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बाबा वेंगा की खौफनाक भविष्यवाणी सच होने के करीब? अमेरिका-वेनेजुएला युद्ध क्या बनेगा तीसरे विश्व युद्ध की वजह
4 Jan, 2026 12:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Baba Vanga 2026 Predictions: फ्रांसीसी भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस और बुल्गारियन लेडी बाबा वेंगा की भविष्यवाणी एक बार फिर सही होती दिखाई दे रही है. उन्होंने अपनी भविष्यवाणी में कहा था कि 2026 में वैश्विक स्तर पर बड़े युद्ध होंगे. अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में 3 जनवरी की रात को बड़े पैमाने पर हमला कर दिया. इसके बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया. इसकी जानकारी खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शेयर की है. साल 2026 शुरू होते ही दो देशों के बीच हुई सैन्य कार्रवाई ने बाबा वेंगा की याद दिला दी. अब उनकी कही गई बात सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी.
बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की थी कि साल 2026 में दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध हो सकता है. यह भविष्य के लिए काफी विनाशकारी रहने वाला है. इस दौरान इंसान ही इंसान का दुश्मन बन जाएगा. धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर चौतरफा हिंसा देखने को मिलेगी. इससे दुनिया में तबाही का मंजर देखने को मिल सकता है. इसके अलावा उन्होंने समुद्र से जुड़े हादसों की भी बात कही थी.
बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच!
हाल ही में हुई वेनेजुएला की घटना बाबा वेंगा की भविष्यवाणी से बिल्कुल मेल खाती है. अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में हमला कर दिया. इसके बाद वहां के राष्ट्रपति मादुरो को और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया. अमेरिकी हमले में करीब 40 लोगों की जनहानि की खबर है. फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.
2026 को लेकर बाबा वेंगा की क्या है भविष्यवाणी?
बाबा वेंगा की 2026 की भविष्यवाणी के अनुसार, पूर्वी देशों के बीच चल रहा तनाव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है. इसका प्रभाव पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा. इसका असर कई पश्चिमी देशों तक पहुंचेगा. इस दौरान काफी उथल-पुथल और जान-माल की बड़ी हानि की संभावना है. इतना ही नहीं भविष्यवाणी के अनुसार, 2026 में रूस, चीन और अमेरिका जैसे देशों के बीच टकराव की स्थिति बनने की संभावना जताई गई है. अमेरिका और रूस के बीच सीधे टकराव का जिक्र किया गया है.
कैसे काम करती हैं स्पेशल डेल्टा फोर्स........निकोलस मादुरो और पत्नी को अपने साथ ले गई
4 Jan, 2026 11:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । वेनेजुएला की राजधानी काराकास को दहलाने के बाद अमेरिकी सेना उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उठकर अपने साथ ले गए है। अमेरिका की स्पेशल डेल्टा फोर्स ने कार्रवाई को इस तरह से अंजाम दिया कि वेनेजुएला में किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। एक ओर अमेरिकी डेल्टा फोर्स के फाइटर जेट्स ने वेनेजुएला के कई मिलिट्री बेस पर अचानक से हमला बोला और दूसरी तरफ सीक्रेट तरीके से मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया। ये वहीं डेल्टा फोर्स है, जिसने दुनिया के खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के सरगना अबु बक्र अल बगदादी को मौत के घाट उतारा था। डेल्टा फोर्स आज भी दुनिया की सबसे रहस्यमयी और खतरनाक स्पेशल यूनिट्स में मानी जाती है। इसकी अधिकांश जानकारी पब्लिक में भी नहीं आती। डेल्टा फोर्स अमेरिका की सशस्त्र सेनाओं की सबसे गोपनीय और हाईलेवल की स्पेशल मिशन यूनिट होती है। इस अलग-अलग समय पर कॉम्बैट एप्लिकेशंस ग्रुप (सीएजी), टास्क फोर्स ग्रीन, आर्मी कंपार्टमेंटेड एलिमेंट्स (एसीई) और सामान्य तौर पर सिर्फ ‘द यूनिट’ भी कहा गया है। इसकी असली पहचान और अस्तित्व को अमेरिकी सरकार ने कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, जो भी जानकारी सार्वजनिक है, वह पूर्व सदस्यों के बयानों पर आधारित है।
डेल्टा फोर्स का असली फोकस एंटी टेररिस्ट ऑपरेशंसन हैं, जिसमें हाई-वैल्यू टारगेट्स को पकड़ना या समाप्त करना और आतंकी नेटवर्क को तोड़ना शामिल है। हालांकि, यह यूनिट केवल काउंटर-टेररिज्म तक सीमित नहीं है। इस छापेमारी, तोड़फोड़, बंधक मुक्ति, विशेष निगरानी और खुफिया अभियानों जैसे कई प्रकार के मिशनों में तैनात किया जाता है। यह यूनिट जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (जेएसओसी) के ऑपरेशनल कंट्रोल में काम करती है, जबकि इसका प्रशासन यूएस आर्मी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड संभालता है। इसका हेडक्वॉर्टर नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग में है।
चीन से चले रहे तनाव के बीच ट्रंप ने दिया जापानी पीएम को अमेरिका आने का न्यौता
4 Jan, 2026 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फोन पर बातचीत में जापान की पीएम साने ताकाइची को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है। जापान के विदेश मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर में पदभार संभालने के बाद ताकाइची की यह अमेरिका की पहली यात्रा होगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने हालांकि अब तक इस बातचीत और निमंत्रण की पुष्टि नहीं की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब जापान और चीन के बीच संबंध तनावपूर्ण चल रहे हैं और क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका, जापान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ अप्रैल में ट्रंप की संभावित चीन यात्रा से पहले बीजिंग के साथ भी अपने संबंधों को स्थिर करने की कोशिश में जुटा है। अमेरिका को जापान का करीबी सहयोगी माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग ने इस सप्ताह ताइवान के तटवर्ती जलक्षेत्र में दो दिवसीय सैन्य अभ्यास किया था। शुक्रवार को जारी बयान में जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ताकाइची और ट्रंप ने इस साल प्रस्तावित यात्रा को संभव बनाने के लिए समन्वय करने पर सहमति जताई है। जापान की समाचार एजेंसी ने संकेत दिया है कि ताकाइची की अमेरिका यात्रा वॉशिंगटन में होने वाले वार्षिक ‘चेरी ब्लॉसम’ महोत्सव के दौरान हो सकती है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने निकोलस मादुरो को बताया नार्को-आतंकी
4 Jan, 2026 08:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्रवाई को लेकर उठ रहे अंतरराष्ट्रीय सवालों पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तीखा जवाब दिया है। वेंस ने साफ कहा कि मादुरो किसी भी सूरत में वैध राष्ट्राध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि अमेरिका में कई मामलों में आरोपित एक “नार्को-आतंकी” हैं, जिनके खिलाफ अमेरिकी अदालतों में गिरफ्तारी वारंट जारी हैं। उपराष्ट्रपति वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो को कई बार चेतावनी दी थी और “ऑफ-रैम्प” यानी सुधार का मौका दिया गया था। इन चेतावनियों में ड्रग तस्करी रोकने और अमेरिका से कथित रूप से चुराए गए तेल को लौटाने की मांग शामिल थी। लेकिन मादुरो ने इन सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया। वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आप कराकस के किसी महल में रहकर अमेरिका में ड्रग तस्करी के अपराधों से बच नहीं सकते।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रंप प्रशासन पूरे समय इस बात को लेकर स्पष्ट था कि अगर अवैध गतिविधियां बंद नहीं हुईं, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
न्यूयॉर्क के मेयर ने जेल में बंद उमर खालिद को लिखी चिट्ठी, यूएस सांसदों ने भी उठाई रिहाई की मांग
3 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। उमर खालिद साल 2020 से दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में यूएपीए के तहत जेल में हैं। हाल ही में दिसंबर में उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए संक्षिप्त अंतरिम जमानत मिली थी, जिसके बाद वे अब पुनः जेल वापस जा चुके हैं। इसी बीच, अमेरिका में भी उमर खालिद और अन्य मुस्लिम कार्यकर्ताओं की लंबी हिरासत को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी सांसद जेम्स पी. मैकगवर्न सहित आठ विधायकों ने भारतीय राजदूत को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। न्यूयॉर्क शहर के नवनिर्वाचित मेयर जोहरान ममदानी ने जेल में बंद भारतीय कार्यकर्ता उमर खालिद के प्रति अपना समर्थन जताते हुए उन्हें हाथ से लिखी एक भावुक चिट्ठी भेजी है।
भारतीय मूल के मुस्लिम नेता ममदानी ने 1 जनवरी 2026 को मेयर पद की शपथ लेने के साथ ही इस पहल के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। यह चिट्ठी उस समय सामने आई है जब उमर खालिद के साथी और परिवार के सदस्य उनकी लंबी हिरासत के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। अपनी चिट्ठी में मेयर ममदानी ने उमर खालिद के साहस की सराहना करते हुए लिखा कि वह अक्सर उनके उन शब्दों को याद करते हैं, जिनमें कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने की बात कही गई थी। ममदानी ने दिसंबर 2025 में अमेरिका यात्रा पर गए उमर के माता-पिता से मुलाकात के बाद यह नोट लिखा था। उन्होंने संदेश में स्पष्ट किया कि वे और उनके समर्थक उमर के बारे में सोच रहे हैं। इस पत्र को उमर की साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। यह ममदानी का उमर के प्रति पहला समर्थन नहीं है, इससे पहले 2023 में भी उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उमर की जेल से लिखी चिट्ठी पढ़ी थी और उन्हें नफरत के खिलाफ लड़ने वाला व्यक्तित्व बताया था। अमेरिकी सांसदों ने अपनी चिट्ठी में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मानवाधिकार संगठनों को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जो उमर को आतंकवाद से जोड़ते हों। उन्होंने भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का पालन करने और त्वरित सुनवाई या रिहाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। न्यूयॉर्क के मेयर और अमेरिकी सांसदों के इन कदमों ने उमर खालिद के मामले को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
मोबाइल से दूर होते ही बेचैनी? डॉक्टरों ने ‘नोमोफोबिया’ को लेकर किया सतर्क
3 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबू धाबी/दुबई। आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। यूएई में स्कूल बस से लेकर दफ्तर और घर तक, मोबाइल हर वक्त लोगों के हाथ में नजर आता है। काम, परिवार, सुरक्षा और दोस्तों से जुड़े रहने के लिए मोबाइल जरूरी बन गया है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल से जरूरत से ज्यादा जुड़ाव अब सेहत के लिए खतरा बन रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, मोबाइल फोन से दूर होते ही घबराहट या बेचैनी महसूस होना एक मानसिक स्थिति की ओर इशारा करता है, जिसे ‘नोमोफोबिया’ कहा जाता है। इसका मतलब है मोबाइल फोन के बिना रहने का डर। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च स्टडीज इन एजुकेशन में छपी एक स्टडी के अनुसार, अमेरिका में 94 प्रतिशत मोबाइल यूजर्स किसी न किसी रूप में इस समस्या से जूझ रहे हैं।
हालांकि, यह अध्ययन अमेरिका पर आधारित है, लेकिन यूएई के मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यहां भी ऐसे ही लक्षण तेजी से देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर लोग खुद यह नहीं समझ पाते कि उन्हें नोमोफोबिया है। यह बीमारी सीधे सामने नहीं आती, बल्कि इसके संकेत रोजमर्रा की परेशानियों में दिखते हैं।
अबू धाबी स्थित एनएमसी रॉयल हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉ. ओमर बिन अब्दुलअज़ीज ने बताया कि मोबाइल से दूरी होने पर लोगों को नींद न आना, चिड़चिड़ापन, चिंता, ध्यान लगाने में परेशानी और तनाव जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासतौर पर तब, जब फोन हाथ में न हो या नेटवर्क न मिले। डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या में पूरी तरह घुल-मिल गया है। देर रात तक फोन चलाना नींद की गुणवत्ता को खराब करता है और मानसिक तनाव बढ़ाता है।
ईरान में महंगाई के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा, हिंसा में छह लोगों की मौत
3 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में खराब आर्थिक स्थिति और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने अब उग्र रूप धारण कर लिया है। राजधानी तेहरान से शुरू हुआ यह असंतोष अब देश के ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों तक फैल गया है। गुरुवार को हालात उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम छह लोगों की जान चली गई। साल 2022 के बड़े जन-आंदोलन के बाद यह पहली बार है जब देश में इतने बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों के दौरान मौतें दर्ज की गई हैं।
आधिकारिक जानकारियों और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा की ये घटनाएं मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में हुईं जहां लुर समुदाय की घनी आबादी है। बुधवार को एक व्यक्ति की मौत के बाद गुरुवार को पांच अन्य लोगों ने अपनी जान गंवाई। लोरेस्तान प्रांत का अजना शहर हिंसा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में सड़कों पर आगजनी, गोलियों की आवाजें और सरकार विरोधी नारेबाजी साफ सुनी जा सकती है। हालांकि तेहरान में फिलहाल स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन की आग लगातार फैल रही है।
विशेषज्ञ इन प्रदर्शनों को 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद का सबसे बड़ा विरोध मान रहे हैं। हालांकि मौजूदा आंदोलन अभी उतना व्यापक नहीं है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का स्वर अब धीरे-धीरे विशुद्ध आर्थिक मांगों से हटकर सत्ता के खिलाफ होता जा रहा है। दूसरी ओर, सरकारी मीडिया इन घटनाओं पर लगभग मौन है और बहुत ही सीमित जानकारी साझा कर रहा है। 2022 की हिंसा के दौरान रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर हुई सख्ती के कारण भी स्थानीय स्तर पर सूचनाओं का प्रवाह धीमा है। जिस तरह से सुरक्षा बलों ने कार्रवाई शुरू की है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासन इस आंदोलन को कुचलने के लिए और भी कड़े कदम उठा सकता है, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है।
अफगानिस्तान में भारी बारिश और बाढ़ से भारी तबाही, अब तक12 की मौत
3 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। युद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए नई मुसीबत कुदरत के कहर के रूप में सामने आई है। देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और भारी बर्फबारी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण कई प्रांतों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस आपदा में 11 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि कई अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ का सबसे भीषण प्रभाव कपिसा, परवान, कंधार, हेलमंद, हेरात और बदख्शां समेत कई प्रमुख प्रांतों में देखा गया है। मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी रिहाइशी इलाकों में घुस गया है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1,859 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए हैं, जिससे हजारों परिवार कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुँचा है; करीब 209 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें पानी में बह गई हैं, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क मुख्य शहरों से कट गया है। बिजली गुल है और स्वच्छ पेयजल के साथ-साथ खाद्य सामग्री की आपूर्ति भी ठप हो गई है।
कृषि और पशुपालन पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इस बाढ़ ने करारा झटका दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 13,941 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे तैयार फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन रहे करीब 1,200 पशुओं की भी इस आपदा में मौत हो गई है। आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन खराब मौसम और कटे हुए रास्तों के कारण सहायता पहुँचाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2026 में देश की लगभग 2.19 करोड़ आबादी को मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता होगी। जलवायु परिवर्तन के कारण बार-बार आने वाले सूखे, भूकंप और अब इस भीषण बाढ़ ने हालात को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। साथ ही, पड़ोसी देशों से लौट रहे लाखों शरणार्थियों के कारण स्थानीय संसाधनों और बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि मानवीय साझेदार भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और आश्रय के लिए करोड़ों डॉलर की सहायता योजना पर काम कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान आपदा ने इन प्रयासों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती पेश कर दी है। आने वाले दिनों में यदि मौसम नहीं सुधरा, तो संकट और अधिक गहरा सकता है।
बांग्लादेश: उस्मान हादी की हत्या में जमात-ए-इस्लामी के अंदरूनी सत्ता संघर्ष का खुलासा
3 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश की राजनीति को झकझोर देने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर बड़ा राजनीतिक खुलासा सामने आया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह हत्या किसी बाहरी साजिश का नहीं, बल्कि जमात-ए-इस्लामी के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष का नतीजा हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि हादी की बढ़ती लोकप्रियता से संगठन के कट्टरपंथी नेतृत्व में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी खासकर युवाओं और छात्र वर्ग में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे। आगामी 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले वे एक मजबूत राजनीतिक फैक्टर बन चुके थे। उनका उभरता प्रभाव जमात की पारंपरिक राजनीति और पुराने नेतृत्व के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा था। इसी वजह से संगठन के भीतर एक गुट उन्हें “रास्ते से हटाने” के पक्ष में आ गया। बताया जा रहा है कि हादी की हत्या की साजिश ढाका स्थित जमात-ए-इस्लामी के कार्यालय में रची गई। सूत्रों का दावा है कि शुरुआत में हत्या की सुपारी एक करोड़ टका में तय करने की बात हुई थी, लेकिन रकम को लेकर संगठन के भीतर ही मतभेद उभर आए। एक धड़ा इसे बड़ी राजनीतिक बाधा बताते हुए ज्यादा रकम देने के पक्ष में था, जबकि दूसरा गुट खर्च कम रखने पर अड़ा रहा। इसी खींचतान के दौरान मामला अंदरूनी तौर पर लीक होने की बात कही जा रही है। शूटर को अलग से बड़ी रकम देने पर सहमति बनने का भी दावा है।
इस बीच, हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिशें भी की गईं। आरोप लगाया गया कि आरोपी भारत भागकर मेघालय में छिपे हैं, लेकिन इस थ्योरी के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। दुबई भागने की कहानी भी गढ़ी गई, पर वहां भी प्रमाणों का अभाव रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, कट्टरपंथी संगठनों के भीतर की दरार और सत्ता संघर्ष की तस्वीर पेश करता है।
'दक्षिण एशिया में भारत का नेतृत्व जरूरी', श्रीलंका विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदासा सेजानिए क्या कहा?
2 Jan, 2026 05:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीलंका में मुख्य विपक्षी पार्टी समगी जना बेलावेगया (एसजेबी) के राजनेता और विपक्ष के नेता सजिथ प्रेमदासा ने भारत के नेतृत्व को लेकर बात की है। एक इंटरव्यू में प्रेमदासा ने कहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने और पूरे दक्षिण एशिया में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए भारत का नेतृत्व आवश्यक है। कोलंबो में एक इंटरव्यू में प्रेमदासा ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित और श्रीलंका के राष्ट्रीय हित साफ तौर पर एक जैसे हैं, जो दोनों पड़ोसी देश आपसी सम्मान, समझ और रचनात्मक सहयोग की नींव बनाते हैं। भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बताते हुए प्रेमदासा ने कहा कि इस सच्चाई को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपने समर्थन को दोहराते हुए कहा कि यह मौजूदा वैश्विक शक्ति संतुलन को दिखाएगा।
प्रेमदासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय सरकार की हालिया नीतियों की तारीफ की, और कहा कि भारत ने आर्थिक कठिनाई और संकट के समय श्रीलंकाई लोगों का समर्थन करने के लिए प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत भारत-श्रीलंका संबंधों ने श्रीलंकाई लोगों की बुनियादी आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य और विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करके ठोस फायदे पहुंचाए हैं। साक्षात्कार के दौरान प्रेमदासा ने कहा, "क्षेत्र में भारत का नेतृत्व बहुत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सुरक्षा दोनों को बढ़ावा देने के लिए बहुत जरूरी है।" उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध फल-फूल रहे हैं और श्रीलंका के लिए मूल्य जोड़ना जारी रखे हुए हैं। दक्षिण एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर बात करते हुए प्रेमदासा ने बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता के महत्व पर जोर दिया, खासकर आने वाले चुनावों के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में स्थिरता लोकतंत्र को मजबूत करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि बांग्लादेशी लोगों की आवाज, आकांक्षाएं और संप्रभु अधिकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से दिखाए जाएं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे, जिसके परिणामस्वरूप लोगों की इच्छा की सच्ची झलक मिलेगी। जब उनसे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के SAARC को फिर से सक्रिय करने के आह्वान पर उनके विचारों के बारे में पूछा गया, तो प्रेमदासा ने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) जैसे बहुपक्षीय ढांचे शांति, बातचीत और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि SAARC ने ऐतिहासिक रूप से चर्चा, सहयोग और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है। समावेशी विकास पर जोर देते हुए प्रेमदासा ने कहा कि समृद्धि साझा होनी चाहिए और समानता, न्याय और निष्पक्षता जैसे सामाजिक लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कार्यात्मक सार्क क्षेत्रीय शांति, समृद्धि और दीर्घकालिक स्थिरता को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
'प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा'; ट्रंप ने ईरान को चेताया
2 Jan, 2026 01:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान । ईरान में आर्थिक संकट के बीच जनता सड़क पर उतर आई है। राजधानी तेहरान से लेकर देश के कई शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हैं। देश की मुद्रा में लगातार गिरावट, भारी महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर लोग उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की खबर सामने आ रही है, जिसमें कई लोगों के मारे जाने की खबर है। इस बीच ईरान में फैली अशांति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी है।
हिंसा के बीच डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (02 जनवरी) को कहा कि अगर ईरानी अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल करते हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह से तैयार है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में लिखा, "अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है और उन्हें बेरहमी से मारता है, जो कि उनकी आदत है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। हम पूरी तरह से तैयार हैं।'
विरोध प्रदर्शन के बीच अब तक सात लोगों की मौत
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी तेहरान में शुरू हुआ ये प्रदर्शन अन्य शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों ने कई सड़कों को ब्लॉक कर दिया है। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। प्रदर्शन की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार के दुकानदारों से हुई, जो धीरे धीरे देशव्यापी प्रदर्शन में बदल गया।
नए साल पर जयशंकर के लिए बलूचिस्तान से आया खुला पत्र, लिखा- पाकिस्तान को उखाड़ फेंको, हम भारत के साथ
2 Jan, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलूचिस्तान। पाकिस्तान के बलूचिस्तान के निर्वासित बलोच नेता मीर यार बलोच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है। इस ओपन लेटर में मीर यार बलोच ने भारत और बलूचिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों के बारे में बताते हुए सहयोग बढ़ाने की अपील की। उन्होंने बलूचिस्तान के छह करोड़ नागरिकों की ओर से भारत के 140 करोड़ लोगों को नए साल की शुभकामनाएं दीं।
बलोच नेता ने भारत के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का दिया हवाला
इस खुले पत्र में एक ओर मीर यार बलोच ने भारत और बलूचिस्तान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और वाणिज्यिक रिश्तों का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत से पाकिस्तान को जड़ से उखाड़ फेंकने की मांग भी कर डाली। बलोच नेता ने कहा कि इस मामले में बलूचिस्तान का हर नागरिक भारत के साथ है। इस खुले पत्र में बलोच नेता ने लिखा, हिंगलाज माता मंदिर जैसे पवित्र स्थल हमारी साझा विरासत के प्रतीक हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के लिए मोदी सरकार की तारीफ की
बलोच नेता ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की और मोदी सरकार की साहसिक और दृढ़ कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने लिखा, बलूचिस्तान के लोग बीते 69 वर्षों से पाकिस्तान का दमन झेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि इस गंभीर समस्या को जड़ से उखाड़ फेंका जाए और हमारे देश की संप्रभुता सुनिश्चित की जाए। चिट्ठी में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ पर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान की स्वतंत्र सेनाओं को जल्द ही मजबूत नहीं किया गया तो हो सकता है कि चीन यहां अपने सैनिक तैनात कर दे। बलूचिस्तान में चीनी सैनिकों की उपस्थिति भविष्य में भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए खतरा और चुनौती होगी।
जर्मनी में भारतीय छात्र की मौत, आग से बचने की कोशिश में अपार्टमेंट से कूदा; घर पर पसरा मातम
2 Jan, 2026 10:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक भारतीय छात्र की बुधवार की रात भीषण अग्निकांड में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उनके अपार्टमेंट में भीषण आग लगी। आग और घने धुएं से बचने की कोशिश में छात्र अपार्टमेंट की ऊपरी मंजिल से कूद गया और उसके सिर पर चोटें आईं। उसे पास के अस्पताल में ले जाया गया। लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की पहचान तेलंगाना के जंगांव जिले के मल्कापुर गांव निवासी रितिक रेड्डी (25 वर्षीय) के रूप में हुई है। संक्रांति के त्योहार पर उनका परिवार उनके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। लेकिन नए साल के पहले दिन यह हादसा हो गया। उनके निधन की खबर सुनकर घर शोक में डूब गया। परिवार अब उनके असामयिक निधन से सदमे में है। रिपोर्ट के मुताबिक, रितिक रेड्डी यूरोप विश्वविद्यालय से एमएस की पढ़ाई के लिए जून 2023 में जर्मनी के मैगडेबर्ग गए थे। उन्होंने 2022 में वाग्देवी इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक किया था। बताया जा रहा है कि रितिक ने दशहरा के समय छुट्टी को टाल दिया और योजना बनाई थी कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में संक्रांति के लिए घर लौटेंगे।जर्मनी के स्थानीय अधिकारी आग लगने के कारण की जांच कर रहे हैं। इसी बीच, रितिक का परिवार और उनके मित्र तेलंगाना से विदेश मंत्रालय (एमईए) और जर्मनी में भारतीय दूतावास से संपर्क कर रहे हैं, ताकि उनके शव को उनके घर गांव लाने की प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके। पिछले महीने जंगांव जिले की सहज रेड्डी उदुमला (24 वर्षीय महिला) की अमेरिका में घर की आग लगने के कारण मौत हो गई थी। सहज रेड्डी 2021 में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गई थीं। वह न्यूयॉर्क के अल्बानी में रह रही थीं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग पड़ोसी भवन से शुरू हुई और तेजी से सहज के घर तक फैल गई। बताया गया कि आग लगने के समय वह सो रही थीं और बाहर नहीं निकल पाईं।
नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका, बार में हुआ ब्लास्ट, कई लोगों के मारे जाने की आशंका
1 Jan, 2026 02:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका हुआ है. जिसमें कई लोगों की मौत की खबर आ रही है. यह हादसा उस दौरान हुआ जब बार में पार्टी चल रही थी और भारी भीड़ मौजूद थी. फिलहाल, मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है, जहां इलाज जारी है. पुलिस के अनुसार, यह धमाका गुरुवार की सुबह क्रैंस मोंटाना के लग्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट में हुआ. हालांकि अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि आखिर यह धमाका कैसे हुआ? स्विटजरलैंड मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई है और कई घायल हैं.
जश्न के बीच धमाका, कई लोगों की मौत
बता दें, हादसा उस दौरान हुआ जब बार में नए साल की पार्टी चल रही थी. ले कॉन्स्टेलेशन बार पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है. इसलिए यहां पर हमेशा भीड़ रहती है लेकिन नए साल की वजह से भीड़ पहले की अपेक्षा ज्यादा ही थी. अब इस हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिखाई दे रहा है कि धमाके के तुरंत बाद ही बार पूरी तरह से आग की लपटों में घिर गया. मौके पर काफी चीख-पुकार मच गई. इस घटना का वीडियो किसी राहगीर ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया. जो अब वायरल हो रहा है.
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस की टीम धमाके के बाद एक्टिव हो गई है और जांच में जुट गई है. दक्षिण-पश्चिमी स्विट्जरलैंड के वालिस कैंटन में पुलिस प्रवक्ता गेटान लैथियन ने बताया कि अभी तक धमाके की वजह साफ नहीं हो पाई है. पूरे मामले की जांच की जा रही है. जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि आखिर यह धमाका कैसे हुआ. फॉरेंसिक टीमें सबूत जुटाने का प्रयास कर रही हैं और बार में मौजूद लोगों से भी पूछताछ की जा रही है.
Switzerland Blast: नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका, बार में हुआ ब्लास्ट, कई लोगों के मारे जाने की आशंका
1 Jan, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Switzerland Blast: नए साल के जश्न के बीच स्विटजरलैंड में बम धमाका हुआ है. जिसमें कई लोगों की मौत की खबर आ रही है. यह हादसा उस दौरान हुआ जब बार में पार्टी चल रही थी और भारी भीड़ मौजूद थी. फिलहाल, मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया है, जहां इलाज जारी है.
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