरा?”
9 Jul, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून : उत्तराखंड में मानसून के दस्तक के बाद से ही लगातार बारिश का सिलसिला जारी है. जिसके चलते भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं. मौजूदा समय में भारी बारिश होने के चलते प्रदेश के तमाम जगहों पर आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है. जो शासन-प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसी बीच भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने प्रदेश के चार जिलों में भूस्खलन को लेकर अलर्ट जारी किया है. साथ ही इन जिलों में विशेष सावधानियां बरतने की बात कही गई है.
मानसून सीजन में भारी भूस्खलन: हर साल मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं काफी अधिक बढ़ जाती हैं. क्योंकि भूस्खलन होने की वजह से ना सिर्फ सड़क मार्ग बाधित होते हैं या फिर क्षतिग्रस्त होते हैं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान और ह्यूमन लॉस भी काफी अधिक होता है. यही वजह है कि आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मशीनें पहले ही तैनात की गई हैं, ताकि भूस्खलन के बाद तत्काल मार्गों को आवागमन के लिए खोला जा सके. हालांकि, प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन का होना कोई नई बात नहीं है बल्कि हर साल मानसून सीजन के दौरान भूस्खलन की घटनाएं काफी अधिक बढ़ जाती हैं.
तमाम जिलों में बारिश से भूस्खलन की आशंका: उत्तराखंड में 10 जुलाई तक भारी बारिश की संभावना जताते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है. इसी बीच भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग ने 7 और 8 जुलाई को प्रदेश के चार जिलों टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली में भूस्खलन की आशंका जताते हुए पूर्वानुमान जारी किया है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की ओर से 6 जुलाई को भूस्खलन को लेकर जारी पूर्वानुमान के अनुसार, चमोली जिले के चमोली सब डिवीजन, रुद्रप्रयाग जिले के रुद्रप्रयाग व ऊखीमठ सब डिवीजन, टिहरी जिले के घनसाली, नरेंद्रनगर एवं धनोल्टी सब डिवीजन और उत्तरकाशी जिले के डुण्डा एवं चिन्यालीसौड़ सब डिवीजनों में 8 जुलाई को भूस्खलन की आशंका जताई थी.
भूस्खलन के लिए तमाम वजह जिम्मेदार: उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में कुछ स्थान ही भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के सभी पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका बनी हुई है. वर्तमान समय में तमाम ऐसे भूस्खलन क्षेत्र चिह्नित हैं, जहां आए दिन भूस्खलन होता रहता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में भूस्खलन के लिए कोई एक वजह जिम्मेदार नहीं है, बल्कि भूस्खलन के लिए तमाम वजह जिम्मेदार होती हैं. जिसमें, क्लाइमेट फैक्टर, एंथ्रोपोजेनिक एक्टिविटी, एक्सेसिव रेनफॉल, नेचुरल एक्टिविटी और एनवायरमेंटल डिग्रेडेशन जैसे फैक्टर्स शामिल है. इन्हीं तमाम फैक्टर की वजह से प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका बनी हुई है.
प्रदेश में भूस्खलन की घटनाएं: राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, साल 1988 से साल 2024 के बीच प्रदेश में करीब 15,000 से अधिक भूस्खलन की घटनाएं हुई है. जिसके चलते काफी अधिक जानमाल का नुकसान भी हुआ है. साल 2018 में 496 भूस्खलन की घटनाएं हुई थी. इसके साथ ही, साल 2019 में 291 भूस्खलन, साल 2020 में 973 भूस्खलन, साल 2021 में 354 भूस्खलन, साल 2022 में 245 भूस्खलन, साल 2023 में करीब 1323 भूस्खलन की घटनाएं हुई थी. इसी तरह साल 2024 में करीब 1813 भूस्खलन की घटनाएं हुई थी. वैज्ञानिक भी इस बात को मान रहे हैं कि भूस्खलन पर तत्काल लगाम लगाना मुश्किल है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कर इनका ट्रीटमेंट किया जा सकता है.
मानसून सीजन के दौरान ही अधिकांश भूस्खलन होते हैं. इसी को देखते हुए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (GSI) ने अर्ली वार्निंग सिस्टम को स्टैबलिश किया है. ऐसे में जब मौसम विभाग भारी बारिश का अलर्ट जारी करता है तो जीआईएस भी भूस्खलन को लेकर अलर्ट जारी कर देता है. लेकिन ये समझने की जरूरत है कि भूस्खलन होने के कुछ वजहों की शुरुआत पहले ही हो चुकी होती है, जिसका असर अब देखने को मिलता है. ऐसे में किसी भी भूस्खलन के वजह को जानने के लिए उससे संबंधित सभी वजहों को देखना पड़ेगा. ऐसा भी कई बार देखा गया है कि जब पहाड़ को सड़क बनाने के लिए काटा जाता है तो वो स्लोप अनसटेबल हो जाता है. ऐसे में रैन फॉल के अलावा एंथ्रोपोजेनिक एक्टिविटी (मानवजनित गतिविधियां) भी एक बड़ा फैक्टर है.
डॉ. एस सी वैदेस्वरन, वैज्ञानिक, डब्ल्यूआईएचजी
पहाड़ों पर भूस्खलन की ये भी वजह: वैज्ञानिक डॉ. एस सी वैदेस्वरन ने बताया कि अगर किसी जगह पर भूस्खलन ज्यादा होता है तो उसके पीछे की एक वजह ये भी है कि इंडियन प्लेट्स लगातार मूव कर रही हैं. क्योंकि जहां एक और इंडियन प्लेट्स मूव कर रहे हैं तो ऐसे में रॉक्स में मौजूद फॉल्ट्स भी एक्टिव रहते हैं, जो भूस्खलन के रूप में नीचे आ जाते हैं. हालांकि मानसून एक बड़ा अहम रोल अदा करता है. वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन भी भूस्खलन के लिए अहम रोल अदा करती है. ऐसे में भूस्खलन मिटिगेशन के लिए तमाम तरीके हैं जिसके जरिए भूस्खलन को रोका जा सकता है.
सीएम धामी ने कही ये बात: वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदाओं को आने से रोकना किसी के बस में नहीं है, लेकिन आपदाओं के असर को काम किया जा सकता है. आपदा उत्तराखंड के लिए एक बड़ी चुनौती हैं, जिसमें भूस्खलन, बादल फटना और अत्यधिक जल भराव शामिल है. जिसका हर साल अलग अलग प्रकार से सामना करना पड़ता है, जिसको देखते हुए मॉक ड्रिल भी की गई है. साथ ही तमाम समीक्षा बैठकें भी की गई हैं, ताकि आपदाओं के असर को कम से कम किया जा सके.
चारधाम यात्रा रूट पर एक्टिव भूस्खलन जोन: चारधाम यात्रा रूट पर भूस्खलन जोन सिरदर्द बनते जा रहे हैं. वहीं ऋषिकेश से बदरीनाथ यात्रा रूट पर कुल 54 लैंडस्लाइड जोन हैं. जिसमें से ऋषिकेश से श्रीनगर के बीच 17 लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं. रुद्रप्रयाग से जोशीमठ के बीच 32 लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किया गया है. जोशीमठ से बदरीनाथ के बीच 5 लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए गए हैं. गौरीकुंड से केदारनाथ मार्ग पर 4-5 संभावित भूस्खलन जोन हैं, जहां पहले भी कई बार भूस्खलन की घटना हो चुकी हैं.ऊखीमठ क्षेत्र में दो भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं और सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच करीब तीन भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं.
प्रदेश में भूस्खलन जोन ने बढ़ाई टेंशन: वहीं प्रदेश में भी कई भूस्खलन जोन हैं, जिन्हें चिन्हित किया गया है. जिसमें नैनीताल जिले में 120 भूस्खलन जोन चिन्हित हैं, जिसमें 90 क्रॉनिक जोन भी शामिल हैं. चंपावत जिले में टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 15 संवेदनशील भूस्खलन जोन हैं. गढ़वाल मंडल में पौड़ी जिले में भूस्खलन के लिहाज से 119 जोन चिन्हित किए गए हैं. वहीं बागेश्वर जिले में सुमगढ़, कुंवारी, मल्लादेश, सेरी, बड़ेत समेत 18 क्षेत्र भूस्खलन के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं.
मसूरी में भी भूस्खलन जोन सक्रिय: टिहरी जिले के ऋषिकेश से कीर्ति नगर के बीच हाईवे पर 15 भूस्खलन जोन चिन्हित हैं. उत्तरकाशी जिले में 16 सक्रिय भूस्खलन जोन अतिसंवेदनशील चिन्हित किए गए हैं. पिथौरागढ़ जिले के पिथौरागढ़-तवाघाट रूट पर करीब 17 भूस्खलन क्षेत्र चिन्हित हैं. देहरादून- मसूरी मार्ग पर गलोगी के पास बीते कुछ सालों से एक नया भूस्खलन जोन सक्रिय हुआ है.
चमोली जिले में 13 भूस्खलन जोन: अल्मोड़ा जिले में तीन चिन्हित भूस्खलन जोन हैं, जिसमे रानीखेत-रामनगर मोटर मार्ग पर टोटाम, अल्मोड़ा-धौलछीना मोटर मार्ग पर कसाड़ बैंड और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मकड़ाऊ शामिल है. चमोली जिले में 13 भूस्खलन जोन, जिसमें लामबगड़ के पास खचड़ा नाला, गोविंदघाट के पास कटैया पुल, हनुमान चट्टी के पास रडांग बैंड, भनेर पाणी, चाड़ा तोक, क्षेत्रपाल, पागल नाला, सोलंग, गुलाब कोटी, छिनका, चमोली चाड़ा, बाजपुर और कर्णप्रयाग क्षेत्र है.
“मौसम अलर्ट: MP, Odisha सहित कई जिलों में रेड/ऑरेंज चेतावनी – जानें आज बारिश की स्थिति”
9 Jul, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मौसम विभाग के अनुसार देश के मध्य भाग और उससे सटे हुए पूर्वी भाग और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भारी बारिश के आसार हैं. इसके साथ साथ पूर्वी मध्य प्रदेश में अत्यंत भारी वर्षा होने का अनुमान है.
इसे देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है. साथ ही पश्चिम मध्य प्रदेश, गुजरात, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में आज भारी बारिश होने का अनुमान है. वहीं, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में अत्यंत अधिक वर्षा होने की संभावना है. इनमें से कई इलाकों के लिए आईएमडी ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम का हाल
पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाके, ओडिशा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़ में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई.
इसी तरह दक्षिण भारत में तमिलनाडु, केरल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, तटीय कर्नाटक, मध्य महाराष्ट्र, गुजरात क्षेत्र, विदर्भ, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, सौराष्ट्र और कच्छ, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अलग-अलग स्थानों पर सामान्य से भारी बारिश हुई.
वहीं, पूर्वोत्तर भारत के असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम में अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा हुई. इनमें से कई जगहों पर आंधी भी आई
मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियाँ
पूर्वी और मध्य भारत
पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाके, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा में अलग-अलग स्थानों पर अगले दो- तीन दिनों के दौरान सामान्य से अत्यधिक वर्षा होने की उम्मीद है. इस दौरान कुछ क्षेत्रों में तेज हवा चलने की भी संभावना है. साथ ही कुछ इलाकों में घने बादल छाए रहेंगे.
उत्तर-पश्चिम भारत
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा चंडीगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान के साथ ही पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और मैदानी इलाकों अलगे दो-तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी बारिश होने का अनुमान है. इस दौरान कई स्थानों पर गरज के साथ बिजली गिरने की संभावना है
पश्चिम भारत
गुजरात, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर अगले दो से तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी वर्षा की संभावना है. इस दौरान कुछ जगहों पर वर्षा के साथ गरज, बिजली तेज हवा चलने की भी संभावना है.
पूर्वोत्तर भारत
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में शामिल असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में में अधिकांश स्थानों अगले 7 दिनों के दौरान सामान्य से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है. इनमे से कई स्थानों पर गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना है.
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत
तेलंगाना, तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अलग-अलग स्थानों में अगले दो से तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी वर्षा की संभावना है. इनमें से कुछ क्षेत्रों में गरज के साथ छिटपुट वर्षा और बिजली गिरने की संभावना है.
“देशव्यापी हड़ताल: 26 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर, भारत बंद ने रोका बैंक, ट्रांसपोर्ट, डाक सेवाएं”
9 Jul, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के 10 व्यापारिक संगठनों के एक संयुक्त संघ ने सरकार की नीतियों खासकर नए लेबर कोड और निजीकरण के विरोध में आज (9 जुलाई) राष्ट्रव्यापी हड़ताल या भारत बंद का आह्वान किया है. इस बंद में बैंक, ट्रांसपोर्ट, पोस्टल, कोयला खनन और निर्माण क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है. वहीं, शैक्षणिक संस्थानों खासकर स्कूल, कॉलेज के खुले होने की उम्मीद की जा रही है. ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि आज भारत बंद में 26000 रुपये न्यूनतम वेतन और पुरानी पेंशन योजना जैसी मांगों के लिए भी आवाज उठाई जाएगी. भारत बंद का आयोजन करने वाली ट्रेड यूनियनों को उम्मीद है कि करीब 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी, किसानों और कृषि मजदूर राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे. कुछ राज्यों में ट्रेन सेवा बाधित किए जाने की आशंका है. प्रदर्शनकारी पटरियों पर धरना दे सकते हैं.
वामपंथी दलों ने 'भारत बंद' में हिस्सा लिया
वामपंथी दलों के संगठनों ने कोलकाता के जादवपुर में पैदल मार्च निकालकर 'भारत बंद' में हिस्सा लिया. 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने 'भारत बंद' का आह्वान किया है. उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है, जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं.
कोलकाता के जादवपुर में भी प्रदर्शन
कोलकाता के जादवपुर 8बी बस स्टैंड के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और 'भारत बंद' के बावजूद जादवपुर में निजी और सरकारी बसें चल रही हैं, इसलिए बस चालक सुरक्षा के लिए हेलमेट पहने हुए हैं. 'भारत बंद' का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया है, जिनका आरोप है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं. 'बंद' के तहत, सरकारी सार्वजनिक परिवहन, सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयाँ, बैंकिंग और बीमा सेवाएँ, डाक संचालन, कोयला खनन और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्र प्रभावित होने की संभावना है.
तमिलनाडु में सफाई कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
तमिलनाडु के थूथुकुडी निगम के सफाई कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि उनके पास दस्ताने नहीं हैं, वे फेस मास्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना काम करते हैं और उन्हें पर्याप्त वेतन भी नहीं दिया जाता है.
पटना के लिए रवाना हुए राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में शामिल होने के लिए पटना रवाना हुए.
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दिखा बंद का असर
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगियों के संयुक्त मंच द्वारा भारत बंद के आह्वान का असर पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में सुबह के समय देखने को मिला. सिलीगुड़ी में सड़कों पर इक्का- दुक्का वाहन नजर आए. खासकर सरकारी बसों की आवाजाही नहीं देखी गई.
बिहार के जहानाबाद रेलवे स्टेशन पर आरजेडी छात्र शाखा के सदस्यों ने रेल रोकी
बिहार के कुछ हिस्सों में भारत बंद का असर सामने आया है. आरजेडी की छात्र शाखा के सदस्यों ने 'भारत बंद' का समर्थन करते हुए जहानाबाद रेलवे स्टेशन पर रेल की पटरियां जाम लगाया. बता दें कि 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगियों के संयुक्त मंच द्वारा भारत बंद का आह्वान किया गया है.
केरल में निपाह का खतरा मंडराया, कोरोना के बाद फिर बढ़ी चिंता
8 Jul, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोच्चि। कोरोना वायरस के बाद दक्षिण भारत के केरल में निपाह के संभावित प्रकोप की आंशका जाहिर की गई है। यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में और दूषित भोजन या सीधे मानव-से-मानव संपर्क के माध्यम से फैलता है। वायरस के लिए ऊष्मायन अवधि पांच से 14 दिनों तक होती है जिसके बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं। राष्ट्रीय संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने कहा कि निपाह वायरस में मृत्यु दर बहुत अधिक है जो मनुष्यों में 40 से 75 प्रतिशत तक है।
हाल ही में मलप्पुरम के चेट्टियारंगडी की 18 वर्षीय लड़की की मौत की पुष्टि पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) ने निपाह संक्रमण के कारण हुई थी, जबकि पलक्कड़ जिले के थचनट्टुकारा की 38 वर्षीय महिला भी इस वायरस से संक्रमित पाई गई थी। केरल में वायरस के फिर से उभरने के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में निपाह वायरस से संक्रमित दो व्यक्तियों की संपर्क सूची में 383 लोग हैं। इनमें से 12 का मलप्पुरम जिले में इलाज चल रहा है, जिनमें से पांच आईसीयू में हैं, जबकि चार अन्य का पलक्कड़ जिले में आइसोलेशन में इलाज चल रहा है।
वायरस से बचाव का नहीं कोई टीका
इस बीच राष्ट्रीय एकीकृत रोग निगरानी नियंत्रण कार्यक्रम के प्रमुख अन्वेषक डा पुरोहित ने कहा कि इस वायरस का अभी कोई टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए लोगों से यह आग्रह किया जाता है कि वे सावधानी बरतें। उनका भोजन चमगादड़ों से दूषित न हो। गौरतलब है कि केरल में निपाह संक्रमण का पहला मामला 2018 में आया था जिसके बाद 17 लोगों की मृत्यु हुई थी। इनमें 18 मामलों में निपाह वायरस की पुष्टि हुई थी।
क्या हैं लक्षण?
निपाह के लक्षण इन्फ्लूएंजा वायरस के समान हैं। इसमें बुखार, सिरदर्द, बेहोशी और मतली शामिल हैं। कुछ मामलों में घुटन, पेट दर्द, उल्टी, थकान और धुंधली दृष्टि जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। लक्षण शुरू होने के दो दिन बाद ही मरीज कोमा में जा सकता है। इसके कारण मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले एन्सेफलाइटिस के संक्रमण की आशंका भी अधिक होती है।
ऐसे करें बचाव
डॉ. पुरोहित ने इस बात पर जोर दिया कि वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद खुद को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है। रोगी से दूरी बनाए रखना और हाथों को अच्छी तरह से साफ करना और धोना महत्वपूर्ण है। कपड़े, बर्तन और शौचालय या बाथरूम में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे बाल्टी और मग को अलग से साफ किया जाना चाहिए और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। हाथों को हमेशा साबुन या अल्कोहल वाले ‘हैंड रब’ से साफ रखना चाहिए। हाथों को कम से कम बीस सेकंड तक साबुन से धोना चाहिए।
हज-2026 के लिए आवेदन शुरू
8 Jul, 2025 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हज 2026 के लिए आवेदन मंगलवार से शुरू किया गया और ऑनलाइन आवेदन 31 जुलाई तक स्वीकार किये जाएंगे। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने कहा कि हज 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। हज यात्रा पर जाने वाले इच्छुक यात्री हज पोर्टल एचटीटीपीएस://हजकमेटीडॉटजीओवीडॉटआईएन या ‘हज सुविधा’ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन विंडो आज से 31 जुलाई रात 11:59 बजे तक खुली रहेगी।
उन्होंने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि को या उससे पहले जारी किया गया पासपोर्ट होना अनिवार्य है और यह कम से कम 31 दिसंबर 2026 तक वैध होना चाहिए। हज समिति आवेदकों को आवेदन करने से पहले अपनी तैयारियों पर सावधानीपूर्वक विचार करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मृत्यु या गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को छोड़कर आवेदन रद्द करने की स्थिति पर आवेदक को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल में मूसलधार बारिश का कहर, कोलकाता जलमग्न, मौसम विभाग ने दी चेतावनी
8 Jul, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भारी बारिश दर्ज की गई है. मंगलवार सुबह से ही कोलकाता समेत बंगाल के कई दक्षिणी जिलों में भारी बारिश हुई, जिससे सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव हो गया. अलीपुर मौसम कार्यालय ने कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. मानसून और कम दबाव के चलते कोलकाता में भारी बारिश हो रही है.
कोलकाता, साल्ट लेक और हावड़ा के कई इलाकों में रात भर हुई लगातार बारिश के कारण जलभराव की खबर है. मंगलवार को सेंट्रल एवेन्यू का एक हिस्सा पानी से भर गया. कोलकाता शहर के कई इलाके जलमग्न हैं. कोलकाता नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, सुबह 2 बजे से सुबह 8 बजे तक जोधपुर पार्क में 195 मिलीमीटर, मानिकतला में 80 मिमी, दत्ता बागान में 77 मिमी, बीरपारा में 78 मिमी और मार्कस स्क्वायर में 68 मिमी बारिश हुई. अलीपुर में 81.6 मिलीमीटर, दमदम में 99.3 मिलीमीटर और साल्ट लेक में 88.3 मिलीमीटर बारिश हुई.
मंगलवार सुबह तक बारिश जारी रहने के कारण काम पर जाने वाले लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. कोलकाता के लोग जलभराव से परेशान हैं. हालांकि, कोलकाता नगर निगम जमा पानी को निकालने में जुट गया है. जल निकासी विभाग ने सुबह से ही विभिन्न स्थानों पर काम शुरू कर दिया है.
कोलकाता नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार जितनी बारिश हुई है, अगर उसे भी जमा कर दिया जाए तो भी स्थिति लंबे समय तक ऐसी नहीं रहेगी. विभिन्न पंपिंग स्टेशनों के माध्यम से जमा पानी को तेजी से निकालने का काम चल रहा है.
हालांकि, इस बीच अगर फिर बारिश हुई तो कुछ समय तक पानी जमा रहेगा, क्योंकि गंगा में ज्वार आने के कारण सभी लॉक गेट बंद रहेंगे. सुबह 11:55 बजे गंगा में जलस्तर 16 फीट से अधिक रहा, जिसके चलते सुबह 10 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक लॉक गेट बंद रहे.
दक्षिण बंगाल में गरज के साथ बारिश की संभावना
मंगलवार को दक्षिण बंगाल के सभी जिलों में गरज के साथ हल्की बारिश की संभावना है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, जिले के कुछ हिस्सों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलेंगी. बुधवार से शुक्रवार तक बारिश कम हो सकती है. विभिन्न जिलों में एक-दो स्थानों पर गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. शनिवार से गरज के साथ बारिश फिर से बढ़ने की संभावना है.
उत्तर बंगाल में भारी बारिश की चेतावनी
अलीपुर स्थित मौसम कार्यालय ने मंगलवार और बुधवार को उत्तर बंगाल में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. दार्जिलिंग, कालिंपोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में भारी बारिश की संभावना है. अन्य जिलों में भी गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गुरुवार को जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. हालांकि, उत्तर बंगाल के ऊपरी 5 जिलों में गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना है.
जम्मू-कश्मीर: सरकारी वेबसाइट्स की साइबर सुरक्षा जांच तेज, ऑपरेशन सिंदूर के समय बढ़ाया गया था अलर्ट
8 Jul, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर: ऑपरेशन सिंदूर के दो महीने बाद भी जम्मू-कश्मीर में डिजिटल आउटेज की समस्या बनी हुई है. क्योंकि डिजिटल सुरक्षा मापदंडों का पालन न करने के कारण कई सरकारी वेबसाइटें अभी भी पहुंच से बाहर हैं. जिससे आम जनता और अधिकारियों को सेवा वितरण और ई-गवर्नेंस में दिक्कतें आ रही हैं. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद, सार्वजनिक क्षेत्र की कई वेबसाइटें और एप्लीकेशन को ऑफ़लाइन कर दिया गया था.
अब, जम्मू-कश्मीर के विद्युत निगमों और जम्मू-कश्मीर लघु उद्योग विकास निगम लिमिटेड (एसआईसीओपी) जैसे कार्यालयों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मिनी डेटा केंद्रों को सुरक्षा के लिए अधिक सुरक्षित और केंद्रीकृत प्रणालियों में स्थानांतरित किया जा रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में लगभग 110 वेबसाइट सुरक्षा ऑडिट के विभिन्न चरणों से गुजर रही हैं. इनमें से 45 लाइव होने के अंतिम चरण में हैं. सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वेबसाइटों का साइबर ऑडिट किया जा रहा है और उन वेबसाइटों को ऑनलाइन के लिए मंजूरी दी जाती है जो भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के आदेशानुसार पूर्ण साइबर सुरक्षा ऑडिट से गुजरती हैं.
आईटी सचिव पीयूष सिंगला ने कहा, "प्रत्येक वेबसाइट या एप्लिकेशन को ऑनलाइन लाने से पहले CERT-In और OWASP दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा." जम्मू-कश्मीर ई-गवर्नेंस एजेंसी (जेकेईजीए) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आईएएस महिमा मदान ने ईटीवी भारत के बार-बार कॉल का जवाब नहीं दिया. सूत्रों ने बताया कि श्रीनगर और जम्मू नगर निगम, आवास एवं शहरी विकास, वन, राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों की वेबसाइटें अभी भी रखरखाव के अधीन हैं.
राजस्व विभाग को निवास प्रमाण पत्र के बारे में जनता तक जानकारी पहुंचाने और प्रदान करने में "तकनीकी मुद्दों" का सामना करना पड़ा. “ई-सेवा (जेके बैकऑफिस) पोर्टल के साथ तकनीकी मुद्दों के कारण, तहसील कार्यालयों को वर्तमान में निवास प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी तक पहुंचने और प्रदान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
जनसुगम पोर्टल पर सरकार द्वारा अधिवास सेवा के विलय के बावजूद, पुरानी साइट पर लॉगिन समस्याओं के कारण पिछला डेटा अप्राप्य है." तहसीलदार सोपोर ने ईटीवी भारत रिपोर्टर द्वारा दायर सूचना के अधिकार के जवाब में कहा, जिसमें अधिवास प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी मांगी गई थी. डिजिटल आउटेज के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने 20 जून को एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों से कहा कि सुरक्षा कारणों से भी महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म के लंबे समय तक बंद रहने को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव ने कहा, "राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को इन महत्वपूर्ण सेवाओं को ऑनलाइन बहाल करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए. सरकारी डेटा और साइबर संपत्तियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और इसमें कोई समझौता नहीं किया जा सकता."
सचिव आईटी सिंगला ने कहा कि 250 अधिकारियों को साइबर सुरक्षा पर प्रशिक्षण दिया गया है. अब हर सरकारी विभाग में डिजिटल सुरक्षा के लिए एक मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी या सूचना सुरक्षा अधिकारी होंगे. उन्होंने कहा कि एंड-यूज़र सुरक्षा के लिए अब तक 4011 डिवाइस पर एंडपॉइंट डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स (ईडीआर) समाधान और 1617 डिवाइस पर यूनिफाइड एंडपॉइंट मैनेजमेंट (यूईएम) समाधान स्थापित किए गए हैं. उन्होंने कहा, "साइबर सुरक्षा के लिए वीपीएन सुरक्षा, जियो-फेंसिंग, पोर्ट सुरक्षा, मजबूत फ़ायरवॉल और राउटर नीतियों को अपनाया गया है."
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि अकेले बिजली क्षेत्र में 2 लाख साइबर हमले विफल किए गए. साइबर हमलों के बारे में भारत सरकार द्वारा यह पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति थी. इससे पहले, महाराष्ट्र साइबर ने बताया था कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और पश्चिम एशिया से पूरे भारत में 15 लाख साइबर हमले किए गए. उनमें से 150 सफल रहे थे.
इन साइबर हमलों के बीच, जम्मू और कश्मीर सरकार ने अधिकारियों के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए और एक बड़े साइबर सुरक्षा ओवरहाल के लिए कदम उठाया और अपने डिजिटल डेटा और संचार की सुरक्षा के लिए सलाह जारी की थी. साइबर हमलों से सभी डिजिटल डेटा और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा उपाय शुरू किए गए थे.
सरकार ने ".com", ".org" या ".net" जैसे डोमेन पर चलने वाली सभी निजी विभागीय वेबसाइटों को निष्क्रिय कर दिया था. अपनी वेबसाइटों को ".gov.in" या ".jk.gov.in" डोमेन पर होस्ट किया. सरकारी कामकाज के लिए निजी ईमेल आईडी के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया था.
ओबीसी आरक्षण की मांग पर बीआरएस की बड़ी घोषणा, रेल रोको आंदोलन 17 जुलाई को
8 Jul, 2025 05:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य में 17 जुलाई को रेल रोको आंदोलन किया जाएगा। यह प्रदर्शन ओबसी समुदाय को 42 फीसदी आरक्षण देने की मांग को लेकर होगा। इस संबंध में विधेयक राज्य विधानसभा में इस साल की शुरुआत में पारित किया गया था।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में के. कविता ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि ओबीसी को 42 फीसदी आरक्षण देने वाले विधेयक को अब तक मंजूरी नहीं मिली है। तेलंगाना विधानसभा ने 17 मार्च को दो विधेयक पारित किए थे, जिनके जरिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को 23 से बढ़ाकर 42 फीसदी किया जाना था। यह आरक्षण शिक्षा संस्थानों, रोजगार और ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में लागू किया जाना था।
ये दो विधेयक — तेलंगाना पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शिक्षण संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए पदों का आरक्षण) विधेयक 2025 और तेलंगाना पिछड़ा वर्ग (ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में सीटों के आरक्षण) विधेयक 2025 — केंद्र सरकार की मंजूरी के अधीन हैं, क्योंकि प्रस्तावित आरक्षण 50 फीसदी की तय सीमा से अधिक है।
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के कविता ने कहा, हम देखते हैं कि (कांग्रेस नेता) राहुल गांधी पूरे देश में ओबीसी की बात करते हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी ने वादा किया था कि कांग्रेस स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी को 42 फीसदी आरक्षण देगी। राज्य विधानसभा ने विधेयक पारित कर दिया है, लेकिन अब वह राष्ट्रपति के पास लंबित है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि इस विधेयक को शीघ्र मंजूरी दिलवाई जाए।
उन्होंने कहा, विधेयक राष्ट्रपति के पास गया है... मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करती हूं, वह स्वयं ओबीसी समुदाय से आते हैं, कृपया सुनिश्चित करें कि यह विधेयक जल्द से जल्द वापस भेजा जाए। कविता ने कहा कि 'तमिलनाडु मॉडल' को अपनाया जा सकता है और यह कानून पारित होने के बाद संविधान की 9वीं अनुसूची में जोड़ा जाना चाहिए। संविधान की 9वीं अनुसूची में उन केंद्र और राज्य कानूनों की सूची होती है, जिन्हें न्यायालयों में चुनौती नहीं दी जा सकती। कविता ने कहा कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान या तो संसद के एक कानून के माध्यम से हो सकता है या फिर संविधान में संशोधन कर इसे लागू किया जा सकता है।
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