व्यापार
घरेलू शेयर बाजार में दबाव: सेंसेक्स-निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले
24 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन भारी गिरावट के साथ शुरू हुआ। वैश्विक दबाव और स्थानीय मुद्रा की कमजोरी के चलते शुक्रवार को बाजार खुलते ही लाल निशान पर आ गया। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 330 अंकों की गिरावट के साथ 77,334 के स्तर पर देखा गया, वहीं निफ्टी भी 93.3 अंक फिसलकर 24,079.75 पर पहुंच गया।
रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और डॉलर की मजबूती
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ा है। रुपया लगातार पांचवें दिन कमजोर होकर 94.25 के स्तर पर जा पहुंचा। शुक्रवार सुबह डॉलर के मुकाबले रुपये में 24 पैसे की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अनिश्चितता ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
वैश्विक तनाव और विशेषज्ञों का विश्लेषण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: अमेरिकी सेना द्वारा तेल टैंकर जब्त किए जाने और छोटी नौकाओं के खिलाफ सख्त सैन्य आदेशों के बाद व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा बढ़ गई है। इससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: घरेलू शेयर बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार पूंजी निकाली जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को करीब 3,254.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए, जिससे बाजार और स्थानीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ 105.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की यह बढ़ती कीमत भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रही है।
कारोबार के बढ़ते समय के साथ सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का दायरा बढ़ता गया, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। फिलहाल बाजार की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की चाल पर टिकी हुई हैं।
खाद संकट गहराया: सरकार ने 25 लाख टन यूरिया आयात का रिकॉर्ड ऑर्डर दिया
24 Apr, 2026 06:57 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का असर अब भारत की उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। इसी के चलते सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक ही टेंडर के माध्यम से रिकॉर्ड 25 लाख टन यूरिया आयात करने का निर्णय लिया है। विशेष बात यह है कि इस बार यूरिया की खरीदारी दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमतों पर की जा रही है। यूरिया की यह बड़ी खेप भारत के कुल वार्षिक आयात का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।
कीमतों में भारी उछाल
बाजार सूत्रों के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड ने पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की दर से यूरिया खरीदने पर अपनी सहमति दी है। यदि इसकी तुलना पिछले टेंडर से की जाए, तो उस समय कीमतें प्रति टन 508 से 512 डॉलर के आसपास थीं। मात्र दो महीने के भीतर कीमतों में आया यह भारी उछाल वैश्विक बाजार में उर्वरक की बढ़ती किल्लत और ऊँची मांग को दर्शाता है।
टेंडर और आपूर्ति की स्थिति
प्रस्ताव: कंपनी को कुल 56 लाख टन आपूर्ति के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन अधिकांश बोलियां 1,000 डॉलर से लेकर 1,136 डॉलर प्रति टन तक बेहद ऊँची थीं।
सहमति: आपूर्तिकर्ताओं द्वारा न्यूनतम बोली की बराबरी करने के बाद ही 25 लाख टन के ऑर्डर को अंतिम रूप दिया गया।
डेडलाइन: टेंडर की शर्तों के तहत इस पूरी खेप को 14 जून 2026 तक लोडिंग पोर्ट से रवाना करना अनिवार्य है।
वैश्विक और घरेलू बाजार पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया सुरक्षित करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के लिए आपूर्ति की चुनौती बढ़ सकती है। उत्पादकों का बड़ा हिस्सा भारत की मांग पूरी करने में व्यस्त रहेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें और बढ़ने की आशंका है। साथ ही, महंगे आयात के कारण घरेलू स्तर पर भी यूरिया की लागत बढ़ सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।
AI जोखिम पर अलर्ट: वित्त मंत्री की बैंकों संग बैठक, डेटा सुरक्षा पर जोर
24 Apr, 2026 06:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों और खतरों को लेकर बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस उच्चस्तरीय चर्चा में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे नए एआई मॉडल्स सॉफ्टवेयर की खामियों का फायदा उठाकर वित्तीय ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
बैंकिंग सुरक्षा और डेटा संरक्षण पर जोर
वित्त मंत्री ने बैंकों को अपनी आईटी प्रणालियों को और अधिक अभेद्य बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राहकों के डेटा और वित्तीय संसाधनों की सुरक्षा सर्वोपरि है, जिसके लिए बैंकों को सक्रिय और निवारक कदम उठाने चाहिए। हालांकि, उन्होंने अब तक साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने की दिशा में बैंकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की।
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के लिए निर्देश
वित्त मंत्री ने 'इंडियन बैंक्स एसोसिएशन' को एक सामूहिक और समन्वित तंत्र विकसित करने की सलाह दी, ताकि साइबर खतरों का तुरंत और प्रभावी मुकाबला किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिए कि:
बैंक अपनी निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए शीर्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और विशेष एजेंसियों की सेवाएं लें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) को दी जाए।
सहयोग और रियल-टाइम सूचना साझाकरण
सीतारमण ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम में खतरों की जानकारी साझा करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान कर उसे पूरे सिस्टम में फैलने से रोका जा सकेगा।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू, आरबीआई और एनपीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी, तथा विभिन्न अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के एमडी और सीईओ शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि 'मिथोस' जैसे आधुनिक एआई मॉडल आईटी सेवाओं और बैंकिंग सुरक्षा के लिए नए जोखिम पैदा कर सकते हैं, जिसे देखते हुए यह सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
कर्मचारियों के कल्याण पर जोर, अमेजन इंडिया लगाएगी 2800 करोड़
23 Apr, 2026 04:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन इंडिया ने भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़े निवेश का एलान किया है। गुरुवार को कंपनी ने बताया कि वह अपने ऑपरेशंस नेटवर्क को आधुनिक बनाने और वर्कफोर्स के कल्याण के लिए 2,800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च करेगी।
अमेजन का महा-निवेश: डिजिटल इंडिया और कर्मचारी सुरक्षा पर जोर
अमेजन इंडिया का यह ताजा निवेश न केवल व्यापार के विस्तार पर केंद्रित है, बल्कि इसके जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), निर्यात को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी काम किया जाएगा।
'प्रोजेक्ट आश्रय' और सामाजिक सुरक्षा
कंपनी अपने 'प्रोजेक्ट आश्रय' के माध्यम से कर्मचारियों और समुदाय के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार कर रही है:
बीमा कवर: कर्मचारियों के लिए मेडिकल और दुर्घटना बीमा की सुविधाओं को पहले से कहीं अधिक बेहतर बनाया जाएगा।
सरकारी योजनाओं से जुड़ाव: कंपनी अपने हजारों कर्मियों और लगभग 2 लाख सामुदायिक सदस्यों को केंद्र व राज्य सरकारों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी।
सुविधा केंद्र: डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य कर्मचारियों के लिए विश्राम और अन्य बुनियादी सुविधाओं (Rest Points) को बढ़ाया जाएगा।
क्विक कॉमर्स और डिलीवरी नेटवर्क का विस्तार
अमेजन अपनी डिलीवरी स्पीड को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को नया रूप दे रही है:
तेज डिलीवरी: कंपनी अपने लॉजिस्टिक्स और 'क्विक कॉमर्स' नेटवर्क को इस तरह डिजाइन कर रही है कि ग्राहकों को कुछ ही मिनटों या घंटों में सामान मिल सके।
माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर: साल 2025 में शुरू हुई 'Amazon Now' सेवा को अब देश के प्रमुख शहरों में 300 से अधिक छोटे केंद्रों तक विस्तार दिया जा चुका है, जिससे तत्काल डिलीवरी सुनिश्चित हो रही है।
पिछले निवेश और भविष्य की राह
यह नया निवेश पिछले साल (2025) किए गए 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की कड़ी को आगे बढ़ाता है।
नेटवर्क की ताकत: पिछले एक साल में कंपनी ने देशभर में 17 नए मुख्य वेयरहाउस (फुलफिलमेंट सेंटर), 6 सॉर्टेशन सेंटर और 75 लास्ट-माइल स्टेशन स्थापित किए हैं।
आर्थिक प्रभाव: अमेजन का मानना है कि इस निरंतर निवेश से भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छोटे व मध्यम उद्योगों (SMBs) को वैश्विक स्तर पर निर्यात करने के नए मौके मिलेंगे।
नाइट फ्रैंक रिपोर्ट का बड़ा दावा, भारत में 2031 तक 313 अरबपति
23 Apr, 2026 04:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की निरंतर बढ़ती रफ्तार अब देश के सबसे धनी वर्ग के बढ़ते आंकड़ों में स्पष्ट रूप से झलकने लगी है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अरबपतियों की संख्या आने वाले वर्षों में एक नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है।
वेल्थ रिपोर्ट 2026: 2031 तक भारत में होंगे 300 से अधिक अरबपति
नाइट फ्रैंक ने 'द वेल्थ रिपोर्ट' का अपना 20वां संस्करण साझा किया है, जिसमें भारतीय संपत्ति निर्माण को लेकर बेहद सकारात्मक अनुमान लगाए गए हैं। रिपोर्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. अरबपतियों की संख्या में 51% का उछाल
अनुमान है कि साल 2031 तक भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 313 हो जाएगी। वर्तमान में देश में 207 अरबपति हैं। इसका अर्थ है कि अगले कुछ वर्षों में इस संख्या में लगभग 51 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी जाएगी।
2. अति-धनी व्यक्तियों (UHNWIs) की बढ़ती आबादी
भारत में उन लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है जिनकी नेट वर्थ $30 मिलियन (लगभग ₹250 करोड़) से अधिक है:
वर्तमान स्थिति: भारत में अभी 19,877 अति-धनी व्यक्ति मौजूद हैं।
भविष्य का अनुमान: 2031 तक यह आंकड़ा बढ़कर 25,217 तक पहुँचने की उम्मीद है।
वैश्विक स्तर: भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अति-अमीर आबादी वाला देश बन चुका है।
इन क्षेत्रों ने दी संपत्ति को रफ्तार
भारत में अमीरों की बढ़ती संख्या के पीछे कुछ प्रमुख क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा है:
टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स: नए जमाने के उद्यमियों और तकनीकी नवाचार ने वेल्थ क्रिएशन में बड़ी भूमिका निभाई है।
पूंजी बाजार (Capital Markets): शेयर बाजार की मजबूती ने निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा किया है।
औद्योगिक विकास (Industrials): बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्र में आई तेजी से भी संपदा का सृजन हुआ है।
आर्थिक राजधानी मुंबई का दबदबा
संपत्ति के संकेंद्रण के मामले में मुंबई आज भी देश का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
अकेले मुंबई शहर में भारत की कुल अति-धनी आबादी का 35.4 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है।
व्यापारिक गतिविधियों और निवेश का मुख्य केंद्र होने के कारण मुंबई संपत्ति सृजन की इस दौड़ में सबसे आगे है।
वैश्विक रैंकिंग: तीसरे पायदान पर भारत
अरबपतियों की कुल संख्या के मामले में भारत अब दुनिया के शीर्ष देशों की कतार में खड़ा है:
अमेरिका: 914 अरबपतियों के साथ पहले स्थान पर।
चीन: 485 अरबपतियों के साथ दूसरे स्थान पर।
भारत: 207 अरबपतियों (और भविष्य की बढ़त के साथ) अब तीसरे स्थान पर काबिज है।
BSE Sensex 578 अंक गिरकर निवेशकों को झटका
23 Apr, 2026 01:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही और दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान के साथ खुले। वैश्विक दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में बिकवाली का माहौल देखा गया।
बाजार की सुस्त शुरुआत: सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों ने सावधानी बरती। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स लगभग 577 अंक फिसलकर 77,938 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी करीब 156 अंकों की कमजोरी के साथ 24,221 के आसपास कारोबार करता दिखा।
कंपनियों के शेयरों की स्थिति
पिछड़ने वाले शेयर: आईटी और ऑटो सेक्टर की कंपनियों में सबसे ज्यादा दबाव रहा। मुख्य रूप से टेक महिंद्रा, इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एशियन पेंट्स और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
बढ़त वाले शेयर: भारी बिकवाली के बीच केवल सन फार्मा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में टिके रहने में कामयाब रहे।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) का 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए शुभ संकेत नहीं है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण: एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में आ रहे गतिरोध और समुद्री रास्तों पर तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
मैक्रो रिस्क: जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार ने बताया कि युद्ध लंबा खिंचने और तेल की कीमतों में उछाल आने से वैश्विक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ रहा है, जो भारत जैसे आयात प्रधान देशों के लिए जोखिम भरा है।
पश्चिम एशिया का तनाव: लिवेलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक हरिप्रसाद के का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर सैन्य तनाव बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
एशियाई और वैश्विक बाजारों का रुख
भारतीय बाजार के साथ-साथ अन्य एशियाई बाजारों में भी मंदी का असर दिखा:
एशियाई बाजार: जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट, सभी गिरावट के साथ कारोबार करते देखे गए।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बीते बुधवार को करीब 2,078 करोड़ रुपये की संपत्ति बेची।
तेल का भाव: ब्रेंट क्रूड फिलहाल 1.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 103.3 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।
सोशल मीडिया और बाजार में फैलाई जा रही खबरों का किया खंडन
23 Apr, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि से जुड़ी तमाम खबरों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक करार दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन के दाम बढ़ाने का फिलहाल कोई विचार या प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरें अफवाह: केंद्र सरकार
सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि जल्द ही ईंधन के दामों में भारी इजाफा हो सकता है। इन खबरों का खंडन करते हुए मंत्रालय ने कहा है कि जनता को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कीमतें स्थिर बनी रहेंगी।
क्या था दावा? कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के हवाले से यह बात फैलाई जा रही थी कि विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की भारी वृद्धि हो सकती है।
सरकार का पक्ष: मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी रिपोर्टों का उद्देश्य केवल आम जनता के बीच भय और भ्रम पैदा करना है।
"भारत में पिछले 4 साल से कीमतें स्थिर"
सरकार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि भारत संभवतः विश्व का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश है, जहाँ पिछले चार वर्षों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज नहीं की गई है। मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम बढ़ने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और सरकार ने मिलकर आम आदमी पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया है।
ईंधन की कीमतें तय होने के मुख्य आधार
आम नागरिकों की जानकारी के लिए मंत्रालय ने उन कारकों को भी स्पष्ट किया है जो पेट्रोल और डीजल के रेट तय करते हैं:
कच्चा तेल (क्रूड ऑयल): अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर घरेलू दामों पर पड़ता है।
रुपये की विनिमय दर: चूँकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती या कमजोरी लागत को प्रभावित करती है।
टैक्स और शुल्क: केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला वैट (VAT) कीमतों का एक बड़ा हिस्सा होते हैं। अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें अलग होने के कारण हर शहर में भाव भिन्न होते हैं।
रिफाइनिंग और लॉजिस्टिक्स: कच्चे तेल को साफ करने (रिफाइन करने) का खर्च और उसे देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाने की लागत भी अंतिम कीमत में शामिल होती है।
डिमांड और सप्लाई: वैश्विक और घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता और मांग के बीच का संतुलन भी कीमतों में उतार-चढ़ाव का कारण बनता है।
अमेरिकी बाजार नई ऊंचाई पर, टेक और बैंकिंग शेयरों में जोरदार उछाल
23 Apr, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी बाजार में ऐतिहासिक उछाल: रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे प्रमुख सूचकांक
बुधवार का दिन अमेरिकी शेयर बाजार के लिए ऐतिहासिक रहा, जहाँ निवेशकों के उत्साह ने प्रमुख इंडेक्स को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया। एसएंडपी 500 (S&P 500) ने करीब 1% की बढ़त के साथ अपने पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। इसी क्रम में डाउ जोन्स में 340 अंकों की मजबूती देखी गई, जबकि तकनीकी शेयरों पर आधारित नैस्डैक ने 1.6% की छलांग लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। बाजार की इस शानदार रिकवरी के पीछे दिग्गज कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे मुख्य वजह रहे।
जीई वर्नोवा और अन्य दिग्गजों का प्रदर्शन
बाजार की इस तेजी में जीई वर्नोवा (GE Vernova) सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरा, जिसके शेयरों में 13.7% का जोरदार उछाल आया। कंपनी को एआई डेटा सेंटरों से मिलने वाले भारी ऑर्डर्स और मुनाफे में बढ़ोतरी ने निवेशकों को गदगद कर दिया। इसके अलावा:
बोस्टन साइंटिफिक, बोइंग और फिलिप मॉरिस के शेयरों में भी ठोस नतीजों के दम पर बढ़त रही।
मारिजुआना सेक्टर: ट्रंप प्रशासन द्वारा मारिजुआना को कम जोखिम वाली श्रेणी में डालने की संभावनाओं के बीच टिलरे ब्रांड्स और कैनोपी ग्रोथ के शेयरों में भारी खरीदारी देखी गई। टैक्स राहत की उम्मीद ने इस पूरे सेक्टर को पंख लगा दिए हैं।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई तपिश
शेयर बाजार की रौनक के बीच ऊर्जा संकट की आहट ने चिंता भी पैदा की है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3.5% चढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।
कारण: ईरान के साथ बढ़ते युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का डर बना हुआ है।
तुलना: युद्ध से पहले जो कच्चा तेल 70 डॉलर पर था, वह अब शतक पार कर चुका है।
गिरावट: जहाँ बाजार बढ़ रहा था, वहीं बेस्ट बाय (Best Buy) के शेयरों में 4.6% की गिरावट आई, जिसका कारण सीईओ कोरी बैरी का पद छोड़ने का फैसला रहा।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और भू-राजनीतिक संकट
वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते, होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान द्वारा जहाजों को जब्त किए जाने की खबरों ने खलबली मचा दी है।
ताजा स्थिति: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर युद्धविराम के विस्तार की चर्चा की है, तो दूसरी ओर ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी बरकरार है। कूटनीतिक और सैन्य दबाव के इस मिश्रण ने इस संकट को और अधिक पेचीदा बना दिया है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार और महंगाई पर पड़ सकता है।
पेंशन योजना में तेजी से बढ़ी भागीदारी, असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोग जुड़े
23 Apr, 2026 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अटल पेंशन योजना: सदस्यों का आंकड़ा 9 करोड़ के पार
भारत सरकार की महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा पहल, अटल पेंशन योजना (APY), सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इस योजना से जुड़ने वाले लोगों की कुल संख्या अब 9 करोड़ के प्रभावशाली स्तर को पार कर गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, योजना की बढ़ती लोकप्रियता के चलते 1.35 करोड़ से अधिक नए सदस्यों ने अपना पंजीकरण कराया है।
टेक महिंद्रा: मुनाफे में 16% की वृद्धि, शेयरधारकों को मिलेगा तगड़ा डिविडेंड
आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टेक महिंद्रा ने वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही के शानदार नतीजे घोषित किए हैं।
शुद्ध लाभ: कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ 16% बढ़कर 1,353.8 करोड़ रुपये पर पहुँच गया है।
लाभांश (Dividend): बोर्ड ने अपने निवेशकों के लिए प्रति शेयर 36 रुपये के अंतिम लाभांश की सिफारिश की है।
वर्कफोर्स: मार्च तिमाही के दौरान कर्मचारियों की संख्या में मामूली कमी देखी गई और अब यह आंकड़ा 75,377 पर है।
भारतीय रियल एस्टेट: निवेश में 72% का ऐतिहासिक उछाल
वैश्विक बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। साल की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में निवेश का प्रवाह 72% बढ़कर 5.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
प्रमुख हिस्सेदारी: निवेश में डेवलपर्स (42%) और रीट (REITs - 40%) की सबसे बड़ी भूमिका रही।
घरेलू दबदबा: कुल निवेश का 96% हिस्सा भारतीय निवेशकों से आया है, जो देश के रियल एस्टेट बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
इंडक्शन चूल्हे होंगे सस्ते: सरकार घटा सकती है सीमा शुल्क और GST
बढ़ते ईंधन संकट और महंगाई से राहत देने के लिए केंद्र सरकार इंडक्शन कुकटॉप को बढ़ावा देने की तैयारी में है।
टैक्स में कटौती: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने इंडक्शन चूल्हों पर GST को 18% से घटाकर 5% करने का सुझाव दिया है। साथ ही इनके पुर्जों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में भी कटौती पर विचार किया जा रहा है।
उद्देश्य: इसका लक्ष्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और इंडक्शन उपकरणों को आम जनता के लिए किफायती बनाना है।
सुरक्षा उपाय: सरकार के विभिन्न विभाग (DPIIT और पेट्रोलियम मंत्रालय) मिलकर काम कर रहे हैं ताकि ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों की उपलब्धता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शुगर सेक्टर में बड़ा सुधार, सरकार ने मांगे सुझाव
22 Apr, 2026 05:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के चीनी क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए एक युगांतकारी बदलाव की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार ने वर्ष 1966 के पुराने 'गन्ना नियंत्रण आदेश' (Sugarcane Control Order) को प्रतिस्थापित कर एक नया कानून लाने का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया है। इस नए कानून का उद्देश्य चीनी मिलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना है।
इथेनॉल अब चीनी उद्योग का अभिन्न हिस्सा
नए ड्राफ्ट में सबसे क्रांतिकारी बदलाव इथेनॉल को लेकर किया गया है:
नई परिभाषा: अब चीनी मिलों की आधिकारिक परिभाषा में उन इकाइयों को भी शामिल किया जाएगा जो गन्ने के रस, सिरप या शीरे (मोलासेस) से सीधे इथेनॉल बनाती हैं।
उत्पादन का पैमाना: गणना को सरल बनाने के लिए सरकार ने तय किया है कि 600 लीटर इथेनॉल को 1 टन चीनी के बराबर माना जाएगा।
इकाईयों को राहत: जो इकाइयां गन्ना नहीं पीसतीं और केवल इथेनॉल बनाती हैं, उनके लिए बैंक गारंटी की शर्तों को उदार बनाया गया है ताकि निवेश को प्रोत्साहन मिले।
किसानों के हित रहेंगे सुरक्षित
कानून नया होने के बावजूद किसानों से जुड़े बुनियादी नियमों को यथावत रखा गया है:
उचित मूल्य (FRP): गन्ने के लाभकारी मूल्य की व्यवस्था जारी रहेगी।
समय पर भुगतान: गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य होगा।
ब्याज का प्रावधान: भुगतान में देरी होने पर मिलों को किसानों को 15% वार्षिक ब्याज देना होगा।
लाइसेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग के नए नियम
सरकार ने मिलों के संचालन और उनकी मंजूरी की प्रक्रिया को अधिक सख्त और स्पष्ट बनाया है:
समय सीमा और दूरी: नई फैक्ट्री खोलने के लिए न्यूनतम दूरी और प्रोजेक्ट पूरा करने की एक निश्चित समय सीमा तय की गई है।
लाइसेंस रद्दीकरण: यदि कोई चीनी मिल लगातार 7 वर्षों तक बंद रहती है, तो उसका लाइसेंस स्वतः रद्द माना जा सकता है।
डिजिटल ट्रैकिंग: हर फैक्ट्री को एक विशिष्ट कोड दिया जाएगा और ऑनलाइन रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी, जिससे सरकार रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर सकेगी।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
चीनी उद्योग के संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि 1966 का कानून वर्तमान तकनीक और इथेनॉल की बढ़ती मांग के हिसाब से पुराना हो चुका था। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने खांडसारी इकाइयों पर बढ़ती सख्ती को लेकर पुनर्विचार की मांग की है।
युद्ध की आहट से कृषि पर असर, खाद सप्लाई पर खतरा
22 Apr, 2026 03:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि खरीफ सीजन की बुवाई शुरू होने से ठीक पहले भारत में खाद की कमी और खाद्य मुद्रास्फीति (महंगाई) का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।
सप्लाई चेन पर 'युद्ध' की मार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक खाद आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस संकट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का गतिरोध: भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 35 प्रतिशत उर्वरक खाड़ी देशों से आयात करता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक बाधाओं के कारण यह सप्लाई लगभग ठप हो गई है।
शिपिंग लागत में उछाल: तनाव की वजह से समुद्री जहाजों का बीमा अत्यधिक महंगा हो गया है और टैंकरों की आवाजाही में 90 से 95 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
बजट पर दबाव: भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खाद सब्सिडी हेतु 18.6 अरब डॉलर का प्रावधान किया है, लेकिन सप्लाई न होने की स्थिति में यह भारी बजट भी कम पड़ सकता है।
घरेलू उत्पादन में बाधा और गैस की कमी
मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, भारत के भीतर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है:
क्षमता का अभाव: गैस की अपर्याप्त आपूर्ति के कारण भारत के घरेलू खाद कारखाने अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में ये प्लांट केवल 60 प्रतिशत क्षमता पर ही संचालित हो रहे हैं।
पंजाब के प्लांट्स: नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) के प्लांट शुरू तो किए गए हैं, लेकिन तकनीकी और कच्चे माल की बाधाओं के कारण उत्पादन लक्ष्य से काफी पीछे है।
खरीफ सीजन और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मई से शुरू होने वाली खरीफ की बुवाई पर इस संकट का सीधा असर पड़ने वाला है:
उत्पादन में कमी: खाद महंगी होने या न मिलने पर किसान इसका सीमित उपयोग करेंगे, जिससे चावल, मक्का और गेहूं जैसी फसलों की पैदावार घट सकती है।
मौसम की दोहरी मार: साल 2026 में मानसून के सामान्य से कम रहने की 60 प्रतिशत संभावना जताई गई है, जो स्थिति को और अधिक विकट बना सकता है।
वैश्विक महंगाई: वैश्विक स्तर पर खाद की कीमतें पहले ही 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। ईंधन महंगा होने से सिंचाई और फसलों की ढुलाई का खर्च भी बढ़ेगा।
ईरान तनाव के बीच भारत की रणनीति, नए बाजारों पर फोकस
22 Apr, 2026 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के बीच भारत अपनी व्यापारिक रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। जोखिम को कम करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत अब अपने व्यापारिक दायरे का विस्तार कर नए वैश्विक बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
नए बाजारों के साथ रणनीतिक समझौते
भारत वर्तमान में कई प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इनमें शामिल हैं:
प्रमुख देश: कनाडा, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, पेरू, चिली और मेक्सिको।
भविष्य की वार्ता: फिलीपींस और मालदीव के साथ भी व्यापारिक संवाद को आगे बढ़ाया जा रहा है।
व्यापार में उछाल: आंकड़ों के अनुसार, समझौतों के चलते भारत का कुल व्यापार, जो 2006 में मात्र 4.6% था, साल 2024 में बढ़कर 28.8% के स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका के साथ समझौता होने के बाद इसमें और भी बड़ी तेजी आने की उम्मीद है।
निर्यात के पारंपरिक और उभरते केंद्र
नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निर्यात की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं:
पारंपरिक बाजार: अमेरिका और यूरोप (विशेषकर नीदरलैंड्स) अभी भी भारतीय निर्यात के मजबूत आधार बने हुए हैं।
उभरते क्षेत्र: उत्तर-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, जो भारतीय व्यापार के विविधीकरण (Diversification) का प्रमाण है।
शीर्ष साझेदार: भारत के कुल निर्यात में अमेरिका, यूएई और हांगकांग की कुल हिस्सेदारी लगभग 70-75% है। हाल ही में स्पेन भी भारत के शीर्ष-10 निर्यात गंतव्यों की सूची में शामिल हुआ है।
खाड़ी क्षेत्र की अहमियत और चुनौतियां
भारत के कुल आयात-निर्यात में खाड़ी देशों की 12% हिस्सेदारी है:
प्रमुख साझेदार: यूएई और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक सहयोगियों में शामिल हैं। यूएई विशेष रूप से भारत के लिए अफ्रीका और यूरोप तक पहुँचने का एक बड़ा केंद्र (Re-export Hub) है।
ऊर्जा संकट: रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमलों ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अस्थिरता पैदा कर दी है। इससे वैश्विक स्तर पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ गई है।
आर्थिक प्रभाव और वैश्विक चेतावनी
बहुपक्षीय संस्थानों ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा की कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रही, तो यह वैश्विक जीडीपी (GDP) की रफ्तार को धीमा कर सकती है। इसका सबसे बुरा असर ईंधन आयात पर निर्भर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के व्यापार सुधार पर पड़ सकता है।
भारत-यूके रक्षा सहयोग को नई रफ्तार, CDS चौहान की यात्रा अहम
22 Apr, 2026 09:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत-यूके रक्षा संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत: जनरल अनिल चौहान का ब्रिटेन दौरा
लंदन: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की हालिया ब्रिटेन यात्रा ने दोनों देशों के बीच सामरिक और रक्षा सहयोग को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। इस दौरे का मुख्य केंद्र रक्षा विनिर्माण (Manufacturing) और तकनीक साझा करने के भविष्य के रोडमैप को तैयार करना रहा।
रक्षा औद्योगिक साझेदारी और 'सह-उत्पादन' पर जोर
ब्रिटेन के रक्षा उद्योग के दिग्गज प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जनरल चौहान ने भारत के बढ़ते रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय केवल 'खरीद-बिक्री' का नहीं, बल्कि 'सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन' का है।
तकनीक हस्तांतरण: जनरल ने महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों के हस्तांतरण (ToT) की आवश्यकता पर बल दिया।
सप्लाई चेन: दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को और अधिक लचीला और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
आर्थिक एकीकरण: उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत और यूके के बीच आर्थिक रिश्ते गहरे होंगे, रक्षा सहयोग में आने वाली बाधाएं स्वतः दूर हो जाएंगी।
शहीदों को नमन: साझा सैन्य विरासत का सम्मान
अपनी यात्रा के दौरान जनरल चौहान ने लंदन स्थित 'मेमोरियल गेट्स' (स्मारक द्वार) पर जाकर विश्व युद्धों में अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारतीय और राष्ट्रमंडल सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
एकीकृत रक्षा स्टाफ (IDS) के अनुसार, यह समारोह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सेवा, साहस और बलिदान के उन साझा मूल्यों का प्रतीक है, जो हमारे रक्षा संबंधों की नींव हैं।
रणनीतिक संवाद और गोलमेज सम्मेलन
जनरल चौहान ने ब्रिटेन की इंडो-पैसिफिक मामलों की राज्य मंत्री सीमा मल्होत्रा से भी मुलाकात की, जहाँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और आपसी हितों पर संवाद हुआ।
यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा "भारतीय सैन्य परिवर्तन: चुनौतियां और अवसर" विषय पर आयोजित गोलमेज सम्मेलन रहा। इसकी अध्यक्षता करते हुए जनरल चौहान ने:
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और 'थिएटरइजेशन' प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
वैश्विक थिंक-टैंक और रणनीतिक विशेषज्ञों के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र की चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
उभरती प्रौद्योगिकियों (AI, साइबर सुरक्षा) में सहयोग की संभावनाओं को तलाशा।
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी दोनों दबाव में
22 Apr, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की तपिश: भारतीय बाजार और रुपये में भारी गिरावट
मुंबई: बुधवार को भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए सुबह बेहद चुनौतीपूर्ण रही। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दोहरे दबाव ने घरेलू निवेशकों की धारणा को झकझोर कर रख दिया है।
शेयर बाजार का हाल: सेंसेक्स और निफ्टी में हड़कंप
बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती सत्र में ही:
सेंसेक्स: 494.12 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 78,779.21 के स्तर पर आ गया।
निफ्टी: 142.2 अंकों की कमजोरी दर्ज करते हुए 24,434.40 पर कारोबार करता दिखा।
रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर की ओर
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे टूटकर 93.75 के स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा सत्र है जब रुपया अपनी मजबूती खोता नजर आ रहा है।
कच्चे तेल में उबाल और ट्रंप की चेतावनी
बाजार में इस उथल-पुथल का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और अमेरिकी राजनीति से जुड़े बयान हैं।
ब्रेंट क्रूड का रुख: वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिलहाल 98.20 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। हालांकि इसमें मामूली 0.28% की नरमी देखी गई है, लेकिन कीमतें अभी भी मनोवैज्ञानिक स्तर 98 डॉलर के ऊपर बनी हुई हैं।
ट्रंप का कड़ा रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। सीएनबीसी (CNBC) के 'स्क्वॉक बॉक्स' कार्यक्रम में ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बुधवार तक कोई ठोस शांति समझौता नहीं होता है, तो वे ईरान पर सैन्य कार्रवाई (बमबारी) के विकल्प पर विचार करेंगे। ट्रंप के अनुसार, समझौता न होने की स्थिति में "बमबारी" एक बेहतर रणनीति साबित हो सकती है।
आरबीआई के नए दिशानिर्देश लागू, ऑटो डेबिट व्यवस्था में बड़ा बदलाव
22 Apr, 2026 08:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
RBI के नए नियम लागू: अब बिना आपकी मर्जी नहीं कटेगा खाते से पैसा, ऑटो-डेबिट पर बढ़ा ग्राहकों का नियंत्रण
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेनदेन को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए 'डिजिटल पेमेंट्स-ई-मैंडेट फ्रेमवर्क 2026' के नए दिशानिर्देशों को मंगलवार से प्रभावी कर दिया है। इन बदलावों का सीधा उद्देश्य ग्राहकों को उनके बैंक खातों से होने वाले स्वचालित भुगतानों (Auto-Debit) पर बेहतर नियंत्रण देना और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम करना है।
1. भुगतान से 24 घंटे पहले मिलेगा 'अलर्ट'
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी प्रकार के ऑटो-डेबिट भुगतान से 24 घंटे पहले बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था को ग्राहक को मोबाइल या ईमेल पर सूचना देनी होगी।
विस्तृत जानकारी: इस अलर्ट में पैसा प्राप्त करने वाली कंपनी का नाम, भुगतान की राशि, तारीख और एक रेफरेंस नंबर दिया जाएगा।
भुगतान रोकने की सुविधा: यदि ग्राहक वह भुगतान नहीं करना चाहता, तो उसके पास उस अवधि के दौरान उसे रोकने (Cancel) का विकल्प होगा।
2. कार्ड बदलने पर नहीं होगी परेशानी
अक्सर डेबिट या क्रेडिट कार्ड की समय सीमा (Expiry) खत्म होने पर ग्राहकों को विभिन्न ऐप्स पर जाकर भुगतान की जानकारी दोबारा अपडेट करनी पड़ती थी। अब बैंक पुराने कार्ड के सभी भुगतान निर्देशों को स्वचालित रूप से नए कार्ड पर स्थानांतरित कर देंगे, जिससे सब्सक्रिप्शन सेवाओं में कोई रुकावट नहीं आएगी।
3. किन सेवाओं पर होगा असर?
यह नियम उन सभी भुगतानों पर लागू होगा जो कार्ड, यूपीआई (UPI) या प्रीपेड वॉलेट के माध्यम से किए जाते हैं, जैसे:
ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन।
बीमा प्रीमियम और बिलों का भुगतान।
म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) और लोन की ईएमआई (EMI)।
नोट: फास्टैग (FASTag) ऑटो-रिचार्ज के लिए 24 घंटे पहले की पूर्व सूचना अनिवार्य नहीं होगी।
4. लेनदेन की नई सीमा और ओटीपी (OTP) नियम
आरबीआई ने डिजिटल निवेश और बिल भुगतान को सुगम बनाने के लिए ओटीपी की सीमा में बदलाव किया है:
₹1 लाख तक की छूट: बीमा प्रीमियम, म्यूचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए अब 1 लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर ओटीपी की जरूरत नहीं होगी।
सामान्य सीमा: अन्य सामान्य ई-मैंडेट के लिए यह सीमा 15,000 रुपये निर्धारित की गई है।
5. कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं और आसान समाधान
रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि ई-मैंडेट की इस उन्नत सुविधा के लिए ग्राहकों से कोई भी अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी गलत लेनदेन या विवाद की स्थिति पैदा होती है, तो बैंकों को त्वरित शिकायत निवारण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
हादसे के बाद प्रशासन सख्त, सुपरवाइजर पर गिरी गाज और कंपनी हुई ब्लैकलिस्ट
