व्यापार
फेल रही ट्रंप की टैरिफ नीति?: अमेरिका ने लगाया भारी शुल्क, फिर भी भारत से व्यापार घाटा 58.2 अरब डॉलर तक बढ़ा
21 Feb, 2026 03:54 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत तक उच्च टैरिफ लगाने के बावजूद अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 2025 में 58.2 अरब डॉलर हो गया। यह पहले 45.7 अरब डॉलर के करीब था। इस बात की जानकारी अमेरिकी सरकार ने टैरिफ पर तेज होती हलचल के बीच शनिवार को दी। बता दें कि अमेरिका का दिसंबर 2025 में कुल व्यापार घाटा (वस्तु और सेवा) 70.3 अरब डॉलर रहा, जो नवंबर में 53 अरब डॉलर था।वहीं, दिसंबर में भारत के साथ व्यापार घाटा 5.2 अरब डॉलर रहा। पूरे साल 2025 के लिए अमेरिका का कुल व्यापार घाटा 901.5 अरब डॉलर रहा, जबकि 2024 में यह 903.5 अरब डॉलर था। इस दौरान अमेरिकी निर्यात 199.8 अरब डॉलर बढ़कर 3,432.3 अरब डॉलर हो गया और आयात 197.8 अरब डॉलर बढ़कर 4,333.8 अरब डॉलर पहुंच गया।
अब समझिए वस्तु और सेवा का अंतर
वस्तुओं के व्यापार में घाटा 25.5 अरब डॉलर बढ़कर 1,240.9 अरब डॉलर हो गया। वहीं, सेवाओं में अधिशेष 27.6 अरब डॉलर बढ़कर 339.5 अरब डॉलर रहा। 2025 में अमेरिका का व्यापार घाटा अन्य देशों के साथ इस प्रकार रहा-
यूरोपीय यूनियन: 218.8 अरब डॉलर
चीन: 202.1 अरब डॉलर
मैक्सिको: 196.9 अरब डॉलर
वियतनाम: 178.2 अरब डॉलर
ताइवान: 146.8 अरब डॉलर
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया अमेरिकी टैरिफ
बता दें कि ये पूरा मामला तब सामने आया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के लगाए गए टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया। लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप ने धारा 122 का इस्तेमाल करते हुए 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयातित सामान पर 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ लगा दिया। यह टैरिफ 24 फरवरी से लागू होगा। व्हाइट हाउस की फैक्टशीट के मुताबिक, व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 122 के तहत राष्ट्रपति कुछ आधारभूत अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं (जैसे व्यापार घाटा) को कम करने के लिए सरचार्ज और अन्य आयात प्रतिबंध लगा सकते हैं।
समझिए किन वस्तुओं पर टैरिफ नहीं लगेगा
व्हाइट हाउस की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, कुछ जरूरी और महत्वपूर्ण वस्तुओं पर यह टैरिफ लागू नहीं होगा। इनमें शामिल हैं-
खनिज और बुलियन में उपयोग होने वाली धातुएं
ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद
प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक
कृषि उत्पाद
फार्मास्यूटिकल्स और संबंधित सामग्री
कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और यात्री वाहन
ट्रंप के टैरिफ रद्द होने का भारत पर क्या असर: व्यापार समझौते में होगा बदलाव या घाटे में रहेगा हिन्दुस्तान?
21 Feb, 2026 03:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने जिन शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए वैश्विक स्तर पर टैरिफ लगाए, वह उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप सरकार बैकफुट पर आ गई। हालांकि, ट्रंप ने तुरंत अपनी आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर पूरी दुनिया से होने वाले व्यापार पर 10 फीसदी नए आयात शुल्क लगाने का दांव खेला। हालांकि, उनका यह फैसला सिर्फ अंतरिम तौर पर लागू होगा और लंबी अवधि में नए टैरिफ की वैधता भी खत्म हो जाएगी।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमानप्रीमियम
भारत और पड़ोस की सियासत: कैसा बांग्लादेश बनाना चाहते हैं रहमान, नई सरकार पर रहेंगी नजरें ट्रंप के अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाने से लेकर सुप्रीम कोर्ट के इन आयात शुल्कों को अवैध करार दिए जाने और अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक बार फिर 10 फीसदी टैरिफ का एलान किए जाने के बाद भारत समेत पूरी दुनिया में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देश ट्रंप के टैरिफ के असर को कम करने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौता कर चुके हैं या इस पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार कर रहे हैं। इसके तहत अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ कई देशों पर लागू किए गए थे। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के टैरिफ के साथ उन अंतरिम समझौतों को भी खत्म कर देगा। आइये जानते हैं...
सवाल-1: ट्रंप के टैरिफ का सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सवाल-2: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने न केवल पुराने टैरिफ को खत्म किया, बल्कि इसके तहत आयातकों ने विदेश से आने वाले उत्पादों पर जो अतिरिक्त भुगतान (पुराने टैरिफ के तहत करीब 130 अरब से 175 अरब डॉलर) किए थे, उन्हें भी वापस मिलने (रिफंड) का रास्ता खुल गया है। हालांकि, यह प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है और जानकारों का मानना है कि इसमें वर्षों लग सकते हैं।अदालत ने अब इस मामले को वापस अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (सीआईटी) भेज दिया है ताकि रिफंड के दावों को सुलझाया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में (1998 के फैसले के बाद) रिफंड देने की प्रक्रिया में लगभग दो साल का समय लगा था।
सवाल-3: आयात शुल्क का बोझ उठाने वाले कैसे ले सकते हैं रिफंड?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि हर एक आयातक को रिफंड पाने के लिए अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड) सीआईटी) में व्यक्तिगत रूप से मुकदमा दायर करना पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में कोई- क्लास एक्शन सूट (सामूहिक मुकदमा) संभव होगा या नहीं।रिफंड की प्रक्रिया के लिए आयातकों को सटीक और विस्तृत दस्तावेज जमा करने होंगे। यूं तो सरकार के पास हासिल किए गए आयात शुल्क के विस्तृत रिकॉर्ड हैं, लेकिन रिफंड का सही अनुमान और इसे वापस खातों में पहुंचाना एक बड़ी उलझन पैदा कर सकता है।रिफंड केवल उसी इकाई को मिल सकता है, जिसे इम्पोर्टर ऑफ रिकॉर्ड माना जाता है, यानी वह कंपनी जो सीमा शुल्क चुकाने और नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार थी। अगर टैरिफ का भुगतान किसी और कंपनी के जरिए किया गया है, तो पैसा किसे मिलेगा यह उनके आपसी कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर करेगा।
सवाल-4: पुराने टैरिफ हटाए जाने के बाद ट्रंप ने क्या किया?
ट्रंप प्रशासन ने पुराने टैरिफ को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया। राष्ट्रपति ने एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया। इसमें अब व्यापार कानून की धारा 122 जैसे अन्य कानूनी प्रावधानों को लागू किया गया और नए 10% टैरिफ लागू किए गए हैं। यह नई दरें 24 फरवरी से प्रभावी होंगी।धारा 122 अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकतम 150 दिनों तक के लिए अलग-अलग देशों से होने वाले आयात पर अधिकतम 15 फीसदी की ड्यूटी लगाने की छूट देता है। इस नियम के तहत ट्रंप टैरिफ लगाने के लिए कोई प्रशासनिक जांच या नियामक कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि, 150 दिन बाद यह टैरिफ लागू नहीं रहेंगे और सिर्फ संसद ही इनकी अवधि बढ़ा सकती है।
सवाल-5: भारत पर अब कितना टैरिफ लगेगा?
अदालत के फैसले के बाद लगभग 55 फीसदी भारतीय निर्यात अब 18% के आयात शुल्क से मुक्त हो गए और इन पर 10 फीसदी टैरिफ लगेगा। यह दर भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत तय की गई दर से कम है। इसकी पुष्टि ट्रंप सरकार के अधिकारियों की तरफ से भी की गई है। जब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी से पूछा गया कि क्या भारत को 10% टैरिफ देना होगा, तो उन्होंने पुष्टि में कहा- हां, 10% जब तक कि कोई अन्य अधिकार लागू न हो।
सवाल-6: भारत के टैरिफ पर विश्लेषक-विशेषज्ञों का क्या कहना है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत पर अब सिर्फ मानक मोस्ट-फेवर्ड नेशन (एमएफएन) टैरिफ और इसके ऊपर 10 फीसदी टैरिफ लगेगा, जो कि ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगाया।
सवाल-7. फिर भारत पर टैरिफ को लेकर भ्रम क्यों?
भारत पर टैरिफ 10 फीसदी रहेगा या 18 फीसदी, इसे लेकर भ्रम की स्थिति राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान से उभरी। उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कुछ भी नहीं बदला है। उनका कहना है कि भारत टैरिफ का भुगतान कर रहा है, हमने बस एक छोटा सा बदलाव किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया डील ऑन है और इसे बस एक अलग कानूनी तरीके से लागू किया जाएगा।
सवाल-8: टैरिफ हटने के बाद भी भारत के किन क्षेत्रों को राहत नहीं?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ अवैध घोषित होने के बावजूद, कई क्षेत्रों और उत्पादों को राहत नहीं मिली है।
एमएफएन जारी रहेंगे, कम मूल्य वाले शिपमेंट की राहत खत्म
नया 10% का वैश्विक टैरिफ अमेरिका के मौजूदा 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' शुल्कों के अतिरिक्त हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी उत्पाद पर पहले से पांच फीसदी का मानक शुल्क है, तो अब उस पर कुल 15% (5% + 10%) शुल्क देना होगा।इससे पहले कम मूल्य वाले पार्सल (बी2सी), जो पहले शुल्क-मुक्त होते थे, उन्हें अब राहत नहीं मिलेगी। प्रशासन ने इन पर शुल्क-मुक्त छूट को निलंबित कर दिया है और अब उन पर भी 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगेगा।कुल मिलाकर भारतीय निर्यात अब 18% के बजाय 10% टैरिफ के दायरे में आ गए हैं, लेकिन स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को पुराने उच्च शुल्कों से कोई राहत नहीं मिली है।दवाएं और स्मार्टफोन जैसे उत्पाद, जो पहले से ही छूट के दायरे में थे उनके आगे भी टैरिफ मुक्त रहने की संभावना है।
सवाल-9: भारत-अमेरिका के व्यापार समझौते में जो दर तय, उसका क्या होगा?
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लागू करने पर चर्चाएं जारी हैं। इससे पहले 6 फरवरी को दोनों देशों ने व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति जता दी थी। यानी दोनों देशों ने यह तय कर लिया था कि व्यापार समझौते पर अगर हस्ताक्षर होते हैं तो दोनों देश कितना आयात शुल्क एक-दूसरे पर लागू करेंगे। इसके तहत भारत ने अधिकतर अमेरिकी उत्पादों पर शून्य टैरिफ करने पर सहमति जता दी थी। उधर अमेरिका ने अलग-अलग सेक्टर्स के लिए टैरिफ को 50 फीसदी (25 फीसदी नियमित टैरिफ+25 फीसदी रूस से तेल खरीद के लिए जुर्मान टैरिफ) से घटाकर 18 फीसदी करने पर हामी भरी थी। इसके बाद समझौते के कानूनी टेक्स्ट को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय अधिकारियों का एक दल 23 फरवरी से वॉशिंगटन में अपने समकक्षों से मिलने वाला है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, इस समझौते पर अगले महीने हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके बाद यह अप्रैल तक लागू हो जाएगा। चूंकि अब तक व्यापार समझौते के नियमों पर दोनों देशों के अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और इन्हें भारत-अमेरिका की संसद की भी मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए फिलहाल दोनों देशों के बीच ट्रेड डील लागू नहीं है। हालांकि, टैरिफ की दरों पर एक सहमति है, जिसे लेकर अब विशेषज्ञ भारत को समझौता करने की सलाह दे रहे हैं।
सवाल-10: ट्रंप का टैरिफ को लेकर आगे क्या कदम उठाने पर विचार?
1. धारा 301 के तहत जांच का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने 'धारा 301' के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की नई जांच शुरू करने की घोषणा की है। धारा 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का एक ताकतवर प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति व्यापारिक विवादों को सुलझाने और अमेरिकी वाणिज्य पर बोझ डालने वाली अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए करते हैं। न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रंप अब इन शक्तियों के जरिए देशों को निशाना बना सकते हैं।अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी अभी सिर्फ उन टैरिफ को अप्रभावी किया है, जो कि आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए थे। धारा 301 के तहत पहले से लागू टैरिफ पूरी तरह से प्रभावी हैं और इस कानूनी बदलाव से उन पर कोई असर नहीं पड़ा है।
2. पहले क्यों नहीं इस्तेमाल की थी ये धारा?
बताया जाता है कि ट्रंप ने शुरुआत में आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए टैरिफ लगाए थे, ताकि अलग-अलग व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, अब इन टैरिफ के रद्द होने के बाद वे अंतरिम समझौते न मानने वाले देशों को धारा 301 के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार वाले देशों के वर्ग में ला सकते हैं। उन्होंने अपने प्रशासन को इस धारा के तहत नई जांच शुरू करने के आदेश भी दे दिए हैं। धारा 301 के तहत जांच की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। इसलिए ट्रंप ने शुरुआत में इस धारा का इस्तेमाल नहीं किया। विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इन जांचों को पूरा होने और नए टैरिफ लागू करने के लिए ठोस कानूनी आधार तैयार करने में आमतौर पर एक साल या उससे अधिक का समय लग सकता है। हालांकि, ये जांच स्थायी और विशिष्ट टैरिफ लगाने का कानूनी आधार देती है।
3. धारा 301 के तहत अब कौन से देश जांच के दायरे में?
हालांकि अभी सभी देशों की सूची स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रशासन ने संकेत दिया है कि चीन और ब्राजील के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है, और वियतनाम-कनाडा जैसे अन्य बड़े व्यापारिक साझेदार भी भविष्य में इसके दायरे में आ सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में तय दरों पर फिर बातचीत हो सकती है। हालांकि, नए व्यापारिक समझौते को भविष्य में धारा 301 या धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) जैसे कानूनों के ढांचे से सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होगी।
US Tariff: अमेरिकी टैरिफ बदलाव के बावजूद भारत मजबूत स्थिति में, सीआईटीआई की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी बोलीं
21 Feb, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में हालिया बदलावों के बावजूद भारत मजबूत स्थिति में बना हुआ है। भारतीय वस्त्र उद्योग परिसंघ (सीआईटीआई) की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने यह दावा किया है।
आरबीआई
रेपो रेट नहीं बदला, मंहगाई का अनुमान बढ़ा RBI की पॉलिसी का पूरा सच! |
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ पर लगाया रोक
दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति के एक बड़े हिस्से को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित कानून राष्ट्रपति को ऐसे आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद ट्रंप ने सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की, जिसे उनकी व्यापार रणनीति का अगला चरण माना जा रहा है।
भारत की स्थिति कैसे मजबूत?
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रिमा चटर्जी ने कहा कि उद्योग यह आकलन कर रहा है कि इन बदलावों का भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पहले भारत को कुछ प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मामूली टैरिफ बढ़त हासिल थी, लेकिन वैश्विक 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होने पर भी भारत की स्थिति अच्छी बनी रहेगी।उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका के बीच चल रही द्विपक्षीय वार्ताएं जारी रहना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारतीय निर्यातकों को टैरिफ के अलावा निवेश, तकनीक आदान-प्रदान और सहयोग के रूप में भी फायदा मिल सकता है।चटर्जी ने यह भी कहा कि अमेरिका भारतीय टेक्सटाइल निर्यात के लिए एक प्रमुख बाजार है और कुल निर्यात में उसकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नीति में अधिक स्पष्टता और स्थिरता आएगी, जिससे भारतीय निर्यातक अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकते हैं और आगे वृद्धि के अवसर तलाश सकते हैं।
AI Futureएआई आने से इंसानों की जगह नहीं लेगी मशीन', सिस्को के अधिकारी ने बताया कैसे बदलेंगे रोजगार के मौके
21 Feb, 2026 01:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच कॉरपोरेट जगत और आम लोगों में यह डर सता रहा है कि क्या मशीनें इंसानों की जगह ले लेंगी? सिस्को के प्रेसिडेंट और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर जीतू पटेल ने इन चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका मानना है कि एआई इंसानों को बेमानी नहीं बनाएगा, बल्कि यह मानवीय क्षमता और मूल्य को और बढ़ाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
ट्रंप का टैरिफ रद्द: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारतीय निर्यातकों को राहत! जानें किन उत्पादों पर होगा असर
एआई और मानवीय समझ का तालमेल
पटेल के अनुसार, असली कामयाबी तब मिलती है जब इंसानी समझ और निर्णय लेने की क्षमता को एआई के ऑटोमेशन के साथ मिलाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चैटबॉट से लेकर ऑटोनॉमस एजेंट तक, एआई सिस्टम तेजी से उन्नत हो रहे हैं, लेकिन इन्हें इंसानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, न कि उन्हें बदलने के लिए। पटेल ने अपनी मां के अस्पताल में भर्ती होने का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी एआई किसी नर्स की जगह नहीं ले सकता। इंसानों में प्यार, समझ और देखभाल की बुनियादी जरूरत होती है, जिसे कोई मशीन पूरा नहीं कर सकती है।
रोजगार और नए उद्योगों पर असर
ऑटोमेशन के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पटेल ने माना कि काम का तरीका बदलेगा और कुछ पुरानी नौकरियां खत्म हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि हर नौकरी का स्वरूप बदलेगा और एआई के कारण पूरी तरह से नए उद्योग और अवसर पैदा होंगे।मशीनें सहानुभूति, रचनात्मकता और समाज में योगदान देने की इंसानी फितरत की नकल नहीं कर सकती हैं।कार्यस्थलों पर एआई 'डिजिटल सहकर्मियों' के रूप में काम करेगा।इंसान अब उच्च-स्तरीय निर्णय लेने, रचनात्मकता और समस्याओं को सुलझाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।जीवन को केवल 'समुद्र तट को घूरने' तक सीमित कर देना जीवन के उद्देश्य को ही चुनौती देगा, क्योंकि इंसानों में स्वभाव से ही कुछ नया बनाने और समाज में मूल्य जोड़ने की जन्मजात इच्छा होती है।
तकनीक को अपनाने की रफ्तार
वर्तमान में दुनिया एआई के दूसरे प्रमुख चरण में प्रवेश कर चुकी है, जबकि पहला चरण चैटबॉट्स का था जो बुद्धिमानी से सवालों के जवाब देते थे और यह किसी जादू जैसा लगता था। पटेल ने कहा कि इंसान किसी भी नई और जादुई लगने वाली तकनीक को बहुत जल्दी सामान्य मान लेते हैं। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में वेमो की सेल्फ-ड्राइविंग कारों का उदाहरण देते हुए बताया कि पहली बार यह अनुभव हैरान करने वाला होता है। दूसरी बार बैठने पर इंसान डिस्ट्रैक्ट होकर ईमेल करने लगता है, और तीसरी बार तक कार की सीटों की शिकायत करने लगता है। तकनीकी प्रगति के कारण इंसानों के तालमेल बिठाने की यह तेज गति आगे भी जारी रहेगी।
लागत और इकोनॉमिक्स
एआई से जुड़े खर्चों पर बात करते हुए पटेल ने कहा कि इसे ट्रेन करने और चलाने की लागत अभी अधिक है, लेकिन यूनिट इकोनॉमिक्स में तेजी से सुधार हो रहा है। पिछले दो वर्षों में इन्फरेंसिंग पर टोकन जनरेशन की लागत 1,000 गुना कम हो गई है। बुनियादी ढांचे पर कुल खर्च बढ़ेगा, लेकिन प्रति क्वेरी लागत समय के साथ तेजी से घटने की उम्मीद है।सिस्को के शीर्ष अधिकारी के अनुसार एआई के विकास का अर्थ समाज में इंसानी योगदान का अंत कतई नहीं है। भविष्य का कार्यस्थल ऐसा होगा जहां मशीनी पैमाने का उपयोग होगा, लेकिन उसके केंद्र में पूरी तरह से इंसान ही रहेंगे। तकनीक सस्ती होने के साथ-साथ यह कॉर्पोरेट्स के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी और कार्यबल में इंसानों के महत्व को मजबूती से बरकरार रखेगी।
टैरिफ अवैध तो अब क्या: बौखलाए ट्रंप ने दुनियाभर पर लगाए अतरिक्त शुल्क, भारत को राहत या कुछ और? समझिए पूरा खेल
21 Feb, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दुनिया भर में अमेरिकी टैरिफ को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है। इसका बड़ा कारण है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक आयात शुल्क को 6-3 के बहुमत से रद्द कर बड़ा झटका दिया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से आगे बढ़कर ये टैरिफ लगाए थे, जो कि गैरकानूनी हैं। इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने 20 फरवरी को हीं एक नया एलान कर वैश्विक जगत में टैरिफ को लेकर हलचल और बढ़ा दी है। ट्रंप के एलान में कहा गया है कि 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों के लिए अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत का अस्थायी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता फिर बढ़ गई है।इस फैसले के बाद भारतीय उत्पादों पर लगने वाला पारस्परिक टैरिफ अब घटकर सिर्फ 10 प्रतिशत रह जाएगा। पहले अमेरिका ने अगस्त में भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था। बाद में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इस तरह कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
भारतीय निर्यातकों के लिए राहत
जब भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत पहुंचा। इसके बाद हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हुआ था, जिसके तहत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनी थी। इस दौरान 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क हटा दिया गया था। ऐसे में कोर्ट के फैसले और ट्रंप के नए एलान के बाद अब अमेरिका में भारतीय सामान पर केवल 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लागू रहेगा।
अब समझिए यह 10 प्रतिशत कैसे लगेगा?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि यह 10 प्रतिशत शुल्क मौजूदा आयात शुल्क (एमएफएन ड्यूटी) के ऊपर लगेगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी उत्पाद पर पहले से पांच प्रतिशत शुल्क है, तो अब उस पर दस प्रतिशत और जुड़ जाएगा। यानी कुल 15 प्रतिशत शुल्क देना होगा। पहले यही शुल्क 5 + 25 प्रतिशत यानी 30 प्रतिशत तक था।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ, ये भी समझिए
ट्रंप के इस टैरिफ खेल पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। ऐसे में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि अब भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी क्योंकि टैरिफ घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। वहीं थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने सुझाव दिया है कि भारत को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए।हालांकि अजय श्रीवास्तव के अनुसार अब केवल 55 प्रतिशत भारतीय निर्यात पर यह 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। करीब 40 प्रतिशत सामान पहले से ही छूट की श्रेणी में है। लेकिन स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत और कुछ ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत का सेक्टोरल टैरिफ अभी भी जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का रुख
टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भारत के साथ व्यापार समझौता जारी रहेगा। बता दें कि इससे पहले, जब दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा घोषित किया था, तब ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ हटा दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से सीधे या परोक्ष रूप से ऊर्जा आयात बंद करने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने का वादा किया है।
अब समझिए भारत-अमेरिका व्यापार का हाल
गौरतलब है कि साल 2021 से 2025 के बीच अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। आयात में हिस्सेदारी 6.22 प्रतिशत है। कुल द्विपक्षीय व्यापार में हिस्सा 10.73 प्रतिशत है। इतना ही नहीं वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच कुल व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें 86.5 अरब डॉलर का निर्यात और 45.3 अरब डॉलर का आयात शामिल है।
AI: UIDAI का एआई सुरक्षा कवच, एक अरब पहचान सुरक्षित; 2028 तक डाटा सेंटर्स की पानी मांग 11 गुना बढ़ेगी
21 Feb, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक अरब से अधिक भारतीयों की पहचान में सेंध लगने से रोकने के लिए एआई आधारित अगली पीढ़ी के डिजिटल सुरक्षा ढांचे की शुरुआत की है। अदृश्य ढाल कहलाने वाली ये पहल आधार नामांकन और अपडेट के दौरान फिंगरप्रिंट, चेहरे और आईरिस की सटीकता बढ़ाती है ताकि डुप्लिकेट आईडी न बन सकें। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय की तरफ से मुहैया कराई गई जानकारी के मुताबिक, भारत में डिजिटल सुरक्षा ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए यूआईडीईआई की तरफ से शुरू की गई यह प्रणाली एआई-सक्षम है, जो त्वरित कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करके चुटकियों में करोड़ों गणनाएं कर लेती है। आधार पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित बनाने वाली यह प्रणाली मल्टी लेयर है जो अदृश्य ढाल की तरह नागरिकों के विश्वास और डाटा विश्वसनीयता की रक्षा सुनिश्चित करती है। यूआईडीएआई प्रत्येक नागरिक की एक विशिष्ट पहचान के सिद्धांत को बनाए रखने के लिए दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक डुप्लीकेशन सिस्टम में से एक का संचालन करता है। प्रत्येक नए आधार नामांकन का संपूर्ण पंजीकृत आधार डेटाबेस से मिलान किया जाता है ताकि उसकी विशिष्टता सुनिश्चित हो सके। इस सुरक्षा ढांचे को और मजबूती देने के लिए यूआईडीएआई ने हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से उंगलियों के निशान, चेहरे और आंखों की पुतली जैसी सभी बायोमेट्रिक पद्धतियों के लिए स्वदेशी रूप से उन्नत एआई मॉडल विकसित किए हैं।
जल्द राष्ट्रव्यापी स्तर पर हो सकेगा डाटा का मिलान
फर्जी नामांकन को रोकने के लिए एआई आधारित ये मॉडल एनवीडिया डीजीएक्स के उच्च प्रदर्शन इन्फरेंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलते हैं जिससे जनसंख्या स्तर पर आंकड़ों की सुरक्षित ढंग से गणना और मिलान संभव हो पाता है। डुप्लिकेशन हटाने के प्रत्येक प्रयास में अरबों गणनाएं शामिल होती हैं।
नवीनतम एआई अनुमान तकनीकों के साथ यूआईडीएआई की तरफ से पहले ही कई राज्यों के लिए उन्नत डुप्लिकेशन हटाने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। आने वाले महीनों में इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर डाटा के मिलाने में सक्षम बना लिया जाएगा।
धोखाधड़ी पर लगाम कसने में मिलेगी मदद
नामांकन धोखाधड़ी रोकने के लिए यूआईडीएआई एआई-आधारित दस्तावेज मेटाडेटा निष्कर्षण और प्रामाणिक स्रोत के विरुद्ध सत्यापन का उपयोग कर रहा है। यह बुनियादी ढांचा दस्तावेज के सत्यापन के लिए डिजीलॉकर के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस का उपयोग करता है। इसी किसी तरह की धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। नई पहल दस्तावेज की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने, नामांकन व अपडेट में लगने वाला समय घटाने और सेवा गुणवत्ता बढ़ाने में मददगार होगी।
डाटा केंद्रों के लिए 2028 तक 11 गुना शुद्ध पानी की जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई डाटा केंद्रों के पानी की वार्षिक जरूरत 2024 के अनुमानों के मुकाबले 2028 तक कम से कम 11 गुना यानी 1,068 अरब लीटर तक शुद्ध पानी की आवश्यकता होगी। वहीं, गूगल की हालिया एनवायरमेंटल रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2023 में गूगल के डेटा सेंटर्स को कुल 6.1 अरब गैलन (लगभग 23 अरब लीटर) शुद्ध पानी की आवश्कता पड़ी थी। यह पिछले वर्ष की तुलना में 17 फीसदी की भारी वृद्धि है। इसमें एआई सर्वरों को ठंडा रखने और उनके संचालन के लिए जरूरी बिजली उत्पादन में पानी की जरूरत पड़ेगी।
एआई से तस्वीर बनाने की कमांड देने के बाद हजारों प्रोसेसर एक साथ काम करते हैं, इससे भारी ऊष्मा पैदा होती है। इन करोड़ों रुपये की मशीनों को पिघलने से बचाने के लिए कूलिंग टावर्स का उपयोग किया जाता है।
ये सिस्टम वाष्पीकरण कूलिंग पर काम करते हैं। इसमें गर्म सतहों पर पानी डाला जाता है, जो गर्मी सोखकर भाप बन जाता है।
इस प्रक्रिया में लगभग 80 फीसदी पानी भाप बनकर हवा में उड़ जाता है। वाष्पीकरण के दौरान ये खनिज और अधिक केंद्रित हो जाते हैं, जिससे मशीनों में लाइमस्केल की मोटी परत जम जाती है। यह उपकरणों को खराब कर देती है।
इसलिए है आवश्यकता
एआई मॉडल जैसे चैट जीपीटी को संचालित करने वाले सर्वर सामान्य कंप्यूटरों की तुलना में बहुत अधिक गर्मी पैदा करते हैं। इन्हें सुरक्षित तापमान पर बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में शुद्ध पानी को कूलिंग टावर्स के जरिये प्रवाहित किया जाता है। साथ ही, इन केंद्रों के लिए जो बिजली बनती है, उसके थर्मल पावर प्लांट भी पानी पर निर्भर होते हैं।
ट्रंप का टैरिफ रद्द: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारतीय निर्यातकों को राहत! जानें किन उत्पादों पर होगा असर
21 Feb, 2026 08:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ के स्थान पर वे अगले 150 दिनों के लिए दुनिया के सभी देशों पर 10 फीसदी का वैश्विक शुल्क लगाने का एलान किया है। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द करने के फैसले का भारतीय निर्यातकों ने स्वागत किया है। निर्यात संगठनों का कहना है कि इस निर्णय से उन भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी, जो देश-विशेष शुल्क से प्रभावित थीं।
अब भारत पर 18 की जगह 10 फीसदी टैरिफ?
1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत जारी किया जाएगा और ये शुल्क इसी कानून के तहत लागू मौजूदा शुल्कों के अतिरिक्त होंगे। दूसरे शब्दों में, जिन देशों पर आपातकालीन शक्तियों के तहत ट्रंप ने 10 फीसदी से अधिक टैरिफ लगाया था वह खत्म हो जाएगा और सिर्फ 10 फीसदी टैरिफ रह जाएगा। इसका भारत पर भी सीधा असर होगा जिसपर ट्रंप ने 18 फीसदी टैरिफ लगा रखा है। यह अब 10 फीसदी रह जाएगा। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि इस फैसले से भारत-अमेरिका व्यापार में स्थिरता आएगी और भविष्य को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अमान्य किए गए टैरिफ के तहत जिन आयातकों ने शुल्क चुकाया है, वे अब धन वापसी का दावा कर सकते हैं, जिससे कारोबार को तुरंत राहत मिल सकती है।
इन उत्पादों को मिल सकती है राहत
वैश्विक व्यापार शोध पहल के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अगर अमेरिका भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ भी हटाता है, तो भारत के लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर केवल सामान्य सीमा शुल्क ही लागू रहेगा। हालांकि इस्पात, एल्युमीनियम और कुछ वाहन पुर्जों पर धारा 232 के तहत लगाए गए 50 और 25 प्रतिशत शुल्क अभी भी लागू रहेंगे। वहीं मोबाइल फोन, पेट्रोलियम उत्पाद और दवाइयों जैसे उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ नहीं लगेगा।
फैसले से अमेरिका में बढ़ सकती है अराजकता
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ पर अकेले चलने की कीमत चुकानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट के शुक्रवार के फैसले से चुनाव वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक अराजकता और अनिश्चितता और बढ़ जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी यह पता नहीं है कि वसूला गया टैरिफ वापस होगा या नहीं। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि देशों पर लगे टैरिफ की भविष्य में क्या स्थिति होगी। हर 10 में से 6 अमेरिकी मानते हैं कि ट्रंप ने दूसरे देशों पर टैरिफ लगाकर सारी हद पार कर दी है। वहीं, ट्रंप ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि फैसला शर्मनाक है। उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ट्रंप ने फैसले की जानकारी मिलते ही कहा, मुझे इन अदालतों के बारे में कुछ करना होगा। माना जा रहा है कि ट्रंप एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसले पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखेंगे।
अमेरिका, यूरोप और एशिया के शेयर बाजारों में तेजी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ रद्द किए जाने के बाद शुक्रवार को अमेरिका, यूरोप और एशिया के शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। अमेरिका का एस एंड पी 500 सूचकांक 0.3 प्रतिशत चढ़ा। यूरोप में ऑटो शेयरों में उछाल आया, जबकि दक्षिण कोरिया से भारत तक बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। बांड बाजार में अमेरिकी 10 वर्षीय प्रतिफल 2 आधार अंक बढ़कर 4.096 प्रतिशत पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर सूचकांक 0.2 प्रतिशत गिरकर 97.67 पर रहा। विश्लेषकों के अनुसार, टैरिफ हटने से व्यापार अनिश्चितता कम हुई है, जिससे शेयर बाजारों को सहारा मिला। हालांकि, आगे सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित धन वापसी को लेकर निवेशक सतर्क हो गए हैं।
भारत-पाक युद्ध समाप्त कराने को टैरिफ का इस्तेमाल किया- डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को समाप्त कराने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल किया, साथ ही उन्होंने दुनिया भर के देशों पर लगाए गए अपने व्यापक टैरिफ को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने कहा कि ‘मैंने जिन आठ युद्धों को समाप्त कराया, उनमें से पांच को समाप्त करने के लिए भी टैरिफ का इस्तेमाल किया गया। मैंने आठ युद्धों का निपटारा किया, चाहे आपको पसंद हो या न हो, जिनमें भारत, पाकिस्तान (का संघर्ष), बड़े युद्ध, या परमाणु युद्ध की आशंका वाले युद्ध शामिल हैं। हालांकि भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष रुकने में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से लगातार इनकार किया है। ट्रंप ने पिछले साल 10 मई के बाद से भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय 80 से अधिक बार लिया है।
Crude Oil: छह साल के शीर्ष पर पहुंच सकता है सऊदी अरब से तेल का आयात, अमेरिकी दबाव से रूस से खरीद घटाने के असर
21 Feb, 2026 07:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत इस महीने सऊदी अरब से छह साल से अधिक समय में सबसे अधिक कच्चे तेल का आयात करने जा रहा है। रूस से कच्चे तेल की खरीदारी कम करने के लिए अमेरिका के भारत पर लगातार दबाव बनाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। केप्लर के प्रमुख अनुसंधान विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति बढ़कर 10 लाख से 11 लाख बैरल प्रतिदिन होने की संभावना है। यह नवंबर, 2019 के बाद से उच्च स्तर होगा। यह रूस के अनुरूप है, जिससे दोनों आपूर्तिकर्ताओं के बीच का अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा। यूक्रेन पर आक्रमण के बाद भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बढ़ाने के कारण यह अंतर काफी बढ़ गया था। भारत पर अमेरिकी दबाव इस महीने की शुरुआत में तब ज्यादा हो गया, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत एक व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीदारी बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने इस दावे पर सार्वजनिक रूप से कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। अगर तेल का प्रवाह 12 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचता है तो रूस इस महीने भी भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहेगा, लेकिन शिपमेंट में और भी गिरावट आने का अनुमान है। 2022 में यूक्रेन पर हुए आक्रमण के बाद भारत रूसी तेल का एक प्रमुख खरीदार बनकर उभरा, क्योंकि ओपेक और अन्य उत्पादक देश रूस को अपने तेल की कीमतों में भारी छूट देनी पड़ी। ऐसा इसलिए, क्योंकि अधिकांश अन्य खरीदार मॉस्को से जुड़ी ऊर्जा से दूर भाग रहे थे। भारत ने तब प्रतिदिन 20 लाख बैरल रूसी तेल आयात किया था।
रूस से और घटेगा आयात
केप्लर ने कहा, अगले महीने रूस से आयात में और कमी आ सकती है। यह आयात प्रतिदिन 8 से 10 लाख बैरल के बीच रहेगा। यूरोपीय संघ के लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूसी कच्चे तेल पर पूरी तरह निर्भर नायरा एनर्जी की ओर से संचालित रिफाइनरी में अप्रैल एवं मई के दौरान रखरखाव कार्य के कारण होने वाले बंद से आयात की मात्रा में और भी कमी आने की आशंका है। रूस के लिए भारत में अपनी हिस्सेदारी खोना यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप से विस्थापित हुए उसके तेल के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार को कमजोर कर देता है। सऊदी अरब के लिए शीर्ष स्थान पुनः प्राप्त करना सबसे तेजी से बढ़ते तेल बाजारों में से एक में रणनीतिक प्रभाव को बहाल करेगा।
Petrol-Diesel Price: शनिवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने दी राहत या बढ़ी मुसीबत? चेक करें आज का ताजा भाव
21 Feb, 2026 07:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आज, 21 फरवरी, 2026 को पहले जैसी ही हैं. कुछ शहरों में बदलाव होता दिखा, तो कुछ जगह कीमतें पहले जैसी ही रहीं. फ्यूल के रेट हर सुबह 6 AM बजे ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों, एक्सचेंज रेट, टैक्स और राज्य की लेवी के आधार पर अपडेट होते हैं. अलग-अलग VAT और लोकल वजहों से कीमतों में बहुत फर्क होता है, दिल्ली में आमतौर पर सबसे कम, जबकि हैदराबाद और कुछ दूसरी जगहों पर ज्यादा.
पूरे भारत में, पेट्रोल आमतौर पर लगभग ₹94 से ₹107+ प्रति लीटर के बीच होता है, जबकि डीजल जगह के हिसाब से ₹87 से ₹95+ प्रति लीटर सस्ता होता है. उदाहरण के लिए, हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.50 पर है और डीजल भी ज्यादा है. पिछले कुछ हफ्तों और कई जगहों पर महीनों से ये रेट काफी स्टेबल रहे हैं, इसका क्रेडिट ग्लोबल ऑयल ट्रेंड्स को जाता है.
टंकी फुल कराने से पहले जरूर चेक करें रेट:
अगर आप पेट्रोल भरवा रहे हैं, तो सही आंकड़ों के लिए अपने लोकल पंप या ऐप देखें, क्योंकि रोजाना छोटे-मोटे बदलाव हो सकते हैं. कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की मजबूती जैसे फैक्टर उन पर असर डालते रहते हैं, ग्लोबल ऑयल की कम कीमतें पंप की कीमतों को कंट्रोल में रखने में मदद करती हैं.
Gold-Silver Rate: सोने की बढ़ती कीमतों के बीच चांदी ने दी राहत, फटाफट चेक करें अपने शहर का नया दाम
21 Feb, 2026 07:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत में सोने और चांदी की कीमतें आज, 21 फरवरी, 2026 को ग्लोबल ट्रेंड, सेफ-हेवन डिमांड, रुपये मूवमेंट और US डॉलर की मजबूती और जियोपॉलिटिकल खबरों जैसे इंटरनेशनल फैक्टर्स से प्रभावित होकर ज्यादा बनी हुई हैं. रेट्स रोज सुबह के समय अपडेट होते हैं, जो लोकल टैक्स, मेकिंग और डीलर चार्ज के कारण शहर के हिसाब से थोड़े अलग हो सकते हैं. खरीदते या बेचते समय सही आंकड़े के लिए हमेशा अपने लोकल ज्वैलर या ऐप से चेक करें. सोने की बात करें तो 24 कैरेट सोने की कीमत ₹15,738 है. वहीं, सिल्वर की बात करें तो यह ₹2,69,900 प्रति किलो है.
आज जहां सोने की कीमत में कुछ बढ़ोतरी हुई है तो वहीं, चांदी की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है. हर शहर में सोने-चांदी की कीमत अलग होती है. आपके शहर में ये कीमत क्या है, ये हम आपको यहां बता रहे हैं.
आज क्या है आपके शहर में सोने का रेट:
शहर
24 कैरेट का रेट
22 कैरेट का रेट
18 कैरेट का रेट
चेन्नई
₹15,730
₹14,419
₹12,349
मुंबई
₹15,738
₹14,426
₹11,804
दिल्ली
₹15,753
₹14,441
₹11,819
कोलकाता
₹15,738
₹14,426
₹11,804
बैंगलोर
₹15,738
₹14,426
₹11,804
हैदराबाद
₹15,738
₹14,426
₹11,804
केरल
₹15,738
₹14,426
₹11,804
पुणे
₹15,738
₹14,426
₹11,804
वडोदरा
₹15,743
₹14,431
₹11,809
अहमदाबाद
₹15,743
₹14,431
₹11,809
जयपुर
₹15,753
₹14,441
₹11,819
लखनऊ
₹15,753
₹14,441
₹11,819
कोयंबटूर
₹15,730
₹14,419
₹12,349
मदुरै
₹15,730
₹14,419
₹12,349
विजयवाड़ा
₹15,738
₹14,426
₹11,804
पटना
₹15,743
₹14,431
₹11,809
नागपुर
₹15,738
₹14,426
₹11,804
चंडीगढ़
₹15,753
₹14,441
₹11,819
सूरत
₹15,743
₹14,431
₹11,809
भुवनेश्वर
₹15,738
₹14,426
₹11,804
आज क्या है आपके शहर में सिल्वर का रेट:
शहर
10 ग्राम
100 ग्राम
1 किलो
चेन्नई
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
मुंबई
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
दिल्ली
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
कोलकाता
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
बैंगलोर
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
हैदराबाद
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
केरल
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
पुणे
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
वडोदरा
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
अहमदाबाद
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
जयपुर
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
लखनऊ
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
कोयंबटूर
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
मदुरै
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
विजयवाड़ा
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
पटना
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
नागपुर
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
चंडीगढ़
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
सूरत
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
भुवनेश्वर
₹2,699
₹26,990
₹2,69,900
पैक्स सिलिका: भारत में सस्ते होंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वाहन, आखिर कैसे मजबूर हुआ अमेरिका?
21 Feb, 2026 07:24 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के पैक्स सिलिका में शामिल होने से सबसे बड़ा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि चीन के एकाधिकार और आपूर्ति शृंखला की बाधाओं के कारण चिप की कीमतों में जो कृत्रिम उछाल रहता था, वह अब खत्म होगा। खनिजों की सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी आपूर्ति होने से चिप निर्माण की लागत कम होगी। इसका सीधा लाभ स्मार्टफोन, लैपटॉप से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक को मिलेगा, जिससे उनकी कीमतें कम होने का रास्ता साफ होगा। अमेरिका ने पैक्स सिलिका गठबंधन की रूपरेखा तैयार करते समय भारत को इसमें शामिल नहीं किया था। विशेषज्ञों का मानना था कि भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता अभी शुरुआती स्तर पर है। हालांकि, बीते दो वर्षों में भारत ने जिस तेजी से 10 सेमीकंडक्टर संयंत्र (एफएबीएस) स्थापित करने की ओर कदम बढ़ाए और 2 नैनो मीटर चिप डिजाइनिंग में महारत हासिल की, उसने अमेरिका सहित अन्य देशों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा के बिना वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा अधूरी है। भारत का इस समूह में आना यह सुनिश्चित करता है कि देश को कच्चे माल के लिए चीन का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।
आपूर्ति शृंखला को हथियार बनाना मंजूर नहीं: वैष्णव
केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दो-टूक कहा कि भारत और अमेरिका का इस घोषणापत्र पर साथ आना दुनिया को संदेश है कि हम आपूर्ति श्रृंखला को हथियार बनाने की कोशिशों को नकारते हैं। उन्होंने कहा, 20वीं सदी तेल और इस्पात की थी, लेकिन 21वीं सदी सिलिकॉन और दुर्लभ खनिजों की है। इस उभरते तंत्र को आने वाले समय में 10 लाख कुशल पेशेवरों की जरूरत होगी और यह पूरी मानव शक्ति भारत से ही आएगी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी जीत बताया।
वैश्विक बिरादरी में बढ़ा कद
अमेरिकी विदेश उप मंत्री जैकब हेलबर्ग ने भारत की भागीदारी को रणनीतिक जरूरत बताया। इस गठबंधन में भारत अब ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
यह है पैक्स सिलिका
यह वैश्विक रणनीतिक गठबंधन है, जिसका लक्ष्य एआई और सेमीकंडक्टर के लिए आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित करना है। पैक्स का लैटिन अर्थ शांति है और सिलिका चिप का आधार।
भारत का आना इसलिए खास
भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिभावान युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है। शुरुआत में नजरअंदाज किए जाने के बाद अब भारत को नेतृत्व की भूमिका मिलना यह दर्शाता है कि दुनिया को चिप उत्पादन के लिए भारत की जमीन और दिमाग, दोनों की जरूरत है। खनिजों की सुरक्षित सप्लाई मिलने के बाद भारत न केवल डिजाइन, बल्कि व्यापाक स्तर पर उत्पादन का भी वैश्विक केंद्र बन जाएगा।
Stock Market: वैश्विक तनाव के बीच खुदरा निवेशकों का भरोसा बरकरार, 15 माह के उच्च स्तर पर पहुंचा निवेश
21 Feb, 2026 06:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारतीय शेयर बाजार में व्यक्तिगत खुदरा निवेशकों की भागीदारी और निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है। उतार-चढ़ाव के बावजूद जनवरी, 2026 में इन निवेशकों ने सेकंडरी मार्केट में रिकॉर्ड 16,944 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। यह अक्तूबर, 2024 के बाद से खुदरा निवेशकों की ओर से किया गया 15 माह में सर्वाधिक मासिक निवेश है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुद्ध निवेश का यह आंकड़ा बताता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और कई देशों में तनाव के बीच सेकंडरी मार्केट में व्यक्तिगत खुदरा निवेशकों की भागीदारी मजबूती से बढ़ रही है। इससे उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय बाजार को समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि खुदरा निवेशकों की खरीदारी में मासिक आधार पर भी बड़ी तेजी दर्ज की गई है। इस खरीदारी ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक सेकंडरी मार्केट में हुई निकासी को कम करने में अहम भूमिका निभाई है। नतीजतन, चालू वित्त वर्ष के दौरान सेकंडरी मार्केट से शुद्ध निकासी घटकर सिर्फ 687 करोड़ रुपये रह गई है।
प्राइमरी मार्केट के साथ 40,685 करोड़ का निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर प्राइमरी मार्केट के आंकड़ों को भी शामिल करें, तो व्यक्तिगत खुदरा निवेशकों का चालू वित्त वर्ष में अब तक शुद्ध निवेश 40,685 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसमें आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसमें खुदरा निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। आंकड़े यह भी बताते हैं कि सेकंडरी मार्केट की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा निवेशकों का इक्विटी बाजार के प्रति आकर्षण बना हुआ है।
निवेशकों ने पैसा लगाने में सतर्क रुख अपनाया
गतिविधियों में बीच-बीच बढ़ोतरी के बावजूद प्राइमरी मार्केट एलोकेशन समेत कुल खुदरा निवेश बीते वित्त वर्ष 2024-25 के 1.59 लाख करोड़ से काफी कम रहा है। इस रुझान से पता चलता है कि व्यक्तिगत खुदरा निवेशकों ने बाजार में अपेक्षाकृत स्थिरता के समय ही पैसा लगाना जारी रखा है। साथ ही, पिछले साल की तुलना में भागीदारी बढ़ाने में ज्यादा सावधानी बरती है।
बड़ी गिरावट से उबरा बाजार सेंसेक्स में 316 अंक की तेजी
घरेलू शेयर बाजार एक दिन पहले की बड़ी गिरावट से उबरते हुए शुक्रवार को बढ़त में बंद हुए। बैंकिंग एवं धातु शेयरों में खरीदारी, व्यापार समझौते में प्रगति को लेकर आशावाद के साथ पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी की खबरों से बाजार को समर्थन मिला।
सेंसेक्स 316.57 अंक उछलकर 82,814.71 पर बंद हुआ। दिन में यह 633.94 अंक तक उछल गया था। निफ्टी 116.90 अंक चढ़कर 25,571.25 पर बंद हुआ।
सूचीबद्ध कंपनियों की पूंजी 1.89 लाख करोड़ बढ़ गई। सेंसेक्स के 30 में 22 शेयर बढ़त में रहे। एनटीपीसी सर्वाधिक 2.73 फीसदी लाभ में बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुद्ध रूप से 934.61 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।
कौन हैं एआई किड ऑफ इंडिया, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान चर्चा में क्यों? जानिए उनके बारे में सबकुछ
20 Feb, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में केरल के युवा एआई इनोवेटर राउल जॉन अजु ने अपनी प्रतिभा और अनुभवों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। 'एआई किड ऑफ इंडिया' के नाम से पहचाने जाने वाले राउल ने बताया कि वह कई एआई टूल्स विकसित कर रहे हैं और कंटेंट क्रिएशन के साथ-साथ बड़े कॉलेजों और स्कूलों में एआई शिक्षा भी दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह छह बार टेडएक्स स्पीकर रह चुके हैं। राउल ने कहा कि बचपन से ही वह अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अभिनय किया, शास्त्रीय नृत्य सीखा और कई नई चीजों को सीखने की कोशिश की। उनके अनुसार, विविध अनुभवों ने ही उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की है। उन्होंने बताया कि वह अपनी पढ़ाई, स्टार्टअप गतिविधियों, कंटेंट क्रिएशन और शिक्षण कार्य के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में परीक्षाओं के कारण वह समिट के पहले दिन ही पूर्ण रूप से शामिल हो पाए। एआई के उपयोग और दुरुपयोग पर बोलते हुए राउल ने कहा कि हर तकनीक की तरह एआई का इस्तेमाल भी सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से हो सकता है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा तकनीक नहीं, बल्कि उसका उपयोग करने का तरीका है। राउल ने बताया कि समिट में अपने सत्र के दौरान वह एआई के जिम्मेदार उपयोग, इसके लाभ और संभावित जोखिमों पर चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि एआई जटिल समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन गलत इस्तेमाल से गंभीर नुकसान भी हो सकता है। समिट के दौरान एक प्रमुख हस्ती से मुलाकात को उन्होंने अपने लिए यादगार अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि कुछ मिनट की बातचीत से उन्हें काफी सीखने का अवसर मिला और उन्होंने आयोजन में आमंत्रित किए जाने पर आभार भी व्यक्त किया। केरल से आने वाले इस युवा नवप्रवर्तक का मानना है कि भारत की नई पीढ़ी तकनीक का सही दिशा में उपयोग कर देश के भविष्य को और बेहतर बना सकती है।
टैरिफ ट्रंप का सबसे बड़ा हथियार: सस्ती दवाओं के लिए फ्रांस पर बनाया दबाव, वाइन पर 100% टैक्स की दी धमकी
20 Feb, 2026 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार और स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर) की कूटनीति में एक नया आक्रामक रुख अपनाया है। अमेरिका में महंगी दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर दबाव बनाते हुए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इस कदम ने स्पष्ट कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन व्यापारिक नीतियों का उपयोग अपनी घरेलू समस्याओं को सुलझाने और भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) रणनीति के तौर पर किस हद तक कर सकता है। कीमतों में भारी अंतर और विदेशी नेताओं से बातचीत जॉर्जिया के रोम स्थित एक स्टील प्लांट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी उपभोक्ता कुछ दवाओं के लिए दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में 13 गुना अधिक कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने विदेशी नेताओं से फोन पर बात कर अमेरिका में दवाओं की कीमतों को अन्य देशों में मिलने वाली सबसे कम कीमतों के बराबर लाने की नीति की घोषणा की। ट्रंप के अनुसार, जब उन्होंने मैक्रों को फोन करके कीमतों में बदलाव की मांग की, तो मैक्रों ने शुरुआत में यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इससे उनका बिजनेस बंद हो जाएगा। इसके जवाब में ट्रंप ने अमेरिका में बेची जाने वाली सभी फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी, जिसके बाद मैक्रों इस बदलाव के लिए तैयार हो गए। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने जर्मनी और स्पेन समेत अन्य देशों से भी इसी तरह की बातचीत की और उनका दावा है कि वे देश भी इस कदम के लिए सहर्ष तैयार हो गए हैं। टैरिफ रणनीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस घटना को इस बात का सबूत बताया कि टैरिफ अभी भी बातचीत का उनका सबसे असरदार तरीका है। 'टैरिफ' को पूरी डिक्शनरी में अपना पसंदीदा शब्द बताते हुए ट्रंप ने कहा कि इन व्यापारिक उपायों ने अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को वापस पटरी पर ला दिया है। फिलहाल वे कुछ ट्रेड ड्यूटी लगाने के अपने अधिकार पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इसके साथ ही, ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने पिछले 11 महीनों में 18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के निवेश कमिटमेंट हासिल किए हैं और चुनाव के बाद से शेयर बाजार अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है। अमेरिका में दवाओं की कीमतों को अंतरराष्ट्रीय दरों के बराबर लाने की कोशिशें राजनीतिक रूप से विवादित रही हैं। फार्मास्युटिकल कंपनियों का तर्क है कि कीमतों में इस तरह की कमी से इनोवेशन (नवाचार) और ग्लोबल सप्लाई चेन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। अमेरिका द्वारा घरेलू दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए टैरिफ को हथियार बनाना वैश्विक व्यापार के नियमों में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव है। ट्रंप का यह स्पष्ट मानना है कि टैरिफ के बिना अमेरिका मुश्किल में होता, जो भविष्य में उनके व्यापारिक फैसलों और आक्रामक वार्ताओं का स्पष्ट संकेत देता है। आगे यह देखना अहम होगा कि वैश्विक फार्मा कंपनियां और यूरोपीय देश इस दबाव के बीच अपनी रणनीति कैसे तय करते हैं।
Export Measures: निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार के सात कदम, ई-कॉमर्स निर्यातकों को सस्ते कर्ज के साथ मदद भी
20 Feb, 2026 03:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सरकार ने देश के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सात नई पहल की घोषणा की है, जिनमें ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट सहायता और वैकल्पिक व्यापार वित्त साधनों को समर्थन शामिल है। ये कदम 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत उठाए गए हैं, जिसके 10 घटकों में से तीन को पहले ही जनवरी में लागू किया जा चुका है।
सरकार की घोषित सात प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं:
डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट फैसिलिटी- ई-कॉमर्स निर्यातकों को 50 लाख रुपये तक कर्ज सहायता, 90% गारंटी कवरेज के साथ।
ओवरसीज इन्वेंट्री क्रेडिट फैसिलिटी- विदेश में स्टॉक रखने के लिए 5 करोड़ रुपये तक सहायता, 75% गारंटी और 2.75% ब्याज सब्सिडी।
एक्सपोर्ट फैक्टरिंग पर ब्याज सब्सिडी- एमएसएमई के लिए सस्ती कार्यशील पूंजी हेतु फैक्टरिंग लागत पर 2.75% ब्याज सहायता (सीमा 50 लाख रुपये सालाना)।
उच्च जोखिम/नए बाजारों के लिए ट्रेड फाइनेंस सपोर्ट- लेटर ऑफ क्रेडिट कन्फर्मेशन और नेगोशिएशन जैसे क्रेडिट एन्हांसमेंट साधनों को समर्थन।
TRACE (ट्रेड रेगुलेशन्स, एक्रेडिटेशन एंड कम्प्लायंस एनेबलमेंट)- अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और अनुपालन खर्च पर 60% से 75% तक प्रतिपूर्ति (सीमा 25 लाख रुपये प्रति IEC)।
FLOW (लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट)- विदेशी वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट हब और ग्लोबल वितरण नेटवर्क तक पहुंच के लिए परियोजना लागत का 30% तक समर्थन।
LIFT और INSIGHT सपोर्ट- दूरदराज/पहाड़ी क्षेत्रों के निर्यातकों को फ्रेट पर 30% तक सहायता (LIFT) और ट्रेड इंटेलिजेंस व फैसिलिटेशन परियोजनाओं के लिए 50% तक वित्तीय सहयोग (INSIGHT)।
सरकार का कहना है कि इन समन्वित वित्तीय और पारिस्थितिकी तंत्र आधारित उपायों के माध्यम से पूंजी लागत में कमी, व्यापार वित्त के विकल्पों का विस्तार, अनुपालन क्षमता में सुधार, लॉजिस्टिक्स बाधाओं का समाधान और एमएसएमई के लिए वैश्विक बाजारों में बेहतर एकीकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
ट्विशा मौत मामला: दिल्ली AIIMS टीम ने किया दोबारा पोस्टमॉर्टम, भोपाल में अंतिम विदाई
