धर्म एवं ज्योतिष
महाभारत: अर्जुन नहीं बल्कि इस पांडव ने किया द्रौपदी से सच्चा प्यार, नहीं देख पाता था आंखों में आंसू
1 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लोगों को लगता होगा कि द्रौपदी से सबसे ज्यादा प्यार अर्जुन ने किया होगा, हकीकत में ऐसा नहीं है. बल्कि पांडवों में एक भाई ऐसा था, जिसने जीवनभर द्रौपदी के लिए सबकुछ किया. वह कभी उसकी आंखों में ना तो आंसू बर्दाश्त कर पाता था और ना ही उसका दुख. जिंदगीभर उसके दुखसुख में साथ खड़ा रहा. हां, ये बात अलग है कि द्रौपदी ने सबसे ज्यादा प्यार अर्जुन से किया लेकिन अर्जुन से धोखा भी मिला. तो क्या आपको मालूम है कि कौन है वो पांडव भाई, जिसने उसे सबसे ज्यादा चाहा.
द्रौपदी ने शर्त रखी थी कि जिस घर में वह पांचों पांडव भाइयों के साथ रहती है, इसमें कोई पांडव दूसरी स्त्री को लेकर नहीं आएगा. इस शर्त को सबसे पहले जिसने तोड़ा, वो अर्जुन ही थे, जो जब सुभद्रा को शादी करके उसी महल में लाए तो द्रौपदी बहुत नाराज हुई थी. शादी दूसरे पांडव भाइयों ने किया लेकिन उनकी पत्नियां अलग महलों में रहती थीं. हम आपको बताते हैं कि किस पांडव ने उससे ऐसी मोहब्बत की कि कभी उसकी आंखों में आंसू नहीं देख पाया. बाकि पांडवों ने तो केवल पति की ही भूमिका ज्यादा निबाही.
महाभारत में द्रौपदी और पांडवों के संबंधों के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है. जब द्रौपदी स्वयंवर के बाद पांचों पांडवों के साथ घर आई तो उसे लगा था कि वह केवल अर्जुन की पत्नी बनेगी लेकिन कुंती ने ऐसी बात कह दी कि उसे पांचों भाइयों की पत्नी बनना पड़ा. इससे वह शुरू में बहुत दुखी हुई लेकिन फिर इस भूमिका के साथ खुद को ढाल लिया.
पांचों पांडव द्रौपदी को प्रेम और सम्मान देते थे, लेकिन एक पांडव ऐसा भी था, जो वास्तव में उससे इतना सच्चा प्यार करता था कि उसके लिए सबकुछ करने को तैयार रहता था. ये ऐसा पांडव था, जिसने हमेशा द्रौपदी की हर इच्छा पूरी की. क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये पांडव कौन था. वैसे हम ये बता देते हैं कि द्रौपदी ने हमेशा पांचों भाइयों में सबसे ज्यादा अगर किसी को चाहा तो वो अर्जुन थे लेकिन अर्जुन से बदले में वैसा प्यार नहीं मिला.
वो पांडव द्रौपदी के लिए सबकुछ करने को तैयार रहता था
तो वो कौन सा पांडव था, जो वाकई उसके लिए आसमान से तारे तोड़ लाने के लिए तैयार रहता था. समय आने पर उसने एक बार नहीं बल्कि कई बार द्रौपदी के लिए ऐसे ऐसे काम किए, जो किसी पांडव ने नहीं किए.
हर पग पर साथ खड़ा होता था, संबल देता था
ये भीम थे, जिन्हें द्रौपदी से सबसे अधिक प्रेम करने वाला माना जाता है. जब भी द्रौपदी अपमानित या दुखी होती थीं, भीम हमेशा उनकी मदद के लिए खड़े रहते थे. जुए के बाद द्रौपदी के चीरहरण की घटना के दौरान भीम ने दुर्योधन और दुःशासन को खुलेआम उनकी मृत्यु की शपथ ली, तब युधिष्ठिर ने तो उसे दाव पर ही लगा दिया था तो दूसरे भाई चुपचाप उसका ये अपमान देखते रह गए.
कठिन से कठिन काम किए
वनवास के दौरान जब कीचक ने द्रौपदी का अपमान किया, तो भीम ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे मार डाला. भीम ने द्रौपदी की हर इच्छा पूरी करने का प्रयास किया.वनवास के दौरान द्रौपदी के लिए भीम ने कुबेर के जंगल से सौगंधिका फूल लाने का कठिन काम किया. इन दुर्लभ फूलों को पाने के लिए भीम ने कुबेर के वन (गंधमादन पर्वत) तक का कठिन रास्ता तय किया. इस यात्रा में उन्होंने यक्षों और राक्षसों का वध किया और फूल लाकर द्रौपदी की इच्छा पूरी की.
द्रौपदी के लिए प्रतिज्ञा ली और पूरा किया
द्रौपदी के चीरहरण का बदला लेने के बाद भीम ने महाभारत के युद्ध में दुःशासन को मारकर उसके रक्त से अपनी प्रतिज्ञा पूरी की. वनवास के दौरान वह लगातार द्रौपदी को ये आश्वासन देते थे कि सभी कौरवों को उनके कृत्यों के लिए दंडित जरूर करेंगे. ऐसा उन्होंने किया भी. युद्ध के दौरान, भीम ने दुर्योधन सहित कई कौरवों को मारा. द्रौपदी के अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने दुर्योधन की जंघा तोड़ी, जैसा उन्होंने चीरहरण के समय प्रतिज्ञा की थी.
भीम ने द्रौपदी को वनवास में बार-बार सांत्वना दी. उसकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया. उनका प्रेम और समर्पण निःस्वार्थ और गहरा था, जो उन्हें द्रौपदी के सबसे करीबी और विश्वासपात्र पांडव के रूप में पेश करता है. भीम का प्रेम न केवल उनके कार्यों में बल्कि उनके शब्दों और भावनाओं में भी प्रकट होता है. द्रौपदी खुद भीम के साथ खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित महसूस करती थी.
भीम ने द्रौपदी को सबसे अधिक समर्पित और निःस्वार्थ प्रेम किया. उनके प्रेम में द्रौपदी की हर खुशी और दुख का ख्याल रखना था.उनके काम भी साबित करते हैं कि उन्होंने द्रौपदी के सम्मान और सुख के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी.
अर्जुन ने कई शादियां की और कई बार प्यार
जहां अर्जुन के साथ द्रौपदी के रिश्ते की सवाल है तो निश्चित तौर पर द्रौपदी पांचों पांडवों में सबसे ज्यादा प्यार और लगाव अर्जुन से रखती थी. हालांकि अर्जुन वैसा कभी नहीं किया, जो कुछ करने के लिए भीम हमेशा तत्पर रहते थे. इसके उलट अर्जुन ने कई बार दूसरी स्त्रियों से प्यार किया और शादियां भी कीं. पांडवों में सबसे ज्यादा पत्नियां उन्हीं की थीं. अर्जुन के इस स्वाभाव से द्रौपदी ने कई बार अपना गुस्सा उनके प्रति जाहिर किया.
वनवास के दौरान जब अर्जुन ने दूसरी शादियां कीं (जैसे सुभद्रा से), तो द्रौपदी थोड़ी असुरक्षित महसूस करती थीं. अर्जुन का प्रेम द्रौपदी के प्रति अधिक संवेदनशील और नियंत्रित था. उन्होंने द्रौपदी के प्रति आदर तो बनाए रखा, लेकिन उनके जीवन में अन्य प्राथमिकताएं (जैसे युद्ध और धर्म) भी महत्वपूर्ण थीं.
युधिष्ठिर भावनात्मक दूरी रखते थे
युधिष्ठिर का द्रौपदी के प्रति प्रेम कर्तव्य और धर्म पर आधारित था. वह उससे सीमित प्यार करते थे बल्कि उनके प्यार पर इसलिए अक्सर सवाल उठा दिया जाता है क्योंकि ये वही थे, जिन्होंने उसे जुए में दाव पर लगा दिया था. युधिष्ठिर ने द्रौपदी को हमेशा सम्मान दिया, लेकिन उनका प्रेम अधिक औपचारिक और नियंत्रित था. वह द्रौपदी के प्रति एक भावनात्मक दूरी रखते थे. युधिष्ठिर ने द्रौपदी को भावनात्मक सहारा देने में भीम या अर्जुन की तरह सक्रिय भूमिका नहीं निभाई.
नकुल और सहदेव ने द्रौपदी को सम्मान और स्नेह दिया, लेकिन उनका प्रेम अधिक भाईचारे या मित्रता जैसा प्रतीत होता है. वे द्रौपदी की इच्छाओं का पालन करते थे. सहायता के लिए तैयार रहते थे. लेकिन उनका प्रेम वैसा कतई नहीं था, जैसा भीम का था. वहीं द्रौपदी का उनके प्रति प्रेम स्नेह मातृभाव जैसा ज्यादा लगता है.
तब द्रौपदी युधिष्ठिर और अर्जुन की ओर से टूट गई थी
द्रौपदी तब भी युधिष्ठिर और अर्जुन की ओर से टूट गई थी जब विराट प्रदेश में अज्ञातवास में रहते हुए कीचक ने उस पर गलत निगाह डालकर उसको परेशान करना शुरू किया. तब जब उसने युधिष्ठिर से शिकायत की तो उन्होंने इसे बर्दाश्त करने की सलाह दी थी, अन्यथा लोगों को पता चल सकता था कि पांडव अज्ञातवास में कहां रह रहे हैं. अर्जुन ने भी तब युधिष्ठिर की बातों से सहमति जताई थी. तब भीम ही ऐसे पांडव थे, जो द्रौपदी के काम आए. उन्होंने रात में धोखे से कीचक को एकांत जगह बुलाकर उसकी हत्या कर दी. द्रौपदी को भी मालूम था अगर वह कभी दुखी होगी या उसको कभी कोई जरूरत पडे़गी तो केवल भीम ही काम आएंगे.
ऐसे पुरुष का कोई अपमान नहीं कर सकता, जिसमें हों ये 4 गुण, जान लीजिए महात्मा विदुर की ये खास बातें
1 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महात्मा विदुर महाभारत के उन महान पात्रों में से एक थे, जिन्होंने धर्म, न्याय और सच्चाई की मिसाल कायम की. महात्मा विदुर एक बुद्धिमान, शांत और निर्भीक व्यक्ति थे. उन्होंने कभी भी सत्ता या लालच के सामने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. उनकी नीतियां आज भी लोगों को जीवन जीने की सही दिशा देती हैं. विदुर नीति में उन्होंने कई ऐसी बातें बताई हैं, जो आज के समय में भी उतनी ही कारगर हैं. उन्हीं में से एक नीति के अनुसार, ऐसा पुरुष जिसमें चार खास गुण होते हैं, उसका कोई भी व्यक्ति अपमान नहीं कर सकता. ये गुण व्यक्ति को समाज में सम्मान, पहचान और स्थिरता प्रदान करते हैं. आइए जानें वे चार महान गुण कौन से हैं.
1. संयम
महात्मा विदुर के अनुसार, संयम ही असली ताकत है. जो व्यक्ति अपने क्रोध, इच्छाओं और व्यवहार पर काबू रखता है, वही सच्चे अर्थों में मजबूत होता है. संयमी व्यक्ति कभी भी गलत निर्णय नहीं लेता और न ही किसी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाता है. वह सोच-समझकर बात करता है और हर परिस्थिति में शांति बनाए रखता है. संयम हमें गहरे संकट से भी बचा सकता है.
2. ज्ञान
ज्ञान केवल किताबों में नहीं होता, बल्कि अनुभव और व्यवहार में भी होता है. महात्मा विदुर के अनुसार, जिस पुरुष के पास सच्चा और व्यवहारिक ज्ञान होता है, उसे समाज हमेशा आदर देता है. ज्ञान इंसान को विनम्र बनाता है और उसे सही निर्णय लेने की क्षमता देता है. ज्ञानी व्यक्ति से कोई बहस नहीं कर सकता क्योंकि वह हमेशा तर्क के साथ और शांति से बोलता है.
3. धैर्य
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में धैर्य रखना एक बड़ी कला है. महात्मा विदुर के अनुसार, जो इंसान धैर्यवान होता है, वह हर परिस्थिति में अपने आप को संभाल सकता है. कठिन समय में भी वह घबराता नहीं, बल्कि स्थिरता से आगे बढ़ता है. धैर्य से ही बड़ा काम होता है और समाज में एक मजबूत छवि बनती है. धैर्यविहीन व्यक्ति अक्सर खुद को ही नुकसान पहुंचाता है.2. ज्ञान
ज्ञान केवल किताबों में नहीं होता, बल्कि अनुभव और व्यवहार में भी होता है. महात्मा विदुर के अनुसार, जिस पुरुष के पास सच्चा और व्यवहारिक ज्ञान होता है, उसे समाज हमेशा आदर देता है. ज्ञान इंसान को विनम्र बनाता है और उसे सही निर्णय लेने की क्षमता देता है. ज्ञानी व्यक्ति से कोई बहस नहीं कर सकता क्योंकि वह हमेशा तर्क के साथ और शांति से बोलता है.
3. धैर्य
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में धैर्य रखना एक बड़ी कला है. महात्मा विदुर के अनुसार, जो इंसान धैर्यवान होता है, वह हर परिस्थिति में अपने आप को संभाल सकता है. कठिन समय में भी वह घबराता नहीं, बल्कि स्थिरता से आगे बढ़ता है. धैर्य से ही बड़ा काम होता है और समाज में एक मजबूत छवि बनती है. धैर्यविहीन व्यक्ति अक्सर खुद को ही नुकसान पहुंचाता है.
4. चरित्र
किसी भी व्यक्ति का असली गहना उसका चरित्र होता है. महात्मा विदुर का मानना था कि अच्छा चरित्र इंसान को हर तरह के अपमान से बचाता है. अगर किसी का चरित्र साफ है, तो दुनिया भी उसे आंख उठाकर नहीं देखती. उसका आदर सब करते हैं, चाहे वो अमीर हो या गरीब. एक अच्छा चरित्र समाज में स्थायी सम्मान दिलाता है.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
1 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कार्य लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष तथा रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
वृष राशि :- कार्य योजना पूर्ण होगा, शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो, सोचे कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मिथुन राशि :- कार्य व्यवसाय में थकावट, बैचेनी, कुछ असफलता के साधन अवश्य ही बनेंगे।
कर्क राशि :- दैनिक व्यवसाय गति मंद रहे, असमर्थता का वातावरण अवश्य बना ही रहेगा।
fिसंह राशि :- आलोचना से बचिए, कार्यकुशलता से पूर्ण संतुष्ट तथा संतोष बना ही रहेगा।
कन्या राशि :- भोग ऐश्वर्य में समय बीतें, शारीरिक थकावट बेचैनी कार्य में बढ़े ध्यान दे।
तुला राशि :- मित्र वर्ग विशेष फलप्रद रहे, आशानुकूल सफलता से संतोष होगा।
वृश्चिक राशि :- मित्र वर्ग विशेष फलप्रद रहे, कार्य में सफलता प्राप्त होगी, रुके कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- तनाव पूर्ण वार्तालाप चलती रहेगी तथा सुखवर्धक योग अवश्य होगा।
मकर राशि :- कार्य वृत्ति में सुधार, सामाजिक कार्य में मान प्रतिष्ठा अवश्य ही बन जाएगी।
कुंभ राशि :- कार्य व्यवसाय गति मंद, चोट आदि का भय रहेगा तथा मानसिक तनाव बनेगा।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य की योजना अवश्य ही बनेगी।
मेष राशि :- कार्य लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष तथा रुके कार्य अवश्य ही बनेंगे।
वृष राशि :- कार्य योजना पूर्ण होगा, शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो, सोचे कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मिथुन राशि :- कार्य व्यवसाय में थकावट, बैचेनी, कुछ असफलता के साधन अवश्य ही बनेंगे।
कर्क राशि :- दैनिक व्यवसाय गति मंद रहे, असमर्थता का वातावरण अवश्य बना ही रहेगा।
fिसंह राशि :- आलोचना से बचिए, कार्यकुशलता से पूर्ण संतुष्ट तथा संतोष बना ही रहेगा।
कन्या राशि :- भोग ऐश्वर्य में समय बीतें, शारीरिक थकावट बेचैनी कार्य में बढ़े ध्यान दे।
तुला राशि :- मित्र वर्ग विशेष फलप्रद रहे, आशानुकूल सफलता से संतोष होगा।
वृश्चिक राशि :- मित्र वर्ग विशेष फलप्रद रहे, कार्य में सफलता प्राप्त होगी, रुके कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- तनाव पूर्ण वार्तालाप चलती रहेगी तथा सुखवर्धक योग अवश्य होगा।
मकर राशि :- कार्य वृत्ति में सुधार, सामाजिक कार्य में मान प्रतिष्ठा अवश्य ही बन जाएगी।
कुंभ राशि :- कार्य व्यवसाय गति मंद, चोट आदि का भय रहेगा तथा मानसिक तनाव बनेगा।
मीन राशि :- आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य की योजना अवश्य ही बनेगी।
महाभारत: स्वर्ग में दुर्योधन को देखते ही क्यों भड़क उठे थे युधिष्ठिर, फिर क्या हुआ, क्यों बताए गए 21 तरह के नरक
31 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जब युधिष्ठिर सशरीर स्वर्ग पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां हर तरह का वैभव, आनंद और सुख-सुविधाएं हैं. अप्सराएं हैं. सुख की बयार है लेकिन उन्होंने जब दुर्योधन को भी वहां सुख भोगते देखा, तो वह क्षुब्ध हो गए. वह भड़क गए. तब उन्होंने क्या कहा. क्यों भड़कते हुए स्वर्ग में रहने से ही इनकार कर दिया.
युधिष्ठिर तो यही सोचकर स्वर्ग में पहुंचे थे कि वहां वो अपने भाइयों और द्रौपदी को दिखेंगे. इसके बजाए उन्होंने वहां दुर्योधन और कौरवों को देखा. उससे स्वर्ग आने का उनका सारा उत्साह ही चला गया. गुस्सा आने लगा.
इसी वजह से वह दुर्योधन के सामने ही भड़क उठे. उन्होंने क्रोध में इंद्र से कहा, जिसने अधर्म किया, भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया, अपने स्वार्थ के लिए अपने बड़ों और गुरुजनों तक का आदर नहीं किया, जिसने भीषण युद्ध कराकर हजारों निर्दोषों का संहार करवाया, वह कैसे स्वर्ग में जगह कैसे मिल सकती है.
युधिष्ठिर ने इसी बात पर क्रोधित होकर कहा था, “मैं ऐसे पापी के साथ इस स्वर्ग में नहीं रह सकता. अगर दुर्योधन स्वर्ग में है, तो मुझे इस स्वर्ग की जरूरत नहीं.” उन्हें लगा कि यदि धर्म-अधर्म का यह न्याय है, तो फिर इस स्वर्ग में रहने का कोई मूल्य नहीं. दरअसल, युधिष्ठिर धर्मराज कहलाते थे. उनका जीवनभर का विश्वास यही रहा कि धर्म ही सबसे ऊपर है. उन्हें अपने जीवन की समस्त पीड़ाओं और अपनों की मृत्यु का कारण दुर्योधन के अन्याय में दिखता था.
दुर्योधन आदत के उलट शांत रहा
हालांकि जब वह दुर्योधन के सामने ही उस भड़क रहे थे तो उन्होंने उसको शांत भी देखा. वह हमेशा की तरह पांडवों से मुकाबला करता हुआ और उनके खिलाफ कुछ बोलता भी नजर नहीं आया. बल्कि युधिष्ठिर की इन बातों को सुनकर भी उसने अनसुना कर दिया.
युधिष्ठिर ने जब दुर्योधन को स्वर्ग में सुख भोगते हुए देखा तो युधिष्ठिर के लिए स्वर्ग का आकर्षण ही खत्म हो गया. उन्होंने इंद्र से कहा, “अगर दुर्योधन स्वर्ग में है, तो मैं नरक जाना पसंद करूंगा. कम से कम वहां वे लोग होंगे जिन्होंने धर्म की रक्षा की होगी. अधर्म के विरोध में अपने प्राण गंवाए होंगे.”
तब इन्द्र और यमराज ने उन्हें समझाया कि दुर्योधन ने अपने जीवन में क्षत्रिय धर्म के अनुसार युद्ध में वीरगति पाई थी. उसने वीरता, पराक्रम और शासन के कर्तव्यों का पालन भी किया, इसलिए उसे उसके पुण्य कर्मों का फल स्वर्ग में मिल रहा है. इसे तरीके से जानने के बाद युधिष्ठिर का मन शांत हो पाया.
पांडव क्यों नरक में
अब आइए जानते हैं कि जब युधिष्ठिर स्वर्ग पहुंचे तो पांडव और द्रौपदी उन्हें वहां क्यों नहीं मिले. जब पांडव और द्रौपदी महाप्रस्थान के लिए हिमालय की ओर गए, तो एक-एक कर द्रौपदी और पांडव मार्ग में गिरते गए. केवल युधिष्ठिर अपने शरीर सहित स्वर्ग जा पाए. दरअसल भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव के साथ द्रौपदी को पहले नरक ले जाया गया. हालांकि कुछ देर के लिए सही.
तब युधिष्ठिर को नरक में ले जाया गया
युधिष्ठिर को जब स्वर्ग के बाद नरक में ले जाया गया, तो उन्होंने वहां अपने भाइयों (भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव) और द्रौपदी को कष्ट भोगते देखा. ये देखने के बाद उन्हें फिर गुस्सा आ गया. क्योंकि उनके भाई और पत्नी धर्मनिष्ठ और सत्यनिष्ठ थे, फिर भी उन्हें नरक में कष्ट सहना पड़ रहा था. युधिष्ठिर ने इसे भी अन्याय माना. इस स्थिति पर गुस्सा जताया.
हालांकि युधिष्ठिर को बात में पता चला कि वास्तव में ऐसा था नहीं, ये केवल माया थी, जो उनकी परीक्षा के लिए रची गई. उनके भाई और पत्नी कुछ देर के लिए जरूर नरक में गए थे लेकिन अब वो वास्तव में स्वर्ग में ही हैं.
महाभारत में स्वर्ग और नरक के बारे में क्या कहा गया
महाभारत में स्वर्ग और नरक के बारे में विस्तार से लिखा गया है. खासकर स्वर्गारोहण पर्व और आनुशासनिक पर्व में. महाभारत के वनपर्व के अध्याय 42 में स्वर्ग को सुखों का स्थान लिखा गया है. जहां कामधेनु, कल्पवृक्ष, अप्सराएं और दिव्य भोग हैं. तो महाभारत के आनुशासनिक पर्व में में कहा गया है कि हिंसा, झूठ, चोरी, ब्रह्महत्या, गुरुद्रोह आदि पाप करने वालों को यमलोक में कष्ट भोगने पड़ते हैं. महाभारत में 21 प्रकार के नरक बताए गए हैं.
महाभारत में 21 प्रकार के नरक का उल्लेख, विशेष रूप से गरुड़ पुराण और विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों के संदर्भ में, कर्मों और पापों के परिणामों को समझाने के लिए किया गया है. ये नरक अलग तरह के पापों के लिए अलग-अलग दंडों को दिखाते हैं. हर अलग तरह के पाप के लिए एक विशिष्ट नरक का वर्णन किया गया है, जो उस पाप की गंभीरता और नेचर दिखाता है. यमराज, जो मृत्यु और न्याय के देवता हैं, उनके दूत लोगों उनके कामों के आधार पर अलग नरकों में ले जाते हैं.
कब से शुरू हो रहा सावन? इस बार कितने होंगे सोमवार
31 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धार्मिक नगरी उज्जैन के कण-कण में भगवान शिव का वास है. रोजाना यहां सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और राजा के रूप में पूजे जानें वाले भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं. बाबा के दरबार में वैसे तो हर दिन पूजा पाठ के लिए भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन सावन माह में पड़ने वाले सोमवार के दिन बाबा महाकाल के दर्शन पूजन का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं कि इस बार सावन के महीने की शुरुआत कब हो रही है.
कि वैदिक हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस बार सावन महीने की शुरुआत 11 जुलाई से होगी. वहीं, इस माह का समापन 09 अगस्त को होगा.
सावन में कितने पड़ेंगे सोमवार
पहला सोमवार- 14 जुलाई
दूसरा सोमवार- 21 जुलाई
तीसरा सोमवार- 28 जुलाई
चौथा सोमवार- 4 अगस्त
जानिए कब-कब देंगे उज्जैन के राजा दर्शन
– पहली सवारी : 14 जुलाई
– दूसरी सवारी : 21 जुलाई
– तीसरी सवारी : 28 जुलाई
– चौथी सवारी : 4 अगस्त
– पांचवी सवारी : 11 अगस्त
– छठी या शाही सवारी : 18 अगस्त
सावन सोमवार का विशेष महत्व
अवंतिका नगरी के राजा बाबा महाकाल का सावन में सोमवार का विशेष महत्व है. इस दिन सावन सोमवार को बाबा महाकाले विशेष रूप के दर्शन तो होते ही हैं. साथ में सावन के हर सोमवार को महाकाल की सवारी भी निकाली जाती है, जिसमें बाबा महाकाल को विभिन्न वाहनों पर सजाकर नगर भ्रमण पर ले जाया जाता है. बाबा महाकाल की शाही सवारी दिव्य और अलौकिक होती है.
एक झलक पाने आतुर रहते भक्त
भगवान महाकाल जैसे ही राजसी ठाठ बाट से निकलते हैं. वैसे ही प्रभु के आगमन मे सैकड़ों लोग तरह-तरह के स्वागत करके अपने बाबा का स्वागत करते हैं. उज्जैन के राजा को मंदिर के बहार आते ही उज्जैन पुलिस दुवारा गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है. इस सुनहरे पल पर भक्त नाचते -जुमते नज़र आते हैं.
क्या घर की दिशा बिगाड़ रही है आपकी रीढ़? जानें इस खास दिशा के असरदार उपाय, दिशा सुधारें और पाएं राहत
31 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्सर जन्मकुंडली में सब कुछ अच्छा होते हुए भी शादी के कई सालों बाद भी घर में संतान का योग नहीं बनता है. ज्योतिष के अलावा भी कुछ ऐसे संयोग हैं, जिनकी वजह से अक्सर घरों में बच्चे नहीं होते या होने से पहले या होकर खत्म हो जाते हैं. इसके लिए घर का वास्तु भी काफी हद तक ज़िम्मेदार होता है. आइए जानते हैं कौन से ऐसे वास्तु कारण हैं, जो ये समस्या उत्पन्न करते हैं, साथ ही जानेंगे इसके आसान उपाय .हड्डी की रीढ़ से जुड़ी समस्या आजकल बहुत आम हो गई है. यह समस्या कई बार हमारे घर के माहौल और उसकी दिशा-निर्देशों से भी जुड़ी हो सकती है, अगर आप या आपके परिवार के किसी सदस्य को रीढ़ की हड्डी से परेशानी हो रही है, तो जरूरी है कि आप अपने घर की दिशा और उसमें रखे सामान पर ध्यान दें. विशेषकर घर का दक्षिण-पश्चिम भाग, जिसका हमारे स्वास्थ्य और संतुलन पर खास प्रभाव होता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
दक्षिण-पश्चिम दिशा और उसका महत्व
दक्षिण-पश्चिम दिशा को हमारे घर में स्थिरता और मजबूती का प्रतीक माना जाता है. यदि इस क्षेत्र में कोई असंतुलन हो जाए, तो इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य, विशेष रूप से हड्डी और रीढ़ की हड्डी पर पड़ सकता है. ऐसे असंतुलन कई कारणों से हो सकते हैं, जैसे इस दिशा में अत्यधिक भारी सामान रखना, दीवारों में क्षतिग्रस्त स्थान होना या वहां हरे रंग के पौधे रखना.
घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से की जांच कैसे करें?
अगर रीढ़ की हड्डी में समस्या हो रही है, तो सबसे पहले अपने घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से की जांच करें. देखें कि वहां कोई दीवार क्षतिग्रस्त तो नहीं है, या कहीं दीवार पर कीलें जड़ी हुई तो नहीं हैं, यदि दीवार में कोई कील लगी हो, तो उसे निकालकर उस जगह को सफेद सीमेंट से ठीक कर लें. इससे दीवार मजबूत होगी और वातावरण में स्थिरता आएगी.
भारी सामान का प्रभाव
घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में भारी वस्तुएं रखने से भी परेशानी हो सकती है, यदि आपने वहां भारी अलमारी, तिजोरी या अन्य भारी सामान रखा है, तो संभव है कि यह आपके शरीर, खासकर रीढ़ की हड्डी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा हो. ऐसे सामान को वहां से हटाकर किसी और सुरक्षित स्थान पर रख दें.
पौधों और रंगों का ध्यान रखें
कुछ लोग घर की सजावट के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में हरे रंग के पौधे या फूल लगाते हैं, लेकिन यह सही नहीं है. हरे रंग के पौधे इस दिशा में समस्या बढ़ा सकते हैं. इसलिए अगर वहां हरे पौधे हैं, तो उन्हें हटा दें. इसके बजाय, आप इस दिशा में पीले रंग का बल्ब लगा सकते हैं. पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और आपको आराम का अनुभव कराता है.
संक्षेप में उपाय
1. दीवारों की मरम्मत – यदि दीवार में कील लगी हो या कोई क्षति हो तो उसे ठीक करें.
2. भारी सामान हटाएं – दक्षिण-पश्चिम हिस्से से भारी सामान हटा दें.
3. हरे पौधे निकालें – इस दिशा में हरे रंग के पौधे न रखें.
4. पीले रंग का बल्ब लगाएं – पीला बल्ब ऊर्जा को संतुलित करता है.
ध्यान रहे कि गंभीर समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह लेना भी जरूरी है. घर की दिशा और सजावट केवल सहायक उपाय हैं, वे उपचार का विकल्प नहीं हैं. इसलिए संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह लेना सबसे जरूरी है.
संतान सुख में आ रही रुकावट? घर की इस खास दिशा को हल्का और शांत बनाएं, जानिए घर की इसका असली प्रभाव
31 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर इंसान अपने घर में सुकून, प्यार और तरक्की चाहता है. हम सभी अपने परिवार के साथ मिलकर ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं जहां हर दिन नए उजाले के साथ शुरुआत हो और हर रात सुकून के साथ खत्म हो. मगर कई बार ऐसा होता है कि बिना किसी कारण के घर में तनाव बना रहता है, काम बनते-बनते रुक जाते हैं या फिर लंबे समय से संतान सुख नहीं मिल पा रहा होता है. ऐसे ही हालात में कई बार हम बाहरी कारणों को जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन असल वजह हमारे घर के अंदर ही छिपी होती है दिशाओं का संतुलन. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
घर की हर दिशा का अपना एक अलग असर होता है. इनमें से एक बहुत खास दिशा होती है ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व और पूर्व के बीच की दिशा. इसे अंग्रेज़ी में East-North-East कहा जाता है. इस दिशा को अक्सर लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यही वो कोना होता है जहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है.
जब ये दिशा साफ, हल्की और शांत होती है, तो घर में सुख-शांति बनी रहती है. खासतौर से जो लोग मां-बाप बनने की कोशिश में हैं या संतान सुख चाहते हैं, उनके लिए ये दिशा बहुत अहम मानी जाती है.
स्टोर रूम या भारी सामान
लेकिन जब इस जगह पर टॉयलेट, स्टोर रूम या भारी सामान रखा होता है, या फिर इस दिशा में लाल, पीला या ग्रे रंग का ज्यादा इस्तेमाल हो जाता है, तो इसका असर सीधा घर की खुशहाली पर पड़ता है. कई बार महिलाओं को बार-बार गर्भधारण में दिक्कत आती है, या संतान से जुड़ी समस्याएं बनी रहती हैं, जिसकी असली वजह यही ऊर्जा अवरोध हो सकता है.
दिशा को हल्का और साफ रखें
इसलिए सबसे पहले इस दिशा को हल्का और साफ रखें. यहां सफेद, हल्के नीले या क्रीम रंग का इस्तेमाल फायदेमंद होता है. अगर यहां किचन या बाथरूम बना हुआ है और उसे हटाना संभव नहीं है, तो वास्तु उपायों से संतुलन बनाने की कोशिश करें.
पुराना तनाव खत्म
आप देखेंगे कि जब ये दिशा सही हो जाती है, तो घर में बिना किसी बड़े बदलाव के ही माहौल बदलने लगता है. घर में बच्चों की हंसी गूंजने लगती है, पुराना तनाव खत्म होता है और एक नई ऊर्जा महसूस होती है.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
31 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- अपने आप पर नियंत्रण रखें, चिन्ता, विभ्रम तथा अशांति से बचकर रुके कार्य बनेंगे।
वृष राशि :- कोई शुभ समाचार हर्षप्रद रखे, थकावट बेचैनी तथा धन का व्यय अवश्य होगा।
मिथुन राशि :- शुभ समाचार से हर्ष तो होगा लेकिन भावना उत्तेजित होगी, मानसिक कष्ट होगा।
कर्क राशि :- दैनिक कार्यगति में सुधार हो एवं कार्ययोजना फलीभूत होगी, मित्र मिलन होगा।
सिंह राशि :- असमंजस क्लेशप्रद रखे, झूठे आश्वासनों पर विश्वास न करें, समय का ध्यान रखें।
कन्या राशि :- दैनिक व्यावसाय गति अनुकूल, स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, लाभ होगा, ध्यान रखें।
तुला राशि :- समय पर सोचे हुये कार्य पूर्ण होंगे, बौद्धिक विकास की क्षमता में वृद्धि अवश्य होगी।
वृश्चिक राशि :- अनायास तनाव-क्लेश, हानि, उपद्रव, विरोधी से विवादास्पद स्थिति बनेगी।
धनु राशि :- समय की अनुकूलता से लाभांवित होंगे, रुके समाचारों के मिलने से खुशी होगी।
मकर राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, स्त्री से सुखवर्धन, कुटुम्ब में सुख के योग बनेंगे, सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
कुंभ राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष, परेशानी व चिन्ताजनक स्थिति बनेगी, ध्यान रखें।
मीन राशि :- स्थिति में सुधार होगा, व्यावसाय अनुकूल, अधिकारी सहयोग करेंगे।
दिशाएं ही तय करती हैं जीवन का संतुलन, जानिए कैसे पड़ता है इसका गहरा असर
30 May, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर किसी के जीवन में दिशा का विशेष महत्व होता है. जिस तरह रास्ता सही हो तो मंजिल तक पहुंचने में आसानी होती है, उसी तरह जीवन में सही दिशा का होना भी जरूरी है. दिशा केवल भौतिक स्थान की बात नहीं होती, बल्कि यह हमारे मन, शरीर और ऊर्जा के संतुलन से जुड़ी होती है. हमें अपनी ताकत और कमजोरी को समझना चाहिए ताकि हम अपने जीवन में बेहतर निर्णय ले सकें. उदाहरण के तौर पर, दक्षिण-पूर्व दिशा को शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. यह दिशा हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन यदि यह दिशा अधिक सक्रिय या कमजोर हो जाए, तो यह हमारी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकती है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
दिशा अधिक शक्तिशाली
जब कोई दिशा अधिक शक्तिशाली होती है, तो व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि वह अत्यधिक सक्षम है, लेकिन यह भ्रम ही होता है. अत्यधिक ताकत कभी-कभी हमें अति आत्मविश्वास में डाल देती है, जिससे हम अपने निर्णयों में गलतियां कर सकते हैं. वहीं, यदि कोई दिशा कमजोर होती है, तो व्यक्ति जल्दी हार मान लेता है और डर या चिंता से घिर जाता है. इस प्रकार, दिशा की सही स्थिति और संतुलन आवश्यक होता है ताकि हम जीवन में स्थिरता और सफलता प्राप्त कर सकें.
दक्षिण-पूर्व दिशा
इसके अलावा, दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित ग्रह वीनस और मंगल का विशेष महत्व होता है, ये ग्रह ऊर्जा और शक्ति के स्रोत माने जाते हैं. जब ये ग्रह संतुलित होते हैं, तो व्यक्ति की सोच और क्रियाएँ सकारात्मक रूप से प्रभावित होती हैं. इसके कारण व्यक्ति में साहस, धैर्य और ऊर्जा का संचार होता है, यदि ये ग्रह प्रभावित हों, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, गुस्सा और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है
जीवन में योग, व्यायाम और सही खान-पान भी इस दिशा के प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. योग और व्यायाम से शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है. वहीं, उचित आहार से भी हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो हमें निरंतर सक्रिय और स्वस्थ बनाए रखता है.
रसोई की दिशा
रसोई की दिशा भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह वह स्थान होता है जहां हम अपने परिवार के लिए भोजन तैयार करते हैं. रसोई की दिशा सही होने से परिवार में सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है, यदि रसोई की दिशा सही न हो, तो परिवार में विवाद और अस्थिरता की स्थिति बन सकती है. इसलिए घर के निर्माण में दिशाओं का ध्यान रखना जरूरी होता है.
सभी दिशाएं
सभी दिशाएं अपने आप में महत्वपूर्ण हैं, परंतु उनका संतुलन ही जीवन को सफल बनाता है. जब किसी एक दिशा की अधिकता या कमी होती है, तो जीवन में असंतुलन पैदा हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली, आहार, और मानसिक स्थिति पर ध्यान दें ताकि सभी दिशाओं का प्रभाव सही रूप से बना रहे.
आधुनिक जीवन
आधुनिक जीवन में हम अक्सर तनाव और उलझनों से घिरे रहते हैं. ऐसे में दिशाओं के सिद्धांत हमें जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. इन्हें अपनाकर हम न केवल मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि शरीर को भी स्वस्थ रख सकते हैं.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
30 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- सफलता के साधन जुटायें, समय की अनुकूलता से लाभ, आवश्यक कार्य बनेंगे।
वृष राशि :- विशेष कार्य स्थिगित रखें, अचानक घटना का शिकार होने से बचें, ध्यान रखें।
मिथुन राशि :- अधिकारियों से लाभ स्थगित रखें, अन्यथा विवाद, क्लेश संभव बन जायेगा।
कर्क राशि :- विरोधी प्रबल होंगे तथा परेशान करने की स्थिति पैदा करेंगे, जल्दबाजी से हानि होगी।
सिंह राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल हो, धन का व्यय होगा, सुख वृद्धि, कार्य वृद्धि अवश्य होगी।
कन्या राशि :- संतान से सुख तथा सम्पन्नता के योग बनें, मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
तुला राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष, बिगड़े कार्य बनेंगे, मित्रों से परेशानी अवश्य बनेगी।
वृश्चिक राशि :- सामाजिक कार्यों में मान-प्रतिष्ठा तथा कुटुम्ब की समस्यायें जटिल होंगी।
धनु राशि :- स्त्री-कष्ट, समय और धन नष्ट होगा, विरोधी समस्याओं से बचकर चलें।
मकर राशि :- षड़यंत्र व कष्ट सामने आये किन्तु कुटुम्ब से लाभ होगा, कष्ट होगा, ध्यान दें।
कुंभ राशि :- षड़यंत्रकारी विरोधी विवाद करने के लिये उग्र होंगे, विवाद को टालें नहीं तो हानि होगी।
मीन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष बनेगा, व्यावधान व चिन्ता बनेगी।
गाय की पूजा-अर्चना से मिलता है सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद
29 May, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में गाय को मां का दर्जा दिया गया है। वहीं शास्त्रों में भी बताया गया है कि गाय एक मात्र ऐसा पशु है, जिसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। ऐसे में गाय की पूजा-अर्चना करने से न सिर्फ गौ माता बल्कि सभी देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिलता है। साथ ही हर तरह के दोष भी दूर हो जाते हैं। वहीं अगर रोजाना गाय की सेवा करना संभव नहीं है, तो ऐसे में रोजाना गाय की आरती जरूर करनी चाहिए।
भगवान की पूजा-अर्चना के बाद गाय की आरती जरूर करनी चाहिए। इससे जातक को कई लाभ प्राप्त होंगे।
गाय की आरती
ॐ जय गौ माता,मैया जय धेनु माता। मुकुन्द विधाता उमापति, सीतापति ध्याता।। ॐ जय धेनु माता
सागर मंथन उपजी,कामधेनु माता । नमन किए सब देवता,अति पावन नाता।। ॐ जय धेनु माता
तनुजा जो तुझसे जन्मी,नंदिनी नाम रचे। ऋषि वशिष्ठ की शक्ति, राजा दिलीप भजे ।। ॐ जय धेनु माता
पाप विनाशिनी मैया,सुखद भंडार भरे। तैंतीस कोटि दैवत,अंग निवास करे।। ॐ जय धेनु माता
पंचगव्य है पावन,औषध गुणकारी। रोग दोष मिटाए,मॉ तुम उपकारी ।। ॐ जय धेनु माता
जिस घर अंगना धेनु,मॉं की हो सेवा। वैतरणी तरते वो नर,पाते शुभ मेवा।। ॐ जय धेनु माता
शुभ मति शुभ फल दायक,है संकट त्राता । जो जन करते सेवा,मोक्ष सुफल पाता ।। ॐ जय धेनु माता
आरती वंदना धेनु की,जो नर हैं गाते। कहते हैं श्रीकृष्णा,वे मनु तर जाते।। ॐ जय धेनु माता
गाय की आरती के लाभ
बता दें कि रोजाना गौ माता की आरती करने से जातक में धार्मिकता बढ़ती है और उसको आध्यात्म की प्राप्ति होती है।
रोजाना गौ माता की आरती करने से जातक के पुण्य में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
गौ माता की रोजाना आरती करने से व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है।
इससे ग्रह दोष और वास्तु दोष भी नष्ट होता है। साथ ही पितृ दोष भी दूर होता है।
रोजाना गौ माता की आरती करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। साथ ही सकारात्मकता और संपदा का भी आगमन होता है।
वहीं रोजाना गाय की आरती करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और जातक की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
जून माह के प्रमुख व्रत त्योहार
29 May, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातत धर्म में व्रत त्योहार बहुत महत्व रखते हैं। जून माह में मां दुर्गा की साधना के लिए गुप्त नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इसमें 10 महाविद्या की पूजा का विधान है।
जून में आषाढ़ और ज्येष्ठ माह का संयोग बन रहा है। ऐसे में जून में गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी, वट पूर्णिमा, गुप्त नवरात्रि, जगन्नाथ रथ यात्रा आदि कौन कौन से महत्वपूर्ण पर्व आएंगे आइए जानते हैं।
4 जून 2025 - महेश नवमी
ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन महेश नवमी मनाते हैं।
5 जून 2025 - गंगा दशहरा
माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान से उन दस मुख्य पापों से मुक्ति मिल जाती है जो पुण्य प्राप्ति में बाधक होते हैं. इनमें दैहिक पाप, वाणी पाप और मानसिक पाप शामिल हैं।
6 जून 2025 - निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी का व्रत बेहद कठिन माना जाता है लेकिन इस एक मात्र व्रत के फल से सभी 24 एकादशियों का फल मिल जाता है। ये शारीरिक और मानसिक शुद्धिकरण में मदद करता है, बल्कि ये भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का माध्यम भी है।
8 जून 2025 - प्रदोष व्रत
10 जून 2025 - पूर्णिमा व्रत
11 जून 2025 - कबीरदास जयंती, ज्येष्ठ पूर्णिमा
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कबीरदास जयंती मनाई जाती है। कबीरदास जी न सिर्फ एक कवि बल्कि समाज सुधारक भी थे। भक्ति आंदोलन पर भी कबीरदास जी के लेखन का काफी प्रभाव पड़ा था।
12 जून 2025 - आषाढ़ माह शुरू
आषाढ़ माह में गुरु की उपासना सबसे फलदायी होती है। इस महीने में श्रीहरि विष्णु की उपासना से भी संतान प्राप्ति का वरदान मिलता है। इस माह में जल देव की पूजा करने से जन्मों के पाप धुल जाते हैं।
14 जून 2025 - कृष्ण पिंगल संकष्टी चतुर्थी
27 जून जगन्नाथ रथ यात्रा
जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान श्रीकृष्ण, भाई बलभद्रा और उनकी बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। मान्यता है कि रथ को खींचने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
इस तरह के भक्तों के पास रहते हैं भगवान
29 May, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
किसी भी वस्तु की चेतनता की पहचान इच्छा, क्रिया अथवा अनुभूति के होने से होती है। अगर किसी वस्तु में ये तीनों नहीं होते हैं, तो उसे जड़ वस्तु कहते हैं और इन तीनों के होने से उसे चेतन वस्तु कहते हैं। मनुष्य में इन तीनों गुणओं के होने से उसे चेतन कहते हैं। मनुष्य के मृत शरीर में इनके न होने से उसे अचेतन अथवा जड़ कहते हैं।
प्रश्न यह उठता है कि जो मनुष्य अभी-अभी इच्छा, क्रिया अथवा अनुभूति कर रहा था और चेतन कहला रहा था, वही मनुष्य इनके न रहने से मृत क्यों घोषित कर दिया गया जबकि वह सशरीर हमारे सामने पड़ा हुआ है? आमतौर पर एक डॉक्टर बोलेगा कि इस शरीर में प्राण नहीं हैं। शास्त्रीय भाषा में, जब तक मानव शरीर में आत्मा रहती है, उसमें चेतनता रहती है। उसमें इच्छा, क्रिया व अनुभूति रहती है। आत्मा के चले जाने से वही मानव शरीर इच्छा, क्रिया व अनुभूति रहित हो जाता है, जिसे आमतौर पर मृत कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार स्वरूप से आत्मा सच्चिदानन्दमय होती है। सच्चिदानन्द अर्थात सत्+चित्+आनंद। संस्कृत में सत् का अर्थ होता है नित्य जीवन अर्थात् वह जीवन जिसमें मृत्यु नहीं है, चित् का अर्थ होता है ज्ञान जिसमें कुछ भी अज्ञान नहीं है और आनंद का अर्थ होता है नित्य सुख जिसमें दुःख का आभास मात्र नहीं है। यही कारण है कि कोई मनुष्य मरना नहीं चाहता, कोई मूर्ख नहीं कहलवाना चाहता और कोई भी किसी भी प्रकार का दुःख नहीं चाहता।
अब नित्य जीवन, नित्य आनंद, नित्य ज्ञान कहां से मिलेगा? जैसे सोना पाने के लिए सुनार के पास जाना पड़ता है, लोहा पाने के लिए लोहार के पास, इसी प्रकार नित्य जीवन-ज्ञान-आनंद पाने के लिए भगवान के पास जाना पड़ेगा क्योंकि एकमात्र वही हैं जिनके पास ये तीनों वस्तुएं असीम मात्रा में हैं। प्रश्न हो सकता है कि बताओ भगवान मिलेंगे कहां? ये भी एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। कोई कहता है भगवान कण-कण में हैं, कोई कहता है कि भगवान मंदिर में हैं, कोई कहता है कि भगवान तो हृदय में हैं, कोई कहता है कि भगवान तो पर्वत की गुफा में, नदी में, प्रकृति में वगैरह।
वैसे जिस व्यक्ति के बारे में पता करना हो कि वह कहां रहता है, अगर वह स्वयं ही अपना पता बताए तो उससे बेहतर उत्तर कोई नहीं हो सकता। उक्त प्रश्न के उत्तर में भगवान कहते हैं कि मैं वहीं रहता हूं, जहां मेरा शुद्ध भक्त होता है। चूंकि हम सब के मूल में जो तीन इच्छाएं- नित्य जीवन, नित्य ज्ञान व नित्य आनंद हैं, वे केवल भगवान ही पूरी कर सकते हैं, कोई और नहीं। इसलिए हमें उन तक पहुंचने की चेष्टा तो करनी ही चाहिए।
भगवान स्वयं बता रहे हैं कि वह अपने शुद्ध भक्त के पास रहते हैं। अतः हमें ज्यादा नहीं सोचना चाहिए और तुरंत ऐसे भक्त की खोज करनी चाहिए जिसके पास जाने से, जिसकी बात मानने से हमें भगवद्प्राप्ति का मार्ग मिल जाए। साथ ही हमें यह सावधानी भी बरतनी चाहिए कि कहीं वह भगवद्-भक्त के वेश में ढोंगी न हो। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि कलियुग में ऐसे गुरु बहुत मिलेंगे जो शिष्य का सब कुछ हर लेते हैं, परंतु शिष्य का संताप हर कर उसे सद्माीर्ग पर ले आए ऐसा गुरु विरला ही मिलेगा।
सोना धारण करने से होता है गुरु मजबूत
29 May, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोना पहनना सभी को पसंद होता है पर इस कीमती धातु को पहनने के भी कई नियम होते हैं। ज्योतिष के रत्न शास्त्र में बताया गया है कि, सोना धारण करने से गुरु ग्रह को मजबूत किया जा सकता है। जातकों को कुंडली में ग्रहों की स्थिति और राशि के अनुसार रत्न को धारण करना चाहिए। सोने को पहनने के लिए कुछ नियम बताए गए हैं, जिन्हें पालन करना काफी जरुरी है अन्यथा नुकसान भी हो सकता है। सोने का सही विधि और सही तरीके से धारण करने से लाभ प्राप्त होता है। सोने के धारण से करने से धन-लाभ व संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए आपको बताते हैं सोने को कब और कैसे धारण करना आवश्य होता है। सोने का गुरु से संबंधित होने के कारण सोना को गुरुवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। इसे पहनने से पहले शुद्ध करना जरुरी है। आप चाहे तो इसे अंगूठी या चेन के रुप में धारण से कर सकते हैं। सोने को शुद्धि करने के लिए आप गंगाजल, दूध और शहद से शुद्ध करें। फिर इसे आप भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित कर दें। विधि-विधान से पूजा करने के बाद अंगूठी और चेन को पहन सकते हैं। माना जाता है कि, रविवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन सोना धारण करना शुभ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोने का धारण मेष, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि के लोगों को धारण करना चाहिए। वहीं, मकर, मिथुन, कुंभ और वृषभ राशि के जातकों को सोना नहीं पहनना चाहिए। इसके साथ ही कुंडली में गुरु की स्थिति देखकर ही सोना का धारण करना चाहिए।
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
29 May, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, व्यावसायिक क्षमता में विशेष वृद्धि होगी, ध्यान दें।
वृष राशि :- सतर्कता से कार्य करें, मनोबल उत्साहवर्धक होगा तथा कार्य उत्तम बन जायेंगे।
मिथुन राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष होगा, समृद्धि के रास्ते खुलें, योजना फलीभूत होगी।
कर्क राशि :- भाग्य की प्रबलता, प्रभुत्व वृद्धि तथा शालीनता से मेल-मिलाप अवश्य होगा।
सिंह राशि :- अधिकारी वर्ग से सफलता के साधन फलप्रद हो, अचानक शुभ समाचार मिलेगा।
कन्या राशि :- योजनायें फलीभूत हों, सफलता से अधिकारी वर्ग से लाभ अवश्य मिलेगा।
तुला राशि :- विघटनकारी तत्व परेशान करें, अग्नि-चोटादि का भय बना ही रहेगा।
वृश्चिक राशि :- तनाव, क्लेश व अशांति, व्यर्थ धन का व्यय तथा विरोधी तत्व परेशान करेंगे।
धनु राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, योजनायें फलीभूत होंगी, कार्य विशेष बनेंगे।
मकर राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, चिन्ता व्याग्रता, मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता बनेगी।
कुंभ राशि :- दैनिक कार्यगति में बाधा, विघटन संभव होगा, कार्य अवरोध होगा।
मीन राशि :- दैनिक कार्यगति में अनुकूलता, चिन्तायें कम हों, कार्य योजना अवश्य बनेगी।
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