व्यापार
निवेशकों के लिए बड़ा मौका, ETF के जरिए विदेशी बाजारों में एंट्री
27 Apr, 2026 06:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
निवेश की नई 'मल्टी-कुजीन थाली' बना ETF: सोने-चांदी के साथ सेक्टोरल फंड्स में भी भारी उछाल
नई दिल्ली: झांसी के रहने वाले अरविंद जैसे कई निवेशक इन दिनों असमंजस में हैं। पिछले एक साल में सोने ने 56% और चांदी ने 155% का बंपर रिटर्न दिया है, जिसे देख कई लोगों को लगता है कि उन्होंने निवेश का एक बड़ा मौका हाथ से गंवा दिया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अवसर कभी खत्म नहीं होते। आज के दौर में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) निवेश का एक ऐसा विकल्प बनकर उभरा है, जहां बैंकिंग और आईटी से लेकर अमेरिकी बाजार तक हर तरह का 'जायका' मौजूद है।
यही कारण है कि वित्त वर्ष 2025-26 में पैसिव निवेश के प्रति भारतीयों का रुझान जबरदस्त बढ़ा है और ईटीएफ में निवेश पिछले साल के मुकाबले 94% तक उछल गया है।
सोना और चांदी: पिछले साल के 'सुपरस्टार'
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निवेशकों ने कीमती धातुओं पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया।
गोल्ड ईटीएफ: निवेश में 350% की भारी वृद्धि।
सिल्वर ईटीएफ: निवेश में 296% का उछाल। इसका मुख्य कारण इन धातुओं द्वारा दिया गया शानदार रिटर्न रहा। हालांकि, केवल कमोडिटी ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य ईटीएफ ने भी पिछले 3 साल में 250% तक का मुनाफा कमा कर दिया है।
ETF क्यों बन रहा है पहली पसंद?
इसके लोकप्रिय होने के तीन प्रमुख कारण हैं:
सस्ता विकल्प: फंड मैनेजर को सिर्फ इंडेक्स फॉलो करना होता है, इसलिए इसका प्रबंधन खर्च (एक्सपेंस रेशियो) बहुत कम होता है।
पारदर्शिता: यह किसी इंडेक्स (जैसे निफ्टी या सेंसेक्स) की हूबहू नकल करता है, जिससे निवेशक को पता होता है कि उसका पैसा कहां लगा है।
लिक्विडिटी: इसे शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है।
ETF के प्रमुख प्रकार: आपकी जरूरत के अनुसार
इक्विटी (शेयर): निफ्टी 50, सेंसेक्स, मिडकैप या किसी खास सेक्टर (बैंक, आईटी, फार्मा) पर आधारित।
कमोडिटी: भौतिक सोना-चांदी रखने के झंझट के बिना 'गोल्ड बीस' (Gold BeES) या 'सिल्वर बीस' के जरिए निवेश।
डेट (बॉन्ड): सरकारी प्रतिभूतियों या भारत बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों में निवेश।
इंटरनेशनल: भारत में रहकर अमेरिकी बाजार (Nasdaq 100) की बड़ी कंपनियों का हिस्सा बनने का मौका।
निवेश से पहले इन 3 बातों का रखें ध्यान
वॉल्यूम (तरलता): हमेशा उस ईटीएफ को चुनें जिसमें ट्रेडिंग ज्यादा हो, ताकि जरूरत पड़ने पर आप उसे तुरंत बेच सकें।
एक्सपेंस रेशियो: कम खर्च वाला ईटीएफ लंबी अवधि में आपके मुनाफे को बढ़ाता है।
ट्रैकिंग एरर: ईटीएफ और इंडेक्स के रिटर्न में जितना कम अंतर होगा, वह फंड उतना ही बेहतर माना जाता है।
औद्योगिक सेक्टर पर दबाव, ग्रोथ 2% तक सीमित रह सकती है: Union Bank of India
27 Apr, 2026 06:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की नवीनतम शोध रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आई सुस्ती के चलते मार्च महीने के औद्योगिक आंकड़ों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट का अनुमान है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की विकास दर मार्च में घटकर मात्र 2% रह जाएगी।
यह गिरावट इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि फरवरी 2026 में यह दर 5.2% थी और मार्च 2025 में 3.9% रही थी।
औद्योगिक सुस्ती के प्रमुख कारण
औद्योगिक गतिविधियों में इस मंदी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं:
विनिर्माण में गिरावट: मैन्युफैक्चरिंग PMI मार्च में गिरकर 53.9 पर आ गई, जो जून 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई चेन में बाधाओं ने उत्पादन मार्जिन पर बुरा असर डाला है।
बुनियादी ढांचा (Core Sector): आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में मार्च में 0.4% की गिरावट आई है। पिछले 19 महीनों में यह इन क्षेत्रों का सबसे कमजोर प्रदर्शन है।
सेक्टरवार स्थिति: जहां स्टील, सीमेंट और नेचुरल गैस के उत्पादन में सुधार दिखा, वहीं कोयला, कच्चा तेल और बिजली जैसे क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा असर उर्वरक उत्पादन पर पड़ा, जिसमें मासिक आधार पर 25.9% की कमी आई।
आर्थिक संकेतकों की मिली-जुली स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उच्च-आवृत्ति वाले संकेतकों (High-frequency indicators) ने बाजार की मिली-जुली तस्वीर पेश की है:
संकेतक
मार्च का प्रदर्शन
विश्लेषण
GST राजस्व
8.8% वृद्धि
फरवरी (8.1%) के मुकाबले सुधार, जो बेहतर खपत को दर्शाता है।
ई-वे बिल
12.9% वृद्धि
वृद्धि जारी है, लेकिन फरवरी (18.8%) के मुकाबले रफ्तार धीमी हुई है।
वाहन बिक्री
25.3% वृद्धि
टू-व्हीलर और ट्रैक्टरों की मांग मजबूत रही, हालांकि कारों की बिक्री कुछ सुस्त पड़ी।
ईंधन खपत
मिश्रित
पेट्रोल (7.6%) और डीजल (8%) की मांग बढ़ी, लेकिन विमान ईंधन (ATF) की मांग में भारी गिरावट आई।
बिजली और मौसम का प्रभाव
मार्च के शुरुआती दिनों में उम्मीद से अधिक बारिश होने के कारण गर्मी का प्रकोप कम रहा। इसके चलते कूलिंग उपकरणों की जरूरत कम हुई और बिजली की मांग सामान्य स्तर पर बनी रही।
रिपोर्ट में दावा—भारत-ताइवान सहयोग से दोनों देशों को होगा फायदा
25 Apr, 2026 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और ताइवान के बीच विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), उच्च तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में एक सशक्त रणनीतिक साझेदारी की नई संभावनाएं उभर रही हैं। 'ताइवान न्यूज' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के पास मौजूद विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, अत्याधुनिक हार्डवेयर क्षमता और फूड प्रोसेसिंग के अनुभव का लाभ भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए उठा सकता है।
आर्थिक और तकनीकी पूरकता
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि दोनों देशों की आर्थिक शक्तियां एक-दूसरे के लिए पूरक का काम करती हैं:
भारत की ताकत: सॉफ्टवेयर विकास, आईटी सेवाएं और बड़ी संख्या में कुशल श्रमशक्ति।
ताइवान की ताकत: सेमीकंडक्टर, हार्डवेयर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक नेतृत्व।
बाजार का अवसर: भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार ताइवान के लिए चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता को कम करने का एक बेहतरीन विकल्प पेश करता है।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक बदलाव
ताइवान की उन्नत कृषि तकनीक भारतीय खेती की तस्वीर बदल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार:
स्मार्ट फार्मिंग: बेहतर बीज तकनीक और स्मार्ट खेती के जरिए भारतीय किसानों की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
सप्लाई चेन: खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) और कोल्ड चेन मैनेजमेंट में ताइवान का अनुभव भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
बढ़ते द्विपक्षीय संबंध और व्यापारिक पहल
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है:
सक्रिय नेतृत्व: ताइवान के प्रतिनिधि मुमिन चेन और भारत के महानिदेशक निनाद देशपांडे लगातार इन रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने में जुटे हैं।
CII का दौरा: हाल ही में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के प्रतिनिधिमंडल ने ताइपे का दौरा किया, जहाँ ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट मोबिलिटी में सहयोग पर गहन चर्चा हुई।
व्यापारिक विस्तार: ताइवान ने मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु में अपने व्यापारिक कार्यालय खोलकर भारत में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है।
भविष्य की राह: मुक्त व्यापार समझौता
2024 में जैविक (ऑर्गेनिक) उत्पादों को लेकर हुए समझौते ने व्यापारिक सहयोग को नई गति दी है। रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि भारत और ताइवान को किसी भी बाहरी दबाव की परवाह किए बिना अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) व्यापार, निवेश और तकनीकी आदान-प्रदान को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।
इस साझेदारी से न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में भी उभरेगा।
डिजिटल युग में निवेश का ट्रेंड बदला, नियामकों को रहना होगा सतर्क
25 Apr, 2026 03:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे उपस्थित रहे।
सेबी की विश्वसनीयता और विकास की यात्रा
चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि सेबी की असली ताकत उसकी विश्वसनीयता है। उन्होंने बाजार के क्रमिक विकास को रेखांकित करते हुए कहा:
ऐतिहासिक बदलाव: 12 अप्रैल 1988 को अपनी स्थापना के बाद से सेबी ने भारतीय बाजारों को पारदर्शी और आधुनिक बनाया है। स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग, डीमैट व्यवस्था और रोलिंग सेटलमेंट जैसे सुधारों ने इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया।
मजबूत आंकड़े: वर्तमान में भारत में 5,900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां हैं और निवेशकों की संख्या 14 करोड़ को पार कर गई है। पिछले दशक में बाजार पूंजीकरण में 15% और म्यूचुअल फंड क्षेत्र में 20% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
पूंजी निर्माण: प्राथमिक बाजार अब हर साल लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने का सशक्त माध्यम बन चुका है।
साइबर सुरक्षा: राष्ट्रीय हित का विषय
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तकनीकी बदलावों के बीच साइबर सुरक्षा को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने आगाह किया कि:
गंभीर खतरा: स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी या बड़े ब्रोकर्स पर किसी भी प्रकार का साइबर हमला निवेशकों के भरोसे को खत्म कर सकता है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचा सकता है।
AI का उपयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब साइबर हमलों को अधिक तीव्र और स्वचालित बना रही है, जिससे निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र को भी उतनी ही तेजी से विकसित करना होगा।
नया फ्रेमवर्क: उन्होंने अप्रैल 2025 से लागू होने वाले साइबर सिक्योरिटी और साइबर रेजिलिएंस फ्रेमवर्क की सराहना की और इसे एक सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
भविष्य की प्राथमिकताएं: नवाचार और सुरक्षा
चेयरमैन पांडे ने कहा कि अब बाजार में डिजिटल पीढ़ी का प्रवेश हो रहा है, जो तकनीक की गहरी समझ रखती है। सेबी की आगामी रणनीतियों में निम्नलिखित बिंदु प्रमुख रहेंगे:
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): नियमों को और अधिक सरल बनाना।
आधुनिक तकनीक: डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फॉरेंसिक और एआई-आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए निगरानी तंत्र को सख्त करना।
गवर्नेंस: कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार और ई-ऑफिस सिस्टम को बढ़ावा देना।
टेक्सटाइल सेक्टर पर दबाव, निर्यात घटने से उद्योग चिंतित
25 Apr, 2026 03:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।भारत के टेक्सटाइल और गारमेंट (वस्त्र एवं परिधान) निर्यात के लिए वित्त वर्ष 2025-26 चुनौतियों भरा रहा है। आर्थिक थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र के कुल निर्यात में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह आंकड़ा 35.8 अरब डॉलर पर सिमट गया है। भारतीय मुद्रा (रुपये) के मूल्य में भी निर्यात में 2.1 प्रतिशत की कमी आई है।
प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट का रुझान
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि टेक्सटाइल की लगभग सभी बड़ी श्रेणियों को नुकसान उठाना पड़ा है:
सूती वस्त्र (Cotton Textiles): इसमें 3.9 प्रतिशत की कमी आई।
तैयार कपड़े (Ready-made Garments): इस क्षेत्र में 1.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
कालीन निर्यात (Carpet Export): इसमें सबसे अधिक 5.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
हस्तशिल्प (Handicraft): केवल इस सेक्टर में मामूली सुधार दिखा, जहाँ 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
मुद्रा के उतार-चढ़ाव और आर्थिक चिंता
GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण आर्थिक चिंता की ओर इशारा किया है। उन्होंने बताया कि डॉलर और रुपये के बीच का अंतर भारतीय व्यापार की कमजोर स्थिति को दर्शाता है।
भ्रामक वृद्धि: कई क्षेत्रों में रुपये के हिसाब से निर्यात बढ़ता दिख रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमाई कम हो रही है।
उदाहरण: मैन-मेड टेक्सटाइल का निर्यात रुपये में 3.6% बढ़ा, लेकिन डॉलर में यह 0.8% घट गया। इसी तरह, गारमेंट निर्यात रुपये में 2.9% बढ़ा, जबकि डॉलर में इसमें 1.4% की गिरावट आई।
विफलता के कारण और नीतिगत सवाल
श्रीवास्तव के अनुसार, निर्यात में दिखने वाली छद्म बढ़त का कारण प्रतिस्पर्धा में सुधार नहीं, बल्कि रुपये का कमजोर होना है। वास्तविकता यह है कि भारत वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ खो रहा है और श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-intensive sectors) में पिछड़ रहा है।
सरकार के समक्ष चुनौतियां:
योजनाओं का प्रभाव: रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि PLI योजना, लॉजिस्टिक्स में सुधार और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' जैसे सरकारी प्रयासों के बावजूद निर्यात में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं हो रही है?
सुधार की मांग: GTRI ने सरकार से उन बाधाओं की तत्काल पहचान करने का आग्रह किया है जो कपड़ा और परिधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निर्यात क्षमता को रोक रही हैं।
खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादों में जल्द सुधार की उम्मीद, रिपोर्ट में दावा
25 Apr, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। गोल्डमैन सैक्स की हालिया शोध रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आवाजाही फिर से सुरक्षित रूप से शुरू हो जाती है, तो खाड़ी देशों के कच्चे तेल उत्पादन में अगले कुछ महीनों के भीतर बड़ी रिकवरी देखी जा सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार रहता है, तो उत्पादन को युद्ध से पहले वाली स्थिति में लौटने में लंबा समय लग सकता है।
इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
उत्पादन में भारी गिरावट और बहाली की संभावना
मौजूदा स्थिति: संघर्ष के चलते खाड़ी देशों का तेल उत्पादन लगभग 57 प्रतिशत (14.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) तक गिर गया है।
बहाली की शर्त: यदि तेल के बुनियादी ढांचे पर नए हमले रुक जाते हैं और जलमार्ग खुल जाता है, तो उत्पादन तेजी से पटरी पर लौट सकता है।
चुनौतियां: बहाली की गति पूरी तरह से पाइपलाइन की क्षमता, खाली टैंकरों की उपलब्धता और तेल क्षेत्रों में होने वाले मरम्मत कार्यों पर निर्भर करेगी।
टैंकरों की कमी और अतिरिक्त क्षमता
रिपोर्ट के अनुसार, तनाव शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में खाली टैंकरों की क्षमता 50 प्रतिशत घटकर महज 130 मिलियन बैरल रह गई है।
सऊदी और यूएई की भूमिका: सऊदी अरामको और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास वर्तमान में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है। बाजार में स्थिरता लाने के लिए इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग किया जा सकता है।
रिकवरी का अनुमान: बाहरी विशेषज्ञों का मानना है कि जलमार्ग दोबारा खुलने के:
3 महीने बाद: लगभग 70 प्रतिशत उत्पादन बहाल हो सकता है।
6 महीने बाद: करीब 88 प्रतिशत तक उत्पादन सामान्य हो सकता है।
लंबी अवधि का जोखिम
गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूर्ण बहाली की प्रक्रिया कई तिमाहियों तक खिंच सकती है। बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और रसद (Logistics) की कमी इस पूरी प्रक्रिया को जटिल बना सकती है।
RBI एक्शन के बाद Paytm का बयान, कहा—बिजनेस पर नहीं पड़ेगा असर
25 Apr, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेटीएम का बड़ा बयान: पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस रद्द होने से कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं, सेवाएं रहेंगी जारी
नई दिल्ली: फिनटेक दिग्गज पेटीएम (Paytm) ने स्पष्ट किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) का लाइसेंस रद्द किए जाने का उसके मुख्य व्यवसाय या वित्तीय स्थिति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। कंपनी ने रेगुलेटरी फाइलिंग के जरिए निवेशकों और ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि उसका बैंक के साथ कोई महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौता या वित्तीय जोखिम नहीं जुड़ा है।
आरबीआई की कार्रवाई और पेटीएम की सफाई
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा का हवाला देते हुए पीपीबीएल का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। इस पर पेटीएम ने निम्नलिखित स्पष्टीकरण दिए हैं:
स्वतंत्र संचालन: पेटीएम के अनुसार, पीपीबीएल एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करता है। इसके प्रबंधन या बोर्ड के फैसलों में पेटीएम का कोई हस्तक्षेप नहीं है।
वित्तीय जोखिम शून्य: कंपनी ने बताया कि 1 मार्च 2024 को ही यह साफ कर दिया गया था कि पीपीबीएल में उनका कोई निवेश जोखिम (Exposure) नहीं है।
इम्पेयरमेंट (वैल्यू कम करना): पेटीएम ने 31 मार्च 2024 को ही बैंक में अपने निवेश के मूल्य को राइट-ऑफ (Impairment) कर दिया था, इसलिए अब कोई नया वित्तीय घाटा होने की आशंका नहीं है।
निर्बाध चलती रहेंगी सभी सेवाएं
पेटीएम ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि एप से जुड़ी उनकी पसंदीदा सेवाएं पहले की तरह बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी। इनमें शामिल हैं:
पेटीएम यूपीआई (UPI) और ऐप सेवाएं
पेटीएम क्यूआर (QR) कोड और साउंडबॉक्स
कार्ड मशीनें और पेमेंट गेटवे
पेटीएम मनी और गोल्ड
मुनाफे में पेटीएम: वित्त वर्ष 2026 के शानदार आंकड़े
व्यावसायिक मोर्चे पर पेटीएम का प्रदर्शन लगातार मजबूत बना हुआ है। कंपनी के हालिया वित्तीय परिणाम इसके सशक्त बिजनेस मॉडल की तस्दीक करते हैं:
लगातार मुनाफा: वित्त वर्ष 2026 में कंपनी लगातार तीन तिमाहियों से लाभ में रही है।
शुद्ध लाभ: कंपनी ने 559 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। एकमुश्त खर्चों को हटाकर भी यह लाभ 369 करोड़ रुपये रहता है।
EBITDA में सुधार: दिसंबर तिमाही में कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) सालाना आधार पर 433 करोड़ रुपये बढ़कर 225 करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
UPI मार्केट में दबदबा
पेटीएम का यूपीआई कारोबार उद्योग की औसत दर से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। पिछले नौ महीनों में कंपनी के उपभोक्ता यूपीआई के सकल बाजार मूल्य (GMV) में 35% की वृद्धि हुई है, जबकि पूरे उद्योग की विकास दर महज 16% रही।
बेहतर नतीजों और मजबूत मार्जिन प्रोफाइल को देखते हुए कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेटीएम का राजस्व मॉडल अब पहले से कहीं अधिक स्थिर और लाभदायक है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता तय, व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
25 Apr, 2026 06:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक संबंधों में नया सवेरा: 27 अप्रैल को होगा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर
नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले की अगवानी की। यह दौरा दोनों देशों के बीच आगामी 27 अप्रैल को होने वाले ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाक़ात की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि टॉड मैक्ले का स्वागत करना सुखद है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता दोनों देशों के साझा मूल्यों और आर्थिक प्रगति के एक समान दृष्टिकोण को मजबूती देगा।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री का विजन: निर्यातकों को मिलेगी नई उड़ान
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस समझौते को अपने देश के विकास के लिए 'मील का पत्थर' बताया है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि सोमवार को होने वाले इस समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों के लिए भारत जैसे विशाल बाजार के द्वार खुल जाएंगे।
मरीन जेट सिस्टम: विशेष रूप से नावों के लिए तकनीक बनाने वाली न्यूजीलैंड की कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
टैरिफ में कटौती: अभी तक भारतीय बाजार में सामान भेजने पर लगने वाले भारी कर (टैरिफ) इस समझौते के बाद धीरे-धीरे कम होंगे, जिससे न्यूजीलैंड का सामान भारत में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
रोजगार और आय: प्रधानमंत्री लक्सन के अनुसार, एफटीए से उनके देश में व्यापार बढ़ने के साथ-साथ बेहतर वेतन वाली नौकरियों के नए अवसर भी पैदा होंगे।
समझौते की मुख्य बातें: क्या सस्ता होगा और क्या रहेगा सुरक्षित?
27 अप्रैल को नई दिल्ली में होने वाले इस हस्ताक्षर समारोह के बाद व्यापार की सूरत बदल जाएगी:
भारत को लाभ: भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100% उत्पादों पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) की सुविधा मिलेगी।
न्यूजीलैंड के लिए छूट: भारत अपने यहाँ न्यूजीलैंड से आने वाले 95% उत्पादों पर शुल्क कम या खत्म करेगा। इसमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद शामिल हैं।
भारतीय किसानों की सुरक्षा: भारत ने अपने घरेलू कृषि क्षेत्र के हितों का ध्यान रखते हुए दूध, पनीर, दही, प्याज, चीनी, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी है।
भविष्य का लक्ष्य: अरबों डॉलर का निवेश और व्यापार
दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी का खाका बेहद महत्वाकांक्षी है:
लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
निवेश: आगामी 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना जताई जा रही है।
वर्तमान स्थिति: वर्ष 2024-25 में दोनों देशों का आपसी व्यापार करीब 1.3 अरब डॉलर रहा है, जिसमें आईटी और व्यावसायिक सेवाओं का बड़ा योगदान है।
MeitY बैठक में बड़ा फैसला: AI जोखिम से निपटने में SBI करेगा अगुवाई
24 Apr, 2026 12:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सीतारम। णकेंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गजों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उत्पन्न होने वाले खतरों पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक के उपरांत उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय बैंकों ने अब तक बढ़ते डिजिटलीकरण और साइबर हमलों का मजबूती से सामना किया है, परंतु भविष्य की जटिल तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए अब सुरक्षा चक्र को और अधिक सुदृढ़ तथा व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
तकनीकी सुरक्षा के लिए नई रणनीति
वित्त मंत्री ने कहा कि यद्यपि हमारा बैंकिंग ढांचा सुरक्षित और सक्षम रहा है, लेकिन अब केवल पारंपरिक सुरक्षा उपायों के भरोसे नहीं रहा जा सकता। उन्होंने 'मिथोस' नामक एक उभरती हुई नई चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बारे में वर्तमान में सीमित जानकारी उपलब्ध है, जिसे सरकार अत्यंत गंभीरता से ले रही है।
वैश्विक सहयोग और मंत्रालयों की भूमिका
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस दिशा में निरंतर सक्रिय है। मंत्रालय विभिन्न तकनीकी कंपनियों, वैश्विक नियामकों और अन्य देशों की सरकारों के साथ तालमेल बिठा रहा है ताकि इस नई चुनौती के स्वरूप को समझा जा सके और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।
समन्वित प्रयास और एसबीआई का नेतृत्व
बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए वित्त मंत्री ने सभी बैंकों को एकजुट होकर काम करने का सुझाव दिया है:
नेतृत्व: इस पूरे मिशन और आपसी समन्वय का नेतृत्व एसबीआई (SBI) के चेयरमैन करेंगे।
कार्ययोजना: आगामी सप्ताहों में बैंकों के बीच गहन विचार-विमर्श और बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा ताकि एक साझा रक्षा तंत्र विकसित किया जा सके।
एआई से ही होगा एआई का मुकाबला
निर्मला सीतारमण ने एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नए जोखिम पैदा हो रहे हैं, तो इसका समाधान भी एआई के पास ही है। सरकार और बैंकिंग संस्थान मिलकर ऐसी तकनीक विकसित करेंगे जो सुरक्षा प्रणालियों को अभेद्य बनाएगी और डिजिटल बैंकिंग के प्रति आम नागरिकों के भरोसे को और मजबूत करेगी।
ग्लोबल तनाव के बावजूद सोने-चांदी में गिरावट, जानें ताजा भाव
24 Apr, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में नरमी के साथ कारोबार शुरू हुआ। वैश्विक और घरेलू स्तर पर बिकवाली बढ़ने के कारण दोनों कीमती धातुओं के भाव में करीब आधा प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सोने की कीमतों में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून 2026 की डिलीवरी वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट पिछले बंद भाव की तुलना में गिरावट के साथ 1,51,167 रुपये पर खुला। सुबह के सत्र में इसमें 0.47 प्रतिशत (करीब 718 रुपये) की कमी देखी गई, जिससे भाव 1,51,043 रुपये के स्तर पर आ गया। बाजार के दौरान सोने ने 1,51,039 रुपये के निचले स्तर को भी छुआ।
चांदी के भाव भी लुढ़के
चांदी में भी कमजोरी का रुख रहा। 5 मई 2026 की डिलीवरी वाला सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट 2,39,200 रुपये के भाव पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव 2,41,513 रुपये था। शुरुआती कारोबार में चांदी 0.35 प्रतिशत फिसलकर 2,40,671 रुपये पर कारोबार करती नजर आई।
वैश्विक बाजार का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव का असर साफ दिखा:
कॉमेक्स (Comex): सोना 0.83 प्रतिशत गिरकर 4,684 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
गिरावट के मुख्य कारण
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने सोने की चमक कम की है।
ब्याज दरों की अनिश्चितता: अमेरिका के सकारात्मक आर्थिक आंकड़ों (PMI) के कारण ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं, जिससे निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं।
कच्चा तेल और महंगाई: कच्चे तेल के भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जो निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रही है।
भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता भी बाजार के उतार-चढ़ाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डिजिटल के साथ कैश भी अहम, SBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
24 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एसबीआई रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में नकद और डिजिटल भुगतान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में उभर रहे हैं। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जहाँ छोटे खर्चों और दैनिक खरीदारी के लिए लोग यूपीआई (UPI) पर भरोसा कर रहे हैं, वहीं आपातकालीन स्थितियों और बचत के लिए आज भी नकदी को प्राथमिकता दी जा रही है।
ई-रुपया (CBDC): चुनौतियां और संभावनाएं
डिजिटल मुद्रा यानी ई-रुपये को लेकर रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल इसका चलन काफी सीमित है। मार्च 2025 तक बाजार में केवल 1,016 करोड़ रुपये मूल्य का ई-रुपया प्रचलन में था। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लोकप्रिय बनाने के लिए लोगों को जागरूक करने और फिनटेक कंपनियों के साथ मिलकर इसे और अधिक सुलभ बनाने की आवश्यकता है।
प्रति व्यक्ति आय और नकदी का गणित
अध्ययन में आय और नकदी के उपयोग के बीच एक दिलचस्प संबंध साझा किया गया है:
जीडीपी में वृद्धि: वित्त वर्ष 2012 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 71,609 रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2026 तक बढ़कर 2,51,393 रुपये हो गई है।
नकदी का उपयोग: इसी अवधि में प्रति व्यक्ति नकदी का चलन 8,762 रुपये से बढ़कर 29,324 रुपये हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, आय और नकदी की वृद्धि दर में जो मामूली अंतर है, वह डिजिटल माध्यम (UPI) की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
एहतियातन नकदी जमा करने की बढ़ती प्रवृत्ति
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है कि लोग अब अपने पास अधिक नकदी जमा रख रहे हैं। वित्त वर्ष 2024 में प्रति व्यक्ति नकदी भंडारण और एटीएम निकासी के बीच का अंतर 1,804 रुपये था, जो 2026 में पांच गुना बढ़कर 9,127 रुपये हो गया है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी अनिश्चित परिस्थितियों के कारण लोग सुरक्षा के लिहाज से अपने पास ज्यादा कैश रखना पसंद कर रहे हैं।
नोटों का प्रचलन: 500 रुपये के नोटों की प्रधानता
भारतीय बाजार में मूल्य के हिसाब से 500 रुपये के नोटों का वर्चस्व बना हुआ है:
दबदबा: मार्च 2025 तक कुल नकदी मूल्य का 86% हिस्सा अकेले 500 रुपये के नोटों का था।
छोटे नोटों पर जोर: इस असंतुलन को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को एटीएम में 100 और 200 रुपये के नोट अधिक संख्या में डालने के निर्देश दिए हैं।
सुधार के संकेत: आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक 100 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 6.2% से बढ़कर 8.2% हो गई है, जो छोटे नोटों की बेहतर उपलब्धता की ओर इशारा करती है।
घरेलू शेयर बाजार में दबाव: सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले
24 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन भारी गिरावट के साथ शुरू हुआ। वैश्विक दबाव और स्थानीय मुद्रा की कमजोरी के चलते शुक्रवार को बाजार खुलते ही लाल निशान पर आ गया। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 330 अंकों की गिरावट के साथ 77,334 के स्तर पर देखा गया, वहीं निफ्टी भी 93.3 अंक फिसलकर 24,079.75 पर पहुंच गया।
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और डॉलर की मजबूती
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ा है। रुपया लगातार पांचवें दिन कमजोर होकर 94.25 के स्तर पर जा पहुंचा। शुक्रवार सुबह डॉलर के मुकाबले रुपये में 24 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अनिश्चितता ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
वैश्विक तनाव और विशेषज्ञों का विश्लेषण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा तेल टैंकर जब्त किए जाने और छोटी नौकाओं के खिलाफ सख्त सैन्य आदेशों के बाद व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा बढ़ गई है। इससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: घरेलू शेयर बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार पूंजी निकाली जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को करीब 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए, जिससे बाजार और स्थानीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ 105.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की यह बढ़ती कीमत भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रही है।
कारोबार के बढ़ते समय के साथ सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का दायरा बढ़ता गया, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। फिलहाल बाजार की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की चाल पर टिकी हुई हैं।
खाद संकट गहराया: सरकार ने 25 लाख टन यूरिया आयात का रिकॉर्ड ऑर्डर दिया
24 Apr, 2026 06:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का असर अब भारत की उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। इसी के चलते सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक ही टेंडर के माध्यम से रिकॉर्ड 25 लाख टन यूरिया आयात करने का निर्णय लिया है। विशेष बात यह है कि इस बार यूरिया की खरीदारी दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमतों पर की जा रही है। यूरिया की यह बड़ी खेप भारत के कुल वार्षिक आयात का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।
कीमतों में भारी उछाल
बाजार सूत्रों के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड ने पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की दर से यूरिया खरीदने पर अपनी सहमति दी है। यदि इसकी तुलना पिछले टेंडर से की जाए, तो उस समय कीमतें प्रति टन 508 से 512 डॉलर के आसपास थीं। मात्र दो महीने के भीतर कीमतों में आया यह भारी उछाल वैश्विक बाजार में उर्वरक की बढ़ती किल्लत और ऊँची मांग को दर्शाता है।
टेंडर और आपूर्ति की स्थिति
प्रस्ताव: कंपनी को कुल 56 लाख टन आपूर्ति के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन अधिकांश बोलियां 1,000 डॉलर से लेकर 1,136 डॉलर प्रति टन तक बेहद ऊँची थीं।
सहमति: आपूर्तिकर्ताओं द्वारा न्यूनतम बोली की बराबरी करने के बाद ही 25 लाख टन के ऑर्डर को अंतिम रूप दिया गया।
डेडलाइन: टेंडर की शर्तों के तहत इस पूरी खेप को 14 जून 2026 तक लोडिंग पोर्ट से रवाना करना अनिवार्य है।
वैश्विक और घरेलू बाजार पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया सुरक्षित करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के लिए आपूर्ति की चुनौती बढ़ सकती है। उत्पादकों का बड़ा हिस्सा भारत की मांग पूरी करने में व्यस्त रहेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें और बढ़ने की आशंका है। साथ ही, महंगे आयात के कारण घरेलू स्तर पर भी यूरिया की लागत बढ़ सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।
AI जोखिम पर अलर्ट: वित्त मंत्री की बैंकों संग बैठक, डेटा सुरक्षा पर जोर
24 Apr, 2026 06:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और खतरों को लेकर बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस उच्चस्तरीय चर्चा में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे नए एआई मॉडल्स सॉफ्टवेयर की खामियों का फायदा उठाकर वित्तीय ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
बैंकिंग सुरक्षा और डेटा संरक्षण पर जोर
वित्त मंत्री ने बैंकों को अपनी आईटी प्रणालियों को और अधिक अभेद्य बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राहकों के डेटा और वित्तीय संसाधनों की सुरक्षा सर्वोपरि है, जिसके लिए बैंकों को सक्रिय और निवारक कदम उठाने चाहिए। हालांकि, उन्होंने अब तक साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने की दिशा में बैंकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के लिए निर्देश
वित्त मंत्री ने 'इंडियन बैंक्स एसोसिएशन' को एक सामूहिक और समन्वित तंत्र विकसित करने की सलाह दी, ताकि साइबर खतरों का तुरंत और प्रभावी मुकाबला किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिए कि:
बैंक अपनी निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए शीर्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और विशेष एजेंसियों की सेवाएं लें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) को दी जाए।
सहयोग और रियल-टाइम सूचना साझाकरण
सीतारमण ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम में खतरों की जानकारी साझा करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान कर उसे पूरे सिस्टम में फैलने से रोका जा सकेगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू, आरबीआई और एनपीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी, तथा विभिन्न अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के एमडी और सीईओ शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि 'मिथोस' जैसे आधुनिक एआई मॉडल आईटी सेवाओं और बैंकिंग सुरक्षा के लिए नए जोखिम पैदा कर सकते हैं, जिसे देखते हुए यह सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
कर्मचारियों के कल्याण पर जोर, अमेजन इंडिया लगाएगी 2800 करोड़
23 Apr, 2026 04:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन इंडिया ने भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़े निवेश का एलान किया है। गुरुवार को कंपनी ने बताया कि वह अपने ऑपरेशंस नेटवर्क को आधुनिक बनाने और वर्कफोर्स के कल्याण के लिए 2,800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करेगी।
अमेजन का महा-निवेश: डिजिटल इंडिया और कर्मचारी सुरक्षा पर जोर
अमेजन इंडिया का यह ताजा निवेश न केवल व्यापार के विस्तार पर केंद्रित है, बल्कि इसके जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), निर्यात को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी काम किया जाएगा।
'प्रोजेक्ट आश्रय' और सामाजिक सुरक्षा
कंपनी अपने 'प्रोजेक्ट आश्रय' के माध्यम से कर्मचारियों और समुदाय के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार कर रही है:
बीमा कवर: कर्मचारियों के लिए मेडिकल और दुर्घटना बीमा की सुविधाओं को पहले से कहीं अधिक बेहतर बनाया जाएगा।
सरकारी योजनाओं से जुड़ाव: कंपनी अपने हजारों कर्मियों और लगभग 2 लाख सामुदायिक सदस्यों को केंद्र व राज्य सरकारों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी।
सुविधा केंद्र: डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य कर्मचारियों के लिए विश्राम और अन्य बुनियादी सुविधाओं (Rest Points) को बढ़ाया जाएगा।
क्विक कॉमर्स और डिलीवरी नेटवर्क का विस्तार
अमेजन अपनी डिलीवरी स्पीड को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को नया रूप दे रही है:
तेज डिलीवरी: कंपनी अपने लॉजिस्टिक्स और 'क्विक कॉमर्स' नेटवर्क को इस तरह डिजाइन कर रही है कि ग्राहकों को कुछ ही मिनटों या घंटों में सामान मिल सके।
माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर: साल 2025 में शुरू हुई 'Amazon Now' सेवा को अब देश के प्रमुख शहरों में 300 से अधिक छोटे केंद्रों तक विस्तार दिया जा चुका है, जिससे तत्काल डिलीवरी सुनिश्चित हो रही है।
पिछले निवेश और भविष्य की राह
यह नया निवेश पिछले साल (2025) किए गए 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की कड़ी को आगे बढ़ाता है।
नेटवर्क की ताकत: पिछले एक साल में कंपनी ने देशभर में 17 नए मुख्य वेयरहाउस (फुलफिलमेंट सेंटर), 6 सॉर्टेशन सेंटर और 75 लास्ट-माइल स्टेशन स्थापित किए हैं।
आर्थिक प्रभाव: अमेजन का मानना है कि इस निरंतर निवेश से भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छोटे व मध्यम उद्योगों (SMBs) को वैश्विक स्तर पर निर्यात करने के नए मौके मिलेंगे।
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