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एक और पति मारा गया, नींद की गोली देकर सबको सुलाती थी... फिर बुलाती प्रेमी
11 Jul, 2025 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अलीगढ
आए दिन प्रेमी के साथ मिलकर पत्नी द्वारा पति की हत्या करने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला अलीगढ़ के बरला कस्बे के मोहल्ला कोठी में सामने आया है। यहां पत्नी के प्रेम संबंधों में बाधा बन रहे पति सुरेश की बृहस्पतिवार की गोली मारकर हत्या करा दी। बीना पिछले आठ साल से अपने पति को धोखा दे रही थी। पति दिल्ली में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। कभी हफ्ते में तो कभी दस दिन में घर आता था। तीन बच्चों की मां बीना की दीवानगी का आलम यह था कि वह अपने से छह वर्ष छोटे प्रेमी को जब मिलने बुलाती तो अपने बच्चों व पति को खाने में नींद की गोलियां खिलाकर सुला देती थी। यह बात पिता की हत्या के बाद स्कूल से थाने पहुंचे तीनों बच्चों ने पुलिस से कही। यहां तक कह दिया कि उनकी मां को जेल भेज दो। कस्बे के मोहल्ला कोठी के स्व.गोविंद राय के दो बेटों में बड़ा विजय गांव में रहकर मजदूरी करता है। घर के ही बगल वाले हिस्से में सुरेश परिवार के साथ रहता था। उसकी शादी फिरोजाबाद के रैपुरा क्षेत्र के बीच का नगला की 30 वर्षीय बीना संग करीब 12 वर्ष पहले हुई। दंपती पर तीन बच्चे क्रमश: 10 वर्षीय नीतेश, 8 वर्षीय पुनीत व 6 वर्षीय रोशनी हुए। सुरेश शादी के साथ से ही दिल्ली में नौकरी करता था। सप्ताह या दस दिन में छुट्टी लेकर परिवार से मिलने आता। पुलिस का कहना है कि बीना के प्रेम संबंध घर से बीस मीटर की दूरी पर दुकान करने वाले मनोज से हो गए। पड़ोसी होने के नाते मनोज भी उसके घर आने लगा।
भेद खुलने पर तीन पंचायतें तक हुईं, नहीं मानी
कहते हैं कि इस तरह की प्रेम कहानी चंद दिनों में ही चर्चा-ए-आम हो जाती हैं। ऐसा ही बीना व मनोज की प्रेम कहानी में हुआ। मोहल्ले से लेकर कस्बे तक में लोग चर्चा करने लगे। सुरेश जब दिल्ली से आया तो उसने अपनी पत्नी को समझाने का प्रयास किया। मगर वह नहीं मानी। फिर तय हुआ कि सामाजिक दबाव बनाने के लिए गांव में पंचायतें कराई गईं। तीन बार की पंचायत में दोनों को अलग रहने का फरमान सुनाया गया। मगर वे कस्बे से बाहर या फिर रात के अंधेरे में गुपचुप मिलने लगे। जब सुरेश नहीं होता था, तब भी या सुरेश घर पर होता था। तब भी दोनों मिलते थे। मगर परिवार को खाने में नींद की गोलियां खिलाकर बीना समय से ही सुला देती थी।
बीना ने कई बार मनोज को पुलिस से बचाया
सीओ गर्वित सिंह के अनुसार जांच में उजागर हुआ है कि गांव में पंचायत की पाबंदियों के बीच एक मर्तबा इन दोनों को अलीगढ़ के एक होटल में पुलिस ने दबोचा था। तब महिला ही पुलिस से इसे यह कहकर बचाकर लाई कि वह अपने काम से लेकर आई थी। इसी तरह एक मर्तबा दोनों दिल्ली में पकड़े गए। वहां से भी पुलिस से बचाकर लाई। चार माह पहले भी दोनों को गांव में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ा। तब खबर पर पुलिस पहुंची। मनोज को पकडक़र थाने लाया गया। मगर वह मनोज के पक्ष में बयान देकर उसे छुड़वाकर लाई। इससे पहले भी दो बार ऐसा हुआ।
यह है मामला
अलीगढ़ में पत्नी के प्रेम संबंधों में बाधा बन रहे सुरेश (32) की बृहस्पतिवार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस वारदात को उसकी पत्नी बीना के इशारे पर उसके प्रेमी मनोज ने अंजाम दिया। आरोपी तमंचा लेकर थाने जा पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने बीना को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों ने जुर्म कबूल कर लिया है। सीओ बरला गर्वित सिंह के अनुसार मोहल्ला कोठी का सुरेश दिल्ली में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। उसकी पत्नी बीना तीन बच्चों को लेकर गांव में ही रहती थी। परिजन से पूछताछ में पता चला है कि करीब आठ वर्ष पहले सुरेश की पत्नी के पड़ोस में परचून की दुकान करने वाले अविवाहित युवक मनोज से प्रेम संबंध हो गए। इन संबंधों का सुरेश व उसके पूरे परिवार ने विरोध किया। मगर बीना व मनोज ने साथ रहने की ठान ली। तीन दिन पहले सुरेश दिल्ली से गांव आया था। उसे बृहस्पतिवार को वापस जाना था। सुरेश सुबह घर के चबूतरे पर बैठकर मोबाइल देख रहा था। तभी मनोज ने उसके सीने में तमंचे से गोली मार दी। सुरेश के बड़े भाई विजय ने मनोज पर लोहे का बाट मारने की कोशिश की। मनोज ने उन पर भी फायर कर दिया। कान पर छर्रे लगने से वह घायल हो गए।
'जा मेरे पति को मार डाल, वरना शक्ल नहीं देखूंगी तेरी'
पति को रास्ते से हटाने के लिए बीना ने अपने प्रेमी मनोज संग मिलकर जो साजिश रची। उसका किस्सा सुनकर खुद पुलिस के होश उड़ गए। एसपीआरए अमृत जैन ने बताया कि दोनों ने सुरेश की हत्या के लिए दो प्लान बनाए थे। पहले रात को नींद में गला दबाकर हत्या करने की योजना थी। लेकिन जब इसमें सफल नहीं हो सके तो बीना ने मनोज को तमंचा दिया और कहा कि सुरेश को मारने के बाद ही अपनी शक्ल दिखाना। यहां तक कहा कि इतनी गोली मारना कि बचने न पाए। पूछताछ में मनोज ने यह स्वीकार किया है। आरोपी मनोज करीब 9-30 पर तमंचा लेकर थाने पहुंच गया था। यहां उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। कुछ देर बाद ही पुलिस ने बीना को भी हिरासत में ले लिया। घटनास्थल से साक्ष्य संकलन आदि की प्रक्रिया के बाद दोनों से थाने पर पूछताछ की गई। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने प्लान बनाया था कि अबकी छुट्टी पर आए सुरेश को जिंदा दिल्ली नहीं जाने देना है। खुद मनोज व बीना ने ये बात स्वीकारी। उनका प्लान था कि पहले रात में खाने में नींद की गोलियां देकर सुरेश को नशे में किया जाएगा। फिर रात में उसकी गला दबाकर हत्या की जाएगी। मगर वह प्लान किसी तरह सफल नहीं हो पाया था। लिहाजा बीना ने तमंचे का इंतजाम कर मनोज को थमा दिया था।
फायरिंग के समय चिल्लाई, आज बच न जाए
सीओ बरला गर्वित सिंह के अनुसार हत्या से पहले दोनों में फोन पर लगातार बातचीत भी हो रही थी। बीना अपने पति की लोकेशन मनोज को बता रही थी। घटना से पहले बीना ने ही पति को घर के बाहर बैठने भेजा था। मृतक के भाई विजय जब गोली की आवाज सुनकर दौडक़र आए तो बीना मनोज से कह रही थी कि जितनी गोली मारनी है मार, मगर आज बचने न पाए।
बच्चों को सुबह ही तैयार करके भेज दिया था स्कूल
बीना ने सुबह हत्या की प्लानिंग के तहत ही बच्चों को खुद तैयार कर स्कूल भेजा था। हालांकि बच्चों ने बारिश व पिता के दिल्ली जाने की बात कहकर स्कूल न जाने की जिद की थी। मगर मां ने दबाव डालकर तीनों बच्चे स्कूल भेज दिए थे। इसके बाद ये घटना हुई। पुलिस पूछताछ में बीना ने बताया कि बच्चे कह रहे थे कि आज दोपहर को पापा चले जाएंगे। हम दोपहर तक उनके साथ रहेंगे। आज स्कूल की छुट्टी कर लेते हैं। लेकिन बीना ने जबरन भेज दिया था।
गणेशोत्सव बना महाराष्ट्र का राजकीय त्योहार: सरकार का ऐतिहासिक फैसला
11 Jul, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को गणेशोत्सव को स्टेट फेस्टिवल के रूप में मान्यता दे दी। सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने विधानसभा में यह घोषणा करते हुए कहा कि गणेशोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।
मंत्री ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी। यह पर्व सामाजिक एकता, राष्ट्रवाद, स्वाभिमान और हमारी भाषा के प्रति गर्व की भावना से जुड़ा है।
राजस्थान डेयरी ने दिल्ली में खोला उपभोक्ताओं के लिए नया विकल्प
11 Jul, 2025 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर, 11 जुलाई। देश की राजधानी दिल्ली में अब दिल्लीवासियों को राजस्थान का प्रसिद्ध सरस घी मिल सकेगा। इसके लिए दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल ऐरिया में राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी द्वारा सरस घी का रिटेल आउटलेट/काउंटर खोला गया है।
इस आउटलेट का उद्घाटन गुरुवार को राजस्थान डेयरी के मार्किटिंग महाप्रबंधक श्री संतोष कुमार शर्मा ने किया। इस अवसर पर राजस्थान डेयरी के दिल्ली स्थित संपर्क कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा डिस्ट्रीब्यूटर भी उपस्थित थे।
उद्घाटन के बाद श्री शर्मा ने बताया कि दिल्ली में राजस्थान डेयरी के प्रोडक्ट्स की बढ़ती मांग को देखते हुए यह आउटलेट खोला गया है। उन्होंने बताया कि आउटलेट में रिटेल बिक्री को बढ़ावा देने के लिए देसी घी को रियायती दरों पर दिया जाएगा। इस आउटलेट पर आधा लिटर 303 रूपये वाले घी कीमत 277 रूपये, 603 रूपये कीमत वाले एक किलो घी की कीमत 552 रूपये, 200 ग्राम घी 112 रूपये तथा 5 लिटर टिन की कीमत 2795/- रूपये रखी गई है। इसी प्रकार गाय की आधा लिटर घी की कीमत 286 रूपये, एक लिटर घी की कीमत 571 रुपये तथा 5 लिटर टिन की कीमत 2894/- रुपये रखी गई है। श्री शर्मा ने बताया कि मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया के टी-1/75 में खोले गए इस आउटलेट के खुलने का समय प्रातः 10 बजे से 7 बजे तक रहेगा।
पुल हादसे का दर्दनाक अंजाम: नदी से मिले 17 शव
11 Jul, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। गुजरात में वडोदरा और आणंद को जोडऩे वाला पुल टूटने के बाद महिसागर नदी से 17 शव निकाले जा चुके हैं। एनडीआरएफ को गुरुवार सुबह 4 शव मिले, जबकि 13 बुधवार को ही बरामद हो चुके थे। हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई है। अभी भी 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनकी तलाश जारी है। महिसागर नदी पर बना ब्रिज बुधवार सुबह टूट गया था। चलते ट्रैफिक के बीच पुल टूट जाने से दो ट्रक, दो कार और एक रिक्शा नदी में गिर गया था। एक टैंकर टूटे सिरे पर फंस गया था। 45 साल पुराना यह ब्रिज दक्षिण गुजरात को सौराष्ट्र से जोड़ता था। इसके टूटने से भरूच, सूरत, नवसारी, तापी और वलसाड से सौराष्ट्र पहुंचना मुश्किल हो गया है। अब इसके लिए अहमदाबाद होकर जाना होगा।
स्कूल में शर्मनाक जांच: टॉयलेट में खून मिलने पर बच्चियों के कपड़े उतरवाए
11 Jul, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ठाणे । महाराष्ट्र के ठाणे के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 5 से 10 तक की बच्चियों के कपड़े उतरवाकर चेकिंग की गई। बच्चियों ने अपने पेरेंट्स को बताया कि स्कूल के टॉयलेट में खून के धब्बे मिले थे। जिसके बाद सभी लड़कियों को कन्वेंशन हॉल में बुलाया गया और प्रोजेक्टर पर इसकी तस्वीरें दिखाई गईं। इसके बाद लड़कियों से पूछा गया कि किस-किस को अभी पीरियड्स हो रहे हैं। जिन लड़कियों ने हां में जवाब दिया, उनकी उंगलियों के निशान लिए गए। जिन लड़कियों ने न में जवाब दिया, उन्हें बारी-बारी से टॉयलेट में ले जाकर एक एक के कपड़े उतरवाकर प्राइवेट पार्ट्स की जांच की गई। पेरेंट्स की शिकायत के बाद पुलिस ने प्रिंसिपल को हिरासत में ले लिया है।
नेलांग घाटी में बर्फ से बना शिवलिंग, श्रद्धालु बोले – बाबा बर्फानी के दर्शन का सौभाग्य
10 Jul, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: अब बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए शिव भक्तों को जम्मू-कश्मीर जाने की जरूरत नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड में भी भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकते है. जी हां उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में चीन सीमा के पास बर्फ से बनी शिवलिंग का आकृति मिली है. शिवलिंग के पास ही बर्फ से बनी नंदी जैसी आकृति भी मौजूद है. इस शिवलिंग की खोज उत्तराखंड एसडीआरएफ ने की है.
दरअसल, एसडीआरएफ की टीम नेलांग घाटी क्षेत्र में पर्वतारोहण अभियान के दौरान की गई है. तभी करीब 4300 मीटर की ऊंचाई पर टीम की नजर बाबा बर्फानी यानी अमरनाथ जैसी आकृति में बने शिवलिंग पर पड़ी. ये शिवलिंग भी बर्फ से ही बना हुआ था. इस शिवलिंग के पास ही बर्फ से नंदी जैसी आकृति भी बनी हुई थी.
बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्रैकिंग और साहसिक खेलों के लिए नए स्थल खोजने के निर्देश दिए थे. इसी क्रम में एसडीआरएफ की टीमों को राज्य की उन चोटियों पर भेजा जा रहा है, जहां अब तक कोई मानवीय गतिविधियां नहीं हुई हैं. इसी अभियान के तहत पांच अप्रैल को एसडीआरएफ की 20 सदस्यीय टीम उत्तराखंड में ट्रैकिंग की नई संभावनाओं की खोजने के लिए नेलांग घाटी की कठिन चोटियों पर चढ़ाई करने निकली थी.
ये टीम नेलांग के नीलापानी क्षेत्र में 6,054 मीटर ऊंची अनाम चोटी पर चढ़ी, जहां अब तक कोई भी पर्वतारोही दल नहीं पहुंचा था. इस दौरान टीम को करीब 4300 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से बनी शिवलिंग की आकृति दिखी.
एसडीआरएफ का दावा है कि नेलांग घाटी के नीलापानी क्षेत्र में मिली शिवलिंग की आकृति बिल्कुल जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ में स्थित शिवलिंग की तरह है. हालांकि अमरनाथ में स्थित शिवलिंग लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. वहीं नीलापानी क्षेत्र में मिला शिवलिंग करीब 4,300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. एसडीआरएफ की टीम ने इस खोज की रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार के पास भेजी है.
एसडीआरएफ सेनानायक अपर्ण यदुवंशी ने बताया कि 5 अप्रैल को फ्लैग ऑफ किया गया था और 2 मई को अभियान पूरा होने के बाद फ्लैग उनके साथ संपन्न किया गया. इस अभियान के दौरान टीम के सदस्यों को करीब 4300 मीटर की ऊंचाई पर शिवलिंग के समान दिव्या आकृति भी दिखाई दी, जिसने पूरे अभियान का एक आध्यात्मिक अनुभूति से भी जोड़ दिया.
अभियान के बाद एसडीआरएफ में इस पर्वत के नामकरण की प्रक्रिया भी शुरू की गई. एसडीआरएफ ने इस पर्वत का नाम माउंट सिंदूर रखने का सुझाव दिया है, जो पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति को समर्पित होगा.
हरिद्वार तैयार कांवड़ मेले के लिए: सुरक्षा के 3 घेरे, 7 करोड़ भक्तों के स्वागत की उम्मीद
10 Jul, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार: कल शुक्रवार 11 जुलाई से कांवड़ मेला 2025 शुरू होने जा रहा है. कांवड़ यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों एवं प्रशासन के अधिकारियों द्वारा हर की पैड़ी पर दिनांक 11 जुलाई को प्रातः 10 बजे मां गंगा का पूजन कर आशीर्वाद लिया जाएगा. इधर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा समेत सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं.
कांवड़ यात्रा 2025: जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा अपनी अपनी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मेले की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी. कांवड़ मेला क्षेत्र को सुरक्षित और व्यवस्थित सम्पन्न कराने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 38 जोन ओर 134 सेक्टरों में बंटा गया है. आधा दर्जन ड्रोन से मेला क्षेत्र पर नजर रखी जायेगी. कांवड़ियों के लिए जगह जगह पानी की टंकियां, शौचालय और पथ प्रकाश की व्यवस्था के साथ साथ सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम की टीमें लगा दी गई हैं.
कल से शुरू होगा कांवड़ मेला 2025: शुक्रवार से शुरू हो रहे कांवड़ मेले कि व्यवस्थाओं के संबंध में जिला अधिकारी मयूर दीक्षित ओर एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि हर की पैड़ी, बैरागी कैंप, कांवड़ पटरी ओर कांवड़ बाजार में पीने के पानी की व्यवस्था, शौचालय और पथ प्रकाश की व्यवस्था के साथ साथ दौरान सफाई की व्यवस्था के लिए नगर निगम की टीमें तैनात कर दी गई हैं.
मेला क्षेत्र को तीन जोन में बांटा गया: मेले की सुरक्षा की दृष्टि से मेला क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 38 जोन और 134 सेक्टरों में बांटा गया है. आज गुरु पूर्णिमा के दिन होने वाली पुलिस ब्रीफिंग के बाद पुलिस बल को तैनात कर दिया जाएगा. मेले में आतंकवादी घटना से बचने के लिए 2 विशेष क्विक एक्शन टीमें तैनात की गई हैं. साथ ही पूरे मेला क्षेत्र पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से नजर रखी जायेगी. कांवड़ मेले में हुड़दंगियों पर नकेल कसने के लिए बेसबॉल बैट, हॉकी ओर त्रिशूल जैसी धारधार वस्तुओं को बेचने पर बैन लगाया गया.
7 करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों के आने की उम्मीद: 2024 के कांवड़ मेले में 4.5 करोड़ से अधिक भोले भक्त कांवड़िए हरिद्वार आए थे. इस बार 7 करोड़ से ज्यादा कांवड़ियों के हरिद्वार कांवड़ मेले में आने की उम्मीद है.
हर साल बढ़ती गई मेला जोन की संख्या: 2023 में कांवड़ मेला क्षेत्र में जहां 12 सुपर जोन, 32 जोन और 119 सेक्टर बनाए गए थे, तो वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़ाई गई थी. पिछले साल मेला क्षेत्र को 13 सुपर जोन, 33 जोन और 125 सेक्टर में बांटा गया है. इस साल यानी कांवड़ मेला 2025 के लिए सुपर जोन 16, जोन 38 और सेक्टर 134 रखे गए हैं.
इतने पुलिसकर्मी हैं तैनात: साल 2024 में कांवड़ मेले में 2,444 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. कांवड़ मेला 2025 में ये संख्या पिछले साल के मुकाबले ज्यादा होगी और 2,981 पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. सुरक्षाकर्मियों में इंस्पेक्टर, दारोगा, आरक्षी, महिला आरक्षी जवान शामिल हैं. इसके साथ ही मेला क्षेत्र में पीएसी की 15 कंपनी, जल बचाव दल की 1 कंपनी, और 18 कंपनी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात हैं.
सुरक्षा के लिए हर तरह के बल: 2,981 पुलिसकर्मियों के साथ ही ड्रोन टीम, एटीएस टीम, इंटेलिजेंस, एंटी बम स्क्वाड, महिला बल, जल पुलिस, मोटर साइकिल टीम, सीपीयू टीम के साथ ही साइबर पुलिस टीम भी तैनात है.
कांवड़ियों के लिए क्यूआर कोड: कांवड़ मेले में इस बार नई शुरुआत भी की गई है. कांवड़ियों की सुविधा के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था शुरू हुई है. कांवड़िए क्यूआर (Quick Response code) के माध्यम से ट्रैफिक प्लान और मेला क्षेत्र के मैप की जानकारी ले सकेंगे. क्यूआर कोड हरिद्वार और जिले में प्रवेश करने वाले सभी बॉर्डर पर उपलब्ध रहेगा. इसके साथ ही हरिद्वार से सटे जिलों में भी ये क्यूआर कोड उपलब्ध होगा. इससे कांवड़िए हरिद्वार में प्रवेश से पहले ही मेला रूट प्लान जान सकेंगे, जिससे जाम से निपटने में आसानी होगी.
कांवड़ यात्रा के बारे में जानें: हर साल सावन में होने वाली कांवड़ यात्रा एक धार्मिक यात्रा है. भगवान भोलेनाथ के भक्त कांवड़िए कहलाते हैं. उत्तराखंड में ये कांवड़िए गंगाजल भरने हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री आते हैं. यहां से गंगाजल भरकर अपने घर जाते हैं. वहां अपने आराध्य भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाते हैं. कांवड़ यात्रा में युवाओं के साथ बड़े-बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं भी शामिल होती हैं. ज्यादातर शिव भक्त कांवड़ यात्रा पर पैदल आते हैं और भगवा रंग के कपड़े पहनते हैं. कांवड़ियों का मानना है कि उनकी इस कठिन यात्रा से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होकर उनकी मनोकामना पूरी करते हैं. कांवड़ यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई को सावन की शिवरात्रि पर संपन्न होगी.
हिंदू रक्षा सेना का बयान: हरिद्वार से लेकर शिवालयों तक कांवड़ यात्रा की गूंज है. इधर हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रबोधनंद गिरि ने कहा है कि हरिद्वार तीर्थ क्षेत्र में कोई भी गैर हिंदू प्रवेश न करे, यह कानून है. इस कानून का पालन कराना सरकार की जिम्मेदारी है.
बीजेपी ने बताया ऐतिहासिक दौरा, मोदी की विदेश नीति से खुला नए युग का द्वार
10 Jul, 2025 05:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा करके वापस लौटे हैं. इसी मौके पर बीजेपी के प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने बताया कि पीएम की इस विदेश यात्रा से भारत को क्या उपलब्धियां हासिल हुई.
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, पीएम की इन देशों के इस सफल दौरे के बाद तीन मुख्य बातें सामने आई हैं. प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स में आतंकवाद के मुद्दे को स्पष्ट और ठोस रूप से रखा. बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा, पीएम ने कहा कि आतंक के अपराधियों और आतंक के पीड़ितों को एक समान नहीं माना जा सकता.
घाना और नामीबिया का दौरा क्यों अहम?
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, इसके अलावा, घाना और नामीबिया जैसे देश, जो यूरेनियम, तांबा, लिथियम जैसी धातुओं जैसे खनिजों और धातुओं से समृद्ध हैं. उनके साथ भारत ने एक ऐसा समझौता किया है जो भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. यह हमें इन महत्वपूर्ण खनिजों और महत्वपूर्ण धातुओं के मामले में किसी एक देश पर ज्यादा निर्भरता से बचने में मदद करता है. इसलिए, यह हमारे आर्थिक पक्ष के लिए भी जरूरी है.
-क्या उपलब्धियां हुई हासिल
त्रिवेदी ने कहा, पीएम मोदी एक लंबी विदेश यात्रा कर वापस लौटे हैं. इस दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई:
आतंकवाद पर भारत के पक्ष को सभी देशों ने स्वीकारा.
भारत की अर्थव्यवस्था जो चौथी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है. इस क्रम में बहुत सारे खनिज घाना और नामीबिया में उपलब्ध है, जिनसे हमारे बेहतर संबंध बने हैं.
भारतीय मूल के लोगों और भारत के बीच संबंध अब पहले से बहुत ज्यादा गहरे और मजबूत हुए हैं. त्रिनिदाद और टोबेगो के साथ संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंचना एक बड़ी सफलता है.
पीएम को चार देशों ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया.
इसके साथ ही पीएम अब तक 27 देशों के उच्चतम नागरिक सम्मान पा चुके हैं.
पीएम अब तक 17 देशों के पार्लियामेंट को संबोधित कर चुके हैं.
27 सर्वोच्च नागरिक सम्मान ये विश्व के आकाश पर भारत की उभरती हुई शक्ति, स्वीकार्यता का प्रतीक है.
भारत एक मात्र देश है जो ब्रिक्स और क्वाड दोनों में सदस्य है.
भारत की विदेश नीति आज बहुत आगे जा चुकी है.
मल्टी पोलर वर्ल्ड की तरफ आज राजनीति आगे बढ़ गई है. भारत पूरे वैश्विक परिदृश्य में पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में उभर रहा हैय
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से, प्रधानमंत्री की इस यात्रा ने अफ्रीकी और दक्षिणी देशों के सहयोग से, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका में एक नए युग की शुरुआत की है. इससे पहले, अर्जेंटीना के साथ और यहां तक कि मेक्सिको की पिछली यात्राओं के दौरान भी, वैश्विक दक्षिण के साथ तालमेल बिठाने और जुड़ने की हमारी रणनीति नई ऊंचाइयों पर पहुंची है.
पीएम ने की 5 देशों की यात्रा
पीएम मोदी ने पांच देशों की यात्रा में की. उन्होंने अपने दौरे की शुरुआत घाना से की थी. इसी के बाद वो त्रिनिदाद और टोबैगो गए. फिर अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया का दौरा किया. इस यात्रा के दौरान पीएम ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शामिल हुए.
V-SHORADS का ट्रायल शुरू, दुश्मन के हवाई हमलों को मिलेगा करारा जवाब
10 Jul, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय नौसेना की वायु रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत करने के लिए DRDO ने एक बड़ा कदम उठाया है. प्रोजेक्ट P044 के तहत DRDO ने बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली को नौसेना युद्धपोतों पर तैनात करने की दिशा में अहम प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए स्टैबलाइज़्ड लॉन्च मैकेनिज्म सिस्टम को समुद्री परीक्षण के लिए एक पोत पर स्थापित किया जाएगा.
यह एक स्वदेशी, अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो बेहद कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों को नष्ट करने में सक्षम है. यह एयर डिफेंस सिस्टम खासतौर पर युद्धपोतों को आधुनिक हवाई खतरों से बचाने के लिए विकसित किया गया है. सूत्रों के अनुसार V-SHORADS से भारतीय नौसेना की ताकत खासतौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ेगी जहां भू-राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है.
ये है खासियत
SLMS की खासियत यह है कि जहाज चलते हुए भी यह सिस्टम सही निशाना साध सकेगा. लहरों और हवा की वजह से जहाज हिलता है, लेकिन यह लॉन्चर उस हलचल को कंट्रोल कर मिसाइल को सही दिशा में दागने में मदद करेगा.
हाल ही में DRDO ने सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए 28 स्वदेशी हथियार प्रणालियों की सूची रक्षा मंत्रालय को आपातकालीन खरीद के लिए सौंपी है, जिसमें बहुत कम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल है.
नौसेना को बनाएगा और अधिक मजबूत
डिफेंस सूत्रों के अनुसार नौसेना युद्धपोत पर SLMS के परीक्षण पूरे होने के बाद इस सिस्टम को बेड़े के दूसरे युद्धपोतों पर भी तैनात किया जा सकता है. इससे भारतीय नौसेना की मल्टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूती मिलेगी. मौजूदा समय में नौसेना के पास बराक-8 और आकाश मिसाइल जैसी प्रणालियां पहले से तैनात हैं.
दुश्मनों को देगा मुंहतोड़ जवाब
V-SHORADS के कॉम्पैक्ट डिजाइन और लचीलापन के कारण इसे विध्वंसक, फ्रिगेट, कोरवेट और ऑफशोर पेट्रोल वेसल जैसे कई प्लेटफार्म पर लगाया जा सकता है. इससे नौसेना को दुश्मन के ड्रोन, हेलीकॉप्टर और एंटी-शिप मिसाइल जैसे खतरों का जवाब देने में नई ताकत मिलेगी.
यदि समुद्री परीक्षण सफल रहते हैं तो आने वाले समय में V-SHORADS भारतीय नौसेना के बेड़े का अहम हिस्सा बनकर देश की समुद्री सीमाओं को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाएगा.
उपराष्ट्रपति ने भारतीय मूल्यों और शोध प्रणाली को बताया कालजयी
10 Jul, 2025 03:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज कहा कि भारत का ग्लोबल पॉवर के रूप में उदय उसकी बौद्धिक और सांस्कृतिक गरिमा के उत्थान के साथ होना चाहिए. यह बहुत ही अहम चीजें हैं, क्योंकि ऐसा उदय ही टिकाऊ होता है और हमारी परंपराओं के अनुकूल होता है. एक राष्ट्र की शक्ति उसकी सोच की मौलिकता, मूल्यों की कालातीतता और बौद्धिक परंपरा की दृढ़ता में निहित होती है. यही सॉफ्ट पावर (सांस्कृतिक प्रभाव) है जो दीर्घकालिक होता है और आज की दुनिया में अत्यंत प्रभावशाली है.
औपनिवेशिक मानसिकता से परे भारत की पहचान को फिर से स्थापित करने की बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “भारत महज 20वीं सदी के मध्य में बना राजनीतिक राष्ट्र नहीं है, बल्कि यह एक सतत सभ्यता है, चेतना, जिज्ञासा और ज्ञान की प्रवाहित नदी है.”
देशज विचारों को आदिम मानकर छोड़ना गलत
उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर पहले सालाना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “देशज विचारों को केवल आदिम और पिछड़ेपन का प्रतीक मानकर खारिज करना केवल एक व्याख्यात्मक भूल नहीं थी, यह मिटाने, नष्ट करने और विकृत करने की वास्तुकला थी. और अधिक दुखद यह है कि स्वतंत्रता के बाद भी यह एकतरफा स्मरण चलता रहा. पश्चिमी मान्यताओं को सार्वभौमिक सत्य के रूप में पेश किया गया. साफ शब्दों में कहें तो ‘असत्य को सत्य के रूप में सजाया गया.’
उन्होंने सवाल दागते हुए कहा, “जो हमारी बुनियादी प्राथमिकता होनी चाहिए थी, वह तो विचार के दायरे में भी नहीं थी. हम अपनी मूल मान्यताओं को कैसे भूल सकते हैं?” इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, जेएनयू की कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलीपुडी पंडित, प्रो. एमएस चैत्र (आईकेएसएचए के निदेशक), प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय टोली सदस्य, तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
भारत की बौद्धिक यात्रा में ऐतिहासिक व्यवधानों को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “इस्लामी आक्रमण ने भारतीय विद्या परंपरा में पहला व्यवधान डाला. जहां समावेशन की बजाय तिरस्कार और विध्वंस का मार्ग अपनाया गया. ब्रिटिश उपनिवेशवाद दूसरा व्यवधान लेकर आया, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली को पंगु बना दिया गया, उसकी दिशा बदल दी गई. विद्या के केंद्रों का उद्देश्य बदल गया, दिशा भ्रमित हो गई. ऋषियों की धरती बाबुओं की भूमि बन गई. ईस्ट इंडिया कंपनी को ‘ब्राउन बाबू’ चाहिए थे, राष्ट्र को विचारक.”
हमने सोचना और चिंतन करना छोड़ दियाः धनखड़
उन्होंने कहा, “हमने सोचना, चिंतन करना, लेखन और दर्शन करना छोड़ दिया. हमने रटना, दोहराना और निगलना शुरू कर दिया. ग्रेड्स (अंक) ने चिंतनशील सोच का स्थान ले लिया. भारतीय विद्या परंपरा और उससे जुड़े संस्थानों को सुनियोजित ढंग से नष्ट किया गया.”
भारतीय ज्ञान प्रणाली सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “जब यूरोप की यूनिवर्सिटियां भी अस्तित्व में नहीं थीं, तब भारत की विश्वविख्यात विश्वविद्यालयें- तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला, वल्लभी और ओदंतपुरी- ज्ञान के महान केंद्र के रूप में स्थापित थीं. इनकी विशाल पुस्तकालयों में हजारों पांडुलिपियां थीं.” “ये वैश्विक विश्वविद्यालय हुआ करते थे, जहां कोरिया, चीन, तिब्बत और फारस जैसे देशों से भी विद्यार्थी आया र थे. ये ऐसे स्थल थे जहां विश्व की बुद्धिमत्ता भारत की आत्मा से आलिंगन करती थी.
उपराष्ट्रपति ने ज्ञान को व्यापक रूप में समझने का आह्वान करते हुए कहा, “ज्ञान केवल ग्रंथों में नहीं होता बल्कि यह समुदायों में, परंपराओं में, और पीढ़ियों से हस्तांतरित अनुभव में भी जीवित रहता है. उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि “एक सच्ची भारतीय ज्ञान प्रणाली को शोध में ग्रंथ और अनुभव-दोनों का समान महत्व देना होगा. संदर्भ और सजीवता से ही सच्चा ज्ञान उत्पन्न होता है.”
व्यावहारिक कदमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “हमें तत्काल कार्रवाई की ओर ध्यान देना होगा. संस्कृत, तमिल, पाली, प्राकृत आदि सभी क्लासिकल भाषाओं के ग्रंथों के डिजिटलीकरण की व्यवस्था तत्काल होनी चाहिए.” “ये सामग्री शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए सार्वभौमिक रूप से सुलभ होनी चाहिए. साथ ही, युवाओं को शोध की ठोस विधियों से लैस करने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम भी जरूरी हैं, जिसमें दर्शन, गणना, और तुलनात्मक अध्ययन का समावेश हो.”
2025 के सात महीने में मोदी ने रचा इतिहास, 4 और देशों से मिला सम्मान
10 Jul, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास अंतरराष्ट्रीय सम्मानों का पहाड़ खड़ा हो चुका है. वह अब तक अलग-अलग देशों से 27 सम्मान पा चुके हैं. इसमें ताजा नाम अफ्रीकी मुल्क नामीबिया का जुड़ा है. पीएम मोदी को बुधवार को नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्वित्चिया मिराबिलिस’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें दक्षिणी अफ्रीकी देश की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान दिया गया.
पीएम मोदी को यह पुरस्कार नामीबिया के राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवा द्वारा विंडहोक में आयोजित एक समारोह में दिया गया. बता दें कि पीएम मोदी 5 देशों के दौरे पर थे. नामीबिया उनकी यात्रा का अंतिम चरण था. मई 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के पदभार ग्रहण करने के बाद से यह उनका 27वां अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है. यह उनकी वर्तमान विदेश यात्रा के दौरान उन्हें दिया गया चौथा पुरस्कार है. वहीं, 24 घंटे के भीतर दिया गया दूसरा पुरस्कार है.
2016 में शुरू हुआ सिलसिला
11 साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 27 देशों ने अवॉर्ड दिया है. सम्मान पाने का सिलसिला 2016 में शुरू हुआ था. यानी 9 साल के भीतर पीएम मोदी ने ये 27 अवॉर्ड अपने नाम किए. 2025 को अब तक 7 महीने हुए हैं और इसमें ही पीएम मोदी 7 अवॉर्ड पा चुके हैं. इससे पहले 2023 और 2024 में उन्हें 6 देशों से सम्मान मिला था.
पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व से लेकर यूरोप और अफ्रीका तक के देशों द्वारा सम्मानित किया गया है. सम्मानों में सऊदी अरब द्वारा दिया गया ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजजीज और अफगानिस्तान द्वारा दिया गया ऑर्डर ऑफ अमानुल्लाह खान शामिल हैं. दोनों ही अवॉर्ड 2016 में दिए गए थे. 2018 में उन्हें ऑर्डर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन, उसके बाद 2019 में मालदीव द्वारा दिया गया ऑर्डर ऑफ द डिस्टिंग्विश्ड रूल ऑफ इज़्ज़ुद्दीन और उसी वर्ष बाद में बहरीन द्वारा दिया गया किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां है.
2023 में उन्हें इजिप्ट के ऑर्डर ऑफ द नाइल और फ्रांस के लीजन डी’होनूर से सम्मानित किया गया. यह सिलसिला 2024 में भी जारी रहा जब उन्हें छह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले.
8 मुस्लिम देशों से भी पा चुके हैं सम्मान
पीएम मोदी को जिन 27 देशों से पुरस्कार मिला है उनमें 8 मुस्लिम देश हैं. ये मुल्क हैं कुवैत, इजिप्ट, बहरीन, मालदीव, UAE, फिलिस्तीन, अफगानिस्तान, सऊदी अरब.
किन देशों ने पीएम मोदी को दिया सम्मान
साल 2016- सऊदी अरब, अफगानिस्तान
2018- फिलिस्तान
2019- बहरीन, मालदीव, UAE
2020- अमेरिका
2021- भूटान
2023- ग्रीस, फ्रांस, इजिप्ट, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, फिजी
2024- कुवैत, गुयाना, बारबडोस, नाइजीरिया, डोमिनिका, रूस
2025-नामीबिया, ब्राजील, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, घाना, साइपरस, श्रीलंका, मॉरिशस
सबसे ज्यादा अवॉर्ड पाने वाले PM
आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दो अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले, जबकि इंदिरा गांधी को भी दो सम्मान मिले. डॉ. मनमोहन सिंह को भी अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान दो अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले, जबकि राजीव गांधी को कोई सम्मान नहीं मिला. पीएम मोदी की इस उप्लब्धि पर बीजेपी ने कहा कि भारत के किसी भी प्रधानमंत्री का वैश्विक स्तर पर इतना गहरा प्रभाव कभी नहीं रहा. यह सिर्फ एक नेता की बात नहीं है. यह विश्व मंच पर भारत की आर्थिक मजबूती, रणनीतिक स्पष्टता और कूटनीतिक दृढ़ता के उदय को दर्शाता है.
ड्रोन से सीमा पर चौकसी होगी और मजबूत, निगरानी में नहीं रहेगी चूक
10 Jul, 2025 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्री और जमीनी सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्यूरेंस (MALE) ड्रोन की खरीद प्रक्रिया में तेजी ला दी है. इसके तहत देश के निजी कंपनियों से ही 87 ड्रोन खरीदे जाएंगे.
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस योजना पर करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह पूरी तरह मेक इन इंडिया के तहत होगा. इस कदम से भारत की स्वदेशी ड्रोन तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी.
पहले इजरायल से खरीदे जाते थे ड्रोन
सूत्रों ने बताया कि यह पहली बार है जब भारतीय कंपनियों को इस तरह के एडवांस MALE ड्रोन बनाने का मौका मिल रहा है. इससे पहले यह ड्रोन एक इजरायली कंपनी से खरीदे जाते थे.
खरीदने से पहले किए गए परीक्षण
ड्रोन की खरीद से पहले जरूरी परीक्षण भी किए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ड्रोन के डिजाइन और तकनीक सेना की जरूरतों पर खरी उतरती हैं.
इन ड्रोन को उन्नत निगरानी और लड़ाकू क्षमताओं से लैस किया जाएगा. यह ड्रोन हर तरह के इलाके में रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही में मदद करेंगे. इनकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये कम से कम 35,000 फीट की ऊंचाई पर 30 घंटे से ज्यादा लगातार उड़ान भर सकेंगे. अधिकारी ने बताया कि इसमें 60% से ज्यादा हिस्सा स्वदेशी होना जरूरी रखा गया है.
वायुसेना को मिलेगी मदद
सूत्रों के मुताबिक MALE ड्रोन के शामिल होने से तीनों सेनाओं की निगरानी क्षमता और मजबूत होगी. खासकर भारतीय वायुसेना को पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर नजर रखने में बड़ी मदद मिलेगी.
अब इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा. मंजूरी मिलते ही ड्रोन की खरीद शुरू हो जाएगी और जल्द ही देश की सीमाओं पर दुश्मन की हर हरकत पर बारीकी से नजर रखी जा सकेगी.
दलाई लामा को भारत रत्न देने की मांग, अरुणाचल CM करेंगे केंद्र से सिफारिश
10 Jul, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को भारत रत्न सम्मान दिए जाने की वकालत की है. पेमा खांडू ने मंगलवार को न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह जल्द केंद्र सरकार को पत्र लिखकर तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु को भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश करेंगे.
14वें दलाई लामा को भारत रत्न दिए जाने के समर्थन में सांसदों के एक समूह के अभियान के बारे में उन्होंने कहा कि यह दलाई लामा ही थे जिन्होंने नालंदा स्कूल ऑफ बुद्धिज्म का प्रचार और विस्तार किया. सीएम पेमा खांडू ने कहा, "आठवीं शताब्दी में नालंदा विश्वविद्यालय से कई गुरु तिब्बत गए. उस समय तिब्बत में 'बोन' धर्म था. बोन धर्म और बौद्ध धर्म के मिलने से तिब्बती बौद्ध धर्म की अवधारणा का उदय हुआ और इस प्रकार बौद्ध धर्म पूरे तिब्बत में फैला."
खांडू ने कहा कि तिब्बती बौद्ध धर्म की अवधारणा लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली.
14वें दलाई लामा को 1959 में तिब्बत पर चीनी आक्रमण के बाद भारत भागने पर मजबूर होना पड़ा था. तब से वह अन्य निर्वासित तिब्बतियों के साथ हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं.
खांडू ने कहा कि दलाई लामा उस समय तिब्बत में मौजूद सभी बड़े मठों की परंपराएं, शाक्य जैसी विभिन्न परंपराएं, तिब्बत में मौजूद सभी पुरानी बौद्ध परंपराएं भारत लाए. उन्होंने कई जगहों पर, विशेषकर दक्षिण भारत में संस्थान स्थापित किए. इन मठों से भारतीय हिमालयी क्षेत्र के बौद्धों को काफी लाभ हुआ.
खांडू ने कहा, "हमारे भिक्षु वहां अध्ययन करने जाते, फिर उन प्रथाओं को अपनी भूमि, अपने स्थानों पर ले आते. तो अगर हम उस दृष्टिकोण से देखें तो 14वें दलाई लामा ने भारत की प्राचीन नालंदा परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है? इस दृष्टिकोण से भारत रत्न की मांग बहुत अच्छा कदम है."
पूर्व मं विदेशी मूल की तीन प्रमुख हस्तियों - मदर टेरेसा (1980), अब्दुल गफ्फार खान (1987) और नेल्सन मंडेला (1990) को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है.
पेमा खांडू बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं. दलाई लामा के उत्तराधिकारी के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि यह हमेशा चर्चा का विषय रहा है. उन्होंने कहा, "पहले दलाई लामा से लेकर वर्तमान 14वें दलाई लामा तक दलाई लामा परंपरा 600 से अधिक वर्षों से निरंतर जारी है. 'गादेन फोडरंग ट्रस्ट' अगले दलाई लामा की पहचान का जिम्मा संभालता है, जो वर्तमान दलाई लामा के निधन के बाद ही शुरू होगी. कोई जल्दबाजी नहीं है और पूरी प्रक्रिया में कड़े नियमों का पालन होता है."
चीन की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए...
उन्होंने कहा कि ऐसी भी अटकलें थीं कि क्या दलाई लामा परंपरा जारी रहेगी और क्या अगली दलाई लामा कोई महिला हो सकती है. खांडू ने कहा, "लेकिन 90वें जन्मदिन से पहले, बौद्ध परंपराओं के सभी प्रमुखों ने बैठक की और इस बात पर सहमति जताई कि परंपरा जारी रहेगी. चीन ने इस पर आपत्ति जताई है... चीन की आपत्तियां उसकी अपनी नीतियों पर आधारित हैं. लेकिन दलाई लामा परंपरा को मुख्यतः हिमालयी क्षेत्र और तिब्बती बौद्धों द्वारा मान्यता प्राप्त है. इस मामले में चीन की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए."
देश में थमा कोरोना का कहर, सक्रिय मामले एक हजार से भी कम
10 Jul, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण के सक्रिय मामलों में तेजी से कमी देखी गई है और बुधवार को कुल सक्रिय मामलों का आंकड़ा एक हजार से नीचे 796 पर आ गया। इस वायरस से उबरने वालों की कुल संख्या 27991 पहुंच गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण से केरल और मध्य प्रदेश में एक-एक और मरीज की मौत होने के साथ देश में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 156 हो गया। गौरतलब है कि 22 मई को देश में कोरोना के सिर्फ़ 257 मामले सक्रिय थे।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आने से इनकी संख्या 72 दर्ज की गई। दूसरी ओर इस वायरस के संक्रमण से 189 मरीज स्वस्थ्य हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार संक्रमण के मामलों में दक्षिण भारत के केरल में अभी भी 174 सक्रिय मामले हैं।
देश के 16 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में सक्रिय मामलों का आंकड़ा दहाई के पास है। जिनमें गुजरात में 83, महाराष्ट्र में 55, राजस्थान 51, कर्नाटक 47, तमिलनाडु 43, दिल्ली में 42, पश्चिम बंगाल में 41, उत्तर प्रदेश 37, सिक्किम 34, पंजाब 33, हरियाणा में 31, जम्मू-कश्मीर में 25, मणिपुर 21, मध्य प्रदेश में 16 और असम और छत्तीसगढ़ में 11-11 सक्रिय मामले रह गए हैं। इसके अलावा छह राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेश में सक्रिय मामले दहाई से कम हैं। आठ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में कोरोना को कोई भी सक्रिय मामला नहीं है।
स्पेस में बना खेत! किसान बने शुभांशु शुक्ला, उगा रहे मेथी और मूंग
10 Jul, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के शुभांशु शुक्ला इन दिनों अपनी अंतरिक्ष यात्रा का लुत्फ उठा रहे हैं। यहां वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में अपनी यात्रा के अंतिम चरण में किसानी करते नजर आए हैं। हाल ही में शुभांशु शुक्ला की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें वह एक पेट्री डिश में अंकुरित हो रहे मूंग और मेथी के साथ नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अंकुरित मूंग और मेथी को आईएसएस के एक स्टोरेज फ्रीजर में रखा गया है। शुभांशु शुक्ला द्वारा इन पौधों को उगाना उनकी टीम द्वारा किए जा रहे अलग-अलग प्रयोगों का हिस्सा है। इन पौधों के जरिए इस बात का अध्ययन किया जा रहा है कि माइक्रो ग्रैविटी पौधों के शुरुआती विकास को कैसे प्रभावित करता है।
यहां अंकुरित बीजों पर प्रयोग का नेतृत्व धारवाड़ के कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के रविकुमार होसामणि और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सुधीर सिद्धपुरेड्डी कर रहे हैं। एक्सिओम स्पेस के एक बयान में कहा गया है कि पृथ्वी पर लौटने के बाद इन बीजों को कई पीढिय़ों तक उगाया जाएगा।
कल के बाद पृथ्वी पर लौटने की उम्मीद
गौरतलब है कि एक्सिओम-4 यान से आईएसएस पहुंचे शुक्ला और उनके साथी कक्षीय प्रयोगशाला में 12 दिन बिता चुके हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार फ्लोरिडा तट पर मौसम की स्थिति के आधार पर 10 जुलाई के बाद किसी भी दिन पृथ्वी पर लौटने की उम्मीद है। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अब तक आईएसएस से एक्सिओम-4 यान के अनडॉकिंग की तारीख की घोषणा नहीं की है। इससे पहले एक्सिओम-4 मिशन की अवधि 14 दिन तक की तय की गई थी।
कई तरह के प्रयोग कर रहे शुभांशु
शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके शोध कार्य विभिन्न क्षेत्रों और विषयों में फैले हुए हैं। उन्होंने बताया कि स्टेम सेल रिसर्च से लेकर बीजों पर माइक्रो ग्रैविटी के प्रभाव का अध्ययन, स्टेशन पर लगे स्क्रीन के साथ बातचीत करते समय अंतरिक्ष यात्रियों पर पडऩे वाले प्रभाव का मूल्यांकन। यह सब अद्भुत रहा है। मुझे रिसर्चर्स और आईएसएस के बीच इस तरह का पुल बनने और उनकी ओर से शोध करने पर गर्व है।
जिला प्रशासन की अनूठी पहल, नहरों के पानी से लबालब हुए 450 तालाब
ईंट निर्माण कार्य से आत्मनिर्भर बन रही हैं समूह की महिलाएं
महासंघ की कार्यप्रणाली को बनाये गतिशील एवं परिणामोन्मुख : राज्यमंत्री पंवार
प्रदेश में जंगली भैंसा प्रजाति का पुनर्स्थापन एक ऐतिहासिक अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सही दवा-शुद्ध आहार' अभियान में जगदलपुर के चाट-गुपचुप सेंटरों और कॉस्मेटिक्स दुकानों का हुआ निरीक्षण
वन मंत्री केदार कश्यप ने भरा ऑनलाइन स्व-गणना पत्रक, नागरिकों से सहभागिता की अपील
एमपी टूरिज्म को मिला “लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन” का प्रतिष्ठित सम्मान
मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दे रहा है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण तेज़ी से जारी, 35 हजार से अधिक बोरे का हुआ संग्रहण
