धर्म एवं ज्योतिष
मौनी अमावस्या पर बना दुर्लभ संयोग, राशि अनुसार उपाय से मिलेगी पितृदोष से मुक्ति
18 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ मास में आने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहते हैं और इस बार यह शुभ तिथि 18 जनवरी 2026 दिन रविवार को है. मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी तिथि बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व दान करने के साथ पितरों के नाम की पूजा और तर्पण करने का विशेष महत्व है. इस बार माघ अमावस्या पर सभी कार्य सिद्ध करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग और खुशी व सौभाग्य लाना वाला हर्षण योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. ज्योतिष शास्त्र में मौनी अमावस्या का महत्व बताते हुए राशि अनुसार उपाय करने के बारे में भी बताया है. इन उपाय के करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और पितृदोष से राहत मिलती है. साथ ही पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में चल रही टेंशन भी दूर हो जाती है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर राशि अनुसार कौन से उपाय करने चाहिए…
मेष और वृश्चिक राशि
मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं इसलिए मौनी अमावस्या पर गरीब व जरूरतमंद लोगों को मूंगफली, तिल, गुड़, साबुत अनाज और फलों का दान करें. साथ ही चीटियों को शक्कर भी खिलाएं.
वृषभ और तुला राशि
वृषभ और तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं इसलिए मौनी अमावस्या पर तांबे के बर्तन में जल भरकर घर में किसी गुप्त स्थान पर रख दें और तुलसी की सुबह शाम पूजा भी करें. साथ ही इस दिन सफेद वस्त्र, चावल, दूध, मोती, चीनी आदि चीजों को दान करें.
मिथुन और कन्या राशि
मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध ग्रह हैं इसलिए मौनी अमावस्या पर शिवलिंग का अभिषेक करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें. साथ ही गाय को हरा चारा खिलाएं और शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में पितरों के नाम का दीपक भी जलाएं.
कर्क राशि
कर्क राशि के स्वामी चंद्र ग्रह हैं इसलिए मौनी अमावस्या के दिन घर की कच्चे दूध से सफाई करें और चावल, दूध, सफेद तिल का दान करें और शाम के समय ॐ सोम सोमाय नमः मंत्र का जप करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें.
सिंह राशि
सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं इसलिए मौनी अमावस्या के दिन गरीब व जरूरतमंद लोगों को गेहूं, लाल वस्त्र और गुड़ का दान करें. साथ ही तांबे के लौटे से सूर्य के अर्घ्य दें. ऐसा करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है.
धनु और मीन राशि
धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु ग्रह हैं इसलिए मौनी अमावस्या के दिन किसी नदी या तालाब में पितरों के नाम का दीपदान करें और पितरों के नाम का साधु-संतों में दान करें.
मकर और कुंभ राशि
मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव हैं इसलिए मौनी अमावस्या के दिन किसी गरीब व जरूरमंद व्यक्ति को देसी घी, काले तिल, काले वस्त्र, जूता-चप्पल आदि चीजों का दान करें. साथ ही पास के किसी नीम के पेड़ को पानी भी दें.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (17 जनवरी 2026)
18 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- भाग्य का सितार साथ देगा, इष्ट मित्रों से सुख कार्य, व्यवसाय गति उत्तम हो।
वृष राशि :- अचानक शुभ समाचार, धन प्राप्त के योग बनेंगे, संवेदनशील होने से बचिए।
मिथुन राशि :- क्रोध से अशांति, झगड़े से बचें, अर्थ व्यवस्था कुछ अनुकूल बन जाएगी।
कर्क राशि :- कार्य कुशलता से सहयोग, स्त्री वर्ग से हर्ष तथा भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति।
सिंह राशि :- इष्ट मित्र सुख वर्धक हों, कुटुम्ब की समस्याऐं अवश्य ही सुलझें।
कन्या राशि :- व्यर्थ व्यय तथा असमंजस और स्थिरिता का वातावरण हीन भावना बढ़ाए।
तुला राशि :- अधिकारियों का समर्थन विफल हो तथा कार्य व्यवसाय गति अनुकूल बने।
वृश्चिक राशि :- समय की अनुकूलता से लाभान्वित हो, कार्यकुशलता से अनुकूलता बने।
धनु राशि :- व्यवसाय गति उत्तम, भाग्य का सितारा साथ देवे, बिगड़े कार्य अवश्य बन जाएंगे।
मकर राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष उल्लास, स्वास्थ्य नरम रहे, स्थिति में सुधार अवश्य ही होगा।
कुंभ राशि :- स्त्री शरीर, सुख मानसिक बेचैनी से बचिए, समय का ध्यान अवश्य रखे।
मीन राशि :- धन लाभ, आशानुकूल सफलता का हर्ष अवश्य होगा, बिगड़े कार्य बन जाएंगे।
शिव पूजा के समय पढ़ें यह प्रदोष व्रत कथा, मिलेगा सुख, सौभाग्य और उपवास का पूरा फल!
17 Jan, 2026 06:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
माघ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत है. इस व्रत में भगवान शिव की पूजा करते हैं और प्रदोष व्रत कथा सुनते हैं. कथा सुनने से व्रत पूरा होता है, उसका महत्व पता चलता है और व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है. प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में 05 बजकर 47 मिनट से शुरू है, जो रात 08 बजकर 29 मिनट तक है. इस समय में आपको प्रदोष व्रत की पूजा कर लेनी चाहिए. प्रदोष करने से सभी प्रकार के कष्ट और रोग मिटते हैं. भगवान शिव की कृपा से धन, संतान, सुख, संपत्ति, सौभाग्य की प्राप्ति होगी. आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत कथा के बारे में.
शुक्र प्रदोष व्रत कथा
शुक्र प्रदोष की पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में 3 दोस्त रहते थे. तीनों में बहुत अच्छी दोस्ती थी. उन तीनों मित्रों में से एक सेठ का बेटा, एक राजा का बेटा और एक ब्राह्मण का बेटा था. राजा और ब्राह्मण के बेटे का विवाह हो चुका था. वे दांपत्य जीवन में सुखी थे, लेकिन सेठ के बेटे का विवाह हो चुका था पर गौना होना बाकी थर.
एक दिन की बात है. तीनों दोस्त आपस में महिलाओं के बारे में बातें कर रहे थे. उसी बीच ब्राह्मण के बेटे ने कहा कि जिस घर में महिला नहीं होती है, उसमें भूतों का डेरा होता है. उसकी बात को सुनकर सेठ का बेटा अपने बारे में सोचने लगा. उसने अपनी पत्नी को गौना कराकर घर लाने का फैसला किया. वह अपने घर गया और अपने फैसले के बारे में पिता को बताया.
इस पर सेठ ने बेटे से कहा कि इस समय शुक्र अस्त हैं. इस वजह से ऐसे समय में बहु या बेटी को घर से विदा नहीं किया जाता है. ऐसे में तुम्हारी पत्नी को घर लाना शुभ नहीं है. शुक्र के उदय होने के बाद ससुराल जाना और पत्नी को विदा कराके घर लाना. लेकिन उसने पिता की बात नहीं सुनी और अपने ससुराल पहुंच गया.
उसने अपने सास और ससुर से पत्नी को विदा करने को कहा. लेकिन उन दोनों ने अपने दामाद को समझाने की कोशिश की. लेकिन वह नहीं माना. दामाद के आगे विवश होकर उन्होंने बेटी को विदा कर दिया. सेठ का बेटा पत्नी को साथ लेकर नगर से बाहर ही निकला था, तभी उसकी बैलगाड़ी का पहिया और एक बैल की टांग टूट गई.
इस घटना में पत्नी को भी चोटें आई. लेकिन उसके बाद भी सेठ का बेटा नहीं रूका. वह पत्नी को साथ में लेकर आगे बढ़ता रहा. रास्ते में कुछ डाकुओं ने उन दोनों को घेर लिया. वे उनका सारा धन लेकर भाग गए. धन लूट जाने से सेठ का दुखी पुत्र घर पहुंचा. तो उसी समय एक सांप ने उसे डस लिया.
सेठ ने एक वैद्य बुलाया, उसने देखा तो कहा कि यह व्यक्ति 3 दिन का मेहमान है, उसके बाद इसकी मृत्यु हो जाएगी. जब यह बात उसके ब्राह्मण दोस्त को पता चली तो वह उसके घर आया. उसने सेठ से कहा कि वह अपनी बहु को उसके पति के साथ मायके वापस भेज दो. शुक्र अस्त हैं और ऐसे में बहु को लाने की वजह से ऐसा हुआ है. यदि बहु अपने पति के साथ मायके पहुंच जाएगी तो शायद उसकी जान बच जाए.
सेठ ने तुरंत अपने बेटे को बहु के साथ उसके घर भेज दिया. ससुराल पहुंचते ही सेठ के बेटे की सेहत में सुधार होने लगा. उसके बाद से उसका बेटा जीवित हो गया. उसने पत्नी के साथ सुखी जीवन व्यतीत किया. मृत्यु के बाद दोनों को स्वर्ग की प्राप्ति हुई.
गणेश जयंती कब है? बनेगा रवि योग, लगेगी भद्रा, जानें तारीख, मुहूर्त, माघ विनायक चतुर्थी का महत्व
17 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गणेश जयंती हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है. इसे माघ विनायक चतुर्थी या गौरी गणेश चतुर्थी भी कहते हैं. इस साल गणेश जयंती पर रवि योग बन रहा है, लेकिन दोपहर से भद्रा भी लग रही है. इस भद्रा का वास धरती पर होगा, इस वजह से भद्रा काल में कोई शुभ कार्य नहीं होगा. इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना भी वर्जित होता है. पंचांग से जानते हैं कि गणेश जयंती कब है? गणेश जयंती का मुहूर्त क्या है?
गणेश जयंती की तारीख
पंचांग के अनुसार, इस बार माघ शुक्ल चतुर्थी तिथि 22 जनवरी दिन गुरुवार को तड़के 2 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी. इस तिथि का समापन 23 जनवरी दिन शुक्रवार को तड़के 2 बजकर 28 ए एम पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के आधार पर गणेश जयंती 22 जनवरी गुरुवार को है.
इस साल गणेश जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे 8 मिनट तक है. इस दिन गणेश जी की पूजा 11 बजकर 29 एएम से शुरू कर सकते हैं, मुहूर्त का समापन दोपहर में 1 बजकर 37 मिनट पर होगा.
रवि योग में गणेश जयंती
गणेश जयंती के अवसर पर रवि योग सुबह में 07 बजकर 14 मिनट से बनेगा और यह दोपहर में 02 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. यह एक शुभ योग हैं, जिसमें सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं. गणेश जयंती की पूजा रवि योग में होगी.
रवि योग के अलावा उस दिन वरीयान् योग प्रात:काल से लेकर शाम को 05 बजकर 38 मिनट तक है. उसके बाद से परिघ योग बनेगा. गणेश जयंती पर शतभिषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 02 बजकर 27 मिनट तक है. फिर पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है.
गणेश जयंती पर भद्रा का साया
गणेश जयंती के दिन भद्रा का साया रहेगा, जिसकी वजह से शुभ काम नहीं हो पाएंगे, लेकिन पूजा में कोई बाधा नहीं होगी. पूजा मुहूर्त के बाद से भद्रा लग रही है. गणेश जयंती पर भद्रा दोपहर में 02 बजकर 40 मिनट से लगेगी और 13 जनवरी को तड़के 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगी.
गणेश जयंती पर वर्जित चंद्र दर्शन समय
गणेश जयंती या शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के अवसर पर चंद्रमा का दर्शन नहीं करते हैं. गणेश जयंती पर चंद्रमा 11 घंटे 57 मिनट तक उदित रहेगा. ऐसे में गणेश जयंती के दिन सुबह 9 बजकर 22 मिनट से रात 9 बजकर 19 मिनट तक चंद्र दर्शन वर्जित है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा देखने से कलंक लगता है.
गणेश जयंती या माघ विनायक चतुर्थी का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश जी का जन्म माघ शुक्ल चतुर्थी को हुआ था, इस वजह से इस तिथि को गणेश जयंती मनाई जाती है. इस दिन व्रत और गणेश पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, संकट दूर होते हैं.
बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े क्यों पहने जाते हैं, इसके पीछे क्या है वजह?
17 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बसंत पंचमी, जिसे श्री पंचमी या ज्ञान पंचमी भी कहा जाता है, बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक पर्व है. इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जिन्हें ज्ञान, कला, संगीत और विद्या की देवी माना जाता है. बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक, तीनों कारण जुड़े हुए हैं, आइए विस्तार से जानते हैं इसकी वजह.
1. पीला रंग बसंत ऋतु का प्रतीक है
बसंत ऋतु को ‘ऋतुराज’ कहा जाता है, क्योंकि यह मौसम सुख-समृद्धि और सौंदर्य का संदेश लेकर आता है.
इस मौसम में सरसों के खेत पूरी तरह पीले फूलों से ढक जाते हैं.
खेत-खलिहान की हरियाली और सरसों की पीली चादर बसंत का मुख्य रूप है.
इसी कारण बसंत पंचमी पर पीला रंग पहनना प्रकृति के प्रति सम्मान और ऋतु के आगमन का स्वागत माना जाता है.
2. पीला रंग मां सरस्वती का प्रिय माना गया है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
देवी सरस्वती को सफेद और पीला रंग अत्यंत प्रिय हैं.
उन्हें अक्सर पीले या हल्के वस्त्रों में दर्शाया गया है, क्योंकि ये रंग सादगी, ज्ञान, बुद्धि और शांति का प्रतीक हैं.
इसलिए भक्त पीला वस्त्र धारण कर मां सरस्वती को समर्पण और श्रद्धा प्रदर्शित करते हैं.
3. पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
रंगों का हमारे मन और ऊर्जा पर गहरा प्रभाव होता है.
पीला रंग उत्साह, ऊर्जा, उजास और सकारात्मकता का रंग माना जाता है.
यह दिमाग को सक्रिय करता है और मन को प्रसन्न बनाता है.
बसंत पंचमी का त्योहार पढ़ाई, संगीत और कला की शुरुआत का प्रतीक है. ऐसे में पीला रंग मानसिक स्पष्टता और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है.
4. आयुर्वेद और विज्ञान भी मानता है पीले रंग का महत्व
आयुर्वेद के अनुसार:
पीला रंग पित्त को संतुलित करता है.
यह शरीर में गर्माहट और ऊर्जा प्रदान करता है.
सर्दियों से निकलकर जब मौसम हल्का गर्म होने लगता है, तब पीला रंग शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है.
वैज्ञानिक दृष्टि से:
पीले रंग की तरंगें (wavelength) मन को शांत और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती हैं.
यह ध्यान और अध्ययन के लिए अच्छा माना जाता है.
इसी कारण स्कूलों और संस्थानों में बसंत पंचमी के दिन बच्चे और शिक्षक पीला वस्त्र पहनते हैं.
5. भोजन में पीला रंग – समृद्धि और शुभता का प्रतीक
बसंत पंचमी पर न केवल पीले कपड़े पहने जाते हैं, बल्कि पीले भोजन भी बनाया जाता है, जैसे,
मीठा चावल
केसरिया हलवा
खिचड़ी
सरसों का साग
पीले भोजन में ऊर्जा और गर्माहट देने वाली सामग्री होती है, जो बदलते मौसम के लिए उपयोगी है. पीला भोजन भी समृद्धि और शुभता का संदेश देता है.
बसंत पंचमी पर पीला कपड़ा पहनना केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रकृति, ऊर्जा और अध्यात्म का सुंदर संगम है. पीला रंग बसंत के उल्लास, देवी सरस्वती की कृपा, सकारात्मक ऊर्जा और शरीर-मन के संतुलन का प्रतीक है. इसलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण करना शुभ, पवित्र और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है.
मौनी अमावस्या 2026: स्नान-दान, मौन व्रत और पितृ तर्पण से प्राप्त करें पुण्य और आध्यात्मिक शांति
17 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सनातन परंपरा में अमावस्या को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है. पूरे वर्ष में पड़ने वाली 12 अमावस्याओं में माघ माह की अमावस्या को सबसे पावन माना जाता है. इसे माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया स्नान, दान, जप और मौन व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है.
जानिए कब है माघ अमवास्या
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा. माघ मास की अमावस्या तिथि 18 जनवरी को पूर्वाह्न 00:03 बजे आरंभ होकर 19 जनवरी को पूर्वाह्न 01:21 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर 18 जनवरी को ही मौनी अमावस्या का पुण्यकाल माना गया है.
मौनी अमवास्या मे स्नान दान का खास महत्व
रविवार होने के कारण इस बार इसे ‘रवि मौनी अमावस्या’ कहा जा रहा है, जिसे अत्यंत शुभ संयोग माना जाता है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है. खासकर गंगा, यमुना और संगम तट पर स्नान का विशेष महत्व है. इस दिन प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं.मान्यता है कि इस दिन गंगाजल अमृत के समान हो जाता है, इसलिए स्नान-दान का फल कई गुना बढ़ जाता है.
मौनी अमवास्या मे करे पितृ तर्पण
मौनी अमावस्या पितृ तर्पण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन पितरों को जल अर्पित कर तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है.
मौनी अमवास्या मे स्नान का मुहूर्त
इस वर्ष मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:27 से 06:21 बजे तक रहेगा, जो स्नान के लिए सर्वोत्तम समय है. इसके अलावा दोपहर में 12:10 से 12:53 बजे तक का समय भी शुभ माना गया है। स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल, लाल पुष्प और अक्षत अर्पित करने की परंपरा है, जिससे स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मबल में वृद्धि होती है.मौनी अमावस्या का सबसे खास पहलू है मौन व्रत. साधु-संत और कई श्रद्धालु इस दिन मौन धारण करते हैं.मान्यता है कि मौन रहने से मन और वाणी शुद्ध होती है, मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संरक्षण होता है. यही कारण है कि यह तिथि आत्मचिंतन, संयम और साधना के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है.कुल मिलाकर, मौनी अमावस्या न केवल धार्मिक बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक संतुलन का भी पर्व है, जो व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (17 जनवरी 2026)
17 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- सघन सम्पन्नता के योग फलप्रद हो, धार्मिक योजना अवश्य सफल होगी।
वृष राशि :- अपने किए पर पछताना पड़ेगा, मानसिक बैचेनी, क्लेश तथा अशांति बनेगी।
मिथुन राशि :- सफलता के साधन जुटाए, व्यवसायिक क्षमता में वृद्धि होगी, समस्या सुलझेगी।
कर्क राशि :- अनेक कार्य से सफलता मिलेगी, स्त्री से सुख, इष्टमित्र सुखवर्धक होंगे।
सिंह राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष उल्लास होवे, भोग ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, कार्यगति उत्तम।
कन्या राशि :- धन प्राप्त आशानुकूल सफतला में वृद्धि होवे, बिगड़े कार्य योजना सफल होंगे।
तुला राशि :- आशानुकूल सफलता से हर्ष, बिगड़े कार्य अवश्य ही बनेंगे, कार्य योजना सफल हो।
वृश्चिक राशि :- दैनिक समृद्धि के साधन बनेंगे, अधिकारियों से कार्य योजना से लाभ हो।
धनु राशि :- कार्य योजना पूर्ण हो, बड़े लोगों से मेल मिलाप होगा, कार्य अवरोध से बचे।
मकर राशिः- कार्य कुशलता से संतोष, स्थिति में सुधार तथा चिन्ता अवश्य कम होगी।
कुंभ राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण अवश्य ही होगी, शरीर कष्ट मानसिक बेचैनी बढ़ेगी।
मीन राशि :- दैनिक कार्यो में बाधा, चिन्ता उद्विघ्नता से बचे धन का व्यय होगा।
किस्मत चमकाने का खास योग! बसंत पंचमी पर करें ये शुभ दान, दूर होंगी बाधाएं
16 Jan, 2026 06:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू पंचांग में हर तिथि और हर वार का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है, लेकिन माघ माह को बेहद पुण्यदायी माना गया है. माघ महीने की शुरुआत के साथ ही धर्म, भक्ति और साधना का वातावरण बन जाता है. इसी पावन माह में आने वाली बसंत पंचमी का पर्व विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि इसी शुभ तिथि पर मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन पूजा-अर्चना, व्रत और साधना का विशेष महत्व है. विद्यार्थी, कलाकार और ज्ञान की प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोग इस दिन मां सरस्वती से विशेष आशीर्वाद मांगते हैं.
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि बसंत पंचमी के दिन अपनी राशि के अनुसार दान किया जाए तो मां सरस्वती अत्यंत प्रसन्न होती हैं और जीवन में ज्ञान, करियर और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुल जाते हैं. ऐसे में आइए जानते है उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य आनंद भारद्वाज से कि कौन-सी राशि के जातकों को कौन-सा दान करना चाहिए, ताकि साल भर मां सरस्वती की विशेष कृपा बनी रहे
कब मनाई जायगी बसंत पंचमी?
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को अर्धरात्रि 02 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इसका समापन 24 जनवरी को अर्धरात्रि 01 बजकर 46 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा. पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें, तो पूजा का शुभ समय सुबह 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा.
जरूर करें यह राशि अनुसार दान
मेष राशि- मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए बसंत पंचमी के दिन लाल चीजों का दान करना चाहिए. क्योंकि इस राशि के स्वामी मंगल ग्रह हैं. आप इस दिन जरूरतमंदों को लाल वस्त्र, गुड़ और लाल धातु जैसे तांबे के बर्तन का दान करना शुभ माना गया है.
वृषभ राशि- विद्या की देवी को प्रसन्न करने के लिए बसंत पंचमी के दिन सफ़ेद चीजों का दान करें जैसे सफेद अनाज, मिठाई या फिर कपड़ों का दान किसी जरूरतमंद को करना चाहिए.
मिथुन राशि- अगर इस राशि के जातक को बसंत पंचमी के दिन हरे वस्त्र, हरी सब्जियां, हरे अनाज जैसे मूंग दाल का दान करने की सलाह दी जाती है.
कर्क राशि- बसंत पंचमी के दिन इस राशि के लोगों के लिए सफेद वस्त्र, चांदी और खीर का दान करने की सलाह दी जाती है. इससे आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक शांति मिलती है.
सिंह राशि- बसंत पंचमी इस दिन गुलाबी रंग की चीजों का दान करना चाहिए, जैसे गुलाब का फूल या गुलाबी कपड़े. यह दान उनके रिश्तों में मधुरता और खुशी लाता है.
कन्या राशि- इस राशि के जातकों को बसंत पंचमी इस दिन गेहूं और फल का दान करना चाहिए. यह दान उनके जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाता है.
तुला राशि- इस राशि वालों को बसंत पंचमी के दिन शहद और चाँदी का दान करना चाहिए. यह दान उनके जीवन में सौभाग्य और सफलता लाता है.
वृश्चिक राशि- मां की विशेष कृपा पाने के लिए इस राशि के जातकों को इस दिन नारियल और काली वस्त्र का दान करना चाहिए. यह दान उनके जीवन में बाधाओं को दूर करता है.
धनु राशि- इस राशि के जातको को बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र, हल्दी और केले का दान करने की सलाह दी होती है.
मकर राशि- मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए इस राशि वाले जातको को बसंत पंचमी के दिन पुस्तक का दान गरीबो को करना चाहिए.
कुंभ राशि- इस राशि वाले जातक को बसंत पंचमी के दिन कला से जुडी हुईं चीजों का दान गरीबो को करना चाहिए.
मीन राशि- विद्या की देवी को प्रसन्न करने के लिए बसंत पंचमी के दिन पीला चावल, केसर और गाय घी का दान करना चाहिए. इस उपाय से उनके जीवन में खुशहाली बनी रहती है और समृद्धि के द्वार खुलते हैं.
क्या था रामायणकाल का खाना - पीना, कौन करता था मांसाहार, महलों में कैसी थी थाली
16 Jan, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अक्सर ये सवाल उठता है कि रामायणकालीन लोग क्या खाते थे. क्या वो शाकाहार और मांसाहार दोनों तरह का खाना खाते थे. उस समय खाना बनाने -पकाने का तरीका कैसा था. इसमें कोई शक नहीं कि उस दौर में खूब अनाज पैदा होता था. अगर कोई मेहमान घर में आ जाए तो उसको उच्च कोटि का भोजन कराया जाता था. तरह तरह के पकवान बनाए जाते थे. लोगों को जब लुभाना होता था या उनसे कोई काम कराना होता था तो स्वादिष्ट पकवानों का आफर दिया जाता था.
रामायणकालीन खानपान के बारे में कई किताबें और ग्रंथ भरपूर जानकारियां देती हैं, इसमें फूड हिस्टोरियन की किताबें भी हैं और उस दौर पर लिखी गईं किताबें भी. शांतिकुमार नानूराम व्यास की किताब “रामायणकालीन संस्कृति” इस बारे में बहुत प्रामाणिक जानकारी देती है. इसमें खान-पान पर एक अध्याय भी है.
किताब में लिखा गया कि मुनिकुमार ऋष्यश्रृंग को अंग देश में लाने के लिए वेश्याओं ने उन्हें नाना प्रकार की मिठाइयों का प्रलोभन दिया था. रावण ने सीता को कई तरह की खाने पीने की चीजों से लुभाने की कोशिश की थी. उस समय अन्न का दान सबसे बेहतर दान माना जाता था. दशरथ और राम के अश्वमेघ यज्ञों में धन और वस्त्र के साथ अन्न का भी दान दोनों हाथों से किया गया. सीता जब वनवास के लिए अयोध्या से निकलीं तो उन्होंने वहां ब्राह्मणों को प्रचुर अन्न दान करने की प्रतिज्ञा की.
शाकाहार के साथ मांसाहार भी
आर्यों का खान -पान वानरों और राक्षसों से अलग था. आर्य मुख्य तौर पर शाकाहारी और कुछ हद तक मांसाहारी थे, वानर विशुद्ध शाकाहारी और राक्षस मुख्य तौर पर मांसाहारी थे. जब वन में भरद्वाज मुनि ने भरत के सैनिकों का स्वागत किया तो उनसे कहा आप अपनी इच्छानुसार सुरा-पान, मांस भक्षण और शाकाहार का सेवन करें. तब इस सेना को इतनी खीर दी गई कि इससे आश्रम के आसपास कीचड़ ही कीचड़ हो गया.
भरत की सेना के लिए मांस परोसा गया
भरद्वाज आश्रम में भरत के सैनिकों को कई तरह के मांस पदार्थ परोसे गए थे यानि ऋषि के आश्रम में मांस के खाने को बनाने या परोसने में कोई गुरेज नहीं था. सीता ने गंगा को मांस भूतौदन (मांस, चावल, शाग और मसालों को एक साथ उबालकर बनाया गया पुलाव) से संतुष्ट करने का संकल्प लिया था. श्राद्धों में ब्राह्णणों को मांस खिलाने की परिपाटी थी.
कौन से अनाज खाए जाते थे, चावल क्यों प्रिय
चावल, जौ और गेहूं मुख्य खाद्य थे. उत्तरकांड में मूंग, चना, कुलथी के साथ उड़द दालों का उल्लेख हुआ है. रोटी खाई जाती थी. चावल खूब खाते थे. खाने में दालों और द्रव सामग्री का उपयोग होता था. खाना मीठा और नमकीन दोनों तरह का होता था. उबला हुआ चावल प्रमुख आहार था. अगर कुंभकरण को चावल के तरह तरह के व्यंजन परोसे जाते थे तो भरद्वाज और वशिष्ठ के आश्रमों में अतिथियों के लिए भरपूर भात उपलब्ध रहता था. सीता अयोध्या में कई तरह के व्यंजनों के साथ अच्छे चावल का सेवन करती थीं.
चावल से इन नामों से व्यंजन बनते थे
मृष्टान्न – चावल के मालपुए
मोदक – चावल, दाल और चीनी के लड्डू
लाज – भुना हुआ चावल
ओदन – भात
पायस – दूध की खीर
कृसर – खिचड़ी या चावल, तिल और दूध से बनी मिठाई
शालि – चावल की बेहतरीन प्रजाति जो जाड़ों में पैदा होती थी
हविष्यान्न – घी में पकाया हुआ चावल
ऐसा लगता है कि रामायणकालीन दौर में चावल की कई किस्में थीं और उनका अलग अलग तरह से इस्तेमाल होता था. खीर खूब खाई जाती थी.
दूध दही का इस्तेमाल
दूध, दही, मक्खन और घी का खूब इस्तेमाल होता था. चीनी और मसालों में मिली हुई दही को रसाल या रायता कहते थे. उस दौर में सौवर्चल नाम का विशेष नमक इस्तेमाल किया जाता था. खाने में मिर्च, चटनी और खटाई का प्रयोग भी होता था. चीनी, गुड़ और शहद से मिठाइयां बनाई जाती थीं. फल भरपूर होते थे.
रामायण में आम, गन्ना, केला, खजूर, जामुन, अनार, नारियल, कटहल और बेर जैसे फलों का उल्लेख हुआ है. फलों का रस भी निकाला जाता था.
कुछ पशु मेध्य थे यानि खाने लायक
हां, खाए जाने वाले पशुओं दो श्रेणियों में रखा गया था, खाए जाने वाले जिन्हें मेध्य यानि पवित्र कहते थे और अमेध्य यानि अपवित्र. मेध्य पशुओं का मांस देवताओं को समर्पित करने योग्य माना जाता था. ये पशु छाग यानि बकरा, हिरण और सुअर थे. मृग यानि हिरण का मांस आर्यों में खासतौर पर प्रिय था. चर्बीवाले पक्षी आहार की दृष्टि से अच्छे माने जाते थे.
मछली का भोजन काफी प्रचलित था. कांटा फेंककर मछली पकड़ने के बारे में वाल्मीकी ने कई बार संकेत किया है. बाणों से भी मछली का शिकार किया जाता था. पंपा सरोवर की मोटी मोटी मछलिया काफी प्रसिद्ध थीं.
अपने वनवास के पहले दिन ही भूख लगने पर राम और लक्ष्मण शाम को मृगों का शिकार किया था. यमुना के करीबी जंगलों में उन्होंने कई पवित्र मृगों का शिकार किया. जिसे रामायण में “बहुन्मेघ्यान्मृगान्हत्वा चेरतुर्यमुनावने” (2/52/33) कहा गया.
हालांकि मांसाहार के व्यापक प्रचलन के बावजूद उसे खराब किस्म का भोजन माना जाता था. इसी वजह से राम ने अपने वनवास काल में कंद मूल फल से निर्वाह करने और मुनियों की तरह मांस का त्याग करने का संकल्प लिया. वह संयमित शाकाहार पर ज्यादा जोर देते थे.
अशोकवाटिका में हनुमान ने सीता से कहा था आपके वियोग में राम ना तो मांस का सेवन करते हैं और न मधु का (न मांसं राघवो भुंक्ते न चैव मधु सेवते, 5/36/41)
अरण्यकांड और अयोध्याकांड में स्पष्ट उल्लेख है कि राम–लक्ष्मण–सीता कंद-मूल, फल खाते थे. मृग का शिकार करते थे. “लक्ष्मणो मृगयां यायात्” यानि लक्ष्मण शिकार के लिए जाते थे.
अयोध्या का राजभोजन क्या था
अयोध्याकांड में दशरथ के राजभोज का में ये चीजें शामिल थीं- चावल, घी, दूध, मांस से बने व्यंजन, मदिरा. ये संकेत देता है कि क्षत्रिय और राजदरबार में मांसाहार सामान्य था.
रामायण काल में पितृयज्ञ, अतिथि सत्कार में मांस परोसने का उल्लेख मिलता है, जो वैदिक परंपरा का हिस्सा था. फूड हिस्टोरियन केटी अचाया “इंडियन फूड – एक हिस्टोरिकन कंपेनियन” (Indian Food: A Historical Companion) में लिखते हैं कि वैदिक और रामायण काल में शाकाहार और मांसाहार दोनों प्रचलित थे. शुद्ध शाकाहार का विचार बाद में बौद्ध–जैन प्रभाव से मजबूत हुआ.
इतिहासकार उपिंदर सिंह की किताब “ए हिस्ट्री ऑफ एनसिएंट एंड अर्ली मेडव इंडिया” (A History of Ancient and Early Medieval India) में लिखा है, यज्ञ, उत्सव, राजभोज में मांस का प्रयोग होता था. तपस्वी जीवन में शाकाहार था तो समाज मिश्रित खाद्य संस्कृति वाला था.
भोजन कितनी बार होता था
भोजन दिन में तीन बार किया जाता था. सबेरे का भोजन प्रातराश कहलाता था. रावण ने सीता को धमकी दी थी कि यदि तुमने मेरी पर्यकशायिनी बनने से इनकार कर दिया तो रसोइए मेरे सुबह के नाश्त के लिए तुम्हारे टुकड़े टुकड़े कर डालेंगे. राक्षण नरमांस भी खाने के लिए जाने जाते थे.
दूसरी बार का भोजन दोपहर बाद किया जाता था. उत्तरकांड के अनुसार राम अपनी अशोकवाटिका में सीता के साथ दोपहर बाद का भोजन करते थे. भोजन का अंतिम समय रात का था. रावण के रात के समय के भोजन का सुंदरकांड के ग्यारहवें सर्ग में विस्तार से बताया गया है. इसमें वो ये चीजें खाता था.
मृगों, भैंसों और जंगली सुअरों के मांस के कटे टुकड़े
सोने बड़े पात्रों में मोरों और मृगों का भुना हुआ मांस
नमक मिश्रित शूकर, एक तरह का पक्षी, साही, हरिण और मोर का मांस
कई तरह अन्य मांस एकशल्य मछली का भली भांति का पकाया मांस
चटनियां
विविध पेय और नमकीन मीठे पदार्थ
तरह तरह के फल
कई तरह के सुंगधित मसालों से सुवासित शर्करा, मधु, पुष्प और द्रव.
रसोइया कैसा होता था
रसोइया सूद या सूपकार कहलाता था. उससे ये अपेक्षा की जाती थी कि वह चबाने, निगलने, चूसने और चाटने के सभी खाद्य पदार्थों को बनाने में सिद्धहस्त हो. वैसे उस समय के राजकुमार भी पाक कला को अच्छी तरह जानते थे. लक्ष्मण खुद कुशल रसोइया थे. भोजन परोसते समय रसोइए सुंदर वस्त्र और आभूषणों से सज्जित थे.
गुप्त नवरात्रि: सपने में दिखे मां दुर्गा तो न समझें साधारण, उज्जैन के ज्योतिषी ने बताए शुभ-अशुभ संकेत
16 Jan, 2026 06:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिंदू धर्म में अनेक शास्त्रों का वर्णन मिलता है, जिनमें से स्वप्न शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है. मान्यता है कि निद्रा के दौरान दिखाई देने वाले स्वप्न केवल कल्पना नहीं होते बल्कि वे भविष्य, चेतावनी और शुभ संकेत भी देते हैं. स्वप्न शास्त्र में हर सपने का एक विशेष अर्थ बताया गया है. इसी क्रम में यदि गुप्त नवरात्रि के पावन दिनों में सपने में मां जगदंबा के दर्शन हो जाएं, तो इसे अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है. यह देवी की विशेष कृपा का प्रतीक समझा जाता है. हालांकि यहां सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह होता है कि मां ने किस स्वरूप में दर्शन दिए हैं. मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप का अपना अलग संदेश और फल होता है. कहीं यह सुख-समृद्धि का संकेत देता है, तो कहीं सावधानी और आत्मचिंतन की आवश्यकता दर्शाता है. उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान स्वप्न में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन का क्या अर्थ होता है, इससे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है और कौन से संकेत भविष्य की दिशा तय करते हैं. आचार्य के अनुसार, मां के स्वरूप में ही आने वाले समय का रहस्य छिपा होता है, इसलिए ऐसे स्वप्नों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.
इस बार प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 जनवरी 2026 दिन सोमवार को दोपहर 01:21 बजे के लगभग हो रही है. वहीं प्रतिपदा तिथि का समापन 20 जनवरी 2026 दिन मंगलवार को दोपहर 02:14 बजे के करीब हो रहा है. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को होगा.
स्वप्न शास्त्र के अनुसार क्या कहते हैं सपने?
1. अगर गुप्त नवरात्रि के दौरान आपको सपने में मां दुर्गा लाल वस्त्र में मुस्कुराती हुई दिखाई देती हैं, तो यह अत्यंत शुभ संकेत है. इसका मतलब आपके जीवन में शुभ परिवर्तन होने वाले हैं. ये परिवर्तन आपकी निजी जिंदगी से लेकर व्यवसाय तक में हो सकते हैं.
2. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में मां दुर्गा के दर्शन हो जाएं, तो इससे व्यक्ति को बहुत लाभ होता है. इसे शुभ माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट और दुख दूर होने वाले हैं.
3. सपने में मां दुर्गा को शेर पर सवार देखना बेहद शुभ होता है. इसका मतलब आपके जीवन की समस्याओं का अंत होगा. वहीं अगर आप मां दुर्गा के शेर को क्रोधित मुद्रा में और दहाड़ते हुए देखते हैं, तो इसे आने वाली समस्याओं का संकेत माना जाता है.
4. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर सपने मां दुर्गा श्रंगार करे हुए दिखाई दें, तो समझना चाहिए कि जिन जातकों का विवाह योग नहीं बन रहा है, तो जल्द ही विवाह का योग बनने वाला है और वैवाहिक जातकों के पारिवारिक कलह समाप्त होने वाले हैं.
राशिफल: जानिए, कैसा रहेगा आपका आज का दिन (16 जनवरी 2026)
16 Jan, 2026 12:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष राशि :- प्रत्येक कार्य में बाधा व विलम्ब से कष्ट होगा, थकावट व बेचैनी बढ़ेगी।
वृष राशि :- कुटुम्ब की समस्याओं में समय बीतेगा, धन का व्यय होगा, समय तथा चिन्ता का नाश होगा।
मिथुन राशि :- स्त्री-वर्ग से हर्ष-उल्लास, प्रेम प्रसंग, सफलता से कार्य अनुकूल होगा।
कर्क राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, रुके कार्य बनेंगे।
सिंह राशि :- आर्थिक योजना पूर्ण होगी, भाग्य का सितारा प्रबल होगा, रुके कार्य बनेंगे।
कन्या राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि, नवीन योजना फलप्रद बनी रहेगी, समय पर कार्य करें।
तुला राशि :- मनोबल उत्साह वर्धक होगा, कार्यगति में सुधार होगा, विरोधी पराजित होंगे।
वृश्चिक राशि :- लेनदेन के मामले में हानि होगी, विरोधी तत्वों से परेशानी अवश्य बनेगी।
धनु राशि :- दैनिक सफलता के साधन सम्पन्न होंगे, स्वाभाव में क्रोध व अशांति होगी।
मकर राशिः- दैनिक सम्पन्नता के साधन जुटायें, आलस्य-प्रमाद से हानि अवश्य होगी।
कुंभ राशि :- बिगड़े हुये कार्य बनेंगे, योजनायें फलीभूत होंगी तथा रुके कार्य बनेंगे।
मीन राशि :- स्त्री वर्ग से हर्ष-उल्लास, चिन्ता कम होगी, विशेष कार्य स्थगित रखें, कार्य कुशलता से संतोष होगा।
Pradosh Vrat 2026: माघ प्रदोष व्रत पर बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें तिथि व पूजा विधि
15 Jan, 2026 02:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का महत्व सबसे अधिक होता है. हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी की तिथि को यह व्रत रखा जाता है. माघ माह में आने वाले प्रदोष व्रत को माघ मास प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से अच्छे फल और लाभ की प्राप्ति होती है. इस बार प्रदोष व्रत के दिन ऐसा शुभ संयोग बनने जा रहा है कि यह तिथि बेहद खास रहने वाली है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि के दौरान शिवजी बहुत ही उदार होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बनाते हैं. तो आइए जानते हैं कि माघ महीने में आने वाला प्रदोश व्रत कब है और शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या रहने वाली है.
कब है प्रदोष व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की त्रयोदशी तिथि के प्रारंभ होने पर 15 जनवरी, गुरुवार को रात 8 बजकर 18 मिनट से प्रदोष व्रत शुरू होने वाला है और इसका समापन अगले दिन यानी 16 जनवरी, शुक्रवार के दिन रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि और प्रदोष काल की गणना के मुताबिक माघ महीने का प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा. वहीं, रात के समय प्रदोष व्रत के समापन के बाद चतुर्दशी तिथि की शुरूआत हो जाएगी. इसके चलते प्रदोष व्रत के दिन ही मासिक शिवरात्रि का शुभ संयोग भी बनता नजर आ रहा है. प्रदोष काल में लोग भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं. इससे जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य के दरवाजे भी खुल जाते हैं.
प्रदोष व्रत के दिन शुभ मुहूर्त
माघ महीने में आने वाला प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है. प्रदोष व्रत में सबसे अच्छा और शुभ मुहूर्त प्रदोष काल का रहेगा. 16 जनवरी, शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत में पूजा करने का प्रदोष काल शाम 5 बजकर 1 मिनट से लेकर 6 बजकर 31 मिनट तक रहने वाला है. इस अवधि के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है. पंचांग के हिसाब से सूयोस्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूयोस्त के 45 मिनट बाद तक का समय प्रदोष काल कहा जाता है.
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन व्रत करने वालों को सुबह जल्दी उठकर स्न्नानादि करना चाहिए. इसके बाद साफ कपड़े पहनना चाहिए.
घर के मंदिर में एक जगह लकड़ी की चौकी बनाए. चौकी पर वस्त्र बिछाएं इसके बाद भगवान शिव और पार्वती की तस्वीर को स्थापित करें. इसके साथ ही उस स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें.
घर के मंदिर और शिवालय में जाकर व्रत वाले व्यक्ति को भगवान को बेलपत्र, गंगाजल, दही, शहद, दुध आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें.
शिवजी को चंदन, फूल, नैवेद्य, दीप-धूप, अक्षत आदि आर्पित करें. इसके बाद, विधि-विधान के साथ पूजा और आरती करें.
शाम के समय प्रदोष काल में स्वच्छ हाेकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और फिर, ‘ओम नम: शिवाय’ या फिर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
शिवजी और मां पार्वती की पूजा आरती करने के बाद भगवान को भोग लगाए.
पंचांग : षटतिला एकादशी व्रत खोलते समय न करें ये गलती, जानें पारण का शुभ मुहूर्त और दान की महिमा
15 Jan, 2026 07:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचांग : आज 15 जनवरी, 2026 गुरुवार, के दिन माघ महीने की कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि है. इस तिथि पर शुभ ग्रह शुक्र का अधिकार है. यह दिन दान देने के लिए अच्छा माना जाता है. इस दिन शुभ कार्यों की योजना बनाई जानी चाहिए. आज षटतिला एकादशी का पारण. आज मट्टू पोंगल भी है.
15 जनवरी का पंचांग
विक्रम संवत : 2082
मास : माघ
पक्ष : कृष्ण पक्ष द्वादशी
दिन : गुरुवार
तिथि : कृष्ण पक्ष द्वादशी
योग : व्रुद्धी
नक्षत्र : ज्येष्ठा
करण : कौलव
चंद्र राशि : वृश्चिक
सूर्य राशि : मकर
सूर्योदय : सुबह 07:16 बजे
सूर्यास्त : शाम 05:45 बजे
चंद्रोदय : सुबह 05.20 बजे (16 जनवरी)
चंद्रास्त : दोपहर 02.34 बजे
राहुकाल : 13:49 से 15:07
यमगंड : 07:16 से 08:35
इस नक्षत्र में शुभ कार्य हैं वर्जित
आज के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि और ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेंगे. यह नक्षत्र वृश्चिक राशि में ही 16:40 से 30:00 डिग्री तक फैला हुआ है. इसके शासक ग्रह बुध और देवता इंद्र हैं. इसे शुभ नक्षत्र नहीं माना जाता है, लेकिन युद्ध संबंधी कार्यों की योजना बनाने, तांत्रिक कार्य करने के साथ किसी विवाद या तर्क की तैयारी के लिए यह नक्षत्र अच्छा है. हालांकि इस नक्षत्र में शुभ काम वर्जित है.
आज के दिन का वर्जित समय
आज के दिन 13:49 से 15:07 बजे तक राहुकाल रहेगा. ऐसे में कोई शुभ कार्य करना हो, तो इस अवधि से परहेज करना ही अच्छा रहेगा. इसी तरह यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् से भी परहेज करना चाहिए.
राशिफल: गुरुवार को धनु राशि के खर्च बढ़ेंगे, धैर्य के साथ दिन गुजारें
15 Jan, 2026 07:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेष- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए आठवें भाव में होगा. आज आप सभी काम सावधानी से करें. सरकार विरोधी काम से दूर रहें. दुर्घटना का भय रहेगा, इसलिए वाहन आदि का उपयोग ध्यान से करें. बाहर के खान-पान की आदत के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना है. काम समय पर पूरे नहीं होंगे. व्यापार में भी संभलकर काम करें. नौकरीपेशा लोगों के अधिकारी उनसे खुश नहीं रहेंगे. संतान के साथ मतभेद हो सकता है. महत्वपूर्ण निर्णय आज टालें. हो सके तो आज ज्यादातर समय मौन ही बने रहें.
वृषभ- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए सातवें भाव में होगा. आप को अपने प्रिय दोस्तों और स्वजनों के साथ घूमने- फिरने का आनंद प्राप्त होगा. सुंदर वस्त्र-आभूषण और भोजन का अवसर मिलेगा. दोपहर के बाद स्थिति आपके नियंत्रण से हट सकती है. वाहन आदि धीमे चलाएं. घर-परिवार में किसी से विवाद हो सकता है. यह स्थिति आपके नियंत्रण में नहीं रहेगी. नौकरीपेशा लोगों को कोई नया काम मिल सकता है. व्यवसाय में आज उन्नति मिल सकती है. निवेश संबंधी योजना आज ना बनाएं.
मिथुन- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए छठे भाव में होगा. आज आपका दिन बहुत अच्छे से गुजरने वाला है. घर में शांति और आनंद का वातावरण रहेगा. सुखमय प्रसंग बनेगा. खर्च होगा, लेकिन वह निरर्थक नहीं होगा. आर्थिक लाभ की भी संभावना है. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा. काम में यश की प्राप्ति होगी. मित्रों से मुलाकात होगी. रुके हुए काम आसानी से बन जाएंगे. क्रोध की मात्रा अधिक रहेगी. व्यर्थ उग्रता को टालें, नहीं तो काम बिगड़ सकता है. साथी कर्मचारियों का सहयोग मिलेगा. विरोधियों पर विजय मिलेगी.
कर्क- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पांचवें भाव में होगा. दिन का आरंभ चिंता और उलझन के साथ होगा. पेट दर्द की शिकायत भी रहेगी. नए काम शुरू करने के लिए दिन अच्छा नहीं है. आकस्मिक धन खर्च होगा. प्रेमीजनों के बीच वाद-विवाद होने से मनमुटाव होगा. यात्रा में कठिनाई आएगी. हो सके तो आज आप यात्रा टालें. घर में छोटों से विवाद करने से बचें. ज्यादातर समय मौन रहकर गुजारें. व्यापारियों के लिए आज का दिन सामान्य है. जीवनसाथी की भावनाओं का भी सम्मान करें.
सिंह- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए चौथे भाव में होगा. आज आप शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ रहेंगे. माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहेगी. आर्थिक रूप से हानि हो सकती है. फिर भी दोपहर के बाद आप निवेश संबंधी योजना पर काम कर सकते हैं. परिश्रम के अनुरूप रिजल्ट मिलेगा. विद्यार्थियों को काम में सफलता होगी. बौद्धिक और राजनीतिक चर्चा ना करें. नए काम की शुरुआत भी आज नहीं करें. शेयर बाजार में किसी तरह के जोखिम लेने से बचें. प्रेम जीवन में स्थिति सकारात्मक रहेगी.
कन्या- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए तीसरे भाव में होगा. आध्यात्मिकता के प्रति आपको आकर्षण अधिक रहेगा. आर्थिक रूप से लाभ होने की संभावना है. नए काम का आरंभ करने के लिए समय शुभ है. प्रियजनों से मुलाकात होगी. आप विरोधियों पर विजय प्राप्त कर सकेंगे. दोपहर के बाद स्थिति में बदलाव होगा. मानसिक और शारीरिक रूप से कुछ चिंता का अनुभव करेंगे. माता का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. स्थायी संपत्ति के लिए किए जा रहे प्रयास आज टालें. विद्यार्थियों के लिए दिन मध्यम है.
तुला- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दूसरे भाव में होगा. शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है. पारिवारिक झगड़े में वाणी पर संयम रखना होगा. नेगेटिविटी मन पर छायी रहेगी. घर के सदस्यों के साथ किसी बात का कनफ्यूजन बना रहेगा. दोपहर के बाद आपके मन की ग्लानि दूर होगी और आनंद छा जाएगा. नए काम करने के लिए आप तैयार रहेंगे. विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी. आप अपने मित्रों के साथ ज्यादा समय गुजारेंगे. नौकरीपेशा लोगों को काम पूरा करने में कठिनाई महसूस होगी.
वृश्चिक- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए पहले भाव में होगा. आज का आपका दिन मध्यम फलदायी है. सुख और संतोष का अनुभव होगा. परिजनों के साथ आनंदपूर्वक दिन गुजरेगा. आज शुभ समाचार मिलेंगे. दोपहर के बाद परिवार में झगड़े का वातावरण रह सकता है. अनावश्यक खर्च पर संयम बरतें. शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें. विद्यार्थियों को पढ़ाई में दिक्कत आएगी. कार्यस्थल पर आज आपके काम समय पर पूरे होंगे, लेकिन आपको दूसरों के काम में हस्तक्षेप करने से बचना होगा.
धनु- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए बारहवें भाव में होगा. आज का दिन आपके लिए थोड़ा कष्टदायक रहेगा. स्वास्थ्य खराब होगा. परिवार के सदस्यों के साथ बहसबाजी से मन दुःखी रहेगा. परिणामस्वरूप आप मानसिक रूप से भी परेशान रहेंगे. क्रोध पर अंकुश रखें. दुर्घटना होने का भय रहेगा. सावधानी रखें. कोर्ट-कचहरी के मामलों में बेहद ध्यान से काम करें. अधिक खर्च होने से धन की कमी महसूस होगी. आज आपका मन कार्यस्थल पर किसी काम में नहीं लगेगा. आज का दिन धैर्य के साथ गुजारें.
मकर- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए ग्यारहवें भाव में होगा. आज का दिन व्यापार और जॉब करने वालों के लिए अच्छा है. पुत्र और पत्नी से आर्थिक लाभ होगा. सांसारिक जीवन में सुखद प्रसंग बनने से मन खुश रहेगा. दोपहर के बाद मानसिक अशांति और खराब स्वास्थ्य आपको परेशान कर सकता है. अधिकारी से बातचीत करते समय किसी तरह कन्फ्यूजन हो सकता है. मनोरंजन के पीछे धन का खर्च होगा. विवाद में आपका सम्मान जाने का डर बना रहेगा.
कुंभ- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए दसवें भाव में होगा. आज का दिन लाभकारी है. व्यापार के क्षेत्र में आपको लाभ होगा. घर-परिवार और समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. नौकरी में पदोन्नति हो सकती है. अधिकारी आपके काम से खुश रहेंगे. स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. उधार दिया गया पैसा आपको मिल सकता है. पुराने दोस्तों से मुलाकात होगी. किसी पर्यटन स्थल पर जाने का कार्यक्रम बनेगा. संतान की संतोषजनक प्रगति से आपका भी मन प्रसन्न रहेगा. पारिवारिक जीवन में आनंद छाया रहेगा.
मीन- 15 जनवरी, 2026 बृहस्पतिवार के दिन वृश्चिक राशि का चंद्रमा आज आपके लिए नवें भाव में होगा. साहित्यिक गतिविधि में आज आपकी रुचि बनी रहेगी. आज कोई नए काम शुरू कर पाएंगे. किसी धार्मिक यात्रा के योग हैं. विदेश में रहने वाले मित्रों और स्नेहीजनों से बातचीत हो सकती है. शरीर में उल्लास और थकान दोनों का अनुभव होगा. हालांकि आज आपके काम बिना किसी विघ्न के पूरे होंगे. धन लाभ का योग है. मित्रों से लाभ होगा. जीवनसाथी के साथ चल रहा कोई पुराना विवाद दूर होगा. प्रेम जीवन में सफलता मिलेगी.
मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने की है परंपरा
15 Jan, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की अंतिम तिथि को मौनी अमावस्या है। इसे माघी या मौनी अमावस्या भी कहते हैं। इस बार माघी अमावस्या 18 जनवरी को है। सनातन धर्म में मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने की परंपरा है। इस शुभ अवसर पर भक्त गंगा तट पर स्नान करते हैं, ध्यान करते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गये पाप धुल जाते हैं। मां गंगा की कृपा भी भक्तों पर बरसती है। कुंडली में शामिल अशुभ ग्रहों से मुक्ति मिलती है।
इस अमावस्या को माघी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मौन व्रत करने का विधान है। इसके अलावा जप, तप और श्रद्धा अनुसार दान भी करना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है।
। यह दिन सनातनियों के लिए व्रत, दान और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण दिन है।
मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
मौनी अमावस्या का मूल तत्व धार्मिक और सांस्कृतिक आचरण है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवता पवित्र नदियों और संगमों में निवास करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं। इसी कारण प्रमुख तीर्थस्थलों, विशेष रूप से गंगा के किनारे, स्नान और प्रार्थना करने के लिए भक्तों की बड़ी भीड़ देखी जाती है।
व्रत की शुरुआत सूर्योदय के समय पवित्र नदी या सरोवर में स्नान से होती है। इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू “मौन व्रत” या “मौन का संकल्प” है, जिसके द्वारा भक्त अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करते हुए आत्मचिंतन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन मन ही मन प्रार्थना करना अधिक फलदायी और शक्तिशाली माना जाता है।
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