व्यापार
बैंकिंग और आईटी शेयरों में मजबूत खरीदारी, बाजार को मिला सपोर्ट
10 Apr, 2026 09:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। बैंक शेयरों में तेजी और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुझान के चलते शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में इक्विटी बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल आया। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 630.08 अंक बढ़कर 77,261.73 पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 203.6 अंक चढ़कर 23,978.70 पर पहुंच गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 5 पैसे कमजोर होकर 92.71 पर खुला, जबकि गुरुवार को यह 92.66 पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस को सबसे ज्यादा लाभ हुआ। सन फार्मा, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और टाइटन पिछड़ गए।
एशियाई बाजारों में दिखी बढ़त
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
रिसर्च एनालिस्ट और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि अमेरिकी बाजारों में मजबूती, जहां डाउ ने अपनी रैली को जारी रखा, साथ ही एशियाई बाजारों में व्यापक रूप से सकारात्मक रुख, अमेरिका-ईरान के नाजुक युद्धविराम को लेकर निरंतर आशावाद को दर्शाता है। हालांकि वैश्विक भावना में सुधार हुआ है, फिर भी यह काफी हद तक घटनाओं पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि भूराजनीतिक घटनाक्रम में कोई भी बदलाव जोखिम लेने की प्रवृत्ति को तेजी से बदल सकता है, खासकर कच्चे तेल की कीमतों पर इसके प्रभाव के कारण। इससे सकारात्मक रुझान बना रहता है, लेकिन यह पूरी तरह से स्थिर नहीं होता। ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार अब "प्रतीक्षा करो और देखो" के चरण में है - समाचार प्रवाह के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, और इसकी दिशा तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है: भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की आवाजाही और एफआईआई।
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 96.11 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.20 प्रतिशत बढ़कर 96.11 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 1,711.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 955.90 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। गुरुवार को सेंसेक्स 931.25 अंक या 1.20 प्रतिशत गिरकर 76,631.65 पर बंद हुआ। निफ्टी 222.25 अंक या 0.93 प्रतिशत गिरकर 23,775.10 पर समाप्त हुआ।
बढ़ती अनिश्चितता से एक्सपोर्ट सेक्टर पर दबाव, व्यापार संतुलन बिगड़ने का खतरा
10 Apr, 2026 06:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण मार्च के आंकड़ों में देश के वस्तु निर्यात में सात से आठ फीसदी की गिरावट आ सकती है। वहीं, 2025-26 में दो से तीन फीसदी की गिरावट की आशंका है। सरकार मार्च महीने के निर्यात के आंकड़े 15 अप्रैल को जारी करेगी।
फियो के अध्यक्ष बोले- निर्यात बुरी तरह प्रभावित
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, अमेरिका और इस्राइल के 28 फरवरी को ईरान पर किए गए संयुक्त हमले ने पश्चिम एशिया को होने वाले देश के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे माल भाड़ा, हवाई परिवहन लागत और बीमा लागत बढ़ गई है। उन्होंने कहा, पश्चिम एशिया के देशों से तेल एवं गैस की आवाजाही में रुकावट के कारण इस्पात, प्लास्टिक और रबड़ जैसे कच्चे माल की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। रल्हन ने कहा, वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर देखें तो भारत के कुल निर्यात में पांच से छह फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है।
मौजूदा संकट के बीच फियो अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार को उच्च ब्याज दर, एडवांस ऑथोराइजेशन यानी शुल्क छूट योजना के तहत भुगतान को सरल बनाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, विदेश व्यापार महानिदेशालय और सीमा शुल्क के बीच नाम, वर्गीकरण एवं कोडिंग प्रणाली के मामले में सामंजस्य स्थापित करने जैसे मुद्दों पर भी फोकस करना चाहिए।
एलपीजी आपूर्ति पर कोई संकट नहीं, 100% भरोसा, सरकार ने दी जानकारी
9 Apr, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं को हिलाकर रख दिया है। हालांकि, इस भारी संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने फिर एक बार साफ तौर पर कहा है कि वर्तमान भू-राजनीतिक हालात के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन सरकार ने आम उपभोक्ताओं की रसोई को इससे पूरी तरह सुरक्षित रखा है। देश की 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरतें आयात से पूरी होने के बावजूद, घरेलू उपयोग के लिए 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में किसी भी एलपीजी वितरक के पास गैस की कमी की कोई सूचना नहीं है। केवल एक दिन में ही 51 लाख से अधिक घरों में एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि 92 प्रतिशत डिलीवरी ओटीपी के माध्यम से हो रही है। शर्मा के मुताबिक, कमर्शियल एलपीजी पर कुछ असर पड़ा था, लेकिन इसे भी अब लगभग 70 प्रतिशत तक बहाल कर दिया गया है। इसके साथ ही फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, फूड, पैकेजिंग और पेंट्स जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए बल्क नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी की आपूर्ति भी सामान्य कर दी गई है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की सक्रियता और ऊर्जा सहयोग
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बहुत करीब से नजर रख रहा है। इसी रणनीतिक पहल के तहत, विदेश मंत्री 11 से 12 अप्रैल 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे, जहां दोनों देशों के नेतृत्व के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, पेट्रोलियम मंत्री भी 9 और 10 अप्रैल, 2026 को कतर के दौरे पर हैं और भारत खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के अन्य देशों के साथ भी लगातार संपर्क में है। जायसवाल ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ संबंधों पर अपडेट देते हुए कहा कि हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने भारत का दौरा किया था और भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता व घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बांग्लादेश को ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति जारी रखे हुए है।
समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी
पश्चिम एशिया संकट के बीच समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने आश्वस्त किया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय ध्वज वाले जहाज या भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। 5 अप्रैल, 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने वाला भारतीय जहाज 'ग्रीन आशा' सुरक्षित रूप से जेएनपीए पहुंच गया है। इसके अलावा, डीजी शिपिंग के माध्यम से अब तक खाड़ी क्षेत्र से 1800 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की गई है, जिनमें से 49 नाविक पिछले 24 घंटों के दौरान ही वापस लाए गए हैं।
फार्मा सेक्टर और दवाओं की कीमतों पर असर बेअसर
वैश्विक आपूर्ति शृंखला में पैदा हुई अनिश्चितता के बीच एक और बड़ी राहत की बात यह है कि देश में जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश टीएल ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण दवाओं और फार्मास्यूटिकल्स की बिक्री कीमतों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई है। अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता से यह साफ है कि भारत सरकार पश्चिम एशिया के ऊर्जा और भू-राजनीतिक संकट से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के साथ-साथ कूटनीतिक संवाद और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर उठाए गए ये कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने में एक ढाल का काम कर रहे हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की ग्रोथ मजबूत, वर्ल्ड बैंक का भरोसा
9 Apr, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। 'साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट' रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों में हालिया कटौती से वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में उपभोक्ता मांग को मजबूती मिलेगी। हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा बाजारों में व्यवधान विकास की राह में चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
विकास दर के अनुमान और तुलना
विश्व बैंक ने जनवरी की अपनी 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स' रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जिसे अब संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। अन्य प्रमुख एजेंसियों के अनुमानों की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 6.9 प्रतिशत, ओईसीडी (ओईसीडी) ने 6.1 प्रतिशत और मूडीज ने विकास दर 6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इससे पहले, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की विकास दर 7.1 प्रतिशत (FY25) से बढ़कर 7.6 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में लचीलापन रहा है।
जीएसटी और घरेलू खपत पर प्रभाव
निजी खपत: कम मुद्रास्फीति और जीएसटी के युक्तिकरण के कारण देश में निजी खपत वृद्धि विशेष रूप से मजबूत रही है।
मांग को समर्थन: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में जीएसटी दरों में कमी से उपभोक्ता मांग को लगातार समर्थन मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक चुनौतियां
28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के बाद से मध्य पूर्व में अनिश्चितता बढ़ गई है। 8 अप्रैल को इन देशों के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम पर सहमति बनी है, लेकिन इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह बाधित कर दिया है। विश्व बैंक के अन्य पूर्वानुमानकर्ताओं ने भी इस अनिश्चितता के कारण FY27 के लिए विकास दर के अनुमानों को घटाकर 5.9 से 6.7 प्रतिशत के दायरे में कर दिया है। विश्व बैंक के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने का दबाव बनेगा, जिससे परिवारों की खर्च करने योग्य आय सीमित हो जाएगी।
सरकारी खर्च, निवेश और निर्यात आउटलुक
सब्सिडी का बोझ: खाना पकाने के ईंधन और उर्वरकों के लिए उच्च सब्सिडी परिव्यय तय करने के कारण सरकारी खपत वृद्धि के नरम पड़ने की उम्मीद है।
निवेश में सुस्ती: बढ़ती अनिश्चितता और उच्च इनपुट लागत के कारण निवेश वृद्धि के मध्यम रहने की संभावना है।
निर्यात व्यापार: हालांकि भारत के निर्यात के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) तक पहुंच में सुधार हुआ है, लेकिन प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की धीमी आर्थिक वृद्धि दर इसका सकारात्मक असर कम कर सकती है।
विश्व बैंक के ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और मांग बुनियादी रूप से मजबूत बनी हुई है। जीएसटी में कटौती जैसे कदम विकास को गति दे रहे हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण ऊर्जा कीमतों में आया उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर सामने आ रहा है। आगामी तिमाहियों में आर्थिक विकास की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक बाजार इस ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव से कैसे निपटते हैं।
पोर्ट संचालन में पारदर्शिता पर जोर, DG Shipping का आदेश जारी
9 Apr, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के महानिदेशालय शिपिंग ने देश के सभी बंदरगाहों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतों का पूरा लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए। जारी सर्कुलर में कहा गया है कि कई मामलों में पोर्ट अथॉरिटीज की ओर से दी गई रियायतें जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट और रीफर प्लग-इन शुल्क निर्यातकों तक समान रूप से नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में अब इन रियायतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से संबंधित हितधारकों, जैसे फ्रेट फॉरवर्डर्स और NVOCCs के माध्यम से निर्यातकों तक पहुंचाना अनिवार्य किया गया है।
पोर्ट अथॉरिटीज को क्या जिम्मेदारी दी गई?
डीजी शिपिंग ने पोर्ट अथॉरिटीज को यह भी जिम्मेदारी दी है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें, ताकि किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी न हो और लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे।
क्यों उठाया गया यह कदम?
यह कदम 497 करोड़ रुपये की निर्यात सुविधा हेतु लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप (RELIEF) योजना के तहत निर्यातकों को राहत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि संकट के बीच व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
शिपिंग लाइनों को क्या दिए गए निर्देश?
साथ ही, शिपिंग लाइनों को निर्देश दिया गया है कि वे शुल्क निर्धारण में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा सुनिश्चित करें। डीजी शिपिंग ने यह भी कहा कि कार्गो पर लगाए जा रहे वार रिस्क प्रीमियम में बदलाव हुए हैं, जो पहले जारी निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकते। इस मुद्दे को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है। इसी बीच, ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए भी सुरक्षा सलाह जारी की गई है। सलाह में कहा गया है कि तट पर मौजूद नाविक घर के भीतर रहें, संवेदनशील इलाकों से दूर रहें और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें। जहाजों पर तैनात कर्मियों को अनावश्यक रूप से किनारे पर जाने से बचने और सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। डीजी शिपिंग ने सभी कर्मियों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और लगातार संपर्क में रहने को कहा है।
विक्रम मिस्री अमेरिका रवाना, अहम मुद्दों पर होगी उच्चस्तरीय वार्ता
9 Apr, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका अपने कई क्षेत्रों में व्यपार को बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अपने तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे के दौरान कई उच्चस्तरीय बैठकें की। दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा और जरूरी तकनीक के मामले में बातचीत बढ़ाई है। यह बातचीत पेंटागन और भारत के वाणिज्य विभाग के बीच हुई। इसके साथ ही व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचने वाली पहल पर भी चर्चा की गई।
व्यापार फैसिलिटेशन पोर्टल लॉन्च
भारत के विदेश सचिव मिस्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने मिलकर भारत-अमेरिकी व्यापार फैसिलिटेशन पोर्टल लॉन्च किया। अमेरिका में भारतीय दूतावास ने इसे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार की पूरी क्षमता को खोलने की दिशा में एक और कदम बताया। इस पोर्टल का मकसद मिशन 500 का समर्थन करना है, जिसमें एक्सपोर्टर्स के लिए रजिस्ट्रेशन अब खुले हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस पहल का मकसद बाजार तक पहुंच को आसान बनाना और वाणिज्यिक जुड़ाव को गहरा करना है। पेंटागन में, मिस्री अमेरिकी युद्ध विभाग में अधिग्रहण और सस्टेनमेंट के अवर सचिव माइक डफी के साथ बातचीत की। भारतीय दूतावास ने कहा, दोनों पक्षों ने पिछले साल हस्ताक्षर किए गए द्विपक्षीय मेजर डिफेंस पार्टनरशिप के फ्रेमवर्क में तय बड़े लक्ष्यों के हिसाब से, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा उद्योग, तकनीक और सप्लाई चेन जुड़ाव को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।
रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बातचीत
रक्षा संबधित बातचीत में दोनों देशों के बीच ओद्योगिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन पर बढ़ते फोकस पर जोर दिया गया।
वाणिज्य विभाग में मिस्री ने कमर्शियल और जरूरी तकनीक में सहयोग बढ़ाने के लिए अवर सचिव जेफरी केसलर और विलियम किमिट से मुलाकात की।
विक्रम मिस्री का यह दौरा फरवरी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के वॉशिंगटन दौरे के बाद हो रहा है। यह दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत की लगातार रफ्तार का हिस्सा है।
बातचीत दोनों देशों की मजबूती के लिए जरूरी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करने और व्यापार, रक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी, साथ ही आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक विकास सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का मौका देता है। भारत और अमेरिका ने हाल के वर्षों में एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग बढ़ाया है। इसमें रक्षा, तकनीक और सप्लाई चेन प्रमुख स्तंभों के रूप में उभरे हैं। द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ी है और दोनों पक्ष इसे और बढ़ाने का लक्ष्य बना रहे हैं। नए ट्रेड पोर्टल जैसी पहलों से एक्सपोर्ट को मदद मिलने और आर्थिक एकीकरण को गहरा करने की उम्मीद है।
IMF रिपोर्ट: भारत के बढ़ते रक्षा खर्च से घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
9 Apr, 2026 11:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते स्वदेशी उत्पादन को देश की आर्थिक वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कदम बताया है। आईएमएफ के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, जब सैन्य खर्च स्थानीय उद्योगों को समर्थन देता है, तो यह न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी करता है बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। आईएमएफ के वैश्विक रक्षा रुझानों पर आधारित इस विश्लेषण में कहा गया है कि रक्षा क्षेत्र में होने वाली वृद्धि अल्पावधि में आर्थिक गतिविधियों को तेज कर सकती है। इससे उपभोग और निवेश दोनों में वृद्धि देखी जा सकती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनावों के बढ़ते माहौल के बीच रक्षा खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल के वर्षों में करीब आधे देशों ने अपने रक्षा बजट में वृद्धि की है, जिसने शीत युद्ध के बाद देखी गई गिरावट को पलट दिया है।
घरेलू उत्पादन पर जोर, फायदे अनेक
भारत के संदर्भ में आईएमएफ के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से आर्थिक बढ़त की ओर इशारा करते हैं। आईएमएफ का मानना है कि जब रक्षा खर्च आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन पर आधारित होता है, तो इसके फायदे और भी अधिक हो जाते हैं। आईएमएफ ने कहा है कि रक्षा खर्च का मल्टीप्लायर औसतन 1 के करीब होता है, जिसका अर्थ है कि खर्च में की गई हर बढ़ोतरी मोटे तौर पर आर्थिक उत्पादन में वैसी ही बढ़ोतरी में बदल जाती है। हालांकि, यह प्रभाव देशों के बीच अलग-अलग होता है। जिन देशों की हथियारों के आयात पर निर्भरता अधिक होती है, उनमें रक्षा खर्च मल्टीप्लायर छोटे होते हैं, क्योंकि मांग का एक हिस्सा विदेशों में चला जाता है। यह अंतर भारत के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है। भारत ने विदेशी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम करने और एक मजबूत घरेलू रक्षा आधार स्थापित करने के प्रयासों को तेज किया है। रक्षा खर्च का एक बड़ा हिस्सा अब स्थानीय विनिर्माण, निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों की ओर निर्देशित किया जा रहा है।
आर्थिक संतुलन और रोजगार सृजन
आईएमएफ ने यह भी बताया है कि आयात पर अधिक खर्च बाहरी संतुलन को कमजोर कर सकता है, क्योंकि मांग आयातित उपकरणों की ओर बढ़ जाती है। भारत का स्वदेशीकरण पर जोर ऐसे दबावों को कम करने में सहायक है। इससे मांग का एक बड़ा हिस्सा देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ही बना रहता है, जो रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा खर्च एक लक्षित मांग झटके के रूप में कार्य करता है। यह सरकारी उपभोग को बढ़ाता है और विशेष रूप से रक्षा से जुड़े क्षेत्रों में निजी खर्च को प्रोत्साहित कर सकता है। समय के साथ, यह उत्पादकता को भी समर्थन दे सकता है। आईएमएफ का मानना है कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने वाला निर्माण लंबे समय तक उत्पादकता वृद्धि का समर्थन कर सकता है।
खर्च में तेजी के जोखिम
हालांकि, आईएमएफ ने रक्षा खर्च में बहुत तेजी से वृद्धि होने पर कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक वृद्धि से राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 2.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और सार्वजनिक ऋण तीन साल के भीतर लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ये दबाव संघर्ष की स्थिति में और बढ़ सकते हैं, जब कर्ज तेजी से बढ़ता है और सामाजिक खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत का स्थान
2010 के दशक के मध्य से दुनिया भर में रक्षा खर्च बढ़ रहा है। वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत से अधिक रक्षा पर खर्च करते हैं। नाटो सदस्यों ने 2035 तक अपने रक्षा और सुरक्षा खर्च को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक बढ़ाने का वादा किया है, जो सैन्य खर्च में निरंतर वृद्धि की ओर संकेत करता है। भारत अपनी जीडीपी का लगभग 2 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करता है। हाल के वर्षों में, नीतिगत सुधारों और प्रोत्साहनों के माध्यम से देश ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आईएमएफ के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि जिन देशों की स्थानीय रक्षा उद्योग मजबूत है, वे अपने सैन्य खर्च को आर्थिक विकास में बदलने और बाहरी जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट
9 Apr, 2026 09:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार के दिन कमजोर शुरुआत हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 500 अंक से अधिक गिरा, निफ्टी 23,850 से नीचे आ गया। ओपनिंग के दौरान 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 558.43 (-0.72 %) अंकों की बढ़त के साथ 77,004.47 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 157.10 (-0.65%) अंक टूटकर 23,840.25 पर पहुंच गया। अदाणी पोर्ट्स और इंफोसिस के शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 92.70 पर आ गया।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर अनिश्चितता बढ़ने और निवेशकों का मनोबल गिरने से भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को लगातार पांच सत्रों की बढ़त का सिलसिला टूट गया और बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स में इंफोसिस, अदाणी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएलटेक और एलएंडटी के शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टाटा स्टील, एनटीपीसी, बीईएल और पावर ग्रिड के शेयरों में सबसे ज्यादा लाभ हुआ। बाजारों में अस्थिरता मापने वाले इंडिया वीआईसी में पिछले सत्र में लगभग 20% की गिरावट के बाद 1% से अधिक की वृद्धि हुई। एनएसई पर निफ्टी आईटी में लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मेटल में 1% से अधिक की वृद्धि हुई। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने बेंचमार्क सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त दर्ज की। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांकों में मामूली बढ़त देखी गई। एनएसई पर 597 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 1,969 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई और 76 शेयर अपरिवर्तित रहे।
बाजार में गिरावट के चार बड़े कारण क्या?
ईरान-अमेरिका युद्धविराम की उम्मीदें धूमिल हो रही हैं। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच अंततः एक संक्षिप्त युद्धविराम पर सहमति बन गई, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों को काफी राहत मिली। पर इस्राइल ने लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपना समानांतर युद्ध जारी रखा है। ईरान ने इस्राइल और अमेरिका दोनों पर युद्धविराम समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि शांति वार्ता को आगे बढ़ाना अनुचित होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे यातायात के लिए खोलने की तैयारी थी, अब भी जहाजों के लिए बंद है। इस बीच, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक पोस्ट में कहा, "संघर्ष क्षेत्र में कुछ स्थानों पर युद्धविराम उल्लंघन की खबरें आई हैं, जो शांति प्रक्रिया की भावना को कमजोर करती हैं। मैं सभी पक्षों से संयम बरतने और दो सप्ताह के लिए, जैसा कि सहमति हुई थी, युद्धविराम का सम्मान करने का आग्रह करता हूं, ताकि संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कूटनीति अग्रणी भूमिका निभा सके।"
तेल की कीमतें फिर 95 डॉलर से ऊपर पहुंच गईं। मध्य पूर्व से होकर तेल और गैस परिवहन के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की आशंकाओं के बीच, गुरुवार को तेल की कीमतों में उछाल आया। ब्रेंट क्रूड वायदा 2% से अधिक बढ़कर 96.70 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 3% बढ़कर 97 डॉलर प्रति बैरल हो गया। यह उछाल युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के एक दिन बाद आया है, जो 110 डॉलर से गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थीं।
वैश्विक बाजार अधिकतर गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि युद्धविराम के प्रभावी होने की उम्मीदें धूमिल होती जा रही थीं। जापान का निक्केई 0.8% गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.2% नीचे आया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.5% से अधिक गिर गया, और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.7% नीचे आया। कल वॉल स्ट्रीट में भारी बढ़त के साथ कारोबार समाप्त हुआ, लेकिन डॉव जोन्स फ्यूचर्स फिलहाल गिरावट में हैं, जो आज अमेरिकी शेयर बाजारों के कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।
एफआईआई द्वारा बिक्री जारी है विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे दलाल स्ट्रीट में निवेशकों की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशक लगातार 26वें सत्र में भारतीय शेयरों में शुद्ध बिक्री करते रहे और बुधवार को लगभग 2,812 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए। इसका निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा।
वैश्विक व्यापार के लिए अहम मार्ग खुलने की तैयारी, टोल वसूली की योजना
8 Apr, 2026 12:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जल्द ही खुलने के आसार हैं। सीजफायर (Ceasefire) के बाद ईरान (Iran) ने भी शर्तों पर सहमति जता दी है। अब यहां से तेल के जहाजों का गुजरना शुरू हो जाएगा। हालांकि, खबरें हैं कि इसके लिए मुल्कों को ईरान के साथ ओमान (Oman) को भी टोल टैक्स (Toll Tax) देना होगा। इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि टैक्स की बात सीजफायर की शर्तों में शामिल है।
क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि दो सप्ताह के सीजफायर प्लान में फीस की बात कही गई है। इसके तहत ईरान और ओमान दोनों ही मुल्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलेंगे। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस रकम का इस्तेमाल मुल्क में दोबारा होने वाले निर्माण कार्यों के लिए करेगा। जबकि, यह साफ नहीं है कि ओमान राशि का किस तरह इस्तेमाल करेगा।
अब तक फ्री था
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में आता है, लेकिन दुनिया इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग ही मानती थी। इसके चलते अब तक कोई भी देश जहाज निकलने के लिए टोल नहीं देता था।
भारत भी दे रहा है फीस?
बीते कुछ दिनों में शिवालिक, नंदा देवी, जग वसंद, पाइन गैस, ग्रीन सान्वी समेत कई जहाज भारत की ओर पहुंचे हैं। हालांकि, अब 16 भारतीय झंडे वाले जहाज स्ट्रेट पर अटके हुए हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि भारत की तरफ से कोई फीस दी जा रही है या नहीं। वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी।
बाब-अल-मंदेब पर भी मंडराया था खतरा
एक दिन पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि मेरिका-इजरायल ने अगर सैन्य कार्रवाइयां जारी रखीं ,तो वह यमन में अपने हूती सहयोगियों के माध्यम से बाब-अल-मंदेब मार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा। ईरान की यह धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के तुरंत बाद आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है तो ‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’।
ईरान ने कहा कि ‘अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है’ तो तेहरान हूतियों से मदद मांगेगा, ‘जो बाब-अल-मंदेब जलमार्ग को भी बंद कर देंगे’। हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। ये विद्रोही पहले भी इस बड़े जलमार्ग और उसके आसपास जहाजों पर अक्सर हमले करते रहे हैं, जो लाल सागर में समुद्री डकैती और उग्रवाद का प्रमुख कारण रहा है।
विकास दर और महंगाई पर गवर्नर का बयान, रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव
8 Apr, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की हालिया बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की गई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक ने स्थिरता और सतर्कता को अपनी नीति का मुख्य आधार बनाया है। नीतिगत ब्याज दरों से लेकर विदेशी मुद्रा भंडार और एनबीएफसी की स्थिति तक, इस बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों के बारे में जानें।
1. नीतिगत दरों पर रिजर्व बैंक का रुख
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से न्यूट्रल रुख अपनाते हुए नीतिगत ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया।
इस फैसले के तहत, रेपो रेट बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।
तरलता प्रबंधन को लेकर रिज़र्व बैंक भविष्य में सक्रिय और पूर्व-सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएगा।
2. महंगाई और आर्थिक विकास
चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
इसके साथ ही, हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
निकट भविष्य के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों का आउटलुक आरामदायक स्थिति में है।
हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में हालिया उछाल महंगाई के लिए एक संभावित जोखिम बनकर सामने आया है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी (जीडीपी) विकास दर 6.9 प्रतिशत अनुमानित है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी कम है।
उच्च-आवृत्ति संकेतक दर्शाते हैं कि देश की आर्थिक गतिविधि और इसकी गति निरंतर बनी हुई है।
3. वैश्विक चुनौतियां और उनका असर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है।
लगातार चल रहे संघर्षों के कारण पैदा हुई भारी अनिश्चितता आर्थिक दृष्टिकोण पर भारी पड़ रही है।
उच्च ऊर्जा कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से आर्थिक विकास के प्रभावित होने की आशंका है।
इन बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक हो गई है।
रिजर्व बैंक उभरती हुई स्थिति पर कड़ी नजर रखेगा और ऐसी नीतियां लागू करेगा जो अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें।
4. विदेशी मुद्रा, रुपया और बाजार
3 अप्रैल तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 696.1 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है।
मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक बुनियादी ढांचे के बावजूद, पिछले साल भारतीय रुपये में पिछले वर्षों के औसत की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई।
आरबीआई की विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और बाज़ार में अस्थिरता रोकने के लिए बैंक हस्तक्षेप जारी रखेगा।
रेमिटेंस में अपेक्षित मजबूती के कारण चालू खाता घाटा को मध्यम और एक टिकाऊ स्तर पर रखने में मदद मिलेगी।
भारत अभी भी ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं के लिए दुनिया का एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है।
5. बैंकिंग और एनबीएफसी
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बुनियादी मानक बेहद मजबूत हैं।
एनबीएफसी सेक्टर पूंजी के मोर्चे पर मजबूत है। यह बेहतरीन लिक्विडिटी और ग्रॉस एनपीए में हुए सुधार के साथ काम कर रहा है।
आरबीआई की यह मौद्रिक नीति बताती है कि वैश्विक स्तर पर व्याप्त तनाव और ऊर्जा संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। 696.1 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार, नियंत्रण में महंगाई दर और एनबीएफसी सेक्टर की मजबूती सकारात्मक संकेत हैं। रिज़र्व बैंक का न्यूट्रल रुख और यथास्थिति का फैसला यह सुनिश्चित करता है कि नीति निर्माता किसी भी वैश्विक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सतर्क हैं।
कानूनी विवाद के बीच अदाणी समूह ने कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा
8 Apr, 2026 10:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज सिविल फ्रॉड केस को खारिज करने की मांग की है। मंगलवार को न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन फेडरल कोर्ट में दाखिल एक याचिका में अदानी के वकीलों ने एसईसी के दावों को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया।
अदानी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर नवंबर 2024 में आरोप लगा था कि उन्होंने अदानी ग्रीन एनर्जी के लिए लाभ पाने हेतु भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने का वादा किया था। एसईसी का दावा है कि 2021 में 6,965 करोड़ रुपये के बॉन्ड ऑफरिंग दस्तावेजों में इस योजना को छिपाया गया। अदालती फाइलिंग में वकीलों ने दलील दी कि यह मामला अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है, क्योंकि घटना और संबंधित व्यक्ति भारत के हैं। साथ ही वे बॉन्ड कभी अमेरिकी एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं हुए थे। वकीलों ने रिश्वतखोरी के दावों को निराधार बताते हुए कहा कि इसमें अदाणी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। फिलहाल इस मामले पर एसईसी की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एजीआर बकाया मामले में वोडाफोन आइडिया को राहत
दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन-आइडिया के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से जुड़े बकाये के पुनर्मूल्यांकन की समय-सीमा जून तक बढ़ा दी है। पहले इस प्रक्रिया को 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क की समीक्षा के चलते समय-सीमा बढ़ाई गई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वोडाफोन-आइडिया को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2006-07 से 2018-19 तक के एजीआर बकाये को 87,695 करोड़ रुपये पर स्थिर कर दिया है।
दूरदराज क्षेत्रों में खुलेंगे बैंकिंग आउटलेट व टच पॉइंट, ग्राहकों को मिलेंगी बेहतर सेवाएं
बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने के लिए रिजर्व बैंक मौजूदा नियमों में बड़ा बदलाव कर रहा है। इसके लिए नया मसौदा तैयार कर लिया गया है। गांव-कस्बों में बैंकिंग सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बैंकिंग आउटलेट व टच पॉइंट खुलेंगे। इन आउटलेट के जरिये खाता खोलने, पैसा निकालने, जमा करने, ट्रांसफर करने, चेक, पासबुक व एटीएम कार्ड समेत तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। नए नियमों के साथ इस व्यवस्था को जुलाई से लागू करने की तैयारी है। बिजनेस बैंकिंग आउटलेट व बैंकिंग टच पॉइंट के लिए अलग अलग व्यापार प्रतिनिधि (बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट) रखे जाएंगे। ये बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट अपनी सहायता के लिए उप-एजेंट भी रख सकेंगे। इनके कार्यों के लिए संबंधित बैंक पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा। बैंकिंग आउटलेट सप्ताह में 5 दिन और रोजाना कम से कम चार घंटे काम करेंगे। छोटे लेनदेन वाले बैंकिंग टच प्वाइंट के लिए कोई समय तय नहीं होगा। दोनों श्रेणियों में परिश्रामिक भी दिया जाएगा।
मिलेंगी ये सुविधाएं
बैलेंस जांच, मिनी स्टेटमेंट, डेबिट कार्ड जारी व ब्लॉक
चेक सेवाएं, आधार/मोबाइल लिंकिंग, पासबुक अपडेट, बिल भुगतान
शिकायत दर्ज, ऋण/बीमा/पेंशन, केवाईसी अपडेट, नोट व सिक्के
जमा वृद्धि के मामले में बेहतर रहा निजी बैंकों का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 25-26 की चौथी तिमाही के दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों ने सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निजी बैंकों की जमा वृद्धि 12 से 17 फीसदी के बीच रही, जबकि सरकारी बैंकों में यह 2 से 14 फीसदी तक सीमित रही। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 2.43 लाख करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर रहा। सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया ने सबसे अधिक 14.33 फीसदी की बढ़त दर्ज की। कर्ज के मोर्चे पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने सबसे अधिक 2.92 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बांटा।
मॉर्गन स्टेनली ने भारत का जीडीपी अनुमान घटाया
मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के वास्तविक जीडीपी अनुमान को 30 आधार अंक घटाकर 6.5 फीसदी से 6.2 फीसदी कर दिया है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि औद्योगिक लागत बढ़ने से उत्पादन में कटौती हो रही है, साथ ही रुपये की कमजोरी से आयातित वस्तुओं पर महंगाई भी बढ़ रही है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 24.6 फीसदी बढ़ी
इलेक्ट्रिक वाहनों की खुदरा बिक्री वर्ष 2025-26 के दौरान 24.6 फीसदी बढ़कर 24.52 लाख इकाई हो गई। फाडा के अनुसार, दोपहिया वाहनों की बिक्री 14 लाख इकाइयों को पार कर गई, जबकि इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री लगभग दो लाख इकाइयों के करीब पहुंच गई।
आईडीबीआई बैंक विनिवेश के लिए नया प्रस्ताव
आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार संभावित खरीदारों से संशोधित वित्तीय बोलियां मांग सकती है। बैंक के अधिग्रहण के लिए फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और एमिरेट्स एनबीडी प्रमुख बोलीदाताओं के रूप में सामने आए हैं।
एपल के पहले फोल्डेबल आईफोन में परीक्षण में ही मिलीं खामियां
एपल के पहले फोल्डेबल आईफोन के शुरुआती परीक्षणों में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिसके कारण इनके उत्पादन और शिपमेंट में देरी का अनुमान है। ये आईफोन इस साल की दूसरी छमाही में लॉन्च किए जाने थे। जापानी पत्रिका निक्केई एशिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कंपनी को इंजीनियरिंग टेस्ट प्रोडक्शन (ईटीपी) चरण के दौरान इन गड़बड़ियों का पता चला, जो उम्मीद से कहीं अधिक हैं। हालांकि, एपल ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।
कॉल-एसएमएस के लिए सस्ते मोबाइल प्लान को अनिवार्य करने की तैयारी
ट्राई का नया प्रस्ताव : सिर्फ कॉल और एसएमएस सेवाएं लेने वाले उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान से मिलेगी राहत
दूरसंचार नियामक ट्राई ने सस्ते मोबाइल प्लान के लिए एक अहम प्रस्ताव किया है। अब मोबाइल कंपनियों को ऐसे किफायती मोबाइल प्लान पेश करने होंगे, जिनमें सिर्फ कॉल और एसएमएस की सुविधा हो और जिसकी कीमत मौजूदा डाटा वाले प्लान से कम हो। दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण (तेरहवां संशोधन) विनियमन, 2026 के मसौदे में ट्राई ने कहा है कि हर टेलीकॉम ऑपरेटर को कम से कम एक ऐसा विशेष प्लान देना होगा, जिसमें केवल वॉयस और एसएमएस सेवाएं शामिल हों। ट्राई के अनुसार, पहले भी इस तरह के वाउचर जारी करने का प्रावधान किया गया था, लेकिन कंपनियों ने सीमित विकल्प और लंबी वैधता वाले ही कुछ प्लान पेश किए। साथ ही, इन प्लानों की कीमतें भी अधिक रखी गईं। ट्राई ने नए मसौदे पर दूरसंचार उद्योग और अन्य हितधारकों से 28 अप्रैल तक सुझाव मांगे हैं।
अनावश्यक सेवाओं की बिक्री पर रोक
ट्राई का मानना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं को फायदा होगा। पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक सेवाओं की जबरन बिक्री पर रोक लगेगी। जिन उपभोक्ताओं को इंटरनेट की जरूरत नहीं है, उन्हें अतिरिक्त भुगतान से राहत मिलेगी। क्या-क्या बदलेगा..हर वैधता अवधि के लिए डाटा वाले प्लान के साथ समान अवधि का केवल वॉयस-एसएमएस प्लान भी देना होगा। इन प्लानों की कीमत डाटा वाले प्लान से कम रखनी होगी। उपभोक्ताओं को अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे।
वैश्विक तनाव कम होते ही सर्राफा बाजार में सोना-चांदी चमकने लगे
8 Apr, 2026 09:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत (Silver Price) 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत (Gold Price ) 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।
बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीद
पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है।
सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंता
ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं।
चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।
राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
ट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।
निफ्टी में 815 अंकों की तेजी, बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखी गई
8 Apr, 2026 09:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद भारतीय बाजार में तेजी दिखी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 2,700 से अधिक अंकों का उछाल दिखा। वहीं, दूसरी ओर निफ्टी 815 अंकों की तेजी के बाद 23,900 के पार पहुंच गया। आज आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले भी आने हैं। बाजार में निवेश करने वाले लोगों की नजर इस पर भी बनी रहेगी। दो हफ्ते के संघर्ष-विराम की घोषणा का असर रुपये पर भी दिखा। अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनने के बाद शुरुआती कारोबार में रुपया 50 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.56 पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का हाल
सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में सबसे अधिक लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा भी प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियों में शामिल थीं। टेक महिंद्रा इस दौड़ में एकमात्र पिछड़ने वाली कंपनी के रूप में उभरी।
एशियाई बाजारों में दिखी तेजी
एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहे थे। मंगलवार को अमेरिकी बाजार स्थिर रुख के साथ बंद हुए।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
अनुसंधान विश्लेषक और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा कि इसका मुख्य कारण अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में दो सप्ताह के विराम की घोषणा और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान करने की सहमति है। इससे ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान से संबंधित तात्कालिक चिंताओं में काफी कमी आई है, जो वैश्विक बाजारों के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो मुद्रास्फीति और मुद्रा दोनों दृष्टिकोणों से भारत के लिए विशेष रूप से सकारात्मक है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम ने निकट भविष्य के बाजार परिदृश्य को नाटकीय रूप से बदल दिया है। युद्धविराम के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत में आई भारी गिरावट (95 अमेरिकी डॉलर तक) से बाजार में फिर से तेजी आएगी। यह युद्धविराम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति, उचित बाजार मूल्यों के समर्थन से बाजार को फिर से तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 94.80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 13.24 प्रतिशत गिरकर 94.80 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 8,692.11 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 7,979.50 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। मंगलवार को सेंसेक्स 509.73 अंक या 0.69 प्रतिशत बढ़कर 74,616.58 पर बंद हुआ। निफ्टी 155.40 अंक या 0.68 प्रतिशत चढ़कर 23,123.65 पर समाप्त हुआ।
दो हफ्ते की मोहलत के बाद अमेरिकी बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया
8 Apr, 2026 07:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित बड़े हमले को दो हफ्तों के लिए टालने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुजरने की अनुमति देता है, तो फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोकी जा सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट
इस फैसले का असर तुरंत वैश्विक बाजारों पर दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत करीब 18% गिरकर लगभग 92.60 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 6% गिरकर 103.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि, ये कीमतें अभी भी युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर से ज्यादा हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी, निवेशकों में भरोसा
वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। एसएंडपी 500 के फ्यूचर्स लगभग 2.4% ऊपर चले गए, जिससे निवेशकों में भरोसा बढ़ता नजर आया। बाजार को उम्मीद है कि अगर तनाव कम होता है, तो आर्थिक हालात भी स्थिर हो सकते हैं।
ट्रंप ने किया सीजफायर का एलान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा एलान करते हुए कहा है कि ईरान पर होने वाले संभावित हमले और बमबारी को फिलहाल दो हफ्तों के लिए रोक दिया गया है। ट्रंप ने बताया कि यह एक 'दोनों तरफ से लागू होने वाला सीजफायर' होगा, यानी इस दौरान न अमेरिका हमला करेगा और न ही ईरान कोई आक्रामक कदम उठाएगा। हालांकि इस समझौते के लिए एक बड़ी शर्त रखी गई है, ईरान को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना होगा।
अमेरिका को ईरान ने भेजा 10 बिंदु वाला शांति प्रस्ताव
ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान की तरफ से 10 बिंदुओं वाला एक कारगर शांति प्रस्ताव आया है, जिससे 28 फरवरी से चल रहे युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अगले दो हफ्तों में हालात किस दिशा में जाते हैं, क्या शांति बनेगी या फिर तनाव फिर से बढ़ेगा।
शेयर बाजार टूटा तो सोने ने पकड़ी रफ्तार, आज के ताजा रेट देखें
7 Apr, 2026 03:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार को सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज खोलने की धमकी दी, इसके बाद बाजार में घबराहट बढ़ गई। निवेशकों के सतर्क रुख के कारण, मई 2026 के लिए एमसीएक्स चांदी वायदा 1,579 रुपये गिर गया। यह 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। जून 2026 के लिए सोने का वायदा भी 356 रुपये कम हुआ। सोना 0.2 फीसदी की गिरावट के साथ 1.49 लाख रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। बाजार की स्थिति अस्थिर बनी हुई है।
सोने की कीमतों में गिरावट, शादी के सीजन में गहनों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद
मंगलवार को वैश्विक सोने की कीमतों में मिश्रित रुझान देखा गया। स्पॉट गोल्ड 4,646.69 डॉलर प्रति औंस पर लगभग स्थिर रहा। वहीं, जून डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोने का वायदा 0.2 फीसदी गिरकर 4,674.40 डॉलर पर आ गया। सर्राफा बाजार के जानकारों का अनुमान है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट को देखते हुए खरीदार अप्रैल से जुलाई वाले शादी के सीजन के लिए गहनों की खरीदारी की पहल कर सकते हैं। अनुमान के मुताबिक अक्षय तृतीया के आसपास कई लोग अग्रिम ऑर्डर दे सकते हैं।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
