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बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ रही हिंसा: 24 घंटों में दो और हत्याओं से दहशत
7 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ जारी हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों के भीतर दो हिंदू व्यक्तियों की नृशंस हत्याओं ने पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ताजा घटनाओं में एक किराना व्यवसायी और एक बर्फ फैक्ट्री के मालिक सह पत्रकार को निशाना बनाया गया है। ये हत्याएं पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय के सदस्यों की लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग) की श्रृंखला की छठी कड़ी हैं, जिसने स्थानीय अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा और भय की गहरी लहर पैदा कर दी है।
पहली घटना सोमवार रात करीब 10 बजे नरसिंगड़ी जिले के पलाश उपजिला स्थित चोरसिंदूर बाजार में घटी। यहाँ अपनी किराना दुकान चलाने वाले 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि (जिन्हें मोनी चक्रवर्ती के नाम से भी जाना जाता है) पर अज्ञात हमलावरों ने उस समय हमला किया जब वे दुकान पर थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ प्रहार किए और फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल मणि को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। राजधानी ढाका के इतने निकट हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हमला पूरी तरह से धार्मिक पहचान के कारण किया गया था। इससे कुछ ही घंटे पहले सोमवार शाम करीब 6 बजे जशोर जिले के मणिरामपुर उपजिला में एक अन्य सनसनीखेज वारदात हुई। यहाँ के कोपालिया बाजार में 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। राणा प्रताप एक बर्फ फैक्ट्री के मालिक होने के साथ-साथ एक स्थानीय समाचार पत्र के कार्यकारी संपादक भी थे। बताया जा रहा है कि मोटरसाइकिल पर सवार कुछ हमलावर उनकी फैक्ट्री पहुंचे और उन्हें बातचीत के बहाने बाहर बुलाया। इसके बाद उन्हें एक सुनसान गली में ले जाया गया, जहाँ बहस के बाद उनके सिर में कई गोलियां मार दी गईं और उनका गला रेत दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से सात खाली कारतूस बरामद किए हैं और पुष्टि की है कि उनके सिर में तीन गोलियां लगी थीं।
पिछले 18 दिनों का घटनाक्रम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करता है। हिंसा का यह दौर 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर और जलाकर की गई हत्या से शुरू हुआ था। इसके बाद 24 दिसंबर को राजबारी में अमृत मंडल, 30 दिसंबर को गारमेंट फैक्ट्री में कार्यरत बजेंद्र बिस्वास और 31 दिसंबर को शरियतपुर में खोकन चंद्र दास पर जानलेवा हमले हुए, जिसमें खोकन की इलाज के दौरान मौत हो गई। हिंदू बौद्ध ईसाई ओइक्य परिषद जैसे संगठनों ने चेतावनी दी है कि कट्टरपंथी समूह अल्पसंख्यकों को डराने और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर करने के लिए सुनियोजित तरीके से हमले कर रहे हैं। इन हमलों की पृष्ठभूमि दिसंबर 2025 में एक कट्टरपंथी छात्र नेता की हत्या के बाद शुरू हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी बताई जा रही है, जिसने धीरे-धीरे सांप्रदायिक रंग ले लिया। वर्तमान अंतरिम सरकार के प्रशासन पर अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में विफल रहने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जहाँ सरकार कुछ मामलों को व्यक्तिगत रंजिश या आपराधिक घटना बता रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इसे धार्मिक कट्टरता से प्रेरित कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया है। भारत ने भी इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक गंभीर मानवीय मुद्दा बताया है। फिलहाल पूरे प्रभावित क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन समुदाय के भीतर व्याप्त असुरक्षा कम होने का नाम नहीं ले रही है।
वेनेजुएला में चुनाव के लिए दबाव नहीं बनाएगा अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप
7 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका वहां जल्दबाजी में चुनाव कराने के लिए कोई दबाव नहीं डालेगा। एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला इस समय एक टूटी हुई व्यवस्था और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, इसलिए चुनाव से पहले देश के ढांचे को फिर से खड़ा करना और व्यवस्था को स्थिर करना अनिवार्य है। निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुए हालातों पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अगले 30 दिनों में वहां चुनाव कराना संभव नहीं है क्योंकि वर्तमान जमीनी स्थितियां मतदान के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक लोग सुरक्षित महसूस न करें और मतदान करने की स्थिति में न हों, तब तक लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं है।
ट्रंप ने अमेरिका और वेनेजुएला के बीच युद्ध की संभावनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वाशिंगटन किसी देश के खिलाफ युद्ध में नहीं है, बल्कि उसका संघर्ष उन तत्वों के खिलाफ है जो नशीले पदार्थों की तस्करी करते हैं और अपनी जेलों से अपराधियों व मानसिक रोगियों को अमेरिका भेज रहे हैं। उन्होंने वेनेजुएला की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया, जिन्होंने देश को अपराध और आर्थिक तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया। गौरतलब है कि मादुरो को अमेरिकी कार्रवाई के दौरान पकड़ा गया था और उन पर नशीले पदार्थों की तस्करी तथा आतंकवाद से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वेनेजुएला के पुनर्निर्माण पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि देश के ऊर्जा क्षेत्र और तेल ढांचे को फिर से विकसित करने में अमेरिकी तेल कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनके अनुसार, यह कार्य 18 महीनों के भीतर पूरा किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण का आर्थिक बोझ मुख्य रूप से तेल कंपनियां ही उठाएंगी, जिसे वे भविष्य के राजस्व से वसूल सकेंगी। जब ट्रंप से सवाल किया गया कि फिलहाल वेनेजुएला का संचालन कौन कर रहा है, तो उन्होंने आत्मविश्वास के साथ स्वयं का नाम लिया। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो वहां के नेतृत्व के साथ निरंतर संपर्क में हैं। अंत में, राष्ट्रपति ने उन आलोचनाओं का भी जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने इस कार्रवाई के लिए अमेरिकी कांग्रेस की अनुमति नहीं ली। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को पूरी जानकारी थी और उन्हें कांग्रेस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि यदि सहयोग की प्रक्रिया विफल होती है, तो अमेरिका भविष्य में सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है, हालांकि उन्हें विश्वास है कि इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। फिलहाल अमेरिका का पूरा ध्यान वेनेजुएला में कानून-व्यवस्था की बहाली और उसकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है।
अमेरिकी अदालत में गरजे निकोलस मादुरो: खुद को बताया अपहृत राष्ट्रपति और युद्धबंदी
7 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच मैनहट्टन की अमेरिकी फेडरल कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान अदालत कक्ष का माहौल तब बेहद तनावपूर्ण हो गया जब मादुरो ने न केवल अपने ऊपर लगे नार्को-टेररिज्म के आरोपों को खारिज किया, बल्कि भरे कोर्ट में खुद को अपहृत राष्ट्रपति घोषित कर दिया। जेल की वर्दी और पैरों में बेड़ियां पहने मादुरो ने जज के सामने दावा किया कि उन्हें उनके देश से गैरकानूनी तरीके से अगवा कर अमेरिका लाया गया है।
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एल्विन हेलरस्टीन के समक्ष हुई इस पहली पेशी में मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस ने ड्रग्स तस्करी से जुड़े सभी चार गंभीर आरोपों में खुद को निर्दोष बताया। जैसे ही सुनवाई शुरू हुई और जज ने उनसे उनकी पहचान की पुष्टि करने को कहा, मादुरो ने संक्षिप्त उत्तर देने के बजाय स्पेनिश भाषा में जोर देकर कहा, मैं वेनेजुएला का निर्वाचित राष्ट्रपति हूं। मुझे काराकस में मेरे घर से जबरदस्ती पकड़ा गया और मेरा अपहरण किया गया है। इस पर जज ने उन्हें टोकते हुए कहा कि इन दलीलों को रखने के लिए उनके पास भविष्य में उचित समय और स्थान होगा। लगभग 40 मिनट तक चली इस नाटकीय सुनवाई के दौरान मादुरो काफी आक्रामक और मुखर नजर आए। उन्होंने खुद को एक युद्धबंदी के रूप में पेश किया। वहीं, उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के चेहरे पर चोट के कई निशान देखे गए, जिसे लेकर उनके वकील ने दावा किया कि 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के दौरान उनके साथ बदसलूकी की गई और उन्हें चोटें आईं। मादुरो के वकील ने फिलहाल अदालत से जमानत की कोई मांग नहीं की है।
सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब दर्शकों के बीच बैठे एक व्यक्ति ने मादुरो पर चिल्लाते हुए कहा कि उन्हें अपने कर्मों की कीमत चुकानी होगी। इस पर मादुरो विचलित नहीं हुए और उसकी ओर मुड़कर दोबारा वही बात दोहराई कि वे एक अपहृत राष्ट्राध्यक्ष हैं। पूरी कार्यवाही के दौरान मादुरो एक पीले लीगल पैड पर नोट्स लेते रहे और उन्होंने जज से उन नोट्स को अपने पास रखने की अनुमति भी मांगी।अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख तय की है। सुनवाई खत्म होने के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को भारी सुरक्षा घेरे में वापस जेल भेज दिया गया। अंतरराष्ट्रीय जगत की निगाहें अब इस मुकदमे पर टिकी हैं, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी देश के शीर्ष नेता को इस तरह के सैन्य ऑपरेशन के बाद सीधे अमेरिकी अदालत में कठघरे में खड़ा किया गया है। यह मामला न केवल कानूनी बल्कि कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है।
मुझे पता है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल से पीएम मोदी का सम्मान करते हैं
7 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणी पर कहा कि भारत जैसे देश के साथ अनावश्यक तनाव से बचना चाहिए। मैरी ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे आगे बढ़ते रहें और भारत के सर्वोत्तम हित में सेवा करना जारी रखें। अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने मंगलवार को एक्स पर लिखा- मुझे पता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल से पीएम मोदी का सम्मान करते हैं, लेकिन दुख की बात है कि ट्रंप को भारत के प्रति अपने रवैये के बारे में गलत सलाह दी जा रही है। मैं इस बारे में राष्ट्रपति के लिए प्रार्थना कर रही हूं। भारत में विपक्ष की टिप्पणियों का जवाब देते हुए मैरी मिलबेन ने कहा कि पीएम मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप की हर टिप्पणी या धमकी का जवाब देने की जरूरत नहीं है। मोदी को सिर्फ भारतीय लोगों को खुश करने की जरूरत है। वे लंबी अवधि की कूटनीति समझते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मैरी मिलबेन ने कहा कि पीएम मोदी को सीनेटर लिंडसे ग्राहम जैसे लोगों पर भी ध्यान देने की जरूरत नहीं है। वह हममें से कई लोगों के लिए अमेरिका में अप्रासंगिक है। उन्होंने लिखा- पीएम नरेंद्र मोदी, रुसी राष्ट्रपति पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी और दुनिया के कई नेताओं को पता है कि नवंबर के मध्यावधि चुनाव तक सिर्फ 10 महीने बचे हैं। और अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस पर कंट्रोल कर लेते हैं, जिसकी संभावना है क्योंकि रिपब्लिकन लगातार कांग्रेस से रिटायरमेंट की घोषणा कर रहे हैं, तो वैश्विक भू-राजनीति में एक बिल्कुल नई बातचीत शुरू होगी। मैरी मिलबेन ने उम्मीद जताई कि डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस मध्यावधि चुनाव जीतने पर ध्यान देंगे और भारत जैसे दोस्तों के साथ बेवजह के तनाव से बचेंगे। अमेरिकी सिंगर ने अपने पोस्ट के आखिर में लिखा- पीएम मोदी आप आगे बढ़ते रहें। आप भारत के सबसे अच्छे हित में काम करते रहें। आपको इसी काम के लिए चुना गया था।
बता दें डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले दिन एक बयान में फिर से टैरिफ की धमकी दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि वाशिंगटन की नाराजगी के कारण भारत ने रूस से तेल खरीद में कटौती की है। ट्रंप के बयान के बाद भारत में कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए हैं।
ट्रंप को सीधी चुनौती: 'हिम्मत है तो मुझे पकड़ो', कोलंबियाई राष्ट्रपति के इस बयान से अमेरिका में मचा हड़कंप
6 Jan, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Colombian President Gustavo Petro: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दुनिया भर में माहौल तनावपूर्ण हो गया है. इसका सबसे ज्यादा असर लैटिन अमेरिका के देशों में देखने को मिल रहा है. अब कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्ताव पेट्रो ने अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती दी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आओ, मुझे ले जाओ, मैं इंतजार कर रहा हूं.
लैटिन अमेरिका में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई तेज की
यूएस ने लैटिन अमेरिका में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. इस मामले के बीच कोलंबिया राष्ट्रपति पेट्रो और ट्रंप के बीच टकराव अब चुनौती में बदल गया है. पेट्रो ने डोनाल्ड ट्रंप को खुले शब्दों में चुनौती दी है. उनकी ओर से ये तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिका ने स्पेशल फोर्स ऑपरेशन जरिए ड्रग्स तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार किया है. इसी कार्रवाई ने पूरी दुनिया में हलचल मची दी है.
मुझे धमकाओ मत- राष्ट्रपति पेट्रो
ट्रंप को दो टूक शब्दों में राष्ट्रपति पेट्रो ने कहा कि आओ, मुझे ले जाओ, मैं यहीं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं. मुझे धमकाओ मत, अगर तुम चाहते हो तो मैं यहीं इंतजार करूंगा. इसके साथ ही उन्होंने बिल्कुल साफ कर दिया कि उन्हें किसी भी तरह का सैन्य अभियान मंजूर नहीं है. पेट्रो ने ट्रंप पर वार करते हुए कहा कि मैं किसी भी तरह का हमला, मिसाइल अटैक या हत्या स्वीकार नहीं करता हूं. सिर्फ इंटेलिजेंस पर बात की जाएगी. यदि आपको बात करना है तो सामने आकर तथ्यों पर बात करो, झूठ के साथ नहीं.
ट्रंप ने दिए थे सैन्य कार्रवाई के संकेत
कोलंबिया राष्ट्रपति की ओर से तीखा बयान ट्रंप की उस टिपण्णी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कोलंबिया को लेकर सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए थे. डोनाल्ड ट्रंप ने कोलंबिया के शीर्ष नेतृत्व को सिक लीडर कहा था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कोलंबिया से कोकीन अमेरिका भेजी जा रही है. ट्रंप ने दावा करते हुए कहा था कि वह कोकीन बना रहा है और उसे यूएसए भेज रहा है, इसलिए उसे सावधान रहना चाहिए.
अमेरिका में प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश की सूची में शामिल नहीं भारत
6 Jan, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश के हिसाब से रैंकिंग के आंकड़ों की सूची सामने आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सूची में भारत का नाम नहीं है। सूची में भारत का नाम ना होना कोई सामान्य बात नहीं है। यह अमेरिका के बड़े प्रवासी माहौल में भारतीय प्रवासियों की खास आर्थिक प्रोफाइल को दिखाता है। ये अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा दिखाते हैं।
इस सूची में सबसे ऊपर नाम भूटान का है, और भूटानी प्रवासियों का अमेरिकी सरकार से मदद पाने की दर 81.4 प्रतिशत है। इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 फीसदी, सोमालिया 71.9 फीसदी और मार्शल आइलैंड्स 71.4 फीसदी के साथ हैं। कई दूसरे देशों में भी कल्याणकारी भागीदारी का स्तर ऊंचा है।
इस सूची में डोमिनिकन रिपब्लिक और अफगानिस्तान दोनों ही देशों का दर 68.1 फीसदी है। कांगो 66 फीसदी, गिनी 65.8 फीसदी और इराक 60.7 फीसदी पर हैं। इस समूह में खासतौर से कई सेंट्रल अमेरिकन, कैरिबियन और अफ्रीकी देश शामिल हैं। ग्वाटेमाला 56.5 फीसदी, सूडान 56.3 फीसदी और अल साल्वाडोर 55.4 फीसदी पर दिखाए गए हैं। होंडुरास 52.9 फीसदी पर है। बांग्लादेश 54.8 फीसदी पर लिस्टेड है। इसके अलावा, लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश शामिल हैं, जिसमें वेलफेयर में कम, लेकिन फिर भी उल्लेखनीय, भागीदारी है। आइवरी कोस्ट सूची में 49.1 फीसदी के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 फीसदी और अल्जीरिया 48.1 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं। सीरिया 48 फीसदी पर लिस्टेड है। जॉर्डन और लीबिया दोनों 47.8 फीसदी पर हैं। इथियोपिया 47.6 फीसदी, रवांडा 47.1 फीसदी और मोरक्को 46.6 फीसदी पर दिखाए गए हैं। पाकिस्तान 40.2 फीसदी और मिस्र 39.3 फीसदी पर शामिल हैं।
लेकिन भारत का दो पेज की सूची में कहीं भी नाम नहीं है। अमेरिका में प्रवासी और कल्याण के मुख्य राजनीतिक मुद्दे हैं, और भारत इनमें काफी चर्चा में रहता है। इसके बावजूद भी लिस्ट में इसकी गैर-मौजूदगी है। यह पता चला है कि भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में, खासकर तकनीक, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग में, एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। वे इनकम टैक्स रेवेन्यू में अहम योगदान देते हैं और सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स शुरू करने में शामिल रहे हैं।
भारत-बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ा
6 Jan, 2026 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजने का फैसला करने के बाद अब बांग्लादेश ने आईपीएल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी है। अंतरिम सरकार ने आईपीएल के प्रसारण पर रोक लगाने का फैसला किया है। आईपीएल 2026 की शुरुआत मार्च में होनी है।
भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद उस वक्त से गरमा गया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने कहा था। पूरे विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने से शुरू हुई। केकेआर ने पिछले महीने मिनी नीलामी में मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। लेकिन बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने इस बांग्लादेशी गेंदबाज को टीम से बाहर कर दिया। मुस्तफिजुर को लेने पर भारत में विरोध हो रहा था और कई राजनेताओं तथा कथावाचक ने इसे लेकर केकेआर के मालिका शाहरुख खान को घेरा था। मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद बांग्लादेश बौखला गया है।
बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने की पुष्टि
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के खेल मंत्री आसिफ नजरुल ने कहा था कि उन्होंने बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्री से अनुरोध किया है कि बांग्लादेश में आईपीएल का प्रसारण निलंबित किया जाए। इसके एक दिन बाद ही बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आईपीएल का प्रसराण निलंबित करने का फैसला लिया। बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा, मार्च से शुरू होने वाले आगामी आईपीएल के लिए बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से बाहर करने के बीसीसीआई के फैसले से बांग्लादेश के लोग बेहद आहत, दुखी और आक्रोशित हैं। इन परिस्थितियों में बांग्लादेश के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सूचित किया है कि अगले आदेश तक बांग्लादेश में आईपीएल के सभी मैच और संबंधित कार्यक्रमों का प्रसारण निलंबित रहेगा।
टी20 विश्व कप के लिए भारत नहीं आएगी टीम
इससे पहले, रविवार को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने स्पष्ट किया था कि वह अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। उन्होंने आईसीसी से श्रीलंका में विश्व कप के मैच कराने की मांग की है। फिलहाल आईसीसी ने बीसीबी की मांग पर कोई फैसला नहीं लिया है। बांग्लादेश को अपने चार लीग मैच में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। बांग्लादेश के लीग मैच वेस्टइंडीज (सात फरवरी), इटली (नौ फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ कोलकाता में और नेपाल (17 फरवरी) के खिलाफ मुंबई में है। बांग्लादेश को ग्रुप सी में इटली, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है।
रूस से भारत का तेल आयात घटने पर ट्रम्प बोले-मोदी ने यह मुझे खुश करने के लिए किया, वे जानते थे मैं नाखुश था
6 Jan, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूस से तेल आयात कम करने को लेकर बयान दिया है। ट्रम्प ने कहा है कि भारत ने यह फैसला उन्हें खुश करने के लिए लिया। ट्रम्प ने कहा कि वे मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था, इसलिए मुझे खुश करना जरूरी था। हम व्यापार करते हैं और उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। इसे लेकर ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया था।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि वह करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत के घर गए थे। उस मुलाकात में सबसे ज्यादा चर्चा भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने को लेकर हुई थी। उन्होंने बताया कि भारतीय राजदूत ने उनसे राष्ट्रपति ट्रम्प तक यह संदेश पहुंचाने को कहा था कि भारत पर लगाया गया एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ हटाया जाए। लिंडसे ग्राहम के मुताबिक, भारत अब पहले के मुकाबले रूस से काफी कम मात्रा में तेल खरीद रहा है। इस मुद्दे को बातचीत में प्रमुख रूप से उठाया गया।
भारत ने 4 साल बाद रूस से तेल आयात कम किया
भारत ने 2021 के बाद पहली बार रूस से कच्चे तेल का आयात घटाया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर में करीब 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है। आने वाले समय में यह 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है। जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है। नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है।
रूस ने डिस्काउंट देना कम किया
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया। तब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी, ऐसे में ये छूट भारत के लिए किफायती थी। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। रूस ने भी अपनी छूट घटाकर 1.5 से 2 डॉलर प्रति बैरल कर दी है। इतनी कम रियायत में भारत को पहले जैसा फायदा नहीं मिल रहा, ऊपर से रूस से तेल लाने में शिपिंग और बीमा खर्च भी ज्यादा पड़ता है। इसी वजह से भारत अब दोबारा सऊदी, यूएई और अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स से तेल खरीद रहा है, क्योंकि अब कीमत में पहले जैसा बड़ा अंतर नहीं बचा।
बांग्लादेश में हिन्दू विधवा से गैंगरेप
6 Jan, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में कालीगंज इलाके में एक हिंदू विधवा महिला के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि दो लोगों ने पहले महिला के साथ रेप किया और फिर उसे पेड़ से बांधकर उसके बाल काट दिए।
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि करीब ढाई साल पहले उसने कालीगंज म्युनिसिपैलिटी के वार्ड नंबर 7 में शाहीन और उसके भाई से 20 लाख टका में तीन डेसिमल जमीन और एक दो मंजिला मकान खरीदा था। इसके बाद से ही आरोपी शाहीन कथित तौर पर महिला को आपत्तिजनक प्रस्ताव देने लगा। मना करने पर वह उसे लगातार परेशान करता रहा।
पीड़िता के मुताबिक, शनिवार शाम को जब उसके गांव से दो रिश्तेदार घर आए हुए थे, उसी दौरान शाहीन अपने साथी हसन के साथ जबरन उसके घर में घुस आया। आरोप है कि दोनों ने महिला के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उससे 50 हजार टका (करीब 37 हजार रुपये) की मांग भी की।
उत्तरी नाइजीरिया फिर दहला, गांव में गोलीबारी से 30 से ज्यादा मौतें, कई ग्रामीण अगवा
5 Jan, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नाइजीरिया (Nigeria) के उत्तरी हिस्से में एक बार फिर खूनी हमला हुआ है. नाइजर राज्य के एक गांव में हथियारबंद लोगों ने 30 लोगों की हत्या कर दी और कई ग्रामीणों को अगवा कर लिया. पुलिस ने रविवार को इसकी पुष्टि की. यह इलाका पहले से ही हिंसा और असुरक्षा से जूझ रहा है. पुलिस के अनुसार, यह हमला शनिवार शाम को नाइजर राज्य के बोरगु लोकल गवर्नमेंट एरिया के कसुवान-दाजी गांव में हुआ.
हथियारबंद हमलावर अचानक गांव में घुसे और सीधे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. गोलीबारी के बाद हमलावरों ने गांव के बाजार और कई घरों में आग लगा दी, जिससे भारी नुकसान हुआ. कसुवान-दाजी गांव के पास ही पापिरी समुदाय है, जहां पिछले साल नवंबर में एक कैथोलिक स्कूल से 300 से ज्यादा बच्चों और शिक्षकों का अपहरण किया गया था.
मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता है
नाइजर स्टेट पुलिस के प्रवक्ता वासियू अबियोदुन ने कहा कि इस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई है. हालांकि गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 37 या उससे भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग अब भी लापता हैं. रविवार तक कुछ ग्रामीणों का कोई पता नहीं चल पाया था, जिससे मौत का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हमले के बाद अब तक सुरक्षा बल गांव नहीं पहुंचे. उनका कहना है कि पुलिस और सेना की कोई मौजूदगी नहीं दिखी, जबकि पुलिस का दावा है कि अगवा किए गए लोगों की तलाश के लिए जवानों को तैनात कर दिया गया है.
नाइजीरिया में पुलिस का डर नहीं
नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, लेकिन यहां के कई दूर-दराज इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है. ऐसे इलाकों में अपराधी गिरोह और हथियारबंद बदमाश सक्रिय रहते हैं. ये गिरोह अक्सर गांवों पर हमला करते हैं, लोगों की हत्या करते हैं और फिरौती के लिए अपहरण करते हैं. पुलिस के मुताबिक, कसुवान-दाजी पर हमला करने वाले हथियारबंद लोग नेशनल पार्क फॉरेस्ट और काबे जिले की ओर से आए थे. इन इलाकों में बड़े-बड़े और सुनसान जंगल हैं, जो अक्सर हथियारबंद गिरोहों के छिपने के ठिकाने बन जाते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत को दी नई धमकी, बोले-टैरिफ बढ़ा सकते हैं…
5 Jan, 2026 10:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोमवार को कहा कि अगर नई दिल्ली ‘रूसी तेल मुद्दे’ (‘Russian oil issue’) पर मदद नहीं करता है, तो देश भारतीय इंपोर्ट (Indian imports) पर मौजूदा टैरिफ बढ़ा सकता है. एजेंस के मुताबिक, ट्रंप ने एक पब्लिक संबोधन के दौरान यह बात कही.
भारत के रूसी तेल इंपोर्ट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “वे असल में मुझे खुश करना चाहते थे. पीएम मोदी बहुत अच्छे आदमी हैं. वह एक अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था. मुझे खुश करना ज़रूरी था. हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.”
ट्रंप भारत के रूस के साथ तेल व्यापार की बात कर रहे थे, जिसका उनकी सरकार लंबे समय से विरोध कर रही है. अगस्त 2025 में भारत पर टैरिफ दोगुना करके 50% करने के पीछे रूस के साथ ऑयल ट्रेड को एक वजह बताया गया था.
इन बयानों से रूस के साथ भारत के एनर्जी संबंधों को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है और ये बातें ट्रंप के उस दावे के कुछ महीने बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ‘भरोसा दिलाया’ था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा. नई दिल्ली ने पहले इस दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि ट्रंप और मोदी के बीच इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई थी.
भारत को ऑयल सप्लाई करने वाला सबड़े देश है रूस
रूस, भारत को तेल सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है. ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के कई अधिकारियों ने पहले आरोप लगाया था कि रूस इस तेल व्यापार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन में युद्ध को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है, और भारत भी इस तेल को दोबारा बेचकर ‘मुनाफ़ा कमा रहा है’ और ‘अरबों कमा रहा’ है.
ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाना काफी हद तक पुतिन पर दबाव डालने की एक चाल के तौर पर देखा गया है.
बांग्लादेश में हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द, शेख हसीना की सीट से भरा था पर्चा
5 Jan, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: बांग्लादेश (Bangladesh) में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर एक प्रमुख हिंदू चेहरे को चुनावी मैदान से बाहर कर दिए जाने का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है. बांग्लादेश चुनाव आयोग ने जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव और वरिष्ठ वकील गोबिंद चंद्र प्रामाणिक का नामांकन रद्द कर दिया है.
गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने 28 दिसंबर को आगामी आम चुनाव के लिए गोपालगंज-3 संसदीय सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल किया था. यह वही सीट है, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भी चुनाव लड़ चुकी हैं और जिसे उनकी पारंपरिक सीट माना जाता है. 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव में हिंदू समुदाय की ओर से प्रामाणिक को एक मजबूत चेहरे के तौर पर देखा जा रहा था.
हालांकि चुनाव आयोग ने उनका नामांकन खारिज कर दिया. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को नामांकन के साथ अपनी संसदीय क्षेत्र की कुल मतदाता संख्या के 1 प्रतिशत मतदाताओं के हस्ताक्षर जमा करने होते हैं. प्रामाणिक का कहना है कि उन्होंने यह सभी हस्ताक्षर समय पर जमा किए थे, लेकिन ऐन मौके पर रिटर्निंग ऑफिसर ने इन हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित कर दिया.
गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने आरोप लगाया कि BNP के इशारे पर हस्ताक्षर करने वाले लोग मुकर गए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनके नामांकन को रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करेंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे.
इस मुद्दे पर बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार सलाहउद्दीन शोएब चौधरी ने दावा किया कि देश की संस्थाएं BNP को चुनाव जिताने में जुटी हुई हैं. उनके अनुसार, चुनाव आयोग की कोशिश है कि कोई भी निर्दलीय, जातीय दल या जमात-ए-इस्लामी का उम्मीदवार जीत न सके, जिससे BNP के उम्मीदवारों को कोई चुनौती न मिले.
प्रामाणिक लंबे समय से हिंदू संगठनों का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं, हालांकि शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख डॉक्टर यूनुस के समर्थन को लेकर वह विवादों में भी आए थे. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मतदाता कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं और ऐसे में एक प्रमुख हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द होना चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित
5 Jan, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।
सोने पर इफेक्ट
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।
चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा
चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
महंगा हो सकता है कच्चा तेल
कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।
भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।
सीरिया में ब्रिटेन और फ्रांस की संयुक्त कार्रवाई, आतंकी संगठन आईएस के ठिकानों पर बरसाए बम
5 Jan, 2026 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन (Britain) और फ्रांस (French) के लड़ाकू विमानों (Fighter Jets) ने सीरिया (Syria) में आतंकी संगठन आईएस के ठिकानों पर हवाई हमले (Air Strikes) किए। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सीरिया में आईएस के हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिन्हें एक सुरंग में छिपाकर रखा गया था। ब्रिटेन की सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि सीरिया में हवाई हमले शनिवार को किए गए। यह हमले सीरिया के होम्स प्रांत के ऐतिहासिक पल्मायरा के पहाड़ी इलाके में किए गए।
इतिहास का सबसे बड़ा ड्रामा...गिरफ्तारी के बाद न्यूयॉर्क लाए गए मादुरो, क्या अमेरिका के इस कदम से दुनिया में मच जाएगी तबाही
4 Jan, 2026 12:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Venezuela News: अमेरिका ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में हवाई हमले कर दिए. इसके बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क लाया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो की हाथ में हथकड़ी और आंखों पर पट्टी बांधे फोटो सोशल मीडिया पर जारी की. मादुरो के न्यूयॉर्क पहुंचने की जानकारी भी डोनाल्ड ट्रंप ने खुद दी है. ट्रंप ने यह भी ऐलान किया है कि अब फिलहाल, वेनेजुएला को अमेरिका चलाएगा. हालांकि ट्रंप की इस कार्रवाई को लेकर कई देशों ने इसकी निंदा करते हुए तनाव कम करने की अपील की है. मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि यह संघीय और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. उन्होंने वेनेजुएला पर किए गए हमले की निंदा की है.
गिरफ्तारी पर भड़के ममदानी
वेनेजुएला राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा, “मुझे आज सुबह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े जाने और न्यूयॉर्क शहर में संघीय हिरासत में उनकी नियोजित कैद के बारे में जानकारी दी गई. किसी संप्रभु राष्ट्र पर एकतरफा हमला युद्ध का कार्य है और संघीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.”
ममदानी ने कहा “सत्ता परिवर्तन का यह खुला प्रयास न केवल विदेशियों को प्रभावित करता है, बल्कि न्यूयॉर्कवासियों को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है, जिनमें हजारों वेनेजुएलावासी शामिल हैं जो इस शहर को अपना घर मानते हैं. मेरी प्राथमिकता उनकी और हर न्यूयॉर्कवासी की सुरक्षा है, और मेरा प्रशासन स्थिति पर नजर रखना जारी रखेगा और प्रासंगिक दिशानिर्देश जारी करेगा.
डेमोक्रेट्स की आपातकालीन बैठक!
मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों के अनुसार, वेनेजुएला पर बड़े हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर डेमोक्रेट्स की रविवार को आपातकालीन बैठक हो सकती है. जानकारी के अनुसार यह बैठक वर्चुअल रूप से की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक बैठक स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे होगी.
अमेरिकी परिवारों कीमत चुकानी पड़ती है: कमला हैरिस
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला के बाद डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने चिंता जाहिर की है. कमला हैरिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला नीति का विरोध करते हुए कहा कि इस कार्रवाइयों से अमेरिका न तो अधिक सुरक्षित, न ही अधिक मजबूत और न ही अधिक किफायती बनता है. मादुरो का क्रूर और अवैध तानाशाह होना इस तथ्य को नहीं बदलता कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और नासमझी भरी थी. हमने यह कहानी पहले भी देखी है. सत्ता परिवर्तन या तेल के लिए युद्ध, जिन्हें ताकत के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन अंततः अराजकता में तब्दील हो जाते हैं, और अमेरिकी परिवारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है.
कमला हैरिस ने आगे लिखा, “अमेरिकी जनता ऐसा नहीं चाहती, और वे झूठ से तंग आ चुके हैं. यह मामला न तो ड्रग्स का है और न ही लोकतंत्र का. यह तेल और डोनाल्ड ट्रम्प की क्षेत्रीय ताकतवर नेता बनने की चाहत का है. अगर उन्हें इन दोनों की परवाह होती, तो वे न तो दोषी ठहराए गए ड्रग तस्कर को माफ करते और न ही मादुरो के साथियों के साथ सौदे करते हुए वेनेजुएला के वैध विपक्ष को दरकिनार करते. राष्ट्रपति सैनिकों को खतरे में डाल रहे हैं, अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, एक क्षेत्र को अस्थिर कर रहे हैं, और न तो कोई कानूनी अधिकार दे रहे हैं, न ही कोई निकास योजना, और न ही देश को कोई लाभ पहुंचा रहे हैं.”
कौन बना वेनेजुएला का नया राष्ट्रपति?
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी गिरफ्तारी के बाद वहां की सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मादुरो को अमेरिकी सुरक्षाबलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद लिया है.
प्रधानमंत्री जनमन योजना से बदली सेजाडीह की तस्वीर
आबकारी मामला: पक्षपात के आरोप निराधार, हाई कोर्ट ने केजरीवाल की मांग ठुकराई
प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल
मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का हो रहा है निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
तकनीकी खामियों पर पैनी नजर: 6 रेलकर्मियों ने सूझबूझ से टाले हादसे, डीआरएम ने किया सम्मान।
सड़क सुरक्षा के लिए पुलिस सख्त: राजधानी के चौक-चौराहों पर ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रही टीमें।
खेत से चोरी हुई थीं गायें: भोपाल के गोदरमऊ क्षेत्र में हुई घटना ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती।
अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप: बृजभूषण और प्रज्वल रेवन्ना मामले पर बरसीं शोभा ओझा
