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बांग्लादेश में चीन की अपील, 'विदेशी पत्नियों' से रहें सावधान
26 May, 2025 12:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश: शेख हसीना के बाद से ही चीन बांग्लादेश से अपने रिश्तों को मजबूत कर रहा है. लेकिन हाल ही में चीनी दूतावास ने एक नोटिस निकालते हुए चीनी नागरिकों को बांग्लादेश में महिलाओं के साथ रिश्ते बनाने या उनसे शादी करने को लेकर चेतावनी दी है. बांग्लादेश में चीनी एंबेसी ने रविवार देर रात एक नोटिस जारी किया जिसमें लिखा था, "चीनी नागरिकों को विदेश में संबंधित शादी से संबंधित कानून का सख्ती से पालन करना चाहिए, अवैध मैचमेकिंग एजेंटों से बचना चाहिए और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर सीमा पार डेटिंग सामग्री से गुमराह नहीं होना चाहिए." दूतावास ने कहा कि उन्हें 'विदेशी पत्नी खरीदने' के विचार को अस्वीकार करना चाहिए और बांग्लादेश में शादी करने से पहले दो बार सोचना चाहिए.
बाहर शादी करने पर क्या कहता है चीनी कानून?
दूतावास के बयान में कहा गया है कि चीनी कानून के मुताबिक किसी भी विवाह एजेंसी को सीमा पार विवाह मैचमेकिंग सर्विस में शामिल होने या सगाई को छिपाने की अनुमति नहीं है और किसी भी व्यक्ति को धोखे से या लाभ के लिए ऐसी गतिविधियों को अंजाम देने या छिपाने की अनुमति नहीं है. दूतावास ने चीनी नागरिकों को सलाह दी है कि वे वाणिज्यिक सीमा पार विवाह एजेंसियों से दूर रहें और वित्तीय और व्यक्तिगत दोनों तरह के नुकसान से बचने के लिए ऑनलाइन रोमांस स्केम के प्रति सतर्क रहें. दूतावास के मुताबिक ऐसे घोटालों के पीड़ितों को तुरंत चीन में सार्वजनिक सुरक्षा अधिकारियों को रिपोर्ट करना चाहिए.
चीन को क्यों हुई चिंता?
पिछले कई दिनों से ह्यूमन ट्रैफिकिंग के केस सामने आने के बाद चीन ने या निर्देश जारी किए हैं. बांग्लादेश मानव तस्करी पर सख्ती से नकेल कसता है. दूतावास ने चेतावनी दी कि बांग्लादेश में अवैध सीमा पार विवाह में शामिल लोगों को तस्करी के संदेह में गिरफ़्तार किया जा सकता है, जो चीनी नागरिकों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है.
प्रदर्शनों के दबाव में यूनुस का ऐलान, जून 2026 से आगे नहीं रहेंगे पद पर
26 May, 2025 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश: बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस आखिरकार झुकने को मजबूर हो गए हैं. पिछले साल अगस्त से सत्ता पर काबिज यूनुस के खिलाफ महीनों से देश में विरोध बढ़ता जा रहा था. देश के कई राजनीतिक पार्टियां और संगठन देश में दिसंबर तक आम चुनाव की मांग कर रहे थे. मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने रविवार को कहा कि वे अगले साल 30 जून से आगे पद पर नहीं रहेंगे और उस समय सीमा से पहले राष्ट्रीय चुनाव करा लिए जाएंगे. हालांकि उनका विरोध इतना था कि उनको किसी भी दिन देश की कुर्सी से उतरना पड़ सकता था, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल को लगभग एक साल के लिए बढ़ा लिया है. प्रोफेसर यूनुस ने तर्क दिया कि हम युद्ध की स्थिति में हैं और ऐसे में एकता जरूरी है. उन्होंने राजनीतिक दलों को विश्वास दिलाया कि चुनाव दिसंबर से 30 जून 2026 के बीच होंगे. साथ ही कहा कि वे अगले साल 30 जून के बाद एक दिन भी कुर्सी पर नहीं रहेंगे.
राजनीतिक दलों की बैठक के बाद फैसला
ये फैसला यूनुस ने स्टेट गेस्ट हाउस जमुना में कई राजनीतिक दलों के साथ बैठक करने के बाद लिया है. रविवार को यूनुस ने बढ़ता विरोध देख देश के कई राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक की थी. जो मांग कर रहे हैं कि देश में दिसंबर तक चुनाव कराया जाए. इससे पहले इस मांग को बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकार उज जमा ने उठाया था. जिसके बाद राजनीतिक दलों ने इसको और हवा दी और देशभर में यूनुस के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे.
हम युद्ध की स्थिति में- यूनुस
मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल के मुताबिक प्रोफेसर यूनुस ने नेताओं से कहा, "हम युद्ध की स्थिति में हैं, अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के बाद, वे देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. हमें इससे खुद को बचाना होगा." उन्होंने एकता की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए कहा, "हमें विभाजनों को दूर करना होगा और आम सहमति बनाए रखनी होगी. देश के अंदर और बाहर दोनों जगह एक साजिश चल रही है, जिसका उद्देश्य हमें वापस अधीनता में धकेलना है. वे देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं."
समुद्र में डूबा लाइबेरियाई जहाज, इंडियन नेवी ने सवार सभी 24 लोगों को बचाया
25 May, 2025 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने खतरनाक सामान से लदे एक लाइबेरियाई कंटेनर पोत के केरल तट के पास डूबने पर चालक दल के सभी 24 सदस्यों को रविवार को बचा लिया। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि लाइबेरियाई कंटेनर पोत एमएससी ईएलएसए तीन आज सुबह सात बजकर 50 मिनट पर कोच्चि तट पर बाढ़ के कारण डूब गया। पोत पर सवार चालक दल के सभी 24 सदस्यों को बचा लिया गया जिनमें से 21 को तटरक्षक बल ने और तीन को नौसेना के पोत आईएनएस सुजाता ने बचाया। यह पोत 640 कंटेनरों के साथ डूब गया। पोत पर 13 में खतरनाक सामान और 12 में कैल्शियम कार्बाइड वाले कंटेनर थे। कंटेनरों में 84.44 टन डीजल और 367.1 टन फर्नेस ऑयल भी भरा हुआ था।
केरल के तट पर संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए तटरक्षक बल ने प्रदूषण संबंधित कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। तेल रिसाव का पता लगाने वाली उन्नत प्रणालियों से लैस विमान हवाई निगरानी कर रहा है और प्रदूषण प्रतिक्रिया उपकरण लेकर बल का पोत सक्षम मौके पर तैनात है। फिलहाल तेल रिसाव की कोई सूचना नहीं मिली है।
यह आपात स्थिति कल उस सयम शुरू हुई, जब विझिनजाम से कोच्चि जाते समय यह पोत लगभग 38 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में 26 डिग्री झुक गया। पोत ने संतुलन खो दिया जिसके कारण संकट की सूचना दी गई। कोच्चि में बल के समुद्री बचाव उप-केंद्र (एमआरएससी) ने तुरंत समन्वित कार्रवाई शुरू की। डोर्नियर विमान को हवाई निगरानी के लिए तैनात किया गया जिसने जीवित बचे लोगों के साथ दो लाइफराफ्ट देखे। वैश्विक खोज और बचाव प्रोटोकॉल के अनुरूप गश्ती जहाजों और व्यापारिक जहाजों एमवी हान यी और एमएससी सिल्वर 2 को भी सहायता के लिए भेजा गया।
देर शाम तक, रूस, यूक्रेन, जॉर्जिया और फिलीपींस के नागरिकों सहित चालक दल के 24 सदस्यों में से 21 को बचा लिया गया था। चालक दल के तीन वरिष्ठ सदस्य बचाव व्यवस्था में सहायता के लिए पोत पर ही रहे। हालांकि, रात में पोत की हालत खराब हो गई और रविवार सुबह यह उलट गया। चालक दल के तीन सदस्यों को पोत छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन्हें आईएनएस सुजाता ने बचा लिया। दुर्घटना के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
वकील की भूमिका निभा चैटजीपीटी ने दिलाया 2.1 लाख रुपए का रिफंड
25 May, 2025 11:53 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क। अमेरिका के कोलंबिया राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित चैटजीपीटी ने एक व्यक्ति के लिए वकील की भूमिका निभाते हुए महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की और उसे 2,500 डॉलर (करीब 2.1 लाख रुपए) का रिफंड दिलवाया।
मेडेलिन नामक व्यक्ति ने बिना कैंसिलेशन इंश्योरेंस के ट्रैवल वेबसाइट एक्सपीडिया से होटल और फ्लाइट बुक की थी। लेकिन जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर (जीएडी) नामक मानसिक स्वास्थ्य समस्या के चलते उसे यात्रा रद्द करनी पड़ी। डॉक्टर का प्रमाण पत्र होने के बावजूद होटल और एयरलाइन ने रिफंड से इनकार कर दिया।
ऐसे में मेडेलिन ने चैटजीपीटी की मदद ली। एआई ने एक्सपीडिया की नीतियों का विश्लेषण कर एक कानूनी भाषा में पत्र तैयार किया, जिसमें चिकित्सा कारणों को अपवाद मानते हुए रिफंड की मांग की गई। चैटजीपीटी द्वारा तैयार किए गए इस पत्र के प्रभाव से होटल ने अपना निर्णय बदला और पूरे रिफंड पर सहमति दे दी।
एयरलाइन भी झुकी चैटजीपीटी के तर्कों के आगे
हालांकि एयरलाइन शुरुआत में अड़ी रही। उसकी नीति के अनुसार केवल गंभीर बीमारी या मृत्यु की स्थिति में रिफंड का प्रावधान था, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए नहीं। इस पर चैटजीपीटी ने एक दूसरा तर्कपूर्ण पत्र तैयार किया, जिसमें कहा गया कि मानसिक बीमारी को रिफंड न देने का आधार बनाना भेदभावपूर्ण है। पत्र में बताया गया कि ऐसी स्थिति में हवाई यात्रा करना यात्री की सेहत के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।
इन तर्कों के आगे एयरलाइन भी झुक गई और केवल एक घंटे में रिफंड देने की सहमति दे दी। मेडेलिन ने बताया कि अगर चैटजीपीटी की मदद न ली होती, तो उसे किसी पैरा-लीगल की सेवाएं लेनी पड़तीं, जिसका खर्च कहीं अधिक होता।
चैटजीपीटी ने पेश की जिम्मेदार एआई की मिसाल
इस मामले में चैटजीपीटी ने बिना किसी झूठ या बहाने के, तथ्य और शोध आधारित तर्क देकर सहायता की। इसने यह सिद्ध कर दिया कि एआई तकनीक जिम्मेदार ढंग से प्रयोग की जाए, तो आम नागरिकों के लिए कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं पार करना आसान हो सकता है।
ट्रम्प ने न्यूक्लियर एनर्जी का प्रोडक्शन बढ़ाने का दिया आदेश
25 May, 2025 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश में न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) का प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए आदेश दिए हैं। उन्होंने इसे अगले 25 साल में 300 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में इससे जुड़े आदेश पर साइन किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अब वक्त न्यूक्लियर एनर्जी का है और हम इसका प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर करने जा रहे हैं।
ट्रम्प ने कुल चार आदेशों पर साइन किए। इनमें परमाणु रिएक्टरों की मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करना, न्यूक्लियर रेगुलेटरी कमीशन में सुधार करना, 4 जुलाई 2026 तक तीन रिएक्टर चालू करना और इस तकनीक के औद्योगिक आधार में निवेश को बढ़ाना शामिल है।
बंद पड़े प्लांट्स दोबारा शुरू किए जाएंगे
ट्रम्प ने अपने आदेश में ऊर्जा और रक्षा विभाग को बंद पड़े न्यूक्लियर प्लांट्स को दोबारा शुरू करने के लिए कहा है। साथ ही संघीय सरकार की जमीन पर नए रिएक्टर बनाने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा है। इनमें अमेरिका के सैन्य ठिकाने भी शामिल होंगे। अमेरिकी बिजली की खपत के मामले में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। 2023 में अमेरिका में कुल 4200 टेरावॉट-ऑवर बिजली की खपत की। वर्तमान में अमेरिका की कुल बिजली का 19 प्रतिशत हिस्सा परमाणु ऊर्जा से आता है। यह 2023 में 775 टेरावॉट-ऑवर था। अगर ट्रम्प का प्लान सफल होता है तो देश की एक तिहाई बिजली परमाणु ऊर्जा से पैदा होगी। अमेरिका में कुल सक्रिय न्यूक्लियर पावर प्लांट हैं, जिनमें 94 रिएक्टर काम कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा रिएक्टर इलिनॉय राज्य में हैं। इनकी संख्या 11 है। पिछले कुछ सालों में प्राकृतिक गैस और रिन्युएबल एनर्जी जैसे सस्ते विकल्प के चलते कुछ रिएक्टर को बंद किया गया है।
परमाणु नियामक आयोग को कमजोर का आरोप
ट्रम्प पर परमाणु नियामक आयोग की कमजोर करने का आरोप लग रहा है। अपने आदेश में ट्रम्प ने परमाणु नियामक आयोग की भूमिका को सीमित करते हुए ऊर्जा सचिव को नई परियोजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार दिया है। बराक ओबामा के समय परमाणु नियामक आयोग प्रमुख ग्रेगोरी जैजको ने कहा कि यह ऐसा लगता है जैसे किसी ने एआई से पूछा हो कि अमेरिका की परमाणु नीति को कैसे बर्बाद करें। परमाणु नियामक आयोग की सख्त निगरानी को कमजोर करने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
जापान में भारत ने आतंकवाद पर रखी अपनी बात
25 May, 2025 08:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो । जेडीयू सांसद संजय झा के नेतृत्व में भारतीय सांसदों का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जापान की राजधानी टोक्यो में भारतीय दूतावास (इंडिया हाउस) में जापान के राजनीतिक, सरकारी और शैक्षणिक क्षेत्र के लोगों से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भारत की सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) नीति की जानकारी दी और ऑपरेशन सिंदूर के महत्व को उजागर किया। यह दौरा भारत के वैश्विक कूटनीतिक अभियान का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाया जा रहा है।
इस प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी और बृज लाल, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन बरिटास और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद शामिल थे। ये सभी सांसद ऑपरेशन सिंदूर को भारत की ‘नई सामान्य’ नीति का प्रतीक बता रहे हैं, जिसमें भारत किसी भी आतंकवादी हमले का दृढ़ और तीव्र जवाब देने की नीति पर चल रहा है।
टोक्यो में प्रेस वार्ता के दौरान सांसदों ने जापानी मीडिया को बताया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं करता और सभी दल राष्ट्रीय हित के मामलों में एकजुट हैं। इंडिया हाउस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज और जापान के राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा हुई, जिसमें भारत के एकीकृत और स्पष्ट रुख को सामने रखा गया।
भारतीय सांसदों ने जापान-भारत संसदीय मैत्री लीग के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इस बैठक में लीग के अध्यक्ष यासुतोशी निशिमुरा ने भारत के संकल्प को समर्थन दिया और आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों के साझा नजरिए को दोहराया। प्रतिनिधिमंडल ने जापान की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष फुकुशिरो नुकागा से भी भेंट की, जिन्होंने भारत के साथ एकजुटता जताई। इस दौरे के जरिए भारत ने यह स्पष्ट किया कि वह सीमापार आतंकवाद के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा और वैश्विक समुदाय से भी इसी तरह की एकजुटता की अपेक्षा करता है।
जर्मनी ने रचा इतिहास, WWII के बाद पहली बार सेना की स्थायी विदेशी तैनाती
24 May, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जर्मनी: जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी के बाहर किसी और देश में अपने सैनिकों को तैनात किया है. दरअसल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के पूर्वी हिस्से की रक्षा में मदद करने के लिए लिथुआनिया में बर्लिन ब्रिगेड का उद्घाटन किया है. उन्होंने इसके लिए इस हफ्ते लिथुआनिया का दौरा किया है. गुरुवार, 22 मई को अपनी यात्रा में, चांसलर मर्ज जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ शामिल हुए. समारोह में आधिकारिक तौर पर जर्मनी की बख्तरबंद ब्रिगेड का गठन किया हुआ.
एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बीच, चांसलर मर्ज ने कहा कि बाल्टिक सहयोगियों की सुरक्षा भी "हमारी सुरक्षा है". उन्होंने नाटो के सहयोगी देशों से मॉस्को के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का विस्तार करने का भी आह्वान किया. चांसलर मर्ज ने कहा, अपनी सेना को मजबूत करके, बर्लिन ने सहयोगियों को सुरक्षा में और निवेश करने का संकेत दिया है. लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने इसे "ऐतिहासिक दिन" कहा, क्योंकि यह पहली बार था कि 1940 के दशक के बाद एक जर्मन ब्रिगेड लंबी तैनाती के लिए अपने क्षेत्र के बाहर आई है.
लिथुआनिया में जर्मन सैनिक
जर्मनी ने लिथुआनिया में अपने सैनिकों को तैनात किया है. बता दें कि लिथुआनिया की सीमा रूस के कलिनिनग्राद और मास्को के प्रमुख सहयोगी बेलारूस के साथ लगती है. अपनी नई ब्रिगेड के साथ, जर्मनी का लक्ष्य देश में गहन जुड़ाव का है, जहां इसने पहली बार 2017 में सैनिकों को ट्रांसफर करना शुरू किया था. यह एक वर्ष से अधिक समय से प्रगति पर था. बाद में इसका विस्तार एक "एक्टिवेशन स्टाफ" के रूप में हुआ, जिसमें लास्ट फॉल के दौरान 250 लोग शामिल थे. 45 बख्तरबंद ब्रिगेड, नवीनतम भारी लड़ाकू इकाई, की कुल ताकत लगभग 5,000 की होगी- इसमें 200 नागरिक कर्मचारियों के साथ 4,800 जर्मन सैनिक शामिल होंगे. इसके 2027 तक अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने की उम्मीद है. गुरुवार को विनियस के सेंट्रल कैथेड्रल स्क्वायर के ऊपर आसमान में दर्जनों सैन्य हेलीकॉप्टर गरजते देखे गए.
रक्षा रणनीति
जर्मन चांसलर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि देश "अपने सशस्त्र बलों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है." 2022 में यूक्रेन पर रूस के फुल स्केल के आक्रमण के बाद, पूर्व जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने अपने रक्षा खर्च को जीडीपी के 2% के नाटो लक्ष्य तक बढ़ाने की बात की. उन्होंने बुंडेसवेहर के आधुनिकीकरण के लिए 113 अरब डॉलर का विशेष कोष भी आधिकारिक तौर पर बनाया. जनवरी में, लिथुआनिया ने 2026 की शुरुआत से अपने रक्षा खर्च को 3% से थोड़ा अधिक बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद के 5% और 6% के बीच कर दिया.
हार्वर्ड बनाम ट्रंप सरकार की लड़ाई तेज, विदेशी छात्रों पर मंडराया खतरा
24 May, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Harvard University: अमेरिका के सबसे पुराने शैक्षणिक संस्थान और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार के बीच ऐसा गतिरोध जारी है. जो आज से पहले कभी देखने को नहीं मिला. बात हो रही है अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की, जहां पढ़ने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स ट्रंप के एक फैसले से दहशत में हैं. ट्रंप सरकार ने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स का एडमिशन करने के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अधिकार को रद्द कर दिया है. भले कोर्ट से अभी के लिए ट्रंप सरकार के इस फैसले पर स्टे लग गया है लेकिन स्टूडेंट अनिश्चितता में डूबे हैं.
लियो गेर्डेन हार्वर्ड में पढ़ने के लिए स्वीडेन से आए हैं. वो अगले सप्ताह ही ग्रेजुएट होने वाले हैं. उन्होंने बताया, "व्हाइट हाउस और हार्वर्ड के बीच लड़ाई में हमें अनिवार्य रूप से पोकर चिप्स के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, और यह ईमानदारी से बहुत अमानवीय लगता है." ट्रंप सरकार ने हार्वर्ड पर यूनिवर्सिटी कैंपस में असुरक्षित संस्कृति को बनाए रखने का आरोप लगाया है. जो यहूदी लोगों के साथ अनुचित व्यवहार करता है. सरकार कैंपस कार्यक्रमों, कर्मचारियों की नियुक्ति और छात्रों के एडमिशन के मामले में यूनिवर्सिटी के काम करने के तरीके को बदलना चाहती है.
एक पोस्टडॉक्टरल इजरायली छात्रा ने कहा कि अमेरिकी सरकार हार्वर्ड के खिलाफ बड़ी लड़ाई को आगे बढ़ाने और हमला करने के लिए यहूदी छात्रों को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कहा, ''यहूदी छात्रों को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.'' उन्होंने कहा कि वास्तव में यहूदी और इजरायली छात्रों की सुरक्षा की परवाह करने के बजाय, व्हाइट हाउस उन विचारों पर नकेल कस रहा है जो हमेशा सरकार के साथ मेल नहीं खाते.
हार्वर्ड छात्र संगठन के सह-अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद सियाल पाकिस्तान के लाहौर से हैं. उन्होंने बताया कि हजारों छात्र अपने अभी के लीगल स्टेट्स को खोने से डर रहे हैं. उन्होंने कहा, "वे सचमुच वे टीनेजर्स हैं, जो अपने वतन से हजारों मील दूर इस स्थिति से निपट रहे हैं, जिसमें वकील अक्सर शामिल होने से डरते हैं." सियाल ने कहा कि हार्वर्ड खास है क्योंकि इसने केवल अमेरिका से ही नहीं, बल्कि दुनिया भर से सबसे बुद्धिमान लोगों को आकर्षित किया है. उन्होंने कहा, जब छात्र वहां पढ़ने आते हैं तो देश को भी बहुत फायदा होता है, लेकिन अब इन छात्रों के साथ गलत और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है.
ऑस्ट्रिया के एक छात्र कार्ल मोल्डन ने कहा कि कई लोगों ने देश के सबसे पुराने और सबसे धनी कॉलेज हार्वर्ड में प्रवेश के लिए बहुत मेहनत की है, और अब उन्हें इंतजार करना होगा और वीजा समस्याओं से निपटना होगा. हार्वर्ड के छात्र समूह में लगभग 27 प्रतिशत इंटरनेशनल स्टूडेंट हैं. हार्वर्ड द्वारा मामले को अदालत में ले जाने के बाद शुक्रवार को एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन के प्रतिबंध को अस्थायी रूप से रोक दिया है.
हिसार: बिना डिग्री चल रहा था अस्पताल, CM फ्लाइंग ने मारा छापा
24 May, 2025 04:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार: गांव बालसमंद में बिना डिग्री के अवैध अस्पताल चलाया जा रहा था। यह बात तब सामने आई जब शुक्रवार को सीएम फ्लाइंग ने बालसमंद गांव में जांगड़ा अस्पताल पर गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा। यहां जांच की तो अस्पताल संचालक की कोई वैध डिग्री नहीं मिली। इसके अलावा यहां पर एलोपैथिक दवाओं का उपयोग किया जा रहा था।
सुबह करीब 11 बजे सीएम फ्लाइंग इंचार्ज सुनैना के नेतृत्व में एएसआई सुरेंद्र, मेडिकल ऑफिसर डॉ नवीन बेनीवाल, ड्रग कंट्रोल आफिसर अजय बिश्नोई ने छापामारी की। यह कार्रवाई रात 11 बजे तक चलती रही। करीब 12 घंटे टीम ने जांच की। छापामारी के दौरान अस्पताल का मालिक व संचालक धर्मपाल मौजूदा मिला।
धर्मपाल से मेडिकल डिग्री मांगी गई तो उसने दावा किया कि वह पिछले 25 वर्षों से यह अस्पताल चला रहा है और उसके पास इलाहाबाद विश्वविद्यालय की आयुर्वेद रत्न की डिग्री है। लेकिन टीम ने जांच की तो पता लगा कि धर्मपाल बिना वैध मेडिकल डिग्री के ही अस्पताल च चला रहा था। साथ ही एलोपैथिक दवाओं का उपयोग कर रहा था।
धर्मपाल ने बताया कि डॉ कृष्ण कुमार मोहन, नियमित रूप से अस्पताल में विजिटिंग डॉक्टर के तौर पर आते हैं। छापे के करीब एक घंटे बाद डॉ मोहन को सूचना दी गई। करीब दो घंटे बाद वे मौके पर पहुंचे।
डॉ मोहन ने स्वीकार किया कि वह 2013 से यहां पर विजिटिंग डॉक्टर हैं, लेकिन उसका कोई वेतन नहीं लेते। उन्होंने बताया कि वे केवल आयुर्वेदिक चिकित्सा में पारंगत हैं, उन्हें एलोपैथिक दवाओं का ज्ञान नहीं है। टीम ने जांच की तो अस्पताल में चार बेड, एक ऑक्सीजन सिलेंडर, एक बीपी मशीन मिली।
टीम ने यहां पर सुखदा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल व जांगड़ा अस्पताल के लेटरहेड्स बरामद किए। अस्पताल परिसर में अजय मेडिसिन सेंटर नामक दवा की दुकान भी चलाई जा रही थी।
टीम ने पुलिस के साथ मिलकर सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो पता लगा कि डॉ मोहन 20 मई को अस्पताल में आए थे। धर्मपाल ने बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन का करार, डॉ मोहन का एफिडेविट, उनकी डिग्री की कॉपी, अपनी आयुर्वेद रत्न डिग्री और मरीजों के बयान व आधार कार्ड की फोटोकॉपी आदि टीम को सौंपे।
धर्मपाल ने बताया कि डॉ निधि मेहता प्रत्येक वीरवार को अस्पताल में मरीज देखने आती हैं। सीएम फ्लाइंग ने अस्पताल में मिले दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। मामले में सदर थाना में केस दर्ज करवाया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0: सिरसा में 22 हजार आवेदनों की जियो टैगिंग प्रक्रिया शुरू
24 May, 2025 04:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिरसा: मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना के लाभार्थियों के जियो टैगिंग का काम शुरू हो गया है। नगर परिषद की एमआइएस शाखा ने पिछले तीन दिनों से लाभार्थियों को फोन कॉल करके सेक्टर 20 के पार्ट थ्री में मौके पर बुलाना शुरू कर दिया।
साथ ही प्लॉट की मार्किंग भी की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 में अब तक 22 हजार आवेदन आ चुके हैं। ये आवेदन तीन कैटेगिरी के लिए है। इसमें पहली कैटेगिरी अफोर्डेबल हाउसिंग पाटर्नरशिप है। जिसके तहत फ्लैट मिलेंगे। जबकि दूसरी कैटेगिरी बेनीफिशरी लैंड है।
ढाई लाख रुपये की मिलेगी मदद
जिसके तहत आवेदक के पास अपना प्लॉट होना चाहिए। उसे सरकार मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपये देगी। शर्त यह है कि प्लॉट खाली हो और यदि पहले मकान बना है तो छत कच्ची होनी चाहिए। जबकि तीसरी स्कीम में इंटरस्ट सबसिडी स्कीम है। इसमें होम लोन लिया हुआ है तो ढाई लाख रुपये की सबसिडी माफ हो जाएगी।
शहर के एचएसवीपी सेक्टर में 853 लाभार्थियों की 30 गज के प्लॉट आबंटित किए जाने हैं। जिन लाभार्थियों के वेरीफिकेशन का काम पूरा हो चुका है, उनके कागजात और उनको आधार से लिंक किए जा चुके हैं।
जियो टैगिंग में यह पता चलता रहेगा कि उसका मकान किस स्टेज पर पहुंच गया है और उसकी स्थिति कैसी दिख सी है। साथ ही फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा।
जिस 854 लाभार्थियों ने आवेदन किया था। उसने से 122 लोगों के पता नहीं मिले। आवेदक इस पते पर नहीं मिले। टीम ने जब मकान मालिकों से इनके बारे में जानकारी चाही ती वे भी उपलब्ध नहीं करवा सके।
ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी सरकार
30 गज के प्लॉट धारकों को मकान बनाने के लिए सरकार की ओर से ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। पहली और दूसरी किश्त के तौर पर इन्हें 10-10 हजार रुपये उपलब्ध करवाए जाएंगे। उसके बाद लाभार्थियों ने सरकार से मांग की थी कि उन्हें दस हजार रुपये किश्तें अदा करने में दिक्कतें आ रही है।
बांग्लादेश की सियासत में हलचल, जनता का गुस्सा और नेताओं में मतभेद
24 May, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश: बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक तख्तापलट का संकट मंडरा रहा है. मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देना चाहते हैं. बांग्लादेश में बीते 9 महीने में दूसरी बार ऐसा संकट आया है.बीते साल अगस्त में भी बांग्लादेश में काफी उथल-पुथल मचा था, जिसमें छात्र आंदोलनों से लेकर शेख हसीना के सत्ता से हटने तक बहुत कुछ घटा. आइए पिछले एक साल की उन प्रमुख घटनाओं पर नजर डालें जिन्होंने बांग्लादेश को आज इस मुकाम तक पहुंचा दिया.
कैसे शुरू हुआ था यह विद्रोह?
जुलाई 2024 में, विश्वविद्यालय के छात्रों ने सरकारी नौकरियों के कोटा सिस्टम के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किए. उनका मानना था कि यह सिस्टम बांग्लादेश में स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को सरकारी नौकरियों में 30% रिजर्वेशन देता जिससे बाकी बच्चे वंचित रह जाते हैं. शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन जब सरकार ने छात्रों पर लाठी चार्ज किया तो ये हिंसक झड़पों में तब्दील हो गया.
प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन
1 जुलाई 2024: छात्र सड़कों पर उतरे और उन्होंने सड़कों व रेलवे लाइनों को जाम कर दिया. उनकी मांग थी कि सरकारी नौकरियों के लिए कोटा सिस्टम में सुधार किया जाए. पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए जिससे तनाव और बढ़ने लगा.
16 जुलाई 2024: प्रदर्शनकारियों और सरकार समर्थकों के बीच हिंसा भड़की, जिसमें दोनों गुटों के बीच हिंसक झड़पे हुई. इस झड़प में छह लोगों की जान चली गई, जिससे वहां तेजी से हिंसा बढ़ गई.
18 जुलाई 2024: प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश टेलीविजन के मुख्यालय और सरकारी इमारतों में आग लगा दी. चारों ओर 'तानाशाह को हटाओ' के नारे गूंजने लगे. उस समय की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने शांति की अपील की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. इस समय तक हिंसा से 32 लोगों की मौत हो चुकी थी और सैकड़ों घायल हो गए थे.
21 जुलाई 2024: बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने कोटा सिस्टम को अवैध घोषित किया, लेकिन प्रदर्शनकारी संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि उनकी मांग थी कि 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के 'स्वतंत्रता सेनानियों' के बच्चों के लिए आरक्षित नौकरियों को पूरी तरह खत्म किया जाए.
5 अगस्त 2024: प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना के महल पर धावा बोल दिया, जिसके बाद वे भारत भाग आईं. उस समय हजारों लोग सड़कों पर उतरकर इसकी खुशी मना रहे थे.
क्या बांग्लादेश में तख्तापलट की आहट?
शेख हसीना के सत्ता से हटने के लगभग एक साल बाद ही मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार भी संकट में है. एक रिपोर्ट की मानें तो यूनुस ने धमकी दी है कि अगर राजनीतिक दल सुधारों को मंजूरी नहीं देंगे, तो वे इस्तीफा दे देंगे. नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम, जो पिछले साल के छात्र आंदोलनों से उभरे हैं. उन्होंने कहा कि यूनुस के लिए बिना राजनीतिक समर्थन के काम करना मुश्किल हो गया है. वह (यूनुस) बहुत परेशान थे. उन्होंने कहा कि अगर वे वह काम नहीं कर सकते, जो उन्हें सौंपा गया था तो वे अपना पद छोड़ देंगे. बता दें कि वे राजनीतिक पार्टियों की राजनीति को बेहतर बनाने और बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यूनुस सत्ता में आए थे जिसमें वो पूरी तरह असफल साबित हुए हैं क्योंकि तब से अब तक में वहां कुछ भी नहीं बदला है. नाहिद ने आगे कहा, 'हमने उनसे साफ कहा कि जनता ने सिर्फ सरकार बदलने के लिए आंदोलन नहीं किया था, बल्कि सिस्टम बदलने के लिए किया था. बिना सुधार के चुनावों का कोई मतलब नहीं है.'
विरोध के कारण यूनुस पर बढ़ता दबाव
हसीना के सत्ता से हटने के बाद, यूनुस ने प्रमुख क्षेत्रों में बड़े सुधारों का वादा किया था, लेकिन आंतरिक राजनीतिक के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए. हाल ही में ढाका में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के समर्थकों ने यूनुस के खिलाफ पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने जल्द से जल्द चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग की.
आगे क्या होगा?
आज बांग्लादेश एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है. यूनुस की सरकार अगर सुधारों को लागू नहीं कर पाई. तो देश फिर से उसी संकट में फंस सकता है, जिससे वह उबरने की कोशिश कर रहा है. जनता अब अंतरिम सरकार के वादों से थक चुकी है, ऐसे में राजनीतिक दलों की आंतरिक राजनीति बांग्लादेश को नई मुसीबत की और ढकेल रही है.
यूएन में भारत का दो टूक संदेश, आतंकवाद रुकेगा तभी आगे बढ़ेगी सिंधु जल संधि
24 May, 2025 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है. शनिवार को भारत पाकिस्तान का असली चेहरा यूएन के सामने लेकर आया. दरअसल भारत ने शनिवार को सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की गलत सूचना को लेकर आलोचना की, जिसे भारत सरकार ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद स्थगित कर दिया था. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, 'पानी जीवन है, युद्ध का हथियार नहीं.' जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी. जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी गोद में पालना बंद नहीं कर देता. यूएन के सामने कुछ बातें रखकर हरीश ने पाकिस्तान को बेनकाब किया.
मित्रता के कारण हुआ था सिंधु जल समझौता
हरीश ने कहा कि भारत ने यह सिंधु जल संधि सद्भावनापूर्वक और मित्रता के लिए की थी. लेकिन पाकिस्तान की तरफ से पिछले 65 सालों में एक भी बार मित्रता नहीं दिखाई गई. पाकिस्तान ने इन सालों में भारत पर हजारों आतंकी हमले किए. इन हमलों में भारत के लगभग 20,000 आम नागरिक मारे गए. इसके आगे उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भी भारत ने धैर्य से काम लिया और दरियादिली दिखाई. लेकिन अब ये नया भारत है किसी भी तरह के आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेगा.
पाकिस्तान ने नेविगेशन परियोजना पर भी किया वार
हरीश कहते हैं कि पाकिस्तान ने न सिर्फ सीमा पर आतंकी हमले किए बल्कि भारत की तरफ से शुरू की गई परियोजनाओं पर भी हमले किए, जिससे ऊर्जा उत्पादन, जलवायु परिवर्तन पर काफी असर पड़ा. उन्होंने कहा कि 2012 में आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर में बनी तुलबुल नौवहन परियोजना पर भी हमला किया था. पाकिस्तान की तरफ से इस तरह का हमला परियोजनाओं की सुरक्षा और नागरिकों के जीवन के लिए खतरा है.
जब तक पाकिस्तान में आतंकी, संधि रहेगी स्थगित
हरीश ने कहा कि पाकिस्तान इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि वह आतंकवाद को नहीं पाल रहा हैं. पाकिस्तान में पल रहा आतंकवाद भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा है. उन्होंने कहा, 'यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि पाकिस्तान, जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से सीमा पार आतंकवाद के लिए अपना समर्थन समाप्त नहीं कर देता.' इसके आगे उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ही है जो सिंधु जल संधि का उल्लंघन कर रहा है. 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने एक दिन बाद ही यानी 23 अप्रैल को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया था. जिसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत 7 मई को पाकिस्तान में घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया था. 10 मई को पाकिस्तान ने भारत के सामने घुटने टेक दिए और दोनो देशों के बीच सीजफायर हुआ.
अदालत ने रोकी ट्रंप की छात्र विरोधी नीति, भारतीय छात्रों ने ली राहत की सांस
24 May, 2025 01:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के एक संघीय जज ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें हार्वर्ड विश्वविद्यालय की विदेशी छात्रों को दाखिला देने की पात्रता रद कर दी गई थी। इस अस्थायी फैसले से भारतीयों समेत हजारों विदेशी छात्रों को फौरी राहत मिली है।
ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है
हार्वर्ड की अपील पर सुनवाई करते हुए जज एलिसन बेरोज ने संवैधानिक उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी। ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है।
विश्वविद्यालय में चल रही जांच के तहत यह कदम उठाया
इससे पहले गुरुवार को ट्रंप प्रशासन ने एक अभूतपूर्व फैसले में हार्वर्ड की विदेशी छात्रों को दाखिला देने की पात्रता रद कर दी थी। प्रशासन ने विश्वविद्यालय को सूचित किया था कि उसने गृह सुरक्षा विभाग द्वारा विश्वविद्यालय में चल रही जांच के तहत यह कदम उठाया है।
इस फैसले से भारतीयों समेत हजारों विदेशी छात्रों के प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को बोस्टन की संघीय अदालत में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया और कहा कि सरकार की कार्रवाई प्रथम संशोधन का उल्लंघन करती है और इसका हार्वर्ड और करीब सात हजार वीजा धारकों पर तत्काल और विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
ट्रंप प्रशासन से विश्वविद्यालय का सीधा टकराव
इससे पहले गुरुवार को गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने विश्वविद्यालय को एक पत्र लिखकर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने की उसकी पात्रता को खत्म कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को विश्वविद्यालय के साथ बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
हार्वर्ड में 788 भारतीय छात्र
हार्वर्ड के स्कूलों में 100 से अधिक देशों के 6800 से ज्यादा छात्र पंजीकृत हैं। इनमें 1203 चीनी छात्र भी हैं। हार्वर्ड इंटरनेशनल ऑफिस की वेबसाइट के अनुसार, विश्वविद्यालय के तहत सभी स्कूलों मे 2024-2025 में भारत के 788 छात्र और शोधार्थी पंजीकृत हैं। जबकि हार्वर्ड ग्लोबल सपोर्ट सर्विसेज ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि हर वर्ष 500-800 भारतीय छात्र और शोधकर्ता हार्वर्ड में पढ़ते हैं।
वर्तमान सेमेस्टर में अपनी डिग्री पूरी करने वाले छात्रों को स्नातक होने की अनुमति होगी। गृह सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम के पत्र में कहा गया है कि ये बदलाव शैक्षणिक सत्र 2025-2026 से प्रभावी होंगे।
हालांकि उन छात्रों को दूसरे विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित होना होगा, जिनकी डिग्री अभी तक पूरी नहीं हुई है। ऐसा नहीं करने पर वे अमेरिका में रहने की अपनी कानूनी स्थिति को खो देंगे।
ट्रंप प्रशासन ने रखी हैं ये मांगें
प्रशासन जब तक अपना निर्णय नहीं बदलता या कोर्ट कोई हस्तक्षेप नहीं करता, तब तक यह फैसला बरकरार रहेगा। नोएम ने कहा है कि अगर हार्वर्ड 72 घंटों के भीतर एक सूचीबद्ध मांगों का पालन करता है तो विदेशी छात्रों को दाखिला देने की उसकी पात्रता बहाल हो सकती है।
मांगों में विदेशी छात्रों का अनुशासनात्मक रिकार्ड के अलावा विरोध-प्रदर्शन की गतिविधियों के आडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। हालांकि हार्वर्ड पहले ही इस तरह के रिकार्ड मुहैया कराने से इन्कार कर चुका है।
क्यों निशाने पर है हार्वर्ड
हार्वर्ड का ट्रंप प्रशासन का टकराव अप्रैल में शुरू हुआ। उस समय इस विश्वविद्यालय ने प्रशासन की फलस्तीन समर्थक प्रदर्शनों को सीमित करने और विविधता, समानता व समावेश संबंधित नीतियों को खत्म करने की मांगों को मानने से इन्कार कर दिया था।
इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप ने हार्वर्ड के लिए अरबों डॉलर के शोध अनुदानों और अन्य सहायता पर रोक लगा दी थी। नोएम ने कहा कि प्रशासन हार्वर्ड को अपने परिसरों में हिंसा, यहूदी विरोधी भावना को बढ़ावा देने और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ समन्वय करने के लिए जिम्मेदार मानता है।
रूस ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की, भारत को दिया समर्थन
24 May, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आतंकवाद विरोधी लड़ाई पर शुक्रवार को रूस के साथ व्यापक चर्चा की और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में रूसी पक्ष को जानकारी दी। रूस ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों देश एक साथ हैं।
द्रमुक सांसद कनिमोरी के नेतृत्व में सांसदों का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत कराने के लिए पांच देशों की यात्रा के पहले चरण में इस समय रूस में है।
भारतीय और रूसी सांसदों ने किया विचारों का अदान-प्रदान
भारतीय सांसदों ने रूसी फेडरेशन एसेंबली (संसद) के सर्वदलीय प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में विचारों का विस्तृत आदान-प्रदान किया, जिसका नेतृत्व ड्यूमा (निचले सदन) के अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के अध्यक्ष लियोनिद स्लटस्की ने किया।
रूस और भारत आतंक के खिलाफ एकजुट खड़े
रूस स्थित भारतीय दूतावास ने एक पोस्ट में कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रथम उपाध्यक्ष आंद्रेई डेनिसोव और रूसी परिसंघ की फेडरेशन काउंसिल के अन्य सीनेटर से भी मुलाकात की। रूसी पक्ष ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की और कहा कि रूस सभी रूपों में आतंकवाद के उन्मूलन के लिए भारत के साथ एकजुटता से खड़ा है।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में रूस और भारत की साझेदारी है। रूस और भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक साथ हैं। स्टालिन द्वारा निर्मित स्मोलेंस्काया स्क्वायर इमारत में उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बीच गुरुवार देर रात मॉस्को पहुंचा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल यूनान, लातविया और स्पेन का भी दौरा करेगा।
मार्च की तबाही के बाद म्यांमार फिर कांपा, राहत में अभी भी कमी
24 May, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मार्च में भूकंप से काफी नुकसान झेल चुके म्यांमार में एक बार फिर भूकंप आया। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी (NCS) की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को म्यांमार में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया। वहीं, भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया।
राहत की बात यह रही कि इस भूकंप के कारण किसी तरह की जानमाल की खबर नहीं आई है। इससे पहले 19 मई को म्यांमार में रिक्टर पैमाने पर 3.9 तीव्रता का भूकंप आया था।
मार्च में आए भूकंप ने मचाई थी तबाही
मार्च की शुरुआत में, म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के भूकंप आए थे, जिससे व्यापक क्षति हुई थी और 3500 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), दक्षिण पूर्व एशिया के अनुसार, इस क्षेत्र में तपेदिक (टीबी), एचआईवी और वेक्टर- और वायरल संक्रमण सहित तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य खतरों की एक श्रृंखला का सामना करने की उम्मीद है।
भारत ने की थी मदद
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए हजारों लोगों के लिए जल जनित बीमारियों से निपटने के लिए ऑपरेशन ब्रह्मा, आपदा के बाद म्यांमार के लिए भारत की समर्पित मानवीय सहायता है। इस पहल के तहत, भारत ने यांगून क्षेत्र में प्रवासी भारतीयों को भी सहायता प्रदान की है।
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