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कनाडा में भारतीय महिलाओं के लिए खास पहल: वन स्टॉप सेंटर फॉर वीमेन शुरू
10 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोरंटो। कनाडा में रह रही भारतीय महिलाओं की मदद के लिए भारत के टोरंटो महावाणिज्य दूतावास में हाल ही में वन स्टॉप सेंटर फॉर विमेन (ओएससीडब्ल्यू) चालू किया है। यह केंद्र कनाडा में रहने वाली भारतीय महिलाओं, छात्रों और महिला कर्मचारियों को वित्तीय, कानूनी और भावनात्मक मदद उपलब्ध कराएगा है। कार्यवाहक महावाणिज्य दूत कपिध्वज प्रताप सिंह के अनुसार, यह पहल कनाडाई और भारतीय अधिकारियों के बीच पुल का काम करेगी, जिससे महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा। महावाणिज्य दूत सिंह ने बताया कि कनाडा में भारतीय महिलाओं को घरेलू हिंसा, दहेज, शोषण और अन्य मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ओएससीडब्ल्यू इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और यह तुरंत काउंसलिंग, साइको-सोशल सपोर्ट, कानूनी सलाह और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा। कार्यवाहक महावाणिज्य दूत सिंह ने कहा कि कनाडा में कई संगठन मदद देते हैं, लेकिन सांस्कृतिक और सामाजिक बाधाओं के कारण महिलाएं खुलकर मदद नहीं ले पातीं। लेकिन इस केंद्र का उद्देश्य इन्हीं रुकावटों को दूर करना और महिलाओं को उनके अधिकारों और संसाधनों तक पहुंच सुनिश्चित करना है। ओएससीडब्ल्यू का उपयोग कनाडा में स्थायी आवासीय महिलाएं, विजिटर, वर्कर और स्टूडेंट सभी कर सकते हैं।
इस पहल को लांच हुए कुछ ही दिनों में महिला समुदाय से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। एक दर्जन से अधिक महिलाएं अपनी विभिन्न समस्याओं के साथ संपर्क कर चुकी हैं। महावाणिज्य दूत ने बताया कि यह केंद्र महिलाओं को कानूनी, वित्तीय और सामाजिक मदद देने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय और सोशल-सर्विस रिसोर्स तक पहुंचने में भी मदद करेगा। 26 दिसंबर, 2025 को स्थापित यह केंद्र पूरी तरह कनाडा के कानून के तहत काम करेगा और महिलाओं को समय पर सही मदद मुहैया कराएगा। इस पहल से कनाडा में रह रही भारतीय महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सहायक माहौल तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
टैरिफ डील पर अमेरिका का दावा, मोदी के फोन न करने से आगे नहीं बढ़ी बात: हॉवर्ड लुटनिक
10 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित टैरिफ डील को लेकर अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे फोन न किए जाने के कारण यह डील समय पर आगे नहीं बढ़ सकी। लुटनिक के इस बयान के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है, हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में भारत पर टैरिफ बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं।
हॉवर्ड लुटनिक ने यह बयान ‘ऑल-इन पॉडकास्ट’ के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका उस समय कई देशों के साथ व्यापारिक समझौतों पर काम कर रहा था और स्पष्ट नीति अपनाई गई थी कि जो देश पहले तैयार होगा, उसे पहले और बेहतर डील मिलेगी। लुटनिक के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप डील को एक सीढ़ी की तरह देखते हैं, जिसमें पहली सीढ़ी पर चढ़ने वाले देश को सबसे फायदेमंद शर्तें मिलती हैं। एक बार वह सीढ़ी पार हो जाने के बाद वही शर्तें दोबारा उपलब्ध नहीं रहतीं।
लुटनिक ने बताया कि सबसे पहले यूनाइटेड किंगडम के साथ डील की गई थी और उन्हें स्पष्ट समयसीमा दी गई थी। इसके बाद अन्य देशों के लिए भी यही नीति अपनाई गई। उन्होंने कहा कि उस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप कई बार भारत का जिक्र कर रहे थे और भारत को भी स्पष्ट रूप से बताया गया था कि उसके पास सीमित समय है। लुटनिक के मुताबिक भारत को यह संदेश दिया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी को सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से बात करनी होगी ताकि डील को अंतिम रूप दिया जा सके।
अमेरिकी मंत्री ने दावा किया कि भारत की ओर से इस पर असहजता दिखाई गई और प्रधानमंत्री मोदी ने तय समयसीमा के भीतर कॉल नहीं किया। उनके अनुसार वह शुक्रवार निकल गया, जो डेडलाइन के रूप में तय था। इसके बाद अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ तेजी से समझौते कर लिए। इस दौरान भारत कथित तौर पर पीछे रह गया।
लुटनिक ने अपने बयान में भारत पर तंज कसते हुए कहा कि जब बाद में भारत की ओर से संपर्क किया गया और यह कहा गया कि वह डील के लिए तैयार है, तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि यह ऐसा था जैसे कोई ट्रेन छूट जाने के बाद टिकट लेकर स्टेशन पर पहुंच जाए। उनके मुताबिक भारत जिस डील की बात कर रहा था, वह पहले वाली नहीं रह गई थी, क्योंकि परिस्थितियां और प्राथमिकताएं बदल चुकी थीं।
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच किसी समय एक प्रारंभिक सहमति जरूर बनी थी, लेकिन उसे समय पर पूरा नहीं किया गया। नतीजतन भारत को अब पहले जैसी शर्तों वाली डील नहीं मिल सकती। इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्तों में टैरिफ को लेकर तनाव के संकेत दिख रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
फैज-ए-इलाही मस्जिद को लेकर पाकिस्तान ने अड़ाई टांग, भारत ने दिखाया आईना
10 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर भारत के आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने की कोशिश की। हालांकि पाकिस्तान को भारत ने आईना दिखा दिया है। दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा की गई, बेबुनियाद टिप्पणियों पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। वहीं बीजेपी ने देश के अंदर सक्रिय विपक्षी गठबंधन को भी निशाने पर लिया।
बता दें दिल्ली में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बुलडोजर एक्शन पर मुख्य संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। वह पूरी तरह सुरक्षित है। दिल्ली में की गई हालिया कार्रवाई किसी धार्मिक स्थल के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ थी। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए प्रशासन ने मस्जिद परिसर में अवैध रूप से संचालित बैंक्वेट हॉल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर को हटाया। यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून सम्मत थी, लेकिन पाकिस्तान इसे सांप्रदायिक रंग देने की नाकाम कोशिश कर रहा है।
मस्जिद मामले पर पाकिस्तानी बयानबाजी के बाद सियासत गरमा गई। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर विपक्षी इंडिया गठबंधन’ को भी घेरा है। पूनावाला ने आरोप लगाया कि जो झूठ देश के अंदर कुछ विपक्षी नेताओं ने फैलाया, अब उसी झूठ को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोहरा रहा है। यह देखना विचलित करने वाला है कि भारत के कुछ लोग और पाकिस्तान एक ही भाषा बोल रहे हैं। कुछ लोगों को देखकर लगता है कि उनके लिए एलओवी का मतलब लीडर ऑफ अपोजिशन नहीं, बल्कि ‘लीडर ऑफ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा’ है।
उन्होंने कहा कि ये लोग इंडी गठबंधन की तरह नहीं, बल्कि ‘रावलपिंडी गठबंधन’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वे भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहर फैलाने के लिए पाकिस्तान को मौका दे रहे हैं। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान जो खुद अपने देश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों के लिए दुनिया भर में बदनाम है, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश इस बात का प्रमाण है कि भारत में कार्रवाई धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान और कानून के आधार पर होती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जमीन पर किए गए किसी भी अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ट्रंप ने दिया झटका, भारत के इंटरनेशनल सोलर एलायंस से बाहर हुआ अमेरिका
9 Jan, 2026 08:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के इंटरनेशनल सोलर एलायंस को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संगठन से अमेरिका के बाहर होने का फैसला किया है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम न केवल वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए चुनौती है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले तीन दशकों से बने मजबूत रिश्तों में भी दरार पैदा करने वाला है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने एक बड़ा कार्यकारी आदेश जारी करते हुए भारत द्वारा प्रवर्तित इंटरनेशनल सोलर एलायंस से हटने की घोषणा की है। यह फैसला ट्रंप की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से नाता तोड़ रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के खिलाफ मानता है। सूत्रों का मानना है कि भारत का कहना है कि अमेरिका को जहां जाना है जाए, यह गठबंधन कायम रहेगा। उसके हटने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
बता दें इस संगठन की शुरुआत 2015 में पेरिस जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने की थी। इसका मुख्य मुख्यालय भारत के गुरुग्राम में है। इसका लक्ष्य 2030 तक सौर ऊर्जा में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश जुटाना है। साथ ही विकासशील देशों को सस्ती सौर तकनीक और फाइनेंस उपलब्ध कराना ताकि वे प्रदूषण बढ़ाए बिना अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकें।
अमेरिका के पूर्व जलवायु दूत जॉन केरी ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम को खुद को पहुंचाया गया घाव बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन यह चीन के लिए एक गिफ्ट की तरह है। इससे उन देशों और प्रदूषण फैलाने वाली ताकतों को छूट मिल जाएगी जो अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं। अमेरिका 31 यूएन संस्थाओं और 35 गैर-यूएन अंतर-सरकारी संगठनों से हट गया है, जिसमें यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम शामिल हैं। वाइट हाउस की एक फैक्ट शीट के मुताबिक ये संगठन, कन्वेंशन और संधियां अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि या संप्रभुता के विपरीत काम करते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका का बाहर होना न केवल जलवायु के लिए बुरा है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह है। अमेरिका उन ट्रिलियन डॉलर के निवेश और रोजगार के अवसरों को खो देगा जो क्लीन एनर्जी सेक्टर में आने वाले हैं। सौर तकनीक के वैश्विक नियमों को लिखने में अब अमेरिका की कोई भूमिका नहीं रहेगी, जिससे अन्य देशों खासकर चीन का दबदबा बढ़ेगा। भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है क्योंकि आईएसए पीएम मोदी का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। अब भारत को फ्रांस और अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर फंडिंग और तकनीक के नए रास्ते तलाशने होंगे।
रूस-यूक्रेन युद्ध विराम हुआ तो भी ब्रिटेन-फ्रांस की सेनाएं यूक्रेन में रहेंगी
9 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। शांति स्थापना की दिशा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ यूक्रेन के राष्ट्रपति और यूरोपीय नेताओं के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में सुरक्षा के एक नए ढांचे पर सहमति बनी है। इस बैठक का सबसे बड़ा परिणाम ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा जताई गई वह प्रतिबद्धता है, जिसके तहत युद्धविराम की स्थिति में ये दोनों देश यूक्रेन की धरती पर अपने सैनिक तैनात कर सकेंगे। इस संबंध में दोनों देशों ने एक औपचारिक डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भविष्य में रूस के संभावित हमलों को रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। इस समझौते की रूपरेखा के अनुसार, यदि युद्धविराम लागू होता है, तो ब्रिटेन और फ्रांस यूक्रेन में अपने सैन्य ठिकाने स्थापित करेंगे।
इन ठिकानों का मुख्य उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। यह कदम राष्ट्रपति जेलेंस्की की उस मुख्य चिंता का समाधान माना जा रहा है, जिसमें वे अक्सर यह अंदेशा जताते रहे हैं कि रूस युद्धविराम का उपयोग अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित करने और भविष्य में दोबारा हमला करने के लिए कर सकता है। विदेशी सैनिकों की मौजूदगी यूक्रेन के लिए एक ठोस गारंटी की तरह काम करेगी। समझौते के विस्तृत पहलुओं पर चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि ब्रिटिश, फ्रांसीसी और अन्य सहयोगी देशों की सेनाएं यूक्रेन की जमीन पर सक्रिय रहेंगी। उनका प्राथमिक कार्य यूक्रेन की हवाई और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और यूक्रेनी सेना को तकनीकी व सामरिक रूप से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना होगा। हालांकि, शांति की इस राह में अब भी कई चुनौतियां बरकरार हैं। पश्चिमी नेताओं ने आगाह किया है कि कोई भी स्थायी शांति समझौता तभी संभव है जब रूसी नेतृत्व वास्तविक रूप से बातचीत के लिए तैयार हो। वर्तमान परिस्थितियों और रूस के हालिया सैन्य कदमों को देखते हुए फिलहाल शांति की स्पष्ट इच्छा कम ही दिखाई दे रही है। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है। हालिया बहुपक्षीय बैठक में, जिसमें लगभग 35 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, यह तय किया गया है कि किसी भी संभावित युद्धविराम की निगरानी और कार्यान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी अमेरिका संभालेगा। इसमें यूरोपीय देशों का भी सक्रिय सहयोग रहेगा। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस पहल का स्वागत करते हुए अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों के प्रति आभार व्यक्त किया है। यह समझौता न केवल युद्ध रोकने की एक कोशिश है, बल्कि यह दीर्घकालिक स्तर पर यूक्रेन की संप्रभुता को सुरक्षित रखने का एक बड़ा रणनीतिक ब्लूप्रिंट भी पेश करता है।
शीतलहर की चपेट में फ्रांस, जर्मनी और स्विट्जरलैंड, बर्फ में दबे विमान नहीं भर पाए उड़ान
9 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्यूरिख। फ्रांस, जर्मनी और स्विट्जरलैंड समेत पूरा यूरोप इन दिनों भीषण शीतलहर और बर्फबारी की चपेट में है। हालात इतने खराब हैं कि ज्यूरिख एयरपोर्ट पर खड़े विमान बर्फ से ढक गए जिसके कारण वे समय पर उड़ान नहीं भर पाए। यहाँ तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर चुका है, जिसके चलते खड़े विमानों पर बर्फ की मोटी परतें जम गई हैं। इस कड़ाके की ठंड के बीच विमानों को सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने के लिए एक अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिसे ‘डी-आइसिंग’ कहा जाता है। सुरक्षा मानकों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बिना किसी भी विमान को रनवे पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, पंखों पर जमी बर्फ आसमान में उड़ते जहाज के लिए एक अदृश्य दुश्मन की तरह काम करती है। दरअसल, विमान के विंग्स और कंट्रोल सरफेसेज को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि हवा उनके ऊपर से सुचारू रूप से गुजर सके और विमान को जरूरी ‘लिफ्ट’ मिल सके। जब इन पर बर्फ या पाला जम जाता है, तो हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे न केवल विमान का वजन बढ़ता है, बल्कि उसकी एयरोडायनामिक्स क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में उड़ान भरना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है। पंखों पर जमी मात्र कुछ मिलीमीटर की बर्फ भी विमान के ‘लिफ्ट’ को 30 प्रतिशत तक कम कर सकती है और हवा के खिंचाव यानी ‘ड्रैग’ को 40 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर इंजन पर पड़ता है और विमान को हवा में बने रहने के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ता है। इसके अलावा, विमान के सेंसर्स (जैसे पिटोट ट्यूब) में बर्फ जमने से पायलट को ऊंचाई और गति का गलत डेटा मिल सकता है, जो हादसों का कारण बनता है। इसी गंभीरता को देखते हुए ज्यूरिख एयरपोर्ट पर सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है। फिलहाल ज्यूरिख एयरपोर्ट पर दर्जनों टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। एक विमान को तैयार करने में बर्फ की मोटाई के आधार पर 5 से 15 मिनट का समय लग रहा है। एयरलाइंस ने यात्रियों को सूचित किया है कि इस सुरक्षा प्रक्रिया के कारण उड़ानों में कुछ देरी हो सकती है। एयरपोर्ट प्रशासन ने पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इस केमिकल को रीसायकल करने के लिए विशेष ड्रेनेज सिस्टम भी सक्रिय किया है।
बर्फ की परत न जमे इसके लिए होता है छिड़काव
ज्यूरिख एयरपोर्ट के विशेष ‘डी-आइसिंग पैड्स’ पर यह प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की जाती है। यहाँ बड़ी-बड़ी क्रेननुमा गाड़ियाँ (डी-आइसिंग ट्रक्स) विमान को चारों ओर से घेर लेती हैं। यह प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले, विमान पर गर्म पानी और ‘प्रोपलीन ग्लाइकोल’ के मिश्रण का छिड़काव किया जाता है। इसे ‘टाइप 1’ फ्लूइड कहते हैं, जो आमतौर पर नारंगी रंग का होता है ताकि ऑपरेटर देख सके कि विमान का कौन सा हिस्सा साफ हो चुका है। यह गर्म मिश्रण जमी हुई बर्फ को तुरंत पिघला देता है। इसके बाद, यदि बर्फबारी जारी है, तो ‘एंटी-आइसिंग’ प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसमें ‘टाइप 4’ फ्लूइड का उपयोग होता है, जो हरे रंग का और जेली जैसा गाढ़ा होता है। यह पंखों पर एक सुरक्षा परत बना देता है, जिससे टेक-ऑफ के दौरान नई बर्फ नहीं जम पाती।
कंगाल पाकिस्तान ने अपनी साख बचाने के लिए अमेरिका के तलवे चाटने में खर्चे कर दिए अरबों
9 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। एक तरफ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर है और आम जनता आटा-दाल जैसी बुनियादी चीजों के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी हुक्मरान अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि चमकाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहे हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा किए गए हालिया खुलासे ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सैन्य नेतृत्व की पोल खोल दी है। दस्तावेजों से पता चला है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी साख बचाने और भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में भारी-भरकम लॉबिंग कराई है।
खुलासे के अनुसार, पाकिस्तान ने अपनी गरीब जनता की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी सांसदों और नीति-निर्धारकों को साधने में खर्च किया। पाकिस्तान ने वॉशिंगटन डीसी की प्रभावशाली लॉबिंग फर्म स्क्वायर पैटन बोग्स और राजनीतिक रूप से मजबूत पकड़ रखने वाली जैवेलिन एडवाइजर्स की सेवाएं लीं। जैवेलिन एडवाइजर्स को पाकिस्तान ने प्रति माह 50,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.40 करोड़ पाकिस्तानी रुपये) की भारी फीस पर नियुक्त किया था। इस फर्म का मुख्य काम अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के शीर्ष नेताओं तक पाकिस्तान का पक्ष पहुंचाना था। हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान ने जिन लॉबिंग कंपनियों का सहारा लिया, उनका सीधा संबंध अमेरिकी सत्ता के गलियारों से है। जैवेलिन एडवाइजर्स के संस्थापकों में डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सहयोगी शामिल हैं। इन कंपनियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन थ्यून और हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज़ जैसे प्रभावशाली नेताओं के दफ्तरों से संपर्क साधा। इनका उद्देश्य पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता से इनकार करना और खुद को शांतिप्रिय देश के रूप में पेश करना था। रिकॉर्ड बताते हैं कि मई 2025 में अमेरिकी सांसदों और पाकिस्तान के राजदूत के बीच कॉल्स भी आयोजित कराई गईं ताकि भारत के साथ बढ़ते तनाव पर पाकिस्तान अपना एजेंडा सेट कर सके।
अमेरिकी न्याय विभाग में दर्ज जानकारी के मुताबिक, लॉबिंग फर्मों ने अमेरिकी सांसदों के बीच एक विवादित नोट भी बांटा। इस नोट में पाकिस्तान ने उलटा भारत पर ही अपनी सीमा के भीतर अस्थिरता फैलाने का आरोप मढ़ा और कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की मांग दोहराई। पाकिस्तान का प्रयास था कि अमेरिका इस मामले में हस्तक्षेप करे और उसे आतंकवाद के आरोपों से क्लीन चिट मिल जाए। इतना ही नहीं, इन फर्मों ने न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसे प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबारों के पत्रकारों से भी संपर्क किया ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पाकिस्तान के पक्ष में खबरें छपवाई जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खुलासा पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करता है। जहां एक ओर वह दुनिया के सामने कर्ज के लिए हाथ फैला रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने के लिए वह करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के दबाव के बाद पाकिस्तान की यह छटपटाहट दिखाती है कि वह कूटनीतिक मोर्चे पर कितना अलग-थलग पड़ चुका है। खुद को निर्दोष साबित करने की यह महंगी कोशिश अब पाकिस्तान के भीतर भी राजनीतिक विवाद का कारण बन सकती है।
बांग्लादेश: चुनाव से पहले खूनी संघर्ष, ढाका में विपक्षी दल के पूर्व नेता की गोली मारकर हत्या
9 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव से पहले राजनीतिक हिंसा का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। राजधानी ढाका के करवान बाजार इलाके में मंगलवार रात अज्ञात हमलावरों ने स्वेच्छासेबक दल के पूर्व नेता अजीजुर रहमान मुसब्बिर की गोली मारकर हत्या कर दी। देश में 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले लागू आदर्श आचार संहिता के बीच हुई इस सनसनीखेज वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुसब्बिर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की स्वयंसेवी इकाई ढाका मेट्रोपॉलिटन नॉर्थ स्वेच्छासेबक दल के महासचिव रह चुके थे।
पुलिस के अनुसार, यह हमला रात करीब 8:30 बजे बशुंधरा सिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के पास स्थित एक होटल के समीप हुआ। भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्र का लाभ उठाकर हमलावरों ने मुसब्बिर पर बेहद करीब से गोलियां चलाईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में भगदड़ मच गई। इस गोलीबारी में मुसब्बिर के पेट में गोली लगी, जबकि उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी गंभीर रूप से घायल हो गया। मुसब्बिर को तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दूसरे घायल व्यक्ति की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और उनका इलाज ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।
वारदात की खबर फैलते ही करवान बाजार और आसपास के इलाकों में भारी तनाव व्याप्त हो गया। आक्रोशित समर्थकों और स्थानीय लोगों ने देर रात सार्क फाउंटेन चौराहे पर सड़क जाम कर दी, जिससे राजधानी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ-साथ सेना के जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा। सेना ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर रास्ता खुलवाया, लेकिन क्षेत्र में रह-रहकर विरोध प्रदर्शन होते रहे। फिलहाल सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों की तलाश में व्यापक छापेमारी की जा रही है।
बांग्लादेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच राजनीतिक हत्याओं का यह सिलसिला चिंताजनक है। मुसब्बिर की हत्या से कुछ दिन पहले ही जूबो दल के एक नेता पर जानलेवा हमला हुआ था, जबकि बीते 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के नेता उस्मान हादी की भी हत्या कर दी गई थी। विपक्षी दलों ने इन घटनाओं को चुनाव से पहले डराने-धमकाने की साजिश करार दिया है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि, मतदान में अब एक महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में बढ़ती हिंसा ने आम नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।
2025 में बांग्लादेश में अपराध में उछाल............महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा अत्याचार
9 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। साल 2025 में बांग्लादेश का क्राइम रेट खतरनाक स्तर पर पहुंचा। इस दौर में महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा अत्याचार हुए, जबकि हत्या, डकैती और मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। विश्लेषकों के मुताबिक, अपराध में बढ़ोतरी कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का नतीजा है। तख्ता पलट के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सामान्य माहौल बनने में नाकाम रही है। पुलिस क्राइम के आंकड़ों का हवाला देकर बांग्लादेश के बांग्ला अखबार ने बताया कि 2025 में रेस्क्यू से जुड़े मामलों सहित कुल 1,81,737 केस रजिस्टर किए गए, जिसमें से कुछ 2024 की घटनाओं से जुड़े थे। इसमें सबसे ज्यादा मामले महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़े थे। बीते साल, पुलिस ने पूरे बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के 21,936 केस पंजीकृत किए, इसके बाद 12,740 चोरी और 3,785 मर्डर के मामले दर्ज किए गए।
डकैती की घटनाओं में भी इजाफा हुआ, पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक डकैती के 1,935 केस रजिस्टर किए गए।
इसके अलावा, पूरे देश में 702 लूट के मामले, स्पीडी ट्रायल एक्ट के तहत 988 मामले, दंगों के 66, अपहरण के 1,101 मामले, पुलिस पर हमले के 601 मामले और 81,738 दूसरे मामले दर्ज किए गए।
पिछले साल साढ़े चार साल की रोजा मणि की हत्या के बाद पूरे बांग्लादेश में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ था। बच्ची का शव 13 मई 2025 को बिजॉय सरानी ओवरपास के पास तेजकुनीपारा में कूड़े के ढेर में मिला था, उसके एक दिन पहले वह ढाका स्थित तेजगांव इलाके से लापता हो गई थी।
रोजा मणि मामले के अलावा, बीते साल ढाका में बच्चों के साथ बदसलूकी के करीब 1,000 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि देश भर के शैक्षिक संस्थानों और काम की जगहों से भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। ढाका यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल वेलफेयर एंड रिसर्च में एसोसिएट प्रोफेसर और क्रिमिनोलॉजिस्ट ने बताया कि 2025 में, हम सभी ने क्राइम के आंकड़ों में कुछ डरावने पहलू देखने को मिले। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पूरी तरह से सामान्य नहीं होने के कारण अपराध बढ़ा है। इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है।
अभिनेता विल स्मिथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में फंसे
8 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एजेलिस । वर्तमान में हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता विल स्मिथ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में फंस गए हैं। अभिनेता पर यह केस ब्रायन किंग जोसेफ नाम के वायलिनिस्ट ने दर्ज कराया है। ब्रायन का दावा है कि 2025 के उनके म्यूजिकल टूर ‘बेस्ड ऑन ए ट्रू स्टोरी’ के दौरान विल ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।
ब्रायन ने बताया कि संबंध की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी, जब उन्हें विल ने सैन डिएगो के एक शो में परफॉर्म करने का मौका दिया। इसके बाद उन्हें 2025 के बड़े टूर के लिए साइन किया गया। शुरुआत में सब सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे विल का व्यवहार बदल गया। ब्रायन का कहना है कि विल ने उन्हें कहा कि उनके बीच एक खास कनेक्शन है, जो किसी और के साथ नहीं है। ब्रायन ने आगे बताया कि मार्च 2025 में लास वेगास टूर के दौरान उनका बैग और कमरे की चाबियां गायब रहीं।
बाद में कमरे में बीयर की बोतलें, वाइप्स और अजनबी के नाम की एचआईवी दवाइयां पाईं गईं। एक नोट मिला, जिसमें लिखा था कि ब्रायन, मैं 5:30 बजे तक वापस आ जाऊंगा, सिर्फ हम दोनों होंगे। ब्रायन ने कहा कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत होटल सिक्योरिटी से की, तो कोई ठोस जवाब नहीं मिला। एक रात जब वे सो रहे थे, तो देखा कि विल उनके कमरे में खड़े थे और जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश कर रहे थे। ब्रायन ने बताया कि जैसे ही उन्होंने यह बात सामने रखी, विल स्मिथ की कंपनी ‘ट्रेबॉल स्टूडियोज मैनेजमेंट’ ने उन्हें दबाव बनाने की कोशिश की कि वे इसे दबा दें। जब ब्रायन ने ऐसा नहीं किया, तो उन्हें तुरंत टूर से निकाल दिया गया।
विल स्मिथ पहले भी विवादों में रह चुके हैं। ऑस्कर इवेंट में हुए थप्पड़ कांड के बाद उन्होंने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की थी। लेकिन इस नए आरोप के साथ उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। ब्रायन किंग जोसेफ ने अब विल स्मिथ और उनकी कंपनी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और नौकरी से निकालने के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बता दें कि अभिनेता विल स्मिथ को ‘मैन इन ब्लैक’ और ‘बैड बॉयज’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय को लेकर पूरी दुनिया में जाना जाता है।
नया अध्याय: लक्जमबर्ग में जयशंकर ने साझा किया डिजिटल और अंतरिक्ष सहयोग का विजन
8 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लक्जमबर्ग। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया लक्जमबर्ग यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई और आधुनिक दिशा प्रदान की है। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उन्होंने लक्जमबर्ग के राष्ट्राध्यक्ष ग्रैंड ड्यूक गुइलौम से मुलाकात कर उन्हें भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। जयशंकर ने भारत के प्रति ग्रैंड ड्यूक के सकारात्मक दृष्टिकोण और आपसी साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। इस मुलाकात को कूटनीतिक स्तर पर बेहद सम्मानजनक और भविष्योन्मुखी माना जा रहा है।
इस यात्रा का सबसे प्रमुख आकर्षण भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित चर्चा रही। लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और लक्जमबर्ग अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर फिनटेक, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अधिक उत्पादक तरीके से सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन क्षेत्रों में साझेदारी न केवल समय की मांग है, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत लाभकारी भी है।
विदेश मंत्री ने लक्जमबर्ग में सक्रिय भारतीय समुदाय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि एक मजबूत व्यापारिक रिश्ते के साथ-साथ अब हमें उभरती हुई प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल दुनिया और एआई के क्षेत्र में साझा प्रयास पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी परिणाम देंगे। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय परिवेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की वर्तमान स्थिति पर भारत और लक्जमबर्ग के बीच एक खुली और स्पष्ट चर्चा दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
जेवियर बेटेल द्वारा किए गए गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए उनके व्यक्तिगत समर्थन की प्रशंसा की। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ अंतरिक्ष और उच्च तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नई संभावनाएं तलाश रहा है। जयशंकर का यह दौरा भारत की उस सक्रिय विदेश नीति का हिस्सा है जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक और तकनीकी सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
वेनेजुएला अटैक के बाद दहशत में ट्रंप: मिडटर्म चुनाव में हार और महाभियोग का बढ़ा खतरा
8 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिका के भीतर ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों को एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि आगामी मिडटर्म (मध्यावधि) चुनाव उनके भविष्य के लिए रेड लाइन साबित हो सकते हैं। वॉशिंगटन में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के रिपब्लिकन सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि पार्टी इन चुनावों में हारती है, तो उनका राष्ट्रपति पद खतरे में पड़ सकता है। उन्हें डर है कि यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस में बहुमत मिल गया, तो वे उनके खिलाफ तत्काल महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर देंगे।
ट्रंप का यह डर उनकी हालिया विदेश नीति और सैन्य फैसलों से उपजी आलोचनाओं के बीच सामने आया है। उन्होंने अपने सांसदों से दो टूक शब्दों में कहा है कि उन्हें हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी, क्योंकि विपक्षी दल उन्हें पद से हटाने का कोई न कोई आधार जरूर तलाश लेंगे। अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था में राष्ट्रपति को पद से हटाना एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन मिडटर्म चुनाव हारने का मतलब है कि कांग्रेस पर राष्ट्रपति का नियंत्रण समाप्त हो जाना। यदि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स का बहुमत होता है, तो उनके पास महाभियोग चलाने की संवैधानिक शक्ति आ जाएगी, जो राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ी विधायी चुनौती होगी।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के ठीक बीच में आयोजित किए जाते हैं। ये चुनाव केवल प्रतीकात्मक नहीं होते, बल्कि सत्ता के संतुलन की असली परीक्षा होते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इसके साथ ही, कई राज्यों में राज्यपालों और स्थानीय निकायों के चुनाव भी संपन्न होते हैं। यदि इन चुनावों में सत्ताधारी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहता है, तो राष्ट्रपति के लिए नए कानून बनाना, बजट पारित करना और महत्वपूर्ण नियुक्तियां करना लगभग असंभव हो जाता है। वर्तमान परिदृश्य में, ट्रंप को डर है कि वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर उनके कड़े रुख को विपक्षी दल एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे। प्रतिनिधि सभा में बहुमत खोने का सीधा अर्थ है कि राष्ट्रपति के हर फैसले की सूक्ष्म जांच होगी और उनके कार्यकाल के बीच में ही उन्हें पद से हटाने की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि ट्रंप अपनी पूरी ताकत इन चुनावों को जीतने में लगा रहे हैं, ताकि वे अपनी राजनीतिक और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
मादुरो ही नहीं, वेनेजुएला की नई राष्ट्रपति भी हैं सत्य साईं बाबा की भक्त
8 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काराकस। वेनेजुएला के राजनीतिक परिदृश्य में एक नाटकीय और ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब अमेरिकी विशेष बलों द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद डेल्सी रोड्रिग्ज ने देश की अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में कमान संभाल ली। मादुरो प्रशासन में उपराष्ट्रपति रहीं रोड्रिग्ज को उनके भाई और नेशनल असेंबली के नेता जॉर्ज रोड्रिग्ज ने पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान भावुक होते हुए रोड्रिग्ज ने इस सैन्य हस्तक्षेप को मातृभूमि पर नाजायज आक्रमण करार दिया और मादुरो व उनकी पत्नी की गिरफ्तारी को दो नायकों का अपहरण बताते हुए जनता के दुख में सहभागी होने की बात कही। इस गंभीर राजनीतिक संकट के बीच एक बेहद दिलचस्प और मानवीय पहलू यह उभरकर सामने आया है कि सत्ता से बेदखल किए गए निकोलस मादुरो और वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज, दोनों का भारत के साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध है।
ये दोनों ही नेता भारतीय आध्यात्मिक गुरु श्री सत्य साईं बाबा के परम भक्त हैं। निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस दशकों से साईं बाबा के सिद्धांतों का अनुसरण कर रहे हैं। इस जुड़ाव की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2005 में मादुरो ने स्वयं आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्ती स्थित प्रशांति निलयम आश्रम का दौरा किया था और बाबा से व्यक्तिगत मुलाकात की थी। राष्ट्रपति रहते हुए मादुरो के कार्यालय में साईं बाबा की तस्वीर वेनेजुएला के महान नायकों साइमन बोलिवार और ह्यूगो शावेज की तस्वीरों के साथ सम्मानपूर्वक लगी रहती थी। यहां तक कि साल 2025 में साईं बाबा की जन्म शताब्दी के अवसर पर मादुरो ने उन्हें प्रकाश का पुंज कहकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
इसी आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी कई बार भारत की यात्रा की है। उपराष्ट्रपति के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अगस्त 2023 और अक्टूबर 2024 में विशेष रूप से पुट्टपर्ती जाकर साईं बाबा के समाधि मंदिर में प्रार्थना की थी। अक्टूबर 2024 में उनकी भारत यात्रा उस समय चर्चा में रही जब वे नई दिल्ली में उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों के बाद सीधे शांति और दिव्यता की तलाश में आश्रम पहुँची थीं। श्री सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट के अनुसार, उनकी ये यात्राएं पूर्णतः व्यक्तिगत थीं। वेनेजुएला में सत्य साईं संगठन का काफी प्रभाव है और वहां के शीर्ष नेताओं का बाबा के प्रति अटूट विश्वास इस संगठन को देश में एक विशेष स्थान दिलाता है।
दूसरी ओर, वेनेजुएला की वर्तमान सरकार दुनिया को यह संदेश देने की पुरजोर कोशिश कर रही है कि देश की संप्रभुता अभी भी बरकरार है और वह बाहरी शक्तियों के दबाव में नहीं है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पैदा हुई अनिश्चितता के बीच सत्ताधारी दल के सांसद और मादुरो के पुत्र निकोलस मादुरो ग्वेरा राजधानी काराकास में नेशनल असेंबली के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस दौरान मादुरो के पुत्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक चुने हुए राष्ट्राध्यक्ष के अपहरण को वैश्विक स्तर पर स्वीकार कर लिया गया, तो भविष्य में कोई भी देश सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने इसे केवल वेनेजुएला की समस्या न मानकर वैश्विक राजनीतिक स्थिरता के लिए एक सीधा खतरा बताया। वेनेजुएला के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में 30 दिनों के भीतर चुनाव होने अनिवार्य हैं, लेकिन अमेरिकी हस्तक्षेप और आंतरिक तनाव को देखते हुए वहां की संवैधानिक व्यवस्था और भविष्य की राह फिलहाल धुंधली नजर आ रही है।
सोवियत संघ को खुफिया जानकारी बेचने वाला सीआईए का पूर्व एजेंट एल्ड्रिक एमेस जेल में मृत
8 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अधिकारी और शीत युद्ध के दौर के सबसे कुख्यात जासूसों में शामिल एल्ड्रिक एमेस का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। मैरीलैंड की जेल में बंद एमेस की मौत बीते सोमवार को हुई। जेल ब्यूरो के प्रवक्ता ने उनके निधन की पुष्टि की है। एमेस पिछले कई दशकों से आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। एल्ड्रिक एमेस ने करीब 31 वर्षों तक अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए में सेवा दी थी, लेकिन इसी दौरान उन्होंने अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचाया। एमेस ने स्वीकार किया था कि उन्होंने 1985 से 1994 के बीच सोवियत संघ को अमेरिकी खुफिया जानकारियां बेची थीं। इसके बदले उन्हें मॉस्को से करीब 25 लाख डॉलर मिले थे। यह मामला शीत युद्ध के समय सामने आए सबसे बड़े जासूसी घोटालों में से एक माना जाता है।
एमेस ने अपनी स्वीकारोक्ति में बताया था कि उन्होंने 10 रूसी अधिकारियों और एक पूर्वी यूरोपीय अधिकारी की पहचान उजागर की थी, जो अमेरिका और ब्रिटेन के लिए जासूसी कर रहे थे। इसके अलावा उन्होंने उपग्रह आधारित निगरानी अभियानों, गुप्त बातचीत, जासूसी नेटवर्क और खुफिया एजेंसियों के काम करने के तरीकों से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां भी सोवियत संघ को सौंपी थीं। इन सूचनाओं के कारण पश्चिमी देशों के कई खुफिया एजेंट पकड़े गए और उनमें से कई की मौत हो गई। यह घटना सीआईए और उसके सहयोगी देशों के लिए बड़ा झटका साबित हुई थी।
एल्ड्रिक एमेस पर जासूसी और टैक्स चोरी के आरोप लगे थे, जिन्हें उन्होंने अदालत में स्वीकार कर लिया था। इसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अभियोजकों का कहना था कि एमेस ने लंबे समय तक अमेरिका से महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां छिपाकर रखीं और उन्हें दुश्मन देश को सौंपा। वहीं अदालत में दिए गए अपने बयान में एमेस ने कहा था कि वह अपने विश्वासघात को लेकर शर्मिंदा हैं और अपराधबोध से ग्रस्त हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने यह कदम अपने भारी कर्ज चुकाने के लिए उठाया था।
एफबीआई के अनुसार, एमेस सीआईए के लैंगली मुख्यालय में सोवियत और पूर्वी यूरोप विभाग में तैनात थे, तभी उन्होंने पहली बार सोवियत खुफिया एजेंसी केजीबी से संपर्क किया। रोम में पोस्टिंग के दौरान और बाद में वाशिंगटन लौटने के बाद भी उन्होंने गोपनीय सूचनाएं साझा करना जारी रखा। लंबे समय तक अमेरिकी खुफिया एजेंसियां यह समझ नहीं पाईं कि सोवियत संघ इतनी आसानी से उनके एजेंटों को कैसे पकड़ पा रहा है। एल्ड्रिक एमेस की मौत के साथ शीत युद्ध के एक काले अध्याय का अंत हो गया है।
जापान के शिमाने प्रांत में 6.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी का खतरा नहीं
7 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो । जापान के पश्चिमी हिस्से में स्थित शिमाने प्रांत मंगलवार तड़के भीषण भूकंप के झटकों से दहल उठा। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.3 मापी गई। झटके इतने तेज थे कि स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई और लोग अपनी सुरक्षा के लिए आनन-फानन में घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह है कि इतनी अधिक तीव्रता के बावजूद अभी तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है और न ही प्रशासन की ओर से सुनामी की कोई चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 10:18 बजे आया। इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इस मुख्य झटके के ठीक 10 मिनट बाद, यानी 10:28 बजे, इलाके में एक और मध्यम तीव्रता का झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 5.1 दर्ज की गई। इन झटकों का सबसे अधिक असर शिमाने प्रांत की राजधानी मात्सुए और पड़ोसी तोत्तोरी प्रांत के विभिन्न शहरों में देखा गया। स्थानीय प्रशासन और परमाणु विनियमन प्राधिकरण ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में स्थित शिमाने परमाणु बिजली संयंत्र और उससे जुड़ी अन्य इकाइयों में किसी भी तरह की असामान्यता या खराबी नहीं पाई गई है। संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है।जापान के लिए यह प्राकृतिक आपदा एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में आए एक शक्तिशाली भूकंप के कारण लगभग 90,000 लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। वर्तमान घटना के बाद भी बचाव दल और आपदा प्रबंधन इकाइयां अलर्ट पर हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।भौगोलिक दृष्टि से जापान प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र पर स्थित है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय बेल्ट में से एक माना जाता है, जिसके कारण यहाँ अक्सर टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल होती रहती है। यही वजह है कि जापान में भूकंप रोधी तकनीक और आपदा पूर्व तैयारियों पर विशेष जोर दिया जाता है, जिससे बड़े खतरों के बावजूद जान-माल का नुकसान कम से कम हो।
प्रधानमंत्री जनमन योजना से बदली सेजाडीह की तस्वीर
आबकारी मामला: पक्षपात के आरोप निराधार, हाई कोर्ट ने केजरीवाल की मांग ठुकराई
प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल
मध्यप्रदेश में खेल सुविधाओं का हो रहा है निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
तकनीकी खामियों पर पैनी नजर: 6 रेलकर्मियों ने सूझबूझ से टाले हादसे, डीआरएम ने किया सम्मान।
सड़क सुरक्षा के लिए पुलिस सख्त: राजधानी के चौक-चौराहों पर ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रही टीमें।
खेत से चोरी हुई थीं गायें: भोपाल के गोदरमऊ क्षेत्र में हुई घटना ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती।
अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप: बृजभूषण और प्रज्वल रेवन्ना मामले पर बरसीं शोभा ओझा
