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इजराइल में सख्त कानून: फिलिस्तीनी आरोपियों को 90 दिन में फांसी का प्रावधान
1 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। इजराइल की संसद नैसेट ने एक बेहद सख्त और विवादास्पद कानून पारित किया है, जिसके तहत फिलिस्तीनी आरोपियों को आतंकवादी गतिविधियों या इजराइली नागरिकों की हत्या के मामलों में 90 दिनों के भीतर फांसी दी जा सकेगी।
नए कानून के अनुसार, दोषी ठहराए गए व्यक्ति को अपील करने का अधिकार नहीं होगा, और सजा सुनाए जाने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर उसे लागू किया जाएगा। हालांकि अदालत को विशेष परिस्थितियों में उम्रकैद की सजा देने का विकल्प भी रखा गया है।
यह विधेयक इत्तमार बेन ग्विर द्वारा आगे बढ़ाया गया था। बिल पास होने के बाद उन्होंने और अन्य सांसदों ने संसद में शैंपेन खोलकर जश्न मनाया। बेन ग्विर ने कहा, जो यहूदियों की हत्या करेगा, वह सांस नहीं ले सकेगा।
दो अलग-अलग कानूनों पर बढ़ा विवाद
इस कानून को लेकर सबसे बड़ा विवाद यह है कि वेस्ट बैंक में रहने वाले फिलिस्तीनियों और इजराइली यहूदियों पर अलग-अलग कानूनी व्यवस्था लागू होती है। फिलिस्तीनियों पर मिलिट्री कानून, जबकि यहूदी बस्तियों में रहने वालों पर सिविल कानून लागू होता है। ऐसे में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग सजा की संभावना बढ़ गई है।
मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष का विरोध
कई मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को भेदभावपूर्ण और नस्लीय बताते हुए इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह कानून फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्ती को बढ़ावा देगा और न्याय प्रणाली में असमानता पैदा करेगा। वहीं, विपक्षी नेता यायर लापिद ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए इसे हमास के सामने झुकने जैसा बताया।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती
कानून पारित होने के तुरंत बाद नागरिक अधिकार संगठनों ने इजराइल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इसे असंवैधानिक करार देते हुए रद्द करने की मांग की है। गौरतलब है कि बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले इस बिल का विरोध किया था, लेकिन बाद में अपना रुख बदलते हुए अंतिम मतदान में इसका समर्थन किया। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि इसे सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच संतुलन के सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है।
बैंक ने तय किया 686 करोड़ का मुआवजा, एपिस्टीन केस की पीड़ितों के लिए राहत
31 Mar, 2026 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन।अमेरिका में चर्चित जेफ्री एपिस्टीन सेक्स कांड से जुड़े मामले में बैंक ऑफ अमेरिका ने प्रभावित पीड़ितों को करीब 686 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मुआवजे के तौर पर देने पर सहमति जताई है। यह भुगतान उन लोगों के लिए होगा, जो वर्ष 2008 से 2019 के बीच कथित शोषण का शिकार हुए थे और जिन्होंने बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि बैंक ने एपिस्टीन से जुड़े खातों और लेन-देन में संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज किया, जिससे उसे वित्तीय लाभ हुआ। पीड़ितों की ओर से कहा गया कि यदि समय रहते उचित निगरानी की जाती, तो शोषण की घटनाओं को रोका जा सकता था। मामले में संघीय अदालत में समझौते का प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर न्यायाधीश की अंतिम मंजूरी आवश्यक होगी।
बताया जा रहा है कि यह बैंक द्वारा ऐसे मामलों में किया गया तीसरा बड़ा समझौता है। समझौते के तहत पात्र पीड़ितों को दावों की समीक्षा के बाद मुआवजा वितरित किया जाएगा। इस फैसले को पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम माना जा रहा है, हालांकि बैंक ने किसी भी प्रकार की कानूनी गलती स्वीकार नहीं की है।
ट्रंप ने दिया शांति का संकेत, होर्मुज पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं होने पर भी युद्ध स्थगित
31 Mar, 2026 11:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप अब इस सैन्य संघर्ष को खत्म करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, भले ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) पूरी तरह से दोबारा न खुले। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि इस अहम तेल मार्ग को तत्काल खोलना अब अमेरिकी जीत के लिए अनिवार्य शर्त नहीं माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने करीबियों और सहयोगियों से चर्चा के दौरान संकेत दिए हैं कि युद्ध की प्राथमिकताओं को अब नए सिरे से परिभाषित किया गया है।
कुछ समय पहले तक अमेरिका के लिए होर्मुज जलमार्ग को मुक्त कराना एक शीर्ष प्राथमिकता थी, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग की घेराबंदी के कारण वैश्विक बाजार में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन अब इस लक्ष्य से पीछे हटता नजर आ रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्यों को बदल दिया है। अब ट्रंप का मानना है कि यदि ईरान की समग्र सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया जाता है, तो इसे ही एक बड़ी सफलता के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
अमेरिका का नया फोकस अब तीन मुख्य लक्ष्यों पर केंद्रित है- पहला, ईरान की नौसैनिक क्षमता को इस स्तर तक नुकसान पहुँचाना कि वह भविष्य में चुनौती न दे सके, दूसरा, उसकी मिसाइल शक्ति को कम करना और तीसरा, भविष्य में समुद्री रास्तों को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह घटाना। अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति के बाद युद्ध को धीरे-धीरे समाप्त किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन अब सीधे और लंबे सैन्य अभियान के बजाय कूटनीतिक दबाव और रणनीतिक प्रहारों के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना एक अत्यंत जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाना और तेल टैंकरों को निरंतर सुरक्षा प्रदान करना होगा, जिससे युद्ध लंबे समय तक खिंच सकता है।
अमेरिका ने चेताया ईरान को, कहा- समझौता करो वरना बड़े हमले होंगे
31 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन|ईरान को लेकर दुनिया की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। इस बयान के साथ ही अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं। इस्राइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बीच यह बयान ऐसे समय आया है, जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच चुका है और हालात तेजी से बदल रहे हैं पीट हेगसेथ ने पेंटागन में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ईरान में अब नया शासन है और उसे पहले से ज्यादा समझदारी दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौते के लिए तैयार हैं और उसकी शर्तें ईरान को पहले से पता हैं। लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान इन शर्तों को नहीं मानता, तो अमेरिकी सेना और ज्यादा ताकत के साथ हमला जारी रखेगी।
क्या ईरान में सच में सत्ता परिवर्तन हुआ है?
हेगसेथ के मुताबिक, पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को सत्ता दी गई है। अली खामेनेई करीब चार दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। हालांकि मोजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वास्तव में नया शासन पूरी तरह स्थापित हो चुका है या स्थिति अभी भी अस्थिर है।
क्या अमेरिका ईरान से बातचीत भी कर रहा है?
अमेरिका ने दावा किया है कि वह ईरान के नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है। लेकिन यह साफ नहीं है कि ईरान की ओर से बातचीत कौन कर रहा है। इस वजह से कूटनीतिक स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है।
क्या अमेरिका सैन्य कार्रवाई और तेज करेगा?
हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो अमेरिकी सेना और ज्यादा आक्रामक कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों में कमी आई है। वहीं अमेरिका ने 200 से ज्यादा डायनामिक स्ट्राइक किए हैं। इन हमलों में रियल टाइम जानकारी के आधार पर नए लक्ष्य तय किए गए और उन्हें निशाना बनाया गया।
जमीनी हालात क्या संकेत दे रहे हैं?
हेगसेथ के अनुसार अमेरिकी हमलों से ईरानी सेना का मनोबल टूट रहा है। उन्होंने कहा कि कई कमांड बंकर तबाह कर दिए गए हैं और कई नेता छिपने को मजबूर हो गए हैं। बिजली, पानी और कम्युनिकेशन जैसी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे ईरानी सेना में भगदड़ और निराशा बढ़ रही है।
अमेरिका का कहना है कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले दिन बेहद अहम होंगे। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सैनिक इस लड़ाई को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और वे इसे आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास विकल्प बढ़ रहे हैं, जबकि ईरान के विकल्प कम होते जा रहे हैं|
इस्फ़हान में अमेरिकी एयर स्ट्राइक: 1,000 किलोग्राम बंकर बस्टर बम गिराया गया
31 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है और हाल के हफ्तों में यह और तेज हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां और बयानबाजी लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े सैन्य और परमाणु ठिकाने पर हमला कर स्थिति को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में करीब 10 हजार किलोग्राम बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे इलाके में जबरदस्त विस्फोट और आग देखी गई। इस घटना का भयानक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है।
बेहद अहम सैन्य केंद्र को बनाया निशाना
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस्फहान में स्थित गोला-बारूद सुविधा को निशाना बनाया गया, जो ईरान के लिए बेहद अहम सैन्य केंद्र माना जाता है। यह क्षेत्र ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर से भी जुड़ा हुआ है। हमले में बड़ी संख्या में पेनिट्रेटर म्यूनिशन का उपयोग किया गया, जो जमीन के अंदर छिपे ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम होते हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई धमाके और आग की लपटें दिखाई देती हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वहां मौजूद हथियारों के कारण सेकेंडरी ब्लास्ट भी हुए।
सबसे ताकतवर बमों में शामिल बंकर बस्टर बम
बंकर बस्टर बम खास तरह के हथियार होते हैं जिन्हें मजबूत और जमीन के नीचे बने ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया जाता है। ये बम पहले कंक्रीट या चट्टानों को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं। सबसे ताकतवर बमों में मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर शामिल है, जिसे बोइंग कंपनी ने विकसित किया है। यह बम जीपीएस गाइडेंस के जरिए सटीक निशाना साधता है। हालांकि इस्फहान हमले में अपेक्षाकृत छोटे बंकर बस्टर का इस्तेमाल हुआ, लेकिन इनका उद्देश्य भी गहराई में छिपे सैन्य ढांचे को खत्म करना ही था।
कुछ ही घंटों पहले ईरान ने किया था हमला
इस हमले के कुछ ही घंटों पहले ईरान ने दुबई के पास एक कुवैती ऑयल टैंकर को निशाना बनाया था, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन तेल रिसाव की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह इस सैन्य अभियान को जल्द खत्म करने के लिए तैयार हैं, भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुला न हो। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका फिलहाल ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमता को कमजोर करने पर ध्यान दे रहा है और आगे कूटनीतिक दबाव बनाने की योजना बना रहा है।
एशिया में नई जंग की आहट: जापान ने चीन की दहलीज तक तैनात कीं लंबी दूरी की मिसाइलें
31 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। एक ओर जहाँ पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ जंग ने दुनिया को दहला रखा है, वहीं अब सुदूर पूर्व एशिया में भी एक नया और खतरनाक सैन्य मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। जापान ने अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए आक्रामक अंदाज में लॉन्ग-रेंज मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है, जिसका सीधा निशाना चीन का मुख्य भूभाग है। जापान के अपग्रेडेड टाइप-12 मिसाइल सिस्टम, जिनकी मारक क्षमता अब 1000 किलोमीटर तक बढ़ाई जा चुकी है, चीन के रणनीतिक ठिकानों तक वार करने में सक्षम हैं।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के हालिया संकेतों ने बीजिंग की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ताइवान के खिलाफ चीन की किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब जापान सैन्य स्तर पर दे सकता है। जापान की नई योजना में राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में संशोधन कर मानवरहित घातक हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों के जरिए अपनी सैन्य शक्ति को कई गुना बढ़ाना शामिल है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।
इन मिसाइलों की तैनाती कुमामोटो प्रान्त के कैंप केंगुन में की जा रही है, जहाँ भारी-भरकम मिसाइल लॉन्चर्स को आधी रात के अंधेरे में बेहद गोपनीय तरीके से पहुँचाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह गुपचुप तरीके से की गई सैन्य गतिविधि कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़ी रणनीतिक चेतावनी है। सरकार द्वारा पहले से कोई सूचना न दिए जाने के कारण स्थानीय स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है, लेकिन टोक्यो ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब आक्रामक तैयारी ही एकमात्र विकल्प है।
कुमामोटो के गवर्नर ताकाशी किमुरा ने इस गोपनीयता पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस महत्वपूर्ण तैनाती के बारे में मीडिया रिपोर्टों से पता चला, जो निराशाजनक है। इसके जवाब में क्षेत्रीय रक्षा ब्यूरो ने घोषणा की है कि 31 मार्च को पूर्ण तैनाती से पहले स्थानीय प्रतिनिधियों को उपकरणों की प्रदर्शनी के लिए आमंत्रित किया जाएगा, हालांकि किसी सार्वजनिक चर्चा की योजना नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने चीन के बढ़ते खतरे को देखते हुए इस तैनाती के कार्यक्रम को तय समय से एक साल पहले ही क्रियान्वित करने का फैसला लिया था। मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित यह टाइप-12 मिसाइल अपनी मूल 200 किलोमीटर की क्षमता से पांच गुना अधिक शक्तिशाली हो चुकी है। जापान द्वारा दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में यह सैन्य घेराबंदी ऐसे समय में की जा रही है जब ताइवान के आसपास चीन की गतिविधियां चरम पर हैं। जापान ने ओकिनावा, इशिगाकी और मियाको जैसे द्वीपों पर पहले ही पीएसी-3 इंटरसेप्टर तैनात कर दिए हैं और आने वाले वर्षों में योनागुनी द्वीप पर मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात करने की योजना है।
चोरों ने मौके का फायदा उठाकर घर में घुसकर चोरी की
31 Mar, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। सांपला मार्ग पर स्थित महावीर कॉलोनी में दिन में ही घुसकर चोरों ने सात लाख 20 हजार रुपये और आठ लाख के गहने चोरी कर लिए। घर में मौजूद दो भाइयों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पड़ोस में गई उनकी मां वापस आई तो गेट पर लगा ताला खुला मिला जिससे चोरी का पता चला। शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। पुलिस को दी शिकायत में हितेश ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से पाई गांव से आकर खरखौदा की महावीर कॉलोनी में रह रहा है। रविवार को वह और उनके भाई हिमांशु ऊपर चौबारे में सो रहे थे। सुबह करीब दस बजे उनकी मां बेबी घर के मेन गेट पर ताला लाकर पड़ोस में किसी काम से चली गईं। उन्होंने बताया कि जब उनकी मां 11 बजे के आसपास घर लौटीं तो मेन गेट पर लगा ताला खुला हुआ मिला। मां ने घर में आकर देखा तो सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी गायब थी। कमरों के ताले टूटे हुए थे। मां ने उन्हें आवाज देकर नीचे बुलाया। मां ने मंदिर वाले कमरे में जाकर देखा तो सारा सामान बिखरा हुआ था। वहीं, मंदिर के नीचे बने लॉकर को चेक किया तो उसमें रखे आठ लाख के सोने-चांदी के गहने और सात लाख 20 हजार रुपये गायब थे। चोरों ने करीब एक घंटे के अंदर न केवल मेन गेट का ताला खोला बल्कि मंदिर में बने लॉकर को भी खोलते हुए चोरी की वारदात को अंजाम दिया। वह पहचान में न आएं इसलिए घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी अपने साथ ले गए। शिकायत पर पुलिस ने चोरी की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। वहीं, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही चोरों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ईरान में तख्तापलट का ख्वाब देख रहे ट्रंप के खिलाफ ही लाखों लोग सड़कों पर उतरे
31 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। ईरान में तख्तापलट और बगावत का ख्वाब देख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में विरोध का सामना करना पड़ा रहा है। ‘नो किंग्स’ आंदोलन के तहत अमेरिका के 3,200 स्थानों पर 90 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। तानाशाही रवैये और युद्ध नीतियों के खिलाफ भड़का यह आक्रोश अब ट्रंप की कुर्सी के लिए खतरा बन गया है। अमेरिका में ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जन-आक्रोश की एक नई लहर देखने को मिली है। शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों समेत दुनिया के कई प्रमुख शहरों में नो किंग्स विरोध प्रदर्शन हुए। आयोजकों का दावा है कि यह अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों में से एक है।
इस बार के प्रदर्शनों के केंद्र में तीन मुख्य मुद्दे हैं- पिछले चार हफ्तों से ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का कड़ा विरोध। विशेष रूप से मिनेसोटा में संघीय एजेंटों द्वारा रेनी गुड और एलेक्स प्रेटी की मौत के बाद गुस्सा चरम पर है। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन निरंकुश तरीके से काम कर रहा है और संवैधानिक मर्यादाओं को चुनौती दे रहा है। यह आंदोलन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। देशभर में 3,200 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर हजारों की भीड़ ने लोकतंत्र बचाओ के नारे लगाए। वहीं मिनेसोटा में यह विरोध का प्रतीकात्मक केंद्र बना। यहां रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने गाना गाकर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जो अप्रवासन कार्रवाई में मारे गए थे। न्यूजर्सी में समृद्ध उपनगरीय इलाकों में भी ‘सॉकर मॉम्स’ और कामकाजी वर्ग सड़कों पर उतरा जो पारंपरिक रूप से राजनीति से दूर रहते थे। इस आंदोलन का नाम ही इसके उद्देश्य को स्पष्ट करता है कोई राजा नहीं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति ट्रंप की ‘कार्यकारी शक्तियों’ के बढ़ते उपयोग को राजशाही के समान मानते हैं। उनका तर्क है कि अमेरिका एक लोकतंत्र है जहां कानून सर्वोपरि है न कि कोई व्यक्ति।
रिपोर्ट के मुताबिक निश्चित रूप से यह प्रदर्शन आगामी मिड-टर्म चुनावों से पहले हो रहे हैं। न्यूजर्सी जैसे राज्यों में जहां रिपब्लिकन मजबूत थे अब मतदाता का डेमोक्रेटिक की तरफ झुकाव दिखा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपनगरीय क्षेत्रों में बढ़ता यह आक्रोश कांग्रेस पर रिपब्लिकन नियंत्रण को खत्म कर सकता है।
लंदन, पेरिस और रोम जैसे शहरों में भी ट्रंप विरोधी रैलियां निकाली गई। यह दर्शाता है कि अमेरिकी विदेश नीति खासकर ईरान युद्ध को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता और विरोध बढ़ रहा है। दुनिया भर के लोग दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। जहां एक ओर डेमोक्रेटिक सीनेटर बर्नी सैंडर्स और मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने इन प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया, वहीं व्हाइट हाउस ने इसे राजनीति से प्रेरित करार दिया है। लॉस एंजिल्स जैसे कुछ स्थानों पर झड़पें भी हुईं जहां पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कुल मिलाकर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।
इस फैसले को योजना में “यू-टर्न” के रूप में देखा जा रहा है
31 Mar, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ। हरियाणा में शिक्षा विभाग ने चिराग योजना को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए आय सीमा फिर से घटा दी है। पहले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दायरे को बढ़ाते हुए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा 1.80 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई थी, लेकिन अब विभाग ने इस फैसले को वापस लेते हुए दोबारा 1.80 लाख रुपये कर दिया है। इस फैसले के साथ ही योजना का दायरा काफी सीमित हो गया है। अब केवल वही छात्र प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले के पात्र होंगे, जिनके परिवार की सालाना आय 1.80 लाख रुपये या उससे कम है।
47,250 सीटों पर होंगे दाखिले, पीपीपी अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चिराग योजना के तहत 47,250 सीटें निर्धारित की हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) अनिवार्य किया गया है, जिसमें दर्ज सत्यापित आय को ही आधार माना जाएगा। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए नियमों के अनुसार दाखिला प्रक्रिया शुरू करें और पात्र बच्चों को ही लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। इस बदलाव के बाद अब योजना का फोकस फिर से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर केंद्रित हो गया है।
फिर आया सुप्रील लीडर मोजतबा खामेनेई का संदेश, ईराक के लोगों का किया शुक्रिया
31 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का एक मैसेज सामने आया है, लेकिन हमेशा की तरह, इस बार भी न तो उनकी कोई तस्वीर दिखी, न कोई वीडियो सामने आया और न ही उनकी आवाज सुनाई दी। बस एक कागज का टुकड़ा, जिसे उनका संदेश बताकर दुनिया के सामने पेश किया गया। इससे पहले भी जब उनका मैसेज आया था, तब भी ऐसे ही कागज का टुकड़ा देखने को मिला था। आखिर ईरान के सुप्रीम लीडर किसे शुक्रिया कह रहे हैं, उनकी सेहत पर किस तरह की चर्चा है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोजतबा खामेनेई ने ताजा मैसेज में इराक के धार्मिक नेताओं और वहां की जनता को धन्यवाद दिया है। मोजतबा ने इराक के लोगों को ईरान के खिलाफ हो रही आक्रामकता पर उनके स्पष्ट और मजबूत स्टैंड के लिए शुक्रिया कहा, लेकिन यह संदेश सीधे तौर पर नहीं दिया गया। ईरानी मीडिया के मुताबिक बगदाद में इराक की ‘सुप्रीम इस्लामिक असेंबली’ के स्पीकर और ईरानी राजदूत के बीच एक बंद कमरे में गुपचुप मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान यह ‘संदेश’ एक इराकी अधिकारी के हाथ में दिया गया।
मोजतबा खामेनेई हैं कहां और उनकी हालत क्या है? उनके जिंदा होने या पूरी तरह स्वस्थ होने पर दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों को भारी शक है। 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर पहली बार भीषण एयरस्ट्राइक की थी, तो उसी दिन मोजतबा के पिता और तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। हैरान करने वाली बात यह है कि एक महीना बीत जाने के बाद भी अयातुल्लाह अली खामेनेई को अब तक दफनाया नहीं गया है। इस रहस्यमयी खामोशी पर ट्रंप ने कुछ दिनों पहले कहा था कि मोजतबा खामेनेई या तो मर चुका है, या फिर उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब है, क्योंकि किसी ने भी उसकी कोई खबर नहीं सुनी है।
इजराइल ने बहुत पहले ही कसम खा ली थी कि मोजतबा सत्ता संभाले या न संभाले, वह इजरायली हिट-लिस्ट में सबसे ऊपर है। इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद और अमेरिकी ड्रोन्स आसमान में गिद्ध की तरह मोजतबा की एक झलक का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिका के विदेश विभाग ने ईरान के 10 बड़े नेताओं के सिर पर 10-10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है। इस लिस्ट में मोजतबा खामेनेई भी शामिल है। अगर मोजतबा अपनी बंकर से बाहर निकले, तो उन्हें पता है कि आसमान से अगली मिसाइल सीधे उनके सिर पर गिरेगी।
बता दें मार्च की शुरुआत में जब मोजतबा को आनन-फानन में ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, तब से लेकर आज तक सिर्फ उनके नाम से लिखे हुए ‘कागज के टुकड़े’ ही बाहर आ रहे हैं। इससे पहले भी उनके नाम से कई लिखित संदेश जारी किए जा चुके हैं, जिनमें सेना का हौसला बढ़ाने और इजराइल-अमेरिका को बर्बाद करने की बातें लिखी थीं, लेकिन राष्ट्रीय टेलीविजन पर उनका चेहरा एक बार भी नहीं दिखाया गया।
अंदर खड़े ट्रक पर भी गोलियां लगने से नुकसान हुआ
31 Mar, 2026 09:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर। रादौर के जठलाना क्षेत्र में स्थित इनेलो के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह की ट्रेनॉक्स लैमिनेट फैक्टरी पर सोमवार देर रात अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैला दी। हमलावरों ने फैक्टरी के मुख्य गेट को निशाना बनाते हुए करीब आठ राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान दो गोलियां फैक्टरी परिसर के अंदर खड़े एक ट्रक के सामने भी लगीं। जानकारी के अनुसार, घटना रात करीब 11 बजे की है। उस समय फैक्टरी के गेट पर सिक्योरिटी रूम में कर्मचारी मौजूद थे। तभी दो युवक, जिन्होंने अपने चेहरे काले कपड़े से ढके हुए थे, अचानक वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी की आवाज से मौके पर भगदड़ मच गई और फैक्टरी में काम कर रहे मजदूरों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने लगातार कई राउंड फायर किए और इसके बाद मौके से फरार हो गए। गनीमत रही कि इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जिस तरह से गोलियां फैक्टरी के अंदर तक पहुंचीं, उससे बड़ा हादसा हो सकता था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर सीआईए-1, सीआईए-2, थाना जठलाना पुलिस के अलावा जिला पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल भी पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने मौके से गोलियों के खाली खोल बरामद किए हैं और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फैक्टरी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। शुरुआती जांच में मामला आपसी रंजिश या डर फैलाने की मंशा से जुड़ा माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। घटना के बाद फैक्टरी क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कर्मचारियों में अभी भी भय का माहौल बना हुआ है।
ईरान का कुवैत के पानी प्लांट पर हमला, भारतीय की मौत, अब तक 8 भारतीयों की गई जान
31 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुवैत सिटी। कुवैत सरकार ने घोषणा की है कि सोमवार तड़के ईरान की ओर से किए गए हमले में कुवैत के एक बिजली और जल डिसेलिनेशन संयंत्र पर काम कर रहे एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई। इस घटना के साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में मारे गए भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय ने एक्स पर पुष्टि की कि ईरान के हमले में संयंत्र की एक सेवा इमारत को भी नुकसान पहुंचा और इसे खाड़ी राष्ट्र के खिलाफ ‘ईरानी आक्रमण’ की कड़ी निंदा की।
मंत्रालय ने कहा कि इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और इमारत को गंभीर क्षति पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन और तकनीकी प्रतिक्रिया टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके, साथ ही नुकसान को कम किया जा सके और संयंत्र के संचालन में बड़े व्यवधान से बचा जा सके। मंत्रालय ने जोर दिया कि ‘बिजली और जल अवसंरचना की सुरक्षा और स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और तकनीकी टीमें किसी भी आगे के जोखिम की आशंका के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं ताकि आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
यह घटना संयुक्त अरब अमीरात में हाल ही में हुई एक दुखद घटना के कुछ दिन हुई है, जिसमें पिछले गुरुवार को अबू धाबी में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जब एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया और मलबा गिरने की वजह से वह घायल हो गया था। भारतीय दूतावास ने कहा था कि वह ‘यूएई अधिकारियों के साथ निकटता से काम कर रहा है ताकि प्रभावित लोगों को सभी संभव समर्थन और मदद दी जा सके।
बता दें यह संघर्ष अब अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और यह तब शुरू हुआ जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इसके बाद, ईरानी बलों ने इजराइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे क्षेत्र में जनहानि हुई और अहम बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
जैश-ए-मोहम्मद को नुकसान: मसूद अजहर के भाई की मौत, ट्रेनिंग कैंपों की थी जिम्मेदारी
31 Mar, 2026 08:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan: पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. इसकी पुष्टि खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने की है. मोहम्मद ताहिर अनवर भी मसूद अजहर भी जैश की आतंकी गतिविधियों में भी सक्रिय रहता था. फिलहाल, मौत किन वजहों से हुई है, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है. इस घटना को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड पर हैं.मोहम्मद ताहिर अनवर की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन हर जगह उसके मौत की खबरें चलाई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर भी अनवर की मौत को लेकर मैसेज और पोस्ट खूब वायरल हो रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है. यह पोस्ट जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों की बताई जा रही है. जिसमें लिखा, ‘मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई हकीम मोहम्मद ताहिर अनवर का अल्लाह की मर्जी से इंतकाल हो गया है.’
जनाजे में शामिल होने की अपील
पोस्ट में आगे लिखा है, ‘ताहिर अनवर की नमाज-ए-जनाज आज रात 10:30 बजे बहावलपुर में जामिया उस्मान व अली के पास अदा की जाएगी. हकीम साहब बेहद नरम दिल और अच्छे इंसान थे. अल्लाह तआला उनकी पूरी तरह से मगफिरत फरमाए.’ इसके साथ ही जैश के आधिकारिक चैनल के जरिए लोगों से अपील की गई है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में जनाजे में शामिल होने के लिए पहुंचें. सूत्रों के मुताबिक, ताहिर अनवर को पाकिस्तान के बहावलपुर स्थित जैश मुख्यालय में दफनाया जाएगा.
अलर्ट मोड पर सुरक्षा एजेंसियां
जानकारी के अनुसार, ताहिर अनवर जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था. काफी लंबे समय से वह संगठन से जुड़ा रहा और कई बड़ी आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा. पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, तो उस दौरान मसूद अजहर के परिवार के करीब 10 सदस्यों की मौत हो गई थी. अब मसूद के भाई की भी मौत हो गई है, जो उसके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. फिलहाल, मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं.
जब खुले मंच से, ट्रंप ने कह दिया................उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एमबीएस उनकी इतनी चापलूसी कर सकते
31 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी में हुए हाई-प्रोफाइल निवेश शिखर सम्मेलन में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) को लेकर चौंकाने वाला बयान दे दिया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एमबीएस उनकी इतनी चापलूसी कर सकते हैं, लेकिन अब ऐसा करना पड़ रहा है। इस बयान का मंच भी खास था—सऊदी अरब के सोवरन वेल्थ फंड द्वारा समर्थित फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव, जिसमें दुनिया भर के निवेशक शामिल थे। ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका-सऊदी रिश्तों और खाड़ी क्षेत्र में शक्ति संतुलन की असली तस्वीर दिखाती है। इस मौके पर ट्रंप ने एमबीएस के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों और बातचीत का जिक्र किया, जिसमें क्राउन प्रिंस ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कदमों को जारी रखने की सलाह दी। रिपोर्ट के मुताबिक, एमबीएस ने ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने जैसे कड़े कदमों का सुझाव दिया। हालांकि, सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से इस बात से इंकार किया कि वह युद्ध को बढ़ावा दे रहा है और कहा कि वह शांतिपूर्ण समाधान और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
इस बयान के पीछे अमेरिका और सऊदी अरब के 80 साल पुराने गठजोड़ का संदर्भ भी है। 1945 में राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी.रूजवेल्ट और किंग अब्दुल अजीज की ऐतिहासिक बैठक से शुरू हुआ यह रिश्ता अमेरिका को सुरक्षा और सऊदी अरब को रणनीतिक स्थिरता देता है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से एमबीएस का मजाक उड़ाया, लेकिन उनकी टिप्पणियों से यह साफ है कि वे खाड़ी देशों के अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका के साथ मजबूती से खड़े रहे, यहां तक कि नाटो सहयोगियों से भी अधिक समर्थन दिखाया। यह बयान वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों पर असर डाल सकता है, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। ट्रंप की बेबाक टिप्पणी केवल व्यक्तिगत रिश्तों का खुलासा नहीं बल्कि अमेरिका-सऊदी रणनीतिक निर्भरता और मध्य पूर्व की जटिल राजनीतिक स्थिति का भी संकेत देती है। उनके इस बयान ने निवेशकों और राजनयिकों के लिए कई नई चुनौतियां और संभावनाएं पैदा कर दी हैं, और वैश्विक समुदाय की निगाहें अब खाड़ी क्षेत्र पर और अधिक केंद्रित हो गई हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप ने मंच से सार्वजनिक रूप से बताया कि एमबीएस उनके प्रति व्यक्तिगत रूप से चापलूसी कर रहे हैं, लेकिन साथ ही अमेरिका-सऊदी रणनीतिक सहयोग मजबूत बना हुआ है, और मध्य पूर्व में संतुलन बनाए रखने में दोनों देशों की भूमिका अहम है।
उड़ान से पहले ईरानी विमान हुआ तबाह, भारत आने वाला था—अमेरिका की भूमिका पर सवाल
31 Mar, 2026 07:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
US Airstrike in Iran: ईरान का एक जहाज (Mahan Air) मदद के लिए भारत आने वाला था. इस दौरान अमेरिका ने उस पर हवाई हमला कर दिया, जिसकी वजह से जहाज क्षतिग्रस्त हो गया. ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि जिस जहाज पर हमला किया गया है. उस विमान को 1 अप्रैल को नई दिल्ली के लिए उड़ान भरनी थी. हालांकि, ईरान के इस दावे को लेकर अमेरिकी अधिकारियों ने कोई बयान जारी नहीं किया है.ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया कि भारत जा रहे एक ईरानी नागरिक विमान को अमेरिका ने निशाना बनाया है. अमेरिका ने मशहद एयरपोर्ट पर खड़े विमान पर हवाई हमला किया है, जो भारत जाने वाला था. विमान सहायता सामग्री लेने के लिए 1 अप्रैल की सुबह 4 बजे दिल्ली पहुंचता.
अमेरिका ने कहां किया हमला?
ईरान के रजावी खुरासान प्रांत के मशहद में अंतरराष्ट्रीय मशहद एयरपोर्ट है. जो सैन्य और नागरिकों दोनो के लिए इस्तेमाल किया जाता है. सूत्रों की मानें तो जंग शुरू होने के बाद से ही यह एयरपोर्ट अमेरिकी सैनिकों के निशाने पर था. जिस पर सोमवार को अमेरिका ने हमला कर विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया. विमान 1 अप्रैल को दिल्ली आने वाला था. लेकिन उससे पहले ही अमेरिका ने एयरस्ट्राइक कर उड़ा दिया.
विमान 1 अप्रैल को आने वाला था भारत
महान एयरलाइन्स एक निजी कंपनी की ईरानी एयरलाइन है, जो कई देशों में उड़ाने संचालित करती है. जिसमेमं पश्चिम एशिया, मध्य एशिया, दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया और पूर्वी एशिया शामिल है. जंग की वजह से ईरान की हालत काफी खराब हो गई है. इसलिए मदद के लिए भारत से गुहार लगाई थी. भारत ने 18 मार्च को भी ईरान की मदद के लिए चिकित्सा सामग्री भेजी थी. 1 अप्रैल को फिर ईरानी विमान मदद के लिए भारत आने वाला था, लेकिन अमेरिका ने उड़ान भरने से पहले ही उड़ा दिया.
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