व्यापार
क्या बदल जाएगी अमेरिकी मौद्रिक नीति? केविन वॉर्श को लेकर SBI रिसर्च का अलर्ट
1 Jul, 2026 12:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:दुनिया भर के शेयर बाजारों और केंद्रीय बैंकों के काम करने के पारंपरिक तौर-तरीकों में जल्द ही एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' की कमान संभालने जा रहे नए चेयरमैन केविन वॉर्श एक ऐसी नई नीति की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों की दिशा बदल सकती है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च की एक होलिया रिपोर्ट के अनुसार, वॉर्श के कार्यकाल में फेडरल रिजर्व का कामकाज पिछले कुछ सालों से चली आ रही ज्यादा बातचीत और खुले संवाद वाली शैली से पूरी तरह अलग होने वाला है। इस बदलाव का सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के नीति निर्माताओं और निवेशकों पर पड़ेगा।
कम संवाद और आर्थिक आंकड़ों पर बढ़ती निर्भरता
एसबीआई रिसर्च के विश्लेषण के मुताबिक, नए चेयरमैन केविन वॉर्श का नजरिया केवल सख्त फैसले लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे व्यवस्था में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करना चाहते हैं। वे केंद्रीय बैंक की तरफ से भविष्य के कदमों को लेकर पहले से दिए जाने वाले संकेतों या बयानों को सीमित करने के पक्ष में हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में दुनिया भर के बाजारों को फेडरल रिजर्व के बयानों के भरोसे रहने के बजाय सीधे तौर पर वास्तविक आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन करना होगा। वॉर्श नीतिगत टूल्स को सीमित रखने, बैलेंस शीट का आकार छोटा करने और अपने सार्वजनिक बयानों में अत्यधिक संयम बरतने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नई नीति के खतरे
आमतौर पर शांत और स्थिर वैश्विक माहौल में केंद्रीय बैंक का कम बोलना उसकी गंभीरता और साख को मजबूत करता है, लेकिन मौजूदा दौर बेहद संवेदनशील और पेचीदा हो चुका है। इस समय पूरी दुनिया भू-राजनीतिक टकराव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उभार से पैदा हो रही नई चुनौतियों, भारी राजकोषीय घाटे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं से जूझ रही है। रिपोर्ट में इस बात को लेकर सचेत किया गया है कि कम बोलने या गुप्त रहने की यह रणनीति तभी कारगर होती है जब दुनिया में भ्रम की स्थिति कम हो। अगर फेडरल रिजर्व अपनी नीतियों के बदलावों को लेकर स्पष्ट पैमाने तय नहीं करता है, तो बाजारों में भ्रम बढ़ेगा और यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है।
डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों पर सीधा प्रभाव
फेडरल रिजर्व के रुख में आने वाले इस बदलाव का सीधा और गहरा असर अंतरराष्ट्रीय ट्रेजरी यील्ड, अमेरिकी डॉलर की ताकत, वैश्विक पूंजी के प्रवाह और दुनिया भर में कर्ज की लागत पर दिखाई देगा। वॉर्श की इन रणनीतियों के चलते अमेरिकी डॉलर के और ज्यादा मजबूत होने की पूरी संभावना है। मजबूत डॉलर भले ही अमेरिका में आयात को सस्ता करके वहां की महंगाई पर लगाम लगाने में मदद करे, लेकिन इससे अमेरिकी निर्यातकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। सबसे ज्यादा परेशानी उन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को होगी जिन्होंने डॉलर में भारी कर्ज ले रखा है, क्योंकि उनके लिए अब इस कर्ज की किस्तें चुकाना बहुत महंगा हो जाएगा।
विश्वसनीयता और संस्थागत स्वतंत्रता की बड़ी चुनौती
एसबीआई रिसर्च ने रेखांकित किया है कि एक भरोसेमंद फेडरल रिजर्व पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत स्तंभ की तरह काम करता है, जबकि एक भ्रमित केंद्रीय बैंक वैश्विक स्तर पर एक अदृश्य बोझ की तरह साबित होता है। केविन वॉर्श के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपनी संस्थागत स्वतंत्रता को बरकरार रखते हुए नीतिगत साख के बीच एक सही संतुलन स्थापित करने की होगी। अगर वे अपनी इस नई और कम बोलने वाली नीति के बीच पारदर्शिता बनाए रखने में कामयाब होते हैं, तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रति भरोसा और मजबूत होगा। इसके विपरीत, यदि इस चुप्पी से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बनता है, तो दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में भारी उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो सकती है।
पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर फैली भ्रांतियों पर सरकार ने दी सफाई
1 Jul, 2026 12:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का प्रोजेक्ट अभी सिर्फ एक प्रयोग है। भारत के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने इस संबंध में एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए स्थिति साफ की है। यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और अन्य तेल विपणन कंपनियों से जुड़े इथेनॉल आवंटन मामले की सुनवाई के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद सरकार ने अपने बयान में वास्तविक दलीलों को सामने रखा है।
भ्रामक मीडिया दावों पर सरकार का स्पष्टीकरण
कुछ मीडिया चैनलों और वेबसाइट्स पर खबरें छपी थीं कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने E20 प्रोग्राम को अभी भी एक चल रहा एक्सपेरिमेंट बताया है, जिसका असर अगले साल साफ होगा। इस पर महान्यायवादी कार्यालय ने साफ शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष किसी भी स्तर पर यह दलील नहीं दी गई कि सरकार का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम या E20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम एक प्रयोग है। सरकार के अनुसार ऐसी रिपोर्टें पूरी तरह से गलत हैं और इनका कोर्ट की असल कार्यवाही से कोई लेना-देना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में महान्यायवादी की वास्तविक दलीलें
इथेनॉल आवंटन मामले में सुनवाई के दौरान महान्यायवादी ने कोर्ट के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट की थी। देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों में डेडिकेटेड इथेनॉल संयंत्रों को इथेनॉल सप्लाई और आवंटन से जुड़े इसी तरह के कई मामले चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि सरकार इन सभी मामलों को एक साथ जोड़ने और उन्हें शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने के लिए ट्रांसफर पिटिशन दायर कर रही है ताकि एक ही प्रकार के कॉन्ट्रैक्ट ढांचे से जुड़े कानूनी सवालों पर देश की सबसे बड़ी अदालत एक साथ विचार करे, जिससे अलग-अलग अदालतों के विरोधाभासी फैसलों से बचा जा सके और कानूनी विवाद का निपटारा भी तेजी से हो।
राष्ट्रीय कार्यक्रम की निरंतरता पर सरकार का जोर
अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया कि इन सभी कानूनी मामलों का एक ही जगह निपटारा होना बेहद जरूरी है। इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम है, इसलिए इसके तहत पूरे देश में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने के लिए तेल कंपनियों को होने वाली रेगुलर सप्लाई चेन पर कोई भी आंच नहीं आनी चाहिए और आपूर्ति व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहनी चाहिए।
मामले पर सर्वोच्च न्यायालय का ताजा आदेश
अटॉर्नी जनरल की इन तमाम दलीलों को सुनने और समझने के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि सरकार को इस मामले से जुड़ी प्रस्तावित स्थानांतरण याचिकाएं जल्द दायर करनी चाहिए। इसके साथ ही मौजूदा विवाद के संदर्भ में कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वर्तमान इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए इथेनॉल के आवंटन को लेकर फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखी जाए।
तीन IPO की अलग-अलग कहानी, दो ने दिया झटका तो एक ने कमाई कराई
1 Jul, 2026 10:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई:घरेलू शेयर बाजार के प्राथमिक बाजार (Primary Market) में आज जबरदस्त हलचल देखी गई। मेनबोर्ड सेगमेंट में जहां 'अद्वित ज्वेल्स' और 'कॉर्डेला क्रूजेज' की पैरेंट कंपनी 'वाटरवेज लेजर टूरिज्म' ने कदम रखा, वहीं एसएमई (SME) प्लेटफॉर्म पर भी तीन कंपनियों की लिस्टिंग हुई। हालांकि, नए लिस्ट हुए इन एसएमई शेयर्स ने निवेशकों को मिला-जुला स्वाद चखाया। दो कंपनियों ने शुरुआत में ही निवेशकों की 20 फीसदी पूंजी पर पानी फेर दिया, जबकि एक टेक्सटाइल शेयर मामूली बढ़त के साथ निवेशकों को राहत देने में कामयाब रहा।
एसएमई लिस्टिंग का पूरा लेखा-जोखा: जानिए किस शेयर का क्या रहा हाल
स्टॉक का नाम
इश्यू प्राइस (₹)
लिस्टिंग प्राइस (₹)
लिस्टिंग गेन/लॉस (%)
मौजूदा भाव (₹)
कुल उतार-चढ़ाव
जिवियल इंडस्ट्रीज
₹196
₹156.80
(-)20.00%
₹151.25
(-)22.83%
श्रीधर स्पिनर्स
₹53
₹54.40
(+)2.64%
₹57.10
(+)7.74%
रियासत Lifeस्टाइल
₹106
₹84.80
(-)20.00%
₹80.60
(-)23.96%
कमजोर सब्सक्रिप्शन का असर; जिवियल और रियासत लाइफस्टाइल की बेहद खराब शुरुआत
जिवियल इंडस्ट्रीज: एल्युमीनियम रेलिंग बनाने वाली इस कंपनी के 32 करोड़ रुपये के आईपीओ को बाजार से बहुत ठंडा रिस्पॉन्स मिला था, जिसके चलते यह महज 0.93 गुना ही सब्सक्राइब हो सका था। यही वजह रही कि ₹196 के इश्यू प्राइस के मुकाबले इसका शेयर 20% टूटकर ₹156.80 पर लिस्ट हुआ और फिलहाल यह ₹151.25 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
रियासत लाइफस्टाइल: एथनिक वियर सेक्टर की इस कंपनी के ₹30 करोड़ के आईपीओ को भी खुदरा निवेशकों ने खास तवज्जो नहीं दी थी। रिटेल हिस्सा सिर्फ 0.44 गुना भरने का खामियाजा कंपनी को उठाना पड़ा। ₹106 का यह शेयर सीधे 20% के घाटे के साथ ₹84.80 पर लिस्ट हुआ और बिकवाली के दबाव में अब ₹80.60 पर आ गया है।
श्रीधर स्पिनर्स ने बचाई लाज; अच्छे रिस्पॉन्स के बाद मुनाफे के साथ खुला शेयर
निराशा के इस माहौल के बीच कॉटन धागा बनाने वाली कंपनी 'श्रीधर स्पिनर्स' के शेयर ने निवेशकों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान बिखेरी। कंपनी के ₹31 करोड़ के आईपीओ को बाजार में 6.70 गुना से अधिक का मजबूत सब्सक्रिप्शन मिला था। मजबूत मांग के दम पर ₹53 की फेस वैल्यू वाला यह शेयर 2.64% के प्रीमियम के साथ ₹54.40 पर लिस्ट हुआ। लिस्टिंग के बाद भी इसमें खरीदारी का सिलसिला जारी रहा, जिससे इसका मौजूदा भाव बढ़कर ₹57.10 के स्तर पर पहुंच गया है, जो इसके मूल भाव से करीब 7.74% ऊपर है।
ATF के दाम में ₹5 की कटौती, एयर ट्रैवल हो सकता है और किफायती
1 Jul, 2026 10:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच देश की विमानन कंपनियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। विमानों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की सीधी कटौती की गई है। इस बदलाव के बाद देश की राजधानी दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमत 115 रुपये से घटकर अब 110 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर आ गई है। पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में उपजे संकट के बाद रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे हवाई ईंधन के दामों में यह पहली गिरावट है, जिससे थोक भाव भी घटकर 1.10 लाख रुपये प्रति किलोलीटर रह गया है।
ग्लोबल मार्केट में तनाव घटने से मिली राहत, एयरलाइंस का घटेगा खर्च
ईंधन के दामों में यह कमी हाल के हफ्तों में वैश्विक स्तर पर आए सकारात्मक बदलावों का नतीजा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की सप्लाई चेन सुधरने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नीचे आए हैं। चूंकि किसी भी एयरलाइन के परिचालन (ऑपरेटिंग) खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन का ही होता है, इसलिए इस कटौती से घरेलू विमानन कंपनियों को अपनी लागत घटाने में बड़ी मदद मिलेगी। हालांकि, आम यात्रियों को हवाई टिकटों में इसका कितना फायदा मिलेगा, यह काफी हद तक एयरलाइंस की अपनी आंतरिक रणनीतियों पर निर्भर करेगा।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी ₹183.50 हुआ सस्ता, घरेलू गैस के दाम स्थिर
महीने की पहली तारीख को होने वाले इस नियमित बदलाव के तहत सिर्फ हवाई ईंधन ही नहीं, बल्कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दाम भी घटाए गए हैं। तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की भारी कटौती की है। इस साल व्यावसायिक गैस के दामों में यह पहली बड़ी गिरावट है, जिससे होटल और रेस्तरां संचालकों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, आम जनता के घरों में इस्तेमाल होने वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे अपने पुराने रेट्स पर ही बने हुए हैं।
प्राइवेट कंपनी 'नायरा एनर्जी' ने पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए; सरकारी कंपनियां शांत
आम उपभोक्ताओं के लिए एक और बड़ा उलटफेर करते हुए देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनी 'नायरा एनर्जी' ने अपने देशव्यापी नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमतों में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की कटौती का एलान किया है। पिछले दो वर्षों में यह पहला मौका है जब किसी तेल कंपनी ने खुदरा ईंधन की कीमतों को कम किया है, जो कंपनी के 7,000 से अधिक पेट्रोल पंपों पर लागू हो चुका है। हालांकि, दूसरी तरफ सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी दिग्गज कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है और उनके रेट्स जस के तस बने हुए हैं।
आम जनता को बड़ी राहत! 1 जुलाई से गैस सिलेंडर सस्ता, डीजल पर नया फैसला लागू
1 Jul, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: जुलाई महीने की शुरुआत देश के आम नागरिकों और व्यापार जगत के लिए राहत और बदलाव की मिली-जुली खबरें लेकर आई है। सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता और दुकानदारों को बड़ी राहत देते हुए 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमतों में 183.50 रुपये की भारी कटौती कर दी है। इस कटौती के बाद देश की राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलिंडर के दाम 3,113.50 रुपये से घटकर 2,930 रुपये पर आ गए हैं। हालांकि, घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरेलू रसोई का बजट पहले जैसा ही बना रहेगा।
डीजल बिक्री पर लगी सीमा हटी, ईंधन और गैस में राहत
ईंधन के मोर्चे पर सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए डीजल की बिक्री पर लगी सीमा को पूरी तरह से हटा दिया है। सरकार के इस कदम से देश के वाहन चालकों, किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बहुत बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें जरूरत के मुताबिक डीजल आसानी से मिल सकेगा। राहत की बात यह भी है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है और वे अपनी पुरानी दरों पर ही स्थिर हैं।
पेट्रोल निर्यात पर शुल्क बढ़ा, कारों की कीमतें भी बढ़ीं
एक तरफ जहां गैस और ईंधन के मामले में राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कुछ फैसलों का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ सकता है। सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के उद्देश्य से पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, ऑटो सेक्टर से भी आम खरीदारों को झटका लगा है। देश की कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने आज यानी 1 जुलाई से अपनी नई कारों की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी है, जिससे अब नया वाहन खरीदना पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस महीने की शुरुआत जहां गैस और ईंधन में राहत लेकर आई है, वहीं ऑटो सेक्टर में बढ़ते खर्च के संकेत भी दे रही है।
गोल्ड-सिल्वर की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानिए क्यों टूटे भाव
1 Jul, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली:जुलाई महीने की शुरुआत के साथ ही कीमती धातुओं के बाजार में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। सोने और चांदी की कीमतों में आई अचानक भारी गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों दोनों को चौंका दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय वायदा बाजार तक हर जगह बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, जिससे दोनों ही बहुमूल्य धातुओं की चमक आज काफी फीकी पड़ गई है।
घरेलू बाजार (MCX) पर धड़ाम हुए रेट्स, सोने में भारी गिरावट
भारतीय कमोडिटी बाजार (MCX) में आज कारोबार की शुरुआत होते ही सोने के भाव औंधे मुंह गिर गए। ताजा आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बाजार में सोना करीब 1155 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 1,42,531 रुपये के स्तर पर आ गई है। अचानक आई इस कमी से बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहक अब रेट्स के और स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं।
चांदी की कीमतों में बड़ा क्रैश, प्रति किलो 3810 रुपये की कमी
सोने के साथ-साथ चांदी की चमक भी आज बेहद फीकी रही। MCX पर चांदी की कीमतों में 3810 रुपये प्रति किलोग्राम की एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस भारी गिरावट के बाद चांदी अब 2,25,000 लाख रुपये प्रति किलो के भाव पर कारोबार कर रही है। औद्योगिक मांग में सुस्ती और ग्लोबल मार्केट के दबाव के चलते चांदी के निवेशकों को आज सतर्क रुख अपनाते देखा गया।
वैश्विक बाजार में भी मंदी, कॉमेक्स (Comex) पर टूटे भाव
कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट के तार सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़े हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच (Comex) पर सोना 1.19% की कमजोरी के साथ 47.90 डॉलर प्रति औंस टूटकर 3,990.60 डॉलर पर आ गया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी 2.63% की गिरावट के साथ 57.915 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक बदलावों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के चलते अभी बाजार में यह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
₹6650 करोड़ के IPO का प्लान तैयार, OYO पहले घटाएगा अपना कर्ज
30 Jun, 2026 01:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की दिग्गज हॉस्पिटैलिटी कंपनी ओयो (OYO) जल्द ही शेयर बाजार में दस्तक देने की तैयारी में है. ओयो की पैरेंट कंपनी प्रिज्म (Prism) की योजना इस ₹6650 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए जुटाई जाने वाली रकम के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपना कर्ज कम करने के लिए करने की है. बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास जमा किए गए नए ड्राफ्ट पेपर के मुताबिक, इस आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी किए जाएंगे. इसका मतलब यह है कि कंपनी का कोई भी मौजूदा शेयरधारक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेगा. कंपनी बाजार में लिस्ट होने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति को और ज्यादा मजबूत करना चाहती है.
कम हो सकता है पब्लिक इश्यू का साइज, प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर भी विचार
आंतरिक रणनीतियों के अनुसार, कंपनी ने आईपीओ से मिलने वाली राशि में से करीब ₹4,987.5 करोड़ यानी लगभग 75 फीसदी हिस्सा पुराना कर्ज चुकता करने के लिए रिजर्व रखा है, जबकि बची हुई रकम का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट कामकाज में किया जाएगा. बाजार के जानकारों का कहना है कि इस पब्लिक इश्यू का कुल साइज आने वाले दिनों में थोड़ा घट भी सकता है, क्योंकि ओयो की मूल कंपनी ₹1,330 करोड़ तक का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट लाने पर भी विचार कर रही है. यदि यह प्लेसमेंट सफल रहता है, तो मुख्य आईपीओ का आकार उसी अनुपात में कम कर दिया जाएगा. गोपनीय तरीके से ड्राफ्ट पेपर दाखिल करने के बाद सेबी की तरफ से इस प्रस्तावित आईपीओ को हरी झंडी मिल चुकी है और बाजार में इसकी वैल्यूएशन करीब 700 से 800 करोड़ डॉलर के आसपास आंकी जा रही है.
वित्तीय मोर्चे पर ओयो की शानदार वापसी, मुनाफे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज
आईपीओ दस्तावेजों से यह साफ जाहिर होता है कि बीते कुछ समय में ओयो की माली हालत में बहुत तेजी से सुधार हुआ है. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों, यानी अप्रैल से दिसंबर की अवधि में पैरेंट कंपनी प्रिज्म ने ₹6,941 करोड़ के ऑपरेशनल रेवेन्यू के साथ ₹748 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 11 फीसदी ज्यादा है. सिर्फ यही नहीं, कामकाजी स्तर पर भी कंपनी का परफॉर्मेंस बेहतरीन रहा है और इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) पिछले वित्त वर्ष में दोगुने से भी अधिक की बढ़त के साथ ₹953 करोड़ से बढ़कर सीधे ₹2,127 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है. मुनाफे और रेवेन्यू के ये मजबूत आंकड़े बताते हैं कि ओयो अब शेयर बाजार में पूरी तैयारी और मजबूत सेहत के साथ उतरने जा रही है.
EV पॉलिसी से हिला ऑटो सेक्टर, आयशर मोटर्स बना बाजार का सबसे बड़ा लूजर
30 Jun, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा घोषित की गई सख्त इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी का सीधा असर आज शेयर बाजार पर देखने को मिला। इस नई नीति की घोषणा के बाद ऑटोमोबाइल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आयशर मोटर्स के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है। हालांकि निचले स्तरों पर आने के बाद स्टॉक में मामूली सुधार जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद दोपहर के कारोबार के दौरान यह निफ्टी इंडेक्स का सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर बना रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दोपहर करीब 12 बजे यह स्टॉक लगभग 290 रुपये यानी 3.91 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 7138 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। आज के कारोबार में इस शेयर ने 7,392.50 रुपये का उच्चतम स्तर और 6,942.50 रुपये का निचला स्तर छुआ, जबकि इसका 52 हफ्तों का उच्च स्तर 8,230 रुपये और निचला स्तर 5,353 रुपये रहा है।
दिल्ली में बंद होंगे पेट्रोल और सीएनजी टू-व्हीलर्स, दो साल से भी कम का समय
आयशर मोटर्स में आई इस तेज गिरावट की मुख्य वजह दिल्ली सरकार की आगामी ईवी नीति है, जो पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के लिए बेहद सख्त रुख अपना रही है। इस नई नीति के तहत दिल्ली में 1 जनवरी 2028 से सभी तरह के इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) यानी पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से राजधानी में सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही पंजीकरण हो सकेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस समयसीमा के बाद किसी भी तरह का अतिरिक्त समय (ग्रेस पीरियड) नहीं दिया जाएगा और न ही हाइब्रिड गाड़ियों को कोई विशेष छूट मिलेगी। भारतीय टू-व्हीलर बाजार में दिल्ली की कुल हिस्सेदारी लगभग 3 फीसदी है, जिसके चलते यह फैसला कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव लेकर आएगा। विशेष बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में आयशर मोटर्स ने रिकॉर्ड रेवेन्यू, एबिटडा (EBITDA) और मुनाफा दर्ज किया था, लेकिन इस नई नीति ने भविष्य की राह को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
रॉयल एनफील्ड के सामने बड़ी चुनौती, इलेक्ट्रिक सेगमेंट में पकड़ मजबूत करने का दबाव
दिल्ली सरकार का यह फैसला आयशर मोटर्स के मशहूर ब्रांड 'रॉयल एनफील्ड' के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वर्तमान में रॉयल एनफील्ड के पोर्टफोलियो में केवल एक ही इलेक्ट्रिक मॉडल शामिल है और दिल्ली के मौजूदा ईवी बाजार में कंपनी की उपस्थिति बेहद सीमित है। जबकि इसके उलट, दिल्ली के पारंपरिक टू-व्हीलर मार्केट में रॉयल एनफील्ड की पकड़ बहुत मजबूत है और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 3.3% है। मिड-साइज पेट्रोल मोटरसाइकिलों के दम पर खड़ी कंपनी की मजबूत साख अब ईवी पर स्विच करने की अनिवार्यता के बाद उतनी प्रभावी नहीं रह जाएगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिन स्थापित कंपनियों के पास मजबूत ईवी रेंज नहीं है, उन्हें या तो बहुत तेजी से नए इलेक्ट्रिक उत्पाद उतारने होंगे या फिर दिल्ली जैसे बड़े बाजार से बाहर होना पड़ेगा। डेडलाइन में दो साल से भी कम का समय बचने के कारण रॉयल एनफील्ड पर अपनी इलेक्ट्रिक फ्लीट बढ़ाने का दबाव काफी ज्यादा है।
आईजीएल के सीएनजी कारोबार को झटका, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर असर
इस नई नीति का असर केवल वाहन निर्माताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) सेक्टर पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म नोमूरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की इस नई ईवी पॉलिसी से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के कारोबार को बड़ा झटका लग सकता है क्योंकि टू-व्हीलर्स के बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक होने से लंबे समय में सीएनजी की मांग और वॉल्यूम में भारी गिरावट आने की आशंका है। हालांकि, इस नीति का महानगर गैस लिमिटेड (MGL) पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। वहीं पूरे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेगमेंट में गुजरात गैस पर इसका सबसे कम प्रभाव देखने को मिलेगा, क्योंकि अब घरेलू और इंडस्ट्रियल पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) ही इस सेक्टर की ग्रोथ को आगे बढ़ाने वाले मुख्य कारक बनेंगे।
भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार, अदाणी पोर्ट में अरबों डॉलर की डील
30 Jun, 2026 12:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र से एक बहुत बड़ी आर्थिक खबर सामने आ रही है। अदाणी पोर्ट्स ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर यह एलान किया है कि उसने दुनिया के दिग्गज एमएससी ग्रुप के साथ एक बड़ा और पक्का समझौता कर लिया है। इस रणनीतिक डील के तहत एमएससी ग्रुप की कंटेनर टर्मिनल संचालन और निवेश से जुड़ी कंपनी 'टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड' (टीआईएल), अदाणी विझिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। कंपनी इस प्रोजेक्ट में करीब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 1.4 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने वाली है।
भारतीय बंदरगाह इतिहास का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश
यह नया सौदा न सिर्फ दोनों कंपनियों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बेहद खास है। इसे भारत के बंदरगाह सेक्टर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश माना जा रहा है। विझिंजम पोर्ट के कुल 2.85 अरब डॉलर के मूल्यांकन के आधार पर टीआईएल इसमें लगभग 1.397 अरब डॉलर का पूंजी निवेश करेगी। इस बड़े वित्तीय कदम से विझिंजम पोर्ट की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और यह हिंद महासागर क्षेत्र में एक बहुत बड़े और प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में अपनी धाक जमाने में कामयाब होगा।
विझिंजम पोर्ट ने महज 18 महीनों में रचा नया कीर्तिमान
अदाणी पोर्ट्स (एपीएसईजेड) के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्विनी गुप्ता ने इस उपलब्धि पर गहरी खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि विझिंजम पोर्ट ने बेहद कम समय के भीतर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। चालू होने के मात्र 18 महीनों के भीतर इस बंदरगाह ने 20 लाख टीईयू कार्गो हैंडलिंग का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जो देश के किसी भी बंदरगाह के लिए अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है। उन्होंने भरोसा जताया कि एमएससी ग्रुप के साथ मिलकर काम करने से वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बेहद मजबूत होगी और दुनिया के बड़े बाजारों तक भारत की पहुंच और आसान हो जाएगी।
रणनीतिक साझेदारी से मिलेंगे कई चौकाने वाले फायदे
कंपनी के मुताबिक सभी जरूरी सरकारी और नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद इस सौदे को पूरी तरह अमलीजामा पहना दिया जाएगा। इस बड़ी पार्टनरशिप के बाद विझिंजम पोर्ट पर आने वाले माल (कार्गो) की मात्रा में तेजी से बढ़ोतरी होगी और समय से पहले ही इसका विस्तार कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बांग्लादेश से आने वाले कार्गो का एक बड़ा हिस्सा अब सीधे भारत आएगा, जो पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों पर निर्भर रहता था। इसके अलावा पूर्वी अफ्रीका के व्यापारिक समुद्री रास्तों पर भी कंपनी की पकड़ काफी मजबूत होने की उम्मीद है।
जानिए क्या है टीआईएल और विझिंजम पोर्ट की असली ताकत
अगर टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (टीआईएल) की बात करें तो यह पांच महाद्वीपों के 100 से अधिक कंटेनर टर्मिनलों का नेटवर्क संभालने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। वहीं दिसंबर 2024 में शुरू हुआ विझिंजम पोर्ट भारत का पहला डीप-ड्राफ्ट मेगा ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह यूरोप, फारस की खाड़ी और सुदूर पूर्व को जोड़ने वाले मुख्य समुद्री व्यापार मार्ग से महज 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है।
साल 2028 तक साढ़े तीन गुना बढ़ जाएगी बंदरगाह की क्षमता
विझिंजम पोर्ट पर इस समय तेजी से विस्तार का काम चल रहा है। अभी इसकी मौजूदा क्षमता 16 लाख टीईयू की है, जिसे दिसंबर 2028 तक साढ़े तीन गुना बढ़ाकर 57 लाख टीईयू करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो इस बंदरगाह ने करीब 13 लाख टीईयू कार्गो और 615 जहाजों का सफल संचालन किया है। अपने काम के पहले ही साल में 10 लाख का आंकड़ा पार करके इसने भारत का सबसे तेज बंदरगाह होने का गौरव भी अपने नाम कर लिया है।
दहेज पर डॉक्टर की टिप्पणी हुई वायरल, सोशल मीडिया पर शुरू हुई तीखी बहस
30 Jun, 2026 10:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में सदियों पुरानी और कुप्रथा मानी जाने वाली दहेज प्रथा को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर आम गलियारों तक बहस बेहद तेज हो गई है। इस बार यह चर्चा एक उच्च शिक्षित महिला रेडियोलॉजिस्ट (डॉक्टर) की भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुई है, जो अब तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रही है। डॉक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर अपने विवाह के लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश के दौरान कथित तौर पर झेली गई दहेज की अमानवीय मांगों का दर्द बयां किया है। महिला डॉक्टर का चौंकाने वाला दावा है कि शादी की बातचीत के दौरान कुछ परिवारों ने उनसे 50 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम दहेज की मांग कर डाली, जबकि एक अन्य परिवार ने तो उनके माता-पिता की कुल संपत्ति में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी तक की शर्त रख दी।
कानूनी पाबंदी के बावजूद समाज में बरकरार है कुप्रथा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। इसके सख्त नियमों के बावजूद देश के तमाम हिस्सों से समय-समय पर दहेज उत्पीड़न और शादी के नाम पर सौदेबाजी के आरोप सामने आते रहते हैं। हालांकि, इस विशिष्ट मामले में महिला डॉक्टर द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि या सत्यापन नहीं किया जा सका है, क्योंकि संबंधित परिवारों की ओर से अब तक इस पर कोई सार्वजनिक सफाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस एक पोस्ट ने यह जरूर साबित कर दिया है कि आधुनिक और शिक्षित समाज में भी यह कुप्रथा किस कदर अपनी जड़ें जमाए बैठी है।
सफल और आत्मनिर्भर होने के बाद भी मानसिक प्रताड़ना
ऑनलाइन साझा किए गए अपने संदेश में महिला डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने रेडियोडायग्नोसिस में एमडी (MD) की उच्च डिग्री हासिल की है और वे पेशेवर रूप से पूरी तरह स्थापित हैं। वे अपनी तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं और आर्थिक रूप से इतनी आत्मनिर्भर हैं कि अपने पूरे परिवार की देखभाल अकेले करने में सक्षम हैं। उन्होंने लिखा कि इतनी बड़ी प्रोफेशनल उपलब्धियों और योग्यताओं के बावजूद, सिर्फ अपनी संकीर्ण सोच के कारण दूल्हे के परिवारों ने जो मांगें रखीं, उसने उनके लिए जीवनसाथी ढूंढने के सफर को भावनात्मक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला और कड़वा अनुभव बना दिया है।
संपत्ति में हिस्सेदारी की अजीबो-गरीब शर्तें
अपनी आपबीती बताते हुए महिला डॉक्टर ने लिखा कि एक रसूखदार परिवार ने तो सीधे 50 करोड़ रुपये की मांग की। वहीं, एक दूसरे परिवार ने उनके सामने यह अजीबोगरीब शर्त रख दी कि चूंकि होने वाले दूल्हे का भाई भी एक डॉक्टर है, इसलिए उन्हें अपनी पारिवारिक प्रॉपर्टी का 10 प्रतिशत हिस्सा 'आदापडुचु कट्नम' (एक पारंपरिक उपहार, जो असल में दहेज प्रथा का ही एक रूप है) के तौर पर देना होगा। इन अनुचित और अनैतिक मांगों ने उनके माता-पिता को भारी मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव में डाल दिया, जो अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित थे। हालांकि, उन्होंने गर्व से यह भी जोड़ा कि उनके माता-पिता ने इस सामाजिक दबाव के आगे घुटने नहीं टेके और उन्हें ऐसे लालची परिवारों में शादी के लिए मजबूर नहीं किया।
सोशल मीडिया पर मिला भारी समर्थन, व्यवस्था पर उठे सवाल
तीन बेटियों के पिता होने के नाते उनके परिवार को इस तरह के माहौल में रिश्ता तलाशने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है, इसका जिक्र करते हुए डॉक्टर ने अंत में एक बेहद तीखा सवाल उठाया कि "क्या हम इस समाज से दहेज प्रथा को कभी खत्म नहीं कर पाएंगे?" इस पोस्ट के वायरल होने के बाद हजारों सोशल मीडिया यूजर्स डॉक्टर के समर्थन में आ गए हैं। लोगों ने इतनी मोटी रकम की मांग पर गहरी हैरानी और नाराजगी जताई है। कुछ यूजर्स ने उन्हें सलाह दी कि वे डॉक्टरों के संकीर्ण दायरे से बाहर निकलकर किसी अन्य मानवीय पेशे के जीवनसाथी की तलाश करें, जबकि अधिकांश लोगों का मानना है कि अब समय आ गया है जब कानून के साथ-साथ समाज को भी ऐसे लालची लोगों का पूरी तरह सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए।
चार वजहों ने बिगाड़ा बाजार का खेल, Nifty में आई जोरदार गिरावट
30 Jun, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। एशियाई बाजारों की मजबूती और अमेरिकी मार्केट से मिले बेहतर संकेतों के दम पर आज घरेलू शेयर बाजार ने शुरुआत तो बढ़त के साथ की थी, लेकिन यह रौनक ज्यादा देर नहीं टिक सकी और बाजार पर अचानक बिकवाली का दबाव हावी हो गया। भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, शुरुआती कारोबार में मिली अपनी पूरी बढ़त गंवाकर काफी नीचे आ गए। सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर (इंट्रा-डे हाई) से 500 अंकों से भी अधिक का गोता लगा गया, वहीं दूसरी ओर निफ्टी भी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने के बाद तेजी से फिसल गया। हालांकि, अगर व्यापक बाजार (ब्रोडर मार्केट) की बात करें तो मिडकैप शेयरों में जहां हल्का दबाव देखने को मिल रहा है, वहीं स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की अच्छी रौनक बनी हुई है।
शुरुआती बढ़त गंवाकर लाल निशान में पहुंचे सूचकांक
कारोबार के दौरान सुबह के समय सेंसेक्स करीब 128 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,600 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि निफ्टी 50 भी लगभग 56 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की फिसलन के साथ 23,889 के करीब आ गया। आज के उतार-चढ़ाव को देखें तो सेंसेक्स पहले 308 अंक उछलकर 77,037 के स्तर पर पहुंचा था, लेकिन मुनाफावसूली के चलते यह अपने ऊपरी स्तर से 581 अंक से ज्यादा टूटकर 76,455 के निचले स्तर तक चला गया। ठीक इसी तरह, निफ्टी 50 भी शुरुआती सत्र में 89 अंकों की छलांग लगाकर 24,035 के स्तर पर पहुंचा था, जहां से वह अचानक रिवर्स हुआ और 183 अंकों की भारी गिरावट के साथ 23,851 के स्तर तक आ गया।
आईटी और ऑटो शेयरों ने बढ़ाया दबाव, मंथली एक्सपायरी का असर
बाजार को नीचे धकेलने में आज सबसे बड़ी भूमिका सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के शेयरों ने निभाई, जिन्होंने इंडेक्स पर तगड़ा दबाव बनाया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में डेढ़ फीसदी से भी ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के सूचकांकों में भी आधा-आधा फीसदी से अधिक की कमजोरी देखी गई। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू बैंक) में करीब आधा फीसदी की बढ़त से बाजार को थोड़ा सहारा मिला। इस भारी उठापटक के पीछे आज होने वाली मंथली एक्सपायरी को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। निफ्टी और बैंक निफ्टी के साथ-साथ कई प्रमुख शेयरों के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की मंथली एक्सपायरी होने की वजह से निवेशक काफी सतर्कता बरत रहे हैं।
ग्लोबल वोलैटिलिटी और इंडिया विक्स में उछाल से घबराए निवेशक
बाजार में आई इस घबराहट को मापने वाला सूचकांक 'India VIX' (इंडिया विक्स) भी आज 1.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 13.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस सूचकांक में उछाल का सीधा मतलब यह है कि आने वाले कुछ हफ्तों में बाजार में उतार-चढ़ाव काफी अधिक रहने की आशंका है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों को परेशान कर रहा है। वीकेंड के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और छिटपुट हमलों की खबरों ने निवेशकों के मन में एक अनजाना डर पैदा कर दिया है। भले ही दोनों देशों की ओर से फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में बताया गया है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि इसी वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने घरेलू बाजार की शुरुआती तेजी का फायदा उठाते हुए मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) करना बेहतर समझा, जिससे बाजार दबाव में आ गया।
सोने की कीमत में बड़ी गिरावट, खरीदारी से पहले देखें शहरवार लेटेस्ट रेट
30 Jun, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: जून महीने के आखिरी दिन और हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को सराफा बाजार से बड़ी खबर आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार गिरावट (Gold Silver Price Crash) दर्ज की गई है। वैश्विक मंदी के संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी के चलते घरेलू वायदा बाजार में भी सुबह से ही बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, जिससे दोनों कीमती धातुओं के दाम काफी नीचे आ गए हैं।
इंटरनेशनल मार्केट (Comex) में भारी हलचल: $4000 के नीचे आया सोना
ग्लोबल मार्केट की बात करें तो Comex पर सोने के भाव में 1.29% की बड़ी गिरावट देखी गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 52.10 डॉलर टूटकर 3990 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में चांदी भी अछूती नहीं रही और इसमें 1.55% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय बाजार (MCX) में बड़ी गिरावट: सोना ₹1564 और चांदी ₹1546 सस्ती
घरेलू वायदा बाजार यानी MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर भी आज सुबह से ही लाल निशान में कारोबार हो रहा है। बाजार खुलते ही सोने और चांदी के खरीदारों के लिए राहत और निवेशकों के लिए झटका देने वाले आंकड़े सामने आए:
सोना (Gold Price): MCX पर सोना करीब ₹1,564 टूटकर ₹1,40,450 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
चांदी (Silver Price): चांदी की कीमतों में भी ₹1,546 की गिरावट आई, जिसके बाद यह ₹2,20,247 प्रति किलोग्राम पर आ गई।
बाजार के जानकारों का क्या कहना है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव में मामूली कमी आने के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग थोड़ी घटी है, जिसका सीधा असर इन कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
लॉन्ग बैटरी लाइफ वाला Motorola टैबलेट बाजार में, देखें कीमत और पूरी स्पेसिफिकेशन्स
29 Jun, 2026 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय गैजेट बाजार में प्रीमियम और दमदार टैबलेट की तलाश करने वाले यूजर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। मशहूर टेक कंपनी मोटोरोला ने भारत में अपना नया फ्लैगशिप टैबलेट 'मोटो पैड 70 प्रो' (Moto Pad 70 Pro) आधिकारिक तौर पर पेश कर दिया है, जो अगले महीने से ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगा। कंपनी ने इस एडवांस्ड डिवाइस को खासतौर पर उन लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया है जो ऑफिस के प्रोफेशनल काम, ऑनलाइन पढ़ाई, बेहतरीन गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए एक भरोसेमंद गैजेट चाहते हैं। यह टैबलेट ऑक्टा-कोर स्नैपड्रैगन प्रोसेसर, दमदार बैटरी बैकअप और शानदार डिस्प्ले क्वालिटी जैसी खूबियों से लैस है।
आकर्षक कीमत और बैंक डिस्काउंट के साथ मिलेगी कीबोर्ड डील
मोटोरोला ने इस प्रीमियम टैबलेट को भारतीय बाजार में काफी प्रतिस्पर्धी कीमत पर उतारा है। इसके शुरुआती वेरिएंट (8GB रैम और 128GB स्टोरेज) की कीमत 36,999 रुपये तय की गई है, जबकि इसका बड़ा वेरिएंट (256GB स्टोरेज) 39,999 रुपये में मिलेगा। इसके अलावा जो लोग इसे एक मिनी लैपटॉप की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे इसे कंपनी के विशेष स्नैप-ऑन कीबोर्ड के साथ बंडल ऑफर में 45,999 रुपये में खरीद सकते हैं, जबकि अलग से यह कीबोर्ड 5,999 रुपये का पड़ेगा। लॉन्चिंग ऑफर के तहत आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक के कार्ड का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों को 4,000 रुपये की तुरंत छूट भी दी जा रही है। इच्छुक ग्राहक आगामी 4 जुलाई से इसे कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और फ्लिपकार्ट के जरिए खरीद सकेंगे, जहां यह बेहद आकर्षक 'पैनटोन टाइटन' रंग में उपलब्ध होगा।
बेजोड़ परफॉर्मेंस और भविष्य के लिए तैयार सॉफ्टवेयर
सॉफ्टवेयर और परफॉर्मेंस के मामले में मोटोरोला ने इस डिवाइस में बेहद आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह नया टैबलेट लेटेस्ट एंड्रायड 16 पर आधारित 'हेलो यूआई' (Hello UI) पर काम करता है। कंपनी ने ग्राहकों के लंबे भरोसे के लिए वादा किया है कि इस टैबलेट को भविष्य में एंड्रायड 18 तक ऑपरेटिंग सिस्टम अपग्रेड और पूरे चार साल तक सुरक्षा अपडेट मिलते रहेंगे, जिससे यह लंबे समय तक पुराना नहीं होगा। इसके अंदर क्वालकॉम का बेहद शक्तिशाली ऑक्टा-कोर स्नैपड्रैगन 8s जेन 4 चिपसेट दिया गया है, जो एक खास एनपीयू (NPU) के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कामों और भारी-भरकम ऐप्स को पलक झपकते ही प्रोसेस कर देता है।
सिनेमा जैसा डिस्प्ले और लंबी चलने वाली सुपर बैटरी
इस टैबलेट की सबसे बड़ी यूएसपी इसका शानदार 13-इंच का एलसीडी टचस्क्रीन डिस्प्ले है, जो 3,504x2,190 पिक्सल रेजोल्यूशन के साथ आता है। बेहतर विजुअल और स्मूद स्क्रॉलिंग के लिए इसमें 144 हर्ट्ज का रिफ्रेश रेट, 800 निट्स की पीक ब्राइटनेस और डॉल्बी विजन का सपोर्ट दिया गया है, जो धूप में भी स्क्रीन को साफ दिखाता है। साथ ही यह स्क्रीन 'मोटो पेन प्रो' को भी सपोर्ट करती है। ऑनलाइन मीटिंग्स और फोटोग्राफी के लिए इसमें 13 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा और आगे की तरफ 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा मिलता है। इस पूरे सिस्टम को लंबे समय तक चालू रखने के लिए कंपनी ने इसमें 10,200 एमएएच (mAh) की विशाल बैटरी दी है, जो 45 वॉट की फास्ट वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए वाई-फाई 7, ब्लूटूथ 6.0 और टाइप-सी पोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं, जबकि महज 6.20 एमएम पतली बॉडी के साथ इसका वजन करीब 589 ग्राम है।
बाजार की अनिश्चितता में कहां लगाएं पैसा? जानिए सुरक्षित रिटर्न वाले विकल्प
29 Jun, 2026 04:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। नौकरी से रिटायर होने के बाद अपनी जीवनभर की पूंजी को सही जगह निवेश करना किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा फैसला होता है। दिल्ली के रहने वाले रमेश मित्तल ने भी पिछले साल सेवानिवृत्त होने पर अपने फंड का एक बड़ा हिस्सा ऊंचे रिटर्न की चाह में स्मॉलकैप और मिडकैप म्यूचुअल फंड में लगा दिया था। शुरुआत में तो पोर्टफोलियो चमकता हुआ दिखा और अच्छा मुनाफा भी हुआ, लेकिन हाल ही में शेयर बाजार में आई भारी उथल-पुथल ने उस पूरे मुनाफे को पल भर में साफ कर दिया। इस गिरावट से रमेश मित्तल इतने परेशान हो गए कि उनकी रातों की नींद उड़ गई। अब वे बेहद अफसोस के साथ सोच रहे हैं कि काश उन्होंने यह गाढ़ी कमाई पीपीएफ (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड) या सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी सरकारी छोटी बचत योजनाओं में लगाई होती, जहां लॉक-इन पीरियड की बंदिश भले ही होती है, लेकिन मूलधन डूबने का खतरा पूरी तरह शून्य रहता है।
घबराहट के दौर में लघु बचत योजनाएं बनती हैं अचूक कवच
जब भी वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या आर्थिक सुस्ती के चलते शेयर बाजार औंधे मुंह गिरने लगता है, तब निवेशकों का सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागना स्वाभाविक है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) और पीपीएफ जैसी योजनाएं निवेशकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होती हैं। बहुत से लोग इन योजनाओं के लंबे लॉक-इन पीरियड को एक कमी के तौर पर देखते हैं, लेकिन असल में यह एक व्यावहारिक अनुशासन की तरह काम करता है। यह कड़ा नियम आपको बाजार की तात्कालिक गिरावट और हलचल को देखकर घबराहट में कोई भी गलत या जल्दबाजी भरा फैसला लेने से मजबूती से रोकता है।
सरकारी योजनाओं के वो मजबूत स्तंभ जो देते हैं मानसिक शांति
इन छोटी बचत योजनाओं की लोकप्रियता के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण छिपे हैं। पहला कारण है संपूर्ण संप्रभु सुरक्षा, क्योंकि म्यूचुअल फंड में आपका पैसा फंड मैनेजर की सूझबूझ और बाजार की चाल पर निर्भर करता है, जबकि सरकारी योजनाओं में आपकी पूंजी और तय रिटर्न दोनों की शत-प्रतिशत गारंटी सीधे भारत सरकार की होती है। दूसरा बड़ा फायदा है बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह दूरी, जिससे इन योजनाओं पर शेयर बाजार की मंदी का कोई असर नहीं पड़ता और हर तिमाही इनकी ब्याज दरों की समीक्षा की जाती है। तीसरा स्तंभ इसका लॉक-इन पीरियड है जो निवेशकों को लंबे समय के लक्ष्यों से भटकने नहीं देता। यह योजनाएं उन लोगों के लिए बिल्कुल मुफीद हैं जो अपने मूलधन पर जरा सा भी जोखिम नहीं चाहते, जो रिटायरमेंट के बाद निश्चित आय की तलाश में हैं, या जो अपनी बेटियों की पढ़ाई और शादी के लिए एक सुरक्षित कोष तैयार करना चाहते हैं। इसके अलावा पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 80सी का लाभ लेने वालों के लिए भी यह बेहतरीन जरिया है।
निवेश के अलग-अलग विकल्पों का गणित और बाजार का सच
यदि हम बाजार के विभिन्न फिक्स्ड-इनकम विकल्पों की तुलना करें, तो सरकारी लघु बचत योजनाएं फिलहाल 7.1% से 8.2% तक का सुरक्षित रिटर्न दे रही हैं और इनमें पीपीएफ व सुकन्या समृद्धि जैसी योजनाएं पूरी तरह से टैक्स-फ्री (EEE) श्रेणी में आती हैं। इसके मुकाबले बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में 6.5% से 7.7% का रिटर्न मिलता है जो पूरी तरह टैक्स योग्य होता है और केवल 5 लाख रुपये तक ही बीमित रहता है। वहीं डेट म्यूचुअल फंड पूरी तरह से बाजार के जोखिमों के अधीन होते हैं।
हालांकि वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक डर के कारण अपने पूरे पैसे को 15 साल के लिए पूरी तरह ब्लॉक कर देना भी समझदारी नहीं है। यदि देश में महंगाई दर 6 से 7 फीसदी के आसपास है, तो टैक्स के बाद इन सरकारी योजनाओं का वास्तविक रिटर्न बेहद मामूली रह जाता है, जिससे आपके पैसे की क्रय शक्ति यानी सामान खरीदने की क्षमता नहीं बढ़ पाती। इसके उलट, इतिहास गवाह है कि 10 से 15 साल की लंबी अवधि में इक्विटी मार्केट या फ्लेक्सीकैप फंड्स ने महंगाई को पछाड़ते हुए औसतन 12 से 14 फीसदी तक का कंपाउंडेड रिटर्न दिया है।
बेहतर भविष्य के लिए अपनाएं संतुलित बास्केट रणनीति
इस पूरी स्थिति को देखते हुए समझदारी इसी में है कि निवेशक न तो अति-उत्साह में आकर अपना सारा पैसा सीधे शेयर बाजार या स्मॉलकैप में झोंके और न ही अत्यधिक डर के कारण उसे पूरी तरह पारंपरिक योजनाओं में बंद करें। एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए सबसे सटीक रास्ता यह है कि आप एक संतुलित बास्केट रणनीति तैयार करें। इसके तहत अपनी कुल पूंजी का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा पूर्ण सुरक्षा के लिए सरकारी लघु बचत योजनाओं में रखें, और बाकी बचे 40 प्रतिशत हिस्से को एक अनुशासित एसआईपी (SIP) के माध्यम से अच्छे म्यूचुअल फंड में निवेश करें, ताकि लंबे समय में आपका पैसा महंगाई को मात देकर एक बड़ा और मजबूत फंड बन सके।
टाटा स्टॉक को लेकर ब्रोकरेज का बड़ा संकेत, दो शर्तें पूरी हुईं तो बदल सकती है रेटिंग
29 Jun, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में आज कमजोरी के रुख के बीच टाटा कैपिटल के शेयरों में गिरावट का दौर देखा गया। दिग्गज घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने टाटा कैपिटल के शेयरों पर अपनी कवरेज की शुरुआत की है। ब्रोकरेज हाउस ने इस शेयर को 'न्यूट्रल' रेटिंग देते हुए इसके लिए 364 रुपये का टारगेट प्राइस (लक्ष्य मूल्य) तय किया है। न्यूट्रल रेटिंग और बाजार के सुस्त सेंटिमेंट के कारण आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर टाटा कैपिटल का शेयर इंट्रा-डे कारोबार के दौरान करीब 2.86 प्रतिशत की गोताखोरी करते हुए 352.95 रुपये के निचले स्तर तक चला गया था। हालांकि, कारोबार के अंत में यह थोड़ी रिकवरी दिखाते हुए लगभग 1.67 फीसदी की गिरावट के साथ 357.30 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। उल्लेखनीय है कि टाटा कैपिटल के शेयरों की लिस्टिंग पिछले साल 13 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जब कंपनी ने 15,512 करोड़ रुपये के विशाल आईपीओ के तहत 326 रुपये के भाव पर अपने शेयर जारी किए थे।
शानदार फ्रेंचाइजी और मजबूत पैरेंटेज का मिलेगा लाभ, लेकिन वैल्यूएशन में सब कुछ शामिल
मोतीलाल ओसवाल ने अपनी शोध रिपोर्ट में टाटा कैपिटल की साख की काफी सराहना की है। ब्रोकरेज का मानना है कि टाटा ग्रुप के मजबूत पैरेंटेज (मूल कंपनी का सहारा) और एएए (AAA) क्रेडिट रेटिंग के कारण कंपनी की लायबिलिटी फ्रेंचाइजी बेहद मजबूत है, जिससे इसे बाजार से बेहद सही और किफायती दरों पर फंडिंग मिल जाती है। कंपनी का लोन पोर्टफोलियो भी काफी संतुलित है, जिसमें 98 प्रतिशत खातों का टिकट साइज 1 करोड़ रुपये से कम है और किसी भी एक प्रोडक्ट की कुल लोन बुक में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक नहीं है। हालांकि, ब्रोकरेज ने न्यूट्रल रेटिंग देने के पीछे तर्क दिया है कि कंपनी की ये सभी अच्छी बातें और भावी ग्रोथ की संभावनाएं वर्तमान शेयर की कीमतों (वैल्यूएशन) में पहले से ही शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भविष्य में कंपनी के रिटर्न ऑन एसेट (RoA) और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) में लगातार टिकाऊ सुधार होता है और कंपनी ज्यादा मार्जिन वाले रिटेल लेंडिंग बिजनेस का विस्तार करती है, तो आगे चलकर इसकी रेटिंग को अपग्रेड किया जा सकता है।
डिजिटलीकरण से लागत पर नियंत्रण, मार्जिन और क्रेडिट कॉस्ट में सुधार की उम्मीद
कंपनी के वित्तीय अनुमानों को लेकर ब्रोकरेज फर्म काफी सकारात्मक नजर आ रही है। वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच टाटा कैपिटल का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना 29 फीसदी की शानदार रफ्तार (CAGR) से बढ़ा है और उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 से 2028 के दौरान भी यह 23 प्रतिशत की मजबूत गति से आगे बढ़ता रहेगा। जैसे-जैसे कंपनी रिटेल और अनसिक्योर्ड लेंडिंग की तरफ कदम बढ़ाएगी, इसके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में क्रमिक सुधार देखने को मिलेगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि कंपनी का एनआईएम वित्त वर्ष 2026 के 5.2 प्रतिशत से सुधरकर वित्त वर्ष 2027 में 5.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028 तक 5.5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच सकता है। इसके अलावा, कंपनी ने नई शाखाएं खोलने और डिजिटल तकनीकों में निवेश के जरिए अपनी परिचालन लागत पर बेहतरीन नियंत्रण स्थापित किया है, जिससे आने वाले समय में कार्यक्षमता और अधिक मजबूत होगी।
टाटा मोटर्स फाइनेंस के मर्जर का असर और भविष्य के संभावित जोखिम
टाटा कैपिटल की भविष्य की राह में कुछ चुनौतियां और जोखिम भी शामिल हैं, जिन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी। बाजार में बढ़ते कड़े कॉम्पिटिशन के कारण कंपनी के लोन मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही, अनसिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो में अगर उम्मीद से ज्यादा डिफॉल्ट होते हैं, तो कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट बढ़ सकती है। गौर करने वाली बात यह है कि वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट 1 फीसदी से कम थी, लेकिन टाटा मोटर्स फाइनेंस लिमिटेड के साथ हुए मर्जर के बाद इसमें थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी क्योंकि कमर्शियल वाहन फाइनेंस बिजनेस और अनसिक्योर्ड पोर्टफोलियो में कुछ दबाव देखा गया था। हालांकि, मार्च तिमाही में मोटर्स फाइनेंस सेगमेंट दोबारा मुनाफे में लौट आया है और इसके अनसिक्योर्ड सेगमेंट की एसेट क्वालिटी में भी तेजी से रिकवरी हो रही है। मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि बेहतर रिस्क मैनेजमेंट के चलते वित्त वर्ष 2027 और 2028 में कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट और कम होकर 1.1 प्रतिशत के आरामदायक स्तर पर आ जाएगी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव! प्रल्हाद जोशी ने संभाला कार्यभार
'न कर्फ्यू-न दंगा, सब चंगा', योगी के बयान से मैनपुरी की सियासत गरमाई
