देश
दुर्गा पूजा की छुट्टियों में घूम सकेंगे सिक्किम, लाचुंग का रास्ता खुला: पर्यटन कारोबारियों में खुशी
9 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिलीगुड़ी: दुर्गा पूजा से पहले सिक्किम में पर्यटन की वापसी होने वाली है. लंबे इंतज़ार के बाद, सोमवार से पर्यटकों को लाचुंग आने की अनुमति दे दी गयी है. मंगन जिला प्रशासन ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं. हालांकि, कुछ इलाकों में खराब सड़कों के कारण, लाचेन में पर्यटकों का प्रवेश अभी भी प्रतिबंधित है. उत्तरी सिक्किम का लाचेन अभी भी बंद है. पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग खुश है कि लाचुंग, युमथांग, याक्सुम जैसे पर्यटन केंद्र खुल गए हैं.
रविवार को जिला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लाचुंग को खोलने का फैसला लिया गया. प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, रविवार से परमिट जारी किए जाएंगे. परमिट सेल के प्रभारी रोशन प्रधान ने बताया, "लाचुंग को सोमवार से खोलने का फैसला किया गया है. परमिट के लिए आवेदन रविवार से दाखिल किए गए थे. पर्यटक उत्तरी सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता का फिर से आनंद ले सकेंगे."
सिक्किम में बादल फटने से लगभग डेढ़ साल तक बंद रहने के बाद इस साल मई के अंत में उत्तरी सिक्किम को खोल दिया गया था. लेकिन जून की शुरुआत में कई जगहों पर भूस्खलन के कारण पर्यटक फिर से फंस गए. छतेन सैन्य शिविर में हुए भूस्खलन में छह सैन्यकर्मी लापता हो गए. बाद में, तीन के शव बरामद किए गए थे. इसके बाद उत्तरी सिक्किम में पर्यटकों के प्रवेश पर फिर से रोक लगा दी गयी थी.
इस बीच, जैसे-जैसे पूजा का मौसम नज़दीक आ रहा था, पर्यटन उद्योग ने उत्तरी सिक्किम को खोलने की मांग की. प्रशासन ने स्थिति की समीक्षा के लिए कई बैठकें कीं. हालात को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया गया. संचार व्यवस्था में सुधार के अलावा, सिंगथांग और लाचुंग के बीच संगकेलांग पुल और लाचुंग और सिंगथांग के बीच तुंग पुल की मरम्मत की गई. प्रशासन ने संगकेलांग पुल पर पर्यटकों के आवागमन का समय प्रतिदिन दोपहर 1 बजे और तुंग पुल पर प्रतिदिन दोपहर 2 बजे तक सीमित कर दिया है.
19 अगस्त को पहाड़ी काटते समय भूस्खलन में तीन मज़दूरों की मौत हो गई थी. ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी लाछांग को खोलने का जोखिम नहीं उठाना चाहते. जब तक सड़क यातायात के लिए उपयुक्त नहीं हो जाती, लाछांग बंद रहेगा. पूजा के दौरान लाछांग के खुलने पर संदेह है. ऐसा इसलिए है क्योंकि लगातार भूस्खलन के कारण कुछ इलाकों में सड़क मरम्मत का काम मुश्किल हो गया है.
पीएम मोदी का पंजाब और हिमाचल प्रदेश दौरा आज, बाढ़ग्रस्त इलाकों का करेंगे सर्वे
9 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मंगलवार को पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा करेंगे. इस दौरान वे आपदा प्रतिक्रिया और पुनर्वास प्रयासों की समीक्षी भी करेंगे. बता दें, मॉनसून से पूरे उत्तर भारत में भारी तबाही मची है.
सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले दोपहर करीब 1:30 बजे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा पहुंचेंगे, जहां मौसम अनुकूल रहने पर वे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे. इसके बाद में, वह धर्मशाला में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जहां उन्हें राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय आपदा मित्र स्वयंसेवकों सहित अन्य बचाव और राहत एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जानकारी दी जाएगी.
वह आपदा पीड़ितों से सीधे बातचीत कर उनके हालातों को समझेंगे. हिमाचल प्रदेश में अपने कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री का राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद लगभग 4:15 बजे पंजाब के गुरदासपुर पहुंचने का कार्यक्रम है.
पंजाब में हालात बेहद खराब
पंजाब में भी बाढ़ ने आफत मचा रखी है. इस बाढ़ ने दशकों को रिकॉर्ड तोड़ दिया है. यहां बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 46 तक पहुंच गया है. वहीं, फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है. करीब 1.75 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर लगी फसलें नष्ट हुई हैं.
हिमाचल प्रदेश में कमोबेश यही हालात
वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी बाढ़ से हालत अच्छे नहीं है. बादल फटने की घटना से यहां बेहद क्षति हुई है. 20 जून से सोमवार 8 सितंबर तक बादल फटने, भारी बारिश, लैंडस्लाइड के चलते करोड़ो का नुकसान हुआ है. अभी तक 370 लोगों की मौत की खबर सामने आई है. बात पहाड़ी इलाकों की करें तो यहां करीब 165 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान गई है. अभी भी करीब 41 लोग लापता हैं. मॉनसून की शुरुआत से ही हिमाचल प्रदेश में 136 घटनाएं लैंडस्लाइड की दर्ज की गई हैं.
हिमालय को लांघ तिब्बत पहुंचा मॉनसून! साइंटिस्ट ने किया बड़ा दावा, खतरा भी जताया
9 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: क्या अब मानसून की हवाएं हिमालय को लांघ तिब्बत पहुंच रही हैं? इस सवाल पर इन दिनों काफी चर्चाएं हो रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के सीनियर साइंटिस्ट ने इस तरह का दावा किया है. अभी तक यही कहा जाता है कि हिमालय भारत की दीवार है और ऐसा होना काफी मुश्किल है, लेकिन यदि ऐसा हो रहा है कि तो भविष्य के लिए ये अच्छा संकेत नहीं है. इसी मुद्दे को ईटीवी भारत ने विस्तार से जानने का प्रयास किया. साथ ही ये भी जाना कि अगर ऐसा हो रहा है कि तो भविष्य के लिए ये कितना बड़ा खतरा है.
मौसम विभाग की मानें तो इस बार सेंट्रल हिमालय में पड़ने वाले उत्तराखंड, हिमाचल के अलावा वेस्टर्न हिमालय जैसे जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कुछ पर्वतीय इलाकों में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई है. इन इलाकों में इस बार संभावित से ज्यादा बरसात देखी गई है.
108 से लेकर 114 फीसदी तक ज्यादा बरसात दर्ज हुई: देहरादून मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार सेंट्रल हिमालय के साथ-साथ वेस्टर्न हिमालय में 108 से लेकर 114 फीसदी ज्यादा बरसात दर्ज की गई है. अगस्त का महीना बारिश के लिहाज से सबसे ज्यादा भारी रहा है. क्योंकि इस दौरान उत्तर भारत में मानसून ने अपना कहर बरपाया था. इससे सैकड़ों लोगों की जान भी गई थी और करोड़ों रुपए का नुकसान भी हुआ.
अगस्त में ज्यादा बारिश का कारण: साइंटिस्ट अगस्त में उम्मीद से कई गुना ज्यादा बारिश होने का कारण इंडियन मॉनसून और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का एक साथ आना मानते हैं. देहरादून मौसम विभाग केंद्र के पूर्व मौसम निदेशक और वर्तमान में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र मुंबई के हेड विक्रम सिंह भी उत्तराखंड में झमाझम हुई बारिश का यही कारण मानते हैं.
2013 में भी बने थे इसी तरह के हालात: विक्रम सिंह की मानें तो जलवायु परिवर्तन (Climate change) के चलते पिछले कुछ सालों से लगातार वेदर सिस्टम में कुछ अनोखे बदलाव देखने को मिल रहे हैं. साल 2013 में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था, जिसकी वजह से जून 2013 में प्रदेश में भारी बारिश हुई थी. पिछले साल जुलाई 2024 में भी इसी तरह की स्थिति उत्तराखंड में देखने को मिली थी. वहीं, इस बार साल 2025 में भी जुलाई से लेकर अगस्त तक इसी तरह के हालात देखने को मिले हैं.
'दोषी को अधिक कारावास में रखने के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा दें', सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से कहा
9 Sep, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को रेप केस में दोषी ठहराए गए शख्स को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिसे अपनी सजा से ज़्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा.
यह मामला जस्टिस जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आया. याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता महफूज़ अहसन नाजकी ने किया.
बेंच को बताया गया कि हाई कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है और धारा 376(1) के तहत सजा को आजीवन कारावास से घटाकर 7 साल के कठोर कारावास में बदल दिया है, जबकि सभी आरोपों में दोषसिद्धि को बरकरार रखा है. याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सज़ा में कमी के बावजूद, उनके मुवक्किल को दोषसिद्धि की अवधि से कहीं अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा, क्योंकि यह गलत धारणा थी कि आजीवन कारावास की सजा अभी भी वैध है.
यह मामला 2 जून, 2025 के एक पत्र के माध्यम से प्रकाश में लाया गया. सुप्रीम कोर्ट की विधिक सेवा समिति ने याचिकाकर्ता के वकील से अनुरोध किया कि वे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए एक विशेष अनुमति याचिका दायर करें. बेंच के समक्ष दलील दी गई कि अभिलेखों की जांच करने पर पता चला कि 30 जनवरी, 2025 के आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र के अनुसार, याचिकाकर्ता पहले ही अतिरिक्त कारावास की सजा काट चुका है.
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की याचिका में कहा गया है, "इस जानकारी पर, याचिकाकर्ता के वकील ने 06 जून 2025 को सागर केंद्रीय कारागार के अधीक्षक को पत्र लिखकर याचिकाकर्ता की तत्काल रिहाई की मांग की और उसकी प्रतियां मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश के महानिदेशक (कारागार) को भेजीं." याचिकाकर्ता को 6 जून, 2025 को रिहा कर दिया गया.
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की याचिका में कहा गया है, "रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि 30 जनवरी 2025 के आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र के अनुसार, याचिकाकर्ता पहले ही 21 साल से ज़्यादा की कैद काट चुका है." सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट द्वारा दी गई सज़ा से ज़्यादा गलत कारावास के लिए आर्थिक मुआवजा देने की मांग की गई थी.
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, बेंच ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को मुआवजा देने का निर्देश दिया. बेंच ने यह भी कहा कि सोहन सिंह ने अतिरिक्त कारावास भी काटा, हालांकि वह कुछ समय के लिए जमानत पर था, लेकिन उसकी जेल की सजा केवल सात साल की थी.
बेंच ने मामले में भ्रामक हलफनामे दाखिल करने के लिए राज्य सरकार के वकील पर भी सवाल उठाए और राज्य सरकार की इस चूक की कड़ी आलोचना की, जिसके परिणामस्वरूप दोषी अपनी सजा पूरी होने के बाद भी जेल में सड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधिक सेवा प्राधिकरण को इसी तरह के मामलों की तलाश जारी रखने का निर्देश दिया.
पिछले महीने, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को एक ऐसे मामले में जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया था जिसमें बलात्कार के एक दोषी ने अपनी सात साल की सजा पूरी करने के बावजूद लगभग आठ साल जेल में बिताए थे. अदालत ने कहा था कि इस मामले के तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हालांकि अक्टूबर 2017 में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आजीवन कारावास की सज़ा को घटाकर सात साल के कठोर कारावास में बदल दिया था, फिर भी याचिकाकर्ता 6 जून, 2025 को ही जेल से रिहा हो पाया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जानना चाहेगा कि इतनी गंभीर चूक कैसे हुई और याचिकाकर्ता सात साल की पूरी सज़ा काटने के बाद भी 8 साल से ज़्यादा समय तक जेल में क्यों रहा. सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार को स्पष्टीकरण देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर, 2025 को बोर्ड की बैठक में तय की है. सिंह ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 10 अक्टूबर, 2017 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सत्र सुनवाई के परिणामस्वरूप याचिकाकर्ता को दोषी ठहराया गया और जुलाई 2005 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता पर आईपीसी की धारा 376(1), 450 और 560B के तहत दंडनीय अपराध के लिए खुरई, जिला सागर, मध्य प्रदेश के सत्र न्यायाधीश की अदालत में मुकदमा चलाया गया था.
इलाज में डॉक्टरों की लापरवाही से महिला मरीज ब्रेन डेड, आयोग ने 10 लाख रुपये मुआवजे का दिया आदेश
9 Sep, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि, ब्रेन डेड की शिकार हुई एक महिला की मौत के पीछे डॉक्टरों की लापरवाही है. इस मामले में आयोग ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.
साल 2005 का मामला
चेन्नई के तिरुवनमियुर निवासी भेल कर्मचारी बोजैया की 38 साल की पत्नी देवेन्द्रम, नाक बंद होने और सिरदर्द से पीड़ित होने के बाद 2005 में वडापलानी विजया अस्पताल में सी. सत्यनारायण कान, नाक और गला अनुसंधान संस्थान के डॉक्टर. रंगारा के पास इलाज के लिए गई थी.
मेडिकल टीम की सलाह पर, देवेंद्रम को एंडोस्कोपी के लिए आईसीयू में ले जाया गया, जहां उन्हें ब्रेन डेड और हार्ट फेलियर से पीड़ित घोषित कर दिया गया. डॉक्टरों ने बताया कि 12 अक्टूबर, 2005 को वेंटिलेटर पर रहते हुए उनकी अचानक मौत हो गई.
बोजैया ने राज्य उपभोक्ता आयोग में एक मामला दायर कर विजया अस्पताल, सर्जनों और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट को उनकी पत्नी की मृत्यु में लापरवाही, असावधानी और सेवा में कमी के लिए एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश देने की मांग की.
यह मामला आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आर. सुब्बैया के समक्ष सुनवाई के लिए आया. याचिकाकर्ता बोजैया की ओर से पेश हुए वकील थेनमोझी शिवपेरुमल ने कहा, महिला को बुनियादी जांच किए बिना, कम हीमोग्लोबिन स्तर, हाई ब्लड शुगर लेवल और नाश्ते के बाद के अंतराल पर विचार किए बिना भर्ती कर लिया गया. उन्हें एनेस्थीसिया दिया गया, जिसके कारण वह ब्रेन डेथ हो गई.
उचित उपचार नहीं मिलने के कारण पति ने पत्नी को खोया, याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा?
उन्होंने बताया कि, अस्पताल प्रशासन द्वारा उचित उपचार न दिए जाने के कारण याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी को खो दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बात पर गहरा संदेह है कि कान, नाक और गला विशेषज्ञों के इलाज के कारण ही उन्हें उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद आईसीयू में स्थानांतरित किया गया.
अस्पताल ने कहा कि डॉक्टर अपने परिसर में चिकित्सा परामर्श कक्ष का उपयोग करते हैं. चूंकि वहां कोई नियोक्ता-कर्मचारी सिस्टम नहीं है, इसलिए उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले उपचार से संबंधित किसी भी समस्या के लिए संबंधित कंसल्टेंट को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.
महिला का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि वह कई डॉक्टरों से तेज सिरदर्द, साइनसाइटिस वगैरह का इलाज करवाने के बाद उनके पास इलाज के लिए आई थी. लेकिन स्टेरॉयड लेने से भी कोई फायदा नहीं हुआ. क्या यह लापरवाही थी या इलाज में कमी. बताया गया कि मरीज की मौत दिमाग की नस में सूजन या ब्रेन ट्यूमर से खून बहने के कारण हुई.
न्यायमूर्ति आर. सुब्बैया ने आदेश जारी किया
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आर सुब्बैया ने आदेश जारी किया. जिसमें नाश्ते के 6 घंटे बाद एनेस्थीसिया देने की प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात कही गई. यह भी कहा गया कि, डॉक्टरों ने मरीज की बीमारियों की प्रक्रिया पर विचार नहीं किया. डॉक्टर सर्जरी शुरू करने से पहले मरीज के शुगर लेवल, कम हीमोग्लोबिन माप और पूरे नाश्ते के बाद इलाज के लिए आने के नकारात्मक प्रभावों को भूल गए.
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आर. सुब्बैया के आदेश में कहा गया कि, यह पुष्टि हो चुकी है कि मौत का कारण डॉक्टरों की लापरवाही थी और चूंकि अस्पताल के साथ नियोक्ता-कर्मचारी का कोई संबंध नहीं था, इसलिए महिला की मौत के लिए डॉक्टर ही जिम्मेदार थे. साथ ही, यह भी ध्यान दिया गया है कि याचिकाकर्ता ने बीमारी के लिए दिए गए उपचार का उल्लेख नहीं किया है, जो एक साल से भी ज़्यादा समय से चल रहा था.
आदेश में कहा गया कि, मृतक महिला का इलाज करने वाले डॉक्टरों में से एक, डॉ. रंगा राव की मृत्यु हो गई है. इसलिए एक अन्य सर्जन, एम जयरामी रेड्डी और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट, ए कृष्णमूर्ति को मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये और 1 लाख रुपये का भुगतान करना होगा. याचिकाकर्ता बोजैया और उनकी तीन बेटियों को कानूनी खर्च के रूप में 8 सप्ताह के भीतर 50,000 रुपये देने का आदेश दिया गया है.
धार्मिक उन्माद में हिंसा: मछली पकाने पर परिवार पर हमला
8 Sep, 2025 11:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महिलाओं के फाड़े कपड़े, पुरुषों को जमकर पीटा, घर में की तोड़फोड़
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के लिंगराज थाना क्षेत्र के नागेश्वर टांगी इलाके में चंद्रग्रहण के दिन मांसाहारी भोजन करने पर एक परिवार को भारी कीमत चुकानी पड़ी। करीब युवकों की भीड़ ने घर में घुसकर परिवार पर हमला कर दिया, कपड़े फाड़े और बुरी तरह पीटा। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अपने घर में खाना बनाकर खा रहे थे, लेकिन उन्हें हेतुवादी या तर्कवादी कहकर निशाना बनाया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक परिवार का कहना है कि उन्होंने चंद्रग्रहण को वैज्ञानिक और तार्किक नजरिए से देखा और रोज की तरह चिकन बिरयानी और मछली पका रहे थे। लेकिन इस बात से कुछ हिंदू धार्मिक कट्टरपंथी नाराज हो गए। कट्टरपंथियों का आरोप था कि परिवार हेतुवादी या तर्कवादी है यानी वे लोग जो धर्म और भगवान में विश्वास नहीं रखते। हमला करने वाले युवकों ने धार्मिक नारे भी लगाए और परिवार के सदस्यों से घसीट घसीट कर बुरा तरह पीटा।
बताया गया कि भीड़ ने जबरन दरवाजा तोड़ दिया, खिड़कियों के शीशे चकनाचूर कर दिए और घर के अंदर घुसकर हमला किया। महिलाओं के कपड़े फाड़कर उनकी बेइज्जती की, पुरुषों को डंडों और लाठियों से पीटा। आस-पास के लोग डर से कुछ नहीं कर पाए। इस पूरी घटना से इलाके में दहशत फैल गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की। हालांकि, तब तक परिवार के कई सदस्य घायल हो चुके थे और घर को काफी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल पेमेंट हुआ आसान, UPI ने बढ़ाई लिमिट
8 Sep, 2025 10:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अगस्त की शुरुआत में यूपीआई के नियमों में कई बदलाव किए गए थे। वहीं अब फिर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए होने वाले बड़े डिजिटल पेमेंट को भी आसान बनाने जा रहा है। इस बार ट्रांजैक्शन लिमिट बढ़ाने का ऐलान किया गया है। ये नए नियम 15 सितंबर से लागू होंगे। यानी जीपे-फोनपे चलाने वाले इसे जान लें।
ये नए बदलाव खासतौर पर पर्सन-टू-मर्चेंट यानी पी2एम ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे। आसान शब्दों में कहें तो अगर आप इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं, लोन ईएमआई भरते हैं या मार्केट में इन्वेस्ट करते हैं। हालांकि पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन यानी फैमिली या दोस्तों को पैसे भेजने की लिमिट पहले की तरह 1 लाख रुपए प्रतिदिन ही रहेगी। इसमें अभी किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कैपिटल मार्केट इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस के तहत अब आप जल्द ही 2 लाख की जगह 5 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन और 24 घंटे में मैक्सिमम 10 लाख तक की ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। सरकारी ई-मार्केटप्लेस और टैक्स पेमेंट में इसकी लिमिट को भी 1 लाख से बढ़कर 5 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन कर दिया जाएगा। ट्रैवल बुकिंग अब 1 लाख की बजाय 5 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन, डेली कैप 10 लाख तक रहेगा। क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट एक बार में 5 लाख रुपए तक, लेकिन प्रतिदिन मैक्सिमम 6 लाख रुपए तक पेमेंट कर सकेंगे। लोन और ईएमआई कलेक्शन इसकी लिमिट को भी बढ़कर 5 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन से मैक्सिमम 10 लाख रुपए प्रतिदिन कर दिया जाएगा। ज्वेलरी खरीदारी के लिए नई लिमिट के बाद 1 लाख की जगह आप 2 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन, डेली कैप 6 लाख तक पेमेंट कर सकेंगे। टर्म डिपॉजिट नई लिमिट के बाद यहां भी आप 5 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन कर सकेंगे जो पहले 2 लाख थी।
डिजिटल अकाउंट ओपनिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है इसकी लिमिट अभी भी 2 लाख ही है। इसके अलावा बीबीपीएस के जरिए फॉरेन एक्सचेंज पेमेंट जल्द ही 5 लाख रुपए प्रति ट्रांजैक्शन और डेली कैप 5 लाख तक हो जाएगी। एनपीसीआई का कहना है कि इन बदलावों से लोगों और कारोबारियों को ज्यादा फायदा होगा। इससे बड़े डिजिटल पेमेंट करने में भी आसानी होगी। इन बदलावों से कैशलेस लेनदेन को और बढ़ावा मिलेगा।
भारत-इस्राइल ने मिलाया हाथ, निवेश को मिलेगी सुरक्षा और मजबूती
8 Sep, 2025 08:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और इस्राइल ने द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्रालय ने सोमवार यह जानकारी दी।
वित्त मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा, "भारत सरकार और इज़राइल सरकार ने आज नई दिल्ली में द्विपक्षीय निवेश समझौते # बीआईटी पर हस्ताक्षर किए।"
इस समझौते पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके इजरायली समकक्ष बेजालेल स्मोट्रिच ने हस्ताक्षर किए।
अप्रैल 2000 से जून 2025 के दौरान, भारत को इज़राइल से 337.77 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ है। इस समझौते पर हस्ताक्षर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत कर रहे हैं।
आधार से वोटर आईडी मान्य, नागरिकता के लिए नहीं: SC
8 Sep, 2025 07:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बिहार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार, मतदाता सूची के लिए वैध पहचान पत्र है, लेकिन इसे नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता। सोमवार को बिहार मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वे आधार कार्ड को 12वां दस्तावेज मानें ताकि मतदाता वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए आधार कार्ड को भी पेश कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश- आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करे चुनाव आयोग
चुनाव आयोग पहले ही 11 दस्तावेजों की सूची जारी कर चुका है, जिन्हें दिखाकर मतदाता, वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कर सकते हैं। पहले इन दस्तावेजों में आधार कार्ड शामिल नहीं था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को बतौर 12वां दस्तावेज मानने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से अपने सभी अधिकारियों को निर्देश जारी करने को भी कहा है ताकि आधार कार्ड को स्वीकार किया जा सके। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता।
'चुनाव आयोग को आधार कार्ड की वैधता जानने का अधिकार'
चुनाव आयोग को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को आधार कार्ड की वैधता जांचने का पूरा अधिकार होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'केवल वास्तविक नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति होगी, जाली दस्तावेजों के आधार पर असली होने का दावा करने वालों को मतदाता सूची से बाहर रखा जाए।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे।'
सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ- 'आधार कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं'
चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने सबमिशन दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता के सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पर जस्टिस बागची ने भी साफ किया कि पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र को छोड़कर, चुनाव आयोग द्वारा सूचीबद्ध किए गए 11 दस्तावेज भी नागरिकता के सबूत नहीं माने जाएंगे।
चुनाव आयोग ने इन दस्तावेजों को दी मान्यता:
1. केंद्र, राज्य सरकार एवं सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत कर्मियों के पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश
2. एक जुलाई 1987 के पूर्व सरकारी, स्थानीय प्राधिकार, बैंक, पोस्टऑफिस, एलआईसी एवं पब्लिक सेक्टर उपक्रमों से जारी आईकार्ड, दस्तावेज
3. सक्षम प्राधिकार से जारी जन्म प्रमाणपत्र
4. पासपोर्ट
5. मान्यता प्राप्त बोर्ड, विश्वविद्यालय से जारी मैट्रिक व अन्य शैक्षिक प्रमाणपत्र
6. स्थायी आवासीय प्रमाणपत्र
7. वन अधिकार प्रमाणपत्र
8. सक्षम प्राधिकार द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी जाति प्रमाणपत्र
9. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो)
10. राज्य/स्थानीय प्राधिकार द्वारा तैयार पारिवारिक रजिस्टर
11. सरकार का कोई भूमि/मकान आवंटन प्रमाणपत्र
राजद ने लगाए ये आरोप
राजद और अन्य याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि आधार कार्ड दिखाने पर लोगों को मतदाता सूची में शामिल किया जाए। इन याचिकाओं पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश जारी किया। राजद की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दावा किया कि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद बूथ लेवल अधिकारी आधार कार्ड को स्वीकार नहीं कर रहे थे। सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारियों को इस बारे में निर्देश जारी नहीं किए।
भारत ने बेल्जियम कोर्ट को दिया आश्वासन– मेहुल चौकसी को जेल में मिलेगी पूरी सुविधा
8 Sep, 2025 01:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 12,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी को भारत लाने की तैयारी तेज हो गई है। भारत सरकार ने बेल्जियम कोर्ट में प्रत्यर्पण की मांग करते हुए बताया है कि चौकसी को आर्थर रोड जेल (मुंबई) में अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक सुविधाएं दी जाएंगी।
जेल में खास व्यवस्था
गृह मंत्रालय ने जानकारी दी कि 66 वर्षीय चौकसी को आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा। यहां उन्हें कॉटन का गद्दा, तकिया, चादर और कंबल मिलेगा। जरूरत पड़ने पर धातु या लकड़ी का बिस्तर भी उपलब्ध कराया जाएगा। चूंकि मुंबई का मौसम गर्म और नमी वाला है, इसलिए हीटिंग की व्यवस्था की जरूरत नहीं होगी।
मेडिकल और डाइट का इंतजाम
सरकार ने कोर्ट को बताया कि चौकसी को 24 घंटे मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी। जेल अस्पताल में 6 डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन मौजूद हैं। 20 बेड वाला सुसज्जित अस्पताल भी है। जरूरत पड़ने पर उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर से दिखाया जाएगा।
खाने के लिए तीन बार भोजन दिया जाएगा और मेडिकल मंजूरी के बाद विशेष डाइट की सुविधा भी मिलेगी।
सुरक्षा और अन्य सुविधाएं
जेल कैंटीन में फल और स्नैक्स उपलब्ध रहेंगे। कैदियों के लिए रोजाना व्यायाम, योग, मेडिटेशन, बैडमिंटन और इनडोर गेम्स की व्यवस्था है। लाइब्रेरी और पढ़ाई की सामग्री भी मिलेगी।
बेल्जियम कोर्ट को दिया डिटेल प्लान
भारत ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि चौकसी की हिरासत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप होगी। इसी उद्देश्य से यह डिटेल प्लान कोर्ट में पेश किया गया है।
गौरतलब है कि चौकसी अप्रैल में बेल्जियम के एंटवर्प से गिरफ्तार हुआ था। उनके वकीलों ने स्वास्थ्य समस्याओं (कैंसर समेत) का हवाला देकर हिरासत पर सवाल उठाए हैं।
जेलों की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय नजर
पिछले दिनों विदेशी अधिकारियों ने तिहाड़ जेल का निरीक्षण किया था। उन्होंने कैदियों की सुरक्षा, भोजन और रहने की स्थिति का आकलन किया। ब्रिटिश अदालतें कई बार भारत की जेल स्थितियों को प्रत्यर्पण याचिका खारिज करने का आधार बना चुकी हैं।
लाल सागर में ऑप्टिक केबल्स कटने से इंटरनेट स्लो, भारत सहित एशिया के कई देश प्रभावित, हूती विद्रोहियों पर शक
8 Sep, 2025 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाल सागर से बड़ी खबर सामने आई है। समुद्र के नीचे बिछी ऑप्टिक केबल्स क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर इंटरनेट की गति धीमी हो गई है। इससे यूजर्स को देरी और धीमी गति का सामना करना पड़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट के एज्योरे पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा है। लाल सागर में बिछी ये केबल्स यूरोप और एशिया के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का 17 फीसदी हिस्सा इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है। क्षतिग्रस्त केबल्स में सीकॉम/टीजीएन-ईए, एएई-1 और ईआईजी जैसे प्रमुख सिस्टम शामिल हैं, जिससे महाद्वीपों के बीच डेटा ट्रांसफर बाधित हुआ है। रिपोट्र्स के अनुसार, केबल्स के क्षतिग्रस्त होने से माइक्रोसॉफ्ट के एज्योर पर बड़ा असर पड़ा है। कंपनी ने बताया कि एज्योर उपयोगकर्ताओं, खासकर एशिया और यूरोप के बीच डेटा ट्रैफिक में समस्याएं आ सकती हैं।
इन केबल्स को ठीक करने में समय लग सकता है और फिलहाल डेटा को वैकल्पिक मार्गों से भेजकर काम चलाया जा रहा है। यूजर्स पर प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी लगातार प्रयास कर रही है। केबल्स टूटने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। लाल सागर में पहले हुई घटनाओं में अकसर कॉमर्शियल वेसल्स को इसका कारण माना गया है, लेकिन कुछ मामलों में जानबूझकर तोडफ़ोड़ की आशंका भी जताई जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण डिजिटल ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जा सकता है, ताकि वैश्विक कनेक्टिविटी प्रभावित हो। इसके अलावा, आशंका है कि यमन के हूती विद्रोही लाल सागर में इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए इजरायल पर दबाव बनाने के लिए हो सकता है। इंटरनेट एक्सेस पर नजर रखने वाली कंपनी नेटब्लॉक्स ने बताया कि लाल सागर में केबल्स की कई रुकावटों ने भारत और पाकिस्तान सहित कई देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को प्रभावित किया है।
100 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया
नवंबर 2023 से दिसंबर 2024 तक हूतियों ने गाजा पट्टी में इजरायल-हमास युद्ध के संदर्भ में मिसाइलों और ड्रोनों से 100 से अधिक जहाजों को निशाना बनाया। इस दौरान उन्होंने चार जहाज डुबो दिए । ईरान समर्थित हूतियों ने युद्ध में एक संक्षिप्त युद्धविराम के दौरान अपने हमले रोके थे। वर्तमान में इजरायल-हमास युद्ध में नए युद्धविराम की अनिश्चितता के बीच हूतियों के नए हमले हो रहे हैं।
उत्तराखंड में अब साल के 12 महीने डरा रहा भालू, शाकाहारी से बना खूंखार शिकारी!
8 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: पहाड़ों पर अब बारह महीने भालू का आतंक पसरा हुआ है. यूं तो मांस के अलावा सब्जियां और शाकाहारी भोजन भी भालुओं की पसंद है, लेकिन बदलते स्वभाव के चलते भालुओं के हमलों ने पहाड़ों पर नई मुसीबत खड़ी कर दी है. आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि भालू शाकाहारी भोजन की जगह खूंखार शिकारी में तब्दील हो रहा है. जानिए क्या कह रहे अफसर?
पौड़ी जिले के सतपुली में भालू के आतंक की खबरें अभी चर्चा में ही थी कि रुद्रप्रयाग से भी दिल दहला देने वाली घटना सामने आ गई. यहां दो महिलाओं पर भालू ने हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया. गंभीर रूप से घायल महिलाओं को जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में भर्ती कराया गया. जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. वैसे उत्तराखंड के पहाड़ों में यह कोई नई घटना नहीं है, लेकिन चिंता भालू के उस बदलते हुए स्वभाव को लेकर बढ़ रही है, जो उन्हें आक्रामक शिकारी के रूप में पहचान दिला रहा है.
अपने मूल स्वभाव को छोड़कर खूंखार शिकारी बन रहा भालू: वन विभाग भी खुद मान रहा है कि सतपुली में जिस तरह भालू ने आतंक मचाया है, वो पहले कभी नहीं देखा गया. भालू के हमले का मौके पर रिकॉर्ड और स्थितियां यह बता रही है कि वो अपने मूल स्वभाव को छोड़कर खूंखार शिकारी बन गया है और पूरी तरह से मांसाहारी वन्य जीव के रूप में व्यवहार कर रहा है. इन स्थितियों को देखकर खुद वाइल्ड लाइफ से जुड़े वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं.
"सतपुली में इतने मवेशियों पर भालू का इतने कम समय में हमला करना पहली बार दिखाई दिया है. घटना के बाद वन विभाग ने मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू करने के अलावा भालू को पकड़ने के लिए टीम तैनात कर दी है. भालू के लिए पिंजरा लगाया गया है और यदि इसके बाद भी यह भालू नहीं पकड़ा जाता है तो इसे नष्ट करने के आदेश भी दे दिए गए हैं. भालू अब जिस तरह आक्रामक रूप दिखा रहा है, उससे स्कूल जाने वाले बच्चों और दूसरे लोगों को भी खतरा पैदा हो गया है. जिसका खौफ भी क्षेत्रीय लोगों में दिखाई दे रहा है."- आरके मिश्रा, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ, उत्तराखंड वन विभाग
हाइबरनेशन से पहले भरपूर खुराक की तलाश में भालू: यह समय वैसे भी भालुओं के लिहाज से बेहद अहम है. दरअसल, यह वक्त भालुओं के शीत निद्रा (Hibernation) में जाने से ठीक पहले का है और इस समय भालू शीत निद्रा में जाने की तैयारी करता है. यानी इतना भोजन जुटाता है, ताकि अगले करीब तीन से चार महीने में शीत निंद्रा (हाइबरनेशन) पर रहने के दौरान उसे कोई दिक्कत ना हो, लेकिन परेशानी इस बात की है कि भालुओं के बदलते स्वभाव के कारण अब बारह महीने ही भालू पहाड़ों पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और हमलावर भी हो रहे हैं.
क्या है भालुओं की शीत निद्रा?
शीत निद्रा यानी हाइबरनेशन जीवन बचाने के लिए जरूरी है. सर्दियों में कड़ाके की ठंड के दौरान कुछ जानवर, पक्षी या सरीसृप जमीन के नीचे या ऐसी जगह छिप जाते हैं, जहां वो ठंड से बचे रहते हैं. भालू भी गुफा या मांद में छिप जाते हैं. जहां उनके शरीर में मौजूद चर्बी ही भालू को जिंदा रखती है. इसके लिए हाइबरनेशन से पहले उसे भरपूर खाना होता और खूब सारी चर्बी जमा करनी होती है. हाइबरनेशन के दौरान भालू के दिल की धड़कन भी हल्की या धीमी हो जाती है. लिहाजा, कोई काम ना करने की वजह से भालू को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत नहीं होती है. माना जाता है कि करीब 3 महीनों तक भालू इस समय बिना खाए रह सकता है.
वहीं, बर्फीला या सर्द मौसम खत्म होने के बाद भालू फिर से सक्रिय हो जाता है. फिर से पहले की तरह गतिविधियों में जुट जाता है, लेकिन अब इसी हाइबरनेशन के समय में भालू में व्यावहारिक रूप से बदलाव देखने को मिल रहा है. भालू जंगलों से निकल कर खेतों और बस्तियों तक पहुंच रहा है. कई जगहों पर तो भालू मवेशियों को मारने के अलावा इंसान के फेंके कूड़े को टटोलते भी नजर आ रहा है, जो कि गंभीर और चिंता का विषय है.
आंकड़ों के रूप में यदि इस बात को समझना चाहे तो उत्तराखंड में पिछले 25 सालों के दौरान भालू 68 लोगों को मौत के घाट उतार चुका है. इतना ही नहीं 1,972 लोग ऐसे हैं, जिन पर भालुओं ने हमला करते हुए उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया. यानी 25 सालों में 2,000 से ज्यादा लोगों पर भालू हमला कर चुके हैं.
यह आंकड़ा केवल इंसानों पर हुए हमले का है, जबकि मवेशियों पर भालू के इसके मुकाबले कई गुना ज्यादा हमले हो चुके हैं. इन 25 सालों में ऐसे साल भी हैं, जब भालू के हमले सालाना 100 से भी ज्यादा रहे. इसमें साल 2009 में 120 लोगों को भालू ने घायल किया. साल 2012 में 119, साल 2013 में 115, साल 2014 में 103, साल 2016 में 106 लोगों को भालू ने घायल किया.
भालू के हमले में घायल लोगों की संख्या: पिछले कुछ सालों की बात करें तो साल 2025 में जहां 28 लोग भालू के हमले में अब तक घायल हो चुके हैं तो वहीं 2024 में 65, 2023 में 53 और 2022 में 57 लोग भालू के हमले में घायल हुए हैं. इसके अलावा कुछ अन्य लोग भी हमले में घायल हो सकते हैं. जो रिकॉर्ड में ही नहीं आ पाए.
भालू के हमले में मौत के आंकड़े: मौत के आंकड़ों को देखें तो साल 2025 में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है. इसी तरह भालू के हमले में साल 2024 में 3 लोगों की जान गई. हालांकि, 2023 में एक भी घटना में किसी की मौत नहीं हुई. जबकि, 2022 में 1 व्यक्ति की भालू के हमले में मौत हुई.
. सभी वन्यजीवों के मुकाबले देखें तो भालू ऐसा दूसरा वन्य जीव है, जिसके कारण सबसे ज्यादा इंसान घायल हो रहे हैं. इंसानों को घायल करने के मामले में गुलदार सबसे ऊपर है. जो पिछले 25 सालों में 2,105 लोगों को घायल कर चुका है.
"भालुओं का स्वभाव काफी ज्यादा बदलता हुआ दिखाई दिया है. जहां तक इंसानों को घायल करने की बात है तो भालू किसी को भी सामने देखा है तो उसे अपने रास्ते में देखकर फौरन उस पर हमला कर देता है. इस दौरान जो भी उसके सामने आता है, वो उसे घायल करते हुए आगे निकल जाता है."- आरके मिश्रा, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ, उत्तराखंड वन विभाग
कल आपदाग्रस्त हिमाचल आएंगे PM मोदी, चंबा-कुल्लू में हुए नुकसान का भी करेंगे हवाई सर्वेक्षण
8 Sep, 2025 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बरसात में हुई क्षति को देखने के लिए हिमाचल आ रहे हैं। अभी तक दी गई सूचना के अनुसार वह नौ सितंबर यानी मंगलवार को चंबा, कुल्लू और कांगड़ा जिला का दौरा कर सकते हैं। चंबा और कुल्लू जिलों का हवाई सर्वे हो सकता है, जबकि प्रधानमंत्री धर्मशाला में राज्य सरकार के साथ आपदा राहत पर बैठक कर सकते हैं। इस बारे में अभी प्रधानमंत्री कार्यालय और राज्य सरकार के बीच चर्चा चल रही है। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल भी धर्मशाला जाएंगे। जयराम ठाकुर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री आ रहे हैं और वह धर्मशाला में बैठक करेंगे। हालांकि बैठक के स्थल को लेकर राज्य सरकार के साथ बातचीत चल रही है। कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पर पीएम की लैंडिंग के बाद यह बैठक तय होगी। हिमाचल में इस बरसात में हुए नुकसान के बाद प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा होगा। इससे पहले केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा मंडी जिला के सराज का दौरा कर चुके हैं। राज्य सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय से फाइनल कन्फर्मेशन का इंतजार कर रही है। इस बरसात में हुए नुकसान के लिए केंद्र सरकार का दल दौरा करके चला गया है और अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है।
2023 में हिमाचल में हुई क्षति के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को 2006 करोड़ का पोस्ट डिजास्टर नीड एसेस्मेंट पैकेज दिया है, जिसमें 25 फीसदी हिस्सेदारी राज्य सरकार की है, लेकिन वर्तमान बरसात सीजन में हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार बिना शर्तों के आपदा राहत पैकेज चाहती है। मुख्यमंत्री सुक्खू इसकी डिमांड कई बार कर चुके हैं। प्रदेश में आम लोगों के मन में भी अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार केंद्र सरकार ने हिमाचल की तरफ को इस आपदा के दौरान देखना बंद क्यों कर दिया है। संभव है कि प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद आपदा राहत पैकेज पर स्थिति कुछ साफ हो। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के चुनाव क्षेत्र सराज में हुई क्षति के बाद भी भाजपा के नेता दिल्ली जाकर केंद्र सरकार में मिले थे। इस मुलाकात के बाद भी अभी तक राहत राशि का इंतजार है। वर्तमान मानसून सीजन में भी राज्य को अब तक 4000 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण, देशभर में दिखा सुर्ख लाल चांद, देखें ब्लड मून की तस्वीरें
8 Sep, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज रात साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है, जो रात 9:58 बजे से शुरू हुआ. इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा ने लाल रंग ले लिया, जिसे ब्लड मून कहा जाता है. भारत सहित कई देशों में यह अद्भुत दृश्य देखा गया, जिसने आकाश को एक जादुई लालिमा में रंग दिया.
यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे, दिल्लीवालों को बाढ़ से मिलेगी राहत
8 Sep, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली बाढ़ पीड़ितों के लिए एक गुड न्यूज है. दिल्ली-एनसीआर में लगातार बारिश रुकने के बाद, यमुना का पानी कम हो गया है और नदी अब खतरे के निशान से नीचे बह रही है. दिल्ली के पुरानी रेलवे ब्रिज पर यमुनाजी का जलस्तर सोमवार सुबह 7 बजे 205.22 मीटर तक घटकर 205.33 मीटर से नीचे आ गया, अधिकारियों ने जानकारी दी.
पिछले गुरुवार को 207.48 मीटर तक जलस्तर पहुँचने के बाद, यमुनाजी का जलस्तर लगातार घट रहा है. सोमवार सुबह 6 बजे यह 205.24 मीटर दर्ज किया गया.
दिल्ली के लिए चेतावनी स्तर 204.50 मीटर है, जबकि खतरे का स्तर 205.33 मीटर है, और 206 मीटर पर लोगों का पलायन शुरू होता है.
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में रविवार रात 9 बजे यमुना का जलस्तर 205.33 मीटर दर्ज किया गया. दिल्ली में पुराने रेलवे पुल पर यमुना के जलस्तर के लिए खतरे का निशान 205.33 मीटर है. दिल्ली में जब यमुना का पानी 206 मीटर पर पहुंचता है तब बाढ़ग्रस्त इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम शुरू हो जाता है. शहर के लिए चेतावनी का निशान 204.50 मीटर है.
बता दें कि मंगलवार को नदी खतरे के निशान को पार कर गई थी, जिसके कारण पुराने रेलवे पुल पर आवाजाही बंद कर दी गई थी. मौजूदा स्थिति के कारण लगभग 10,000 लोग विस्थापित हो गए हैं. पुराना रेलवे पुल नदी के प्रवाह और संभावित बाढ़ के खतरों पर नज़र रखने के लिए एक प्रमुख निगरानी केंद्र के रूप में कार्य करता है. पिछले कुछ दिनों में, यमुना नदी के किनारे के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर, मोरी गेट के पास और मयूर विहार इलाकों में नदी के पास निचले इलाकों से निकाले गए लोगों के अस्थायी आवास के लिए टेंट लगाए गए हैं.
दिल्ली को 2023 में बाढ़ का सबसे खराब स्थिति का सामना करना पड़ा, जब कई इलाके जलमग्न हो गए, जिसके कारण 25,000 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था. 13 जुलाई, 2023 को यमुना का जलस्तर 208.66 मीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था. इस स्थिति के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में बाढ़ आ गई, जिनमें उत्तर-पूर्वी, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी ज़िले और तिब्बती मार्केट व राजघाट जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं.
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