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ऐसा धूमकेतु सामने आया, जो नहीं है सौरमंडल का हिस्सा
10 Nov, 2025 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। हाल के दिनों में अंतरिक्ष में एक ऐसा धूमकेतु सामने आया है जो हमारे सौरमंडल का हिस्सा नहीं है। शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने इसे नाम दिया गया है 3आई/एटलस। यह तीसरा ऐसा खगोलीय पिंड जो किसी दूसरे तारामंडल से हमारे सौरमंडल में आया है। वैज्ञानिकों के लिए ऐसे ऑब्जेक्ट बेहद मूल्यवान होते हैं क्योंकि इनके अध्ययन से उन्हें यह समझने का अवसर मिलता है कि अन्य तारामंडलों की रासायनिक और भौतिक संरचना कैसी होती है। इससे पहले 2017 में ‘ओउमुआमुआ’ और 2019 में ‘2I/बोरिसोव’ को इसी श्रेणी में दर्ज किया गया था।
29 अक्टूबर को जब 3आई/एटलस सूरज के सबसे करीब पहुंचा, तब वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि इसकी चमक सामान्य रूप से बढ़ेगी। लेकिन यह धूमकेतु उम्मीद से कहीं अधिक तेज रोशनी बिखेरने लगा। इसकी चमक में आई असामान्य वृद्धि ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। आमतौर पर किसी धूमकेतु की बर्फ सूरज की गर्मी से पिघलकर गैस में बदल जाती है, जिससे धूल और गैस का बादल बनता है और धूमकेतु चमकने लगता है। मगर3आई/एटलस की चमक बाकी धूमकेतुओं की तुलना में कई गुना ज्यादा बढ़ी, जिसकी वजह फिलहाल रहस्य बनी हुई है। इस घटना पर नासा के कई सैटेलाइट्स स्टेरियो-ए, 3आई/एटलस -बी, सोहो और गोज-19 लगातार नजर रखे हुए हैं। वर्तमान में इसे पृथ्वी से देखा नहीं जा सकता क्योंकि यह सूरज की रोशनी के बेहद पास है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि नवंबर 2025 के मध्य या अंत तक जब यह सूरज की चमक से बाहर निकलेगा, तब इसे फिर से टेलिस्कोप से देखा जा सकेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी असामान्य चमक के पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, यह सूरज की ओर इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है कि इसकी सतह पर गैस और बर्फ की प्रतिक्रियाएं अत्यधिक हो गई हैं। दूसरा, इसकी रासायनिक बनावट बाकी धूमकेतुओं से अलग हो सकती है संभव है कि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अधिक हो, जिसने सूरज के नजदीक आने तक पानी की बर्फ को ठंडा रखा और फिर अचानक तीव्रता से प्रतिक्रिया शुरू कर दी। भविष्य में 3आई/एटलस कैसा व्यवहार करेगा, यह अब भी अनिश्चित है।
हरियाणा विधानसभा सत्र दिसंबर में, पहली बार सर्वश्रेष्ठ विधायक और अधिकारी होंगे सम्मानित
10 Nov, 2025 01:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा विधानसभा का शीतकालीन सत्र दिसंबर में होगा। सत्र की तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी। सत्र के दाैरान सर्वश्रेष्ठ विधायक और सर्वश्रेष्ठ अधिकारी को सम्मानित किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ विधायक चुनने के लिए नियमों में संशोधन किया जाएगा।
विधानसभा स्पीकर ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि विधानसभा की नई बिल्डिंग के लिए कार्रवाई जारी है। हमारे पास कुछ ऑप्शन हैं, उस पर सरकार काम कर रही है। विधानसभा के अधिकारी से लेकर चपरासी तक सभी को ट्रेनिंग दी जाएगी। विधानसभा के नियमों में संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए रिटायर्ड कानून विशेषज्ञ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पर पिछले चार महीने से काम चल रहा है।
तैयार हैं ईरान की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल...........वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क निशाने पर
10 Nov, 2025 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान ने दावा किया है कि उसके पास एक नई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) है, जो करीब तैयार है। यह मिसाइल 10,000 किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है। अगर यह सच है, तब यह मिसाइल यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकती है। एक वीडियो में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर्प्स (आईआरजीसी) के कमेंट्री के साथ मिसाइल साइलो, मोबाइल लॉन्चर और पुरानी लॉन्चिंग की फुटेज दिखाई गई। वीडियो कहता है कि मिसाइल का विकास पूरा हो चुका है। लेकिन कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है, जैसे सैटेलाइट इमेज या 10,000 किमी की टेस्ट फ्लाइट का वीडियो।
पहले ईरान के नेता 2,000 किलोमीटर की रेंज की सीमा पर ही रुकते थे। यह सीमा गल्फ देशों, इजरायल और पूर्वी यूरोप तक कवर करती थी। लेकिन अब 10,000 किमी का दावा बहुत बड़ा बदलाव है। ईरान पहली बार अमेरिका के पूर्वी तट जैसे वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क जैसे शहरों को निशाना बना सकेगा। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान का सैटेलाइट लांच व्हीकल प्रोग्राम (जैसे सिमोर्घ और कासेद) इसमें मदद कर रहा है। ये स्पेस मिशन के लिए हैं, लेकिन मिसाइल बनाने में भी इस्तेमाल हो सकते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग कहता है कि ये दोहरे इस्तेमाल वाले प्रोग्राम हैं स्पेस और मिसाइल दोनों के लिए है।
मिसाइल को रोड-मोबाइल लांचर पर रखा जा सकता है, जो छिपाना आसान है। ईरान हाल में सॉलिड-फ्यूल वाली मिसाइलें पसंद कर रहा है, क्योंकि वे जल्दी लांच हो जाती है। लेकिन इतनी लंबी रेंज के लिए सॉलिड फ्यूल बनाना मुश्किल है। ईरान के नेता अब खुद को वैश्विक ताकत बता रहे हैं। यह दावा सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि अमेरिका को चेतावनी है। ईरान पर सैंक्शन हैं और अंदर असंतोष बढ़ रहा है, इसलिए यह मनोवैज्ञानिक ताकत देता है। ईरान अक्सर हथियारों की क्षमता बढ़ा-चढ़ाकर बताता है। इस दावे के साथ कोई फ्लाइट डेटा, प्रभाव वाली फुटेज या ट्रैकिंग नहीं है। वारहेड (विस्फोटक) कितना ताकतवर है, या न्यूक्लियर के लिए बनेगा या नहीं-यह स्पष्ट नहीं।
‘बीमारी’ से जूझ रहे लोगों को नहीं मिलेगा अमेरिकी वीजा!
9 Nov, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन।डायबिटीज, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अब अमेरिका में प्रवेश पाना मुश्किल हो सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनियाभर के अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिया है कि वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को अमेरिका आने या रहने की अनुमति न दें। यह नियम पब्लिक चार्ज (सार्वजनिक बोझ) नीति पर आधारित है, जिसका मकसद ऐसे अप्रवासियों को रोकना है जो अमेरिकी सरकारी संसाधनों पर निर्भर हो सकते हैं। इसमें वीजा अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदकों के हेल्थ, उम्र और फाइनेंशियल स्टेट्स की जांच करें। अगर कोई व्यक्ति भविष्य में महंगी चिकित्सा देखभाल या सरकारी सहायता पर निर्भर होने की संभावना रखता है, तो उसका वीजा रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश में कहा गया है कि आवेदक के स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी है। चिकित्सा स्थितियां जैसे हृदय रोग, सांस की दिक्कत, कैंसर, डायबिटीज, मेटाबॉलिक डिजीज, न्यूरोलॉजिकल डिजीज और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं लाखों डॉलर की देखभाल की जरूरत पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, अधिकारी मोटापे जैसी स्थितियों को भी ध्यान में रखेंगे, क्योंकि यह अस्थमा, स्लीप एप्निया और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। नए निर्देशों के तहत, अधिकारियों को यह तय करना होगा कि क्या प्रवासी पब्लिक चार्ज बन सकता है, यानी सरकारी संसाधनों पर बोझ, और क्या उसे महंगी लंबी अवधि की देखभाल की जरूरत पड़ेगी। रिपोर्ट के अनुसार, वीजा अधिकारियों को यह भी जांचने को कहा गया है कि क्या आवेदक अपने पूरे जीवन में बिना सरकारी सहायता के चिकित्सा खर्च खुद उठा सकता है या नहीं। इसके साथ ही, परिवार के सदस्यों जैसे बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य को भी ध्यान में रखना होगा।
अधिकारी हेल्थ कंडिशन जांचने के लिए ट्रेंड नहीं
लीगल इमिग्रेशन नेटवर्क के वरिष्ठ वकील चाल्र्स व्हीलर ने इसे चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि वीजा अधिकारी हेल्थ कंडिशन को जांचने के लिए ट्रेंड नहीं होते। व्हीलर ने कहा कि कोई बीमारी कितनी खतरनाक है, या फिर उसका कितना असर सरकारी संसाधन पर पड़ेगा अधिकारियों को इसका आकलन करने का अनुभव नहीं है। वहीं, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की इमिग्रेशन वकील सोफिया जेनोवेस ने कहा कि ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में चिकित्सा रिकॉर्ड जमा करने पड़ते हैं, लेकिन यह निर्देश आवेदकों की चिकित्सा इतिहास के आधार पर उनके इलाज के खर्च और अमेरिका में नौकरी पाने की चाहत को कम करने पर जोर देती है। जेनोवेस ने कहा कि डायबिटीज या हार्ट प्राब्लम किसी को भी हो सकते हैं। पहले भी हेल्थ स्टेटस को जांचा जाता था, लेकिन क्या होगा अगर कोई अचानक डायबिटिक शॉक में चला जाए। अगर यह बदलाव तुरंत लागू हो गया, तो वीजा इंटरव्यू में कई समस्याएं पैदा होंगी।
तुर्किये ने गाजा में नरसंहार का आरोप लगाया
9 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्किये ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार के कई बड़े अधिकारियों पर गाजा में नरसंहार का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। तुर्किये में आने पर इन लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। तुर्किये अभियोक्ता कार्यालय के बयान के अनुसार, 37 संदिग्धों में इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज, राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर और सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर शामिल हैं।
फिलहाल पूरी सूची जारी नहीं की गई है। तुर्किये का आरोप है कि इजराइल ने गाजा में नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध व्यवस्थित तरीके से किए हैं। बयान में तुर्किये ने गाजा में बनाए गए तुर्की-फिलिस्तीनी मैत्री अस्पताल का भी जिक्र है, जिसे इजराइल ने मार्च में बमबारी कर तबाह कर दिया था। दूसरी ओर इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे तुर्की के तानाशाह एर्दोआन का प्रचार स्टंट बताते हुए खारिज कर दिया। पिछले साल तुर्किये दक्षिण अफ्रीका के साथ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजराइल पर नरसंहार के मुकदमे में शामिल हुआ था।
अजरबैजान के विजय दिवस परेड में शामिल हुई पाकिस्तानी सेना
9 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अजरबैजान के रक्षा संबंध हालिया महीनों में ठीक हुए हैं। अजरबैजान उन देशों में एक है, जो कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद खुलकर पाकिस्तान की तारीफ की थी। दोनों देशों ने अपने संबंधों में बेहतरी के लिए नया कदम उठाया है। पाकिस्तनी सेना और जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान अजरबैजान की विजय दिवस परेड में शामिल हो रहे हैं। पाकिस्तानी जेट और सेना की टुकड़ी अजरबैजान पहुंच गई है। इतना ही नहीं असीम मुनीर और शहबाज शरीफ भी अजरबैजान पहुंचे हैं। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इसकी जानकारी दी है।
अजरबैजान 8 नवंबर को साल 2020 में आर्मेनिया के खिलाफ 44 दिनों तक चले काराबाख युद्ध में जीत के उपलक्ष्य में विजय दिवस मनाया जाता रहा है। अजरबैजान का यह 5वां विजय दिवस है। तरार ने कहा है कि पाकिस्तान-अजरबैजान की दोस्ती अटूट है। राजधानी बाकू स्थित पाकिस्तान दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शहबाज शरीफ और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की तस्वीर पोस्ट की है। शहबाज शरीफ विजय दिवस समारोह में भाग लेने के लिए गए हैं। पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भी अलीयेव के साथ बैठक की है। बैठक में दोनों देशों के बीच कई तरह की डील हुई हैं।
काठमांडू एयरपोर्ट पर भी दिल्ली की तरह आई तकनीकी खराबी, सभी उड़ानें प्रभावित
9 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। दिल्ली हवाई अड्डे की ही तरह अब नेपाल के काठमांडू एयरपोर्ट में तकनीकी खराबी आने और सभी उड़ानें प्रभावित होने की खबर है। तकनीकी गड़बड़ी के चलते नेपाल के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सभी उड़ानों को रोक दिया गया है।
काठमांडू एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है, कि एयरपोर्ट रनवे की लाइट्स में तकनीकी खराबी आने के चलते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सभी उड़ानें प्रभावित हुई हैं। इस संबंध में त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रवक्ता रेनजी शेरपा ने मीडिया को बताया कि रनवे के एयरफील्ड लाइटिंग सिस्टम में खराबी आ गई है। इस कारण फिलहाल कम से कम पांच फ्लाइट्स को होल्ड पर रखा गया है। यही नहीं बल्कि एयरपोर्ट पर आने-जाने वाली सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी विलंबित हैं। तकनीकी खराबी आने संबंधी समस्या का स्थानीय समयानुसार शाम 5.30 बजे के आसपास पता चला।
गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार को एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी। इस कारण फ्लाइट्स ऑपरेशन बुरी तरह प्रभावित हो गया था। इस दौरान विभिन्न एयरलाइंस की करीब 800 से ज्यादा उड़ानें डिले हुई थीं। इन सब में यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
ट्रंप का नया आदेश: बीमार या गरीब प्रवासियों को अब नहीं मिलेगा आसानी से वीजा
8 Nov, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ट्रंप प्रशासन ने नई हिदायत जारी की है जिससे कुछ स्वास्थ्य स्थितियों वाले विदेशी नागरिकों को अमेरिका का वीजा पाना कठिन हो सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनिया भर के दूतावासों को निर्देश दिया है कि वीजा आवेदकों की स्वास्थ्य स्थिति और इलाज वहन करे की क्षमता को ध्यान में रखा जाए।
नई नीति के तहत वीजा अधिकारी यह तय करेंगे कि कोई व्यक्ति सरकारी सहायता पर निर्भर तो नहीं हो जाएगा। इसमें कई बीमारियों का जिक्र है, जैसे हृदय रोग, सांस संबंधी बीमारियां, कैंसर, डायबिटीज, मेटाबॉलिक और न्यूरोलॉजिकल विकार और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
मोटापा भी इसमें शामिल
यहां तक की इसमें मोटापे को भी शामिल किया गया है, क्योंकि यह ब्लड प्रेशर, अस्थमा और स्पीप एनिया जैसी बीमारियों से जुड़ा होता है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे देखें कि क्या आवेदक या उसके परिवार को लंबे और महंगे इलाज की जरूरत पड़ सकती है और क्या वे सरकारी योजनाओं जैसे Medicaid पर निर्भर होंगे।
अभी तक यह साफ नहीं है कि यह नियम टूरिस्ट (B-1/B-2) या स्टूडेंट वीजा (F-1) जैसे अस्थायी वीजा वालों पर भी लागू होगा या नहीं। हालांकि, गाइडलाइन सभी वीजा कैटेगरी पर लागू बताई गई है, पर माना जा रहा है कि इसका असर स्थायी रूपसे बसने वालों (ग्रीन कार्ड आवेदकों) पर ज्यादा होगा। फिलहाल, टूरिस्ट वीजा लेने वालों को पहले से यह साबित करना होता है कि उनके पास यात्रा के लिए पर्याप्त पैसे हैं और वे अमेरिका में बसने का इरादा नहीं रखते।
इलाज पड़ सकता है महंगा
अमेरिका में वीजा या ग्रीन कार्ड के लिए पहले भी मेडिकल टेस्ट जरूरी थे, खासकर संक्रामक बीमारियों जैसे टीबी की जांच और टीकाकरण रिकॉर्ड के लिए। अब नई बात यह है कि सरकार ने क्रॉनिक और गैर-संक्रामक बीमारियों को भी जोखिम की श्रेणी में डाल दिया है। यानी अधिकारी अब यह आकलन करेंगे कि किसी बीमारी का भविष्य में इलाज कितना महंगा पड़ सकता है।
आलोचकों का कहना है कि यह फैसला बहुत सब्जेक्टिव है, क्योंकि वीजा अधिकारी मेडिकल एक्सपर्ट नहीं होते। कैथोलिक लीगल इमग्रेशन नेटवर्क के वकील चार्ल्स व्हीलर ने कहा, "यह परेशान करना वाला है क्योंकि अधिकारी खुद डॉक्टर नहीं हैं और वे अपने निजी अनुमान पर फैसले ले सकते हैं।"
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की इमिग्रेशन वकील सोफिया जेनोवेस ने कहा, “यह नियम अधिकारियों को आवेदकों की संभावित चिकित्सा लागत पर अटकलें लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे नतीजे असंगत हो सकते हैं।”
‘पब्लिक चार्ज’ नियम की वापसी
यह नई नीति ट्रंप प्रशासन के पुराने ‘पब्लिक चार्ज’ नियम की याद दिलाती है, जो उन लोगों के खिलाफ था जिन्होंने सरकारी सहायता ली थी या लेने की संभावना थी। बाइडेन प्रशासन ने 2022 में उस नियम को हटा दिया था, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने उसे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति से जोड़कर फिर से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि हर केस का अलग-अलग मूल्यांकनकिया जाएगा और सिर्फ बीमारी होने से किसी को वीजा से वंचित नहीं किया जाएगा। पर यह देखा जाएगा कि व्यक्ति अपने जीवनकाल में इलाज का खर्च खुद उठा सकता है या नहीं।
क्यों अहम है यह फैसला
यह नीति खासकर वृद्ध या पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को प्रभावित कर सकती है। दुनियाभर में करीब 10% आबादी डायबिटीज से ग्रस्त है और अमेरिका में लगभग 40% लोग मोटापे से पीड़ित हैं, यानी इसका असर बहुत बड़े वर्ग पर पड़ सकता है।
एलन मस्क को मिली दुनिया की सबसे बड़ी सैलरी डील, बन सकते हैं पहले ट्रिलियनेयर
8 Nov, 2025 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क अब एक और रिकॉर्ड के करीब पहुंच गए हैं। टेस्ला के शेयरहोल्डर्स ने हाल ही में एक ऐतिहासिक पे पैकेज मंजूर किया है, जिससे मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन सकते हैं।
अगर अगले 10 सालों में मस्क अपनी तय परफॉर्मेंस टारगेट्स को पूरा कर लेते हैं, तो उन्हें करीब $1 ट्रिलियन (करीब ₹83 लाख करोड़) के शेयर मिल सकते हैं। यह रकम इतनी बड़ी है कि यह दुनिया के 190 देशों में से 183 देशों की GDP से भी ज्यादा है।
बाकी टॉप CEO की कमाई मस्क से बहुत पीछे
रपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनिया के टॉप 10 CEO की सैलरी मस्क के मुकाबले बहुत कम रही। यह रही उनकी सालाना कमाई (डॉलर और भारतीय रुपये में):
इन सभी में शेयर अवॉर्ड्स और बोनस शामिल हैं, लेकिन मस्क का पैकेज इन सब से कई गुना बड़ा है।
2018 के मुकाबले 18 गुना बड़ा नया डील
मस्क का नया पे पैकेज उनके 2018 वाले $56 बिलियन के डील से करीब 18 गुना बड़ा है। इस बार टेस्ला ने उन्हें इतना बड़ा रिवार्ड देने का फैसला किया है, जितना खुद कंपनी का मौजूदा मार्केट वैल्यू है।
फिलहाल मस्क की नेटवर्थ करीब $460 बिलियन (₹38 लाख करोड़) है, जो Tesla, SpaceX और उनकी AI कंपनी xAIसे जुड़ी है। अगर यह नया प्लान एक्टिव हुआ, तो मस्क की संपत्ति कई देशों की अर्थव्यवस्था के बराबर हो जाएगी।
75% शेयरहोल्डर्स ने किया मस्क के पक्ष में वोट
इस फैसले पर पिछले कुछ हफ्तों से निवेशकों में गहमागहमी रही। कई लोग सवाल उठा रहे थे कि क्या किसी एक व्यक्ति को इतनी बड़ी रकम देना ठीक है। फिर भी, 75% से ज्यादा शेयरहोल्डर्स ने एलन मस्क के पक्ष में वोट किया। यह वोटिंग ऑस्टिन, टेक्सास में हुई टेस्ला की वार्षिक मीटिंग में हुई, जिसमें छोटे इनवेस्टर्स से लेकर बड़े फंड्स तक ने हिस्सा लिया।
जालंधर की खराब हवा से अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालु परेशान, प्रशासन के नाम भेजी चिट्ठी
8 Nov, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जालंधर में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और इसका असर अब विदेशी मेहमानों पर भी दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया, इटली और अमेरिका से आए श्रद्धालुओं ने डीसी और सीएमओ जालंधर को ईमेल भेजकर शिकायत की है कि यहां की हवा में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि उन्हें सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन हो रही है। ये सभी मेहमान गांव उदोवाल, महितपुर स्थित दरबार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी बुलंदपुरी में 9 से 19 नवंबर तक चलने वाले श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से भी जिला प्रशासन को लिखित शिकायत भेजी गई है। समिति ने कहा कि 40 देशों से श्रद्धालु इस धार्मिक समागम में भाग लेने आ रहे हैं, और प्रदूषण की वजह से माहौल दूषित हो गया है। प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि तुरंत उपाय किए जाएं ताकि विदेशी मेहमानों को राहत मिल सके।
खराब श्रेणी में है हवा
गुरुवार को जब शिकायत दर्ज हुई थी, तब जालंधर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 277 था, जो शुक्रवार को बढ़कर 305 तक पहुंच गया यानी बहुत खराब श्रेणी में। इस पर एडीसी (अर्बन डेवलपमेंट) जसबीर सिंह और एसडीएम शाहकोट लाल विश्वास ने कहा कि प्रशासन पराली जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है, लेकिन प्रदूषण की वजह सिर्फ पराली नहीं बल्कि पटाखे और औद्योगिक धुआं भी है।
दरबार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी बुलंदपुरी विश्वभर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रचार के लिए प्रसिद्ध है। इसकी शाखाएं ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इटली और पनामा जैसे देशों में हैं। यहां सिखों के साथ-साथ विदेशी श्रद्धालु भी रिसर्च के लिए आते हैं। यही कारण है कि इस धार्मिक स्थल के आस-पास बढ़ता प्रदूषण अब अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। कनाडा से आए एक श्रद्धालु ने बताया कि हम दो दिन पहले यहां पहुंचे हैं, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो रही है। स्थानीय डॉक्टर से दवा लेनी पड़ी।
नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स वॉटसन का निधन, विज्ञान को दी थी ऐतिहासिक खोज
8 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डीएनए की संरचना की खोज करने वाले अमेरिकी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन का 97 साल की आयु में निधन हो गया है. 20वीं सदी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक खोजों में से एक के रूप में, उन्होंने 1953 में ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक के साथ मिलकर डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की पहचान की थी.
हालांकि, नस्ल और लिंग को लेकर दिए गए उनके बयानों ने उनके सम्मान को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया. एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने यह विवादास्पद टिप्पणी की थी कि जीन काले और गोरे लोगों के आईक्यू परीक्षणों में अंतर का कारण हो सकते हैं.
DNA की खोज की
वॉटसन की मृत्यु की पुष्टि कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी ने बीबीसी को की है, जहां उन्होंने कई दशकों तक काम किया और रिसर्च की थी. वॉटसन ने 1962 में मॉरिस विल्किंस और फ्रांसिस क्रिक के साथ डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार जीता था. उस समय उन्होंने कहा था, “हमने जीवन का रहस्य खोज लिया है.” बाद में, नस्ल (रेस) पर दिए गए उनके विवादास्पद बयानों की वजह से वैज्ञानिक समाज ने उनसे दूरी बना ली.
बयान पड़े थे भारी
2007 में, जब वो पहले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कैवेंडिश लैब में काम कर चुके थे, उन्होंने कहा कि वो “अफ्रीका के भविष्य को लेकर निराश” हैं, क्योंकि “हमारी सारी नीतियां यह मानकर बनी हैं कि अफ्रीकी लोगों की बुद्धि हमारे जैसी ही है — जबकि सभी टेस्ट कुछ और बताते हैं.” इस बयान के बाद उन्हें न्यूयॉर्क की कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब में चांसलर के पद से हटा दिया गया था.
2019 में उन्होंने फिर से ऐसा ही बयान दिया — जब उन्होंने कहा कि नस्ल और आप कितने बुद्धिमान है इस के बीच संबंध है — तो लैब ने उनसे सभी उपाधियां छीन लीं, जैसे चांसलर एमेरिटस, प्रोफेसर एमेरिटस और मानद ट्रस्टी.
लैब ने कहा, “डॉ. वॉटसन के बयान गलत हैं और विज्ञान उनका समर्थन नहीं करता.” डीएनए की खोज 1869 में हुई थी, लेकिन तब वैज्ञानिक इसकी संरचना नहीं जानते थे.
बेचा था नोबेल पुरस्कार
वॉटसन ने 2014 में अपना नोबेल पुरस्कार का गोल्ड मेडल नीलामी में 4.8 मिलियन डॉलर (लगभग 3.6 मिलियन पाउंड) में बेच दिया था. उन्होंने कहा था कि वो यह पदक इसलिए बेच रहे हैं क्योंकि नस्ल (रेस) पर अपने बयानों के बाद वो खुद को वैज्ञानिक समुदाय से अलग-थलग महसूस कर रहे थे.
एक रूसी अरबपति ने यह पदक 4.8 मिलियन डॉलर में खरीदा और तुरंत ही उसे वॉटसन को वापस दे दिया.
कैम्ब्रिज में की थी रिसर्च
वॉटसन का जन्म अप्रैल 1928 में शिकागो में हुआ था. उनके माता-पिता, जीन और जेम्स, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड के बसने वालों के वंशज थे. 15 साल की उम्र में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में पढ़ाई के लिए स्कोलरशिप हासिल की. डीएनए की संरचना पर शोध जारी रखने के लिए वे कैम्ब्रिज गए, जहां उनकी मुलाकात फ्रांसिस क्रिक से हुई. दोनों ने मिलकर डीएनए की संभावित संरचनाओं के बड़े मॉडल तैयार करना शुरू किया.
1968 में वॉटसन ने न्यूयॉर्क राज्य की कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी का कार्यभार संभाला — जो एक पुरानी संस्था थी. उनके नेतृत्व में यह दुनिया के सबसे प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में से एक बन गई.
223 वोटों पर छपी बुजुर्ग महिला की फोटो, बोलीं—“मैं तो अब आई हूं, मेरे नाम के वोट पहले ही पड़ गए”
8 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला (हरियाणा): अंबाला की मुलाना विधानसभा में आने वाले गांव धकोला में एक बुजुर्ग चरणजीत कौर की 223 वोट बनने का मामला राहुल गांधी ने उठाया था। इस मामले को लेकर बुजुर्ग का कहना है उनके कई बार शिकायत करने के बावजूद वोटों से उनका फोटो नहीं हटाया गया। राहुल गांधी ने फर्जी वोटों का मुद्दा उठाया। जिसमे अंबाला की मुलाना विधानसभा के धकोला गांव का जिक्र किया। उसमे बुजुर्ग चरणजीत कौर की 223 वोटों पर फोटो होने की लिस्ट दिखाई।
इस मामले को लेकर धकोला गांव की बुजुर्ग महिला से बात की गई तो उन्होंने साफ तौर पर इसे शरारत बताया और कहा प्रवासियों की फर्जी वोट बनाई गई है। फोटो का इस्तेमाल उनका किया गया है। इसकी कई बार शिकायत की गई लेकिन अधिकारियों ने कोई संज्ञान नही लिया। बुजुर्ग ने कहा जब वो गांव में वोट करने जाती है तो पुलिस व वहां बैठे लोग उन पर हंसते थे कि माता जी अब वोट करने आई हैं सुबह से कितने लोग उनकी फोटो लगी फर्जी वोट से मतदान कर चले गए।
बुजुर्ग महिला का बेटा हैप्पी धकोला गांव से सरपंच का चुनाव लड़ चुका है। उनकी माता की फोटो लगे 223 वोट है वो भी सिर्फ 2 बूथों पर । उनका कहना है उन्होंने इस मुद्दे को लेकर धरने तक दिये लेकिन अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने इसे सीधे विरोधी पार्टियों की शरारत बताया और कहा प्रवासियों की फर्जी वोट बनवा कर यह सब खेल किया जा रहा है।
राज्यपाल अशिम घोष ने की TITS की सराहना, कहा—तकनीकी शिक्षा में नया मानक स्थापित
8 Nov, 2025 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी (हरियाणा): द टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज भिवानी में शनिवार को दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें हरियाणा के राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। एमडी. यूनिवर्सिटी रोहतक के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। जबकि सीबीएलयू भिवानी की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी विशिष्ट आमंत्रित अतिथि रहीं।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के लगभग 300 स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। साथ ही उद्योग जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पांच विशिष्ट पूर्व छात्रों आई एमजेएस सिद्धू (अध्यक्ष, वर्धमान टेक्सटाइल्स, बद्दी), अनिल जैन (चेयरमैन, जैन कॉर्ड्स), हरीश सराफ (संस्थापक एवं सीईओ, निप्पॉन डेटा सिस्टम्स), सुभाष भार्गव (प्रबंध निदेशक, कलरेंट) को प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष आरके डालमिया तथा निदेशक प्रो बीके बेहेरा भी समारोह में उपस्थित रहे।
राज्यपाल प्रो. अशिम कुमार घोष ने कहा कि टीआईटीएस जैसी संस्थाएं तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा के भविष्य की दिशा निर्धारित कर रही हैं। यहां का अनुशासन, अनुसंधान भावना और उद्योग से जुड़ाव इसे अद्वितीय बनाता है। मैं चाहता हूं कि हमारे विद्यार्थी केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भावना से कार्य करें। यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्ति नहीं, बल्कि ज्ञान को कर्म में रूपांतरित करने का अवसर है।
कनाडा ने कसे वीजा नियम, विदेशी छात्रों और पर्यटकों पर बढ़ेगी सख्ती
8 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा ने अपने वीजा नियमों को काफी सख्त बना दिया है। सभी अधिकारियों को नए नियमों का सही तरह से पालन करने का आदेश दिया गया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय छात्रों, काम करने पहुंचे श्रमिकों और पर्यटकों के लिए कनाडा में रहना मुश्किल हो सकता है।
कनाडा ने वीजा नियमों को कड़ा करते हुए अधिकारियों को वीजा रद करने और परमिट की फिर से जांच करने की अनुमति दे दी है। 4 नवंबर को कनाडा ने इमिग्रेशन रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के नियमों में बदलाव करते हुए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।
क्या हैं नए नियम?
IRCC की नई गाइडलाइंस में घूमने, पढ़ने, काम या इलेक्ट्रानिक ट्रेवल के लिए कनाडा आने वाले लोगों के वीजा नियमों को विस्तार से लिखा दया है। नए नियमों के अनुसार, वीजा पर वन टाइम अप्रूवल अब लागू नहीं होगा, बल्कि इसे समय-समय पर रिन्यू करवाना होगा।
कनाडियन इमिग्रेशन कंसलटेंट (RCIC) गुरप्रीत ओशान के अनुसार, कनाड ने वीजा नियमों में बदलाव किया है, जो अस्थाई निवासियों पर लागू होगा। इस लिस्ट में स्टडी परमिट, वर्क परमिट और अस्थायी निवासी वीजा रखने वाले लोग शामिल हैं।
गुरप्रीत ओशान का कहना है
नए नियमों के तहत इमिग्रेशन अधिकारी वीजा परमिट जारी होने के बाद भी उसे रद कर सकते हैं। प्लेन में बैठने से पहले या कनाडायी बंदरगाह पर एंट्री करते समय यह एक्शन लिया जा सकता है।
किस पर होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, कनाडा की नई नीति का सबसे अधिक असर पेरेंट्स पर पड़ सकता है, जो समय-समय पर अपने बच्चों से मिलने के लिए कनाडा जाते हैं। नए नियमों के तहत अगर वो वीजा की अवधि खत्म होने से पहले नहीं लौटे, तो विजिटिंग वीजा रद हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर 2024 तक कुल 5 लाख 10 हजार भारतीय स्टडी वीजा पर कनाडा गए थे।
शेख हसीना का बड़ा हमला, मोहम्मद यूनुस पर लगाए तानाशाही के आरोप
8 Nov, 2025 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने यूनुस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूनुस प्रशासन पर नियंत्रण रखने में नाकाम साबित हुए हैं और उन्होंने आतंकवादी संगठनों से जुड़े इस्लामी समूहों को कट्टरपंथी विचारधाराएं फैलाने की खुली छूट दे दी है.
आवामी लीग की नेता हसीना ने द वीक पत्रिका में लिखे एक लेख में दावा किया कि हिज्ब उत-तहरीर जैसे उग्रवादी संगठन देश में दमन फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और आदिवासी समुदायों पर हमलों में तेजी आई है, कई घटनाएं 2016 के होली आर्टिजन कैफे हमले की याद दिलाती हैं.
यूनुस पर साधा निशाना
शेख हसीना ने कहा, “ये वही उग्रवादी ताकतें हैं जो 2016 में हुए होली आर्टिजन कैफे पर भयावह और घातक हमले जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं — वो समूह जिन्हें रोकने और खत्म करने के लिए हमने दिन-रात मेहनत की थी.” शेख हसीना पिछले साल अगस्त 2024 में देश में हुए तख्तापलट के बाद से भारत में रह रही हैं, उन्होंने यूनुस की अंतरिम सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, बिना जनमत (मतदान से मिली वैधता) वाले किसी भी राष्ट्रप्रमुख के अधीन सच्चा लोकतंत्र संभव नहीं है.
पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा किया कि बांग्लादेश में हत्या, बलात्कार, लूट, आगजनी और चोरी जैसे अपराध आम बात हो गए हैं और अपराधियों को कोई जवाबदेही नहीं झेलनी पड़ रही है.
“हिंदू-बौद्ध-ईसाई पर हुआ हमला”
हसीना ने कहा, “यूनुस प्रशासन के शासन के शुरुआती हफ्तों में हिंदू, बौद्ध, ईसाई और आदिवासी समुदायों पर हजारों हमलों की खबरें आईं. आज भी हमें हर हफ्ते मंदिरों, घरों और पूजा स्थलों के बिना वजह नष्ट किए जाने की रिपोर्टें सुनाई देती हैं.”
उन्होंने यूनुस पर आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने, लाखों लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करने और एक असंवैधानिक चार्टर लागू करने का आरोप लगाया, जिसका मकसद तानाशाही शासन को वैध ठहराना है.
अपने लेख में हसीना ने कहा कि बांग्लादेश, जो कभी धार्मिक एकता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए जाना जाता था, अब धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं, लड़कियों और उनकी पार्टी के समर्थकों के खिलाफ रोजाना होने वाली हिंसा से जूझ रहा है.
आवामी लीग पर लगाया प्रतिबंध
हसीना ने कहा, “सच्चा लोकतंत्र तब तक संभव नहीं है जब तक हमारे देश पर ऐसा नेता शासन कर रहा है जिसके पास जनादेश नहीं है, जिसने सबसे लोकप्रिय राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया है, करोड़ों नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया है और हमारे संविधान को एक असंवैधानिक चार्टर से खतरे में डाल दिया है.”
हसीना ने आरोप लगाया, “यह चार्टर बांग्लादेश के लोगों की आवाज नहीं सामने रखता. यह सिर्फ एक राजनीतिक हथकंडा है, जिसका मकसद सुधारों के नाम पर बढ़ती तानाशाही को वैध ठहराना है.” हसीना ने यूनुस की शासन शैली की आलोचना करते हुए कहा कि वो अपने प्रशासन पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं और शासन का अनुभव न होने की कमी आम बांग्लादेशियों को साफ दिखाई दे रही है.
अपने शासनकाल की कामयाबी गिनाई
हसीना ने कहा, “सच यह है कि यूनुस के पास असल में कोई नियंत्रण नहीं है.” अपने शासनकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए हसीना ने कहा, “हमारा जीडीपी 47 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 600 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे बांग्लादेश दुनिया की 35 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया. इसका ज्यादातर श्रेय आम बांग्लादेशी नागरिकों को जाता है, न कि राजनेताओं को.”
उन्होंने आगे कहा, “लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया, महिलाएं बड़ी संख्या में कार्यबल का हिस्सा बनीं, हमारे विदेशी मुद्रा भंडार उस स्तर तक पहुंच गए, जिसकी पहले कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.” हसीना ने कहा कि बांग्लादेश को सच्चे अर्थों में भागीदारी वाले चुनावों की परंपरा स्थापित करनी चाहिए.
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