धर्म एवं ज्योतिष
बीमारी से छुटकारे का उपाय! पौष पूर्णिमा की रात चुपचाप करें ये काम, मां लक्ष्मी की कृपा भी मिलेगी
29 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू पंचांग में पौष मास को पुण्य, साधना और दान का विशेष काल माना गया है. इस माह की पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत ऊंचा होता है. मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति प्राप्त होती है. साथ ही यह तिथि भाग्य को प्रबल करने और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का उत्तम अवसर प्रदान करती है. इस वर्ष पौष पूर्णिमा विशेष शुभ योग में पड़ रही है, जिससे दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए उपाय जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं.
नए साल की पौष पूर्णिमा पर यदि कुछ सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय किए जाएं, तो धन संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों का दान विशेष फलदायी माना गया है. साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है. पौष पूर्णिमा का यह पावन दिन आत्मिक शुद्धि के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का भी श्रेष्ठ अवसर है.
कब मनाई जाएगी पौष पूर्णिमा?
आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, पंचांग के मुताबिक पौष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 3 जनवरी 2026 को दोपहर तीन बजकर 32 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार स्नान-दान की पौष पूर्णिमा 3 जनवरी को मनाई जाएगी.
जरूर करें ये उपाय
1. बहुत समय से अगर बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है, लगातार घर में कोई न कोई बीमारी बनी हुई है, तो पौष माह की पूर्णिमा की रात चावल की खीर बनाएं और इसे चांदी या कांच के बर्तन में ऐसी जगह रखें, जहां चंद्रमा की सीधी रोशनी उसपर पड़े. मध्य रात्रि के बाद इस अमृतमयी खीर को परिवार के साथ ग्रहण करें. यह उपाय उत्तम स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है.
2. आर्थिक स्थिति में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, तो पौष मास की पूर्णिमा के दिन 11 पीली कौड़ियों पर हल्दी का तिलक लगाकर मां लक्ष्मी को अर्पित करें. इसके बाद लक्ष्मी जी के मंत्रों का 108 बार जाप करें, फिर इन कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें. इससे सालभर बरकत बनी रहती है.
3. घर में लगातार पारिवारिक कलह मचा रहता है, तो पौष मास की पूर्णिमा के दिन चांदी के लोटे में जल, कच्चा दूध, चीनी और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. यह उपाय सौभाग्य में वृद्धि करता है और परिवार में शांति बनी रहती है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (29 दिसंबर 2025)
29 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- कुटुम्ब की चिन्ताएं मन व्यग्र रखे, किसी के कष्ट के कारण थकावट बढ़ेगी।
वृष राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, बिगड़े हुए कार्य अवश्य ही बनेंगे।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र से तनाव, क्लेश व अशांति तथा कार्य व्यवसाय में बाधा अवश्य हो।
कर्क राशि :- दैनिक कार्यगति अनुकूल, परिश्रम अधिक करना पड़ेगा।
सिंह राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सुख के साधन बनें, तनाव क्लेश व अशांति होगी।
कन्या राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल मिलाप एवं समस्याएं सुधरे, सुख के कार्य अवश्य हो।
तुला राशि :- साधन सम्पन्नता के योग बनें, कुटुम्ब में क्लेश तथा धन की हानि हो।
वृश्चिक राशि :- असमंजस बना रहे, प्रभुत्व वृद्धि तथा कार्यगति अनुकूल बनी रहे।
धनु राशि :- असमर्थता का वातावरण क्लेश युक्त रहे, अवरोध, विवाद से बचकर चले।
मकर राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष होवे तथा बिगड़े कार्य अवश्य बनें।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक हो, बड़े-बड़े लोगों से मेलमिलाप होवेगा, ध्यान दें।
मीन राशि :- मनोवृत्ति संवेदनशील हो, धन और शांति नष्ट हो, मानसिक व्यग्रता से बचेंगे।
450 साल पुराने इस पाकड़ के पेड़ ने कैद की बजरंगबली की प्रतिमा, अब नहीं होना चाहते हैं अलग, ये है मान्यता
28 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत प्राचीन काल से ही देवी-देवताओं के साथ-साथ प्रकृति की पूजा करता चला रहा है. प्रकृति में नदियों, पहाड़ों, सूर्य, चंद्रमा, वृक्षों की पूजा भारतीय आस्था का पारंपरिक इतिहास मानी जाती रही है. इसी मान्यता को आगे बढ़ाते हुए सुल्तानपुर जिले में आज हम बताने वाले हैं एक ऐसे पाकड़ वृक्ष के बारे में, जिसकी आयु लगभग 450 वर्षों से भी अधिक पुरानी है. यहां पर एक हनुमान जी की प्रतिमा रखी गई थी. कुछ सालों बाद जब उसे हटाने की कोशिश की गई तो प्रतिमा हटी ही नहीं और पाकड़ वृक्ष ने उस प्रतिमा को अपनी शाखा में कैद कर लिया.
इतना पुराना है इतिहास
सुल्तानपुर मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर बंधुआ कला गांव में स्थित पाकड़ का यह वृक्ष बाबा सहजराम आश्रम के मुख्य द्वार के ठीक सामने स्थित है. इस आश्रम के महंत डॉ. स्वामी दयानंद मुनि लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि जब बाबा सहज राम आश्रम की स्थापना की गई, उसी दरमियान इस पकड़ वृक्ष को भी लगाया गया या पकड़ का वृक्ष लगभग 450 वर्ष की आयु पूरा कर चुका है. यहां पर एक हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई. बाद में जब प्रतिमा को दूसरी जगह पर हटाने का प्रयास किया गया, तब प्रतिमा पकड़ के वृक्ष में जाकर दब गई और लोग उसे हटा नहीं पाए. लोगों का ऐसा मानना है कि हनुमान जी इस वृक्ष से अलग नहीं होना चाहते थे. इसी वजह से उनकी प्रतिमा को इस वृक्ष ने जकड़कर रख लिया है.
बाबा सहज राम आश्रम के मुख्य द्वार पर पकड़ के इस वृक्ष के लोग पूजा करते हैं. मंगलवार के दिन विशेष पूजा का आयोजन होता है. अगर आप भी इस अद्भुत वृक्ष और हनुमान जी का दर्शन करना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर बंधुआ कला गांव में आना होगा. यहां बाबा सहज राम आश्रम के पूरब दिशा पर स्थित मुख्य द्वार के ठीक सामने पकड़ का यह वृक्ष मौजूद है, जो सुल्तानपुर के ऐतिहासिक धरोहर को संजोकर रखे हुए है.
महादेव के गले की शोभा है ये सांप, हर दिन होता है इंसानों से सामना, क्या आप जानते हैं नाम?
28 Dec, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान शंकर के गले में जो सांप है. वह स्पेक्टिकल्ड कोबरा या गेहूंवन है. क़रीब 26 वर्षों से वाइल्ड लाइफ पर काम कर रहे एक्सपर्ट अभिषेक बताते हैं कि ये सांप भारत के चार सबसे विषैले सांपों में शामिल है. बिग फोर का हिस्सा माना जाता है.
सनातन धर्म में भगवान शंकर को जितना विनाशक बताया गया है, उससे कहीं ज्यादा दयालु भी कहा गया है.तन पर बाघ की छाल, हाथ में त्रिशूल और गले में रुद्राक्ष सहित सांपों की माला पहने देव आदि देव महादेव को सभी देवताओं से भिन्न दिखाया जाता है.
शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो महादेव की तस्वीर या प्रतिमा को देख उसमें खो न जाता हो.आश्चर्य की बात यह है कि हर दिन महाकाल के दर्शन के बावजूद भी बेहद कम लोगों को ही उनके गले में हार की लटकते सांप की जानकारी होती है.
इस लेख में हम आपको इस बात की ही जानकारी दे रहे हैं कि महादेव के गले की शोभा बढ़ाने वाला यह सांप आख़िरकार है कौन. क़रीब 26 वर्षों से वाइल्ड लाइफ पर काम कर रहे एक्सपर्ट अभिषेक बताते हैं कि भोलेनाथ के गले में लटके हुए सांप को जब भी हम देखेंगे, तो पाएंगे कि उसके फन पर आंख की आकृति बनी हुई है.
बकौल अभिषेक, धरती पर पाए जाने वाले सांपों की सभी प्रजातियों में सिर्फ स्पेक्टिकल्ड कोबरा ही एक ऐसा सांप है, जिसके फन पर आंख की आकृति बनी होती है, जो पीछे से चश्मे की तरह प्रतीत होती है.यही कारण है कि वैज्ञानिकों ने कोबरा की इस प्रजाति को स्पेक्टिकल्ड नाम दिया है.
ऐसे में यह कहा जा सकता है कि भगवान शंकर के गले की शोभा बढ़ाने वाला यह सांप कोई और नहीं, बल्कि स्पेक्टिकल्ड कोबरा ही है.भारत में इस सांप को गेहूंवन के नाम से जाना जाता है.यह एशिया के चार सबसे विषैले सांपों की सूची में सबसे पहले आता है.
कोबरा, करैत, रसल वाइपर और सॉ स्केल्ड वाइपर, यही वो चार सांप हैं जो भारत में सबसे अधिक दंश और उससे होने वाली मौतों के लिए जिम्मेवार हैं.यही कारण है कि इन्हें बिग फोर के नाम से जाना जाता है.इन चारों में से भी सिर्फ स्पेक्टिकल्ड कोबरा( गेहूंवन) ही ऐसा सांप है, जो देश के ज्यादातर भागों में बड़ी आसानी से देखा जाता है.
देश के ज्यादातर भागों में आसानी से पाए जाने की वजह से इंसानों से इनका सामना भी खूब होता है. ऐसी स्थिति में दंश के मामले कई गुना बढ़ जाते हैं. बेहद तीव्र और घातक न्यूरोटॉक्सिन विष से लैस इन सांपों के दंश के बाद पीड़ित को इलाज के लिए सिर्फ 30 से 45 मिनट का समय मिल पाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (28 दिसंबर 2025)
28 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मानसिक बेचैनी, दुर्घटना ग्रस्त होने से बचें तथा अधिकारियों से तनाव हो।
वृष राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटायें तथा विशेष लाभ हो।
मिथुन राशि :- अचानक उपद्रव कष्टप्रद हो, विशेष कार्य स्थिगित रखे, कार्य अवरोध हो।
कर्क राशि :- परिश्रम से कुछ सफलता मिले, अर्थव्यवस्था की विशेष चिंता बनी रहे।
सिंह राशि :- किसी अपवाद व दुर्घटना से बचें, व्यवसायिक क्षमता में बाधा अवश्य हो।
कन्या राशि :- व्यवसायिक गति उत्तम, चिन्ताएं कम होगी, अवरोध के बाद कार्य बनेंगे।
तुला राशि :- मानसिक बेचैनी, उद्विघ्नता के योग बनेंगे तथा कुटुम्ब में क्लेश होंगे।
वृश्चिक राशि :- सामर्थ्य वृद्धि के साथ तनाव, अडंगे तथा झगड़े संभावित होगे।
धनु राशि :- कुटुम्ब की समस्याएं कष्टप्रद हो तथा व्यर्थ धन का व्यय होगा।
मकर राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटाएं तथा कार्य बनें।
कुंभ राशि :- स्वभाव में खिन्नता, मानसिक बेचैनी तथा बने हुए कार्य अवश्य बनें।
मीन राशि :- तनाव क्लेश व अशांति बनेगी, परिश्रम विफल होंगे, कार्यगति मंद होगी।
लोहड़ी और मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक...!
27 Dec, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत में जनवरी का महीना परंपराओं, फसल उत्सवों और राष्ट्रीय समारोहों की एक जीवंत तस्वीर पेश करता है. जैसे ही नया साल शुरू होता है, देश सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और मौसमी उत्सवों का संगम देखता है. पंजाब में लोहड़ी की गर्मजोशी से लेकर गणतंत्र दिवस के देशभक्ति के जोश तक, हर हफ़्ता कुछ अनोखा लेकर आता है. आइए उन त्योहारों और छुट्टियों के बारे में जानें जो जनवरी 2026 को खास बनाते हैं.
नव वर्ष 01 जनवरी
ग्रेगोरियन नया साल पूरे भारत में सभाओं, उत्सवों और समारोहों के साथ जश्न लेकर आता है. हालांकि यह भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग नहीं है, लेकिन यह एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला अवसर बन गया है, खासकर शहरी इलाकों में. परिवार एक-दूसरे को बधाई देते हैं, संकल्प लेते हैं, और शहर उत्सव की खुशियों से जगमगा उठते हैं. यह सांस्कृतिक समृद्धि से भरे महीने की शुरुआत का प्रतीक है.
पौष पुत्रदा एकादशी 05 जनवरी
यह हिंदू व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे वे लोग रखते हैं जो अपने पूर्वजों से संतान प्राप्ति के लिए आशीर्वाद चाहते. भक्त अनाज नहीं खाते और पूरा दिन प्रार्थना और भक्ति में बिताते हैं. यह त्योहार आस्था, परिवार और वंश की निरंतरता पर ज़ोर देता है, जिससे यह कई परिवारों के लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है.
स्वामी विवेकानंद जयंती 09 जनवरी
स्वामी विवेकानंद की जयंती बहुत श्रद्धा के साथ मनाई जाती है, खासकर युवाओं द्वारा. आध्यात्मिकता, राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भरता पर उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं. स्कूल, कॉलेज और संगठन उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए लेक्चर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं.
लोहड़ी 13 जनवरी
लोहड़ी पंजाब और उत्तरी भारत में मनाया जाने वाला एक फसल का त्योहार है. परिवार बोनफायर के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, लोक गीत गाते हैं, और ढोल की थाप पर नाचते हैं. तिल, गुड़ और मूंगफली जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ बांटी जाती हैं. लोहड़ी सर्दियों के खत्म होने और लंबे दिनों के आने का प्रतीक है, जो गर्मी, समृद्धि और सामुदायिक भावना का प्रतीक है.
मकर संक्रांति 14 जनवरी
मकर संक्रांति पूरे भारत में मनाया जाने वाला एक फसल उत्सव है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है. गुजरात में पतंग उड़ाने, महाराष्ट्र में तिल और गुड़ की मिठाइयां खाने, और उत्तर प्रदेश में नदियों में पवित्र स्नान करने जैसी विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार कई रीति-रिवाजों को एक साथ लाता है. यह नई शुरुआत, समृद्धि और फसल के मौसम के लिए आभार का प्रतीक है.
पोंगल 14-17 जनवरी
तमिलनाडु में पोंगल चार दिन का फसल का त्योहार है जो सूर्य देवता को समर्पित है. परिवार चावल और दूध से बनी पारंपरिक डिश “पोंगल” बनाते हैं और उसे देवताओं को चढ़ाते हैं. हर दिन के अपने खास रीति-रिवाज होते हैं, जिनमें जानवरों की पूजा से लेकर सामुदायिक उत्सव तक शामिल हैं. पोंगल तमिल संस्कृति की गहरी कृषि जड़ों को दिखाता है और यह कृतज्ञता की खुशी भरी अभिव्यक्ति है.
माघ बिहू 15 जनवरी
असम में मनाया जाने वाला माघ बिहू, फसल के मौसम के खत्म होने का प्रतीक है. समुदाय “मेजी” नाम की आग जलाता है, चावल के केक का आनंद लेता है, और पारंपरिक खेलों में भाग लेता है। यह समृद्धि, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव का त्योहार है. बिहू समारोहों की गर्माहट पारिवारिक समारोहों को रोशन करती है और जनवरी की इन अनोखी रातों में उन्हें एक साथ लाती है.
गुरु गोबिंद सिंह जयंती 17 जनवरी
यह सिख त्योहार दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के जन्म की याद में मनाया जाता है. खालसा के संस्थापक के रूप में जाने जाने वाले गुरु गोबिंद सिंह की समानता, साहस और भक्ति की शिक्षाओं को याद किया जाता है। गुरुद्वारों (सिख मंदिरों) में खास प्रार्थनाएं, कीर्तन (भक्ति गीत) और लंगर का आयोजन किया जाता है.
पौष पूर्णिमा 21 जनवरी
पौष पूर्णिमा के दिन लोग नदियों में पवित्र स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. भक्तों का मानना है कि इस पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ करने से आशीर्वाद और समृद्धि मिलती है. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, और कुछ इलाकों में मेले लगते हैं. हिंदू कैलेंडर में इसे एक आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है.
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी
गणतंत्र दिवस भारत की सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय छुट्टियों में से एक है, जिसे 1950 में संविधान को अपनाने की याद में मनाया जाता है. नई दिल्ली में भव्य परेड में भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता दिखाई जाती है. पूरे देश में झंडा फहराने के समारोह आयोजित किए जाते हैं.
बसंत पंचमी 27 जनवरी
मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी, वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। भक्त पीले कपड़े और गहने पहनते हैं, पूजा करते हैं, और ज्ञान और विद्या का उत्सव मनाते हैं। पंजाब में पतंगें उड़ाई जाती हैं, जबकि बंगाल में घरों और समुदायों में सरस्वती पूजा की जाती है. यह त्योहार भक्ति और आनंदमय उत्सव का मिश्रण है.
रोगों से छुटकारा, दु:खों से मुक्ति, मार्तंड सप्तमी कुंडली ठीक करने का दिन, इस विधि से करें सूर्य पूजा
27 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भगवान विष्णु और ग्रहों के स्वामी सूर्य देव को समर्पित पौष मास में कुछ खास तिथियां बेहद चमत्कारी और मानव कल्याण के लिए होती हैं. पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि सूर्य देव को समर्पित है. मार्तंड सप्तमी एक तिथि नहीं बल्कि संपूर्ण जगत को ऊर्जा देने वाले सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त करने का पर्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ग्रहों के स्वामी का प्राकट्य हुआ था. रोगों से छुटकारा, आरोग्यता और प्रकाश की ओर ले जाने वाले सूर्य देव को समर्पित इस दिन उनकी आराधना, पूजा पाठ और स्तोत्र आदि का पाठ करने से चमत्कारी लाभ होते हैं. साल 2025 के आखिरी सप्ताह में मार्तंड सप्तमी का पर्व मनाया जाएगा. मार्तंड सप्तमी के दिन सूर्य देव को कुंडली में मजबूत करने और सभी समस्याओं से छुटकारा पाने का बेहद ही खास दिन होता है.
इनके लिए जरूरी
हरिद्वार के विद्वान धर्माचार्य और शास्त्रों के जानकार पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि 27 दिसंबर को मार्तंड सप्तमी की खास तिथि का आगमन होगा. जिन जातकों की कुंडली में सूर्य देव नीचे स्थान में विराजमान हैं या ऐसे भाव में बैठे हैं जहां से उनका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है तो मार्तंड सप्तमी के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने, उनकी स्तुति करने और स्तोत्र आदि का पाठ करने मात्र से लाभ मिलता है. हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ग्रहों के स्वामी सूर्य देव का प्राकट्य होने की मान्यता बताई गई है.
27 दिसंबर शनिवार को मार्तंड सप्तमी का व्रत किया जाएगा. यह व्रत करने से जीवन में खुशहाली का अनुभव और परिवार में सुख समृद्धि, आरोग्यता बनी रहेगी. 27 दिसंबर शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने दैनिक कार्यों से निवृत होकर मार्तंड सप्तमी के व्रत का संकल्प करें और स्नान आदि करने के बाद गंगा के जल में तिल, जौ, गुड़ आदि डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. इसके बाद सूर्य देव के बीज मंत्र ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ का 108 बार जाप करें और वैदिक मंत्रों से सूर्य देव की उपासना करें. मार्तंड सप्तमी के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से सभी शारीरिक रोगों, दु:खों और समस्याओं से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा सूर्य देव कुंडली में मजबूत होकर आरोग्यता, आत्मविश्वास में वृद्धि और करियर को मजबूत कर देते हैं. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ मार्तंड सप्तमी के दिन करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
वैदिक मंत्र:
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन् ॥
सिर्फ निशान नहीं है तिल, ऊपरी होंठ पर तिल बदल सकता है आपकी किस्मत!
27 Dec, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हर व्यक्ति के शरीर में तिल जरूर होता है. किसी इंसान के शरीर पर तिल जन्म से ही मौजूद होता है, तो किसी के शरीर पर जन्म के कुछ समय बाद तिल उभर आता है. सामान्य रूप से लोग तिल को सिर्फ एक निशान मानते हैं, लेकिन सामुद्रिक शास्त्र में तिल को बहुत ही खास और महत्वपूर्ण संकेत माना गया है. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार शरीर पर मौजूद तिल व्यक्ति के स्वभाव, भाग्य, धन और जीवन से जुड़ी कई बातों का संकेत देता है. तो आइए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि अगर होंठ के दाहिने ऊपर तिल हो तो इंसान पर इसका कैसा प्रभाव पड़ता है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि शरीर के किस हिस्से में तिल है और वह किस ओर है, इसका व्यक्ति के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है. पुरुष और महिला के लिए तिल के शुभ-अशुभ फल भी अलग-अलग माने गए हैं. यही कारण है कि तिल को केवल सुंदरता का प्रतीक नहीं, बल्कि एक संकेतक माना गया है.
पुरुष के दाहिने तरफ तिल बेहद भाग्यशाली
कि सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार अगर पुरुष के शरीर के दाहिने भाग में तिल हो, तो इसे शुभ माना जाता है. ऐसे पुरुष जीवन में तरक्की करते हैं और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं. वहीं, यदि महिला के दाहिने भाग में तिल हो, तो इसे अशुभ संकेत माना गया है और ऐसे मामलों में जीवन में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
ऊपरी होंठ के दाहिने तरफ तिल बेहद शुभ
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अगर किसी पुरुष के ऊपरी होंठ के ऊपर दाहिनी ओर तिल हो, तो वह व्यक्ति बेहद भाग्यशाली माना जाता है. ऐसे लोग धनवान होते हैं और उनके जीवन में पैसों की कभी कमी नहीं होती. उन्हें जीवन में सुख-सुविधाएं आसानी से प्राप्त होती हैं. हालांकि ऐसे लोग धन कमाने के साथ-साथ खर्च भी खूब करते हैं. उनका स्वभाव उदार होता है और वे दिल खोलकर खर्च करते हैं. जरूरतमंदों की मदद करना, परिवार और दोस्तों पर पैसे खर्च करना उनकी आदत में शामिल होता है. कुल मिलाकर, ऐसे लोग ऐशो-आराम और खुशहाल जीवन जीते हैं.
तिल भविष्य और स्वभाव के बारे में संकेत करता है
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, शरीर पर मौजूद तिल हमें हमारे भविष्य और स्वभाव के बारे में कई संकेत देते हैं. हालांकि इन बातों को अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक परंपरागत विद्या के रूप में देखना चाहिए. तिल के ये संकेत व्यक्ति को खुद को समझने और जीवन की दिशा तय करने में मदद कर सकते हैं.
नए साल में शुक्र और मंगल ग्रहों के बीच टकराव...! इन 4 राशियों के लिए मुश्किल समय!
27 Dec, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
2026 की शुरुआत में एक खास ग्रहों की स्थिति बन रही है. जनवरी के पहले हफ्ते में दो बड़े ग्रह, शुक्र और मंगल, आमने-सामने होंगे. इसका असर चार राशियों पर नेगेटिव पड़ेगा.
शुक्र धनु राशि में प्रवेश कर चुका है. मंगल भी धनु राशि में है. 6 जनवरी 2026 को ये दोनों ग्रह एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाएंगे, जिससे शुक्र और मंगल के बीच टकराव होगा.
शुक्र और मंगल एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं. इसी वजह से इन दोनों ग्रहों के करीब आने को ‘शुक्र-मंगल युद्ध’ कहा जाता है. इन ग्रहों के बीच ये टकराव 6 जनवरी सुबह शुरू होकर 10 जनवरी सुबह खत्म होगा. लेकिन ये चार दिन चार राशियों के लिए बहुत मुश्किल रहेंगे.
मेष राशि वालों के लिए, मंगल और शुक्र के बीच तनाव गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ा सकता है. काम में विवाद होने की संभावना है. इस समय विवादों से दूर रहना अच्छा रहेगा. कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए. नींद की कमी और सेहत से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. आर्थिक नुकसान भी हो सकता है.
वृषभ राशि वालों के लिए यह समय तनाव और अशांति ला सकता है. कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो सकती है. अपने गुस्से को कंट्रोल करें. अगर कोई आपकी आलोचना करे तो शांत रहकर सुनें. ध्यान, माइंडफुलनेस और योग का अभ्यास करें. मनोरंजन के लिए भी समय निकालें.
तुला राशि वालों को भी सावधान रहना चाहिए. किसी से विवाद होने की संभावना है. आप मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं. कानूनी मामलों को ध्यान से संभालें. घर और काम को बैलेंस करना मुश्किल हो सकता है. अपनी सेहत का ध्यान रखें. नींद और आराम के लिए समय जरूर निकालें
वृश्चिक राशि वालों को तनाव और चिंता परेशान कर सकती है. आपको लगेगा कि आप मानसिक रूप से थक गए हैं. बहस और झगड़ों से दूर रहें, नहीं तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं. कोशिश करें कि आप हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (27 दिसंबर 2025)
27 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- व्यय बाधा, स्वभाव में उद्विघ्नता तथा दु:ख कष्ट अवश्य ही बनेगा।
वृष राशि :- किसी आरोप से बचें, कार्यगति मंद रहेगी, क्लेश व अशांति अवश्य ही बढ़ेगी।
मिथुन राशि :- योजनाएं पूर्ण होगी, धन का लाभ होगा, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
कर्क राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक हो, कार्यगति से सुधार हो तथा चिन्ताएं कम होवेगी।
सिंह राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक हो, कार्यगति में सुधार होवे, चिन्ताएं कम होवेगी।
कन्या राशि :- सामर्थ्य और धन अस्त व्यस्त हो, सर्तकता से कार्य अवश्य ही निपटा लेवे।
तुला राशि :- मान प्रतिष्ठा, सुख के साधन बने, स्त्री वर्ग से सुख, शांति अवश्य बनें।
वृश्चिक राशि :- अग्नि चोट आदि का भय, व्यर्थ भ्रमण, धन का व्यय होगा, कार्य बनेंगे।
धनु राशि :- तनाव क्लेश व अशांति, मानसिक विभ्रम व उद्धेग तथा भय बना ही रहेगा।
मकर राशि :- विवाद ग्रस्त होने से बचिएगा, तनाव क्लेश मानसिक अशांति बनेगी।
कुंभ राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता मिलेगी, इष्टमित्र सुखवर्धक होगे।
मीन राशि :- भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति, समय उल्लास से बीते, मनोवृत्ति उत्तम बनेगी, ध्यान रखे।
कपूर के बिना अधूरी मानी जाती है आरती
26 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन धर्म में पूजा में कपूर बहुत जरुरी होता है। पूजा के बाद आरती में कपूर का उपयोग किया जाता है। कपूर के बिना आरती अधूरी मानी जाती है। कपूर जलाने से नकारात्मकता सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है। कपूर का उपयोग बीमारियों के इलाज में भी किया जाता है। इसलिए धर्मग्रंथों के साथ आयुर्वेद में भी कपूर के बारे में खासतौर से बताया गया है। ज्योतिषीय और वास्तु उपायों में भी कपूर का उपयोग महत्वपूर्ण रूप से किया जाता है। भारतीय पूजा पद्धति वैज्ञानिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है। कपूर के बारे में वैज्ञानिक शोधों के आधार पर भी कहा जाता है कि इसकी सुगंध से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव खत्म हो जाते हैं। यह वातावरण को शुद्ध करता है जिससे बीमारी होने खतरा कम हो जाता है। घर में कपूर जलाने से हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं।
बाहर हो जाती है दूषित वायु
पूजा या हवन करते समय जब हम कपूर जलाते हैं, तो उससे निकलने वाला धुआं आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। कपूर जलाने से आसपास की हवा साफ होने लगती है। खराब हवा घर से बाहर हो जाती है और वातावरण शुद्ध हो जाता है। सुबह-शाम कपूर जलाने से बाहरी नकारात्मक ऊर्जा घर में नहीं आ पाती है। कपूर जलाने से हवा में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ सकती है। प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बीमारियों से बचने के लिए कपूर जलाना चाहिए। वास्तु दोष दूर करने में भी कपूर का अच्छा असर होता है। घर के जिस कमरे में शुद्ध वायु आने-जाने के लिए खिड़की, रोशनदान आदि न हों वहां कांच के बर्तन में कपूर रखने से शुद्ध वायु का संचार होता है।
सूअर के शरीर से सने पानी को राजा ने जैसे ही छुआ, मिट गए सारे दुख-दर्द! रोचक है इस मंदिर की कहानी
26 Dec, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलिया को साधुओं की तपोभूमि कहा जाता है, जहां का इतिहास काफी रोचक है. आज हम आपको उन्हीं में से एक ऐसे अद्भुत और चमत्कारिक धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका अपना एक अलग ही रोचक इतिहास है. जिले के सिकंदरपुर में स्थित चतुर्भुज मंदिर न केवल एक मंदिर, बल्कि आस्था, चमत्कार और इतिहास की जीवंत धरोहर भी है. इस मंदिर की कथा जितनी रोचक है, उतनी ही अजब-गजब और श्रद्धा से भरी हुई इसकी कथा भी है. यह मंदिर बेहद प्राचीन है. इसकी कहानी सीधे प्रतापी राजा सुरथ से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपने हाथों से निर्माण किया था.
चतुर्भुज नाथ मंदिर के महंथ महेन्द्र दास ने कहा कि बु जुर्गों के कहने के अनुसार सिकंदरपुर क्षेत्र कभी घना जंगल हुआ करता था. इसी जंगल में एक विशाल पीपल के पेड़ के नीचे राजा सुरथ अपने सेवक मोहन के साथ विश्राम कर रहे थे. राजा उस समय कुष्ठ रोग से पीड़ित थे. अचानक उन्हें पानी की जरूरत पड़ी और उन्होंने मोहन को पानी लाने को भेजा. मोहन ने पूरा इलाका छान मारा, लेकिन कहीं पानी नहीं मिला. अंत में उसे कुछ दूरी पर एक गड्ढा दिखाई दिया, जिसमें एक सूअर लेटी थी और पास ही थोड़ा पानी था. मोहन ने उसी पानी को छानकर राजा के पास लेकर पहुंचा.
अब चमत्कार यहीं से शुरू होता हैं, जब राजा ने वह पानी शरीर पर लगाया, तो जहां-जहां कुष्ठ रोग था, वहां आराम मिलने लगा. राजा ने पानी के स्रोत के बारे में पूछा, लेकिन मोहन डर के कारण टालता रहा. बार-बार पूछने पर वह राजा को उसी गड्ढे तक ले गया. राजा ने स्वयं उस पानी में स्नान किया और उनका कुष्ठ रोग पूरी तरह समाप्त हो गया. घर लौटने के बाद राजा सुरथ को स्वप्न आया, जिसमें स्वयं भगवान ने कहा कि वह इसी पोखरे के नीचे हैं, उन्हें बाहर निकाला जाए. अगले दिन राजा ने उस स्थान की खुदाई करवाई.
कैसे पड़ा चतुर्भुज नाम
खुदाई में भगवान विष्णु की चतुर्भुज मूर्ति प्राप्त हुई, जिनके चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म की माला थी. खुदाई के दौरान फावड़े से बाएं हाथ पर निशान भी लग गया, जो आज भी मौजूद है. इसके साथ ही लक्ष्मी, साली ग्राम सहित अन्य तमाम मूर्तियां भी मिलीं. बाद में शिव जी की मूर्ति भी प्राप्त हुई, जिनका सिर खुदाई में क्षतिग्रस्त हो गया और पूरा पानी खून में बदल गया. राजा सुरथ ने सभी मूर्तियों को मंदिर में स्थापित कराया और तभी से यह स्थान चतुर्भुज मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया. शिवलिंग का नाम अद्भुत महादेव रखा गया. आज यहां दूर-दराज के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन को आते हैं.
पोखरे के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा
मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. दान-पुण्य से मंदिर का निर्माण और विस्तार हो रहा है. जतो दास से लेकर वर्तमान महंत तक, पुजारी परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी इस दिव्य धरोहर की सेवा करता आ रहा है. चतुर्भुज मंदिर आज भी आस्था और चमत्कार की अद्भुत कहानी सुनाता है. हालांकि, स्थानीय निवासी शुभम कुमार पांडेय और रजनीश कुमार पांडेय ने कहा कि वर्तमान में ऐतिहासिक धरोहर के रूप स्थित इस पोखरे का अस्तित्व खतरे में है. आसपास का पूरा गंदा पानी इसी पोखरे में छोड़ा जा रहा है. यहां इतनी बदबू होती है कि जीना मुश्किल हो जाता है. इस पोखरे के अस्तित्व को बचाने की जरूरत है.
पहाड़ों की गोद में बसा पवित्र धाम, जानें इसका इतिहास, महत्व और चमत्कारिक कथा
26 Dec, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू कश्मीर की खूबसूरत वादियों में छुपा मचैल माता मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं बल्कि अद्भुत प्राकृतिक नजारों का भी केंद्र है. मचैल माता मंदिर की पहचान सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे स्थान के रूप में है जहां भक्त हजारों किलोमीटर का सफर तय करके मां के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं. यहां का माहौल, पहाड़ों से घिरी शांत वादियां, और मां का दिव्य रूप भक्तों को बार-बार खींच लाता है. मचैल माता मंदिर जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पाडर इलाके में स्थित है. समुद्र तल से लगभग 9500 फीट की ऊंचाई पर बसे इस मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं है, लेकिन श्रद्धालु मां की भक्ति में हर मुश्किल पार कर लेते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में माता की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी और तभी से यहां पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू हुई.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान की खोज 1980 के दशक में एक साधु ने की थी, जो मां दुर्गा के परम भक्त थे. कहते हैं कि साधु को यहां दिव्य आभा का अनुभव हुआ और उन्होंने लोगों को बताया कि यह स्थान मां के वास का है. इसके बाद धीरे-धीरे यहां मंदिर का निर्माण हुआ और आज यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है.
मचैल माता यात्रा
हर साल यहां मचैल माता यात्रा का आयोजन होता है, जो सावन महीने में शुरू होकर भाद्रपद महीने तक चलती है. यह यात्रा पाडर घाटी से होकर गुजरती है, जहां रास्ते में ऊंचे-ऊंचे पहाड़, बहते झरने और हरे-भरे जंगल नजर आते हैं. यात्रा के दौरान भक्त जयकारे लगाते हुए मां के दरबार की ओर बढ़ते हैं. यात्रा की शुरुआत आमतौर पर छतरो से होती है, जहां से लगभग 32 किलोमीटर का ट्रेक करना पड़ता है. पहले यह यात्रा पूरी तरह पैदल ही होती थी, लेकिन अब प्रशासन ने हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू कर दी है, ताकि बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले भक्त भी आसानी से दर्शन कर सकें.
मचैल माता मंदिर का महत्व
मचैल माता मंदिर को शक्ति पीठों में से एक माना जाता है. यहां विराजमान मां को चंडिका माता या दुर्गा माता के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि मां यहां अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. विशेष रूप से जो लोग संतान सुख की इच्छा रखते हैं, वे यहां आकर मां से आशीर्वाद मांगते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई कोई भी मुराद खाली नहीं जाती. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां आने वाला हर भक्त एक अनोखा मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है.
मचैल माता से जुड़ी कथा
मान्यता है कि एक बार एक गड़ेरिया अपनी भेड़ों को चराने के लिए इस इलाके में आया था. तभी उसे एक गुफा से तेज प्रकाश दिखाई दिया. जब वह अंदर गया तो उसने वहां मां का दिव्य रूप देखा. मां ने उसे आशीर्वाद दिया और कहा कि यहां उनकी पूजा होनी चाहिए. गड़ेरिये ने यह बात पूरे गांव में फैला दी और धीरे-धीरे यहां भक्तों का आना शुरू हो गया.
दूसरी कथा के अनुसार, यह स्थान प्राचीन काल में साधना स्थल हुआ करता था, जहां ऋषि-मुनि मां दुर्गा की आराधना करते थे. समय के साथ यह स्थान जंगल और पहाड़ों में छिप गया, लेकिन मां की इच्छा से यह फिर से लोगों के सामने आया.
प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का संगम
मचैल माता मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यहां का प्राकृतिक सौंदर्य भी लाजवाब है. ऊंचे बर्फीले पहाड़, ठंडी हवा और बहते झरने इस यात्रा को यादगार बना देते हैं. यह जगह उन लोगों के लिए भी खास है जो ट्रेकिंग और एडवेंचर पसंद करते हैं.
सावधानियां और सुझाव
मचैल माता मंदिर की यात्रा आसान नहीं है, इसलिए यहां आने से पहले पूरी तैयारी करना जरूरी है. मौसम का ध्यान रखें, गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखें. पैदल यात्रा के दौरान पानी और हल्का खाना साथ होना चाहिए.
मचैल माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, साहस और प्रकृति का अद्भुत संगम है. यहां की यात्रा हर भक्त के लिए जीवनभर की यादगार बन जाती है. मां की भक्ति और इस पवित्र स्थल का अनुभव आपको भीतर से बदल देता है. चाहे आप धार्मिक आस्था से जाएं या प्रकृति प्रेमी होकर, मचैल माता मंदिर की वादियां आपको हमेशा अपनी ओर खींचती रहेंगी.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (26 दिसंबर 2025)
26 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- तनावपूर्ण वातावरण से बचिए, स्त्री शारीरिक मानसिक कष्ट, मानसिक बेचैनी अवश्य बनेगी।
वृष राशि :- अधिकारियों के सर्मथन से सुख होवे, कार्य गति विशेष अनुकूल किन्तु विचार भेद अवश्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- भोग ऐश्वर्य प्राप्ति, वाद, तनाव व क्लेश होवे, तनाव से बचकर अवश्य चले।
कर्क राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, भाग्य साथ दें, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- परिश्रम सफल हो, व्यवसाय मंद हो, आर्थिक योजना सफल अवश्य ही हो जाएगी।
कन्या राशि :- कार्य गति सामान्य रहे, व्यर्थ परिश्रम, कार्यगति मंद अवश्य होगा, ध्यान रखें।
तुला राशि :- किसी दुर्घटना से बचे, चोट चपेट आदि का भय होगा, रुके कार्य अवश्य ही बन जाएगे।
वृश्चिक राशि :- कार्य गति अनुकूल रहे, लाभान्वित कार्य योजना बनेगी, बाधा आदि से बच सकेंगे।
धनु राशि :- कुछ प्रतिष्ठा के साधन बने, किन्तु हाथ में कुछ न लगे तथा कार्य अवरोध अवश्य होवे।
मकर राशि :- अधिकारी वर्ग से तनाव, क्लेश होगा, मानसिक अशांति, कार्य अवरोध बनेगा।
कुंभ राशि :- मनोबल बनाए रखे, योजनाएं पूर्ण हो तथा नया कार्य अवश्य प्रारंभ होगा।
मीन राशि :- दैनिक कार्य गति उत्तम, कुटुम्ब में सुख समय उत्तम बनेगा, ध्यान रखगें।
New Year 2026: नए साल के पहले दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना रुक सकती है तरक्की
25 Dec, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
New Year 2026 सिर्फ कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह जीवन में नई उम्मीदों, नए संकल्पों और सकारात्मक बदलावों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि अगर नए साल के पहले दिन सही कार्य किए जाएं, तो पूरा साल सुख, समृद्धि और सफलता से भरा रहता है। यही वजह है कि अधिकतर लोग नए साल की शुरुआत पूजा-पाठ, हवन और दान-दक्षिणा से करना पसंद करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार New Year 2026 के पहले दिन पैसों का लेन-देन करने से बचना चाहिए। न तो किसी से उधार लें और न ही किसी को पैसे दें। यहां तक कि पूजा सामग्री या घरेलू जरूरतों के लिए भी धन का लेन-देन अशुभ माना गया है। ऐसा करने से पूरे साल आर्थिक परेशानियां बनी रह सकती हैं।
नए साल के दिन घर में किसी भी तरह के विवाद या क्लेश से दूर रहें। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां हंसी-खुशी का माहौल होता है, वहीं मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए गुस्सा, झगड़ा या नकारात्मक बातें करने से बचें। साथ ही, किसी बात को लेकर रोना या दुख व्यक्त करना भी शुभ नहीं माना जाता।
New Year 2026 के पहले दिन फटे-पुराने, काले रंग या किसी से उधार लिए कपड़े पहनने से बचना चाहिए। मान्यता है कि ऐसे कपड़े दुर्भाग्य को आमंत्रित करते हैं। इसके अलावा घर में अंधेरा न रखें। मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आलस्य भी नए साल के दिन सबसे बड़ा दोष माना गया है। देर तक सोने के बजाय सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पूजा-पाठ करें और सकारात्मक सोच के साथ दिन की शुरुआत करें। ऐसा करने से पूरा साल ऊर्जा और उत्साह से भरा रहता है।
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