व्यापार
‘सभी देशों को समान अवसर’, पीयूष गोयल ने रखी भारत की बात
27 Mar, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विश्व व्यापार संगठन में सुधार को लेकर भारत ने स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित होनी चाहिए, जिसमें विकासशील देशों के विशेष अधिकारों को केंद्र में रखा जाए। कैमरून में आयोजित डब्ल्यूटीए मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि संगठन के सुधार विकास-केंद्रित होने चाहिए और इनमें भेदभावरहित व सहमति आधारित निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि सभी सदस्य देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि डब्ल्यूटीओ समझौतों में शामिल स्पेशल एंड डिफरेंशियल ट्रीटमेंट (S&DT) प्रावधान, जो विकासशील देशों को विशेष अधिकार देते हैं, उन्हें अधिक स्पष्ट, प्रभावी और व्यवहारिक बनाया जाना चाहिए। कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए गोयल ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा है, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण (पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग), विशेष सुरक्षा तंत्र और कपास से जुड़े लंबित मुद्दों के जल्द समाधान की मांग की। मत्स्य पालन (फिशरीज) के मुद्दे पर भारत ने संतुलित समझौते की वकालत करते हुए कहा कि यह गरीब मछुआरों की आजीविका की रक्षा करे और वर्तमान व भविष्य की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए, साथ ही S&DT प्रावधानों को भी प्रभावी बनाए। गोयल ने डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र को बहाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया, इसे दुर्बल बताते हुए कहा कि इसके कमजोर होने से सदस्य देशों को न्याय पाने में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा, उन्होंने प्लूरिलेटरल (बहुपक्षीय से इतर) समझौतों को WTO ढांचे में शामिल करने के लिए सर्वसम्मति को जरूरी बताया और कहा कि इससे गैर-भागीदार देशों के अधिकारों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट (मोराटोरियम) के मुद्दे पर भी भारत ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि इसके प्रभावों को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने पर पुनर्विचार जरूरी है। उभरती तकनीकों के संदर्भ में गोयल ने कहा कि भारत का मानना है कि इनका उपयोग ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए, ताकि विकास और नवाचार का लाभ सभी तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने अंत में कहा कि WTO को वैश्विक व्यापार व्यवस्था के केंद्र में बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सुधारों के जरिए इसे अधिक प्रभावी, समावेशी और विकासोन्मुख बनाया जाए, ताकि यह गरीब और कमजोर वर्गों के हितों की बेहतर तरीके से रक्षा कर सके।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, निफ्टी 23000 के नीचे
27 Mar, 2026 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। अमेरिका-ईरान संघर्ष बाजारों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 94.24 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1074.97 अंक गिरकर 74,198.48 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 321.25 अंक गिरकर 22,985.20 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 280.95 अंक गिरकर 23,025.50 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एटर्नल, इंटरग्लोब एविएशन और बजाज फिनसर्व प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं।
एशियाई बाजारों में रहा मिला-जुला हाल
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक नीचे कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक सकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि वैश्विक बाजार में जोखिम से बचने का माहौल साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, नैस्डैक कंपोजिट 2.4 प्रतिशत गिरकर करेक्शन ज़ोन में प्रवेश कर गया और अब अपने हालिया उच्चतम स्तर से 10 प्रतिशत से अधिक नीचे कारोबार कर रहा है। डाउ जोन्स 400 से अधिक अंक गिर गया, जबकि एसएंडपी 500 में 1.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के बढ़ने के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट है। यह दर्शाता है कि निवेशकों की चिंताएं अब अल्पकालिक अस्थिरता से परे गहरी होती जा रही हैं और व्यापक मैक्रो जोखिमों को प्रतिबिंबित करना शुरू कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस बदलाव का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान संघर्ष को सुलझाने में सार्थक प्रगति का अभाव है। हरिप्रसाद ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि बीच-बीच में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन फिर से तनाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है, जिससे बाजार भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी हुई हैं, जो 100-107 अमेरिकी डॉलर के दायरे में घूम रही हैं, जिससे एक बार फिर मुद्रास्फीति, इनपुट लागत और व्यापक मैक्रो दबावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। पोनमुडी ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के कारण जारी अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने का माहौल फिर से पैदा कर दिया है, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार रात भर में काफी नीचे बंद हुए।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 106.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 106.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,429.78 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। राम नवमी के कारण गुरुवार को शेयर बाजार बंद रहे। बुधवार को सेंसेक्स 1,205 अंक या 1.63 प्रतिशत बढ़कर 75,273.45 पर बंद हुआ। निफ्टी 394.05 अंक या 1.72 प्रतिशत बढ़कर 23,306.45 पर समाप्त हुआ।
ऊर्जा मुद्दे पर घिरी सरकार, जयराम रमेश का बड़ा बयान
27 Mar, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में तेल और गैस की उपलब्धता को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच कांग्रेस ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बीते एक दशक में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि 2014-15 से 2024-25 के बीच कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता 84% से बढ़कर 90% हो गई है, जबकि एलपीजी आयात 46% से बढ़कर 62% तक पहुंच गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस गैस का वादा किया गया था, वह अब तक सिर्फ वादा ही बनी हुई है।
रमेश ने प्राकृतिक गैस के मुद्दे को लेकर लगाए गंभीर आरोप
रमेश ने प्राकृतिक गैस के मुद्दे पर भी सवाल उठाते हुए 2005 में गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) द्वारा कृष्णा-गोदावरी बेसिन में बड़े गैस भंडार की खोज के दावे का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में 2011 से 2016 के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों में इसे 20,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया, जिसे बाद में ओएनजीसी में विलय कर छिपाया गया।
सरकार क्या कर रही दावा?
इधर, पेट्रोल पंपों और एलपीजी एजेंसियों पर लंबी कतारों की खबरों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए किसी भी तरह की कमी से इनकार किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देश में करीब 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है और एक महीने की एलपीजी सप्लाई सुनिश्चित की गई है। मंत्रालय ने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए कहा कि देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक है और कहीं भी पेट्रोल-डीजल की राशनिंग नहीं हो रही है। सरकारी तेल कंपनियों ने भी सप्लाई सामान्य रहने का दावा किया है। वहीं, विपक्ष ने संसद परिसर में एलपीजी आपूर्ति को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें पश्चिम एशिया के हालात के बीच तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जाएगी।
रिकॉर्ड लो पर रुपया, डॉलर के सामने 94.24 तक लुढ़का
27 Mar, 2026 09:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 28 पैसे गिरकर 94.24 के नए निचले स्तर पर आ गया। यह लगातार तीसरे सत्र में रुपये में गिरावट दर्ज की गई है, जो बुधवार और मंगलवार को भी तेजी से टूटा था। रुपये में यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी और ईरान संकट के कारण हुई है, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई है। बुधवार को पिछले सत्र में रुपया 29 पैसे फिसलकर 94 के स्तर को पार कर 94.05 पर बंद हुआ था।
लगातार तीसरे दिन गिरावट
रुपये में गिरावट का यह सिलसिला मंगलवार से जारी है। मंगलवार को रुपया 23 पैसे कमजोर होकर 93.76 पर बंद हुआ था। बुधवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.94 पर खुला और 93.86 से 94.08 के बीच कारोबार करने के बाद अपने अब तक के सबसे निचले बंद स्तर पर पहुंचा। मध्य पूर्व में जारी तनाव भी रुपये पर दबाव डाल रहा है।
गिरावट के प्रमुख कारण
रुपये की इस लगातार गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी की लगातार निकासी एक बड़ा कारक है। इसके साथ ही, ईरान में जारी संकट और व्यापक मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। इन कारकों के चलते रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
सोना-चांदी के दाम में जोरदार उछाल, जानें ताजा भाव
27 Mar, 2026 09:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया के हालात को लेकर बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने फिर से बुलियन में खरीदारी बढ़ाई। चांदी की कीमत 5380 रुपये बढ़कर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1320 रुपये बढ़कर 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
वैश्विक बाजार में सोने-चांदी का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट थमती नजर आई और दोनों धातुएं हल्की बढ़त के साथ कारोबार करती दिखीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ समझौते की समयसीमा को एक बार फिर आगे बढ़ाने के फैसले से बाजार को अस्थायी राहत मिली है। कॉमेक्स पर सोना 0.33% बढ़कर 4,423 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में इसमें करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं चांदी की कीमत 0.29% बढ़कर 68.13 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।
क्यों थमी गिरावट?
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की कार्रवाई को फिलहाल 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है। इससे निवेशकों की घबराहट कुछ कम हुई है, क्योंकि पिछले एक महीने से जारी संघर्ष ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रखी थी।
फिर भी क्यों दबाव में हैं दाम?
हालांकि, सोना और चांदी पर दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं-
ऊंची ब्याज दरों की आशंका: ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई का खतरा बढ़ा है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रख सकते हैं। इससे बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोना-चांदी की मांग घटती है।
मजबूत डॉलर: डॉलर इंडेक्स करीब 100 के स्तर पर बना हुआ है और संघर्ष शुरू होने के बाद इसमें लगभग 2.3% की बढ़त आई है। मजबूत डॉलर से कमोडिटीज महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग कमजोर पड़ती है।
तुर्की का गोल्ड सेल: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की के केंद्रीय बैंक ने संघर्ष के शुरुआती दो हफ्तों में करीब 60 टन सोना बेचा या स्वैप किया, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव आया।
एक महीने में बड़ा झटका
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक सोना करीब 17% तक गिर चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान सोना पारंपरिक सेफ हेवन की तरह व्यवहार करने के बजाय शेयर बाजार के साथ चलता दिखा और तेल की कीमतों के विपरीत दिशा में रहा।
वैश्विक बाजार में तेल सस्ता, ब्रेंट क्रूड फिसला
27 Mar, 2026 01:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल बाजार में इस सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव के बीच शुक्रवार को कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। दोनों प्रमुख बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई नकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखे। सुबह करीब 9:40 बजे ब्रेंट क्रूड वायदा 2.29 प्रतिशत गिरकर 105.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।
इस हफ्ते के ब्रेंट क्रूड के भाव में हुई पांच प्रतिशत की गिरावट
साप्ताहिक आधार पर भी कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी बनी हुई है। इस हफ्ते अब तक ब्रेंट क्रूड 5 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है। इसी तरह WTI क्रूड में भी करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो फिलहाल 90 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
रुपया गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
कमोडिटी बाजार में गिरावट के साथ ही भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ा। रुपया शुरुआती कारोबार में 28 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 94.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी
इस अनिश्चित माहौल में निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा, जिससे कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिली। 2 अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 1,486 रुपये या 1.07 प्रतिशत चढ़कर 1,40,979 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं 5 मई डिलीवरी वाली चांदी 4,223 रुपये या 1.92 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,24,097 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजारों में यह अस्थिरता पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने की अवधि अप्रैल तक बढ़ाने की बात कही और यह भी कहा कि तेहरान के साथ बातचीत काफी अच्छी चल रही है। हालांकि, ईरान के एक अधिकारी ने अमेरिकी प्रस्ताव को एकतरफा और अनुचित करार दिया है और किसी ठोस वार्ता की पुष्टि भी नहीं की है। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष एक प्रमुख चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि बीच-बीच में तनाव कम होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन फिर से तनाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है, जिससे बाजार भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बने हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी हुई हैं, जो 100-107 अमेरिकी डॉलर के दायरे में घूम रही हैं, जिससे एक बार फिर मुद्रास्फीति, इनपुट लागत और व्यापक मैक्रो दबावों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
युद्ध विराम से इनकार का असर: क्रूड ऑयल फिर महंगा, दुनिया पर दबाव
26 Mar, 2026 02:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली। शुरुआती गिरावट के बाद कीमतों ने मजबूती पकड़ी, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का रुख बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड 1.3 प्रतिशत बढ़कर 98.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले बुधवार को यह 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड की कीमत भी 1.6 प्रतिशत बढ़कर 91.75 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
ईरान ने ठुकराया युद्धविराम का प्रस्ताव
तेल की कीमतों में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई जब तेहरान ने बुधवार को अमेरिका द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम योजना को खारिज कर दिया। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्री प्रस्ताव दिया था और ट्रम्प ने इस सप्ताह ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से अपने बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की स्वयं निर्धारित समय सीमा को स्थगित कर दिया था। ईरान ने भी इस्राइल और खाड़ी अरब देशों पर और हमले शुरू कर दिए, जबकि इस्राइल ने तेहरान पर हवाई हमले किए और अमेरिका ने इस क्षेत्र में और अधिक अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की तैयारी की।
होर्मुज में बढ़ते तनाव से पड़ रहा असर
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कि एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है और जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल का परिवहन होता है, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से काफी हद तक बंद है। इसके चलते तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है और युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो अब अपने चौथे सप्ताह में है।
सरकार का सम्मान, वीरता पदक विजेताओं को फ्री ट्रेन यात्रा
26 Mar, 2026 01:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत सरकार ने सेना, नौसेना और वायुसेना में वीरता पदक से सम्मानित सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस आदेश के तहत, इन वीरता पुरस्कार विजेताओं को भारतीय रेलवे में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा प्रथम श्रेणी, सेकेंड एसी या एसी चेयर कार में एक साथी के साथ उपलब्ध होगी। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि यह रियायत देश के बहादुर जवानों के सम्मान में दी गई है। यह योजना उन सभी सैनिकों पर लागू होगी जिन्हें सेना, नौसेना या वायुसेना पदक से सम्मानित किया गया है। पुरस्कार विजेताओं के जीवनसाथी भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसमें विधवाएं और विधुर शामिल हैं, जब तक वे पुनर्विवाह नहीं करते। इसके अतिरिक्त, अविवाहित मरणोपरांत पुरस्कार विजेताओं के माता-पिता को भी यह सुविधा प्रदान की जाएगी। यह कदम देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले और वीरता दिखाने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है। इससे इन परिवारों को यात्रा में आर्थिक सहायता मिलेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। भारतीय रेलवे इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। यह सुविधा पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर मान्य होगी।
पात्रता के लिए क्या मानदंड?
इस योजना के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना पदक से सम्मानित सभी व्यक्ति पात्र होंगे। पुरस्कार विजेता के जीवनसाथी, जिनमें विधवाएं और विधुर शामिल हैं, पुनर्विवाह तक पात्र रहेंगे। अविवाहित मरणोपरांत पुरस्कार विजेताओं के माता-पिता भी इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि देश के लिए सेवा करने वाले हर पात्र व्यक्ति को यह सम्मान मिले। रक्षा मंत्रालय जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा।
जियोपॉलिटिकल तनाव से बाजार डरे, एशियाई शेयरों में गिरावट
26 Mar, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एशियाई शेयर बाजारों में गुरुवार को ज्यादातर गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि ईरान से जुड़े युद्ध में तनाव कम होने को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है।
टोक्यो का निक्केई 225 सूचकांक 0.3 प्रतिशत गिरकर 53,607.75 पर कारोबार कर रहा था।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1.9 प्रतिशत गिरकर 5,537.30 पर आ गया।
हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 1.4 प्रतिशत गिरकर 24,978.71 पर आ गया।
शंघाई कंपोजिट सूचकांक 0.6 प्रतिशत गिरकर 3,909.16 पर पहुंच गया।
ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स 0.2 प्रतिशत नीचे गिर गया।
ताइवान का ताइएक्स इंडेक्स 0.4 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था।
क्या रहा अमेरिकी बाजार का हाल?
बुधवार को वॉल स्ट्रीट के शेयर बाजार में तेजी के साथ कारोबार समाप्त हुआ। एसएंडपी 500 में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 6,591.90 पर पहुंच गया। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 46,429.49 पर पहुंच गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 21,929.83 पर बंद हुआ। अमेरिकी वायदा बाजार में 0.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
तेल की कीमतों में आया 1.3% का उछाल
गुरुवार को तेल की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद फिर से उछाल आया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 1.3 प्रतिशत बढ़कर 98.51 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। बुधवार को यह 95 अमेरिकी डॉलर से नीचे था। अमेरिकी मानक क्रूड 1.6 प्रतिशत बढ़कर 91.75 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखी सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट
गुरुवार की सुबह बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोने की कीमत 0.8 प्रतिशत गिरकर 4,513.90 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस हो गई। चांदी की कीमत में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 71.97 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गई। अमेरिकी डॉलर 159.47 जापानी येन से गिरकर 159.42 जापानी येन पर आ गया। यूरो 1.1559 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 1.1570 अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
सोने की खरीदारी में बदलाव, अब निवेश के तौर पर बढ़ रही मांग
26 Mar, 2026 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत का स्वर्ण (गोल्ड) क्षेत्र इस समय बड़े संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां मांग का स्वरूप खपत आधारित से निवेश आधारित होता जा रहा है। आईसीआरए और एसोचैम की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, देश में घरेलू खनन उत्पादन बेहद कम होने के कारण भारत अब भी सोने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। रिपोर्ट में इस निर्भरता को कम करने के लिए संगठित रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया गया है। साथ ही, गोल्ड डोरे (कच्चा सोना) पर कम आयात शुल्क बनाए रखने और IGDS मानकों वाले बार्स को व्यापक स्वीकार्यता देने की सिफारिश की गई है, ताकि घरेलू रिफाइनर वित्तीय बाजारों से बेहतर जुड़ सकें। इसके अलावा, गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) को फिर से प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई है, क्योंकि शुरुआत से ही इसमें सीमित भागीदारी देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, भावनात्मक जुड़ाव और पारंपरिक सोच के कारण लोग अपने आभूषण इस योजना में शामिल करने से हिचकते हैं। रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि योजना को सरल बनाया जाए, इसके लाभों के बारे में बेहतर जानकारी दी जाए और संगठित ज्वैलर्स को इस प्रक्रिया में शामिल कर लोगों का भरोसा बढ़ाया जाए, ताकि देश में मौजूद निष्क्रिय सोने को आर्थिक रूप से उपयोग में लाया जा सके।
तेलंगाना में निवेश की बड़ी छलांग, दावोस से 2.19 लाख करोड़ के 44 समझौते
तेलंगाना सरकार ने वैश्विक निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। राज्य के उद्योग मंत्री श्रीधर बाबू ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी की 2024 और 2025 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) यात्राओं के दौरान कुल 44 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनकी कुल निवेश राशि 2.19 लाख करोड़ रुपये है। मंत्री ने कहा कि ये सभी निवेश प्रस्ताव फिलहाल विभिन्न चरणों में लागू हो रहे हैं और इनसे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 68,150 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने भूमि आवंटन के जरिए अब तक 1,540 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। सरकार का फोकस निवेश को जमीन पर उतारने और रोजगार सृजन को गति देने पर है, ताकि तेलंगाना को प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत किया जा सके।
खुदरा महंगाई घटाने का प्लान, आम आदमी को कितनी राहत?
26 Mar, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए खुदरा महंगाई (रिटेल इन्फ्लेशन) का लक्ष्य चार प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। यह लक्ष्य 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगा। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने 25 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना में इसकी जानकारी दी। अधिसूचना के अनुसार, महंगाई के लिए 4 प्रतिशत का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि इसकी ऊपरी सहनशील सीमा 6 प्रतिशत और निचली सीमा 2 प्रतिशत रखी गई है। यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के तहत, रिजर्व बैंक के परामर्श से लिया गया है।
एमपीसी के फैसले पर पड़ेगा असर
सरकार के इस फैसले के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का मौजूदा जनादेश भी बरकरार रहेगा। मौद्रिक नीति समिति (MPC) अब भी इसी लक्ष्य के अनुरूप नीतिगत ब्याज दरों का निर्धारण करेगी, ताकि महंगाई को निर्धारित दायरे में रखा जा सके। गौरतलब है कि भारत ने 2016 में औपचारिक रूप से महंगाई लक्ष्य निर्धारण (इन्फ्लेशन टार्गेटिंग) का ढांचा अपनाया था। उसी समय एमपीसी का गठन हुआ था, जिसे मूल्य स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। शुरुआती अवधि मार्च 2021 तक थी, जिसके बाद सरकार ने इस लक्ष्य को लगातार जारी रखा है। यह दूसरा अवसर है जब सरकार ने बिना बदलाव के चार प्रतिशत लक्ष्य को आगे बढ़ाया है।
मौजूदा महंगाई की स्थिति
फरवरी 2026 में CPI आधारित महंगाई: 3.21%
ग्रामीण महंगाई: 3.37%
शहरी महंगाई: 3.02%
खाद्य महंगाई (CFPI): 3.47%
यानी महंगाई फिलहाल लक्ष्य (4%) से नीचे है। इस दौरान टमाटर, मटर और फूलगोभी जैसी सब्जियों की कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे खाद्य महंगाई पर दबाव कम हुआ।
किन राज्यों में महंगाई ज्यादा?
फरवरी 2026 में सबसे ज्यादा महंगाई वाले राज्य:
तेलंगाना
राजस्थान
केरल
आंध्र प्रदेश
पश्चिम बंगाल
कैसे जुटाया जाते हैं आंकड़े?
सरकार के अनुसार, महंगाई के आंकड़े देशभर के 1407 शहरी बाजारों और 1465 गांवों से एकत्र किए जाते हैं। फरवरी 2026 में लगभग सभी बाजारों से सफलतापूर्वक डेटा संग्रह किया गया, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता बनी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि 4 प्रतिशत के लक्ष्य को बरकरार रखना नीति निरंतरता और आर्थिक स्थिरता का संकेत है। इससे बाजार और निवेशकों को स्पष्ट दिशा मिलती है, वहीं RBI को भी ब्याज दरों के प्रबंधन में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। मार्च 2026 के महंगाई आंकड़े 13 अप्रैल को जारी किए जाएंगे, जिस पर आगे की मौद्रिक नीति के संकेत निर्भर करेंगे।
ग्लोबल मंच पर भारत की आवाज बुलंद, WTO में कृषि और मत्स्य हितों की पैरवी
26 Mar, 2026 06:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की कैमरून बैठक में भारत का जोर छोटे किसानों और मत्स्यपालकों की आजीविका और आर्थिक हितों की आवाज बुलंद करने पर होगा। यह बैठक 26 मार्च से चार दिनों के लिए कैमरून के याउंदे में होगी। विकासशील देशों के लिए डिजिटल व्यापार जैसे नए क्षेत्रों में नीति बनाने की स्वतंत्रता इस मंत्री स्तरीय बैठक में भारत की मुख्य प्राथमिकता होगी। इस बैठक में 166 सदस्य देशों के वाणिज्य मंत्री शामिल होंगे। इनमें भारत, चीन और अमेरिका प्रमुख हैं। बैठक में कृषि, ई-कॉमर्स और मत्स्य उद्योग से जुड़े वैश्विक व्यापार मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत का नेतृत्व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। उनकी टीम में वाणिज्य विभाग और जेनेवा में भारत के स्थायी मिशन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। भारत का मुख्य फोकस खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, छोटे किसानों और मत्स्यपालकों के रोजगार की रक्षा के साथ डिजिटल व्यापार और नई तकनीकों में विकासशील देशों के लिए स्वतंत्रता बनाए रखना होगा।
विकास के लिए निवेश सुविधा
भारत ऐसे प्रयासों का समर्थन करता है जो विकासशील देशों में निवेश बढ़ाएं। पिछली बैठक में भारत ने चीन के नेतृत्व वाले आईडीएफ प्रस्ताव का विरोध किया था। यह प्रस्ताव सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होगा।
क्या होंगे बैठक के मुख्य प्रस्ताव
बैठक के मुख्य प्रस्ताव होंगे- कृषि, ई-कॉमर्स, मत्स्य उद्योग, निवेश, डब्ल्यूटीओ सुधार और डिजिटल ट्रेड। भारत अन्य मुद्दों को भी उठाएगा, जिनमें ई-कॉमर्स ट्रांसमिशन पर 28 साल की रोक को जारी रखना, मत्स्य पालन सब्सिडी और विकास के लिए निवेश सुविधा समझौते का प्रस्ताव शामिल है। डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं।भारत बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने वाली सुधारों का समर्थन करेगा, लेकिन विकासशील देशों के हितों को केंद्र में रखेगा। डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही है, खासकर कृत्रिम मेधा और नई तकनीकों के युग में। भारत का कहना है कि देशों को नई तकनीकों का लाभ लेने के लिए नीतियों में स्वतंत्रता चाहिए।
25 वर्षों तक सब्सिडी पर रोक की मांग कर सकता है भारत
भारत सार्वजनिक भंडारण के स्थाई समाधान की मांग करेगा। देश के 99.4 फीसदी किसान कम आय वाले हैं और नयूनतम समर्थन मूल्य पर निर्भर हैं। इस व्यवस्था का समाधान किसानों के जीवन और खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक है। इसके अलावा भारत ने मत्स्य उद्योग सब्सिडी पर बातचीत और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके तहत मत्स्य उत्पादन में अग्रणी देशों को मछली पकड़ने की क्षमता को धीरे-धीरे घटाने की बात कही गई है। साथ ही, इस क्षेत्र में कम से कम 25 वर्षों के लिए सब्सिडी पर रोक हो।
7% ग्रोथ का अनुमान, लेकिन मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता
25 Mar, 2026 02:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर ताजा अनुमान जारी किया है। एजेंसी ने अगले वित्त वर्ष (2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक निजी खपत, निवेश में सुधार और मजबूत निर्यात इस वृद्धि के प्रमुख आधार होंगे। हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से सरकार की सब्सिडी लागत बढ़ेगी, जिससे राजकोषीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी अपने अनुमान को बढ़ाया
एसएंडपी ने 2025-26 के लिए भी अपने अनुमान को 0.4 प्रतिशत बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, 2026-27 के लिए अनुमान में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। एजेंसी का कहना है कि ऊंचे तेल दाम व्यापार घाटा बढ़ा सकते हैं, लेकिन सेवाओं के निर्यात में मजबूत अधिशेष से चालू खाता घाटा नियंत्रित रह सकता है।
महंगाई बढ़ने के अनुमान
महंगाई को लेकर एसएंडपी का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2027 में बढ़कर 4.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है, हालांकि सरकार पूरी तरह से कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डालेगी।
मौद्रिक नीति को लेकर क्या?
मौद्रिक नीति को लेकर एजेंसी का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और न्यूट्रल रुख बनाए रखेगा। लेकिन अगर ऊर्जा बाजार में व्यवधान ज्यादा गहरा और लंबा चलता है जैसे कि ब्रेंट क्रूड जून तिमाही में 185 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है तो केंद्रीय बैंक को सख्ती करनी पड़ सकती है। ऐसे परिदृश्य में साल के दूसरे हिस्से में 25 आधार अंक की दर बढ़ोतरी संभव है। एसएंडपी के बेसलाइन अनुमान के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड जून तिमाही में औसतन 92 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। रिपोर्ट यह भी मानकर चलती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान अप्रैल की शुरुआत तक रहेगा और उसके बाद आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होगी। एसएंडपी ने यह भी कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू मांग प्रभावित हो सकती है और सरकारों पर सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।
रिफॉर्म एक्सप्रेस पर भारत, वित्त विधेयक को लोकसभा की मंजूरी
25 Mar, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वित्त विधेयक 2026 लोकसभा में 32 सरकारी संशोधनों को शामिल करने के बाद पारित हो गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भारत तेजी से सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में सुधार किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि स्पष्ट सोच, आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता के साथ किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है और लगातार आगे बढ़ रहा है।
टैक्स सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश
उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस भरोसे पर आधारित टैक्स सिस्टम बनाने पर है, जिसके तहत ईमानदार करदाताओं के लिए परेशानियां कम की जा रही हैं। टैक्स प्रशासन को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
17 दवाओं पर से बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाई गई
वित्त मंत्री ने आम लोगों को राहत देने के लिए 17 जरूरी जीवनरक्षक दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त करने का भी एलान किया। इससे इन दवाओं की कीमतें कम होने की उम्मीद है और मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा।
छोटे करदाताों के लिए बड़ा कदम
छोटे करदाताओं के लिए भी प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब कम या शून्य टीडीएस (TDS) सर्टिफिकेट पाने के लिए नियम-आधारित ऑटोमेटेड ऑनलाइन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे समय और जटिलता दोनों कम होंगे। इसके अलावा, सीतारमण ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा वसूले गए सेस और सरचार्ज से अधिक राशि राज्यों के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत खर्च की जा रही है, जिससे राज्यों को वित्तीय सहयोग मिलता है।
वित्त विधेयक में क्या प्रावधान?
उन्होंने कहा कि एमएसएमई, किसान और सहकारी क्षेत्र रोजगार सृजन और उत्पादन के केंद्र में हैं, इसलिए सरकार इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। वित्त विधेयक में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो इन सेक्टर्स के लिए तरलता बढ़ाने, अनुपालन बोझ कम करने और अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाने में मदद करेंगे।
तीन साल तक डिविडेंड टैक्स में छूट
सरकार ने सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने और छोटे सदस्यों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी संघों (नेशनल कोऑपरेटिव फेडरेशंस) की डिविडेंड आय पर तीन साल तक टैक्स छूट देने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने कहा कि समावेशी विकास के लिए इन क्षेत्रों को सशक्त बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ये क्षेत्र अहम भूमिका निभाते हैं और विभिन्न उद्योगों में रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।
डेटा सेंटर सेवाओं से जुड़ा नया प्रावधान शामिल
इसके अलावा, वित्त विधेयक में डेटा सेंटर सेवाओं से जुड़ा एक नया प्रावधान भी शामिल किया गया है। सेफ हार्बर नियम के तहत, भारत की कंपनियों को अपनी संबंधित विदेशी इकाइयों को सेवाएं देने पर लागत का 15 प्रतिशत मार्जिन रखने की अनुमति दी जाएगी। इससे भारत में वास्तविक और लाभकारी कारोबार को बढ़ावा मिलेगा तथा शेल कंपनियों पर रोक लगेगी। अनुपालन को आसान बनाने के लिए तकनीकी चूक (टेक्निकल डिफॉल्ट) पर लगने वाले जुर्माने को अब निश्चित शुल्क (फिक्स्ड फीस) में बदल दिया गया है। इससे कारोबारियों के लिए अनिश्चितता कम होगी। इसके साथ ही, यात्रियों को राहत देने के लिए एयरपोर्ट पर विवाद कम करने हेतु पैसेंजर अलाउंस को भी तर्कसंगत बनाया गया है। सरकार का कहना है कि ये सभी कदम प्रमुख क्षेत्रों को मजबूती देने, कारोबार को आसान बनाने और आर्थिक विकास का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच खाद सप्लाई पर सरकार की पैनी नजर
25 Mar, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार खाद आपूर्ति को लेकर सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की जाएगी। वहीं बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक कर देश की रक्षा तैयारियों की समीक्षा की थी।
पीएम ने किसानों को किया आश्वास्त
पिछले दिनों संसद में पीएम मोदी किसानों को आश्वास्त किया था। किसानों को संसद से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, बुवाई में उर्वरक-खाद की कमी नहीं होगी। सरकार हर परिस्थिति में साथ खड़ी है। उन्होंने राज्यसभा में अपने वक्तव्य के दौरान कहा, 'मैं किसानों को आश्वस्त करता हूं कि सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। बुवाई के मौसम में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सकें, सरकार ये सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।'
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
