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देश के भूजल में ज़हर घुला! आर्सेनिक और फ्लोराइड बन रहे स्वास्थ्य के दुश्मन
25 Jul, 2025 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पर्यावरणविदों ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई है. उनका कहना है कि सरकार की पहल और शमन प्रयासों के बावजूद, देश में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच चुनौती बनी हुई है. पर्यावरणविदों की यह चिंता राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) को हाल ही में दिए गए निर्देश के मद्देनजर सामने आई है, जिसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की उपस्थिति पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.
एनजीटी ने 25 राज्यों के भूजल में आर्सेनिक और 27 राज्यों में फ्लोराइड की मौजूदगी पर प्रकाश डालने वाली एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था और मामले में सुनवाई करते हुए यह रिपोर्ट मांगी है. अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी.
एनजीटी ने सीजीडब्ल्यूए से कहा है कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड की उपस्थिति पर अपनी रिपोर्ट में दी गई जानकारी को सारणीबद्ध करे और इससे प्रभावित जिलों, गांवों और स्रोतों की संख्या और समस्या के निवारण के लिए की गई कार्रवाई का सारांश प्रस्तुत करे.
सीजीडब्ल्यूए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समस्या के समाधान के लिए जारी किए गए परामर्श/निर्देश/आदेशों (अगर कोई हों) का भी खुलासा करेगा. उसे प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित किए जा सकने वाले विभिन्न क्षमताओं वाले आर्सेनिक और फ्लोराइड निष्कासन संयंत्रों की उपलब्धता का भी खुलासा करना होगा, अगर अभी तक ऐसा नहीं किया गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आर्सेनिक से जन स्वास्थ्य को सबसे बड़ा खतरा दूषित भूजल से उत्पन्न होता है. भारत, बांग्लादेश, कंबोडिया और चिली सहित कई देशों के भूजल में अकार्बनिक आर्सेनिक प्राकृतिक रूप से उच्च सांद्रता में पाया जाता है. लगभग 70 देशों में 14 करोड़ व्यक्ति 10 μg/L के अनंतिम दिशानिर्देश मान (guideline value) से अधिक स्तर पर आर्सेनिक युक्त जल का सेवन कर रहे हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तीव्र आर्सेनिक विषाक्तता के शुरुआती लक्षणों में उल्टी, पेट में तकलीफ और दस्त शामिल हैं. इसके बाद, व्यक्ति को अंगों में सुन्नता और झुनझुनी, मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर मामलों में मृत्यु भी हो सकती है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अकार्बनिक आर्सेनिक की उच्च सांद्रता के लंबे समय तक संपर्क में रहने (जैसे कि पीने के पानी और भोजन के सेवन के जरिये) के प्रारंभिक लक्षण आमतौर पर त्वचा में दिखाई देते हैं, जो त्वचा में परिवर्तन, त्वचा पर घाव और हथेलियों तथा पैरों के तलवों पर कठोर क्षेत्रों (हाइपरकेराटोसिस) के रूप में प्रकट होते हैं.
पर्यावरणविद् की राय
ईटीवी भारत से बात करते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता बीएस वोहरा ने कहा, "यह दुखद है कि आजादी के दशकों बाद भी भारत में लाखों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है. आर्सेनिक, फ्लोराइड और अन्य प्रदूषकों से होने वाला प्रदूषण जन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, खासकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में."
उन्होंने जोर देकर कहा कि जल जीवन मिशन जैसे सरकारी प्रयासों के बावजूद, खराब बुनियादी ढांचे, अपर्याप्त परीक्षण और असुरक्षित भूजल पर अत्यधिक निर्भरता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. वोहरा ने कहा, "भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड का दूषण भारत के कई हिस्सों में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है. पश्चिम बंगाल, बिहार और असम जैसे राज्यों में भूजल में आर्सेनिक का दूषण त्वचा के घावों, कैंसर और तंत्रिका संबंधी समस्याओं का कारण बनता है. राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में आम तौर पर पाया जाने वाला फ्लोराइड, विशेष रूप से बच्चों में दंत और कंकालीय फ्लोरोसिस (skeletal fluorosis) का कारण बनता है. लाखों लोग अशोधित (untreated) भूजल पर निर्भरता के कारण इसके संपर्क में आते हैं. कुछ क्षेत्रों में इनके संयुक्त संपर्क से स्वास्थ्य संबंधी परिणाम और भी खराब हो जाते हैं."
दिल्ली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "यहां तक कि दिल्ली में भी भूजल में फ्लोराइड दूषण (contamination) की समस्या है, खासकर नरेला, बवाना और रोहिणी जैसे इलाकों में. 50 से अधिक ट्यूबवेल से सुरक्षित फ्लोराइड सीमा से अधिक दूषित पानी निकलता है, जिससे दंत और कंकालीय फ्लोरोसिस का खतरा है. हालांकि पानी को शुद्ध करके आपूर्ति की जाती है, फिर भी शहरी आबादी को फ्लोराइड-संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने के लिए निरंतर निगरानी और सुरक्षित विकल्प जरूरी हैं."
पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा कि सुरक्षित जल तक पहुंच एक बुनियादी मानव अधिकार है, न कि एक विलासिता और तत्काल, निरंतर कार्रवाई की आवश्यकता है - प्रौद्योगिकी, नीति सुधार और सामुदायिक भागीदारी को मिलाकर - यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रत्येक नागरिक, स्थान या आय की परवाह किए बिना, अपने स्वास्थ्य या सम्मान को खतरे में डाले बिना पानी पी सके.
भूजल में आर्सेनिक को कम करने के उपाय
उनका कहा है कि भूजल में आर्सेनिक को सुरक्षित जल स्रोत, फिल्ट्रेशन और नीतिगत उपायों के संयोजन से कम किया जा सकता है. उन्होंने कहा, "समुदायों को उथले कुओं, सतही जल या वर्षा जल संचयन जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना चाहिए. रिवर्स ऑस्मोसिस, सक्रिय एल्यूमिना और कम लागत वाले घरेलू फिल्टर जैसी आर्सेनिक हटाने की तकनीकें दूषित पानी को प्रभावी ढंग से शुद्ध कर सकती हैं. नियमित परीक्षण, आर्सेनिक मुक्त स्रोतों पर स्विच करना और प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण जोखिम को सीमित करने में मदद कर सकते हैं. सार्वजनिक जागरूकता और फिल्टर का उचित रखरखाव जरूरी है."
वोहरा ने पूरे भारत में आर्सेनिक और फ्लोराइड-दूषित क्षेत्रों के मानचित्रण और निगरानी पर जोर दिया. उन्होंने आगे कहा, "इसे भूजल गुणवत्ता नियमों को सख्ती से लागू करना चाहिए, सतही और वर्षा जल जैसे सुरक्षित जल विकल्पों को बढ़ावा देना चाहिए और पर्यावरण-अनुकूल शुद्धिकरण तकनीकों का समर्थन करना चाहिए. जन स्वास्थ्य प्रयासों के साथ शमन को एकीकृत करने के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है. सामुदायिक जागरूकता, क्षमता निर्माण और स्थानीय जल प्रशासन को मजबूत किया जाना चाहिए. इसके अतिरिक्त, कम लागत वाले फिल्ट्रेशन और सख्त पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के लिए अनुसंधान में निवेश जरूरी है. प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने और सुरक्षित पेयजल की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रित बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण की जरूरत है."
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा था कि केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) पूरे देश में नियमित रूप से यूरेनियम और आर्सेनिक सहित कई प्रदूषकों के लिए भूजल गुणवत्ता निगरानी करता है और विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के दौरान क्षेत्रीय स्तर पर भूजल गुणवत्ता के आंकड़े भी तैयार करता है. इन अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुछ इलाकों में भूजल में यूरेनियम और आर्सेनिक की मात्रा मानव उपभोग के लिए स्वीकार्य सीमा से ज्यादा है.
उन्होंने कहा कि देश के कुछ अलग-थलग हिस्सों में यूरेनियम और आर्सेनिक दूषण के अपेक्षाकृत अधिक मामले सामने आए हैं, जो दूषण को लेकर संवेदनशील क्षेत्रों में सीजीडब्ल्यूबी द्वारा परीक्षण की आवृत्ति में वृद्धि के कारण हो सकता है.
केदारनाथ यात्रा में टनल लाएगी क्रांति, श्रद्धालुओं के बचेंगे 7 घंटे
25 Jul, 2025 08:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड चारधाम यात्रा को लेकर लगातार हर साल श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ रहा है. हर साल औसतन 50 लाख श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आ रहे हैं. यह संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है. सबसे ज्यादा श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचते हैं. साल 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग और भी ज्यादा लंबा और कठिन हो गया है. ऐसे में भारत सरकार ने जिस कवायद को साल 2022 में शुरू किया था, अब उस पर अंतिम मुहर लग गई है. भारत सरकार केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा को सुगम बनाने के लिए एक 7 किलोमीटर की लंबी टनल बनाने की प्लानिंग में अंतिम कदम रख चुकी है.
टनल से मिलेगी भक्तों को चढ़ाई से राहत: साल 2013 की आपदा के दौरान कई श्रद्धालुओं की मौत हुई थी. आपदा के बाद कई सालों तक श्रद्धालुओं के कंकाल केदारनाथ पैदल मार्ग पर मिलते रहे. केदारनाथ आपदा के बाद सरकार ने नए रास्ते के जरिए श्रद्धालुओं को भेजना शुरू किया. परंतु यह रास्ता और भी लंबा हो गया. अब भारत सरकार के केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने केदारनाथ तक सुरंग बनाने का प्लान तैयार किया है.
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिशासी अभियंता ओमकार पांडे की मानें तो भारत सरकार के सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के द्वारा चौमासी से लेकर लिनचोली तक पहाड़ का सर्वे पूरा कर लिया गया है. पहले टनल का काम या कहें कि सर्वे गौरीकुंड से रामबाड़ा तक होना था. लेकिन अब जिस मार्ग का सर्वे किया गया है, उस मार्ग पर इस बात को सुनिश्चित कर लिया गया है कि कोई भी भूस्खलन या पहाड़ दरकने जैसी घटना इस क्षेत्र में नहीं होगी अगर टनल तैयार होती है.
विश्व स्तर के होंगे काम: इस टनल के बनने से ना तो रास्ते में रामबाड़ा आएगा और ना ही सोनप्रयाग और गौरीकुंड. फिलहाल अभी ये साफ नहीं है कि इस टनल का काम कब तक शुरू होगा? लेकिन अगर टनल बनती है तो केदारनाथ तक का सफर पैदल मार्ग से बेहद कम हो जाएगा. इसके साथ ही माल की आवाजाही भी बेहद आसान हो जाएगी. अभी बेहद मुश्किल से सामान केदारनाथ धाम तक पहुंचता है. हालांकि अभी टनल के लिए सर्वे वाहन और पैदल दोनों ही पहलूओं को लेकर किया गया है.
उत्तराखंड सरकार में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की मानें तो केदारनाथ और बदरीनाथ को लेकर केंद्र सरकार का विजन बेहद अलग है. खुद पीएम यहां के कामों पर नजर रखते हैं. इसलिए टनल से लेकर रोपवे जो भी काम केदारनाथ और बदरीनाथ में होंगे, दुनिया के सबसे बेहतर कामों में से एक होंगे.
ब्लू प्रिंट तैयार: केदारनाथ के लिए टनल बनने के बाद श्रद्धालुओं की गाड़ी केदारनाथ के बेहद करीब तक जा जाएगी और उसके बाद मात्र 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा श्रद्धालुओं को करनी होगी. इसमें लगभग डेढ़ से 2 घंटे का समय लगेगा. जबकि टनल बनने से लगभग 6 घंटे का सफर कम हो जाएगा. साल 2024 में केंद्रीय सड़क मंत्रालय की एक टीम ने इस पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था और तब यह पाया था कि यह जगह टनल बनने के लिए बेहतर है. बाकायदा इसका एक ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया गया है. इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने उत्तराखंड सरकार से भी इस बाबत जानकारी मांगी थी. जिसकी रिपोर्ट सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी थी.
अभी एक टनल हो गई तैयार: रुद्रप्रयाग और बदरीनाथ हाईवे को आपस में जोड़ने के लिए भी एक टनल का काम पूरा हो गया है. यह 900 मीटर की टनल बनने के बाद यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को काफी फायदा मिलेगा.
रोपवे को कैबिनेट से मिल चुकी है हरी झंडी: भारत सरकार, केदारनाथ को रोपवे से जोड़ने के प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है. इस रोपवे के बनने के बाद 9 घंटे की चढ़ाई मात्र 40 मिनट में पूरी हो जाएगी. सोनप्रयाग से केदारनाथ तक लगभग 12.9 किलोमीटर के रस्सी प्रोजेक्ट की मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट ने साल 2025 की शुरुआती दिनों में ही दे दी थी. अभी श्रद्धालुओं को 18 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है. रोपवे बनने के बाद मात्र 40 मिनट में श्रद्धालु सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम पहुंच जाएंगे. इस प्रोजेक्ट के तहत 1 घंटे में लगभग 1800 श्रद्धालु रोपवे से केदारनाथ धाम पहुंच सकेंगे. साल 2031 तक इसका काम पूरा होना है.
लोकसभा में दी सड़कों की जानकारी: मॉनसून सत्र के तहत लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तीसरे चरण के संबंधित प्रश्न उठाया गया. जिसके लिखित जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने बताया कि ग्राम सड़क योजना (PMGSY-3) के तहत उत्तराखंड को 212 नई सड़कों (2288 किमी) और 9 पुलों की मंजूरी दी गई है. इन सड़कों के माध्यम से अब राज्य के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि बाज़ारों से बेहतर संपर्क मिलेगा.
“जम्मू–कश्मीर की नई हाइड्रो पावर पॉलिसी: बिजली उत्पादन की कमी को दूर करने का रोडमैप”
24 Jul, 2025 10:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर: जम्मू कश्मीर सरकार जल्द ही एक नई जलविद्युत नीति (हाइड्रो पावर पॉलिसी) पेश करेगी. इस कदम से जलविद्युत उत्पादन में निजी निवेश को प्राइवेट उत्पादकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है.
इस नीति के तहत 18,000 मेगावाट (MW) की अनुमानित जलविद्युत क्षमता वाले क्षेत्र में बिजली उत्पादन की कमी को दूर करने का प्रयास किया जाएगा. इस नई हाइड्रो पावर पॉलिसी में डेवलपर्स को कई रियायतें प्राप्त हो रही हैं जैसे, पानी के उपयोग से छूट और निवास संबंधी प्रावधानों को हटाना शामिल है.
इस नीति पर इस साल सरकार द्वारा दो बार विचार-विमर्श किया गया और बुधवार को सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा अधिकारियों के साथ एक बैठक में इसकी समीक्षा की गई. यह नीति जम्मू-कश्मीर राज्य जलविद्युत परियोजना विकास नीति 2011 का स्थान लेगी.
डेवलपर्स को आकर्षित करने के लिए, सरकार ने आईपीपी के लिए जल उपयोग शुल्क जैसे प्रावधानों को हटा दिया है, जो 2011 की नीति के विपरीत है. जहां हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश इन लघु जलविद्युत परियोजनाओं के आवंटन और विकास के लिए अपने निवासियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार अपनी नई नीति से इन डोमिसाइल प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव कर रही है.
हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड ने 5 मेगावाट तक की परियोजनाओं को अपने निवासियों के लिए आरक्षित कर दिया है. मसौदा नीति में अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के लिए व्हीलिंग शुल्क को भी हटा दिया गया है, जो 2011 की नीति में लागू था.
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया, "जलविद्युत नीति 2025 के मसौदे का उद्देश्य 2011 की नीति का स्थान लेना और स्वतंत्र विद्युत उत्पादक (आईपीपी) तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडलों के माध्यम से निजी निवेश के नए रास्ते खोलना है.
इस नीति में पारदर्शी आवंटन तंत्र, वित्तीय प्रोत्साहन, सुव्यवस्थित मंजूरी और गारंटीकृत बिजली उठाव शामिल हैं. ये सभी नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं. बयान में कहा गया है कि उमर अब्दुल्ला ने सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और समावेशी विकास के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई.
ईटीवी भारत द्वारा मूल्यांकन की गई जम्मू-कश्मीर जलविद्युत नीति-2025 नामक मसौदा नीति अधिसूचना की तिथि से लागू होगी. इस नीति के तहत, डेवलपर्स जम्मू-कश्मीर औद्योगिक नीति 2021-30 के अनुसार प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं, जिसका अनावरण उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2021 में किया था.
100 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं का उपयोग स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों (आईपीपी मोड) और सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) के माध्यम से किया जाएगा.
अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित नीति के तहत सभी परियोजनाओं (यानी 100 मेगावाट क्षमता तक) के लिए जल उपयोग पर कोई शुल्क नहीं लेना जम्मू-कश्मीर जल संसाधन (विनियमन और प्रबंधन) अधिनियम 2010 की धारा 137 के अनुसार और विद्युत मंत्रालय के निर्देश (25 अप्रैल 2023) के अनुरूप है.
जम्मू कश्मीर जल नियामक प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, जल विद्युत परियोजनाओं के संचालन के लिए प्रस्तावित जल उपयोग पर रोक से राज्य के खजाने को राजस्व का नुकसान होगा. जम्मू कश्मीर जल नियामक प्राधिकरण के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद काकरू ने हाल ही में ईटीवी भारत को बताया कि वर्तमान परियोजनाओं से सरकारी खजाने को 250-350 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है क्योंकि मालिक जल शुल्क का भुगतान करने से इनकार कर रहे हैं.
जम्मू कश्मीर सरकार को अपनी व्यापारिक उपयोगिता के माध्यम से 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए अनिवार्य रूप से बिजली खरीदनी होगी. नीति में कहा गया है कि 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली परियोजनाओं से उत्पादित बिजली के लिए, जम्मू-कश्मीर सरकार को परियोजना से उत्पादित संपूर्ण बिजली खरीदने से इनकार करने का पहला अधिकार होगा.
नीति के अनुसार, जम्मू-कश्मीर सरकार 40 साल की लीज अवधि के दौरान 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं से आस्थगित और चरणबद्ध तरीके से 12 प्रतिशत तक मुफ्त बिजली प्राप्त करेगी. 25 मेगावाट से 100 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए, मुफ्त बिजली (उत्पन्न शुद्ध ऊर्जा का 12 फीसदी) चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी.
शुरुआती 10 सालों के दौरान मुफ्त बिजली का 10 फीसदी, मानक 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली के अतिरिक्त, रियायत अवधि के शेष 30 वर्षों में वसूल किया जाएगा. यह नीति केंद्र शासित प्रदेश के पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत विकास लक्ष्यों पर जोर देती है.
भूमि अधिग्रहण के लिए, नीति कहती है कि दोहरी फसल वाली या उपजाऊ कृषि भूमि के उपयोग से बचने और विस्थापन को कम करने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे. इसमें कहा गया है, जम्मू कश्मीर सरकार, जहां भी लागू हो, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा '2' के अंतर्गत भारत सरकार से पूर्वानुमति लेने के बाद, दीर्घकालिक पट्टे के आधार पर मानी गई वन भूमि उपलब्ध करा सकती है.
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, शाहिद चौधरी ने कहा कि यह नीति, जिस पर विशेषज्ञों, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) और प्रमुख जलविद्युत विकासकर्ताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया है.
इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे विज्ञान, नीति और कार्रवाई मिलकर हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्वच्छ, समावेशी और सतत ऊर्जा का समाधान कर सकते हैं.
भारत‑ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: मुफ्त में UK बाज़ार तक पहुंच और लाखों नौकरियों के अवसर
24 Jul, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/लंदन: भारत और ब्रिटेन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. ये डील दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस डील का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी को बढ़ावा देना है. इस डील से दोनों देशों को फायदा होने की उम्मीद है.
डील होने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि यह एक ऐसा समझौता है जिससे दोनों देशों को भारी लाभ होगा. सैलरी में बढ़ोतरी, लाइफ स्टाइल में सुधार और कामकाजी लोगों की जेब में अधिक पैसा आएगा. यह नौकरियों और व्यापार के लिए अच्छा है. इस डील से टैरिफ में कटौती होगी और व्यापार को आसान होगा. वहीं, पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच वैश्विक स्थिरता आएगी और यहां के प्रॉडक्ट भारत में काफी सस्ते दामों में मिलेंगे. इससे भारतीय कपड़ा, जूते, रत्न, आभूषण, सी फूड और इंजीनियरिंग वस्तुओं को ब्रिटेन में बेहतर बाजार मिलेगा. इस समझौते से भारतीय युवाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई क्षेत्र को लाभ होगा.
क्या होता है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?
यूके गवर्नमेंट के मुताबिक फ्री ट्रे़ड एग्रीमेंट (FTA) दो या दो से अधिक देशों के बीच एक समझौता होता है, जिसमें देश कुछ दायित्वों पर सहमत होते हैं जो वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेशकों और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा, आदि को प्रभावित करते हैं.
मुक्त व्यापार समझौतों के प्रमुख लाभ
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लाभों के लिए आपको अपने उत्पाद को लेकर अधिक रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन यह आपके प्रोडक्ट को अन्य देशों के उत्पादों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी प्रदान कर सकता है. यह वस्तुओं पर टैरिफ में कमी या उनको पूरी तरह से खत्म कर सकता है.
कितने देशों के साथ फ्री ट्रेड करता है यूके?
एक स्वतंत्र व्यापारिक राष्ट्र के रूप में ब्रिटेन के 70 से ज्यादा साझेदारों के साथ 39 ट्रेड एग्रीमेंट हैं. ये समझौते 72 साझेदारों के लिए लागू हैं.
भारत के 13 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो (PIB) के मुताबिक जुलाई 2022 तक भारत ने विभिन्न देशों/क्षेत्रों, जैसे जापान, दक्षिण कोरिया, आसियान क्षेत्र के देशों और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के देशों, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ 13 क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (RTA)/मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं.
बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए कितनी हुई प्रगति
24 Jul, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में बुलेट ट्रेन की सवारी का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर हैं। देश में बुलेट ट्रेन जल्द दौड़ने वाली है। जापान की मदद से भारत में अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलने वाली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का काम तेजी से जारी है।
रेल मंत्रालय द्वारा लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना का गुजरात हिस्सा दिसंबर 2027 तक पूरा हो जाएगा। एक लाख आठ हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना का 81 फीसदी हिस्सा जापान की एक कंपनी कर रही है। बाकी का हिस्सा रेल मंत्रालय, गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारें मिलकर खर्च कर रही हैं। इस साल 30 जून तक इस परियोजना पर 78 हजार 839 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे।
बुलेट ट्रेन से जुड़े अन्य सवालों के जवाब में रेल मंत्रालय ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) प्रोजेक्ट कुल 508 किलोमीटर की है। इस परियोजना पर जापान सरकार की वित्तीय और तकनीकी सहायता से काम चल रहा है। बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र, गुजरात और दादर नगर हवेली से होकर गुजरेगी। इस रूट पर कुल 12 स्टेशन- मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, बापी, बिल्लीमोरा, सूरत, भरूच, वड़ोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती बनाए जाएंगे। गुजरात में बापी से साबरमती के बीच के हिस्से पर काम दिसंबर 2027 तक पूरा कर लेने की योजना है। जबकि पूरी परियोजना दिसंबर 2029 तक पूरी कर लेने की योजना है।
मंत्रालय ने जवाब दिया कि, बुलेट ट्रेन की परियोजना एक बहुत ही जटिस परियोजना है। ऐसे में इसके पूरी तरह से पूरा हो जाने का निर्धारण सिविल वर्क, ट्रैक, बिजली, सिग्नल, टेलीकम्यूनिकेशन और ट्रेन के सेट मिल जाने के बाद ही किया जा सकता है। बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जरूरी पूरी जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। भारत में एमएएचएसआर कॉरिडोर से आगे बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार और व्यावसायिक, आर्थिक और पर्यटन महत्व के शहरों के बीच बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहा है।
DGCA ने Air India को थमाया नोटिस, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला
24 Jul, 2025 03:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विमानन नियामक डीजीसीए ने एअर इंडिया पर एक्शन लिया है। कंपनी द्वारा कई नियमों के उल्लंघन करने पर ये नोटिस जारी किए गए हैं। अहमदाबाद विमान हादसे के बाद से डीजीसीए एक्शन मोड में है।
इस कारण नोटिस किए गए जारी
केबिन क्रू के आराम और ड्यूटी मानदंडों, केबिन क्रू प्रशिक्षण नियमों और परिचालन प्रक्रियाओं से संबंधित विभिन्न उल्लंघनों के लिए नियामक ने चार कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
एअरलाइन द्वारा नियामक को कुछ स्वैच्छिक खुलासे किए जाने के एक महीने बाद यह जानकारी दी गई है। सूत्रों ने बताया कि ये कारण बताओ नोटिस 20 और 21 जून को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को एअरलाइन द्वारा किए गए स्वैच्छिक खुलासे के आधार पर 23 जुलाई को जारी किए गए।
एअर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान में कहा,
हमें नियामक से एअर इंडिया द्वारा पिछले एक साल में किए गए कुछ स्वैच्छिक खुलासों से संबंधित ये नोटिस प्राप्त होने की जानकारी है। हम निर्धारित अवधि के भीतर इन नोटिसों का जवाब देंगे। हम अपने चालक दल और यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सूत्रों ने बताया कि एअर इंडिया द्वारा 20 जून को किए गए स्वैच्छिक खुलासे के आधार पर तीन कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें कम से कम चार अल्ट्रा लॉन्ग हॉल उड़ानों के संबंध में केबिन क्रू ड्यूटी और आराम नियमों का उल्लंघन शामिल है।
नकली विदेशी मुहरें, हवाला का जाल: हर्षवर्धन जैन ने कैसे रचा था धोखे का तंत्र
24 Jul, 2025 02:22 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजियाबाद। आपने कभी सोचा है कि कोई शख्स फर्जी कागजात और पहचान के दम पर कितनी आलीशान जिंदगी जी सकता है? गाजियाबाद में एक ऐसे ही शातिर दिमाग वाले ठग का पर्दाफाश हुआ है, जिसने खुद को राजनयिक बताकर लोगों को करोड़ों का चूना लगाया और एक हाई-फाई लाइफस्टाइल जी रहा था। जब गिरफ्तारी के बाद हर्षवर्धन जैन से पूछताछ की गई तो उसने कई राज उगले। धोखाधड़ी के मामलों में बड़ा हाथ मारते हुए गाजियाबाद निवासी हर्षवर्धन जैन ने बड़े खेल को अंजाम दिया है। एसटीएफ की गिरफ्तारी के बाद ये स्पष्ट हो चुका है कि हर्षवर्धन जैन फर्जी दूतावास बनाकर लोगों के साथ शासन-प्रशासन की आंख में धूल झोंकने का काम करता था। लंदन से पढ़ाई कर गाजियाबाद लौटे हर्षवर्धन जैन की लगभग पूरी कुंडली खुल गई है। लंदन से गाजियाबाद लौटे इस फर्जी राजदूत का सफर इतना अलग है कि व्यक्ति बैठे-बैठे ही माथा पीट ले। कारोबारी परिवार से ताल्लुकात रखने वाले जैन की पहुंत कई मंत्रालयों तक में थी। वो निडर होकर दुबई, दक्षिण अफ्रीका, पेरिस, लंदन और सऊदी अरब घूमने जाता था। हालांकि, अब धीरे-धीरे सारे खुलासे हो रहे हैं।
खुल गई फर्जी राजदूत हर्षवर्धन की कुंडली!
अब तक हुए खुलासे के मुताबिक हर्षवर्धन जैन के कारोबारी बैकग्राउंड होने की बात सामने आई है। खुद को चार देशों का राजदूत बताकर गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने वाले हर्षवर्धन जैन पर पुलिस की नकेल टाइट हो रही है। हर्षवर्धन जैन लंदन से पढ़कर भारत लौटा था। इस शख्स का जुड़ाव हवाला कारोबार से भी होने की खबर है। इससे इतर जैन चंद्रास्वामी से भी जुड़ा था। कॉलेज ऑफ अप्लाइड साइंस लंदन से एमबीए कर गाजियाबाद लौटे हर्षवर्धन जैन ने आईटीएस से भी एमबीए कर रखा है। वो लोगों को विदेश में नौकरी और व्यापार के नाम पर ठगता था और फर्जीवाड़े को अंजाम देता था। STF अब धीरे-धीरे नकेल कस फर्जी राजदूत से जुड़े खुलासे कर रहा है।
एंबेसी फ्रॉड केस में पहले भी पकड़ा जा चुका है हर्षवर्धन जैन
गाजियाबाद के कवि नगर में किराए के मकान में फर्जी दूतावास चलाने वाला हर्षवर्धन जैन पहले भी एंबेसी फ्रॉड केस में पकड़ा जा चुका है। वो वर्ष 2011 का दौर था जब हर्षवर्धन को हवाला कारोबार चलाते हुए पुलिस ने पकड़ा था। डासना जेल में कुछ दिनों तक चक्की पीसने के बाद चंद्रास्वामी के सहयोग से वो बाहर आया और फिर लंदन से आकर गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने लगा। अंतत: एसटीएफ की टीम ने हर्षवर्धन जैन को उसके फर्जी दूतावास से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने फर्जी राजदूत के आवास से 5 करोड़ रुपए की 12 घड़ियां, 4 लग्जरी कार और 44 लाख रुपए की विदेशी नकदी करेंसी बरामद की है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है, ताकि पूरा खुलासा किया जा सके।
किराए की कोठी में बना डाली ‘फर्जी एंबेसी’
पुलिस ने गाजियाबाद के कवि नगर से हर्षवर्धन जैन नाम के एक हवाला कारोबारी को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस शख्स ने एक किराए की कोठी में चार-चार फर्जी देशों की एंबेसी बना रखी थी। इसका मकसद था लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगना और हवाला के जरिए काला पैसा इधर से उधर करना। पुलिस को उसके पास से नकली पासपोर्ट, स्टैंप, भारतीय और विदेशी करेंसी के साथ-साथ कई महंगी गाड़ियां और घड़ियां भी मिली हैं।
ऐशो-आराम की जिंदगी का शौकीन
हर्षवर्धन जैन को देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था कि वह एक अपराधी है। उसे महंगी चीजों और ऐशो-आराम का बेहद शौक था। वह अक्सर दुबई, दक्षिण अफ्रीका, पेरिस, लंदन और सऊदी अरब जैसे देशों में घूमने जाता था। फाइव स्टार होटलों में रुकना और महंगी कारों में चलना उसकी पहचान थी। राजनयिक सूट पहनकर वह इतना असली लगता था कि कोई उसे नकली समझ ही नहीं पाता था। इसी आड़ में वह शेल कंपनियों के जरिए हवाला का करोड़ों रुपया विदेशों तक पहुंचाता था।
मंत्रालयों तक VIP एंट्री!
एसटीएफ (STF) की कार्रवाई के बाद एटीएस (ATS) ने हर्षवर्धन से ढाई घंटे तक पूछताछ की। शुरुआती दौर में उसने एजेंसी को गुमराह करने की खूब कोशिश की, लेकिन बाद में कई राज उगले। उसने बताया कि दिल्ली के कई मंत्रालयों में उसकी सीधी एंट्री थी। वह अलग-अलग लग्जरी गाड़ियों से वीआईपी की तरह मंत्रालयों में पहुंचता था। उसने दावा किया कि उसकी गाड़ी को आज तक किसी शहर में रोका नहीं गया और न ही किसी ने उसे फर्जी समझा। हर्षवर्धन ने यह भी बताया कि उसने फ्रांस से पीएचडी और लंदन से एमबीए की डिग्री ली है। शायद इसी वजह से उसकी पहुंच ब्यूरोक्रेसी में कुछ अधिकारियों तक हो गई थी, जिससे उसे एंट्री में कभी कोई दिक्कत नहीं आई।
करोड़ों की घड़ियां और बेशकीमती कारें बरामद
जब पुलिस ने हर्षवर्धन के घर की तलाशी ली, तो जो मिला वह आंखें चौंधिया देने वाला था। एक अलमारी से 12 विदेशी घड़ियां मिली हैं, जिनकी कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। घर के बाहर खड़ी 4 लग्जरी कारों में मर्सिडीज और हुंडई की दो सोनाटा कारें शामिल थीं। इसके अलावा, उसके पास से 44 लाख रुपये की भारतीय और अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, यूरोपीय करेंसी भी मिली है, जिसके दस्तावेज वह पेश नहीं कर सका।
भारत-चीन के बीच बर्फ पिघलने लगी, दोनों देशों में तनाव कम करने की पहल
24 Jul, 2025 01:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और चीन ने बुधवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ समग्र स्थिति की समीक्षा की और सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के लिए आधार तैयार किया। भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की यह 34वीं बैठक नई दिल्ली में हुई।
इसमें दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता की सामान्य स्थिति को लेकर संतोष व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय ने बताया, 'दोनों पक्षों ने इस वर्ष के अंत में भारत में होने वाली विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के अगले दौर के लिए भी तैयारी की।'
चीनी विदेश मंत्री वांग यी कर सकते भारत का दौरा
विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता साल के आखिर में भारत में होगी, जिसमें हिस्सा लेने के लिए चीनी विदेश मंत्री वांग यी के आने की संभावना है। वांग और एनएसए अजीत डोभाल इस वार्ता के लिए विशेष प्रतिनिधि हैं।
सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा हुई
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता की सामान्य स्थिति को लेकर संतोष व्यक्त किया। इससे द्विपक्षीय संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, 'दोनों पक्षों ने स्थापित तंत्र के माध्यम से सीमा मामलों से संबंधित मुद्दों पर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नियमित आदान-प्रदान और संपर्क बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।' विशेष प्रतिनिधि स्तर की पिछली वार्ता गत दिसंबर में चीन में हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज मामलों में इलाहाबाद HC की दो महीने की गिरफ्तारी रोक गाइडलाइंस को दी मंज़ूरी
24 Jul, 2025 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामलों में दुरुपयोग रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की गाइडलाइंस को मंजूरी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (पत्नी के साथ क्रूरता) के दुरुपयोग को रोकने के लिए फैमिली वेलफेयर कमेटी (एफडब्ल्यूसी) के गठन संबंधी जारी दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ए.जी.मसीह की पीठ ने आदेश दिया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 13 जून 2022 को क्रिमिनल रिवीजन नंबर 1126 ऑफ 2022 में दिए गए फैसले के पैरा 32 से 38 तक जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, वे प्रभाव में रहने और संबंधित अधिकारियों द्वारा लागू किए जाए। इन दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि धारा 498ए के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी न हो, बल्कि पहले उन्हें फैमिली वेलफेयर कमेटियों के पास भेजा जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच और सुलह-सफाई का मौका मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2 साल पुराने दिशा-निर्देशों को अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब कोई महिला अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराए, तब पुलिस दो महीने तक पति या उसके रिश्तेदारों को गिरफ्तार न करे। दरअसल, कोर्ट ने यह फैसला एक महिला आईपीएस से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि महिला आईपीएस अधिकारी को अलग हुए पति और उसके रिश्तेदारों से उत्पीड़न के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशित करके माफी मांगनी होगी।
“एयर इंडिया दुर्घटना: ब्रिटिश परिवारों को मिले गलत शव, अंतिम संस्कार रद्द
24 Jul, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। गुजरात से लंदन जा रहे एयर इंडिया विमान हादसे में मारे गए यात्रियों के परिवारों को अब एक नई त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों के शवों की अदला-बदली और गलत पहचान के कई मामले सामने आए हैं। कुछ परिवारों को अपने प्रियजनों की जगह किसी और का शव मिला है, जिससे उनके अंतिम संस्कार भी रुक गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ ताबूतों में एक से ज़्यादा लोगों के अवशेष पाए गए, जिन्हें अंतिम संस्कार से पहले अलग करने की ज़रूरत थी। अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास हुए हादसे में 261 लोग मारे गए थे, जिसमें से 52 ब्रिटिश नागरिक थे। अब तक शवों की अदला-बदली की कम से कम दो घटनाएं सामने आई हैं, और आशंका है कि इसतरह के कई और मामले हो सकते हैं।
बात दें कि पीड़ितों के परिवार घटना से सदमे में हैं और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। लंदन में डॉ. फिओना विल्कोक्स ने ब्रिटिश नागरिकों के शवों और उनके डीएनए का मिलान करने की कोशिश की, ताकि उनकी सही पहचान हो सके। एविएशन मामलों के वकील जेम्स हेली प्राट ने बताया कि परिवार सबसे पहले अपने प्रियजनों के शवों को वापस चाहते थे, लेकिन अब उन्हें गलत अवशेष मिलने से गहरा दुख हुआ है। वह मानते हैं कि एयर इंडिया को इस गलती के लिए परिवारों को स्पष्टीकरण देना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, अगले हफ्ते प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान इस पूरे मुद्दे को उठा सकते हैं। ब्रिटेन सरकार ने भी पीड़ितों के परिवारों की अत्यधिक पीड़ा पर चिंता व्यक्त की है।
इस बीच, एयर इंडिया ने कहा कि उसने अपने बोइंग 787 और 737 विमानों के बेड़े में ईंधन नियंत्रण स्विच (एफसीएस) की लॉकिंग प्रणाली का एहतियाती निरीक्षण पूरा कर लिया है और उसमें कोई भी समस्या नहीं मिली है। यह निरीक्षण विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद किया गया था, जिसमें कहा गया था कि दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले विमान के ईंधन स्विच बंद कर दिए गए थे। नागर विमानन सुरक्षा नियामक डीजीसीए ने एयर इंडिया को 21 जुलाई तक इस निरीक्षण को पूरा करने का निर्देश दिया था। एयर इंडिया का बोइंग 787 विमान 12 जून को लंदन गैटविक के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद अहमदाबाद हवाई अड्डे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई थी, जबकि ज़मीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए थे।
“रूफटॉप सोलर: देश में 15.45 लाख घरों ने पाई मुफ्त बिजली—14 जुलाई तक आंकड़े
24 Jul, 2025 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में 14 जुलाई तक कुल 15.45 लाख परिवार रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने से लाभान्वित हुए हैं, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के परिवार भी शामिल हैं। इनमें से गुजरात के 5.23 लाख परिवार हैं।
संसद में बुधवार को दी गई जानकारी के अनुसार इस कंपोनेंट के लिए 800 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसमें प्रत्येक मॉडल विलेज के लिए एक करोड़ रुपए की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है
फरवरी 2024 में शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का एक कंपोनेंट देश के प्रत्येक जिले में मॉडल सोलर विलेज का विकास करना है।विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि ‘स्थानीय निकायों को प्रोत्साहन’ कंपोनेंट के अंतर्गत, इस योजना में शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) और ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत राज संस्थाओं (पीआरआई) के संबंधित अधिकार क्षेत्र में प्रत्येक रूफटॉप सौर ऊर्जा स्थापना के लिए 1,000 रुपए का प्रोत्साहन प्रदान करने का प्रावधान है।
योजना का लक्ष्य केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान कर आवासीय क्षेत्र के एक करोड़ घरों में रूफटॉप सौर ऊर्जा स्थापना का लक्ष्य प्राप्त करना है
इस योजना का लक्ष्य केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान कर आवासीय क्षेत्र के एक करोड़ घरों में रूफटॉप सौर ऊर्जा स्थापना का लक्ष्य प्राप्त करना है। राज्य मंत्री ने कहा कि यह योजना मांग-आधारित है, जिसके तहत देश के सभी आवासीय उपभोक्ता, जिनमें स्थानीय डिस्कॉम के ग्रिड से जुड़े बिजली कनेक्शन वाले ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता भी शामिल हैं, योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन करके लाभ उठा सकते हैं।
सरकार ने इस योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे रजिस्ट्रेशन से लेकर राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवासीय उपभोक्ता के बैंक खाते में सीधे सब्सिडी के वितरण तक की ऑनलाइन प्रक्रिया, राष्ट्रीयकृत बैंकों से रेपो दर जमा 50 आधार अंकों की रियायती ब्याज दर पर कोलेटरल फ्री लोन की उपलब्धता, तकनीकी व्यवहार्यता आवश्यकता को माफ कर और 10 किलोवाट तक ऑटो लोड वृद्धि शुरू करके नियामक अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।
भारतीय नौसेना के चार जहाजों ने सिंगापुर यात्रा पूरी, समुद्री सहयोग पर गहरी चर्चा
24 Jul, 2025 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।दक्षिण पूर्व एशिया में तैनाती के दौरान पूर्वी बेड़े के जहाजों दिल्ली, शक्ति, सतपुड़ा और किल्टन ने सिंगापुर बंदरगाह पर अपनी यात्रा पूरी कर ली है। पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल सुशील मेनन के नेतृत्व ने इन जहाजों की 16 से 19 जुलाई तक परिचालन तैनाती की गई थी। यात्रा के दौरान सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के फ्लीट कमांडर से मुलाकात हिंद-प्रशांत क्षेत्र में द्विपक्षीय नौसैनिक संबंधों और समुद्री सहयोग को बढ़ाने के अवसरों और संभावनाओं पर चर्चा की गई।
इस यात्रा के दौरान रियर एडमिरल सुशील मेनन ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास पर भारतीय नौसेना के दृष्टिकोण पर अकादमिक समुदाय के साथ अनौपचारिक चर्चा की। पूर्वी बेड़े के जहाजों के कमांडिंग अधिकारियों ने क्रांजी युद्ध स्मारक पर भव्य पुष्पांजलि समारोह में भाग लिया और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नौसेनाओं के बीच व्यावसायिक बातचीत में क्रॉस-डेक दौरे, विषय वस्तु विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और मैत्रीपूर्ण खेल गतिविधियां शामिल थीं, जिनका उद्देश्य अंतर-संचालन और आपसी समझ को मजबूत करना था।
इसी दौरान आईएनएस शक्ति पर एक डेक रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें सिंगापुर नौसेना के कर्मियों, प्रतिष्ठित व्यक्तियों, राजनयिक समुदाय के सदस्यों और भारतीय प्रवासियों ने समुद्री साझेदारी के बंधनों का जश्न मनाया।
सीमा सुरक्षा में बड़ी पहल, BSF तैनात करेगी निगरानी और हमले के ड्रोन
23 Jul, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली बार ड्रोन स्क्वाड्रन तैनात करने का फैसला लिया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद बीएसएफ अपनी सीमा चौकियों को और मजबूत कर रही है ताकि दुश्मन के घातक ड्रोन हमलों को नाकाम किया जा सके.
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह ड्रोन स्क्वाड्रन चुनिंदा सीमा चौकियों पर तैनात होगा और इसमें निगरानी, टोही और हमले में सक्षम विभिन्न प्रकार के ड्रोन शामिल होंगे. इन ड्रोन को संचालित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों की टीम भी बनाई जा रही है.
चंडीगढ़ से किया जाएगा कंट्रोल
इस स्क्वाड्रन को बीएसएफ की पश्चिमी कमान के चंडीगढ़ मुख्यालय से कंट्रोल किया जाएगा. बीएसएफ के पास भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, जो जम्मू से लेकर पंजाब, राजस्थान और गुजरात तक करीब 2,000 किमी से ज्यादा लंबी है.
ऑपरेशन सिंदूर बना सबक
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस ऑपरेशन में बीएसएफ ने भारतीय सेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
इस दौरान पाकिस्तान ने बहुत बड़ी संख्या में ड्रोन, जिनमें स्वार्म ड्रोन भी शामिल थे, भारतीय सैन्य ठिकानों और सीमावर्ती इलाकों में भेजे थे. इसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीएसएफ ने 118 से ज्यादा पाकिस्तानी चौकियां तबाह कर दीं और उनकी निगरानी प्रणाली को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया.
छोटे और बड़े दोनों तरह के ड्रोन होंगे शामिल
कड़ी सुरक्षा के साथ ड्रोन स्क्वाड्रन की तैनाती सूत्रों के अनुसार, स्क्वाड्रन में छोटे और बड़े ड्रोन शामिल होंगे जो जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन या युद्ध जैसी स्थिति में तुरंत लॉन्च किए जाएंगे. हर चौकी पर करीब 2-3 प्रशिक्षित जवानों की टीम तैनात की जाएगी. स्क्वाड्रन के लिए नए ड्रोन और उपकरण खरीदे जा रहे हैं और जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
चौकियों और बंकरों को किया जा रहा है मजबूत
बीएसएफ ने अपनी सीमा चौकियों और बंकरों को और मजबूत करना भी शुरू कर दिया है. चौकियों की छत और दीवारों को मजबूत शीट्स से ढंका जा रहा है ताकि ड्रोन हमलों से नुकसान कम किया जा सके. इसके अलावा कुछ चुनिंदा चौकियों पर काउंटर-ड्रोन तकनीक लगाने की तैयारी भी चल रही है ताकि सीमा पार से आने वाले हथियारबंद ड्रोन को बीच में ही नष्ट किया जा सके. बीएसएफ का यह कदम सीमा पर भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने की उसकी तैयारी को और मजबूत करता है.
पहलगाम आतंकी हमले पर सरकार का बड़ा बयान, संसद में होगी विस्तृत चर्चा
23 Jul, 2025 04:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया. विपक्षी दल ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम आतंकी हमले और बिहार में जारी SIR जैसे मुद्दों पर सदन में चर्चा करने की मांग कर रहे थे. हाालंकि सरकार अब पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए तैयार हो गई है. अगले हफ्ते सोमवार (28 जुलाई) को लोकसभा में और मंगलवार (29 जुलाई) को राज्यसभा में इस मुद्दे पर बहस होगी. विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय सेना की कार्रवाई पर संसद को संबोधित करने की भी मांग की थी.
ऑपरेशन सिंदूर पर बोलेंगे कब बोलेंगे पीएम मोदी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी अगले हफ्ते पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर पर बोलेंगे. पीएम मोदी 29 जुलाई को इस विषय पर राज्यसभा को संबोधित करेंगे. 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद से विपक्ष भारत की ओर से की गई कार्रवाई पर चर्चा की मांग कर रहा है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की थी.
यूके दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी
कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल चाहते थे कि इस हफ्ते ही ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा हो, लेकिन पीएम मोदी 23-24 जुलाई को दो दिवसीय यात्रा पर लंदन जाएंगे. ऐसे में अगर सदन में चर्चा होती है तो पीएम मोदी जवाब नहीं दे पाएंगे इसलिए विपक्ष ने संशोधित कार्यक्रम को स्वीकार कर लिया. लंदन में पीएम मोदी और यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.
संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर 25 घंटे होगी चर्चा
संसद के मानसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के लिए सरकार सोमवार (21 जुलाई 2025) को तैयार हुई थी. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में मानसून सत्र के दौरान ऑपरेशन सिंदूर पर लोकसभा में 16 घंटे और राज्यसभा में 9 घंटे चर्चा करने का निर्णय लिया गया. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के बजाय विदेश दौरे को ज्यादा महत्व दिया है.
सरकारी नियमों के अनुसार उपराष्ट्रपति एन्क्लेव खाली करेंगे धनखड़, अब कहां रहेंगे?
23 Jul, 2025 01:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उपराष्ट्रपति पद से सोमवार (21 जुलाई, 2025) को इस्तीफा देने वाले जगदीप धनखड़ सरकारी बंगले के हकदार हैं. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार (22 जुलाई) को इस बारे में जानकारी दी.
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत उपराष्ट्रपति एन्क्लेव का हुआ था निर्माण
74 वर्षीय पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पिछले साल अप्रैल महीने में संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड पर नवनिर्मित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में शिफ्ट हो गए थे. उपराष्ट्रपति के आवास और कार्यालय वाले एन्क्लेव का निर्माण सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत किया गया था.
जगदीप धनखड़ को दिया जाएगा टाइप-8 का बंगला- अधिकारी
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लगभग 15 महीने उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में रहने के बाद उसे छोड़ना होगा. उन्होंने कहा, 'उन्हें (पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़) लुटियंस दिल्ली या किसी अन्य इलाके में टाइप आठ का बंगला दिया जाएगा.' टाइप आठ का बंगला आमतौर पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों या राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों को आवंटित किया जाता है.
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
उल्लेखनीय है कि जगदीप धनखड़ ने सोमवार (21 जुलाई, 2025) की शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए देश के उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजकर कहा कि वह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं.
हालांकि, जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देने से सत्ता पक्ष और विपक्ष पूरी तरह हैरान है. धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस ने आशंका जताते हुए कहा कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के पीछे उनकी ओर से बताए गए स्वास्थ्य कारणों के अलावा कोई और अधिक गहरे कारण हैं.
संसद के मानसून सत्र के बीच की इस्तीफे की घोषणा
दरअसल, देश की संसद में सोमवार (21 जुलाई, 2025) से ही मानसून सत्र की शुरुआत हुई है और मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही के दौरान जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति के तौर पर उपस्थित थे. लेकिन पहले दिन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद शाम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया.
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