व्यापार
नए टैरिफ और व्यापार जांच पर होगी अहम चर्चा
15 Apr, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की बातचीत एक बार फिर से रफ्तार पकड़ने जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय वार्ताओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल आगामी 20 से 22 अप्रैल 2026 तक अमेरिका का दौरा करेगा। हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आयात शुल्क (टैरिफ) और व्यापारिक जांच से जुड़े घटनाक्रमों के बीच इस आगामी बैठक को व्यापार जगत के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंतरिम समझौते और टैरिफ में मिली छूट
इस साल की शुरुआत में दोनों देशों के बीच व्यापारिक मोर्चे पर कई बड़े फैसले देखने को मिले हैं। 2 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते की आधिकारिक घोषणा की गई थी। इसके कुछ ही दिनों बाद, 7 फरवरी 2026 को दोनों देशों ने इस विषय पर एक संयुक्त बयान भी जारी किया था। इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए, अमेरिका ने 7 फरवरी को 25 प्रतिशत के अतिरिक्त यथामूल्य टैरिफ को हटा लिया था, जो कि भारतीय व्यापार के लिए एक बड़ी राहत थी। इसके अतिरिक्त, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले ने पारस्परिक टैरिफ को पूरी तरह से अमान्य कर दिया। हालांकि, इस फैसले के तहत धारा 232 वाले टैरिफ और इससे जुड़ी छूट पहले की तरह ही जारी रहेंगी।
नए अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक चुनौतियां
इन सकारात्मक व्यापारिक कदमों के बीच, अमेरिकी सरकार के कुछ नए फैसलों ने नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। 24 फरवरी 2026 से अमेरिकी सरकार ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत एक कार्यकारी आदेश लागू किया है। इस आदेश के माध्यम से अमेरिका ने सभी देशों से आने वाले कुछ चुनिंदा उत्पादों पर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लगा दिया है। इसके साथ ही, अमेरिका ने व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत दो नई वैश्विक जांच भी शुरू कर दी हैं, जिनका सीधा प्रभाव भारतीय निर्यात पर भी पड़ सकता है:
अतिरिक्त क्षमता: अमेरिका द्वारा शुरू की गई पहली जांच 'अतिरिक्त क्षमता' को लेकर है, जिसके दायरे में भारत सहित दुनिया की 16 अर्थव्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।
जबरन श्रम: दूसरी जांच 'जबरन श्रम' के संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रित है, और इस जांच में भारत समेत 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है।
भारत सरकार का रुख और आगे की राह
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) द्वारा इन नई जांचों के संबंध में विचार-विमर्श का अनुरोध किया गया था। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए, भारत सरकार ने अपना आधिकारिक जवाब अमेरिकी प्रशासन को सौंप दिया है। भारतीय दल की 20 से 22 अप्रैल की यह अमेरिका यात्रा द्विपक्षीय व्यापार नीतियों में स्थिरता लाने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। इस वार्ता से उम्मीद की जा रही है कि नए अमेरिकी टैरिफ नियमों और व्यापारिक जांच के कारण पैदा हुई मौजूदा चिंताओं का कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा, जिससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक साझेदारी को एक नई दिशा मिलेगी।
महंगाई ने फिर बढ़ाई चिंता, मार्च में दर पहुंची 3.88%
15 Apr, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई (WPI) लगातार पांचवें महीने बढ़ते हुए मार्च 2026 में 3.88 फीसदी पर पहुंच गई। यह फरवरी के 2.13 फीसदी और पिछले साल मार्च के 2.25 फीसदी से काफी ज्यादा है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे मुख्य वजह ईंधन, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कीमतों का तेज उछाल है। उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि मार्च में महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल्स, नॉन-फूड आर्टिकल्स और अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही।
ईंधन और कच्चे तेल में बड़ा उछाल
WPI आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई फरवरी के -3.78 फीसदी (गिरावट) से बढ़कर मार्च में 1.05 फीसदी हो गई। खासतौर पर कच्चे तेल (क्रूड पेट्रोलियम) में महंगाई 51.57 फीसदी तक पहुंच गई, जो फरवरी में -1.29 फीसदी थी।
मैन्युफैक्चरिंग महंगी, लेकिन खाने-पीने की रफ्तार धीमी
मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई भी फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में 3.39 फीसदी हो गई। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार थोड़ी कम हुई है।
फूड आर्टिकल्स महंगाई: 1.90% (फरवरी: 2.19%)
सब्जियों की महंगाई: 1.45% (फरवरी: 4.73%)
पश्चिम एशिया संकट का असर
अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है। 28 फरवरी से अब तक कच्चे तेल के दाम 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके हैं। एक महीने के भीतर कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
सरकार का कदम: एक्साइज ड्यूटी में कटौती
तेल कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने 26 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई, ताकि कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर न डालें।
रिटेल महंगाई भी बढ़ी, आरबीआई ने दरें स्थिर रखीं
इससे पहले जारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई (CPI) मार्च में बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 3.21 फीसदी थी। रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी द्वैमासिक मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को यथावत रखा है। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से खुदरा महंगाई के आधार पर ही नीतिगत दरों का फैसला करता है।कुल मिलाकर, ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है, जबकि खाद्य महंगाई में थोड़ी नरमी देखने को मिली है।
शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में शानदार बढ़त
15 Apr, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एक दिन की छुट्टी के बाद घरेलू शेयर बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत हरे निशान पर हुई। सेंसेक्स में 1,350 अंक से अधिक की तेजी देखी गई, वहीं निफ्टी 24,200 के पार पहुंचने में सफल रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,270.42 के स्तर तक गया। वहीं, निफ्टी भी 24,280.90 के ऊच्च स्तर तक पहुंच गया। बैंक और रियल्टी इंडेक्स में 2% का उछाल दिखा। ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता की नई उम्मीदों समेत कई अन्य कारकों ने बाजार में बढ़त को बढ़ावा दिया। बुधवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में उछाल आया, जो वैश्विक बाजारों में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिरावट को दर्शाता है। यह उछाल अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों के फिर से शुरू होने की उम्मीदों के बीच आया है। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,422.85 अंक बढ़कर 78,270.42 के हाई पर पहुंच गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 438.25 अंक चढ़कर 24,280.90 पर पहुंचा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीदों के बीच कमजोर अमेरिकी मुद्रा के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 93.15 पर पहुंच गया।
शुरुआती कारोबार में सेसेक्स के सभी 30 शेयर हरे निशान पर दिखे
शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर सकारात्मक दायरे में थे। इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एटर्नल, लार्सन एंड टुब्रो और बजाज फाइनेंस प्रमुख लाभ कमाने वाली कंपनियां थीं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.26 प्रतिशत बढ़कर 95.04 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। रिसर्च एनालिस्ट और लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के ने कहा, "बाजार तात्कालिक जोखिमों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों के फिर से शुरू होने की संभावना को ध्यान में रख रहे हैं। इस बदलाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता को देखते हुए उसके लिए एक महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू है,"
ट्रंप का दावा- जल्द खत्म हो सकता है युद्ध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध "समाप्त होने के कगार पर है", और उन्होंने दावा किया है कि अगर वह अभी अपना समर्थन वापस ले लेते हैं, तो तेहरान को देश का पुनर्निर्माण करने में 20 साल लगेंगे। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे लगता है कि यह लगभग खत्म हो चुका है, हाँ। मैं इसे लगभग खत्म होने के कगार पर मानता हूँ"। इस इंटरव्यू का प्रसारण बाद में होना है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ वार्ता का दूसरा दौर अगले दो दिनों में इस्लामाबाद में आयोजित किया जा सकता है।एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार में भी दिखी हरियाली
मंगलवार को अमेरिकी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए। नैस्डैक कंपोजिट में 1.96 प्रतिशत की उछाल आई, एसएंडपी 500 में 1.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.66 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा, "अमेरिका-ईरान वार्ता और इजरायल-लेबनान वार्ता के फिर से शुरू होने की उम्मीदें और दो दिनों में ब्रेंट क्रूड में 10 डॉलर की गिरावट निकट भविष्य में बाजार के लिए अच्छे संकेत हैं।" डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को शेयर बाजार बंद रहे। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने एक दिन की राहत के बाद सोमवार को फिर से 1,983.18 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,432.30 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
सोमवार को बाजार में दिखी थी बड़ी गिरावट
सोमवार को सेंसेक्स 702.68 अंक या 0.91 प्रतिशत गिरकर 76,847.57 पर बंद हुआ। निफ्टी 207.95 अंक या 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,842.65 पर समाप्त हुआ। पश्चिम एशिया संकट के बीच पाकिस्तान में हुुई शांति वार्ता विफल होने के बाद अनिश्चितताओं का माहौल छा गया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग बढ़ गई। इसके चलते सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 52 पैसे गिरकर 93.35 पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी घोषणा के बाद ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी करने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने को लेकर अनिश्चितताओं ने घरेलू शेयरों से विदेशी पूंजी की निकासी को और तेज कर दिया, जिससे भारतीय मुद्रा कमजोर हो गई।
सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर सेंसेक्स और निफ्टी
सेंसेक्स
78,197.58
+1350.01 +1.76 %
15 Apr 26 | 9:15
निफ्टी
24,232.45
389.80(1.63%)
15-Apr-2026 09:15 IST
UPI का जलवा कायम, डिजिटल ट्रांजैक्शन में भारत ने बनाया रिकॉर्ड
15 Apr, 2026 08:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में छोटे लेनदेन के लिए यूपीआई का चलन तेजी से बढ़ा है। इंडिया डिजिटल पेमेंट्स 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीआई के जरिये 2025 में 228.5 अरब लेनदेन दर्ज किए। कुल लेनदेन मूल्य बढ़कर 299.74 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस बीच, औसत लेनदेन आकार लगातार घट रहा है, जो इस बात का संकेत है कि अब छोटी खरीदारी में भी यूपीआई का चलन बढ़ रहा है। व्यापारिक लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। व्यक्ति-से-व्यापारी (पीटूएम) भुगतान 34 फीसदी बढ़कर 143.82 अरब हो गया। यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या बढ़कर 73 करोड़ से अधिक हो गई है, जबकि पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल की संख्या 1.14 करोड़ से अधिक पहुंच गई है। जहां यूपीआई छोटे भुगतान में अग्रणी बना हुआ है, वहीं क्रेडिट कार्ड का उपयोग बड़े लेनदेन में बढ़ रहा है। 2025 में क्रेडिट कार्ड लेनदेन 27 फीसदी बढ़कर 5.69 अरब हो गया, जबकि डेबिट कार्ड के उपयोग में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
भारत बनेगा दूसरा बड़ा सौर ऊर्जा बाजार
भारत 2026 तक दूसरा बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बनने की राह पर है। भारत ने मात्र 14 महीनों में 50 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर अब तक की सबसे तेज वृद्धि हासिल की है। देश का सौर ऊर्जा उत्पादन 150 गीगावाट तक पहुंच गया है। पहले 50 गीगावाट तक पहुंचने में 11 साल लगे थे।
आज से भुना सकेंगे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
आरबीआई ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड 2019-20 सीरीज-पांच के लिए समयपूर्व मोचन (प्रीमैच्योर रिडेम्पशन) कार्यक्रम घोषित कर दिया है। निवेशक 15 अप्रैल 2026 को अपने बॉन्ड समय से पहले भुना सकेंगे। इसे 15 अक्तूबर 2019 को जारी किया गया था।
पेटीएम के स्वामित्व ढांचे में हुआ बदलाव
पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशन्स में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 50.3 फीसदी हो गई। इसके साथ ही यह बहुलांश भारतीय स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनी बन गई। इसमें म्यूचुअल फंड कंपनियों की बड़ी भूमिका रही।
10 फीसदी तक बढ़ सकता है निजी कर्मचारियों का वेतन
नौकरी छोड़ने की दर बढ़ने की चिंताओं के बीच भारतीय कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी भर्ती रणनीति को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जीनियस एचआरटेक के अनुसार, अब कंपनियों का फोकस मझोले स्तर की भर्तियों पर अधिक रहेगा। वेतन वृद्धि औसतन 5 से 10 फीसदी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 49 फीसदी कंपनियां मझोले स्तर के कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं। कार्यबल विस्तार को लेकर रुख मिला-जुला है। करीब 28 फीसदी संस्थान भर्ती 10-15 फीसदी बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 43 फीसदी कंपनियां सीमित वृद्धि के पक्ष में हैं। 46 फीसदी कंपनियां 10 फीसदी तक वेतन बढ़ा सकती हैं। नए श्रम कानूनों के बाद 57 फीसदी कंपनियां अपने वेतन ढांचे में बदलाव की योजना बना रही हैं। इन कर्मचारियों को होगा फायदा: वेतन वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मध्यम-सीनियर स्तर के कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है। इनका हिस्सा 48 फीसदी तक हो सकता है। इसके मुकाबले जूनियर और सीनियर स्तर के कर्मचारियों की वेतन वृद्धि क्रमशः 26 फीसदी और 22 फीसदी रहने का अनुमान है।
आईएमएफ का भारत पर भरोसा 6.5% विकास दर का अनुमान
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर सकारात्मक अनुमान जताते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 में 6.5 फीसदी रफ्तार से बढ़ सकती है। वृद्धि अनुमान में बढ़त को मजबूत घरेलू प्रदर्शन और बाहरी कारकों से समर्थन मिला है। इसके बूते भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। आईएमएफ के अनुसार, 2025 में बेहतर आर्थिक प्रदर्शन का असर आगे भी दिखेगा। भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ में कमी से निर्यात को राहत मिली है। इससे पश्चिम एशिया के तनाव से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक संतुलित हुए हैं।युद्ध ने वैश्विक वृद्धि की धीमी: आईएमएफ ने कहा, यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष सीमित अवधि के लिए रहता है, तो विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि में मामूली नरमी आ सकती है। 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 फीसदी और 2027 में 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है।
पेट्रोल-डीजल बेचने में नुकसान झेल रहीं तेल कंपनियां, बढ़ा वित्तीय दबाव
15 Apr, 2026 07:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। चुनाव के बाद सरकार कर सकती है पेट्रोल-डीजल कीमतों की समीक्षा कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 35 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। मार्च में हुए भारी घाटे ने जनवरी और फरवरी के मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया है, जिसके चलते जनवरी-मार्च तिमाही में इन कंपनियों के नुकसान में जाने की आशंका जताई जा रही है।
बढ़ सकता है कंपनीयों का घाटा
वित्तीय सेवा कंपनी मैक्वेरी की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो यह घाटा और बढ़ने की आशंका है। क्रूड में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान करीब 6 रुपये तक बढ़ सकता है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अप्रैल 2022 के बाद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। मार्च तक तीनों कंपनियों का संयुक्त दैनिक नुकसान करीब 2,400 करोड़ रुपये था। केंद्र सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद ये घटकर रोजाना लगभग 1,600 करोड़ रह गया है।
विकास दर घटने की आशंका
भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद कच्चे तेल के झटकों को काफी हद तक संभाल सकती है। हालांकि, अगर औसत मूल्य 130 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहता है तो देश की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 0.8 फीसदी कम हो सकती है। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी के अनुसार, 2026-27 के दौरान तेल कंपनियों की परिचालन आय में 15 से 25 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इसके चलते कॉरपोरेट कर्ज और बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है। बैंकों का एनपीए बढ़कर 3.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।
गोल्ड ETF में बंपर उछाल, AUM 1.71 लाख करोड़ के पार
15 Apr, 2026 06:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों ने सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने जैसी कीमती धातु पर भरोसा जताया है। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में गोल्ड ईटीएफ (गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में जबरदस्त निवेश देखने को मिला। भारतीय म्यूचुअल फंड संघ (एम्फी) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च अवधि के दौरान गोल्ड ईटीएफ में कुल 31,561 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब छह गुना अधिक है। जनवरी-मार्च 2025 में यह आंकड़ा 5,654 करोड़ रुपये था।
मजबूत निवेश के चलते गोल्ड ईटीएफ की कुल प्रबंधित परिसंपत्तियां (एयूएम) मार्च 2026 के अंत तक लगभग तीन गुना बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गईं जो एक साल पहले 58,888 करोड़ रुपये थी। मार्च महीने में गोल्ड ईटीएफ में 2,266 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो फरवरी के 5,255 करोड़ रुपये और जनवरी के 24,040 करोड़ की तुलना में कम रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर रिटर्न और बाजार में अस्थिरता के कारण सोना निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट की वरिष्ठ विश्लेषक नेहल मेश्राम ने कहा, जनवरी में निवेश में असामान्य उछाल मुख्य रूप से जोखिम से बचाव की रणनीति, पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन और सोने की कीमतों में तेजी के कारण आया। मार्च में प्रवाह धीमा होने के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
2266 करोड़ का शुद्ध निवेश आया मार्च में 6 गुना बढ़त हुई एक साल में गोल्ड लोन बाजार 3.8 गुना बढ़ा
मार्च 2022 से भारत का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 3.8 गुना बढ़ गया है। ट्रांसयूनियन सिबिल की गोल्ड लोन लैंडस्केप रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ने तेज रफ्तार से विस्तार किया है। इसके साथ ही गोल्ड लोन देश का दूसरा सबसे बड़ा फुटकर क्रेडिट उत्पाद बन गया है। कुल खुदरा उधार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी मार्च 2022 के 5.9 फीसदी से बढ़कर अब 11.1 फीसदी हो गई है। औसत गोल्ड लोन अधिशेष इस अवधि में बढ़कर मार्च 2022 के 1.1 लाख रुपये से दिसंबर 2025 में 1.9 लाख रुपये तक पहुंच गया। नए ऋण वितरण का मूल्य 5.1 गुना जबकि मात्रा 2.3 गुना बढ़ी है। गोल्ड लोन में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 57 से बढ़कर 62 फीसदी हो गई है। एनबीएफसी की हिस्सेदारी बढ़कर 11 फीसदी तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र में गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ी है।
क्या होता है गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड ईटीएफ सोने में निवेश करने का एक डिजिटल तरीका है। इसमें कारोबार शेयर बाजार के जरिये होता है। यह म्यूचुअल फंड जैसा है, जिसकी एक यूनिट आमतौर पर 1 ग्राम भौतिक सोने (99.5 फीसदी शुद्धता) के बराबर होती है। इसकी इकाइयां डीमैट रूप में होती हैं। डीमैट खाते के जरिए इसे आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है। निवेशकों को सोने के दाम के उतार-चढ़ाव का लाभ भी मिलता है।
अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीद से एशियाई बाजारों में जोश
14 Apr, 2026 05:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। आंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बंद रहे, लेकिन वैश्विक मोर्चे से निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, जिसके चलते एशियाई बाजारों ने बढ़त के साथ कारोबार किया है।
वैश्विक बाजार और कच्चे तेल का हाल
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान के बाद वैश्विक बाजार की धारणा में सुधार हुआ है, जिसमें उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावना जताई है। इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार रहे:
कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता: भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण ब्रेंट क्रूड पहले 99.36 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गया था, लेकिन अब यह नरमी के साथ लगभग 97.99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी बाजारों में मजबूती: वॉल स्ट्रीट पर अमेरिकी बाजारों ने लचीलापन दिखाया है। S&P 500 ने 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जबकि इसके पिछले सत्र में यह 6,886.24 के उच्च स्तर पर बंद हुआ था। टेक-हैवी नैस्डैक में भी 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
एशियाई बाजारों में बढ़त: सकारात्मक वैश्विक संकेतों का अनुसरण करते हुए मंगलवार को जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.5 प्रतिशत चढ़ा।
भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई पर असर
सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाकेबंदी के आदेश के बाद भारतीय सूचकांक निफ्टी 50 और सेंसेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुए थे। इसके बावजूद, भारत के व्यापक आर्थिक आंकड़े राहत देने वाले हैं। क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा, "पश्चिम एशिया संकट को पूरा एक महीना होने के बावजूद, ऊर्जा संकट का खुदरा महंगाई पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव दिखा है"। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपरिवर्तित रखने से खुदरा महंगाई दर ऊर्जा मूल्य वृद्धि के झटके से काफी हद तक सुरक्षित रही। बुधवार को जब भारतीय बाजार फिर से खुलेंगे, तो एक मजबूत शुरुआत की संभावना है। शुरुआती रुझानों में डेरिवेटिव्स बाजार में जीआईएफटी निफ्टी 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 24,126 पर पहुंच गया है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से मानसून के सामान्य से कम रहने के शुरुआती पूर्वानुमान से खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है, जो भविष्य में निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल सकती है।
QCO टेस्टिंग के महंगे खर्च से MSME परेशान, GTRI ने उठाई आवाज
14 Apr, 2026 04:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत में उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (क्यूसीओ) के नियम अब सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहे हैं। प्रमुख थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (जीटीआरआई) ने मंगलवार को सरकार से आग्रह किया है कि रूटीन औद्योगिक उत्पादों की टेस्टिंग के लिए ली जाने वाली फीस की एक अधिकतम सीमा तय की जाए।
छोटे आयातकों के कारोबार से बाहर होने का खतरा
जीटीआरआई के मुताबिक, क्वालिटी कंट्रोल नियमों के तेजी से विस्तार के कारण टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे एमएसएमई के लिए अनुपालन संबंधी बड़ी बाधाएं पैदा हो गई हैं। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि भारत के बढ़ते क्वालिटी कंट्रोल ढांचे के कारण टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की लागत इतनी अधिक हो गई है कि कई एमएसएमई आयातक कारोबार से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर ऐसा होता है, तो बाजार पर पूरी तरह से बड़े आयातकों का दबदबा कायम हो जाएगा।
15-20 लाख रुपये का शुरुआती खर्च बना चुनौती
यह सारा खर्च ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) की 'फॉरेन मैन्युफैक्चरर्स सर्टिफिकेशन स्कीम' (एमएफसीएस) के कारण उत्पन्न हो रहा है। इस नियम के तहत, विदेशी कंपनियों को भारत में सामान भेजने से पहले BIS सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य है।
इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई कदम उठाने पड़ते हैं:
एक अधिकृत भारतीय प्रतिनिधि नियुक्त करना।
तकनीकी दस्तावेज जमा करना।
बीआईएस द्वारा विदेशी फैक्ट्री का निरीक्षण।
बीआईएस से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में सैंपलिंग और टेस्टिंग कराना।
अजय श्रीवास्तव का कहना है कि बड़े आयातक अधिक मात्रा में सामान मंगाकर इस खर्च को आसानी से बांट लेते हैं। हालांकि, कम मात्रा में या विशेष उत्पाद मंगाने वाले छोटी कंपनियों के लिए 15 से 20 लाख रुपये का यह भारी-भरकम शुरुआती खर्च आयात को व्यावसायिक रूप से अव्यावहारिक बना देता है।
मेक इन इंडिया पहल पर पड़ सकता है नकारात्मक असर
इस भारी सर्टिफिकेशन लागत का असर केवल आयातकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल को भी नुकसान पहुंचा सकता है। अजय श्रीवास्तव के अनुसार, कई घरेलू निर्माता ऐसे विशेष इनपुट्स, कंपोनेंट्स और मशीनरी के आयात पर निर्भर हैं, जो फिलहाल भारत में जरूरी गुणवत्ता या बड़े पैमाने पर नहीं बनाए जाते हैं। ऐसे में महंगी टेस्टिंग का सीधा असर स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग की लागत पर पड़ेगा।
जीटीआरआई की ओर से क्या सुझाव दिए गए?
उद्योगों को राहत देने के लिए जीटीआरआई ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख सुझाव रखे हैं:
रूटीन औद्योगिक उत्पादों की टेस्टिंग फीस को कैप (निर्धारित) किया जाए।
केवल भारत ही नहीं, बल्कि मान्यता प्राप्त विदेशी प्रयोगशालाओं की टेस्टिंग रिपोर्ट को भी स्वीकार किया जाए।
अत्यधिक सैंपलिंग की जगह जोखिम-आधारित टेस्टिंग के नियमों को अपनाया जाए।
कोई भी नया क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर लागू करने से पहले उसका उद्योगों पर पड़ने वाले प्रभाव का उचित मूल्यांकन किया जाए।
यदि सरकार सर्टिफिकेशन और टेस्टिंग की जटिलताओं और लागत को कम नहीं करती है, तो इसका सबसे अधिक खामियाजा देश के एमएसएमई सेक्टर को भुगतना पड़ सकता है।
वेस्ट एशिया संकट से भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा, लाखों प्रभावित
14 Apr, 2026 12:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष का असर अब सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर पड़ने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट के कारण भारत में लगभग 25 लाख लोगों के गरीबी में धकेल दिए जाने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। 'मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट: ह्यूमन डेवलपमेंट इम्पैक्ट्स अक्रॉस एशिया एंड द पैसिफिक' नामक इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यह भू-राजनीतिक तनाव पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास और आजीविका पर भारी दबाव डाल रहा है।
गरीबी और विकास पर सीधी चोट
रिपोर्ट के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 88 लाख लोगों के गरीबी में गिरने का जोखिम है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा दक्षिण एशिया का है। भारत के संदर्भ में, अनुमान है कि संकट के बाद देश की गरीबी दर 23.9 प्रतिशत से बढ़कर 24.2 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे 24,64,698 अतिरिक्त लोग गरीबी के दायरे में आ जाएंगे। इसके अतिरिक्त, भारत को अपने मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) की प्रगति में भी लगभग 0.03 से 0.12 वर्ष का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार में भारी उथल-पुथल
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। देश अपनी कुल तेल जरूरतों का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें से 40 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी (एलपीजी) अकेले पश्चिम एशिया से आता है। रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य संकट के कारण माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि हुई है, जिससे व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह बाधित हुई है। इसका सीधा असर भारत के 48 अरब डॉलर के गैर-तेल निर्यात पर पड़ रहा है, जिसमें बासमती चावल, चाय, रत्न और आभूषण तथा परिधान जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।
एमएसएमई, रोजगार और खाद्य सुरक्षा पर मंडराता खतरा
इस संकट के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था के कई मोर्चों पर दबाव साफ देखा जा सकता है:
एमएसएमई और नौकरियां: भारत का लगभग 90 प्रतिशत रोजगार असंगठित क्षेत्र में है। महंगे आयात और आपूर्ति की कमी के कारण आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण सामग्री और रत्न निर्माण से जुड़े छोटे उद्योगों में लागत बढ़ रही है। इससे काम के घंटे कम होने, छंटनी होने और व्यापार बंद होने का जोखिम पैदा हो गया है।
दवाएं और चिकित्सा उपकरण: होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधान के कारण चिकित्सा उपकरणों के लिए आवश्यक कच्चे माल की लागत 50 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है। वहीं, दवाओं की थोक कीमतों में पहले ही 10-15 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है।
खाद्य सुरक्षा और खेती: भारत अपना 45 प्रतिशत से अधिक उर्वरक आयात पश्चिम एशिया से करता है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि यह व्यवधान जून में शुरू होने वाले खरीफ सीजन (मानसून की फसल) तक जारी रहता है, तो कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा, हालांकि वर्तमान में उपलब्ध 61.14 लाख टन यूरिया का बफर स्टॉक कुछ राहत प्रदान कर सकता है।
रेमिटेंस में गिरावट: खाड़ी देशों (GCC) में काम करने वाले 93.7 लाख भारतीय देश के कुल रेमिटेंस का 38-40 प्रतिशत हिस्सा भारत भेजते हैं। वहां आर्थिक मंदी के कारण इन प्रवासियों की आय प्रभावित होने का अनुमान है, जिसका सीधा असर भारत में उनके परिवारों की क्रय शक्ति और घरेलू आय पर पड़ेगा।
आगे का आउटलुक
इस चुनौती को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और यूएनडीपी के क्षेत्रीय निदेशक कान्नी विग्नाराजा ने सुझाव दिया है कि देशों को सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ ऊर्जा और खाद्य प्रणालियों में विविधता लानी चाहिए। स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल एक कूटनीतिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह भारत के आर्थिक विकास, महंगाई दर और रोजगार के लिए एक बड़ा जोखिम बनकर सामने आ रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव से चीन के एक्सपोर्ट पर असर, मार्च में गिरावट
14 Apr, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। चीन का निर्यात मार्च में 2.5 फीसदी बढ़ा, जो पिछले दो महीनों से काफी धीमा है। ईरान युद्ध और ऊर्जा कीमतों से वैश्विक मांग में अनिश्चितता बढ़ी। जनवरी और फरवरी में निर्यात वृद्धि 21.8 फीसदी थी। मार्च में आयात 27.8 फीसदी बढ़ा, जो पहले के 19.8 फीसदी से अधिक था। अर्थशास्त्री मानते हैं कि ईरान युद्ध चीनी निर्यात की वैश्विक मांग घटा सकता है। अमेरिकी शुल्क और घरेलू संपत्ति क्षेत्र की सुस्ती भी निर्यात पर दबाव डाल रही है। चीन ने 2026 के लिए 4.5 से 5 फीसदी आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखा है।
भारतपे के सह-संस्थापक नकरानी अब रणनीतिक सलाहकार होंगे
भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी- भारतपे के सह-संस्थापक शाश्वत नकरानी एक मई, 2026 से दैनिक कार्यों से हटकर रणनीतिक सलाहकार बनेंगे। वह सबसे बड़े शेयरधारक और निदेशक बने रहेंगे। नकरानी फंड इकट्ठा करने के साथ-साथ आईपीओ योजना जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में शामिल रहेंगे। उन्होंने कंपनी पर विश्वास जताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में छह करोड़ रुपये का कर-पूर्व लाभ कमाया।
आईएमएफ की सिफारिशों पर सवाल, असमानता बढ़ाने का दावा
14 Apr, 2026 06:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) अमीर और गरीब देशों के लिए अलग-अलग रवैया अपना रहा है। ऑक्सफेम की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड जैसे समृद्ध देशों को प्रगतिशील करों की सलाह दे रहा है, वहीं भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों को ऐसे सुझाव मिले जिनका बोझ गरीबों पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच भारत को आईएमएफ से सबसे अधिक प्रतिगामी कर सुझाव मिले। ये असमानता बढ़ा सकते हैं क्योंकि इनसे निम्न और मध्यम आय वर्ग पर अधिक बोझ पड़ता है। आईएमएफ द्वारा निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों को दिए गए 59 फीसदी कर सुझाव प्रतिगामी थे, जबकि उच्च आय वाले देशों के लिए 52 फीसदी सिफारिशें प्रगतिशील श्रेणी में थीं। प्रतिगामी कर प्रणाली में कम आय वालों पर उच्च आय वालों की तुलना में अधिक बोझ पड़ता है। इसके विपरीत, आय के अनुपात में लगाया जाने वाला कर प्रगतिशील कहलाता है। 2020 के बाद से अरबपतियों की संपत्ति में 81 फीसदी की वृद्धि हुई है, इसके बावजूद संपत्ति पर कर बढ़ाने जैसे सुझाव बहुत कम दिए गए।
स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये की नई योजना जल्द
14 Apr, 2026 06:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब 10,000 करोड़ रुपये के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की शुरुआत करने जा रही है। यह कोष प्रौद्योगिकी, प्रारंभिक विकास चरण और नवाचार आधारित विनिर्माण स्टार्टअप का समर्थन के लिए है। सरकार ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए उद्यम और विकास पूंजी जुटाना है। इसके लिए अनुभवी लोगों को लेकर उद्यम पूंजी निवेश समिति बनाएगा।
योजना की निगरानी के लिए तंत्र भी बनेगा
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग इस समिति की संरचना और संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करेगा। योजना के अमल के लिए मजबूत निगरानी और निरीक्षण तंत्र भी बनेगा। इसमें सरकार और संस्थागत निवेशकों द्वारा सह-निवेश के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यह योजना देश की आर्थिक दृढ़ता को मजबूत करने, विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन करने और भारत को एक वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देगी।
तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी बढ़ी
पश्चिमी एशिया संकट के चलते ऊर्जा क्षेत्र में आई परेशानियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। इसके तहत पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहन यानी ई-रिक्शा, ई-कार्ट आदि के लिए सब्सिडी की समय सीमा 31 मार्च, 2028 तक बढ़ा दी गई है। इसी तरह, पंजीकृत दुपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए के लिए सब्सिडी की आखिरी तिथि 31 जुलाई, 2026 की गई है। भारी उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने अंतर मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और अपनाने को बढ़ावा दे रही है। यह केवल ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत तिपहिया रिक्शा के लिए सब्सिडी मार्च 2026 तक थी, अब इसे दो साल बढ़ाकर मार्च 2028 तक कर दिया गया है। इसी तरह इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए लिए सब्सिडी 31 जुलाई तक कर दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति शृंखला में आई समस्याओं को देखते हुए ट्रकों और बसों के लिए चरणबद्ध निर्माण कार्यक्रम दिशानिर्देशों में छह महीने की छूट दी गई है।
होर्मुज तनाव के बीच भारत ने मंगाया ईरानी तेल, बढ़ी हलचल
13 Apr, 2026 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी जारी है और इसी दौरान लगभग सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरानी कच्चे तेल की खेप भारत पहुंची है। अमेरिका की ओर से दी गई प्रतिबंधों में अस्थायी छूट के चलते करीब 40 लाख (4 मिलियन) बैरल कच्चा तेल लेकर दो सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर पहुंचे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सप्ताहांत में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हो गई है और वाशिंगटन ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी (ब्लॉकेड) का ऐलान किया है।
जहाजों की आमद और तेल की खेप
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, नेशनल ईरानी टैंकर कंपनी द्वारा संचालित 'फेलिसिटी' नामक एक बहुत बड़ा क्रूड कैरियर रविवार देर रात गुजरात के सिक्का तट पर लंगर डाल चुका है। इस जहाज में लगभग 20 लाख (2 मिलियन) बैरल कच्चा तेल है, जिसे मार्च के मध्य में ईरान के खार्ग द्वीप से लोड किया गया था। उसी समय, दूसरा टैंकर 'जया' ओडिशा के पारादीप तट के पास खड़ा हुआ है, जिसमें इतनी ही मात्रा में तेल मौजूद है। 'जया' में मौजूद तेल फरवरी के अंत में तब लोड किया गया था, जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू नहीं किए थे।
अमेरिका की अस्थायी छू' से मिला रास्ता
ईरानी तेल का भारत आना अमेरिकी प्रशासन द्वारा पिछले महीने दी गई 30 दिनों की प्रतिबंध छूट का परिणाम है। यह कदम वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधाओं को कम करने और अमेरिका-इस्राइल युद्ध के कारण तेजी से बढ़ती तेल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया था। यह एक महीने की छूट केवल पारगमन वाले तेल को बेचने की अनुमति देती है।
सेक्टर पर प्रभाव और प्रमुख खरीदार
इन खेपों के खरीदारों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि, पारादीप बंदरगाह मुख्य रूप से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) द्वारा संचालित होता है, जिसने इस छूट के तहत कम से कम एक ईरानी खेप खरीदने की पुष्टि की है। दूसरी ओर, गुजरात का सिक्का रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) के लिए एक प्रमुख क्रूड हैंडलिंग हब है।
कुछ अहम आंकड़े और ऐतिहासिक संदर्भ
भुगतान की अड़चन: पिछले महीने 600,000 बैरल ईरानी कच्चा तेल लेकर आ रहे 'पिंग शुन' नामक एक टैंकर को गुजरात के वाडिनार आना था, लेकिन भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण इसे बीच रास्ते से ही चीन की ओर मोड़ दिया गया।
अतीत का शानदार व्यापार: ऐतिहासिक रूप से भारत ईरानी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार रहा है। 2018 में भारत ईरान से प्रतिदिन 518,000 बैरल तेल खरीदता था, लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंध सख्त होने के बाद मई 2019 से यह आयात पूरी तरह बंद हो गया था।
आयात में हिस्सेदारी: प्रतिबंधों से पहले, भारत के कुल तेल आयात में ईरानी कच्चे तेल की हिस्सेदारी अपने चरम पर 11.5 प्रतिशत हुआ करती थी।
अब आगे क्या संभावना?
अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली इस छूट की अवधि 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि वर्तमान में लगभग 9.5 करोड़ (95 मिलियन) बैरल ईरानी तेल समुद्र में मौजूद जहाजों पर है। इसमें से करीब 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि शेष तेल चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई खरीदारों के अनुकूल है। हालांकि, शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका द्वारा सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी (ब्लॉकेड) की चेतावनी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आपूर्ति लंबे समय तक जारी नहीं रहने वाली है और इसका लक्ष्य तेहरान के तेल निर्यात राजस्व पर पूरी तरह से अंकुश लगाना है।
वेदांता की याचिका पर सुनवाई स्थगित, मामला फिर टला
13 Apr, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कर्ज में डूबी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण को लेकर देश के दो बड़े कॉर्पोरेट घरानों के बीच कानूनी खींचतान जारी है। सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने खनन दिग्गज वेदांता समूह की उस याचिका पर सुनवाई टाल दी, जिसमें जेपी एसोसिएट्स के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की बोली के चयन को चुनौती दी गई थी। बेंच के एक सदस्य की अनुपस्थिति के कारण पीठ की संरचना में बदलाव हुआ, जिसके चलते न्यायाधिकरण को यह सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।
अदाणी की 14,535 करोड़ रुपये की बोली और विवाद
यह पूरा विवाद जेपी एसोसिएट्स की दिवाला प्रक्रिया से जुड़ा है। इलाहाबाद स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने 17 मार्च को एक आदेश पारित करते हुए जेएएल के अधिग्रहण के लिए अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह ने एनसीएलटी के इस फैसले का विरोध करते हुए एनसीएलएटी के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। अपनी अपीलों के माध्यम से वेदांता ने अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की बोली के चयन पर सवाल उठाए हैं।
न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट का रुख
कानूनी मोर्चे पर वेदांता को शुरुआती स्तर पर कोई त्वरित राहत नहीं मिली है। एनसीएलएटी ने 24 मार्च को अपने फैसले में एनसीएलटी द्वारा पारित आदेश पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था। अपीलीय न्यायाधिकरण के इस अंतरिम आदेश को बाद में देश के सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने से मना कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह सख्त निर्देश दिया है कि यदि अधिग्रहण से जुड़ी निगरानी समिति कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय लेना चाहती है, तो उसे सबसे पहले न्यायाधिकरण की मंजूरी प्राप्त करनी होगी।
भविष्य का दृष्टिकोण
इस दिवाला प्रक्रिया का अंतिम निर्णय अभी कानूनी कसौटी पर है। एनसीएलएटी जल्द ही इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित करेगा। हालांकि अदाणी एंटरप्राइजेज को अधिग्रहण की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जेपी एसोसिएट्स की यह समाधान योजना वेदांता समूह की ओर से दायर अपीलों के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी। बाजार और निवेशकों की नजर अब अपीलीय न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
होर्मुज तनाव का असर भारत पर—ट्रंप के ऐलान के बाद सेंसेक्स धड़ाम, निफ्टी 23,600 के नीचे
13 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता फेल हो गई. जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है. गिफ्ट निफ्टी पर भी करीब 350 प्वाइंट की गिरावट दर्ज की गई है. मार्केट खुलते ही बाजार क्रैश हो गया. सेंसेक्स में करीब 1600 अंक और निफ्टी 50 पर करीब 450 अंको की गिरावट दर्ज की गई है.
सोमवार को मार्केट खुलते ही धराशायी हो गया. मिनटों में निवेशकों के करोड़ों रुपए स्वाहा हो गए. शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की धमकी मानी जा रही है. ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की धमकी दी थी, जिसके बाद ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल बन गया और निवेशकों के करोड़ों रुपए स्वाहा हो गए. आज निफ्टी 50 की एक्सपायरी भी है, क्योंकि कल मंगलवार को अंबेडकर जयंती है. इसलिए शेयर बाजार बंद रहेगा.
ट्रंप के एक बयान के बाद शेयर बाजार में भूचाल
शनिवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आयोजित की गई थी, जो विफल रही. इसके पीछे अमेरिका ने बताया कि ईरान ने अपनी शर्तें कुछ ज्यादा ही रखीं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सका. जब शांति वार्ता विफल रही, तो ट्रंप ने होर्मुज के चारों ओर यूएस नेवी उतारने की योजना का ऐलान कर दिया. ट्रंप के इस ऐलान के बाद ग्लोबल मार्केट में दबाव बढ़ गया. क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छूने लगीं. शेयर बाजार भरभराकर गिर गया.
सोना-चांदी और क्रूड ऑयल पर भी दिखा असर
एक ओर जहां कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, तो वहीं सोने पर भी दबाव बढ़ रहा है. यानी ट्रंप के बयान का असर हर जगह दिखाई देने लगा है. सोना भी आज सोमवार को करीब 0.50 प्रतिशत लुढ़का है. चांदी पर भी 5 हजार रुपए की गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका और ईरान जंग के बीच मॉर्केट काफी गिर गया था, लेकिन सीजफायर के ऐलान होते ही एक फिर तूफानी तेजी दर्ज की गई. लेकिन अब बाजार फिर से धराशायी हो गया.
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
