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व्हाइट हाउस के बाहर गोलीबारी, अटैकर मारा गया, ट्रंप कार्यक्रम में शामिल
6 May, 2026 10:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमरीकी राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास व्हाइट हाउस के निकट हुई एक गोलीबारी की वारदात ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर डाल दिया, जिसके परिणामस्वरूप एहतियात के तौर पर परिसर में कुछ समय के लिए तालाबंदी कर दी गई। सीक्रेट सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार, 15वीं स्ट्रीट और इंडिपेंडेंस एवेन्यू के पास तैनात सुरक्षाकर्मियों ने एक सशस्त्र संदिग्ध को गोली मार दी। यह पूरी घटना वाशिंगटन स्मारक के समीप उस वक्त घटित हुई जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का काफिला क्षेत्र से गुजर रहा था, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस समय व्हाइट हाउस के भीतर एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में व्यस्त थे।
सुरक्षा घेरे में संदिग्ध और सीक्रेट सर्विस की भिड़ंत
इस हिंसक टकराव के विषय में जानकारी देते हुए सीक्रेट सर्विस ने स्पष्ट किया कि यह पूरी घटना एक हथियारबंद व्यक्ति और उनके पुलिस अधिकारियों के बीच हुई सीधी मुठभेड़ का परिणाम थी। स्थिति को अनियंत्रित होता देख सुरक्षा अधिकारी ने जवाबी कार्रवाई करते हुए संदिग्ध पर गोलियां चलाईं। हालांकि इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े किए, किंतु अधिकारियों ने तत्काल पुष्टि की कि राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित हैं और व्हाइट हाउस की सुरक्षा की अभेद्य दीवार को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा है।
जांच के चलते क्षेत्र में आवाजाही पर लगी रोक
वारदात के तुरंत बाद सक्रिय हुई जांच एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और घटनास्थल के आस-पास के सभी मुख्य मार्गों को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों और सुरक्षा बलों ने सबूत जुटाने के लिए गहन तलाशी अभियान चलाया, जिससे वाशिंगटन स्मारक के पास के क्षेत्र में काफी देर तक हलचल बनी रही। सुरक्षा की दृष्टि से उठाए गए इन कड़े कदमों के कारण आम जनता की आवाजाही को कुछ घंटों के लिए रोक दिया गया ताकि गहन पड़ताल में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
भविष्य की सुरक्षा रणनीतियों पर कड़ी निगरानी
इस गंभीर सुरक्षा उल्लंघन की कोशिश के बाद व्हाइट हाउस और उसके निकटवर्ती संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी पहले से कहीं अधिक कड़ी कर दी गई है। सीक्रेट सर्विस अब इस बात की विस्तृत जांच कर रही है कि वह सशस्त्र व्यक्ति इतने सुरक्षित क्षेत्र तक कैसे पहुँचने में सफल रहा। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह की अप्रिय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
‘Mission Drishti’ की सफलता पर दुनिया मुरीद, एलन मस्क ने दी बधाई
6 May, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखते हुए बेंगलुरु के स्टार्टअप 'गैलेक्सीआई' ने अपने महत्वाकांक्षी उपग्रह 'मिशन दृष्टि' का सफल प्रक्षेपण कर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस उपलब्धि की गूँज सात समंदर पार तक सुनाई दी, जहाँ दुनिया के दिग्गज उद्यमी एलन मस्क ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय स्टार्टअप को इस कामयाबी के लिए बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता को भारतीय युवाओं के अटूट नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण का जीवंत उदाहरण बताया है। कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया यह उपग्रह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अब तक की सबसे बड़ी छलांग माना जा रहा है।
ऑप्टो-सार तकनीक और मौसम की बाधाओं पर विजय
मिशन दृष्टि की सबसे बड़ी विशेषता इसका दुनिया का पहला 'ऑप्टो-सार' (OptoSAR) सैटेलाइट होना है, जो इसे पारंपरिक उपग्रहों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली बनाता है। अत्याधुनिक सेंसर और हाई-टेक कैमरों से लैस यह उपग्रह घने बादलों, भारी बारिश या घोर अंधेरे के बावजूद पृथ्वी की अत्यंत स्पष्ट और हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें लेने की क्षमता रखता है। भारत जैसे देश के लिए, जहाँ मानसून के दौरान लंबे समय तक बादलों के कारण उपग्रहों से निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, यह तकनीक एक क्रांतिकारी समाधान के रूप में उभरी है। लगभग 1.8 मीटर रेजोल्यूशन के साथ यह सैटेलाइट हर समय और हर मौसम में निरंतर डेटा उपलब्ध कराता रहेगा, जिससे अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी का एक नया युग शुरू होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पर अभेद्य निगरानी
रक्षा क्षेत्र के दृष्टिकोण से 'मिशन दृष्टि' को भारत की सुरक्षा ढाल के रूप में देखा जा रहा है, जो सीमाओं पर पल-पल की जानकारी देने में सक्षम है। इसकी रीयल-टाइम मॉनिटरिंग क्षमता के माध्यम से चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर किसी भी संदिग्ध हलचल को तुरंत पकड़ा जा सकेगा, जिससे भारतीय सेना को रणनीतिक निर्णय लेने में अत्यधिक सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपग्रह न केवल दुश्मनों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों में सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी कई गुना बढ़ा देगा। निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित अब तक का यह सबसे बड़ा स्वदेशी उपग्रह भारत को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होने वाला है।
आपदा प्रबंधन और नागरिक सेवाओं में बहुआयामी उपयोग
यह उपग्रह केवल रक्षा उद्देश्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपनी 'डुअल-यूज' प्रकृति के कारण यह आम नागरिकों और प्रशासन के लिए भी वरदान सिद्ध होगा। प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, चक्रवात, भूकंप या वनों में लगने वाली आग के दौरान इसके द्वारा प्रदान की गई सटीक जानकारी से समय रहते राहत कार्य संचालित किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के अध्ययन, समुद्री तटों की निगरानी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नजर रखने में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों के लिए फसलों की निगरानी और शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में भी इस सैटेलाइट से प्राप्त डेटा का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाएगा, जिससे देश के आर्थिक और सामाजिक विकास को एक नई गति प्राप्त होगी।
रोहतक में युवक की संदिग्ध मौत, इलाके में तनाव
6 May, 2026 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक: सुनारिया जेल रोड पर युवक की नृशंस हत्या, गला रेतने के बाद हमलावरों ने पेट चीरकर फैलाई दहशत
रोहतक के सुनारिया जेल रोड स्थित मीट मार्केट के समीप एक 25 वर्षीय युवक की रूह कंपा देने वाली हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुधवार की सुबह सड़क किनारे एक युवक का क्षत-विक्षत शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हमलावरों ने न केवल युवक का गला रेतकर उसे मौत के घाट उतारा, बल्कि बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उसके पेट को भी किसी धारदार हथियार से चीर दिया। शिवाजी कॉलोनी थाना पुलिस ने सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर मिले हालात को देखकर यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों ने इस वारदात को बेहद क्रूरता के साथ अंजाम दिया है ताकि आसपास के लोगों में खौफ पैदा किया जा सके।
वारदात वाली जगह पर मिली शराब की बोतलें और प्रारंभिक पुलिस तफ्तीश
पुलिस को सुबह करीब पौने आठ बजे इस घटना की जानकारी मिली, जिसके बाद एएसपी आयुष यादव और थाना प्रभारी राकेश सैनी सहित एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। जिस स्थान पर शव पड़ा था, वहां पास में ही शराब की बोतलें, नमकीन के पैकेट और अन्य सामान बिखरा हुआ मिला है, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि हत्या से पहले वहां कुछ लोगों का जमावड़ा था। एफएसएल एक्सपर्ट डॉक्टर सरोज दहिया ने बारीकी से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि कातिलों का कोई सुराग मिल सके। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई के शवगृह में भिजवा दिया है और मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए गहन छानबीन की जा रही है।
रामनगर निवासी मोहित के रूप में हुई शिनाख्त और परिजनों का बयान
शव मिलने के कुछ घंटों बाद मृतक की पहचान रामनगर निवासी मोहित के तौर पर हुई। मोहित के भाई गौरव ने पुलिस को बताया कि वह आर्य नगर स्थित एक ढाबे पर काम करता था और उसे आखिरी बार मंगलवार की रात किला रोड स्थित गीता मार्केट के पास देखा गया था। परिवार के लिए यह पहेली बनी हुई है कि मोहित रात के वक्त अनाज मंडी के पीछे के सुनसान इलाके में कैसे पहुंचा और उसकी किसी से कोई दुश्मनी थी या नहीं। पुलिस अब मोहित के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और अंतिम बार उसे किसके साथ देखा गया था, इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
सीसीटीवी कैमरों की मदद से कातिलों तक पहुँचने का प्रयास
शिवाजी कॉलोनी थाना पुलिस और अनाज मंडी चौकी की टीम इस अंधी हत्या के मामले को सुलझाने के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। पुलिस को उम्मीद है कि गीता मार्केट से लेकर वारदात वाली जगह तक के रास्ते में लगे कैमरों से हमलावरों की पहचान हो सकेगी। इस हत्याकांड ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि हमलावरों ने इतनी व्यस्त सड़क के पास इस वारदात को अंजाम दिया और आसानी से फरार हो गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे संदिग्धों से पूछताछ कर रहे हैं और जल्द ही इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले सलाखों के पीछे होंगे।
शांति की पहल या रणनीति? Iran के प्रस्ताव पर उठे सवाल
5 May, 2026 06:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहाँ शांति की अपीलों के बीच बारूद की गंध और तेज हो गई है। वैश्विक कूटनीति में समाधान के प्रयास तो हो रहे हैं, लेकिन समुद्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार होते हमले और नौसैनिक घेराबंदी ने पूरी दुनिया की आपूर्ति व्यवस्था को संकट में डाल दिया है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए ताजा हमले ने हफ्तों से बनी अस्थाई शांति को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, छोटी नावों के जरिए किए गए इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
होर्मुज जलमार्ग पर ईरान की नई शर्तें और वैश्विक ऊर्जा संकट
दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ढोने वाले होर्मुज जलमार्ग पर ईरान ने अब बेहद सख्त और अड़ियल रुख अपना लिया है। तेहरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर 'टोल टैक्स' वसूलने की नई शर्त थोप दी है, साथ ही अमेरिका और इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। ईरान की इस नीति ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि, तनाव कम करने के लिए ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक 14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें एक महीने के भीतर विवाद सुलझाने का खाका पेश किया गया है। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख दिखाते हुए स्पष्ट किया है कि वे ईरान की पुरानी गतिविधियों को देखते हुए उसे इतनी आसानी से कोई बड़ी राहत देने के पक्ष में नहीं हैं।
अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था
ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने उसके बंदरगाहों की अभूतपूर्व नौसैनिक घेराबंदी कर रखी है, जिसका उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की इस नाकेबंदी के कारण ईरान के तेल भंडार अब अपनी अधिकतम क्षमता तक भर चुके हैं, जिससे वहां के तेल कुओं को बंद करने की नौबत आ गई है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अब तक लगभग 49 जहाजों को ईरान की ओर जाने से रोका जा चुका है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ रहा है। यह आर्थिक घेराबंदी इतनी सख्त है कि इसने ईरान को रणनीतिक रूप से पीछे हटने या कड़े फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है।
कूटनीतिक मध्यस्थता और समाधान की अंतिम कोशिशें
एक तरफ जहां युद्ध के मैदान में तनातनी जारी है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे समाधान की तलाश भी तेज हो गई है। ओमान और पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आए हैं। ईरान के विदेश मंत्री और ओमान के प्रतिनिधियों के बीच हालिया चर्चाओं से यह संकेत मिलते हैं कि दोनों पक्ष किसी न किसी तरह के समझौते की संभावना टटोल रहे हैं। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई, आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक वार्ताओं का एक ऐसा जटिल त्रिकोण बन चुका है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में न केवल इस क्षेत्र की राजनीति पर, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा।
United States बोला— टैरिफ लगाना हमारा अधिकार, Beijing पर बढ़ी टेंशन
5 May, 2026 05:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन की अपनी आगामी महत्वपूर्ण यात्रा से पहले व्यापारिक मोर्चे पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सस्ते विदेशी आयात ने अमेरिकी घरेलू उद्योगों की कमर तोड़ दी है और उनकी सरकार की टैरिफ नीतियां इस असंतुलन को ठीक करने के लिए सबसे प्रभावी हथियार साबित हो रही हैं। चीन के दौरे पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात से ठीक पहले ट्रंप के इस आक्रामक तेवर ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों और व्यापार विशेषज्ञों के बीच व्यापक हलचल पैदा कर दी है।
आयात शुल्क की नीति और स्वदेशी उद्योगों की वापसी
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों ने अमेरिकी बाजार में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा की है। उन्होंने टैरिफ को राजस्व का एक बड़ा स्रोत बताते हुए संकेत दिया कि यदि विदेशी दबाव कम नहीं हुआ, तो इन दरों में और भी वृद्धि की जा सकती है। ट्रंप ने उन कंपनियों को सीधा संदेश दिया जो ऊंचे शुल्कों से बचना चाहती हैं, कि वे अपना उत्पादन केंद्र वापस अमेरिका में स्थानांतरित करें। उनके अनुसार, इस नीति का सकारात्मक प्रभाव अब दिखने लगा है और ऑटोमोबाइल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के उद्योग फिर से अमेरिकी जमीन पर लौटने लगे हैं।
चीन के साथ प्रतिस्पर्धा और तकनीकी प्रभुत्व
अमेरिका और चीन के द्विपक्षीय संबंधों पर बात करते हुए ट्रंप ने इसे एक चुनौतीपूर्ण लेकिन प्रतिस्पर्धी मित्रता करार दिया। उन्होंने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अमेरिका की बढ़त का उल्लेख करते हुए दावा किया कि तकनीक के मामले में अमेरिका आज भी चीन से काफी आगे है। पिछली व्यापार नीतियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दशकों तक देश के आर्थिक हितों की अनदेखी की गई, लेकिन वर्तमान सरकार की टैरिफ नीतियों ने अमेरिका को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि कानूनी चुनौतियों के बावजूद वे घरेलू उद्योगों के संरक्षण के लिए अन्य कड़े विकल्पों का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे।
अर्थव्यवस्था की रीढ़ और छोटे व्यवसायों का सशक्तिकरण
टैरिफ के मुद्दों के बीच राष्ट्रपति ने 'नेशनल स्मॉल बिजनेस वीक' के अवसर पर देश के छोटे व्यापारियों के योगदान की जमकर सराहना की। उन्होंने छोटे व्यवसायों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ बताते हुए कहा कि देश के लगभग 36 मिलियन लघु उद्यमी कुल आर्थिक गतिविधियों में 40 प्रतिशत की महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हैं। ट्रंप ने विकास की गति को बनाए रखने के लिए करों में कटौती और जटिल नियमों में ढील देने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। उन्होंने विश्वास जताया कि छोटे व्यवसायों को दी गई छूट और टैरिफ से होने वाली आय मिलकर अमेरिका को वैश्विक मंच पर और अधिक शक्तिशाली बनाएंगे।
वैश्विक मंच पर Subrahmanyam Jaishankar ने आर्थिक साझेदारी को दी प्राथमिकता
5 May, 2026 03:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किंग्स्टन: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने नौ दिवसीय कैरेबियाई प्रवास के प्रथम चरण में जमैका की राजधानी किंग्स्टन पहुंचकर दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह यात्रा कैरेबियाई क्षेत्र के साथ भारत के प्रगाढ़ होते सामरिक और सांस्कृतिक संबंधों का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसके अंतर्गत वे सूरीनाम और त्रिनिदाद व टोबैगो का भी दौरा करेंगे। किंग्स्टन में जमैका की विदेश मंत्री कामिना जॉनसन स्मिथ और उनके कैबिनेट सहयोगियों के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयामों पर गहन मंथन किया गया। इस बैठक का मुख्य केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में साझा भविष्य की नींव रखना रहा।
द्विपक्षीय सहयोग के नए आयाम और आर्थिक साझेदारी
विदेश मंत्री जयशंकर ने इस यात्रा के दौरान जमैका के शीर्ष नेतृत्व और व्यापारिक दिग्गजों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बदलते हुए वैश्विक परिवेश में एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि भारत और जमैका के आर्थिक हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री एंड्रयू होलनेस के साथ हुई विशेष मुलाकात में राजनीतिक संबंधों को और अधिक सक्रिय और जीवंत बनाने की कार्ययोजना पर सहमति बनी। जयशंकर ने व्यापारिक समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन और बेहतर हो सके।
मानवीय सहायता और तकनीकी नवाचार की मिसाल
भारत ने अपनी मानवीय प्रतिबद्धता को दोहराते हुए जमैका को 'भीष्म क्यूब' (BHISHM Cubes) उपहार स्वरूप भेंट किए हैं। स्वदेशी तकनीक से निर्मित यह अत्याधुनिक मोबाइल अस्पताल प्रणाली किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में मिनटों के भीतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है। यह उपहार न केवल भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि जमैका के प्रति भारत के सहयोगी और संवेदनशील दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्री ने तकनीकी सहयोग के माध्यम से जमैका के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में भारत के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है।
सांस्कृतिक विरासत और क्रिकेट का साझा जुड़ाव
राजनीतिक और आर्थिक वार्ताओं के साथ-साथ इस यात्रा में दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासत और खेलों के प्रति प्रेम की झलक भी देखने को मिली। विदेश मंत्री ने जमैका के ऐतिहासिक सबिना पार्क क्रिकेट स्टेडियम को एक आधुनिक स्कोरबोर्ड समर्पित किया। उन्होंने क्रिस गेल और कोर्टनी वॉल्श जैसे महान क्रिकेटरों के योगदान को याद करते हुए कहा कि क्रिकेट दोनों देशों के बीच जनता से जनता के जुड़ाव का सबसे मजबूत माध्यम है। साथ ही, उन्होंने किंग्स्टन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत में हो रहे तीव्र बुनियादी विकास और तकनीकी क्रांति की जानकारी दी, जिससे प्रवासियों के मन में अपनी जड़ों के प्रति गर्व और विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
Donald Trump का कड़ा रुख, Iran के खिलाफ एक्शन मोड में अमेरिका
5 May, 2026 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: मध्य पूर्व के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अब एक ऐसे चरम बिंदु पर पहुंच गया है, जहां से वैश्विक युद्ध की आशंका प्रबल हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी के लहजे में अब तक का सबसे कठोर संदेश देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक जहाजों या उनके ऑपरेशनों को निशाना बनाने का दुस्साहस किया, तो उसे धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका होर्मुज में महीनों से फंसे सैकड़ों तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' (Project Freedom) नामक एक व्यापक सैन्य अभियान चला रहा है। इस मिशन के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी और घातक सैन्य झड़प की खबरें भी सामने आई हैं।
होर्मुज में सैन्य कार्रवाई और 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना ने जलमार्ग को व्यापार के लिए फिर से खोलने के प्रयासों के दौरान ईरान की सात छोटी सैन्य नावों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने ईरान पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि वह उन देशों के वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना बना रहा है जिनका इस विवाद से कोई सीधा संबंध नहीं है। ट्रंप ने विशेष रूप से दक्षिण कोरिया जैसे देशों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा के लिए अमेरिका के प्रयासों में सहयोग दें। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस मिशन में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक, 100 से अधिक विमान और लगभग 15,000 सैनिक तैनात किए गए हैं, ताकि ईरान की 'समुद्री नाकाबंदी' को तोड़ा जा सके।
फुजैरा तेल बंदरगाह पर हमला और भारतीय नागरिकों की चोट
तनाव की यह आग अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तक भी फैल गई है, जहां फुजैरा के प्रमुख तेल भंडारण केंद्र पर भीषण ड्रोन और मिसाइल हमला किया गया है। यूएई ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और एक खतरनाक उकसावा करार दिया है। फुजैरा में हुए इस विस्फोट ने भारत की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं, क्योंकि इस घटना में तेल केंद्र पर काम कर रहे तीन भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है ताकि घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर यूएई को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है।
वैश्विक बाजार में हाहाकार और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
होर्मुज जलडमरूमध्य में छिड़ी इस सैन्य जंग का सीधा और गहरा असर वैश्विक तेल व्यापार पर पड़ा है, जिसे दुनिया की आर्थिक लाइफलाइन माना जाता है। ट्रंप की विनाशकारी चेतावनी और फुजैरा में तेल बुनियादी ढांचे पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें 5% से अधिक उछलकर 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कीमतें 150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा। फिलहाल, अमेरिकी रक्षा मंत्री और सैन्य नेतृत्व इस पूरी स्थिति पर कल एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं।
खाड़ी में तनाव चरम पर! Iranian Navy की अमेरिकी जहाजों को खुली चेतावनी
5 May, 2026 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: पश्चिमी एशिया के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति की कोशिशों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब ईरानी नौसेना और अमेरिकी युद्धपोतों के बीच सीधी सैन्य तनातनी देखने को मिली। सोमवार की देर शाम हुई इस घटना में ईरान ने अमेरिकी जहाजों की दिशा में चेतावनी स्वरूप गोलाबारी की, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। ईरान का दावा है कि अमेरिकी जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए अपनी पहचान प्रणालियों को बंद कर दिया था, जिसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर यह आक्रामक रुख अपनाना पड़ा। दूसरी ओर, अमेरिका ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने नियमित समुद्री मिशन का हिस्सा बताया है।
सुरक्षा उल्लंघन के आरोप और ईरानी नौसेना की सख्त कार्रवाई
ईरान के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार ओमान की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों की आवाजाही संदिग्ध पाई गई थी, क्योंकि उन्होंने राडार और अन्य पहचान प्रणालियों को जानबूझकर निष्क्रिय कर दिया था। ईरानी नौसेना ने रेडियो संदेशों के जरिए अमेरिकी बेड़े को रुकने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चेतावनी दी थी, जिसे कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया। इसके जवाब में ईरानी बलों ने क्रूज मिसाइलों और कॉम्बैट ड्रोनों का उपयोग करते हुए अमेरिकी जहाजों के निकट वार्निंग फायर किए। तेहरान ने इस पूरी घटना को उकसावे वाली कार्रवाई करार देते हुए स्पष्ट किया है कि उसकी समुद्री सीमाओं की संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान का जिम्मेदार वाशिंगटन होगा।
अमेरिकी स्पष्टीकरण और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर मिशन की दलील
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपनी प्रतिक्रिया में ईरानी दावों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि उनके गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक केवल 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत अपनी निर्धारित यात्रा पर थे। वाशिंगटन का तर्क है कि उनके युद्धपोत इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं ताकि वैश्विक व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे। अमेरिका के अनुसार उनके संरक्षण में दो व्यापारिक जहाज इस मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं और वे केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर ही संचालन कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच चल रही अस्थायी शांति वार्ता और युद्धविराम की संभावनाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे के संकेत और कच्चे तेल का संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोक पॉइंट बनाती है, क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है और विशेषज्ञों ने कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका जताई है। रक्षा और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच यह छद्म युद्ध सीधे सैन्य संघर्ष में बदलता है, तो इसके परिणाम स्वरूप पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है। वर्तमान में दोनों सेनाओं ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है और क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।
अतिक्रमण की शिकायतों ने प्रशासन का ध्यान खींचा
5 May, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: समाधान शिविर में उठीं सफाई, अतिक्रमण और जल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें, अधिकारियों को तुरंत समाधान के निर्देश
शिविर में रखी गईं जनसमस्याएं, कई विभागों को दिए गए मौके पर कार्रवाई के आदेश
हिसार के जिला सचिवालय परिसर में आयोजित समाधान शिविर में जगदीश कॉलोनी में नालियों की सफाई, गली में अवैध अतिक्रमण, डाकघर के पास पाइपलाइन लीकेज और मामनपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति जैसी कई शिकायतें सामने आईं। अतिरिक्त उपायुक्त लक्षित सरीन ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
गांव-शहर से पहुंची शिकायतों पर तेज हुई प्रशासनिक कार्रवाई
उमरा गांव के वीरेंद्र सिंह ने खेतों में जर्जर बिजली खंभों और तारों को बदलने की मांग रखी, जिस पर बिजली विभाग को तुरंत सुधार कार्य के आदेश दिए गए। वहीं जगदीश कॉलोनी के अनिल कुमार ने नालों की सफाई और अवैध कब्जा हटाने की मांग की, जिस पर नगर परिषद को निरीक्षण कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पेयजल, अतिक्रमण और कृषि से जुड़ी समस्याओं पर सख्त निर्देश
डाकघर के पास पानी की पाइपलाइन रिसाव को लेकर जन स्वास्थ्य विभाग को तुरंत मरम्मत के आदेश दिए गए। इसके अलावा बंद गली खुलवाने, खेतों से मिट्टी हटाने और दूषित पेयजल समस्या के समाधान के लिए भी अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए गए। एडीसी ने साफ कहा कि हर शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके।
यूक्रेन के Zaporizhzhia Nuclear Power Plant पर बड़ा हमला, दुनिया में चिंता की लहर
5 May, 2026 12:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर आ चुका है जिसने पूरी दुनिया को परमाणु खतरे के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यूरोप के सबसे विशाल परमाणु ऊर्जा केंद्र, जापोरिजिया की रेडिएशन निगरानी प्रयोगशाला पर हुए हालिया ड्रोन हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं को गहरा दिया है। रूसी अधिकारियों ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर यूक्रेनी सेना को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि यह हमला जानबूझकर उस महत्वपूर्ण इकाई को निशाना बनाकर किया गया है जो संयंत्र के इर्द-गिर्द विकिरण की स्थिति पर बारीक नजर रखती है। हालांकि प्रारंभिक जांच में संयंत्र के उपकरणों को किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस हमले के रणनीतिक और सुरक्षात्मक निहितार्थ बेहद डरावने माने जा रहे हैं।
मानवता के लिए बड़ा खतरा और निगरानी तंत्र पर चोट
यह प्रयोगशाला जापोरिजिया संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है क्योंकि यह चौबीसों घंटे वातावरण में रेडिएशन के स्तर की निगरानी करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह इकाई पूरी तरह से ध्वस्त हो जाती है, तो किसी भी संभावित रेडियोधर्मी रिसाव की पहचान करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। ऐसी स्थिति में न तो समय रहते बचाव कार्य शुरू किए जा सकेंगे और न ही आम जनता को सचेत किया जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी इस घटना को अत्यंत जोखिम भरा करार देते हुए चेतावनी दी है कि परमाणु संयंत्र के पास इस तरह की सैन्य गतिविधियां विनाशकारी साबित हो सकती हैं।
संभावित परमाणु आपदा का व्यापक भौगोलिक प्रभाव
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जापोरिजिया दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा केंद्रों में से एक है और यहां होने वाली कोई भी चूक केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रहेगी। यदि संयंत्र में कोई बड़ा विस्फोट या रिसाव होता है, तो उससे निकलने वाले रेडियोएक्टिव बादल पूरे यूरोप की हवा को दूषित कर देंगे। यह त्रासदी न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए घातक होगी बल्कि इसका जहरीला प्रभाव आने वाले कई दशकों तक मानवता को झेलना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए यह स्थिति एक अग्निपरीक्षा की तरह बन गई है क्योंकि एक छोटी सी सैन्य गलती भी वैश्विक परमाणु आपदा का कारण बन सकती है।
रूसी रुख और भविष्य की भीषण सैन्य कार्रवाई के संकेत
इस हमले के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में रूसी प्रशासन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसे परमाणु सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ बताया है। मॉस्को ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने परमाणु ठिकानों की रक्षा के लिए किसी भी कठोर कदम से पीछे नहीं हटेगा। कूटनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि रूस इस ड्रोन हमले के प्रतिशोध में यूक्रेन के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर अपने हमलों को और अधिक तेज कर सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब यह स्पष्ट है कि युद्ध का यह नया चरण न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गया है।
भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के कार्यकर्ताओं में टकराव, चार घायल
5 May, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: उकलाना क्षेत्र में सोमवार की रात उस समय भारी तनाव फैल गया जब चुनावी जनसभा से वापस आ रहे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस टकराव के दौरान हुई गोलीबारी ने एक भयंकर रूप ले लिया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी और चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय थाना प्रभारी कुलदीप ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि दो गुटों के आपसी विवाद में चली गोलियों के कारण एक युवक की मौत हुई है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
चुनावी जनसभा के बाद उपजा हिंसक विवाद
घटना की शुरुआत उकलाना की नई अनाज मंडी में आयोजित एक चुनावी सभा के समापन के बाद हुई, जब भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के समर्थक आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि हथियारों से फायरिंग शुरू हो गई, जिसकी चपेट में आकर भाना निवासी शुभम और विवेक के साथ-साथ सदलपुर के मुकेश को गोलियां लगीं। इसी अफरा-तफरी में सदलपुर निवासी सुग्रीव भी चोटिल हो गया। घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए ले जाया गया, परंतु अस्पताल पहुंचने से पहले ही शुभम ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने इस मामले में घायल प्रदीप को अपनी कस्टडी में लेकर एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया है।
पुरानी रंजिश या राजनीतिक निष्ठा में बदलाव का असर
अस्पताल में उपचाराधीन प्रदीप ने बताया कि उसने हाल ही में अपने साथियों के साथ मिलकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी और वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में दल में शामिल हुआ था। सोमवार रात वह भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित जनसभा में शामिल होकर अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहा था। रास्ते में जब वह अपने परिवार के बच्चों के लिए आइसक्रीम खरीदने के उद्देश्य से एक स्थान पर रुका, तभी अचानक एक गाड़ी में सवार होकर आए हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और इलाके में सुरक्षा
इस खूनी संघर्ष के बाद क्षेत्र में स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है और पुलिस बल ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। हमलावरों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई हैं जो घटना के चश्मदीदों और आसपास के साक्ष्यों के आधार पर तफ्तीश को आगे बढ़ा रही हैं। चुनावी माहौल के बीच हुई इस हत्या और गोलीबारी ने स्थानीय प्रशासन के सामने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिसके चलते संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव, अमेरिकी हमले से 5 ईरानी मारे गए—दावा
5 May, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुबई/तेहरान: मध्य पूर्व के समुद्री गलियारों में बारूद की गंध एक बार फिर गहरी हो गई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्गों में से एक, 'स्ट्रेट ऑफ होरमुज' (होरमुज जलडमरूमध्य) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने भीषण रूप ले लिया है। इस बार विवाद एक ताजा सैन्य कार्रवाई को लेकर है, जिसमें ईरानी मीडिया ने निर्दोष नागरिकों की मौत का दावा किया है। फरवरी में शुरू हुए हमलों और अप्रैल में हुई अस्थायी शांति की कोशिशों के बाद, अब यह इलाका फिर से एक बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
ईरान का नागरिकों की मौत का दावा और सैन्य खंडन
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिकी सेना की हालिया कार्रवाई में पांच आम नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। ईरानी पक्ष के अनुसार, ओमान के खासाब तट से ईरान की ओर लौट रही दो छोटी मालवाहक नावों पर अमेरिकी बलों ने हमला किया। ईरान ने स्पष्ट किया कि इन नावों में केवल घरेलू सामान और आम लोग सवार थे, न कि कोई सैन्य दस्ता। तेहरान ने उन अमेरिकी दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की छह लड़ाकू स्पीडबोट को निशाना बनाया गया है। ईरान का मानना है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी नौकाओं की गति से खौफ में है और डर के कारण जल्दबाजी में निर्दोषों पर गोलियां चला रही है।
अमेरिकी डिफेंस का पक्ष: समुद्री यातायात की सुरक्षा
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस घटना को एक वैध सैन्य ऑपरेशन करार दिया है। अमेरिका का तर्क है कि उनके हेलीकॉप्टरों ने उन संदिग्ध नावों को निशाना बनाया जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं। वॉशिंगटन का दावा है कि ये छोटी नावें समुद्री यातायात को बाधित करने और जहाजों को डराने का प्रयास कर रही थीं, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करना अनिवार्य हो गया था। अमेरिका इस इलाके में 13 अप्रैल से ही कड़ी समुद्री नाकेबंदी लागू कर चुका है, जिसका उद्देश्य ईरानी गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। अमेरिका का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर वैश्विक व्यापारिक मार्ग को बंद नहीं होने देंगे।
होरमुज की नाकेबंदी और टूटता संघर्षविराम
स्ट्रेट ऑफ होरमुज इस समय वैश्विक भू-राजनीति का सबसे अशांत केंद्र बना हुआ है। फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई सीधी जंग के बाद से ही यहां शांति की हर कोशिश विफल रही है। हालांकि, अप्रैल में पाकिस्तान ने मध्यस्थता कर एक अस्थायी युद्धविराम कराया था और डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे आगे बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर कूटनीतिक बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। ईरान द्वारा इस सामरिक मार्ग को बंद करने की धमकियों ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है। वर्तमान नाकेबंदी और ताजा गोलीबारी की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि क्षेत्र में छोटी सी चिंगारी भी किसी बड़ी त्रासदी या पूर्ण युद्ध का रूप ले सकती है।
धर्मनगरी दौरे पर नायब सैनी, धार्मिक कार्यक्रम में की आहुति
5 May, 2026 10:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी आज अपने निर्धारित दौरों के तहत धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में मौजूद रहेंगे, जहां वे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में शिरकत कर जनता के बीच समय व्यतीत करेंगे। मुख्यमंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र लाडवा पहुंच चुके हैं, जहां उनके आगमन को लेकर प्रशासन और स्थानीय नेताओं ने पुख्ता तैयारियां की हैं। उनके दिन की शुरुआत शिवाला रामकुंडी में आयोजित एक पावन हवन यज्ञ में आहुति देने के साथ होगी, जिसके माध्यम से वे क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक सरोकार के कार्य
हवन यज्ञ के पश्चात मुख्यमंत्री लाडवा में ही एक रक्तदान शिविर का विधिवत शुभारंभ करेंगे, जिसका उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और युवाओं को इस नेक कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अतिरिक्त लाडवा के अग्रसेन चौक पर एक विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिलेगा, जहां चुनावी विजय की खुशी में जलेबी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मुख्यमंत्री स्वयं इस उत्सव का हिस्सा बनकर कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों के साथ अपनी जीत का जश्न साझा करेंगे।
महिला सशक्तिकरण और विश्वविद्यालय का विशेष कार्यक्रम
दोपहर के समय मुख्यमंत्री कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का रुख करेंगे, जहां वे 'सकशत नारी, सशक्त समाज' जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आधारित एक विशेष संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के जरिए वे समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके सशक्तिकरण के प्रयासों पर अपने विचार साझा करेंगे। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह आयोजन शिक्षाविदों और छात्रों के बीच नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित करने का एक बड़ा मंच साबित होगा।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन को हरी झंडी
मुख्यमंत्री के आज के दौरे का एक मुख्य आकर्षण श्री हुजूर साहिब के लिए रवाना होने वाली विशेष ट्रेन होगी, जिसे वे दोपहर करीब दो बजे हरी झंडी दिखाकर प्रस्थान कराएंगे। कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन से रवाना होने वाली इस यात्रा में कुरुक्षेत्र सहित पड़ोसी जिलों के लगभग 850 श्रद्धालु सवार होंगे, जो गुरुधाम के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे। सरकार के इस कदम से तीर्थयात्रियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और इस विशेष ट्रेन की रवानगी के साथ ही मुख्यमंत्री का कुरुक्षेत्र का यह दौरा भक्ति और सेवा के संगम के साथ संपन्न होगा।
पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में 21 की मौत, 61 लोग घायल—चीन से बड़ी खबर
5 May, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन के हुनान प्रांत स्थित लियुयांग शहर सोमवार को एक भीषण औद्योगिक त्रासदी का गवाह बना, जब वहां की एक पटाखा फैक्ट्री जोरदार धमाकों से दहल उठी। हुआशेंग पटाखा कंपनी के इस कारखाने में हुए विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पल भर में पूरी इमारत आग की लपटों में घिर गई और मीलों दूर तक धुएं का काला गुबार देखा गया। इस हादसे का असर फैक्ट्री की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि धमाके के दबाव से 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाले रिहायशी मकानों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए और दरवाजे उखड़ गए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित होने के निर्देश जारी किए हैं।
जान-माल की भारी क्षति और हताहतों का विवरण
इस भयावह अग्निकांड ने कई परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कारखाने के भीतर काम करने वाले 21 श्रमिकों की इस धमाके में जान चली गई है। वहीं, मलबे और आग की चपेट में आने से 61 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने का प्रयास कर रही है। चिकित्सा विभाग के अनुसार, कुछ घायलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है, जबकि शेष लोगों का उपचार जारी है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
व्यापक बचाव अभियान और तकनीक का प्रयोग
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया। घटनास्थल पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लगभग 500 बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है। मलबे के नीचे दबे संभावित लोगों की खोज के लिए भारी क्रेन और आधुनिक मशीनों के साथ-साथ रोबोट्स की भी मदद ली जा रही है, ताकि खतरनाक और दुर्गम हिस्सों में राहत कार्य को तेजी से पूरा किया जा सके। रेस्क्यू टीम आग पर पूरी तरह काबू पाने और लापता श्रमिकों की तलाश में दिन-रात एक कर रही है।
राष्ट्रपति का कड़ा रुख और प्रशासनिक कार्रवाई
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि घायलों का उपचार और पीड़ितों की सहायता उनकी प्राथमिकता है। राष्ट्रपति ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं ताकि विस्फोट के मूल कारणों का पता लगाया जा सके। इस बीच, सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप में पटाखा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिले।
11 दिनों की मशक्कत के बाद बुझी जापान की आग, हालात काबू में
4 May, 2026 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान के उत्तर-पूर्वी प्रांत इवाते के ओत्सुची शहर में करीब 11 दिनों तक तांडव मचाने वाली भीषण वन्य अग्नि (Forest Fire) पर आखिरकार पूरी तरह काबू पा लिया गया है। स्थानीय प्रशासन और फायर एजेंसी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस भयावह आग ने देखते ही देखते 1,633 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में लेकर खाक कर दिया। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पिछले 30 वर्षों में देश की दूसरी सबसे बड़ी वनाग्नि की घटना है, जिसने न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि आठ इमारतों को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया।
प्रशासनिक मुस्तैदी और भारी बारिश से थमी आग की लपटें
ओत्सुची के मेयर कोजो हिरानो ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि आग पर नियंत्रण पाने में हवाई और जमीनी स्तर पर किए गए व्यापक फायरफाइटिंग ऑपरेशंस के साथ-साथ प्रकृति का भी बड़ा योगदान रहा। क्षेत्र में हुई भारी बारिश ने आग को बुझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे स्थिति में तेजी से सुधार आया। इस सप्ताह की शुरुआत में जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए जारी किए गए 'निकासी आदेश' भी अब वापस ले लिए गए हैं। हालांकि, मेयर ने चेतावनी दी है कि अभी भी पूर्ण सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि सूखे पत्तों और लकड़ियों के नीचे दबे अंगारे फिर से सुलग सकते हैं।
जापान में बढ़ती वनाग्नि और ऐतिहासिक संदर्भ
आंकड़ों पर नजर डालें तो जापान में जंगल की आग की घटनाएं समय के साथ और विकराल होती जा रही हैं। पिछले साल भी इवाते प्रीफेक्चर के ओफुनातो में लगी आग ने 2,600 हेक्टेयर क्षेत्र को जला दिया था। इससे पहले साल 1975 में होक्काइडो के कुशिरो में 2,700 हेक्टेयर जमीन आग की भेंट चढ़ी थी। ओत्सुची की हालिया घटना ने 22 अप्रैल से शुरू होकर 2 मई 2026 तक तबाही मचाई, जो आधुनिक जापान के इतिहास में वनों के विनाश की एक बड़ी मिसाल बन गई है।
जलवायु परिवर्तन और सूखे वसंत का दोहरा खतरा
वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने जापान के जंगलों में बढ़ती आग की इन घटनाओं के पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को मुख्य कारण माना है। विशेषज्ञों के अनुसार, जापान में मार्च से मई के बीच वसंत ऋतु के दौरान हवाएं काफी शुष्क होती हैं और बारिश कम होती है, जिससे जंगलों में सूखी लकड़ियों और पुराने पत्तों का ढेर 'बारूद' की तरह काम करता है। 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं ने इस आग को नियंत्रित करना नामुमकिन बना दिया था। ड्राई विंटर्स (शुष्क शीतकाल) की बढ़ती अवधि ने वनों में नमी कम कर दी है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा और बढ़ गया है।
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