धर्म एवं ज्योतिष
काली गाय को रोटी खिलाने से केवल शनि ही नहीं, राहु और केतु भी रहते हैं शांत, जानें इसके अनेक फायदे
24 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय संस्कृति में गाय को देवी माना गया है, और उसमें भी काली गाय को विशेष शुभ और प्रभावशाली माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि गाय के शरीर में देवी-देवताओं का वास होता है. विशेष रूप से काली गाय को शनि देव से जुड़ा हुआ माना जाता है, इसलिए यह ग्रहों की शांति के लिए बेहद लाभकारी होती है. धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार काली गाय को रोटी खिलाने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं. यह सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे ज्योतिषीय रहस्य छिपे हुए हैं. साथ ही, यह एक सरल और प्रभावशाली उपाय है जिसे कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में अपना सकता है. आइए जानते हैं काली गाय को रोटी खिलाने से कौन-कौन से ग्रह मजबूत होते हैं और इससे हमें क्या लाभ प्राप्त होते हैं. इस बारे में बता रहे हैं
काली गाय और शनि ग्रह का गहरा संबंध
ज्योतिष के अनुसार काली गाय का सीधा संबंध शनि ग्रह से होता है. शनि को कर्मों का दंडाधिकारी माना गया है. अगर किसी की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो, शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो ऐसे व्यक्ति को काली गाय को रोटी खिलाने की सलाह दी जाती है. ऐसा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आ रही रुकावटें, बाधाएं और कर्ज जैसी समस्याएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं
राहु और केतु पर भी असर
काली गाय को रोटी खिलाने से सिर्फ शनि ही नहीं बल्कि राहु और केतु जैसे छाया ग्रह भी शांत होते हैं. अगर कुंडली में कालसर्प दोष हो या राहु-केतु की दशा चल रही हो, तो यह उपाय बेहद लाभकारी साबित होता है. इन ग्रहों के दुष्प्रभाव से मानसिक तनाव, डर, भ्रम और दुर्घटनाएं हो सकती हैं. लेकिन काली गाय को नियमित रोटी खिलाने से ये प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है.
किस प्रकार और कब खिलानी चाहिए रोटी?
हर शनिवार को सुबह स्नान करके, काली गाय को गुड़ या तिल मिलाकर बनी रोटी खिलानी चाहिए. इसे खिलाते समय मन से ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें. ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और ग्रहों की कृपा प्राप्त होती है. हो सके तो रोटी में थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर खिलाएं, यह शनि के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है.
काली गाय को रोटी खिलाने से मिलते हैं ये लाभ
1. कर्ज से मुक्ति – जिन लोगों पर भारी कर्ज हो, उन्हें यह उपाय करना चाहिए. इससे धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति सुधरती है.
2. नौकरी और प्रमोशन में सफलता – अगर बार-बार प्रयास के बावजूद सफलता नहीं मिल रही हो तो यह उपाय बहुत कारगर साबित हो सकता है.
3. दाम्पत्य जीवन में शांति – पारिवारिक कलह दूर होती है और रिश्तों में मिठास आती है.
4. नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति – काली गाय को रोटी खिलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बुरी शक्तियां दूर रहती हैं.
करियर और जीवन की उलझनों में समाधान चाहिए? तो अपनाएं कृष्ण-अर्जुन की सीख, बन सकती है आपके जीवन की रोशनी
24 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर इंसान की ज़िंदगी में कभी न कभी एक ऐसा दौर आता है जब वह यह तय नहीं कर पाता कि उसे करना क्या है. कई बार ऐसा होता है कि हम किसी और की राह पकड़ लेते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि समाज, माता-पिता या साथियों ने वही राह चुनी होती है. फिर एक समय ऐसा आता है जब भीतर से आवाज़ आती है क्या यही रास्ता मेरा है? यही उलझन आज के युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है. बहुत से लोग ऐसे हैं जिनका कोई ठोस लक्ष्य नहीं है. वह समझ ही नहीं पाते कि उन्हें आगे क्या करना है. ऐसे में एक छोटा सा कदम, एक मामूली सा बदलाव आपकी सोच की दिशा को पूरी तरह बदल सकता है.
अगर आप जीवन में उलझे हुए हैं, आपके पास कोई ठोस योजना नहीं है या आप अपने विचारों में स्पष्टता नहीं पा रहे, तो अपने घर के उत्तर-पूर्व कोने में एक खास चित्र लगाइए. यह चित्र वह हो जिसमें भगवान कृष्ण, अर्जुन को कुरुक्षेत्र के मैदान में उपदेश दे रहे हों. यह वही क्षण है जब अर्जुन संशय में था, दुविधा में था और कृष्ण ने उसे उसका उद्देश्य समझाया.
उत्तर-पूर्व दिशा को मानसिक ऊर्जा की दिशा माना गया है. यहां सकारात्मकता जल्दी असर करती है. जब आप रोज़ उस चित्र को देखते हैं, तो आपके भीतर धीरे-धीरे वही भावना जागने लगती है जो अर्जुन में जगी थी. धैर्य, स्पष्टता और संकल्प. यह कोई टोना-टोटका नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है. जिस चीज़ को आप लगातार देखते हैं, वह आपके अवचेतन मन में बैठ जाती है और जब मन तैयार होता है, तो राह अपने आप बनने लगती है
आज के युवा कई बार अलग-अलग करियर विकल्पों के बीच फंस जाते हैं. पहले सोचा कि इंजीनियर बनना है, फिर लगा नहीं, कुछ और बेहतर होगा. कभी लगा कि सरकारी नौकरी ठीक है, फिर YouTube या सोशल मीडिया में दिलचस्पी आने लगी. हर बार राह बदली, क्योंकि मन में स्थिरता नहीं थी. और जब तक सोच स्थिर नहीं होगी, दिशा नहीं मिलेगी.
इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने दिमाग की गति को एक दिशा दें. वह दिशा आप खुद तय नहीं कर पा रहे, तो एक ऐसी प्रेरणा का सहारा लीजिए जो सदियों से मानवता का मार्गदर्शन करती आई है. कृष्ण और अर्जुन का संवाद सिर्फ धार्मिक प्रसंग नहीं है, वह एक मनोवैज्ञानिक गहराई है जो हमें खुद से जोड़ता है.
इस बदलाव का असर आपको कुछ ही दिनों में दिखने लगेगा. सोचने का तरीका बदलने लगेगा. मन में जो कोहरा है, वह धीरे-धीरे छंटने लगेगा. आपको अपने अंदर ही वो आवाज़ सुनाई देने लगेगी, जो कहेगी “तू यही करने के लिए बना है”.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
24 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनाव व उदर रोग, मित्र लाभ, राज भय होगा, विवेक से कार्य बनाने का ध्यान रखे।
वृष राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील रहे, कार्यगति अनुकूल चिन्ता कम होगी, ध्यान रखे।
मिथुन राशि :- किसी प्रयोजन से हानि, मनोवृत्ति संवेदनशील रहेगी, कार्यगति उत्तम होगी।
कर्क राशि :- कार्य व्यवस्था की चिंता बनी ही रहेगी, प्रयास करने से लाभ अवश्य होगा।
fिसंह राशि :- भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्य गति उत्तम सुख के साधन अवश्य ही बनेंगे।
कन्या राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, समय पर सोचे कार्य पूरे होंगे, रुके कार्य बन ही जायेंगे।
तुला राशि :- पारिवारिक बाधायें परेशान करेगी, विरोधी तत्व कष्ट प्रद होंगे, ध्यान रखे।
वृश्चिक राशि :- मानसिक बेचैनी, उदविघ्नता से बचे तथा समय पर लाभान्वित अवश्य होंगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्याएं कष्ट प्रद हो तथा व्यर्थ भ्रमण से व्यय अवश्य ही होगा।
मकर राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटाए तथा कार्य बने ध्यान दे।
कुंभ राशि :- स्वभाव से खिन्नता, मानसिक बेचैनी तथा मानसिक कष्ट से स्वस्थ्य शरीर पीड़ा होगी।
मीन राशि :- तनाव क्लेश व अशांति बनेगी, परिश्रम विफल होगे, कार्यगति मंद होगी।
वट सावित्री व्रत में क्या करें और क्या न करें? जानिए सभी जरूरी नियम और शुभ विधि
23 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत खास महत्व है. यह व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करती हैं. धार्मिक ग्रंथों में वट सावित्री व्रत को विशेष फल देने वाला बताया गया है. यदि इसे सही विधि-विधान से किया जाए तो कई तरह के लाभ मिलते हैं.
ज्येष्ठ मास में वट सावित्री व्रत दो बार आता है. एक बार कृष्ण पक्ष की अमावस्या को और दूसरी बार शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को. ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में यह व्रत करने से वैधव्य दोष दूर होता है. वहीं शुक्ल पक्ष में करने से पति की लंबी उम्र होती है और जीवन की सभी परेशानियां खत्म होती हैं. पुराणों में इस व्रत का विशेष वर्णन मिलता है.
महाभारत में भी मिलता है इस व्रत का उल्लेख
हरिद्वार के ज्योतिष पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, वट सावित्री व्रत का हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा महत्व है. सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए यह व्रत करती हैं. महाभारत और अन्य धार्मिक ग्रंथों में सावित्री और सत्यवान की कथा का उल्लेख मिलता है, जिसमें सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस लिए थे. इसी कथा के आधार पर माना जाता है कि यह व्रत करने से वैधव्य दोष दूर होता है और जीवन की सभी कठिनाइयां खत्म हो जाती हैं.
वट सावित्री पर इस चीज से करें परहेज
पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि इस साल वट सावित्री व्रत 10 जून मंगलवार को मनाया जाएगा. इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, ध्यान लगाएं और व्रत का संकल्प लें. व्रत के दौरान फल और हल्का भोजन ग्रहण करें. वट वृक्ष की पूजा करना और सूती धागे से वट वृक्ष की सात परिक्रमा करना शुभ माना जाता है. इससे पति की आयु लंबी होती है.
धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए इस व्रत में वट वृक्ष की पूजा करने से जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं और सुख-समृद्धि आती है. व्रत के दौरान वट सावित्री की कथा पढ़ना भी शुभ माना जाता है.
इस व्रत को विधिपूर्वक करने से जीवन में खुशहाली आती है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है. इसलिए हर सुहागन महिला को इस वट सावित्री व्रत का पालन जरूर करना चाहिए.
भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना रुष्ट हो सकते हैं न्याय के देवता शनिदेव!
23 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शनि देवता को हिंदू ज्योतिष में “न्याय का देवता” माना जाता है. वह न कर्म से डरते हैं, न पद से प्रभावित होते हैं. उनका न्याय अचूक है जिसने अच्छा किया, वह ऊंचा उठा; जिसने अन्याय किया, वह नीचे गिरा. ऐसे में Shani Jayanti, यानी उनके जन्मदिन पर की गई पूजा, आपके जीवन का रुख बदल सकती है लेकिन यदि आप भूल कर भी कुछ गलतियां न करें.
शनि जयंती पर भूलकर भी न करें ये गलतियाँ
1. तामसिक भोजन से करें परहेज़
मांस, मदिरा या किसी भी तरह के तामसिक भोजन को इस दिन ग्रहण करना अशुभ माना जाता है. शनि जयंती के दिन सात्विक और शुद्ध शाकाहारी भोजन ही करें.
2. तेल का दान
तेल चढ़ाना शुभ है, लेकिन गंदा या पुराना तेल चढ़ाना वर्जित है. शनिदेव को सरसों के तेल का दीपक जलाएं और तेल का दान शुद्ध मन और नीयत से करें.
3. अन्याय या अपमान बिल्कुल न करें
गरीबों, ज़रूरतमंदों या पशु-पक्षियों के साथ कठोर व्यवहार शनिदेव को अप्रसन्न कर सकता है. इस दिन अधिक से अधिक सेवा करें, सहायता करें और सभी के साथ सम्मान से पेश आएं.
कैसे करें शनिदेव को प्रसन्न
पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
शनिदेव की प्रतिमा के सामने काली उड़द, काला तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र या काला छाता दान करें.
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें.
शनि मंदिर में जाकर शांति और श्रद्धा से प्रार्थना करें.
इन उपायों से साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य कष्टों से राहत मिल सकती है.
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
23 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष तथा रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
वृष राशि :- कार्य योजना पूर्ण होगा, शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो, सोचे कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मिथुन राशि :- कार्य व्यवसाय में थकावट, बैचेनी, कुछ असफलता के साधन अवश्य ही बनेंगे।
कर्क राशि :- दैनिक व्यवसाय गति मंद रहे, असमर्थता का वातावरण अवश्य बना ही रहेगा।
fिसंह राशि :- आलोचना से बचिए, कार्यकुशलता से पूर्ण संतुष्ट तथा संतोष बना ही रहेगा।
कन्या राशि :- भोग ऐश्वर्य में समय बीतें, शारीरिक थकावट बेचैनी कार्य में बढ़े ध्यान दे।
तुला राशि :- मित्र वर्ग विशेष फलप्रद रहे, आशानुकूल सफलता से संतोष होगा।
वृश्चिक राशि :- मित्र वर्ग विशेष फलप्रद रहे, कार्य में सफलता प्राप्त होगी, रुके कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- तनाव पूर्ण वार्तालाप चलती रहेगी तथा सुखवर्धक योग अवश्य होगा।
मकर राशि :- कार्य वृत्ति में सुधार, सामाजिक कार्य में मान प्रतिष्ठा अवश्य ही बन जाएगी।
कुंभ राशि :- कार्य व्यवसाय गति मंद, चोट आदि का भय रहेगा तथा मानसिक तनाव बनेगा।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य की योजना अवश्य ही बनेगी।
भगवान कार्तिकेय के मंदिर में महिलाओं को नहीं मिलता है प्रवेश
22 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान कार्तिकेय के भारत में अनेकों मंदिर हैं। खासकर दक्षिण भारत में स्वामी कार्तिकेय के अनेकों मंदिर हैं। जहां पर स्वामी कार्तिकेय की पूजा की जाती है। हालांकि वहां पर महिलाओं का जाना वर्जित है। एक ऐसा ही मंदिर पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर स्वामी कार्तिकेय के नाम से जाना जाता है।
हरियाणा के पिहोवा में एक ऐसा मंदिर है, जहां पर महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगी है। हालांकि महिलाएं खुद इस मंदिर में नहीं जाना चाहती हैं। इस मंदिर में महिलाओं के न जाने की वजह मंदिर के श्राप को माना जाता है। इस श्राप का डर महिलाओं के दिमाग में इस कदर है कि यहां पर वह खुद से नहीं जाना चाहती हैं। इस मंदिर में महिलाओं के न जाने का क्या कारण है। भगवान कार्तिकेय द्वारा स्त्री को श्राप देना है। पौराणिक मान्यता है कि है कि जब भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती ने भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय से पृथ्वी का चक्कर लगाने को कहा। तो कार्तिकेय जी मोर पर बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाने निकल गए। लेकिन भगवान गणेश मां पार्वती और शिवजी के चक्कर लगाने लगे। तीन चक्कर लगाने के बाद गणेश ने कहा कि उन्होंने संपूर्ण जगत की परिक्रमा कर ली है। जिसके बाद भगवान शिव ने गणेश का राजतिलक कर दिया। साथ ही गणेश जी को शुभ-अशुभ कार्यों में पूजा का अधिकार दे दिया।
इस घटना के बारे में देवर्षि नारद ने भगवान कार्तिकेय को बताया। वहीं कार्तिकेय ने मां पार्वती से कहा का कि माता आपने मेरे साथ छल किया है। बड़ा होने के कारण राजतिलक का अधिकार मेरा था। इस घटना से क्रोधित होकर अपनी खाल और मांस उतारकर माता के चरणों में रख दिए। उन्होंने गुस्से में पूरी नारी जाति को श्राप देते हुए कहा कि जो भी स्त्री उनके इस रूप के दर्शन करेगी, वह सात जन्म तक विधवा रहेगी। हालांकि देवताओं ने कार्तिकेय को शारीरिक शांति के लिए तेल और सिंदूर का अभिषेक किया। वहीं गुस्सा शांत होने के बाद अन्य देवताओं ने भगवान कार्तिकेय को देव सेना का सेनापति बना दिया। इसी मान्यता को देखते हुए सिर्फ पुरुष ही भगवान कार्तिकेय के पिंडी रूप के दर्शन कर सकते हैं। वहीं महिलाएं यहां पर दर्शन नहीं कर सकती हैं।
भक्तों को चावल के दानों में दर्शन देते हैं भगवान श्रीनाथजी
22 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नाथद्वार में स्थित भगवान श्रीनाथजी का चमत्कारी मंदिर है। यह मंदिर कई चमत्कारी कहानियों के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि श्रीनाथजी खुद भगवान विष्णु के अवतार हैं। पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण सात साल के थे, तब वह यहां पर विराजमान हो गए थे। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रीकृष्ण की काले रंग की मूर्ति को एक पत्थर से तराशा गया है। वहीं यह अपने आप में हैरान कर देने वाली चीज है। यहां भगवान भक्तों को चावल के दानों में दर्शन देते हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने साथ चावल लेकर जाते हैं। दर्शन के बाद श्रद्धालु इन चावलों को अपनी तिजोरी में रखते हैं, जिससे कि घर में धन कमी न हो।
उस समय श्रीनाथजी की मूर्ति जोधपुर के पास चौपासनी गांव में थी। चौपासनी गांव में कई समय तक बैलगाड़ी में श्रीनाथजी की मूर्ति की पूजा होती रही। हालांकि अब यह गांव जोधपुर का हिस्सा बन गया है। वहीं जिस जगह ये बैलगाड़ी खड़ी थी, वहां पर श्रीनाथजी का मंदिर बना है। कोटा से करीब 10 किमी दूर श्रीनाथजी की चरण पादुकाएं उसी दौरान आज तक वहीं रखी हुई है। इस स्थान को चरण चौकी के नाम से जानते हैं।
मंदिर से जुड़े नियमों के मुताबिक सर्दियों में प्रभु श्रीनाथजी को उठाकर भोग लगाया जाता है। वहीं रात में प्रभु को सुलाने के लिए कवियों के पदों का गान किया जाता है। श्रीनाथजी के शयनानन्तर तक बीन भी बजाई जाती है। वहीं गर्मी में उनके लिए पंखे की सेवा की जाती है। वहीं सर्दियों में उनको ठंड से बचाने के लिए श्रीनाथजी की मूर्ति के पास अंगीठी रखी जाती है।
कामधेनु गाय देती है शुभ फल
22 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे जीवन में वास्तु शास्त्र का महत्व काफी ज्यादा बताया गया है। कहा जाता है अगर किसी भी कार्य को करने से पहले या फिर करने के दौरान वास्तु शास्त्र में बताये गए नियमों का पालन किया जाता है तो इसके परिणाम काफी शुभ और सकारात्मक होते हैं. वहीं, जब इन नियमों को नजरअंदाज किया जाता है तो इसके परिणाम भी उतने ही बुरे हो सकते हैं। सनातन धर्म के अनुसार कामधेनु गाय में देवी-देवताओं का निवास होता है। इसे घर पर रखने से इंसान की हर मनोकामना पूरी होती है। वास्तु शास्त्र की अगर मानें तो जब आप इसे रखते हैं तो इससे सुख समृद्धि का वास आपके घर पर होता है.
किस जगह रखें कामधेनु की मूर्ति?
वास्तु शास्त्र की अगर मानें तो आपको कामधेनु गाय की मूर्ति को अपने घर के ईशान कोण में रखना चाहिए। इसे सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। आप अगर चाहें तो कामधेनु गाय की मूर्ति को घर के पूजास्थल या फिर मुख्य द्वार पर रख सकते हैं। अगर आप मूर्ति नहीं रख पा रहे हैं तो ऐसे में तस्वीर लगाना भी काफी शुभ माना जाता है.
अगर आप अपने घर पर कामधेनु गाय की मूर्ति स्थापित करने जा रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि वह सोना, चांदी, पीतल, तांबे या फिर मार्बल की बनी हुई हो। आप अगर चाहें तो चीनी मिटटी से बनी मूर्ति भी अपने घर पर रख सकते हैं। अगर आप अपने घर में सही जगह पर कामधेनु गाय की मूर्ति स्थापित करते हैं तो इससे आपको वास्तु दोषों से छुटकारा मिल सकता है। केवल यहीं नहीं, जब आप इसे अपने घर पर रखना शुरू कर देते हैं तो आपकी आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो जाती है।
8 अंक वालों पर रहती है शनिदेव की कृपा
22 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मानव जीवन में अंक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का विशेष योगदान होता है। अंक शास्त्र के अनुसार अंकों के माध्यम से ही किसी भी व्यक्ति के भविष्य स्वभाव अथवा व्यवहार के बारे में काफी हद तक जाना जाता है। अंकों के द्वारा ही मूल्यांकन और भाग्यांक बनाया जाता है।
हर एक मूल्यांकन का अलग-अलग ग्रह स्वामी भी होते हैं। उसी के आधार पर वह फल भी देते हैं। ऐसे में 8 मूल्यांकन वाले जातक के ऊपर शनिदेव की विशेष कृपा भी रहती है। यह लोग अपने भाग्य से ज्यादा कर्मों पर विश्वास रखते हैं। ऐसी स्थिति में शनि देव की कृपा से धन संपदा समाज में मान सम्मान की वृद्धि भी होती है
किस पर मेहरबान होते हैं शनिदेव?
जिन जातक का जन्म 26, 17, 8 आदि तिथियां में हुआ होता है तो इसका कुल मिलाकर 8 ही बनता है। ऐसे में इस तारीख को जन्म लेने वाले जातकों का मूलांक 8 होता है 8 मूल्यांकन वाले हमेशा सफल होने की चाहत भी रखते हैं। इसी वजह से हर चीज को यह बहुत ही व्यवस्थित तरीके से करना पसंद भी करते हैं।
8 मूल्यांकन वाले जातक
8 मूल्यांकन वाले जातक अपनी मेहनत के बल पर खूब पैसा कमाते हैं. इसके साथ ही यह बचत करने में कामयाब भी होते हैं। इन्हें इस बात की अच्छी से इल्म होती है कि कब कहां और कितना धन खर्च करना सही होता है। किसी के कारण इनका अच्छा खासा बैंक बैलेंस भी होता है।
शनिदेव की विशेष कृपा
इसके अलावा अंक शास्त्र के अनुसार मूल्यांकन 8 वाले जातक बहुत ही अधिक मेहनती भी होते हैं। यह हर एक चीज को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से करते हैं। इसी वजह से हमेशा यह सफल भी होते हैं इसी कारण इस राशि के जातक के ऊपर शनिदेव की विशेष कृपा भी रहती है।
राशिफल: कैसा रहेगा आपका आज का दिन
22 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय विफल हो कार्य गति में बाधा, चिन्ता, व्यर्थ भ्रमण, कार्य अवरोध होगा।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल मिलाप होवें तथा रुके कार्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय का लाभ ले।
कर्क राशि :- भाग्य प्रबल है रुके कार्य बना ले, समस्याओं का समाधान बन जायेगा।
सिंह राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक होगे, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझे, स्त्री वर्ग में हर्ष होगा।
कन्या राशि :- भावनायें संवेदनशील रहे, कुटुम्ब में सुख धन अवश्य प्राप्त होगा।
तुला राशि :- समय अनुकूल नहीं, स्वास्थ्य नरम रहे, किसी धारणा का अनदेखा अवश्य होगा।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक उद्विघ्नता, स्वभाव में असमर्थता अवश्य हो।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता, स्थिति में सुधार व्यवसाय गति उत्तम अवश्य होगी।
मकर राशि :- व्यर्थ धन का व्यय, मानसिक उद्विघ्नता हानिप्रद होगी, ध्यान अवश्य रखे।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सहयोगी, कार्य बनेंगे तथा कार्य गति अनुकूल होगी ध्यान दे।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, बिगड़े कार्य अवश्य ही बन जायेंगे, ध्यान दे।
भगवान शिव के 108 नाम, सब एक से बढ़कर एक, जानें क्या हैं उनके अर्थ
21 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देवों के देव महादेव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सोमवार, शिवरात्रि, महाशिवरात्रि के अलावा सावन के सभी दिन शिव पूजा के लिए उत्तम होते हैं. शिव जी सबसे आसानी से प्रसन्न होने वाले देव हैं, जो सबसे भोले हैं, इसलिए उनको भोलेनाथ कहते हैं. वे पशुओं के भी देवता हैं, इस वजह से वे पशुपति नाथ कहलाए. शिव जी के भक्त उनको कई नामों से पुकारते हैं. जो काल से भी परे हैं, वे महाकाल हैं, जो उज्जैन में निवास करते हैं. शिव अष्टोत्तर शतनामावली के अनुसार, शिव जी के 108 नाम बताए गए हैं. हर नाम का अर्थ विशेष है, जो उनके गुण और स्वरूप की व्याख्या करते हैं. आइए जानते हैं भगवान शिव के 108 नामों के बारे में.
भगवान शिव के 108 नाम और उनके अर्थ
1. शिव – कल्याणकारी, जो सभी का मंगल करते हैं.
2. महेश्वर – महान ईश्वर, सभी के स्वामी.
3. शंभु – सुख और आनंद देने वाले.
4. पिनाकी – जो पिनाक धनुष धारण करते हैं.
5. शशिशेखर – जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है.
6. वामदेव – सुंदर और दयालु स्वरूप वाले.
7. विरूपाक्ष – विचित्र नेत्रों वाले.
8. कपर्दी – जटाजूट धारण करने वाले.
9. नीलकंठ – नीले कंठ वाले.
10. स्थाणु – स्थिर और अटल.
11. भक्तवत्सल – भक्तों के प्रति प्रेम रखने वाले.
12. भव – संसार के सृष्टिकर्ता.
13. सर्व – सर्वव्यापी, सभी कुछ.
14. त्रिलोचन – तीन नेत्रों वाले.
15. शितिकंठ – शीतल कंठ वाले.
16. शिवप्रिय – जो शिव को प्रिय हैं.
17. जटाधर – जटाएं धारण करने वाले.
18. कैलाशवासी – कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले.
19. कपाली – जो कपाल धारण करते हैं.
20. कामारी – कामदेव का नाश करने वाले.
21. अंधकारिपु – अंधकार यानि अज्ञान के शत्रु.
22. गंगाधर – गंगा को जटाओं में धारण करने वाले.
23. ललाटाक्ष – मस्तक पर नेत्र वाले.
24. कालकाल – काल यानि मृत्यु के भी काल.
25. कृपानिधि – करुणा के भंडार.
26. भीम – भयंकर और शक्तिशाली.
27. परशुहस्त – हाथ में परशु धारण करने वाले.
28. मृगपाणि – जिनके हाथ में हिरण है.
29. जटिल – जटाधारी.
30. कैलाशपति – कैलाश के स्वामी.
31. कृत्तिवास – बाघ की खाल पहनने वाले.
32. पुराराति- पुर यानि त्रिपुर के शत्रु.
33. भगवान – सभी ऐश्वर्य के स्वामी.
34. प्रमथाधिप – गणों के स्वामी.
35. मृत्युंजय – मृत्यु को जीतने वाले.
36. सूक्ष्मतनु – सूक्ष्म शरीर वाले.
37. जगद्व्यापी – विश्व में व्याप्त.
38. जगद्गुरु – विश्व के गुरु.
39. व्यास – जो सभी को विस्तार देते हैं.
40. सर्वज्ञ – सर्वज्ञानी, सब कुछ जानने वाले.
41. विनय – विनम्रता के प्रतीक.
42. विश्वनाथ – विश्व के स्वामी.
43. वृषभ – नंदी के स्वामी.
44. वृषध्वज – बैल के चिह्न वाला ध्वज रखने वाले.
45. सुरवन्दित – देवताओं द्वारा पूजित.
46. सिद्धनाथ – सिद्धियों के स्वामी.
47. सिद्धिद – सिद्धियां देने वाले.
48. सर्वद – सभी कुछ देने वाले.
49. शर्व – सभी का संहार करने वाले.
50. श्रीकंठ – सुंदर कंठ वाले.
51. शितकंठ – शीतल कंठ वाले.
52. कपिलमुनि – कपिल मुनि के स्वरूप.
53. आयुर्द – आयु देने वाले.
54. आदिदेव – प्रथम देवता.
55. महादेव – देवों के देव.
56. नन्दीश्वर – नंदी के स्वामी.
57. नागभूषण – सर्पों से सुशोभित.
58. निकुंभ – दुष्टों का नाश करने वाले.
59. सनातन – अनादि और अनंत.
60. अनन्तदृष्टि – अनंत दृष्टि वाले.
61. आनन्द – आनंद देने वाले.
62. धूर्जटि – भारी जटाओं वाले.
63. चन्द्रमौलि – चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाले.
64. नित्य – शाश्वत और अनश्वर.
65. निराधार – बिना किसी आधार के स्वयंभू.
66. निराकार – बिना आकार के.
67. आदिकर्ता – प्रथम सृष्टिकर्ता.
68. नागेन्द्र – सर्पों के स्वामी.
69. अभयंकर – भय का नाश करने वाले.
70. पशुपति – सभी प्राणियों के स्वामी.
71. दक्षाध्वरहर – दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले.
72. हर- पापों का हरण करने वाले.
73. भुजंगभूषण – सर्पों से अलंकृत.
74. भर्ग – भय को नष्ट करने वाले.
75. गिरीश – पर्वतों के स्वामी.
76. गिरिशाय – पर्वत पर निवास करने वाले.
77. जगन्नाथ – विश्व के स्वामी.
78. कुबेरमित्र – कुबेर के मित्र.
79. मृत्युंजय – मृत्यु पर विजय पाने वाले.
80. कृत्तिवास – बाघ की खाल धारण करने वाले.
81. पुराराति – त्रिपुरासुर के शत्रु.
82. नित्यसुन्दर – सदा सुंदर.
83. महायोगी – महान योगी.
84. महेश – महान ईश्वर.
85. चराचरगुरु – चर और अचर के गुरु.
86. ईशान – उत्तर दिशा के स्वामी.
87. सहस्राक्ष – हजार नेत्रों वाले.
88. सहस्रपाद – हजार पैरों वाले.
89. अपवर्गप्रद – मोक्ष देने वाले.
90. अनघ – पापरहित.
91. सदा शिव – सदा कल्याणकारी.
92. अनन्त – अनंत स्वरूप.
93. शान्त – शांत स्वरूप.
94. सर्वज्ञ – सब कुछ जानने वाले.
95. परमात्मा – सर्वोच्च आत्मा.
96. सोमसुन्दर – चंद्रमा के समान सुंदर.
97. सुरेश्वर – देवताओं के स्वामी.
98. महासेन – महान सेना के स्वामी.
99. वेदकर्ता – वेदों के रचयिता.
100. वरद – वरदान देने वाले.
101. विश्वेश्वर – विश्व के ईश्वर.
102. त्र्यम्बक – तीन नेत्रों वाले.
103. विश्वरूप – विश्व के स्वरूप.
104. वीरभद्र – वीरभद्र के स्वामी.
105. विशालाक्ष – विशाल नेत्रों वाले.
106. वृषांक – बैल के चिह्न वाले.
107. वृषवाहन – बैल पर सवारी करने वाले.
108. अहिर्बुध्न्य – सर्पों के आधार वाले.
लड्डू गोपाल को स्नान करवाते समय भूलकर ना करें ये गलतियां
21 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लड्डू गोपाल को भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप माना जाता है और ज्यादातर घरों में आपको लड्डू गोपाल देखने को मिल जाएंगे. लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना शास्त्रीय विधि से की जाती है और इसकी शुरुआत सुबह सुबह स्नान से हो जाती है. लड्डू गोपाल (भगवान श्री कृष्ण) को स्नान करवाने की विधि एक विशेष धार्मिक प्रक्रिया है, जहां ईश्वर और भक्त के बीच अनोखा संयोग देखने को मिलता है. यह विधि केवल एक स्नान से जुड़ी नहीं है, बल्कि भक्त उनकी पूजा अर्चना और बच्चों की तरह स्नान करवाने से ईश्वर के करीब महसूस करते हैं और मानसिक शांति भी मिलती है. आइए जानते हैं कि लड्डू गोपाल को किस तरह स्नान करवाएं, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके…
लड्डू गोपाल को स्नान करवाने की विधि:
1. स्नान की तैयारी
* सबसे पहले, लड्डू गोपाल को बिस्तर से उठाकर उनके साथ बातचीत करें और बच्चों के जैसे कपड़े उतारते हैं, धीरे धीरे. वैसे ही उनके कपड़े उतारें.
* स्नान के लिए एक छोटी सी चौकी या आसन पर लड्डू गोपाल को रखें.
* स्नान के लिए पानी, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर जैसे पदार्थों को अलग-अलग रखें.
* इन सभी सामग्रियों का उपयोग स्नान के दौरान भगवान को शुद्ध करने और उनका पवित्रता देने के लिए किया जाता है.
2. स्नान के समय का चुनाव
लड्डू गोपाल स्नान करवाने का सबसे उपयुक्त समय सुबह का होता है, खासकर ब्राह्ममुहूर्त (जो सूर्योदय से पहले का समय होता है) में. लेकिन आप दिन में भी स्नान करवा सकते हैं. बुधवार और रविवार को विशेष रूप से स्नान कराना लाभकारी होता है.
3. स्नान की विधि
* सबसे पहले, गंगाजल से लड्डू गोपाल का अभिषेक करें. यह भगवान के पवित्रता को बढ़ाने के लिए किया जाता है.
* अब, एक चम्मच दूध लेकर भगवान के ऊपर से धीरे-धीरे डालें. दूध भगवान को शुद्ध करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है.
* इसके बाद, दही से भगवान को स्नान कराएं. दही भगवान की मुरली को शुद्ध करता है और भक्तों को सुख और शांति का आशीर्वाद मिलता है.
* फिर, एक चम्मच घी लेकर भगवान पर डालें. घी, विशेष रूप से, आत्मिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक है.
* अब, एक चम्मच शहद भगवान पर डालें. शहद का अर्थ है जीवन में मिठास और सफलता की प्राप्ति.
* अंत में, शक्कर से भगवान को स्नान कराएं. शक्कर से भगवान की कृपा बढ़ती है और जीवन में सुख और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.
4. स्नान के बाद पवित्र जल छिड़कना
अब, भगवान को स्नान कराकर पवित्र जल से उनका अभिषेक करें. आप गंगाजल या किसी शुभ जल का उपयोग कर सकते हैं. इससे भगवान का स्नान पूर्ण होता है.
5. मालिश
भगवान के शरीर को सूखा देने के बाद, एक सफेद कपड़े से उन्हें पोंछ लें. फिर, लड्डू गोपाल को कपड़े पहनाकर और आभूषणों से सजाकर एक सुंदर आसन पर बिठा लें.
6. धूप, दीप, भोग और पूजा सामग्री
अब भगवान को धूप (धूपबत्ती) और दीप (दीपक) दिखाकर उन्हें अर्पित करें.फिर, भगवान को फूल और लड्डू अर्पित करें. लड्डू या आपके घर में जो भी ताजा हो, उसका भोग लगा सकते हैं क्योंकि ईश्वर केवल भाव का भूखा होता है.
7. स्मरण और प्रार्थना
स्नान के बाद, भगवान से अपने दिल की प्रार्थना करें और उन्हें धन्यवाद अर्पित करें. आप निम्नलिखित मंत्र का जाप कर सकते हैं:
ॐ श्री कृष्णाय नमः
इस मंत्र का जाप करने से भगवान श्री कृष्ण की कृपा मिलती है.
इस दिन करें पितरों की पूजा, मिलेगा वैभव और धन, हर काम में लगेगा मन, जानें पूरी विधि
21 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साल में होने वाले सभी 24 प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित बताए गए हैं. जैसे साल में 12 प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में आते हैं तो वहीं 12 प्रदोष व्रतों का आगमन शुक्ल पक्ष में होता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा आराधना, मंत्रो का जाप, स्तोत्र आदि का पाठ करना बेहद चमत्कारी और लाभकारी बताया गया है. इस दिन भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करने का महत्व बताया गया है. प्रदोष काल तीसरे पहर में सूर्यास्त के समय आता है साथ ही यह समय पितरों के लिए भी खास होता है.
पितृ दोष की शांति के लिए प्रदोष व्रत के दिन क्या उपाय करने चाहिए कि पितरों को समर्पित पितृपक्ष भगवान शिव के अधिपत्य में आते हैं. उस समय विष्णु भगवान क्षीर सागर में आराम करते हैं और पूरे ब्रह्मांड का संचार भगवान शिव करते हैं. पितरों को मोक्ष देने के लिए कृष्ण पक्ष की प्रदोष तिथि का बहुत अधिक महत्व बताया गया है. यदि प्रदोष व्रत शनिवार के दिन हो तो उसका जातकों को कई गुना लाभ होता है. साल 2025 में ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 24 मई शनिवार को होगा. इस दिन अपने पितरों के निमित्त कोई भी धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण, पिंडदान, हवन, यज्ञ या पितरों की पूजा करने पर उसका संपूर्ण से अधिक लाभ मिलता है.
वह आगे बताते हैं कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत शनिवार को होगा और इस दिन प्रदोष काल के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाने, भगवान शिव का गंगाजल, काले तिल, दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक करने, भगवान शिव के एकाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करने और रुद्राष्टक, पशुपत्येष्टक, शिव महिम्न, शिव तांडव आदि स्तोत्र का पाठ करने पर पितृ दोष से शांति मिल जाती है. सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट के बाद वाला समय प्रदोष काल होता है.
स्वर्ग लोक की वो अप्सरा, जो अर्जुन की थी दीवानी, फिर क्यों दिया उन्हें किन्नर बनने का श्राप? कैसे बना वो ढाल!
21 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अगर कोई आपको श्राप दे और वह आपके लिए लाभदायक साबित हो, तो क्या कहेंगे? ये बात सुनने में अजीब लगती है, लेकिन महाभारत की कहानी में एक ऐसा ही रोचक प्रसंग सामने आता है, जिसमें अर्जुन को मिला श्राप उनके लिए वरदान बन गया. ये श्राप उन्हें किसी और ने नहीं, बल्कि स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी ने दिया था. अर्जुन को यह श्राप मिला कि वह कुछ समय के लिए किन्नर बन जाएंगे. लेकिन आगे चलकर यही श्राप अर्जुन के लिए संकट से बचने का रास्ता बन गया. आइए जानते हैं इस घटना से जुड़ी पूरी कहानी.
अर्जुन पहुंचे स्वर्गलोक
अर्जुन की वीरता केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं थी. दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त करने की चाह में उन्होंने स्वर्गलोक की यात्रा की. वहां इंद्रदेव ने उनकी परीक्षा ली और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें कई दिव्यास्त्र प्रदान किए. ये अस्त्र आगे चलकर महाभारत के युद्ध में अर्जुन के बड़े काम आए.
उर्वशी का प्रेम प्रस्ताव
स्वर्गलोक में रहते हुए अर्जुन का तेज और शौर्य देखकर उर्वशी जैसी अप्सरा भी उन पर मोहित हो गई. उन्होंने अर्जुन से प्रेम का प्रस्ताव रखा. लेकिन अर्जुन ने उसे विनम्रता से ठुकरा दिया. अर्जुन ने उर्वशी से कहा कि वह उन्हें माता समान मानते हैं, क्योंकि उर्वशी पांडवों के वंशज पुरुरवा की पत्नी रह चुकी थीं.
अपमानित होकर दिया श्राप
उर्वशी अर्जुन के उत्तर से बेहद आहत हुईं. क्रोध में उन्होंने अर्जुन को श्राप दे दिया कि वे नपुंसक यानी किन्नर बन जाएंगे. अर्जुन इस अप्रत्याशित श्राप से हैरान रह गए. उन्हें समझ नहीं आया कि इसका क्या परिणाम होगा. लेकिन उन्होंने तुरंत इंद्रदेव से इसका समाधान पूछा.
इंद्रदेव ने बताया समाधान
इंद्रदेव ने अर्जुन को सांत्वना दी और कहा कि यह श्राप स्थायी नहीं है. वे जब चाहें, अपनी पूर्व अवस्था में लौट सकते हैं. साथ ही इंद्रदेव ने कहा कि यह श्राप भविष्य में उनके बहुत काम आने वाला है.
जब श्राप बना कवच
महाभारत के अज्ञातवास के समय पांडवों को एक साल तक अपनी पहचान छुपाकर रहना था. यदि उनकी पहचान उजागर हो जाती, तो अज्ञातवास असफल हो जाता. ऐसे में अर्जुन ने उर्वशी के श्राप का लाभ उठाया. वे किन्नर बृहन्नला बनकर राजा विराट के महल में रहने लगे. उन्होंने राजकुमारी उत्तरा को नृत्य और संगीत सिखाया.
दुर्योधन को भी नहीं हुआ शक
अर्जुन के इस भेष को कोई पहचान नहीं सका. दुर्योधन और उसके गुप्तचरों को भी संदेह नहीं हुआ कि यह बृहन्नला वास्तव में अर्जुन हैं. इस तरह पांडवों का अज्ञातवास सफल हुआ और अर्जुन को उर्वशी का श्राप संकट से बचाने वाला कवच बन गया.
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