देश
चीन-पाकिस्तान और तु्र्की का घमंड तोड़ेगा भारत, ये नया एयर डिफेंस सिस्टम चटाएगा धूल
17 Jul, 2025 12:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन, पाकिस्तान और तुर्की की तिकड़ी को पूरी दुनिया ने देखा। चीनी विमानों और तुर्की के ड्रोन की मदद से पाकिस्तान भारत पर हमले की कोशिश करता रहा, लेकिन सफल नहीं हो सका। अब भारत ने बुधवार को एक नए एयर डिफेंस सिस्टम का सफलतापूर्वक ट्रायल कर लिया है। यह भारत का मेड इन इंडिया एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। आकाश प्राइम नामक एयर डिफेंस सिस्टम का 15 हजार फुट की ऊंचाई पर लद्दाख सेक्टर में सक्सेसफुल ट्रायल किया गया।
इस नए डिफेंस सिस्टम की सफलता के बाद अब भविष्य में कोई भी दुश्मन देश, भारत पर आंख उठाने की कोशिश भी करता है, तो उसकी हार होना तय है। रक्षा अधिकारी ने बताया कि परीक्षणों के दौरान, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों ने अत्यंत ऊंचाई वाले क्षेत्र में तेज गति से चलने वाले लक्ष्य विमानों पर दो सीधे प्रहार किए। आकाश प्राइम सिस्टम भारतीय सेना में आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की तीसरी और चौथी रेजिमेंट का गठन करेगी। इस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी विमानों और तुर्की ड्रोनों का उपयोग करके पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों को विफल करने में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।
पुरानी वीडियो ने रोके सैलानियों के कदम, मनाली-लेह रूट पर थमे सैलानियों के कदम
17 Jul, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुल्लू, मनाली से लेह तक का सफर अब सिर्फ रोमांचक नहीं, बल्कि आरामदायक भी हो गया है। परिवहन निगम द्वारा चलाई जा रही नियमित बस सेवा में सवार यात्रियों के लिए यह यात्रा एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई है। बर्फीली वादियों, ऊंचे दर्रों और घाटियों से होकर गुजरती यह बस न केवल पर्यटकों को गंतव्य तक पहुंचाती है, बल्कि रास्ते में हिमालय की अनुपम छटा का भी साक्षी बनाती है। बता दें कि परिवहन निगम की यह सेवा हर साल गर्मियों में हजारों पर्यटकों को सुरक्षित और सुंदर यात्रा अनुभव देने में सफल रहती है। साहसिक यात्रा और प्राकृतिक सौंदर्य का यह मेल निश्चित ही यात्रियों के दिल में हमेशा के लिए बस जाता है। वहीं लेह घूमने का शौक रखने वाले यात्रियों की संख्या भी अब यहां काफी कम हो गई है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों कुल्लू के सैंज घाटी में बाढ़ से हुए नुकसान के बाद से और मंडी में आई आपदा के बाद से सैलानियों की संख्या घटते ही यहां दिल्ली-मनाली-सेह जाने वाले सैलानियों की संंख्या में भी कमी दर्ज की जा रही है। बुधवार को मनाली से लेह के लिए गई बस सेवा में केवल 25 यात्रियों ने ही सफर किया है। परिवहन निगम के आरएम अंशित शर्मा ने कहा कि मनाली से बसें प्रात: 4 से 5 बजे के बीच रवाना होती हैं। यात्रा अवधि यह यात्रा लगभग 12 से 15 घंटे की होती है, जो सडक़ की स्थिति और मौसम पर निर्भर करती है। (एचडीएम)
आनंद में बदला सफर
कुल्लू निवासी रमेश ठाकुर, योगराज, प्रकाश ठाकुर जो पहली बार इस मार्ग से लेह गए थे, का कहना है कि इससे पहले हमने इस यात्रा को लेकर घबराहट महसूस की थी। निगम की बस में सफर इतना आरामदायक रहा कि पूरा सफर आनंद में बदल गया। युवाओं की मानें तो सैलानियों की संख्या भी काफी कम हो गई है, जो बस में देखने को मिला है।
एचपीटीडीसी की टैम्पो टै्रवलर सेवा भी उपलब्ध
मनाली से लेह जाने वालों के लिए हिमाचल परिवहन निगम के अलावा एचपीटीडीसी की टैम्पो टै्रवलर भी यहां उपलब्ध है, जो कि एक दिन छोड़ कर मनाली से लेह का सफर तय करवाती है। सुबह पांच बजे मनाली से यह टैम्पो ट्रैवलर सेवा रहती है और शाम करीब छह बजे यानी 11 घंटे के बीच में लेह तक यात्रियों को पहुंचा देती है।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर की मांग- जम्मू-कश्मीर को मिले राज्य का दर्जा
17 Jul, 2025 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग की है। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि, संसद के आगामी मानसून सत्र में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए बिल लाया जाए। राहुल ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी के पुराने दो बयानों का भी जिक्र किया। जब पीएम ने 19 मई 2024 को भुवनेश्वर में और 19 सितंबर 2024 को श्रीनगर की रैली में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने की बात कही थी। इसके अलावा राहुल ने सरकार से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए कानून लाने का भी अनुरोध किया।
साल 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाते समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे। सरकार ने उस समय ही राज्य के हालात सामान्य होने पर पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का भरोसा दिया था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुर्नगठित किया गया था। इसलिए पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए संसद में एक कानून पारित कर पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव करना होगा। यह बदलाव संविधान की धारा 3 और 4 के तहत होंगे। राज्य का दर्जा देने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नए कानूनी बदलावों का अनुमोदन जरूरी होगा, यानी संसद से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना जरूरी है। मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद जिस दिन राष्ट्रपति इस कानूनी बदलाव की अधिसूचना जारी करेंगे, उसी तारीख से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।
71 दवाओं की कीमतों में संशोधन, इन गंभीर बीमारियोंं के मरीजों को मिलेगी राहत
17 Jul, 2025 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से 71 आवश्यक दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतें संशोधित कर दी हैं। इनमें कैंसर, डायबिटीज, अल्सर और गंभीर संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। एनपीपीए ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया है। नई व्यवस्था के तहत दवा निर्माता कंपनियां तब ही जीएसटी जोड़ सकेंगी, जब उन्होंने उस दवा की कीमत पर जीएसटी जमा किया हो या जमा करना बाकी हो। एनपीपीए द्वारा जारी सूची में कैंसर की दवाओं पर खास फोकस किया गया है। उदाहरण के लिए रिलायंस लाइफ साइंसेज की ट्रास्टुजुमाब इंजेक्शन, जो ब्रेस्ट और पेट के कैंसर के इलाज में काम आती है, अब 11,966 प्रति वायल की दर से उपलब्ध होगी।
वहीं, टॉरंट फार्मास्यूटिकल्स की पेप्टिक अल्सर की तीन दवाओं के संयोजन से बनी टैबलेट 162.50 प्रति टैबलेट में मिलेगी। गंभीर संक्रमण के इलाज में काम आने वाली एक कॉम्बीपैक दवा 626 प्रति वायल और एक अन्य दवा 515.50 प्रति वायल की दर से बेची जाएगी। डायबिटीज की दवाओं की कीमतों में भी संशोधन किया गया है। एनपीपीए के नोटिफिकेशन में 25 एंटीडायबिटिक दवाओं की नई कीमतें तय की गई हैं, जिनमें सिटाग्लिप्टिन और एम्पाग्लिफ्लोजिन वाले कई कॉम्बिनेशन शामिल हैं। इससे डायबिटीज के मरीजों को किफायती दरों पर दवाएं मिलने में मदद मिलेगी। बता दें कि फरवरी में एनपीपीए ने निर्देश जारी किए थे कि सभी दवा निर्माता अपनी नई कीमतों की सूची राज्य ड्रग कंट्रोलर, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं और सरकार के पास भेजें। इसके अलावा हर दवा विक्रेता और डीलर को यह नई सूची अपनी दुकान या कार्यालय में ऐसी जगह लगानी होगी, जहां ग्राहक आसानी से उसे पढ़ सकें। यह नियम ऑनलाइन दवा विक्रेताओं पर भी लागू होगा। एनपीपीए भारत में दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमतें तय करने वाली संस्था है, ताकि जीवन रक्षक दवाएं सभी नागरिकों को उचित दर पर उपलब्ध हो सकें। नई कीमतों के लागू होने से कैंसर, डायबिटीज और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाखों मरीजों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल में ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट फर्जीबाड़ा, आयुर्वेदिक विभाग के कई डाक्टर शिकंजे में
17 Jul, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्रों को लेकर एक बड़ा फर्जीबाड़ा सामने आया है, जिसने राज्य में हडक़ंप मचा दिया है। विजिलेंस जांच में खुलासा हुआ है कि कई अपात्र व्यक्तियों ने फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली। इनमें से कुछ तो आयुर्वेदिक विभाग में डाक्टर के पद पर तैनात हो गए हैं। इतना ही नहीं, जांच आगे बढ़ी तो अन्य विभागों में भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने आयुर्वेदिक विभाग में मंडी, धर्मशाला, हमीरपुर और बिलासपुर में फर्जी दस्तावेज बनाने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप में केस दर्ज कर लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से तीन मामलों को तो स्वीकृति भी मिल चुकी है, जिससे यह साफ है कि जांच की आंच अब तेजी से आगे बढ़ेगी।
यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को इस संबंध में शिकायत की। गहन जांच के बाद पता चला कि कुछ अभ्यार्थियों ने डाक्टर बनने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए न केवल अपनी पारिवारिक आय छिपाई, बल्कि कुछ ऐसे भी थे जो पहले से ही किसी अन्य सरकारी सेवा में कार्यरत थे। यह सीधे तौर पर पात्रता मानदंडों का उल्लंघन है, क्योंकि यह लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को दिया जा सकता है, जिनके परिवार में सरकारी सेवा में कोई नहीं हैं और जिनकी पारिवारिक आय निर्धारित सीमा से कम है। उल्लेखनीय है कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद उम्मीदवार केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं। इस फजीबाड़े ने इस महत्त्वपूर्ण आरक्षण प्रणाली की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विजिलेंस की यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि इस तरह के कदाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद लगाई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी गलत प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अधिकारी भी जांच के दायरे में
इस पूरे प्रकरण में केवल ये डाक्टर ही नहीं, बल्कि उन अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी कटघरे में आ गई है, जिन्होंने आंखें मूंदकर ये फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी किए। विजिलेंस इस जांच को आगे बढ़ा रही है और ऐसी संभावना है कि आने वाले समय में प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी भी कानून के शिकंजे में आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार फर्जीबाड़े के इस मामले में सबसे ज्यादा जिला कांगड़ा में पांच, मंडी में चार, हमीरपुर में चार और बिलासपुर में एक केस दर्ज किया गया है। इन आयुर्वेदिक विभाग के कर्मियों की तैनाती 2022 में बैचवाइज आधार पर हुई थी।
मुगल निर्दयी और क्रूर…बदल गई 8वीं की NCERT किताब, जानिए अकबर के बारे में क्या लिखा
17 Jul, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की आठवीं क्लास की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में मुगल शासकों को लेकर कुछ सख्त बातें लिखी गई हैं। किताब में बाबर को ‘बहुत ही निर्दयी और क्रूर विजेता’ कहा गया है, जिसने कई शहरों की पूरी आबादी को मरवा दिया। वहीं, अकबर के बारे में लिखा गया है कि उसका शासन एक तरफ से सहनशील था, लेकिन उसमें जालिम फैसले भी थे। इसके अलावा औरंगजेब के बारे में कहा गया है कि उसने कई मंदिरों और गुरुद्वारों को तुड़वाया।
इसके साथ ही किताब में एक जरूरी चेतावनी भी दी गई है कि इतिहास में जो गलतियां या घटनाएं हुई हैं, उसके लिए आज के समय में किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए यानी आज की पीढ़ी को बीते वक्त के झगड़ों को दोहराना नहीं चाहिए। किताब में मुगलों और दिल्ली सल्तनत के समय को ‘धार्मिक असहिष्णुता’ और हिंसा से भरा समय बताया गया है, जिसमें कई बार गांवों और शहरों को लूटा गया, मंदिरों और ज्ञान के केंद्रों को तबाह किया गया। किताब में कहा गया है कि यह समय इतिहास का ‘काला दौर’ था। इसके साथ ही एक स्पेशल नोट में कहा गया है कि ‘इतिहास को समझना जरूरी है, लेकिन उसकी वजह से आज के लोगों को दोष नहीं देना चाहिए’। इस किताब का नाम है ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी- इंडिया एंज्ञ बियोंड’ और इसे इस हफ्ते ही स्कूलों में पढ़ाने के लिए जारी किया गया है।
इससे पहले मुगलों और दिल्ली सल्तनत के बारे में जानकारी सातवीं क्लास में दी जाती थी, लेकिन अब नए सिलेबस में यह सब आठवीं में लाया गया है। नई किताब में 13वीं से 17वीं शताब्दी तक के भारतीय इतिहास को कवर करने वाले चैप्टर ‘भारत के राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण’ में दिल्ली सल्तनत के उत्थान और पतन और उसके प्रतिरोध, विजयनगर साम्राज्य, मुगलों और उनके प्रतिरोध और सिखों के उत्थान पर प्रकाश डाला गया है। इसमें सल्तनत काल को राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य अभियानों से भरा बताया गया है। सल्तनत और मुगलों पर आधारित खंडों में मंदिरों पर हमलों और कुछ शासकों की क्रूरता के कई संदर्भ हैं, जिनमें से किसी का भी उल्लेख कक्षा सातवीं की उस पुरानी एनसीईआरटी पुस्तक में नहीं है, जिसमें छात्रों को इतिहास के इस काल के बारे में बताया गया था।
किताब में विशेष नोट
किताब में एक विशेष चेतावनी में कहा गया है कि इतिहास को समझना जरूरी है, लेकिन उसकी वजह से आज के लोगों को दोष नहीं देना चाहिए।
दिल्ली सरकार का दावा: प्रदूषण मुक्त शोधन से सुधरेगी वायु और जल गुणवत्ता
16 Jul, 2025 10:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली में ई-वेस्ट के प्रबंधन को लेकर सरकार एक नई दिशा में कदम बढ़ा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि कचरे के शोधन के दौरान वायु, जल और भूमि प्रदूषण पूरी तरह से रोका जाए। इसी उद्देश्य से दिल्ली सरकार ‘जीरो एमिशन ई-वेस्ट मैनेजमेंट पार्क’ की स्थापना की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए नॉर्वे और हांगकांग जैसे देशों के सफल और न्यूनतम प्रदूषण वाले वेस्ट मैनेजमेंट मॉडलों का अध्ययन कराया जा रहा है।
सरकार ने इस अध्ययन के लिए एक थर्ड पार्टी एजेंसी को ज़िम्मेदारी दी है, जो यह मूल्यांकन करेगी कि इन अंतरराष्ट्रीय मॉडलों को दिल्ली के संदर्भ में कितना प्रभावी और व्यावहारिक तरीके से लागू किया जा सकता है।
गाजीपुर-भलस्वा में बढ़ता प्रदूषण बना बड़ी चुनौती
वर्तमान में दिल्ली के गाजीपुर और भलस्वा जैसे लैंडफिल साइट्स पर भारी मात्रा में कचरे का शोधन किया जा रहा है, जिससे इन इलाकों में वायु, जल और भूमि प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। स्थानीय निवासियों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ रही है और दूषित पानी पीना मजबूरी बन गया है। दिल्ली सरकार इस स्थिति को खत्म करने के लिए वैकल्पिक और पर्यावरण-मित्र उपायों की ओर अग्रसर है।
150 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक ई-वेस्ट इको पार्क
दिल्ली सरकार ने करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से एक ग्रीन ई-वेस्ट इको पार्क विकसित करने की योजना बनाई है, जिसके लिए ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इस परियोजना की जानकारी देते हुए दिल्ली के उद्योग, पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार नॉर्वे और हांगकांग जैसे देशों की तर्ज पर शून्य प्रदूषण फैलाने वाले शहरी ई-वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था दिल्ली में लागू करना चाहती है।
11.4 एकड़ में फैलेगा पार्क, मिलेगा रोजगार और आमदनी
इस ग्रीन ई-वेस्ट इको पार्क को 11.4 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिसमें हर साल 51,000 मीट्रिक टन से अधिक ई-वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। परियोजना से अनुमानित 350 करोड़ रुपये की आय अर्जित होने की उम्मीद है। पार्क के 33 प्रतिशत हिस्से में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाएगा, जो पर्यावरण को हरा-भरा बनाए रखने में सहायक होगा।
हजारों ग्रीन नौकरियों के अवसर होंगे पैदा
पार्क के जरिए ना केवल कीमती धातुओं की रिकवरी की जाएगी, बल्कि इससे हजारों ग्रीन जॉब्स भी उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
शिरडी साईं मंदिर को गुरु पूर्णिमा पर विदेशी मुद्रा समेत ₹6 करोड़ की भेंट
16 Jul, 2025 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शिरडी: महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में हमेशा भक्तों के द्वारा दान किए जाने की बातें सामने आती रहती हैं. वहीं लाखों साईं भक्त साईं बाबा को अपना गुरु मानते हुए हर साल गुरु पूर्णिमा पर दर्शन के लिए शिरडी आते हैं.
इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा उत्सव के दौरान देश-विदेश से लगभग तीन लाख श्रद्धालु साईं समाधि के दर्शन के लिए शिरडी आए. साथ ही इस अवसर पर आने वाले भक्त गुरु दक्षिणा के रूप में बड़ी राशि दान करते हैं. इस बार दान की राशि का यह छह करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया.
तीन दिन में 6 करोड़ रुपये दान में मिले : साईं बाबा संस्थान की ओर से शिरडी में 9 से 11 जुलाई तक गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया. इस महोत्सव के तीन दिनों के दौरान देश भर के भक्तों ने साईं चरणों में 6 करोड़ 31 लाख 31 हजार रुपये का दान दिया है. वहीं विदेशों से भी भक्तों ने लगभग 9 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा दान की है.
इन 13 देशों के भक्तों ने दान की राशि
कनाडा कैनेडियन डॉलर-480
इथियोपियाई बिर-2
यूरोपीय संघ यूरो-460
इंडोनेशियाई रुपिया-21000
मलेशियाई रिंगित-361
न्यूज़ीलैंड डॉलर-5
कतर रियाल-65
सिएरा लियोनियन लियोन-50
सिंगापुर डॉलर-39
श्रीलंकाई रुपया-490
संयुक्त अरब अमीरात दिरहम-180
यूनाइटेड किंगडम पाउंड-45
अमेरिका अमेरिकी डॉलर-7731
इन 13 देशों के भक्तों ने साईं बाबा को कुल 30908 विदेशी मुद्राएं दान की हैं. हालांकि इस विदेशी मुद्रा को साईं बाबा संस्थान के द्वारा बैंक में जमा करने पर इसका सही मूल्य पता चल सकेगा. अनुमान है कि यह विदेशी मुद्रा औसतन लगभग 9 लाख रुपये है.
कितना नकद और कितना ऑनलाइन मिला दान: साईं मंदिर क्षेत्र में दान काउंटर पर 1 करोड़ 17 लाख 84 हजार रुपए और हुंडी (दान पेटी) में 1 करोड़ 88 लाख 8 हजार रुपए दान में मिले. इसके अलावा जो भक्त शिरडी नहीं आ सके, उन्होंने ऑनलाइन, चेक और डीडी के जरिए 2 करोड़ 5 लाख 76 हजार रुपए दान किए हैं.
इसके साथ ही 668.400 ग्राम सोना और 6798.680 ग्राम चांदी भी दान में प्राप्त हुई है. गुरु पूर्णिमा उत्सव के दौरान, साईं भक्तों ने शिरडी के साईं बाबा को उदारतापूर्वक दान दिया.
मिलने वाले दान में इजाफा : इस बीच, शिरडी साईंबाबा को भक्तों द्वारा दी जाने वाली दान राशि दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में, साईंबाबा संस्थान के दानपात्र में भक्तों द्वारा दिए गए बड़े दान के कारण, साईंबाबा के मिलने वाले दान में बढ़ोत्तरी हुई है.
वर्तमान में 3000 करोड़ रुपये बैंकों में जमा : बता दें कि 1920 में शुरू हुए साईंबाबा संस्थान के खाते में पहले 1600 रुपये थे. आज, साईंबाबा संस्थान के पास विभिन्न बैंकों में लगभग 3000 करोड़ रुपये जमा हैं. इसके अलावा, संस्थान के पास 480 किलो सोना और 7000 किलो चांदी भी है.
CDS ने दी चेतावनी: पाक ड्रोन से बड़ा खतरा नहीं, लेकिन युद्ध जीतने के लिए चाहिए आधुनिक रणनीति
16 Jul, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर हाल के संघर्षों ने यह प्रदर्शित किया है कि ड्रोन किस तरह से सामरिक संतुलन को असमान रूप से बदल सकते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवरहित विमानों और मानवरहित हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) में आत्मनिर्भरता भारत के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता है.
यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में जनरल चौहान ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखा दिया है कि हमारे भूभाग और हमारी जरूरतों के लिए निर्मित स्वदेशी मानवरहित हवाई प्रणालियां (यूएएस) और सी-यूएएस क्यों महत्वपूर्ण हैं.
एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय द्वारा थिंक टैंक सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के सहयोग से 'यूएवी और सी-यूएएस के क्षेत्र में विदेशी ओईएम से वर्तमान में आयात किए जा रहे महत्वपूर्ण घटकों के स्वदेशीकरण' पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है.
रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि यह आयोजन हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई शत्रुता को देखते हुए हो रहा है. इसमें ऑपरेशन सिंदूर भी शामिल है, जिसने यूएवी और सी-यूएएस के सामरिक महत्व और परिचालन प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला था.
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) ने उद्घाटन सत्र में अपने मुख्य भाषण में कहा कि ड्रोन वास्तविकता का प्रमाण हैं. हाल के संघर्षों में उनकी व्यापक उपयोगिता दर्शाती है कि ड्रोन किस प्रकार अपने आकार या कीमत के अनुपात में सामरिक संतुलन को बदल सकते हैं.
उन्होंने कहा, 'असममित ड्रोन युद्ध बड़े प्लेटफार्मों को कमजोर बना रहा है. सेनाओं को वायु सिद्धांतों, सी-यूएएस के विकास और संलग्नता के अनुकूली कदमों के वैचारिक पहलुओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है.' सीडीएस ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने 10 मई को बगैर हथियार के ड्रोन और लोटर हथियारों का इस्तेमाल किया. लेकिन उनमें से कोई भी वास्तव में भारतीय सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका.'
जनरल चौहान ने कहा, 'उनमें से अधिकांश को निष्क्रिय कर दिया गया. उनमें से कुछ को लगभग सही सलामत स्थिति में बरामद किया जा सका. सीडीएस ने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर ने 'हमें दिखाया है कि हमारे इलाके और हमारी जरूरतों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित यूएएस, सी-यूएएस क्यों महत्वपूर्ण हैं.
आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए जनरल चौहान ने जोर देकर कहा कि हम आयातित विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर भरोसा नहीं कर सकते जो हमारे आक्रामक और रक्षात्मक मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, 'विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता हमारी तैयारियों को कमजोर करती है. उत्पादन बढ़ाने की हमारी क्षमता को सीमित करती है. महत्वपूर्ण पुर्जों की कमी और चौबीसों घंटे उपलब्धता की कमी हो जाती है.
ड़े सैन्य अधिकारी, रक्षा विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और निजी उद्योग के प्रतिनिधि इस आयोजन के लिए यहां एकत्र हुए हैं. इनका उद्देश्य स्वदेशीकरण के लिए एक रणनीतिक रोडमैप विकसित करना है. इसका मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण यूएवी और सी-यूएएस घटकों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना है.
कार्यशाला के लिए अपने संदेश में सीडीएस ने लिखा, 'गैर-संपर्क युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे परिदृश्य में यूएवी एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरे हैं. भारत जैसे राष्ट्र के लिए यूएवी और सी-यूएएस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता न केवल एक रणनीतिक अनिवार्यता है, बल्कि यह भारत को अपना भाग्य बनाने अपने हितों की रक्षा करने और भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के बारे में भी है.
क्या था ऑपरेशन सिंदूर
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने हमला कर दिया था. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे. इस हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया. इस ऑपरेशन के जरिए सेना ने पाकिस्तान स्थिति कई आतंकी संगठनों के मुख्यालयों को निशाना बनाया. इन हमलों को लेकर पाकिस्तान काफी संवेदनशील हो गया और उसने भारत पर जवाबी कार्रवाई करने का दुस्साहस किया. इसके बाद भारतीय जवानों ने फिर से पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया. उनके कई हवाई अड्डों को तबाह कर दिया. इन हमलों से घबराकर पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ से हमला रोकने का आग्रह किया. भारत ने इसे स्वीकार कर लिया. सैद्धान्तिक रूप से भारत ने अभी तक ऑपरेशन सिंदूर को खत्म नहीं किया है.
एक बार फिर स्वर्ण मंदिर पर खतरा, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में
16 Jul, 2025 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईमेल में लिखा- पाइपों में आरडीएक्स भरकर किए जाएंगे धमाके
अमृतसर। पंजाब में स्वर्ण मंदिर को लगातार तीसरे दिन बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ईमेल पर मिली। ईमेल में दावा किया गया कि पाइपों में आरडीएक्स भरकर मंदिर के अंदर धमाके किए जाएंगे। हालांकि सुरक्षा कारणों से मेल में लिखे गए शब्दों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच के लिए डॉग और बम स्क्वायड मौके पर पहुंच गए।
वहीं, एसजीपीसी और अमृतसर पुलिस भी अलर्ट पर है। बीएसएफ और पुलिस कमांडो तैनात किए गए हैं। हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इससे पहले, सोमवार और मंगलवार को भी मंदिर को उड़ाने की धमकी मिली थी। एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि 15 जुलाई को दूसरी ईमेल केरल के सीएम और पूर्व चीफ जस्टिस की फेक आईडी से भेजी गई थी। बुधवार सुबह आसिफ कपूर नाम के ईमेल एड्रेस से ईमेल आई। ये ईमेल सीएम भगवंत मान को भी भेजी गई।
हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि पिछले लंबे समय से हमारे आस्था के केंद्र स्वर्ण मंदिर को टारगेट किया जा रहा। 1984 में श्री दरबार साहिब का बहुत नुकसान हुआ था। गुरुओं द्वारा दिए गए उपदेश कुछ लोगों को अच्छे नहीं लग रहे। धामी ने कहा कि अगर सांसदों और मुख्यमंत्रियों को ऐसे ईमेल भेजे गए तो सरकार ने इस पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। सिख संगत का यह केंद्रीय संस्थान है और ऐसी आस्था के केंद्र की सुरक्षा कैसे दांव पर लगाई जा सकती है। कहीं दरबार साहिब में संगत के आवागमन को कम करने की कोई कोशिश तो नहीं हो रही है। जांच होनी चाहिए।
एसजीपीसी सचिव ने कहा कि कुछ शरारती तत्वों की तरफ से धमकी दी गई है कि स्वर्ण मंदिर को बम से उड़ा दिया जाएगा। ये जो धमकी दे रहे हैं। उनका कोई धर्म नहीं होता। ये लोगों में डर की भावना पैदा करने के लिए ऐसा करते हैं। उन्होंने कहा कि संगत पहले की तरह ही माथा टेकने आ रही है। गुरुघर में कीर्तन सुन रहे हैं। संगत से विनती है कि ये गुरुओं का दर है और यहां ऐसा सोचना भी पाप है। जिसने भी ये धमकी दी है, ये सरकारों का काम है कि वे उसे ट्रेस करे और सख्त से सख्त सजा दे। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर शांति और एकता का संदेश मिलता है। यहां हर धर्म के लोग आकर नतमस्तक होते हैं। ये धर्म से तोड़ने की और एकता को खंडित करने की साजिश है।
शुभांशु का अंतरिक्ष सफर सफल, ISRO ने बताया गगनयान की तैयारी में होगा अहम रोल
16 Jul, 2025 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला मंगलवार को वापस पृथ्वी पर लौट आए हैं। उनके साथ उनका क्रू भी वापस आया। शुभांशु का ये मिशन भारत के लिए बेहद अहम है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत गगनयान मिशन को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर चुका है। ये मिशन भारत का पहला मानवरिहत मिशन होगा।
शुभांशु शुक्ला पहले ऐसे भारतीय हैं जिन्होंने अंतराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर कदम रखा है। इससे पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने 41 साल पहले अंतरिक्ष यात्रा की थी। ISS पर रहते हुए शुभांशु ने 7 परीक्षण किए हैं। इन परीक्षणों से मिलने वाले नतीजे और शुभांशु के अनुभव को मिशन गगनयान में इस्तेमाल किया जाएगा।
पीएम मोदी ने शुभांशु का कामयाबी को बताया मील का पत्थर
प्रधानमंत्री मोदी ने शुभांशु का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और अग्रणी भावना से अरबों सपनों को प्रेरित किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "यह हमारे अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान की दिशा में एक और मील का पत्थर है।"
इसरो के मिशन गगनयान में शुभांशु के अनुभव से मिलेगी सहूलियत
इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने कहा, ''शुभांशु शुक्ला द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए गए समय के दौरान हासिल किए गए अनुभव अगले दो सालों में तय गगनयान मिशन के लिए काफी अहम होगा। यह उनके (शुभांशु) लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर कई प्रयोग किए।"
अंतरिक्ष और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण का अनुभव करने के बाद उन्होंने कई वैज्ञानिक परीक्षण भी किए। यह मिशन हमारे लिए सीखने का एक बड़ा अवसर रहा है। इसरो ने यह मिशन इसलिए शुरू किया ताकि वह अनुभव प्राप्त कर सके जो गगनयान मिशन में हमारी मदद करेगा।
नीलेश एम. देसाई, निदेशक,अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, इसरो
उन्होंने आगे कहा कि गगनयान मिशन इस साल के आखिर एक मानवरहित उड़ान के साथ शुरू होगा। उन्होंने कहा, "हम इस साल एक मानवरहित मिशन लांच करेंगे, जिसके बाद दो और मानवरहित उड़ानें होंगी। इसके बाद, एक भारतीय एस्ट्रोनाट को गगनयान के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। वह दो से सात दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे और फिर पृथ्वी पर वापस लौटेंगे।"
मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में आज भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया
16 Jul, 2025 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र, उत्तरी झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और इसके गंगा के इलाकों में विभिन्न स्थानों पर बुधवार को भारी बारिश होने का अनुमान है. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, आंतरिक कर्नाटक और केरल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर सामान्य से भारी बारिश होने के आसार हैं.
आईएमडी के अनुसार उत्तरी राजस्थान के मध्य भागों, उत्तरी झारखंड, उससे सटे दक्षिणी बिहार में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. राजस्थान और उससे सटे मध्य भारत में अगले दो से तीन दिनों के दौरान सामान्य से अत्यधिक बारिश होने के आसार हैं.
पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम का हाल
पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, केरल, तटीय कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, असम में अलग-अलग स्थानों पर सामान्य से भारी से बहुत भारी हुई. तमिलनाडु, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात क्षेत्र, पंजाब, गोवा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में अलग-अलग स्थानों पर भी हल्की से भारी दर्ज की गई.
मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियां
उत्तर-पश्चिम भारत
जम्मू- कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर अगले दो तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी वर्षा की संभावना है. पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, हिमालयी क्षेत्र और मैदानी इलाकों के अलग-अलग हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों के दौरान हल्की से भारी बारिश होने के अनुमान है.
पूर्वी और मध्य भारत
दौरान मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, पश्चिमी भारत में अलग-अलग स्थानों पर अगले दो से तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है. इसके अलावा इनमें से कुछ जगहों पर बारिश के साथ गरज और बिजली कड़कने की संभावना है.
पश्चिम भारत
देश के पश्चिमी हिस्से में शामिल महाराष्ट्र, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर अगले दो से तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी बारिश होने आसार हैं.
पूर्वोत्तर भारत
देश के पूर्वोत्त राज्यों में शामिल असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर अगले तीन से चार दिनों के दौरान सामान्य से भारी वर्षा जारी रहने की संभावना है.
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत
तेलंगाना, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, केरल, माहे, यनम, रायलसीमा, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अलग-अलग स्थानों पर अगले दो से तीन दिनों के दौरान सामान्य से भारी बारिश होने के आसार हैं.
यमन में 16 जुलाई 2025 को केरल की नर्स निमिषा प्रिया की निर्धारित फांसी की सजा स्थगित कर दी गई
16 Jul, 2025 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: यमन के स्थानीय अधिकारियों ने 16 जुलाई 2025 को निमिषा प्रिया की निर्धारित फांसी की सजा स्थगित कर दी है. भारत सरकार जो इस मामले की शुरुआत से ही हर संभव सहायता प्रदान कर रही है, उस ने हाल के दिनों में निमिषा प्रिया के परिवार को दूसरे पक्ष के साथ आपसी सहमति से समाधान निकालने के लिए और समय देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं.
सूत्रों के मुताबिक मामले की संवेदनशीलता के बावजूद भारतीय अधिकारी स्थानीय जेल अधिकारियों और अभियोजक कार्यालय के साथ नियमित संपर्क में रहे हैं, जिसके कारण यह स्थगन संभव हो पाया है. इससे पहले भारत सरकार ने केरल की नर्स की फांसी रोकने के लिए अंतिम प्रयास किया था.
फांसी स्थगित करने की औपचारिक अपील
इस संबंध में सरकार ने यमन के अभियोजन महानिदेशक से निमिषा प्रिया की फांसी स्थगित करने की औपचारिक अपील की थी. बता दें कि निमिषा को यमन के एक नागरिक की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है.
क्या है पूरा मामला?
केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा प्रिया पर 2017 में यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की कथित हत्या का आरोप है. निमिषा 2012 में नर्स के तौर पर यमन चली गई थीं और उनके पति टॉमी भी यमन में रहते थे. जानकारी के मुताबिक उन्होंने तलाल के साथ मिलकर एक क्लिनिक शुरू की थी. इस बीच उनके पति और बेटी भारत लौट आए, लेकिन यमन में युद्ध छिड़ जाने के कारण निमिषा उनके साथ नहीं आ सकीं, जिससे वह कथित तौर पर उस यमनी नागरिक तलाल के जाल में फंस गईं.
तलाल को इंजेक्शन देकर किया बेहोश
तलाल ने निमिषा और एक अन्य यमनी महिला का कथित तौर पर गंभीर शारीरिक और मानसिक शोषण किया और उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए. हताश होकर निमिषा और उस यमनी महिला ने उसे एक इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया और अपने पासपोर्ट छीनकर भागने की कोशिश की. हालांकि, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और जेल में डाल दिया.
बाद में तलाल का शव उनके क्लिनिक में मिला, जिसके कारण उन पर हत्या का आरोप लगाया गया और बाद में मुकदमा चलाया गया. निमिषा यमन की निचली अदालत में अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर सकीं और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई, जबकि यमनी महिला को आजीवन कारावास की सजा मिली. इस फैसले के खिलाफ निमिषा ने यमन के सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन उनको वहां से भी निराशा हाथ लगी और देश की सु्प्रीम अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी.
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, घायलों को 50,000 रुपए मिलेंगे
16 Jul, 2025 09:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून/पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मंगलवार शाम हुई भीषण सड़क दुर्घटना में 8 लोगों की मौत हो गई. 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. ये हादसा तब हुआ जब एक मैक्स जीप थल-पिथौरागढ़ मोटर मार्ग में मुवानी के पास सूनी पुल से अनियंत्रित होकर 100 फीट नीचे नदी में जा गिरी. पीएम मोदी ने पिथौरागढ़ सड़क हादसे पर दुख जताया है.
पीएम मोदी ने पिथौरागढ़ हादसे पर दुख जताया: पीएमओ के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पीएम मोदी की ओर से दुख जताते हुए अनुग्रह राशि देने की घोषणा भी की गई है. पीएम मोदी ने लिखा है-
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में हुई सड़क दुर्घटना में हुई जान-माल की हानि से दुखी हूँ। इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएँगे।
सीएम धामी ने पीड़ित परिवारों के लिए सहायता राशि का ऐलान किया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिथौरागढ़ हादसे पर दुख जताने और अनुग्रह राशि की घोषणा करने पर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी इसकी जानकारी दी है. उन्होंने लिखा-
पिथौरागढ़ सड़क दुर्घटना पर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी द्वारा व्यक्त की गई संवेदना एवं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रदान की गई आर्थिक सहायता से शोकाकुल परिजनों को इस कठिन समय में संबल मिलेगा।
प्रदेश सरकार द्वारा भी मृतकों के परिजनों को ₹2-2 लाख एवं घायलों को ₹50,000 की सहायता दी जाएगी। हमारी सरकार मृतकों के परिजनों के साथ मजबूती से खड़ी है और घायलों को हर संभव सहायता प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है।
सांसद अजय भट्ट ने दुख जताया: नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय सीट के सांसद अजय भट्ट ने पिथौरागढ़ हादसे पर दुख जताया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा- उत्तराखंड के जनपद पिथौरागढ़ के मुवानी क्षेत्र में वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने का अत्यंत दु:खद समाचार प्राप्त हुआ। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि दुर्घटना में दिवंगत हुए लोगों की आत्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने भी दुख जताया: स्थानीय सांसद अजय टम्टा ने भी पिथौरागढ़ सड़क हादसे पर दुख जताया है. उन्होंने कहा- मेरे लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत पिथौरागढ़ जनपद के मुवानी क्षेत्र में एक वाहन दुर्घटना की दुःखद सूचना प्राप्त हुई है। इस हृदयविदारक घटना में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनके प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ।
मुवानी से बोकटा जा रही थी मैक्स जीप: पिथौरागढ़ जिले में मंगलवार शाम 14 सवारियों को लेकर एक मैक्स जीप मुवानी से बोकटा के लिए चली थी. मुवानी से करीब एक किमी आगे भंडारीगांव पुल पर अचानक जीप बेकाबू होकर पहाड़ी नदी में जा गिरी. पुल से नदी की गहराई 150 फीट के करीब थी. हादसे में 6 यात्रियों की दुर्घटनास्थल पर ही मौत हो गई. 8 यात्री घायल अवस्था में मुवानी हॉस्पिटल ले जाए गए. वहीं दो और लोगों ने दम तोड़ दिया. इनमें 8 साल की सिमरन और 40 साल का चालक नरेंद्र शामिल हैं. 6 गंभीर घायलों को पिथौरागढ़ जिला अस्पताल भेजा गया.
तोता घाटी में पड़ी दरारों की मॉनिटरिंग के लिए डिस्प्लेसमेंट मीटर के साथ पूरा लैंडस्लाइड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाया गया
16 Jul, 2025 08:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून : केदारनाथ और बदरीनाथ धाम सहित आधे गढ़वाल मंडल को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग NH07 एक बड़ी समस्या की जद में है. इस समस्या का हाल ही में पता चला है. सामरिक दृष्टि से भी ये मार्ग महत्वपूर्ण है. ये समस्या अगर आ गई तो गढ़वाल की लाइफ लाइन ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे का फिर कोई विकल्प नहीं होगा.
तोता घाटी में बिगड़ सकते हैं हालात: हम बात कर रहे हैं गढ़वाल की जीवन रेखा ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे को रास्ता देने वाली तोता घाटी की. तोता घाटी एक जगह ही नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड के इतिहास और हिमालय क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों का जीता जागता उदाहरण है. लेकिन अब भौगोलिक गतिविधियों पर नजर रखने वाले लोगों को यहां एक समस्या बहुत परेशान कर रही है. अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान या विकल्प नहीं ढूंढा गया तो भविष्य में स्थिति काफी विकट हो सकती है.
अब भी रहस्यमयी है तोता घाटी: दरअसल, गढ़वाल के देवप्रयाग, श्रीनगर, चमोली, रुद्रयाग सहित समूचे गढ़वाल को मैदान से जोड़ने वाला मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग नेशनल हाईवे 07 पर ऋषिकेश से श्रीनगर जाते समय लगभग 75-80 किलोमीटर की दूरी पर खड़ी चट्टानों को काटती हुई सड़क जिस जगह पर क्रॉस करती है वही तोता घाटी है.
ये तोता घाटी जितनी रहस्यमयी पहली बार सड़क बनने से पहले थी, उतना ही रहस्य आज भी अपने अंदर छिपाए है. ना तो पहली बार यहां सड़क बनाना आसान था और ना आज यहां हालात अनुकूल हैं. तोता घाटी के आज के हालातों के बारे में बात करने से पहले आपको थोड़ा इसके इतिहास में ले चलते हैं. जब पहली बार यहां सड़क बनाई गई तब कैसे एक पहाड़ और एक पहाड़ी नौजवान ने एक दूसरे को चुनौती दी, यह समझते हैं.
पहाड़ को चीर कर अपने नाम कर गये तोता सिंह: 'तोता घाटी' उत्तराखंड के ऋषिकेश–बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर देवप्रयाग और व्यासी के बीच साकणी धार से पहले पड़ती है. इसका रोचक इतिहास 1930 के दशक से जुड़ा है. इतिहासकार शीशपाल गुसाईं बताते हैं कि 1931 में ऋषिकेश से कीर्तिनगर तक सड़क बनाने की योजना थी. लेकिन तोता घाटी की उलझी हुई लाइम स्टोन की चट्टानें इतनी कठोर थीं कि कोई ठेकेदार उस समय की दर पर काम करने को तैयार नहीं था. अंत में प्रतापनगर के ठेकेदार तोता सिंह रांगड़ ने पहाड़ को चीरने का बीड़ा उठाया. वो भी उस समय के सामान्य औजारों से.
छेनी हथौड़ों से तोता सिंह ने बनाई थी सड़क: इस दुर्गम पहाड़ी पर मार्ग बनाना बेहद मुश्किल था. तब कोई आधुनिक ड्रिलिंग मशीन नहीं थी. छैनी हथौड़ों से उनके मजदूर और इंजीनियर लगे रहे. इस दौरान कई मजदूरों की जान चली गई. ज्यादातर लोग काम छोड़कर चले गए. इसके बावजूद भी ठेकेदार तोता सिंह ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी जमा पूंजी खर्च की. पत्नी के आभूषण तक बेच दिए. मजदूरों के जाने के बाद 50 ग्रामीणों के साथ रात-दिन एक करके आखिरकार इस चट्टान को तोड़ा और यहां पर सड़क बना दी.
तोता सिंह के नाम पर रखा तोता घाटी: तोता सिंह रांगड़ के इस साहसिक सफल कार्य से टिहरी के राजा इतने खुश हुए, कि इस जगह का नाम ठेकेदार तोता सिंह रांगड़ के नाम पर तोता घाटी रख दिया. राजा ने उन्हें 'लाट साहब' की उपाधि भी दी. टिहरी के राजा नरेंद्र शाह ने उनकी इस अथाह मेहनत को देखते हुए बाद में नरेंद्र नगर में एक पूरी जागीर भी तोहफे में दे दी.
तोता घाटी को लेकर चिंता: पहली बार ऋषिकेश-श्रीनगर सड़क का निर्माण 1935 में पूरा हुआ. इसी दौरान 'तोता घाटी' नाम सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज हो गया. लेकिन आज तकरीबन 100 साल बाद सड़क निर्माताओं और शोधकर्ताओं ने एक बार फिर इस जगह को लेकर चिंता जाहिर की है.
'तोता घाटी' में दिखीं डराने वाले दरारें: तोता घाटी के आज की परिस्थितियों की बात की जाए तो ऑल वेदर रोड और सड़क चौड़ीकरण के चलते एक बार फिर तोता घाटी को छेड़ा गया, जो अब निर्माण एजेंसियों के गले पर बन आई है. वैज्ञानिकों ने तोता घाटी में बड़ी दरारें पाई हैं. एचएनबी गढ़वाल सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने ईटीवी भारत से खास बातचीत करते हुए बताया कि आज प्रदेश के सामने तोता घाटी एक नई और बड़ी समस्या बनकर सामने है. हमें राज्य के इतिहास से सीखते हुए भविष्य के लिए सोचना चाहिए.
लाइम स्टोन रॉक से बनी है तोता घाटी: महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट बताते हैं कि, तोता घाटी का अपना एक इतिहास है, लेकिन आज के परिदृश्य में अगर बात की जाए तो इस जगह की भौगोलिक बनावट लाइमस्टोन रॉक से निर्मित है. यहां पर हाल ही में कई बड़े-बड़े फ्रैक्चर और दरारें देखी गई हैं. इस बात की जानकारी हमें भी नहीं थी कि यहां पर इतनी बड़ी दरारें हैं. यह बड़ा फिनोमिना है कि लाइमस्टोन में फ्रैक्चर और क्लिंट्स पाए जाते हैं और यह समय के साथ खुलते रहते हैं.
3 फीट तक चौड़ी दरारें बनी हैं:
तोता घाटी में जहां पर सड़क क्रॉस करती है, उससे 300 मीटर ऊपर जाएं, तो पहाड़ के टॉप पर चार बड़ी दरारें हैं. इन दरारों का आकार इतना बड़ा है कि एक भूवैज्ञानिक के नजरिए से ये दरारें डराने वाली हैं. ये दरारें तकरीबन ढाई से 3 फीट चौड़ी हैं. पहाड़ी पर उनकी लंबाई काफी ज्यादा है तो गहराई इतनी ज्यादा है कि इसका अंदाजा लगाया जाना बेहद मुश्किल है.
- महेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ भू वैज्ञानिक -
तोता घाटी की दरारों की गहराई का नहीं अंदाजा: वरिष्ठ जियोलॉजिस्ट महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने बताया कि अपने एक प्रयोग के दौरान उन्होंने पाया कि यह दरारें कई सौ मीटर गहरी हैं जो कि पूरे पहाड़ को चीर कर अनंत गहराई में जा रही हैं.
तोता घाटी पर इन दरारों का फॉर्मेशन इस तरह का है कि अगर ये दरारें बढ़ती हैं या फिर टूटती हैं, तो पहाड़ी का एक पूरा हिस्सा साफ हो जाएगा. ऐसे में कई महीनों के लिए ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे पूरी तरह से ठप हो जाएगा. दरारों के चलते अगर यह रॉक फॉल होता है, तो पूरा पहाड़ नीचे गंगा में समा जाएगा और पूरे गढ़वाल की लाइफ लाइन ठप हो जाएगी.
- महेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ भू वैज्ञानिक -
तोता घाटी का पहाड़ ढहा तो मिट जाएगा एनएच का नाम-ओ-निशान: उन्होंने कहा कि आसपास कोई भी वैकल्पिक मार्ग यहां मौजूद नहीं है. उन्होंने अपनी चिंता मुख्य सचिव आनंद वर्धन के सामने भी रखी है और कहा कि हमें यहां पर एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग को लेकर सोचना चाहिए.
ये विभाग कर हैं तोता घाटी की मॉनिटरिंग: कई जिलों को और बदरी-केदार धाम सहित माणा बॉर्डर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग NH-07 जो पूरे गढ़वाल की लाइफ लाइन भी है. यहां पर मौजूद तोता घाटी के इस जियोलॉजिकल डेवलपमेंट को लेकर उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग की नेशनल हाईवे शाखा भी सकते में हैं. भू वैज्ञानिकों द्वारा किए गए विश्लेषण और दरारों की हालत को देखते हुए लोक निर्माण विभाग अब तोता घाटी पर ज्यादा एहतियात बरत रहा है.
ऑलवेदर रोड बनने के बाद बढ़ी चुनौती! लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर राष्ट्रीय राजमार्ग मुकेश परमार ने बताया कि-
तोता घाटी पर पहले 9 से 10 मीटर चौड़ी सड़क थी. ऑल वेदर रोड के तहत जब काम किया गया, तो सड़क को चौड़ी करके तकरीबन 20 मीटर किया गया. इसी के साथ चुनौतियां भी सामने आने लगीं. सड़क चौड़ीकरण के लिए पहाड़ी की तरफ खुदाई करनी पड़ी. इसकी वजह से क्रॉस सेक्शन काफी ज्यादा हाई हो गए. ओवर हैंगिंग रॉक के साथ-साथ लैंडस्लाइड का खतरा भी बढ़ गया.
- मुकेश परमार, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी एनएच -
शुरू से ही चुनौती रही है तोता घाटी: चीफ इंजीनियर मुकेश परमार ने बताया कि तोता घाटी शुरू से ही चुनौती भरी रही है. जब उनके द्वारा सड़क चौड़ीकरण किया गया, तो उस वक्त भी देखा गया कि एक शार्प रिज के चलते यहां पर काम किया जाना बेहद खतरनाक साबित हो रहा था. कार्यदायी संस्था द्वारा इस जगह पर लगातार आ रही चुनौतियों को देखते हुए भू वैज्ञानिकों से संपर्क किया गया. जब जियोलॉजिस्ट टीम यहां पर पहुंची, तो निरीक्षण के दौरान पाया गया कि तोता घाटी जैसी बाहर से दिखती है, उससे कई ज्यादा खतरनाक अंदर से है.
दरारों की मॉनिटरिंग हो रही है:
पहाड़ के बीच में इतनी बड़ी-बड़ी दरारें हैं कि इन्हें भरना शुरू करेंगे तो 3000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट का पता भी नहीं चलेगा. इसलिए पहाड़ के बीच में दरारों की मॉनिटरिंग के लिए इक्विपमेंट यहां पर लगाए गए हैं, ताकि पहाड़ के भीतर की छोटी सी भी गतिविधि को मापा जा सके.
- मुकेश परमार, चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी -
लैंडस्लाइड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाया गया: चीफ इंजीनियर मुकेश परमार ने बताया कि इन दरारों को देखते हुए वहां पर कोई काम करने के लिए राजी नहीं था. अब डिस्प्लेसमेंट मीटर के साथ पूरा लैंडस्लाइड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाया गया है, जिसके बाद छोटी सी भी गतिविधि इक्विपमेंट के माध्यम से पता चल जाती है. उन्होंने बताया कि अभी कुछ ही दिन पहले डिस्प्लेसमेंट मीटर इन दरारों में लगाए गए हैं, जिस में अभी फिलहाल किसी तरह की कोई खास हलचल नजर नहीं आ रही है.
तोता घाटी में रोजाना चलते हैं इतने वाहन: PWD के रिकॉर्ड के अनुसार तोता घाटी में स्थित ऋषिकेश-बदीरनाथ नेशनल हाईवे पर 2014-15 के दौरान रोजाना 3909 वाहनों की आवाजाही होती थी. वर्ष 2026-27 में इसके बढ़कर लगभग दोगुना यानी 7019 होने की संभावना है.
जिला प्रशासन की अनूठी पहल, नहरों के पानी से लबालब हुए 450 तालाब
ईंट निर्माण कार्य से आत्मनिर्भर बन रही हैं समूह की महिलाएं
महासंघ की कार्यप्रणाली को बनाये गतिशील एवं परिणामोन्मुख : राज्यमंत्री पंवार
प्रदेश में जंगली भैंसा प्रजाति का पुनर्स्थापन एक ऐतिहासिक अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सही दवा-शुद्ध आहार' अभियान में जगदलपुर के चाट-गुपचुप सेंटरों और कॉस्मेटिक्स दुकानों का हुआ निरीक्षण
वन मंत्री केदार कश्यप ने भरा ऑनलाइन स्व-गणना पत्रक, नागरिकों से सहभागिता की अपील
एमपी टूरिज्म को मिला “लीडिंग टूरिज्म डेस्टीनेशन” का प्रतिष्ठित सम्मान
मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दे रहा है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण तेज़ी से जारी, 35 हजार से अधिक बोरे का हुआ संग्रहण
