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न्यूयॉर्क में इतिहास रचे Zohran Mamdani, पहली भारतवंशी-मुस्लिम मेयर की राह पर
6 Nov, 2025 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय मूल के और युगांडा में जन्मे जोहरान ममदानी ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने न्यूयॉर्क सिटी के पहले मुस्लिम मेयर बनने का गौरव हासिल किया है. 33 वर्षीय जोहरान अपनी सादगी, धर्मनिरपेक्ष सोच और समाजसेवा के कारण चर्चा में हैं.
लेकिन जैसे ही उनकी जीत की खबर आई, लोगों के मन में एक दिलचस्प सवाल भी उठ खड़ा हुआ है-आखिर जोहरान ममदानी का धर्म क्या है, और उनका परिवार किस धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आता है. आइए जानते हैं उनके पूरे परिवार की कहानी.
जोहरान ममदानी का धर्म और पहचान
जोहरान ममदानी ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि मैं एक शिया मुसलमान हूं, लेकिन मेरा परिवार अंतरधार्मिक है.दरअसल, जोहरान की मां हिंदू पंजाबी परिवार से हैं, जबकि पिता गुजराती मुस्लिम. यही वजह है कि जोहरान बचपन से ही एक बहुधार्मिक माहौल में पले-बढ़े. उन्होंने बताया कि वे न सिर्फ ईद मनाते थे, बल्कि दिवाली, होली और राखी जैसे हिंदू त्योहारों का भी हिस्सा रहे हैं. वे मानते हैं कि इन परंपराओं ने उनकी सोच को और अधिक समावेशी बनाया है. उनकी पत्नी रमा दुवाजी सीरियाई मूल की मुस्लिम हैं. वे एक सीरियन मुस्लिम परिवार से हैं, जिनकी जड़ें दमिश्क से जुड़ी हैं. उनके माता-पिता दोनों सीरिया के मुस्लिम हैं.
मां मीरा नायर: सिनेमा की दुनिया की चमकदार हस्ती
जोहरान ममदानी की मां मीरा नायर, भारतीय सिनेमा की मशहूर फिल्म निर्देशक हैं. राउरकेला, ओडिशा में एक हिंदू पंजाबी परिवार में जन्मीं मीरा का पालन-पोषण भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच हुआ. उन्होंने अपनी फिल्मों सलाम बॉम्बे! (1988), मॉन्सून वेडिंग (2001) और द नेमसेक (2006) के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई.
पिता महमूद ममदानी: विद्वान और विचारक
जोहरान के पिता महमूद ममदानी एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर और लेखक हैं. 1946 में बॉम्बे में जन्मे और युगांडा में पले-बढ़े महमूद एक गुजराती मुस्लिम परिवार से हैं. वर्तमान में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में राजनीति और मानवविज्ञान के प्रोफेसर हैं. उनकी किताब-Citizen and Subject अफ्रीका की उपनिवेशवादी राजनीति पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन मानी जाती है.
पत्नी रमा दुबाजी: सीरियाई मूल की कलाकार
जोहरान की पत्नी रमा दुवाजी एक सीरियाई मूल की मुस्लिम कलाकार हैं, जिनका परिवार दमिश्क, सीरिया से ताल्लुक रखता है. उनके माता-पिता दोनों सीरियाई मुसलमान हैं, जो बाद में अमेरिका में आकर बस गए. रामा दुवाजी ने स्पॉटिफाई और एप्पल जैसी बड़ी कंपनियों के लिए काम किया है. टेक्सास में जन्मीं रमा ने वर्जिनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी से फाइन आर्ट्स की पढ़ाई की और बाद में न्यूयॉर्क के स्कूल ऑफ विजुअल आर्ट्स से मास्टर डिग्री ली. जोहरान और रमा की मुलाकात 2021 में हुई और फरवरी 2025 में दोनों ने शादी कर ली.
1500 की आबादी वाला शहर पोक्रोव्स्क बना जंग का अड्डा, पुतिन क्यों कर रहे कब्जे की तैयारी?
6 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नजर यूक्रेन के एक शहर पर है. ये कोई डोनेस्क की तरह बड़ा शहर नहीं है बल्कि लगभग खाली हो चुका है. इस शहर का नाम है- पोक्रोव्स्क (Pokrovsk). जहां कभी करीब 60 हजार लोग रहते थे. लगातार बमबारी और तीन साल से जारी जंग के चलते यहां की आबादी 1500 से भी नीचे आ गई है.
यानी पोक्रोव्स्क में अब लगभग कोई आम नागरिक नहीं बचा. इमारतें खंडहर बन चुकी हैं, सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं और विश्वविद्यालय तक बमबारी में तबाह हो चुका है. लेकिन रूस ने इस छोटे से शहर पर कब्जे के लिए करीब 1 लाख सैनिक तैनात कर दिए हैं. सवाल है आखिर इस वीरान शहर में ऐसा क्या है कि पुतिन इसे हर हाल में लेना चाहते हैं? आइए जानते हैं विस्तार से.
डोनबास का दरवाजा है पोक्रोव्स्क
रिपोर्ट के मुताबिक पोक्रोव्स्क पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में एक अहम सड़क और रेल जंक्शन है. यही इलाका रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. रूस की नजर पूरे डोनबास क्षेत्र (डोनेट्स्क और लुहांस्क) पर है, और पोक्रोव्स्क को वो गेटवे टू डोनेट्स्क मानता है. अगर रूस इस शहर पर कब्जा कर लेता है, तो वो आगे क्रीमाटोर्स्क और स्लोवियान्स्क जैसे यूक्रेन के बड़े शहरों की ओर बढ़ सकता है. अगर रूस इसे जीतता है, तो यह फरवरी 2024 में अवदीवका के बाद उसका सबसे बड़ा सैन्य फायदा होगा.
कोयले की खान भी है एक वजह
पोक्रोव्स्क के पास यूक्रेन की एकमात्र कोकिंग कोल खदान है, जो देश की स्टील इंडस्ट्री की रीढ़ रही है. रूस इस खान पर नियंत्रण पाकर यूक्रेन की औद्योगिक क्षमता को कमजोर करना चाहता है. जंग के चलते मेटइनवेस्ट कंपनी ने जनवरी में खनन रोक दिया था, लेकिन रूस अब उस इलाके को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहा है.
पुतिन ने कब्जे के लिए बदली रणनीति
रूस इस बार पहले की तरह सीधी लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि धीरे-धीरे घेरने की रणनीति अपनाई है. छोटे-छोटे यूनिट्स और ड्रोन से यूक्रेनी सप्लाई लाइन काटी जा रही हैं. रूस का दावा है कि इस तरह वो अपने नुकसान को कम रख रहा है. यूक्रेन का कहना है कि उसने अब भी शहर के कई हिस्सों पर नियंत्रण बना रखा है और रूसी फौजों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. रूसी सेना का दावा है कि उसने यूक्रेनी सैनिकों को शहर के कुछ हिस्सों में घेर लिया है, जबकि कीव कह रहा है कि अभी तक कोई इलाका पूरी तरह रूस के नियंत्रण में नहीं गया.
आसमान में क्रैश हुआ जेट फ्यूल से भरा कार्गो प्लेन, पूरे इलाके में फैली आग, कई घर तबाह
5 Nov, 2025 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन. अमेरिका (America) के केंटीक स्थित लुइसविले (Louisville) मोहम्मद अली इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Muhammad Ali International Airport) से मंगलवार शाम पांच बजे उड़ान भरने के तुरंत बाद एक यूपीएस कार्गो (UPS Cargo) विमान क्रैश (crashes) हो गया, जिससे आसपास के इलाके में भीषण आग लग गई. बताया जा रहा है कि इस हादसे में गई घर जलकर तबाह हो गए हैं. वहीं, घटना के बाद अधिकारियों को हवाई अड्डे को बंद कर दिया और आसपास के रहने वाले लोगों को शेल्टर-इन-प्लेस का आदेश दिया. हादसे में तीन लोगों के मारे जाने और 11 लोगों को घायल हो गए हैं. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है.
फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बताया कि यूपीएस फ्लाइट 2976 जो एक मैकडॉनेल डगलस एमडी-11एफ विमान था और होनोलुलु के लिए रवाना हुआ था, स्थानीय समयानुसार शाम 5:15 बजे (नवंबर 4) उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया. ये एयरपोर्ट यूपीएस वर्ल्डपोर्ट का घर है जो कंपनी के एयर कार्गो संचालन का वैश्विक सेंटर और दुनिया का सबसे बड़ा पैकेज हैंडलिंग सुविधा केंद्र है.
बढ़ सकती है मृतकों की संख्या
केंटकी राज्य के गवर्नर एंडी बेसेर ने बताया कि लुइसविले में हुए भयावह विमान हादसे में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि बचाव कार्य अभी भी जारी है.
विमान में भारी मात्रा ईंधन के कारण लगी आग
लुइसविले के मेयर क्रेग ग्रीनबर्ग ने कहा कि विमान में भारी मात्रा में जेट ईंधन होने के कारण आग लगी. ग्रीनबर्ग ने डब्ल्यूएलकेवाई-टीवी को बताया, ‘मेरी समझ से विमान में लगभग 2,80,000 गैलन ईंधन था. ये कई मायनों में चिंता का एक गंभीर कारण है.’
पुलिस विभाग ने की हादसे की पुष्टि
लुइसविले मेट्रो पुलिस विभाग (एलएमपीडी) ने बताया कि कई एजेंसियां आग और मलबे के साथ एक सक्रिय स्थल पर प्रतिक्रिया दे रही थीं. विभाग ने एक्स पर एक संक्षिप्त पोस्ट में ‘चोटों की सूचना’ की भी पुष्टि की.
विभाग ने एक्स (जिसे पहले ट्विटर कहा जाता था) पर एक संक्षिप्त पोस्ट में कहा, “चोटों की सूचना मिली है.” बाद में बचाव अभियान जारी रहने के कारण अधिकारियों ने स्टूजेस और क्रिटेंडेन के बीच ग्रेड लेन को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया.
लुइसविले मोहम्मद अली इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने पुष्टि की है कि एक विमान दुर्घटना में शामिल था और आपातकालीन सेवाओं के घटनास्थल पर काम करने के दौरान हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था.
‘जारी की राहत और बचाव का काम’
केंटकी के गवर्नर एंडी बेशियर ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए एक्स पर कहा, ‘केंटकी, हमें लुइसविले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक विमान दुर्घटना की सूचना मिली है. घटनास्थल पर पहले से ही बचाव दल मौजूद है और जैसे ही जानकारी उपलब्ध होगी, हम उसे साझा करेंगे. कृपया पायलटों, चालक दल और प्रभावित सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें. हम जल्द ही और जानकारी साझा करेंगे.’
स्थानीय मीडिया ने हवाई अड्डे के अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों का हवाला देते हुए कहा कि दुर्घटना में यूपीएस एयरलाइंस का एक मालवाहक विमान शामिल था जो हवाई अड्डे के परिसर में स्थित कंपनी के विशाल लॉजिस्टिक्स केंद्र से संचालित होने वाले कई विमानों में से एक था.
फ्लाइट राडार 24 से प्राप्त उड़ान- ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि विमान- N259UP के रूप में पंजीकृत ने शाम 5:10 बजे लुइसविले से उड़ान भरी थी और रडार से गायब होने से पहले कुछ देर के लिए ऊपर की ओर बढ़ा था.
हादसे की जांच करेगा FAA
फ्लाइट राडार 24 के फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि फ्लाइट (पंजीकृत N259UP) ने शाम 5:10 बजे लुइसविले से उड़ान भरी थी और रडार से गायब होने से कुछ देर पहले विमान ऊपर की ओर बढ़ रहा था. एफएए (FAA) और राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) ने घोषणा की कि वे हादसे के कारण की जांच करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पावर पर सुनवाई; व्हाइट हाउस बोला- हर स्थिति के लिए तैयार है सरकार
5 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन. अमेरिका (America) के राष्ट्रपति (President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की टैरिफ लगाने की शक्तियों (tariff powers) को लेकर इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अहम सुनवाई होने जा रही है। इससे पहले व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह हर संभावित परिणाम के लिए तैयार है, लेकिन सरकार को अपने कानूनी पक्ष पर पूरा भरोसा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि व्हाइट हाउस हमेशा प्लान बी के लिए तैयार रहता है। राष्ट्रपति के सलाहकारों के लिए ऐसा न करना अनुचित होगा। हमें राष्ट्रपति और उनकी टीम के कानूनी तर्कों पर 100% भरोसा है। हमें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट सही फैसला देगा।
लीविट ने आगे कहा कि यह मामला केवल ट्रंप से जुड़ा नहीं है, बल्कि भविष्य में आने वाले राष्ट्रपतियों की नीतियों से भी संबंधित है। उन्होंने कहा यह मामला सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप के बारे में नहीं है, बल्कि आपातकालीन अधिकारों के तहत भविष्य में राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ लगाने की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। ट्रंप का मानना है कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है।
‘यह देश के लिए जीवन-मृत्यु का सवाल’
सुनवाई से पहले, ट्रंप ने इस मामले को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कल का सुप्रीम कोर्ट केस हमारे देश के लिए जीवन या मृत्यु का सवाल है। अगर हम जीतते हैं, तो हमें मजबूत आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा मिलेगी। अगर नहीं, तो हम उन देशों के सामने असहाय हो जाएंगे जिन्होंने वर्षों से हमारा फायदा उठाया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी स्टॉक मार्केट रिकॉर्ड स्तर पर है और यह ट्रंप प्रशासन द्वारा की गई टैरिफ नीतियों और समझौतों की वजह से संभव हुआ है।
खजाना सचिव भी रहेंगे मौजूद
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की कि वे सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे। उन्होंने कहा मैं खुद कोर्ट में मौजूद रहूंगा और पूरी सुनवाई सुनूंगा। यह एक ऐतिहासिक क्षण है।
असम को लेकर ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का सपना देख रही यूनुस सरकार, तुर्की-पाकिस्तानी के समर्थन की दरकरार
5 Nov, 2025 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्वी पड़ोसी देश बांग्लादेश (Bangladesh) अब नया ख्याली पुलाव पका रहा है। वहां मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की अगुलाई वाली अंतरिम सरकार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों खासकर असम को अपने भूभाग में रणनीतिक तौर पर शामिल कर ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ (Greater Bangladesh) के सपने देख रही है। उनके इस मंसूबे और प्लान का खुलासा पाकिस्तानी और तुर्की प्रतिनिधिमंडल को भेंट की गई एक कलाकृति से हुआ है। दरअसल, मोहम्मद यूनुस ने पिछले दिनों ढाका के दौरे पर आए तुर्की के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल को आर्ट ऑफ ट्रायम्फ” भेंट की है।
तुर्की के प्रतिनिधिमंडल से पहले यही कलाकृति कुछ दिनों पहले उन्होंने एक पाकिस्तानी कमांडर को भी भेंट की थी। इस कलाकृति में एक “ग्रेटर बांग्लादेश” योजना की रूपरेखा पेश की गई है, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, खासकर असम को भविष्य में रणनीतिक तौर पर बांग्लादेश में शामिल करना शामिल है। खुफिया सूत्रों ने बांग्लादेश की इस हरकत को एक प्रतीकात्मक इशारे से कहीं व्यापक अर्थों में लिया है और इसके पीछे छिपे बांग्लादेशी हुक्मरानों के मंसूबों को डिकोड किया है।
ढाका के प्रभाव में असम को लाना मकसद
सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि बांग्लादेश के इस दस्तावेज में युद्ध योजनाएं और विजय के बाद के प्रबंधन ढाँचे शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश का उद्देश्य कथित तौर पर ढाका के प्रभाव में असम को लाना है। सूत्र इसे अचानक उकसावे की रणनीति के बजाय एक जानबूझकर दिया गया वैचारिक संकेत बता रहे हैं। सूत्रों का कहना है, “यह कोई कला प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इस्लामिक देशों को एक संदेश था, जो बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को एक व्यापक रणनीतिक सुदृढ़ीकरण के हिस्से के रूप में देखते हैं।”
दक्षिण-पूर्वी एशिया में तुर्की सक्रिय
इस कलाकृति के जरिए संदेश देने का समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में तुर्की की अखिल-इस्लामी पहुँच के अनुरूप है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसके जरिए तुर्की सैन्य सहयोग, ड्रोन तकनीक हस्तांतरण और वैचारिक साझेदारी के जरिए दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाना चाह रहा है। 2024 की शुरुआत से ही तुर्की ढाका के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। तुर्की ने ढाका को प्रशिक्षण कार्यक्रम, रक्षा उद्योग सहयोग और तकनीकी निवेश की पेशकश भी की है।
ग्रेटर बांग्लादेश यूनुस सरकार की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा
ढाका की अंतरिम सरकार के लिए, तुर्की के साथ घनिष्ठ संबंध घरेलू अनिश्चितता के समय में अंतर्राष्ट्रीय वैधता और नए रक्षा संबंध दोनों मुहैया करता है। हालाँकि, “ग्रेटर बांग्लादेश” ढाका की अंतरिम सरकार की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा का पहला बड़ा और स्पष्ट संकेत है। खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह क्षेत्रीय प्रतिक्रियाओं को परखने और देश-विदेश में इस्लामी समूहों के बीच वैचारिक समर्थन को मज़बूत करने की एक संभावित कोशिश है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित तौर पर भारत का सुरक्षा प्रतिष्ठान इस घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहा है।
कनाड़ा दे सकता है भारतीय को बड़ा झटका… अस्थायी वीजा को रद्द करने पर विचार
5 Nov, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोरंटो। कनाडा (Canada) जाने की चाह रखने वाले भारतीयों (Indians) को तगड़ा झटका लग सकता है। कनाडाई सरकार (Canadian Government) संसद में लंबित विधेयक के जरिए अस्थायी वीजा (Temporary Visa) को बड़े पैमाने पर रद्द करने की शक्ति चाहती है, जिसका इस्तेमाल भारत से आने वाले फर्जी आवेदनों को रोकने के लिए किया जा सकता है। एक रिपोर्ट में आईआरसीसी, सीबीएसए और अमेरिकी विभागों के हवाले यह बताया गया है। इस प्रावधान को भारत से अस्थायी वीजा आवेदकों की धोखाधड़ी को रोकने वाला कदम बताया गया है।
विधेयक में कहा गया कि महामारी या युद्ध के समय ढेर सारे वीजा एक साथ रद्द किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई अधिकारी इनमें से कुछ खास देशों के वीजा धारकों को निशाना बनाना चाहते हैं। अस्थायी निवासियों में काम करने वाले, विदेशी छात्र और घूमने आने वाले लोग शामिल होते हैं। यह नियम कनाडा की सीमाओं को मजबूत करने वाले कानून का हिस्सा बताया जा रहा है।
नए लोगों का आना कम करने का दबाव
इमिग्रेशन वकील सुमित सेन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था कि अगर लिबरल सरकार का स्ट्रॉन्ग बॉर्डर्स बिल पास हो गया, तो हजारों आवेदन एक झटके में रद्द हो सकते हैं, क्योंकि इससे मंत्री को बहुत बड़ी ताकत मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि 2007 में फाइलें इसलिए बंद की गईं ताकि पुरानी लंबित अर्जियों का बोझ हटाया जा सके। ये बात उन्होंने तब कही जब अर्जियों को मंजूरी देने में बहुत देरी हो रही है – जैसे स्टार्टअप वीजा के तहत उद्यमियों को 35 साल (420 महीने) तक इंतजार करना पड़ जाता है। अभी कनाडा सरकार नए लोगों का आना कम करना चाहती है, चाहे वो स्थायी रहने वाले हों या अस्थायी। इससे भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है।
74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट
रविवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में 74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट हो गए जबकि 2023 के अगस्त में सिर्फ 32% ही रिजेक्ट हुए थे। यानी अब भारत से पढ़ाई के लिए कनाडा जाना बहुत मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार इस महीने अपनी आप्रवासन स्तर योजना पेश करने वाली है। देश में बढ़ते आप्रवासन-विरोधी भावना के कारण सरकार पर नए लोगों की संख्या कम करने का दबाव है।
US में भारतीय मूल के 2 युवाओं ने रचा इतिहास, जुकरबर्ग का रिकॉर्ड तोड़ सबसे कम उम्र के सेल्फमेड अरबपति बने
4 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। भारतीय मूल के दो अमेरिकी युवाओं (Two Indian-American youths) आदर्श हीरमठ (Adarsh Hiremath) और सूर्या मिधा (Surya Midha) ने 22 वर्ष की आयु में इतिहास रच दिया है। दोनों ने अपने मित्र ब्रेंडन फूडी के साथ मिलकर शुरू किए गए एआई-आधारित भर्ती स्टार्टअप मेर्कर (AI-based recruitment startup Merkur) के माध्यम से दुनिया के सबसे कम उम्र के सेल्फमेड अरबपति बनने का गौरव हासिल किया है।
फोर्ब्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मेर्कर ने पिछले सप्ताह 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब ₹2,900 करोड़) की नई फंडिंग प्राप्त की, जिससे कंपनी का मूल्यांकन 10 अरब डॉलर (लगभग ₹83,000 करोड़) तक पहुंच गया है। इस मूल्यांकन के बाद दोनों संस्थापकों की व्यक्तिगत संपत्ति अरबों डॉलर आंकी जा रही है।
मार्क जुकरबर्ग का रिकॉर्ड टूटा
इस उपलब्धि के साथ ही हीरमठ और मिधा ने मार्क जुकरबर्ग का 2008 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जब फेसबुक संस्थापक 23 वर्ष की उम्र में अरबपति बने थे। अब ये दोनों 22 वर्ष की उम्र में दुनिया के सबसे युवा स्वनिर्मित अरबपति बन गए हैं। स्वनिर्मित अरबपति शब्द का अर्थ है कि व्यक्तिगत रूप से उनकी शुद्ध संपत्ति कम-से-कम एक अरब डॉलर हो गई हो।
दोनों एक ही स्कूल के साथी
हीरमठ और मिधा ने कैलिफोर्निया के बेलारमाइन कॉलेज प्रिपरेटरी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी और दोनों एक ही डिबेट टीम में थे। हीरमठ ने बाद में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की, लेकिन स्टार्टअप पर पूरा ध्यान देने के लिए पढ़ाई बीच में छोड़ दी। सूर्या मिधा के माता-पिता मूल रूप से नई दिल्ली के निवासी हैं और बाद में अमेरिका में बस गए।
कंपनी का मॉडल
मेर्कर एक एआई संचालित प्लेटफॉर्म है जो कंपनियों को फ्रीलांसरों और पेशेवरों से जोड़ने में मदद करता है। कंपनी का कहना है कि उसका एआई इंजन भर्ती की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और लागत प्रभावी बनाता है। कंपनी का दावा है कि उसका एआई इंजन पारंपरिक भर्ती एजेंसियों की तुलना में कई गुना तेज़ और सटीक है।
घरौंडा में बदमाशों ने छीना मजदूर का फोन, मेहनत की कमाई गई पानी में
4 Nov, 2025 03:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। घरौंडा बस स्टैंड के समीप रविवार देर शाम को बाइक सवार दो युवक नया मोबाइल छीनकर फरार हो गए। युवक ने इसकी शिकायत पुलिस को दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
शिकायत में गांव मदनपुर में राजेश राइस मिल में किराए पर रहने वाले कपिल देव ने बताया वह अपने साथी विकास के साथ नया मोबाइल खरीदने गोयल कम्युनिकेशन दुकान गया था।
देर शाम को वह मोबाइल खरीदकर करनाल जाने के लिए नए बस स्टैंड की ओर पैदल लौट रहा था। दोनों नए बस स्टैंड के सामने स्थित वाल्मीकि चौक पर पहुंचे, तभी मोटरसाइकिल पर आए दो युवक उसके हाथ में पकड़ा मोबाइल वाला थैला झपटकर भाग गए। युवक का कहना है कि उसने मजदूरी कर यह मोबाइल खरीदा था, उसके हाथ में 15 मिनट तक ही यह मोबाइल रहा।
साइबर क्राइम का नया मामला: गृह सचिव के नाम पर बनाई नकली प्रोफाइल
4 Nov, 2025 02:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा की गृह सचिव डॉ. सुमिता के नाम पर फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर धोखाधड़ी की कोशिश का मामला सामने आया है। खुद गृह सचिव ने इस संबंध में चेतावनी जारी करते हुए कहा कि फेसबुक पर पल्लवी अग्रवाल नाम से किसी ने मेरे नाम और तस्वीर का दुरुपयोग किया है। यह खाता मित्रता अनुरोध भेज सकता है या धन की मांग भी कर सकता है। कृपया किसी भी संदिग्ध अनुरोध का जवाब न दें और न ही स्वीकार करें।
उन्होंने बताया कि मामला साइबर पुलिस, पंचकुला को रिपोर्ट कर दिया गया है और फर्जी खाते के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी को ऐसा खाता दिखे तो तुरंत फेसबुक पर रिपोर्ट विकल्प के माध्यम से उसकी सूचना दें।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठग अब सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर लोगों को भरोसे में लेते हैं और बाद में धन उधार या आपातकालीन मदद के बहाने ठगी की कोशिश करते हैं।
गृह सचिव ने कहा कि सोशल मीडिया पर जागरूक रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी ऑनलाइन बातचीत या वित्तीय अनुरोध को सत्यापित किए बिना उस पर भरोसा न करें।
जरा सी भी गड़बड़ी हुई तो रद्द होगी अडानी पावर डील… बांग्लादेश सरकार की दो टूक
4 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh) की मुहम्मद युनूस (Muhammad Yunus) की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार (Interim Government) ने साफ कहा है कि अगर भारत (India) की अडानी कंपनी (Adani Company) के साथ हुए साल 2017 के बिजली समझौते में किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार का सबूत मिलता है, तो वे इस करार को रद्द करने से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, राष्ट्रीय समीक्षा समिति के एक सदस्य मुश्ताक हुसैन खान ने एक अहम बात कही है। उन्होंने कहा कि क्योंकि यह एक ‘सॉवरेन कॉन्ट्रैक्ट’ (दो देशों के बीच समझौता) है, इसलिए इसे मनमाने ढंग से खत्म नहीं किया जा सकता। ऐसे समझौतों को रद्द करने से बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालतों से भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
रिपोर्ट में बड़े आरोप
यह बात एक ऐसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद कही गई है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र में “बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार” और “शासन में बड़ी विफलता” का दावा किया गया है। यह रिपोर्ट एक राष्ट्रीय समीक्षा समिति ने पेश की है, जिसे पिछली शेख हसीना सरकार के दौरान हुए बिजली क्षेत्र के सभी समझौतों की जांच के लिए बनाया गया था। समिति के प्रमुख, सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के जज मोइनुल इस्लाम चौधरी ने कहा, “हमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, सांठगांठ, धोखाधड़ी और अनियमितताएं मिली हैं।”
सरकार ने की पुष्टि
रविवार को इस समिति के साथ बैठक के बाद, बांग्लादेश के बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधनों के सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हालांकि समझौते में दावा किया गया है कि कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ, लेकिन अगर सबूतों से कुछ और साबित होता है तो समझौता रद्द किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अदालतें सिर्फ मौखिक आश्वासन नहीं मानेंगी, इसके लिए ठोस कारण होने चाहिए।”
विवादास्पद है समझौता
25 साल का यह समझौता अडानी पावर और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के बीच हुआ था। इसके तहत बांग्लादेश को झारखंड में अडानी के 1,600 मेगावाट के कोयला बिजलीघर से पैदा होने वली सौ फीसदी बिजली खरीदनी है। शेख हसीना सरकार के बाद आई नई सरकार ने इस समझौते की जांच शुरू की है। इस प्लांट को सिर्फ बांग्लादेश को बिजली देने के लिए ही बनाया गया था और बिजली एक क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइन के जरिए पहुंचाई जाती है।
खेत में बने कमरे के बाहर मिला युवक का शव, हत्या के बाद आरोपी फरार
4 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी के बहल क्षेत्र में भिवानी मार्ग पर खेत में बने कमरे के बाहर 50 वर्षीय एक व्यक्ति का शव खून से लथपथ बहल पुलिस को बरामद हुआ। व्यक्ति की तेजधार हथियार से गला रेतकर हत्या की गई थी। बहल पुलिस ने सीन आफ क्राइम टीम को मौके पर बुलाया वहीं शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला नागरिक अस्पताल लाया गया। मृतक बहल निवासी 50 वर्षीय दलीप उर्फ पप्पू है।
बहल-भिवानी मुख्य मार्ग पर खेत में बने कमरे के बाहर एक व्यक्ति का शव पड़ा होने की सूचना बहल पुलिस को दी गई थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। मृतक दलीप उर्फ पप्पू का गला तेजधार से गला रेता गया था। जिसकी वजह से उसकी मौत हुई थी। फिलहाल बहल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला नागरिक अस्पताल में उसका पोस्टमार्टम करया।
वहीं पुलिस उसके हत्यारों की तलाश में जुटी है। दलीप की बेरहमी से गला रेतकर हत्या हुई है। थाना प्रभारी संजय ने बताया कि पुलिस भिवानी रोड पर सीसीटीवी की फुटेज खंगाल रही है ताकि घटना के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। ग्रामीणों ने बताया कि जिस खेत और कमरे के बाहर दलीप का शव मिला है वह खेत और कमरा उसी का है।
नीतीश कुमार के राज में हत्या और लूट की वारदातें लगातार बढ़ रही है – राजद नेता तेजस्वी यादव
4 Nov, 2025 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना । राजद नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav) ने कहा कि नीतीश कुमार के राज में (Under Nitish Kumar’s Rule) हत्या और लूट की वारदातें लगातार बढ़ रही है (Incidents of Murder and Robbery are continuously Increasing) ।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “अभी तक देखने में जैसा लग रहा है, उसी आधार पर कहा जा सकता है कि बिहार में एनडीए कभी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। यह बात नीतीश कुमार को भी पता है। आने वाले समय में यह सबको देखने को मिलेगा।” पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए महागठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी के बयान पर तेजस्वी यादव ने कहा कि जिसकी जैसी सोच होती है, वो वैसा ही करता है। हम लोग एक साथ हैं। महागठबंधन में किसी को कोई परेशानी नहीं है। अगर किसी को कोई पद दिया जा रहा है तो सबकी सहमति से किया जा रहा है। इस विषय पर मैं और कुछ नहीं बोल सकता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिन एक रैली के दौरान महागठबंधन पर ‘राजनीतिक गुंडागर्दी’ का आरोप लगाया और दावा किया कि राजद ने बंदूक के बल पर कांग्रेस से मुख्यमंत्री का पद छीन लिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि एनडीए पार्टियों को अपने साथ जोड़ने के लिए कुछ भी कर सकती है। बिहार में फिर से महागठबंधन की सरकार बनने वाली है। यह बात एनडीए को भी पता चल गई है।
उन्होंने कहा गुजरात में लोग फैक्ट्री, आईटी पार्क, डाटा सेंटर सहित कई उद्योगों की बात करेंगे, लेकिन बिहार में इस तरह की बात नहीं करते। बिहार में एनडीए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास को रोक दिया है, जिसकी वजह से यहां के लोगों को परेशानी हो रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि एनडीए के राज में हत्या और लूट लगातार बढ़ रही है। सरकार ही उन लोगों को संरक्षण दे रही है, जो बिहार में अपराध कर रहे है। ये बात जनता को पता चल गई है। आने वाले दिनों में इसका जवाब मिल जाएगा।
तालिबान ने जारी किया ‘ग्रेटर अफगान’ MAP, पाकिस्तान के 3 हिस्से शामिल
4 Nov, 2025 12:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलूचिस्तान: पाकिस्तान (Pakistan) और अफगानिस्तान (Afghanistan) के बीच पहले से ही तनाव चल रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में अफगानिस्तान के उप-आंतरिक मंत्री मोहम्मद नबी ओमारी एक सरकारी कार्यक्रम में ग्रेटर अफगानिस्तान का नक्शा दिखाते नजर आते हैं. यह कार्यक्रम 28 अक्टूबर को अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में हुआ था, जो पाकिस्तान की सीमा के पास है.
वीडियो में सैन्य वर्दी पहने दो बच्चे मंत्री को एक ढाल भेंट करते दिखते हैं. इस ढाल पर अफगानिस्तान का नक्शा बना है, जिसमें पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाके भी शामिल हैं. इसी वजह से यह नक्शा विवाद में है और इसे ग्रेटर अफगानिस्तान कहा जा रहा है.
इस वीडियो के सामने आने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान फिलहाल युद्धविराम का पालन कर रहे हैं. कुछ हफ्ते पहले दोहा वार्ता के बाद भी तालिबान ने साफ कहा था कि वह डूरंड रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं मानता. अफगानिस्तान का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद अब भी बाकी है, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि यह मुद्दा बहुत पहले सुलझ चुका है और डूरंड रेखा ही असली सीमा है.
इंडोनेशिया ने बुलेट ट्रेन के लिए चीन से लिया था लोन, कर्ज के जाल में अब बुरा फंसा
4 Nov, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: चीन (China) जिस भी देश के साथ संबंध रखता है उसे कर्ज (Loan) के जाल में जरूर फंसाता है. अब चीन का नया शिकार इंडोनेशिया (Indonesia) है. आरोप लग रहे हैं कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (Bullet Train Project) के नाम पर चीन ने उसे कर्ज के जाल में फंसाया. इंडोनेशिया और चीन के बीच बने 7.27 अरब डॉलर (लगभग ₹60,000 करोड़) के हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट ‘वुश’ पर अब बड़ा वित्तीय विवाद खड़ा हो गया है. यह दक्षिण-पूर्व एशिया की पहली हाई-स्पीड ट्रेन है, जिसे चीन की मदद से बनाया गया, लेकिन अब इसके बढ़ते कर्ज को लेकर इंडोनेशिया सरकार में ही टकराव शुरू हो गया है.
इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधि सादेवा (Purabaya Yudhi Sadeva) ने साफ कहा है कि इस प्रोजेक्ट का कर्ज देश के बजट से नहीं चुकाया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी डानंतारा (Danantara) नाम की देश की सॉवरेन वेल्थ फंड संस्था (Sovereign Wealth Fund Institution) की है, जो 1,000 से ज्यादा सरकारी कंपनियों के मुनाफे और निवेश को नियंत्रित करती है. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘Whoosh पहले से ही डानंतारा के अधीन है. उसने सरकारी कंपनियों से 80 ट्रिलियन रुपिया (करीब 4.8 अरब डॉलर) का डिविडेंड लिया है. अब वही इस कर्ज को संभाले. देश बजट से इसका भुगतान करना बेतुका होगा.’
मंत्री के मुताबिक, इंडोनेशिया को हर साल इस प्रोजेक्ट के लिए 2 ट्रिलियन रुपिया (लगभग 120 मिलियन डॉलर) का कर्ज चुकाना पड़ता है. इस बीच, डानंतारा के सीईओ रोसान रोसलानी ने कहा कि वे ‘कर्ज संकट’ से निकलने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें हिस्सेदारी बढ़ाना और सरकारी स्वामित्व में लेना शामिल है. दूसरी ओर, चीन ने संकेत दिया है कि वह इस कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग करने पर चर्चा के लिए तैयार है. हालांकि, देश के भीतर इस कर्ज को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है.
इंडोनेशिया के पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो के कार्यकाल में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की रक्षा करते हुए उनके करीबी मंत्री लुहुत पांडजैतान ने कहा, ‘मैंने शुरुआत से ही इस प्रोजेक्ट में खामियां देखी थीं, लेकिन अब हम वित्तीय सुधार कर रहे हैं. हमने चीन से कर्ज पुनर्गठन पर बातचीत शुरू कर दी है.’ उन्होंने यह भी कहा कि यह कहना गलत है कि इंडोनेशिया ‘चीन के कर्ज के जाल’ (Debt Trap) में फंस गया है. उन्होंने आलोचकों को जवाब दिया, ‘अगर आपको डेटा नहीं पता, तो टिप्पणी न करें.’
वहीं पूर्व समन्वय मंत्री महफूद ने आरोप लगाया कि निर्माण लागत बढ़कर 52 मिलियन डॉलर प्रति किलोमीटर हो गई, जो चीन में इसी प्रकार की लाइन बनाने की लागत से तीन गुना अधिक है. उन्होंने यह भी सवाल खड़ा किया कि कॉन्ट्रैक्ट सार्वजनिक नहीं है. हमें नहीं पता कि इस प्रोजेक्ट की क्या कीमत है.
‘चीन-रूस कर रहे न्यूक्लियर टेस्टिंग’, डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर आया चीन का रिएक्शन
4 Nov, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया था कि चीन और रूस (Russia) अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट कर रहे हैं. इस पर चीन की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई है. चीनी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है. ड्रैगन (Dragon) ने कहा कि वह एक जिम्मेदार परमाणु-संपन्न देश है.
ट्रंप के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन (China) के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने कहा, ‘वह एक जिम्मेदार परमाणु-हथियार (Nuclear Weapons) संपन्न देश है. बीजिंग ने आगे कहा कि उसने हमेशा आत्मरक्षा परमाणु रणनीति को बरकरार रखा है और परमाणु परीक्षण रोकने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन किया है.’
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