धर्म एवं ज्योतिष
भगवान में गहरी आस्था रखते हैं माल्या...सबरीमाला मंदिर में कर चुके हैं सोने की छत दान, इन मंदिरों में भी करोड़ों का...
8 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंक घोटाले के आरोप में लंबे समय से चर्चा में रहे उद्योगपति विजय माल्या ने हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अपनी निजी आस्था और भगवान के प्रति विश्वास को लेकर कई बातें साझा की हैं. राज शमानी के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान माल्या से जब सवाल किया गया क्या आप भगवान में विश्वास करते हैं? इसके जवाब में विजय माल्या ने कहा कि वे पूरी तरह धार्मिक हैं और भगवान में गहरा विश्वास रखते हैं. इस इंटरव्यू का वह हिस्सा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें माल्या ने कहा कि उन्होंने भारत के लगभग सभी प्रमुख मंदिरों के दर्शन किए हैं और अपनी मां की श्रद्धा के अनुसार कई जगहों पर भेंट भी दी है.
उन्होंने बताया कि पूजा, व्रत और मंदिर यात्राएं उनके जीवन का एक अहम हिस्सा रही हैं. वे वर्षों से धार्मिक नियमों का पालन करते आ रहे हैं और उनका मानना है कि अध्यात्म से मन को शांति मिलती है. विजय माल्या ने साफ शब्दों में कहा कि वे भगवान में बहुत आस्था रखते हैं और स्वयं को एक गहरा धार्मिक व्यक्ति मानते हैं.
मंदिरों में किया करोड़ों का चढ़ावा
विजय माल्या ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने भारत के ज्यादातर प्रमुख मंदिरों में दर्शन किए हैं और कई जगहों पर भारी दान भी दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी मां की श्रद्धा के अनुसार भी कई मंदिरों में भेंट अर्पित की है. केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के संदर्भ में उन्होंने बताया कि उसकी जो पूरी सोने की छत है, वह उन्होंने दान दी थी. इसके अलावा तिरुपति बालाजी मंदिर, सुब्रमण्य मंदिर और मूकांबिका मंदिर में भी उन्होंने दान दिया है.
माल्या ने यह भी बताया कि वह हर साल 41 दिन का व्रत रखते हैं और नंगे पांव यात्रा करते हैं. उन्होंने कहा कि उनके लिए यह आस्था और आत्मा की शांति का विषय है, कोई दिखावा नहीं.
भगवान मेरी रक्षा करेंगे
बातचीत के दौरान राज शमानी ने जब माल्या से पूछा, क्या आप इस पर सवाल नहीं करते? भगवान में आप इतना विश्वास करते हैं, अपने धार्मिक विश्वास के लिए इतना कुछ करते हैं और फिर भी इन सब से गुज़र रहे हैं? तो इस पर विजय माल्या कुछ पल चुप हो गए और फिर भावुक अंदाज में बोले- “भगवान मेरी रक्षा करेंगे.”
सोशल मीडिया पर मिक्स रिएक्शन
इस बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोगों ने माल्या की बातों को पाखंड बताया, वहीं कुछ ने इसे एक आम इंसान की पीड़ा और विश्वास का प्रतीक कहा. कई यूजर्स ने लिखा कि जो व्यक्ति बैंक घोटालों का आरोपी है, वह भगवान के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि आस्था हर इंसान का निजी मामला है, और किसी के धार्मिक विश्वास पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
कानून से लड़ाई और भगवान से उम्मीद
विजय माल्या पर भारतीय बैंकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. वह साल 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं और भारत सरकार उन्हें वापस लाने के लिए कानूनी प्रयास कर रही है. हालांकि इन तमाम कानूनी विवादों और चुनौतियों के बीच भी विजय माल्या का भगवान में विश्वास कमजोर नहीं हुआ है.
प्रदोष, शिवरात्रि और सोमवार को पढ़ें यह शक्तिशाली शिव स्तोत्र, टल जाएगा बड़े से बड़ा संकट!
8 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रदोष व्रत हो या मासिक शिवरात्रि या फिर सोमवार का दिन. ऐसे अवसर पर भगवान शिव की पूजा करते हैं. देवों के देव महादेव को बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, फूल, धतूरा, शमी के पत्ते, गंगाजल, शहद, गाय का दूध, धूप, दीप आदि अर्पित करते हैं. शिव पूजा के समय शिव चालीसा पढ़ते हैं और मंत्र जाप करते हैं. यदि आपको भगवान शिव को प्रसन्न करना है तो इस दिन रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्तोत्र कर रचना की थी. आइए जानते हैं शिव तांडव स्तोत्र और उसके फायदे के बारे में.
शिव तांडव स्तोत्र के फायदे
1. शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने से आत्मबल, साहस और ऊर्जा में बढ़ोत्तरी होती है.
2. शिव कृपा से तंत्र बाधा और भय से मुक्ति मिलती है. महाकाल दुश्मनों से सुरक्षा प्रदान करते हैं.
3. शिव कृपा से ग्रह दोष शांत हो जाते हैं. शनि, मंगल, राहु, केतु के दोष मिट जाते हैं.
4. स्तोत्र के पाठ से मन के विकार मिट जाते हैं. बुद्धि सही काम करती है. शरीर संतुलित रहता है.
शिव तांडव स्तोत्र
जटाटवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले
गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं
चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम् ॥1॥
जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥2॥
धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा
कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।
मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥4॥
सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः
श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥5॥
ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा
निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥6॥
करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र
कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥7॥
नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर
त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥
प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥
जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध
गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित:
प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥
दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र
जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥
कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति
मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥13॥
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥
प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥15॥
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥16॥
10 जून को अंतिम ज्येष्ठ बड़ा मंगल, जानें हनुमानजी की प्रिय राशियों के बारे में, कभी नहीं होती इनको परेशानी
8 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ज्येष्ठ मास का अंतिम बड़ा मंगल 10 जून को है. वैसे तो सभी मंगलवार का अपना महत्व है लेकिन ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि हनुमानजी की कृपा किन राशियों पर हमेशा बनी रहती है. इन राशि वालों को कभी किसी चीज का भय नहीं होता है और जीवन में संपन्नता बनी रहती है. आइए जानते हैं हनुमानजी की प्रिय राशियों के बारे में...
10 जून दिन मंगलवार को ज्येष्ठ मास का अंतिम बड़ा मंगल है. ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले सभी मंगल को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है. इस दिन हनुमानजी के वृद्ध स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है इसलिए बड़े मंगल को बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बड़े मंगल का व्रत करने से हनुमानजी की विशेष कृपा रहती है और सभी संकट व परेशानियों से मुक्ति मिलती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राशिचक्र की सभी राशियों में कुछ राशियां ऐसी होती हैं, जिन पर हमेशा बजरंगबली की कृपा बनी रहती है. आइए जानते हैं किन राशियों पर हनुमानजी की सदैव कृपा बनी रहती है...
मेष राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं और मंगलवार के दिन हनुमानजी और मंगल ग्रह की पूजा करने का विधान हैं. इस राशि वाले मंगलवार का व्रत अवश्य करें और हनुमानजी की विधि विधान से पूजा करें, ऐसा करने से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होगी और सुख व सौभाग्य की प्राप्ति होगी. हनुमानजी मेष राशि वालों को बुद्धि और कौशल प्रदान करते हैं, जिससे इन राशियों की धन समेत सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है.
सिंह राशि के स्वामी सूर्यदेव हैं और सूर्यदेव हनुमानजी के गुरु भी हैं, ऐसे में सिंह राशि वालों पर हनुमानजी की विशेष कृपा रहती है. हनुमानजी की कृपा से सिंह राशि वालों को जीवन में ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता और कोई ना कोई मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है. अगर सिंह राशि वाले सच्चे मन से हनुमानजी की पूजा और उपवास करें तो यह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं.
कन्या राशि वालों पर हमेशा हनुमानजी की कृपा बनी रहती है. कन्या राशि वालों का हनुमानजी की कृपा से भाग्य हमेशा साथ देता है, जिसकी वजह से पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में हमेशा तरक्की करते हैं. हनुमानजी कन्या राशि वालों को बड़ी से बड़ी परेशानियों से तुरंत निकालते हैं और हर समस्या से दूर भी रखते हैं. इस राशि के नौकरी पेशा जातक ऑफिस में हमेशा चमकते हुए सितारा बने रहते हैं.
वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं और मंगल ग्रह के स्वामी हनुमानजी, ऐसे में वृश्चिक राशि वालों पर हनुमानजी की हमेशा कृपा बनी रहती है. हनुमानजी की कृपा से वृश्चिक राशि वालों के मुश्किल से मुश्किल कार्य भी आसानी से कर लेते हैं और इनके अंदर साहस की कोई कमी नहीं होती है. यह अपनी सभी जिम्मेदारियों का पूरा करते हैं और परिजनों का पूरा ध्यान रखते हैं. हनुमानजी की पूजा करने से वृश्चिक राशि वालों के सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है.
हनुमानजी की प्रिय राशियों में कुंभ राशि का भी नाम आती है. कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव हैं और शनिदेव कभी भी हनुमानजी के भक्तों को परेशान नहीं करते हैं. कुंभ राशि वालों पर हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी हर परेशानियों को दूर करते हैं. पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में जो भी अड़चन आती है, उनको हनुमानजी दूर करते हैं. कुंभ राशि वाले अगर हर मंगलवार का व्रत करें तो हनुमानजी इनकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
8 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा व वृत्ति से लाभ, कुसंग से हानि, कुछ सहयोग रहे, पारिवारिक समाचार मिलेगा।
वृष राशि :- शुभ कार्य, भूमि से हानि, सिद्धी, कभी-कभी विरोधी अडंगे करते रहेंगे, कार्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- अधिक व्यय, स्वजन कष्ट, विवाद, आर्थिक कमी का अनुभव अवश्य होगा।
कर्क राशि :- हानि, रोगभय, नौकरी में कष्ट, चिन्ता, राजकार्य, मामले-मुकदमे में असंतोष।
सिंह राशि :- निराशा, लाभ, कार्य में सफलता, आर्थिक सुधार आदि होगा।
कन्या राशि :- शरीर कष्ट, लाभ, राजभय, उद्योग-व्यापार में अडंगे अवश्य ही आयेंगे।
तुला राशि :- चोट-अग्नि भय, धार्मिक कार्य, कष्ट, व्यर्थ अनाप-शनाप खर्च से परेशानी।
वृश्चिक राशि :- बाधा, उलझन, लाभ, यात्रा, कष्ट, गृहकार्य में परेशानी अवश्य रहेगी।
धनु राशि :- शत्रुभय, मुकदमे में जीत, रोगभय होगा, व्यापार में सुधार, कष्ट अवश्य होगा।
मकर राशि :- व्यापार में लाभ, शत्रुभय, धन सुख, सुधार, खर्च होते ही रहेंगे, ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- कलह, व्यर्थ खर्च, सफलता प्राप्त हो, विरोधी असफल रहें, व्यापार में सुधार होगा।
मीन राशि :- स्वजन सुख, पुत्र-चिन्ता, धन हानि, व्यापार की स्थिति अच्छी नहीं रहे।
आपने कभी सोचा है विवाहित महिलाएं क्यों पहनती हैं चांदी की घुंघरू वाली पायल? इसके फायदे जानकर उड़ जाएंगे होश
7 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में शादी के बाद महिलाएं कई परंपराओं को निभाती हैं, लेकिन कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं जिनका सीधा संबंध हमारे मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक जीवन से होता है. ऐसी ही एक परंपरा है चांदी की पायल पहनना. यह केवल एक गहना नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी ज्योतिषीय, आयुर्वेदिक और सांस्कृतिक बातें जुड़ी होती हैं. यह परंपरा हर क्षेत्र, जाति और भाषा में अलग-अलग तरीके से निभाई जाती है, लेकिन उद्देश्य एक ही होता है- स्त्री को सशक्त, स्वस्थ और सौभाग्यशाली बनाए रखना. पायल पहनने से न केवल शरीर को लाभ होता है बल्कि यह वातावरण को भी सकारात्मक बनाती है. यह भारतीय नारी के श्रृंगार का हिस्सा ही नहीं, उसकी गरिमा का प्रतीक भी है. यही वजह है कि हर संस्कृति में इसे विशेष स्थान दिया गया है. इस बारे में बता रहे हैं
1. पायल पहनना सौभाग्य का प्रतीक है
ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी बताते हैं कि विवाह के बाद महिला जब चांदी की पायल पहनती है, तो वह नारी के सौभाग्य का प्रतीक बन जाती है. यह परंपरा सिर्फ श्रृंगार नहीं है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि स्त्री अब अपने परिवार की लक्ष्मी बन गई है. इससे घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
2. चांदी शरीर की ऊर्जा को संतुलित करती है
चांदी को शास्त्रों में एक शांत करने वाली धातु माना गया है. यह चंद्रमा से जुड़ी होती है, जो मन और भावनाओं को नियंत्रित करता है. जब महिला पैरों में चांदी की पायल पहनती है, तो यह शरीर की निचली नसों में ऊर्जा का संचार करती है. इससे महिला को थकान कम महसूस होती है और वह ज्यादा सक्रिय रहती है. ज्योतिषाचार्य अंशुल त्रिपाठी के अनुसार, पायल पहनने से पैरों की नसों पर हल्का दबाव पड़ता है, जो खून के बहाव को बेहतर बनाता है.
3. घुंघरू की मधुर आवाज मानसिक शांति देती है
पायल में लगे छोटे-छोटे घुंघरू जब चलते समय बजते हैं, तो वह सिर्फ कानों को नहीं, मन को भी सुकून देते हैं. यह ध्वनि वातावरण की नकारात्मकता को दूर करती है और घर में सकारात्मकता लाती है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जैसे मंदिर में घंटियों की ध्वनि ऊर्जा को शुद्ध करती है, वैसे ही पायल की आवाज घर को पवित्र और शांत रखती है.
4. घर में बरकत और समृद्धि आती है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस घर में महिलाएं चांदी की पायल पहनती हैं, वहां चंद्रमा की ऊर्जा सक्रिय रहती है. यह ऊर्जा घर में समृद्धि, बरकत और स्थिरता लाती है. कई शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि ऐसे घरों में धन और सौभाग्य का वास बना रहता है.
5. पायल पहनना शुभ
वास्तु शास्त्र में पायल को घर की ऊर्जा को सक्रिय रखने का एक माध्यम माना गया है. वहीं आयुर्वेद के अनुसार, चांदी शरीर की गर्मी को नियंत्रित करती है और हॉर्मोनल संतुलन बनाए रखती है. खासकर महिलाएं यदि पायल नियमित पहनें, तो उन्हें पीरियड्स संबंधी दिक्कतें भी कम होती हैं.
6. संस्कार और ऊर्जा का मिलन है पायल
अंशुल त्रिपाठी कहते हैं कि पायल पहनना एक तरह से नारी की ऊर्जा और भारतीय परंपरा के मिलन का प्रतीक है. यह न सिर्फ एक गहना है, बल्कि स्त्री की गरिमा, उसका सम्मान और उसकी सकारात्मक ऊर्जा का भी संकेत है.
इस दिन शिवलिंग पर चढ़ा दें ये फूल फिर देखें चमत्कार! दूर होगी दरिद्रता, बरसने लगेगी भोले की कृपा!
7 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोमवार के अलावा एक तिथि हर महीने ऐसी भी आती है, जो भगवान शिव को समर्पित रहती है. वह है हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि, जिसे प्रदोष व्रत भी कहा जाता है माना जाता है कि प्रदोष व्रत के दिन व्रत रखकर अगर जातक प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा-आराधना कर ले, तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. रोग, दुख, कष्ट, दरिद्रता, काल, सब खत्म हो जाते हैं.
कुछ ही दिनों में आषाढ़ महीने की शुरुआत होने वाली है. आषाढ़ महीने का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन कैसे भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं, जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य से.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
15 जून से आषाढ़ महीने की शुरुआत हो जाएगी. आषाढ़ महीने का पहला प्रदोष व्रत 23 जून को रखा जाएगा. सोमवार के दिन के अलावा जातक को प्रदोष व्रत के दिन व्रत रखकर प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए.
कब से हो रही है त्रयोदशी तिथि की शुरुआत
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि ऋषिकेश पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 22 जून रात 2 बजकर 34 मिनट से हो रही है और समापन 23 जून रात 11 बजकर 06 मिनट पर होगा. चूंकि प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा होती है, इसलिए 23 जून को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
कैसे करें इस दिन भगवान शिव की पूजा
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि प्रदोष व्रत के दिन स्नान कर व्रत का संकल्प लें और प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा पंचोपचार विधि से करें. अगर जातक इस दिन राम नाम लिखा बेलपत्र अर्पण करें और उनका प्रिय पुष्प धतूरा का पुष्प अर्पण कर दें, तो भगवान शिव बेहद प्रसन्न हो जाएंगे और जातक की मनोकामनाएं जरूर पूरी होंगी. साथ ही रोग, दुख, कष्ट, काल और दरिद्रता सब खत्म हो जाएंगे.
भूलकर भी किसी को न बताएं ये 4 सपने, ऐसे समय में चुप रहना है समझदारी, वरना लाभ की जगह होगा बड़ा नुकसान!
7 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हम सभी कभी न कभी ऐसे सपने देखते हैं जो हमारे मन पर गहरा असर छोड़ते हैं. सपनों की दुनिया हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से अलग होती है, लेकिन हमारे शास्त्रों में इन्हें बेहद खास और अर्थपूर्ण बताया गया है. माना जाता है कि कुछ सपने शुभ संकेत होते हैं तो कुछ अशुभ. इसलिए जरूरी होता है यह जानना कि कौन-से सपनों को दूसरों से साझा करना चाहिए और कौन-से सिर्फ अपने तक ही सीमित रखना चाहिए. आज हम आपको बताएंगे कि कुछ सपने अगर आपको दिखें, तो उनका जिक्र किसी और से करने से बचना क्यों जरूरी है. ऐसा न करने पर जिस लाभ या सुख की उम्मीद होती है, वह दूर हो सकता है. आइए जानते हैं
1. चांदी से भरा कलश
अगर सपने में चांदी से भरा कलश दिखे, तो यह धन, सुख और समृद्धि का संकेत होता है. लेकिन इसका जिक्र दूसरों से करने पर इसका फल मिलना टल सकता है. शास्त्रों के अनुसार जब तक सपना पूरा न हो, चुप रहना बेहतर होता है.
2. फूलों से भरा बगीचा
सपने में रंग-बिरंगे फूलों का बगीचा देखना बहुत शुभ माना जाता है. यह आने वाली खुशियों और शुभ समाचारों का संकेत होता है. लेकिन अगर यह सपना आप किसी से शेयर कर देते हैं, तो वो खुशी किसी कारणवश रुक सकती है या फिर उसकी दिशा बदल सकती है.
3. भगवान के दर्शन
भगवान को सपने में देखना बहुत बड़ी कृपा का संकेत होता है. यह दर्शाता है कि आपकी मुसीबतें अब खत्म होने वाली हैं. लेकिन इस तरह का सपना अगर आप किसी को बता दें, तो उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा कम हो सकती है और संकट का समाधान टल सकता है.
4. खुद को राजा के रूप में देखना
अगर आप सपने में खुद को किसी राजा या बड़े अधिकारी के रूप में देखते हैं, तो यह संकेत है कि आपके जीवन में बड़ी जिम्मेदारियां और सफलता आने वाली है. यह सपना आत्मविश्वास और नेतृत्व की ओर बढ़ने का प्रतीक है. लेकिन अगर आपने यह सपना दूसरों से कह दिया, तो हो सकता है कोई आपकी योजनाओं को नुकसान पहुंचा दे या आपकी सोच को नीचा दिखाने की कोशिश करे. इसलिए ऐसे सपनों को गुप्त रखना चाहिए.
क्यों नहीं करना चाहिए ऐसे सपनों का जिक्र?
शास्त्रों के अनुसार कुछ सपनों की ऊर्जा बहुत खास और नाजुक होती है. अगर आप उन्हें किसी से साझा कर देते हैं, तो उस ऊर्जा का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है. कई बार सामने वाला व्यक्ति आपकी बातों का मजाक भी बना सकता है, जिससे शुभ संकेतों का असर उल्टा पड़ सकता है. इसलिए जब तक सपना पूरा न हो, चुप रहना ही समझदारी होती है.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
7 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्वभाव में अचानक परिवर्तन हो सकता है, व्यवसाय में अच्छी गति होगी।
वृष राशि :- कार्यों में सफलता मिले, मान-सम्मान की प्राप्ति होगी, शत्रु कमजोर होंगे।
मिथुन राशि :- सप्ताह उत्तम फलकारक हो, अधिकारियों का पूर्ण समर्थन-सहयोग मिले।
कर्क राशि :- नौकरी में व्यवधान हो सकता है, व्यवसाय ठीक नहीं रहेगा, ध्यान रखें।
सिंह राशि :- आप आनंद का अनुभव करेंगे, केतू गृह पीड़ाकारक है, आपसी मतभेद से बचें।
कन्या राशि :- मनोरंजन से अति हर्ष होगा, व्यवसाय में लाभ होगा, रुके कार्य बन जायेंगे।
तुला राशि :- पारिवारिक उत्तरदायित्व की वृद्धि होगी, आमोद-प्रमोद में विशेष ध्यान देंगे।
वृश्चिक राशि :- मानसिक तनाव अकस्मिक बढ़ेगा, स्वजनों से सहानुभूति अवश्य होगी।
धनु राशि :- व्यवसाय की उन्नति से अर्थिक स्थिति में विशेष सुधार अवश्य होगा।
मकर राशि :- विलास सामग्री का संचय होगा, अधीकारी वर्ग की कृपा का लाभ मिले।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्रों से अच्छा सहयोग मिले, उन्नति एवं लाभ के योग बनेंगे।
मीन राशि :- गृह-कलह, हीन मनोवृत्ति, शरीर पीड़ा से परेशानी अवश्य ही होगी।
वैदिक मंत्र के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न, जानें किस दिशा में राम दरबार समेत कौन से देवी देवता हुए विराजमान
6 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या में एक नया अध्याय और जुड़ गया. गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भव्य मंदिर में राजा राम की प्राण प्रतिष्ठा की. इस मौके पर वैदिक मंत्रों की ध्वनि चारों दिशाओं में गुंजायमान रही. आचार्यों और संतों का स्वर, शंखध्वनि ने अध्यात्म का माहौल बना दिया. अभिजीत मुहूर्त, वेदघोष और मंत्रोच्चार की ध्वनि के बीच अयोध्या में गंगा दशहरा के अवसर पर श्रीराम दरबार सहित समस्त नवनिर्मित देवालयों में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह संपन्न हुआ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में हुए इस त्रिदिवसीय अनुष्ठान का यह अंतिम दिन था, जिसमें वैदिक परंपरा और आधुनिक तकनीक का दुर्लभ संगम देखने को मिला.
प्राण प्रतिष्ठा का पावन कार्य संपन्न
राम दरबार समेत सभी देवी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की आयोजन का समापन विशेष आरती और भंडारे के साथ हुआ. बुधवार सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर यज्ञमंडप में आह्वानित देवताओं के पूजन के साथ अनुष्ठान की विधिवत शुरुआत हुई. दो घंटे चले इस पूजन के बाद सुबह 9 बजे से हवन प्रारंभ हुआ, जो लगभग एक घंटे तक चला. इसके बाद सभी नवनिर्मित देवालयों में केंद्रीयकृत दृश्य और श्रव्य माध्यमों की सहायता से एक साथ प्राण प्रतिष्ठा का पावन कार्य संपन्न हुआ.
दिशाओं का रखा गया है ध्यान
प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अंतर्गत मंदिर परिसर के विभिन्न भागों में स्थित देवविग्रहों में विधिपूर्वक प्राणस्थापन किया गया. इनमें प्रमुख रूप से श्रीराम दरबार, शेषावतार, परकोटा के ईशान कोण पर शिव मंदिर, अग्निकोण में गणेशजी, दक्षिणी भुजा में हनुमानजी, नैऋत्य कोण में सूर्य देव, वायव्य कोण में मां भगवती तथा उत्तरी भुजा में अन्नपूर्णा माता की मूर्तियां शामिल हैं.
संगमरमर पत्थर से बना है राम दरबार
पूरे मंदिर परिसर को दृश्य माध्यमों के माध्यम से एकीकृत किया गया था, जिससे सभी देवालयों में एक ही समय पर मंत्रोच्चार की सामूहिक गूंज के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो सकी. प्राण प्रतिष्ठा के इस आयोजन में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, वैदिक आचार्य, रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी और आम श्रद्धालु उपस्थित रहे. राम मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित होने वाले राम दरबार की महिमा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि स्थापत्य की दृष्टि से भी अतुलनीय होने जा रही है. राम दरबार का निर्माण जिस संगमरमर पत्थर से हुआ है.
रोज शाम को इस खास चीज से करें आरती, घर में फैलेगी शांति और दूर होंगे झगड़े, परिवार की कलह से पाएं राहत
6 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
शाम का समय दिन और रात के बीच की कड़ी होता है. इस समय को आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दिन भर की हलचल के बाद जब सूर्य अस्त हो जाता है, तब नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होने लगती हैं. ऐसे में अगर इस समय दीपक जलाकर आरती की जाए, तो यह नकारात्मकता को दूर करने में मदद करता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
क्यों जरूरी है कपूर से आरती करना?
शाम की आरती में कपूर का इस्तेमाल करना बहुत ही लाभदायक होता है. कपूर को बेहद पवित्र और शुद्ध तत्व माना गया है. जब इसे जलाया जाता है, तो यह बिना किसी राख के पूरी तरह जल जाता है, जो जीवन की अस्थिरता और नश्वरता का प्रतीक है. इसके साथ ही, कपूर की खुशबू पूरे माहौल को शुद्ध करती है.
वातावरण के लिए लाभकारी
कपूर से आरती करने पर जो धुआं निकलता है, वह न सिर्फ वातावरण को साफ करता है, बल्कि मन को भी शांत करता है. इससे घर के हर कोने में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और धीरे धीरे वहां फैली नकारात्मकता दूर होने लगती है. कहा जाता है कि जिस घर में रोजाना कपूर से आरती की जाती है, वहां देवी देवता का वास बना रहता है.
कैसे करता है कपूर घर की समस्याओं को दूर?
ज्योतिष के अनुसार, कपूर शुक्र ग्रह से जुड़ा होता है. शुक्र ग्रह समृद्धि, प्रेम, सौंदर्य और सुख सुविधाओं का प्रतिनिधि माना जाता है. जब आप नियमित रूप से कपूर जलाते हैं, तो यह शुक्र ग्रह को मजबूत करता है. इससे न केवल आर्थिक स्थिति में सुधार आता है, बल्कि पारिवारिक रिश्तों में भी मिठास बढ़ती है.
दूर होती मानसिक अशांति
साथ ही, कपूर को राहु और केतु के दोष को कम करने वाला भी माना गया है. इन दोनों ग्रहों के असर से घर में कलह, मानसिक अशांति और आर्थिक दिक्कतें आ सकती हैं. लेकिन कपूर से आरती करने पर इन दोषों का प्रभाव घटने लगता है.
कैसे करें शाम की आरती?
शाम को सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर में एक साफ दीपक में गाय के घी का दीप जलाएं. फिर उसमें एक छोटा सा कपूर डालें और उसे जलाकर आरती करें. आरती के समय भगवान का ध्यान करें और मन में घर की शांति और सुख की प्रार्थना करें. आप चाहें तो “ओम जय जगदीश हरे” जैसे भजन गा सकते हैं, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो जाता है.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
6 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- यात्रा, भय, कष्ट, व्यापार बाधा, शुभ समाचार, प्रसन्नता का योग बनेगा।
वृष राशि :- शत्रु भय, रोग, स्वजन सुख, लाभदायक जीवन, सुख, मन असमंजस में होगा।
मिथुन राशि :- वाहन भय, मातृ-पितृ कष्ट, हानि, व्यर्थ अनाप-सनाप खर्च से परेशानी होगी।
कर्क राशि :- सफलता, उन्नति, शुभ कार्य, विवाह, उद्योग-व्यापार में कष्ट होगा, ध्यान दें।
सिंह राशि :- शरीर कष्ट, उत्तम व्यय, खर्च में सफलता, व्यवस्था में साधारण लाभ होगा।
कन्या राशि :- खर्च, विवाद, स्त्री कष्ट, विद्या लाभ, कुछ अच्छे कार्य भी हो सकते हैं, ध्यान रखें।
तुला राशि :- यात्रा में हानि, राजभय, लाभ, कारोबार में उछाल, कष्ट की स्थिति बनेगी।
वृश्चिक राशि :- वृत्ति में लाभ, यात्रा, सम्पत्ति लाभ, कारोबार में लाभ, शिक्षा से लाभ होगा।
धनु राशि :- अल्प लाभ, शरीर कष्ट, चोटादि का भय, कष्ट, विलाप तथा हानि होगी।
मकर राशि :- शत्रु हानि, आंशिक शारीरिक सुख, समय उद्योग-व्यापार से लाभ होगा।
कुंभ राशि :- शुभ व्यय, संतान सुख, कार्य सफलता, मित्र वर्ग से संतोष होगा।
मीन राशि :- पदोन्नति, राजभय, न्याय, लाभ-हानि, व्यय, जीवन संतोषमय होगा।
पूजा में कपूर होता है अहम
5 Jun, 2025 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में पूजा में कपूर बहुत जरुरी होता है। पूजा के बाद आरती में कपूर का उपयोग किया जाता है। कपूर के बिना आरती अधूरी मानी जाती है। कपूर जलाने से नकारात्मकता सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है। कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। इसलिए धर्मग्रंथों के साथ आयुर्वेद में भी कपूर के बारे में खासतौर से बताया गया है। ज्योतिषीय और वास्तु उपायों में भी कपूर का उपयोग महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है। भारतीय पूजा पद्धति वैज्ञानिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है। कपूर के बारे में वैज्ञानिक शोधों के आधार पर भी कहा जाता है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव खत्म हो जाते हैं। यह वातावरण को शुद्ध करता है जिससे बीमारी होने खतरा कम हो जाता है। घर में कपूर जलाने से हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं।
बाहर हो जाती है दूषित वायु
पूजा या हवन करते समय जब हम कपूर जलाते हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। कपूर जलाने से आसपास की हवा साफ होने लगती है। खराब हवा घर से बाहर हो जाती है और वातावरण शुद्ध हो जाता है। सुबह-शाम कपूर जलाने से बाहरी नकारात्मक ऊर्जा घर में नहीं आ पाती है। कपूर जलाने से हवा में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ सकती है। प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बीमारियों से बचने के लिए कपूर जलाना चाहिए। वास्तु दोष दूर करने में भी कपूर का अच्छा असर होता है। घर के जिस कमरे में शुद्ध वायु आने-जाने के लिए खिड़की, रोशनदान आदि न हों वहां कांच के बर्तन में कपूर रखने से शुद्ध वायु का संचार होता है।
गंगा दशहरा पर गंगा पूजन का है विशेष महत्व
5 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गंगा दशहरा इस बार पांच जून को है। सनातन धर्म में इसका बेहद महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पुरखों को मुक्ति प्रदान करने के लिए भगवान शिव की आराधना करके गंगा जी को स्वर्ग से उतारा था। जिस दिन वे गंगा को इस धरती पर लाए, वही दिन गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से गंगा का आगमन हुआ था। अतः इस दिन गंगा आदि का स्नान, अन्न वस्त्र आदि का दान, जप तप, उपासना और उपवास किया जाता है। इससे पापों से छुटकारा मिलता है। इस दिन गंगा पूजन का विशेष महत्व है। महर्षि व्यास ने गंगा की महिमा के बारे में पद्म पुराण में लिखा है कि अविलंब सद्गति का उपाय सोचने वाले सभी स्त्री−पुरुषों के लिए गंगा ही ऐसा तीर्थ है, जिनके दर्शन भर से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। भविष्य पुराण में लिखा हुआ है कि जो मनुष्य इस दिन गंगा के पानी में खड़ा होकर दस बार गंगा स्तोत्र को पढ़ता है चाहे वो दरिद्र हो, चाहे असमर्थ हो वह भी गंगा की पूजा कर वांछित फल को पाता है।
इस पर्व पर मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है खासकर गंगा किनारे के मंदिरों की सजावट इस दिन देखते ही बनती है। लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं और पवित्र नदी का पूजन करते हैं। इस पर्व की छटा उत्तर भारत में विशेष रूप से संपूर्ण उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार में अलग ही रूप में देखने को मिलती है। यहां गंगा अवसर के दिन मेले का आयोजन भी किया जाता है।
इस दिन गंगा तटवर्ती प्रदेश में अथवा सामर्थ्य न हो तो समीप के किसी भी जलाशय या घर के शुद्ध जल से स्नान करके स्वर्ण आदि के पात्र में त्रिनेत्र, चतुर्भुज, सर्वावय विभूषित, रत्न कुम्भधारिणी, श्वेत वस्त्रों से सुशोभित तथा वर और अभय मुद्रा से युक्त श्री गंगाजी की प्रशान्त मूर्ति अंकित करें अथवा किसी साक्षात मूर्ति के करीब बैठ जाएं और फिर ओम नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमः से आह्वान आदि षोड्शोपचार पूजन करें। तत्पश्चात ओम नमो भगवते ऐं ह्रीं श्रीं हिलि, हिलि, मिली मिली गंगे मां पावय पावय स्वाहा मंत्र से पांच पुष्पांजलि अर्पण करके गंगा को पृथ्वी पर लाने वाले भगीरथ का और जहां से उनका उद्भव हुआ है, उस हिमालय का नाम मंत्र से पूजन करें। फिर दस फल, दस दीपक और दस सेर तिल का गंगायै नमः कहकर दान करें। साथ ही घी मिले हुए सत्तू और गुड़ के पिण्ड जल में डालें। सामर्थ्य हो तो सोने का कछुआ, मछली और मेढक आदि का भी पूजन करके जल में विसर्जित करें। इसके अतिरिक्त दस सेर तिल, दस सेर जौ और दस सेर गेहूं दस ब्राह्मणों को दान दें।
दीपक को न रखें जमीन पर
5 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जगत में सभी लोग धन और वैभव चाहते हैं और इसके लिए जी जान से प्रयास करते हैं। उनके हर प्रयास के पीछे असली लक्ष्य सुख शान्ति और अपने परिवार की खुशहाली और तरक्की होती है पर लेकिन कई बार आपने देखा होगा की सब प्रयास करने के बाद हम धन सम्पदा तो कमा लेते है पर घर की शान्ति और अमन बिगड़ जाता है। ऐसी क्या गलतियां हैं जो भूलवश हम करते रहते है और जिनके कारण हमारे सुखी जीवन पर ग्रहण लगा रहता है।
दीपक हमारे घर में प्रतिदिन जलाया जाता है। दीपक का प्रयोग हम भगवान् की पूजा के लिए करते है। कभी गलती से भी दीपक को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए।
शिवलिंग की पूजा हम प्रतिदिन करते है ,पर क्या आप जानते है कभी शिवलिंग ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। कई लोग मंदिर साफ़ करते समय कई बार शिवलिंग ज़मीन पर रखते है। ऐसा कभी न करे। शालिग्राम की पूजा तो सभी करते है। पर ज्योतिष एक बात हमेशा ध्यान में रखे कि कभी भी शालिग्राम को ज़मीन पर न रखे। इससे आप के घर कि आर्थिक स्थिति ख़राब हो सकती है।जनेऊ को बहुत पवित्र माना गया है। इसलिए इसे कभी ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। न ही फेकना चाहिए। अगर आप का जनेऊ ख़राब है तो उसे पेड़ की टहनी से बाँध दे या पेड़ की जड़ में डाल दे। शंख का प्रयोग हर रोज पूजा पाठ में किया जाता है। इसलिए कभी भी शंख को ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए। शंख बजाने के बाद हमेशा उसे धोकर रखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भोजन की थाली को भी कभी जमीन पर नहीं रखना चाहिए ऐसा करना भी दुर्भाग्य की वजह बन जाता है।
शनिदेव के हैं नौ वाहन
5 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सूर्यपुत्र शनिदेव न्याय के देवता हैं हालांकि लोग उनके कोप से भयभीत रहते हैं पर वह हमेशा ही कार्यों के अनुरुप परिणाम देते हैं। उनके कई वाहन हैं। शनि के वाहनों की बात करते हुए सामान्यन रूप से कौवे के बारे में ध्याभन आता है, लेकिन उनके कौवे सहित कुल 9 वाहन है। जिनमें से कई को ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व के अनुसार बेहद शुभ माना गया हैं। इसके बावजूद जरूरी नहीं है कि वे सभी आपके लिए भी शुभ ही हों। इसलिए ये जानना अत्यंनत आवश्यरक है कि कौन शुभ है और कौन अशुभ। शास्त्रों की माने तो शनि जिस वाहन में सवार होकर किसी व्याक्तिप की कुंडली में प्रवेश करते हैं उसकी राशि की गणना करके तय होता है कि उनका आगमन व्यरक्ति के लिए अच्छाै है या बुरा।
इस गणना की विधि सुनने में कठिन लगती है पर है गणित के सूत्रों की तरह एक दम तय है। इसके लिए जन्म नक्षत्र की संख्या और शनि के राशि बदलने की तिथि के नक्षत्र की संख्या जोड कर उसके योगफल को नौ से भाग करना होता है। इस गणना से मिली संख्या के आधार पर ही शनि का वाहन निर्धारित होता है। एक दूसरी विधि भी है, इसमें शनि के राशि प्रवेश करने की तिथि की संख्या, ऩक्षत्र संख्या, वार संख्या और नाम के प्रथम अक्षर संख्या सभी को जोडकर योगफल को 9 से भाग देदें, जो शेष संख्या आयेगी वो शनि के वाहन की जानकारी देगी। दोनो विधियों मे यदि शेष 0 बचे तो मानना चाहिए कि आपकी अपेक्षित संख्यान 9 है।
सूर्य देव का परिवार
रविवार को सूर्यदेव का दिन माना जाता है। यश और सम्मान हासिल करने के लिए सभी लोग उनकी पूजा करते हैं। पर क्या आप सूर्यदेव के परिवार को जानते हैं। सूर्य देव का परिवार काफी बड़ा है। उनकी संज्ञा और छाया नाम की दो पत्निोयां और दस संताने हैं। जिसमे से यमराज और शनिदेव जैसे पुत्र और यमुना जैसी बेटियां शामिल हैं। मनु स्मृजति के रचयिता वैवस्वत मनु भी सूर्यपुत्र ही हैं।
सूर्य देव की दो पत्निमयां संज्ञा और छाया हैं। संज्ञा सूर्य का तेज ना सह पाने के कारण अपनी छाया को उनकी पत्नीम के रूप में स्थाहपित करके तप करने चली गई थीं। लंबे समय तक छाया को ही अपनी प्रथम पत्नीर समझ कर सूर्य उनके साथ रहते रहे। ये राज बहुत बात में खुला की वे संज्ञा नहीं छाया है। संज्ञा से सूर्य को जुड़वां अश्विनी कुमारों के रूप में दो बेटों सहित छह संताने हुईं जबकि छाया से उनकी चार संताने थीं।
देव शिल्पीं विश्वेकर्मा सूर्य पत्नीव संज्ञा के पिता थे और इस नाते उनके ससुर हुए। उन्होंंने ही संज्ञा के तप करने जाने की जानकारी सूर्य देव को दी थी।
धर्मराज या यमराज सूर्य के सबसे बड़े पुत्र और संज्ञा की प्रथम संतान हैं।
यमी यानि यमुना नदी सूर्य की दूसरी संतान और ज्येसष्ठा पुत्री हैं जो अपनी माता संज्ञा को सूर्यदेव से मिले आर्शिवाद के चलते पृथ्वीज पर नदी के रूप में प्रसिद्ध हुईं।
सूर्य और संज्ञा की तीसरी संतान हैं वैवस्वत मनु वर्तमान (सातवें) मन्वन्तर के अधिपति हैं। यानि जो प्रलय के बाद संसार के पुर्निमाण करने वाले प्रथम पुरुष बने और जिन्हों।ने मनु स्मृपति की रचना की।
सूर्य और छाया की प्रथम संतान है शनिदेव जिन्हें् कर्मफल दाता और न्याषयधिकारी भी कहा जाता है। अपने जन्मन से शनि अपने पिता से शत्रु भाव रखते थे। भगवान शंकर के वरदान से वे नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर नियुक्तव हुए और मानव तो क्या देवता भी उनके नाम से भयभीत रहते हैं।
छाया और सूर्य की कन्या तप्तिह का विवाह अत्यन्त धर्मात्मा सोमवंशी राजा संवरण के साथ हुआ। कुरुवंश के स्थापक राजर्षि कुरु का इन दोनों की ही संतान थे, जिनसे कौरवों की उत्पत्ति हुई।
सूर्य और छाया पुत्री विष्टि भद्रा नाम से नक्षत्र लोक में प्रविष्ट हुई। भद्रा काले वर्ण, लंबे केश, बड़े-बड़े दांत तथा भयंकर रूप वाली कन्या है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कड़क बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया है।
सूर्य और छाया की चौथी संतान हैं सावर्णि मनु। वैवस्वत मनु की ही तरह वे इस मन्वन्तर के पश्चांत अगले यानि आठवें मन्वन्तर के अधिपति होंगे।
संज्ञा के बारे में जानकारी मिलने के बाद अपना तेज कम करके सूर्य घोड़ा बनकर उनके पास गए। संज्ञा उस समय अश्विनी यानि घोड़ी के रूप में थी। दोनों के संयोग से जुड़वां अश्विनीकुमारों की उत्पत्ति हुई जो देवताओं के वैद्य हैं। कहते हैं कि दधीचि से मधु-विद्या सीखने के लिये उनके धड़ पर घोड़े का सिर रख दिया गया था, और तब उनसे मधुविद्या सीखी थी। अत्यं्त रूपवान माने जाने वाले अश्विनीकुमार नासत्य और दस्त्र के नाम से भी प्रसिद्ध हुए।
सूर्य की सबसे छोटी और संज्ञा की छठी संतान हैं रेवंत जो उनके पुनर्मिलन के बाद जन्मीा थी। रेवंत निरन्तर भगवान सूर्य की सेवा में रहते हैं।
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
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