धर्म एवं ज्योतिष
तो आप खूब करेंगे यात्रा
15 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हाथ भी आपके व्यवहार और जीवनशैली की जानकारी दे देते हैं। जिन व्यक्तियों के हाथ की उंगलियां चौड़े सिरों वाली यानी सिरे पर से पहले एवं दूसरे जोड़ की अपेक्षा अधिक चौड़ी होती हैं ऐसे व्यक्ति में कर्म करने की तीव्र इच्छा रहती है। ये व्यक्ति खाली नहीं बैठ सकते, लेकिन अस्थिर प्रवृत्ति के होते हैं। ऐसे व्यक्ति यात्रा प्रेमी होते हैं और जीवन में बदलाव के पक्षपाती भी होते हैं। ऐसे व्यक्ति आविष्कारक एवं यान्त्रिक दक्षता वाली प्रवृत्ति के होते हैं। विस्तार, शोध एवं अनुसंधान से इन्हें विशेष प्रेम होता है।
जिन व्यक्तियों की हाथ की उंगलियों के सिरे मिश्रित हों अर्थात एक उंगली का सिरा नोकदार दूसरी उंगली का सिरा वर्गाकार, तीसरी का सिरा चौड़ा हो, ऐसा व्यक्ति बहुमुखी प्रतिभा का स्वामी होता है। ऐसा व्यक्ति ग्रहणशील होता है और किसी भी कार्य को अनायास ही करने में सक्षम होता है। ऐसा व्यक्ति सब कार्यों में दखल तो रखता है, किन्तु दक्ष किसी कार्य में नहीं होता। ऐसा व्यक्ति सर्वगुण सम्पन्न तो होता है, किन्तु उसमें विशेषज्ञता की कमी होती है। हर प्रकार के व्यक्ति से वह सही व्यवहार कर सकता है।
इसलिए ईश्वर को प्रकाश के रूप में बताया जाता है
15 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हमें हमेशा ईश्वर को प्रकाश के रूप में बताना होता है, क्योंकि प्रकाश से आप देखते हैं, प्रकाश से हर चीज स्पष्ट होती है। लेकिन जब आपका अनुभव बुद्धि की सीमाओं को पार करना शुरू करता है, तब हम ईश्वर को अंधकार के रूप में बताने लगते हैं। आप मुझे यह बताएं कि इस अस्तित्व में कौन ज्यादा स्थायी है? कौन अधिक मौलिक है, प्रकाश या अंधकार? निश्चित ही अंधकार। शिव अंधकार की तरह सांवले हैं। क्या आप जानते हैं कि शिव शाश्वत क्यों हैं? क्योंकि वे अंधकार हैं। वे प्रकाश नहीं हैं। प्रकाश बस एक क्षणिक घटना है। अगर आप अपनी तर्क-बुद्धि की सीमाओं के अंदर जी रहे हैं तब हम आपको ईश्वर को प्रकाश जैसा बताते हैं। अगर आपको बुद्धि की सीमाओं से परे थोड़ा भी अनुभव हुआ है, तो हम ईश्वर को अंधकार जैसा बताते हैं, क्योंकि अंधकार सर्वव्यापी है।
अंधकार की गोद में ही प्रकाश अस्तित्व में आया है। वह क्या है जो अस्तित्व में सभी चीजों को धारण किए हुए है? यह अंधकार ही है। प्रकाश बस एक क्षणिक घटना है। इसका स्रोत जल रहा है, कुछ समय के बाद यह जलकर खत्म हो जाएगा। चाहे वह बिजली का बल्ब हो या सूरज हो। एक कुछ घंटों में जल जाएगा, तो दूसरे को जलने में कुछ लाख साल लगेंगे, लेकिन वह भी जल जाएगा।
तो सूर्य से पहले और सूर्य के बाद क्या है? क्या चीज हमेशा थी और क्या हमेशा रहेगी? अंधकार। वह क्या है जिसे आप ईश्वर कहते हैं? वह जिससे हर चीज पैदा होती है, उसे ही तो आप ईश्वर के रूप में जानते हैं। अस्तित्व में हर चीज का मूल रूप क्या है? उसे ही तो आप ईश्वर कहते हैं। अब आप मुझे यह बताएं कि ईश्वर क्या है, अंधकार या प्रकाश? शून्यता का अर्थ है अंधकार। हर चीज शून्य से पैदा होती है। विज्ञान ने आपके लिए यह साबित कर दिया है।
और आपके धर्म हमेशा से यही कहते आ रहे हैं -ईश्वर सर्वव्यापी है। और केवल अंधकार ही है जो सर्वव्यापी हो सकता है।
प्रकाश का अस्तित्व बस क्षणिक है, प्रकाश बहुत सीमित है, और खुद जलकर खत्म हो जाता है, लेकिन चाहे कुछ और हो या न हो, अंधकार हमेशा रहता है। लेकिन आप अंधकार को नकारात्मक समझते हैं। हमेशा से आप बुरी चीजों का संबंध अंधकार से जोड़ते रहे हैं। यह सिर्फ आपके भीतर बैठे हुए भय के कारण है। आपकी समस्या की यही वजह है। यह सिर्फ आपकी समस्या है, अस्तित्व की नहीं। अस्तित्व में हर चीज अंधकार से पैदा होती है। प्रकाश सिर्फ कभी-कभी और कहीं-कहीं घटित होता है। आप आसमान में देखें, तो आप पाएंगे कि तारे बस इधर-उधर छितरे हुए हैं और बाकी सारा अंतरिक्ष अंधकार है, शून्य है, असीम और अनन्त है।
यही स्वरूप ईश्वर का भी है। यही वजह है कि हम कहते हैं कि मोक्ष का अर्थ पूर्ण अंधकार है। यही वजह है कि योग में हम हमेशा यह कहते हैं कि चैतन्य अंधकार है। केवल तभी जब आप मन के परे चले जाते हैं, आप अंधकार का आनन्द उठाना जान जाते हैं, उस अनन्त, असीम सृष्टा को अनुभव करने लगते हैं। जब आपकी आंखें बंद होती हैं, तो उस अंधकार में आपके सभी अनुभव और ज्यादा गहरे हो जाते हैं!
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (15 जनवरी 2026)
15 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, लेन-देन के मामले में हानि, चिन्ता असमंजस रहेगा।
वृष राशि :- विवाद ग्रस्त होने से बचें, उत्तम भावना, क्लेश व हानि, असमंजस की स्थिति रहेगी।
मिथुन राशि :- व्यग्रता असमंजस में रखे, विषय व्यवस्था से बचने की चेष्ठा अवश्य करें।
कर्क राशि :- स्त्री से भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति तथा सुख-समृद्धि के साधन अवश्य ही बनेंगे।
सिंह राशि :- समय और धन नष्ट होगा, क्लेश व अशांति, विघटनकारी तत्वों से परेशानी बनेगी।
कन्या राशि :- नवीन योजना फलप्रद होगी, भावनायें संवेदनशील बनी रहेंगी, धैर्य रखकर कार्य करें।
तुला राशि :- धन का व्यर्थ व्यय होगा, कार्य कुशलता से संतोष होगा, मनोबल बनाये रखें।
वृश्चिक राशि :- भाग्य का सितारा साथ देगा, समय अनुकूल नहीं कार्य स्थगित रखें।
धनु राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद होगा, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी।
मकर राशिः- मान-प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य कुशलता से संतोष होगा, समय स्थिति का ध्यान रखें।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक होंगे तथा भाग्य का सितारा प्रबल अवश्य ही होगा।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्यकर्ता व कार्य कुशलता से संतोष होगा, शांति रहेगी।
13 या 14 जनवरी... कब है षटतिला एकादशी व्रत? तिल का 6 तरह से करें उपयोग, जानें पूजा विधि और पारण का समय
13 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ मास के कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी कहा जाता है और यह जनवरी मास की पहली एकादशी है. शास्त्रों में इसका विशेष पुण्य बताया गया है. पद्मपुराण एवं विष्णुधर्मोत्तर पुराण के अनुसार, एकादशी का व्रत पापों के नाश और दरिद्रता दूर करने वाला माना गया है. इस एकादशी व्रत में तिल का दान, तिल का प्रसाद और तिल का सेवन किया जाता है. लेकिन इस बार एकादशी तिथि को लेकर हर जगह कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है, कुछ जगह बताया जा रहा है कि एकादशी तिथि 13 जनवरी को है तो कुछ 14 जनवरी बोल रहे हैं. आइए पंचांग के माध्यम से जानते हैं इस बार षटतिला एकादशी का व्रत कब किया जाएगा…
कब है षटतिला एकादशी व्रत?
एकादशी तिथि का प्रारंभ – 13 जनवरी, दोपहर 3 बजकर 18 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन – 14 जनवरी, शाम 5 बजकर 52 मिनट तक
ऐसे में उदिया तिथि को मानते हैं षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी दिन बुधवार को किया जाएगा. इस बार षटतिला एकादशी के दिन ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. साथ ही इस बार षटतिला एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे महायोग बन रहे हैं.
पारण का समय: 15 जनवरी, सुबह 7 बजे से लेकर 9 बजकर 30 मिनट तक.
षटतिला एकादशी का महत्व
एकादशी तिथि का व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना जाता है और इस व्रत को करने से पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में चल रही परेशानियों से मुक्ति मिलेगी. शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से पूर्व जन्मों के पाप, ऋण और दरिद्रता का क्षय होता है. साथ ही जो व्यक्ति श्रद्धा से षटतिला एकादशी का व्रत करता है, उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति और अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. मान्यता है कि षटतिला एकादशी के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर तर्पण करने और तिल का दान करने का विशेष महत्व बताया गया
6 प्रकार से तिल का प्रयोग करने का विधान
जैसे कि इस एकादशी के नाम में षट अर्थ छह और तिला का अर्थ तिल. इस एकादशी में तिल (तिलहन) का छह प्रकार से प्रयोग करने का विधान है, इसलिए इसे षटतिला कहा गया है. इस व्रत के दिन तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल का हवन, तिल का दान, तिल का भोजन और तिल का उपयोग जल में मिलाकर पितृ तर्पण.
षटतिला एकादशी पूजा विधि
षटतिला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत्त होकर हाथ में अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें. इस दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें. इसके बाद चौकी बिछाएं और उस पर भी पीला कपड़ा बिछाएं. इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. फिर तुलसी दल, चंदन, अक्षत, फल, तिल, फूल, वस्त्र, तिल से बना भोग आदि पूजा से संबंधित चीजें अर्पित करें. इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. इसके बाद घी के दीपक से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें. फिर पूरे दिन फलहार रहें और दान भी अवश्य करें. शाम के समय भी भगवान की आरती करें और रात्रि जागरण करें. इसके बाद अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें.
कौन हैं नागा साधु दिगंबर अजय गिरि? 11 हजार रुद्राक्ष की माला और तन पर भस्म, माघ मेले में बने आकर्षण का केंद्र
13 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ मास में हजारों लाखों की संख्या में साधु-संत प्रयागराज पहुंचते हैं और कल्पवास भी करते हैं. इस बार माघ मेले में 11 हजार रुद्राक्ष की माला और तन पर भस्म लगाए नागा साधु पहुंचे हैं, जो वहीं रहकर साधना में लीन हैं. इस रूप को धारण करने के लिए उन्होंने अपना पिंड दान किया और फिर साधु बनने की राह पर चले हैं.
साल 2025 के महाकुंभ के बाद माघ मेला साल का सबसे बड़ा मेला बनकर उभरा है, जहां रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं. माघ मेले के संगम तट पर आस्था का नया रूप भी देखने को मिल रहा है. साधु और संतों का जमावड़ा तटों पर स्नान कर अनुष्ठानों में लीन दिख रहा है, तो वहीं कुछ ऐसे तपस्वी भी दिखने को मिल रहे हैं, जो अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए माघ मेले का हिस्सा बने हैं. बताया जाता है कि माघ मेला केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि अहंकार त्याग, साधु-संत संग, आत्मशुद्धि, जीवन की दिशा परिवर्तन का अवसर है. आइए जानते हैं 11 हजार रुद्राक्ष की माला और तन पर भस्म लगाए नागा साधु के बारे में और माघ मास का महत्व...
हम बात कर रहे हैं 11,000 रुद्राक्ष की माला पहने एक नागा साधु की, जो निरंजनी पंचायती अखाड़ा के दिगंबर अजय गिरि हैं. माघ मेले में उन्हें सिर से लेकर गले तक में लंबी-लंबी रुद्राक्ष की माला को धारण करते हुए देखा गया. उन्होंने बताया कि मैं ज्यादातर केदारनाथ में रहता हूं और वाराणसी वह स्थान है, जहां भगवान शिव अवतरित हुए थे. काशी वह नगर है जहां मोक्ष प्राप्त होता है, और ऐसा माना जाता है कि यहां मरने वालों को मोक्ष प्राप्त होता है. माघ मेले के दौरान, देश भर के सभी क्षेत्रों से श्रद्धालु भजन सुनने, गाने और आध्यात्मिक साधनाओं में भाग लेने के लिए एकत्रित होते हैं.
11,000 रुद्राक्ष की माला पर बात करते हुए दिगंबर अजय गिरि ने बताया कि 26 साल पहले उन्होंने संन्यास लिया था और कुछ साल पहले ही 11,000 रुद्राक्ष को धारण किया है. शिव पुराण में भी इस बात का जिक्र है कि जो 11,000 रुद्राक्ष की माला धारण करता है, वह शिव के लिए बहुत प्रिय होता है. इस रूप को धारण करने के लिए उन्होंने अपना पिंड दान किया और फिर साधु बनने की राह पर चले हैं.
शरीर पर रमी भस्म को लेकर साधु ने कहा कि भस्म शिव को प्रिय है और भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए रुद्राक्ष और भस्म दोनों ही अनिवार्य हैं. भस्म हमेशा याद दिलाती है कि जन्म और मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है. माघ मेले में नागा साधु और अघोरी बाबा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.
माघ मेला भारत की सनातन परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और तपोमय पर्व है, जो मुख्यतः प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) में माघ मास भर आयोजित होता है. इसे कल्पवास का महापर्व भी कहा गया है. जब माघ मास (पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक) में लाखों श्रद्धालु गंगा–यमुना–सरस्वती के संगम पर स्नान, दान, जप, तप और व्रत करते हैं, उसी आध्यात्मिक आयोजन को माघ मेला कहा जाता है. पद्मपुराण और मत्स्यपुराण में माघ स्नान को सहस्र अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी बताया गया है.
शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है. वहीं इस मास में कल्पवास भी किया जाता है और इस दिन कई नियमों का पालन किया जाता है. कल्पवास के दौरान संयमित जीवन, भूमि शयन, एक समय सात्त्विक भोजन, ब्रह्मचर्य और विष्णु नाम जप किया जाता है. कहा गया है कि एक माघ मास में कल्पवास का फल कई वर्षों की तपस्या के बराबर मिलता है.
महाबली रावण का ये स्तोत्र पैसों से भर देगा घर, अक्षय धन के लिए इसका पाठ जरूरी
13 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ मास में भगवान शिव की पूजा अर्चना, पूजा पाठ, व्रत, धार्मिक यात्रा आदि करने का विशेष महत्त्व है. अगर माघ मास में कुछ खास तिथि पर भगवान शिव के स्तोत्र, मंत्र आदि का पाठ किया जाए तो साधकों को कई गुना फल मिलता है. शिव महापुराण और दूसरे धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के अनेक शक्तिशाली और मनोकामना पूर्ति के स्तोत्रों का वर्णन किया गया है. माघ मास भगवान शिव को बेहद ही प्रिया और समर्पित मास है. इस मास के पहले प्रदोष व्रत यानी त्रयोदशी तिथि पर एक खास स्तोत्र का पाठ किया जाए तो साधक को अपार धन की प्राप्ति, विद्या की प्राप्ति, बल की प्राप्ति हो जाने की मान्यता है. पहले प्रदोष व्रत पर किस स्तोत्र के पाठ से अपार धन की प्राप्ति होगी, चलिए विस्तार से जानते हैं.
माघ मास भगवान शिव को समर्पित मास है. इस मास में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का आगमन होता है, जिसमें त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत करने का विधान है. माघ मास में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव की विशेष आराधना करने पर मनवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है. कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यदि महाबली, राक्षस राजा और भगवान शिव के परम भक्त महाराजा रावण रचित ‘शिव तांडव’ स्तोत्र का पाठ तीन समय सुबह (ब्रह्म मुहूर्त), दोपहर और प्रदोष काल में किया जाए तो अपार धन, विद्या बुद्धि, बल आदि सभी की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है. शिव तांडव स्तोत्र बेहद ही शक्तिशाली स्त्रोत है, जिसमें भगवान शिव का वर्णन किया गया है.
बनेंगे रुके हुए काम
शिव तांडव स्तोत्र का वर्णन कई धार्मिक ग्रंथों में किया गया है. इस स्तोत्र का पाठ दिन में एक बार, दो बार या तीन बार कर सकते हैं. इससे सभी कार्यों में सफलता और रुके हुए कार्यों में प्रगति आती है. शिव तांडव स्तोत्र का वर्णन शिव महापुराण और उत्तर रामायण आदि ग्रंथों में विशेष तौर पर आता है. माघ मास कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी तिथि पर इस स्तोत्र का पाठ भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, बेल पत्र, तिल, जौ, शहद आदि सामग्री से अभिषेक करने के बाद किया जाए तो धन का आगमन बना रहता है. साल 2026 में माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी बृहस्पतिवार की रात 08:17 से शुरू होकर 16 जनवरी शुक्रवार की रात 10:21 तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार 16 जनवरी को माघ मास का पहला प्रदोष व्रत किया जाएगा.
मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान क्यों इतना जरूरी? जानें तिल और गुड़ बांटने का भी सीक्रेट
13 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ का महीना वैसे भी अपने आप में खास है. चाहे बात मौसम की हो या धर्म की. इसी महीने मकर संक्रांति आती है और हर जगह लोग इसे अपने-अपने तरीके से मनाते हैं. हिंदू परंपरा में इस दिन खिचड़ी दान करने का बड़ा महत्त्व है. लोग मानते हैं कि इस दिन दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पुण्य भी मिलता है. ग्रंथों में लिखा है कि अगर आप अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा से खिचड़ी दान करते हैं तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है. सवाल है कि कि क्या सिर्फ संक्रांति के दिन ही दान करना जरूरी है. पंडितों की मानें तो माघ के महीने में कभी भी खिचड़ी दान करो, उसका अच्छा फल जरूर मिलेगा.
पिता बेटे के घर
कि मकर संक्रांति वो समय है जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं. शास्त्रों के हिसाब से सूर्य शनि के पिता माने जाते हैं. पिता का बेटे के घर जाना शुभ संकेत है और इसी वजह से इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है. इस दिन तिल, गुड़, अनाज और खास तौर पर खिचड़ी का दान करने की परंपरा है. पंडित मिश्रा कहते हैं कि इस दिन दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और यह परंपरा बहुत पुरानी है.
असली दान क्या
पंडित उमा चंद्र मिश्रा बताते हैं कि इसी दिन गंगा जी पृथ्वी पर आई थीं और कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिली थीं. इसलिए मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्त्व है. लोग सुबह-सुबह नदी में स्नान करते हैं और फिर दान-पुण्य करते हैं. अगर किसी के आसपास नदी नहीं है तो घर पर ही तिल मिलाकर नहाना चाहिए. ऐसा करने से भी उतना ही पुण्य मिलता है. मूंग दाल और चावल से बनी खिचड़ी सात्त्विक मानी जाती है और ये शरीर को ताकत और गर्मी दोनों देती है. पंडित मिश्रा के मुताबिक, मूंग दाल की खिचड़ी का दान खास पुण्य देता है. कपड़े और पैसे का दान भी अच्छा माना गया है. ये दान ब्राह्मण या जरूरतमंद लोगों को देना चाहिए. असली दान वही है जिसमें मन से श्रद्धा और सहजता हो बस किसी को कुछ पकड़ा देने से काम नहीं चलता.
नाम अलग-अलग
भारत के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति के कई नाम हैं. कहीं पोंगल, कहीं लोहड़ी, तो कहीं पाटी या संक्रांत. तिल और गुड़ खाने और बांटने की भी परंपरा है. माना जाता है कि इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं और रिश्तों में मिठास भी बढ़ती है. मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था, मौसम और परंपरा का संगम है. ये दिन हमें दान का असली अर्थ समझाता है और यही वजह है कि हमारे बुजुर्ग हमेशा दान और मदद करने की सीख देते रहे हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (13 जनवरी 2026)
13 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- मान प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, कार्य व्यवसाय गति उत्तम, स्त्री वर्ग से क्लेश अवश्य होगा।
वृष राशि :- धन प्राप्ति के योग बनेंगे, नवीन मैत्री-मंत्रणा प्राप्त होगी ध्यान अवश्य दें।
मिथुन राशि :- इष्ट मित्र सहायक होंगे, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी तथा कार्य बनेंगे।
कर्क राशि :- सामाजिक कार्य में प्रतिष्ठा, कार्य कुशलता से संतोष तथा रुके कार्य बनेंगे।
सिंह राशि :- सोचे कार्य परिश्रम से समय पर पूर्ण होंगे, व्यवसाय गति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- अधिकारियों का समर्थन फलप्रद रहेगा, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
तुला राशि :- दैनिक व्यवसायिक गति उत्तम तथा व्यवसायिक चिन्ता कम होगी, समय का ध्यान रखें।
वृश्चिक राशि :- कार्यवृत्ति में सुधार होगा, असमंजस तथा सफलता के कार्य अवश्य होंगे।
धनु राशि :- स्थिति अनियंत्रित रहेगी, समय स्थिति को ध्यान में रखकर कार्य अवश्य करें।
मकर राशिः- मानसिक खिन्नता से स्वाभाव में उद्विघ्नता बनेगी, विचारे कार्यों को धैर्य पूर्वक निपटायें।
कुंभ राशि :- योजना फलीभूत होगी, विघटनकारी तत्व परेशान करेंगे, समय से कार्य करें।
मीन राशि :- मनोबल उत्साहवर्धक होगा, कार्य कुशलता से संतोष तथा लाभ अवश्य ही होगा।
सूर्य, बुध समेत चार ग्रहों गोचर से इस सप्ताह सिंह समेत 5 राशियां के कमाई के बढ़ेंगे साधन, पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में टेंशन होगी कम
12 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जनवरी के इस सप्ताह 12 से 18 जनवरी 5 टैरो राशिफल वालों के लिए कल्याणकारी रहने वाला है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जनवरी के इस सप्ताह में मकर राशि में शुक्र, सूर्य, मंगल, चंद्र और बुध ग्रह गोचर करने वाले हैं, इस तरह एक राशि में पांच ग्रहों की युति बनने जा रही है. मकर राशि में पांच ग्रहों की युति से पंचग्रही योग, चतुर्ग्रही योग, लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग का निर्माण हो रहा है, जो 5 टैरो राशिफल वालों के लिए शुभ फलदायी रहने वाला है. यह सप्ताह मकर संक्रांति का भी रहने वाला है, इसलिए मकर संक्रांति के इस सप्ताह 5 टैरो राशिफल वालों को धार्मिक कार्यों में मन लगेगा और नौकरी पेशा जातकों को ऑफिस का माहौल अच्छा लगेगा. आइए जानते हैं जनवरी 2026 के इस सप्ताह किन किन टैरो राशिफल वालों का भाग्योदय होने वाला है…
मेष (नाइट ऑफ स्वॉर्ड्स) का टैरो साप्ताहिक राशिफल (Aries Weekly Tarot Horoscope)
टैरो कार्ड्स की गणना के अनुसार, जनवरी 2026 के इस सप्ताह मेष राशि वाले बच्चों की तरक्की व विकास से खुश हो सकते हैं और आप बच्चों पर ज्यादा ध्यान भी दे सकते हैं. करियर के लिहाज से जनवरी का यह सप्ताह अच्छा रहेगा, आप अपने काम से संतुष्ट रहेंगे और ऑफिस में काम करने का माहौल भी अच्छा रहेगा. साथ ही इस सप्ताह आपको अतिरिक्त धन कमाने के अवसर भी मिल सकते हैं, जिससे आपके छोटे-मोटे खर्चे पूरे हो जाएंगे. अगर आप व्यापारिक गतिविधियों जैसे ट्रेडिंग और शेयर बाजार में हाथ आजमाते हैं, तो मेष राशि वालों को शुभ योग के प्रभाव से इस सप्ताह अच्छा मुनाफा कमाने का अवसर मिल सकता है.
सिंह (जजमेन्ट) का टैरो साप्ताहिक राशिफल (Leo Weekly Tarot Horoscope)
टैरो कार्ड्स की गणना के अनुसार, जनवरी 2026 के इस सप्ताह सिंह राशि वालों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे और बिजनेस में अच्छी तरक्की भी होगी. इस सप्ताह शुभ योग के प्रभाव से सिंह राशि वालों को पैसों के मामले में, कमाई की क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है और धन प्राप्ति के नए नए मार्ग भी मिलेंगे. अपनी विनम्रता और ईमानदार संवाद से विरोधियों को भी जीत सकते हैं और समाज के कई प्रतिष्ठित लोगों से आपके संबंध मजबूत होंगे. आपको इस सप्ताह यात्रा के लिए भी ज्यादा समय मिल सकता है. हो सकता है आप इस सप्ताह जीवनसाथी या किसी दोस्त के साथ घूमने चले जाएंगे. सिंह राशि वालों को इस सप्ताह शुभ योग के प्रभाव से पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में कई फायदे मिलेंगे.
टैरो कार्ड्स की गणना के अनुसार, जनवरी 2026 के इस सप्ताह वृश्चिक राशि वालों को अटके धन की प्राप्ति के योग बन रहे हैं और कई विवादों से मुक्ति भी मिलेगी. बिजनेस की बात करें तो अगर आप इसमें हाथ आजमाते हैं तो इस सप्ताह आप फायदे में रह सकते हैं और बिजनेस पर फिर से नियंत्रण पा सकते हैं. इस राशि के जो जातक काफी समय से रोजगार की तलाश कर रहे हैं, उनको शुभ योग का लाभ मिल सकता है. अगर किसी रिश्तेदार से वाद-विवाद चल रहा है तो वह इस सप्ताह किसी बड़े बुजुर्ग की माध्यम से वह खत्म हो सकता है. मकर संक्रांति की वजह से इस सप्ताह परिवार में धार्मिक माहौल रहेगा और धर्म-कर्म के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे.
धनु (दी फूल) का टैरो साप्ताहिक राशिफल (Sagittarius Weekly Tarot Horoscope)
टैरो कार्ड्स की गणना के अनुसार, जनवरी 2026 का यह सप्ताह धनु राशि वालों के लिए शानदार रहने वाला है. धनु राशि वालों को इस सप्ताह किसी सदस्य से शुभ समाचार सुनने को मिल सकता है, जिसका आप काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. अगर किसी कानूनी मामलों में फंसे हुए हैं तो इस सप्ताह मामला आपके पक्ष में आने की संभावना बन रही है और आपके कर्मों के मुताबिक फल मिलेगा. इस राशि के नौकरी पेशा जातकों की बात करें तो मकर संक्रांति के इस सप्ताह आपको अधिकारियों से काम की तारीफ मिल सकती है और आपके सभी टारगेट पूरे भी हो जाएंगे. शुभ योग के प्रभाव से इस सप्ताह आप समझदारी से निवेश कर सकते हैं, जिससे भविष्य में अच्छा रिटर्न और लाभ मिलेगा.
मीन (ऐस ऑफ स्वोर्ड्स) का टैरो साप्ताहिक राशिफल (Pisces Weekly Tarot Horoscope)
टैरो कार्ड्स की गणना के अनुसार, जनवरी 2026 का यह सप्ताह मीन राशि वालों के लिए अच्छा रहेगा. मीन राशि वालों को इस सप्ताह अटके धन की प्राप्ति होगी और किसी अच्छी जगह निवेश का मौका भी मिल सकता है. प्रतीयोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इस सप्ताह शुभ समाचार मिल सकता है, जिसके लिए वे काफी लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. अगर आप इस सप्ताह मेहनत और लगन से काम करते हैं तो आपकी कमाई बढ़ सकती है और परिवार की सभी जरूरतों को पूरा कर पाने की स्थिति में होंगे. वैवाहिक जीवन की बात करें तो आप जीवनसाथी के साथ खुशहाल यादें साझा करके अच्छा संबंध महसूस कर सकते हैं. अगर आप ट्रेडिंग बिजनेस करते हैं तो आपको इस सप्ताह सफलता और अच्छा लाभ मिल सकता है.
मैंने झाड़ू के साथ घर में रख दीं 3 चीजें, मेरे करियर में हुई तरक्की और बनने लगे धन आगमन के साधन, जानें कैसे?
12 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
घर की सफाई सिर्फ बाहरी रूप से सुंदर बनाने का काम नहीं होती, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली बनाए रखने का एक अहम तरीका भी है. ज्योतिष शास्त्र में झाड़ू को केवल गंदगी साफ करने के साधन के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि इसे मां लक्ष्मी के आगमन और घर में समृद्धि बनाए रखने से जोड़कर देखा गया है. ऐसा माना जाता है कि जिस घर में झाड़ू का सम्मान होता है और उसे सही जगह पर रखा जाता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है. वहीं, अगर झाड़ू को अनदेखा किया जाए या गलत जगह पर रखा जाए, तो यह दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित कर सकता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं
झाड़ू केवल सफाई के लिए नहीं, बल्कि घर में मां लक्ष्मी के वास का प्रतीक है. इसके पास कपूर, कच्चे चावल और फिटकरी रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और धन, शांति व खुशहाली का प्रवाह लगातार बना रहता है.
झाड़ू रखने की दिशा, स्थान और उसके साथ रखी जाने वाली चीजें घर में धन, शांति और समृद्धि बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. झाड़ू को हमेशा किसी ऐसी जगह पर रखना चाहिए जो बाहरी नजरों से छुपी हो और वहां वातावरण साफ-सुथरा हो.
इसके साथ ही अगर झाड़ू के साथ कुछ विशेष चीजें भी रखी जाएं, तो न केवल घर में धन और खुशहाली बनी रहती है, बल्कि वहां मौजूद नकारात्मक ऊर्जा भी खत्म हो जाती है. इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि झाड़ू के पास कौन-सी तीन चीजें रखने से घर में मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और समृद्धि का मार्ग साफ रहता है.
1. झाड़ू के पास रखें कपूर झाड़ू रखने की जगह पर कपूर रखना बेहद शुभ माना जाता है. कपूर में ऐसी ऊर्जा होती है जो नकारात्मक शक्तियों को अपने में समेट लेती है और वातावरण को शुद्ध करती है. इसे जलाना या बस रखना दोनों ही स्थिति में घर में सकारात्मकता लाता है. जब झाड़ू के पास कपूर रखा जाता है, तो यह सुनिश्चित होता है कि घर में सफाई के साथ-साथ कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में न ठहरे. इसके अलावा, यह उपाय घर में धन और खुशहाली के रास्ते को भी साफ करता है. ज्योतिष में यह माना जाता है कि कपूर की महक और ऊर्जा घर के प्रत्येक कोने तक फैली रहती है, जिससे घर का माहौल हमेशा शांत और सुखद बना रहता है.
2. झाड़ू के पास रखें कच्चे चावल हिंदू धर्म में अक्षत यानी कच्चे चावल को समृद्धि और संपूर्णता का प्रतीक माना जाता है. पूजा के दौरान चावल का इस्तेमाल अनिवार्य होता है और इसे मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है. झाड़ू रखने की जगह पर थोड़े से कच्चे चावल किसी कटोरी में रख दें या कपड़े में बांधकर रखें. ऐसा करने से घर में हमेशा धन की कमी नहीं होती और अनाज का भंडार भरा रहता है. यह उपाय घर में दरिद्रता को दूर करने में भी मदद करता है और अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बनाए रखता है. इसे करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मां लक्ष्मी का वास स्थायी होता है.
3. झाड़ू के पास रखें फिटकरी फिटकरी का इस्तेमाल पुराने समय से जल को शुद्ध करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए किया जाता रहा है. वास्तु और ज्योतिष में यह माना जाता है कि फिटकरी घर से बुरी शक्तियों और रोगों को दूर रखती है. झाड़ू के पास फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा रखने से उस स्थान पर वास्तु दोष नहीं उत्पन्न होते. इससे घर का वातावरण हमेशा शांत, संतुलित और सौहार्दपूर्ण रहता है. जब घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो मां लक्ष्मी अपने आप वहां निवास करती हैं और घर में समृद्धि लाती हैं.
घर में झाड़ू केवल सफाई का साधन नहीं, बल्कि धन और खुशहाली बनाए रखने का एक अद्भुत उपाय भी है. इसके पास कपूर, कच्चे चावल और फिटकरी रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है, माहौल शुद्ध और सकारात्मक बनता है, और मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है. यह छोटे लेकिन असरदार उपाय घर की खुशहाली, शांति और समृद्धि को बढ़ाते हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (12 जनवरी 2026)
12 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- समय विफल होगा, कार्यगति में बाधा, चिन्ता, व्यर्थ भ्रमण होगा।
वृष राशि :- इष्ट मित्रों से सुख, अधिकारियों से मेल-मिलाप होगा तथा रुके कार्य अवश्य बनेंगे।
मिथुन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे, सफलता मिलेगी।
कर्क राशि :- बिगड़े कार्य अवश्य बनेंगे, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, समय का लाभ अवश्य लें।
सिंह राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक होंगे, कुटुम्ब की समस्यायें सुलझें, स्त्री वर्ग से हर्ष होगा।
कन्या राशि :- भावनायें संवेदनशील रहें, कुटुम्ब में सुख तथा समृद्धि के साधन बनेंगे।
तुला राशि :- समय की अनुकूलता से लाभ लें, स्वास्थ्य नरम रहेगा, किसी धारणा की अनदेखी होगी।
वृश्चिक राशि :- स्त्री शरीर कष्ट, मानसिक उद्विघ्नता, स्वभाव में उद्विघ्नता तथा असमर्थता रहेगी।
धनु राशि :- आशानुकूल सफलता, स्थिति में सुधार, व्यवसाय गति उत्तम बनी रहेगी।
मकर राशिः- धन का व्यर्थ व्यय होगा, मानसिक उद्विघ्नता हानिप्रद होगी ध्यान दें।
कुंभ राशि :- इष्ट मित्रों से सहयोग, कार्य बनेंगे, कार्यगति अनुकूल बनेगी, समय का ध्यान रखें।
मीन राशि :- भाग्य का सितारा प्रबल होगा, बिगड़ें कार्य बनेंगे, रुके कार्य अवश्य बनेंगे।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का करना है दर्शन, तो भूलकर भी न करें ये 6 काम, जानें दर्शन-आरती समय, ड्रेस कोड और सुविधाएं
11 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
8 जनवरी से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 10 जनवरी से दो दिवसीय सोमनाथ यात्रा पर रहेंगे. जहां पर मंदिर में दर्शन, पूजन, ओंकार मंत्र का जाप, शौर्य यात्रा आदि जैसे कार्यक्रमों में शामिल होंगे. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के समय या अन्य मौकों पर आपको सोमनाथ मंदिर जाना है और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने हैं तो उसके लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा. इसमें कुछ धार्मिक नियम हैं तो कुछ मंदिर प्रशासन से जुड़े नियम हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है. आइए जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर में दर्शन के क्या नियम हैं, कौन से काम भूलकर नहीं करने हैं और भक्तों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
द्वादश ज्योतिर्लिंग में प्रथम है सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
शिव पुराण के द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति में 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है, जिसमें सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रथम है, जिसकी स्थापना चंद्र देव ने की थी. चंद्रमा को सोम भी कहा जाता है, इस वजह से इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ है. सोमनाथ यानि जो चंद्रमा के नाथ यानि प्रभु हैं महादेव. क्षय रोग से मुक्ति के लिए यहां पर चंद्रमा ने भगवान शिव की स्तुति की थी, उनकी कृपा से चंद्र देव दोष मुक्त हुए थे.
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्॥
परल्यां वैघनाथं च डाकिन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति॥
भूलकर भी न करें ये काम
आपको जिस दिन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने हैं, उससे एक दिन पहले से सात्विक भोजन करें. मांस, मदिरा या तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें.
कहा जाता है कि भगवान भाव के भूखे है. वैसे भी महादेव भोलेनाथ हैं, आपका मन जितना ही पवित्र और निर्मल होगा, उतना ही आपको शिव के सामिप्य का अनुभव होगा. अपने मन में किसी भी प्रकार का क्रोध, निंदा, ईर्ष्या, द्वेष, लोभ आदि न रखें. ऐसे में भक्ति का मार्ग आपके लिए कठिन होगा.
मंदिर के अंदर जूते या चप्पल पहन कर न जाएं. मंदिर के बाहर जूते और चप्पल रखने के लिए उचित स्थान बनाए गए हैं, वहां पर नि:शुल्क सेवाएं दी जाती हैं. वहां पर अपने जूते चप्पल निकालकर मंदिर में प्रवेश करें.
सोमनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे हैं तो आपको ड्रेस कोड का पालन करना होगा. कपड़े भी सही और मर्यादित होने चाहिए. आप धोती, कुर्ता, पायजामा, साड़ी, सलवार, कमीज आदि पहनकर जा सकते हैं. मिनी स्कर्ट या इस तरह के कपड़ों को पहनकर मंदिर में आने की अनुमति नहीं है.
मंदिर के अंदर कैमरा, मोबाइल फोन, लैपटॉप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर जाना मना है. इसे आप क्लॉक रूम के लॉकर में रख सकते हैं. इसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं है.
मंदिर के अंदर फोटो लेना और वीडियो बनाना मना है. सुरक्षा कारणों से इस बात का ध्यान रखना चाहिए.
मंदिर परिसर में पान, बीड़ी, सिगरेट जैसी वस्तुओं का सेवन करना पूर्णतया वर्जित है. अगर ऐसा करते हैं तो आपको जुर्माना देना पड़ सकता है.
सोमनाथ मंदिर में मिलने वाली सुविधाएं
क्या मंदिर में कोई भी दर्शन कर सकता है?
हां, जो लोग हिंदू धर्म में विश्वास करते हैं, वे लोग सोमनाथ मंदिर में पूजा, अर्चना और दर्शन कर सकते हैं.
सोमनाथ मंदिर में दर्शन के लिए रुपए देने होते हैं?
नहीं. सोमनाथ मंदिर में प्रवेश और दर्शन के लिए कोई रुपए नहीं देने होते हैं.
दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्या सुविधाएं हैं?
मंदिर में दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्हील चेयर, लिफ्ट और वाहन की सुविधा है. मंदिर के मेन गेट पर आपको व्हील चेयर और वाहन की सुविधा मिलती है.
हवन और यज्ञ कराया जा सकता है?
मंदिर के गेस्ट हाउस में रूम कैसे बुक करें?
सोमनाथ मंदिर के गेस्ट हाउस में आप ऑनलाइन रूम बुक कर सकते हैं. इसके लिए आपको मंदिर की वेबसाइट पर जाना होगा.
नवजात बच्चों के लिए सुविधाएं हैं?
हां, गेस्ट हाउस में नवजात बच्चों के लिए पालना सहित अन्य सुविधाएं दी गई हैं.
सोमनाथ मंदिर में दर्शन और आरती समय
सोमनाथ मंदिर में दर्शन का समय सुबह में 6 बजे से लेकर रात को 10 बजे तक है.
आरती का समय: सुबह में 7 बजे, दोपहर में 12 बजे, शाम को 7 बजे.
लाइट एंड साउंड शो: रात में 8 बजे से लेकर रात 9 बजे तक.
माघ मासिक शिवरात्रि कब है? रात में लगेगी भद्रा, जानें तारीख, शिव पूजा मुहूर्त और महत्व
11 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जनवरी की मासिक शिवरात्रि माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को है. यह नए साल 2026 की पहली शिवरात्रि भी है. इस मासिक शिवरात्रि पर रात में भद्रा लग रही है. मासिक शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है. उनकी कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कष्ट दूर होते हैं. मासिक शिवरात्रि को आप रुद्राभिषेक कराकर धन, धान्य, संतान, सुख, समृद्धि आदि की प्राप्ति कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि माघ मासिक शिवरात्रि कब है? मासिक शिवरात्रि का मुहूर्त, भद्रा समय क्या है?
माघ मासिक शिवरात्रि की तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी दिन शुक्रवार को रात में 10 बजकर 21 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 17 जनवरी की देर रात 12 बजकर 3 मिनट पर हो रहा है. निशिता मुहूर्त के आधार पर माघ की मासिक शिवरात्रि 16 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी.
मासिक शिवरात्रि मुहूर्त
16 जनवरी को मासिक शिवरात्रि के दिन निशिता पूजा का मुहूर्त 54 मिनट का है. यह मुहूर्त रात में 12 बजकर 4 मिनट से शुरू होती है और मध्य रात्रि को 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगी.
उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 05:27 ए एम से 06:21 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:10 पी एम से 12:52 पी एम तक रहेगा. शिवरात्रि का राहुकाल दिन में 11:12 ए एम से दोपहर 12:31 पी एम तक है.
आमजन मासिक शिवरात्रि की पूजा सूर्योदय से कर सकते हैं. माघ शिवरात्रि पर 07:15 ए एम से लेकर सुबह 11:12 ए एम तक शुभ समय है. इसमें आप विधि विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा करें.
ध्रुव योग में मासिक शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि के दिन ध्रुव योग और मूल नक्षत्र है. ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर रात में 09 बजकर 06 मिनट तक है. उसके बाद व्याघात योग बनेगा. शिवरात्रि पर मूल नक्षत्र है, जो प्रात:काल से पूर्ण रात्रि तक है. चंद्रमा धनु राशि में और सूर्य मकर राशि में रहेंगे.
मासिक शिवरात्रि पर रात में भद्रा
जनवरी की मासिक शिवरात्रि पर भद्रा रात में लग रही है. भद्रा का प्रारंभ रात में 10 बजकर 21 मिनट से होगा और यह 17 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास पाताल लोक में है.
मासिक शिवरात्रि का महत्व
मासिक शिवरात्रि का व्रत और शिव पूजा करने से पाप, कष्ट, रोग, दोष मिटते हैं. इस दिन शिव जी के मंत्रों का जाप करने से सिद्धियों की प्राप्ति होती है. महादेव के अशीर्वाद से आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी.
तुलसी के गमले की मिट्टी बदल रही है रंग? लाल-पीली मिट्टी से जानें ग्रह दोष और घर की ऊर्जा के संकेत
11 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में सिर्फ पौधा नहीं बल्कि घर की सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. घर के आंगन में हरी-भरी तुलसी न केवल वातावरण को शुद्ध करती है बल्कि इसे देवी लक्ष्मी का रूप भी माना जाता है. अकसर देखा जाता है कि तुलसी के गमले की मिट्टी का रंग अचानक बदलने लगता है. कभी वह भूरी से लाल हो जाती है, तो कभी पीली. विज्ञान की नजर से इसे मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या जलवायु का असर माना जा सकता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसे और गहरा महत्व दिया गया है. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि तुलसी की मिट्टी का रंग बदलना घर की ऊर्जा और वहां रहने वाले लोगों की कुंडली के ग्रहों से जुड़ा संकेत है. लाल या पीली मिट्टी आने वाली परेशानियों और ग्रहों की अशुभ स्थिति की चेतावनी होती है. यदि इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह कलह, आर्थिक तंगी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की तरफ इशारा कर सकता है. इस आर्टिकल में हम भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से जानेंगे तुलसी के गमले की मिट्टी के रंग और उनके ग्रहों से जुड़े प्रभाव को विस्तार से समझेंगे. आइए जानते हैं कि लाल, पीली मिट्टी और बुध ग्रह के संबंध में क्या संदेश छिपा है और इसे सही तरीके से कैसे समझा जा सकता है.
मिट्टी का लाल होना: मंगल ग्रह की सक्रियता या अशुभता
अगर तुलसी के गमले की मिट्टी अचानक लाल दिखाई देने लगे तो ज्योतिष के अनुसार यह मंगल ग्रह के प्रभाव का संकेत है. मंगल को अग्नि और क्रोध का कारक माना जाता है. जब यह ग्रह अशुभ स्थिति में होता है, तो घर में कलह-क्लेश बढ़ सकता है. लाल मिट्टी यह संकेत देती है कि घर के किसी सदस्य को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है. इसके अलावा यह ‘पितृ दोष’ या ‘भूमि दोष’ की ओर भी इशारा कर सकती है. ऐसे समय में प्रॉपर्टी के मामलों में विवाद या किसी तरह की अनबन बढ़ने की संभावना रहती है. लाल मिट्टी वाले गमले को रोज़ाना साफ रखना और तुलसी की नियमित पूजा करना इन नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है.
मिट्टी का पीला होना: बृहस्पति की कमजोरी
पीली मिट्टी का संबंध गुरु ग्रह से माना जाता है. बृहस्पति घर में सुख, सौभाग्य और ज्ञान लेकर आता है. अगर मिट्टी पीली हो रही है, तो यह संकेत है कि घर की बरकत रुक सकती है. शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं और घर के सदस्यों का भाग्य अनुकूल नहीं चल रहा होगा. ज्योतिष अनुसार, पीली मिट्टी आर्थिक तंगी, आध्यात्मिक ऊर्जा में कमी और नकारात्मकता के प्रवेश का संदेश देती है. इस समय घर में दान-पुण्य, पूजा और धार्मिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए. तुलसी के गमले को साफ रखना, नियमित जल देना और आसपास सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है.
बुध ग्रह और तुलसी का संबंध
ज्योतिष में तुलसी का पौधा बुध ग्रह से जुड़ा होता है. बुध हरियाली, बुद्धि और चतुराई का प्रतीक है. जब घर पर मंगल या शनि की अशुभ दृष्टि पड़ती है, तो तुलसी के पौधे पर इसका असर सबसे पहले दिखाई देता है.
मिट्टी का रंग बदलना और पत्तियों का पीली होकर गिरना व्यापार, करियर या मानसिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है. यह संकेत है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा कम हो रही है और निर्णय लेने में बाधा आ सकती है. इस समय तुलसी की नियमित पूजा और ध्यान करना नकारात्मक प्रभावों को कम करता है.
मिट्टी का रंग बदलने पर ध्यान देने योग्य उपाय
1. गमले की सफाई –मिट्टी को हफ्ते में एक बार हल्की पानी से धोएं और पुराने पत्तों को हटाएं.
2. सकारात्मक ऊर्जा –तुलसी के पास अगर कोई छोटा दीपक या मसाला रखा जाए तो नकारात्मक ऊर्जा कम होती है.
3. पौधे की देखभाल –पौधे को पर्याप्त पानी और हल्की धूप दें.
4. ज्योतिषीय उपाय –लाल मिट्टी होने पर मंगलवार और पीली मिट्टी होने पर गुरुवार को तुलसी की विशेष पूजा करें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (11 जनवरी 2026)
11 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- धन का व्यय संभव है, तनावपूर्ण वातावरण से बचिये तथा काया का ध्यान रखें।
वृष राशि :- अधिकारियों के समर्थन से साधन जुटायेंगे, शुभ समाचार अवश्य ही मिलेगा।
मिथुन राशि :- चिन्तायें कम होंगी, सफलता के साधन जुटायेंगे तथा शुभ समाचार अवश्य मिलेगी।
कर्क राशि :- बड़े-बड़े लोगों से मेल-मिलाप होगा तथा सुख-समृद्धि के साधन अवश्य बनेंगे।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास होगा, भोग-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्यगति उत्तम होगी।
कन्या राशि :- प्रतिष्ठा बाल-बाल बचे, संघर्ष से अधिकार प्राप्त करें, भाग्य आपका साथ देगा।
तुला राशि :- कुटुम्ब और धन की चिन्ता बनी रहेगी, सोचे कार्य परिश्रम से अवश्य ही पूर्ण होंगे।
वृश्चिक राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा क्लेशयुक्त रखेगी, स्थिति सामर्थ योग्य अवश्य ही बनेगी।
धनु राशि :- भावनायें विक्षुब्ध रहें, दैनिक कार्यगति मंद होगी, परिश्रम से कार्य बनेंगे।
मकर राशिः- तनाव, क्लेश व अशांति, धन का व्यय, मानसिक खिन्नता अवश्य ही बनेगी।
कुंभ राशि :- कार्य कुशलता से संतोष, व्यवसायिक समृद्धि के साधन अवश्य जुटायें।
मीन राशि :- कुटुम्ब के कार्यों में समय बीतेगा तथा हर्षप्रद समाचार प्राप्त होगा, मित्र मिलन होगा।
माओवाद की समाप्ति के बाद अब बस्तर का सर्वांगीण विकास होगा: मंत्री राम विचार नेताम
अम्बिकापुर में विकास को नई रफ्तार
ड्रोन के साथ अपने हौसलों को उड़ान दे रही हैं सरूपी मीणा
अल्पविराम की अवधारणा जीवन और कार्य के संतुलन के लिये अत्यंत आवश्यक : अर्गल
चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
जल जीवन मिशन से संवरी बुलगा की तस्वीर, जीवंती बाई के घर तक पहुँचा शुद्ध पेयजल
नगरीय निकायों के कायाकल्प और वित्तीय सुदृढ़ीकरण के लिये दो दिवसीय "शहरी सुधार कार्यशाला" का हुआ समापन
संकल्प से समाधान अभियान’ से त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी निराकरण हुआ सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
यूरिया का प्रभावी विकल्प बन रही हरी खाद, जशपुर में 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन
