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लंदन में भारतीय प्रतिभा को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच
2 May, 2026 04:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन में भारतीय सितारों का जलवा: मैडम तुसाद में शुरू हुआ 'आइकन्स ऑफ इंडिया' उत्सव, एक ही छत के नीचे दिखेंगे सिनेमा और क्रिकेट के 13 दिग्गज
लंदन| ब्रिटेन की राजधानी लंदन स्थित दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैक्स म्यूजियम 'मैडम तुसाद' में इस सप्ताह से एक भव्य भारतीय उत्सव का आगाज हुआ है। 'आइकन्स ऑफ इंडिया' नाम की इस विशेष प्रदर्शनी में भारतीय फिल्म जगत और क्रिकेट की 13 महान हस्तियों के मोम के पुतलों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। यह आयोजन भारतीय संस्कृति और वैश्विक मनोरंजन में भारत के बढ़ते प्रभाव का एक शानदार मेल है।
मई-जून तक चलेगा सितारों का मेला
म्यूजियम के प्रसिद्ध 'अवार्ड्स पार्टी जोन' को विशेष रूप से इस उत्सव के लिए तैयार किया गया है। पूरे मई और जून के महीने में यह हिस्सा भारतीय रंग-ढंग में रंगा नजर आएगा। यहाँ आने वाले पर्यटकों को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों के करीब जाने और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।
दुनियाभर से जुटाए गए भारतीय सितारे
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शामिल कई पुतले दुनिया के अलग-अलग देशों के मैडम तुसाद म्यूजियम से विशेष रूप से लोन पर मंगाए गए हैं:
विराट कोहली: बैंकॉक से लंदन पहुँचे।
ऐश्वर्या राय और रणबीर कपूर: न्यूयॉर्क म्यूजियम से लाए गए।
काजल अग्रवाल: सिंगापुर से पहली बार लंदन की गैलरी का हिस्सा बनीं।
इसके अलावा प्रशंसक दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, प्रियंका चोपड़ा, ऋतिक रोशन, कैटरीना कैफ और माधुरी दीक्षित जैसे चहेते सितारों के दीदार भी एक साथ कर सकेंगे।
सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण
मैडम तुसाद लंदन के जनरल मैनेजर स्टीव ब्लैकबर्न ने कहा, "बॉलीवुड और क्रिकेट की वैश्विक अपील बेमिसाल है। लंदन का इन दोनों क्षेत्रों के प्रति प्रेम साल-दर-साल बढ़ रहा है। हम इस जादू को अपने मेहमानों के लिए पेश करते हुए रोमांचित हैं।"
वहीं, लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस पहल की सराहना की है। उच्चायोग ने एक बयान में कहा कि यह प्रदर्शनी भारत की जीवंत भावना को लंदन के दिल में लाती है। यह आयोजन भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों और 'पीपल-टू-पीपल' कनेक्ट का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
कला और इतिहास का संगम
लगभग 200 साल पुराने इतिहास वाले मैडम तुसाद म्यूजियम ने अपनी पारंपरिक कलात्मकता और आधुनिक तकनीक के जरिए इन भारतीय आइकन को जीवंत रूप दिया है। अब दुनिया भर के पर्यटकों के लिए लंदन का यह म्यूजियम भारतीय सिनेमा और खेल की एक भव्य गैलरी में तब्दील हो चुका है।
नौसेना प्रमुख का म्यांमार दौरा, रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा
2 May, 2026 02:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्री सुरक्षा: म्यांमार के 4 दिवसीय दौरे पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, हिंद महासागर में भारत की रणनीति होगी मजबूत
नेप्यीडॉ: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 2 मई से 5 मई 2026 तक म्यांमार की आधिकारिक यात्रा पर हैं। चार दिनों के इस महत्वपूर्ण दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और म्यांमार के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करना और समुद्री क्षेत्र में साझा सुरक्षा हितों को बढ़ावा देना है।
सैन्य और कूटनीतिक बैठकों का दौर
एडमिरल त्रिपाठी अपने प्रवास के दौरान म्यांमार के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। इन मुलाकातों में मुख्य रूप से निम्नलिखित चर्चाएँ शामिल होंगी:
रणनीतिक संवाद: म्यांमार के सेना प्रमुख जनरल ये विन ऊ और रक्षा मंत्री जनरल यू हटुन आंग के साथ सुरक्षा समीकरणों पर मंथन।
नौसेना सहयोग: म्यांमार नौसेना प्रमुख एडमिरल ह्टीन विन के साथ परिचालन समन्वय (Operational Synergy) बढ़ाने और सहयोग के नए आयामों पर चर्चा।
प्रमुख कार्यक्रम और निरीक्षण
नौसेना प्रमुख का यह दौरा केवल बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सैन्य प्रतिष्ठानों का जमीनी अवलोकन भी शामिल है:
वे म्यांमार नौसेना के सेंट्रल नेवल कमांड और नेवल ट्रेनिंग कमांड का दौरा करेंगे।
नंबर-1 फ्लीट के निरीक्षण के साथ-साथ शहीद सैनिकों के स्मारक पर जाकर श्रद्धासुमन भी अर्पित करेंगे।
ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण (Capacity Building) और तकनीकी सहयोग पर विशेष फोकस रहेगा।
भारत-म्यांमार: समुद्री सुरक्षा के साझेदार
दोनों देशों के बीच नौसैनिक संबंध काफी गहरे हैं, जो इस दौरे से और अधिक सुदृढ़ होंगे।
संयुक्त अभ्यास: दोनों नौसेनाएँ नियमित रूप से IMNEX और IMCOR जैसे अभ्यास आयोजित करती हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा: हाइड्रोग्राफी सर्वे और पोर्ट विजिट के माध्यम से दोनों देश हिंद महासागर की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं।
दौरे का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) और 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए म्यांमार के साथ तालमेल बिठाना भारत की समुद्री रणनीति का एक अहम हिस्सा है। एडमिरल त्रिपाठी की यह यात्रा क्षेत्र में भारत की सशक्त उपस्थिति और कूटनीतिक गंभीरता को दर्शाती है।
युद्ध का व्यापार पर वार, फुटवियर इंडस्ट्री को भारी झटका
2 May, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़ फुटवियर उद्योग पर संकट: खाड़ी युद्ध के चलते उत्पादन गिरा आधा, 10 हजार करोड़ की चपत
बहादुरगढ़। भारत का प्रमुख नॉन-लेदर फुटवियर केंद्र, बहादुरगढ़, इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। सालाना करीब 70 हजार करोड़ रुपये का कारोबार करने वाला यह उद्योग अंतरराष्ट्रीय तनाव और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण गंभीर संकट में है।
उत्पादन की रफ्तार हुई धीमी
बहादुरगढ़ में देश का लगभग 60 प्रतिशत नॉन-लेदर फुटवियर तैयार होता है, लेकिन मौजूदा हालात ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है:
आधा रह गया उत्पादन: सामान्य दिनों में यहाँ रोजाना एक से सवा करोड़ जोड़ी जूते-चप्पल बनते थे, जो अब घटकर मात्र 50 लाख जोड़ी रह गए हैं।
बंद पड़ी मशीनें: फैक्टरियों में काम ठप होने के कगार पर है। कई उद्यमियों को अपने प्लांट की आधी मशीनें बंद रखनी पड़ रही हैं।
क्यों गहराया संकट?
उद्योग विशेषज्ञों और फैक्ट्री मालिकों के अनुसार, इस मंदी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
सप्लाई चेन और कच्चा माल: युद्ध के कारण विदेशों से आने वाले कच्चे माल की आवक रुक गई है और तैयार माल भेजने के रास्ते प्रभावित हुए हैं।
मजदूरों का पलायन: गैस की किल्लत और अनिश्चित भविष्य के डर से यहाँ काम करने वाले करीब 40 प्रतिशत श्रमिक अपने गांवों को लौट गए हैं।
बढ़ती लागत: ऊर्जा संकट और कच्चे माल की महंगाई ने उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे हर रोज लाखों का घाटा हो रहा है।
उद्यमियों का दर्द: रोज़ाना हो रहा लाखों का नुकसान
फुटवियर पार्क एसोसिएशन के वरिष्ठ उपप्रधान नरेंद्र छिकारा का कहना है कि एक महीने से अधिक समय से उत्पादन आधा रहने के कारण नुकसान का आंकड़ा 10 हजार करोड़ के पार पहुँच गया है। स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा।
उद्यमी मुकेश (MIE पार्ट-A): "जहाँ हम रोज़ाना 1,000 जोड़ी फुटवियर बनाते थे, अब 500 पर सिमट गए हैं। हर दिन 10 हजार रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।"
उद्यमी सुभाष जग्गा: "लेबर की भारी कमी है। उत्पादन 50% रह गया है और नुकसान लाखों में पहुँच रहा है।"
भविष्य की अनिश्चितता
बहादुरगढ़ में करीब 2,500 फैक्टरियां हैं, जिनसे ढाई से तीन लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। जानकारों का मानना है कि अगर आज भी हालात सुधरते हैं, तो सप्लाई चेन को पटरी पर आने में कम से कम एक महीना लगेगा। वहीं, घर लौट चुके श्रमिकों की वापसी गर्मी के मौसम के बाद ही संभव लग रही है।
कर्नाल में सनसनी, बदमाश ने कैश के लिए सेल्समैन को धमकाया
2 May, 2026 01:14 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तरावड़ी में पेट्रोल पंप पर लूट की कोशिश: सेल्समैन की बहादुरी से भागे बदमाश, हवाई फायरिंग से मचा हड़कंप
तरावड़ी (करनाल)। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के किनारे स्थित चौधरी पेट्रोल पंप पर शनिवार तड़के बाइक सवार बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम देने की कोशिश की। हालांकि, कर्मचारियों की मुस्तैदी के कारण आरोपी बिना कुछ हाथ लगे मौके से फरार हो गए।
वारदात का घटनाक्रम
पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह एक युवक बिना नंबर प्लेट वाली काली मोटरसाइकिल पर पेट्रोल पंप पहुंचा।
सामान्य व्यवहार: शुरुआत में युवक ने बिल्कुल सामान्य ग्राहक की तरह व्यवहार किया और सेल्समैन सुरेश कुमार से 100 रुपये का पेट्रोल डलवाया। उसने पेट्रोल के पैसे भी चुका दिए।
अचानक हमला: जैसे ही सेल्समैन पैसे लेकर अंदर केबिन की ओर मुड़ा, बदमाश उसके पीछे गया और अचानक उस पर पिस्तौल तान दी। आरोपी ने जान से मारने की धमकी देकर सारा कैश सौंपने को कहा।
बहादुरी ने पलटी बाजी
सेल्समैन सुरेश कुमार डरा नहीं और उसने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी का हाथ झटक दिया।
हवाई फायरिंग: हाथ झटकने के दौरान पिस्तौल से गोली चल गई, जो गनीमत रही कि हवा में चली और किसी को नहीं लगी।
मदद के लिए शोर: गोली की आवाज और सुरेश का शोर सुनकर अंदर से दूसरा कर्मचारी नरेश कुमार भी बाहर की तरफ भागा। खुद को घिरता देख और शोर मचते देख बाइक सवार बदमाश तुरंत मौके से भाग निकला।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही तरावड़ी पुलिस टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
खोल बरामद: पुलिस को घटनास्थल से कारतूस का एक खोल मिला है, जिसे कब्जे में ले लिया गया है।
सीसीटीवी की जांच: थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपी की पहचान कर उसे जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।
8.6 अरब डॉलर के हथियार चार देशों को देने की तैयारी, US में हलचल
2 May, 2026 01:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला, खाड़ी देशों को 8.6 अरब डॉलर के हथियार बेचेगा अमेरिका; ईरान पर युद्ध 'विराम' का दावा
वाशिंगटन: अमेरिकी प्रशासन ने पश्चिम एशिया में अपने रणनीतिक दबदबे को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने अपने चार प्रमुख सहयोगी देशों—इस्राइल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 8.6 अरब डॉलर (लगभग 72,000 करोड़ रुपये) से अधिक के अत्याधुनिक हथियार बेचने का प्रस्ताव दिया है। विशेष बात यह है कि यह निर्णय अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की अनिवार्य समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए लिया गया है।
हथियारों के सौदे में क्या है खास?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन रक्षा सौदों में मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीक शामिल हैं:
प्रिसिजन गाइडेड वेपन्स: सटीक लक्ष्य भेदने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियाँ।
मिसाइल डिफेंस रिप्लेनिशमेंट: हवाई हमलों और मिसाइलों से बचाव के लिए रक्षा तंत्र की आपूर्ति।
बैटल कमांड सिस्टम: एक एकीकृत युद्ध कमान प्रणाली, जो युद्ध क्षेत्र में त्वरित निर्णय लेने में सक्षम है।
"ईरान के साथ युद्ध समाप्त": ट्रंप का कांग्रेस को पत्र
इस रक्षा सौदे के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों को एक औपचारिक पत्र लिखकर सूचित किया है कि ईरान के साथ चल रहा सैन्य संघर्ष अब 'समाप्त' हो चुका है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से दोनों देशों के बीच कोई गोलाबारी नहीं हुई है।
युद्ध शक्तियों का विवाद: यह पत्र असल में 1973 के 'वार पावर्स रेजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के कानूनी पेंच को सुलझाने की कोशिश है। इस कानून के तहत, बिना संसद की मंजूरी के शुरू की गई सैन्य कार्रवाई को 60 दिनों के भीतर खत्म करना अनिवार्य होता है। ट्रंप ने दावा किया कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब पूरी तरह थम चुका है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का बड़ा दावा
पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां अंदरूनी कलह व्याप्त है और यह स्पष्ट नहीं है कि सत्ता की असली बागडोर किसके हाथ में है। ट्रंप ने दावा किया:
हालिया संघर्षों के बाद ईरान की नौसेना और वायुसेना काफी कमजोर हो चुकी है।
ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उनके द्वारा दिए गए वर्तमान प्रस्ताव संतोषजनक नहीं हैं।
अमेरिका शांतिपूर्ण कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है, तो 'सैन्य विकल्प' अभी भी खुला रखा गया है।
गरनाला गोलीकांड पर मंत्री का एक्शन, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश
2 May, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला गोलीबारी कांड: अनिल विज ने परिजनों को बंधाया ढांढस, एसपी को आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी के निर्देश
अंबाला। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज शनिवार सुबह अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल पहुंचे। यहाँ उन्होंने मृतक गुरप्रीत सिंह के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई
मंत्री अनिल विज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए घटना की जानकारी साझा की:
गौ तस्करी का मामला: बीती रात गौ तस्कर गायों को लेकर भाग रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस की दो पीसीआर टीमों ने उनका पीछा शुरू किया।
फायरिंग की चपेट में आया युवक: पीछा करने के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर गोलियां चलाईं। इसी बीच गांव गरनाला का निवासी गुरप्रीत सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी बाद में मौत हो गई।
पोस्टमार्टम का इंतजार: विज ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पूरी तरह साफ होगा कि गोली किसकी तरफ से चली और किसे लगी।
एसपी को फोन पर कड़े निर्देश
अस्पताल परिसर से ही अनिल विज ने पुलिस अधीक्षक (SP) से फोन पर बात की और मामले की जांच तेज करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि:
वारदात में शामिल सभी आरोपियों को बिना देरी किए गिरफ्तार किया जाए।
घटनास्थल से जुड़े तमाम साक्ष्य जुटाए जाएं और कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन हर संभव कदम उठाए।
परिजनों को मदद का भरोसा
मृतक के परिवार से मिलकर अनिल विज ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और आरोपियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।
कनाडा की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: खालिस्तानी तत्वों से सुरक्षा को खतरा
2 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा की सुरक्षा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: खालिस्तानी तत्वों को माना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
ओटावा| कनाडा की सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने वर्ष 2025 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद में पेश की है, जिसमें देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से माना गया है कि कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी तत्व देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के लिए लगातार खतरा पैदा कर रहे हैं।
हिंसक एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं चरमपंथी
इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में मौजूद कुछ खालिस्तानी समूहों की गतिविधियां एक हिंसक चरमपंथी एजेंडे को हवा दे रही हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये तत्व कनाडाई संस्थानों का उपयोग करके धन जुटाते हैं, जिसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों के लिए किया जाता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी राहत की बात कही गई है कि साल 2025 में इन समूहों से जुड़ा कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है।
कनिष्क बम विस्फोट की 40वीं बरसी का जिक्र
खुफिया रिपोर्ट में कनाडा के इतिहास के सबसे काले अध्याय, एअर इंडिया उड़ान 182 (कनिष्क) बम विस्फोट का भी उल्लेख किया गया है। पिछले साल इस भीषण हमले की 40वीं बरसी थी। रिपोर्ट ने दोहराया कि इस हमले के संदिग्ध कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथी समूहों के सदस्य थे। इस आतंकी हमले में 329 लोगों की जान गई थी, जिनमें से अधिकांश कनाडाई नागरिक थे।
भारत और अन्य देशों पर हस्तक्षेप के आरोप
कनाडाई खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में चीन, रूस, भारत, ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों पर कनाडा की आंतरिक राजनीति में दखल देने का आरोप लगाया है। भारत के संदर्भ में रिपोर्ट कहती है कि वहां की सरकार ने अपने हितों की रक्षा के लिए कुछ समुदायों और नेताओं के साथ संपर्क बनाए हैं, जिसे कनाडा 'ट्रांसनेशनल रेप्रेशन' (सीमा पार दमन) के रूप में देख रहा है। रिपोर्ट यह भी मानती है कि भारत अपनी आंतरिक स्थिरता के लिए खालिस्तानी अलगाववाद को एक बड़े खतरे के रूप में देखता है।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दौर में सुधरते रिश्ते
गौर करने वाली बात यह है कि यह रिपोर्ट 2025 के शुरुआती खुफिया आकलनों पर आधारित है। लेकिन, कनाडा में नेतृत्व परिवर्तन और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद से भारत और कनाडा के संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति:
आरसीएमपी का बयान: रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के प्रमुख माइक ड्यूहेम ने हाल ही में कहा है कि वर्तमान में कनाडा के लिए किसी विदेशी एजेंट से कोई सीधा खतरा साबित नहीं हुआ है।
बदला हुआ रुख: कनाडाई अधिकारियों का अब मानना है कि भारत कनाडा की धरती पर किसी भी हिंसक अपराध में शामिल नहीं है।
तनाव का अंत: पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर जो राजनयिक गतिरोध पैदा हुआ था, वह अब धीरे-धीरे संवाद और सुधार की ओर बढ़ रहा है।
60 दिन की समयसीमा पूरी, ट्रंप ने संसद को दी जानकारी
2 May, 2026 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा एलान—"ईरान के साथ युद्ध अब समाप्त", कांग्रेस को पत्र लिख दी सैन्य कार्रवाई रोकने की जानकारी
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। राष्ट्रपति ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को पत्र लिखकर सूचित किया कि निर्धारित 60 दिनों की कानूनी समयसीमा पूरी होने के साथ ही शत्रुता समाप्त कर दी गई है।
7 अप्रैल के बाद से शांति का दावा
सांसदों को संबोधित अपने पत्र में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार की गोलीबारी या सैन्य झड़प नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "28 फरवरी 2026 को शुरू हुई शत्रुता अब औपचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है।"
'वार पावर्स रिजोल्यूशन' और कानूनी मजबूरी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका के 1973 के 'वार पावर्स रिजोल्यूशन' (War Powers Resolution) के कानूनी पेच को सुलझाने की कोशिश है।
इस कानून के तहत राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई की सूचना कांग्रेस को देनी होती है।
बिना संसद की विशेष मंजूरी के ऐसी कार्रवाई को 60 दिनों के भीतर समाप्त करना अनिवार्य है।
2 मार्च को कांग्रेस को दी गई जानकारी के बाद, यह समयसीमा 1 मई को समाप्त हो रही थी।
ईरान के प्रस्तावों से असंतुष्ट हैं ट्रंप
युद्ध समाप्ति की घोषणा के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के रुख पर अनिश्चितता जताई है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "वे (ईरान) समझौता तो करना चाहते हैं, लेकिन उनके वर्तमान प्रस्तावों से मैं संतुष्ट नहीं हूँ। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है।"
ईरानी नेतृत्व पर साधा निशाना
ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को "असंगठित और बिखरा हुआ" करार दिया। उन्होंने दावा किया कि तेहरान के भीतर भारी आंतरिक मतभेद हैं, जिसके कारण बातचीत की स्थिति कमजोर हो रही है। ट्रंप के अनुसार:
ईरान का नेतृत्व अंदरूनी कलह से घिरा हुआ है।
यह स्पष्ट नहीं है कि वहां सत्ता की बागडोर असल में किसके हाथ में है।
नेतृत्व में आपसी सहमति की कमी के कारण कूटनीतिक वार्ता जटिल हो रही है।
कूटनीति बनाम सैन्य विकल्प
कड़ी बयानबाजी के बीच ट्रंप ने मानवीय आधार पर कूटनीतिक समाधान को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा, "क्या हमें पूरी तरह हमला कर इसे खत्म कर देना चाहिए या समझौते की कोशिश करनी चाहिए? मैं समझौते के पक्ष में हूँ।" हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला रखा गया है।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इस्राइल ने शुरू किया था साझा सैन्य अभियान।
1 मई को सैन्य कार्रवाई की 60 दिनों की कानूनी समयसीमा हुई पूरी।
अमेरिकी प्रशासन ने कूटनीतिक और सैन्य, दोनों रास्ते खुले रखने की बात कही।
ईरान का दावा: होर्मुज बनेगा क्षेत्रीय स्थिरता का आधार
2 May, 2026 08:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान का रणनीतिक दांव: होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र के लिए घोषित किए 'नए नियम', विदेशी शक्तियों को दी चेतावनी
तेहरान: मध्य पूर्व (West Asia) में जारी भारी तनाव के बीच ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने दक्षिणी तट से सटे समुद्री क्षेत्रों के लिए नए 'परिचालन नियम' (Rules of Engagement) जारी किए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन कदमों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और फारस की खाड़ी जैसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों पर अपना प्रभुत्व और कड़ा नियंत्रण स्थापित करना है।
IRGC नौसेना की सख्त निगरानी
आईआरजीसी की नौसेना कमान ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वह ईरान की लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और उससे सटे जलक्षेत्र की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रभुत्व का विस्तार: ईरान का लक्ष्य इन जल क्षेत्रों को अपनी शक्ति के स्रोत के रूप में स्थापित करना है।
रणनीतिक नियंत्रण: होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल गुजरता है, वहाँ ईरान अपनी निगरानी और नियंत्रण को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।
सर्वोच्च नेता का कड़ा संदेश: "विदेशी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं"
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने इस क्षेत्र में मौजूद विदेशी शक्तियों, विशेषकर अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने निर्देश जारी करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी में उन विदेशी शक्तियों के लिए कोई स्थान नहीं है जो क्षेत्र की शांति को भंग करना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय सुरक्षा का जिम्मा केवल यहाँ के देशों का होना चाहिए।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बताया 'कागजी शेर'
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच खामेनेई ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तीखा हमला बोला है:
रक्षा क्षमता पर सवाल: उन्होंने अमेरिकी ठिकानों को 'कागजी शेर' करार देते हुए उनकी सुरक्षा क्षमताओं का मजाक उड़ाया।
क्षेत्रीय सहयोगियों को चेतावनी: ईरान ने उन क्षेत्रीय देशों और सहयोगियों पर भी निशाना साधा है जो इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल का समर्थन कर रहे हैं।
बढ़ता तनाव और नाकाबंदी की स्थिति
13 अप्रैल को कूटनीतिक वार्ताओं की विफलता के बाद से अमेरिका द्वारा ईरान की घेराबंदी की कोशिशें तेज हुई हैं। इसके जवाब में ईरान ने समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर वैश्विक व्यापार और सुरक्षा समीकरणों को चुनौती दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के ये 'नए नियम' आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तनाव को और अधिक बढ़ा सकते हैं।
क्षेत्र: होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी।
दायरा: 2,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर IRGC का कड़ा पहरा।
उद्देश्य: विदेशी हस्तक्षेप को समाप्त करना और क्षेत्रीय जल क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण।
एपस्टीन के प्रोजेक्ट को लेकर नया विवाद, मिडल ईस्ट कनेक्शन सामने आया
1 May, 2026 11:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के बारे में सामने आए नए दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी मचा दी है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन मध्य पूर्व के देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का सलाहकार बनना चाहता था। अपनी इस महात्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए उसने न केवल प्रभावशाली लोगों से कूटनीतिक संबंध बनाए, बल्कि खुद को इस्लामी कला और संस्कृति के प्रति बेहद समर्पित दिखाने का प्रयास भी किया। दस्तावेजों से पता चलता है कि वह सऊदी अरब के बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की फिराक में था और इसके लिए उसने कई वर्षों तक जमीन तैयार की थी।
निजी द्वीप पर बनाई 'नकली मस्जिद': काबा के पवित्र 'किस्वा' का भी किया इस्तेमाल
रिपोर्ट में सबसे हैरान करने वाला खुलासा एपस्टीन के निजी कैरेबियाई द्वीप 'लिटिल सेंट जेम्स' को लेकर हुआ है। एपस्टीन ने वहां एक अनोखी इमारत बनवाई थी, जिसे वह खुद 'मस्जिद' कहता था। इस इमारत को सजाने के लिए उसने मक्का के पवित्र काबा के 'किस्वा' (कुरान की आयतों वाले रेशमी कपड़े) के हिस्से, उज्बेकिस्तान की प्राचीन टाइल्स और सीरियाई वास्तुकला से प्रेरित सोने का गुंबद जैसी दुर्लभ धार्मिक वस्तुओं का संग्रह किया था। हालांकि, जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह इमारत किसी धार्मिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि एक आर्ट प्रोजेक्ट के रूप में बनाई गई थी, जिसका उपयोग वह अरब देशों के सहयोगियों को प्रभावित करने के लिए करता था। साल 2017 में आए भीषण तूफान 'मारिया' के बाद इस ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जिसके साथ ही एपस्टीन के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का यह मायाजाल भी बिखरने लगा।
भरी सभा में ट्रंप पर सवाल, अमेरिकी सांसद का बयान चर्चा में
1 May, 2026 09:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन | वाशिंगटन में 'हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी' की बैठक के दौरान उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब डेमोक्रेटिक सांसद सारा जैकब्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानसिक स्थिति को लेकर सीधे सवाल दाग दिए। सैन डिएगो का प्रतिनिधित्व करने वाली जैकब्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से पूछा कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप कमांडर-इन-चीफ की जिम्मेदारी निभाने के लिए मानसिक रूप से पर्याप्त स्थिर हैं? अपनी दलील को पुख्ता करने के लिए उन्होंने ट्रंप के पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान किए गए विवादित सोशल मीडिया पोस्ट्स और एआई (AI) द्वारा निर्मित उस मीम का हवाला दिया, जिसमें ट्रंप को ईसा मसीह के रूप में दर्शाया गया था। जैकब्स ने तर्क दिया कि इस तरह का व्यवहार एक जिम्मेदार वैश्विक नेता की छवि के अनुकूल नहीं है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है।
रक्षा मंत्री का पलटवार: ट्रंप को बताया सबसे दूरदर्शी नेता, बाइडेन का दिया हवाला
सांसद जैकब्स के तीखे सवालों पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और इसे राष्ट्रपति पद का सीधा अपमान करार दिया। हेगसेथ ने ट्रंप का पुरजोर बचाव करते हुए उन्हें अमेरिका के इतिहास का सबसे तेज और दूरदर्शी कमांडर-इन-चीफ बताया। उन्होंने डेमोक्रेटिक सांसद पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए पलटवार किया और पूछा कि क्या उन्होंने इसी तरह की चिंताएं पिछले चार वर्षों के दौरान जो बाइडेन के स्वास्थ्य को लेकर जताई थीं? इस पर जैकब्स ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ट्रंप ही सत्ता के केंद्र में हैं और उनकी नीतियों व आचरण का प्रभाव सीधे तौर पर देश के सैन्य नेतृत्व पर पड़ता है। इस बहस ने एक बार फिर वाशिंगटन के सियासी गलियारों में राष्ट्रपति की कार्यशैली और उनके विरोधियों के बीच बढ़ती वैचारिक खाई को उजागर कर दिया है।
शांति वार्ता पर असर, होर्मुज मुद्दे को लेकर United Arab Emirates ने जताई चिंता
1 May, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: यूएई ने ईरान पर जताया अविश्वास, वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने से मंदी का खतरा
दुबई: पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की तमाम कोशिशें अब तक बेअसर साबित हुई हैं। इस बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे शांति वार्ताओं में गहरा अविश्वास साफ झलक रहा है। यूएई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
दुनिया की 20% तेल-गैस आपूर्ति पर संकट
पिछले दो महीनों से जारी जंग के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ईरानी नाकाबंदी की वजह से बंद पड़ा है।
अमेरिकी कार्रवाई: अमेरिकी नौसेना लगातार ईरानी कच्चे तेल के निर्यात को रोक रही है।
आपूर्ति बाधित: इस सैन्य गतिरोध के कारण दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है।
महंगाई का असर: इसके परिणामस्वरूप वैश्विक बाजार में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंका गहरा गई है।
युद्धविराम के बावजूद तनाव बरकरार
यद्यपि 8 अप्रैल से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन हालिया सैन्य गतिविधियों और नए हमलों की खबरों ने बाजार को डरा दिया है। ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया है और किसी भी हमले की स्थिति में 'व्यापक जवाबी कार्रवाई' की चेतावनी दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। इस बीच, मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने अगली वार्ता के लिए फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की है।
राजनयिक गतिरोध और अविश्वास की दीवार
यूएई के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गश ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता ही प्राथमिक गारंटर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की आक्रामकता को देखते हुए उसके एकतरफा समझौतों पर भरोसा करना मुश्किल है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया है कि बातचीत के तत्काल परिणामों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता साया
होर्मुज जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने की चिंताओं के बीच वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह मार्च 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
गठबंधन की तैयारी: अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों को 'मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट' गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
रुक-रुक कर हमले: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी ठिकानों पर 'लंबे और दर्दनाक' हमलों की धमकी दी है।
सहयोगियों का रुख: फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा है कि वे जलडमरूमध्य को खोलने में तभी मदद करेंगे जब संघर्ष पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
Zohran Mamdani की ब्रिटिश किंग से मुलाकात, कोहिनूर वापसी का मुद्दा उठा
1 May, 2026 07:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क | ब्रिटेन के किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने अपनी न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान बुधवार को 9/11 मेमोरियल का दौरा कर 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शाही जोड़े ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी से औपचारिक मुलाकात की। इस संक्षिप्त मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान तब खींचा, जब मेयर ममदानी ने मुलाकात से ठीक पहले सार्वजनिक रूप से यह संकेत दिया था कि यदि उन्हें किंग चार्ल्स के साथ निजी तौर पर संवाद का अवसर मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने का मुद्दा जरूर उठाएंगे। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे के बीच हुई इस छोटी सी बातचीत में मेयर ने अपनी बात रखी या नहीं, क्योंकि उनके कार्यालय ने इस संवेदनशील विषय पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
विवादों के केंद्र में कोहिनूर: 177 सालों से ब्रिटिश ताज की शोभा बना 'भारतीय रत्न'
कोहिनूर हीरा, जो वर्तमान में 'टावर ऑफ लंदन' में सुरक्षित है और ब्रिटिश शाही ताज का अहम हिस्सा माना जाता है, लंबे समय से भारत और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक विवाद का विषय रहा है। भारत ने बार-बार इस ऐतिहासिक रत्न पर अपना कानूनी और नैतिक दावा पेश करते हुए इसे वापस लौटाने की मांग की है। कोहिनूर के ब्रिटेन पहुंचने का इतिहास 1849 के 'द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध' से जुड़ा है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर अधिकार कर लिया था। उस समय सिख साम्राज्य के मात्र 10 वर्षीय शासक दलीप सिंह को 'लाहौर की संधि' पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी शर्तों के तहत यह बेशकीमती हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंपना पड़ा था। न्यूयॉर्क के मेयर की हालिया टिप्पणी ने एक बार फिर सदियों पुराने इस औपनिवेशिक विरासत के मुद्दे को वैश्विक मंच पर ताजा कर दिया है।
गैस की भारी कमी, पाकिस्तान में लोग जान जोखिम में डालकर कर रहे खाना तैयार
1 May, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची | पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर कराची इस समय ऊर्जा के भीषण संकट से जूझ रहा है, जहां रसोई गैस (LPG) की भारी कमी ने नागरिकों को जानलेवा जोखिम उठाने पर मजबूर कर दिया है। एआरवाई (ARY) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, कराची के ओरंगी टाउन और मोमिनाबाद जैसे इलाकों में लोग अब लोहे के सिलेंडरों के बजाय बड़े प्लास्टिक के गुब्बारों में गैस भरकर घरों में रख रहे हैं। अनियमित गैस सप्लाई के कारण जब भी कुछ देर के लिए पाइपलाइन में गैस आती है, लोग इन खास प्लास्टिक बैग्स को भर लेते हैं और फिर दिन भर इन्हीं से खाना पकाते हैं। स्थानीय बाजारों में ये खतरनाक प्लास्टिक बैग 1000 से 1500 रुपये में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस जुगाड़ को 'मोबाइल बम' की संज्ञा दी है, क्योंकि घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में घर्षण या मामूली सी चिंगारी भी एक भयानक विस्फोट का कारण बन सकती है।
ईरान-अमेरिका तनाव का असर: ऊर्जा संकट और सुरक्षा विशेषज्ञों की गंभीर चेतावनी
कराची में गैस का यह संकट ऐसे समय में गहराया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे पाकिस्तान जैसे देशों में गैस और तेल की किल्लत चरम पर पहुंच गई है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि घरों के भीतर गैस से भरे इन गुब्बारों को रखना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है। कराची में सालों से गैस की कम सप्लाई और भारी कटौती की समस्या बनी हुई है, लेकिन वर्तमान युद्ध जैसी स्थितियों ने आम लोगों के पास कोई सुरक्षित विकल्प नहीं छोड़ा है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि इन असुरक्षित तरीकों के कारण होने वाली संभावित जनहानि को रोका जा सके।
होर्मुज बंद होने का असर, खाड़ी में बदला ट्रेड का पूरा सिस्टम
1 May, 2026 02:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से आई एक खबर ने वैश्विक रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर 'USS हिगिंस' एशियाई समुद्र में तैनात रहने के दौरान भीषण आग की चपेट में आ गया। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में जहाज के इलेक्ट्रिकल सिस्टम और इंजन को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इसे एक 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' बताया है, लेकिन घटना की टाइमिंग और परिस्थितियों ने साजिश की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया पर इस आग को चीन की गुप्त कार्रवाई या मिडिल ईस्ट की जंग के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी महीने अमेरिका के दो अन्य विशाल विमानवाहक पोतों—USS ड्वाइट डी आइजनहावर और USS जेराल्ड आर फोर्ड—में भी रहस्यमयी तरीके से आग लगने की खबरें आई थीं, जिससे अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पश्चिम एशिया में गहराता संकट: UAE का यात्रा बैन और ट्रंप की नाटो को सेना वापसी की धमकी
बदलते वैश्विक हालातों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपने नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी करते हुए ईरान, लेबनान और इराक की यात्रा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विदेश मंत्रालय ने इन देशों में मौजूद अपने नागरिकों को तुरंत स्वदेश लौटने का निर्देश दिया है, जो क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आहट का संकेत माना जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए विवाद को जन्म देते हुए यूरोप से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने स्पेन और इटली में तैनात अमेरिकी सेना की संख्या कम करने पर विचार करने की बात कही है, क्योंकि उनके अनुसार इन देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का साथ नहीं दिया। ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला है। ट्रंप का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि मिडिल ईस्ट की जंग अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि इसने अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों (नाटो) के बीच भी एक गहरी कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है।
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