व्यापार
ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ी टेंशन, होर्मुज पर दुनिया की नजर
7 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई मंगलवार की समयसीमा (डेडलाइन) के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। इस तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान के लिए फिर से खोलने की समयसीमा के सीधे असर से मंगलवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि
कच्चे तेल के बाजार में दर्ज किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड फ्यूचर्स 3 प्रतिशत या 4.15 डॉलर से अधिक बढ़कर 116.56 डॉलर पर पहुंच गया है। वहीं, सुबह 9:57 बजे तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.69 प्रतिशत या 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर के इंट्राडे उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। ब्रेंट क्रूड ने इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है, जो 27 फरवरी के 72.48 डॉलर के स्तर से उछलकर 9 मार्च तक 119.50 डॉलर तक पहुंच गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति का आक्रामक रुख और गंभीर धमकियां
कीमतों में यह ताजा तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में ईरान के प्रति दिखाए गए नए आक्रामक रुख के बाद आई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान जलडमरूमध्य को खोलने की मंगलवार रात की समयसीमा का अनुपालन नहीं करता है, तो उस पर कहर बरपाया जाएगा । उन्होंने यह भी धमकी दी कि ईरान को "एक ही रात में खत्म" किया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो ईरान का हर पुल नष्ट कर दिया जाएगा और वहां के हर बिजली संयंत्र को हमेशा के लिए तबाह कर दिया जाएगा।
ऊर्जा आपूर्ति शृखला और ईरान की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, ऐसी खबरें हैं कि ईरान ने संघर्षविराम योजना को खारिज कर दिया है और दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ अपनी लड़ाई जारी रखी है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व बहुत अधिक है:
यह जलमार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के वैश्विक तेल प्रवाह को संभालता है।
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लगातार बाधित है।
इस गतिरोध के कारण इस साल कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो औसतन 100 डॉलर के आंकड़े के आसपास बनी हुई है।
ऊर्जा बाजार की इस अस्थिरता का मिला-जुला असर वैश्विक इक्विटी बाजारों पर दिखाई दे रहा है। जहां अमेरिका में वॉल स्ट्रीट मामूली सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ और एशियाई शेयरों में मिला-जुला कारोबार देखा गया, वहीं भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट का रुख रहा। भारत के प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, 1 प्रतिशत तक गिरकर कारोबार कर रहे थे।
सरकार का बड़ा फैसला, छोटे गैस सिलिंडर अब ज्यादा मिलेंगे
7 Apr, 2026 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश भर के विभिन्न राज्यों में प्रवासी मजदूरों को एक बड़ी राहत देते हुए 5 किलो वाले 'फ्री ट्रेड एलपीजी' (एफटीएल) गैस सिलिंडरों का दैनिक आवंटन (कोटा) दोगुना करने का फैसला किया है। मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के बीच सरकार यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास कर रही है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। पेट्रोलियम मंत्रालय के इस अहम नीतिगत फैसले से शहरों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को सीधा फायदा मिलेगा।
कोटे में बढ़ोतरी और वितरण का नया ढांचा
पेट्रोलियम मंत्रालय की एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सिलिंडर का यह बढ़ा हुआ आवंटन प्रवासी श्रमिकों को प्रदान की जाने वाली औसत दैनिक आपूर्ति पर आधारित होगा। यह संशोधित नया आवंटन सरकार द्वारा मार्च में घोषित की गई 20 प्रतिशत की पिछली सीमा के पार चला गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये अतिरिक्त पांच किलो वाले एफटीएल सिलिंडर सीधे राज्य सरकारों और उनके खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभागों को सौंपे जाएंगे। इन सिलेंडरों का वितरण तेल विपणन कंपनियों की सहायता से विशेष रूप से केवल प्रवासी मजदूरों के लिए ही किया जाएगा, ताकि लक्षित वर्ग तक इसका लाभ पहुंच सके।
बुकिंग के नए नियम और ऊर्जा प्रबंधन
एलपीजी की मांग को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सरकार ने मांग और आपूर्ति से जुड़े कई कड़े और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
रिफाइनरी आउटपुट: मांग पूरी करने के लिए रिफाइनरियों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
बुकिंग अंतराल में बदलाव: गैस बुकिंग का समय बढ़ाकर शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक कर दिया गया है।
वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था: एलपीजी पर से दबाव कम करने के लिए मिट्टी का तेल और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों को भी उपलब्ध कराया गया है।
पीएनजी का विस्तार: सभी राज्यों को पीएनजी कनेक्शन का नेटवर्क तेज गति से विस्तारित करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने साफ किया है कि इन सबके बीच घरेलू एलपीजी और पीएनजी आपूर्ति के साथ-साथ अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे अति-महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा और आपूर्ति का हाल
सरकार ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे एलपीजी बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का ही उपयोग करें और जब तक बहुत जरूरी न हो, डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से बचें। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें और सूचनाओं के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। प्रवासी श्रमिकों को आश्वस्त करते हुए सरकार ने कहा है कि उनकी एलपीजी आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में लगभग 51 लाख घरेलू एलपीजी सिलिंडरों की डिलीवरी की गई है। इस दौरान ऑनलाइन बुकिंग का आंकड़ा उछलकर 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा, गैस की कालाबाजारी या हेराफेरी रोकने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन-आधारित' वितरण प्रणाली का सख्ती से पालन किया जा रहा है।
आम आदमी का किचन बजट बिगड़ा, टमाटर ने बढ़ाई परेशानी
7 Apr, 2026 10:05 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी की रसोई और उसके बजट से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रोटी राइस रेट नाम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में घर पर पकाई जाने वाली खाने की थाली की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत की कीमतों के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किन चीजों ने आपकी थाली को महंगा किया और किनसे आपको राहत मिली।
सवाल: मार्च 2026 में शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतों में क्या बदलाव आया?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, सालाना आधार पर मार्च 2026 में मांसाहारी थाली की कीमत में 1 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल के मुकाबले पूरी तरह स्थिर रही है। हालांकि, यदि मासिक आधार पर तुलना करें, तो शाकाहारी थाली 3 प्रतिशत और मांसाहारी थाली 2 प्रतिशत सस्ती हुई है।
सवाल: प्याज और आलू की कीमतों ने आम आदमी को कितनी राहत दी?
जवाब: सब्जियों के मोर्चे पर प्याज और आलू ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है। सालाना आधार पर प्याज की कीमतों में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण रबी और लेट खरीफ फसल की एक साथ बंपर पैदावार, कमजोर निर्यात और ज्यादा सप्लाई है। इसी तरह, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर से मांग कम होने के कारण आलू की कीमतें भी 13 प्रतिशत गिर गई हैं।
सवाल: जब प्याज-आलू सस्ते हुए, तो शाकाहारी थाली की कीमत क्यों नहीं घटी?
जवाब: शाकाहारी थाली का बजट मुख्य रूप से टमाटर ने बिगाड़ दिया है। मार्च 2025 में जो टमाटर 21 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह मार्च 2026 में 33 प्रतिशत महंगा होकर 28 रुपये प्रति किलो हो गया है। दरअसल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बुवाई में देरी के कारण टमाटर की पैदावार और बाजार में इसकी आवक बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सवाल: मांसाहारी थाली की कीमत में 1% की गिरावट के पीछे क्या वजह है?
जवाब: मांसाहारी थाली के सस्ता होने का सबसे मुख्य कारण ब्रॉयलर (मुर्गे) की कीमतों में कमी आना है। एक मांसाहारी थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत होती है। सालाना आधार पर ब्रॉयलर की कीमतों में दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरी मांसाहारी थाली की कीमत नीचे आ गई।
सवाल: दालों के दाम और सप्लाई को लेकर रिपोर्ट में क्या अच्छी खबर है?
जवाब: दालों के मोर्चे पर आम आदमी के लिए राहत की खबर है। मासिक आधार पर दालों की कीमतों में छह प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-जून मार्केटिंग वर्ष के लिए अरहर का स्टॉक इस साल 20 प्रतिशत ज्यादा रहने का अनुमान है। वहीं, जनवरी-दिसंबर मार्केटिंग वर्ष के लिए चने का स्टॉक भी लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसी ज्यादा स्टॉक के कारण दालों की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बना हुआ है।
सवाल: क्या गैस और तेल की कीमतों ने भी थाली का बजट बढ़ाया है?
जवाब: जी हां, टमाटर के अलावा रसोई गैस और खाद्य तेल ने भी रसोई का बजट बढ़ाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण खाद्य तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमत भी 14 प्रतिशत बढ़ गई है। इन्हीं महंगे कारकों ने प्याज-आलू से मिलने वाली राहत को सीमित कर दिया।
सवाल: अब आगे क्या?
जवाब: जहां एक तरफ आलू, प्याज और दालों के बेहतर स्टॉक ने रसोई का बजट सुधारने में मदद की, वहीं टमाटर, खाद्य तेल और रसोई गैस की महंगाई ने आम आदमी की जेब पर दबाव बनाए रखा। आने वाले समय में सब्जियों की पैदावार और वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिति ही यह तय करेगी कि खाद्य महंगाई से आम आदमी को पूरी तरह राहत मिलेगी या नहीं।
एविएशन इंडस्ट्री का बड़ा नाम: कैसे Campbell Wilson पहुंचे टॉप पोजीशन तक
7 Apr, 2026 08:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। कंपनी के मौजूदा सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कंपनी ने उनसे अनुरोध किया है कि नए सीईओ की नियुक्ति तक वे अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहें, ताकि ट्रांजिशन सुचारु रूप से हो सके। बताया जा रहा है कि उनका कार्यकाल सितंबर 2027 तक था, लेकिन उन्होंने पहले ही संकेत दे दिया था कि वे इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इसी वजह से कंपनी ने जनवरी 2026 से ही नए सीईओ की तलाश शुरू कर दी थी।
कौन हैं कैंपबेल विल्सन?
कैंपबेल विल्सन एविएशन इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1996 में सिंगापुर एयरलाइंस में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी। न्यूजीलैंड के निवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी से मास्टर ऑफ कॉमर्स (फर्स्ट क्लास ऑनर्स) करने वाले विल्सन ने कनाडा, हांगकांग और जापान जैसे देशों में काम किया है। वे स्कूट के फाउंडिंग सीईओ भी रहे हैं और 2011 से 2016 तक इस लो-कॉस्ट एयरलाइन का नेतृत्व किया। बाद में 2020 में फिर से स्कूट के सीईओ बने। इसके बाद 2022 में उन्होंने एअर इंडिया का कार्यभार संभाला।
अब कौन बनेगा नया CEO?
एअर इंडिया में नए सीईओ की तलाश अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस दौड़ में कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के अनुभवी दिग्गज शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगले सप्ताह होने वाली अहम बैठक में नए नाम पर मुहर लग सकती है, हालांकि कंपनी ने अभी तक किसी भी उम्मीदवार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
एअर इंडिया के सामने बड़ी चुनौतियां
एअर इंडिया इस समय कई मोर्चों पर दबाव में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी को करीब ₹20,000 करोड़ तक का नुकसान होने की आशंका है। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, जिसके चलते एयरस्पेस प्रतिबंध लागू हो रहे हैं। इससे फ्लाइट्स के रूट बदलने और अतिरिक्त ईंधन खर्च बढ़ गया है, खासकर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका असर पड़ा है। इसके अलावा, नए विमानों की डिलीवरी में देरी और ऑपरेशनल लागत में बढ़ोतरी भी कंपनी की परेशानी बढ़ा रही है।
AI-171 हादसे का असर अब भी जारी
पिछले साल अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI-171 टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे का असर अभी भी कंपनी की छवि और संचालन पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट, जो जून 2026 तक आने की उम्मीद है, नए सीईओ की नियुक्ति के फैसले को भी प्रभावित कर सकती है।
इंडिगो में भी हुआ था बड़ा बदलाव
एअर इंडिया से पहले इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने भी 10 मार्च को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कंपनी ने विली वॉल्श को नया सीईओ नियुक्त किया। इंडिगो भी हाल के समय में ऑपरेशनल संकट और भारी नुकसान से जूझ रही थी।
शेयर बाजार में हाहाकार, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम
7 Apr, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स 800 अंक से अधिक गिर गया। वहीं, निफ्टी 22,800 से नीचे पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 824.44 अंक गिरकर 73,282.41 पर आ गया; निफ्टी 248.95 अंक गिरकर 22,719.30 पर पहुंच गया। इटरनल और इंडिगो के शेयरों में 2% की गिरावट दिख रही है। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे गिरकर 93.07 पर आ गया।
एशियाई बाजारों का क्या हाल?
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजार में सतर्कतापूर्ण कारोबार के बीच मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी प्रकार के समुद्री यातायात के लिए फिर से खोलने या बिजली संयंत्रों और पुलों पर बमबारी का जोखिम उठाने की समय सीमा निर्धारित करने से पहले तेल की कीमतों में लगातार उछाल जारी रहा। जापान का बेंचमार्क निक्केई 225 शुरुआती बढ़त को गंवाते हुए सुबह के कारोबार में 0.2 प्रतिशत गिरकर 53,310.30 पर आ गया। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 1.5 प्रतिशत बढ़कर 8,706.90 पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी मामूली रूप से अपरिवर्तित रहा और 0.1 प्रतिशत से भी कम गिरकर 5,445.80 पर आ गया। शंघाई कंपोजिट 0.4 प्रतिशत बढ़कर 3,896.98 पर पहुंच गया। हांगकांग में छुट्टी के कारण कारोबार बंद रहा।
वॉल स्ट्रीट की चाल कैसी रही?
वॉल स्ट्रीट पर शेयर की कीमतों में मामूली उछाल आया, एसएंडपी 500 में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले छह हफ्तों में पहली बार सकारात्मक रुझान वाला सप्ताह रहा। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 165 अंक या 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई और नैस्डैक कंपोजिट में 0.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। ऊर्जा व्यापार में, बेंचमार्क अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 2.37 अमेरिकी डॉलर बढ़कर 114.78 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.40 अमेरिकी डॉलर बढ़कर 111.17 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। यह युद्ध से पहले की लगभग 70 अमेरिकी डॉलर की कीमत से काफी अधिक है।
Stock Market Update: सेंसेक्स में 400+ अंकों की तेजी, निफ्टी 22800 के ऊपर
6 Apr, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध के और बढ़ने की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकी कारोबार के दौरान यह हरे निशान पर आ गया, 1:15 तक सेंसेक्स 430.94 अंक या 0.59% बढ़कर 73,750.49 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 144.25 अंक या 0.64% बढ़कर 22,857.35 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 270.13 अंक गिरकर 73,049.42 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 93.60 अंक गिरकर 22,619.50 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान करीब 10:30 बजे तक बीएसई का बेंचमार्क 509.77 अंक गिरकर 72,822.60 पर और निफ्टी 141.20 अंक गिरकर 22,571.90 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे बढ़कर 92.85 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। ट्रेंट, टाइटन, टेक महिंद्रा और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लाभ कमाने वालों में शामिल थे।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और संभावित अच्छी-बुरी खबरों के कारण इसमें बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में युद्ध के और बढ़ने की आशंका बहुत अधिक है। बाजार कच्चे तेल की कीमतों पर युद्ध से संबंधित घटनाओं के प्रभाव पर पैनी नजर रखेगा। अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उन टिप्पणियों ने, जिनमें प्रमुख आपूर्ति मार्गों को बहाल न किए जाने पर संभावित वृद्धि का संकेत दिया गया है, जोखिम लेने की प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखा है। इससे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता बाजारों के प्रमुख चालक बने हुए हैं।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार बंद रहे।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 9,931.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,208.41 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 33.70 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 22,713.10 पर बंद हुआ।
सुप्रीम कोर्ट से वेदांता को झटका: अदाणी की ₹14535 करोड़ बोली को मिली राहत
6 Apr, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के कॉरपोरेट जगत से जुड़ी एक अहम कानूनी लड़ाई में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अदाणी ग्रुप की ₹14,535 करोड़ की बोली के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए जेएएल की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी को बिना नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि इस मामले में सभी पक्ष खासतौर पर वेदांता लिमिटेड और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड अपनी दलीलें एनसीएलएटी के सामने रखें। अदालत ने एनसीएलएटी को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरी करे। एनसीएलएटी इस विवाद पर 10 अप्रैल से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनसीएलएटी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदाणी ग्रुप की बोली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
इससे पहले:
24 मार्च को एनसीएलएटी ने अंतरिम रोक देने से इनकार किया था।
25 मार्च को वेदांता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
एनसीएलएटी ने जेएएल के कर्जदाताओं की समिति (CoC) से जवाब मांगा था।
अधिग्रहण की कहानी
जेएएल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है और इसके अधिग्रहण के लिए कई कंपनियां दौड़ में थीं। अंततः नवंबर में कर्जदाताओं ने अदाणी एंटरप्राइजेज की योजना को मंजूरी दी, जिसे बाद में कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने भी हरी झंडी दे दी।
वेदांता ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग अपीलें दायर की हैं
रेजोल्यूशन प्लान की वैधता पर सवाल।
सीओसी और एनसीएलटी द्वारा मंजूरी पर आपत्ति।
अब आगे क्या?
अब इस पूरे मामले का फैसला एनसीएलएटी में होने वाली सुनवाई पर टिका है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से साफ है कि फिलहाल अदाणी ग्रुप की बोली पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।
देश के सेवा क्षेत्र पर ब्रेक: मार्च में PMI 57.5 पर, 14 महीनों का निचला स्तर
6 Apr, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर मार्च 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है। एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, HSBC इंडिया सर्विसेज पीएमआई फरवरी के 58.1 से घटकर मार्च में 57.5 पर आ गया, जो पिछले 14 महीनों का सबसे धीमा विस्तार है। हालांकि, सूचकांक अब भी अपने दीर्घकालिक औसत 54.4 से ऊपर बना हुआ है, जो संकेत देता है कि सेवा क्षेत्र में कुल मिलाकर वृद्धि जारी है।
पीएमआई (Purchasing Managers' Index) एक आर्थिक सूचकांक है, जो बताता है कि किसी देश के उद्योग या सेवा क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ रही हैं या घट रही हैं। इसे कंपनियों के खरीद प्रबंधकों (Purchasing Managers) से सर्वे के जरिए तैयार किया जाता है।
कैसे समझें?
50 से ऊपर- आर्थिक गतिविधि बढ़ रही है
50 से नीचे- गतिविधि घट रही है
50 के आसपास- स्थिर स्थिति
क्या है ये सुस्ती की वजह?
रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की इस सुस्ती की प्रमुख वजह नए कारोबार की रफ्तार में कमी रही। मार्च में नए ऑर्डर जनवरी 2025 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़े, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ा। वित्त, रियल एस्टेट और परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही। हालांकि, निर्यात मांग ने राहत दी। रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी ऑर्डर लगभग रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गए, जिनमें अफ्रीका, एशिया, यूरोप और अमेरिका से मजबूत मांग देखने को मिली। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का नकारात्मक असर बाजार स्थितियों, मांग और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ा, जिससे कुल कारोबारी माहौल प्रभावित हुआ।
निर्यात आधारित मांग से सेक्टर को सहारा मिला
एचएसबीसी के अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि मार्च में सेवा क्षेत्र विस्तार में बना रहा, लेकिन लगातार दूसरे महीने वृद्धि की रफ्तार कमजोर हुई। उन्होंने बताया कि निर्यात आधारित मांग मजबूत रही, जिससे सेक्टर को सहारा मिला।
महंगाई को लेकर चिंता
रिपोर्ट में महंगाई के दबाव को लेकर भी चिंता जताई गई है। इनपुट लागत लगभग चार वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिसका कारण ईंधन, परिवहन और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी है। इसके बावजूद, कंपनियों का भविष्य को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है। करीब 12 वर्षों में पहली बार कारोबारियों ने उत्पादन को लेकर इतनी सकारात्मक उम्मीद जताई है, जो आने वाले समय में मांग और बाजार परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद पर आधारित है। कुल मिलाकर, मार्च के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ रही है और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जो आगे के महीनों में चुनौती बन सकता है।
लाल निशान पर खुला बाजार: सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट
6 Apr, 2026 10:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध के और बढ़ने की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बीएसई का बेंचमार्क 509.77 अंक गिरकर 72,822.60 पर और निफ्टी 141.20 अंक गिरकर 22,571.90 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे बढ़कर 92.85 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 270.13 अंक गिरकर 73,049.42 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 93.60 अंक गिरकर 22,619.50 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, इंटरग्लोब एविएशन, अदानी पोर्ट्स और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख पिछड़ने वाली कंपनियों में शामिल थीं। ट्रेंट, टाइटन, टेक महिंद्रा और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लाभ कमाने वालों में शामिल थे।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर अनिश्चितता के माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और संभावित अच्छी-बुरी खबरों के कारण इसमें बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में युद्ध के और बढ़ने की आशंका बहुत अधिक है। बाजार कच्चे तेल की कीमतों पर युद्ध से संबंधित घटनाओं के प्रभाव पर पैनी नजर रखेगा। अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उन टिप्पणियों ने, जिनमें प्रमुख आपूर्ति मार्गों को बहाल न किए जाने पर संभावित वृद्धि का संकेत दिया गया है, जोखिम लेने की प्रवृत्ति को नियंत्रण में रखा है। इससे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता बाजारों के प्रमुख चालक बने हुए हैं।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी और जापान का निक्केई 225 सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। गुड फ्राइडे के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार बंद रहे।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। गुड फ्राइडे के कारण शुक्रवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 9,931.13 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,208.41 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक या 0.25 प्रतिशत बढ़कर 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी 33.70 अंक या 0.15 प्रतिशत बढ़कर 22,713.10 पर बंद हुआ।
Crude Oil Price: होर्मुज संकट गहराया, ट्रंप के बयान से तेल बाजार में उछाल
6 Apr, 2026 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त चेतावनी के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.74 प्रतिशत बढ़कर 109.8 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। वहीं रवीवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.4% बढ़कर 110.60 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी क्रूड (WTI) में 1.8% की तेजी आई और यह 113.60 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर होर्मुज को तुरंत नहीं खोला गया, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। उन्होंने बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठा सकता है। इस बयान के जवाब में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में जलडमरूमध्य नहीं खोला जाएगा। उनका कहना था कि जब तक युद्ध से हुए नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होती, तब तक यह मार्ग बंद रहेगा।
कूटनीतिक कोशिशें जारी
तनाव के बीच ओमान ने मध्यस्थता की पहल की है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसके प्रतिनिधियों ने रविवार को ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की, जिसमें व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने के संभावित विकल्पों पर चर्चा हुई।
ओपेक+ का उत्पादन बढ़ाने का फैसला
इस बीच, वैश्विक आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए ओपेक+ और सहयोगी देशों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान सहित आठ देशों ने मई 2026 से प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल (kbd) उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है।
इस योजना के तहत:
सऊदी अरब और रूस: 62-62 kbd
इराक: 26 kbd
यूएई: 18 kbd
कुवैत: 16 kbd
कजाखस्तान: 10 kbd
अल्जीरिया: 6 kbd
ओमान: 5 kbd
ओपेक+ ने कहा कि यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया गया है और उत्पादन में बदलाव परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, ओपेक+ की उत्पादन वृद्धि इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने की कोशिश मानी जा रही है।
चांदी में भारी गिरावट, सोना भी लुढ़का: जानें आज के ताजा भाव
6 Apr, 2026 07:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सोमवार को बुलियन पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत 2290 रुपये गिरकर 2.31 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। वहीं सोने का भाव 1100 रुपये गिरकर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,51,070 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 1,50,920 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह है कि गिरावट के बावजूद बीते एक सप्ताह में 24 कैरेट सोना करीब 2,860 रुपये तक महंगा हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमतों में भी लगभग 2,600 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत स्थिर रही थी और यह 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर टिकी रही।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। हाजिर सोना फिलहाल 4,591.52 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतें सिर्फ स्थानीय मांग-आपूर्ति से ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से भी प्रभावित होती हैं।
क्या हैं आगे के संकेत?
विश्लेषकों के मुताबिक इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं, लेकिन रुझान सकारात्मक रहने की उम्मीद है। निवेशक खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।
MCX पर मिला-जुला रुख
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के वायदा भाव में हल्की गिरावट देखने को मिली। सोना 0.02 फीसदी यानी 30 रुपये टूटकर 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 4.48 फीसदी यानी 10,901 रुपये लुढ़ककर 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई।
पूरे वित्त वर्ष में चमके कीमती धातु
वित्त वर्ष 2025-26 सोने और चांदी के लिए शानदार रहा। इस दौरान सोने की कीमत में करीब 57,350 रुपये प्रति 10 ग्राम यानी लगभग 61 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं चांदी ने इससे भी ज्यादा तेजी दिखाई और इसकी कीमत में 1,34,500 रुपये प्रति किलो यानी करीब 131 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया।
भारत का फार्मा निर्यात 28 अरब डॉलर पार, FY26 में मजबूत ग्रोथ
4 Apr, 2026 02:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सरकार ने एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इस वित्तीय वर्ष में फरवरी तक भारतीय दवाओं का निर्यात 28 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में पांच प्रतिशत ज्यादा है। फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के महानिदेशक के राजा भानु के अनुसार, वर्तमान में लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के इस क्षेत्र के 2030 तक बढ़कर 130 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा, "वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, दवा निर्यात उन चुनिंदा क्षेत्रों में से एक रहा है जिसने अपनी विकास गति को बनाए रखा है। वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-फरवरी की अवधि के दौरान दवा निर्यात 28.29 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें वित्त वर्ष 2025 की इसी अवधि की तुलना में 5.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इस वृद्धि में फॉर्मूलेशन, बायोलॉजिकल, टीके और आयुष उत्पादों का अहम योगदान रहा।" अधिकारी ने आगे कहा कि वैश्विक मूल्य दबाव और व्यापार अस्थिरता के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 में निर्यात 30.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.4 प्रतिशत अधिक है।
Delhi में व्यापारियों को झटका, PNG कनेक्शन के लिए आवेदन जरूरी
4 Apr, 2026 02:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति के नियमों को सख्त कर दिया है। खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से 2 अप्रैल को एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया। इसके तहत, अब उन इलाकों में जहां पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध है, वहां व्यवसायों के लिए कमर्शियल एलपीजी प्राप्त करना तभी संभव होगा, जब उनके पास पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का कनेक्शन हो या उन्होंने इसके लिए आवेदन कर दिया गया हो। सरकार ने हाल ही में अधिसूचित कमर्शियल एलपीजी वितरण नीति से जुड़े एक प्रमुख नियम में यह संशोधन किया है।
क्या हैं नए नियम और अनुपालन?
संशोधित नियमों के तहत, कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ता अब एलपीजी आपूर्ति प्राप्त करने के पात्र तभी माने जाएंगे, जब वे संबंधित तेल विपणन कंपनी (ओएमसी) के साथ पंजीकृत होंगे और नेटवर्क मौजूद होने की स्थिति में उन्होंने पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया होगा। आदेश में उन क्षेत्रों के लिए भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं जहां पीएनजी इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को एक आवेदन जमा करना होगा, जिसमें पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध होने पर उस पर स्विच करने की मंशा साफ की गई हो।
ओएमसी और आईजीएल की भूमिका
इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए तेल और गैस कंपनियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है:
दस्तावेजों का सत्यापन: कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं को आपूर्ति करते समय ओएमसी (ओएमसी) को कम से कम एक बार यह सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेज एकत्र करने होंगे कि उपभोक्ता पंजीकृत है और उसने पीएनजी के लिए आवेदन या मंशा पत्र जमा कर दिया है।
आईजीएल के साथ डेटा साझाकरण: पीएनजी पर शिफ्ट होने की इच्छा जताने वाले उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड आगे की कार्रवाई के लिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) के साथ साझा किया जाएगा।
दोहरे उपयोग के लिए मिलेगी छूट
सरकार ने उन व्यवसायों को लचीलापन भी प्रदान किया है जिन्हें अपने संचालन के लिए पीएनजी के साथ-साथ एलपीजी की भी आवश्यकता होती है।
ऐसे कारोबारी अपनी जरूरतों का स्पष्टीकरण देते हुए विभाग के अतिरिक्त आयुक्त को आवेदन कर सकते हैं। ओएमसी भी इस तरह के आवेदनों को एकत्र करके त्वरित निर्णय के लिए अतिरिक्त आयुक्त को सौंप सकती हैं। आदेश के अनुसार, "अतिरिक्त आयुक्त तीनों तेल विपणन कंपनियों के परामर्श से इन आवेदनों का जल्द निपटारा करेंगे"।
आगे का आउटलुक
यह नया आदेश 26 मार्च को अनुपूरक के साथ अधिसूचित की गई मूल नीति का हिस्सा है। इस नीति के बाकी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार के इस कदम से साफ है कि दिल्ली सरकार वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में पारंपरिक सिलिंडरों के उपयोग को व्यवस्थित करते हुए पीएनजी के उपयोग को अनिवार्य बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
India ने खबरों को बताया बेबुनियाद, सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित
4 Apr, 2026 01:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ईरानी कच्चे तेल की खेप को लेकर फैल रही खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है कि भुगतान संबंधी दिक्कतों के कारण गुजरात के वडीनार से ईरान का कच्चा तेल चीन की ओर मोड़ा गया। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को सुरक्षित कर लिया है, जिसमें ईरान से आयात भी शामिल है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ईरानी कच्चे तेल के भुगतान को लेकर किसी तरह की कोई बाधा नहीं है, जैसा कि कुछ अफवाहों में दावा किया जा रहा है। सरकार ने दोहराया कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की आवश्यकताएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और सप्लाई को लेकर कोई चिंता की बात नहीं है।
दरअसल, तेल बाजार पर नजर रखने वाली एजेंसी केप्लर ने दावा किया था कि ईरान से लगभग 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक जहाज अचानक अपना मार्ग बदलकर चीन की दिशा में बढ़ गया । यह जहाज, जिसका नाम 'पिंग शुन' है, गुरुवार रात तक अरब सागर में भारत के रास्ते पर था और इसके गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी। केप्लर में रिफाइनरी और ऑयल मार्केट मॉडलिंग के मैनेजर सुमित रितोलिया ने बताया था कि यह जहाज पिछले तीन दिनों से वाडिनार की ओर बढ़ रहा था, लेकिन मंजिल के करीब पहुंचने से ठीक पहले इसने अपनी दिशा बदल दी। उन्होंने कहा था कि जहाज ने अब अपने घोषित गंतव्य भारत से बदलकर चीन की ओर संकेत देना शुरू कर दिया है, जिससे इस अचानक बदलाव को लेकर सवाल खड़े हो गए थे।
भारत के लिए खुशखबरी, सातवां LPG टैंकर Green Shanvi सुरक्षित निकला
4 Apr, 2026 12:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए एक और राहत भरी खबर है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन शान्वी 3 अप्रैल 2026 की रात हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर गया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, जहाज में करीब 46,650 मीट्रिक टन एलपीजी कार्गो लदा हुआ था। आने वाले दिनों में दो और भारत-ध्वज वाले एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा और जग विक्रम भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना होंगे।
सात भारतीय जहाजों ने होर्मुज किया पार
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ग्रीन शान्वी समेत कुल सात भारतीय एलपीजी टैंकर इस संवेदनशील जलमार्ग को पार कर चुके हैं। ग्रीन शान्वी के ट्रांजिट के बाद अब फारस की खाड़ी में कुल 17 भारतीय जहाज मौजूद हैं। इनमें तीन अन्य एलपीजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक एलएनजी टैंकर, एक केमिकल प्रोडक्ट्स टैंकर, तीन कंटेनर शिप, दो बल्क कैरियर और दो जहाज नियमित मरम्मत (मेंटेनेंस) के लिए शामिल हैं।
भारत की कूटनीतिक बातचीत का असर
भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की है। ईरान ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि जो देश उसके साथ समन्वय बनाए रखते हैं और शत्रु श्रेणी में नहीं आते, उनके जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा था कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की इजाजत दी जा रही है।
होर्मुज क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक बेहद संकरा लेकिन रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी माना जाता है। हर दिन दो करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यह मात्रा दुनिया की कुल तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का लगभग चौथाई हिस्सा है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की ढुलाई भी इसी रास्ते से होती है। ऐसे में अगर इस मार्ग में थोड़ी देर के लिए भी बाधा आती है, तो उसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वित्तीय बाजारों, वैश्विक सप्लाई चेन और आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट तक महसूस किया जाता है। यही वजह है कि होर्मुज में मौजूदा संकट को लेकर दुनिया भर की निगाहें अमेरिका, ईरान और ऊर्जा बाजारों पर टिकी हुई हैं।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
