व्यापार
सेंसेक्स धड़ाम, निफ्टी भी लुढ़का; ग्लोबल संकेतों का असर
13 Apr, 2026 08:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने से सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 1,600 अंक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 23,600 से नीचे पहुंच गया। बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट दिख रही है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स दिन के निचले स्तर 75,939 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 450 अंक से अधिक गिरकर सुबह 9:20 बजे 23,600 के स्तर से नीचे आ गया। बाजार में अस्थिरता मापने वाला भारतीय VIX 13% से अधिक बढ़कर 21 के ऊपर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 49 पैसे गिरकर 93.32 पर आ गया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी का हाल
सेंसेक्स
76,003.55
-1,546.70 (-1.99%)
निफ्टी
23,580.00
-470.60 (-1.96%)
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर के दौरान शांति वार्ता टूटने के बाद बाजार में व्यापक बिकवाली हावी रही। इससे सभी प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक लाल निशान में आ गए। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, इसके बाद बैंकिंग, वित्तीय और तेल व गैस क्षेत्रों में भी गिरावट आई। इस बीच निवेशक वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण दबाव में दिखे। फार्मा और स्वास्थ्य सेवा जैसे सुरक्षित क्षेत्रों में कम गिरावट दिखी। कुल मिलाकर बाजार का माहौल कमजोर बना हुआ है, जो जोखिम से बचने के रुझान और इक्विटी में क्षेत्रीय नेतृत्व की कमी को दर्शाता है।
तेल की कीमतों में उछाल
इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है और ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए नई चिंता बनकर उभरा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, यह नाकेबंदी दरअसल ईरान की संभावित नाकेबंदी के जवाब में अमेरिकी कदम है, जिसका आगे क्या असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में भू-राजनीतिक स्तर पर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जिसका सीधा असर बाजारों पर पड़ेगा। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि इस अत्यधिक अनिश्चित माहौल में वेट एंड वॉच यानी इंतजार और नजर बनाए रखने की रणनीति अपनाना ही बेहतर होगा।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर, भारत की GDP पर पड़ सकता है दबाव
13 Apr, 2026 06:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल, गैस और उर्वरक के आयात बिल में भारी उछाल आने की आशंका है। इससे व्यापार घाटा बढ़ने के साथ देश की जीडीपी वृद्धि भी धीमी पड़ सकती है। यदि संकट लंबा खिंचता है तो भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 2 फीसदी तक पहुंच सकता है।
क्या है रिपोर्ट में?
रिपोर्ट में कहा है कि मुश्किल हालात में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी तथा उर्वरक आयात में वृद्धि से व्यापार घाटा काफी बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर 23 फीसदी की वृद्धि हो सकती है, जिससे पेट्रोलियम आयात बिल में तेज उछाल आने की आशंका है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया निर्यात में संभावित बाधाएं, शिपिंग व बीमा लागत में वृद्धि एवं वैश्विक मांग में नरमी भी निर्यात पर दबाव डाल सकती है। इन सब कारणों से व्यापार घाटा और बढ़ेगा। इससे महंगाई में वृद्धि हो सकती है, साथ ही रुपये पर भी दबाव बढ़ेगा।
भारत-यूके व्यापार समझौता जल्द, आयात शुल्क में बड़ी कटौती
13 Apr, 2026 05:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता अगले महीने से लागू हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह समझौता मई के दूसरे सप्ताह से प्रभाव में आने की संभावना है। दोनों देशों ने 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत भारत के 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के (ड्यूटी फ्री) प्रवेश मिलेगा, जबकि भारत ब्रिटिश उत्पादों जैसे कार और व्हिस्की पर आयात शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी करेगा। भारत और ब्रिटेन ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को मौजूदा 56 अरब डॉलर से बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच: समझौते की शर्तों के मुताबिक, भारत ने चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे कई उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपना बाजार खोला है, जबकि भारतीय निर्यातकों को कपड़ा, जूते-चप्पल, रत्न एवं आभूषण, खेल सामान और खिलौनों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन निर्यात का मौका
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क को तत्काल 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी किया जाएगा। वर्ष 2035 तक धीरे-धीरे इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत आयात शुल्क को मौजूदा 110 फीसदी से घटाकर पांच वर्षों में 10 फीसदी करेगा।
इसके बदले भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के निर्यात के लिए कोटा के आधार पर प्रवेश मिलेगा।
भारत और ब्रिटेन ने दोहरा योगदान संधि करार पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
इससे दोनों देशों के अस्थायी कर्मियों को सामाजिक शुल्क को दो बार नहीं देना पड़ेगा।
नई कारों को लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही टाटा
12 Apr, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। टाटा मोटर्स कंपनी कई नई कारों को लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। बीते वित्तीय वर्ष में टाटा नेक्सान देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट एसयूवी रही, जिसने कंपनी को नई रणनीति बनाने का आत्मविश्वास दिया है। एफवाय 2026 में सब-4 मीटर एसयूवी सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन के बाद कंपनी अब अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।
अब टाटा इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नई ईवीज और अपडेटेड मॉडल्स पेश करने जा रही है। कंपनी की अपकमिंग कारों में टाटा अविन्या प्रमुख है, जिसे पहली बार ऑटो एक्सपो में पेश किया गया था। यह एक प्रीमियम क्रॉसओवर एसयूवी होगी और पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म पर आधारित रहेगी। इसे 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है। इसके अलावा टाटा सफारी ईवी भी चर्चा में है, जिसकी टेस्टिंग लगभग पूरी हो चुकी है।
यह कंपनी की पहली थ्री-रो इलेक्ट्रिक एसयूवी होगी और फेस्टिव सीजन के आसपास लॉन्च हो सकती है। वहीं टाटा सियेरा ईवी को भी 2026 में बाजार में उतारने की तैयारी है, जिसकी संभावित रेंज करीब 600 किलोमीटर बताई जा रही है। कंपनी अपने लोकप्रिय मॉडल टाटा टियागो और टियागो ईवी के फेसलिफ्ट वर्जन भी लाने वाली है। इनमें डिजाइन और फीचर्स में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे ग्राहकों को नया अनुभव मिलेगा।
हुंडई ने की कारों के सभी मॉडलों की कीमतों में बढोत्तरी की घोषणा
12 Apr, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रमुख कार निर्माता कंपनी हुंडई मोटर इंडिया ने अपनी संपूर्ण मॉडल श्रृंखला की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। मई 2026 से कंपनी की सभी लोकप्रिय गाड़ियों पर इसका असर देखने को मिलेगा। कंपनी अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में अधिकतम एक प्रतिशत तक की वृद्धि करने जा रही है, हालांकि हर मॉडल और उसके अलग-अलग विकल्पों के हिसाब से कीमतों में बदलाव अलग-अलग हो सकता है। इस कीमत बढ़ोतरी के पीछे कंपनी ने उत्पादन लागत में लगातार हो रही वृद्धि को मुख्य वजह बताया है। कच्चे माल, परिवहन और अन्य परिचालन खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। हुंडई ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसने काफी समय तक इन बढ़ती लागतों को स्वयं वहन करने की कोशिश की थी, ताकि ग्राहकों पर सीधा बोझ न पड़े। लेकिन अब खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के चलते कंपनी को इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना पड़ रहा है। यह साल 2026 में दूसरी बार है जब हुंडई ने अपनी गाड़ियों की कीमतों में इजाफा किया है। इससे पहले जनवरी महीने में कंपनी ने अपने पूरे पोर्टफोलियो में लगभग 0.6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। इसके अलावा, मार्च में भी कंपनी ने अपनी एक लोकप्रिय गाड़ी की कीमतों में शुरुआती ऑफर समाप्त होने के बाद संशोधन किया था।
इस नई बढ़ोतरी का सीधा असर कंपनी की सबसे ज्यादा बिकने वाली गाड़ियों पर पड़ने की संभावना है, खासकर मध्यम वर्ग के ग्राहकों में लोकप्रिय मॉडलों की कीमतें बढ़ने से बिक्री पर असर पड़ सकता है। हालांकि, अंतिम रूप से यह तभी स्पष्ट होगा जब कंपनी मॉडल और विकल्प के अनुसार नई कीमतों का पूरा विवरण जारी करेगी। लगातार बढ़ती कीमतें यह संकेत देती हैं कि आने वाले समय में वाहन खरीदना और महंगा हो सकता है। ऐसे में जो ग्राहक नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है।
अनंत अंबानी के जन्मदिन पर रोशनियों से जगमगा उठा बांद्रा सी लिंक
12 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई : रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी का 31वां जन्मदिन 10 अप्रैल को धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर उनकी एक तस्वीर मुंबई स्थित बांद्रा-वर्ली सी लिंक की रंगीन रोशनियों के बीच भी देखी गई. इसमें उनका नाम और चेहरा दोनों ही दिख रहा था. उन्हें जन्म दिन की बधाइयां दी गईं.
मुंबई का बांद्रा वर्ली सी लिंक अरब सागर के ऊपर बना केबल बेस्ड ब्रिज है. यह 5.6 किलोमीटर लंबा है. रात में यह पुल रोशनी से जगमगा उठता है. उस समय पुल और भी मनमोहक लगता है. ऐसा ही नजारा 10 अप्रैल की रात को भी दिखा, जब अनंत अंबानी को जन्मदिन की बधाई दी गई. आमतौर पर इस तरह का दृश्य बुर्ज खलीफा पर दिखाई पड़ता है, लेकिन बांद्रा सी लिंक का यह नजारा अनूठा था और बहुत ही सुंदर लग रहा था. पुल न केवल स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है, बल्कि कई बॉलीवुड फिल्मों में भी इसे खूबसूरती से दिखाया गया है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने अपने बेटे को जन्मदिन की बधाई दी. अनंत अंबानी ने 31वें जन्मदिन से पहले गुजरात में विभिन्न धार्मिक ट्रस्ट, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों और सामाजिक संगठनों को दान दिया. उन्होंने गुजरात के द्वारका, सोमनाथ, अंबाजी एवं सालंगपुर जैसे धार्मिक स्थलों पर कई परोपकारी पहल भी की.
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बयान में कहा कि द्वारका में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक बहुमंजिला यात्री भवन बनाया जाएगा. इसके साथ द्वारका शारदापीठ में वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों की सुविधा के लिए एस्केलेटर लगाए जाएंगे. अंबाजी में बनने वाले यात्री भवन में 17 कमरों का एक तल बनाने की भी घोषणा की गई.
कंपनी की ओर से बताया गया कि मंदिर में एक वर्ष तक "भोजन प्रसाद सेवा" चलाई जाएगी, जिससे करीब 26 लाख श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा. इसी तरह सोमनाथ मंदिर में भी एक वर्ष तक सुबह-शाम भोजन प्रसाद सेवा आयोजित किए जाने की घोषणा की गई.
इसके अलावा, सालंगपुर के श्री कष्टभंजनदेव हनुमानजी मंदिर और जामनगर जिले के सेतलूस में गौशालाएं खोलने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है. बयान के मुताबिक, शैक्षणिक ढांचे के उन्नयन, गौशालाओं की स्थापना, सामुदायिक भोज, जामनगर रिफाइनरी के नजदीकी गांवों में साड़ी वितरण और ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई गई है.
अंबानी ने गुजरात में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई पहल, शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे में सुधार और सामुदायिक भोज का भी आयोजन किया. अनंत अंबानी के जन्मदिन पर केरल में मंदिरों के विकास और पशु कल्याण के लिए 18 करोड़ की सहायता राशि देने की घोषणा की गई. इनमें राजराजेश्वरम मंदिर और गुरुवायूर मंदिर शामिल हैं. राजराजेश्वरम के ऐतिहासिक ईस्ट गोपुरम के जीर्णोद्धार का भी संकल्प लिया गया.
अनंत अंबानी देश के सबसे अमीर व्यक्ति और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे हैं. वे रिलायंस एनर्जी और न्यू एनर्जी कारोबार को संभालते हैं. वह कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. उनकी शादी राधिका मर्चेंट के साथ 12 जुलाई 2024 को सुर्खियों में थी. इसमें देश-विदेश की कई गणमान्य हस्तियों ने हिस्सा लिया था.
अनफ्रीज फंड्स को लेकर बढ़ी कूटनीतिक हलचल, सच्चाई पर बना संशय
11 Apr, 2026 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका कतर में ईरान की छह अरब डॉलर की संपत्ति अनफ्रीज करने को तैयार हो गया है। ईरानी सूत्रों के अनुसार अमेरिका कतर और अन्य देशों में रखे ईरानी फंड को अनफ्रीज करने पर सहमत हो गया है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत चल रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका कतर और अन्य विदेशी बैंकों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को जारी करने पर सहमत हो गया है। एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे वाशिंगटन की ओर से समझौते तक पहुंचने की दिशा में 'गंभीरता' के संकेत के रूप में बताया है। यह कदम न केवल संकटग्रस्त ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए राहत ला सकता है, बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के कूटनीतिक प्रयासों से भी सीधा जुड़ा हुआ है। पूरे घटनाक्रम की आर्थिक-सामरिक महत्व को नीचे सवाल-जवाब के नजरिए से समझें।
सवाल: अमेरिका ईरान की कितनी संपत्ति को अनफ्रीज कर रहा है और इसका मतलब क्या है?
जवाब: सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने कतर के बैंकों में रखी ईरान की लगभग छह अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करने पर सहमति दी है। यह कदम इस्लामाबाद वार्ता में एक सकारात्मक माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा है। मुख्य रूप से इस फंड की रिहाई को 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के माध्यम से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की शर्त से जोड़ा गया है, जो इस वार्ता का एक प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है। हालांकि, इस घटनाक्रम पर अब तक अमेरिका या कतर के विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
सवाल: यह भारी-भरकम फंड कहां से आया और इसे पहली बार कब फ्रीज किया गया था?
जवाब: यह धनराशि मूल रूप से ईरान द्वारा दक्षिण कोरिया को बेचे गए कच्चे तेल की बिक्री से जुड़ी है। 2018 में, जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुए समझौते को रद्द कर दिया था और ईरान पर कड़े प्रतिबंध फिर से लगा दिए थे, तब यह संपत्ति दक्षिण कोरियाई बैंकों में ब्लॉक हो गई थी।
सवाल: दक्षिण कोरिया के बैंकों से यह संपत्ति कतर तक कैसे पहुंची?
जवाब: सितंबर 2023 में कतर (दोहा) की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच एक कैदियों की अदला-बदली से जुड़ा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत, अमेरिका में कैद पांच ईरानियों और ईरान में कैद पांच अमेरिकी नागरिकों की रिहाई पर सहमति बनी थी। इसी समझौते के हिस्से के रूप में इस फंड को दक्षिण कोरिया से कतर के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था।
सवाल: 2023 में इस संपत्ति को दोबारा फ्रीज करने की नौबत क्यों आई?
जवाब: यह छह बिलियन डॉलर का फंड 2023 में जारी किया जाना तय हुआ था। लेकिन 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल पर ईरान के सहयोगी फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास द्वारा किए गए हमलों के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन ने इसे फिर से फ्रीज कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया था कि ईरान निकट भविष्य में इस पैसे तक नहीं पहुंच पाएगा और वाशिंगटन के पास इस खाते को पूरी तरह से फ्रीज रखने का अधिकार सुरक्षित है।
सवाल: अनफ्रीज होने के बाद, क्या ईरान इस पैसे का इस्तेमाल अपनी मर्जी से कर सकेगा?
जवाब: नहीं, इस फंड के इस्तेमाल पर बेहद सख्त पाबंदियां लागू हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह धनराशि केवल 'मानवीय उपयोग' तक सीमित रहेगी। ईरान इस पैसे को सीधे तौर पर नहीं निकाल सकता; इसके बजाय यह फंड अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की निगरानी में अनुमोदित विक्रेताओं को भोजन, दवा, चिकित्सा उपकरण और कृषि वस्तुओं की खरीद के लिए चुकाया जाएगा, जिन्हें ईरान में भेजा जाएगा।
सवाल: अब आगे क्या?
जवाब: कतर में ईरानी संपत्ति का अनफ्रीज होना कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम है। इस्लामाबाद वार्ता के नतीजे और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा इस कदम की अंतिम सफलता तय करेंगे। इसके साथ ही, ईरान वर्तमान में एक गंभीर आंतरिक नेतृत्व संकट से भी जूझ रहा है यह देखना बेहद अहम होगा कि अमेरिकी ट्रेजरी की कड़ी निगरानी के बीच, इन मानवीय वस्तुओं की आपूर्ति से ईरान के आम नागरिकों और वहां की चरमराती अर्थव्यवस्था को कितनी वास्तविक राहत मिल पाती है।
महंगाई के दबाव में उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
11 Apr, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ब्रोकरेज फर्म सिस्टेमैटिक्स की एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, आने वाली तिमाहियों में कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी (उपभोक्ताओं पर आधारित) सेक्टर को विकास और चुनौतियां दोनों का सामना करना पड़ सकता है। उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं, कच्चे माल (इनपुट) की बढ़ती लागत और विनियामक दबावों के कारण इस सेक्टर की विकास दर और मुनाफे पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
आभूषण और परिधान क्षेत्र में मजबूत बढ़त
वित्तीय वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में इस सेक्टर में कुल मिलाकर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। यह मुख्य रूप से वैल्यू अपैरल (किफायती परिधान) रिटेल, प्रीमियम फैशन और आभूषणों के मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित था।
आभूषण: सोने की कीमतों में महंगाई, शादियों की मांग और त्योहारी खरीदारी के दम पर इस क्षेत्र ने असाधारण वृद्धि देखी है। हालांकि, उत्पाद मिश्रण में बदलाव के कारण मार्जिन में थोड़ी नरमी आ सकती है। सिस्टेमैटिक्स ने कहा, " वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में आभूषण उद्योग ने उल्लेखनीय लचीलापन और मजबूत विकास गति का प्रदर्शन किया है, जिसमें सोने की कीमतों में भारी अस्थिरता के बावजूद उपभोक्ता मांग मजबूत रही है"।
परिधान: वैल्यू अपैरल खुदरा विक्रेताओं ने नए स्टोर के विस्तार और समान-स्टोर बिक्री में सुधार के माध्यम से मजबूत वृद्धि हासिल की। इसके साथ ही प्रीमियम ब्रांडों ने भी अपनी निरंतर गति बनाए रखी है।
क्यूएसआर और बेवरेजेज: मार्जिन पर दबाव और अस्थिर मांग
अन्य उपभोक्ता खंडों में रिकवरी के संकेत तो हैं, लेकिन चुनौतियां भी बरकरार हैं:
क्विक सर्विस रेस्तरां: इस सेक्टर ने रिकवरी के शुरुआती संकेत दिए हैं, लेकिन मांग में अस्थिरता और एलपीजी (एलपीजी) आपूर्ति से संबंधित व्यवधानों के कारण मार्जिन लगातार दबाव में है। हालांकि कच्चे माल की स्थिर कीमतों के कारण ग्रॉस मार्जिन स्वस्थ रहा, लेकिन भारी छूट (डिस्काउंटिंग) और नकारात्मक परिचालन लीवरेज के कारण रेस्तरां का मुनाफा प्रभावित हुआ है।
अल्कोहलिक-बेवरेज: इस सेगमेंट में मिला-जुला प्रदर्शन रहा। नए उत्पादों के लॉन्च से 'प्रेस्टीज एंड अबव' सेगमेंट में दहाई अंकों की मजबूत वॉल्यूम वृद्धि देखी गई और इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) कंपनियों ने ग्रोथ का नेतृत्व किया। इसके विपरीत, बीयर सेगमेंट का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
चुनौतियां: इनपुट लागत और मार्जिन पर उभरता जोखिम
रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में आक्रामक रहा है, जिससे राजस्व वृद्धि को तो समर्थन मिला है, लेकिन उच्च परिचालन लागत के कारण निकट अवधि की लाभप्रदता पर असर पड़ा है। भारी छूट और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मार्जिन पर दबाव स्पष्ट रूप से उभर रहा है। पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत और एल्को-बेवरेज सेगमेंट में विनियामक चुनौतियां भी प्रमुख अड़चनें हैं। परिधान क्षेत्र के लिए चेतावनी देते हुए सिस्टेमैटिक्स ने कहा, "पॉलिएस्टर की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण परिधान कंपनियों को संभावित मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर 1QFY27 से नतीजों पर पड़ सकता है, जब तक कि इन लागतों का बोझ उपभोक्ताओं पर न डाला जाए"।
टियर-2 और टियर-3 शहर बनेंगे ग्रोथ इंजन
इन तमाम चुनौतियों के बीच, कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी सेक्टर की विकास गति जारी रहने की उम्मीद है। उपभोक्ता व्यवहार में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है; टियर-2 और टियर-3 शहरों में 'वन-स्टॉप शॉप्स' तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, जो किफायती कीमतों पर विस्तृत रेंज पेश करते हैं। भविष्य के दृष्टिकोण से, ब्रोकरेज ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक संघर्ष खपत के लिए जोखिम पैदा करता है। वर्तमान मांग रिकवरी की स्थिरता बनाए रखने के लिए यह एक प्रमुख कारक है, जिस पर आगे कड़ी नजर रखने की आवश्यकता होगी।
साइबर सुरक्षा बढ़ाने और प्रोसेस आसान बनाने के लिए नए प्लेटफॉर्म पेश
11 Apr, 2026 12:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार में सुगमता) को बढ़ावा देने और साइबर सुरक्षा की निगरानी को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सेबी अध्यक्ष ने 24 मार्च को तीन नए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्लेटफॉर्म लॉन्च किए हैं, जिनकी आधिकारिक जानकारी शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई। ये प्लेटफॉर्म नियामक संस्थाओं के साथ संचार को सुव्यवस्थित करने और न्यायिक कार्यवाही को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का काम करेंगे।
क्या हैं ये तीन नए प्लेटफॉर्म और इनका असर?
इस नई पहल के तहत SUPCOMS, ई-एडज्यूडिकेशन पोर्टल (e-adjudication portal) और साइबर-सेक ऑडिट कंप्लायंस (C-SAC) को लॉन्च किया गया है। इन तकनीकी सुधारों से सेबी-विनियमित संस्थाओं की कार्यप्रणाली में बड़ी पारदर्शिता आएगी। SUPCOMS से सुधरेगा संचार: 'सिंगल यूनिवर्सल प्लेटफॉर्म फॉर कम्युनिकेशंस' (SUPCOMS) सेबी के साथ होने वाली पारंपरिक ईमेल-आधारित बातचीत की जगह लेगा। सेबी ने स्पष्ट किया है कि "यह बदलाव सुनिश्चित करता है कि आगे चलकर बाहरी संस्थाओं के साथ सभी संचार सेबी और संस्था दोनों के लिए आसानी से उपलब्ध रहें"। यह प्लेटफॉर्म सभी आधिकारिक संवादों को एक जगह रखकर संचार को टूटने से बचाता है और एक मजबूत 'संस्थागत स्मृति' का निर्माण करता है। ई-एडज्यूडिकेशन पोर्टल: यह एक नेक्स्ट-जेन प्लेटफॉर्म है जिसे अर्द्ध-न्यायिक कार्यवाही को डिजिटल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके जरिए सभी पक्षों को एक पारदर्शी विकल्प मिलेगा, जहां बाहरी संस्थाएं 'कारण बताओ नोटिस' डाउनलोड कर सकेंगी, अपना जवाब दाखिल कर सकेंगी और एक समर्पित ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से सुनवाई में भाग ले सकेंगी। C-SAC (AI-आधारित साइबर सुरक्षा निगरानी): साइबर-सेक ऑडिट कंप्लायंस (C-SAC) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम प्लेटफॉर्म है। यह SI पोर्टल (https://siportal.sebi.gov.in) पर जमा की गई साइबर ऑडिट रिपोर्ट का गहन विश्लेषण करेगा और अनुपालन में कमियों तथा जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा। विश्लेषण के बाद यह संस्थाओं को 'रिस्क स्कोर' और तुलनात्मक विवरण भी प्रदान करेगा, जिससे सेबी के जोखिम-आधारित सुपरविजन को मजबूती मिलेगी। सेबी के ये तीनों प्लेटफॉर्म न केवल नियामक ढांचे को तकनीकी रूप से उन्नत बनाएंगे, बल्कि बाजार के प्रतिभागियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को भी बेहद आसान कर देंगे। एआई और ऑनलाइन व्यवस्था के इस्तेमाल से मैनुअल प्रयासों में भारी कमी आएगी और समय पर डेटा-आधारित पर्यवेक्षी निर्णय लेना संभव हो सकेगा।
डाउनस्ट्रीम कंपनियों संग साझेदारी से उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
11 Apr, 2026 06:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमिनियम ने ओडिशा के झारसुगुड़ा में प्रस्तावित वेदांता एल्युमिनियम पार्क के भीतर डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए दो प्रमुख कंपनियों, सिंघल स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड और स्कॉट-एल मेटकॉन प्राइवेट लिमिटेड (स्कॉटिश केमिकल इंडस्ट्रीज और यूएल इंडस्ट्रीज की सहयोगी कंपनी) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
ओडिशा में 500 करोड़ रुपये का निवेश आएगा
एमओयू हस्ताक्षर समारोह भुवनेश्वर में आयोजित हुआ, जिसमें ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें उद्योग, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री श्री संपद चंद्र स्वाईं, उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री हेमंत शर्मा शामिल थे। झारसुगुड़ा में प्रस्तावित वेदांता एल्युमिनियम पार्क को डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम उद्योगों के लिए एक विश्वस्तरीय औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देना, एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देना और ओडिशा को वैश्विक एल्युमिनियम केंद्र के रूप में मजबूत करना है। इस पहल से राज्य में 500 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश आने की संभावना है और लगभग 1,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
रोजगार के अवसर पैदा होंगे
इस अवसर पर उद्योग, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री श्री संपद चंद्र स्वाईं ने कहा, 'यह पहल ओडिशा को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में और मजबूत करती है। वेदांता एल्युमिनियम पार्क निवेश को बढ़ावा देगा, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा और राज्य की विनिर्माण क्षमता को मजबूत करेगा।' उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री हेमंत शर्मा ने कहा, 'वेदांता एल्युमिनियम पार्क ओडिशा की औद्योगिक वैल्यू चेन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर बुनियादी ढांचा और नीतिगत सहयोग के साथ हम उद्योगों को प्रतिस्पर्धी तरीके से आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं।'
वेदांता झारसुगुड़ा के सीईओ सी. चंद्रु ने कहा, 'झारसुगुड़ा, वेदांता एल्युमिनियम की विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वेदांता एल्युमिनियम पार्क न केवल डाउनस्ट्रीम उद्योगों को मजबूत करेगा, बल्कि रोजगार के स्थायी अवसर पैदा करेगा, उद्यमिता को बढ़ावा देगा और क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान देगा।' लगभग 56 एकड़ क्षेत्र में वेदांता एल्युमिनियम पार्क विकसित किया जा रहा है। इस पार्क को एक प्रमुख डाउनस्ट्रीम विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे उद्योगों को लॉजिस्टिक्स लागत, ऊर्जा खपत और उत्पादन समय को कम करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल लॉजिस्टिक्स ने बदली छोटे उद्योगों की तस्वीर
11 Apr, 2026 05:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में ई-कॉमर्स का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल महानगरों और बड़े मार्केटप्लेस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सूरत, लखनऊ, कोच्चि और रायपुर जैसे शहरों के छोटे और मझोले ब्रांड्स भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। ये ब्रांड्स अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाते हुए डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल को तेजी से अपना रहे हैं।
क्या है शिपरॉकेट?
इस बदलाव के केंद्र में Shiprocket (शिपरॉकेट) एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। यह प्लेटफॉर्म एमएसएमई कंपनियों (छोटे और मझोले उद्योग) के लिए एंड-टू-एंड ई-कॉमर्स समाधान उपलब्ध कराता है, जिसमें शिपिंग, फुलफिलमेंट, चेकआउट और पोस्ट-ऑर्डर मैनेजमेंट जैसी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलती हैं। उद्योग से जुड़े हालिया अध्ययनों के अनुसार, छोटे और लघु उद्योग पहले से ही देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे रहे हैं और आने वाले समय में ऑनलाइन रिटेल ग्रोथ में उनकी हिस्सेदारी और बढ़ने की संभावना है। खासकर D2C वर्ग पारंपरिक मार्केटप्लेस की तुलना में अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें गैर-मेट्रो शहरों का योगदान उल्लेखनीय है।
एमएसएमई कंपनियों के सामने कई चुनौतियां
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे हैं। वहीं, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए सोशल और चैट कॉमर्स एक नए बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां लोकल बुटीक, क्षेत्रीय फूड ब्रांड्स और किराना स्टोर्स सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, MSMEs को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। उच्च शिपिंग लागत, विभिन्न सेवा प्रदाताओं के बीच समन्वय की कमी, मल्टीपल कूरियर पार्टनर्स और पेमेंट गेटवे का प्रबंधन, रिटर्न और रिकॉन्सिलिएशन की जटिलताएं छोटे व्यापारियों के लिए बड़ी बाधाएं हैं। साथ ही, अधिकांश छोटे व्यवसायों के पास तकनीकी टीम रखने की क्षमता भी सीमित होती है।
शिपरॉकेट ऐसे कर रहा एमएसएमई कंपनियों की मदद
इन समस्याओं के समाधान के रूप में Shiprocket ने एक सरल और प्रभावी प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह कई कूरियर पार्टनर्स को एक ही इंटरफेस में जोड़ता है, जिससे व्यापारी हर ऑर्डर के लिए कीमत, डिलीवरी समय और रेटिंग की तुलना कर सकते हैं। इसके फुलफिलमेंट सेंटर और यूनिफाइड कॉमर्स सिस्टम ऑनलाइन और ऑफलाइन चैनलों को जोड़ते हैं, जिससे लोकल स्टोर का स्टॉक भी ऑनलाइन ऑर्डर पूरा कर सकता है। इसके अलावा, शिपरॉकेट का क्रॉस-बॉर्डर समाधान भारतीय व्यापारियों को 100 से अधिक देशों में अपने उत्पाद भेजने की सुविधा देता है। इस तरह, सेलम के साड़ी ब्रांड से लेकर भोपाल के स्नैक निर्माता तक, शिपरॉकेट अब केवल एक सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरकर सामने आया है, जो क्षेत्रीय D2C ब्रांड्स को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचने में सक्षम बना रहा है।
माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के अधिकारों को लेकर उठा मुद्दा
10 Apr, 2026 05:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पब्लिक लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर गहरा गया है। शापूरजी पल्लोनजी (एसपी) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने पारदर्शी कॉरपोरेट गवर्नेंस का हवाला देते हुए टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को समय की एक महत्वपूर्ण जरूरत बताया है। एसपी ग्रुप की इस मांग ने कॉरपोरेट और वित्तीय जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।
आइए इस पूरे विवाद और इसके व्यावसायिक पहलुओं को सवालों और जवाबों के जरिए आसान भाषा में समझते हैं।
सवाल: शापूरजी पलोनजी मिस्त्री की मुख्य मांग क्या है और क्यों?
जवाब: एसपी ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री लगातार यह मांग कर रहे हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। टाटा संस में एसपी परिवार की लगभग 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मिस्त्री का स्पष्ट तौर पर मानना है कि यह लिस्टिंग महज एक नियामक अनुपालन (रेगुलेटरी कंप्लायंस) नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक हित में एक आवश्यक क्रमिक विकास है। उनका तर्क है कि शेयर बाजार में लिस्टिंग से टाटा समूह के भीतर पारदर्शिता, शासन (गवर्नेंस) और जवाबदेही और अधिक मजबूत होगी।
सवाल: क्या इस लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स या उसके सामाजिक कार्यों को कोई नुकसान होगा?
जवाब: शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री के अनुसार, टाटा संस की ओर से आज तक ऐसा कोई भी स्पष्ट और तथ्य-आधारित प्रमाण सामने नहीं रखा गया है जिससे यह साबित हो सके कि पब्लिक लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स के हितों को कोई नुकसान पहुंचेगा या लाभार्थियों की सेवा करने की उनकी क्षमता किसी भी रूप में कम होगी। इसके विपरीत, मिस्त्री का मानना है कि लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स के लिए एक अधिक स्पष्ट और मजबूत डिविडेंड (लाभांश) स्ट्रीम तैयार होगी, जिससे देश के सबसे गरीब तबकों को फायदा पहुंचाने वाले उनके सामाजिक और परोपकारी कार्यों का दायरा और भी व्यापक होगा।
सवाल: इस लिस्टिंग को लेकर टाटा ग्रुप के भीतर कैसा रुख है?
जवाब: टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद की खबरें हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह, टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग के पक्ष में हैं, जबकि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस कदम के सख्त खिलाफ हैं। इसी आपसी खींचतान और विवाद के बीच पिछले साल अक्टूबर में भी मिस्त्री ने पारदर्शिता लाने के लिए लिस्टिंग की मांग उठाई थी।
सवाल: इस मामले में भारतीय रिजर्व बैंक के नियम क्या कहते हैं?
जवाब: भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के ढांचे के तहत, टाटा संस 'अपर-लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी' (एनबीएफसी) की श्रेणी में आती है, जिसके लिए पब्लिक लिस्टिंग करना अनिवार्य शर्त है। मिस्त्री ने इसी का हवाला देते हुए कहा है कि विश्वास और सत्यनिष्ठा पर बने टाटा समूह को आरबीआई की ओर से अनिवार्य लिस्टिंग के अनुपालन से और मजबूती मिलेगी। एसपी ग्रुप इस मामले में एक निर्णायक दिशा-निर्देश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से अपेक्षा कर रहा है। मिस्त्री ने इस विषय पर भारत सरकार और आरबीआई की ओर से निर्णायक कदम उठाए जाने पर भरोसा जताया है।
सवाल: लिस्टिंग से आम शेयरधारकों और खुद एसपी ग्रुप को क्या फायदा मिल सकता है?
जवाब: एसपी ग्रुप के चेयरमैन का मानना है कि टाटा संस की लिस्टिंग बुनियादी तौर पर जनहित में है, क्योंकि सार्वजनिक रूप से लिस्टेड होल्डिंग कंपनी होने से बोर्ड की जवाबदेही बढ़ती है, निवेशकों का आधार व्यापक होता है और सभी हितधारकों के लिए लंबी अवधि का मूल्य सुरक्षित होता है। यह कदम लाखों रिटेल शेयरधारकों (आम निवेशकों) के लिए वैल्यू अनलॉक करेगा। इसके साथ ही, एसपी ग्रुप अपनी ऋण अदायगी (कर्ज कम करने) और धन जुटाने के लिए टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी का लाभ उठाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है। इस पूरी प्रक्रिया और बहस के बीच, एसपी ग्रुप ने साफ किया है कि इस मसले पर जल्द से जल्द एक सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए टाटा संस के नेतृत्व के साथ लगातार बातचीत हो रही है। अब बाजार और कॉरपोरेट जगत की नजरें आरबीआई के रुख और टाटा संस के अगले कदम पर टिकी हैं।
बाजार में तरलता संतुलित करने की दिशा में बड़ा कदम
10 Apr, 2026 04:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय कॉरपोरेट और वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम दर्ज किए गए हैं, जो ऊर्जा आपूर्ति, नकदी प्रबंधन और कॉर्पोरेट नेतृत्व की दिशा तय करते हैं। एक तरफ जहां देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया (सीआईएल) ने बढ़ती लागत का बोझ खुद उठाकर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है, वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी के प्रबंधन के लिए बड़े कदम की घोषणा की है। इसके अलावा, महारत्न कंपनी भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) को संजय खन्ना के रूप में नया अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मिला है।
कोल इंडिया ने उठाया बढ़ती लागत का बोझ, उत्पादन में गिरावट
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया ने विस्फोटकों और औद्योगिक डीजल की बढ़ती कीमतों के झटके को खुद अवशोषित कर लिया है ताकि इसका व्यापक असर उपभोक्ताओं पर न पड़े और किफायती दामों पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। पश्चिम एशिया संकट के बाद से अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटकों का 60% हिस्सा) की कीमत युद्ध-पूर्व के 50,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन से 44 प्रतिशत बढ़कर 1 अप्रैल 2026 तक 72,750 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई है। इसके परिणामस्वरूप मार्च अंत तक विस्फोटकों की औसत लागत 26 प्रतिशत बढ़ गई है। इसी तरह, मध्य मार्च 2026 से 1 अप्रैल 2026 के बीच औद्योगिक डीजल की कीमत 92 रुपये से बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर (54% की वृद्धि) हो गई है। इन सबके बावजूद, CIL की कुछ सहायक कंपनियों ने सिंगल विंडो ई-ऑक्शन में कोयले का रिजर्व प्राइस घटाया है और ऑक्शन की फ्रीक्वेंसी भी बढ़ाई है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कोयला उत्पादन 1.7 प्रतिशत गिरकर 768.1 मिलियन टन रह गया है।
आरबीआई का दो लाख करोड़ का वीआरआर ऑक्शन
बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक शुक्रवार को 2 लाख करोड़ रुपये का 7-दिवसीय वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन आयोजित करेगा। सरकारी प्रतिभूतियों के परिपक्व होने के कारण बैंकिंग सिस्टम में भारी नकदी अधिशेष हो गया है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 9 अप्रैल तक बैंकिंग सिस्टम में लगभग 4.55 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष होने का अनुमान है। 8 अप्रैल को 31,329 करोड़ रुपये के जीसेक्स परिपक्व हुए हैं, जबकि 12 और 17 अप्रैल को भी बड़ी राशि की परिपक्वताएं निर्धारित हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तरलता प्रबंधन में सक्रिय और एहतियाती कदम उठाना जारी रखेगा।
संजय खन्ना बने बीपीसीएल के नए चेयरमैन और प्रबंध निदेशक
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने संजय खन्ना को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का नया चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) नियुक्त किया है। वह इस पद पर 31 मई 2029 को अपनी सेवानिवृत्ति तक या अगले आदेश तक बने रहेंगे। खन्ना इससे पहले कंपनी में निदेशक (रिफाइनरीज) के रूप में कार्यरत थे और उनके पास रिफाइनरी संचालन में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कोच्चि रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक के रूप में महामारी के दौरान कंपनी के पहले प्रोपलीन डेरिवेटिव पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट (पीडीपीपी) को सफलतापूर्वक चालू किया था। बीपीसीएल की कुल रिफाइनिंग क्षमता 35.3 एमएमटीपीए है और कंपनी का लक्ष्य 2040 तक नेट जीरो एनर्जी कंपनी बनना है।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा, बाजार में आई स्थिरता
10 Apr, 2026 02:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में शुद्ध निवेश बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपये हो गया। यह जुलाई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फरवरी में यह आंकड़ा 25,977.81 करोड़ रुपये था। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। मार्च में एसआईपी का योगदान 32,087 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से अधिक है, जो खुदरा निवेशकों की लगातार भागीदारी दर्शाता है। हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग से मार्च में 2.39 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। फरवरी में इसमें 94,530 करोड़ रुपये का निवेश आया था।
इस निकासी का मुख्य कारण डेट फंड्स से भारी मात्रा में पैसे का निकलना रहा। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, निवेश में यह वृद्धि एसआईपी के जरिए लगातार निवेश से हुई है। साल के अंत में पोर्टफोलियो समायोजन भी एक वजह है। बाजार की गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखा गया। पश्चिम एशिया में तनाव से आई अस्थिरता ने दीर्घकालिक निवेशकों को अच्छे प्रवेश बिंदु दिए।
इक्विटी में विभिन्न श्रेणियों का प्रदर्शन
इक्विटी श्रेणी के सभी खंडों में निवेश में वृद्धि दर्ज की गई। फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जिनमें मार्च में 10,054.12 करोड़ रुपये का निवेश आया। मिड-कैप में 6,063.53 करोड़ रुपये और स्मॉल-कैप में 6,263.56 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। लार्ज-कैप फंड्स में 2,997.84 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में 2,698.82 करोड़ रुपये का स्थिर निवेश देखा गया।
डेट और अन्य फंड्स से निकासी
इसके विपरीत, डेट म्यूचुअल फंड्स में मार्च में 2.94 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी की गई। फरवरी में इनमें 42,106.31 करोड़ रुपये का निवेश आया था। ओवरनाइट और लिक्विड फंड्स इस निकासी के मुख्य कारण रहे। हाइब्रिड स्कीम्स से 16,538.47 करोड़ रुपये और आर्बिट्रेज फंड्स से 21,113.70 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया। नए फंड ऑफर के जरिए मार्च में चौबीस लॉन्च से 3,985 करोड़ रुपये जुटाए गए।
GDP ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान, अर्थव्यवस्था में स्थिरता के संकेत
10 Apr, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर मजबूत और सकारात्मक तस्वीर पेश की है। एशियाई विकास बैंक की ताजा एशियन डेवलपमेंट आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान है, जो अगले वित्त वर्ष 2027-28 में बढ़कर 7.3% तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहेगी।
क्या है इस वृद्धि की वजह?
एडीबी के मुताबिक, इस वृद्धि के पीछे मजबूत घरेलू मांग, आसान वित्तीय स्थितियां और भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में कमी जैसे अहम कारक होंगे। साथ ही, सरकारी सुधार, निवेश में बढ़ोतरी और यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौते भी आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को गति देंगे। हालांकि रिपोर्ट में कुछ जोखिमों की भी ओर इशारा किया गया है। खासतौर पर मध्य पूर्व में जारी तनाव भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, व्यापार आपूर्ति में बाधा और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस पर दबाव पड़ने की आशंका है।
महंगाई को लेकर क्या अनुमान?
महंगाई के मोर्चे पर एडीबी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर 4.5% तक पहुंच सकती है, जबकि पिछले वर्ष यह 2.1% थी। इसके पीछे खाद्य कीमतों में उछाल, वैश्विक तेल कीमतों में तेजी, रुपये की कमजोरी और कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि जैसे कारण बताए गए हैं। हालांकि अगले वित्त वर्ष में महंगाई घटकर 4% रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.6% की दर से बढ़ी, जो इससे पहले 7.1% थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत उपभोक्ता मांग, टैक्स में राहत, सस्ती खाद्य कीमतों और निरंतर सरकारी निवेश के कारण संभव हुई। एडीबी ने यह भी कहा कि अगर तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि यदि इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर सीमित रहता है, तो अल्पकाल में अर्थव्यवस्था पर प्रभाव नियंत्रित रह सकता है, लेकिन इससे सरकारी सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
