व्यापार
पश्चिम एशिया संकट पर Kotak Mahindra Bank की रिपोर्ट, असर सीमित रहने की संभावना
4 Apr, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के इक्विटी बाजारों को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। कोटक संस्थागत इक्विटी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा संघर्ष अगले कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाता है, तो भारतीय बाजारों की कमाई पर इसका असर सीमित रह सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया समय में शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद निवेशकों के लिए जोखिम और रिटर्न का संतुलन बेहतर हुआ है। यानी मौजूदा स्तर पर निवेश के अवसर पहले की तुलना में अधिक आकर्षक हो सकते हैं। विशेष रूप से अमेरिका की ओर से ईरान-इस्राइल संघर्ष को लेकर दिए गए संकेतों ने तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति स्थिर होने की उम्मीद बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणियों से उम्मीद जगी है कि ईरान-इस्राइल/अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का अंत हो सकता है और आने वाले महीनों में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य हो सकती है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की कमाई पर संभावित नुकसान सीमित रहेगा। कोटक ने अपने बेस केस परिदृश्य में माना है कि यह संघर्ष कुछ हफ्तों तक जारी रह सकता है, लेकिन इससे वैश्विक तेल आपूर्ति ढांचे पर कोई दीर्घकालिक असर नहीं पड़ेगा।
आत्मनिर्भरता की राह पर 25-27% एथेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण को लेकर भारत की नीति किसी भू-राजनीतिक संकट, खासकर पश्चिम एशिया के तनाव, से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता के दीर्घकालिक लक्ष्य पर आधारित है। अनाज इथेनॉल निर्माता संघ (जीईएमए) के अध्यक्ष सीके जैन ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि ई20 का युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। इसका एक ही उद्देश्य है ऊर्जा में आत्मनिर्भरता। जब हमारे पास खुद का उत्पादन है, तो हम दूसरों पर निर्भर क्यों रहें? भारत ने 1 अप्रैल से E20 का पूर्ण रोलआउट शुरू कर दिया है। जैन ने इसे अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक चेकपॉइंट बताया। उनके मुताबिक, इस चरण का मकसद यह देखना था कि क्या निवेशक आगे आते हैं और क्या पर्याप्त कच्चा माल (फीडस्टॉक) उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति अनुकूल है अतिरिक्त अनाज जैसे फीडस्टॉक की उपलब्धता है और उत्पादन क्षमता भी विकसित हो चुकी है। ऐसे में एथेनॉल मिश्रण को आगे बढ़ाने की पूरी संभावना है। जैन ने संकेत दिया कि 20% अंतिम सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आगे बढ़ने की शुरुआत है। 25-27% तक ब्लेंडिंग बढ़ाने की 100% संभावना है।
सरकार का बड़ा फैसला: संकटग्रस्त इलाकों को मिलेगा आर्थिक सहारा
4 Apr, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों को राहत देने के लिए नई कर्ज गारंटी योजना लाने की तैयारी कर रही है। इस योजना का मकसद खासतौर पर उन कंपनियों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराना है, जो आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के साथ कच्चे माल और लॉजिस्टिक खर्च की बढ़ती लागत से परेशान हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई योजना के तहत सरकार दो से 2.5 लाख करोड़ रुपये तक की कर्ज गारंटी दे सकती है। यह कोविड महामारी के दौरान शुरू की गई आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के मॉडल पर आधारित होगी। वित्तीय सेवा विभाग इस योजना पर काम रहा है। माना जा रहा है कि सरकार अगले 15 दिनों के भीतर इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस राहत पैकेज का मकसद यह सुनिशि्चत करना है कि आपूर्ति शृंखला में रुकावट की वजह से जो क्षेत्र चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें नकदी की कमी न हो और वे अपना कारोबार चालू रख सकें। योजना के तहत उन कंपनियों को सरकार की गारंटी पर कर्ज मिलेगा।
अनिश्चित माहौल में मिलेगा भरोसा
सूत्रों ने कहा, इस योजना का मकसद कंपनियों को भरोसा देना है, ताकि वे अनिश्चित माहौल में भी काम जारी रख सकें। हालात अभी ज्यादा खराब नहीं हैं, लेकिन सरकार पहले से तैयारी कर रही है, ताकि अर्थव्यवस्था पर अधिक दबाव न पड़े। सरकार प्रभावित क्षेत्रों से संपर्क कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उनके उत्पादन पर कितना असर पड़ रहा है।
एमएसएमई और निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी राहत
सूत्रों ने कहा, ईरान युद्ध का सीधा असर लघु, सूक्ष्म एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई)और निर्यात पर पड़ा है। निर्यात से जुड़े क्षेत्र आवाजाही में रुकावट और बढ़ते मालभाड़े की वजह से दबाव में हैं। एमएसएमई क्षेत्र भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जो ब्याज दरों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और जिनकी कार्यप्रणाली स्थिर नकदी प्रवाह पर निर्भर करती है। सरकार की नई कर्ज गारंटी योजना से छोटे उद्यमों को अपना व्यापार बचाने और कर्मचारियों का समय पर वेतन देने में मदद मिलेगी।
कोरोना में ईसीएलजीएस से मिली थी बड़ी राहत
कोविड काल के दौरान शुरू की गई आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना ने लाखों कर्जदारों की मदद की थी और महामारी के दौरान खासतौर पर एमएसएमई क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई थी। ईसीएलजीएस के तहत अब तक 1.19 करोड़ लाभार्थियों को 3.62 लाख करोड़ रुपये की कर्ज गारंटी दी जा चुकी है। एमएसएमई क्षेत्र इसका सबसे बड़ा लाभार्थी रहा।
चुनौतियों के बावजूद निर्यात क्षेत्र में मजबूती
वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत के निर्यात क्षेत्र ने मजबूती दिखाई है। 2025-26 में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, 31 मार्च तक के रुझानों के आधार पर यह स्पष्ट है कि कई चुनौतियों के बावजूद निर्यात में गिरावट नहीं आई है। टैरिफ के अलावा अर्थव्यवस्था की विभिन्न चुनौतियों जैसे यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया तनाव जैसे मुद्दों के बावजूद भारत के वस्तु निर्यात ने अपनी रफ्तार बनाए रखी है।
चीन पर टेक्नोलॉजी नकेल, US ने पेश किया MATCH एक्ट
3 Apr, 2026 03:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक सेमीकंडक्टर और तकनीकी वर्चस्व की दौड़ में अमेरिका ने एक और आक्रामक कदम उठाया है। वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस के सीनेटरों ने चीन और अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों को एडवांस्ड चिप निर्माण तकनीक हासिल करने से रोकने के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। 'एमएटीसीएच' एक्ट नामक इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य निर्यात नियंत्रण (एक्सपोर्ट कंट्रोल) की मौजूदा खामियों को दूर करना और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों के साथ नीतियों में तालमेल स्थापित करना है।
क्या है बिल का मकसद?
यह कानून केंद्र सरकार को सेमीकंडक्टर उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट्स' (व्यापार और आपूर्ति के प्रमुख मार्ग) की पहचान करने और मित्र देशों के साथ मिलकर एक समान एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू करने का निर्देश देता है। सीनेटर पीट रिकेट्स और एंडी किम द्वारा संयुक्त रूप से लाए गए इस बिल को सीनेटर जिम रिश और चक शूमर का भी समर्थन प्राप्त है। सीनेटर रिकेट्स के अनुसार, वर्तमान में लागू इकाई-आधारित प्रतिबंधों का ढांचा बिखरा हुआ है, जिसे चीन फ्रंट कंपनियों या बिचौलियों के माध्यम से आसानी से चकमा दे देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने और बनाने की क्षमता कम्युनिस्ट चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है। यह नया बिल इन खामियों को खत्म कर अमेरिकी कंपनियों के लिए एक समान अवसर तैयार करेगा।
'एमएटीसीएच एक्ट' के प्रमुख प्रावधान
यह बिल सीधे तौर पर ग्लोबल सप्लाई चेन और तकनीकी बाजार को प्रभावित करेगा। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
तकनीक और उपकरणों पर पाबंदी: एमएटीसीएच एक्ट में डीप अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी इक्विपमेंट सहित आवश्यक चिप निर्माण उपकरणों पर देशव्यापी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
चीनी कंपनियों पर नकेल: इसके तहत हुआवेई, एसएमआईसी और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों के प्लांट को प्रतिबंधित इकाई घोषित कर निशाना बनाया गया है।
सहयोगियों पर दबाव और अधिकार क्षेत्र का विस्तार: बिल में ऐसे नियम शामिल हैं कि यदि साझेदार देश तय समय सीमा के भीतर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन नहीं करते हैं, तो अमेरिका विदेशी निर्मित उन वस्तुओं पर भी अपना अधिकार क्षेत्र बढ़ा सकता है जो अमेरिकी तकनीक पर निर्भर हैं।
सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के बारे में क्या बोले जॉन डब्ल्यू. मैनियन?
प्रतिनिधि जॉन डब्ल्यू. मैनियन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी श्रमिकों और नवाचार ने दुनिया की सबसे एडवांस्ड सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि यह बिल उन उपकरणों, नौकरियों और तकनीकों की सुरक्षा करेगा जो 21वीं सदी में अमेरिका को चीन से आगे रखेंगे। कांग्रेसी माइकल बॉमगार्टनर और विश्लेषक रयान फेडासियुक ने चेतावनी दी है कि चीन अमेरिकी और सहयोगी देशों की निर्यात व्यवस्था के गैप का लगातार फायदा उठा रहा है, क्योंकि सहयोगी देशों के नियंत्रण हमेशा एक समान लागू नहीं होते। समर्थकों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिकी लीडरशिप बनाए रखने के लिए यह सख्त कानून अनिवार्य है।
अब आगे क्या?
सेमीकंडक्टर अब केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि एआई, डिफेंस सिस्टम और ग्लोबल सप्लाई चेन का समर्थन करने वाली एक रणनीतिक तकनीक बन चुका है। यह नया कदम घरेलू चिप उत्पादन को मजबूत करने और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की वाशिंगटन की पूर्व की कोशिशों का ही विस्तार है। चूंकि अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों में मतभेद एक बड़ी चुनौती रहे हैं, इसलिए 'एमएटीसीएच एक्ट' वैश्विक स्तर पर तकनीक पर नियंत्रण के लिए अधिक समन्वित और बहुपक्षीय दृष्टिकोण स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है।
वैश्विक तनाव का असर, ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर के ऊपर
3 Apr, 2026 12:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर अगले दो से तीन हफ्तों में संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई, जिससे तेल कीमतों में तेजी आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब आठ प्रतिशत उछलकर 109.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 111.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता देखा गया।
बाजार में दिख रही अस्थिरता
साप्ताहिक आधार पर भी तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस WTI क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि के दौरान 3.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में अस्थिरता को दर्शाती है। सप्ताह के दौरान यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि में 3.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।
जंग पांचवे हफ्ते में पहुंच चुका है
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ऊर्जा कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजरने वाली सप्लाई पर निर्भर देशों में ईंधन की कमी भी देखने को मिल रही है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। इस हफ्ते दिए गए अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर 'बेहद कड़ा प्रहार' कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई और अन्य देशों से इसे सुचारू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रुपए और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बना रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर स्थिति में सुधार होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और करेंसी में स्थिरता आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ेगी। कीमती धातुओं की बात करें तो कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत गिरकर 4,679.70 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं। इस बीच, गुड फ्राइडे के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार सुबह के सत्र में बंद रहे। वहीं, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी रही।
दवाओं पर 100% टैरिफ, भारत की फार्मा इंडस्ट्री कितनी होगी प्रभावित
3 Apr, 2026 11:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन जोखिमों का हवाला देते हुए पेटेंटेड फार्मास्युटिकल उत्पादों के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह निर्णय सेक्शन 232 जांच के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य दवा आपूर्ति में विदेशी निर्भरता को कम करना है।
जेनेरिक दवाओं को टैरिफ से रखा गया बाहर
हालांकि भारत के लिए राहत की बात यह है कि जेनेरिक दवाओं को फिलहाल इस टैरिफ से बाहर रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कंपनियों की प्रमुख ताकत माने जाने वाले जेनेरिक ड्रग्स पर अभी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे भारत से अमेरिका को होने वाले सस्ते दवाओं के निर्यात पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा। भारत की फार्मा इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा अमेरिकी जेनेरिक बाजार पर निर्भर है और इस छूट से अल्पकाल में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी के अनुसार, भविष्य में जेनेरिक उत्पादन की स्थिति की समीक्षा कर टैरिफ नीति में बदलाव किया जा सकता है।
भारत के लिए क्या चुनौती?
हालांकि, लंबे समय में यह फैसला भारत के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। पेटेंटेड दवाओं और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) पर भारी टैरिफ से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, जिसमें भारतीय कंपनियां अहम भूमिका निभाती हैं। खासकर कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और इंटरमीडिएट सप्लाई के क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।
कंपनियों को लेकर ट्रंप प्रशासन का क्या रुख
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों के पास अमेरिका में उत्पादन शिफ्ट करने की योजना नहीं होगी, उनके भारत से आयातित पेटेंटेड उत्पादों पर 100 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। हालांकि, जो कंपनियां उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए प्रतिबद्ध होंगी, उन्हें शुरुआती राहत के तौर पर 20 प्रतिशत टैरिफ दिया जाएगा, जो चार साल में बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।
कैसे लागू होगा टैरिफ?
यह टैरिफ जुलाई और सितंबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वर्तमान में अमेरिका में वितरित लगभग 53 प्रतिशत पेटेंटेड दवाएं विदेशों में बनती हैं, जबकि केवल 15 प्रतिशत APIs का उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है। ऐसे में किसी वैश्विक संकट की स्थिति में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अमेरिका का मानना है कि कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग होने वाली पेटेंटेड दवाओं के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है। इसी उद्देश्य से घरेलू उत्पादन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
गैस सिलिंडर को लेकर फेक न्यूज पर एक्शन, केंद्र ने राज्यों को दी सलाह
3 Apr, 2026 09:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एलपीजी की उपलब्धता को लेकर फैल रही अफवाहों पर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि सिर्फ 17 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ही नियमित प्रेस ब्रीफिंग कर रहे हैं, जो स्थिति को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है।
राज्यों से संचार व्यवस्था को मजबूत करने की अपील
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने अपने पत्र में कहा कि कुछ क्षेत्रों में अब भी अफवाहें और गलत जानकारी फैल रही है, जिससे लोगों में अनावश्यक डर पैदा हो रहा है और कई जगहों पर घबराहट में खरीदारी (पैनिक बायिंग) देखी जा रही है। मंत्रालय ने राज्यों से अपील की है कि वे संचार व्यवस्था को और मजबूत करें ताकि स्थिति सामान्य बनी रहे। वर्तमान में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे 17 राज्य/यूटी नियमित या अंतराल पर प्रेस ब्रीफिंग कर रहे हैं। केंद्र ने बाकी राज्यों से भी तुरंत इसी तरह के कदम उठाने को कहा है।
मंत्रालय ने राज्यों को क्या दिया सलाह
मंत्रालय ने सलाह दिया है कि वरिष्ठ स्तर पर रोजाना प्रेस ब्रीफिंग की जाए और सोशल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सही और समय पर जानकारी दी जाए, ताकि लोगों को एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता और सुचारु वितरण का भरोसा मिल सके और अफवाहों पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही केंद्र ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि इस तरह की गलत गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी कदम लगातार उठाए जाएं। यह निर्देश 27 मार्च को जारी उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर असर की बात कही थी। इन परिस्थितियों के चलते पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों व उपलब्धता को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें तेजी से फैल रही हैं, जिससे घरेलू वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ा है।
टैरिफ वॉर का असर दिखा? व्हाइट हाउस बोला—घाटा कम हुआ
3 Apr, 2026 08:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' टैरिफ नीति के एक साल पूरे होने पर बड़ा दावा किया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस नीति के तहत किए गए नए व्यापार समझौतों ने वैश्विक व्यापार संतुलन को बदल दिया है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित बनाया है।
एक साल में कितने व्यापार समझौते हुए?
व्हाइट हाउस प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि 'लिबरेशन डे' के एक साल में 20 से अधिक नए व्यापार समझौते हुए, ट्रिलियन डॉलर के निवेश आए, दवाओं की कीमतें घटीं और वस्तु व्यापार घाटा कम हुआ। उनका कहना है कि यह बदलाव अभी शुरुआत है और आने वाले समय में इसके और बड़े परिणाम देखने को मिलेंगे।
वस्तु व्यापार घाटे में आई कितनी कमी?
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच अमेरिका का वस्तु व्यापार घाटा सालाना आधार पर 24 प्रतिशत तक घटा है। यह भी दावा किया गया कि इस अवधि में हर महीने घाटा साल-दर-साल कम हुआ।
चीन के साथ अमेरिका का व्यापार
चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा पिछले एक साल में 32 प्रतिशत और अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 46 प्रतिशत तक घटा है। पहली बार साल 2000 के बाद चीन अमेरिका का सबसे बड़ा घाटा वाला व्यापारिक साझेदार नहीं रहा। यूरोपीय संघ के साथ भी घाटा लगभग 40 प्रतिशत घटा है, जबकि स्विट्जरलैंड के साथ अमेरिका ने 2012 के बाद पहली बार सरप्लस दर्ज किया है।
विदेशी उत्पादकों का बोझ पड़ने का दावा
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि टैरिफ का बोझ विदेशी उत्पादकों पर पड़ा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया कि अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए निर्यातकों ने अपने उत्पादों की कीमतें घटाईं। सरकार के मुताबिक, यूरोपीय संघ, जापान, भारत, वियतनाम और अर्जेंटीना जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ 20 से ज्यादा समझौते हुए हैं, जो वैश्विक जीडीपी के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर करते हैं। इन समझौतों से कृषि, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों के लिए नए बाजार खुले हैं।
उद्योग क्षेत्र को लेकर क्या दावा?
उद्योग क्षेत्र में भी सुधार का दावा किया गया है। एपल, टोयोटा, माइक्रोन और फाइजर जैसी कंपनियों के निवेश से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है। 2025 में कोर कैपिटल गुड्स की शिपमेंट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जबकि 2026 की शुरुआत में दो साल बाद पहली बार मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में विस्तार दर्ज हुआ। अमेरिका ने 2025 में कच्चे स्टील उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक बनने का भी दावा किया है। मजदूरों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है प्राइवेट सेक्टर में औसतन 1,400 डॉलर से ज्यादा की वास्तविक वेतन वृद्धि दर्ज की गई।
भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदारों में है शामिल
हालांकि, भारत के साथ व्यापार में तस्वीर थोड़ी अलग है। पिछले 12 महीनों में अमेरिका का भारत के साथ वस्तु व्यापार घाटा 54.91 अरब डॉलर रहा, जिससे भारत अमेरिका के प्रमुख घाटा साझेदारों में शामिल है। फरवरी 2026 में ही अमेरिका को भारत के साथ करीब 3.5 अरब डॉलर का घाटा हुआ।
क्या कहते हैं आंकड़े?
इस अवधि में भारत से अमेरिका को 101.97 अरब डॉलर के सामान का आयात हुआ, जिसमें फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उत्पाद शामिल हैं। इन आयातों पर अमेरिका ने 12.34 अरब डॉलर की कस्टम ड्यूटी वसूली, जबकि औसत टैरिफ दर 12.12 प्रतिशत रही।
फरवरी 2026 के मासिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 अरब डॉलर हो गया, जो जनवरी से 2.67 अरब डॉलर ज्यादा है, हालांकि यह 12 महीने के औसत से 11 प्रतिशत कम है।
इस महीने कुल निर्यात 314.8 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 372.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वस्तु व्यापार में 84.60 अरब डॉलर का घाटा रहा, जबकि सेवाओं में 27.26 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज किया गया।
आयात में तेज वृद्धि के पीछे कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, कच्चा तेल और दवाओं की मांग रही, जबकि निर्यात में औद्योगिक सामग्री, प्राकृतिक गैस और सोने की शिपमेंट बढ़ी।
दोहरी मार: प्रॉपर्टी में निवेश गिरा, महिंद्रा कारें होंगी महंगी
3 Apr, 2026 08:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति शृंखला में आई रुकावटों और बढ़ती कीमतों के चलते चालू वित्त वर्ष में भारत में रिफाइंड सूरजमुखी तेल की बिक्री में 10 फीसदी घट सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा, दोहरी चुनौतियों के कारण मांग पर असर पड़ेगा। उपभोक्ता राइस ब्रान और सोयाबीन तेल जैसे सस्ते विकल्पों का रुख कर सकते हैं।
हल्की बढ़त के साथ बंद हुए अमेरिकी शेयर बाजार
अमेरिका के शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद आखिरकार हल्की बढ़त के साथ बंद हुए और पूरे हफ्ते में मुनाफे के साथ खत्म हुए। यह ईरान युद्ध शुरू होने के बाद पहला ऐसा हफ्ता रहा जब बाजार ने बढ़त दर्ज की। हालांकि दिन की शुरुआत में बाजार में गिरावट देखी गई थी, लेकिन बाद में स्थिति संभल गई। इस बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। अमेरिकी कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर हमले जारी रखेगा। इससे युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद कम हो गई है और बाजार पर दबाव बना हुआ है। टेस्ला के शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई, क्योंकि कंपनी की बिक्री उम्मीद से कम रही। वहीं कुछ टेक कंपनियों के शेयरों में तेजी आई, जिससे बाजार को सहारा मिला। तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों का खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा हवाई यात्रा और सामान ढुलाई भी महंगी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद भी कम हो जाएगी।
रियल एस्टेट में विदेशी निवेश 75 फीसदी घटा
ईरान युद्ध के कारण मार्च तिमाही में भारतीय रियल एस्टेट में निवेश को लेकर विदेशी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इससे विदेश निवेश 75 फीसदी घटकर 40 करोड़ डॉलर रह गया। कॉलियर्स इंडिया के अनुसार, इस अवधि में क्षेत्र में कुल संस्थागत निवेश 61 फीसदी घटकर 1.6 अरब डॉलर रह गया।
एयरटेल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी
भारती एयरटेल ग्राहक संख्या के आधार पर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन गई है। जीएसएमए के आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च तक एयरटेल का कुल ग्राहक आधार करीब 65 करोड़ तक पहुंच गया। कंपनी के भारत में 36.8 करोड़ और अफ्रीका में 17.9 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं।
महिंद्रा 6 अप्रैल से गाड़ियों के दाम 2.5 फीसदी तक बढ़ाएगी
महिंद्रा एंड महिंद्रा ने डीजल-पेट्रोल ईंधन वाले एसयूवी और व्यावसायिक वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को बताया, 6 अप्रैल से इन वाहनों की कीमत में 2.5 फीसदी तक बढ़ोतरी की जाएगी। पूरे पोर्टफोलियो में गाड़ियों की औसत कीमत 1.6 फीसदी बढ़ेगी। कंपनी ने कहा, उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी की वजह से यह फैसला लिया गया है। हालांकि, हाल में लॉन्च एक्सयूवी 7 एक्सओ मॉडल की कीमत 40,000 बुकिंग की डिलीवरी के बाद ही बढ़ाई जाएगी।
रिलायंस की एसईजेड रिफाइनरी से निर्यात पर विंडफॉल टैक्स नहीं
डीजल और विमान ईंधन पर हाल ही में लगाए गए अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) रिलायंस इंडस्ट्रीज की एसईजेड रिफाइनरी पर लागू नहीं होंगे। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि न्यायिक फैसलों के चलते विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित रिफाइनरी को इन करों से छूट मिली हुई है। ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति संकट को देखते हुए सरकार ने 26 मार्च से डीजल पर 21.50 रुपये और विमान ईंधन पर 29.50 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क फिर से लगा दिया है। पेट्रोल को इससे बाहर रखा गया है।
पेट्रोल पर 24 व डीजल पर 104 रुपये घाटा सह रहीं तेल कंपनियां
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण विश्व स्तर पर कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इसका सीधा असर भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर पड़ रहा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू बाजार में दाम स्थिर रखने के चलते कंपनियों को पेट्रोल पर 24 व डीजल पर 104 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। सरकार ने कहा, आम जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी कम की गई है और घाटे का हिस्सा कंपनियां वहन कर रही हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। मंत्रालय के अनुसार, अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।
विनिर्माण सेक्टर सुस्त, लेकिन निर्यात और नौकरियों में तेजी
2 Apr, 2026 01:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर दिखने लगा है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों और मांग में अनिश्चितता के कारण मार्च महीने में भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग चार वर्षों के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है।
क्या कह रहे पीएमआई के ताजा आंकड़े?
एसएंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित 'एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स' (पीएमआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च में यह सूचकांक गिरकर 53.9 पर आ गया है, जो फरवरी में 56.9 पर था। यह आंकड़ा 53.8 के प्रारंभिक अनुमान के लगभग अनुरूप ही है। इस गिरावट का मुख्य कारण मांग का कमजोर होना है, जिसके चलते नए ऑर्डर और उत्पादन का विस्तार लगभग चार वर्षों में अपनी सबसे धीमी दर से हुआ है। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "पश्चिम एशिया में संघर्ष से जुड़ी बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था में गूंज रही हैं और भारतीय निर्माताओं पर भारी पड़ रही हैं"।
उद्योग जगत के लिए इन आंकड़ों का क्या मतलब?
निजी क्षेत्र की ओर से की गई इस सर्वे रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक रुझानों के साथ-साथ मजबूत बुनियादी संकेत भी सामने आए हैं:
लागत में भारी वृद्धि: एल्युमीनियम, रसायन, ईंधन और स्टील की कीमतों में तेज उछाल के कारण कंपनियों को अगस्त 2022 के बाद से सबसे भारी लागत दबाव का सामना करना पड़ा है।
बिक्री मूल्य: इनपुट लागत में भारी वृद्धि के बावजूद, कंपनियों ने ग्राहकों पर पूरा बोझ नहीं डाला और पिछले दो वर्षों में सबसे धीमी गति से अपने बिक्री मूल्य बढ़ाए हैं।
निर्यात में मजबूती: मांग में समग्र सुस्ती के बावजूद विदेशी बाजारों से समर्थन मिला है, जिससे मार्च में निर्यात ऑर्डर उछलकर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
रोजगार में वृद्धि: कंपनियों ने अपने लंबित काम निपटाने और भविष्य की विस्तार योजनाओं को समर्थन देने के लिए नई भर्तियां की हैं। इसके चलते रोजगार वृद्धि की दर सात महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
अब आगे क्या
हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन की महंगी कीमतों ने मैन्युफैक्चरिंग की वर्तमान रफ्तार को धीमा कर दिया है, लेकिन भारत के विनिर्माता भविष्य के व्यापार को लेकर अत्यधिक आश्वस्त बने हुए हैं। कृषि क्षेत्र में मजबूती की उम्मीद और क्षमता विस्तार की योजनाओं के दम पर आगामी वर्ष के लिए निर्माताओं का व्यापारिक आशावाद मई 2024 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 63% बढ़ा, पहली बार नया रिकॉर्ड
2 Apr, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत अभियान के मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। देश का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹38,424 करोड़ के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल भारतीय उद्योग की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की मजबूत होती साख का भी सीधा प्रमाण है।
आंकड़ों में रिकॉर्ड छलांग
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गुरुवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो यह ₹14,802 करोड़ का बड़ा उछाल है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस अहम उपलब्धि की जानकारी देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात की एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्यात में आया यह भारी उछाल भारत की स्वदेशी क्षमताओं और उन्नत विनिर्माण ताकत में बढ़ते वैश्विक भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से हासिल हुई उपलब्धि
इस रिकॉर्ड व्यावसायिक प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की मजबूत संयुक्त भागीदारी है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार:
डीपीएसयू की हिस्सेदारी: इस कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी: वहीं, निजी उद्योगों ने 45.16 प्रतिशत का अहम योगदान देकर देश में एक सहयोगी और आत्मनिर्भर रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत का प्रदर्शन किया है।
भविष्य की संभावनाएं: वर्तमान में, रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्म्स के निर्माण में निजी उद्योग का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। रक्षा मंत्री के अनुसार, निकट भविष्य में इसके कुल उत्पादन मूल्य का 50 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।
उत्पादन और नौसेना में शत-प्रतिशत आत्मनिर्भरता
निर्यात के साथ-साथ घरेलू रक्षा उत्पादन भी तेज गति से बढ़ रहा है। मार्च में आयोजित एक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने बताया था कि सरकार के प्रयासों से वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.50 लाख करोड़ के पार चला गया था, और तब निर्यात लगभग ₹24,000 करोड़ के स्तर पर था। आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण नौसेना के क्षेत्र में दिख रहा है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियां अब पूरी तरह भारतीय शिपयार्ड में ही बन रही हैं। इनकी डिजाइनिंग से लेकर इंजीनियरिंग, निर्माण और जीवनचक्र समर्थन तक सब कुछ स्वदेशी है। राजनाथ सिंह ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, "आत्मनिर्भरता अब सिर्फ एक नारा नहीं है; यह एक व्यावहारिक वास्तविकता के रूप में स्थापित हो रही है। 'बिल्डर्स नेवी' कोई नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है"। सरकार ने वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। 62.66% की वर्तमान विकास दर और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए, भारत न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सही ट्रैक पर है, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला में खुद को एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी स्थापित कर रहा है।
ईरान मुद्दे पर ट्रंप के तेवर, निवेशकों में बढ़ी घबराहट
2 Apr, 2026 11:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव का सीधा असर अब वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार पर दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर कड़े सैन्य हमले जारी रखने की चेतावनी के बाद, गुरुवार को घरेलू वायदा बाजार (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस बयान ने युद्ध के शांत होने की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है, जिससे लगातार चार दिनों से जारी सोने की तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया है।
वायदा बाजार और हाजिर कीमतों के आंकड़े
भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण कमोडिटी बाजार में भारी बिकवाली देखी जा रही है।
चांदी की कीमतों में क्रैश: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर मई 2026 डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 13,613 रुपये (लगभग 5.5%) की भारी गिरावट के साथ 2,29,888 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है।
सोना भी धड़ाम: जून 2026 डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में भी 2,574 रुपये (1.6%) की बड़ी गिरावट आई है, जिसके बाद यह 1,51,161 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। यह अपने हालिया उच्चतम स्तर से बड़ी गिरावट है।
मुंबई हाजिर बाजार: स्थानीय हाजिर बाजार में, मुंबई में 22 कैरेट मानक सोने की कीमत 1,12,168 रुपये प्रति 8 ग्राम और 24 कैरेट शुद्ध सोने की कीमत 1,22,368 रुपये प्रति 8 ग्राम दर्ज की गई है।
ईरान संकट और मजबूत डॉलर
टेलीविजन पर दिए गए एक संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर "बेहद कड़ा" प्रहार करेगा और वे अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के करीब हैं। इसके चलते पूरे कमोडिटी और वित्तीय बाजार का सेंटिमेंट बदल गया:
कच्चे तेल में उबाल: ट्रंप के बयानों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 4 से 5 प्रतिशत तक उछलकर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स: 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और मजबूत डॉलर इंडेक्स ने सोने-चांदी पर भारी दबाव बनाया है। पृथ्वी फिनमार्ट के विशेषज्ञ मनोज कुमार जैन के अनुसार, इन दोनों में बढ़त सोने के लिए नकारात्मक साबित हो रही है।
ब्याज दरों पर असर: मुद्रास्फीति बढ़ने के जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 के अंत से पहले ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी कम हो गई है।
प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी गिरावट
इस बिकवाली का असर केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक धातु बाजार में प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी भारी गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में भी स्पॉट चांदी 2.9% गिरकर 72.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। उच्च यील्ड के कारण निवेशकों का रुझान अब नॉन-यील्डिंग एसेट्स से कम हो रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण निकट भविष्य में कीमती धातुओं में भारी अस्थिरता बनी रहेगी। साप्ताहिक आधार पर चांदी को 64 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस और सोने को 4,470 डॉलर पर अहम सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। ऐसे में विश्लेषकों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे तेजी आने पर मुनाफावसूली करें और उच्च स्तरों पर नई लॉन्ग पोजीशन बनाने से फिलहाल परहेज करें।
शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लुढ़के
2 Apr, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को बुरी तरह धराशायी हो गए। सेंसेक्स लगभग 1300 अंकों से अधिक गिर गया और निफ्टी बुधवार की बढ़त के बाद 22,250 से नीचे आ गया। निवेशकों ने अन्य कारणों के साथ-साथ ईरान-अमेरिका युद्ध में ट्रंप की टिप्पणियों पर रिएक्शन दिया, जिससे बेंचमार्क पिटते दिखे। सुबह 9.39 बजे सेंसेक्स 1,394.38 (-1.90%) अंक टूटकर 71,739.94 पर जबकि निफ्टी 407.75 (1.80%) अंक फिसलकर 22,271.65 पर कारोबार करता दिखा। इस दौरान बैंकिंग और फार्मा सेक्टर के शेयरों में तेज बिकवाली दिखी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग दो प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार सुबह के कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसईसेंसेक्स 1,433.72 अंक या 1.96 प्रतिशत लुढ़ककर 71,700.60 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 445.70 अंक या 1.97 प्रतिशत का गोता लगाकर 22,233.70 के स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि इसके ठीक एक दिन पहले बुधवार को सेंसेक्स 1,186.77 अंकों की छलांग के साथ 73,134.32 पर और निफ्टी 348 अंक चढ़कर 22,679.40 पर बंद हुआ था। बाजार की इस भारी गिरावट के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सबसे बड़ा कारक है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, "राष्ट्रपति ट्रंप की इस घोषणा के बाद कि 'हम अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़ा प्रहार करने जा रहे हैं', बाजार की धारणा फिर से नकारात्मक हो गई है"।
इस सैन्य तनाव के डर से ऊर्जा बाजार में भी भारी हलचल है:
कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' लगभग 4.44 से 5 प्रतिशत की तेजी के साथ 105.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
बॉन्ड यील्ड और कमोडिटी: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.36 प्रतिशत हो गई है, जिसका सोने और चांदी की कीमतों पर मामूली नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विदेशी फंड्स की निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,171.80 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।
प्रमुख कंपनियों और एशियाई बाजारों पर असर
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां नुकसान में कारोबार कर रही थीं। सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले प्रमुख शेयरों में सन फार्मा, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक और पावरग्रिड शामिल रहे। इसका असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी बाजार बुधवार को भले ही बढ़त के साथ बंद हुए हों, लेकिन गुरुवार को व्यापक एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4.31 प्रतिशत, जापान का निक्केई 2.24 प्रतिशत, हांगकांग का हैंगसेंग 1.04 प्रतिशत और शंघाई का कंपोजिट इंडेक्स 0.53 प्रतिशत गिर गया।
रुपया 151 पैसे मजबूत हुआ
भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 'ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट' में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया 94.62 पर खुला और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से बढ़कर 93.19 पर पहुंच गया। पिछले बंद भाव के मुकाबले रुपये में 151 पैसे या 1.6 प्रतिशत की मजबूती आई है।
आगे का आउटलुक
वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रुपये और घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। विशेषज्ञ वीके विजयकुमार ने आगाह किया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस (प्रेषण) की आशंका और लगातार एफपीआई (एफपीआई) बिकवाली रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं। डॉलर वायदा सौदों पर आरबीआई (आरबीआई) के प्रतिबंधों के बावजूद यह दबाव कम नहीं हो रहा है। आगे चलकर बाजार और अर्थव्यवस्था की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
आरबीआई की सख्ती का असर, रुपये ने पकड़ी रफ्तार
2 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रुपये ने ऐतिहासिक निचले स्तर से शानदार वापसी करते हुए गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 151 पैसे की मजबूत रिकवरी दर्ज की है। यह उछाल मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 'ऑनशोर फॉरवर्ड डिलीवरी मार्केट' में बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को सीमित करने के त्वरित कदम का नतीजा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण मुद्रा बाजार पर अब भी दबाव बना हुआ है।
सोमवार को 95 का चिंताजनक स्तर पार कर गया था रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया 94.62 के स्तर पर खुला और जल्द ही 1.6 प्रतिशत (151 पैसे) की तेज बढ़त के साथ 93.19 के स्तर पर पहुंच गया। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 94.84 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ था और सोमवार को इसने 95 का चिंताजनक स्तर भी पार कर लिया था। रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई को सीधा हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने 27 मार्च, 2026 को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से बैंकों के लिए भारतीय रुपये पर 'नेट ओपन पोजिशन' की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय कर दी है और बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
क्रूड में उबाल और शेयर बाजार धड़ाम
रुपये को मिले इस नीतिगत सहारे के बावजूद मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां बरकरार हैं:
ग्लोबल मार्केट: डॉलर इंडेक्स 0.32 प्रतिशत बढ़कर 99.77 पर कारोबार कर रहा है, जो दुनिया की अन्य मुद्राओं पर दबाव डाल रहा है।
कच्चा तेल: वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' वायदा बाजार में 4.84 प्रतिशत के बड़े उछाल के साथ 106.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
शेयर बाजार: गुरुवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजारों में हाहाकार मचा। सेंसेक्स 1,312.91 अंक (1.80%) लुढ़ककर 71,821.41 पर और निफ्टी 410.45 अंक (1.81%) गिरकर 22,383.40 पर आ गया।
विदेशी निकासी: एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी शुद्ध बिकवाली की है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "कच्चे तेल की ऊंची कीमत, बढ़ता व्यापार घाटा, घटते रेमिटेंस की आशंका और लगातार FPI बिकवाली एक साथ मिलकर रुपये पर भारी दबाव डाल रहे हैं"। 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर हुई है।
जीएसटी कलेक्शन में तेजी
विदेशी मोर्चे पर चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से एक बड़ी राहत की खबर है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात और घरेलू बिक्री में तेजी के दम पर मार्च में जीएसटी राजस्व लगभग 9 प्रतिशत बढ़ा है। टैक्स कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है, जो 2025-26 के वित्तीय वर्ष में तीसरी सबसे बड़ी मासिक वसूली है।
अब आगे क्या?
रिजर्व बैंक की ओर से उठाए गए कदमों से गिरता रुपया फिलहाल थम गया है। लेकिन रिकॉर्ड महंगाई और कच्चे तेल की कीमतें जो 106 डॉलर का स्तर पार कर चुका है, से भारत का आयात बिल बढ़ना तय है। ऐसे में आने वाले समय में रुपये की स्थिरता बहुत हद तक पश्चिम एशिया के तनाव और विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की वापसी पर निर्भर करेगी।
पेट्रोकेमिकल उद्योग को राहत, 30 जून तक ड्यूटी में छूट
2 Apr, 2026 09:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों और आम जनता को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में छूट देने का एलान किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह रियायत 30 जून तक लागू रहेगी। इस कदम का मकसद पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष प्रभावित होने वाली आपूर्ति शृंखला को दुरुस्त करने के लिए प्रमुख सेक्टर्स को कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
पश्चिम एशिया तनाव और कच्चे तेल में उबाल
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इस युद्ध के कारण महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग बाधित हुए हैं, जिससे भारत में उर्वरक (फर्टिलाइजर), कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। गौरतलब है कि भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का एक प्रमुख आयातक देश है। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत का भारी उछाल आ चुका है।
उद्योगों के लिए रणनीतिक राहत
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, कस्टम ड्यूटी में छूट का मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल इनपुट की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और डाउनस्ट्रीम (आश्रित) क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम करना है।
सरकार ने जिन प्रमुख उत्पादों को कस्टम ड्यूटी से मुक्त किया है, उनमें मेथेनॉल, निर्जल अमोनिया, टोल्यूनि , स्टाइरीन, डाइक्लोरोमेथेन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर और अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इस फैसले से निम्नलिखित सेक्टर्स को सीधा फायदा होगा:
प्लास्टिक्स और पैकेजिंग: कच्चे माल की लागत घटने से इस सेक्टर में उत्पादन सस्ता होगा।
टेक्सटाइल्स: कपड़ा उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट्स को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने में मदद मिलेगी।
फार्मा और केमिकल्स: दवा उद्योग और रसायन क्षेत्र को सप्लाई में स्थिरता मिलेगी।
ऑटो कंपोनेंट्स: ऑटोमोबाइल कलपुर्जे बनाने वाले उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन लागत घटने का फायदा अंतिम उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के असर से आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने पिछले सप्ताह ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की थी। इस कटौती के बाद वर्तमान में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क मात्र 3 रुपये प्रति लीटर रह गया है, जबकि डीजल पर उत्पाद शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगा दिया है।
बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप: RBI ने 14 बैंकों को दंडित किया, एक बैंक का लाइसेंस रद्द
2 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बैंकिंग सेक्टर में नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। ताकि ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके। मार्च में आरबीआई ने कई बैंकों के खिलाफ सख्ती दिखाई है। 14 बैंकों पर पेनल्टी लगाई है। इस लिस्ट में कई पब्लिक सेक्टर और सहकारी बैंक शामिल हैं। वहीं एक बैंक को हमेशा के लिए बंद भी कर दिया गया है, लाइसेंस रद्द करने का आदेश सेंटर बैंक ने जारी किया था। कुछ पर प्रतिबंध भी लगाया गया है, अस्थायी रूप से कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने 14 बैंकों पर जुर्माना लगाया है। सभी ने नियमों का उल्लंघन किया है, जिसका पता निरीक्षण के दौरान चला था। कारण बताओ नोटिस पर प्राप्त जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार आरोप साबित होने के बाद पेनल्टी लगाई गई। हालांकि यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है, इसलिए इसका असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट पर नहीं पड़ेगा।
इन बैंकों पर लगा जुर्माना
एयरटेल पेमेंट्स बैंक लिमिटेड
दावनगेरे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
इटावा में स्थित नगर सहकारी बैंक लिमिटेड, उत्तर प्रदेश
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया
बैंक ऑफ़ इंडिया
सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया
द तनूर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, केरल
लोकनेते आरडी अप्पा क्षीरसागर सहकारी बैंक लिमिटेड, निफाद, महाराष्ट्र
द पाली डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, राजस्थान
कोडागु डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
द मैसूर एंड चमराजनगर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव सेंट्रल बैंक लिमिटेड, कर्नाटक
हॉन्ग कोंग एंड शांगहाई बैंकिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड
वलचंदनगर में स्थित वलचंदनगर सहकारी बैंक लिमिटेड, महाराष्ट्र
द पल्लिकाेंडा को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, तमिलनाडु
इस बैंक का लाइसेंस रद्द
आरबीआई ने कर्नाटक में स्थित शिमशा सहकारा बैंक नियमिथा का लाइसेंस रद्द करने का आदेश मार्च 2026 में जारी किया है। अब इसे बैंकिंग कारोबार करने की अनुमति नहीं होगी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस बैंक को 24 मई 2026 तक बिजनेस बंद रखने का आदेश दिया था। जिसे खारिज कर दिया गया है।
इन बैंकों पर लगा प्रतिबंध
आरबीआई ने लखनऊ में स्थित द यूपी सिविल सेक्रेटेरिएट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड और गुजरात में स्थित राज्य कर्मचारी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड अहमदाबाद पर प्रतिबंध लगाया गया है। दोनों को 11 मार्च से कारोबार बंद करने का निर्देश दिया है। वहीं कनक पट्टन सहकारी बैंक नियमित दावणगेरे को 12 मार्च से बिजनेस बंद करने का आदेश जारी किया है। तीनों बैंकों यह आदेश 6 महीने तक लागू रहेगा। गहकों को पैसे निकालने की अनुमति नहीं होगी। इस दौरान रिजर्व बैंक बैंकों के स्थिति की समीक्षा करेगा।
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