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सिरसा में ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाने उतरी NIA, पुलिस ने पांच युवकों को लिया हिरासत में
27 Nov, 2025 02:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महिला थाने की दीवार के पास ग्रेनेड फैंकने के मामले में पुलिस की विभिन्न टीमें बुधवार दोपहर से ही लगी हुई हैं। इस मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। रानियां का गांव खारियां मुख्य केंद्र रहा है। खारियां से चार से पांच युवाओं को पुलिस ने बुधवार देर रात को हिरासत में लिया था। गांव खारियां के युवाओं के बैकग्रांउड पहले ही अपराधिक प्रवृति के बताएं जा रहा हैं। ऐसे में कई अन्य वारदातों का खुलासा भी इन आरोपियों से हो सकता है। इस पूरे मामले में आज दोपहर बाद एसपी दीपक सहारन खुलासा करेंगे।
जानकारी के मुताबिक हैंड ग्रेनेड की क्षमता व गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान हैं। इन ग्रेनेड को बाहर से लाया गया था या इसका निर्माण आरोपियों ने किया था। इसमें प्रयोग किया गया मैटीरियल कौन सा था। क्योंकि महिला थाने के पास जहां पर हैंड ग्रेनेड फैंका गया था, उससे कोई खास नुकसान नहीं हुआ है। धमाके के अलावा न थाने की दीवार को नुकसान पहुंचा है और न ही कोई बड़ा गड्ढा वहां पर हुआ है इसलिए हैंड ग्रेनेड के निर्माण के लिए प्रयोग हुई सामग्री का भी पुलिस की फॉरेंसिक टीम जांच कर रही है
एनआईए टीम की सिरसा पहुंचने की सूचना
सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले की जांच करने के लिए एनआईए की टीम भी सिरसा पहुंची है। वह इस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है। मामले की जिम्मेदारी खालिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है। साथ ही घटना को अंजाम देने के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
पूर्व कांग्रेस के अध्यक्ष डा अशोक तंवर के घर के पास से फैंका था ग्रेनेड
जिन दो युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया था और जहां से ग्रेनेड फैंका था। उससे 10 मीटर की दूरी पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर का आवास है। वहीं, 20 मीटर की दूरी पर महिला थाना है। युवक ग्रेनेड फैंकने के बाद वापस हुड्डा ग्राउंड की ओर बाइक लेकर भाग गए थे। इसी पॉश इलाके में पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल, विधायक शीशपाल केहरवाला रहते हैं। जिस दिशा में युवक भागे थे, उस क्षेत्र में भाजपा कार्यालय सरसाईनाथ सदन भी पड़ता है।
पूर्वी एशिया में तनाव: योनागुनी पर मिसाइल तैनाती से चीन भड़का, ट्रंप का ताइवान पर दबाव बढ़ा
27 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान के दक्षिणी द्वीप योनागुनी पर मध्यम दूरी की सतह-से-हवा मिसाइल इकाई तैनाती की योजना तेज होने से पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और गहरा गया है। रविवार को जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजूमी ने ताइवान से मात्र 110 किलोमीटर दूर इस सैन्य अड्डे का दौरा किया और स्पष्ट कहा, “यह तैनाती हमले की संभावना कम करेगी, बढ़ाएगी नहीं।” कोइजूमी का यह बयान चीन-जापान के बीच ताइवान विवाद पर बढ़ती कड़वाहट के बीच आया है, जहां अमेरिका भी ताइवान पर आर्थिक व सैन्य दबाव बना रहा है। जापान योनागुनी को अपनी दक्षिणी द्वीप श्रृंखला की रणनीतिक कड़ी मानता है, जो ताइवान जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
जापान ने पहले ही इशिगाकी द्वीप पर एंटी-शिप मिसाइलें और मियाको पर हवाई निगरानी प्रणाली तैनात कर दी है। कोइजूमी ने जोर देकर कहा कि जापान और अमेरिका को संयुक्त रूप से प्रतिरोध क्षमता मजबूत करनी होगी, क्योंकि “द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे गंभीर सुरक्षा परिदृश्य है।” उन्होंने क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मिसाइलें योनागुनी की रक्षा सुनिश्चित करेंगी। यह योजना 2016 से चली आ रही है, जब द्वीप पर सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस का बेस स्थापित किया गया था, स्थानीय निवासियों के शुरुआती विरोध के बावजूद।चीन की नाराजगी क्यों बढ़ी? जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल ही में कहा था कि ताइवान पर चीनी हमले की स्थिति में जापान अन्य देशों के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकता है। चीन ने इसे “उकसावे वाला” बयान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को कहा, “यह मिसाइल तैनाती क्षेत्रीय तनाव पैदा करने और सैन्य टकराव भड़काने की जानबूझकर कोशिश है। ताकाइची के गलत बयानों के साथ मिलकर यह बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है।” बीजिंग ने जापान पर “दकियानूसी सोच” का आरोप लगाते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाया है, जैसे जापानी सीफूड पर प्रतिबंध। ताइवान ने जापान का खुलकर समर्थन किया। उप विदेश मंत्री फ्रांसिस वू ने कहा, “जापान संप्रभु राष्ट्र है और अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकता है। यह ताइवान जलडमरूमध्य में स्थिरता बनाए रखेगा।” जापानी मीडिया के अनुसार, कुछ स्थानीय निवासी तैनाती से चिंतित हैं, क्योंकि यह उन्हें भू-राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में ला सकता है।
ताइवान पर अमेरिका का नया दबाव। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ताइवान पर चिप्स, टैरिफ और रक्षा बजट के मुद्दों पर कड़ा दबाव डाल रहे हैं। ट्रंप चाहते हैं कि ताइवान अपनी सेमीकंडक्टर उत्पादन का 50 प्रतिशत अमेरिका स्थानांतरित करे, जिसे ताइवान “अव्यावहारिक” बता रहा है। ताइवान के पास विश्व का सबसे उन्नत चिप इकोसिस्टम है, जबकि अमेरिका में पूरी इंडस्ट्री विकसित नहीं हुई। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इतना बड़ा शिफ्ट एक दशक से अधिक ले सकता है। अप्रैल 2025 में ट्रंप ने ताइवान पर 32 प्रतिशत टैरिफ लगाए, जो जापान व दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगियों से अधिक है। अगस्त में इसे 20 प्रतिशत तक कम किया गया, लेकिन स्टील-एल्यूमिनियम पर 50 प्रतिशत टैरिफ बरकरार हैं। ताइवान के उद्योगपति चिंतित हैं कि टेक्सटाइल, मशीन टूल्स और साइकिल जैसे क्षेत्र प्रभावित होंगे।
हरियाणा में ठंड का कहर: कई शहर कांपे, न्यूनतम तापमान सबसे नीचे—अभी और गिरेगा पारा
27 Nov, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रदेश के नारनौल में बुधवार को न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री पहुंच गया जो इस सीजन का सबसे कम है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक आने वाले दिनों में हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में ठंड और बढ़ेगी।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इन क्षेत्रों में अधिकतर स्थानों पर रात का तापमान सिंगल डिजिट (10 डिग्री से नीचे) में पहुंच गया है। हालांकि दिनभर धूप खिली रहने से अभी लोगों को राहत है।
आगे ऐसा रहेगा मौसम
आने वाले दिनों में हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में ठंड और बढ़ेगी। हालांकि वीरवार को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय होने से 27-28 नवंबर को हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में कहीं कहीं आंशिक बादलवाही देखने को मिलेगी। इससे तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव दिखेगा जबकि उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों के इसके असर से बर्फबारी होगी। मैदानी राज्यों में अभी मौसम आमतौर पर शुष्क और साफ बना हुआ है। अभी वातावरण में भी नमी भी नहीं है। ऐसे में तापमान में गिरावट से आने वाले दिनों में पाला जमने की स्थिति बनेगी।
शंघाई एयरपोर्ट विवाद: चीन ने खारिज किया दुर्व्यवहार का आरोप, अरुणाचल पर फिर दोहराया दावा
27 Nov, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीनी विदेश मंत्रालय ने शंघाई हवाई अड्डे पर अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार की सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि महिला को न हिरासत में लिया गया, न उत्पीड़न हुआ और न ही कोई अनुचित व्यवहार किया गया। सीमा अधिकारियों ने पूरी तरह कानून के दायरे में काम किया तथा एयरलाइन ने उन्हें विश्राम कक्ष, भोजन और पानी उपलब्ध कराया। हालांकि इस मौके का उपयोग करते हुए माओ निंग ने एक बार फिर चीन का पुराना दावा दोहराया कि जांगनान (अरुणाचल प्रदेश) चीन का अभिन्न क्षेत्र है और चीन ने कभी भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी।
घटना 21 नवंबर की है। लंदन में रहने वाली भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक पेमा वांगजोम थोंगडोक लंदन से जापान जा रही थीं। शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर ट्रांजिट के दौरान उनकी तीन घंटे की स्टॉपओवर अचानक 18 घंटे तक खिंच गई। चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट में जन्मस्थान के तौर पर अरुणाचल प्रदेश लिखा देखते ही उसे “अमान्य” घोषित कर दिया और उन्हें आगे जाने से रोक दिया। परेशान पेमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी आपबीती साझा की, जिसके बाद मामला तूल पकड़ लिया।
भारत ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया। सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली ने बीजिंग के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि ट्रांजिट यात्री को केवल जन्मस्थान के आधार पर हिरासत में लेना और भारतीय पासपोर्ट को अमान्य बताना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा है और उसके नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट से विश्व में कहीं भी यात्रा करने का पूर्ण अधिकार है। भारतीय पक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि चीनी अधिकारियों का यह व्यवहार शिकागो कन्वेंशन तथा मॉन्ट्रियल कन्वेंशन समेत अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का खुला उल्लंघन है। इस तरह की कार्रवाइयाँ दोनों देशों के बीच चल रहे संबंध सामान्यीकरण के प्रयासों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करती हैं। चीन ने महिला को अंततः जापान के लिए रवाना होने दिया, लेकिन अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को फिर से जोरदार तरीके से सामने लाकर उसने विवाद को नया आयाम दे दिया है।
पाक रक्षा मंत्री ने कबूला बोले- सभी उम्मीदें खत्म, तालिबान से रिश्ते कभी ठीक नहीं होंगे
27 Nov, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया है कि अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के संबंध अब कभी सामान्य नहीं हो सकते। तालिबान शासन के चार साल बाद भी इस्लामाबाद को मुंह की खानी पड़ रही है और उसकी सारी उम्मीदें ध्वस्त हो चुकी हैं।
एक साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा, हमने तालिबान का स्वागत किया था, कई बार काबुल जाकर बात की, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। हमें लगा था कि तालिबान हम पर निर्भर रहेंगे और पुराना प्रभाव बना रहेगा, मगर ठीक उलटा हुआ। अब हमारी सारी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं। तालिबान से किसी सकारात्मक बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं बची।यह बयान ऐसे समय आया है जब अक्टूबर 2025 से दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलीबारी और हवाई हमले चल रहे हैं। तीन दौर की बातचीत बेनतीजा रही क्योंकि पाकिस्तान टीटीपी हमलों की जिम्मेदारी अफगान तालिबान पर डालता रहा। आसिफ ने माना कि तालिबान ने पाकिस्तान की एक नहीं मानी और अब दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की संभावना लगभग शून्य हो गई है। पाकिस्तानी सेना और सरकार की नाराजगी की असली वजह तालिबान की स्वतंत्र विदेश नीति है। अफगान मंत्री लगातार भारत आ रहे हैं, दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और कनेक्टिविटी के नए समझौते हो रहे हैं। इस्लामाबाद को यह हजम नहीं हो रहा कि जिस तालिबान को उसने सत्ता दिलाई, वह अब इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान की बात मानने के बजाय विकास और भारत के साथ मजबूत रिश्तों की राह पर चल पड़ा है।
ख्वाजा आसिफ का यह कबूलनामा पाकिस्तान की अफगान नीति की सबसे बड़ी नाकामी का सार्वजनिक ऐलान है। चार साल पहले जिस तालिबान को इस्लामाबाद अपना स्ट्रैटेजिक एसेट मानता था, आज उसी से उसे स्थायी दुश्मनी का डर सता रहा है।
वाइट हाउस में बैठक को ट्रंप ने बताया था शानदार पर सलमान के दिखे थे सख्त तेवर
27 Nov, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बीते सप्ताह वाइट हाउस में बैठक हुई थी। इस बैठक को ट्रंप ने शानदार बताया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान तनाव देखने को मिला था। मीडिया कैमरों से दूर हुई इस बैठक में कई मसलों पर ट्रंप और प्रिंस सलमान के बीच असहमति नजर आई। इनमें सबसे बड़ा मसला अब्राहम अकॉर्ड है। ट्रंप ने अपील की थी कि सऊदी अरब भी इसका हिस्सा बने, लेकिन मोहम्मद बिन सलमान ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसके अलावा एक ऐसी शर्त भी रखी, जिसका पूरा होना मुश्किल है। ऐसे में ट्रंप का सऊदी अरब से दोबारा अब्राहम अकॉर्ड के लिए अपील करना मुश्किल होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप इस बात को लेकर निराश हुए कि सऊदी अरब ने अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। इसकी शुरुआत अमेरिका और इजराइल ने 2020 में की थी। इसमें यूएई और बहरीन जैसे देशों को शामिल किया गया था। इसके अलावा कजाखस्तान भी इसका हिस्सा बन चुका है। अब अमेरिका चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम देश इसका हिस्सा बनें ताकि मिडल ईस्ट में शांति रहे और इजराइल के साथ इनके रिश्ते बेहतर हों। इस लिहाज से सऊदी अरब सबसे अहम देश है, जिसे इस्लामिक मुल्क अपने नेता के तौर पर देखते हैं। ऐसी स्थिति में यदि सऊदी अरब ने साफ इनकार किया है तो अमेरिका के लिए यह झटका है।
बैठक में प्रिंस सलमान ने साफ कहा कि उनके देश की जनता अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है। हमारे देश में इसके पक्ष में कोई माहौल नहीं है। इसके अलावा यदि आप हमें इसमें देखना ही चाहते हैं तो फिर फिलिस्तीन को टू-स्टेट सॉलूशन के तहत मान्यता दें। यदि हमारी इस शर्त को पूरा किया जाता है तो हम इसके बारे में विचार करेंगे। प्रिंस सलमान ने कहा कि सऊदी अरब के लोग पूरी तरह से फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं। इसके अलावा इजराइल और हमास की जंग को लेकर भी हमारी एक राय है।
बता दें प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान एक सख्त नेता हैं। डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में भी उनका यही रवैया देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इजराइल को पीछे हटना चाहिए। फिलिस्तीन को मान्यता मिलनी चाहिए। तभी बातचीत के लिए हमारे दरवाजे खुल सकते हैं। वाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि ट्रंप इसलिए मिडल ईस्ट के देशों को इस अब्राइम अकॉर्ड में लाना चाहते हैं ताकि गाजा में जंग खत्म हो। इसके अलावा ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी मजबूती से आगे बढ़े।
इंडोनेशिया में भूस्खलन और बाढ़ से 10 लोगों की मौत, कई लापता
27 Nov, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिबोल्गा,। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर मूसलाधार बारिश से अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और छह लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि पिछले सप्ताह हुई मानसूनी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। इसके बाद बाढ़ से इलाके में तबाही मच गई। इस घटना के बाद बचाव दल, उत्तरी सुमात्रा प्रांत के छह जिलों में प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बयान में कहा गया है कि बुधवार तक बचाव कर्मियों ने सबसे ज्यादा प्रभावित शहर सिबोल्गा से कम से कम पांच शव और तीन घायलों को निकाला और वे चार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। वहीं मध्य तपनौली में भूस्खलन के कारण एक ही परिवार के कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। बाढ़ के चलते करीब दो हजार घर और इमारतें पानी में डूब गईं। इस आपदा के कारण दक्षिण तपनौली जिले में पेड़ उखड़ गए जिससे एक ग्रामीण की मौत हो गई।
सिबोल्गा पुलिस ने बताया कि आपातकालीन आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं और अधिकारियों ने ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों के लोगों से तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है। अक्टूबर से मार्च तक भारी मौसमी बारिश के कारण इंडोनेशिया में अक्सर भूस्खलन और बाढ़ आती है। यह 17,000 द्वीपों का एक द्वीपसमूह है, जहां लाखों लोग पहाड़ी क्षेत्रों में या उपजाऊ मैदानों के पास रहते हैं।
पाकिस्तान की आबादी में तेजी से हो रहा विस्फोट, चरमरा सकती है व्यवस्था
26 Nov, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। दुनिया में इटली, जापान, रूस, साउथ कोरिया जैसे देशों में तेजी से आबादी कम हो रही है और हालात ऐसे हैं कि अस्तित्व के संकट तक की बात हो रही है। यहां तक कि भारत जैसे देश में भी अब प्रजनन दर तेजी से कम हो रही है। प्रति महिला जन्मदर अब भारत में 1.9 ही रह गई है, लेकिन पाकिस्तान की आबादी में तेजी से विस्फोट हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बदलते दौर में पाकिस्तान की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है, उससे देश के आगे संकट पैदा हो सकता है। पाक मीडिया ने ही अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान की पूरी व्यवस्था ही चरमराने का अनुमान जताया है। पाक बढ़ती आबादी और उसके संसाधनों में असंतुलन का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह क्षेत्रफल के मामले में दुनिया का 33वां देश है, लेकिन आबादी के मामले में वह 5वें नंबर पर पहुंच गया है।
करांची, लाहौर, पेशावर, रावलपिंडी, क्वेटा समेत तमाम शहरों की हालत यह है कि जरा सी बारिश भी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर देती है। भारी आबादी के चलते कहीं भी रिहायश की सही व्यवस्था नहीं है और खेती का रकबा भी लगातार कम हो रहा है। क्लाइमेट चेंज और आर्थिक संकट जैसी समस्याएं अलग से घर रही हैं। फिलहाल पाकिस्तान की आबादी 241.5 मिलियन पर है। अब यह अगले 5 सालों में 300 मिलियन यानी 30 करोड़ तक पहुंच गई है। यही नहीं 2050 में तो यह 40 करोड़ हो जाएगी। छोटे से देश की इतनी भीषण आबादी बड़ा संकट खड़ा कर सकती है। ऐसी स्थिति इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान में प्रजनन दर 3.6 है। यह भारत के मुकाबले दोगुनी है।
साउथ एशिया के देशों में किसी भी मुल्क की आबादी बढ़ने की ग्रोथ इतनी अधिक नहीं है। पाकिस्तान के बाद अफ्रीका के मुल्कों में ही आबादी बढ़ने की रफ्तार इतनी तेज देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इतनी भारी आबादी का असर हर सेक्टर पर दिख रहा है। एक तरफ बच्चे कुपोषित हैं तो वहीं उनके बड़े होने पर बेरोजगारी का संकट है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर जैसी समस्याएं भी पैदा हो रही है। पाकिस्तान की बढ़ती आबादी के चलते हालात यह हैं कि 5 साल से कम आयु के 40 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा बच्चों को जन्म देने के दौरान ही 11 हजार माताओं की हर साल मौत हो जाती है।
पाकिस्तान में गर्भ निरोधक उपायों के इस्तेमाल में कमी के चलते भी ऐसी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इसकी वजह कुछ लोगों की कट्टरता है और वे गर्भनिरोध का इस्तेमाल नहीं करते। यही नहीं यह कट्टरता बढ़ती आबादी में एक और तरीके से खाज का काम करती है। पोलियो की दवा का विरोध किया जाता है और इसके चलते अकसर पाकिस्तान में पोलियो के केस मिल जाते हैं।
पृथ्वी पर अंतरिक्ष से हुए वार ने हिलाकर रख दिया वैज्ञानिक को
26 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । साल 2024 में पृथ्वी पर अंतरिक्ष से ऐसा वार हुआ जिसने वैज्ञानिक समुदाय को हिलाकर रख दिया। 10–11 मई 2024 की रात सुपरस्टॉर्म गान्नोन जिसे ‘मदर्स डे सुपरस्टॉर्म’ की ऊर्जा इतनी भयंकर थी कि पृथ्वी का प्लाज्मास्फीयर अपने सामान्य आकार के सिर्फ एक-पांचवें हिस्से जितना रह गया। सुपरस्टॉर्म गान्नोन पिछले दो दशकों का सबसे ताकतवर भूचुंबकीय तूफान साबित हुआ। जापान की जाक्सा एजेंसी का अरासे सैटेलाइट सही समय पर तूफान की सीधी लाइन में मौजूद था और इसने पहली बार सुपरस्टॉर्म के पूरे प्रभाव को विस्तार से मापा। डेटा दिखाता है कि प्लाज्मास्फीयर 44,000 किलोमीटर से सिकुड़कर मात्र 9,600 किलोमीटर तक सिमट गया—इतनी तेज गिरावट पहले कभी रिकॉर्ड नहीं हुई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सुपरस्टॉर्म सूरज से निकले उस विशाल विस्फोट का नतीजा था, जिसमें अरबों टन आवेशित कण पृथ्वी की ओर फेंके गए। इन कणों ने पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर पर सीधा वार किया और इसे जोरदार तरीके से झकझोर दिया। मात्र नौ घंटों में प्लाज्मास्फीयर 80 प्रतिशत तक दब गया, जिससे पृथ्वी की स्पेस-शील्ड लगभग निचोड़ दी गई।
अरासे सैटेलाइट, जिसे 2016 में लॉन्च किया गया था, तूफान के मार्ग में ठीक उसी जगह मौजूद था जहां सबसे शक्तिशाली प्रभाव दर्ज हुआ। इसके लगातार रिकॉर्ड किए गए डेटा से स्पष्ट हुआ कि सुपरस्टॉर्म ने न सिर्फ प्लाज्मास्फीयर को नीचे धकेला बल्कि आयनमंडल से आने वाले कणों के प्रवाह में भी भारी व्यवधान पैदा कर दिया, जिससे रिकवरी महज कुछ घंटों के बजाय पूरे चार दिन तक खिंच गई। तूफान की ताकत इतनी अधिक थी कि सामान्यतः केवल ध्रुवी क्षेत्रों में दिखने वाली ऑरोरा रोशनी पृथ्वी के मध्य अक्षांशों तक फैल गई। जापान, मेक्सिको और यूरोप के दक्षिणी हिस्सों में पहली बार लोगों ने आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी की चादरें देखीं जो इस तूफान की खतरनाक तीव्रता का संकेत थीं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऑरोरा जितनी नीचे तक दिखाई दे, समझ लेना चाहिए कि तूफान उतना ही शक्तिशाली है, और गान्नोन ने इस सीमा को ऐतिहासिक रूप से तोड़ दिया। प्लाज्मास्फीयर की धीमी रिकवरी ने वैज्ञानिकों को और चौंकाया। आमतौर पर सुपरस्टॉर्म के शांत होते ही आयनमंडल से कण ऊपर उठकर प्लाज्मास्फीयर को तेजी से भर देते हैं। लेकिन इस बार ‘नेगेटिव स्टॉर्म’ नाम की घटना हुई जिसमें आयनमंडल अचानक कण खो देता है, ऑक्सीजन आयन तेजी से कम हो जाते हैं और प्लाज्मास्फीयर के लिए जरूरी ‘ईंधन’ लगभग कट जाता है। इसी वजह से इसे पूरी तरह सामान्य होने में चार दिन लग गए, और अरासे के सात वर्षों के अवलोकन में ऐसा धीमा रिकवरी पैटर्न पहली बार देखा गया। इस सुपरस्टॉर्म का असर धरती पर मौजूद तकनीकी ढांचों पर भी साफ दिखा। कई सैटेलाइट्स ने पावर समस्याएं दर्ज कीं, कुछ समय तक डेटा भेजना बंद कर दिया। जीपीएस की सटीकता बिगड़ गई और हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुए।
वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि अगर ऐसा तूफान और अधिक शक्तिशाली हो, तो आधुनिक दुनिया फ्लाइट्स, नेवीगेशन, इंटरनेट, सैन्य संचार कुछ ही घंटों में ठप हो सकती है। यह अध्ययन स्पेस वेदर फोरकास्टिंग के लिए एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। पहली बार वैज्ञानिकों के पास इतना सटीक डेटा है कि वे प्लाज्मास्फीयर के व्यवहार को समझकर बेहतर मॉडल तैयार कर सकें। इससे आने वाले वर्षों में स्पेस-स्टॉर्म चेतावनियों की सटीकता बढ़ेगी और सैटेलाइट व संचार प्रणालियों को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकेगा।
खानपान, आदतों और दिनचर्या में बदलाव कर बचे कैंसर से
26 Nov, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । कुछ आदतों और लाइफस्टाइल में बदलाव करके कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि यह बीमारी काफी हद तक हमारे खानपान, आदतों और दैनिक दिनचर्या से जुड़ी होती है। इसी संदर्भ में डॉक्टर इरिक बर्ग ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जो कैंसर की रोकथाम में मदद कर सकते हैं।
डॉ. इरिक बताते हैं कि कैंसर तब विकसित होता है जब शरीर की सामान्य कोशिका का माइटोकोंड्रिया क्षतिग्रस्त हो जाता है। माइटोकोंड्रिया के खराब होते ही कोशिका का नियंत्रण तंत्र बिगड़ जाता है और सेल अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है। यही स्थिति आगे चलकर कैंसर का रूप लेती है। इसलिए यदि माइटोकोंड्रिया को स्वस्थ रखा जाए तो कैंसर का जोखिम काफी कम हो सकता है। कैंसर से बचाव के लिए सबसे पहला कदम है रिफाइंड खाद्य पदार्थों को डाइट से हटाना। डॉक्टर इरिक का कहना है कि रिफाइंड शुगर, रिफाइंड ऑयल, मैदा और स्टार्च जैसे खाद्य पदार्थ शरीर में इनफ्लेमेशन बढ़ाते हैं और सेल डैमेज का कारण बन सकते हैं। इसलिए प्राकृतिक और अनप्रोसेस्ड भोजन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
इसके अलावा शरीर को पर्याप्त धूप मिलना भी बेहद महत्वपूर्ण है। धूप से मिलने वाला विटामिन डी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और कैंसर के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। सर्दियों में धूप कम मिलने पर विटामिन डी के सप्लीमेंट्स का सहारा लिया जा सकता है। फास्टिंग को भी डॉक्टर इरिक बेहद प्रभावी तरीका मानते हैं। इंटरमिटेंट फास्टिंग या लंबी अवधि के उपवास से शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है और माइटोकोंड्रिया को संरक्षण मिलता है। इससे अनहेल्दी कोशिकाएं नष्ट होती हैं और नई स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होता है। नियमित व्यायाम भी कैंसर से बचाव में अहम है। एक्सरसाइज न केवल माइटोकोंड्रिया को स्वस्थ रखती है बल्कि डैमेज कोशिकाओं को बाहर निकालने में भी मदद करती है। इसके साथ ही तनाव को कम करना भी जरूरी है। लगातार तनाव माइटोकोंड्रिया को कमजोर कर सकता है और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटा सकता है। इसलिए रोजाना लंबी वॉक, पर्याप्त नींद और मानसिक शांति बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
जीवन में नकारात्मक और तनाव बढ़ाने वाले लोगों से दूरी बनाना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। डॉक्टर इरिक के अनुसार, यदि इन आदतों को दैनिक जीवन का हिस्सा बना लिया जाए, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के अवसर काफी बढ़ जाते हैं। बेहतर खानपान, नियमित एक्सरसाइज, तनावमुक्त जीवन और धूप का पर्याप्त सेवन मिलकर माइटोकोंड्रिया को सुरक्षित रखते हैं और शरीर को मजबूत बनाते हैं। मालूम हो कि कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम भर सुनते ही लोग डर और चिंता से घिर जाते हैं। खासतौर पर जिस तेजी से हाल के वर्षों में यह बीमारी बढ़ रही है, उससे लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि ऐसा क्या किया जाए जिससे कैंसर कभी हो ही न पाए।
सऊदी अरब और अमेरिका के बीच सुरक्षा समझौता........भारत के लिए हर मोर्चे पर बड़े मौके
26 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद । सऊदी अरब और अमेरिका के बीच की सुरक्षा पार्टनरशिप दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स में एक बड़ा बदलाव दिखाती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह रक्षा समझौते की तरह नहीं है, लेकिन वाशिंगटन का रियाद को मेजर नॉन-नाटो सहयोगी (एमएनएनए) का दर्जा देने और संभावित एफ-35 ट्रांसफर पर खुली चर्चा करने का फैसला वेस्ट एशिया में अमेरिकी रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। भारत के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने लेख में सऊदी और अमेरिका के बीच हुए समझौते को भारत के लिए एक बड़ा मौका बताया है।
जनरल हसनैन ने अपने लेख में लिखा है कि सऊदी अरब ने ट्रंप को अमेरिका में अगले एक दशक में एक ट्रिलियन डॉलर का निवेश का वादा कर दिया है, जो अमेरिका में सऊदी की रणनीतिक गहराई को दिखाता है। जिसमें ऊर्जा, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा-तकनीक और एआई-आधारित सुरक्षा समाधान शामिल हैं। इस पूंजी सहयोग के बदले में सऊदी सिर्फ बड़ा हथियार ग्राहक नहीं बन रहा, बल्कि अमेरिका के उच्च-स्तरीय रणनीतिक साझेदारों के समूह में प्रवेश कर रहा है, जहां अब तक मुख्य रूप से इजरायल, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल थे।
सऊदी अरब और अमेरिका के बीच बन रहे नये संबंध को लेकर जनरल हसनैन ने लिखा है कि भारत के लिए यह उभरता समीकरण मौकों से भरा है, दबाव से नहीं। खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक गहराई भारत के ऊर्जा-हितों, व्यापार और 90 लाख भारतीय प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो हर साल 45 अरब डॉलर से ज्यादा भारत भेजते हैं। उन्होंने लिखा है कि अमेरिका-सऊदी तकनीकी और रक्षा-उद्योग सहयोग भारत-सऊदी साझेदारी में, एआई, रक्षा-उत्पादन, क्रिटिकल-मिनरल्स, डिजिटल-इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक लॉजिस्टिक्स में नए अवसर खोल सकता है।
लेकिन पाकिस्तान फैक्टर इस मामले को और अधिक दिलचस्प बनाता है। रियाद और इस्लामाबाद ने हाल ही में एक स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस पैक्ट पर साइन किए हैं, जो यह याद दिलाता है कि सऊदी अरब कई सुरक्षा सोर्स से फायदा उठाता है। पाकिस्तान मैनपावर, ट्रेनिंग एक्सपर्टीज और एक ऐतिहासिक धार्मिक-मिलिट्री लिंकेज दिखाता है, जबकि यूएस पार्टनरशिप हाई टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस और पॉलिटिकल इंश्योरेंस लाती है। लेकिन यह ट्रायंगुलरिटी मामले में पेचीदगी भी लाती है, क्योंकि पाकिस्तान के चीन के साथ गहरे मिलिट्री लिंक हैं और ईरान के साथ उसके रिश्ते ऊपर-नीचे होते रहते हैं।
उन्होंने लिखा है कि भारत को सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बनने वाले समीकरण को लेकर सतर्क रहना होगा। लेकिन सऊदी की अब स्ट्रेटेजिक मैच्योरिटी और मल्टी-वेक्टर डिप्लोमेसी से पता चलता है कि वह अब भारत को सिर्फ एक वर्कफोर्स प्रोवाइडर के तौर पर नहीं, बल्कि अपने लॉन्ग-टर्म विजन में एक बड़े इकोनॉमिक और सुरक्षा साथी के तौर पर देखता है। जनरल हैसनन ने लिखा है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों की मजबूती एक ऐसी समझ पर आधारित है जिसमें कई सालों से गहरी सलाह-मशविरा, सहयोग और लगातार बातचीत हुई है। ट्रंप 2.0 में हुए बदलाव को भी रुकावट नहीं समझना चाहिए क्योंकि रिश्ता अब लेन-देन की गड़बड़ियों से आगे निकल गया है। इसीलिए भारत को इसका फायदा उठाने के लिए कोई नॉन-नाटो सहयोगी होने की जरूरत नहीं है। और भारत बिना किसी कैंप में जाए अपनी शर्तों पर रहने की जरूरत है।
पाकिस्तान के सियासी इतिहास में सबसे ताकतवर महिला थी जनरल रानी
26 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद पाकिस्तान के सियासी इतिहास में एक ऐसी महिला का नाम आज भी चमकता है, जिसे ‘जनरल रानी’ कहा गया था। अकलीम अख़्तर को यह उपाधि इसलिए मिली थी क्योंकि वे पाकिस्तानी फौज के ताकतवर जनरलों की ‘रानी’ थीं। यह एक ऐसी कहानी हैं जो पॉवर, साजिश, सेक्स और पतन की मिसाल है। 1960-70 के दशक में वे जनरल याह्या खान की सबसे करीबी रहीं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कहा जाता है कि याह्या खान उन पर इतना फिदा थे कि 1971 की जंग में भी उनका ध्यान रानी पर ही लगा रहा, लेकिन उनकी असली विरासत उनकी बेटी अरूसा आलम के हाथों बनी, जिसने भारत के पंजाब की राजनीति में ऐसा तूफान मचाया कि पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का राजनीतिक करियर ही दांव पर लग गया। यह कहानी सिर्फ दो देशों के बीच की दुश्मनी नहीं, बल्कि प्यार, विश्वासघात और सत्ता की भूख की है।
बता दें अकलीम अख्तर का जन्म 1930 के दशक में गुजरात जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे काफी साहसी थीं। कम उम्र में ही उनकी शादी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से हो गई थी, लेकिन शादी के बाद जिंदगी ऐसी उलझी कि वे घर छोड़ने को मजबूर हो गईं। पति की मारपीट और आर्थिक तंगी ने उन्हें तोड़ दिया। 1963 या उसके आसपास पहाड़ों पर एक छुट्टी के दौरान वह अपने पति से तकरार के बाद अलग हो गईं।
1960 के दशक में वह अपने दो बच्चों बेटी अरूसा और बेटे के साथ करांची, लाहौर और रावलपिंडी के नाइट क्लबों की दुनिया में उतर गईं। वहां पाकिस्तान के राजनीतिक, सैन्य और व्यापारिक हल्कों के मर्दों का जमावड़ा रहता था। अकलीम ने खुद को ‘पार्टी ऑर्गनाइजर’ बना लिया। वे न शराब पीतीं, न डांस करतीं, लेकिन स्मार्ट तरीके से काम करती थीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मैं मर्दों की कमजोरियों को भांपती थी। मैं उन्हें ‘डंब, प्रिटी गर्ल्स’ देती, जो बिना किसी बंधन के आती थीं। वे टॉयलेट के पास बैठतीं, जहां शराब के नशे में जनरल लोग आते और बातचीत शुरू कर देती थीं।
अकलीम की यह रणनीति काम कर गई। 1969 में जब जनरल अयूब खान के बाद जनरल याह्या खान पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। एक पार्टी में अकलीम की मुलाकात याह्या से हुई। नशे में धुत याह्या टॉयलेट से लौटे और अकलीम ने बात करने लगे। जल्द ही यह रिश्ता गहरा हो गया। याह्या उनपर इतना फिदा थे कि उन्हें ‘जनरल रानी’ कहने लगे। कहा जाता है कि याह्या की कमजोरियां यानी शराब, औरतों को अकलीम ही संभालती थी। बताया जाता है कि उनके एक इशारे पर लोगों को नौकरी मिल जाती थी, प्रमोशन हो जाता, या ट्रांसफर। प्रभावशाली लोग उनके पास फेवर मांगने के लिए लाइन में लगे रहते थे।
अकलीम और याह्या का एक किस्सा बड़ा मशहूर है। कहा जाता है कि एक बार याह्या रात 2 बजे परेशान होकर उनके पास आए। उन्हें नूरजहां का गाना सुनना था। अकलीम ने तुरंत लाहौर की फ्लाइट बुक कराई, होटल सूट रिजर्व कराया और सुबह तक रिकॉर्डिंग करवा दी। इस दिन अकलीम ने याह्या के दिल में घर कर लिया। अकलीम का उन पर इतना असर था कि कहा जाता है 1971 की जंग में भी उनका ध्यान अपनी जनरल रानी पर ही लगा रहा।
डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर यूक्रेन ने लगाई मुहर
26 Nov, 2025 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच 4 सालों से जारी जंग को खत्म कराने के लिए तत्पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) ने हाल ही में एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसपर दोनों पक्षों का समर्थन मिलना लगभग नामुमकिन बताया जा रहा है। अब इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका ने बड़ा दावा किया है। सीएनएन ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि यूक्रेन रूस के साथ युद्ध खत्म करने के लिए इस डील पर सहमत हो गया है। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इससे अलग बयान दिया है। समझौते को लेकर जेलेंस्की ने कहा है कि अभी इस पर और काम करने की जरूरत है।
बता दें कि ट्रंप प्रशासन के इस नए प्रस्ताव पर बातचीत का सिलसिला जारी है। इस कड़ी में मंगलवार को अमेरिकी आर्मी सेक्रेटरी ने अबू धाबी में रूसी अधिकारियों के साथ एक बैठक की है। यूक्रेन का एक डेलिगेशन भी आबू धाबी में मौजूद था। बैठक के बीच एक अधिकारी ने बताया “यूक्रेन शांति समझौते के लिए सहमत हो गया है। कुछ छोटी-मोटी डिटेल्स को सुलझाना बाकी है लेकिन वे इस प्रस्ताव के लिए सहमत हो गए हैं।”
हालांकि अमेरिका का यह बयान यूक्रेनी पक्ष के बयानों से मेल नहीं खा रहा है। इससे पहले मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में जेलेंस्की ने कहा था, “जिनेवा में बैठक के बाद, हमें कई ऐसे मौके दिख रहे हैं जो शांति का रास्ता बना सकते हैं। अभी भी बहुत काम बाकी है।”
‘एक तरफ अपनी इज्जत खोने…’
इससे पहले जेलेंस्की ने सोमवार को यह भी कहा था कि उनका देश एक नाजुक स्थिति में है। उन्होंने जोर देकर कहा था कि यूक्रेन के लिए एक तरफ अपनी इज्जत खोने तो दूसरी तरफ अमेरिका को एक साथी के तौर पर खोने का रिस्क है। जेलेंस्की ने कहा, “असली शांति पाने के लिए हमें ज्यादा की जरूरत है। बेशक हम सभी पार्टनर्स, खासकर अमेरिका के साथ काम करना जारी रखेंगे और ऐसे समझौतों की तलाश करेंगे जो हमें मजबूत करें लेकिन कमजोर न करें।”
प्रस्ताव में क्या?
अमेरिका के इस 28 सूत्री प्रस्ताव में यूक्रेन से दोनबास का इलाका छोड़ने, अपनी सेना में कटौती करने और NATO में शामिल होने की अपनी इच्छाओं को छोड़ने के लिए कहा था। वहीं इसके तहत अमेरिका क्रीमिया को रूस के आधिकारिक हिस्से में भी मान्यता दे सकता है। हालांकि रूस की इस तरह की मांगों को यूक्रेन काफी समय से खारिज करता रहा है और जेलेंस्की ने कई मौकों पर कहा है कि इस तरह की मांगें यूक्रेन के लिए लाल रेखा है।
‘एलीट कैप्चर’ की वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान
26 Nov, 2025 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहोर। भारत के पड़ोसी पाकिस्तान (Pakistan) की तंगहाली छिपी हुई नहीं है। अब कर्ज तले डूबे इस मुल्क को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की नई रिपोर्ट में कुछ हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। IMF की इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली की असली वजह पर सीधी उंगली रख दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार, “एलीट कैप्चर” और सत्ता और कारोबार से जुड़े चुनिंदा हुक्मरानों के हाथों में नीतियों का केंद्रित होना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है।
IMF ने हाल ही में 186 पेज की ‘गवर्नेंस एंड करप्शन डायग्नॉस्टिक असेसमेंट (GCDA)’ रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में करप्शन बेहद भयावह में स्थिति है, जिससे बाजार की स्थिति खराब हो रही है, जनता का भरोसा टूट रहा है और सरकारी खजाना खाली होता जा रहा है।
IMF की रिपोर्ट में क्या?
रिपोर्ट के मुताबिक अगर पाकिस्तान अभिजात वर्गों को दे रहे विशेषाधिकार की नीतियों को खत्म कर दें, तो अर्थव्यवस्था तेजी से सुधर सकती है। IMF के अनुमान के मुताबिक कुछ सुधारों से पांच साल में जीडीपी 5 से 6.5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। बता दें कि 2024 में पाकिस्तान की अनुमानित जीडीपी 340 अरब डॉलर थी।
25 बार कर्ज लेने पहुंच चुका है पाक
रिपोर्ट इसीलिए भी अहम है कि क्योंकि पाकिस्तान दुनिया में सबसे ज्यादा बार IMF का दरवाजा खटखटाने वाला देश बन चुका है। पाक 1958 से अब तक 25 बार कर्ज की उम्मीद में IMF के पास पहुंच चुका है। हाल ही में पाक ने एक बार IMF बोर्ड के सामने गुहार लगाई थी और इसके तहत IMF अगले महीने 1.2 अरब डॉलर की नई किश्त मंजूर कर सकता है।
क्या है एलीट कैप्चर’?
IMF के मुताबिक पाकिस्तान में भ्रष्टाचार सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े स्तर पर मौजूद है, जहां शक्तिशाली संस्थाएं और लोग सरकारी नीतियों को अपने हित में मोड़ लेते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि विशेष लाभ, टैक्स छूट और सरकारी ठेकों तक खास पहुंच रखने वाला यह समूह हर साल अर्थव्यवस्था से अरबों डॉलर निकाल लेते हैं। 2021 में आई UNDP की रिपोर्ट में भी यह बताया गया था कि पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य एलीट को मिलने वाले आर्थिक फायदे देश की अर्थव्यवस्था के करीब 6 प्रतिशत के बराबर हैं।
धरती पर दो विश्व युद्ध देख चुकी 141 साल की ‘ग्रैमा’ कछुए की मौत, फैली शोक की लहर
26 Nov, 2025 08:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लॉस एंजिल्स! धरती पर हुए 2 विश्व युद्धों (World Wars) की साक्षी और अपने जीवनकाल में 20 अमेरिकी राष्ट्रपतियों का शासन देख चुकी ग्रैमा की मौत हो गई है। 141 साल की ग्रैमा सैन डिएगो जू (Gramma San Diego Zoo) की सबसे उम्रदराज जीव थी और अब इस गैलापागोस कछुए की मौत से यहां शोक की लहर फैल गई है। जू के अधिकारियों ने बताया कि बीते 20 नवंबर को ग्रैमा की मौत हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि यह कछुआ सैन डिएगो जू में कब आया, लेकिन अनुमान के मुताबिक इसे 1928 या 1931 में ब्रोंक्स जू से यहां लाया गया था। समय गुजरने के साथ वह अपने मनमोहक और शर्मीले व्यवहार से पर्यटकों को लुभाती रही।
ग्रैमा के केयर स्पेशलिस्ट उसे प्यार से “जू की रानी” भी कहते थे। चिड़ियाघर प्रशासन ने कहा कि उन्हें बढ़ती उम्र की वजह से हड्डियों में दिक्कतें होने लगीं और यही उसकी मौत का कारण बना।
ग्रैमा की मौत के बाद कई विज़िटर्स ने सोशल मीडिया पर उसे याद किया और बताया है कि किस तरह जब वे छोटे थे, तो उन्हें पहली बार ग्रैमा से मिलने का मौका मिला और फिर सालों बाद अपने बच्चों के साथ भी वापस आने पर भी उसने उनका स्वागत किया।
बता दें कि गैलापागोस कछुए जंगल में 100 साल से ज्यादा जिंदा रह सकते हैं। वहीं इंसानी कैद में इसके और अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना रहती है। पृथ्वी पर सबसे ज्यादा समय तक जिंदा रहने का रिकॉर्ड हैरियट नाम के कछुए के नाम था। इसकी उम्र 175 साल थी और यह ऑस्ट्रेलिया के एक जू में था। 2006 में उसकी मौत हो गई।
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