धर्म एवं ज्योतिष
शनि की काली छाया से 2026 में भी बच नहीं पाएंगी ये राशियां, साढ़ेसाती और ढैय्या का रहेगा प्रचंड प्रभाव
1 Jan, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुछ दिनों में भले ही कैलेंडर बदल जाएगा, लेकिन साढ़ेसाती और ढैय्या वाली राशियों के लिए स्थिति वैसी ही रहेगी. साल 2026 को लेकर लोगों में नई उम्मीदें और सकारात्मक बदलाव की अपेक्षाएं हैं. लेकिन ज्योतिष के अनुसार नववर्ष कई राशियों के लिए कठिन साबित हो सकता है. इसका कारण है, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का जारी प्रभाव. शनि को न्याय का देवता माना जाता है, जोकि बहुत ही पावरफुल ग्रह भी माने जाते हैं. शनि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल भी देते हैं. जब शनि गोचर के दौरान किसी राशि को साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव में लाते हैं, तो जीवन में संघर्ष, दबाव, देरी और मानसिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है.
2026 में शनि नहीं बदलेंगे राशि
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, शनि देव ढाई वर्ष में एक बार राशि परिवर्तन करते हैं. 2025 में 29 मार्च को शनि गुरु की राशि मीन में आए थे और जून 2027 तक इसी राशि में रहेंगे. ऐसे में 2026 में शनि का कोई राशि परिवर्तन नहीं होगा और जिन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है वह 2026 में भी चलती रहेगी.यही कारण है कि साल 2026 में भी इन राशियों को शनि के इसी प्रचंड प्रभाव यानी साढ़ेसाती और ढैय्या से गुजरना पड़ेगा, जिस कारण उन्हें अधिक धैर्य, संयम और आध्यात्मिक उपायों की आवश्यकता होगी. जानें साल 2026 में किन राशियों पर रहेगा साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव.
साढ़ेसाती और ढैय्या पीड़ित राशियां
कुंभ राशि (साढ़ेसाती)- कुंभ राशि वाले जातकों पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है और शनि आपकी राशि के दूसरे भाव में हैं. ऐसे में यदि आप मेहनत करें और धैर्य रखें तो सफलता मिल सकती है. लेकिन साल 2026 में मानसिक तनाव बढ़ सकता है और छोटे-छोटे कार्य भी पूरा करने के लिए अधिक मेहनत व समय लग सकता है.
मीन राशि (साढ़ेसाती)- शनि आपकी राशि के लग्न यानी पहले भाव में विराजमान हैं और आपकी राशि में फिलहाल साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है जोकि जून 2027 तक चलता रहेगा. साढ़ेसाती का दूसरा चरण सबसे मुश्किल भरा होता है. इस दौरान साढ़ेसाती चरम पर होती है. इसका असर आपके सेहत पर पड़ सकता है. साथ ही आर्थिक परेशानी भी हो सकती है.
मेष राशि (साढ़ेसाती)- आपकी राशि के 12वें भाव में हैं और साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है. घर-परिवार की सुख-शांति भंग हो सकती है और मानसिक तनाव निरंतर बढ़ सकता है. ऐसे में धैर्य ही काम आ सकता है.
सिंह राशि (ढैय्या)- सिंह राशि वाते जातकों को शनि ढैय्या का प्रभाव रहेगा. शनि आपकी राशि में फिलहाल आठवें भाव में विराजमान हैं और खर्चों को बढ़ा रहे हैं. यात्राएं भी बढ़ रही हैं, लेकिन आपको बहुत सावधान रहना है. मानसिक और शारीरिक कष्ट बढ़ सकता है.
धनु राशि (ढैय्या)- धनु राशि वालों पर भी जून 2027 तक शनि ढैय्या का प्रभाव रहेगा. साल 2026 में शनि आपकी राशि के चौथे भाव में विराजमान रहेंगे. इस समय जीवन में उतार-चढ़ाव और अच्छे-बुरे समय आते-जाते रहेंगे. भूमि-भवन या संपत्ति को लेकर भी विवाद की स्थिति बन सकती है.
साढ़ेसाती और ढैय्या वाले करें ये उपाय
प्रत्येक शनिवार के दिन शनि देव और हनुमान जी की पूजा करें. इससे साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होगा.
शनिवार को पीपल वृक्ष में जल चढ़ाकर परिक्रमा करें और सरसों तेल का दीप जलाएं.
शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, काला छाता, चप्पल, लोहा और सरसों तेल का दान करें.
शनि चालीसा या हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से भी शनि देव प्रसन्न होंगे.
नए साल 2026 के पहले दिन कर लीजिए ये काम, पूरे साल दुर्भाग्य रहेगा दूर
1 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। 1 जनवरी 2026 यानी नए साल का पहला दिन हर किसी के लिए खास होगा. इस दिन को दुनियाभर में लोग उत्सव और जश्न की तरह मनाने हैं. आप भी नए साल का स्वागत बेहद खास तरीके से करें. माना जाता है कि साल की शुरुआत जिस ऊर्जा से होती है, वही पूरे वर्ष को प्रभावित करती है. ऐसे में यदि 2026 के पहले दिन कुछ विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय किए जाएं, पूरे साल दुर्भाग्य दूर रहता और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. साथ ही जीवन में सकारात्मक परिणाम भी मिलते हैं. माना जाता है कि साल की शुरुआत जिस ऊर्जा से होती है, वही पूरे वर्ष को प्रभावित करती है. ऐसे में यदि 2026 के पहले दिन कुछ विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय किए जाएं, पूरे साल दुर्भाग्य दूर रहता और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. साथ ही जीवन में सकारात्मक परिणाम भी मिलते हैं. साल की शुरुआत से पहले नकारात्मक ऊर्जा से घर को पूरी तरह से मुक्त कर दें. कूड़े-कबाड़ वाली बेकार चीजों को बाहर निकालें और घर को साफ-सुथरा रखें. साथ ही द्वार पर हल्दी पानी या गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें. साल की शुरुआत से पहले नकारात्मक ऊर्जा से घर को पूरी तरह से मुक्त कर दें. कूड़े-कबाड़ वाली बेकार चीजों को बाहर निकालें और घर को साफ-सुथरा रखें. साथ ही द्वार पर हल्दी पानी या गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें. साल की शुरुआत ईश्वर के ध्यान के साथ करें. सुबह उठकर सबसे पहले हाथ जोड़ें और भगवान से प्रार्थना करें वे आप पर अपनी कृपा बनाए रखें. साल के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, सूर्य देव को अर्घ्य दें और पूजाघर में दीप जलाएं. साथ ही प्रतिदिन स्नान, ध्यान, पूजा आदि का संकल्प भी लें. साल की शुरुआत ईश्वर के ध्यान के साथ करें. सुबह उठकर सबसे पहले हाथ जोड़ें और भगवान से प्रार्थना करें वे आप पर अपनी कृपा बनाए रखें. साल के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, सूर्य देव को अर्घ्य दें और पूजाघर में दीप जलाएं. साथ ही प्रतिदिन स्नान, ध्यान, पूजा आदि का संकल्प भी लें. इस वर्ष नए साल की शुरुआत गुरुवार के दिन से हो रही है. साल को शुभ बनाने के लिए तुलसी का पौधा जरूर लगाएं. इससे घर पर मां लक्ष्मी का वास होगा और भगवान विष्णु भी प्रसन्न होंगे. यदि घर पर पहले से ही तुलसी पौधा हो तो जल अर्पित कर पूजा-पाठ करें और दीप जलाएं. इस वर्ष नए साल की शुरुआत गुरुवार के दिन से हो रही है. साल को शुभ बनाने के लिए तुलसी का पौधा जरूर लगाएं. इससे घर पर मां लक्ष्मी का वास होगा और भगवान विष्णु भी प्रसन्न होंगे. यदि घर पर पहले से ही तुलसी पौधा हो तो जल अर्पित कर पूजा-पाठ करें और दीप जलाएं. नए साल के पहले दिन गरीब-जरूरतमंदों में भोजन, कंबल या गर्म कपड़ों का दान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. दान से पूरे साल पितृ और देव कृपा बनी रहती है. इसलिए इस दिन यथासंभव दान जरूर करें. नए साल के पहले दिन गरीब-जरूरतमंदों में भोजन, कंबल या गर्म कपड़ों का दान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. दान से पूरे साल पितृ और देव कृपा बनी रहती है. इसलिए इस दिन यथासंभव दान जरूर करें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (01 जनवरी 2026)
1 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय विफल हो, कार्य गति में बाधा चिन्ताग्रस्त होवे, व्यर्थ भ्रमण तथा कार्य अवरोध होगा।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल मिलाप होवे तथा रुके कार्य अवश्य ही बन जाएगे।
मिथुन राशि :- भाग्य का सितारा प्राप्त हो, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय का उपयोग अवश्य करें।
कर्क राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल है, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, समय समस्याओं से घिरा है।
सिंह राशि - इष्ट मित्र सुखवर्धक हो, कुटुम्ब की समस्याएं सुलझे तथा स्त्रीवर्ग से हर्ष अवश्य होगा।
कन्या राशि :- भावनाएं संवेदनशील रहे, कुटुम्ब में सुख तथा धन प्राप्त के साधन अवश्य बनेंगे।
तुला राशि :- समय अनुकूल नहीं, स्वास्थ्य नरम रहे तथा किसी धारणा का अनदेख अपराध होगा।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक उद्विघ्नता, हानिप्रद होगी, समय का ध्यान रखें।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता, स्थिति में सुधार, व्यवसाय गति उत्तम अवश्य ही बनेगी।
मकर राशि - व्यर्थ धन का व्यय, मानसिक उद्विघ्नता हानिप्रद होगी, समय का ध्यान रखे।
कुंभ राशि - इष्ट मित्र सहयोगी, कार्य बनेंगे तथा कार्य गति अनुकूल होगी, अनुकूलता का लाभ लें।
मीन राशि - भाग्य का सितारा प्रबल हो, बिगड़े कार्य बन जाएंगे, रुके कार्यों पर ध्यान दें।
1 जनवरी को कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती? प्रेमानंद महाराज से जानें क्यों बर्बाद हो सकता है आपका पूरा साल
31 Dec, 2025 03:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
New Year 2026: नए साल 2026 की शुरुआत से पहले ही देश के अलग-अलग राज्यों से लाखों श्रद्धालु धार्मिक स्थलों और मंदिरों में पहुंच रहे हैं. इस कड़ी में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. यहां आने वाले भक्त प्रेमानंद महाराज से नए साल से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं. एक भक्त ने नए साल के पहले दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं ये सवाल पूछा. जानिए प्रेमानंद महाराज ने इसका क्या जवाब दिया-
नए साल में कौन से नियम अपनाने चाहिए?
एक भक्त ने महाराज से पूछा- ‘महाराज जी, आने वाले नए साल में हमें कौन से नियम अपनाने चाहिए? इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि नया साल केवल पार्टी या उत्सव मनाने का समय नहीं है, बल्कि यह जीवन सुधारने, बुरे कर्म त्यागने और अच्छे कर्म अपनाने का सुनहरा अवसर है. उन्होंने कहा कि नए साल में पाप और बुरे आचरण छोड़कर भगवान की भक्ति और परोपकार पर फोकस करना चाहिए, तभी जीवन में सच्ची खुशी और शांति आएगी.
शराब, मांस और पाप से दूर रहें
इस सवाल के जवाब को देते हुए प्रेमानंद महाराज ने आगे स्पष्ट शब्दों में कहा- ‘शराब पीना, मांस खाना, हिंसा करना और व्यभिचार जैसे कार्य नरक का द्वार खोलते हैं. कई लोग नए साल के नाम पर इनका सेवन करते हैं और इसे खुशी मानते हैं, लेकिन यह वास्तव में दुख और पाप का कारण है.’
उन्होंने आगे कहा- ‘हैप्पी न्यू ईयर बोलकर शराब पीना और गलत काम करना खुशी नहीं, बल्कि पाप और दुख लाता है.’ साथ ही उन्होंने अपील की कि नई शुरुआत में नशा और पाप छोड़कर जीवन को धर्म व भक्ति के पथ पर ले जाएं.
नए साल पर करें ये काम
प्रेमानंद महाराज ने बताया नए साल पर अच्छे काम करने चाहिए और जीवन को सुखी बनाने के लिए कुछ संकल्प लेने चाहिए, जैसे- शराब का पूर्ण त्याग करना, मांसाहार छोड़ना, पराई स्त्री या पुरुष के प्रति गलत विचार त्याग, क्रोध, चोरी, हिंसा और अन्य बुरे कर्मों से दूर रहें, भगवान का नाम जपें और भक्ति करें. साथ ही दान-परोपकार खूब करें.
बच्चों और समाज के लिए संदेश
महाराज जी ने व्यक्तिगत सुधार के साथ-साथ समाज और बच्चों के लिए भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि पाप कर्मों में लिप्त रहने से जीवन में दुख और कष्ट आते हैं. उन्होंने कहा- ‘मनुष्य जन्म मिला है, राक्षसी कर्म न करें. परमात्मा की कृपा प्राप्त करें.’
सच्ची प्रसन्नता परमात्मा से मिलती है
प्रेमानंद महाराज जी ने आगे कहा कि असली आनंद शराब, मांस या पार्टी से नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति और अच्छे कर्मों से मिलता है. साथ ही उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि नए साल पर अच्छे संकल्प लें, बुराइयों का त्याग करें और धर्म-भक्ति को अपनाएं. इससे नया साल मंगलमय होगा, भगवान की कृपा बनी रहेगी और सभी स्वस्थ-सुखी रहेंगे.
साल में एक बार खुलता है स्वर्ग का द्वार, भगवान रंगनाथ ने वैकुंठ द्वार पर दिए भक्तों को दर्शन
31 Dec, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैकुंठ एकादशी के मौके पर साल में एक बार खुलने वाले बैकुंठ द्वार पर विराजमान होकर भगवान ने भक्तों को दर्शन दिए. रंगनाथ मंदिर में खुले बैकुंठ द्वार से निकलने और भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. लाखों की संख्या में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. आइए जानते हैं बैकुंठ द्वार खुलने के पीछे मान्यता...
उत्तर भारत के विशालतम दक्षिण शैली के सबसे बड़े रंगनाथ मंदिर में मंगलवार को बैकुंठ एकादशी के अवसर पर बैकुंठ द्वार को खोला गया. साल में एक बार खुलने वाले बैकुंठ द्वार पर विराजमान होकर भगवान ने भक्तों को दर्शन दिए. मान्यता है कि बैकुंठ द्वार से जो भक्त निकलता है उसे बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है. बैकुंठ उत्सव की शुरुआत देर रात भगवान रंगनाथ की मंगला आरती से हुई. इसके बाद सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान रंगनाथ माता गोदा जी के साथ परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के मध्य निज मंदिर से पालकी में विराजमान हो कर बैकुंठ द्वार पहुंचे. यहां भगवान रंगनाथ की पालकी करीब आधा घंटे तक द्वार पर खड़ी रही.
वैदिक मंत्रोचार के साथ पूजा पाठ - भगवान रंगनाथ की सवारी बैकुंठ द्वार पर पहुंचने पर मंदिर के महंत गोवर्धन रंगाचार्य के नेतृत्व में सेवायत पुजारियों ने पाठ किया . करीब आधा घण्टे तक हुए पाठ और अर्चना के बाद भगवान रंगनाथ, शठ कोप स्वामी,नाथ मुनि स्वामी और आलवर संतों की कुंभ आरती की गई. वैदिक मंत्रोचार के मध्य हुए पूजा पाठ के बाद भगवान रंगनाथ की सवारी मंदिर प्रांगड़ में भृमण करने के बाद पौंडानाथ मंदिर जिसे भगवान का निज धाम बैकुंठ लोक कहा जाता है में विराजमान हुई. यहां मंदिर के लोगों ने भगवान को भजन गाकर सुनाए.
बैकुंठ एकादशी पर्व पर खोला जाता है बैकुंठ द्वार - बैकुंठ द्वार से निकलने की चाह में लाखों भक्त रात से ही मंदिर परिसर में एकत्रित होना शुरू हो गए. मंदिर के पुजारी स्वामी राजू ने बताया कि 21 दिवसीय बैकुंठ उत्सव में 11वें दिन बैकुंठ एकादशी पर्व पर बैकुंठ द्वार खोला जाता है . यह एकादशी वर्ष की सर्वश्रेष्ठ एकादशियों में से एक मानी जाती है. मान्यता है कि बैकुंठ एकादशी पर जो भी भक्त बैकुंठ द्वार से निकलता है उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती हैं.
वर्ष में एक बार खुलने वाले बैकुंठ द्वार - मंदिर की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि अलवार आचार्य बैकुंठ उत्सव के दौरान अपनी रचित गाथाएं भगवान को सुनाते हैं. बैकुंठ एकादशी के दिन दक्षिण के सभी वैष्णव मंदिरों में बैकुंठ द्वार ब्रह्म मुहूर्त में खुलता है. इसी परम्परा का निर्वाहन वृन्दावन स्थित रंगनाथ मंदिर में किया जाता है. वर्ष में एक बार खुलने वाले बैकुंठ द्वार पर बेहद ही आकर्षक सजावट की गई. द्वार को सजाने के लिए करीब एक हजार किलो से ज्यादा विभिन्न प्रजाति के फूल वृंदावन,दिल्ली और बैंगलुरू से मंगाए गए. इसके साथ ही बैकुंठ लोक में की गई लाइटिंग अहसास करा रही थी कि जैसे भगवान बैकुंठ धाम में विराजमान हों. बैकुंठ एकादशी के अवसर पर भगवान रंगनाथ के दर्शन कर भक्त आनंदित हो उठे.
बैकुंठ द्वार खुलने के पीछे मान्यता - बैकुंठ एकादशी पर बैकुंठ द्वार खुलने के पीछे मान्यता है कि दक्षिण भारत के अलवार संतों ने भगवान नारायण से जीवात्मा के उनके निज बैकुंठ जाने के रास्ता के बारे में पूछा. जिस पर भगवान ने बैकुंठ एकादशी के दिन बैकुंठ द्वार से निकलने की लीला दिखाई. यह परंपरा आज भी श्री रंगनाथ मंदिर में पारंपरिक नियमानुसार मनाई जा रही है.
विवाह में देरी या जल्दी? ग्रहों की कौन सी स्थिति शुभ-अशुभ
31 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंसान के दिल में एक ही ख्वाहिश होती है कि शादी के बाद उसकी जिंदगी प्यार, समझ और भरोसे से भरी रहे. जीवनसाथी सिर्फ साथ निभाने वाला ही नहीं बल्कि हर सुख-दुख में हमसफर बने. घर में शांति हो, रिश्तों में अपनापन हो और भविष्य सुरक्षित महसूस हो लेकिन कई लोगों के जीवन में शादी के बाद हालात वैसे नहीं रहते जैसी उम्मीद की जाती है. कभी रिश्तों में तनाव आ जाता है, कभी जीवनसाथी की सेहत चिंता का कारण बनती है, तो कभी आर्थिक परेशानियां मन को बेचैन कर देती हैं. ऐसे में अक्सर मन में सवाल उठता है कि आखिर हमारी खुशियों में यह रुकावट क्यों आती है.
वैवाहिक सुख केवल प्रयासों से ही नहीं बल्कि ग्रहों की स्थिति से भी गहराई से जुड़ा होता है. जब कुंडली में विवाह से जुड़े ग्रह मजबूत और शुभ अवस्था में होते हैं, तब रिश्तों में स्थिरता, विश्वास और संतुलन बना रहता है. ऐसे योग व्यक्ति को न केवल सही जीवनसाथी दिलाते हैं बल्कि शादी के बाद रिश्ते को लंबे समय तक निभाने की शक्ति भी देते हैं. गुरु, शुक्र, चंद्रमा, लग्नेश और सप्तमेश ये वही ग्रह हैं, जो दांपत्य जीवन की दिशा तय करते हैं. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जब इन ग्रहों की कृपा बनी रहती है, तो विवाह सिर्फ एक बंधन नहीं बल्कि दो आत्माओं का सुंदर संगम बन जाता है, जहां प्रेम, सम्मान और सुख हमेशा बना रहता है.
शुक्र ग्रह की स्थिति का अध्ययन
ज्योतिष शास्त्र में विवाह और दांपत्य जीवन के सुख का प्रमुख कारक शुक्रदेव को माना गया है. किसी भी विवाह मुहूर्त का निर्धारण करते समय सबसे पहले शुक्र ग्रह की स्थिति का गहन अध्ययन किया जाता है. यदि जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह अस्त अवस्था में हो या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में आ जाए, तो विवाह से जुड़े शुभ संयोग कमजोर पड़ जाते हैं और रुकावटें सामने आने लगती हैं. शास्त्रों के अनुसार सफल और सुखद विवाह के लिए गुरु बृहस्पति और शुक्र, दोनों ग्रहों का मजबूत और अनुकूल स्थिति में होना अत्यंत आवश्यक माना गया है. जब कुंडली में शुक्र ग्रह दुर्बल होते हैं, तब शुक्रवार के दिन सफेद रंग से जुड़ी वस्तुओं जैसे- दूध, दही, चावल, मिठाई, सफेद वस्त्र या सफेद फूलों का दान करना विशेष फलदायी माना गया है. ऐसे उपाय करने से शुक्रदेव की कृपा प्राप्त होती है, शुभ विवाह योग सक्रिय होने लगते हैं और वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं
देवगुरु बृहस्पति का भी विशेष महत्व
बृहस्पति ग्रह को विवाह और दांपत्य सुख का सबसे प्रभावशाली कारक माना गया है, खासतौर पर कन्या के विवाह में गुरु ग्रह की स्थिति को अत्यंत निर्णायक माना जाता है. यदि जन्मकुंडली में बृहस्पति ग्रह उच्च राशि में स्थित हो या अपनी मित्र राशि में बलवान अवस्था में हो, तो विवाह से जुड़ी किसी भी प्रकार की अड़चन नहीं आती और सुयोग्य जीवनसाथी मिलने के प्रबल संकेत बनते हैं. गुरु ग्रह की शुभ दृष्टि से विवाह के बाद जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान, संतान सुख और मानसिक शांति बनी रहती है. वहीं यदि कुंडली में बृहस्पति ग्रह नीच अवस्था में हो या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में आ जाए, तो विवाह में देरी, रुकावटें या बार-बार बाधाएं उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है. इस ग्रह के उपाय करने से यह भी शुभ फल देता है.
लग्न भाव और सप्तम भाव की भूमिका
ज्योतिष शास्त्र में लग्न भाव व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व और जीवन की पूरी दिशा को दर्शाता है. यदि कुंडली के लग्न भाव पर किसी अशुभ ग्रह का प्रभाव बन रहा हो, तो विवाह से जुड़े मामलों में देरी या अड़चनें देखने को मिल सकती हैं. ऐसी स्थिति में प्रभावित ग्रह के मंत्रों का नियमित जाप और शास्त्रों में बताए गए दान करने से नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और विवाह के अनुकूल योग सक्रिय होने लगते हैं. दूसरी ओर सप्तम भाव को विवाह और वैवाहिक जीवन का सबसे अहम भाव माना गया है. जब इस भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि होती है, सप्तमेश मजबूत अवस्था में होते हैं और संबंधित ग्रह अनुकूल स्थिति में होते हैं, तब विवाह के योग जल्दी बनते हैं और दांपत्य जीवन में सुख, स्थिरता और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं.
2 या 3 जनवरी, कब है साल 2026 की पहली पूर्णिमा? जाने महत्व, शुभ मुहूर्त और किन चीजों का दान करें
31 Dec, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है और साल 2026 की पहली पूर्णिमा पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाएगी. इस दिन चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है और पवित्र नदी में स्नान-दान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बतलाया गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि पौष मास में किए गए धार्मिक कर्मकांड की पूर्णता पूर्णिमा के स्नान करने के बाद ही सार्थक मानी जाती है. साथ ही पौष पूर्णिमा से ही माघ मेले का आयोजन भी शुरू हो जाएगा. माघ मेला भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजन में से एक है, जो प्रयागराज में पौष पूर्णिमा से शुरू होता है. आइए जानते हैं कब है पौष पूर्णिमा, महत्व और मुहूर्त…
पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का खास धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत, स्नान और दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों को दान करना बेहद शुभ माना जाता है. ऐसा करने से जीवन की हर समस्या दूर हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है. 3 जनवरी 2026 को साल 2026 की पहली पूर्णिमा पड़ रही है. पौष पूर्णिमा का व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट और नकारात्मकता दूर होती है, मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ता है. साथ ही धन, अन्न और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
पौष पूर्णिमा से माघ मेले का आयोजन
पौष पूर्णिमा से ही माघ स्नान की शुरुआत मानी जाती है. धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है. साधु-संत और श्रद्धालु इस दिन से कल्पवास भी शुरू करते हैं. कल्पवास एक आध्यात्मिक अनुष्ठान और साधना होती है. इस दौरान साधु-संत या श्रद्धालु एक महीने तक प्रयागराज के संगम के तट ही पर रहते हैं और हर दिन संगम में पवित्र स्नान करते हैं. ये स्नान एक बार नहीं बल्कि दिन भर में तीन बार किया जाता है. कहा जाता है कि पौष पूर्णिमा पर किया गया स्नान और दान, साल भर किए गए पुण्य कर्मों के बराबर फल देता है. इसी वजह से यह पूर्णिमा खास मानी जाती है. माना जाता है कि माघ मेले में स्नान करने से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है.
3 जनवरी को साल 2026 की पहली पूर्णिमा
हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से होगी और इस तिथि का समापन 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा. उदया तिथि को मानते हुए पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी 2026 दिन शनिवार को रखना ही उचित होगा. 3 जनवरी को चंद्रमा का उदय शाम 05 बजकर 28 मिनट पर होगा.
पौष पूर्णिमा व्रत पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर दान-स्नान का ब्रह्म मुहूर्त 3 जनवरी 2026 दिन शनिवार को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 20 तक रहेगा, इसके अलावा आप चाहें तो दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में भी दान-धर्म के कार्य कर सकते हैं
पौष पूर्णिमा 2026 पूजन विधि
पौष पूर्णिमा पर सवेरे-सवेरे पवित्र नदी में स्नान के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें. इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें, अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव के मंत्रों का जप करें. फिर भगवान विष्णु की पीले फूल, भोग, चंदन, अक्षत, वस्त्र तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और तुलसी की माला से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. इसके बाद गाय के घी के दीपक से आरती करें और भोग लगाएं. फिर दिन में एक बार सात्विक भोजन करें या फलाहार लें और गरीबों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान दें. पौष पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को भी अर्घ्य देना चाहिए और प्रार्थना करनी चाहिए. मान्यता है कि पूर्णिमा की रात की गई आराधना शीघ्र फल प्रदान करती है.
पूर्णिमा पर इन चीजों का करें दान
पौष पूर्णिमा 2026 पर दान करने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन दान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ग्रह-नक्षत्र के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है. पूर्णिमा तिथि पर सफेद रंग की चीजें, जैसे- दूध, चावल, चीनी, चांदी, सफेद वस्त्र, सफेद चंदन इत्यादी का दान करना चाहिए. साथ ही खीर का प्रसाद के रूप में वितरण किया जा सकता है. इस दिन खास तौर पर कंबल, गर्म कपड़े, चावल, गेहूं, तिल और गुड़, घी और दूध का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (31 दिसंबर 2025)
31 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- क्लेश व अशांति, परिश्रम करने पर भी आरोप, क्रोध होगा।
वृष राशि :- अधिकारियों का मेल मिलाप फलप्रद रहे, कार्य कुशलता से संतोष।
मिथुन राशि :- कार्य व्यवसाय में थकावट व बेचैनी, कुछ सफलता के साधन हो।
कर्क राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, परेशानी व चिन्ता जनक स्थिति होगी।
सिंह राशि :- स्त्रीवर्ग से हर्ष उल्लास, भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा कार्य गति होगी।
कन्या राशि :- आर्थिक योजनापूर्ण होवे, समय पर सोचे कार्य अवश्य ही बनेंगे।
तुला राशि :-सामर्थ्य होते हुए भी कार्य विफल बना रहेगा तथा कार्य की हानि हो।
वृश्चिक राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं से क्लेश, धन हानि, मानसिक बेचैनी होगी।
धनु राशि :- आरोप, क्लेश व अशांति से बचिएगा तथा तनाव पूर्ण वातावरण होगा।
मकर राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, सफलता के साधन जुटाए, काय अवश्य हो।
कुंभ राशि :- परिश्रम करने पर सफलता न मिलें तथा कार्यों में विशेष बाधा बनेगी।
मीन राशि :- धन लाभ सफलता का हर्ष प्रभुत्व वृद्धि तथा सामाजिक कार्य में प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
पंचांग : आज साल की सबसे बड़ी एकादशी...श्रीहरि खोलेंगे खुशियों के द्वार, नोट कर लें पूजा का सबसे सटीक समय और पारण मुहूर्त
30 Dec, 2025 07:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार, के दिन पौष महीने की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि है. इस तिथि पर भगवान शिव के प्रमुख सेनापति वीरभद्र का नियंत्रण है. शुभ समारोह और नए भवन के उद्घाटन के लिए यह तिथि शुभ मानी जाती है. दशमी तिथि सुबह 7.50 बजे तक है. इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जा रही है, जो 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे तक है. इसे पौष पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है.
30 दिसंबर का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : पौष
पक्ष : शुक्ल पक्ष दशमी
दिन : मंगलवार
तिथि : शुक्ल पक्ष दशमी
योग : सिद्धि
नक्षत्र : अश्विनी
करण : गर
चंद्र राशि : मेष
सूर्य राशि : धनु
सूर्योदय : 07:19 बजे
सूर्यास्त : 06:04 बजे
चंद्रोदय : दोपहर 01.33 बजे
चंद्रास्त : देर रात 03.43 बजे (31 दिसंबर)
राहुकाल : 15:22 से 16:43
यमगंड : 11:21 से 12:41
आज का नक्षत्र
आज के दिन चंद्रमा मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र में रहेगा. नक्षत्र गणना में अश्विनी पहला नक्षत्र है. इसका विस्तार मेष राशि में 0 से 13.2 डिग्री तक होता है. इसके देवता अश्विनी कुमार है, जो जुड़वा देवता है और देवताओं के चिकित्सक के रूप में प्रसिद्ध है. इसका स्वामी ग्रह केतु है. यह नक्षत्र यात्रा करने, हीलिंग, ज्वैैैलरी बनाने, अध्ययन की शुरुआत, वाहन खरीदने/बेचने के लिए अच्छा माना जाता है. नक्षत्र का वर्ण हल्का और तेज होता है. खेल, सजावट और ललित कला, व्यापार, खरीदारी, शारीरिक व्यायाम, गहने पहनने और निर्माण या व्यापार शुरू करने, शिक्षा और शिक्षण, दवाएं लेने, ऋण देने और लेने, धार्मिक गतिविधियों, विलासिता की वस्तुओं का आनंद लेने के लिए भी इस नक्षत्र में कार्य किए जा सकते हैं.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 15:22 से 16:43 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल : सिंह राशि समेत इन राशियों का चमकेगा सितारा...मंगलवार से शुरू होगा सुनहरी सफलताओं का दौर, क्या आपकी राशि है शामिल?
30 Dec, 2025 07:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा पहले भाव में होगा. आज का दिन आपके लिए बेहद अनुकूल रहेगा. आप तन और मन से स्वस्थ होकर कई तरह के काम आसानी से पूरे कर पाएंगे. सफलता मिलने से आपके उत्साह में वृद्धि होगी. आज भाग्य आपका साथ देगा। इनकम बढ़ेगी. परिजनों के साथ आनंद एवं उल्लास से समय गुजरेगा. माता से लाभ होने के संकेत आपको मिल रहे हैं. मित्र और संबंधियों से घर का वातावरण अच्छा रहेगा. जीवनसाथी के साथ विचारों का मतभेद दूर होगा.
वृषभ- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा बारहवें भाव में होगा. आज निर्णय लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार लें. किसी के साथ गलतफहमी होने की संभावना है. खराब तबीयत के कारण आप उदास हो सकते हैं. परिवार में किसी के विरोध के कारण मतभेद होगा, जिससे आपको ग्लानि होगी. परिश्रम का उचित मुआवजा नहीं मिलने से आप निराशा महसूस करेंगे. आज का दिन खर्चीला होगा. कार्यस्थल पर आपके काम में विलंब हो सकता है.
मिथुन- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा ग्यारहवें भाव में होगा. आपके परिवार में सुख और शांति बनी रहेगी. व्यापार में लाभ हो सकेगा. आज लोग आपके काम की सराहना करेंगे. विवाह के इच्छुक लोगों का विवाह पक्का होने की संभावना है. मित्रों से लाभ प्राप्त कर सकेंगे. आपकी आय में वृद्धि होगी. वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी. संतान से अच्छे समाचार प्राप्त होंगे. घर के इंटीरियर को बदलने के लिए आज आप कुछ बड़ा कदम उठा सकते हैं.
कर्क- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा दसवें भाव में होगा. आज का दिन आपके व्यवसाय के लिए लाभदायी है. आप पर उच्च अधिकारियों की कृपा रहेगी. आपके वर्चस्व में वृद्धि होगी. पदोन्नति की संभावना है. व्यापार में विरोधियों को आप पीछे छोड़ देंगे. आर्थिक लाभ से आपका दिन अच्छा बीतेगा. परिवार में आवश्यक विषयों पर चर्चा होगी. माता का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. धन, संपत्ति और मान सम्मान के अधिकारी बनेंगे. घर के इंटीरियर में फेरबदल कर सकते हैं. दोपहर के बाद कुछ थकान का अनुभव करेंगे. इस दौरान अनावश्यक चिंता से आपको बचना चाहिए.
सिंह- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा नवें भाव में होगा. आलस और थकान आपके कार्य करने की गति कम कर देंगे. पेट संबंधी शिकायत से अस्वस्थता का अनुभव होगा. नौकरी या व्यवसाय में विघ्न उत्पन्न हो सकता है. क्रोध को वश में रखना आवश्यक है. धार्मिक कामों में आज धन खर्च हो सकता है. किसी मंदिर या धार्मिक स्थल पर जाना हो सकता है. इससे मानसिक शांति मिलेगी. तनाव को दूर रखने के लिए आप ध्यान या मनपसंद संगीत सुन सकते हैं. शाम को घर-परिवार के साथ समय गुजारेंगे.
कन्या- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा आठवें भाव में होगा. आज नए काम हाथ में लेना हितकर नहीं है. जो काम अभी आप कर रहे हैं, उसे ही पूरा करने की कोशिश करें. व्यापारियों के लिए दिन सामान्य है. बाहर के खाद्य पदार्थों से तबीयत खराब होने की आशंका रहेगी. क्रोध को नियंत्रण में रखने के लिए मौन रहना सही साबित होगा. धन खर्च अधिक होगा. गुप्त शत्रु आपका नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे. सरकार विरोधी या नियम विरोधी कामों से दूर रहें. जीवनसाथी के साथ विचारों का मतभेद हो सकता है.
तुला- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा सातवें भाव में होगा. आज का दिन रोमांस, मनोरंजन और मौज-मस्ती से भरपूर है. सार्वजनिक जीवन में आप सम्मान प्राप्त करेंगे. यश और कीर्ति में वृद्धि होगी. व्यापार में उन्नति का दिन है. भागीदारों से लाभ की बात होगी. आज किसी नए काम की शुरुआत भी कर सकते हैं. सुंदर वस्त्र या आभूषणों की खरीदारी होगी. दांपत्यसुख और वाहनसुख उत्तम रहेगा. तंदुरुस्ती और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहेगा. मित्रों के साथ बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है.
वृश्चिक- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा छठे भाव में होगा. आज आप के घर में सुख शांति और आनंद का माहौल रहेगा. आपका शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. जरूरी कामों पर धन खर्च होगा. बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा. शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी. दफ्तर में सहकर्मियों का अच्छा साथ मिलेगा. मित्रों से मुलाकात होगी. महिलाओं के मायके से अच्छे समाचार आने के योग हैं. धन लाभ होगा और अधूरे काम पूरे हो सकते हैं.
धनु- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा पांचवें भाव में होगा. आज आपको क्रोध पर संयम बरतने की जरूरत है. पेट से संबंधित बीमारियों में परेशानी होगी. किसी भी काम में सफलता नहीं मिलने से निराशा हो सकती है. साहित्य या अन्य किसी रचनात्मक काम के प्रति रुचि बनी रहेगी. संतान के प्रति चिंता रहने से आप परेशान रह सकते हैं. कहीं जाने की योजना को हर संभव टालें. नौकरीपेशा लोग आज केवल अपने काम से काम रखें.
मकर- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा चौथे भाव में होगा. आज आपको शारीरिक अस्वस्थता और मानसिक बेचैनी का अनुभव होगा. थकान और तनाव के चलते आप समय पर काम पूरा कर पाने की स्थिति में नहीं रहेंगे. पारिवारिक वातावरण क्लेशमय रहने से मन उदास रहेगा. स्फूर्ति और ताजगी का अभाव रहेगा. स्वजनों के साथ मनमुटाव हो सकता है. सीने में दर्द हो सकता है. इस दौरान आपको चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत पड़ सकती है. सार्वजनिक रूप से अपमानित होने की आशंका है. वाद-विवाद से बचना ही बेहतर है.
कुंभ- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा तीसरे भाव में होगा. आपके मन पर छाए हुए चिंता के बादल दूर होने से आप मानसिक राहत अनुभव करेंगे. धीरे-धीरे काम करने में आपको उत्साह आने लगेगा. आप अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी कोशिश करेंगे. भाई-बंधुओं के साथ घरेलू मामलों पर चर्चा करेंगे और आनंदपूर्वक समय व्यतीत करेंगे. आपका मन प्रसन्न रहेगा. मित्रों, स्नेहीजनों का आगमन आपके आनंद में वृद्धि करेगा. विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी. भाग्य वृद्धि होगी. प्रिय व्यक्तियों के साथ से आनंद मिलेगा. स्वास्थ्य लाभ मिलेगा. आज आप काफी समय परिवार में देंगे.
मीन- 30 दिसंबर, 2025 मंगलवार को चंद्रमा मेष राशि में स्थित है. आपकी राशि से चंद्रमा दूसरे भाव में होगा. आज का दिन आर्थिक योजना बनाने के लिए बहुत अच्छा है. आप जो काम पूरा करने का निश्चय करेंगे, उसे पूरा कर सकेंगे. व्यापार में वृद्धि होगी. आपकी आय भी बढ़ेगी. किसी मीटिंग के लिए बाहर जाने का कार्यक्रम बन सकता है. नए लोगों से मित्रता होगी. उनसे लाभ और मान-सम्मान प्राप्त कर सकेंगे. संतान और पत्नी की तरफ से अच्छे समाचार मिलने से आनंद अनुभव करेंगे. वैवाहिक जीवन में आनंद रहेगा. विद्यार्थियों के लिए भी शुभ समय है. एकाग्रता से पढ़ाई पर ध्यान दे पाएंगे.
5 या 6 जनवरी? कब है सकट चौथ, गजानन को प्रसन्न करने के उपाय
30 Dec, 2025 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में प्रत्येक तिथि और प्रत्येक वार का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है. इन्हीं पावन तिथियों में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन संकट चतुर्थी और तिल चौथ का व्रत किया जाता है, जो भगवान गणेश को समर्पित होता है. गणपति महाराज को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है, इसलिए हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि उनकी आराधना के लिए विशेष मानी जाती है. शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को रखने से जीवन में आने वाले कष्ट, बाधाएं और संकट दूर होते हैं. मान्यता है कि संकट चतुर्थी के दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है. साथ ही मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से भी मुक्ति मिलती है. उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि साल 2026 के जनवरी माह में आने वाली पहली संकट चतुर्थी कब है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा किस विधि से करनी चाहिए ताकि गणपति महाराज की विशेष कृपा प्राप्त हो सके.
वैदिक पंचांग के अनुसार, नए साल में माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर होगा. यह तिथि 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026 दिन मंगलवार को रखा जाएगा.
तिल और गुड़ का दान
सकट चौथ को कई स्थानों पर तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है. इस पावन दिन तिल का दान अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है, इसलिए सकट चौथ पर तिल और गुड़ का दान अवश्य करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं. साथ ही समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है.
गर्म वस्त्रों का दान
माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली सकट चौथ के समय ठंड अपने चरम पर होती है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को कंबल, ऊनी वस्त्र या जूते-चप्पल का दान करने से पितृ दोष शांत होता है. साथ ही संतान से जुड़ी परेशानियों और कष्टों से भी राहत मिलती है.
अन्न दान का महत्व
भूखे व्यक्ति को भोजन कराना सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है. सकट चौथ के अवसर पर अनाज का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती. धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक संकट दूर होता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है.
तांबे के पात्र और दक्षिणा का दान
सकट चौथ की पूजा संपन्न होने के बाद किसी ब्राह्मण को तांबे का पात्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देना व्रत की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि दक्षिणा के बिना कोई भी पूजा अधूरी रहती है, इसलिए अंत में श्रद्धा भाव से दक्षिणा अवश्य अर्पित करें.
हनुमानजी ने क्यों लिया था पंचमुखी अवतार, जानें पांचों मुखों के नाम, इस मंदिर में भक्तों को देते हैं आशीर्वाद
30 Dec, 2025 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैसे तो हनुमानजी के कई मंदिरों के दर्शन आपने किए होंगे लेकिन कर्नाटक में एक ऐसा हनुमानजी का मंदिर हैं, जहां पंचमुखी अवतार भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से ही नकारात्मकता दूर होती है और सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं हनुमानजी के इस अवतार के बारे में...
सच्ची भक्ति और आस्था का उदाहरण दुनिया को देने वाले पवनपुत्र हनुमान के कई मंदिर अलग-अलग रूपों में देखने को मिल जाते हैं. पुरी के समंदर तट पर जहां उन्हें बेड़ी हनुमान के नाम से जाना जाता है, वहीं कर्नाटक में दूर पहाड़ियों के बीच वह विशाल अवतार में पंचमुखी अंजनेय के रूप में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं. भगवान हनुमान के पंचमुखी अवतार के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है आखिर हनुमानजी ने क्यों पंचमुखी अवतार लिया था और उस पंचमुख के नाम क्या है. इस पंचमुखी अवतार में हनुमानजी कर्नाटक में आज भी दर्शन दे रहे हैं. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. आइए जानते हैं इस मंदिर की खास बातें...
कर्नाटक के तुमकुरु जिले के पास बिदानगेरे में पंचमुखी अंजनेय स्वामी मंदिर स्थापित है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी और अनोखे रूप वाली हनुमान प्रतिमा बनी है. 161 फुट की पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र है.
पंचमुखी अंजनेय स्वामी हनुमान की शक्ति का प्रतीक है. यहां पर भय और दुश्मनों से छुटकारा पाने के लिए भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं.
प्रतिमा में हनुमान के पांच रूपों को दिखाया गया है, जिसमें वराह, गरूड़, वानर, नरसिंह और अश्व अवतार शामिल हैं. पंचमुखी अवतार हनुमान ने अहिरावण का वध करने के लिए लिया था.
कहा जाता है कि अहिरावण बहुत शक्तिशाली था और उसने छल से भगवान राम और लक्ष्मण का अपहरण किया था. वह उन्हें अपने साथ पाताल लोक लेकर गया था. अहिरावण को हरा पाना मुश्किल था, क्योंकि उसे वही हरा सकता था, जो पांचों दिशाओं में जल रहे दीपकों को एक साथ बुझा सके.
पौराणिक कथाओं के मुताबिक अलग-अलग दिशाओं में जल रहे पांच दीपकों में अहिरावण के प्राण बसे थे. ऐसे में हनुमान ने भगवान राम और लक्ष्मण की रक्षा के लिए पंचमुखी अवतार लिया और असंभव काम को पूरा कर दिखाया. पंचमुखी अंजनेय स्वामी हनुमान की शक्ति का प्रतीक है. यहां पर भय और दुश्मनों से छुटकारा पाने के लिए भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं.
प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है और इसके दर्शन मात्र से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है. भक्तों का मानना है कि भगवान के दर्शन मात्र से ही नकारात्मकता दूर होती है और सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है.
30 या 31? कब है पुत्रदा एकादशी, काशी के पंडित ने बताई सही तारीख, ये भी जानें इस व्रत से मिलेगा क्या
30 Dec, 2025 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है. वैसे तो साल में 24 एकादशी के व्रत पड़ते हैं. इन सभी एकादशी व्रत का अपना अलग महत्त्व होता है. शास्त्रों के मुताबिक, हर एकादशी व्रत से अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को ‘पुत्रदा एकादशी‘ के नाम से जानते हैं. इस बार तिथियों में हेरफेर के कारण पुत्रदा एकादशी की तिथि को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति है. अगर आप भी इसे लेकर कन्फ्यूज हैं तो आज ही काशी के ज्योतिषी से अपना कंफ्यूजन दूर कर लीजिए. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय बताते हैं कि पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस व्रत को पुत्र रत्न की प्राप्ति की इच्छा से रखते हैं. जिन्हें संतान है, वे उनकी सलामती और उत्तम कामना से इस व्रत को करते हैं.
हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस बार पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 30 दिसम्बर तड़के 2 बजकर 51 मिनट से हो रही है. इस दिन सूर्योदय व्यापिनी एकादशी तिथि पूरे दिन मिल रही है. ऐसे में शैव और वैष्णव दोनो ही सम्प्रदाय के लोग 30 दिसम्बर को एकादशी का व्रत रखेंगे और भगवान विष्णु की पूजा आराधना करेंगे. साल से सभी एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य को ज्ञान-अज्ञात पापों से मुक्ति मिल जाती है. इसलिए इस व्रत को विशेष पुण्यकारी माना जाता है.
कैसे करें इस दिन पूजा
पुत्रदा एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ही शास्त्रों में शालिग्राम की पूजा का भी विशेष महत्त्व बताया गया है. शालिग्राम को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. इस दिन शालिग्राम को सुगंधित द्रव्य अर्पित करना चाहिए. कमल के फूल और तुलसी पत्ते की डाल से श्रृंगार करें. इस दौरान चंदन का लेप भी लगाना चाहिए. फिर धूप-अगरबत्ती और घी का दीपक जलाकर पूजा करनी चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य को धन, ऐश्वर्य और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. मनुष्य की मनचाही मुराद भी श्रीहरि विष्णु पूरी करते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (30 दिसंबर 2025)
30 Dec, 2025 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष, उल्लास, अधिकारियों का सर्मथन फलप्रद रहेगा।
वृष राशि :- योजनाएं फलीभूत हो, शुभ समाचार संभव होगा, कार्य अवश्य ही हो।
मिथुन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य हो।
कर्क राशि :- अर्थ व्यवस्था की चिन्ता बनी रहेगी तथा कार्य कुशलता से संतोष हो।
सिंह राशि :- भोग ऐश्वर्य प्राप्ति, कार्यगति उत्तम, सुख साधनों में समय बीतेंगा।
कन्या राशि :- आर्थिक योजनापूर्ण होवे, समय पर सोचे कार्य अवश्य ही बनेंगे।
तुला राशि :- पारिवारिक बधाएं परेशान करें, विरोधी तत्व कष्टप्रद रखे।
वृश्चिक राशि :- मानसिक उद्विघ्नता बेचैनी से बचे तथा समय से लाभान्वित हो।
धनु राशि :- चिन्ताए संभव हो, मनोवृत्ति मनोबल बनाए रखे, कार्य व्यवसाय हो।
मकर राशि :- तनाव क्लेश व अशांति, धन व्यय, अशांति, कष्टप्रद स्थिति होवे।
कुंभ राशि :- मानसिक क्लेश व अशांति, धन व्यय, कष्टप्रद स्थिति बनी रहे।
मीन राशि :- लाभान्वित योजनाएं बनें, आशानुकूल सफलता का हर्ष होगा।
100 साल पुराने भगवान विष्णु के इस मंदिर में अर्पित किए जाते हैं कछुए, बौद्ध धर्म से जुड़ा है बेहद खास कनेक्शन
29 Dec, 2025 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने 10 बार अवतार लिया. भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान कछुए बनकर सृष्टि का उद्धार किया तो राक्षसों का वध करने के लिए मत्सय अवतार लिया. भगवान विष्णु के अलग-अलग रूपों को देश भर में पूजा जाता है, लेकिन असम में भगवान विष्णु एक अनोखे रूप में विराजमान हैं, जहां उनका सिर घोड़े का और नीचे का हिस्सा मानव शरीर का है. लेकिन यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि बौद्ध धर्म के लिए भी आकर्षण का केंद्र है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से ही सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. आइए जानते हैं भगवान विष्णु के इस मंदिर के बारे में…
100 साल पुराना हयग्रीव माधव मंदिर
असम के हाजो की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार को समर्पित हयग्रीव माधव मंदिर है, जिसे 100 साल से भी पुराना बताया जाता है. यह प्राचीन मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों के लिए असीम आध्यात्मिक महत्व रखता है और तीर्थयात्रियों और यात्रियों को समान रूप से आकर्षित करता है. ऐसा इसलिए क्योंकि हिंदू धर्म के लोगों का मानना है कि यहां भगवान ने मधु और कैटव नाम के राक्षस को मारने के लिए हयग्रीव अवतार लिया था. मधु और कैटव नाम के राक्षसों की उत्पत्ति भगवान विष्णु के कानों की गदंगी से हुई थी, जबकि बौद्ध धर्म के लोगों का मानना है कि इसी स्थान पर महात्मा बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था. यही कारण है कि मंदिर दोनों धर्मों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है.
मंदिर में सदियों से अनोखी परंपरा
मंदिर में सदियों से एक अनोखी परंपरा का पालन होता आया है, जिसमें मंदिर में भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए काले मुलायम खोल वाले कछुए अर्पित किए जाते हैं. मंदिर में एक मीठे पानी का तालाब बना है, जहां भक्त कछुओं को छोड़ देते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त कछुए प्रसाद स्वरूप लेकर आते हैं, लेकिन विडंबना ये है कि काले मुलायम खोल वाले कछुए संरक्षित श्रेणी में आते हैं, जो तेजी से विलुप्त हो रहे हैं. पर्यावरणविदों का मानना है कि भक्तों का जंगलों से कछुए लाकर मंदिर में चढ़ाना प्रकृति के साथ खिलवाड़ के जैसा है. हालांकि, इस परंपरा का निर्वाहन आज भी हो रहा है.
हयग्रीव माधव मंदिर में जटिल नक्काशी
हयग्रीव माधव मंदिर में जटिल नक्काशी और मूर्तियां हैं, जो मनमोहक पौराणिक कथाओं को बयां करती हैं और विभिन्न देवी-देवताओं को दर्शाती हैं. गर्भगृह में मुख्य रूप से भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की प्रतिमा का पूजन होता है और प्रसाद स्वरूप दाल, चावल और कद्दू की सब्जी अर्पित की जाती है. मंदिर के निर्माण को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं. कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर का निर्माण राजा रघुदेव नारायण ने 1583 में करवाया था, जबकि कुछ इतिहासकारों का मानना है कि मंदिर को पाल वंश के राजाओं ने अपने समय में बनवाया था.
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