धर्म एवं ज्योतिष
आषाढ़ 2025: कब से हो रहा है शुरू, क्या करें-क्या न करें, भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जुड़ा ये महीना
12 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में साल का 12 महीना बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है. प्रत्येक महीना किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ का माह शुरू होने वाला है और आषाढ़ का माह विशेष रूप से पवित्र माना जाता है. इस महीने से मौसम में भी अहम बदलाव देखने को मिलता है. इसके अलावा इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी अधिक होता है. आषाढ़ माह में भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा-आराधना करने का विधान है. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि कब से शुरू हो रहा है आषाढ़ का माह और इस महीने क्या करने से बचना चाहिए.
अब भूलकर भी ना करें ये काम
कि हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ महीने की शुरुआत 12 जून से हो रही है, जिसका समापन 11 जुलाई को होगा. इस दौरान भारी बारिश होती है और गर्मी से लोगों को राहत मिलती है. इसी महीने एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं. इसी महीने चातुर्मास की भी शुरुआत होती है. चातुर्मास में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे गृह प्रवेश, शादी, सगाई आदि संस्कार नहीं किए जाते हैं. इतना ही नहीं, इस महीने कुछ चीजों को करने से भी बचना चाहिए.
ना करें मांस और मदिरा का सेवन
आषाढ़ महीने में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. इसके साथ ही, इस महीने तामसिक भोजन भी नहीं ग्रहण करना चाहिए. विशेष तौर पर देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होने के बाद तो गलती से भी मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही इस महीने धार्मिक नियमों के उल्लंघन से भी बचना चाहिए. झूठ बोलना, छल-कपट, चोरी जैसे कर्मों से दूर रहना चाहिए. इस माह वृक्षों की कटाई से भी परहेज करना चाहिए.
इस महीने करें यह काम
इस महीने भगवान श्री हरि विष्णु की आराधना करनी चाहिए. विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना करें. इस महीने गुरु पूर्णिमा का भी पर्व मनाया जाता है, इसलिए अपने गुरु का सम्मान करें और उनके आदेश का पालन करें. इसके साथ ही, इस महीने जल, छाता और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए. ऐसा करने से श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
पुरी की परंपरा उदयपुर में... ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान ने लिया विश्राम, दर्शन के लिए 15 दिन का इंतजार!
12 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उदयपुर के ऐतिहासिक जगदीश मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ का विशेष जेष्टांगन स्नान परंपरागत रूप से संपन्न हुआ. यह अनुष्ठान ठीक उसी प्रकार किया गया जैसे जगन्नाथ पुरी में होता है. सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे.
मंदिर के पुजारी विनोद पुजारी ने बताया कि ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी भगवान सहन नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष स्नान कराया जाता है. भगवान का दूध, दही, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक किया गया. इसके बाद 108 कलशों से शुद्ध जल स्नान भी हुआ. अभिषेक के बाद भगवान को करंट टाइम अवस्था में रखा जाता है, जिसे बीमार अवस्था कहा जाता है.
विश्राम काल में नहीं होते सामान्य दर्शन
इस अवधि में भगवान मंदिर के गर्भगृह में विश्राम करते हैं और उन्हें सामान्य दर्शन के लिए नहीं रखा जाता. भगवान की विशेष सेवा की जाती है और उन्हें हल्का, सुपाच्य भोग अर्पित किया जाता है. पुजारी विनोद ने बताया कि यह परंपरा जगन्नाथ पुरी से प्रेरित होकर शुरू की गई थी, क्योंकि उदयपुर का जगदीश मंदिर भी उसी परंपरा और स्थापत्य शैली पर आधारित है. जेष्टांगन स्नान के बाद भगवान 15 दिन तक आराम करते हैं. फिर आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान नगर भ्रमण के लिए चांदी के रथ पर सवार होकर निकलते हैं. यह रथ यात्रा उदयपुर शहर की सबसे प्रमुख धार्मिक घटनाओं में से एक है. इसे विश्व की तीसरी सबसे बड़ी रथ यात्रा माना जाता है.
धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और देश-विदेश से पर्यटक इस विशाल रथ यात्रा में भाग लेते हैं. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रह विशेष रूप से सजाए गए रथ में विराजते हैं और शहर के मुख्य मार्गों से होकर मंदिर लौटते हैं. यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि यह संस्कृति और विरासत का जीवंत उदाहरण भी है, जो हर साल उदयपुर को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से एक नई पहचान दिलाती है.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
12 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्वभाव में आकस्मिक परिवर्तन ही सफलता है, व्यवसाय में उन्नति होगी।
वृष राशि :- कार्य में सफलता मिलेगी, मान-सम्मान की प्राप्ति होगी, शत्रु वर्ग का जोर होगा।
मिथुन राशि :- यह सप्ताह उत्तम फलकारक है, अधिकारियों का पूर्ण सहयोग अवश्य मिलेगा।
कर्क राशि :- नौकरी में व्यावधान हो सकता है, व्यवसाय ठीक नहीं है, भवुकता से हानि होगी।
सिंह राशि :- आनंद का अनुभव करेंगे, केतु गृह पीड़ा कारक है, काफी मतभेद अवश्य होंगे।
कन्या राशि :- मनोरंजन में अति हर्ष होगा, व्यवसाय में लाभ होगा तथा कार्य अवश्य होगा।
तुला राशि :- पारिवारिक उत्तर दायित्व की वृद्धि होगी, आमोद-प्रमोद में विरोध अवश्य होगा।
वृश्चिक राशि :- मानसिक तनाव अनावश्यक बढ़ेगा, स्वजनों की सहायता अनुभूति अवश्य होगी।
धनु राशि :- व्यवसाय की उन्नति में आर्थिक स्थिति में विशेष सुधार अवश्य होगा, ध्यान दें।
मकर राशि :- विलास सामग्री का संचय होगा, अधिकारियों की कृपा का लाभ मिलेगा।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्रों से अच्छा सहयोग मिले तथा उत्तम लाभ के योग अवश्य बनेंगे।
मीन राशि :- गृह-कलह, हीन मनोवृत्ति, शरीर पीड़ा, परेशानी अवश्य ही बनेगी, व्यापार में व्यावधान होगा।
महाभारत: क्यों स्त्रियां करती थीं अर्जुन का पीछा, कैसे हुई उलूपी और चित्रांगदा से शादी
11 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पांडवों में अर्जुन सबसे ज्यादा सुदर्शन और आकर्षक थे. इसलिए वह जहां कहीं होते थे, वहां स्त्रियों के चहेते हो जाते थे. जीवनभर स्त्रियां उनकी दीवानी होती रहीं. इस बात के कई किस्से हैं कि अर्जुन को कई स्त्रियां इस तरह घेर लेती थीं या पीछा करती थीं कि भीम और नकुल को उनके बचाव के लिए सामने आना पड़ता था.
जाने माने पौराणिक कथा विशेषज्ञ और लेखक देवदत्त पटनायक ने अपनी नई किताब सती सावित्री में लिखा, अर्जुन जब वनवास गमन कर रहे थे तो नकुल ने स्त्रियों को उनका पीछा करने से रोकने के लिए उनके चेहरे पर धूल मल दी. अर्जुन का रूप -लावण्य इतना आकर्षक था कि स्त्रियां हर जगह उनका पीछा करती थीं. इसी में उन्होंने लिखा कि कैसे कई स्त्रियों ने अर्जुन से संपर्क किया.
कुंती से अर्जुन का जन्म इंद्र के जरिए हुआ था. लिहाजा वह इंद्र की ही तरह सुंदर और मनोहारी थे. महाभारत में उन्हें बहुत सुंदर, आकर्षक और वीर पुरुष के रूप में बताया गया है. अपने रूप, शील, और युद्ध कौशल की वजह से वह ना केवल युद्ध के मैदान में बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में भी कई लोगों, विशेषकर स्त्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र थे.
हर जगह स्त्रियां उनकी ओर आकर्षित होती थीं
महाभारत में कई प्रसंग हैं जो बताते हैं कि जब पांडव वनवास में थे, तब अर्जुन की सुंदरता और व्यक्तित्व का प्रभाव इतना था कि कई स्त्रियां उनके प्रति आकर्षित होती थीं. कुछ कथाओं में कहा गया कि अर्जुन का आकर्षण इतना प्रबल था कि उनके भाइयों विशेष रूप से भीम को उन्हें कुछ उत्साही प्रशंसकों से बचाने की स्थिति में आना पड़ता था.
अर्जुन के जीवन में कई ऐसी स्त्रियां आईं, जिनसे उन्हें प्यार भी हुआ. उन्होंने शादियां भी कीं. कई को उन्हें इनकार करना पड़ा. उन्हें इसकी नाराजगी भी झेलनी पड़ी.
चित्रांगदा से अर्जुन का प्यार और शादी कैसे हुई
जब पांडवों को द्रौपदी के अपमान और जुए में हार के बाद 12 वर्ष के वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास की सजा मिली तो अर्जुन ने कुछ समय के लिए तीर्थयात्रा पर जाने का निर्णय लिया. तब वह देश के कई हिस्सों का भ्रमण करते हुए मणिपुर पहुंचे, जो उस समय एक समृद्ध और शक्तिशाली राज्य था. मणिपुर के राजा चित्रवाहन थे. उनकी पुत्री चित्रांगदा सुंदर, वीर और कुशल योद्धा थी.
जब दोनों ने पहली बार एक दूसरे को देखा
मणिपुर पहुंचने पर अर्जुन ने चित्रांगदा को देखा, जो अपनी सुंदरता, शालीनता और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध थी. चित्रांगदा भी अर्जुन के रूप, वीरता और ख्याति से प्रभावित हुई. दोनों एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हो गए. अर्जुन ने राजा चित्रवाहन से चित्रांगदा का हाथ मांगा.
उर्वशी भी प्यार करती थी लेकिन क्यों नाराज हुई
जब अर्जुन इंद्र के दरबार में गए, तब अप्सरा उर्वशी उनके प्रति आकर्षित हुई. उसने अर्जुन को प्रेम प्रस्ताव दिया, लेकिन अर्जुन ने उसे माता के समान माना (क्योंकि वह उनके पूर्वज पुरुरवा की पत्नी थी). तब उर्वशी ने क्रोधित होकर अर्जुन को श्राप दिया कि वह एक वर्ष तक नपुंसक रहेंगे. हालांकि यह श्राप बाद में अज्ञातवास में अर्जुन के लिए वरदान साबित हुआ, जब वे बृहन्नला के रूप में रहे.
दुर्योधन की पत्नी तक उन्हें चाहती थी
महाभारत में ये भी कहा गया है कि दुर्योधन से शादी से पहले उसकी पत्नी भानुमति अर्जुन की प्रशंसक थी. वह उनसे शादी करना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका. उसकी शादी दुर्योधन से हुई. लेकिन माना जाता है कि जब महाभारत के युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु हो गई तो अपने कुनबे को बचाने के लिए जब भानुमति को अर्जुन से विवाह का सुझाव दिया गया तो उसने इसे स्वीकार कर लिया. अर्जुन से शादी कर ली. उसके बाद वह उनकी पत्नी बनकर रहीं.
रात को तकिये के नीचे रखें नमक और देखें चमत्कार, बुरी नजर और गरीबी से मिले छुटकारा
11 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कभी कभी हमारी जिंदगी में परेशानियां बिना किसी वजह के बढ़ती जाती हैं. मन बेचैन रहता है, नींद नहीं आती, या फिर बुरे सपने सताते हैं. ऐसे में लोग कई उपाय करते हैं – मंदिर जाते हैं, पूजा करवाते हैं, तावीज़ पहनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर में मौजूद एक आम चीज़, यानी नमक, आपकी कई समस्याओं का हल हो सकता है? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.
ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि अगर रात को सोते समय तकिये के नीचे नमक रखा जाए, तो इससे जीवन में काफी बदलाव महसूस किया जा सकता है. यह उपाय न सिर्फ मानसिक शांति देता है बल्कि बुरी शक्तियों को भी दूर करता है. आइए जानते हैं कैसे काम करता है यह आसान लेकिन असरदार उपाय.
नकारात्मक ऊर्जा को करता है खत्म
रात को सोने से पहले अगर आप एक छोटी सी नमक की पोटली बनाकर तकिये के नीचे रख लें, तो इससे आपके आस पास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा धीरे धीरे खत्म होने लगती है. नमक में ऐसी क्षमता होती है कि वह आस पास की बुरी तरंगों को सोख लेता है. जो लोग नींद में डर जाते हैं या जिन्हें अक्सर बुरे सपने आते हैं, उनके लिए यह उपाय बेहद फायदेमंद है. कई बार तो इससे रात की नींद इतनी अच्छी हो जाती है कि सुबह उठते ही मन हल्का महसूस होता है.
बुरी नजर से मिलती है राहत
अगर आपको लगता है कि आप बार बार बीमार पड़ते हैं या बिना कारण कोई काम नहीं बन रहा है, तो यह बुरी नजर का असर हो सकता है. ऐसे में नमक की यह पोटली आपकी रक्षा कर सकती है. तकिये के नीचे रखा नमक न सिर्फ बुरी नजर को दूर करता है बल्कि आपकी ऊर्जा को भी संतुलित करता है.
धन आकर्षण में भी मददगार
नमक को अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह धन को भी आकर्षित कर सकता है. इसके लिए हर रात सोने से पहले नमक की पोटली को हाथ में लें और ‘ॐ धनाय नमः’ मंत्र का 11 बार जाप करें. फिर उस पोटली को तकिये के नीचे रखकर सो जाएं. यह प्रयोग लगातार कुछ दिनों तक करें, आप खुद फर्क महसूस करेंगे.
वास्तु दोष को भी करता है दूर
अगर आपके घर में लगातार तनाव बना रहता है या चीज़ें गड़बड़ होती रहती हैं, तो यह किसी वास्तु दोष का संकेत हो सकता है. शुक्रवार की रात को नमक की पोटली बनाकर तकिये के नीचे रखें और हर शुक्रवार को पोटली बदलते रहें. यह प्रक्रिया लगातार 11 शुक्रवार तक करें. माना जाता है कि इससे घर का माहौल सुधरने लगता है और धीरे धीरे घर में सुख शांति बढ़ती है.
ध्यान रखने वाली बातें
-नमक की पोटली में केवल सादा समुद्री नमक ही रखें.
-हर हफ्ते इसे बदलना न भूलें.
-इस्तेमाल किए गए नमक को बहते पानी में बहा दें.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
11 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे, प्रयत्नशीलता तथा सफलता से लाभ होगा।
वृष राशि :- समय पर सोचे कार्य बनेंगे, कार्य तत्परता से लाभ अवश्य ही होगा।
मिथुन राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक होगा, व्यावसायिक क्षमता में वृद्धि अवश्य होगी।
कर्क राशि :- परिश्रम में सफलता सम्भव है, सोच-समझ कर कार्य करें।
सिंह राशि :- कार्य वृत्ति में सुधार, चिन्ताऐं कम हों, सफलता के साधन अवश्य बनेंगे।
कन्या राशि :- परिश्रम करने पर भी सफलता दिखायी न देवे, कार्य स्थगित रखना ठीक होगा।
तुला राशि :- कुछ लोगों से मेल-मिलाप सम्भव, कार्य क्षमता अनुकूल अवश्य होगी।
वृश्चिक राशि :- स्वास्थ नरम, चोटादि का भय होगा, मनोबल उत्साहवर्धक होगा।
धनु राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, दैनिक कार्यवृत्ति में सुधार होगा, ध्यान रखें।
मकर राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक हो, इष्ट मित्रों से परेशानी, धोखे से बचें।
कुंभ राशि :- कार्य-व्यावसाय गति मंद होते हुए भी साधन सम्पन्नता बनकर कार्य होगा।
मीन राशि :- विघटनकारी तत्व परेशान करें, अनायास कुछ बाधायें बन जायेंगी।
अगर कर रहे हैं एकादशी व्रत, तो ये 3 काम भूलकर भी न करें...नाराज़ हो सकते हैं भगवान विष्णु
10 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को विशेष पुण्यदायक माना गया है. यह न केवल आत्मशुद्धि का माध्यम है, बल्कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर भी है. सालभर में 24 एकादशियाँ आती हैं हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक.
कि एकादशी व्रत सिर्फ व्रत रखने का नाम नहीं, बल्कि एक नियमबद्ध तपस्या है. यदि इसमें कुछ गलतियां हो जाएं, तो व्रत अधूरा रह जाता है और इसका पूरा फल नहीं मिल पाता.
एकादशी व्रत के लाभ
पं. शुक्ला के अनुसार, “जो भी श्रद्धा और नियम से एकादशी का व्रत करता है, उसके समस्त पापों का क्षय होता है और उसे जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.” भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख भी बढ़ते हैं.
व्रत को अधूरा बना देती हैं ये सामान्य गलतियां
दोपहर में सोना या सुबह देर तक उठना:
व्रत के दिन आलस्य वर्जित माना गया है. दोपहर में सोने से मानसिक शुद्धता पर असर पड़ता है और शास्त्रों के अनुसार व्रत का फल कम हो जाता है.
लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन:
एकादशी के दिन व्रती को पूरी तरह सात्विक आहार पर रहना चाहिए. प्याज, लहसुन जैसे तामसिक तत्वों का सेवन व्रत की पवित्रता को प्रभावित करता है.
कटु वचन और नकारात्मकता से परहेज:
किसी को अपशब्द कहना या मन में नकारात्मक विचार लाना व्रत को अपवित्र कर देता है. व्रत के दौरान मन, वाणी और आचरण तीनों में शुद्धता अत्यंत आवश्यक है.
पूजा की विधि और धार्मिक व्यवहार
पं. शुक्ला बताते हैं कि एकादशी के दिन सुबह स्नान कर के भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए, साथ ही तुलसी दल, पीले फूल और पंचामृत का प्रयोग कर उन्हें भोग अर्पण करें. पूरे दिन भक्ति, ध्यान और दान में मन लगाना चाहिए.
व्रत को बनाएं सफल, न कि दिखावा
व्रत का उद्देश्य केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करना है. इसलिए केवल भोजन त्यागना ही नहीं, बल्कि आचरण सुधारना भी व्रत की सफलता की कुंजी है.
बारिश का पानी चमका सकता है आपका भाग्य, घर की इस दिशा में रखें और 11 दिन तक करें ये काम, हो जाएंगे मालामाल!
10 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बारिश का मौसम आते ही ठंडी हवा, हरियाली और सुकून का एहसास होने लगता है. ये मौसम सिर्फ मौसम में बदलाव नहीं लाता, बल्कि हमारे जीवन में भी पॉजिटिव असर डाल सकता है. कई लोग सोचते हैं कि बारिश का पानी बस गंदगी या कीचड़ का कारण होता है, लेकिन वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत खास माना गया है. ऐसा माना जाता है कि बारिश का पानी हमारे जीवन से नकारात्मकता को हटाने और स्वास्थ्य में सुधार लाने की ताकत रखता है. अगर आप बारिश के पानी को सही तरीके से जमा करके कुछ खास उपाय करें, तो पुरानी बीमारियां दूर हो सकती हैं और घर से बुरी नजर हटाई जा सकती है. इससे घर में सुख, शांति और आर्थिक बढ़त भी आती है. आइए जानें बारिश के पानी से कैसे करें ये असरदार उपाय. इस बारे में बता रहे हैं
1. कमजोर चंद्रमा को मजबूत करने का उपाय
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, तो वह मानसिक तनाव, डर, बेचैनी और रात को नींद न आने जैसी समस्याओं से परेशान रहता है. ऐसे लोगों को हरे रंग की कांच की बोतल में बारिश का पानी भरकर घर के किसी शांत कोने में रखना चाहिए. ध्यान रखें कि यह पानी अगले साल की बारिश से पहले तक ही रखा जाए, फिर पुराना पानी निकालकर नया पानी भरना होगा. इस उपाय से मानसिक शांति मिलती है और डर, चिंता कम होती है.
2. लंबे समय से चल रही बीमारी के लिए
कभी-कभी बीमारियां ऐसी होती हैं जिनका कोई कारण समझ नहीं आता और डॉक्टर भी साफ जवाब नहीं दे पाते. ऐसे में बारिश का शुद्ध पानी एक साफ स्टील या तांबे के बर्तन में जमा करें. फिर उस पानी से भगवान शिव की पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें. यह प्रक्रिया नियमित करें, धीरे-धीरे शरीर में सुधार महसूस होने लगेगा और कमजोरी भी दूर होगी.
3. घर से बुरी नजर हटाने का असरदार तरीका
अगर आपको लगता है कि घर का माहौल बार-बार खराब हो रहा है, बिना कारण झगड़े, परेशानियां या आर्थिक नुकसान हो रहा है, तो एक आसान उपाय करें. बारिश का पानी एक साफ बर्तन में इकट्ठा करें और उसे हनुमानजी के सामने रखें. हर दिन उसी स्थान पर बैठकर 51 बार हनुमान चालीसा पढ़ें. यह उपाय कम से कम 30 दिन करें और फिर उस पानी से पूरे घर में छिड़काव करें. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और शांति का माहौल बनेगा.
4. धन वृद्धि के लिए बारिश का जल उपाय
अगर घर में पैसे की कमी चल रही है या खर्चे अधिक हैं, तो यह उपाय आजमाएं. एक मिट्टी के कुल्हड़ या तांबे के बर्तन में बारिश का पानी भरें और उसमें एक चुटकी हल्दी डाल दें. अब इस पानी को घर के उत्तर दिशा में रखें और प्रतिदिन सुबह उस दिशा में दीपक जलाएं. ऐसा 11 दिन तक करें, इससे आर्थिक स्थिति में सुधार आना शुरू हो जाएगा और लक्ष्मी कृपा बनी रहेगी.
क्यों खास होता है बारिश का पानी?
बारिश का पानी आसमान से सीधे आता है, इसलिए यह प्राकृतिक रूप से पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है. यह किसी रासायनिक प्रक्रिया से नहीं गुजरता, इसलिए पूरी तरह शुद्ध और ऊर्जावान होता है. इसीलिए पुराने समय से लोग इसे इकट्ठा करके पूजा-पाठ, आयुर्वेदिक इलाज में उपयोग करते रहे हैं. यह पानी घर के वातावरण को भी साफ करता है और मन में ताजगी भर देता है
रामायण: कौन थीं वो दो स्त्रियां, जो राम से शादी करना चाहती थीं, इनकार पर क्या हुआ परिणाम
10 Jun, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामायण में कई स्त्रियां राम से विवाह करना चाहती थीं. वो उनके पास विवाह का प्रस्ताव लेकर खुद पहुंचती थीं. लेकिन राम मना कर देते थे कि उनका विवाह सीता से हो चुका है और वह उनके प्रति निष्ठावान रहेंगे. लेकिन दो महिलाएं इनमें एकदम अलग थीं. एक राम को लंबे समय से चाहती थी और एक उनको देखते ही मुग्ध हो गई थी. इनमें से एक से राम ने अगले जन्म में मिलने का वादा किया लेकिन दूसरी से जब मना किया तो परिणाम बहुत खतरनाक निकला.
रामायण में भगवान राम का विवाह केवल सीता से हुआ था. राम एकनिष्ठ पति के रूप में दिखाए गए. जो अपनी पत्नी के अलावा किसी और के बारे में सोचता ही नहीं. हालांकि अयोध्या से लेकर दूसरे राज्यों की कई सुंदर स्त्रियां उन पर मुग्ध थीं. कुछ ने उनसे प्रेम जताया. कुछ ने शादी करने की इच्छा जाहिर की. राम पत्नी सीता के प्रति निष्ठा और धर्म के कारण इसे स्वीकार नहीं किया.
देवदत्त पटनायक ने अपनी नई किताब “सती सावित्री” में कई ऐसी नारीवादी कहानियों का जिक्र किया, जो कभी सामने नहीं आईं इसी में राम के प्रति आकर्षित महिलाओं के बारे में बताया है. वैसे इसका जिक्र रामायण के अरण्यकांड में भी है.
कौन थीं वेदवती, जिनसे राम ने अगले जन्म में मिलने को कहा
सबसे पहले बात वेदवती की, जो राम से प्यार करती थीं, बेशक ये उनकी ओर से ही था. वह राम के पास शादी के लिए गईं. राम ने उन्हें मना जरूर किया लेकिन ये कहा कि वह अगले जन्म में उन्हें जरूर मिलेंगे. उसे तब तक प्रतीक्षा करनी होगी, जब तक वह कृष्ण का अवतार लेकर धरती पर दोबारा नहीं आ जाते. फिर ऐसा हुआ भी. ये भी कहा जाता है कि वेदवती अगले जन्म में रुक्मिणी के रूप में उनसे मिलीं.
बहुत सुंदर थीं और विष्णु भक्त
वेदवती एक पौराणिक चरित्र हैं, जिनका उल्लेख वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में मिलता है. वह एक तपस्विनी थीं, जिन्हें भगवान विष्णु की भक्त और अत्यंत सुंदर माना जाता है. वेदवती कुशध्वज ऋषि की पुत्री थीं. वह बचपन से ही भगवान विष्णु की उपासना करती थीं. उनका लक्ष्य था कि वह भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में प्राप्त करें. इसके लिए उन्होंने कठिन तप किया.
तब उन्होंने राम के पास जाकर शादी की पेशकश की
फिर विष्णु के अवतार भगवान राम जब त्रेता युग में धरती पर आए तो वेदवती ने उन्हें देखा. उनके पास पहुंचीं. उनसे विवाह करने की पेशकश की. ये उल्लेख मिलता है कि वेदवती राम को भगवान विष्णु के रूप में पहचानती थीं. तब राम ने वेदवती को बताया कि वह इस बार तो केवल सीता के पति हैं. लिहाजा इस जन्म में उन्हें स्वीकार नहीं कर सकते लेकिन अगले जन्म में जरूर वह उनके जीवन में रहेंगी.
वेदवती ने रावण को कौन सा शाप दिया
वेदवती की कहानी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब लंकापति रावण ने उनकी सुंदरता पर मोहित होकर उनका अपहरण करने की कोशिश की. जबरदस्ती की कोशिश की. तब वेदवती ने रावण को शाप दिया कि उसकी मृत्यु एक स्त्री के कारण होगी. इसके बाद वेदवती ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए अग्नि में प्रवेश किया. प्राण त्याग दिए.
राम पर मुग्ध होने वाली दूसरी स्त्री कौन थी
राम पर आकर्षित और मुग्ध होने वाली दूसरी स्त्री शूर्पणखा थी, जिसने ना केवल राम के पास जाकर ये कहा कि वह उनको चाहने लगी है बल्कि शादी भी करना चाहती है. उसने राम को तरह तरह से लुभाने की कोशिश की, लेकिन राम ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया. राम ने मजाक में कहा कि वह पहले से ही विवाहित हैं. शूर्पणखा को लक्ष्मण की ओर इशारा किया, जिसके बाद लक्ष्मण ने भी उसे अस्वीकार कर दिया.
तब शूर्पणखा ने सीता पर हमला किया. फिर इससे नाराज लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काट दी. चूंकि वह रावण की बहन थी. लिहाजा ये घटना आगे चलकर रावण के साथ युद्ध का कारण बनी.
तभी सीता को राम से प्यार हो गया था
पटनायक की इसी किताब में ये भी बताया गया है कि सीता के लिए शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा सकने की प्रतियोगिता बेशक रखी गई थी लेकिन प्रतियोगिता से पहले जब राम और सीता की मुलाकात एक उद्यान में होती है, तो उनसे प्यार करने लगती हैं, उनके साथ रहना चाहती हैं. उन्हें विश्वास हो गया था कि ये प्रतियोगिता तो राम ही जीतेंगे. ऐसा ही हुआ भी.
जिस पर्वत पर रहते थे राम, बगल में प्रकट हुए हनुमान, सुर्खियों में अनजान जगह
10 Jun, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश में बजरंगबली के अनेक मंदिर हैं, लेकिन चित्रकूट में एक ऐसा मंदिर है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं. इसे बरहा हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहां बजरंगबली के दर्शन मात्र से ही भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. यह मंदिर श्रद्धा का प्रतीक है. भक्त कामदगिरि की परिक्रमा करते समय इस मंदिर में पूजा जरूर करते हैं. बरहा हनुमान मंदिर चित्रकूट की कामतानाथ परिक्रमा मार्ग पर है. इसी जगह पर भगवान राम अपने वनवास के दौरान 11 वर्ष 6 माह तक माता सीता और लक्ष्मण के साथ रहे थे. मंदिर के ठीक बगल में वही पहाड़ी है, जिसे प्रभु राम के वनवास काल का साक्षी माना जाता है. इसी पहाड़ी पर भगवान राम रुके थे.
खुद प्रकट हुई प्रतिमा
इस मंदिर के मुख्य पुजारी अमित तिवारी बताते हैं कि कामतानाथ परिक्रमा मार्ग में कुल चार पवित्र द्वार हैं. यह मंदिर तीसरे द्वार पर है. यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है. पुजारी अमित तिवारी के अनुसार, बरहा हनुमान की यह प्रतिमा स्वयंभू है. यह मूर्ति यहां स्वतः प्रकट हुई थी, जो अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी मानी जाती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां जो भी सच्चे मन से आता है और बजरंगबली से प्रार्थना करता है, उसकी हर मनोकामना जरूर पूरी होती है.
इस दिन उमड़ता हुजूम
बरहा हनुमान मंदिर में सप्ताह के सभी दिन भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ बड़े आयोजन के साथ होता है. इन आयोजनों के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है. भक्त परिक्रमा मार्ग पर पदयात्रा करते हुए हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. कई श्रद्धालु यहां नियमित रूप से 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
10 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- आशानुकूल सफलता से संतोष तथा कुछ सफलता के साधन बनेंगे।
वृष राशि :- समय आराम से बीते, व्यवसायिक क्षमता का ध्यान अवश्य ही रख सकेंगे।
मिथुन राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा किन्तु इष्ट मित्रों से परेशानी होगी।
कर्क राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक हों, कुटुम्ब की समस्याएं सुलझेंगी, धैर्य से कार्य करेंगे।
सिंह राशि :- प्रतिष्ठा वृद्धि एवं बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा, स्थिति हर्षप्रद बनी रहेगी।
कन्या राशि :- संघर्ष में सफलता से संतोष, व्यवसायिक क्षमता में अनुकूलता बनी रहेगी।
तुला राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, कार्यक्षमता बढ़े, समाज में प्रतिष्ठा के योग बनेंगे।
वृश्चिक राशि :- सामाजिक कार्यों में सुधार, कार्यगति में अनुकूलता, इष्ट मित्र सुखवर्धक हों।
धनु राशि :- अचानक कोई शुभ समाचार प्राप्त हो, कार्यगति में सुधार होगा, समय का ध्यान रखें।
मकर राशि :- स्थिति यथावत रखें, समय पर सोचे कार्य पूर्ण होंगे, कार्य में सुधार हो।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुखवर्धक होंगे, शरीर कष्ट, चिन्ता असमंजस की स्थिति बने।
मीन राशि :- इष्ट मित्र सहायक रहेंगे, दैनिक कार्यगति अनुकूल बनी ही रहेगी।
कपूर के ये आसान टोटके बदल सकते हैं आपकी किस्मत, धन, स्वास्थ्य समेत हर सुख की होगी प्राप्ति
9 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमारे घर की पूजा थाली में रोज़ जलने वाला कपूर सिर्फ एक धार्मिक वस्तु नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली ऊर्जा का स्रोत है. आयुर्वेद से लेकर वास्तु और ज्योतिष तक, हर परंपरा में कपूर को एक शुद्धकर्ता, रोगनाशक और सौभाग्य लाने वाला माना गया है. आरती के समय कपूर के जलाने से पूरा वातावरण सकारात्मक हो जाता है और इससे मन व मस्तिष्क को शांति भी मिलती है. औषधी के रूप में कपूर के वैसे तो कई फायदे हैं लेकिन तंत्र शास्त्र में संकट कारक माना गया है. कपूर का एक छोटा सा उपाय भी कई तरह के संकटों को दूर करता है और मालामाल बना सकता है. आइए जानते हैं कपूर से किए जाने वाले इन चमत्कारी उपाय के बारे में…
इस उपाय से हर अड़चन होगी दूर
तंत्र शास्त्र के अनुसार, हर दिन सुबह, शाम और रात के समय तीन बार कपूर को घी में भिगो लें और फिर जलाएं. इसके बाद कपूर को पूरे घर में दिखाएं. साथ ही घर के बाथरूम में कपूर की 2 टिकिया रख दें. ऐसा करने से देव दोष, पितृ दोष और कालसर्प दोष भी दूर होता है और जीवन में चल रहीं अड़चन भी दूर हो जाती है.
इस उपाय से धन की होगी प्राप्ति
मेहनत करने के बाद भी अच्छा फल प्राप्त नहीं हो रहा है तो गुलाब के फूल में कपूर का टुकड़ा रख दें. इसके बाद शाम के समय फूल में रखे कपूर को जला दें और फूल को देवी दुर्गा को अर्पित कर दें. ऐसा करने से आपको मेहनत का फल मिलेगा और अचानक धन की प्राप्ति के योग भी बनना शुरू हो जाएंगे. ध्यान रहे कि यह कार्य आपको लगातार 43 दिनों तक करना है. अगर आप नवरात्रि में इसको प्रांरभ करते हैं तो ज्यादा फल मिलेगा.
इस उपाय से भाग्य देगा साथ
अगर आपका भाग्य साथ नहीं दे रहा है तो पानी में कपूर के तेल की कुछ बूंदों को डालकर नहाएं. यह ना केवल आपको पूरी तरह फ्रेश और एक्टिव रखेगा बल्कि आपका भाग्योदय भी होगा. वहीं अगर आप नहाने के पानी में चमेली के तेल की कुछ बूंदें भी डाल लेंगे तो इससे राहु, केतु और शनि का दोष भी दूर हो जाएगा लेकिन यह उपाय केवल आप शनिवार के दिन ही करें.
इस उपाय से महालक्ष्मी की होगी कृपा
बार-बार धन की हानि हो रही है या फिर बैंक बैलेंस नहीं बढ़ रहा है तो रात के समय में रसोई समेटने के बाद चांदी की कटोरी में लौंग और कपूर जला दें. संभव हो सके तो यह कार्य आप हर दिन करें, ऐसा करने से महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होगी और धन-धान्य में वृद्धि होगी. साथ ही धन प्राप्ति के योग बनने से बैंक बैलेंस भी बढ़ेगा.
इस उपाय से वास्तु दोष होगा दूर
अगर आपको लग रहा है कि घर के इस स्थान पर वास्तु दोष हो रहा है तो उस स्थान पर कपूर की 2 टिकियां रख दें. जब वह टिकिया गल जाए तो फिर दूसरी टो टिकिया रख दें. ऐसा करने से घर का वास्तु दोष दूर होगा. साथ ही आप उस स्थान पर रोज कपूर भी जला सकते हैं, ऐसा करने से धीरे-धीरे उस स्थान की ऊर्जा बदलने लगती है और सकारात्मक माहौल हो जाता है.
राजस्थान के इस मंदिर में महिलाएं निभाती हैं पुजारी की भूमिका... बुधवार लगता भक्तों का मेला, हर मन्नत होती है पूरी!
9 Jun, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागौर के कुचामन सिटी स्थित गणेश डूंगरी मंदिर एक अद्वितीय धार्मिक स्थल है. यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा गणेश मंदिर है जहां पुरुषों के साथ-साथ महिला पुजारी भी पूजा-अर्चना करती हैं. यह परंपरा न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से उल्लेखनीय है बल्कि धार्मिक भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी का प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करती है.
मंदिर कुचामन सिटी की एक ऊंची डूंगरी पर स्थित है. जिसे गणेश डूंगरी कहा जाता है. यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है. आसपास के क्षेत्र में यह मंदिर अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र माना जाता है. गणेश चतुर्थी और हर बुधवार को यहां भारी भीड़ उमड़ती है. श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं. उनकी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं. इसी विश्वास के चलते यह मंदिर दूर-दराज़ से आने वाले भक्तों का भी केंद्र बना हुआ है.
समाज में समानता का प्रतीक
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां महिला पुजारी भी नियमित पूजा करती हैं. आम तौर पर पुजारी का दायित्व पुरुषों को सौंपा जाता है. लेकिन इस मंदिर में महिला पुजारी की उपस्थिति समाज में लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है. यह परंपरा यह दर्शाती है कि महिलाएं भी धार्मिक कर्तव्यों को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निभा सकती हैं.
प्राचीन मूर्ति और मनोकामनाएं पूरी होने का विश्वास
स्थानीय मान्यता के अनुसार यह मंदिर पहाड़ी वाले गणेश मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि यहां एक प्राचीन गणेश मूर्ति स्थित है. स्थानीय पुजारी का कहना है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी को याद करके की जाती है. कुचामन और आसपास के लोग यहां श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं. उनका विश्वास है कि पहाड़ी वाले गणेश जी उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं.
आज का राशिफल: जानिए क्या कहती हैं आपकी किस्मत की सितारे
9 Jun, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनाव, उदर विकार, मित्र लाभ, राज भय, पारिवारिक समस्या उभरेगी।
वृष राशि :- अनुभव सुख, मंगल कार्य, विरोध, मामले मुकदमे में जीत की संभावना है।
मिथुन राशि :- कुसंगत से हानि, विरोध, भय, यात्रा, सामाजिक कार्यों में सावधानी रखें।
कर्क राशि :- भूमि लाभ, स्त्री सुख, हर्ष, प्रगति, स्थिति में सुधार, लाभ की गति बढ़ेगी।
सिंह राशि :- तनाव, प्रवास से बचें, विरोध की चिन्ता, राज कार्यों में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
कन्या राशि :- भूमि लाभ, स्त्री सुख, हर्ष, प्रगति की स्थिति में सुधार, लाभ होगा।
तुला राशि :- प्रगति, वाहन का भय, भूमि लाभ, कलह, कुछ अच्छे कार्य भी होंगे।
वृश्चिक राशि :- कार्य सिद्धी, विरोध, लाभ, कष्ट, हर्ष, व्यय होगा, व्यापार में सुधार होगा।
धनु राशि :- यात्रा में हानि, मातृ-पितृ कष्ट, व्यय की कमी किन्तु कुछ व्यवसाय भी होगा।
मकर राशि :- शुभ कार्य, वाहन आदि रोग, धार्मिक-कर्म, कुछ अच्छे कार्य हो सकते हैं।
कुंभ राशि :- अभीष्ट सिद्धी, राज भय, कार्य में बाधा, राजकार्य में रुकावट होगी।
मीन राशि :- अल्प हानि, रोग भय, सम्पर्क लाभ, राज कार्यों में विलम्ब तथा परेशानी होगी।
भूलकर भी पर्स में न रखें ये चीजें, कर देंगी कंगाल, रूठ जाएंगी मां लक्ष्मी, तरस जाएंगे एक-एक पैसे को!
8 Jun, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वास्तु शास्त्र सिर्फ हमारे घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजों पर भी असर डालता है, उन्हीं में से एक पर्स भी है. पर्स आर्थिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है और धन का प्रतीक भी माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ चीजें ऐसी हैं जो पर्स में बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए.
इससे माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और जीवन पर बुरा असर पड़ सकता है. आर्थिक तंगी भी झेलनी पड़ सकती है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक पर्स को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए,
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि हमारे घर में पर्स माता लक्ष्मी का ही प्रतीक माना जाता है. वहीं वास्तु शास्त्र में पर्स का बहुत खास महत्व होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ ऐसी चीजें हैं जो पर्स में बिल्कुल भी नहीं रखनी चाहिए, इससे आर्थिक तंगी हो सकती है और धन हानि के साथ बुरी ऊर्जा बढ़ सकती है.
इन चीजों को भूलकर भी न रखें पर्स में
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि सबसे पहले पर्स फटा या पुराना बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए. इससे माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और धन हानि हो सकती है. अगर बहुत महंगा नहीं ले सकते तो सामान्य पर्स खरीदें पर फटा हुआ पर्स न रखें.
फटा नोट
अगर आप भी अपने पर्स में फटा या पुराना नोट रखते हैं, तो तुरंत पर्स से निकाल दें, नहीं तो आपको बार-बार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है. अगर आप व्यापार करते हैं तो व्यापार में भी घाटा हो सकता है.
लोहे की चीज
अपने पर्स में भूलकर भी छोटे-मोटे लोहे की चीजें नहीं रखनी चाहिए जैसे सेफ्टी पिन, चाबियां आदि. इससे अच्छी ऊर्जा का बहाव रुकता है और धन हानि की संभावना बढ़ जाती है.
दवाई
अपने पर्स में भूलकर भी दवाई नहीं रखनी चाहिए, इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है. आमदनी की जगह ज्यादा खर्च बढ़ सकता है.
किसी मृत व्यक्ति की तस्वीर
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अपने पर्स में भूलकर भी किसी मृत व्यक्ति की तस्वीर नहीं रखनी चाहिए, इससे आर्थिक परेशानी आ सकती है. नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. पर्स में सिर्फ देवी-देवताओं की तस्वीर रखें.
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