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New Labor Codes: नई श्रम संहिता से बदलेगी नौकरी की तस्वीर, 60% कामगारों को कार्य स्थितियां सुधरने की उम्मीद
10 Feb, 2026 06:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश में नई श्रम संहिता लागू होने से पहले ही कामगारों और नियोक्ताओं के बीच उम्मीद का माहौल दिख रहा है। ज्यादातर श्रमिकों को भरोसा है कि नए श्रम कानून लागू होने के बाद कार्यस्थल की स्थितियां सुधरेंगी। काम के घंटे तय होंगे, वेतन भुगतान में पारदर्शिता आएगी और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा। एक बड़े सर्वे में यह दावा किया गया है कि श्रम सुधारों को लेकर जमीनी स्तर पर सकारात्मक सोच बन रही है।नोएडा स्थित वीवी गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान ने श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच यह सर्वे किया। सर्वे के अनुसार करीब 60 फीसदी श्रमिकों का मानना है कि नई श्रम संहिता से काम करने की स्थितियां बेहतर होंगी। 63 फीसदी कामगारों को उम्मीद है कि काम के घंटों के नियमन में सुधार आएगा। यह संस्थान श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करता है। सर्वे में 5,720 श्रमिकों और 715 नियोक्ताओं से बातचीत की गई।
वेतन पारदर्शिता और समय पर भुगतान की उम्मीद
सर्वे में 64 फीसदी श्रमिकों ने कहा कि नई व्यवस्था से वेतन भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी। 54 फीसदी कामगारों को भरोसा है कि सैलरी समय पर मिलेगी। आय सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। 68 फीसदी श्रमिकों ने ई-श्रम और कल्याण बोर्ड के जरिए सुविधाओं तक आसान पहुंच की उम्मीद जताई है। बड़ी संख्या में श्रमिकों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम से शिकायत और पंजीकरण की प्रक्रिया आसान होगी।
गिग, प्रवासी और अनुबंध कर्मचारियों को फायदा
करीब 63 फीसदी श्रमिकों का मानना है कि नए श्रम कानूनों से अनुबंध, प्रवासी और गिग यानी अस्थायी काम करने वाले कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा। अभी तक इन वर्गों को योजनाओं का पूरा फायदा नहीं मिल पाता था। नई श्रम संहिता में इनके लिए अलग प्रावधान जोड़े गए हैं। इससे असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सुरक्षा कवच मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
नियोक्ताओं ने भी सुधारों को बताया जरूरी
सर्वे में शामिल 76 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि नए श्रम कानूनों से कार्यबल में लचीलापन आएगा, जो कारोबार के लिए जरूरी है। 64 फीसदी नियोक्ताओं का मानना है कि निश्चित अवधि का रोजगार मॉडल उनके बिजनेस के लिए उपयुक्त रहेगा। 73 फीसदी नियोक्ताओं ने कहा कि लंबे समय में नियमों का अनुपालन आसान होगा और कानूनी जटिलताएं कम होंगी। इससे उद्योग जगत को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर जोर
करीब 66 फीसदी कामगारों ने माना कि नए नियमों से महिला कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। सुरक्षा और परिवहन से जुड़े अनिवार्य प्रावधानों से कार्यस्थल ज्यादा सुरक्षित होंगे। 60 फीसदी श्रमिकों ने कहा कि छुट्टी से जुड़े नियम भी पहले से बेहतर होंगे। इससे काम और निजी जीवन के संतुलन में मदद मिलेगी। महिला भागीदारी बढ़ाने के लक्ष्य को भी इससे बल मिलने की बात कही गई है।
एक अप्रैल से लागू करने की तैयारी
केंद्र सरकार चारों श्रम कानून पहले ही अधिसूचित कर चुकी है। नियमों के मसौदे पर सुझाव भी मांगे जा चुके हैं। सरकार की योजना एक अप्रैल 2026 से इन्हें पूरी तरह लागू करने की है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इन सुधारों का लक्ष्य सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक काम और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
Investors: सोना-चांदी में तेज गिरावट के बाद निवेशकों का रुख बदला, मल्टी एसेट फंड बने नया सहारा; जोखिम भी कम
10 Feb, 2026 06:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पिछले कुछ महीनों में तिहरे अंकों में रिटर्न एवं आगे और तेजी की उम्मीद से निवेशकों ने चांदी में जमकर निवेश किया। लेकिन, हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में एक ही दिन में आई 25 फीसदी की भारी गिरावट से निवेशकों में दहशत फैल गई। चांदी से सावधान रहने वाले निवेशकों ने सोने को चुना, जिसकी कीमतों में भी पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारी गिरावट देखने को मिली है।
ने मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स का विकल्प
सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट के बीच निवेशकों ने मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स का विकल्प चुना। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को ऐसे म्यूचुअल फंड्स का विकल्प चुनना चाहिए, जो कमोडिटी और इक्विटी में निवेश का मिश्रण प्रदान करते हैं। इससे पोर्टफोलियो में विविधता और संतुलन आती है और जोखिम कम होता है। जैसे मल्टी एसेट एलोकेशन म्यूचुअल फंड्स। मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स कम से कम तीन अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों इक्विटी, ऋण और कमोडिटीज में निवेश करते हैं। इसमें सोना और चांदी भी शामिल हैं, जिनमें हाल के दिनों में भारी उतार-चढ़ाव दिखा है।
सेबी के निर्देश की भी बाध्यता
सेबी के तय निर्देशों के मुताबिक, मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के लिए कम से कम 10 फीसदी निवेश तीन एसेट क्लास में करना अनिवार्य है। फंड मैनेजरों को किसी भी समय एसेट क्लास के प्रदर्शन के आधार पर निवेश मिश्रण तय करने की स्वतंत्रता होती है।मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने निवेशकों को ऐसे समय में विविधीकरण का अवसर दिया, जब इक्विटी बाजार अस्थिर थे और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में रिटर्न अपेक्षाकृत कम था। मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने हाइब्रिड फंड्स से भी बेहतर प्रदर्शन किया है।मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने पिछले कुछ वर्षों में शानदार रिटर्न दिया है। इनमें निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड सबसे आगे है। फंड ने एक, दो और तीन वर्षों में क्रमशः 23.97 फीसदी, 20.47 फीसदी और 22.62 फीसदी का रिटर्न दिया है।वास्तव में, शीर्ष-10 मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने पिछले एक वर्ष में औसतन 20.26 फीसदी और तीन वर्षों में 21.01 फीसदी की सीएजीआर से वृद्धि दर्ज की है। इसकी तुलना में, शीर्ष-10 इक्विटी फंड्स का रिटर्न एक वर्ष में मात्र 16.62 फीसदी रहा है।
भारत ने सेशेल्स के लिए खोला खजाना, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार
9 Feb, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदार देश सेशेल्स के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच सोमवार को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में विकास से जुड़ी साझेदारी को केंद्र में रखा गया। इस दौरान दोनों नेताओं ने 'सेशेल' विजन को अपनाया, जिसका मकसद स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। भारत ने सेशेल्स की विकास से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की है, जो वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक हाउसिंग सेक्टर को मजबूती देगा। सेशेल विजन और विशेष आर्थिक पैकेज इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे अहम दस्तावेज रहा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस विजन के तहत भारत ने सेशेल्स के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज का एलान किया है। यह फंड मुख्य रूप से पब्लिक हाउसिंग, मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
ब्लू इकोनॉमी से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक समझौते
हैदराबाद हाउस में हुई इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई अहम समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। इनमें स्वास्थ्य, डिजिटल सहयोग, मौसम विज्ञान, संस्कृति, महासागर विज्ञान, खाद्य सुरक्षा और गवर्नेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों नेताओं ने ब्लू इकोनॉमी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सेक्टर्स में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। सेशेल्स की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन और समुद्री संसाधन बेहद अहम हैं, ऐसे में भारत का सहयोग वहां की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करने में मदद करेगा।
विजन 'सागर' और रणनीतिक महत्व
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे। सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के 'विजन सागर' का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि एक समुद्री पड़ोसी के रूप में, सेशेल्स का समर्थन इस क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा के लिए बेहद मूल्यवान है। समुद्री सुरक्षा पर हुई चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।
मुंबई और चेन्नई में निवेश पर चर्चा
राष्ट्रपति हर्मिनी का यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से बिजनेस सेंट्रिक भी रहा है। दिल्ली पहुंचने से पहले उन्होंने चेन्नई और मुंबई में समय बिताया, जहां उन्होंने गवर्नेंस, इंडस्ट्री और कोस्टल मैनेजमेंट से जुड़े प्रमुख स्टेकहोल्डर्स के साथ मुलाकात की। पिछले साल अक्तूबर में पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो पांच दिनों तक चलेगा। रविवार को दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया था और सोमवार को उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
Pakistan Economic Crisis: कर्ज के बोझ तले कराह रहा पाकिस्तान, कर्जा लेकर चल रहे रोजमर्रा के खर्चे
9 Feb, 2026 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से गहराते आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में बढ़ता बाहरी कर्ज, सुस्त आर्थिक वृद्धि और कमजोर संरचनात्मक सुधार, जो दशकों की खराब शासन व्यवस्था और बाहरी वित्तपोषण पर अत्यधिक निर्भरता का नतीजा हैं। यह देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना रहे हैं।
पाकिस्तान का कुल कर्ज 134 अरब डॉलर तक पहुंचा
वन वर्ल्ड ऑउटलुक में प्राकिशत लेख के अनुसार पाकिस्तान का कुल बाहरी कर्ज 2025 के अंत तक लगभग 134 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश को 23-26 अरब डॉलर के बाहरी ऋण सेवा (मूलधन और ब्याज सहित) का सामना करना है, जिससे भुगतान संतुलन पर गंभीर दबाव है।
सहयोगी देशों के भरोसे जीने को मजबूर है पाकिस्तान
हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा पाकिस्तान के 2 अरब डॉलर के कर्ज का रोलओवर किया जाना इस नाजुक वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के अस्थायी उपाय पाकिस्तान के सहयोगी देशों UAE, सऊदी अरब और चीन पर निरंतर निर्भरता को रेखांकित करते हैं। इनके सहारे पाकिस्तान तत्काल डिफॉल्ट जोखिम टलता रहा है। हालांकि, यूएई द्वारा केवल एक महीने का विस्तार देना जोखिम धारणा में बदलाव या भू-राजनीतिक कारणों की ओर भी इशारा करता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ सुधार जरूर दिखा है।
जनवरी 2026 के अंत तक कुल तरल भंडार 21.29 अरब डॉलर तक पहुंच गया, लेकिन आगामी परिपक्वताओं और आयात आवश्यकताओं के चलते यह स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 7 अरब डॉलर की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF), जिसे सितंबर 2024 में मंजूरी मिली थी, स्थिरता के लिए अहम रही है।
दिसंबर 2025 में दूसरे रिव्यू के पूरा होने के बाद किस्त जारी हुई, लेकिन आगे की प्रगति वित्तीय अनुशासन, कर आधार विस्तार और सार्वजनिक उपक्रमों (SOE) के सुधारों पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल द्विपक्षीय रोलओवर प्रतिबद्धताएं करीब 12 अरब डॉलर की हैं, लेकिन शर्तें अब पहले की तुलना में अधिक व्यावसायिक होती दिख रही हैं।
आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के साथ रोजगार संकट भी गहराता जा रहा है
आधिकारिक बेरोजगारी दर 2024-25 में बढ़कर करीब 6.9% हो गई, जबकि 2020-21 से 2024-25 के बीच बेरोजगारों की संख्या में 31% (लगभग 14 लाख) की वृद्धि दर्ज की गई।
सीमित अवसरों, ठहरी हुई मजदूरी और बढ़ती महंगाई के कारण बड़ी संख्या में लोग काम की तलाश में विदेश जा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था की मौजूदा वृद्धि दर करीब 3% रही है, जो तेजी से बढ़ती आबादी और हर साल आवश्यक 15 लाख नई नौकरियों के लिहाज से नाकाफी मानी जा रही है।
आईएमएफ कार्यक्रमों के तहत करों और ऊर्जा शुल्क में बढ़ोतरी, साथ ही प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ के असर ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं।
The Bonus Market Update: हरे निशान पर खुला घरेलू शेयर बाजार; सेंसेक्स 416 अंक चढ़ा, निफ्टी 25800 के पार
9 Feb, 2026 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय शेयर बाजार सोमवार को हरे निशान पर खुला। विदेशी निधियों के प्रवाह, एशियाई बाजारों में तेजी और भारत और अमेरिका के बीच नए व्यापार समझौते के बाद उत्पन्न आशावाद के चलते सोमवार को शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सकारात्मक रुख के साथ खुले।शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 415.97 अंक बढ़कर 83,996.37 पर पहुंच गया। वहीं 50 शेयरों वाल निफ्टी 126.05 अंक बढ़कर 25,819.75 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे बढ़कर 90.44 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाइटन, इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, टाटा स्टील, सन फार्मास्यूटिकल्स, लार्सन एंड टुब्रो, अदानी पोर्ट्स, इंडिगो, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारती एयरटेल लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल थे। दूसरी ओर, पावरग्रिड, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचडीएफसी बैंक पिछड़ने वालों में शामिल थे।
विदेशी निवेशकों ने पिछले कारोबारी दिनों में खरीदारी की
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि एफआईआई (वित्तीय द्वितीय विश्व निवेशक) जो बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे थे, उन्होंने पिछले चार कारोबारी दिनों में से तीन में कैश मार्केट में खरीदारी की है। डेरिवेटिव बाजार में लगातार भारी नेट शॉर्ट पोजीशन बनी रहने से शॉर्ट कवरिंग की उम्मीदों के चलते बाजार को मजबूती मिल सकती है।उन्होंने आगे कहा कि हालिया 'मानवजनित संकट' का असर आईटी क्षेत्र में बाजार की भावनाओं पर पड़ता रहेगा। इसके विपरीत, ऋण वृद्धि में सुधार की खबरों के चलते बैंकिंग शेयरों में मजबूती आने की संभावना है, जिसका वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी वृद्धि और कंपनियों की आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, जापान का निक्केई 225, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का एसएसई कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुए।जापान में चल रहे राजनीतिक परिणामों का दिखा असर एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च के प्रमुख देवरश वकील ने कहा कि सनाए ताकाइची के नेतृत्व वाली जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने निर्णायक जीत हासिल की, जिससे निक्केई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।उन्होंने कहा कि ताकाइची की "आर्थिक सुरक्षा" नीति के तहत जापानी पूंजी के चीन से दूर हटने से भारतीय शेयरों को लाभ होने की संभावना है, और भारतीय बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अरबों डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने की उम्मीद है।भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी दिखा असर वकील ने आगे कहा कि भारत और अमेरिका शनिवार को एक अंतरिम व्यापार समझौते पर पहुंच गए, जिससे उनके दस महीने से चल रहे टैरिफ युद्ध का अंत हो गया, जिसमें वाशिंगटन ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया।भारत ने डेयरी जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सफलतापूर्वक रक्षा की, साथ ही ऊर्जा, विमान और रक्षा प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करते हुए पांच वर्षों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई।उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता रणनीतिक रूप से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों और एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाली "पैक्स सिलिका" पहल में एकीकृत करता है, जिससे भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रतिसंतुलन के रूप में स्थापित होता है।ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 67.41 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 0.94 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 67.41 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 1,950.77 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 266.47 अंक बढ़कर 83,580.40 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50.90 अंक चढ़कर 25,693.70 पर समाप्त हुआ।
Gold Silver Price Today: आज सर्राफा बाजार में तेजी, चांदी की कीमतों में ₹14800 का उछाल, सोना करीब ₹3000 महंगा
9 Feb, 2026 09:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीते सप्ताह की भारी उतार-चढ़ाव के बाद सोमवार को सोना और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। बुलियन की वेबसाइट के अनुसार चांदी 14800 रुपये उछलकर 2.65 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोना 3050 रुपये चढ़कर 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।शुरुआती कारोबार में एमसीएक्स पर चांदी 5,185 रुपये महंगी होकर 2.49 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 3,428 रुपये चढ़कर 1.55 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने-चांदी का भाव
एशियाई कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड करीब 1.18% चढ़कर $5,040 प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि स्पॉट सिल्वर में 3.39% की तेज बढ़त दर्ज की गई और यह $79.89 प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।हालांकि, मौजूदा उछाल के बावजूद दोनों कीमती धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से अभी भी नीचे हैं। सोना अपने सर्वकालिक उच्च $5,608.35 से करीब 11.27% नीचे बना हुआ है, वहीं चांदी 29 जनवरी को बने $121.67 के ऑल-टाइम हाई से लगभग 52.29% फिसल चुकी है।
क्या है ये तेजी का कारण?
बाजार में तेजी का प्रमुख कारण जापान में सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री साने ताकाइची की निर्णायक चुनावी जीत रहा। नतीजों के बाद अधिक उदार राजकोषीय नीति की उम्मीदें मजबूत हुई हैं और येन पर दबाव बना हुआ है, दोनों ही कारक सोने के लिए सकारात्मक माने जाते हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यही उम्मीदें कीमती धातुओं की मांग को सहारा दे रही हैं।
अमेरिकी आंकड़ों पर फोकस
निवेशक अब अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक संकेतकों का इंतजार कर रहे हैं, जिनसे फेडरल रिजर्व की आगे की नीति पर संकेत मिल सकते हैं। जनवरी का रोजगार आंकड़ा बुधवार को आने की संभावना है, जिससे श्रम बाजार में स्थिरता के संकेत मिलने की उम्मीद है। वहीं, महंगाई से जुड़े आंकड़े शुक्रवार को जारी होंगे।
पिछले हफ्ते क्यों टूटी थीं कीमतें?
पिछले सप्ताह सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखी गई थी। इसकी वजह मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और वास्तविक यील्ड्स में बढ़ोतरी रही, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की चमक कुछ फीकी पड़ी। कुल मिलाकर, अल्पकाल में राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी मैक्रो डेटा की दिशा सोना-चांदी की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
आज फिर बदल गए पेट्रोल-डीजल के रेट, जानें सोमवार को आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ
9 Feb, 2026 07:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत में हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की रोशनी से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों के साथ होती है. सुबह 6 बजे देश की तेल कंपनियां ताजा रेट जारी करती हैं. इन कीमतों का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो या सामान ढोने वाला ट्रक ड्राइवर, हर कोई इन दामों से प्रभावित होता है.
पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई वजहों से तय होती हैं. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और टैक्स की भूमिका इसमें सबसे अहम होती है. यही वजह है कि कभी राहत की उम्मीद बनती है तो कभी महंगाई का डर सताने लगता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार से भारत तक कैसे पहुंचता है असर
फरवरी 2026 के लिए यूएई ने फ्यूल की कीमतों में हल्की कटौती का ऐलान किया है. इससे यह संकेत मिला कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिल रही है. हालांकि भारत में इसका असर तुरंत और पूरी तरह दिखे, यह जरूरी नहीं है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है. ऐसे में वैश्विक बाजार में होने वाला हर छोटा बदलाव घरेलू कीमतों को प्रभावित करता है. अगर कच्चा तेल सस्ता होता है तो लोगों को राहत की उम्मीद होती है, लेकिन टैक्स और अन्य खर्चों के चलते यह राहत कई बार जेब तक पहुंचते पहुंचते कमजोर हो जाती है.
पेट्रोल डीजल के ताजा रेट
आज जारी कीमतों के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है. मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. कोलकाता में पेट्रोल 105.45 रुपये और डीजल 92.02 रुपये प्रति लीटर है.
चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 100.84 रुपये और डीजल 92.39 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है. अहमदाबाद में पेट्रोल 94.68 रुपये और डीजल 90.35 रुपये प्रति लीटर है. बैंगलोर में पेट्रोल 102.92 रुपये और डीजल 90.99 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
हैदराबाद में पेट्रोल 107.50 रुपये और डीजल 95.70 रुपये प्रति लीटर है. जयपुर में पेट्रोल 104.91 रुपये और डीजल 90.38 रुपये प्रति लीटर पर है. लखनऊ में पेट्रोल 94.69 रुपये और डीजल 87.81 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है.
पुणे में पेट्रोल 103.87 रुपये और डीजल 90.40 रुपये प्रति लीटर है. इंदौर में पेट्रोल 106.81 रुपये और डीजल 92.18 रुपये प्रति लीटर दर्ज हुआ है. पटना में पेट्रोल 105.41 रुपये और डीजल 91.66 रुपये प्रति लीटर है. सूरत में पेट्रोल 94.69 रुपये और डीजल 90.38 रुपये प्रति लीटर पर है. नासिक में पेट्रोल 104.50 रुपये और डीजल 91.02 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है.
आम आदमी पर क्या पड़ता है असर
पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ वाहन चालकों को ही प्रभावित नहीं करते. इनके बढ़ते दामों से ट्रांसपोर्ट महंगा होता है. जब माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है तो सब्जी, फल और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें भी महंगी हो जाती हैं. यही वजह है कि फ्यूल की कीमतें हर परिवार के बजट को झकझोर देती हैं. जब कीमतों में स्थिरता रहती है या थोड़ी गिरावट आती है तो आम आदमी को थोड़ी राहत महसूस होती है. हालांकि मौजूदा रेट्स को देखें तो बड़े स्तर पर राहत की तस्वीर अभी साफ नहीं दिखती.
शादियों के सीजन से पहले बड़ी राहत! सोने की कीमतों में आई भारी कमी, यहाँ देखें अपने शहर का लेटेस्ट रेट कार्ड
9 Feb, 2026 07:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सोने की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव जारी है. दो दिन की छुट्टी के बाद सोमवार 9 फरवरी 2026 को जैसे ही बाजार खुले, सोने के दामों में नरमी देखने को मिली. बीते कुछ हफ्तों से सोना लगातार नई ऊंचाई बना रहा था, लेकिन अब कीमतों में गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों का ध्यान खींचा है.
आज सुबह दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना गिरकर 1,57,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इससे पहले इसका बंद भाव 1,60,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था. यानी कीमत में एक झटके में बड़ा अंतर देखने को मिला है.
रिकॉर्ड ऊंचाई से फिसला सोना
जनवरी के आखिर में सोने ने ऐसा स्तर छुआ था, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. 29 जनवरी 2026 को सोना करीब 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. इस ऊंचाई के बाद बाजार में मुनाफावसूली शुरू हुई और धीरे धीरे दाम नीचे आने लगे. जानकारों का कहना है कि जब भी सोना बहुत तेजी से ऊपर जाता है, तो निवेशक मुनाफा निकालना शुरू कर देते हैं. यही वजह है कि अब कीमतों में ठहराव और गिरावट देखने को मिल रही है.
वायदा बाजार में क्या रहा हाल
घरेलू बाजार के साथ साथ वायदा बाजार में भी हलचल दिखी. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव सुबह कमजोरी के साथ खुला, लेकिन बाद में दिनभर की गिरावट काफी हद तक संभल गई. कारोबार के दौरान सोना करीब 1,53,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास देखा गया. पिछले सत्र में सोना 1,52,071 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था. यानी वायदा बाजार में भी कीमतें फिलहाल स्थिर होने की कोशिश कर रही हैं.
24 कैरेट सोना 1,52,078 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा.
23 कैरेट सोना 1,51,469 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया.
22 कैरेट सोना 1,39,303 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा.
18 कैरेट सोना 1,14,059 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा.
14 कैरेट सोना 88,966 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ.
Biz Updates: फोर्ब्स ग्लोबल प्रॉपर्टीज का भारत के लिए बड़ा एलान; बैंकिंग क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी
9 Feb, 2026 07:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
फोर्ब्स ग्लोबल प्रॉपर्टीज ने भारत में अपने विस्तार को लेकर दीर्घकालिक रणनीति ‘मिशन 2030’ का अनावरण किया है। इस रणनीति के तहत कंपनी रेजिडेंशियल, कमर्शियल और एडवाइजरी सेगमेंट में लग्जरी रियल एस्टेट को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने पर ध्यान देगी। कंपनी का कहना है कि भारत में संपत्ति सृजन, वैश्विक पूंजी निवेश और हाई-नेट-वर्थ तथा अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ लोगों की बढ़ती संख्या के कारण रियल एस्टेट एक अहम एसेट क्लास बन चुका है। अब यह केवल आवास तक सीमित नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल, निवेश और दीर्घकालिक मूल्य से जुड़ा क्षेत्र बन गया है। फोर्ब्स ग्लोबल प्रॉपर्टीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइकल डब्ल्यू. जल्बर्ट ने कहा कि कंपनी भारत में ब्रांडेड लग्जरी सेगमेंट में ग्राहकों की बेहतर मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कंपनी वर्तमान में 38 देशों में 600 कार्यालयों के साथ काम कर रही है और भारत को लेकर उसकी बड़ी योजनाएं हैं। कंपनी की डायरेक्टर मणि गुप्ता ने कहा कि भारत में ब्रांडेड रेजिडेंस की मांग तेजी से बढ़ रही है। मिशन 2030 के जरिए इन परियोजनाओं को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और संगठित तरीके से विकसित किया जाएगा, जिससे गुणवत्ता और निवेश पर बेहतर रिटर्न सुनिश्चित हो सके।1,200 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला, चावल कंपनी के दो प्रवर्तक भगोड़े आर्थिक अपराधी घोषित राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष अदालत ने दिल्ली की अमीरा प्योर फूड्स प्राइवेट लि. के दो प्रमोटरों को बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया है। उनके खिलाफ 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी का आरोप है। विशेष न्यायाधीश राजेश मलिक की अदालत ने शुक्रवार को एक आदेश में एपीएफपीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक करण ए चानना और उक्त कंपनी की पूर्णकालिक निदेशक अनीता डिंग को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने आरोपियों की 123 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का भी निर्देश दिया है। चानना ब्रिटेन में रहते हैं, जबकि डिंग दुबई में रहती हैं।विकसित भारत के लिए बैंकिंग क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी, बनेगी उच्चस्तरीय समिति केंद्र सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जल्द ही विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति ऐसा खाका तैयार करेगी, जिससे देश में बड़े और मजबूत बैंक बन सकें, जो विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकें। एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में वित्त मंत्री ने कहा, यह समिति बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और सुझाव देगी कि किस तरह बैंकिंग प्रणाली को इतना सक्षम बनाया जाए कि आम लोगों तक कर्ज और बैंकिंग सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें। इस पहल को सिर्फ सरकारी बैंकों के विलय तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए। 1 फरवरी के बजट भाषण में वित्त मंत्री इस समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था। बजट में सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी कंपनियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव दिया गया।केरल में धान बोनस को लेकर केंद्र- राज्य में टकराव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने धान किसानों को दी जा रही अतिरिक्त बोनस राशि को बंद करने संबंधी केंद्र सरकार के निर्देश को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है केंद्र के इस निर्देश पर केरल की एलडीएफ सरकार और मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन पहले ही कड़ी आपत्ति जता चुके हैं। राज्य सरकार ने इसे किसानों और केरल के प्रति केंद्र का “शत्रुतापूर्ण रवैया” करार दिया है। दरअसल, 9 जनवरी को वित्त मंत्री के व्यय सचिव वी. वुअलनाम ने केरल के मुख्य सचिव ए. जयथिलक को पत्र लिखकर राज्य से मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और अतिरिक्त प्रोत्साहन बंद करने पर विचार करने को कहा था। पत्र में तर्क दिया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की आवश्यकता से अधिक चावल का भंडार जमा हो गया है, जिससे सरकारी खजाने पर लगातार और बड़ा बोझ पड़ रहा है। इस मुद्दे पर अब केंद्र और राज्य के बीच सियासी खींचतान तेज होती दिख रही है।
India-US Trade Deal: अमेरिका को पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर शुल्क कटौती को लेकर असमंजस में उद्योग
9 Feb, 2026 06:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में पशु आहार और सोयाबीन तेल से जुड़े प्रावधानों को लेकर नई तस्वीर सामने आई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर बहुत सीमित रियायत दी गई है। यह छूट कोटा आधारित है और कुल घरेलू खपत का केवल एक छोटा हिस्सा कवर करती है। इससे बाजार और किसानों पर बड़े असर की आशंका को कम बताया जा रहा है।अधिकारियों के मुताबिक भारत ने डीडीजीएस यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन तक शुल्क रियायत दी है। देश में पशु चारे की कुल खपत करीब 500 लाख टन है। इस हिसाब से अमेरिकी कोटा सिर्फ एक फीसदी बैठता है। सरकार का कहना है कि यह आयात घरेलू कमी को पूरा करने और चारे की लागत को स्थिर रखने में मदद करेगा।
घरेलू बाजार पर दबाव घटाने की तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि डीडीजीएस के सीमित आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव कम होगा। इससे इंसानों के खाने लायक अनाज को पशु चारे में लगाने की जरूरत घटेगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन क्षेत्र को लागत में उतार-चढ़ाव से राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी मदद मिल सकती है।
बढ़ती मांग के कारण पहले भी हुआ आयात
पिछले कुछ वर्षों में मांग बढ़ने के कारण भारत को पशु आहार और उससे जुड़े उत्पादों का आयात करना पड़ा है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों के दबाव के चलते करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील आयात किया गया था। छह लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल से आया। इसके अलावा म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का तथा अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का आयात भी हुआ है।
सोयाबीन तेल और चारे पर उद्योग सतर्क
व्यापार समझौते के मसौदे का खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क स्वागत किया है। समझौते के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। बदले में भारत अमेरिकी औद्योगिक सामान, सोयाबीन तेल, पशु चारा, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाएगा या खत्म करेगा। हालांकि उद्योग जगत टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों के स्पष्ट विवरण का इंतजार कर रहा है।
कीमत और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा कि भारत सोयाबीन तेल के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए यह कदम अवसर भी हो सकता है। अभी अमेरिका से आने वाला तेल शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना के मुकाबले 30 से 40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। उद्योग संगठनों ने यह भी कहा कि अभी साफ नहीं है कि जेनेटिकली मोडिफाइड और गैर-जीएम उत्पादों पर सरकार क्या रुख अपनाएगी।
पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी: क्या आपके शहर में कीमतें बढ़ीं या मिली राहत? घर से निकलने से पहले चेक करें लेटेस्ट लिस्ट
8 Feb, 2026 07:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Petrol Diesel Price Today: देश में पेट्रोल और डीजल के दामों की रोजाना समीक्षा सुबह 6 बजे की जाती है. कई प्रमुख तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर तथा अन्य वैश्विक और घरेलू आर्थिक कारकों के आधार पर नई दरें तय करती हैं.
8 फरवरी को अधिकांश प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहीं. कुछ इलाकों में केवल मामूली बदलाव दर्ज किया गया, लेकिन बड़े पैमाने पर कोई उल्लेखनीय वृद्धि या कमी नहीं देखी गई. दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर टिका हुआ है. लोकसभा चुनाव से पहले बजट पेश होने वाला है, ऐसे में ईंधन कीमतों में यह स्थिरता आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है.
प्रमुख महानगरों में पेट्रोल के दाम
देश की राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल अब भी 94.77 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है. वित्तीय राजधानी मुंबई में यह दर 103.54 रुपये, कोलकाता में 105.41 रुपये और चेन्नई में 100.80 रुपये प्रति लीटर है. उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में गुड़गांव में 95.50 रुपये, नोएडा में 95.16 रुपये, लखनऊ में 94.69 रुपये और जयपुर में 104.62 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल बिक रहा है.
दक्षिण भारत में बेंगलुरु में पेट्रोल 102.92 रुपये, हैदराबाद में 107.50 रुपये और भुवनेश्वर में 101.03 रुपये प्रति लीटर है. पूर्वी क्षेत्र के पटना में 105.43 रुपये जबकि तिरुवनंतपुरम में 107.48 रुपये प्रति लीटर की दर देखने को मिल रही है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दक्षिणी और पूर्वी शहरों में पेट्रोल अन्य क्षेत्रों की तुलना में महंगा पड़ रहा है.
क्या है डीजल के रेट?
डीजल की बात करें तो दिल्ली में यह 87.67 रुपये प्रति लीटर पर है. मुंबई में 90.03 रुपये, कोलकाता में 92.02 रुपये और चेन्नई में 92.39 रुपये प्रति लीटर की दर लागू है. गुड़गांव में 87.97 रुपये, नोएडा में 88.31 रुपये, बेंगलुरु में 90.99 रुपये और भुवनेश्वर में 92.60 रुपये प्रति लीटर डीजल मिल रहा है.
उत्तर भारत में चंडीगढ़ डीजल के मामले में सबसे सस्ता साबित हो रहा है, जहां यह मात्र 82.45 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है. वहीं हैदराबाद में 95.70 रुपये, जयपुर में 90.12 रुपये, लखनऊ में 87.81 रुपये, पटना में 91.67 रुपये और तिरुवनंतपुरम में 96.48 रुपये प्रति लीटर की दर है.
सोना-चांदी खरीदने का प्लान है? दुकान जाने से पहले देख लें आज की रेट लिस्ट, कीमतों ने फिर चौंकाया
8 Feb, 2026 07:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में शनिवार को सोने की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. पिछले दो सत्रों में आई गिरावट के बाद निवेशकों की सक्रिय खरीदारी से कीमती धातु में एक दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली.
यह उछाल बाजार में नए भरोसे और वैश्विक संकेतों के सकारात्मक प्रभाव का संकेत दे रहा है. शादी के मौसम में भौतिक मांग भी इस रैली को सहारा दे रही है.
कितना बदला सोना-चांदी के भाव
देश भर में 24 कैरेट सोना 15,660 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया, जो कल की तुलना में 289 रुपये की बढ़ोतरी दर्शाता है. इसी तरह 22 कैरेट सोना 14,355 रुपये प्रति ग्राम (कल से +265 रुपये) और 18 कैरेट सोना 11,745 रुपये प्रति ग्राम (कल से +217 रुपये) पर कारोबार कर रहा है. वहीं चांदी की बात करें तो, कल के मुकाबले इसके दाम बढ़े हैं. दिल्ली में शनिवार को चांदी की कीमत 274.90 रुपये प्रति ग्राम था. वहीं एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2,74,900 दर्ज किया गया. वहीं आज यानी रविवार को चांदी ₹285 प्रतिग्राम और ₹2,85,000 प्रति किलो है.
प्रमुख शहरों में सोने के दाम
मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोच्चि और पुणे में 24 कैरेट सोना 15,660 रुपये प्रति ग्राम पर स्थिर है. दिल्ली में यह थोड़ा प्रीमियम पर 15,675 रुपये, जबकि चेन्नई में 15,731 रुपये प्रति ग्राम है. अहमदाबाद में 15,665 रुपये दर्ज किया गया.
शहर
24K
22K
18K
मुंबई
15,660
14,355
11,745
दिल्ली
15,675
14,370
11,760
कोलकाता
15,660
14,355
11,745
चेन्नई
15,731
14,420
12,350
बेंगलुरु
15,660
14,355
11,745
India Us Trade Deal: विकसित भारत की यात्रा के लिए अहम समझौता; बोले पीयूष गोयल
7 Feb, 2026 02:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर ( करीब 45,29,069.80 रुपये) के व्यापार समझौते के लिए एक अंतरिम ढांचे पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय है, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में पैठ बढ़ाने का एक बड़ा मौका भी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को अमेरिका के साथ हुई इस डील पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनाने की दिशा में यह समझौता अहम साबित होगा।गोयल ने कहा कि हमारे निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था मोस्ट प्रीफर्ड ड्यूटी के साथ खुलती है। कल देर रात जो भारत-अमेरिका के बीच संयुक्त बयान तय हुआ, दुनिया के सामने रखा गया, इसका हर तरफ स्वागत हुआ है।
India-US Deal: 'अमेरिकी किसानों-उत्पादकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार होगा', समझौते पर और क्या बोला यूएसटीआर
7 Feb, 2026 10:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की अंतिम रूपरेखा पर मुहर लग चुकी है। जिसे लेकर दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया। अब इस कड़ी में संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) का बयान सामने आया है। जिसमें कहा गया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से अमेरिकी किसानों और उत्पादकों का नए बाजार में पहुंच का विस्तार होगा। बयान में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ व्यापार समझौते के तहत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक में अमेरिकी किसानों और उत्पादकों की पहुंच का विस्तार कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश व्यापार नीतियों को विकसित करने और बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार एजेंसी ने आगे कहा कि भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त करने या कम करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है।यूएसटीआर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, 'मेवों और सूखे आसवन अनाज (डीडीजी) से लेकर लाल ज्वार और ताजे और प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) फलों तक, व्यापार समझौता अमेरिकी उत्पादों के लिए नए बाजार तक पहुंच प्रदान करेगा।'एक अन्य पोस्ट में कहा , 'राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी किसानों और उत्पादकों की दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक तक पहुंच का विस्तार कर रहे हैं, जिसके तहत भारत ने सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त करने या कम करने, व्यापार में लंबे समय से चली आ रही गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने, अधिक अमेरिकी सामान और सेवाएं खरीदने और 500 बिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पादों की खरीद करने की प्रतिबद्धता जताई है।'
किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर होंगे पैदा: ग्रीर
इस समझौते की सराहना करते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'समझौते' करने के प्रयासों से अमेरिकी श्रमिकों और उत्पादकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के द्वार खुल रहे हैं। ग्रीर ने एक बयान में कहा, 'आज की घोषणा संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच गहरे होते संबंधों को दर्शाती है, क्योंकि हम दोनों देशों के किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।'
भारत भी टैरिफ बाधाए खत्म करेगा
व्हाइट हाउस ने भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में कहा कि दोनों पक्ष आपसी और पारस्परिक रूप से फायदेमंद व्यापार पर एक अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं।ग्रीर ने कहा कि ट्रंप के सौदेबाजी से सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए टैरिफ कम हो रहे हैं, जबकि भारत के 1.4 अरब से अधिक लोगों के बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के साथ निष्पक्ष और संतुलित व्यापार हासिल करने की दिशा में नेतृत्व और प्रतिबद्धता के लिए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को धन्यवाद दिया।
आज से खत्म होगा अमेरिका का अतिरिक्त टैरिफ: भारतीय आमजन के लिए क्या बदलेगा? जानें व्यापार समझौते की अहम बातें
7 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी कर दी गई है। दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तय किया है और इस पर संयुक्त बयान जारी किया है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा मिलने की संभावना के तौर पर देखा जा रहा है। अंतरिम व्यापार समझौते के इस ढांचे में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी कटौती की है, जिससे निर्यात, रोजगार और MSME सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी बरकरार रखी है।जारी बयान में बताया गया है कि इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, रोजगार पैदा करना और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिका में सामान बेचना सस्ता और आसान हो जाएगा। आईए इस समझौते के अहम बिंदुओं को समझते है।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के अहम बिंदु
अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% किया गया, जिससे भारत के निर्यातकों को बड़ा बाजार मिलेगा।
आज से खत्म होगा भारत पर लगा अतरिक्त टैरिफ।
अमेरिका का लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार अब MSMEs, किसानों और मछुआरों के लिए खुला।
निर्यात बढ़ने से लाखों नए रोजगार, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए पैदा होंगे।
जेनेरिक दवाएं, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जों पर टैरिफ 0% होगा।
टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी में अवसर बढ़ेंगे।
गेहूं, चावल, मक्का, दूध, पनीर, पोल्ट्री और अन्य संवेदनशील उत्पादों पर कोई समझौता नहीं।
अमेरिका के कृषि और औद्योगिक सामान पर टैरिफ घटाए जाएंगे, जैसे मेवे, फल, सोयाबीन तेल, शराब और पशु आहार।
डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले जीपीयू, अन्य तकनीकी सामान और डिजिटल व्यापार में सहयोग बढ़ेगा।
दोनों देश मिलकर सप्लाई चेन मजबूत करेंगे और तीसरे देशों की नीतियों से सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
अगले 5 साल में भारत 500 अरब डॉलर का ऊर्जा, विमान, धातु, तकनीक और कोल का सामान अमेरिका से खरीदेगा।
ढांचे को तुरंत लागू किया जाएगा और भविष्य में पूरा द्विपक्षीय व्यापार समझौता फाइनल करने की दिशा में काम होगा।
आज से खत्म होगा भारत पर लगा आतरिक्त टैरिफ
वहीं भारत पर लगे अतरिक्त टैरिफ को लेकर भी अमेरिका ने बड़ा बयान जारी किया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि भारत अब सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इसके बाद अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स 7 फरवरी 2026 से हटा दिया है।बता दें कि पिछले साल अगस्त में अमेरिका ने भारत पर 25% टैक्स लगाया था, क्योंकि भारत रूस का तेल खरीद रहा था। अब भारत ने अमेरिका से यह भी वादा किया है कि वह अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और अगले 10 साल में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ाएगा। अमेरिका का कहना है कि अगर भारत फिर से रूस से तेल खरीदता है, तो अमेरिका फिर से 25% टैक्स लगा सकता है।
क्या है अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा?
दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में बताया गया है कि भारत और अमेरिका अंतरिम समझौते के लिए तय ढांचे को तुरंत लागू करेंगे और इसे अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फ्रेमवर्क दोनों देशों की व्यापक द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराता है। यह पहल अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई व्यापार वार्ताओं का अगला चरण है। समझौते का लक्ष्य संतुलित और पारस्परिक लाभ वाला व्यापार तंत्र बनाना है।
कृषि और डेयरी क्षेत्रों में समझौता नहीं, गोयल ने क्या कहा?
इस समझौते में भारत ने अपने कृषि क्षेत्र और डेयरी क्षेत्र को सुरक्षित रखा है। इस बारे में पीयूष गोयल ने साफ कहा कि समझौते में भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज, एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस उत्पादों को संरक्षण दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों और ग्रामीण आजीविका पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। व्यापार खोलने के साथ घरेलू हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
किन सेक्टरों को होगा बड़ा फायदा?
गौरतलब है कि इस समझौते से कई उद्योगों को सीधा फायदा मिलागा। इसमें टेक्सटाइल और रेडीमेड कपड़े, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, केमिकल्स, होम डेकोर और हस्तशिल्प और मशीनरी सेक्टर शामिल है। इसके अलावा जेनेरिक दवाएं, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जों पर टैरिफ शून्य कर दिया जाएगा।
गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व
मन की शांति ही तन का योग सादृश्य...यही है आर्ट ऑफ लिविंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
ट्विशा मौत मामला: दिल्ली AIIMS टीम ने किया दोबारा पोस्टमॉर्टम, भोपाल में अंतिम विदाई
