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मादुरो और फ्लोरेस की वेनेजुएला वापसी तक एक मिनट भी आराम नहीं करुंगी
12 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काराकास। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने अमेरिकी सेना की हिरासत में लिए गए निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की देश वापसी का संकल्प लिया है। रोड्रिग्ज ने कहा कि मादुरो और फ्लोरेस की वेनेजुएला वापसी तक वह एक मिनट भी आराम नहीं करेंगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक कार्यक्रम में रोड्रिग्ज ने कहा कि वेनेजुएला के नेतृत्व या शासन कार्यक्रम के बारे में कोई अनिश्चितता नहीं है।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के लोग प्रभारी हैं और एक सरकार है, जो राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की है। उन्होंने शांति, स्थिरता और देश के भविष्य की गारंटी के लिए एकता का आह्वान किया। रोड्रिग्ज ने कहा कि एक साल पहले उन्होंने मादुरो के साथ उनके तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में शपथ ली थी। आज एक साल बाद हम उनकी आजादी के लिए शपथ ले रहे हैं। रोड्रिग्ज ने कहा कि राष्ट्रीय एकता मादुरो को बचाने के प्रयास में निर्णायक होगी। इसी बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिग्ज ने पुष्टि की कि उनकी सरकार मादुरो की ओर से निर्धारित सात कार्य योजनाओं को जारी रखे हुए है।
बता दें अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी को काराकास और वेनेजुएला के तीन अन्य शहरों में सैन्य हमले किए थे। इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उनकी पत्नी समेत हिरासत में ले लिया था। अमेरिका की इस कार्रवाई की दुनियाभर में निंदा की गई और कई देशों ने अपनी चिंताएं भी जाहिर कीं। इस बीच ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करना शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे प्रत्यक्ष अमेरिकी कार्रवाई का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वे कैदी याद रखेंगे कि वे कितने भाग्यशाली हैं कि अमेरिका आया और उसने वह किया जो करना जरूरी था।
ईरानी विद्रोह से क्या तीसरे विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई है? रुस-चीन भी हैं तैयार
12 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। ईरानी रियाल की भारी गिरावट से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब इतने बड़े स्तर पर पहुंच गए हैं कि पूरी दुनिया और खासतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भी इसमें इनवॉल्व हो रहे हैं। आशंका ये है कि तेल का खेल बिगड़ते देखकर चीन और रूस भी इस बार शायद चुप रहेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तीसरे विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई है? मौजूदा हालात और बिगड़े तो क्या ईरान की सड़कों पर खून-खराबा होगा? फिर संकट की घड़ी में ईरान के साथ कौन-कौन से देश खड़े होंगे?
ईरान ने अपनी ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को मैक्सिमम अलर्ट पर रखा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आदेश दिया है कि आईआरजीसी पूरी तरह तैयार रहे। इस अलर्ट को जून 2025 में इजराइल के साथ हुई 12 दिनों की जंग से भी ज्यादा गंभीर माना है। इस तनाव के बीच सोशल मीडिया पर इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे ईरान की जनता से आजादी के लिए लड़ने की अपील करते नजर आ रहे हैं। इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी जनता से जोरदार विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है। उन्होंने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों से देशव्यापी हड़ताल करने और बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।
ईरान में भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन, रूस और ईरान के युद्धपोत दक्षिण अफ्रीका पहुंच चुके हैं। यहां तीनों देशों के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास हो रहा है। माना जा रहा है कि रूस आईआरजीसी को आधुनिक हथियारों, एयर डिफेंस मिसाइलों और रडार सिस्टम की ट्रेनिंग दे सकता है।
ईरान का सबसे बड़ा युद्धपोत मकरान, चीनी और रूसी जहाजों के साथ मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका की रक्षा सेना का कहना है कि इन अभ्यासों से आपसी सैन्य तालमेल और अनुभव साझा करने में मदद मिलेगी। ईरानी दूतावास ने एक्स पर बयान जारी कर अमेरिका पर मनोवैज्ञानिक युद्ध, सैन्य हस्तक्षेप की धमकी, झूठी खबरें फैलाने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि ये सभी कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
इस बीच अमेरिकी वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान जर्मनी से मध्य पूर्व की ओर उड़ता देखा गया है। यह विमान भारी हथियार, टैंक और सैनिक ले जाने में सक्षम है। कुछ रिपोर्टे्स में ये भी कहा गया कि अमेरिकी केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान फारस की खाड़ी और इराकी हवाई क्षेत्र में फ्यूल भरते देखा गया है। ऐसा नहीं है कि वो अमेरिका ही इस तैयारी में लगा हुआ है ईरान के समर्थन में चीन भी खुलकर आ गया है उसने कहा है कि वह ईरान की संप्रभुता की रक्षा के लिए आर्थिक, खुफिया, तकनीकी या सैन्य मदद देने को तैयार है। कई रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन बाहरी ताकतों के समर्थन से फैलाए जा रहे अस्थिरता के खिलाफ ईरानी सरकार के साथ खड़ा है। रिपोर्ट्स कह रही हैं कि चीन वेनेजुएला के बाद अपने एक और तेल के स्रोत को यूं ही नहीं जाने देगा।
ब्रिटेन सांसद ने बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा के लिए सरकार से किया हस्ताक्षेप का आग्रह
12 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन में विपक्ष की नेता प्रीति पटेल ने सरकार से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्याओं समेत हिंसा में बढ़ोतरी के मामले में हस्तक्षेप करने और देश में स्थिरता लाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आह्वान किया है। विपक्षी दल कंजर्वेटिव पार्टी की सांसद प्रीति पटेल ने सोशल मीडिया पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री यवेट कूपर को लिखा अपना पत्र पोस्ट किया, जिसमें लेबर पार्टी सरकार से ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में इस मुद्दे पर बयान देने का भी आह्वान किया है।
सांसद पटेल ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए और हिंदुओं की हत्याएं और उन पर हो रहे अत्याचार गलत हैं और इन्हें रोकना होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन सरकार को बांग्लादेश में स्थिरता लाने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखने के लिए अपने प्रभाव और समन्वय शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। कूपर को लिखे अपने पत्र में प्रीति पटेल ने हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में कम से कम छह हिंदुओं की हत्या की खबरों का जिक्र किया है।
US से तनाव के बीच दिल्ली पहुंचे ट्रंप के करीबी… बोले- भारत का बहुत अच्छा लग रहा है
11 Jan, 2026 08:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and America) के रिश्तों में तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के करीबी माने जाने वाले नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) नई दिल्ली पहुंच गए हैं। गोर (38) ने नवंबर के मध्य में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ली। शुक्रवार रात नयी दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘भारत में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हमारे दोनों देशों के लिए आगे अपार अवसर हैं।’’ भारत में उनका आगमन ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के एक दावे के बाद दोनों पक्षों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। लटनिक ने कहा था कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता पिछले साल इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।
भारत ने शुक्रवार को इस दावे को खारिज कर दिया और लटनिक की टिप्पणियों को गलत बताया। गोर ‘व्हाइट हाउस’ के कार्मिक निदेशक के रूप में कार्यरत थे, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अगस्त में उन्हें भारत में अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित किया था। ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क (टैरिफ) को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध गंभीर तनाव में है। शुल्क के अलावा, कई अन्य मुद्दों पर भी संबंधों में गिरावट आई है, जिनमें पिछले साल मई में ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त करने का दावा और अमेरिका की नयी आव्रजन नीति शामिल है।
अमेरिकी सीनेट ने अक्टूबर में गोर को भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी। गोर के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्रंप ने कहा था, ‘‘मुझे सर्जियो गोर पर भरोसा है कि वह हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों में से एक, यानी भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में मदद करेंगे।’’
गोर ने अपनी नयी भूमिका को अपने जीवन का ‘‘सबसे बड़ा सम्मान” बताया था और कहा था कि वह अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को ‘‘मजबूत’’ करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप के प्रचार अभियान की राजनीतिक कार्रवाई समिति (पीएसी) में एक प्रमुख भूमिका निभाई, और नए प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियों की जांच का काम सौंपे जाने के बाद उनका प्रभाव कई गुना बढ़ गया। पिछले साल जनवरी में भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन के लिए अपना नया राजदूत नियुक्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया। सीनेट से मंजूरी के कुछ दिनों बाद गोर ने अक्टूबर में छह दिनों के लिए भारत का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।
छोटे, तेज और झुंड में हमला करने वाले ड्रोन को होगा सफाया.........चीन ने तैयार किया ‘हरिकेन 3000’ गोलाबारूद से नहीं बिजली से चलेगा ये घातक हथियार
11 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । समय के साथ दुनिया में युद्ध का स्वरूप भी बदल गया है। जहां पहले लड़ाइयां जमीन पर होती थीं, वहीं अब आधुनिक युद्ध में ड्रोन सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। छोटे, तेज और झुंड में हमला करने वाले ये ड्रोन टैंकों, एयरबेस और शहरों तक को निशाना बनाते हैं। इसके जवाब में हर देश इसतरह का एयर डिफेंस सिस्टम बनाने में लगा है, जो कम खर्च में इन ड्रोन झुंडों का सफाया कर सके। परंपरागत मिसाइल और तोप आधारित सिस्टम महंगे हैं और बड़े पैमाने पर ड्रोन नष्ट करना चुनौतीपूर्ण है। इस कमी को देखकर चीन ने एक ऐसा समाधान निकाला है, जिसने दुनिया को चौंका दिया है।
चीनी सरकारी रक्षा कंपनी नोरिन्को ने ‘हरिकेन 3000’ नामक हाई-पावर माइक्रोवेव (एपपीएम) हथियार विकसित किया है। यह कोई सामान्य मिसाइल या तोप नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर हमला करने वाला एक अत्याधुनिक हथियार है। ट्रक पर लगे सिस्टम से निकली माइक्रोवेव किरणें दुश्मन के ड्रोन के कंट्रोल और सर्किट को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके चलते ड्रोन हवा में ही बर्बाद हो जाते हैं। नोरिन्को के अनुसार, यह हथियार 3 किलोमीटर तक छोटे और हल्के ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है, और यह पूरे झुंड को एक साथ रोक सकता है।
हरिकेन 3000 का पहला प्रदर्शन 2024 में झुहाई एयर शो में हुआ था, जबकि सितंबर 2025 में चीन की सैन्य परेड में सार्वजनिक रूप से पेश किया। इस हथियार का संचालन अत्याधुनिक सेंसर और रडार सिस्टम से होता है। रडार उड़ते ड्रोन का पता लगाता है और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर उन्हें लॉक करता है। इसके बाद माइक्रोवेव किरणें ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में प्रवेश कर निष्क्रिय कर देती हैं। इस प्रक्रिया में न विस्फोट होता है और न ही मलबा फैलता है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में कोई नुकसान नहीं होता।
विशेषज्ञों का कहना है कि हरिकेन 3000 का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस चलाने के लिए गोलाबारूद की जरूरत नहीं होती। बिजली उपलब्ध रहने तक यह हथियार लगातार हमला कर सकता है। इसकी लागत भी पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले बहुत कम है। अमेरिका के पास भी ऐसा ही हथियार है, इस ‘लियोनिडास’ कहते हैं, लेकिन इसकी रेंज केवल दो किलोमीटर है। चीन का दावा है कि हरिकेन 3000 इससे कहीं अधिक दूरी तक प्रभावी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य की लड़ाई अब तरंग आधारित तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक हथियारों के इर्द-गिर्द घूमेगी, और गोले-बारूद की जगह हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार युद्ध के नए स्वरूप में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। हरिकेन 3000 की क्षमताओं ने न केवल चीन की वायु रक्षा प्रणाली को सशक्त किया है, बल्कि वैश्विक सैन्य तकनीक की दिशा को भी बदलने की चेतावनी दी है। भविष्य में ड्रोन हमलों के खिलाफ इसका उपयोग युद्धक्षेत्र में निर्णायक साबित हो सकता है।
मैं शांतिदूत… मैंने भारत-पाक युद्ध रुकवाया, शांति के नोबेले के लिए मुझसे बड़ा हकदार कोई नहीं: ट्रंप
11 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अपनी भूमिका को लेकर बड़ा दावा करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रुकवाने का श्रेय खुद को दिया है। कहा मैं ही दुनिया का शांतिदूत हूं। ट्रंप ने अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए न केवल स्वयं को नोबेल शांति पुरस्कार का सबसे बड़ा हकदार बताया, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हवाले से दावा किया कि ट्रंप के हस्तक्षेप की वजह से करोड़ों लोगों की जान बची। उन्होंने कहा कि पिछले साल मई 2025 में जब दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच युद्ध जैसे भीषण हालात बन गए थे, तब उन्होंने रैपिड ऑर्डर के जरिए इस टकराव को खत्म कराया था।
ट्रंप ने एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान कहा कि लोग उन्हें पसंद करें या न करें, लेकिन उन्होंने दुनिया के आठ बड़े युद्धों को सुलझाने में सफलता प्राप्त की है, जिनमें से कुछ संघर्ष पिछले 36 वर्षों से जारी थे। भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उस समय हवा में आठ लड़ाकू विमान गिराए जा चुके थे और दोनों देश परमाणु हमले की कगार पर खड़े थे। उन्होंने जोर देते हुए कहा, इतिहास में मुझे नहीं लगता कि कोई और मुझसे ज्यादा नोबेल पुरस्कार का हकदार है। हर उस युद्ध के लिए पुरस्कार मिलना चाहिए जिसे आपने रुकवाया हो। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार किया था कि राष्ट्रपति ट्रंप की सक्रियता के कारण ही एक करोड़ से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकी।
हालांकि, भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को हमेशा की तरह सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली का आधिकारिक रुख पूरी तरह स्पष्ट है कि सीमा पर युद्धविराम का फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी सैन्य बातचीत और डीजीएमओ स्तर की वार्ताओं का परिणाम था, न कि किसी तीसरे पक्ष के दबाव का। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के बाद भारतीय वायुसेना और थल सेना ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, जिससे दबाव में आकर पाकिस्तान ने स्वयं युद्धविराम की अपील की थी। भारत-पाक संबंधों के अलावा ट्रंप ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर भी सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने वहां जारी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान की सरकार वर्तमान में बड़ी मुश्किल में है और प्रदर्शनकारी उन शहरों पर नियंत्रण कर रहे हैं जिनके बारे में पहले कभी सोचा नहीं गया था। ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे नरमी नहीं दिखाएंगे। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि ईरानी सरकार ने अपने ही प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई शुरू की, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करेगा और उन ठिकानों पर चोट करेगा जहां दुश्मन को सबसे ज्यादा दर्द होगा।
खामेनेई ने ट्रंप पर किया तीखा प्रहार कहा- अहंकार ही ट्रंप के पतन का कारण बनेगा
11 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा और बेहद तल्ख हमला बोला है। तेहरान में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक संदेश में खामेनेई ने ट्रंप को दुनिया का सबसे अहंकारी शासक करार दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी किसी तानाशाह का घमंड अपने चरम पर पहुँचा है, उसका पतन निश्चित हुआ है। खामेनेई ने ट्रंप की तुलना इतिहास के क्रूर पात्रों फिरौन, निमरोद और ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी से करते हुए कहा कि वर्तमान अमेरिकी नेतृत्व भी उसी विनाशकारी रास्ते पर है।
खामेनेई ने अपने बयान में धार्मिक और ऐतिहासिक प्रतीकों का गहराई से उपयोग किया। उन्होंने कहा कि जो अमेरिकी राष्ट्रपति पूरी दुनिया के बारे में अहंकार से फैसले लेते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि तानाशाही का अंत हमेशा बुरा होता है। उन्होंने फिरौन का उदाहरण दिया, जिसे इस्लामी और बाइबिल परंपराओं में अत्याचार का प्रतीक माना जाता है और जिसका अंत लाल सागर में डूबने से हुआ था। इसी तरह उन्होंने निमरोद का जिक्र किया, जिसका अंत एक मामूली मच्छर के कारण हुआ था—यह उदाहरण उन्होंने यह बताने के लिए दिया कि एक विशाल साम्राज्य का अहंकारी राजा भी तुच्छ चीज से पराजित हो सकता है।
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का यह बयान काफी मायने रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी अपनी ही सड़कों और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। खामेनेई ने ट्रंप को नसीहत दी कि उन्हें दूसरों के मामलों में दखल देने के बजाय अपने देश की आंतरिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। इस बीच, ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने भी सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अधिकतम और बिना किसी कानूनी रियायत के कठोर कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी भी इस उथल-पुथल के बीच सक्रिय हो गए हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति में बेदखल किए गए शाह के पुत्र रजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे वर्तमान शासन के बजाय ईरानी जनता का साथ दें। उन्होंने इंटरनेट पाबंदियों के बावजूद लोगों से शांतिपूर्ण प्रतिरोध जारी रखने का आह्वान किया है। रजा पहलवी ने इन प्रदर्शनों को किसी एक नेता की पहल नहीं, बल्कि दशकों के दमन और आर्थिक बदहाली से उपजी जनता की पुकार बताया है। वर्तमान में ईरान में तनाव अपने चरम पर है। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और अमेरिकी प्रशासन चिंता जता चुके हैं। जहाँ ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही है, वहीं ईरानी नेतृत्व इसे विदेशी साजिश करार दे रहा है। कुल मिलाकर, ईरान के भीतर का जनआक्रोश और बाहर से मिल रही कूटनीतिक धमकियों ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया और गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री बोले- गाजा के लिए दंडित करने नेतन्याहू का अपहरण करें ट्रंप
11 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू के खिलाफ बेहद विवादित टिप्पणी की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया विवाद पैदा हो गया है। ख्वाजा आसिफ ने खुले मंच से अमेरिका और तुर्की जैसे देशों से अपील की, कि वे इजरायली प्रधानमंत्री का अपहरण (किडनैप) कर लें ताकि गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई के लिए उन पर युद्ध अपराधों का मुकदमा चलाया जा सके।
पाकिस्तानी पत्रकार के साथ बातचीत के दौरान रक्षा मंत्री ने नेतनयाहू को मानवता का सबसे बड़ा अपराधी करार दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) द्वारा नेतनयाहू के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट का हवाला देते हुए कहा कि वह दुनिया के सबसे वांटेड अपराधी हैं। आसिफ ने तर्क दिया कि यदि अमेरिका वास्तव में खुद को मानवता का मित्र और न्याय का समर्थक मानता है, तो उसे नेतनयाहू को पकड़कर उन पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने अमेरिका द्वारा पूर्व में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ की गई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए मांग की कि नेतनयाहू के मामले में भी इसी तरह की सख्ती दिखाई जानी चाहिए।
इंटरव्यू के दौरान माहौल उस समय और भी तनावपूर्ण हो गया जब रक्षा मंत्री ने तुर्की को भी इस कार्य के लिए उकसाया। उन्होंने कहा कि तुर्की भी उन्हें हिरासत में ले सकता है और पाकिस्तान की जनता इसके लिए दुआ कर रही है। हालांकि, विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब ख्वाजा आसिफ ने उन वैश्विक नेताओं को सजा देने की बात शुरू की जो इजरायल का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस इशारे को स्पष्ट रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर देखा गया।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए शो के एंकर ने रक्षा मंत्री को बीच में ही टोक दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की टिप्पणी पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किलें पैदा कर सकती है। एंकर ने तुरंत कमर्शियल ब्रेक ले लिया और ब्रेक के बाद घोषणा की गई कि रक्षा मंत्री अब इस चर्चा का हिस्सा नहीं रहेंगे। जानकारों का मानना है कि यह पाकिस्तान सरकार द्वारा डैमेज कंट्रोल करने की एक त्वरित कोशिश थी ताकि अमेरिका के साथ संबंधों में कोई बड़ी दरार न आए। यह विवाद ऐसे संवेदनशील समय में सामने आया है जब पाकिस्तान अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अमेरिका के साथ संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तानी नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा की थी। भारत के साथ जारी तनावपूर्ण स्थितियों के बीच पाकिस्तान अपनी विदेश नीति को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाने का दावा करता रहा है, लेकिन रक्षा मंत्री के इस बयान ने सरकार की कूटनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। हालांकि पाकिस्तान इजरायल को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता है, लेकिन इस तरह की उग्र बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
खालिदा जिया के निधन के बाद तारिक रहमान बने बीएनपी के अध्यक्ष
11 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के निधन के बाद उनके बेटे तारिक रहमान ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की कमान संभाल ली है। बीएनपी की स्टैंडिंग कमेटी ने तारिक रहमान को पार्टी का चेयरमैन बनाने की मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला शुक्रवार रात पार्टी के गुलशन दफ्तर में हुई एक बैठक में लिया गया। बैठक के बाद बीएनपी सचिव जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने इसकी पुष्टि की। बैठक में कमेटी के सभी सदस्यों ने एकमत से तारिक रहमान को बीएनपी अध्यक्ष चुना। सबकी रजामंदी के बाद तारिक रहमान ने बीएनपी संविधान के मुताबिक अध्यक्ष का पद संभाल लिया।
सूत्रों के मुताबिक रहमान इरशाद विरोधी आंदोलन के दौरान अपनी मां के साथ सड़क पर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे। ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि तारिक 1988 में पार्टी की गबताली उपजिला यूनिट के आम सदस्य के तौर पर शामिल हुए थे। 1991 के आम चुनाव से पहले उन्होंने देश के हर जिले में अपनी मां जिया के साथ अभियान चलाया था। 1993 में तारीक रहमान ने बीएनपी की बोगुरा जिला यूनिट की एक कॉन्फ्रेंस की थी, जहां इलाके के पार्टी नेतृत्व को सीक्रेट बैलेट से चुना गया था। इसके बाद उन्होंने दूसरे जिला यूनिट्स को अपना नेता चुनने में लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने के लिए बढ़ावा दिया।
2002 में बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी ने तारिक रहमान को सीनियर संयुक्त सचिव नामित किया। 2005 में उन्होंने देश भर में जमीनी स्तर का कॉन्फ्रेंस की और बांग्लादेश के हर उपजिला में बीएनपी इकाई के साथ परामर्श किया। 2007 में वन-इलेवन पीरियड के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए विदेश भेज दिया गया, जिसके बाद वे 2008 से देश निकाला में रहे। वे 17 साल बाद 25 दिसंबर, 2025 को बांग्लादेश लौटे।
इससे पहले 2009 में उन्हें बीएनपी का सीनियर उपाध्यक्ष चुना गया। हालांकि फिर 2018 में जब बेगम खालिदा जिया को जेल हुई थी, तो तारिक रहमान को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद अब पार्टी ने खालिदा जिया के निधन के बाद तारिक रहमान को बीएनपी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है।
एक हजार साल पहले अमेरिका में हुआ था खूनखराबा, ग्रीनलैंड के रास्ते आए वाइकिंग्स
10 Jan, 2026 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का ग्रीनलैंड (Greenland) में इंटरेस्ट एक बार फिर जाग गया है और वह इस नॉर्डिक देश (Nordic countries) पर कब्जा करने की बात करने लगे हैं। वहीं डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी से डेनमार्क और ग्रीनलैंड समेत लगभग सारे ही नॉर्डिक और स्कैंडिनेवियाई देश भड़क गए हैं। नॉर्डिक देशों में नॉर्वे, स्वीडन, ग्रीनलैंड, फिनलैंड, डेनमार्क हैं। नॉर्डिक का अर्थ ही उत्तर होता है। अमेरिका और नॉर्डिक देशों का टकरवा कोई नया नहीं है। इसके पीछे की कहानी 1 हजार साल पहले ही शुरू होती है। कोलंबस से पहले भी नॉर्डिक देशों के लोगों ने अमेरिका महाद्वीप पर कदम रखा था और वह यही जमीन थी जहां आज कनाडा है।
इन देशों के लोगों को वाइकिंग कहा जाता था और ये बेहद खोजी और बहादुर हुआ करते थे। समंदर पर इनका राज था। इनमें से कई गुट लुटेरों के भी थे। वाइकिंग का काम ही यही था कि वे समंदर के रास्ते जमीन को ढूंढते थे और वहां रहने वाले लोगों को लूट लेते थे। वे कोशिश करते थे कि वहां वे स्थायी कब्जा कर लें। हालांकि अगर वहां बसने में कोई लाभ नहीं दिखता था तो वे बहुमूल्य चीजें लेकर चलते बनते थे।
ये वाइकिंग स्कैंडिनेवियाई भूमि (डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे) के रहने वाले लोगों ने ही ग्रीनलैंड की भी खोज की थी और यहां बस गए थे। वर्तमान समय में नॉर्डिक देश सांस्कृतिक रूप से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और संकट आने पर एकजुट भी हो जाते हैं। नॉर्डिक देशों का कहना है कि अमेरिका को नाटो से बाहर कर देना चाहिए। ऐसे में जानकारों का कहना है कि उत्तरी भूमि से एक बार फि वाइकिंग्स की शुरुआत हो रही है।
अमेरिका में वाइकिंग्स का खून-खराबा
आज अमेरिका और नॉर्डिक देशों में तनाव बढ़ रहा है। वहीं इतिहास के पन्ने पलटें तो एक हजार साल पहले वाइकिंग्स ने अमेरिका में काफी रक्तपात किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक लीफ एरिकसन और उसके साथी पहली बार अमेरिकी भूमि पर पहुंचे थे। सन् 1000 के आसपास वाइकिंग्स और अमेरिका के मूल निवासियों के बीच जमकर टकराव हुआ था। वाइकिंग्स ने अमेरिका में जमकर लूटपाट की और उनमें से कई वहां रहने भी लगे। इसके बाद वाइकिंग्स का अमेरिकी भूमि पर आना-जाना हो गया।
लीफ एरिकसन के पिता एरिक द रेड काफी हिंसक थे और उनकी आदतों की वजह से नॉर्वे और आइसलैंड ने भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद ही एरिक अपने गुट को लेकर ग्रीनलैंड की तरफ निकल गए थे। एरिक की कई पीढ़ियां ग्रीन लैंड को खंगालती रहीं। यहां के मूल निवासियों से एरिक के संबंध पहले सौहार्दपूर्ण थे हालांकि जब व्यापार और लूट की बात आई तो संबंध खराब होने लगे। नेटिव अमेरिकन के साथ भी एरिक की दुश्मनी हो गई। नॉर्स लोगों ने वहां के मूल निवासियों की हत्या शुरू कर दी। इसके बाद रक्तपात शुरू हो गया। बाद में हुआ यह कि अमेरिका के मूल निवासियों ने वाइकिंग्स को खदेड़ा और वे फिर लौट आए। हालांकि दूसरे वाइकिंग्स गुटों का अमेरिका आना-जाना शुरू हो गया।
वाइकिंग्स उग्र थे, बावजूद इसके वे उत्तरी अमेरिका में अपनी बस्ती नहीं बसा पाए। अंततः वे ग्रीनलैंड में ही बस गए। इसके बाद उत्तरी अमेरिका के लोग ग्रीनलैंड पर हमला करने लगे। इससे वहां की बस्तियों का काफी नुकसान पहुंची। आज भी अमेरिका के साथ ग्रीनलैंड का तनाव बढ़ रहा है। वहीं ग्रीन लैंड के साथ सारे नॉर्डिक देश खड़े आ रहे हैं। नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने कहा है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का अभिन्न हिस्सा है। डेनमार्क मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा है। इसमें मुख्य भूमि यूरोप में है। इसमें फ्यून और बोर्नहोम जैसे कई बड़े द्वीप हैं। दूसरा हिस्सा ग्रनलैंड है जो कि दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और अटलांटिक और आर्कटिक सागर के बीच है। यह उत्तरी अमेरिका का ही हिस्सा है। हालांकि राजनीतिक रूप से इसे किंगडम ऑफ डेनमार्क ही कहा जाता है। तीसरा हिस्सा फैरो आइलैंड है जो कि उत्तरी अटलांटिक सागर में है। यह एक स्वायत्त क्षेत्र है। ग्रीनलैंड की लगभग डेढ़ किलोमीटर की सीमा कनाडा के एक द्वीप के साथ भी जुड़ी है।
डेनमार्क से काफी दूर है ग्रीनलैंड
समुद्री मार्ग और प्राकृतिक संसाधनों की वजह से ग्रीनलैंड काफी अहम है। यहां की आबादी बेहद कम है। इतनी बड़ी भूमि पर 50 हजार के ही करीब लोग रहते हैं। यहां के लोगों की जीविका मछली पकड़ने पर निर्भर है। वहीं डेनमार्क की सरकार की तरफ से यहां सब्सिडी दी जाती है। ग्रीनलैंड की राजधानी नूक से कोपेनहेगेन की दूरी लगभग साढ़े 3 हजार किलोमीटर है।
मादुरो को हटाने के बाद भी अमेरिका ने तेल के पांचवे टैंकर पर किया कब्जा
10 Jan, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
oil वाशिंगटन। निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) को घर से उठाने के बाद भी अमेरिकी सेना (US Army) का वेनेजुएला पर हमला कम नहीं हुआ है। सोमवार को एक वीडियो फुटेज जारी करते हुए बताया कि उन्होंने वेनेजुएला से आने-जाने वाले एक और तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह पिछले कुछ दिनों में अमेरिका द्वारा कब्जे में लिया गया वेनेजुएला का पांचवा टैंकर है।
अमेरिकी सेना की दक्षिणी कमान के मुताबिक यह कार्रवाई अमेरिकी मरीन और नौसेना कर्मियों द्वारा की गई। वेनेजुएला के ओलिना नामक पोत को जब्त करने की घोषणा करते हुए सेना ने लिखा कि अब अपराधियों के लिए कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी की सचिव क्रिस्टी नोएम ने भी कैरिबियाई सागर के पास इंटरनेशनल जलक्षेत्र में जब्त किए गए मोटर टैंकर को अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी करार दिया।
सोशल मीडिया साइट एक्स पर सेना ने एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें जिसमें एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर को पोत पर उतरते हुए और अमेरिकी कर्मियों द्वारा पोत की तलाशी लेते हुए देखा जा सकता है। अमेरिकी सेना द्वारा जब्त किया गया ओलिना, पांचवां टैंकर है और यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा वेनेजुएला के तेल उत्पादों के वैश्विक वितरण को नियंत्रित करने के व्यापक प्रयास के तहत की गई है। खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अचानक सत्ता से हटाया गया है।
रुसियों को रिहा करने के फैसले का मॉस्को ने किया स्वागत
इससे पहले जब्त किए गए टैंकर मेरिनेरा पर सवार दो रूसी नागरिकों को अमेरिका ने रिहा करने का फैसला किया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने एक बयान में कहा, ‘‘हमारे अनुरोध के जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तरी अटलांटिक में एक अभियान के दौरान अमेरिका द्वारा जब्त किये गए टैंकर मेरिनेरा के चालक दल के दो रूसी नागरिकों को रिहा करने का फैसला किया है।’’
मंत्रालय के टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान में जखारोवा ने कहा, ‘‘हम इस फैसले का स्वागत करते हैं और अमेरिकी नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।’’
गौरतलब है कि उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी तटरक्षक बल ने रूसी ध्वज वाले टैंकर मेरिनेरा (जिसे पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था) को बुधवार को जब्त कर लिया था। इस पर 17 यूक्रेनी नागरिक, छह जॉर्जियाई नागरिक, तीन भारतीय नागरिक और दो रूसी नागरिक सवार थे।’’ तीन भारतीयों सहित चालक दल के अन्य सदस्यों के भविष्य को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी…. इंटरनेट बंद, इंटरनेशनल टेलीफोन सेवाओं पर भी रोक
10 Jan, 2026 05:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। लगातार विरोध प्रदर्शनों (Protests) के बीच ईरान (Iran) में इंटरनेट बंद (Internet shut down) कर दिया गया है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय टेलीफोन सेवाओं (International telephone services) पर भी रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का विरोध थम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि राजधानी तेहरान और अन्य क्षेत्रों की सड़कों पर मलबा बिखरा हुआ है और प्रदर्शनकारी अलाव जलाकर ईरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इन सबके बीच मरने वालों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को इन प्रदर्शनों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल के आतंकवादी एजेंटों ने आग लगाई और हिंसा भड़काई। उसने यह भी कहा कि कुछ लोग हताहत हुए हैं, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (86) ने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संक्षिप्त संबोधन में संकेत दिया कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे, वहीं लोग अमेरिका मुर्दाबाद! के नारे लगा रहे थे।
खामेनेई ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी ही सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं। पिछले साल 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में लगातार तेजी आई है। विरोध प्रदर्शन इस बात की भी पहली परीक्षा है कि क्या ईरानी जनता युवराज रजा पहलवी से प्रभावित हो सकती है, जिनके गंभीर रूप से बीमार पिता 1979 की इस्लामी क्रांति से ठीक पहले ईरान से भाग गए थे।
पहलवी ने गुरुवार रात को विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया था और उन्होंने शुक्रवार रात 8 बजे भी प्रदर्शनों का आह्वान किया। ‘वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी‘ की वरिष्ठ फेलो होली डैग्रेस ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों का रुख बदलने वाला कारक पहलवी का ईरानियों से बृहस्पतिवार और शुक्रवार को रात 8 बजे सड़कों पर उतरने का आह्वान था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से यह स्पष्ट हो गया कि ईरानियों ने इस आह्वान को गंभीरता से लिया और इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंकने के लिए विरोध प्रदर्शन किया।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ग्रीनलैंड पर हमने कुछ नहीं किया तो रूस या चीन कब्जा कर लेंगे
10 Jan, 2026 04:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्रीनलैंड (Greenland) पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि यूएस (US) इस आर्कटिक द्वीप (Arctic Island) पर कार्रवाई करेगा, चाहे वह आसान तरीके से हो या कठिन। व्हाइट हाउस में तेल उद्योग के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे, जिससे US को इन देशों को पड़ोसी के रूप में स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड पर कुछ करने जा रहे हैं, चाहे उन्हें पसंद आए या नहीं। हमारे लोग आसान तरीके से डील करना चाहते हैं, लेकिन अगर नहीं हुआ तो हम इसे कठिन तरीके से करेंगे।’
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाते हुए जोर दिया कि ग्रीनलैंड का मालिकाना हक अमेरिका के पास होना चाहिए, ताकि इसे ठीक से बचाया जा सके। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के ईरान समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि अल्पकालिक डील से काम नहीं चलता, बल्कि स्थायी नियंत्रण जरूरी है। मालूम हो कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र है और लगभग 57,000 निवासियों का घर है। यह प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, खासकर दुर्लभ खनिजों से। ट्रंप प्रशासन इस द्वीप पर प्रभाव बढ़ाने के लिए कई विकल्प तलाश रहा है, जिसमें ग्रीनलैंडवासियों को प्रति व्यक्ति 10,000 से 1,00,000 डॉलर तक नकद भुगतान करने का प्रस्ताव शामिल है, ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के करीब आएं।
अमेरिका की क्या है पेशकश
रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य विकल्प कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन है जिसमें अमेरिका वित्तीय सहायता और रक्षा प्रदान करेगा। इसके बदले में सैन्य पहुंच मिलेगी। वैसे अधिकांश ग्रीनलैंड निवासी डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते। ट्रंप का यह बयान पिछले सालों की उनकी इच्छा को दोहराता है, जब उन्होंने ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही थी। ट्रंप के इन बयानों पर डेनमार्क और यूरोपीय देशों में भारी नाराजगी है।
डेनमार्क भी हमले के लिए तैयार
डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड पर कोई हमला हुआ तो उसके सैनिक पहले गोली चलाएंगे और बाद में सवाल पूछेंगे। यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य सिर्फ उसके लोगों और डेनमार्क के हाथ में है। यह विवाद नाटो गठबंधन के लिए भी चुनौती पैदा कर रहा है, क्योंकि डेनमार्क नाटो का सदस्य है। ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन आर्कटिक में बढ़ती गतिविधियां चला रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड के पास ऐसी कोई प्रत्यक्ष धमकी नहीं है। यह मामला अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने की क्षमता रखता है।
चीनी पेप्टाइड्स के जाल में फंसते अमेरिकी युवा
10 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सैन फ्रांसिस्को । टेक कंपनियों में काम करने वाले अमेरिका युवा चीनी पेप्टाइड्स के जाल में फंसते जा रहे हैं। अमेरिकी युवा इन्हें वजन घटाने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और शरीर को ज्यादा एक्टिव रखने के लिए अपना रहे हैं। ये पेप्टाइड्स सीधे चीन से मंगाए जा रहे हैं और इनके इस्तेमाल को लेकर न तो अमेरिकी सरकार की मंजूरी है और न ही इनकी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं। इसके बावजूद स्टार्टअप ऑफिस, प्राइवेट नेटवर्क और ‘पेप्टाइड रेव’ जैसे इवेंट्स के जरिए इनका खुलेआम प्रचार और उपयोग हो रहा है। अमेरिका में इन अनधिकृत पेप्टाइड्स की मांग बीते कुछ समय में तेजी से बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक 2025 के पहले नौ महीनों में ही चीन से इनका आयात करीब आठ गुना तक बढ़ गया। ये केमिकल आमतौर पर पाउडर के रूप में आते हैं, जिन्हें लोग पानी में घोलकर खुद ही इंजेक्ट कर लेते हैं।
इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से इंसुलिन सिरिंज आसानी से खरीदी जा रही हैं। सैन फ्रांसिस्को में काम कर रहे एक चीनी पेप्टाइड सप्लायर का कहना है कि किसी टेक कंपनी में एक व्यक्ति इसका इस्तेमाल शुरू करता है और फिर धीरे-धीरे पूरा ग्रुप या क्लस्टर बन जाता है, जहां इसे सामान्य और सुरक्षित मान लिया जाता है। पेप्टाइड्स असल में छोटे अमीनो एसिड चेन होते हैं, जो शरीर में हार्मोन को नियंत्रित करने, सूजन कम करने और रिकवरी में मदद करने का दावा करते हैं। वजन घटाने वाली चर्चित दवाओं जैसे ओजेम्पिक और वीगोवी में भी पेप्टाइड्स का ही उपयोग होता है, लेकिन वे सख्त मेडिकल ट्रायल और सरकारी मंजूरी के बाद बाजार में आई हैं।
इसके उलट अब लोग बीपीसी-157, टीबी-500, ऑक्सीटोसिन, एपिटालॉन और रेटाटूटाइड जैसे अनप्रूव्ड पेप्टाइड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनसे चोट जल्दी ठीक होने, बेहतर नींद, एंटी-एजिंग और ज्यादा फोकस की उम्मीद की जाती है। सोशल मीडिया इस ट्रेंड को और हवा दे रहा है। टिकटॉक और इंस्टाग्राम रील्स पर डीआईवाई इंजेक्शन गाइड खुलेआम मिल रहे हैं, जिनमें इन्हें आसान और असरदार समाधान के तौर पर दिखाया जाता है। कानून से बचने के लिए वेबसाइटों और वीडियो में इन्हें ‘रिसर्च केमिकल’ या ‘केवल अध्ययन के लिए’ बताया जाता है, ताकि सीधे मानव उपयोग का दावा न करना पड़े। हालांकि वीडियो के कमेंट्स और यूजर अनुभव साफ संकेत देते हैं कि इन्हें वजन घटाने, फोकस बढ़ाने और फिटनेस सुधारने के लिए ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारतीय स्वान बना शांति का प्रतीक
10 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टैक्सास । अमेरिका के टेक्सास राज्य में बौद्ध भिक्षुओं की शांति यात्रा जारी है। 19 बौद्ध भिक्षु एक भारतीय कुत्ते के साथ यात्रा कर रहे हैं।इस स्वान का नाम बौद्ध भिक्षुओं ने आलोका रखा है। बौद्ध भिक्षुओं का यह दल फोर्ट वर्थ से लेकर वॉशिंगटन डीसी की 2300 मिल की पदयात्रा पर निकला है। सभी जगह इनका स्वागत किया जाता है तथा लोग इन्हें खान शाकाहारी खाना भी उपलब्ध कराते हैं। रुकने की व्यवस्था भी जहां से हैं, निकलते हैं वहां के निवासी करते हैं। बौद्ध भिक्षु शांति का प्रतीक बन गए हैं। इस यात्रा का उद्देश्य लोगों में करुणा और शांति का संदेश फैलाना है।
यह भारतीय स्वान यात्रा के दौरान एक कार की चपेट में आकर घायल हो गया था। बौद्ध भिक्षुओं ने इसे इलाज के लिए एक ट्रक पर रवाना किया था। घायल होने के बाद भी यह ट्रक से छलांग लगाकर बौद्ध भिक्षुओं के पास आ गया। उनकी यात्रा में यह साथ-साथ चल रहा है। स्वान के रूप में वह शांति का प्रतीक बनकर लोगों को संदेश देने की कोशिश कर रहा है।
तकनीकी खामियों पर पैनी नजर: 6 रेलकर्मियों ने सूझबूझ से टाले हादसे, डीआरएम ने किया सम्मान।
सड़क सुरक्षा के लिए पुलिस सख्त: राजधानी के चौक-चौराहों पर ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रही टीमें।
खेत से चोरी हुई थीं गायें: भोपाल के गोदरमऊ क्षेत्र में हुई घटना ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती।
अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप: बृजभूषण और प्रज्वल रेवन्ना मामले पर बरसीं शोभा ओझा
जशपुर में विमान हादसा: आरा पहाड़ पर एयर एम्बुलेंस क्रैश होने से मचा हड़कंप
