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इजरायल का बड़ा एक्शन, UN एजेंसी के हेडक्वार्टर पर चली बुलडोजर कार्रवाई
20 Jan, 2026 05:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरुशलम|इजराइल ने पूर्वी यरुशलम में संयुक्त राष्ट्र फिलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी (UNRWA) के मुख्यालय परिसर में इमारतों को ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई मंगलवार को हुई, जब इजरायली बलों ने परिसर में घुसकर सुरक्षा गार्डों को बाहर निकाला और बुलडोजरों से कई बड़ी इमारतों व अन्य संरचनाओं को गिरा दिया। UNRWA ने इसे 'अभूतपूर्व हमला' करार दिया और अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का गंभीर उल्लंघन बताया। बता दें कि परिसर पिछले साल से खाली पड़ा था, क्योंकि इजरायल ने 2024 में कानून पारित कर UNRWA के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया था और एजेंसी को सभी परिसर खाली करने का आदेश दिया था।UNRWA के प्रवक्ता जोनाथन फाउलर ने बताया कि इजरायली सेना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 7 बजे परिसर में घुसी, सुरक्षा गार्डों को बाहर निकाला और फिर बुलडोजरों से इमारतों को ध्वस्त करना शुरू किया। फाउलर ने इसे UNRWA और उसके परिसर पर 'अभूतपूर्व हमला' करार दिया तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकारों व उन्मुक्तियों का गंभीर उल्लंघन बताया।वहीं, संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कुछ पूर्व कर्मचारियों ने कहा कि मंगलवार को ध्वस्त की गई संरचनाओं का इस्तेमाल वेस्ट बैंक और गाजा के लिए सहायता सामग्री के भंडारण के लिए किया जाता था। UNRWA के पूर्वी यरुशलम मुख्यालय के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ हकम शाहवान ने कहा कि इजरायली कब्जे द्वारा किया गया यह विनाश दुनिया को यह संदेश देता है कि इजरायल एकमात्र ऐसा देश है जो अंतरराष्ट्रीय कानून को तोड़ सकता है और बिना किसी सजा के बच सकता है।बता दें कि इजरायल की संसद ने अक्टूबर 2024 में एक कानून पारित किया था, जिसमें एजेंसी के देश में काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया और अधिकारियों को एजेंसी से संपर्क करने से मना किया गया। इजरायल के कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे UNRWA परिसर के सामने खड़े हैं जबकि बुलडोजर इमारत को गिरा रहा है। बेन-ग्वीर ने इसे 'ऐतिहासिक दिन' और 'उत्सव का दिन' बताया।वहीं, इजराइल ने आरोप लगाया है कि UNRWA के कुछ कर्मचारी फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के सदस्य थे और उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हुए हमले में हिस्सा लिया था, जिसमें लगभग 1200 इजराइली मारे गए थे। गौरतलब है कि इसी हमले के बाद इजरायल ने हमास के खिलाफ युद्ध शुरू किया। गाजा के अधिकारियों के अनुसार, इस युद्ध में 71000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं।
घने कोहरे में बड़ा हादसा, एलिवेटेड रोड पर मचा हड़कंप
20 Jan, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बागपत |उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मंगलवार सुबह कुदरत के कहर और रफ्तार के जानलेवा तालमेल ने एक बड़े हादसे को अंजाम दिया। दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाईवे पर बने खेकड़ा-अक्षरधाम एलिवेटिड हाईवे पर घने कोहरे के चलते एक के बाद एक 20 से अधिक वाहन आपस में टकरा गए। इस भीषण सड़क दुर्घटना में 30 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक है। हसनपुर मसूरी गांव के पास यह हादसा उस वक्त हुआ जब दृश्यता (विजिबिलिटी) शून्य के करीब थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कोहरा इतना घना था कि चंद फीट की दूरी पर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। अचानक एक वाहन के ब्रेक मारने से पीछे आ रही गाड़ियां टकराती चली गईं। लग्जरी कारों से लेकर मालवाहक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और चारों तरफ घायल यात्रियों की चीख-पुकार मच गई।
पुलिस और रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की जानकारी मिलते ही बागपत और खेकड़ा कोतवाली पुलिस भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंची। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों में फंसे घायलों को बाहर निकाला। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 30 से अधिक घायलों को खेकड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और जिला अस्पताल में भर्ती कराया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है।
काट-काटकर जलाता रहा पत्नी का शव, नीले ड्रम के बाद नीला संदूक कांड से सनसनी
एएसपी ने किया निरीक्षण
हादसे की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) प्रवीण सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने क्रेन मंगवाकर क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से किनारे करवाया ताकि यातायात सुचारू किया जा सके। एएसपी ने अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की है कि कोहरे के दौरान वाहनों की रफ्तार धीमी रखें और फॉग लाइट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
हादसों का 'हॉटस्पॉट' बना हाईवे
हैरानी की बात यह है कि इसी एलिवेटिड हाईवे पर ठीक दो दिन पहले भी इसी तरह का बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें दर्जनों वाहन क्षतिग्रस्त हुए थे। बार-बार हो रहे इन हादसों ने हाईवे पर सुरक्षा मानकों और कोहरे के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोहरे का प्रकोप बढ़ने के साथ ही प्रशासन ने अब हाईवे पर पेट्रोलिंग बढ़ाने और रिफ्लेक्टिव टेप लगाने के निर्देश जारी किए हैं।
खामेनेई को निशाना बनाया तो अन्यायपूर्ण आक्रमण का जवाब कठोर होगा: राष्ट्रपति मसूद
20 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता नजर आ रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाया गया, तो इसे पूरे ईरानी राष्ट्र के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक्स पर कहा कि किसी भी अन्यायपूर्ण आक्रमण का जवाब कठोर होगा। इस बीच सरकारी चैनल को हैक कर उसपर प्रदर्शनों की वीडियो चलाए जाने का मामला भी सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति पेजेश्कियन की यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उन बयानों के बाद आई है जिसमें ट्रंप ने कहा था कि ईरान में नए नेतृत्व की जरूरत है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या या फांसी जारी रही तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर ईरान की आर्थिक बदहाली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और अमानवीय प्रतिबंधों की वजह से आम ईरानी नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं ईरानी शासन ने यह भी कुबूल किया कि प्रदर्शनों में कमोबेश 5000 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं।
ईरान के बद्र सैटेलाइट को हैक करने का मामला भी सामने आया है और सरकारी चैनल पर प्रदर्शनों के वीडियोज चलाए गए हैं। इस दौरान प्रिंस रेजा पहलवी का संदेश प्रसारित किया गया, जिसमें उन्होंने ईरानियों से इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध करने की अपील की। सरकार विरोधी मीडिया आउटलेट्स के मुताबिक यह प्रसारण कुछ समय तक कई चैनलों पर देखा गया। इस फुटेज को रेजा पहलवी के मीडिया विभाग ने भी साझा किया है।
हालांकि कड़े बयानों के बीच एक दिन पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान ने 800 प्रदर्शनकारियों की प्रस्तावित फांसी रोक दी है। इसके बावजूद अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधन बढ़ा दिए हैं, हालांकि वॉशिंगटन ने अभी किसी ठोस कार्रवाई का खुलासा नहीं किया है। इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने ट्रंप को अपराधी करार देते हुए स्वीकार किया कि अशांति के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई है। उन्होंने हिंसा के लिए अमेरिका और इजरायल समर्थित आतंकी और दंगाइयों को जिम्मेदार ठहराया है।
हाई-स्पीड ट्रेन पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन से टकराई, 39 की मौत, कई घायल
20 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैड्रिड। स्पेन में बड़ा ट्रेन हादसा हो गया है। रविवार को एक हाई-स्पीड ट्रेन पटरी से उतर कर बगल वाले ट्रैक पर चली गई और सामने से आ रही ट्रेन से टकरा गई। हादसे के बाद यात्रियों में चीख पुकार मच गई। इस हादसे में कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। करीब 300 यात्रियों को लेकर मैड्रिड जा रही ट्रेन का पिछला हिस्सा शाम कोर्डोबा के पास पटरी से उतर गया। रेल ऑपरेटर के मुताबिक ट्रेन की टक्कर मैड्रिड से दक्षिणी स्पेनिश शहर ह्यूएलवा जा रही एक दूसरी ट्रेन से हो गई, जिसमें करीब 200 यात्री सवार थे।
स्पेन के परिवहन मंत्री ने मरने वालों की संख्या 21 बताई है। उन्होंने कहा कि बचाव दल ने सभी बचे लोगों को ट्रेन से निकाल लिया। हालांकि मंत्री ने कहा कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि अभी दुर्घटना की वजह पता नहीं चल सका है। उन्होंने यह भी कहा कि जो ट्रेन पटरी से उतरी वह चार साल से भी कम पुरानी थी। वह ट्रेन निजी कंपनी इरयो की थी, जबकि दूसरी ट्रेन, जो हादसे का शिकार हुई, स्पेन की सार्वजनिक ट्रेन कंपनी रेनफे की थी।
इरीयो ने एक बयान जारी कर कहा कि जो कुछ हुआ उस पर गहरा दुख है और वह स्थिति को मैनेज करने के लिए काम कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक पहली ट्रेन का पिछला हिस्सा पटरी से उतर गया और दूसरी ट्रेन से टकरा गया, जिससे उसकी पहली दो बोगियां पटरी से उतर गईं और चार मीटर ढलान पर गिर गईं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान रेनफे ट्रेन के अगले हिस्से को हुआ है। स्पेन के एक पत्रकार जो एक ट्रेन में सवार थे। उन्होंने फोन पर बताया कि एक क्षण ऐसा आया जब ऐसा महसूस हुआ जैसे भूकंप आ गया हो। उन्होंने कहा कि यात्रियों ने खिड़कियों को तोड़ने के लिए आपातकालीन हथौड़ों का इस्तेमाल किया और कुछ गंभीर चोटों के बिना बाहर निकल आए।
रिपोर्ट में एक यात्री ने बताया कि एक झटके के साथ ट्रेन पूरी तरह से रुक गई और सब कुछ अंधेरा हो गया। उसने बताया कि वह ट्रेन के आखिरी बोगी में सवार था, वहां भी लोग एक दूसरे के ऊपर गिर गए। उसने कहा कि मेरे पीछे मौजूद अटेंडेंट के सिर पर चोट लगी। वहां बच्चे रो रहे थे...सौभाग्य से वह आखिरी बोगी में थे मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मुझे दूसरा जीवन मिल गया है।
बता दें स्पेन के पास यूरोप में 3,100 किलोमीटर से अधिक ट्रैक के साथ सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है। यहां ट्रेन 250 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से चलती हैं। यह नेटवर्क परिवहन का एक लोकप्रिय, प्रतिस्पर्धी कीमत वाला और सुरक्षित साधन है। इस सदी में स्पेन की सबसे भीषण ट्रेन दुर्घटना 2013 में हुई थी, जब देश के उत्तर-पश्चिम में एक ट्रेन के पटरी से उतर जाने से 80 लोगों की मौत हो गई थी।
स्पेन में हुए भीषण ट्रेन हादसे पर ईटली की पीएम मेलोनी ने जताया दु:ख
20 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैड्रिड। दक्षिणी स्पेन में हुए भीषण रेल हादसे पर इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में कम से कम 39 लोगों की जान चली गई है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं। पीएम मेलोनी ने कहा कि अंडालूसिया में हुई इस रेल दुर्घटना की खबर से मैं दुखी हूं। इस त्रासदी में इटली स्पेन के साथ खड़ा है। हमारी संवेदनाएं मृतकों, घायलों और उनके परिवारों के साथ हैं।”
यह हादसा स्पेन के कॉर्डोबा प्रांत के अदामूज़ इलाके के पास हुआ, जहां मलागा से मैड्रिड जा रही एक हाई-स्पीड इरियो ट्रेन पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन से टकरा गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी तेज थी कि झटका भूकंप जैसा महसूस हुआ। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आ रह हैं। यात्रियों ने बताया कि उन्हें खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलना पड़ा, जिससे कई लोग घायल हुए। कुछ डिब्बों में धुआं भर गया था। स्पेन की रेल अवसंरचना एजेंसी एडीआईएफ ने मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच सभी रेल सेवाएं अस्थायी रूप से बंदर कर दी हैं। रेड क्रॉस और आपातकालीन सेवाएं राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
नवाज शरीफ की बहू ने पहने इंडियन फैशन डिजाइनर के कपड़े, पाक में हो रही आलोचना
20 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी नेता मरियम नवाज़ के बेटे और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ के पोते जुनैद सफदर की शादी की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। जहां एक तरफ दुल्हन शांजेह अली रोहेल के ब्राइडल आउटफिट्स की खूब तारीफ हो रही है तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी फैशन कंटेंट क्रिएटर और स्टाइलिस्ट मोईद शाह ने दुल्हन की आलोचना की है। उन्हें इंडियन फैशन डिजाइनर के कपड़े पहनने के लिए खरी खोटी सुनाई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोईद ने अपने कैप्शन में लिखा- तो बारात के लुक्स सामने आ गए और मैं कन्फ्यूज हो गया... उनके लिए मुख्य दिक्कत यह थी कि शांज़ेह ने अपनी बारात के लिए तरुण तहिलियानी की साड़ी चुनी थी। स्टाइलिस्ट ने निराशा जताई कि दुल्हन ने एक ऐसी लाल साड़ी चुनी जो पहले ही एक इंडियन सेलिब्रिटी पहन चुकी थी। वीडियो में उन्होंने समझाया- दुल्हन, शांज़ेह अली रोहेल का यह लुक बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा,। यह फीका पड़ गया। इसमें वाह फैक्टर की कमी थी। हमें कुछ अलग, कुछ यादगार उम्मीद थी। और हमें क्या मिला? दोहराव और बोरियत? शांज़ेह ने तरुण तहिलियानी की साड़ी पहनी थी, जिसे अनन्या पांडे पहले ही किसी इवेंट में पहन चुकी हैं।
मोईद ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी शादी के लिए नवाज शरीफ और शेख रोहेल असगर के परिवारों के बीच एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मिलन फैशन दोहराव वाला होने के बजाय यादगार होना चाहिए था। शांज़ेह के वेडिंग लुक के रीसायकल एस्थेटिक के अलावा, मोईद ने पाकिस्तानी कारीगरी को नज़रअंदाज़ करने के फैसले की भी आलोचना की है। यह देखते हुए कि शांज़ेह ने अपनी मेहंदी में पहले ही एक इंडियन डिज़ाइनर के कपड़े पहने थे, उन्होंने शादी के दिन लोकल रिप्रेजेंटेशन की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बारात के लिए मुझे सच में लगा कि किसी पाकिस्तानी डिजाइनर के कपड़े पहने जा सकते थे, यह इस सीजन की सबसे बड़ी पॉलिटिकल शादी है, लाखों लोग इसे देश और विदेश में देख रहे हैं। आप कम से कम लोकल फैशन को तो प्रमोट कर सकते थे।
मोईद ने शांज़ेह के शादी के फंक्शन में दिखने के एक जैसेपन की भी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी मेहंदी और बारात के लुक में कोई फर्क नहीं था। वही बाल, वही ग्लैमर, वही एनर्जी... मूड बदलने के लिए कुछ भी नहीं था। बारात में दुल्हनों को सबसे ज़्यादा करने की छूट होती है। मोईद ने कहा कि दूल्हे की मां ने दुल्हन को पूरी तरह से फीका कर दिया। पाकिस्तानी डिज़ाइनर इक़बाल हुसैन के गोल्डन सूट में सजी मरियम नवाज़ की पाकिस्तानी शादी की पारंपरिक भावना को अपनाने के लिए तारीफ़ हुई। नवाज शरीफ के पोते जुनैद सफदर और शानज़े अली रोहेल की शादी सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
मुझे नोबेल नहीं दिया, अब शांति मेरी जिम्मेदारी नहीं......ग्रीनलैंड चाहिए, ट्रंप की चिट्ठी हो गई लीक
20 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर अपनी नाराजगी नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को लिखे पत्र में जाहिर की है। पत्र के लीक होने से पता चला कि ट्रंप ने लिखा कि नोबेल पुरस्कार न मिलने के बाद अब उन्हें दुनिया में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी महसूस नहीं होती। उन्होंने साफ किया कि शांति महत्वपूर्ण है, लेकिन अब उनकी प्राथमिकता अमेरिका का हित होगा। ट्रंप ने स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की उनकी कोशिश इसी झुंझलाहट से प्रेरित है।
नॉर्वे के पीएम को लिखे पत्र में ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क, जिसका ग्रीनलैंड स्वायत्त क्षेत्र है, रूस या चीन से इस क्षेत्र को सुरक्षित नहीं रख सकता, इसलिए उनके पास इस पर मालिकाना हक क्यों है। उन्होंने कहा, “सैकड़ों साल पहले नावें वहां पहुंचीं, लेकिन अमेरिकी नावें भी पहुंची थीं।” ट्रंप ने अपने पत्र में संकेत दिया कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के बाद उनका वैश्विक दृष्टिकोण बदल गया है और अब वे अमेरिका के रणनीतिक हितों पर अधिक ध्यान देने वाले है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री स्टोरे ने पत्र की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब्ब के साथ मिलकर ट्रंप को एक पत्र भेजा था जिसमें नॉर्वे और अन्य देशों पर टैरिफ लगाने का विरोध किया गया था। ट्रंप के पत्र को उन्होंने उसी संदर्भ में प्राप्त किया। इसके अलावा, रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने इस तरह के पत्र कई यूरोपीय राजदूतों को भी भेजे हैं। ट्रंप ने कई बार कहा कि वे ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व के अलावा किसी और विकल्प को स्वीकार नहीं करने वाले है। उन्होंने डेनमार्क पर आर्कटिक क्षेत्र में कथित “रूसी खतरे” से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। ट्रंप ने लिखा कि नाटो ने पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क को ग्रीनलैंड में सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा, लेकिन डेनमार्क कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिका को ग्रीनलैंड खरीदने की अनुमति नहीं मिलेगी, तब तक वे यूरोपीय सहयोगियों पर बढ़ते टैरिफ लगाएंगे। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप के रुख को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और इस अमेरिका का हिस्सा नहीं बनना है। यूरोपीय अधिकारी इस बात पर भी जोर देते हैं कि ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो की सामूहिक रक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। ट्रंप का तर्क है कि चीन और रूस की बढ़ती उपस्थिति के कारण ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन डेनमार्क और यूरोप इसे बेचने या हस्तांतरण की अनुमति देने को तैयार नहीं हैं। पत्र से यह भी पता चलता है कि ट्रंप की वैश्विक नीतियों में व्यक्तिगत प्रेरणाएँ और पुरस्कारों की उम्मीदें भी प्रभाव डालती हैं। नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने की प्रतिक्रिया में उन्होंने सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय विवाद और रणनीतिक संपत्ति पर अमेरिकी दबाव की बात की। यह घटनाक्रम अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव को दर्शाता है और दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन वैश्विक मामलों में अपने दृष्टिकोण को कैसे व्यक्तिगत महत्व और राष्ट्रीय हितों के आधार पर आकार देता है।
दक्षिणी स्पेन में बड़ा ट्रेन हादसा, दो हाई स्पीड ट्रेनों की टक्कर में 20 की मौत-73 घायल
19 Jan, 2026 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैड्रिड (स्पेन). दक्षिणी स्पेन (southern Spain) में दो तेज रफ्तार ट्रेनों (high-speed trains) की आपस में भिड़ंत (collision) हो गई। जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 73 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह दुर्घटना कॉर्डोबा प्रांत के आदमूज के पास हुई, जिसके चलते मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच रेल सेवाएं निलंबित कर दी गईं। जानकारी के मुताबिक मलागा से मैड्रिड जा रही एक ट्रेन पटरी से उतर गई और सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों ट्रेनों में लगभग 500 यात्री सवार थे।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
स्पेनिश रेल ऑपरेटर एडीआईएफ ने बताया कि रविवार को दक्षिणी स्पेन में एक तेज रफ्तार ट्रेन पटरी से उतर गई और विपरीत दिशा से आ रही ट्रेन से टकरा गई। आपातकालीन सेवाओं ने बताया कि इस टक्कर में 20 लोगों की मौत हो गई और 73 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है। गार्डिया सिविल के दो अधिकारियों ने फोन और टेक्स्ट मैसेज के जरिए एसोसिएटेड प्रेस को मृतकों की संख्या की पुष्टि की। उन्होंने पुलिस नियमों के अनुसार नाम न छापने की शर्त पर बात की।
पटरी से उतरकर दूसरी ट्रेन से जा टकराई रेल
एडीआईएफ के अनुसार मलागा और मैड्रिड के बीच चलने वाली शाम की ट्रेन पटरी से उतर गई और मैड्रिड से दक्षिणी स्पेन के एक अन्य शहर हुएलवा जा रही ट्रेन से टकरा गई। जिस प्रांत अंडालूसिया में यह दुर्घटना हुई, वहां की आपातकालीन सेवाओं ने बताया कि 20 लोगों की मौत हो गई है और 75 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सिविल गार्ड के मुताबिक कई लोग अभी भी डिब्बों के अंदर फंसे हुए हैं। बचाव अभियान जारी है और आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर मौजूद हैं। इधर, हादसे के बाद मैड्रिड के अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया है। 73 घायल यात्रियों को छह अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया है।
हाई-स्पीड सेवाएं निलंबित
दुर्घटना के बाद मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच चलने वाली हाई-स्पीड रेल सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा एहतियात के तौर पर रास्ते में चल रही सभी ट्रेनों को उनके शुरुआती बिंदु पर वापस भेज दिया गया है। रेड क्रॉस ने कॉर्डोबा से एम्बुलेंस और जैन से तीन और एम्बुलेंस भेजीं। इसने दोनों ट्रेनों के यात्रियों के लिए आवश्यक आपूर्ति की व्यवस्था भी की।
Trump New Tariffs: ग्रीनलैंड विवाद पर भड़के ट्रंप, 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ का ऐलान
18 Jan, 2026 08:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Trump New Tariffs : के ऐलान के बाद ग्रीनलैंड को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नाटो के कई यूरोपीय देशों के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। ट्रंप ने फरवरी से यूरोप के आठ देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद ब्रिटेन और फ्रांस ने कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि यूरोपीय यूनियन ने हालात की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन बैठक बुलाई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि फरवरी 2026 से नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, फिनलैंड और नीदरलैंड से आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप के मुताबिक, ये सभी देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध कर रहे हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह रणनीतिक है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो 1 जून 2026 से टैरिफ की दर बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी जाएगी। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वे डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
ट्रंप को नोबेल देने की सिफारिश पर सियासी बहस तेज
17 Jan, 2026 04:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेनेजुएला | वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित कर दिया है। पिछले एक साल से नोबेल की रट लगाए बैठे ट्रंप ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार भी कर लिया। मीडिया ने जब इस पर सवाल पूछा तो वह इस कदम का बचाव करते नजर आए। अब दुनिया भर में इस कदम को लेकर प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। वैश्विक राजनीति में बेहतर पकड़ रखने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस घटनाक्रम को 'वेनेजुएला की हताशा और अमेरिकी अहंकार के टकराव का सुनहरा अवसर' करार दिया।एनडीटीवी में लिखे एक संपादकीय लेख में कांग्रेस नेता ने मचाडो के इस कदम को एक बेशर्म राजनीतिक नाटक बताया। उन्होंने लिखा, "ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से नोबेल पदक सौंपकर मचाडो ने एक ऐसा राजनीतिक नाटक किया है, जो बेशर्मी की हद तक पहुंच जाता है।"उन्होंने लिखा, "यह घटनाक्रम नोबेल पुरस्कार और उसकी प्रतिष्ठा के माध्यम से उस चीज (वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद के लिए ट्रंप का समर्थन, जिसके लिए वाइट हाउस तेजी से आगे बढ़ने के लिए तैयार दिख रहा है।) खरीदने का प्रयास था, जिसकी फिलहाल कमी है।"दरअसल, थरूर का तात्पर्य अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में वर्तमान उपराष्ट्रपति रोड्रिगेज को अपना समर्थन देने और मचाडो को दरकिनार करने से है। मादुरो को उठाने के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने माचाडो को लेकर कहा था कि उनका वेनेजुएला में कोई बड़ा समर्थक दल नहीं है, न ही उनकी उस देश में कोई इज्जत करता है। इसलिए वह मचाडो को समर्थन नहीं देंगे।थरूर ने कहा कि मचाडो का यह कदम उनकी राजनीतिक हताशा का सबूत देता है, जबकि ट्रंप ने अनैतिक क्रूरता का ऐसा स्तर दिखाया है, जिसे लेकर उनके आलोचक अक्सर उन्हें कम आंकते होंगे।" उन्होंने मचाडो के इस कृत्य को "राजा की चापलूसी" और ट्रंप द्वारा इसे स्वीकार करने को "चोरी की कला" बताया।उन्होंने लिखा, "मचाडो ने भले ही सोना सौंप दिया हो, लेकिन ऐसा करके उन्होंने शायद अपना आखिरी तुरुप का पत्ता भी खो दिया है। हमेशा की तरह सौदेबाज़ी करने वाले ट्रंप ने अपने विशाल संग्रह में एक और वस्तु जोड़ ली है।"
अमेरिका ने जिस यूएसएस अब्राहम लिंकन युद्धपोत को किया ईरान रवाना क्या है उसकी खासीयत
17 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने अपने सबसे ताकतवर निमित्ज़-क्लास सुपरकैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीवीएन-72) को मिडिल ईस्ट रवाना कर दिया है। यह युद्धपोत दक्षिण चीन सागर में तैनात था, लेकिन पेंटागन ने हालात को देखते हुए इसके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को ईरान के करीब तैनात करने का फैसला किया है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह ग्रुप अकेले ही किसी मध्यम आकार की सेना के बराबर मारक क्षमता रखता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूएसएस अब्राहम लिंकन (सीएसजी-3) का फ्लैगशिप है। यह सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि चलता-फिरता एयरबेस और कमांड सेंटर है। इस ग्रुप में कैरियर के अलावा 3 से 4 अत्याधुनिक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, 1 से 2 न्यूक्लियर अटैक सबमरीन, और सप्लाई व फ्यूल सपोर्ट जहाज शामिल होते हैं। जरूरत पड़ने पर यह समूह महीनों तक समुद्र में रहकर युद्ध कर सकता है। करीब एक लाख टन वजनी यूएसएस अब्राहम लिंकन न्यूक्लियर-पावर्ड है यानी इसे ईंधन भरने की जरूरत कम पड़ती है। अकेले इस कैरियर पर करीब 5,000 से 6,000 सैनिक और एयरक्रू तैनात रहते हैं, जबकि पूरे स्ट्राइक ग्रुप में यह संख्या 7,000 से 8,000 तक पहुंच जाती है।
इस सुपरकैरियर पर तैनात (सीवीडब्ल्यू-9) इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इसमें करीब 65 से 70 लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल हैं। इनमें एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट, अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर एफ-35सी लाइटनिंग-2, ईए-18जी ग्राउलर, ई-2डी हॉकआई और एमएच-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। ये विमान दिन-रात उड़ान भरकर हमला, निगरानी और रक्षा तीनों काम कर सकते हैं।
इस ग्रुप के पास सैकड़ों टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें हैं, जिन्हें डिस्ट्रॉयर और सबमरीन से दागा जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक पूरा ग्रुप एक साथ 500 से 1000 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें लॉन्च करने में सक्षम है। इसके अलावा एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें, स्मार्ट बम और एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम इसे अभेद्य बनाते हैं जिन्हें भेदा नहीं जा सकता। अगर ईरान के साथ सीधी जंग होती है, तो यह ग्रुप ईरान के एयरबेस, मिसाइल ठिकानों, नौसैनिक अड्डों और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और प्रॉक्सी मिलिशिया हैं, जो संघर्ष को लंबा और खतरनाक बना सकती हैं। फिलहाल अमेरिका का संदेश साफ है- यूएसएस अब्राहम लिंकन की तैनाती सिर्फ युद्ध के लिए नहीं, बल्कि ईरान को रोकने और क्षेत्र में अमेरिकी व सहयोगी हितों की रक्षा के लिए है।
ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से क्यों डरा हुआ है पाकिस्तान, क्या कुछ टूट जाने का खतरा है सता रहा?
17 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। ईरान पर अमेरिका के संभावित सैन्य हमले की आशंका का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान की चिंता में नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के अटैक प्लान की चर्चाओं के बीच पाकिस्तान को डर है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन या बड़े पैमाने पर अस्थिरता हुई तो उसके अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की आग और तेज हो सकती है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान अपने लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरे के तौर पर देख रहा है।
यहां बताते चलें कि पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो सीधे पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील प्रांत बलूचिस्तान से लगती है। यह वही इलाका है जहां दशकों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत भी इसी सीमा पर स्थित है, जहां रहने वाले बलूच समुदाय के पाकिस्तान के बलूचों से जातीय, भाषाई और जनजातीय संबंध हैं। ऐसे में ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल का असर सीधे पाकिस्तान पर पड़ सकता है। इस मामले में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि ईरान में चाहे आंतरिक बदलाव हों या बाहरी हस्तक्षेप, उसका सीधा प्रभाव पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ेगा। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ईरान में हालात बिगड़े तो बलूच विद्रोही गुटों को नए ठिकाने और समर्थन मिल सकता है, जिससे सीमा पार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और हिंसक घटनाएं बढ़ सकती हैं।
बलूचिस्तान में पहले से ही कई विद्रोही संगठन सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के साथ-साथ चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बनाते रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) इस प्रांत से होकर गुजरता है और इसमें किसी भी तरह की अस्थिरता पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। अलगाववादी गुट खुले तौर पर बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग कर चुके हैं, जिससे ‘टूटने के डर’ की आशंका और गहरी हो जाती है।
पाकिस्तान को एक और बड़े शरणार्थी संकट का भी डर सता रहा है। 2021 में अफगानिस्तान से लाखों शरणार्थियों के आने से पाकिस्तान पहले ही भारी आर्थिक दबाव में है। अगर ईरान में युद्ध या सत्ता परिवर्तन होता है तो बड़ी संख्या में ईरानी शरणार्थियों के पाकिस्तान आने की आशंका है, जिसे आईएमएफ के कर्ज पर चल रही अर्थव्यवस्था झेल नहीं पाएगी। पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम ने चेतावनी दी है कि ईरान में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। पाकिस्तानी मीडिया में भी यह माना जा रहा है कि ईरान में सत्ता का पतन पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक कूटनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व से जुड़ा संकट बन सकता है।
बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में घुसे हथियारबंद लोग, सरकारी व निजी बैंकों में की तोड़फोड़
17 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खारान जिले में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब बड़ी संख्या में हथियारबंद लोग शहर में दाखिल हुए और अलग-अलग इलाकों में हमला करना शुरू कर दिया। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने खारान शहर के मुख्य पुलिस थाने को निशाना बनाया और सरकारी व निजी बैंकों में तोड़फोड़ की। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावर कारों और बाइकों पर सवार थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमले में कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ, लेकिन पुलिस वाहनों और हथियारों को नुकसान पहुंचा। हमलावर कुछ हथियार अपने साथ ले गए।
पुलिस के मुताबिक हमलावरों ने पुलिस थाने में घुसकर वहां बंद अंडरट्रायल कैदियों को जबरन छुड़ा लिया। इसके बाद कुछ सशस्त्र लोग शहर के बाजार इलाके में पहुंचे, जहां दो से तीन बैंकों को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमलावर बैंक से नकदी ले जाने में सफल हुए या नहीं। खारान के सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि जिला मुख्यालय अस्पताल में कुल पांच घायल लोगों को लाया गया। इनमें एक युवक को गोली लगी है, जबकि चार बच्चे विस्फोट के छर्रों से घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में हथियारबंद लोगों के शहर में घुस आने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। दुकानों के शटर गिर गए और लोग घरों में दुबक गए। खारान, जो कि क्वेटा से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, लंबे समय से उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में गिना जाता है। हालांकि जिले में पहले भी छिटपुट हिंसा की घटनाएं होती रही हैं, लेकिन पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सशस्त्र लोगों के सीधे शहर में घुसकर हमला किया है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। प्रशासन की ओर से फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेने की पुष्टि नहीं की है।
ईरान में 800 फांसी रोकने, क्या अमेरिकी राष्ट्रपति को इसलिए मिला नोबेल?
17 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी ने ईरान को लेकर बड़ा ऐलान किया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि उसने ईरान में 800 फांसी की सजाएं रोकी हैं और अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि अमेरिका के सामने सभी विकल्प खुले हैं, लेकिन इससे पहले खबर आई कि अमेरिका ने ईरान से पर्दे के पीछे समझौता कर लिया है यानी अब ईरान पर किसी भी तरह का हमला नहीं करेगा। इस बीच अमेरिका में एक और अजीबोगरीब घटनाक्रम देखने को मिला। व्हाइट हाउस में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार सौंपा गया है। सवाल उठता है कि क्या यह पुरस्कार उन्होंने फांसी रुकवाने के लिए मिला और क्या यह नोबेल कमेटी ने सौंपा है? ऐसा नहीं है।
बता दें गुरुवार को वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिलने पहुंची थीं। तभी उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को सौंपा। हालांकि इससे वह पुरस्कार ट्रंप का नहीं हो जाता, लेकिन फिर भी वह गदगद हैं। ट्रंप ने मारिया कोरीना मचाडो का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार सौंपने को ‘आपसी सम्मान का अद्भुत संकेत’ बताया। व्हाइट हाउस में हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात को वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ने देश के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा- आज वेनेजुएला की मारिया कोरीना मचाडो से मिलना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात थी। वह एक अद्भुत महिला हैं, जिन्होंने बहुत कुछ झेला है। उन्होंने मेरे किए गए कामों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार भेंट किया। यह आपसी सम्मान का शानदार इशारा है। धन्यवाद, मारिया!’
मचाडो गुरुवार को व्हाइट हाउस पहुंचीं, जहां बंद कमरे में उनकी ट्रंप के साथ बातचीत हुई। सफेद सूट में पहुंचीं मचाडो को एक एसयूवी से व्हाइट हाउस परिसर में ले जाया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नोबेल पुरस्कार सौंपने का यह कदम वेनेजुएला की भावी राजनीति पर अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मचाडो नोबेल शांति पुरस्कार की मेडल व्हाइट हाउस में ही छोड़ गईं। मामले से परिचित एक सूत्र ने बताया कि यह मेडल फिलहाल राष्ट्रपति के पास है और व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि ट्रंप इसे अपने पास रखे हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं और दावा करते हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में कई युद्ध सुलझाने के कारण वे इसके हकदार हैं। नोबेल समिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यह पुरस्कार न तो साझा किया जा सकता है और न ही किसी को स्थानांतरित किया जा सकता है। समिति ने कहा था, ‘मेडल का मालिक बदला जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का दर्जा नहीं।
तनाव के बीच ईरान ने इजराइल की तरफ तानी मिलाइलें, भारतीय दूतावास ने की एडवाइजरी जारी
17 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रही तनातनी में एक रहस्यमयी मोड़ आ गया है। एक तरफ खाड़ी देशों ने अमेरिका को ईरान पर अटैक के लिए एयरस्पेस देने से इनकार कर दिया है वहीं दूसरी तरफ ट्रंप नरम पड़ गए हैं। इसके बाद ईरान ने इजराइल के 8 ठिकानों पर मिसाइलें तान दी हैं। इन सबके बीच भारतीय दूतावास द्वारा हाल ही में नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। भारतीय नागरिकों को ‘अत्यधिक सतर्क’ रहने की सलाह देते हुए इजराइल की यात्रा करने से भी मना किया है।
भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों को मैसेज देते हुए कहा है कि ‘क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, इजराइल में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और इजराइली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। इसमें लिखा है कि ‘भारतीय नागरिकों को इजराइल की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने को कहा है। किसी भी आपात स्थिति में, भारतीय नागरिक भारतीय दूतावास की 24×7 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं जिसके लिए टेलीफोन: +972-54-7520711; +972-54-3278392 ईमेल जारी किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अपनी खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च पैड पर तैनात कर दिया है। ये आठ मिसाइलें सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि मौत का पैगाम हैं। ऐसे में डर बना हुआ है कि इजराइल के आसमान में किसी भी वक्त आग बरस सकती है। ईरान की ये मिसाइलें पल भर में शहरों को खंडहर बनाने की ताकत रखती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पिछले कुछ घंटों में इजराइल में भी हलचल तेज हो गई है।
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